रॉ एजेंट कबीर की पाकिस्तानी कैंप में घुसपैठ और आतंकवादी जलालुद्दीन की हत्या की सच्ची कहानी।
Key Takeaways
- खुफिया मिशन में धैर्य और सूझबूझ अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
- असामान्य भूमिका निभाकर दुश्मन के बीच घुसपैठ संभव है।
- नर्व एजेंट का इस्तेमाल बिना किसी हिंसा के लक्ष्य को खत्म करने में किया गया।
- सुरक्षा व्यवस्था को समझना और उसका फायदा उठाना मिशन की सफलता की कुंजी है।
- खुफिया एजेंसियां बिना बड़े धमाके के भी महत्वपूर्ण मिशन पूरा कर सकती हैं।
What the video covers
- 17 मई 2019 को रावलपिंडी में रॉ एजेंट कबीर ने एक साधारण मजदूर का भेष धारण किया।
- कबीर का मिशन आतंकवादी जलालुद्दीन को बिना धमाके के मारना था।
- वह पाकिस्तानी सेना के सुरक्षित कैंप फोर में पानी के टैंकर ड्राइवर के रूप में घुसा।
- कबीर ने सुरक्षा व्यवस्था का पूरा नक्शा बनाया और अपने आप को अदृश्य बना लिया।
- जलालुद्दीन के गेस्ट हाउस में अस्थमा का अटैक दिखाकर उसे नर्व एजेंट से मारना था।
- कबीर ने अपनी घड़ी में छिपी सूई से जलालुद्दीन को कार्डियक अरेस्ट से मारा।
- हत्या को नेचुरल डेथ जैसा दिखाने के लिए जहर का इस्तेमाल किया गया।
- मिशन के बाद रॉ हेडक्वार्टर में सफलता का संदेश मिला।
- यह कहानी भारत-पाकिस्तान के खुफिया युद्ध की एक महत्वपूर्ण घटना को उजागर करती है।
- कबीर की सूझबूझ और धैर्य ने मिशन को सफल बनाया।
Chapters
- 00:00रावलपिंडी की गर्म रात और कबीर का परिचय
- 01:25मिशन की गंभीरता और रॉ चीफ के निर्देश
- 02:44कबीर की घुसपैठ: पानी के टैंकर ड्राइवर का रोल
- 04:02ब्रिगेडियर तारिक से मुलाकात और कैंप में जगह बनाना
- 06:46कैंप फोर की सुरक्षा और कबीर की स्थिति
- 08:04जलालुद्दीन के गेस्ट हाउस की खबर और योजना बनाना
- 09:23नर्व एजेंट के साथ हत्या की तैयारी
- 10:47पानी की लाइन में छेड़छाड़ और अंतिम मिशन
- 12:14मिशन की सफलता और रॉ हेडक्वार्टर की प्रतिक्रिया
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Speaker A
17 मई 2019 रात 2:03 पर रावलपिंडी पाकिस्तान की सड़कों पर मई की गर्मी किसी भट्टी की तरह धक रही थी। हवा में उड़ती धूल और दूर से आती अजान की आवाज जैसे माहौल को और भारी बना रही थी। इसी तपते
Speaker A
हुए सन्नाटे के बीच एक जजर नीले रंग का पानी का टैंकर खांसता हुआ धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था। स्टीयरिंग पर बैठे शख्स के चेहरे पर पसीने की बूंदें जम चुकी थीं। दाढ़ी बेतरतीब बढ़ी हुई थी और उसने एक
Speaker A
मैला सा पठानी सूट पहन रखा था। पहली नजर में वह लगभग 35 साल का एक थका हारा आम पाकिस्तानी मजदूर [संगीत] अब्दुल लग रहा था। लेकिन उस मैले कपड़े के पीछे छिपा हुआ सच बिल्कुल अलग था। उसका शरीर भले थका हुआ
Speaker A
दिखता था, पर उसका दिमाग पूरी तरह जागृत, सतर्क और तेज था। वह कोई साधारण मजदूर नहीं था। [संगीत] वह कबीर था। भारत की खुफिया एजेंसी रॉ का सबसे खामोश, सबसे घातक और सबसे खतरनाक हथियार। कबीर का मिशन कोई साधारण जासूसी नहीं था। ना ही यह केवल
Speaker A
जानकारी जुटाने का काम था। [संगीत] इस बार उसे एक भूत को खत्म करना था। जलालुद्दीन लश्कर वह खूंखार कमांडर जिसने भारत के तीन बड़े शहरों को खून से नहला दिया था। जब भारत की सेटेलाइट्स ने उसकी लोकेशन रावलपिंडी के सबसे सुरक्षित कैंप फोर में
Speaker A
ट्रेस की तो साउथ ब्लॉक दिल्ली में हड़कंप मच गया था। हम मिसाइल नहीं दाग सकते। रॉ चीफ के वे शब्द अब भी कबीर के कानों में गूंज रहे थे। वहां एक सुई भी गिरी तो जंग छिड़ जाएगी। हमें कोई धमाका नहीं चाहिए।
Speaker A
हमें बस उसकी लाश चाहिए और दुनिया को लगना चाहिए कि वह अपनी मौत मरा है। तुम्हें वहां जाना है उसके किले में और उसे उसी के घर में दफन करना है और इसीलिए कबीर अब अब्दुल था। वह जानता था कि पाकिस्तानी
Speaker A
सेना के हेड क्वार्टर में सीधे घुसना आत्महत्या से कम नहीं है। वहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता। [संगीत] इसलिए कबीर ने वह रास्ता चुना जिस पर किसी का ध्यान नहीं जाता। जरूरत रावलपिंडी के पौश मिलिट्री इलाकों [संगीत] में पानी की भारी किल्लत
Speaker A
थी और प्यास इंसान को अंधा कर देती है। टैंकर एक शानदार बंगले के सामने आकर रुका। गेट पर दो संतरी ए के 47 ताने खड़े थे। यह ब्रिगेडियर तारिक का घर था। पाकिस्तानी सेना की सप्लाई और लॉजिस्टिक्स का इंचार्ज
Speaker A
ओए अब्दुल आज फिर देर कर दी। संतरी ने कड़क आवाज में कहा। कबीर ने अपने चेहरे पर एक ढी हुई बेबसी मुस्कान ला दी। वह टैंकर से नीचे उतरा। कंधे झुके हुए नजरें जमीन पर। एक जासूस की सबसे बड़ी कला यही होती
Speaker A
है। अपने अहंकार को पूरी तरह मार देना। [संगीत] माफी जनाब। वो ट्रक का रेडिएटर गर्म हो गया था। बस अभी पानी डालता हूं। कबीर ने ठेठ पंजाबी लहजे में जवाब दिया जो रावलपिंडी की गलियों में आम था। उसने पानी
Speaker A
का मोटा पाइप निकाला और उसे अंडरग्राउंड टैंक में डाल दिया। पानी गिरने की छपछप आवाज के बीच बाहर से शांत दिखता हुआ कबीर अंदर ही अंदर एक मशीन की तरह काम कर रहा था। उसकी आंखें हर कोने को स्कैन कर रही
Speaker A
थीं। बंगले के अंदर की हलचल, सुरक्षा कैमरों की पोजीशन, संतरियों की शिफ्ट बदलने का समय, उसका दिमाग, हर छोटी बड़ी जानकारी को अपनी हार्ड ड्राइव में सेव कर रहा था। तभी बंगले के पोर्च में खड़ी एक मिलिट्री जीप के पास से गालियों [संगीत]
Speaker A
की तेज आवाज गूंज उठी। ब्रिगेडियर तारिक अपनी जीप का बोनट खोले खड़ा था और उसका ड्राइवर डर के मारे कांप रहा था। जैसे हर गलती उसकी आखिरी गलती हो सकती हो। बेवकूफ मुझे हेड क्वार्टर पहुंचना है और यह खटारा
Speaker A
स्टार्ट ही नहीं हो रही। ब्रिगेडियर तारिक की आवाज में गुस्सा नहीं हुकूमत थी और हुकूमत में हमेशा डर छुपा होता है। कबीर ने पानी का पाइप वहीं छोड़ा और धीरे-धीरे बहुत नापतोल कर पोर्च की तरफ बढ़ा। उसके हर कदम में हिचकिचाहट दिखाई दे रही थी।
Speaker A
लेकिन उसके दिमाग में एक ही शब्द गूंज रहा था। मौका वह मौका जिसका वह पिछले डेढ़ महीने से हर रोज इस बंगले के बाहर खड़े होकर इंतजार कर रहा था। जनाब अगर इजाजत हो तो मैं देख लूं। कबीर ने बेहद संकोच और डर
Speaker A
के साथ कहा। ब्रिगेडियर ने उसे सिर से पांव तक घूरा जैसे उसकी औकात तोल रहा हो। तू पानी का टैंकर चलाने वाला मेरी जीभ ठीक करेगा। कबीर ने तुरंत नजरें झुका ली। जनाब पहले फैसला बाद में मैं पहले मैकेनिक ही
Speaker A
था। [संगीत] फौज की गाड़ियां तो बहुत देखी हैं। शायद स्पार्क प्लग या फ्यूल लाइन में कचरा आ गया हो। उसने अपनी आवाज में इतना यकीन भरा कि शक की जगह जिज्ञासा ने ले ली। ब्रिगेडियर तारिक ने चिढ़ते हुए हाथ से
Speaker A
इशारा किया। जैसे कह रहा हो। कर ले। अगर कर सकता है तो कबीर आगे बढ़ा। बोनट के अंदर झांका। लेकिन उसके लिए यह कोई नई चीज नहीं थी। वह पहले से जानता था यह मशीन कैसे सांस लेती है। कैसे रुकती है और कैसे
Speaker A
जिंदा की जाती है। उसने बस 2 मिनट का एक छोटा सा नाटक किया। जानबूझकर अपने हाथों पर ग्रीस मल ली। एक ढीले तार को ठीक से जोड़ा। [संगीत] कार्बोरेटर को हल्का सा एडजस्ट किया। इंजन घुमाइए जनाब। उसने पीछे
Speaker A
हटते हुए कहा। ड्राइवर ने कांपते हाथों से चाबी घुमाई और अगले ही पल जीप एक झटके में दहाड़ते हुए जिंदा हो गई। कुछ सेकंड के लिए सन्नाटा छा गया। ब्रिगेडियर तारिक की आंखों में एक अलग सी चमक उभरी। यह सिर्फ
Speaker A
एक ड्राइवर नहीं था। यह एक काम का आदमी था। [संगीत] एक ऐसा आदमी जो फौज की जरूरत बन सकता था। क्या नाम है तेरा? तारिक ने पहली बार बिना गुस्से के पूछा। अब्दुल जनाब कल से यह खटारा टैंकर चलाना बंद कर।
Speaker A
सुबह 7:00 बजे कैंप चार की सप्लाई डिपो में रिपोर्ट करना। फौज में कॉन्ट्रैक्ट ड्राइवर की जरूरत है। तेरी दिहाड़ी दुगनी कर दूंगा। कबीर ने बिना एक पल गंवाए सिर झुकाकर सलाम ठोका। अल्लाह आपको सलामत रखे जनाब। [संगीत] लेकिन जैसे ही ब्रिगेडियर
Speaker A
की जीप गेट से बाहर निकली कुछ बदल गया। कबीर के चेहरे पर फैली वो डरी हुई बेबस मुस्कान एकदम से गायब हो गई। उसकी आंखों में अब एक अजीब सी ठंडक उतर आई थी। बर्फ जैसी भावनाओं से खाली सिर्फ मकसद से भरी
Speaker A
हुई। वो अंदर घुस चुका था। एक हफ्ते [संगीत] बाद कैंप चार रावलपिंडी। द लायंस डेन कैंप चार सिर्फ एक सैन्य अड्डा नहीं था। [संगीत] यह एक अभेद्य किला था। तीन परतों वाली सुरक्षा। हर कोने पर स्नाइपर टावर और हर गेट पर फिंगरप्रिंट ऑफ रेटिना
Speaker A
स्कैन। यहां घुसना असंभव था। और जो अंदर था वह बाहर निकलने के लिए नहीं बचने के लिए जीता था। [संगीत] लेकिन कबीर यानी अब्दुल वहां एक वफादार कुत्ते की तरह अपनी जगह बना चुका था। वह ब्रिगेडियर के अंडर
Speaker A
में लॉजिस्टिक के ट्रक चलाता था। राशन, हथियारों के कलपुरजे और सबसे जरूरी पानी। वह हर दिन इन सबको कैंप के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचाता और हर रास्ते के साथ, हर मोड़ के साथ। वह इस किले को अपने दिमाग में नक्शे की तरह उतारता जा रहा था।
Speaker A
कबीर हर दिन अपनी बेवकूफी का नाटक करता, जानबूझकर जूनियर अफसरों की गालियां सुनता। कभी उनके जूते तक पॉलिश कर देता। इतना झुकता कि लोग उसे देखना ही बंद कर देते और यही उसकी सबसे बड़ी जीत थी अदृश्य होना।
Speaker A
अब हालत यह थी कि अफसर उसके सामने खुफिया बातें करने लगे थे। उन्हें लगता था वह सिर्फ एक मामूली ड्राइवर है जो सुन तो सकता है लेकिन समझ नहीं सकता। अरे वो गेस्ट हाउस नंबर तीन में जो खास मेहमान है
Speaker A
उसके नखरे ही खत्म नहीं होते। एक सिपाही ने सिगरेट सुलगाते हुए कहा। कल रात उसे अस्थमा का अटैक आ गया था। आधी रात को डॉक्टर बुलाना पड़ा। दूसरा हंसते हुए बोला। पास ही अपनी पानी की बाल्टी साफ कर
Speaker A
रहे कबीर के हाथ अचानक रुक गए। उसके कान चौकन्ने हो गए। दिल की धड़कन एक पल के लिए धीमी। फिर तेज गेस्ट हाउस नंबर तीन। अस्थमा का अटैक। रात के ठीक 2:00 बजे। कैंप चार के बैरक में गहरी नींद पसरी हुई
Speaker A
थी। हर बिस्तर पर एक शरीर था और हर शरीर के भीतर थकान का बोझ। लेकिन एक बिस्तर ऐसा भी था जहां नींद [संगीत] नहीं थी। सिर्फ जागती हुई खामोशी थी। कबीर अपनी चारपाई पर सीधा लेटा हुआ था। आंखें बंद पर दिमाग
Speaker A
पूरी तरह खुला हुआ। अचानक उसकी आंखें खुली धीरे से बिना किसी आवाज के। उसके दिमाग में पूरा कैंप 4 एक 3 डी नक्शे की तरह घूम रहा था। हर गेट, हर दीवार, हर रास्ता और उस नक्शे के बिल्कुल बीच में था। गेस्ट
Speaker A
हाउस नंबर तीन। वह जगह जहां हर समय एसएसजी कमांडो तैनात रहते थे। जहां बिना अनुमति हवा भी अंदर नहीं जा सकती थी। जहां हर एंट्री पर मेटल डिटेक्टर, हर हरकत पर नजर और जहां कोई हथियार। यहां तक कि एक छोटा
Speaker A
सा चाकू भी ले जाना नामुमकिन था। [संगीत] लेकिन कबीर को जलालुद्दीन को मारना था और ऐसा मारना था कि वह मर्डर ना लगे। उसने छत की तरफ देखा जैसे किसी अदृश्य सवाल का जवाब खोज रहा हो। और तभी उसके दिमाग में
Speaker A
एक शब्द चमका अस्थमा। यही उसकी चाबी थी। कबीर ने धीरे से अपनी कलाई पर बंधी पुरानी कैसियों की घड़ी को खोला। वह घड़ी सिर्फ समय दिखाने के लिए नहीं थी। उसके पीछे छिपा था। मौत का एक बेहद खामोश तरीका।
Speaker A
घड़ी के पिछले ढक्कन के नीचे एक बेहद बारीक कांच की सुई छिपी थी। इतनी पतली कि त्वचा को छूकर भी निशान ना छोड़े। उस सुई में भरा था सक्सिनाइल कोलीन का एक मॉडिफाइड वर्जन। एक ऐसा नर्व एजेंट जो
Speaker A
शरीर में जाते ही बिना किसी शोर के दिल को रोक देता है। कार्डियक अरेस्ट और कुछ ही घंटों में खून में इस तरह घुल जाता है कि कोई भी आम पोस्टमार्टम उसे पकड़ नहीं सकता। ना झर का सबूत ना हत्या का निशान बस
Speaker A
एक नेचुरल डेथ। हथियार तैयार था। अब बाकी था उस किले के सबसे सुरक्षित कमरे तक पहुंचना। अगले दिन कबीर ने अपनी ड्यूटी खुद बदली और कैंप के मैन वाटर सप्लाई स्टेशन पर पहुंच गया। वह काम करता रहा लेकिन उसकी नजरें पाइपलाइन पर थी। वह देख
Speaker A
रहा था गेस्ट हाउस नंबर तीन तक पानी कैसे जाता है। कौन सा वॉल्व किस लाइन को क
Speaker A
उस पाइपलाइन तक पहुंचा। उसने गेस्ट हाउस नंबर तीन की मुख्य पानी की लाइन के वॉल्व में एक बेहद छोटा छेद किया और उसमें थोड़ी सी मिट्टी थोड़ी सी रेत भर दी। बस इतना कि पानी रुके भी और जो आए वो गंदा लगे। यह
Speaker A
कोई हमला नहीं था। यह एक निमंत्रण था। अगली सुबह वही हुआ जो कबीर चाहता था। गेस्ट हाउस के अंदर हड़कंप मच गया। चीख पुकार, भागदौड़ और गुस्से की आवाजें। वीआईपी मेहमान के बाथरूम में पानी नहीं आ रहा और जो आ रहा है वह गंदा है। अरे कोई
Speaker A
प्लंबर को बुलाओ। मेहमान खफा हो रहे हैं। एक सूबेदार चिल्लाया। कैंप का असली प्लंबर उस्मान अपना टूलबॉक्स लेकर तेजी से गेस्ट हाउस की तरफ भागा। लेकिन वह वहां तक कभी नहीं पहुंचा। रास्ते में स्टोर रूम के पास एक अंधेरे कोने में कोई उसका इंतजार कर
Speaker A
रहा था। कबीर जैसे ही उस्मान उस जगह से गुजरा कबीर ने बिना एक सेकंड गमवाए उसके मुंह पर क्लोरोफॉर्म से भीगा रुमाल दबा दिया। संघर्ष बस कुछ पल का था। 10 सेकंड और उस्मान बेहोश। कबीर ने उसे घसीट कर
Speaker A
स्टोर रूम के अंदर ले गया। एक खाली ड्रम में छिपा दिया और बिना भाव बदले उसकी नीली वर्दी पहन ली। उसने टूलबॉक्स उठाया। अपना सिर झुकाया [संगीत] और चल पड़ा। गेस्ट हाउस नंबर तीन की तरफ हर कदम अब मौत के
Speaker A
करीब ले जा रहा था। गेट पर एसएसजी कमांडो खड़े थे। चौकन्ने खामोश खतरनाक। किधर? एक ने रोका। जनाब सूबेदार साहब ने बुलाया है। अंदर पानी की लाइन चौक हो गई है। कबीर ने वहीं डरी हुई आवाज निकाली जो अब उसकी
Speaker A
पहचान बन चुकी थी। कमांडो ने उसे मेटल डिटक्टर से चेक किया। टूलबॉक्स खोला पेचकस पाना सब कुछ सामान्य ना कोई हथियार ना कोई बम बस एक मामूली प्लंबर कमांडो ने इशारा किया जा और 10 मिनट में काम खत्म करके
Speaker A
बाहर आजा कबीर ने सिर हिलाया और दरवाजा खोलकर अंदर दाखिल हुआ अंदर की हवा अलग थी भारी ठंडी और अजीब तरह से चुप ऐसी पूरी ताकत से चल रहा था और सामने एक सोफे पर लेटा हुआ था। जलालुद्दीन वही आतंकी जिसके
Speaker A
एक इशारे पर मुंबई और दिल्ली में लाशें बिछ गई थी। वह अपने अस्थमा के इन्हेलर का सहारा ले रहा था। हर सांस जैसे उधार की हो। [संगीत] कबीर ने बाथरूम की तरफ कदम बढ़ाए। लेकिन उसकी नजरें जलालुद्दीन पर
Speaker A
टिकी रही। अब वहां कोई संतरी नहीं था। कोई कमांडो नहीं था। सिर्फ दो लोग थे। एक जो खुद को बचा रहा था और दूसरा जो उसे खत्म करने आया था और इनके बीच कबीर की कलाई में बंधी वो खामोश मौत। कबीर ने अपना सिर और
Speaker A
झुका लिया। टूलबॉक्स को घसीटते हुए बाथरूम की तरफ बढ़ गया और बाहर खड़े एसएसजी कमांडो को कोई शक ना हो। इसलिए उसने जानबूझकर पाइप पर दो-तीन बार रिंच से खटखट की आवाज की। अंदर लेटे जलालुद्दीन को यह आवाज बर्दाश्त नहीं हुई। वह अस्थमा और
Speaker A
बीपी का मरीज था और उसका मिजाज पहले से ही बेहद चिड़चिड़ा हो चुका था। हर छोटी आवाज उसे चुभती थी और यह खटखटाहट उसके सिर में हथौड़े की तरह लग रही थी। ओए जाहिल आराम से काम नहीं कर सकता। मेरे सिर में दर्द
Speaker A
हो रहा है। जलालुद्दीन खांसते हुए गुस्से में चिल्लाया और उसी झुंझुलाहट में बाथरूम की तरफ बढ़ा। यही वह पल था जिसका कबीर इंतजार कर रहा था। कबीर ने बाथरूम का दरवाजा पहले से ही आधा खुला छोड़ रखा था।
Speaker A
एक जाल, एक निमंत्रण। जैसे ही जलालुद्दीन गुस्से में अंदर घुसा, कबीर ने एक झटके में दरवाजा बंद किया और अंदर से कुंडी चढ़ा दी। एक सेकंड का सन्नाटा। जलालुद्दीन की नजर धीरे-धीरे कबीर पर टिकी। पहले उसकी नीली प्लंबर की वर्दी पर फिर ऊपर उठती हुई
Speaker A
सीधी उसकी आंखों में जा अटकी और वहीं सब कुछ बदल गया। एक खूंखार आतंकी होने के नाते जलालुद्दीन ने मौत को कई बार करीब से देखा था। वह डर को पहचानता था और यह भी जानता था कि डर कैसा दिखता है। लेकिन कबीर
Speaker A
की आंखों में डर नहीं था। वहां एक अजीब सी शांति थी। ठंडी, स्थिर और घातक। वह एक आम प्लमबर की आंखें नहीं थी। वह एक ट्रेंड किलर की खामोशी थी। तू कौन? जलालुद्दीन के होठों से बस इतना ही निकला और उसी पल कबीर
Speaker A
टूट पड़ा। खामोश मौत का तांडव। बाहर कमांडो खड़े थे। इसीलिए गोली चलाने या कोई आवाज करने का सवाल ही नहीं था। यह एक साइलेंट हैंड टू हैंड कॉम्बैट था। बिना हथियार, बिना शोर, सिर्फ कौशल और इरादे की लड़ाई। जलालुद्दीन ने अपने बचाव में बेसिन
Speaker A
के पास रखा एक भारी कांच का गिलास उठाया। और पूरी ताकत से कबीर के सिर पर दे मारा। लेकिन कबीर तैयार था। उसने बिजली की फुर्ती से खुद को नीचे झुका लिया। गिलास दीवार से टकराने ही वाला था कि कबीर ने
Speaker A
अपना बाया हाथ बीच में अड़ा दिया। कांच उसके हाथ पर लगा। हल्का सा खून निकला पर आवाज बाहर नहीं गई। दर्द उसके लिए मायने नहीं रखता था। अगले ही पल कबीर का दाया हाथ जलालुद्दीन के गले पर पड़ा। एक सटीक
Speaker A
अचूक कराटे चौप जलालुद्दीन की सांसे लड़खड़ा गई लेकिन वह कमजोर नहीं था। भारीभरकम शरीर और बचने की बेताब कोशिश। उसने पूरी ताकत से कबीर को धक्का दिया और लड़खड़ाते हुए दरवाजे की कुंडी खोलने की कोशिश की। बस एक सेकंड और सब खत्म हो सकता
Speaker A
था। लेकिन कबीर ने उसे मौका नहीं दिया। वह पीछे से लपका। पास पड़ा तौलिया उठाया और बिजली की तेजी से जलालुद्दीन के गले में कसकर लपेट दिया। एक झटका और जलालुद्दीन पीछे की ओर खींच गया। अब उसकी सांसे बंद
Speaker A
होने लगी। उसका चेहरा लाल पड़ गया। आंखें बाहर आने लगी। पैर जमीन पर बेतहाशा रगड़ खा रहे थे। वह हवा के लिए तड़प रहा था। लेकिन कबीर की पकड़ लोहे के शिकंजे जैसी [संगीत] थी। कबीर जानता था जलालुद्दीन को अस्थमा
Speaker A
है और गले पर थोड़ा सा दबाव। उसके शरीर को जल्दी हार मानने पर मजबूर कर देगा। यही कमजोरी अब उसकी मौत बनने वाली थी और तभी कबीर ने अपनी बाई कलाई को हल्का सा घुमाया। संगीत उसकी पुरानी कैसियों घड़ी
Speaker A
का डायल चुपचाप खुला और उसके अंदर छिपी वह माइक्रो सुई धीरे से बाहर आ गई। सब कुछ सेकंडों में हुआ। कबीर ने जलालुद्दीन को अपनी तरफ खींचा और बिना एक पल गमवाए वह सुई सीधे उसकी गर्दन की नस में उतार दी।
Speaker A
यह उन बेगुनाहों की तरफ से है जिन्हें तूने मारा था। कबीर ने उसके कान के पास बेहद धीमी आवाज में फुसफुसाया। जहर अब अपना काम कर चुका था। सक्सिनाइल कोलीन का वह मॉडिफाइड जहर [संगीत] सेकंडों में खून में घुल गया। जलालुद्दीन का शरीर अचानक
Speaker A
अकड़ने लगा। मांसपेशियां सख्त, सांसे बंद, फेफड़े जैसे काम करना भूल गए हो। बाहर से देखने पर यह सब एक भयानक अस्थमा अटैक या हार्ट अटैक जैसा लगता। कोई शोर नहीं, कोई संघर्ष नहीं, बस एक धीमी मौत, 10 सेकंड और
Speaker A
सब खत्म। जलालुद्दीन की आंखें पत्थर आ गई। उसका शरीर ढीला पड़ गया। भारत का सबसे बड़ा दुश्मन अब एक बेजान लाश बन चुका था। कुछ पल के लिए बाथरूम में सिर्फ खामोशी थी। गहरी, भारी और सुकून देने वाली। कबीर
Speaker A
ने एक लंबी सांस ली। मिशन पूरा हो चुका था। [संगीत] लेकिन असली खेल अब शुरू होने वाला था। दिमागी चाल और वापसी। उसने तुरंत जलालुद्दीन की लाश को घसीट कर कमोड के पास रखा। हर हरकत में सटीकता थी। कोई जल्दबाजी
Speaker A
नहीं, कोई घबराहट नहीं। जैसे यह सब पहले से कई बार उसके दिमाग में हो चुका हो। तौलिया जो अभी कुछ पल पहले मौत का फंदा बना था। अब वापस अपनी जगह स्टैंड पर ऐसे टंगा था जैसे कभी छुआ ही ना गया हो। कबीर
Speaker A
ने झुककर जलालुद्दीन का अस्थमा इनेलर उठाया और बहुत सोच समझ कर उसे उसकी लाश के हाथ के पास गिरा दिया। एक छोटा सा दृश्य जो पूरी कहानी बदल सकता था। अब जो भी इसे देखेगा उसे यही लगेगा अटैक पड़ा। उसने दवा
Speaker A
लेने की कोशिश की और उसी कोशिश में गिरकर खत्म हो गया। कबीर ने अपने हाथ पर गिरे खून की दो छोटी बूंदों को देखा। एक पल के लिए रुका। फिर पानी से उन्हें पूरी तरह धो दिया। कोई निशान नहीं। कोई सबूत नहीं। बस
Speaker A
एक साफ सुथरी मौत। उसने गहरी सांस ली। दरवाजे की कुंडी खोली। टूलबॉक्स उठाया और वहीं झुका हुआ सिर। वहीं डरी हुई चाल। वह फिर से अब्दुल बन चुका था। जैसे ही वह बाहर निकला। एसएसजी कमांडो ने मुड़कर उसे
Speaker A
देखा। हो गया काम। जी जनाब वाल्व में कचरा था निकाल दिया। मेहमान अभी बाथरूम में है। कबीर ने अपनी आवाज में वही पुराना डर घोलते हुए जवाब दिया। कमांडो ने बिना शक किए हाथ से इशारा किया। जा [संगीत] बस
Speaker A
इतना ही। कबीर ने गेट पार किया। हर कदम अब आजादी की तरफ था। लेकिन उसकी चाल में कोई बदलाव नहीं था। वह ना तेज चला ना पीछे मुड़ा। जैसे कुछ हुआ ही ना हो। स्टोर रूम पहुंचते ही वह अचानक बदल गया। 30 सेकंड।
Speaker A
बस इतने में प्लंबर की नीली वर्दी उतरी। बेहोश उस्मान को बाहर निकाला और कबीर ने फिर से अपने मैले कपड़े पहन लिए। अब्दुल वापस जिंदा था। वह तेजी से अपने पानी के टैंकर तक पहुंचा। इंजन स्टार्ट किया। घड़ी
Speaker A
देखी। जहर अपना काम शुरू कर चुका था। 3 मिनट। बस कुछ ही पलों में अंदर तूफान उठने वाला था। कबीर ने टैंकर को धीरे-धीरे कैंप फोर के मुख्य गेट की तरफ बढ़ाया। हर सेकंड अब भारी था। हर नजर शक बन सकती थी।
Speaker A
[संगीत] गेट पर संतरी ने उसे रोका। खाली हो गया टैंकर। हां जनाब। [संगीत] ब्रिगेडियर साहब ने शाम को दोबारा भेजने को कहा है। कबीर ने हल्की मुस्कान के साथ जवाब दिया। संतरी ने एक पल उसे देखा। फिर बैरियर उठा दिया और उसी पल कबीर मौत के
Speaker A
किले से बाहर निकल गया। टैंकर जैसे ही हाईवे पर पहुंचा, उसने रियर व्यू मिरर में देखा। कैंप फोर के अंदर अचानक सायरन गूंज उठे थे। चीखें, भागदौड़, एंबुलेंस, गाड़ियां, सब कुछ एक साथ। जलालुद्दीन की लाश मिल चुकी थी। पाकिस्तानी सेना में
Speaker A
हड़कंप मच गया था। लेकिन उनकी सोच वहीं अटक गई थी। हार्ट अटैक उनके लिए यह बस एक मेडिकल इमरजेंसी थी। किसी के दिमाग में यह ख्याल तक नहीं आया कि कातिल वहीं था जो अभी-अभी उनके गेट से निकलकर हवा में घुल
Speaker A
चुका था। अगले दिन पाकिस्तान के अखबारों में एक छोटी सी खबर छपी। रावलपिंडी में एक अज्ञात बुजुर्ग के दिल का दौरा पड़ने से मौत। बस इतनी सी बात। दुनिया के लिए यह एक साधारण खबर थी। लेकिन दिल्ली के साउथ
Speaker A
ब्लॉक में रॉ के हेड क्वार्टर में एक अलग ही खामोशी थी। एक संतोष जो शब्दों से नहीं सिर्फ एहसास से समझ आता है। रॉ चीफ की टेबल पर एक इंक्रिप्टेड मैसेज फ्लैश हुआ। द ग्लास इज एम्प्टी। कुछ सेकंड तक वह
Speaker A
स्क्रीन को देखते रहे। फिर उनके चेहरे पर एक धीमी संतुष्ट मुस्कान उभर आई। दोस्तों, अगर वीडियो पसंद आया हो तो लाइक करें और चैनल को सब्सक्राइब जरूर करें। ऐसी ही वीडियो आगे भी आती रहेंगी। जय हिंद।
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