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पाकिस्तान और बांग्लादेश दुखी क्यों ? Real History and Problems Of Bengal l 2D Animation

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Speaker A
भारत में एक चुनाव हुआ एक राज्य में, और उस चुनाव के नतीजे सुनकर पाकिस्तान के न्यूज़ चैनल्स पर मातम छा गया।
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Speaker A
बांग्लादेश की सड़कों पर बेचैनी फैल गई। सवाल यह है, बंगाल का चुनाव और पाकिस्तान-बांग्लादेश को तकलीफ क्यों?
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Speaker A
एक नेता हारे, ममता बनर्जी, और दो देश बेचैन हो गए। क्यों? क्योंकि ममता सिर्फ एक
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Speaker A
नेता नहीं थी। कई आरोपों के अनुसार ममता एक शील्ड थी। उन कथित घुसपैठियों की शील्ड जो चुपके-चुपके इस
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Speaker A
देश में बस चुके थे। उस स्मगलिंग
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Speaker A
नेटवर्क की शील्ड जो बंगाल की बॉर्डर से
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Speaker A
चलने का आरोप झेलता रहा। उस पूरे इकोसिस्टम की शील्ड जिस पर
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Speaker A
भारत को अंदर से कमजोर करने के आरोप लगते रहे। अब वो शील्ड हट गई है और इसी वजह से
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Speaker A
पाकिस्तान
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Speaker A
बेचैन है। इसी वजह से बांग्लादेश घबराया हुआ है और यह दर्द, यह घबराहट, यह डर असल में शुरू हुआ था साल 1947
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Speaker A
में। जब एक अंग्रेज ने एक रात में नक्शे पर लकीर खींची थी और उस लकीर ने जो जख्म
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Speaker A
दिया वो आज तक
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Speaker A
पूरी तरह भरा नहीं। उसी जख्म की पूरी कहानी आज इस डॉक्यूमेंट्री में। तो बने रहिए इस वीडियो में अंत तक। वीडियो को हाइप करें और चैनल को सब्सक्राइब
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Speaker A
जरूर करें। दो देश एक दर्द भारत में एक चुनाव हुआ
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Speaker A
बंगाल में, और पाकिस्तान के न्यूज़ चैनल्स पर मातम छा गया। Jio न्यूज़, एआरवाई न्यूज़, समा टीवी कई चैनल्स ने इस हार
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Speaker A
को ब्रेकिंग न्यूज़ बनाया। एंकर्स बेचैन थे। कहा जा रहा था यह मुसलमानों के लिए खतरा है। अल्पसंख्यकों
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Speaker A
पर जुल्म होगा, यह बीजेपी का एजेंडा है। रुकिए। पाकिस्तान जहां हिंदुओं, ईसाइयों और अहमदियों पर अत्याचार की खबरें आती रहती हैं। जहां ब्लासफेमी के नाम पर भीड़ हिंसा की घटनाएं सामने आती रहती हैं। वो पाकिस्तान भारत के मुसलमानों की चिंता कर
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Speaker A
रहा है। यह चिंता नहीं लगती। यह डर लगता है अपने नेटवर्क
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Speaker A
के टूटने का डर। बांग्लादेश भी घबराया हुआ है। लेकिन उनका डर अलग है। कथित तौर पर उन लोगों की वापसी का डर
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Speaker A
जो चुपके-चुपके भारत में
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Speaker A
घुसे बंगाल में बसे और राजनीतिक वोट बैंक
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Speaker A
का हिस्सा बन गए। अब ममता नहीं तो शील्ड नहीं, पाकिस्तान को डर है
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Speaker A
स्मगलिंग रोड्स बंद होने का। बांग्लादेश को डर है घुसपैठियों की वापसी का। दोनों का दर्द एक ही जगह से आ रहा है। बंगाल की
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Speaker A
वो बॉर्डर, वो बॉर्डर जो सालों से कमजोर मानी जाती रही, जो एक पूरे इको सिस्टम को जिंदा रखे हुए थी, वो अब बंद होने वाली है। इसीलिए दो
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Speaker A
देश बेचैन हैं एक नेता की हार पर क्योंकि उनके लिए वो नेता एक
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Speaker A
रखवाली जैसी थी और अब वो रखवाली ही खत्म हो गई। साल था 1947, एक साल, एक फैसला। एक ऐसा जख्म जो आज तक नहीं भरा। अंग्रेज जा रहे थे। 200 साल तक इस देश को लूटा, खोखला किया, तोड़ा
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Speaker A
और जाते-जाते एक आखिरी तोहफा दे गए। पार्टीशन साइरल रेडक्लिफ, एक अंग्रेज वकील जिसने भारत
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Speaker A
को ठीक से देखा भी नहीं था। जिसे इस मिट्टी की खुशबू नहीं पता थी। उसने एक कमरे में बैठकर नक्शे पर एक लकीर खींच दी। बस, और उस एक लकीर ने
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Speaker A
लाखों लोगों की जान ले ली। करोड़ों लोगों को बेघर कर दिया और एक पूरे देश को टुकड़ों में
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Speaker A
बांट दिया। जिन्ना को अलग देश चाहिए था, टू नेशन थ्योरी। यानी हिंदू और मुसलमान एक
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Speaker A
साथ नहीं रह
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Speaker A
सकते। अंग्रेजों ने इस थ्योरी को हवा दी क्योंकि बंटा हुआ भारत कमजोर भारत था। 14 अगस्त 1947 को पाकिस्तान बना। पश्चिम में वेस्ट पाकिस्तान,
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Speaker A
पूरब में ईस्ट पाकिस्तान, दोनों के बीच पूरा भारत, एक अजीब देश, दो हिस्से,
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Speaker A
1000 मील की
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Speaker A
दूरी, अलग भाषा, अलग कल्चर, अलग सोच। बस एक चीज
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Speaker A
कॉमन थी, रिलिजन। लेकिन सिर्फ रिलिजन से देश नहीं चलते। इस पूरे खेल में सबसे ज्यादा तकलीफ किसे हुई?
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Speaker A
बंगाल को। वो बंगाल जो सदियों से एक था, एक भाषा, एक संस्कृति,
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Speaker A
एक पहचान। उसे बीच से चीर दिया गया। एक ही भाषा बोलने वाले लोग एक रात में दो देशों के नागरिक बन गए। एक ही नदी के दो किनारे दो
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Speaker A
अलग देशों में चले गए। खून बहा, आंसू बहे और एक पूरी सभ्यता टूट गई। लेकिन कहानी यहां खत्म नहीं हुई। पाकिस्तान ने ईस्ट पाकिस्तान के साथ जो किया वो इतिहास का एक काला अध्याय था।
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Speaker A
बंगाली भाषा पर
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Speaker A
दबाव। बंगालियों को दूसरे दर्जे का नागरिक मानने के आरोप और जब आवाज उठी तो पाकिस्तान आर्मी ने भयानक
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Speaker A
कारवाई की। ऑन ऑपरेशन सर्च लाइट साल 1971 लाखों बंगाली मारे गए। गांव जलाए गए। महिलाओं पर अत्याचार हुए। भारत चुप नहीं
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Speaker A
रहा। इंदिरा गांधी ने फैसला किया। 16 दिसंबर 1971 पाकिस्तान के 93,000 सैनिकों ने भारत के सामने सरेंडर किया। इतिहास के सबसे बड़े सरेंडर्स में से एक। ईस्ट पाकिस्तान बना। बांग्लादेश बांग्लादेश बना लेकिन खुशहाली तुरंत नहीं आई। गरीबी रही, बांट रही,
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Speaker A
रोजगार की समस्या रही और
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Speaker A
फिर एक रास्ता खुला। बंगाल की वो बॉर्डर यहीं से शुरू हुआ। घुसपैठ का खेल
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Speaker A
जो सालों तक बढ़ता गया और अब उसके नतीजे बदलने वाले हैं। रात का अंधेरा, नदी का किनारा और एक
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Speaker A
आदमी
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Speaker A
जो अपनी पीठ पर एक बोरी लादे हुए हैं। बोरी में सामान नहीं है। बोरी में उसका पूरा जीवन है। वह पानी में उतरता है। ठंडा पानी। अंधेरी रात दूसरी तरफ भारत वह तैरता है। और जब वह दूसरे
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Speaker A
किनारे पर पहुंचता है तो टेक्निकली वह इललीगल है। लेकिन प्रैक्टिकली कोई नहीं पूछता क्योंकि आरोप है कि एक पूरा सिस्टम उसका इंतजार कर रहा होता था। साल 1997 एक रिपोर्ट आई इंटेलिजेंस ब्यूरो की जिसमें दावा किया गया कि बंगाल और असम में
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Speaker A
बांग्लादेशी इललीगल इमीग्रेंट्स की संख्या करीब 1 करोड़ तक पहुंच चुकी है। 1 करोड़ पूरे देश में हड़कंप मच गया। लेकिन कुछ बड़ा नहीं हुआ। क्योंकि जिन नेताओं को कुछ करना था उन्हें
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Speaker A
इन्हीं लोगों के वोट्स चाहिए थे और फिर साल बीतते गए। 2000,
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Speaker A
2005, 2010, 2015, 2020 हर साल लाखों लोगों के आने के आरोप लगते रहे। हर साल नेटवर्क मजबूत होता रहा। हर साल नंबर्स बढ़ते रहे और 2026
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Speaker A
तक दावा किया गया कि यह संख्या 2 करोड़ से भी ज्यादा हो चुकी है। यानी 30 साल में
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Speaker A
लगभग दो गुनी। यानी हर साल औसतन 3 से 4 लाख लोग। यानी हर महीने 25 से 3000 लोग। यानी हर दिन सैकड़ों से हजारों लोग चुपके से रात को बिना किसी को बताए इस देश में। बंगाल की बॉर्डर 2217 कि.मी. आधी से कम
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Speaker A
जगह पर फेंसिंग, बाकी बॉर्डर जंगल,
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Speaker A
नदियां, खेत और रात को रास्ता। बीएसएफ है। जवान है लेकिन हर जगह जवान नहीं हो सकते। और जहां जवान नहीं थे वहां नेटवर्क था। एजेंट्स थे, रूट्स थे, रेट्स थे। बॉर्डर पार करने का अलग रेट, फेक डॉक्यूमेंट
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Speaker A
बनवाने का अलग रेट, बॉर्डर पार करने के बाद असली खेल शुरू होता था। पहले वोटर आईडी, फिर आधार, फिर राशन कार्ड
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Speaker A
और एक बार यह मिल गए जो कल तक बांग्लादेश का नागरिक था। आज कागज पर भारतीय बन गया।

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