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How Mamata Banerjee Lost Bengal | The Real Story Behind Bengal’s Decline | 2D Animation

बंगाल के उत्थान से पतन तक की कहानी, ममता बनर्जी के शासनकाल में हुई राजनीतिक और आर्थिक गिरावट का विश्लेषण।

Key Takeaways

  • बंगाल का औद्योगिक और सांस्कृतिक इतिहास समृद्ध था, लेकिन राजनीतिक कारणों से उसका पतन हुआ।
  • ममता बनर्जी के शासनकाल में भ्रष्टाचार और राजनीतिक हिंसा ने राज्य की स्थिति खराब की।
  • फ्री बीज जैसी योजनाएं विकास नहीं बल्कि वोट बैंक राजनीति का हिस्सा थीं।
  • राजनीतिक विरोध को दबाने के लिए हिंसा और गुंडागर्दी का सहारा लिया गया।
  • बीजेपी ने बंगाल में राजनीतिक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है।

What the video covers

  • बंगाल का इतिहास महान विभूतियों और उद्योगों से भरा था, जो भारत का दिल माना जाता था।
  • 1977 में लेफ्ट फ्रंट की सत्ता में आने के बाद उद्योगों का पतन शुरू हुआ और निवेशक बंगाल छोड़ने लगे।
  • टाटा की नैनो कार फैक्ट्री का सिंघूर में निर्माण ममता बनर्जी के विरोध के कारण रद्द हो गया, जिससे बंगाल का भविष्य प्रभावित हुआ।
  • 2011 में ममता बनर्जी की सरकार आई, जिसने सत्ता के लिए फ्री बीज जैसी योजनाओं को अपनाया लेकिन विकास नहीं हुआ।
  • ममता के शासनकाल में भ्रष्टाचार के कई बड़े घोटाले हुए जैसे शारदा चिट फंड, रोज वैली, नारदा स्टिंग, कोल स्कैम और टीचर भर्ती घोटाला।
  • राजनीतिक हिंसा और गुंडागर्दी का माहौल बढ़ा, विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं पर हमले और धमकियां आम हो गईं।
  • आरजीकर मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर की हत्या ने बंगाल में न्याय की मांग को जन्म दिया और सरकार की आलोचना बढ़ाई।
  • बीजेपी ने बंगाल में मजबूत पकड़ बनाई, 2021 में 18 सांसद जीतकर टीएमसी को चुनौती दी।
  • शुभेंदु अधिकारी जैसे नेता नंदीग्राम में ममता को हराकर बदलाव का प्रतीक बने।
  • बंगाल की जनता राजनीतिक और आर्थिक बदलाव की उम्मीद में है, लेकिन अभी भी कई चुनौतियां बनी हुई हैं।

Answers

Questions about this video

बंगाल के औद्योगिक पतन के मुख्य कारण क्या थे?

बंगाल के औद्योगिक पतन के मुख्य कारण लेफ्ट फ्रंट की 34 साल की सत्ता में ट्रेड यूनियन की गतिविधियां, उद्योगपतियों का भागना और ममता बनर्जी के सिंघूर आंदोलन के कारण टाटा नैनो कार फैक्ट्री का निर्माण रद्द होना थे।

ममता बनर्जी के शासनकाल में कौन-कौन से बड़े घोटाले हुए?

ममता बनर्जी के शासनकाल में शारदा चिट फंड स्कैम, रोज वैली स्कैम, नारदा स्टिंग ऑपरेशन, कोल स्कैम और टीचर भर्ती घोटाला जैसे बड़े भ्रष्टाचार के मामले सामने आए।

आरजीकर मेडिकल कॉलेज की घटना का बंगाल की राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ा?

आरजीकर मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर की हत्या ने बंगाल में न्याय की मांग को बढ़ावा दिया, जिससे सरकार की आलोचना हुई और राजनीतिक हिंसा तथा सुरक्षा की स्थिति पर सवाल उठे।

Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:00
Speaker A
बंगाल एक ऐसी धरती है जहां रविंद्रनाथ टैगोर ने कविताएं लिखीं। जहां विवेकानंद ने दुनिया को जगाया। जहां सुभाष चंद्र बोस ने आजादी का सपना देखा। वो बंगाल जो कभी पूरे हिंदुस्तान की रोशनी था। आज उसी बंगाल की सड़कों पर खून बहता है। आज उसी
00:19
Speaker A
बंगाल के नौजवान के पास काम नहीं है। आज उसी बंगाल की बेटियां रात को अकेले निकलने से डरती हैं। यह कैसे हुआ? वो बंगाल जिसकी पर कैपिटा इनकम कभी पूरे देश में सबसे ऊंची थी। वो बंगाल जहां टाटा जैसे
00:35
Speaker A
उद्योगपति फैक्ट्री लगाना चाहते थे। वो बंगाल जो भारत का इंडस्ट्रियल क्राउन था। उसे किसने तोड़ा? एक औरत थी सफेद साड़ी पहनती थी। खुद को दीदी कहलवाती थी। और 15 साल तक उसने जो किया वो इस देश का सबसे बड़ा धोखा था। घोटाले,
00:53
Speaker A
गुंडागर्दी, खून, झूठ। और जब एक बेटी की लाश हॉस्पिटल में मिली तब बंगाल जागा। तब बंगाल उठा। तब बंगाल ने हिसाब मांगा। जो बंगाल ने सहा, जो बंगाल ने खोया और जो बंगाल ने आखिर में पाया। रुकिए मत
01:10
Speaker A
क्योंकि यह सिर्फ बंगाल की कहानी नहीं है। यह हर उस इंसान की कहानी है जो अंधेरे में भी उम्मीद नहीं छोड़ता। दोस्तों इस डॉक्यूमेंट्री में हम दिखाएंगे बंगाल के उत्थान से पतन तक की कहानी। ममता दीदी की सरकार से बीजेपी
01:26
Speaker A
सरकार तक की कहानी। तो इस वीडियो में अंत तक बने रहिए और चैनल को सब्सक्राइब जरूर करें। कोलकाता जो कभी ब्रिटिश इंडिया की राजधानी था वो सिर्फ एक शहर नहीं था। वो एक सपना था। एक जीती जागती तहजीब था। एक ऐसी धरती
01:54
Speaker A
जहां से पूरे देश की रोशनी निकलती थी। आजादी के बाद जब भारत खड़ा होने की कोशिश कर रहा था तब बंगाल पहले से खड़ा था। हावड़ा का इंजीनियरिंग हब, दुर्गापुर का स्टील प्लांट, हदिया का बंदरगाह, हजारों जूट मिल्स, केमिकल फैक्ट्रीज यह सब
02:12
Speaker A
बंगाल की ताकत थे। देश का सबसे बड़ा इंडस्ट्रियल बेस यहीं था। कोलकाता की सड़कों पर एक जमाने में बड़े-बड़े उद्योगपति चलते थे। टाटा, बिरला इन नामों की जड़े बंगाल से जुड़ी थीं। देश का पहला मेट्रो यहां चला। देश की पहली फिल्म
02:28
Speaker A
इंडस्ट्री यहां पली। देश की पहली आधुनिक यूनिवर्सिटी यहां बनी। बंगाल सिर्फ एक राज्य नहीं था। बंगाल भारत का दिल था। लेकिन जो दिल एक बार टूट जाए उसे जोड़ने में पूरी उम्र लग जाती है। बंगाल को किसी
02:43
Speaker A
दुश्मन ने नहीं तोड़ा। बंगाल को उन्होंने तोड़ा जो खुद को उसका रखवाला कहते थे। साल 1977 लेफ्ट फ्रंट सत्ता में आया। ज्योति बसु मुख्यमंत्री बने। शुरुआत में लगा शायद यह अलग होगा। गरीबों की बात होगी, मजदूरों की बात होगी। लेकिन जो हुआ वह बंगाल
03:03
Speaker A
के लिए अभिशाप बन गया। 34 साल, 34 साल तक एक ही पार्टी, एक ही सोच, एक ही ढर्रा। फैक्ट्रीज बंद होने लगी। इन्वेस्टर्स भागने लगे। ट्रेड यूनियन के नाम पर काम ठप करवाया जाने लगा। जो उद्योगपति बंगाल में पैसा लगाना चाहता था,
03:21
Speaker A
उसे पहले पार्टी को खुश करना पड़ता था। धीरे-धीरे बंगाल की इंडस्ट्री गुजरात चली गई। महाराष्ट्र चली गई, तमिलनाडु चली गई और बंगाल रह गया सिर्फ नारों के साथ। फिर आया वह पल जो बंगाल की तकदीर का सबसे बड़ा मोड़ था। टाटा ग्रुप ने बंगाल
03:39
Speaker A
में नैनो कार फैक्ट्री लगाने का फैसला किया। सिंघूर में जमीन मिली। हजारों करोड़ का इन्वेस्टमेंट, लाखों नौकरियों की उम्मीद, एक पूरी नई इंडस्ट्रियल रिवोल्यूशन की शुरुआत। लेकिन एक औरत को यह मंजूर नहीं था। ममता बनर्जी उन्होंने सिंघूर में धरना दिया, आंदोलन
03:57
Speaker A
किया, जमीन अधिग्रहण को रोका। महीनों तक राजनीति चलती रही और आखिरकार टाटा को बंगाल छोड़ना पड़ा। नैनो फैक्ट्री गुजरात के सारण में चली गई। उस दिन बंगाल ने सिर्फ एक फैक्ट्री नहीं खोई। उस दिन बंगाल ने अपना भविष्य खोया। हर वो
04:14
Speaker A
इन्वेस्टर जो बंगाल में आना चाहता था, उसने सिंघूर देखा और वापस चला गया। मैसेज साफ था। बंगाल में इंडस्ट्री सेफ नहीं है। लेकिन ममता को इसकी परवाह नहीं थी। उन्हें परवाह थी सत्ता की। साल 2011 लेफ्ट का 34 साल का राज खत्म हुआ।
04:33
Speaker A
बंगाल की जनता बदलाव चाहती थी। ममता बनर्जी परिवर्तन का नारा लेकर आई। लोगों ने उन्हें भारी बहुमत दिया। उम्मीद थी अब बंगाल बदलेगा। बंगाल बदला लेकिन बेहतर नहीं हुआ। लेफ्ट का एक तानाशाही राज खत्म हुआ और उसकी जगह आया एक और तानाशाही राज।
04:52
Speaker A
बस फर्क इतना था। इस बार तानाशाह एक औरत थी। इस बार तानाशाह सफेद साड़ी पहनती थी। इस बार तानाशाह खुद को दीदी कहलवाती थी और दीदी के राज में बंगाल ने जो देखा वो लेफ्ट के 34 सालों से भी ज्यादा
05:07
Speaker A
दर्दनाक था। क्योंकि लेफ्ट ने बंगाल की इकॉनमी बर्बाद की। ममता ने बंगाल की आत्मा बर्बाद की। गुंडा राज, खून की राजनीति। सत्ता मिलते ही ममता बनर्जी ने एक काम सबसे पहले किया विरोध की आवाज बंद करना। बंगाल में कोई नया कानून नहीं आया,
05:23
Speaker A
कोई नया आदेश नहीं आया बस एक संदेश गया टीएमसी का विरोध करने वालों की खैर नहीं और उस संदेश को जमीन पर उतारने के लिए तैयार थे टीएमसी के गुंडे। हर जिले में, हर ब्लॉक में, हर गांव में। यह कोई छुपी हुई
05:39
Speaker A
बात नहीं थी। यह खुलेआम होता था दिन दहाड़े सबके सामने और पुलिस देखती रहती थी क्योंकि पुलिस भी उन्हीं की थी। फ्री बीज का जाल। ममता सरकार ने एक तरफ गुंडागर्दी चलाई और दूसरी तरफ चलाई फ्री बीज की
05:54
Speaker A
राजनीति। लक्ष्मी भंडार, महिलाओं को हर महीने पैसे। द्वारे सरकार घर के दरवाजे पर सरकारी योजनाएं। कन्याश्री, लड़कियों को पैसे। स्वास्थ्य साथी, हेल्थ कार्ड। नाम सुनने में अच्छे लगते हैं लेकिन जरा रुकिए यह पैसे आ कहां से रहे थे। बंगाल पर कर्ज
06:13
Speaker A
बढ़ता जा रहा था। 2011 में जब ममता आई तब कर्ज था लगभग 2 लाख करोड़ और उनके राज में यह बढ़ते-बढ़ते 6 लाख करोड़ के पार चला गया। यानी हर बंगाली के सिर पर कर्ज, हर बच्चे के सिर पर कर्ज जो अभी
06:28
Speaker A
पैदा भी नहीं हुआ उसके सिर पर भी कर्ज। लेकिन ममता को इलेक्शन जितना था तो फ्री बीज चलती रही। रोड्स नहीं बनी, हॉस्पिटल्स में डॉक्टर्स नहीं थे, स्कूल्स में टीचर्स नहीं थे, इंडस्ट्री नहीं आई, जॉब्स नहीं थीं।
06:44
Speaker A
लेकिन इलेक्शन से ठीक पहले हर घर में पैसे पहुंच जाते थे। यह डेवलपमेंट नहीं था। यह जनता को खरीदना था। और जब फ्री बीज के लिए पैसे कम पड़े तो घोटाले शुरू हुए। शारदा चिट फंड स्कैम, लाखों गरीब लोगों की जमा
06:58
Speaker A
पूंजी डूब गई। विधवाओं की सेविंग्स गई, मजदूरों की कमाई गई और टीएमसी के नेता उस पैसे पर मौज करते रहे। रोज वैली स्कैम फिर वही कहानी, फिर वही गरीब, फिर वही नेता। नारदा स्टिंग ऑपरेशन, हिडन कैमरा में टीएमसी के नेता खुलेआम रिश्वत लेते दिखे।
07:17
Speaker A
करोड़ों रुपए थैलियों में बिना किसी शर्म के। कोल स्कैम, बंगाल की खदानों से अवैध कोयला। अनुव्रत मंडल टीएमसी का बड़ा नेता। सीबीआई ने गिरफ्तार किया। कैटल स्मगलिंग, बांग्लादेश बॉर्डर से गायों की तस्करी, करोड़ों का खेल और टीएमसी के
07:36
Speaker A
नेता बीच में। और फिर आया सबसे बड़ा घोटाला, एसएसएससी टीचर रिक्रूटमेंट स्कैम। बंगाल के हजारों बेरोजगार नौजवानों ने सरकारी टीचर बनने के लिए एग्जाम दिया। पास भी हुए, मेरिट लिस्ट में नाम भी आया। लेकिन नौकरी नहीं मिली। क्यों? क्योंकि नौकरियां बिक
07:54
Speaker A
रही थीं। पैसे दो, नौकरी लो। योग्यता की जरूरत नहीं। मेरिट की जरूरत नहीं। बस टीएमसी को पैसे चाहिए। एजुकेशन मिनिस्टर पार्थ चटर्जी के घर और उनकी करीबी अर्पिता मुखर्जी के घर से ईडी ने छापा मारा। जो मिला वो देखकर पूरा
08:10
Speaker A
देश हैरान रह गया। ₹50 करोड़ से ज्यादा कैश, नोटों के बंडल, बैग भर-भर के, अलमारियां भरी हुई। यह पैसा था उन नौजवानों का। जिन्होंने सपना देखा था कि वह टीचर बनेंगे। पार्थ चटर्जी जेल गए। लेकिन उन हजारों नौजवानों का क्या जिनकी उम्र बीत
08:29
Speaker A
गई, जिनके सपने टूट गए। जिन्होंने कोर्ट्स के चक्कर काटे, जिन्होंने सड़कों पर धरने दिए, उनका कोई हिसाब नहीं। खून की राजनीति लेकिन जो सबसे दर्दनाक था वो था खून। बंगाल में पॉलिटिकल वायलेंस कोई नई बात नहीं थी। लेफ्ट के जमाने में भी होती
08:46
Speaker A
थी। लेकिन ममता के राज में यह एक सिस्टम बन गई। विरोध करो, मारे जाओगे। बीजेपी का झंडा थामो, मारे जाओगे। दूसरी पार्टी को वोट दो, घर जला दिया जाएगा। 2018 पंचायत इलेक्शन बीजेपी ने कैंडिडेट्स उतारने की कोशिश की। लेकिन नॉमिनेशन
09:05
Speaker A
फॉर्म्स भरने भी नहीं दिए गए। टीएमसी के गुंडों ने इलेक्शन ऑफिस के बाहर खड़े होकर बीजेपी वर्कर्स को भगाया। जो नहीं भागा उसे मारा गया। पूरे बंगाल में हजारों सीटों पर टीएमसी निर्विरोध जीत गई। अभिजीत सरकार, मनीष शुक्ला, देवेंद्रनाथ
09:24
Speaker A
राय, दुलाल कुमार और ऐसे सैकड़ों नाम जिन्हें टीएमसी के गुंडों ने मार डाला। सिर्फ इसीलिए क्योंकि उन्होंने गलत पार्टी को चुना था। इन परिवारों के पास आज भी सिर्फ तस्वीरें हैं और तस्वीरों के सामने जलती अग्रबत्ती। आरजीकर वो रात जिसने बंगाल
09:42
Speaker A
को जगा दिया। 2024। कोलकाता आरजीकर मेडिकल कॉलेज। वहां एक ट्रेनी डॉक्टर थी। रात की ड्यूटी थी। वह अपना काम कर रही थी।
10:00
Speaker A
सुबह उसकी लाश मिली। बलात्कार, हत्या, हॉस्पिटल के अंदर। पूरा बंगाल सड़कों पर आ गया। डॉक्टर्स ने काम
10:07
Speaker A
बंद किया। स्टूडेंट्स ने मार्च किया। महिलाएं रात को मोमबत्तियां लेकर निकली और ममता सरकार ने क्या किया?
10:23
Speaker A
एविडेंस मिटाने की कोशिश की। आरोपी को बचाने की कोशिश की। डॉक्टर्स को धमकियां दी। प्रोटेस्टर्स पर लाठियां चलाई। एक बेटी का न्याय मांगना भी बंगाल में गुनाह था। यह था ममता का बंगाल जहां गुंडे खुले घूमते थे। जहां नेता करोड़ों
10:38
Speaker A
लूटते थे। जहां बेटियां सुरक्षित नहीं थीं। जहां विरोध की आवाज को खून से दबाया जाता था।
10:53
Speaker A
सिर्फ लहर [संगीत] नहीं थी। यह एक करवट थी। एक जागरण था। बीजेपी ने बंगाल में 42 [संगीत] में से 18 सीटें जीती। यह कोई छोटी बात नहीं थी। वो बंगाल जहां बीजेपी का कोई नाम नहीं था। वहां अचानक 18 सांसद
11:07
Speaker A
टीएमसी हिल गई। ममता घबरा गई और घबराहट में उन्होंने वहीं किया जो वह हमेशा करती थी। हिंसा 2019 के बाद बीजेपी वर्कर्स पर हमले तेज हो गए। [संगीत] घर जलाए गए, दफ्तर तोड़े गए, कार्यकर्ताओं को मारा गया लेकिन बीजेपी रुकी नहीं। शुभेंदु अधिकारी
11:27
Speaker A
वो नाम जिसने खेल बदल दिया 2020 का आखिर। टीएमसी के सबसे ताकतवर नेताओं में से एक शुभेंदु अधिकारी बेचैन थे। शुभेंदु कोई छोटा नेता नहीं था। नंदीग्राम आंदोलन का चेहरा, ममता का सबसे भरोसेमंद। ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर जिस जिले में जाता
11:45
Speaker A
था वहां टीएमसी जीतती थी। लेकिन शुभेंदु ने देखा [संगीत] ममता का दरबार अब भतीजे अभिषेक बनर्जी के इर्द-गिर्द सिमट रहा है। पुराने नेताओं को किनारे किया जा रहा है। पार्टी एक परिवार की जागीर बन रही है और शुभेंदु ने फैसला किया। दिसंबर 2020 में
12:03
Speaker A
शुभेंदु अधिकारी ने टीएमसी छोड़ी। बीजेपी में शामिल हुए और उनके साथ आए दर्जनों [संगीत] टीएमसी विधायक, नेता, कार्यकर्ता बंगाल की राजनीति में भूचाल आ गया। उन्होंने ऐलान किया नंदीग्राम से ममता के खिलाफ चुनाव लडूंगा। [संगीत] वो नंदीग्राम जो शुभेंदु का गढ़ था जो ममता की राजनीति
12:24
Speaker A
की नियम [संगीत] था। जहां से ममता का उदय हुआ था। 2021 असेंबली इलेक्शन बीजेपी ने पूरी ताकत झोंक दी। प्रधानमंत्री मोदी की ताबड़तोड़ रैलियां। अमित शाह का घर-घर कैंपेन, जेपी नड्डा का बंगाल दौरा, सोनार बंगला का सपना, असल पोरिबोर्तन का नारा,
12:43
Speaker A
पूरे देश की निगाहें बंगाल पर थी और शुभेंदु अधिकारी नंदीग्राम में डटे थे। चुनाव हुए, [संगीत] रिजल्ट्स आए। शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को नंदीग्राम में हरा दिया। [संगीत] यह सिर्फ एक सीट की जीत नहीं थी। यह एक प्रतीक था। यह एक संदेश
13:00
Speaker A
था। यह साबित हो गया था [संगीत] कि ममता को हराया जा सकता है। लेकिन ओवरऑल रिजल्ट्स में बीजेपी पिछड़ गई। 294 सीटों में बीजेपी को मिली 77 सीटें। टीएमसी ने 214 सीटें [संगीत] जीती। ममता फिर मुख्यमंत्री बन गई। बीजेपी का सपना टूट
13:19
Speaker A
गया। 2 मई 2021 बंगाल का सबसे काला दिन रिजल्ट्स आते ही टीएमसी के गुंडे सड़कों पर आ गए। यह जश्न [संगीत] नहीं था। यह बदला था। बीजेपी वर्कर्स के घर जलाए गए। महिलाओं के साथ अत्याचार हुए। बच्चों को
13:34
Speaker A
मारा गया। सैकड़ों परिवारों को अपना घर छोड़कर भागना पड़ा। बीजेपी के दफ्तर तोड़े गए। कार्यकर्ताओं की हत्याएं हुई। पूरे बंगाल में खून था [संगीत] और ममता सरकार देखती रही। सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया। लेकिन जो जा चुका था [संगीत] वो
13:50
Speaker A
वापस नहीं आया। जो जाने गई थी वो [गला साफ़ करने की आवाज़] वापस नहीं आई। हार के बाद [संगीत] जब असली लड़ाई शुरू हुई 77 सीटें बीजेपी के पास बस यही था कोई सरकार नहीं [संगीत] कोई मंत्रिमंडल नहीं
14:03
Speaker A
कोई सत्ता नहीं बस 77 विधायक और शुभेंदु अधिकारी ऑपोजिशन लीडर बहुत लोगों ने सोचा अब बीजेपी बंगाल में खत्म हो जाएगी कार्यकर्ता टूट जाएंगे नेता वापस टीएमसी में चले जाएंगे लेकिन शुभेंदु अधिकारी ने हार नहीं मानी [संगीत] उन्होंने असेंबली
14:22
Speaker A
में हर घोटाले को उठाया एस एसएसएससी स्कैम पर बोले, आरजीकर पर बोले, [संगीत] कैटल स्मगलिंग पर बोले, कोल स्कैम पर बोले, बूथ-बूत तक संगठन बनाया [संगीत] गया। गांव-गांव में कार्यकर्ता तैयार किए गए। हर जिले में नेतृत्व खड़ा किया गया। यह
14:38
Speaker A
काम कैमरों के सामने नहीं होता था। यह काम होता था गर्मी में, बारिश में, रात को, अकेले। लेकिन यह काम हो रहा था और इसी काम की नींव पर एक दिन इतिहास लिखा जाने वाला था क्योंकि बंगाल की जनता थक चुकी थी,
14:54
Speaker A
गुंडागर्दी से थक चुकी थी, घोटालों से थक चुकी थी, खून की राजनीति से थक [संगीत] चुकी थी और जब जनता थक जाती है तो वह बदल देती है। वो वक्त आने वाला था। 4 मई 2026 वह तारीख है। लेकिन इस तारीख को समझने के
15:10
Speaker A
लिए थोड़ा पीछे जाना होगा। वो चिंगारी जिसने आग लगाई 2024 कोलकाता [संगीत] आरजीकर मेडिकल कॉलेज की उस रात के बाद बंगाल बदल गया था और ममता सरकार उन्होंने प्रोटेस्टर्स को गुंडा कहा डॉक्टर्स को धमकियां दी [संगीत] एविडेंस से छेड़छाड़
15:26
Speaker A
के आरोप लगे कोर्ट ने सरकार को फटकारा सीबीआई जांच में [संगीत] खामियान निकली न्याय नहीं मिला लेकिन गुस्सा मिला वो गुस्सा जो 2026 तक सुलगता रहा जनता का मन बदल रहा था। एसएसएससी स्कैम के हजारों पीड़ित अभी भी कोर्ट्स के चक्कर काट रहे
15:45
Speaker A
थे। बेरोजगार नौजवान अभी भी नौकरी के इंतजार में थे। पोस्ट पोल वायलेंस के पीड़ित परिवार अभी भी न्याय मांग रहे थे। उद्योग नहीं थे, जॉब्स नहीं थी, रोड्स टूटी थी, हॉस्पिटल्स में दवाएं नहीं थी, [संगीत] स्कूल्स में टीचर्स नहीं थे,
16:01
Speaker A
लेकिन फ्री बीज थी और जनता समझ चुकी थी कि फ्री बीज डेवलपमेंट नहीं होती। फ्री बीज भीख होती है। बीजेपी ने 2026 में वह गलतियां नहीं की जो 2021 [संगीत] में हुई थी। 2021 में बाहर से नेता आए थे।
16:18
Speaker A
बड़ी-बड़ी रैलियां हुई थी लेकिन ग्राउंड पर पकड़ कमजोर [संगीत] थी। 2026 में जमीन से काम किया गया। हर बूथ पर ट्रेंड कार्यकर्ता थे। हर गांव में बीजेपी का चेहरा था। हर पीड़ित परिवार को लगा कि कोई उनके साथ है। प्रधानमंत्री मोदी ने बंगाल
16:35
Speaker A
में [संगीत] रैलियां की। लेकिन इस बार बात सिर्फ नारों की नहीं थी। बात थी आरजीकर की बेटी की। बात थी एसएसएससी के नौजवानों की। [संगीत] बात थी उन वर्कर्स की जिनके घर जलाए गए थे। जनता को लगा यह हमारी बात कर
16:50
Speaker A
रहे हैं। जैसे-जैसे इलेक्शन नजदीक आया, टीएमएससी घबराने लगी। ममता की रैलियों में भीड़ कम होने लगी। टीएमएससी के नेता आपस में लड़ने लगे। कई नेताओं ने पाला बदलना शुरू किया। ममता ने आखिरी दाम खेला, धमकियां, पैसे बूथ कैप्चरिंग की कोशिश।
17:08
Speaker A
लेकिन इस बार इलेक्शन कमीशन सख्त था। सेंट्रल फोर्सेस हर बूथ पर थी। कैमरे थे, ऑब्जर्वर्स थे। वो गुंडागर्दी जो [संगीत] 2021 में हुई थी वो 2026 में नहीं हो सकती थी। और जब गुंडागर्दी नहीं हुई तो जनता का
17:24
Speaker A
असली वोट सामने आया। 4 मई 2026 वो सुबह जब रिजल्ट्स आने शुरू हुए तो पहले किसी को यकीन नहीं हुआ। पहला ट्रेंड बीजेपी आगे। दूसरा ट्रेंड बीजेपी बहुत आगे। [संगीत] तीसरा ट्रेंड बीजेपी इतिहास बना रही है। एक-एक सीट आती गई। एक-एक जिला बीजेपी के
17:45
Speaker A
रंग में रंगता गया। वह जिले जहां बीजेपी का कोई नाम नहीं था। वहां से बीजेपी के विधायक जीत रहे थे। वह सीटें जिन्हें टीएमसी का गढ़ समझा जाता था। वह टूट रही थी। ममता बनर्जी की सीट वह भी गई। 15 साल
18:00
Speaker A
की सत्ता एक दिन में खत्म। बीजेपी ने बंगाल में सरकार बना ली। कोलकाता में बीजेपी दफ्तर के बाहर हजारों लोग जमा थे। कोई नाच रहा था, कोई रो रहा था, कोई बस खड़ा था। आंखें बंद किए जैसे यकीन नहीं हो
18:16
Speaker A
रहा हो। और उस भीड़ में कहीं थी वो माएं जिनके बेटे 2021 में मारे गए थे। जिन्होंने सोचा था शायद न्याय नहीं मिलेगा। जिन्होंने सोचा था शायद बंगाल ऐसे ही रहेगा। उनकी आंखों में आंसू थे। शुभेंदु अधिकारी जब स्टेज पर आए तो उनकी
18:34
Speaker A
आवाज कांप रही थी। उन्होंने सिर्फ इतना कहा यह जीत मेरी [संगीत] नहीं है। यह जीत उनकी है जिन्होंने सब कुछ खोकर भी हार नहीं मानी। अब जिम्मेदारी बढ़ी है। 6 लाख करोड़ [संगीत] का कर्ज है। उद्योग [नाक से की जाने वाली आवाज़] बंद हैं।
18:48
Speaker A
नौजवान बेरोजगार हैं। न्याय का इंतजार अभी बाकी है। लेकिन उम्मीद है क्योंकि क्योंकि बंगाल की मिट्टी में विवेकानंद का जोश है। टैगोर की संवेदना है। बोस का जज्बा है। वो बंगाल जो टूटा था वो फिर उठेगा। आपने उस
19:04
Speaker A
हर इंसान की कहानी सुनी जो हार कर भी नहीं टूटा। यह है बंगाल की वापसी। [संगीत] दोस्तों, अगर यह डॉक्यूमेंट्री आपको पसंद आई हो, तो वीडियो को हाइप जरूर करें। चैनल को सब्सक्राइब करें और कमेंट में अपना ओपिनियन जरूर दें। जय हिंद, जय [संगीत]
19:21
Speaker A
भारत जय बंगाल।
Topics:बंगालममता बनर्जीराजनीतिक हिंसाभ्रष्टाचारटीएमसीबीजेपीनैनो कार फैक्ट्रीसिंघूर आंदोलनशारदा घोटालाआरजीकर मेडिकल कॉलेज

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