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Kaise Ajit Doval Ne Blast Se Sirf 90 Second Pehle PM Modi Ko Bachaya? | 2D Animation

अजीत डोभाल ने 90 सेकंड में पीएम मोदी को मेट्रो सुरंग में धमाके से बचाया, एक रहस्यमय आत्महत्या की जांच से शुरू होकर।

Key Takeaways

  • सतर्कता और गहन जांच से ही बड़े खतरे को समय रहते रोका जा सकता है।
  • आत्महत्या जैसी घटनाओं के पीछे गहरे राज छिपे हो सकते हैं।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण और निर्णायक है।
  • सुरक्षा व्यवस्था में केवल बाहरी जांच नहीं, गुप्त और तेज कार्रवाई भी जरूरी है।
  • पीएम मोदी की सुरक्षा के लिए जोखिम उठाना राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा है।

What the video covers

  • 18 अक्टूबर 2023 को दिल्ली में पीएम मोदी मेट्रो सुरंग में एक धमाके के खतरे से बचाए गए।
  • सुरंग के अंदर एक ट्रेन थी जिसमें पीएम मोदी मुस्कुरा रहे थे, unaware कि उनके नीचे धमाका हो सकता है।
  • 6 दिन पहले, 12 अक्टूबर को मेट्रो इंजीनियर सुधीर तनेजा की संदिग्ध आत्महत्या हुई।
  • अजीत डोभाल ने इस आत्महत्या की फाइल को गंभीरता से लिया और जांच शुरू की।
  • सुधीर तनेजा ने आखिरी कॉल में कुछ नहीं कहा, जिससे डोभाल को शक हुआ कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि नाटक था।
  • तनेजा ने सुरंग का एक बंद दरवाजा खोला था जो उद्घाटन से 3 दिन पहले था, जहां पीएम मोदी का कार्यक्रम था।
  • डोभाल ने एक गुप्त टीम 'सेल जीरो' बनाई जो बिना फाइल या आदेश के जांच करेगी।
  • टीम ने सुरंग के रिकॉर्ड और तनेजा के पिछले 30 दिन की गतिविधियों की जांच की।
  • पता चला कि सुरंग में पहले से ही कोई खतरा था, जो जांच में नहीं पकड़ा गया था।
  • डोभाल ने सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देते हुए पीएम मोदी की सुरक्षा सुनिश्चित की।

Answers

Questions about this video

अजीत डोभाल ने पीएम मोदी को मेट्रो सुरंग में धमाके से कैसे बचाया?

अजीत डोभाल ने सुधीर तनेजा की संदिग्ध आत्महत्या की गहन जांच कर सुरंग में छिपे खतरे का पता लगाया और एक गुप्त टीम बनाकर सुरंग की जांच कर पीएम मोदी की सुरक्षा सुनिश्चित की।

सुधीर तनेजा की मौत क्यों संदिग्ध मानी गई?

सुधीर तनेजा ने आत्महत्या से पहले कई असामान्य व्यवहार किए जैसे जूते उतारना, बैग और चश्मा साथ रखना, और आखिरी कॉल में कुछ न कहना, जिससे डोभाल को लगा कि यह नाटक था और मौत के पीछे कोई बड़ा राज है।

'सेल जीरो' टीम का क्या उद्देश्य था?

'सेल जीरो' टीम को बिना किसी फाइल या आदेश के गुप्त रूप से सुरंग की जांच करने और खतरे का पता लगाने के लिए बनाया गया था ताकि पीएम मोदी की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:01
Speaker A
18 अक्टूबर 2023, दिल्ली। दिल्ली की जमीन से 40 मीटर नीचे एक सुरंग, अंधेरा, और उस अंधेरे में एक ट्रेन दौड़ रही है। उस ट्रेन के अंदर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बैठे हैं। मुस्कुरा रहे हैं, बच्चों से बात कर रहे हैं। उन्हें नहीं
00:19
Speaker A
पता कि जिस डिब्बे में वो बैठे हैं, उसके फर्श के नीचे मौत बंधी हुई है। और सबसे खतरनाक बात यह है कि इस ट्रेन को रोका नहीं जा सकता। अगर यह ट्रेन रुकी तो धमाका, अगर एक तार [संगीत] भी काटा तो धमाका। अगर
00:35
Speaker A
सुरंग में खड़े उस आदमी को गोली मारी तो भी धमाका। और उस आदमी की तरफ उसी अंधेरी सुरंग में बिना हथियार अकेला एक 78 [संगीत] साल का बूढ़ा चल रहा है। नाम अजीत डोभाल, पद भारत का राष्ट्रीय सुरक्षा
00:50
Speaker A
[संगीत] सलाहकार। उसके पास कुल जमा 90 सेकंड हैं। सवाल यह नहीं है कि वह जीतेगा या हारेगा। सवाल यह है कि यह सब यहां तक पहुंचा कैसे? इसका जवाब छ दिन पीछे है। एक ऐसी मौत में जिसे पूरी दिल्ली [संगीत] ने
01:04
Speaker A
खुदकुशी मान लिया था। 12 अक्टूबर 2023, 6 दिन पहले, दिल्ली। रात के 9:20, राजीव चौक मेट्रो स्टेशन, आखिरी भीड़ प्लेटफार्म पर खड़ी थी। ट्रेन आ रही थी। हवा का झोंका सुरंग से बाहर निकला और तभी एक आदमी पटरी पर गिरा। जी भगदड़
01:24
Speaker A
[कराहने की आवाज़] ट्रेन की इमरजेंसी ब्रेक, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। मरने वाले का नाम था सुधीर [संगीत] तनेजा। उम्र 41 साल। मेट्रो का सीनियर टनल इंजीनियर, 17 साल की नौकरी। पुलिस आई, सीसीटीवी देखा गया। फुटेज में
01:40
Speaker A
साफ था। किसी ने उसे धक्का नहीं दिया। वो खुद कूदा था। फाइल पर लिखा गया [संगीत] आत्महत्या, काम का दबाव, केस बंद और यही वो [संगीत] जगह थी जहां यह कहानी हमेशा के लिए खत्म हो जाती। लेकिन अगली सुबह वो
01:54
Speaker A
फाइल एक और आदमी की मेज पर पहुंची। 13 अक्टूबर 2023, साउथ ब्लॉक, सुबह के 7:00 बजे। अजीत डोभाल अपनी कुर्सी पर बैठे थे। उम्र 78 [संगीत] साल, सफेद बाल, चेहरे पर वो सन्नाटा जिसे पढ़ना नामुमकिन है। 40 साल
02:11
Speaker A
[संगीत] इस काम में। 7 साल दुश्मन के मुल्क में एक झूठे नाम के साथ और ऐसे ऑपरेशन जिनका जिक्र आज तक किसी फाइल में नहीं है। रोज सुबह उनके सामने दिल्ली की हर उस मौत की सूची रखी जाती थी जो थोड़ी
02:25
Speaker A
भी अजीब हो। 200 में से 199 बेकार होती थी। उस दिन वो एक निकली। डोभाल ने 3 सेकंड में फाइल पढ़ी और [संगीत] फिर एक ही सवाल पूछा। इसने जूते क्यों उतारे?
02:37
Speaker A
उनके सामने बैठा आईबी अफसर चौंका। सर डोभाल ने तस्वीर उठाई। प्लेटफार्म पर उसके जूते रखे हैं। करीने से एक के बगल में एक। सर, खुदकुशी करने वाले अक्सर जूते उतार देते हैं। यह आम बात है। आम बात है। डोभाल
02:54
Speaker A
ने कहा। लेकिन यह आदमी ऑफिस से सीधे आया था। बैग कंधे पर था। मोबाइल जेब में था। [संगीत] चश्मा आंखों पर था। उन्होंने तस्वीर मेज पर रखी। जो आदमी मरने जा रहा हो, वो जूते उतारता है, बैग नीचे
03:08
Speaker A
रखता है, चश्मा उतारता है। यह तीनों में से सिर्फ एक काम करता है और बाकी दो भूल जाता है। नहीं, यह आदमी नाटक कर रहा था। "सर, नाटक?" वो मर गया। मैंने कहा वो नाटक कर रहा था। यह नहीं कहा कि वो मरना नहीं चाहता था।
03:27
Speaker A
अफसर चुप हो गया। डोभाल ने कहा, इसके पिछले 15 दिन निकालो। फोन, [संगीत] बैंक, गाड़ी, ऑफिस की एंट्री। और सबसे पहले इसने आखिरी बार किससे बात की? 4 घंटे बाद जवाब आया। सुधीर तनेजा ने मरने से 51 मिनट [संगीत] पहले एक नंबर पर फोन किया
03:45
Speaker A
था। कॉल सिर्फ 9 सेकंड चली। नंबर एक कॉल सेंटर का था। कस्टमर केयर। बिजली के बिल की शिकायत वाला। डोभाल ने कहा, "उस 9 सेकंड की रिकॉर्डिंग चाहिए।" सर, कस्टमर केयर पर रिकॉर्डिंग तभी [संगीत] शुरू होती है जब कॉल कनेक्ट हो। 9 सेकंड में तो
04:03
Speaker A
निकालो। रात 9:00 बजे रिकॉर्डिंग आई। उसमें एक मशीनी आवाज थी। अपनी भाषा चुनने के लिए एक दबाएं। और उसके पीछे बहुत हल्की सी एक आदमी [संगीत] की सांस। सुधीर तनेजा 9 सेकंड तक बस सांस लेता रहा। कुछ नहीं बोला [संगीत]
04:19
Speaker A
और फोन काट दिया। डोभाल ने वो 9 सेकंड चार बार सुने। फिर उन्होंने कहा यह आदमी किसी को बताना चाहता था लेकिन उसे पता था कि उसके सारे नंबर सुने जा रहे हैं। इसलिए उसने एक ऐसा नंबर मिलाया जो शक ना पैदा करे और फिर हिम्मत
04:38
Speaker A
नहीं हुई। सर, या शायद उसका सचमुच बिजली का बिल। डोभाल ने उसकी तरफ देखा। जो आदमी 51 मिनट बाद मेट्रो के आगे कूदने वाला हो, वो बिजली का बिल ठीक कराने नहीं बैठता। कमरे में सन्नाटा हो गया। डोभाल ने
04:54
Speaker A
फाइल बंद की और खड़े हुए। यह आदमी डरा हुआ था। और डरा हुआ इंजीनियर एक ही वजह से होता है क्योंकि उसने अपनी बनाई हुई किसी चीज में कुछ ऐसा देखा जो वहां नहीं होना चाहिए था। [संगीत] मुझे इसके पिछले 30 दिन की हर
05:09
Speaker A
एंट्री चाहिए। यह आदमी कहां-कहां गया? किस सुरंग में उतरा? कौन सा दरवाजा खोला? अगले दिन दोपहर तक वो लिस्ट आई। और उस लिस्ट में एक एंट्री ऐसी थी जिसने पूरे मामले को पलट दिया। सुधीर तनेजा ने मरने से 4 दिन पहले रात के 2:10 पर एक ऐसा
05:28
Speaker A
दरवाजा खोला था जो पिछले 14 महीने से बंद था। नई मेट्रो लाइन की सुरंग सेक्शन बी7, इमरजेंसी एग्जिट नंबर छ। वो लाइन अभी जनता के लिए खुली [संगीत] नहीं थी। उसका उद्घाटन तीन दिन बाद होना था और उद्घाटन
05:43
Speaker A
कौन करने वाला था? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। डोभाल ने कागज मेज पर [संगीत] रखा और कुछ देर तक कुछ नहीं बोला। फिर उन्होंने वह फोन उठाया जिसकी कोई घंटी नहीं बजती, सिर्फ लाल बत्ती जलती है। रेड अल्फा, रेड अल्फा [संगीत] उन्होंने कहा
05:59
Speaker A
आधे घंटे में सब मेरे कमरे में हैं। रात 11:50, साउथ ब्लॉक का बिना खिड़की वाला कमरा। आईबी डायरेक्टर, रॉ का काउंटर टेररिज्म चीफ, एनएसजी [संगीत] कमांडेंट, एसपीजी डायरेक्टर। डोभाल ने बिना भूमिका के शुरू किया। 3 दिन बाद प्रधानमंत्री नई मेट्रो लाइन का
06:18
Speaker A
उद्घाटन करेंगे। वो सिर्फ फीता नहीं काटेंगे। वो पहली ट्रेन में बैठकर दो स्टेशंस का सफर भी करेंगे। 200 मेहमानों के साथ। 11 मिनट सुरंग के अंदर। और 4 दिन पहले उसी सुरंग का एक इंजीनियर रात 2:00 बजे वहां गया और फिर मर गया।
06:38
Speaker A
एसपीजी डायरेक्टर ने तुरंत कहा, सर, ट्रेन वाला हिस्सा कैंसिल करवा देते हैं। फीता कटवाइए, भाषण करवाइए। बस। डोभाल ने उनकी तरफ देखा। आप जानते हैं, मैं 10 साल से इन साहब को जानता हूं। अगर मैंने यह कहा तो वह एक ही
06:54
Speaker A
सवाल पूछेंगे। डोभाल जी, अगर देश का प्रधानमंत्री अपने ही शहर की मेट्रो में नहीं बैठ सकता तो हम बना किसके लिए रहे हैं? उद्घाटन होगा, ट्रेन चलेगी। वो उसमें बैठेंगे और सुरक्षित उतरेंगे। यह हमारा काम है। यह हमारा काम [संगीत] है। उनका नहीं। रॉ चीफ
07:12
Speaker A
ने कहा, सर, 3 दिन में हम पूरी सुरंग की जांच करवा सकते हैं। बम स्क्वाड, [संगीत] डॉग स्क्वाड, हर मीटर करवाएंगे। डोभाल ने कहा और उसमें कुछ नहीं मिलेगा। सर, डोभाल ने कहा, जिस आदमी ने 14 महीने से बंद
07:28
Speaker A
दरवाजा खोला और डर के मारे मर गया, वो कोई ऐसी चीज देखकर डरा था जो जांच में नहीं पकड़ी जाती, वरना वो सीधे रिपोर्ट कर देता। उन्होंने मेज पर हाथ रखा। आज रात से एक टीम बनेगी, आठ लोग। कोई फाइल नहीं, कोई आर्डर
07:44
Speaker A
नहीं। कुछ गलत हुआ तो इस टीम का वजूद ही नहीं माना जाएगा। नाम सेल जीरो। आधे घंटे में नाम [संगीत] तय हो गए। मेजर अनिरुद्ध चौहान, बम और मशीनों का माहिर, 47 बम डिफ्यूज कर चुका आदमी, एक बार 15 सेकंड
08:01
Speaker A
में एक बम बंद किया था। कैप्टन मीरा जोशी, देश की सबसे तेज निशानेबाजों में से एक। रघु, आईबी का जमीनी आदमी जो किसी भी भीड़ में पानी में नमक की तरह घुल जाता था। अंशु, 23 साल की साइबर एक्सपर्ट जिसे
08:18
Speaker A
सिस्टम [संगीत] ने कॉलेज से सीधा उठाया था। और चार और जिनके नाम इस कहानी में कभी नहीं आएंगे। डोभाल ने सबसे पहला हुक्म दिया। अंशु, उस सुरंग का पूरा निर्माण रिकॉर्ड चाहिए। किसने डिजाइन किया? किसने बनाया?
08:32
Speaker A
कौन-कौन अंदर गया? राठौड़, तुम इमरजेंसी एग्जिट नंबर छह जाओगे। लेकिन वर्दी में नहीं, मजदूर बनकर। रघु, सुधीर तनेजा की बीवी से मिलो। पुलिस बनकर मत जाना। बीमा कंपनी वाला बनकर जाना। जिस औरत का पति खुदकुशी कर चुका हो, वो
08:49
Speaker A
पुलिस से नहीं, पैसे की बात करने वाले से ज्यादा बोलती है। तीनों निकल गए। सबसे पहले रघु का फोन आया सुबह 4:00 बजे। सर, तनेजा की बीवी ने एक बात बताई। मरने से एक हफ्ते पहले उसका पति रात को नींद में एक
09:04
Speaker A
ही लाइन बोलता था। क्या लाइन? सर, [संगीत] वो पहले से वहां था। डोभाल कुर्सी पर सीधे हो गए। पूरी लाइन? जी सर। बस यही। वो पहले से [संगीत] वहां था। डोभाल ने फोन रखा और खिड़की के बाहर देखा।
09:19
Speaker A
दिल्ली में सुबह की पहली रोशनी [संगीत] आ रही थी। वो पहले से वहां थे। उन्होंने खुद से कहा और उसी पल उन्हें समझ आ गया कि वह इस पूरे मामले को गलत तरीके से देख रहे हैं। वो ढूंढ रहे थे कि कोई क्या लगाने
09:32
Speaker A
वाला है। लेकिन सुधीर तनेजा ने यह नहीं देखा था कि कोई कुछ लगाने आ रहा है। उसने देखा था कि कुछ पहले से लगा [संगीत] हुआ है। दोपहर तक अंशु के पास सुरंग का पूरा रिकॉर्ड था। सर, यह लाइन 4 साल में बनी।
09:46
Speaker A
तीन बड़ी कंपनियां, 61 [संगीत] ठेकेदार, 11,000 मजदूर, पूरा डाटा है। डिजाइन किसने किया? डोभाल ने पूछा। सर, मुख्य डिजाइन एक सरकारी टीम ने किया। लेकिन इमरजेंसी सिस्टम [संगीत], यानी वो छह आपातकालीन दरवाजे, उनके ताले, हवा का सिस्टम, बिजली का बैकअप, वो एक [संगीत]
10:07
Speaker A
बाहरी सलाहकार ने डिजाइन किया था। नाम? अंशु ने स्क्रीन देखी और रुक गई। सर, नाम रिकॉर्ड में नहीं है। डोभाल ने सिर उठाया। मतलब सर, कंपनी का नाम है, पेमेंट का रिकॉर्ड है, फाइल नंबर है, अंशु। लेकिन जिस आदमी ने
10:24
Speaker A
काम किया, उसका नाम हर जगह से हटाया गया है। और सर, बोलो। हटाया 2 साल पहले गया है। एक ही दिन में 17 अलग-अलग फाइलों से। [संगीत] डोभाल कुछ देर चुप रहे। फिर बोले, जिस आदमी का नाम कोई सरकारी बाबू मिटाता
10:40
Speaker A
है, वो शर्मिंदगी होती है। जिस आदमी का नाम खुद मिट जाता है, वो...
10:54
Speaker A
है वो 18वीं जगह पर जरूर होगी। 6 घंटे लगे। रात 8:00 बजे अंशु ने एक पुराना स्कैन [संगीत] किया हुआ बिल निकाला। नीचे हाथ से दस्तखत थे। नाम निर्भय राठी। रघु ने आधे घंटे में पूरा इतिहास निकाल [संगीत] लिया। निर्भय राठी उम्र 44 साल।
11:12
Speaker A
भारतीय सेना की इंजीनियरिंग शाखा में मेजर रह चुका। 12 साल की नौकरी [संगीत] सुरंग बनाने और तोड़ने दोनों का माहिर। 6 साल पहले उसे नौकरी [संगीत] से निकाल दिया गया। वजह एक निर्माणाधीन सुरंग का हिस्सा गिरा था। नौ मजदूर मरे थे। जांच बैठी और
11:29
Speaker A
जांच ने पूरा दोष [संगीत] निर्भय राठी पर डाल दिया। फाइल बंद, नौकरी खत्म, पेंशन खत्म। डोभाल ने रिपोर्ट पढ़ी और एक लाइन पर रुक गए। रघु यह जांच कितने दिन चली?
11:42
Speaker A
सर 11 दिन। नौ आदमी मरे और जांच 11 दिन में खत्म। जी सर। डोभाल ने रिपोर्ट नीचे रखी। मतलब जांच ने सच नहीं ढूंढा। जांच ने एक नाम ढूंढा जिस पर सब कुछ डाला जा सके। रघु ने पूछा। सर तो
11:58
Speaker A
तो क्या वो बेकसूर था? मुझे नहीं पता। डोबाल ने कहा। लेकिन वो खुद को बेकसूर मानता है और इस काम में इंसान वही करता है जो वो खुद को मानता है। वो नहीं जो वो होता है। निर्भय राठी अभी कहां है?
12:12
Speaker A
अंशु ने कहा सर 4 साल पहले वो देश छोड़कर चला गया था। खाड़ी के एक देश में एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में नौकरी की। और सर उसके बाद उसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। ना वीजा, ना टिकट, [संगीत] ना कोई एंट्री। मतलब वो वापस आ
12:29
Speaker A
चुका है। डोभाल ने कहा और अपने असली नाम से नहीं आया। एसपीजी डायरेक्टर ने कहा सर अब तो सीधा-सीधा मामला है। हम पूरी सुरंग को दो दिन के लिए सील कर देते हैं। हर इंच खोदते हैं। नहीं। डोबाल ने कहा। सर, क्यों नहीं?
12:48
Speaker A
डोबाल उठे और दीवार पर लगे सुरंग के नक्शे के पास गए। क्योंकि जिस आदमी ने यह सुरंग डिजाइन की है, उसे पता है कि हम कहां-कहां देखेंगे। उसने 4 साल पहले वह सिस्टम बनाया था जिसकी मदद से आज हम उसे ढूंढेंगे। अगर हमने
13:03
Speaker A
सुरंग सील की तो उसे पता चल जाएगा कि हम जान गए हैं। और फिर वो योजना बदल देता। तो सर हम करें क्या? डोभाल ने नक्शे पर उंगली रखी। हम वही करेंगे जो वो चाहता है। हम सामान्य जांच करेंगे। बॉम्ब स्क्वाड
13:18
Speaker A
भेजेंगे, कुत्ते भेजेंगे, कागज भरेंगे। उसे लगने दो कि हम अंधे हैं और असली काम रात को होगा। उसी रात मेजर चौहान मजदूर की वर्दी [संगीत] में इमरजेंसी एग्जिट नंबर छह पर पहुंचा और वहां से उसने जो पहली रिपोर्ट
13:33
Speaker A
भेजी उसने डोहाल को अपनी कुर्सी से खड़ा कर दिया। राठौड़ की आवाज धीमी थी। वो सुरंग के अंदर से बोल रहा था। सर दरवाजा नंबर छह में कुछ नहीं है। बिल्कुल साफ है। और डोभाल ने पूछा सर लेकिन दरवाजे के पास
13:50
Speaker A
दीवार पर चूने के निशान हैं। किसी ने वहां खड़े होकर कुछ नापा है। और सर निशान 4 साल पुराने नहीं है। 3 महीने पुराने हैं। डोभाल ने पूछा उस जगह से क्या दिखता है?
14:03
Speaker A
सर यहां से पूरी पटरी का एक सीधा हिस्सा दिखता है। [संगीत] करीब 200 मीटर डोभाल ने आंखें बंद की। राठौड़ एक बात बताओ ट्रेन उस हिस्से से कितनी देर में गुजरती है?
14:15
Speaker A
राठौड़ ने [संगीत] कुछ देर हिसाब लगाया। सर करीब 20 सेकंड और उस दिन प्रधानमंत्री की ट्रेन उस जगह कितने बजे होगी? अंशु ने तुरंत जवाब दिया। सर कार्यक्रम के हिसाब से दोपहर 12:41 पर। डोभाल ने कहा मतलब उसे 20 सेकंड चाहिए
14:32
Speaker A
और वह उन 20 सेकंड के लिए इस दरवाजे पर खड़ा होगा। राठौड़ ने कहा सर तो हम उसे यहीं पकड़ लेंगे। नहीं डोभाल ने कहा अगर वह सिर्फ बटन दबाने आ रहा है तो उसे 200 मीटर की सीधी नजर की क्या
14:46
Speaker A
जरूरत रिमोट तो कहीं से भी दबता है सर फिर डोभाल ने बहुत धीरे से कहा उसे इसलिए देखना है क्योंकि उसे कुछ देखना जरूरी है और अगर वह ना देखे तो कुछ अपने आप हो जाएगा। फोन पर खामोशी छा गई।
15:03
Speaker A
राठौड़ अब मेरी बात ध्यान से सुनो। तनेजा ने कहा था वो पहले से वहां था। हम अब तक सुरंग में ढूंढ रहे हैं। हमें सुरंग में नहीं ढूंढना। तो सर हमें ट्रेन में ढूंढना है। अगली सुबह डोभाल खुद मेट्रो के डिपो
15:18
Speaker A
पहुंचे बिना काफिले के। एक साधारण सफेद गाड़ी में उद्घाटन वाली ट्रेन वहीं खड़ी थी। छह डिब्बे नई [संगीत] चमकती हुई। डोभाल ने डिपो के मुख्य इंजीनियर से एक ही सवाल पूछा। यह ट्रेन आखिरी बार खोली कब गई थी? सर 3
15:34
Speaker A
महीने पहले। बड़ी सर्विसिंग हुई थी। किसने की? सर कंपनी की अपनी टीम ने और एक बाहरी विशेषज्ञ भी आया था बैटरी सिस्टम के लिए दो भाल की आंखें सिकुड़ी बाहरी विशेषज्ञ का नाम इंजीनियर ने रजिस्टर पलटा सर नाम लिखा है आर के शर्मा पहचान पत्र की
15:53
Speaker A
कॉपी भी है डोभाल ने वो कॉपी उठाई तस्वीर धुंधली थी दाढ़ी [संगीत] थी चश्मा था लेकिन आंखें डोभाल ने वो कॉपी अंशु को भेजी और सिर्फ इतना कहा चेहरे का मिलान निर्भय राठी से करो 12 मिनट बाद जवाब आया
16:08
Speaker A
सर 88% 88% डोभाल ने फोन जेब में रखा और ट्रेन की तरफ देखा। 3 महीने पहले जब उद्घाटन की तारीख तक तय नहीं हुई थी। दुश्मन इस ट्रेन के अंदर था। राठौड़ को बुलाया गया। वो पूरे 4 घंटे ट्रेन के नीचे लेटा रहा। हर
16:26
Speaker A
डिब्बे के फर्श के नीचे लगे उपकरण के बक्से खोले और तीसरे डिब्बे में उसे वो मिला। बैटरी वाले हिस्से में एक अतिरिक्त बक्सा। बिल्कुल वैसा ही जैसा बाकी [संगीत] सब वही रंग वही मोहर वही नंबर प्लेट अगर आप 20 साल इस काम में हो तब भी आप उसे 20
16:45
Speaker A
बार देखकर निकल जाएं। [संगीत] राठौड़ ने बाहर आकर कहा और उसकी आवाज कांप रही थी। सर यह कोई बॉम्ब नहीं है जो चिपकाया गया हो। यह इस ट्रेन का हिस्सा बना दिया गया है। पेंट तक मैचिंग है। नंबर तक सही क्रम में
17:00
Speaker A
है। वजन सर अंदाजन 7 किलो। डोबाल ने पूछा। बंद कर सकते हो? राठौड़ चुप रहा। मेजर मैंने सवाल पूछा है। सर इसमें तीन अलग-अलग सुरक्षा है। और यह तीनों उस आदमी ने लगाई हैं जो सुरंग बनाता भी है और गिराता है। बताओ। पहली बात इसमें
17:22
Speaker A
एक हिलने वाला सेंसर है। ट्रेन जब तक चल रही है यह सोया रहता है। अगर ट्रेन बीच सुरंग में [संगीत] पूरी तरह रुक गई तो यह जाग जाएगा। डोबाल ने आंखें बंद की। मतलब हम ट्रेन रोक नहीं सकते। जी
17:35
Speaker A
[संगीत] सर। दूसरी इसका ढक्कन बंद सर्किट पर है। अगर मैंने इसे बीच रास्ते खोलने की कोशिश की तो भी वही नतीजा। और तीसरी राठौड़ ने बहुत मुश्किल से कहा। सर तीसरी सबसे बुरी है। इसमें एक छोटा रिसीवर लगा
17:52
Speaker A
है। यह लगातार एक सिग्नल का इंतजार करता है। जब तक सिग्नल आता रहेगा यह चुप रहेगा। डोभाल ने बहुत धीरे से पूछा। और अगर सिग्नल बंद हो?
18:03
Speaker A
राठौड़ ने कहा तो यह चल जाएगा सर। पूरे कमरे में जैसे हवा जम गई। डोबाल ने बहुत देर बाद कहा। यानी वो आदमी सुरंग में खड़ा होकर एक बटन दबाए रखेगा। और जिस पल हम उसे मारेंगे उसका हाथ ढीला होगा सिग्नल टूटेगा और
18:19
Speaker A
ट्रेन उड़ जाएगी। जी सर [संगीत] डोभाल कुर्सी पर बैठ गए तो हम उसे रोक नहीं सकते। मार नहीं सकते। ट्रेन रोक नहीं सकते। बक्सा खोल नहीं सकते। राठौड़ [संगीत] ने कहा सर इसीलिए मैं कह रहा हूं कार्यक्रम कैंसिल कीजिए। डोबाल [संगीत] ने
18:35
Speaker A
सिर उठाया। मेजर अगर हम कार्यक्रम कैंसिल करते हैं तो यह ट्रेन डिपो में खड़ी रहेगी। और उसमें 7 किलो का यह बक्सा लगा रहेगा और वो आदमी बाहर [संगीत] रहेगा। और फिर एक दिन किसी आम मंगलवार की सुबह जब
18:50
Speaker A
उस जब उसमें 1200 आम लोग सफर कर रहे होंगे वो सिग्नल तोड़ देगा। आज हमें पता है कि वो कब आएगा, कब आएगा और कहां खड़ा होगा। कल हमें कुछ नहीं पता होगा। डोभाल खड़े हुए। ट्रेन चलेगी और उसी ट्रेन के साथ हमें उसे
19:06
Speaker A
भी खत्म करना होगा। उस रात डोभाल ने पूरी टीम को एक कमरे में बैठाया और ब्लैक बोर्ड पर तीन लाइनें लिखी। [संगीत] पहली ट्रेन रुक नहीं सकती। दूसरी निर्भय राठी मारा नहीं जा सकता। तीसरी [संगीत] सिग्नल टूट नहीं सकता। अब बताओ उन्होंने
19:23
Speaker A
कहा इन तीन शर्तों के अंदर हम जीत कैसे सकते हैं? अंशु ने कहा सर हम उसका सिग्नल कॉपी कर सकते हैं। एक नकली सिग्नल बनाकर रिसीवर को देते रहेंगे। फिर उसका हाथ ढीला भी हो जाए। फर्क नहीं पड़ेगा।
19:38
Speaker A
कितना वक्त लगेगा? सर अगर मुझे उसके ट्रांसमीटर की फ्रीक्वेंसी मिल जाए तो 90 सेकंड। और फ्रीक्वेंसी कैसे मिलेगी? अंशु चुप हो गई। वो तभी मिलेगी जब वो ट्रांसमीटर चालू करेगा। डोभाल ने खुद जवाब दिया। यानी उस [संगीत] दिन उस सुरंग में उन 20 सेकंड में
19:55
Speaker A
राठौड़ ने कहा। सर 90 सेकंड बहुत ज्यादा है। ट्रेन उस हिस्से से 20 सेकंड में निकल जाएगी। डोभाल ने ब्लैकबोर्ड पर चौथी लाइन लिखी। तो हमें उसे 90 सेकंड तक बटन दबाए रखने पर मजबूर करना होगा। सर सर मीरा ने पूछा अगर उसका काम 20 सेकंड
20:13
Speaker A
में खत्म हो जाता है तो वो 21वें सेकंड में बटन छोड़ देगा। हमें उससे 70 सेकंड और चाहिए। और आदमी बटन तभी दबाए रखता है जब उसे लगे कि उसका काम अभी अधूरा है। रघु ने पूछा सर उसे ऐसा लगेगा कैसे? डोभाल
20:29
Speaker A
ने चौक नीचे रखी। क्योंकि उस सुरंग में उसके सामने एक आदमी खड़ा होगा जिससे बात करना उसके लिए बटन [संगीत] दबाने से भी ज्यादा जरूरी होगा। मीरा ने धीरे से कहा सर सर आप डोभाल ने जवाब नहीं दिया। राठौड़ खड़ा
20:44
Speaker A
हो गया। सर ये सर यह पागलपन है। आप 78 साल के हैं। बिना हथियार बंद सुरंग में एक ऐसे आदमी के सामने जिसके हाथ में 7 किलो का ट्रिगर है। मेजर बैठ जाओ। सर बैठ जाओ। राठौड़ बैठ गया। डोभाल ने बहुत शांति से कहा निर्भय
21:02
Speaker A
राठी छ साल से गुस्से में है और गुस्से वाला आदमी दुनिया से एक ही चीज चाहता है कि कोई उसकी बात सुने छ साल में किसी ने उसकी नहीं सुनी उस दिन सुरंग में जब वो अकेला होगा अंधेरे में अपनी जिंदगी के
21:17
Speaker A
सबसे बड़े पल में और अचानक उसके सामने वो आदमी आ जाए [संगीत] जिसने पूरी उम्र इसी सिस्टम को चलाया है डोबाल ने रुक कर कहा वो गोली नहीं चलाएगा वो बोलेगा और जब तक वो बोलेगा उसका अंगूठा बटन पर रहेगा और
21:33
Speaker A
अंशु का काम चलता रहेगा। कमरे में लंबी खामोशी रही। फिर मीरा ने पूछा सर और अगर वो नहीं बोला डोभाल ने अपना कोर्ट उठाया तो तुम्हें उसी सेकंड फैसला लेना होगा कैप्टन और मैं तुम्हें पहले ही बता दूं। अगर वो हालत आई तो तुम गोली
21:50
Speaker A
चलाओगी। मेरी परवाह मत करना। सर मैं यह आदेश है। [संगीत] मीरा ने सिर झुका लिया। अगले 24 घंटे में तैयारी हुई। सबसे पहले रघु ने वह पकड़ा जो सबसे जरूरी था। निर्भय राठी [संगीत] देश में घुसा कैसे? जवाब
22:05
Speaker A
हवाई अड्डे पर नहीं मिला। वो एक अस्पताल में मिला। 14 महीने पहले एक आदमी की मौत हुई थी। नाम आर के शर्मा। [संगीत] 60 साल का लावारिस कोई परिवार नहीं। लाश 7 दिन तक मुर्दा घर में पड़ी रही और फिर सरकारी
22:21
Speaker A
खर्चे पर जला दी गई। लेकिन उसका आधार, उसका पैन, उसका बैंक खाता तीनों आज भी जिंदा थे। रघु ने रिपोर्ट में लिखा सर यह आदमी मरा नहीं इसका नाम बेचा गया है। डोभाल ने पढ़कर कहा मतलब कोई है जो
22:37
Speaker A
लावारिस लाशों के कागज इकट्ठे करता है और उन्हें बेचता है। यह आदमी अकेला नहीं आया रघु। इसके पीछे एक पूरा बाजार है। सर उस बाजार को भी उठाइए। अभी नहीं। डोबाल ने कहा पहले कल की सुबह निकल जाने दो। फिर
22:51
Speaker A
रघु ने दूसरा सवाल हल किया। निर्भय राठ ही सुरंग में घुसेगा कैसे? जवाब सीधा था। वो पहले से अंदर होगा। सर्विस सुरंग के एक पुराने हिस्से में जिसका दरवाजा उसने खुद डिजाइन किया था [संगीत] और जिसकी चाबी किसी रजिस्टर में दर्ज नहीं थी। अंशु ने
23:08
Speaker A
अपना पूरा सिस्टम एक बैग में डाला और उसे राठौड़ के साथ ट्रेन के पहले डिब्बे में बिठाया गया। मेट्रो [संगीत] के तकनीकी स्टाफ की वर्दी में मीरा को पटरी के दूसरी तरफ 200 मीटर दूर एक बंद हवा नाली में
23:22
Speaker A
लिटाया गया। रात 2:00 बजे 12 घंटे पहले नीचे उतरने से पहले उसने डोभाल को रोका। सर एक बात पूछूं?
23:31
Speaker A
पूछो। अगर वो आपकी बात नहीं सुनता [संगीत] और मुझे गोली चलानी पड़ी। और आप बीच में आ गए तो डोभाल ने उसकी तरफ देखा। [संगीत] कैप्टन इस काम में एक ही नियम है जिसकी जान बचानी है। वो सबसे [संगीत] बड़ा है।
23:45
Speaker A
बाकी सब उसके बाद आते हैं। मैं भी और एक बात कल तुम 12 घंटे उस नाली में अकेली रहोगी अंधेरे में बिना हिले। उन 12 घंटों में तुम्हारा दिमाग तुम्हें 100 बार कहेगा कि यह सब बेकार है कि तुम गलत जगह हो कि
24:05
Speaker A
कुछ नहीं होगा। उस आवाज को सुनना मत। क्योंकि जिस सेकंड कुछ होगा वो एक ही सेकंड होगा। मीरा ने सलाम किया और अंधेरे में उतर गई। 18 अक्टूबर 2023 उद्घाटन वाली सुबह जब पूरा शहर टीवी पर नई मेट्रो लाइन देख रहा था। अजीत डोभाल एक
24:24
Speaker A
साधारण नीली वर्दी पहनकर सिर पर हेलमेट लगाकर इमरजेंसी एग्जिट नंबर पांच के रास्ते 40 मीटर नीचे उतर रहे थे। अकेले 18 अक्टूबर 2023 सुबह 11:00 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहुंचे। फीता कटा, तालियां बजी, कैमरे चमके, वो नीचे प्लेटफार्म पर
24:44
Speaker A
उतरे और 200 मेहमानों के साथ पहली ट्रेन में बैठे। सामने की सीट पर उन्होंने एक सरकारी स्कूल के बच्चों के समूह को बिठाया। एक बच्चे ने पूछा, "सर, आपको डर नहीं लगता इतनी नीचे?" मोदी जी हंसे। बेटा डर तो लगता है लेकिन जब बहुत सारे अच्छे
25:02
Speaker A
लोग साथ हो तो डर छोटा हो जाता है। उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि वो कितना सही बोल रहे हैं। ट्रेन चली 12:39 सुरंग के अंदर इमरजेंसी दरवाजे नंबर छह के पास अंधेरे में एक आदमी खड़ा था। काली
25:17
Speaker A
जैकेट हाथ में एक छोटा काला डिब्बा। उस डिब्बे पर एक हरी बत्ती जल रही थी। निर्भय राठी ने घड़ी देखी और तभी उसके पीछे से एक आवाज आई। राठी साहब वो बिजली की [संगीत] तरह घूमा। अंधेरे में 20 कदम की दूरी पर
25:32
Speaker A
एक बूढ़ा आदमी खड़ा था। नीली वर्दी, हाथ में एक छोटी टॉर्च और कुछ नहीं। निर्भय ने जेब से पिस्तौल निकाली और सीधे उसकी तरफ तान दी। कौन हो तुम? मेरा नाम अजीत डोभाल है। निर्भय एक पल के लिए जम गया। फिर उसने
25:47
Speaker A
बहुत धीरे से हंसना शुरू किया। तुम तुम खुद आए हो यहां अकेले? हां। क्यों? डोभाल ने कहा क्योंकि मैं तुमसे एक सवाल पूछना चाहता हूं। और मुझे पता है कि तुम्हें कोई जवाब देने का मौका नहीं मिला। मुझे बातों में
26:04
Speaker A
मत उलझाओ। और अगर तुम्हें लगता है कि तुम अकेले होशियार हो तो एक बात सुन लो। उसने पीछे सुरंग के अंधेरे की तरफ इशारा किया। मेरे पीछे 300 मीटर पर एक और आदमी है। उसके पास भी वही डिब्बा है। मैं गिरा
26:19
Speaker A
तो वह दबाएगा। डोभाल के चेहरे पर कोई हलचल नहीं हुई। उन्होंने बस इतना कहा, [संगीत] नहीं है। क्या तुम झूठ बोल रहे हो और मैं बता सकता हूं कैसे? डोभाल [संगीत] ने एक कदम और बढ़ाया। अगर तुम्हारे पीछे सचमुच कोई होता तो तुम
26:35
Speaker A
मुझे देखकर उसे पुकारते। चेतावनी देते कुछ करते। तुमने कुछ नहीं किया। तुम अकेले [संगीत] हो राठी पूरी जिंदगी की तरह आज भी अकेले हो निर्भय की जबड़े की हड्डी कसी तुम मुझे जानते नहीं मैं उलझा नहीं रहा डोभाल ने एक कदम आगे बढ़ाया
26:54
Speaker A
रुक जाओ निर्भय चिल्लाया उसका अंगूठा उस काले डिब्बे पर और कस गया एक कदम और यह ट्रेन तुम्हारा अंगूठा बटन पर है। डोभाल ने कहा अगर वो हटा तो सिग्नल टूटेगा और ट्रेन उड़ जाएगी मुझे पता है। इसलिए मैं यहां बिना
27:11
Speaker A
हथियार के आया हूं। पीछे 200 मीटर दूर हवा की नाली में लेटी मीरा जोशी की उंगली ट्रिगर पर आ गई। उसे निशाना [संगीत] साफ दिख रहा था और उसके इयर पीस में डोभाल की आवाज आई। सिर्फ एक शब्द। रुको। ट्रेन के पहले डिब्बे में
27:27
Speaker A
अंशु का लैपटॉप जाग गया। मिल गया। उसने फुसफुसा कर कहा। सर ट्रांसमीटर एक्टिव है। फ्रीक्वेंसी पकड़ ली। 90 सेकंड चाहिए। राठौड़ ने घड़ी देखी। ट्रेन उस 200 मीटर वाले सीधे हिस्से में घुस चुकी थी। 20 सेकंड 90 चाहिए थे और तभी ट्रेन की रफ्तार
27:46
Speaker A
धीमी [संगीत] होने लगी। राठौड़ का सिर झटके से ऊपर उठा। आगे ड्राइवर के केबिन में पीली बत्ती जल रही थी। वो दौड़ कर आगे गया। क्या हुआ? ड्राइवर ने कहा, सर, आगे सिग्नल पीला है। नियम है कि रफ्तार आधी करनी पड़ेगी। मत करो। सर यह
28:03
Speaker A
नियम है। मैं राठौड़ ने उसका कंधा पकड़ा और उसकी आंखों में देखा। भाई अगर यह ट्रेन इस सुरंग में रुकी तो हम में से कोई घर नहीं जाएगा। रफ्तार वहीं रखो। सिग्नल की जिम्मेदारी मेरी ड्राइवर के माथे पर पसीना
28:17
Speaker A
आ गया लेकिन उसने हाथ नहीं हटाया। पीछे डिब्बे में एक बच्चा चिल्लाया। अरे यह ट्रेन कितनी तेज है? प्रधानमंत्री हंसे और बोले और तेज चलेगी बेटा। राठौड़ ने अंशु की तरफ देखा। कितना बाकी? 60 सेकंड सर। सुरंग में डोबाल ने पूछा। नौ मजदूर थे। है
28:35
Speaker A
ना? निर्भय की पिस्तौल 1 इंच नीचे हुई। क्या? 6 साल पहले उस सुरंग में जो हिस्सा गिरा था, नौ मजदूर मरे थे। निर्भय की सांस तेज हो गई। तुम्हें क्या पता है उसके बारे में? मुझे इतना पता है कि जांच 11 दिन में
28:51
Speaker A
खत्म हो गई थी। डोबाल ने कहा, नौ आदमी मरे और जांच 11 दिन में खत्म हो जाए। यह या तो बहुत तेज काम है या फिर बहुत [संगीत] गंदा। निर्भय की आंखों में कुछ चमका। 13 उसने कहा। 13 बार मैंने लिखा था। 13
29:07
Speaker A
चिट्ठियां। मैंने बताया था कि उस हिस्से में पानी रिस रहा है कि सीमेंट का ग्रेड बदला गया है कि जो सामान भेजा जा रहा है वो कागज [संगीत] वाला नहीं है। उसकी आवाज ऊंची हो गई। 13 चिट्ठियां। और जानते हो जवाब में क्या
29:22
Speaker A
आया? कुछ नहीं। और और जब वो हिस्सा गिरा जब नौ आदमी उस मलबे के नीचे दबे तो जांच [संगीत] ने वो 13 चिट्ठियां फाइल से गायब कर दी और मेरा नाम लिख दिया। उसकी आंखों में कुछ जल रहा था।
29:36
Speaker A
मैं खुद मलबा हटाने गया था अपने [संगीत] हाथों से तीन दिन और तीसरे दिन मुझे एक लड़का मिला 19 साल का बिहार का। उसका हाथ अब भी ऊपर की तरफ उठा हुआ था। जैसे किसी को बुला रहा हो। वो मुझे बुला रहा था
29:56
Speaker A
और मैं 11 दिन बाद अपराधी घोषित कर दिया गया। 80 सेकंड डोभाल ने बहुत शांति से पूछा और उसके बाद उसके बाद निर्भय हंसा लेकिन उस हंसी में कुछ टूटा हुआ था। उसके बाद मेरी बीवी चली गई। मेरे पिता ने 4
30:13
Speaker A
महीने बाद दम तोड़ दिया और मैं एक ऐसे देश में मजदूरी [संगीत] करने चला गया जहां कोई मुझसे मेरा नाम नहीं पूछता था और वहां तुमसे कोई मिला। डोभाल ने कहा निर्भय चुप हो गया। वो तुम्हारे पास आए है ना?
30:26
Speaker A
उन्होंने तुम्हारी सुनी। पहली बार किसी ने तुम्हारी सुनी और फिर उन्होंने तुम्हें पैसा दिया और तुमने खुद से कहा कि यह पैसे के लिए नहीं है। यह इंसाफ के लिए है। निर्भय की पिस्तौल कांपने लगी। 50 सेकंड। तुम्हें क्या पता इंसाफ के बारे में?
30:42
Speaker A
वो चिल्लाया। डोभाल ने अपनी जेब में हाथ डाला। रुको। निर्भय ने पिस्तौल फिर उठा ली। सिर्फ कागज है। डोभाल ने कहा। और बहुत धीरे से एक मुड़ा हुआ कागज निकाला। उन्होंने उसे जमीन पर रखा और पैर से आगे
30:56
Speaker A
सरका दिया। पढ़ो। निर्भय ने कागज नहीं उठाया। पढ़ो राठी। तुम्हारे पास बटन है। मैं भाग नहीं सकता। निर्भय झुका। एक हाथ से कागज उठाया। दूसरा अंगूठा अब भी बटन पर था। टॉर्च की रोशनी में उसने पढ़ा। 30 सेकंड। कागज पर एक [संगीत] पुरानी सरकारी
31:14
Speaker A
नोटिंग थी। तारीख 5 साल पहले। जांच रिपोर्ट संख्या [संगीत] 41 खंड दो के संबंध में असहमति दर्ज। रिपोर्ट में सामग्री की गुणवत्ता वाले 13 पत्रों का उल्लेख नहीं है। पुनः जांच की [संगीत] सिफारिश और सबसे नीचे दस्तखत अजीत डोभाल।
31:32
Speaker A
निर्भय के हाथ से कागज [संगीत] छूटते-छूटते बचा। ये मैंने 5 साल पहले लिखा था। डोभाल ने कहा पुनः जांच नहीं हुई। तुम्हारा नाम वापस नहीं आया। मैं हार गया था। लेकिन 3 साल पहले उन नौ मजदूरों के परिवारों को मुआवजा मिला। बिना किसी
31:50
Speaker A
अखबार के, बिना किसी घोषणा के। और जिस ठेकेदार का सीमेंट था उसकी कंपनी को हमेशा के लिए काली सूची में डाल दिया गया। डोभाल ने उसकी आंखों में देखा तुम्हें नहीं बताया गया क्योंकि सिस्टम माफी नहीं मांगता। लेकिन सिस्टम में कुछ लोग होते
32:08
Speaker A
हैं जो चुपचाप हिसाब बराबर [संगीत] करते रहते हैं। 15 सेकंड निर्भय के चेहरे पर आंसू थे। तो तुम मुझे कहां थे? 5 साल तुम कहां थे? वहीं जहां मैं आज हूं। डोभाल ने कहा, एक ऐसे कागज के पीछे जिसे कोई नहीं
32:24
Speaker A
पढ़ता। 5 सेकंड डोभाल की आवाज पहली बार भारी हुई। राठी वो नौ मजदूर तुम्हारे आदमी थे। तुम उनके लिए लड़े थे। और आज तुम इस सुरंग में जिस ट्रेन को उड़ाने आए हो, उसमें 38 बच्चे बैठे हैं। तुम उनके लिए कौन बनोगे? निर्भय राठी का
32:42
Speaker A
मुंह खुला रहा और उसके हाथ का काला डिब्बा नीचे [संगीत] झुक गया। उसके इयर पीस में अंशु की आवाज फटी। सर सिग्नल कॉपी हो गया। रिसीवर हमारे कब्जे में है। बटन अब बेकार है। डोभाल ने बस इतना कहा। मीरा एक हल्की
32:59
Speaker A
सी आवाज। निर्भय राठी का दाया कंधा पीछे [संगीत] झटका खाकर मुड़ा। पिस्तौल हाथ से छूट कर पटरी पर गिरी और काला डिब्बा भी। बटन छूट गया। सिग्नल टूट गया और कुछ नहीं हुआ। सुरंग में सिर्फ ट्रेन की गूंज रह
33:12
Speaker A
गई। तीसरे डिब्बे के नीचे बंधा वो 7 किलो का बक्सा चुपचाप बंद बेकार पड़ा रहा। 10 सेकंड बाद ट्रेन उस सीधे हिस्से से निकल गई। अंदर बच्चे खिड़की से बाहर देख रहे थे। प्रधानमंत्री उन्हें बता रहे थे कि
33:26
Speaker A
सुरंग कैसे बनती है। किसी ने कुछ नहीं सुना। किसी को कुछ नहीं पता चला। ट्रेन 2 मिनट बाद अगले स्टेशन पर रुकी। प्रधानमंत्री उतरे, हाथ हिलाया, भाषण दिया और चले गए। 18 अक्टूबर 2023 उसी शाम ट्रेन को तकनीकी जांच के नाम पर डिपो भेजा गया।
33:45
Speaker A
रात 11:00 बजे जब पूरा डिपो खाली था। मेजर अनिरुद्ध चौहान ने तीसरे डिब्बे के नीचे लेटकर वो बक्सा खोला। 40 मिनट लगे। बाहर निकलकर उसने सिर्फ इतना कहा साफ। निर्भय राठी को उसी रात दिल्ली से बाहर एक जगह ले
34:01
Speaker A
जाया गया। उसने बयान दिया। [संगीत] बिना दबाव के उसने बताया कि उसे किसने ढूंढा। किसने पैसा दिया और उस पैसे के साथ और कौन-कौन से नाम आए थे? 14 नाम निकले। सात भारत में, सात बाहर। अगले 47 दिनों
34:18
Speaker A
में सातों को उठा लिया गया। [संगीत] बिना किसी खबर के, बिना किसी हेडलाइन के। सुधीर तनेजा की फाइल पर आज भी आत्महत्या लिखा है। लेकिन उसकी बीवी को हर महीने एक पेंशन मिलती है, [संगीत] जिसका कोई सरकारी आधार
34:31
Speaker A
नहीं है।" रघु ने एक बार पूछा था, "सर, उसे बता क्यों नहीं देते कि उसका पति डरपोक नहीं था?" डोभाल ने कहा था जिस दिन बता दूंगा उस दिन उसे यह भी पता चल जाएगा कि उसका पति बचाया
34:44
Speaker A
जा सकता था। वो [संगीत] बोझ मैं उठा लूंगा वो नहीं। अंशु मीरा और राठौड़ को कोई मेडल नहीं मिला। तीन हफ्ते [संगीत] बाद तीनों के घर एक-एक सादा लिफाफा पहुंचा। ना भेजने वाले का नाम ना मुहर। अंदर एक कागज और हाथ
34:59
Speaker A
से लिखे दो शब्द [संगीत] देश अरणी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें आज तक नहीं बताया गया। एक हफ्ते बाद डोभाल उनसे मिलने गए। मोदी जी फाइलें देख रहे थे। उन्होंने ऊपर देखा क्या आपने डोभाल जी मेट्रो कैसी लगी आपको?
35:14
Speaker A
बहुत बहुत अच्छी सर। मोदी जी ने कलम रखी। कुछ पल उनकी आंखों में देखा। आप उस दिन कार्यक्रम आप उस दिन कार्यक्रम में नहीं दिखे। सर मैं नीचे था। मैं नीचे [संगीत] था। नीचे। नीचे? डोभाल ने कहा। सुरंग में। तकनीकी
35:27
Speaker A
काम था। काम था। मोदी जी कुछ देर चुप रहे। फिर उन्होंने धीरे से सिर [संगीत] हिलाया और वापस फाइल खोल ली। ठीक है डोबाल जी। ठीक है आप जानते हैं आपको क्या करना है क्या करना है डोभाल ने सिर झुकाया और बाहर निकल गए 25
35:41
Speaker A
अक्टूबर 2023 उस शाम दिल्ली में 7:00 बजे अजीत डोभाल अपने घर के बरामदे में अकेले बैठे थे सामने बगीचे में अंधेरा उतर रहा था हाथ में चाय का कप था [संगीत] और गोद में एक पुरानी फाइल जांच रिपोर्ट संख्या
35:56
Speaker A
41 खंड दो उन्होंने उसे खोला 13 चिट्ठियों की उस लिस्ट पर उंगली फेरी जो 5 साल पहले गायब कर दी गई फिर फाइल बंद की। अंदर से किसी ने पूछा खाना लगा दें। हां उन्होंने कहा लगा दो। और 78 साल का वो आदमी उठकर अंदर
36:14
Speaker A
चला गया। जैसे [नाक से की जाने वाली आवाज़] उस दोपहर 40 मीटर नीचे [संगीत] कुछ हुआ ही ना हो। दोस्तों अगर यह डॉक्यूमेंट्री पसंद आई हो तो वीडियो को लाइक, [संगीत] शेयर करें और चैनल को सब्सक्राइब जरूर करें। जय हिंद।
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