तुकाराम मुंडे ने महाराष्ट्र में खाद्य माफिया की पोल खोली, नकली दूध और जहरीली शराब के खिलाफ सख्त कार्रवाई की।
Key Takeaways
- खाद्य सुरक्षा में भ्रष्टाचार और माफिया का बड़ा प्रभाव है।
- सख्त और ईमानदार अधिकारियों की जरूरत है जो जनता की भलाई के लिए काम करें।
- नकली और मिलावटी खाद्य पदार्थों का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है।
- सरकारी तंत्र में सुधार और कड़ी निगरानी आवश्यक है।
- सामाजिक जागरूकता और दबाव से ही खाद्य सुरक्षा में सुधार संभव है।
What the video covers
- मुंबई हाईकोर्ट में प्राइवेट रेस्टोरेंट्स और सरकारी कैंटीन की जांच के दौरान कई कैंटीनों के पास फूड लाइसेंस नहीं पाया गया।
- तुकाराम मुंडे ने महाराष्ट्र के खाद्य विभाग में भ्रष्टाचार और खाद्य सुरक्षा के मुद्दों को उजागर किया।
- मुंडे ने जहरीली शराब के स्रोत का पता लगाया, जिसमें मिथेनॉल नामक खतरनाक इंडस्ट्रियल केमिकल शामिल था।
- मुंडे की टीम ने नकली दूध और मिलावट वाले खाद्य पदार्थों की जांच की, जिसमें कॉस्टिक सोडा और डिटर्जेंट जैसे हानिकारक पदार्थ पाए गए।
- मुंडे ने भ्रष्ट अधिकारियों और खाद्य माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए कई गोदामों को सील किया।
- मुंडे की जांच में पता चला कि नकली दूध का उत्पादन बड़े पैमाने पर हो रहा था, जो बाजार में असली दूध के साथ मिलाया जाता था।
- मुंडे को भ्रष्टाचार और लॉबी के दबाव के बावजूद अपने काम को जारी रखने की हिम्मत दिखानी पड़ी।
- मुंडे की कार्रवाई से खाद्य सुरक्षा में सुधार की उम्मीद जगी, लेकिन माफिया की ताकत और भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हैं।
- यह कहानी खाद्य सुरक्षा, भ्रष्टाचार, और सरकारी तंत्र की कमजोरियों पर प्रकाश डालती है।
- मुंडे की मेहनत और ईमानदारी ने 12 करोड़ लोगों की थाली को सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए।
Chapters
- 00:00मुंबई हाईकोर्ट में प्राइवेट रेस्टोरेंट्स और सरकारी कैंटीन की जांच
- 01:57कैंटीनों की जांच और फूड लाइसेंस की कमी
- 02:58मुंडे पर लॉबी का दबाव और भ्रष्टाचार के आरोप
- 04:31मुंडे की एफडीए में नियुक्ति और खाद्य सुरक्षा की जिम्मेदारी
- 06:01खाद्य निरीक्षण, जुर्माना और भ्रष्टाचार की चुनौतियां
- 07:22मुंडे की टीम की कार्रवाई और नकली दूध की खोज
- 08:49मिथेनॉल और जहरीली शराब का खुलासा
- 10:53नकली दूध का उत्पादन और बाजार में मिलावट
- 12:44मुंडे की सख्ती और खाद्य माफिया के खिलाफ लड़ाई
- 14:25खाद्य सुरक्षा में सुधार के लिए मुंडे का योगदान
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Speaker A
बुधवार का दिन था। बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही थी। मुंबई के बड़े होटल और रेस्टोरेंट मालिक अपने वकीलों के साथ खड़े थे। शिकायत एक ही थी, हमें बिना मौका दिए सीधे दुकान बंद कर दी जाती है?
Speaker A
बहस के बीच जज ने [संगीत] एक सवाल पूछ लिया। आप हर बार प्राइवेट रेस्टोरेंट को ही क्यों पकड़ते हैं? कभी सरकारी कैंटीन [संगीत] देखी है? कभी इसी हाई कोर्ट की कैंटीन देखी है?
Speaker A
बहस के बीच जज ने एक सवाल पूछ लिया। आप हर बार प्राइवेट रेस्टोरेंट को ही क्यों पकड़ते हैं? कभी सरकारी कैंटीन देखी है? कभी इसी हाई कोर्ट की कैंटीन देखी है?
Speaker A
कैंटीन थी। तीनों की जांच हुई। [संगीत] खाना, सफाई, रजिस्टर, लाइसेंस, नतीजा। तीन में से दो कैंटीन [संगीत] के पास फूड लाइसेंस ही नहीं था। बोर्ड लगा, कारोबार बंद। टीम बाहर निकल गई। थोड़ी देर बाद वहीं वकील साहब [संगीत] चाय पीने पहुंचे
Speaker A
कोर्ट रूम में हल्की हंसी हुई। बात आ ही गई हो गई। लेकिन अगले दिन ठीक 24 घंटे के अंदर एफडीए की टीम बॉम्बे हाईकोर्ट की इमारत में दाखिल हुई और सीधे कैंटीन की तरफ बढ़ गई। परिसर में तीन
Speaker A
अगले ही दिन झांकना शुरू हो गया उसी अदालत से। अब आप सोचिए यह करने के लिए कितना जिगरा चाहिए और अब वो बात सुनिए जो इस पूरी कहानी [संगीत] की जड़ है। ठीक इन्हीं दिनों महाराष्ट्र की विधानसभा में खड़े
Speaker A
कैंटीन थी। तीनों की जांच हुई। खाना, सफाई, रजिस्टर, लाइसेंस, नतीजा। तीन में से दो कैंटीन के पास फूड लाइसेंस ही नहीं था। बोर्ड लगा, कारोबार बंद। टीम बाहर निकल गई। थोड़ी देर बाद वहीं वकील साहब चाय पीने पहुंचे
Speaker A
सा हिस्सा नहीं बनेगी। तो सवाल यह है वो धंधा आखिर कितना बड़ा होगा जिसे बचाने के लिए 250 करोड़ भी सस्ता सौदा लगे और उस धंधे से निकलकर हर रोज आपकी थाली में और आपके बच्चे [संगीत] के गिलास में जो पहुंच
Speaker A
तो ताला लटका मिला। एक दिन पहले अदालत ने पूछा था, कभी अपने घर में झांका है?
Speaker A
महीने में एक नई कुर्सी नया शहर नया विभाग लेकिन इस बार विभाग ऐसा था जिसका सीधा ताल्लुक 12 करोड़ लोगों की थाली से था। मुंडे केबिन में पहुंचे बैग [संगीत] रखा इंटरकॉम उठाया। सारे सीनियर अधिकारियों की मीटिंग चाहिए।
Speaker A
अगले ही दिन झांकना शुरू हो गया उसी अदालत से। अब आप सोचिए यह करने के लिए कितना जिगरा चाहिए और अब वो बात सुनिए जो इस पूरी कहानी की जड़ है। ठीक इन्हीं दिनों महाराष्ट्र की विधानसभा में खड़े
Speaker A
जुर्माना 10,000 दुकान [संगीत] चालू। तीसरी जगह सफाई बेहद खराब। नोटिस देकर छोड़ दिया गया। मुंडे ने फाइल बंद की। अगर आदमी जुर्माना भरकर अगले दिन वही काम फिर शुरू कर देता है। तो इस कारवाई का मतलब क्या है?
Speaker A
होकर एक विधायक ने आरोप लगाया कि इस एक आदमी को कुर्सी से हटाने के लिए एक लॉबी 250 करोड़ इकट्ठा कर रही है। ₹50 करोड़। एक सरकारी अफसर की पूरी जिंदगी की तनख्वाह जोड़ दीजिए तो भी इस रकम का छोटा
Speaker A
पैसे लेते पकड़ा गया तो उसके लिए भी कोई रियायत नहीं। मीटिंग खत्म। [संगीत] उस शाम पूरे दफ्तर में एक ही बात घूम रही थी। यह आदमी फाइलें देखने नहीं आया है। और उसे पहला इम्तिहान बहुत जल्दी मिल गया। कुर्सी संभाले कुछ ही
Speaker A
सा हिस्सा नहीं बनेगी। तो सवाल यह है, वो धंधा आखिर कितना बड़ा होगा जिसे बचाने के लिए 250 करोड़ भी सस्ता सौदा लगे और उस धंधे से निकलकर हर रोज आपकी थाली में और आपके बच्चे के गिलास में जो पहुंच
Speaker A
दो हफ्ते बाद खबर ठंडी। लेकिन मुंडे ने सवाल बदल दिया। उन्होंने यह नहीं पूछा कि शराब [संगीत] किसने बेचीं? उन्होंने पूछा जहर आया कहां से? क्योंकि जहरीली शराब में मारता शराब नहीं मिथेनॉल है। एक इंडस्ट्रियल केमिकल जो पेंट और सॉल्वेंट
Speaker A
रहा है वो आखिर है क्या? 25 मई 2026, महाराष्ट्र एफडीए मुख्यालय, सुबह का वक्त। बाहर एक सरकारी गाड़ी आकर रुकी। ना काफिला, ना गुलदस्ता, ना स्वागत। एक आदमी उतरा, तुकाराम मुंडे। 21 साल
Speaker A
रुकी नहीं। दूसरी कड़ी ले गई ठाणे जिले के भिवंडी में एक गोदाम तक और वहां से जो निकला करीब 6000 किलो मिथेनॉल 6000 किलो यह किसी घर की भट्ठी का मामला नहीं था यह स्टोरेज था सप्लाई थी पहुंचाने वाले लोग
Speaker A
की नौकरी में 25वीं पोस्टिंग। औसतन हर 10 महीने में एक नई कुर्सी, नया शहर, नया विभाग। लेकिन इस बार विभाग ऐसा था जिसका सीधा ताल्लुक 12 करोड़ लोगों की थाली से था। मुंडे केबिन में पहुंचे, बैग
Speaker A
पनीर, खोया, [संगीत] घी, तेल, मिठाई, सैंपल उठाकर लैब भेजे जाने लगे। फिर दूध की रिपोर्ट आई और वहीं से कहानी बदल गई। 10 जून 2026 एफडीए कार्यालय एक बंद कमरे में टेबल पर लैब रिपोर्टें फैली थी। मुंडे ने पूछा, कितने सैंपल फेल हुए? अधिकारी ने
Speaker A
रखा, इंटरकॉम उठाया। सारे सीनियर अधिकारियों की मीटिंग चाहिए।
Speaker A
इससे आगे का है। अधिकारी ने अगली रिपोर्ट आगे बढ़ाई। कुछ सैंपलों में फैट तय मानक से बहुत नीचे था। वो अलग बात थी। लेकिन कुछ सैंपलों में ऐसी चीजें मिली थी जो दूध में होनी ही नहीं चाहिए। कॉस्टिक सोडा डिटर्जेंट और
Speaker A
अभी और पिछले एक साल में जितनी पेनल्टी लगी है, सारी फाइलें मेरी टेबल पर। 10 मिनट बाद कमरा भर चुका था। मुंडे ने ऊपर वाली फाइल उठाई। पन्ने पलटे। एक दुकान पर एक्सपायरी माल मिला। जुर्माना 5000। दूसरी जगह खाने में कीड़े मिले।
Speaker A
लाखों घरों में पहुंच रहे थे। मुंडे ने रिपोर्ट टेबल पर रखी। दूध में पानी मिलाना भी गलत है। लेकिन जो डिटर्जेंट मिलाकर लोगों के घर भेज रहा है, उसे मिलावट कहकर छोटा मत कीजिए। अगला सवाल था यह बन कहां रहा है?
Speaker A
जुर्माना 10,000। दुकान चालू। तीसरी जगह सफाई बेहद खराब। नोटिस देकर छोड़ दिया गया। मुंडे ने फाइल बंद की। अगर आदमी जुर्माना भरकर अगले दिन वही काम फिर शुरू कर देता है, तो इस कारवाई का मतलब क्या है?
Speaker A
पहुंचते हैं तो गोदाम खाली मिलता है। मशीनें गायब, लोग गायब। [संगीत] मुंडे ने आंखें उठाई। खबर किससे जाती है?
Speaker A
कमरे में सन्नाटा। आज से जहां लोगों की सेहत के साथ गंभीर खिलवाड़ मिलेगा, वहां कागजी कारवाई नहीं होगी। कानून जितनी सख्ती की इजाजत देता है, उतनी होगी। एक सेकंड रुकिए। और इस विभाग का कोई कर्मचारी गलत तरीके से
Speaker A
पुलिस स्टेशन को भी नहीं। एक-एक करके फोन टेबल पर आते गए। जगह मैं रास्ते में बताऊंगा। रात के करीब 2:00 बजे छत्रपति संभाजी नगर के बाहरी इलाके में कुछ गाड़ियां बिना सायरन आगे बढ़ रही थी। दोनों तरफ खेत।
Speaker A
पैसे लेते पकड़ा गया तो उसके लिए भी कोई रियायत नहीं। मीटिंग खत्म।
Speaker A
तो भी मुड़कर नहीं देखेंगे। और शायद यही उसकी सबसे बड़ी ताकत थी। लेकिन शटर के नीचे से रोशनी की एक पतली लकीर बाहर आ रही थी। रात 2:00 बजे अंदर काम चल रहा था। शटर खुला। अंदर गाय नहीं थी। भैंस नहीं थी।
Speaker A
उस शाम पूरे दफ्तर में एक ही बात घूम रही थी। यह आदमी फाइलें देखने नहीं आया है। और उसे पहला इम्तिहान बहुत जल्दी मिल गया। कुर्सी संभाले कुछ ही दिन हुए थे कि पुणे और
Speaker A
रहा था। दूसरा ऊपर से कोई चिपचिपा पदार्थ मिला रहा था। तीसरा लंबी छड़ से घोल चला रहा था। और उस टैंक में जो बन रहा था, वो देखने में बिल्कुल दूध जैसा [संगीत] था। सफेद, गाढ़ा, ऊपर हल्का झाग। टीम को देखकर
Speaker A
पिंपरी चिंवड़ से खबर आई, जहरीली शराब। कम से कम 18 लोग मर चुके थे। ऐसे मामलों में आमतौर पर क्या होता है? पुलिस अड्डे पर छापा मारती है। दो-चार लोग पकड़े जाते हैं।
Speaker A
मुंडे शांत खड़े रहे। मुझे इससे कोई मतलब नहीं कि गोदाम किसका है। मुझे यह जानना है कि इस टैंक के अंदर क्या बन रहा है। वो आदमी जेब [संगीत] से फोन निकालने लगा। सर एक मिनट अभी बात करवाता हूं। सब सुलझ
Speaker A
दो हफ्ते बाद खबर ठंडी। लेकिन मुंडे ने सवाल बदल दिया। उन्होंने यह नहीं पूछा कि शराब
Speaker A
[संगीत] मुंडे ने आदेश दिया। पूरा गोदाम सील करो। एक बूंद बाहर नहीं जानी चाहिए। मशीनें, माल, कागज सब कब्जे में। और रजिस्टर्स सबसे पहले। यह आखिरी लाइन सबसे जरूरी थी। क्योंकि माल पकड़ा जाए तो नुकसान दोबारा कमाया जा सकता
Speaker A
किसने बेची? उन्होंने पूछा जहर आया कहां से? क्योंकि जहरीली शराब में मारता शराब नहीं मिथेनॉल है। एक इंडस्ट्रियल केमिकल जो पेंट और सॉल्वेंट
Speaker A
से कलेक्शन सेंटर, वहां से डेयरी, वहां से बाजार और उसके ठीक बगल में उसी के साथ-साथ एक दूसरी लाइन। घटिया मिल्क पाउडर, तेल, केमिकल और इमल्सिफायर से बनने वाले सिंथेटिक दूध की और इसमें दो अलग-अलग गिरोह मिलकर काम कर रहे थे। एक जो सस्ता
Speaker A
में इस्तेमाल होता है। अगर वो शरीर में चला जाए तो पहले आंखों की रोशनी जाती है। फिर आदमी। टीम ने चैन पकड़नी शुरू की। पहली कड़ी उस अड्डे तक गई जहां से शराब बंटी थी। जगह सील, एफआईआर दर्ज लेकिन जांच वहां
Speaker A
जाता है। इमल्सिफायर पड़ते ही वो [संगीत] दूध बन जाता है। गणित सुनिए। ऐसे दूध की लागत आती थी करीब ₹15 लीटर और बाजार में असली दूध बिकता है [संगीत] 40 से 50 बस पूरा खेल इन्हीं दो आंकड़ों में है। लेकिन
Speaker A
रुकी नहीं। दूसरी कड़ी ले गई ठाणे जिले के भिवंडी में एक गोदाम तक और वहां से जो निकला करीब 6000 किलो मिथेनॉल। 6000 किलो यह किसी घर की भट्ठी का मामला नहीं था। यह स्टोरेज था, सप्लाई थी, पहुंचाने वाले लोग
Speaker A
असली। 10 हिस्सा नकली। और यही वजह है कि यह सालों तक पकड़ में नहीं आया क्योंकि 10 फीसदी पर स्वाद नहीं बदलता, रंग नहीं बदलता। दूध फटता भी नहीं। बस आपके शरीर में कुछ ऐसा चला जाता है जिसका असर उस दिन
Speaker A
थे और पूरा नेटवर्क था। यहीं मुंडे का तरीका साफ हो गया। बाकी लोग दुकान उठाते हैं। दुकान बंद होती है।
Speaker A
[गला साफ़ करने की आवाज़] धारा शिव जिले का कस्बा दूध और खोया के कारोबार का बहुत बड़ा केंद्र यही इस पूरी बात का असली आकार [संगीत] समझ आता है क्योंकि नकली दूध सिर्फ चाय के गिलास में नहीं रुकता वही
Speaker A
बोर्ड बदलता है। अगले हफ्ते धंधा फिर शुरू। मुंडे ने चैन उठाई और अगले कुछ ही दिनों में राज्य भर में छापे शुरू हो गए। दूध,
Speaker A
मन में एक बात आ रही होगी। ठीक है, खुला दूध खतरनाक है। मैं तो ब्रांडेड पैकेट लेता हूं। सील बंद। मेरा मामला ही नहीं बनता और ठीक यही सोच निशाने पर थी। मुंबई क्राइम ब्रांच ने जब मिलावट की एक अलग
Speaker A
पनीर, खोया,
Speaker A
केमिकल का घोल भर देते और फिर हीट सीलिंग मशीन से पैकेट दोबारा सील कर देते। ऊपर वही ब्रांड, वही रंग, वही डिजाइन, वही [संगीत] तारीख। आप दुकान से उठाते हैं, घर लाते हैं, कैंची से काटते हैं, गिलास में
Speaker A
घी, तेल, मिठाई, सैंपल उठाकर लैब भेजे जाने लगे। फिर दूध की रिपोर्ट आई और वहीं से कहानी बदल गई। 10 जून 2026, एफडीए कार्यालय। एक बंद कमरे में टेबल पर लैब रिपोर्टें फैली थीं। मुंडे ने पूछा, कितने सैंपल फेल हुए? अधिकारी ने
Speaker A
जाए? और यही मुंडे का जवाब सबसे दिलचस्प है। क्योंकि वह छापे की बात नहीं करते। वो कहते हैं असली चाबी है ट्रेसेबिलिटी। हिसाब सीधा है। हर गांव में पता होता है कि कितने जानवर हैं और एक जानवर औसतन
Speaker A
कुछ सेकंड लिए। सर, 50 में से 40। हर पांच में से चार सिर्फ मिलावट है या मामला इससे आगे का है?
Speaker A
था। जानवर की टैगिंग को दूध की खरीद से जोड़ दीजिए। आंकड़ा मैच नहीं करेगा तो सिस्टम खुद पकड़ लेगा बिना छापे के। लेकिन सिस्टम बनने में वक्त लगता है और वक्त था नहीं क्योंकि दूध के बाद अगली चीज [संगीत]
Speaker A
इससे आगे का है। अधिकारी ने अगली रिपोर्ट आगे बढ़ाई। कुछ सैंपलों में फैट तय मानक से बहुत नीचे था। वो अलग बात थी। लेकिन कुछ सैंपलों में ऐसी चीजें मिली थीं जो दूध में होनी ही नहीं चाहिए। कॉस्टिक सोडा, डिटर्जेंट और
Speaker A
बताइए इसमें दूध कहां है? कहीं नहीं है। पाउडर है, तेल है और एक इमल्सिफायर है। बस इन तीन चीजों से एक ऐसा ब्लॉक बन जाता है जो दिखता है पनीर जैसा, कटता है पनीर जैसा और तवे पर सिकता भी पनीर [संगीत] जैसा है।
Speaker A
इंडस्ट्रियल इस्तेमाल वाले इमल्सिफायर। अब समझिए इन नामों का मतलब। कॉस्टिक सोडा वो चीज है जिससे नालियां साफ होती हैं। डिटर्जेंट वो चीज है जिससे कपड़े धुलते हैं। और यह दोनों हर सुबह चुपचाप
Speaker A
रहा था कि प्लेट में रखी चीज ने कभी किसी गाय या भैंस का मुंह नहीं देखा। और जब जांच में कई सैंपल असुरक्षित पाए गए तो धोखे के साथ खतरा भी जुड़ गया। सिर्फ जून में पुणे के कई ठिकानों से हजारों किलो
Speaker A
लाखों घरों में पहुंच रहे थे। मुंडे ने रिपोर्ट टेबल पर रखी। दूध में पानी मिलाना भी गलत है। लेकिन जो डिटर्जेंट मिलाकर लोगों के घर भेज रहा है, उसे मिलावट कहकर छोटा मत कीजिए। अगला सवाल था यह बन कहां रहा है?
Speaker A
रेस्टोरेंट, हर कैटर को अब बताना पड़ेगा कि वो एनालॉग [संगीत] पनीर इस्तेमाल कर रहा है या नहीं। क्योंकि छापा एक दुकान बंद करता है। लेकिन जानकारी हर ग्राहक को ताकत देती है। अब मुंडे की नजर उस धंधे पर
Speaker A
टीम ने बताया कि सप्लाई छोटे दूध वालों से नहीं आ रही। यह शहरों के बाहर मौजूद बड़े ठिकानों से आ रही है। लेकिन सर, दिक्कत यह है कि हम जैसे ही निकलते हैं, खबर पहले पहुंच जाती है। हम
Speaker A
लोग भूल चुके थे कि बैन है भी। और पुराना तरीका क्या था? पान की दुकान पर छापा, 20 पैकेट जब्त, मामूली जुर्माना। अगले दिन दुकान फिर चालू। मुंडे ने साफ [संगीत] कह दिया, आखिरी दुकानदार पकड़ कर नेटवर्क नहीं
Speaker A
पहुंचते हैं तो गोदाम खाली मिलता है। मशीनें गायब, लोग गायब।
Speaker A
औसतन हर दिन 30 और सिर्फ गुटखा और पान मसाला ज्त हुआ करीब 34 करोड़ 66 लाख का एक महीने में। उसी विभाग ने जिसके बारे में लोग कहते थे कि वहां कुछ होता ही नहीं। लेकिन असली धमाका अब हुआ। मुंडे का तर्क
Speaker A
मुंडे ने आंखें उठाई। खबर किससे जाती है?
Speaker A
अनऑर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट वही कानून जो इस राज्य में अंडरवर पर लगता आया है। बड़े गैंगस्टरों पर इसमें जमानत आसानी से नहीं मिलती। गुटखा सिंडिकेट [संगीत] में हड़कंप मच गया क्योंकि जुर्माना वह भर सकते थे। माल की जब्ती वह झेल सकते थे। यह सब उनके
Speaker A
कमरे में कोई नहीं बोला क्योंकि सबको जवाब पता था और जवाब उसी कमरे में कहीं बैठा था।
Speaker A
हैं आप। जो ज्यादा तेज दौड़ता है अक्सर मुंह के बल गिरता है। घर परिवार का ख्याल रखिए। फोन कट गया। ऐसी कॉल सिर्फ डराने के लिए नहीं होती। यह असल में एक ऑफर [संगीत] होती है। रुक जाओ और सब ठीक रहेगा। और
Speaker A
मुंडे ने टेबल की तरफ इशारा किया। सब अपने फोन यहीं रख दीजिए। अगली कारवाई की जगह किसी को नहीं बताई जाएगी। लोकल
Speaker A
नहीं कर रहे उन्हें मुझसे हर चीज का डर होना चाहिए। धमकी का असर उल्टा हुआ क्योंकि अब तक की सारी कारवाई गोदामों पर थी, डेरियों पर थी। ऐसी जगहों पर जहां शहर के बड़े लोग नहीं जाते। [संगीत] लेकिन
Speaker A
पुलिस स्टेशन को भी नहीं। एक-एक करके फोन टेबल पर आते गए। जगह मैं रास्ते में बताऊंगा। रात के करीब 2:00 बजे छत्रपति संभाजी नगर के बाहरी इलाके में कुछ गाड़ियां बिना सायरन आगे बढ़ रही थीं। दोनों तरफ खेत।
Speaker A
गली की छोटी दुकान क्योंकि वहां ना वकील है, ना नेता, ना पैसा। ऊपर वाले के यहां इंस्पेक्शन होता है, नोटिस जाता है और बात संभल जाती है। इस बार उल्टा हुआ। सबसे बड़ा नाम था द क्रिकेट क्लब ऑफ [संगीत]
Speaker A
बीच-बीच में टीन के शेड। एक जगह गाड़ियां रुकीं। सामने एक बड़ा पुराना टिन शेड था। ना बोर्ड, ना नाम, ना रोशनी, ना गार्ड। बाहर से देखने पर किसी कबाड़ खाने जैसा। ऐसी जगह से आप दिन में 100 बार गुजर जाएं
Speaker A
सारे कागज पूरे हैं। अधिकारियों ने कागज मांगे ही नहीं। वो सीधे किचन की तरफ बढ़ गए और जो मिला वो रिपोर्ट [संगीत] में दर्ज है। किचन और कचरे वाले हिस्से में जिंदा कॉकरोच और मक्खियों का भारी संक्रमण। सब्जियों पर
Speaker A
तो भी मुड़कर नहीं देखेंगे। और शायद यही उसकी सबसे बड़ी ताकत थी। लेकिन शटर के नीचे से रोशनी की एक पतली लकीर बाहर आ रही थी। रात 2:00 बजे अंदर काम चल रहा था। शटर खुला। अंदर गाय नहीं थी। भैंस नहीं थी।
Speaker A
बर्तन काटने वाले बोर्ड सीधे फर्श पर पड़े थे। यह वह जगह है जहां एक प्लेट की कीमत हजारों में होती है। और उसी जगह के किचन का फर्श किसी सड़क किनारे के ढाबे से बेहतर नहीं था। कुछ ही दिनों में पांच
Speaker A
दूध की वह महक भी नहीं थी। अंदर स्टील के बड़े टैंक थे।
Speaker A
दिलचस्प था। [संगीत] वहां एक कैटरिंग एजेंसी काम कर रही थी जिसके पास वैध फूड लाइसेंस ही [संगीत] नहीं था। कॉकरोच, किचन में मकड़ी के जाले, कच्चे पके खाने का घालमेल और सबसे अहम जो लोग वहां खाना बना रहे थे उनके मेडिकल रिकॉर्ड मौजूद नहीं
Speaker A
पाइप, मोटरें, नीले ड्रम, पाउडर के बोरे और तेल के कैन। तीन आदमी काम कर रहे थे। एक पाउडर को पानी के
Speaker A
तो फूड बिजनेस का लाइसेंस ही नहीं था। कारोबार तुरंत बंद। उस शाम शहर के पांच सबसे बड़े क्लबों के किचन [संगीत] बंद पड़े थे। लेकिन अगली कारवाही ने लोगों को और गहरी चोट पहुंचाई। क्योंकि अब निशाने पर अमीरों के क्लब नहीं थे। अब निशाने पर
Speaker A
टैंक में डाल रहा था। दूसरा ऊपर से कोई चिपचिपा पदार्थ मिला रहा था। तीसरा लंबी छड़ से घोल चला रहा था। और उस टैंक में जो बन रहा था, वो देखने में बिल्कुल दूध जैसा
Speaker A
बचपन में वहां जाते थे। फिर जवानी में फिर बच्चों को लेकर एफडीए की टीम पहुंची [संगीत] और अंदर जो मिला काम करने वालों के धुले हुए कपड़े वहीं सुखाए [संगीत] जा रहे थे। ठीक उसी जगह के पास जहां खाना बन
Speaker A
था। सफेद, गाढ़ा, ऊपर हल्का झाग। टीम को देखकर
Speaker A
पर्याय माना जाता था। निरीक्षण कमियां कारवाई फिर दक्षिण मुंबई का पूर्णिमा [संगीत] छह दशक पुराना उडुपी रेस्टोरेंट और फिर एक ऐसी जगह जिसका नाम सुनकर लोग चौंक गए। आईआईटी बॉम्बे देश के सबसे होशियार बच्चे [संगीत] जहां पढ़ते हैं। वहां के दो
Speaker A
काम रुक गया। कोने में हिसाब लिख रहा एक आदमी हड़बड़ा कर खड़ा हुआ। आप लोग कौन हैं? आपको पता है यह गोदाम किसका है?
Speaker A
खा रहे हैं। कभी कुछ नहीं हुआ। और मुंडे का जवाब सबसे तीखा हिस्सा है। उन्होंने कहा सवाल यह नहीं है कि आप कितने साल से वहां खा रहे हैं? सवाल यह है कि क्या आपने कभी पूछा खाना किससे बन रहा है? कैसे बन रहा
Speaker A
मुंडे शांत खड़े रहे। मुझे इससे कोई मतलब नहीं कि गोदाम किसका है। मुझे यह जानना है कि इस टैंक के अंदर क्या बन रहा है। वो आदमी जेब
Speaker A
करते हैं। तो बड़े क्लब्स को अलग नियम क्यों मिले? और इस एक बयान के बाद डर बदल गया। पहले डर जुर्माने का था। अब डर नाम का था। जुर्माना कोई भी भर सकता है। सस्पेंशन झेला जा सकता है। लेकिन एक बार ग्राहक को
Speaker A
से फोन निकालने लगा। सर, एक मिनट, अभी बात करवाता हूं। सब सुलझ
Speaker A
जो कुक कल तक नंगे हाथों से रोटी बना रहा था, वो आज कैप और दस्ताने पहन कर खड़ा था। यानी अब सुधार पकड़े जाने के बाद नहीं हो रहा था। पकड़े जाने के डर से पहले हो [संगीत] रहा था। लेकिन इतने बड़े कारोबार
Speaker A
जाएगा। उसे रोक दिया गया। आज रात कोई बात नहीं होगी। टेस्टिंग किट निकली। टैंक, ड्रम, पाउडर और तेल चारों से नमूने लिए गए। कुछ मिनट बाद अधिकारी ने ऊपर देखा। सर, इसमें असली दूध का एक कतरा भी नहीं है।
Speaker A
अंतरराष्ट्रीय मानकों पर चलता है। हमारा कंप्लायंस स्कोर 95% से ज्यादा है और टीम को सिर्फ एक डिश में दो छोटे कीड़े मिले और उन्होंने पूरे होटल का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया। सैकड़ों लोगों का रोजगार रुक गया। यह सजा अपराध से कहीं बड़ी है।
Speaker A
मुंडे ने आदेश दिया। पूरा गोदाम सील करो। एक बूंद बाहर नहीं जानी चाहिए। मशीनें, माल, कागज सब कब्जे में। और रजिस्टर्स सबसे पहले। यह आखिरी लाइन सबसे जरूरी थी। क्योंकि माल पकड़ा जाए तो नुकसान दोबारा कमाया जा सकता
Speaker A
यह है कि लकीर कहां खींचनी है? क्योंकि अगर आज तय हो गया कि दो कीड़े चल जाते हैं। तो कल कोई कहेगा चार क्यों नहीं?
Speaker A
है। रजिस्टर पकड़ा जाए तो नाम सामने आ जाते हैं। कहां से आया? किसने लिया, कितना गया और उन कागजों ने जो दिखाया
Speaker A
असली मोड़ अब आया क्योंकि उसी बहस में अदालत ने वो सवाल पूछ लिया। कभी सरकारी कैंटीन देखी है?
Speaker A
वह एक गोदाम की कहानी नहीं थी। महाराष्ट्र में दूध की एक असली लाइन चल रही थी। किसान
Speaker A
यह उसी सवाल का जवाब था जो सुनवाई में पूछा गया था। जवाब कागज पर नहीं दिया गया। जवाब जमीन पर दिया गया और इसके बाद जो हुआ वो होना ही था। 24 जून 2026 महाराष्ट्र विधानसभा मानसून सत्र विधायक जितेंद्र आभाड़ खड़े
Speaker A
से कलेक्शन सेंटर, वहां से डेयरी, वहां से बाजार और उसके ठीक बगल में उसी के साथ-साथ एक दूसरी लाइन। घटिया मिल्क पाउडर, तेल, केमिकल और इमल्सिफायर से बनने वाले सिंथेटिक दूध की और इसमें दो अलग-अलग गिरोह मिलकर काम कर रहे थे। एक जो सस्ता
Speaker A
स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई। लेकिन आरोप का आकार ही सवाल खड़ा कर देता है। एक सरकारी अफसर के तबादले पर कोई 250 करोड़ क्यों लगाएगा? और यह तो सिर्फ एक मोर्चा था। दूसरा मोर्चा उद्योग का था। देश के
Speaker A
स्किम्ड मिल्क पाउडर सप्लाई करता था बल्क में बिना बिल के। दूसरा जो वो केमिकल देता था जो पाउडर और पानी को इस तरह बांध दे कि घोल गाढ़ा रहे और ऊपर वैसा ही झाग बने। अकेला पाउडर काम नहीं करता। वो नीचे बैठ
Speaker A
लगती है और कुछ हद तक है भी। लेकिन इसका दूसरा पहलू यह है कि अगर किचन में जिंदा चूहे मिले तो भी 30 दिन खाना परोसा जाता रहेगा। 30 दिन में कितनी प्लेटें बनती हैं और दूसरी मांग [संगीत]
Speaker A
जाता है। इमल्सिफायर पड़ते ही वो
Speaker A
यानी सबसे बड़ा डर अपराध का नहीं था। सबसे बड़ा डर इस बात का था कि ग्राहक को पता चल जाएगा। तीसरा मोर्चा अदालत था [संगीत] जो आप सुन चुके हैं। तीनों मोर्चे एक साथ खुल चुके थे। पैसा, लॉबी और कानून और सबको लग
Speaker A
दूध बन जाता है। गणित सुनिए। ऐसे दूध की लागत आती थी करीब ₹15 लीटर और बाजार में असली दूध बिकता है
Speaker A
साथ-साथ खेत का काम। बाद में जब उनसे पूछा गया कि बचपन में सपना क्या था? तो जवाब था कोई सपना नहीं था। उनके शब्दों में हमें पता ही नहीं था कि आईएएस नाम की कोई चीज होती है। फिर एमपीएसएससी आया और मुंडे एमपीएसएससी
Speaker A
40 से 50। बस पूरा खेल इन्हीं दो आंकड़ों में है। लेकिन
Speaker A
परीक्षा में [संगीत] 20वें नंबर पर और फिर शुरू हुआ वो सफर जिसमें एक चीज बार-बार [संगीत] साथ चली तबादला सोलापुर में ट्रेनिंग के दौरान ही एक ताकतवर नेता का अवैध बार बंद करवा दिया नांदेड़ के देगलूर में रेत खेत माफिया पर हाथ डाला। नतीजा
Speaker A
सबसे शातिर चाल आगे थी। यह लोग पूरा का पूरा नकली दूध बाजार में नहीं भेजते थे। क्योंकि 100% ही नकली भेजोगे
Speaker A
सेल्स टैक्स में जॉइंट कमिश्नर रहते हुए विभाग ने 310 करोड़ वसूले। सालाना टारगेट से दोगुने से भी ज्यादा सोलापुर के कलेक्टर रहते सूखे जिले के सैकड़ों गांवों को पानी के टैंकरों से आजाद करवाया। नवी मुंबई महानगर पालिका में चार्ज लेते ही
Speaker A
तो कोई ना कोई पकड़ लेगा। स्वाद अलग लगेगा। शिकायत आएगी। इसलिए नकली दूध को असली में मिलाया जाता था। करीब 90 हिस्सा
Speaker A
सब एक ईमानदार [संगीत] अफसर को हटाने के लिए एक हो गए। 10 महीने बाद नासिक वहां भी वही कहानी। वहां भी अविश्वास प्रस्ताव और नासिक का एक किस्सा उनका पूरा तरीका एक लाइन में समझा देता है। नवरात्रि का दिन
Speaker A
असली। 10 हिस्सा नकली। और यही वजह है कि यह सालों
Speaker A
मौके पर निरीक्षण शुरू। नासिक से तबादला हुआ तो पत्रकारों ने पूछा सर इस पर क्या कहेंगे?
Speaker A
जवाब में 21 साल की पूरी कहानी थी। मुझे हर साल अपने बच्चे का एडमिशन नए स्कूल में करवाना पड़ता है। इसमें नया क्या है?
Speaker A
लेकिन इन 25 तबादलों में एक [संगीत] चीज कभी नहीं हुई। इस आदमी पर आज तक भ्रष्टाचार का एक भी आरोप नहीं लगा। क्योंकि वह हर मुश्किल फैसले को तीन सवालों पर टोलते हैं। क्या यह कानूनी रूप से सही है? क्या यह नैतिक रूप से सही है?
Speaker A
और यह जनहित में है या किसी एक आदमी के हित में? और फिर एक चौथा [संगीत] सवाल जो वह खुद से पूछते हैं। अगर मैं यह नहीं कर सकता तो और कौन करेगा? तबादले की खबर फैली। और इस बार पहली बार महाराष्ट्र में
Speaker A
वो हुआ जो 25 बार में कभी नहीं हुआ था। जनता सड़क पर आ गई। पुणे में हस्ताक्षर अभियान शुरू हो गया। चौराहों पर बैनर लगे। लोग गाड़ियां रोक कर कागजों पर दस्तखत कर रहे थे और मंगलवेड़ा में लोगों ने कुछ ऐसा
Speaker A
किया जो शायद इस देश में पहले कभी [संगीत] नहीं हुआ। उन्होंने सड़क पर मुंडे की बड़ी सी तस्वीर रखी और उस तस्वीर पर असली दूध चढ़ाना [संगीत] शुरू कर दिया। एक सरकारी अफसर की तस्वीर पर दूध सोशल मीडिया पर लोग
Speaker A
लिख रहे थे हमें हमारा सिंघम वापस चाहिए और फिर विधानसभा में वो नजारा दिखा जो राजनीति में सबसे कम दिखता है। वो नेता जो हर मुद्दे पर एक दूसरे से लड़ते हैं। इस एक मुद्दे पर एक साथ खड़े हो गए। अलग-अलग
Speaker A
पार्टियों के सदस्यों ने एक सुर में कहा इस अवसर को हटाइए मत। इसे और ताकत दीजिए। एक विधायक ने तो सदन में मांग रख दी। इनका तबादला इनके रिटायरमेंट तक [संगीत] मत कीजिए। अब सरकार के सामने हिसाब बदल चुका
Speaker A
था क्योंकि लॉबी के पास पैसा था लेकिन जनता के पास वोट था और आखिरकार सरकार की तरफ से भरोसा देना पड़ा। तुकाराम मुंडे का तबादला नहीं होगा। वो वहीं रहेंगे। यानी 250 करोड़ के सामने जो चीज [संगीत] खड़ी
Speaker A
हुई वो कोई नया कानून नहीं था। वो सिर्फ जनता का दबाव था। अब आखिरी बात और यह सबसे डरावनी है। इस पूरी कहानी में सबसे डरावना यह नहीं है कि गोदाम में नकली दूध मिला। यह भी नहीं कि बड़े क्लब के किचन में
Speaker A
कॉकरोच मिले। सबसे डरावना यह है कि यह सब पिछले साल भी चल रहा था और उससे पिछले साल भी वही गोदाम, [संगीत] वही टैंक, वही रजिस्टर, वही किचन, वही चूहे। कानून भी वही था जो आज है। नियम भी
Speaker A
वही थे। धाराएं भी वही। फर्क सिर्फ इतना पड़ा कि एक दिन कुर्सी पर एक ऐसा आदमी बैठ गया जिसने फाइल खोलकर पूछ लिया यह क्या है? बस इतना ही फर्क था। अब एक आखिरी बार उस टिन शेड में चलिए रात 2:00 बजे वो सफेद
Speaker A
टैंक जिसमें दूध [संगीत] की एक बूंद नहीं थी। अगर उस रात टीम वहां ना पहुंचती तो वो माल दो दिन में किसी असली सप्लाई में मिल जाता। फिर टैंकर चलता। फिर दुकान तक पहुंचता और किसी घर में कोई मां उसे
Speaker A
उबालकर [संगीत] अपने बच्चे के गिलास में डाल देती। उसे क्या पता होता कि रात 2:00 बजे किसी टिन [संगीत] शेड में क्या बना था? यही इस कहानी का असली डर है। अपराध हमेशा डरावने चेहरे [संगीत] के साथ नहीं
Speaker A
आता। कभी-कभी वह सफेद होता है दूध जैसा। अब आप बताइए नीचे कमेंट में ऐसे अफसर को खुली छूट मिलनी चाहिए या अदालत सही कह रही है कि [संगीत] थोड़ा व्यावहारिक भी होना पड़ेगा? दोस्तों, अगर यह डॉक्यूमेंट्री पसंद आई हो, तो वीडियो [संगीत] को लाइक,
Speaker A
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