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Kaise 3 Pakistani Bharat Mein Ghus Gaye? | BSF Border Operation | 2D Animation

नवंबर 2003 में राजस्थान-पंजाब सीमा पर तीन पाकिस्तानी घुसपैठियों की भारत में घुसपैठ और बीएसएफ की कार्रवाई की कहानी।

Key Takeaways

  • पाकिस्तानी घुसपैठिए भारत में गहरे नेटवर्क स्थापित करने की योजना बना रहे थे।
  • भारतीय सुरक्षा एजेंसियां संदिग्ध हलचल को नोटिस कर रही थीं लेकिन पूरी जानकारी नहीं थी।
  • घुसपैठियों की पकड़ और नेटवर्क की पहचान भारत की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण थी।
  • सलीम कुरैशी जैसे लोग दोनों देशों के बीच खुफिया और हथियारों के आदान-प्रदान में भूमिका निभाते हैं।
  • सटीक और सतर्क खुफिया रिपोर्ट सुरक्षा में अहम भूमिका निभाती है।

What the video covers

  • नवंबर 2003 की रात राजस्थान-पंजाब सीमा पर तीन पाकिस्तानी घुसपैठिए भारत में घुसने की योजना बनाते हैं।
  • तीनों के पास नकली पहचान पत्र, भारतीय सिम कार्ड और एक माइक्रोचिप थी जिसमें छह शहरों के नाम और एक तारीख थी।
  • उनका मकसद भारत के अंदर एक सोया हुआ नेटवर्क सक्रिय करना था जो बड़े शहरों में फैला हुआ था।
  • बीएसएफ जवान सुरेंद्र सिंह नाइट विजन डिवाइस से संदिग्ध हलचल को नोटिस करते हैं लेकिन पुष्टि नहीं होती।
  • तीनों घुसपैठिए अलग-अलग शहरों दिल्ली, जयपुर और लखनऊ में जाकर नेटवर्क स्थापित करने की कोशिश करते हैं।
  • इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारी अर्जुन राठौड़ संदिग्ध रिपोर्टों पर नजर रखते हैं और घुसपैठ की संभावना समझते हैं।
  • घुसपैठियों में से इमरान की पहली और आखिरी गलती भारत में पकड़ाए जाने की वजह बनती है।
  • सलीम कुरैशी (कालाबाज) नामक व्यक्ति भारत में नेटवर्क का पुल था जो दोनों देशों के बीच खुफिया जानकारी और हथियारों का आदान-प्रदान करता था।
  • घुसपैठ की जांच के दौरान माइक्रोचिप से भारत के कई शहरों में छिपे संपर्कों के नाम और पते सामने आते हैं।
  • यह कहानी भारत-पाक सीमा पर चल रहे खुफिया और सुरक्षा संघर्ष की एक गहन झलक प्रस्तुत करती है।

Answers

Questions about this video

घुसपैठियों का मुख्य उद्देश्य क्या था?

उनका उद्देश्य भारत के अंदर एक सोया हुआ नेटवर्क सक्रिय करना था जो बड़े शहरों में फैला हुआ था, जिससे खुफिया और हथियारों का आदान-प्रदान संभव हो सके।

बीएसएफ ने घुसपैठियों को कैसे पहचाना?

बीएसएफ जवान सुरेंद्र सिंह ने नाइट विजन डिवाइस से रेगिस्तान में संदिग्ध हलचल देखी, जिससे उन्हें शक हुआ और बाद में निशान मिलने से पुष्टि हुई।

सलीम कुरैशी की भूमिका क्या थी?

सलीम कुरैशी, जिसे कालाबाज कहा जाता था, भारत में एक व्यापारी के रूप में छुपा हुआ था और दोनों देशों के बीच खुफिया जानकारी, लोग और हथियारों के आदान-प्रदान का पुल था।

Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:00
Speaker A
रात के 2:00 बजे थे। राजस्थान [संगीत] की सीमा पर रेत में तीन लोग रेंग रहे थे। उनके बैग में एक छोटी सी चिप थी। उस चिप में थे छह शहर, छह नाम और एक तारीख। वो लोग जो सालों से हमारे बीच रह रहे थे। चाय
00:15
Speaker A
बेचते हुए, किताबें बेचते हुए, बस एक इशारे का इंतजार करते हुए। वो इशारा 22 [संगीत] दिन दूर था। उस इशारे के बाद तीन शहरों में एक साथ बिजली [संगीत] जाती। फोन बंद होते, पूरा देश अंधेरे में डूब जाता।
00:29
Speaker A
लेकिन उसी रात दिल्ली में एक [संगीत] आदमी एक छोटी सी रिपोर्ट पढ़ रहा था जिसे सब लोग फाइल में दबा देते हैं। अर्जुन राठौड़ ने नहीं दबाई और लखनऊ में एक 22 [संगीत] साल का लड़का अपनी पहली और आखिरी गलती की
00:42
Speaker A
तरफ बढ़ रहा था। तीन घुस बैठिए एक अधिकारी [संगीत] एक लड़का। अगले 22 दिन में से कुछ लोग बचेंगे। कुछ नहीं और भारत को आज तक नहीं पता। उस रात उसके साथ [संगीत] क्या होने वाला था। यह कहानी उस रात की है।
00:57
Speaker A
नवंबर 2003 राजस्थान और पंजाब की सीमा के बीच फैला वह रेगिस्तान रात [संगीत] के 2:00 बजे पूरी तरह मुर्दा पड़ा था। हवा नहीं चल रही थी। कोई आवाज नहीं थी। रेत भी जैसे सांस रोक कर बैठी हो। आसमान में बादल
01:12
Speaker A
थे। चांद बार-बार उनके पीछे छिप रहा था। जैसे वह भी उस रात कुछ देखना नहीं चाहता था। सीमा के उस पार पाकिस्तान [संगीत] की तरफ दूर कहीं हल्की-हल्की रोशनी थी। एक दो बत्तियां। शायद किसी चौकी की शायद किसी
01:26
Speaker A
गांव की। लेकिन भारतीय सीमा के [संगीत] इस हिस्से में सब कुछ खाली था। एकदम खाली। दूर एक बीएसएफ चौकी पर जवान अलाव के पास बैठे थे। ठंड इतनी थी कि सांस लेने पर मुंह से धुआं निकल रहा था। वायरलेस
01:40
Speaker A
[संगीत] पर रुक-रुक कर कुछ आवाजें आ रही थी। रात का नियमित अपडेट। सब ठीक है। कोई हलचल नहीं लेकिन सब ठीक नहीं था। उसी समय सीमा से करीब 2 कि.मी. दूर पाकिस्तानी इलाके में रेत पर तीन परछाइयां झुकी हुई
01:55
Speaker A
थी। [संगीत] काले कपड़े, चेहरे ढके हुए, हाथों में छोटे बैग और आंखों में वह खालीपन जो तब आता है [संगीत] जब इंसान खुद को मशीन बना चुका हो। तीनों कई घंटों से उस पल का इंतजार कर रहे थे। उनके साथ
02:09
Speaker A
[संगीत] चौथा आदमी था हाशिम। उसने धीमी आवाज में तीनों को आखिरी निर्देश दिए। आवाज में कोई भावना नहीं थी जैसे वह [संगीत] किसी को काम पर नहीं मौत की तरफ भेज रहा हो और उसे इसकी आदत पड़ [संगीत]
02:22
Speaker A
चुकी हो। उसने कहा आज रात अगर पार निकल गए तो आगे का रास्ता आसान होगा। [संगीत] लेकिन अगर पकड़े गए तो हम में से कोई तुम्हें नहीं पहचानेगा। समझे? तीनों ने बिना कुछ कहे सिर हिला दिया। पहला था
02:35
Speaker A
फरीद। [संगीत] उम्र 38। चेहरे पर झुर्रियां नहीं थी। लेकिन आंखों में वह गहराई थी जो सिर्फ [संगीत] उन लोगों में होती है जिन्होंने बहुत कुछ किया हो जो याद रखना ठीक नहीं। अफगान सीमा के इलाके, पहाड़ों के रास्ते,
02:50
Speaker A
[संगीत] नक्शे उसकी भाषा थे। वह इस दल का अगवा था। दूसरा था नदीम। छोटे-छोटे यंत्रों से वह ऐसा [संगीत] जाल बुन सकता था जो दिखाई ना दे। इस पूरे मिशन की रीड तीसरा था इमरान 22 साल। पहला बड़ा मिशन।
03:06
Speaker A
उसने खुद को शान दिखाने की कोशिश की थी। लेकिन उसकी उंगलियां लगातार बैग की पट्टी मरोड़ रही थी। उनके बैगों में हथियार कम [संगीत] थे। लेकिन जो था वह हथियारों से ज्यादा खतरनाक था। नकली पहचान पत्र, भारतीय कपड़े, भारतीय सिम कार्ड, [संगीत]
03:23
Speaker A
कोडेड दस्तावेज और एक छोटी सी माइक्रोचिप जिसके बारे में तीनों में से सिर्फ फरीद को [संगीत] पूरी जानकारी थी। उनका मकसद सिर्फ सीमा पार करना नहीं था। उन्हें भारत के अंदर एक नेटवर्क जगाना था। एक ऐसा नेटवर्क जो सालों से सोया पड़ा था जो भारत
03:40
Speaker A
के बड़े शहरों [संगीत] में फैला हुआ था और जिसके बारे में भारतीय एजेंसियों को अब तक कुछ नहीं [संगीत] पता था। रात के ठीक 2:13 पर हाशिम ने कहा अब और तीनों रेंगते हुए आगे बढ़ने लगे। बीएसएफ जवान सुरेंद्र सिंह
03:54
Speaker A
[संगीत] नाइट विज़न डिवाइस से रेगिस्तान को स्कैन कर रहा था। दूर कहीं एक हलचल बहुत हल्की इतनी धीमी कि शायद लगे हवा है। उसने डिवाइस उस तरफ टिकाया। अगले ही पल सब शांत। साथी ने देखा कुछ नहीं। शायद कोई
04:10
Speaker A
जानवर था। फाइल में एक छोटी एंट्री हुई। संदिग्ध हलचल [संगीत] पक्का नहीं और दोनों आगे बढ़ गए। उधर रेत पर गांठेदार तारों के करीब फरीद पिछले कई मिनटों से बिल्कुल नहीं हिला था। उसने वायरलेस की आवाज सुनी थी। उसे पता था किसी ने देखा है लेकिन यह
04:27
Speaker A
भी पता था कि देखा नहीं गया। कुछ देर बाद उसने इशारा किया। तारों तक [संगीत] पहुंचने में 3 मिनट लगे। वहां पहले से एक जगह काटी गई थी। रेत से ढकी हुई। किसी ने पहले से यह काम किया था। फरीद ने धीरे से
04:41
Speaker A
रेत हटाई। तार को एक तरफ [संगीत] किया। एक-एक करके तीनों अंदर घुस गए। भारत की सीमा में। सीमा पार करने के बाद 1 घंटे तक [संगीत] तीनों बिना रुके चलते रहे। कोई सड़क नहीं, कोई रोशनी नहीं। सिर्फ रेत और
04:57
Speaker A
तीनों के कदमों की आवाज जो रेत सोख लेती थी। [संगीत] फरीद के पास एक नक्शा था। किसी ने उसे बहुत मेहनत से बनाया था। बहुत पहले अगला पड़ाव था एक आदमी से मिलना। कोड नाम कालाबाज। वही इस पूरे मिशन [संगीत] की
05:11
Speaker A
चाबी था। उसी समय दिल्ली में। रात के 3:00 बज रहे थे। लेकिन इंटेलिजेंस [संगीत] ब्यूरो के उस दफ्तर में रोशनी थी। अर्जुन राठौड़ मेज पर झुका हुआ फाइलें पड़ रहा था। पिछले कुछ महीनों से एक ही तरह [संगीत] की रिपोर्टें आ रही थी। सीमा पार
05:26
Speaker A
से कुछ होने वाला है। कोई आने वाला है। कोई बड़ा कोई तैयार लेकिन कोई ठोस जानकारी नहीं। ना तारीख [संगीत] ना जगह ना नाम। सिर्फ एक धुंधली सी आहट। अर्जुन ने फाइल बंद की। खिड़की के बाहर देखा। दिल्ली सो रही थी। उसे नींद नहीं
05:43
Speaker A
आई। सुबह होने में अभी 2 घंटे बाकी थे। रेगिस्तान की [संगीत] रात में ठंड इतनी थी कि सांस लेने पर सीने में जलन होती थी। लेकिन तीनों चलते रहे। रुकना उनके लिए मौत के बराबर था। [संगीत] फरीद आगे था। नदीम
05:57
Speaker A
बीच में इमरान सबसे पीछे। इमरान के कदम कभी-कभी लड़खड़ाते थे। [संगीत] वह थका हुआ था। लेकिन उससे ज्यादा वह डरा हुआ था। फरीद ने बिना [संगीत] पीछे देखे धीमी आवाज में कहा। कदम मिलाकर चलो। रेत पर अलग-अलग निशान नहीं पड़ने चाहिए। नदीम चुप था।
06:14
Speaker A
उसकी आंखें [संगीत] लगातार चारों तरफ घूमती रहती थी। हर आवाज पर, हर परछाई पर। करीब 1 घंटे की पैदल चाल के बाद फरीद रुक गया। सामने एक पुरानी ढाणी थी। टूटी हुई दीवारें, बंद दरवाजे, [संगीत] बाहर से बिल्कुल वीरान लेकिन एक तरफ एक
06:31
Speaker A
पुरानी जीप खड़ी थी। जीप के अंदर [संगीत] एक आदमी बैठा था। सफेद कुर्ता, सिर पर गमछा। उसने उनकी तरफ देखा भी नहीं। बस इतना कहा, जल्दी बैठो। जीप कच्चे रास्ते पर आगे बढ़ने लगी। अंधेरे में बिना हेडलाइट के वह आदमी था कालाबाज।
06:48
Speaker A
असली नाम सलीम कुरैशी। [संगीत] उम्र 50 के करीब। चेहरे पर वह चालाकी थी जो उन लोगों में होती है जो दो नामों पर [संगीत] सवार होकर जिंदगी गुजारते हैं। जवानी में तस्करी से शुरुआत की। छोटी चीजें कपड़े मसाले दवाइयां [संगीत]
07:05
Speaker A
फिर धीरे-धीरे संपर्क बड़े होते गए। एक दिन किसी ने पैसे [संगीत] का लालच दिया। बड़े पैसे और सलीम कुरैशी कालाबाज बन गया। भारत में वह एक व्यापारी था। लेकिन असल में वह एक पुल था जिसके ऊपर से दोनों तरफ
07:19
Speaker A
की खुफिया जानकारी लोग और हथियार गुजरते थे। जीप में [संगीत] सलीम ने तीनों की तरफ देखा। फरीद से पूछा कोई दिक्कत तो नहीं हुई रास्ते में? फरीद ने जवाब दिया। एक बार चौकी पर नजर पड़ी [संगीत] लेकिन रुके
07:33
Speaker A
रहे। वे समझे नहीं। सलीम ने सिर हिलाया। अच्छा किया। फिर उसने योजना बताई। अगले दो दिन तीनों [संगीत] को अलग-अलग जगहों पर रुकना था। फरीद को दिल्ली, नदीम को जयपुर और इमरान को लखनऊ। सलीम ने जीप रोकी। तीन
07:47
Speaker A
अलग-अलग रास्ते थे। [संगीत] उसने धीमी आवाज में कहा, "याद रखो भारत में गलती की कोई माफी नहीं है। तीनों उतर गए [संगीत] और तीन अलग-अलग दिशाओं में चले गए। दिल्ली, उसी सुबह। इंटेलिजेंस ब्यूरो के दफ्तर में अर्जुन राठौड़ की मेज पर
08:03
Speaker A
[संगीत] एक नई रिपोर्ट आई। राजस्थान सीमा की एक चौकी से सूचना। संदिग्ध हलचल, पुष्टि नहीं हुई। सामान्य दिनों में यह रिपोर्ट किसी फाइल में दब [संगीत] जाती, लेकिन अर्जुन की नजर उस पर अटक गई। उसने राजस्थान यूनिट [संगीत] से एक ही सवाल
08:19
Speaker A
पूछा। उस इलाके में उस रात कुछ और था। जब जवाब आया तो अर्जुन की आंखें सिकुड़ गई। सीमा [संगीत] के पास रेत पर निशान मिले थे। बहुत हल्के जैसे जानबूझकर मिटाए गए हो। अर्जुन उठ खड़ा [संगीत] हुआ। कोई सीमा
08:34
Speaker A
पार कर चुका है और वह प्रशिक्षित है। जयपुर नदीम शहर के बाहरी इलाके में एक पुराने मकान में था। बाहर से पूरी तरह बंद खिड़कियों पर मोटे पर्दे [संगीत] लेकिन अंदर एक कमरा अस्थाई कंट्रोल रूम बन चुका था। वह एक एंक्रिप्टेड डिवाइस पर काम कर
08:51
Speaker A
रहा था। कई बार कोशिश की। कई बार [संगीत] संकेत टूटा। फिर डिवाइस पर हल्की सी बीप हुई। स्क्रीन पर दो शब्द उभरे। कबूतर सुरक्षित। नदीम ने तुरंत लिखा। अगला पड़ाव जवाब आया। लखनऊ पहुंच रहा हूं। नदीम ने डिवाइस बंद किया। स्क्रीन काली हो गई।
09:08
Speaker A
उसने सोचा पहला दिन ठीक रहा। वह नहीं जानता [संगीत] था कि यह उसकी आखिरी शांत रात होने वाली थी। लखनऊ पुराना शहर। इमरान स्टेशन से निकला तो [संगीत] उसने गहरी सांस ली। गलियां पुरानी थी। हवा में मसालों की, गुलाब की और वक्त की बू थी। वह
09:26
Speaker A
सीधे पुराने शहर की तरफ गया। एक तंग गली [संगीत] में एक छोटी चाय की दुकान। इमरान वहां बैठ गया। चाय आई। उसने पहला घूंट लिया। फिर धीमी आवाज में एक शब्द कहा। बरसात। [संगीत] बूढ़े दुकानदार ने उसे ऊपर
09:40
Speaker A
से नीचे तक देखा। फिर बोला, लेकिन मौसम तो साफ है। यह [संगीत] पहचान का कोट था। पीछे के कमरे में दो आदमी पहले से बैठे थे। एक ने पूछा।
09:54
Speaker A
रहा है? इमरान चुप रहा। लेकिन उसकी उंगलियां बैग की पट्टी मरोड़ने लगी थी। दिल्ली अर्जुन की [संगीत] टीम ने पिछले 24 घंटों का डाटा खंगाला। हजारों यात्री, हजारों नाम कुछ खास नहीं मिला। लेकिन एक चीज मिली [संगीत] जो अर्जुन के दिमाग में
10:11
Speaker A
अटक गई। तीन अलग-अलग शहरों में तीन नकली पहचान पत्र। होटल चेकिंग के दौरान अलग-अलग नाम, अलग-अलग पथे, लेकिन तीनों की प्रिंटिंग की [संगीत] बनावट एक जैसी। अर्जुन ने फाइल बंद की और बोला, "यह साधारण घुसपैठिए नहीं है। यह लोग पहले से
10:27
Speaker A
तैयार नेटवर्क के साथ आए हैं। उसने जयपुर और लखनऊ की यूनिट को सतर्क किया। और एक बात, किसी को अभी [संगीत] गिरफ्तार नहीं करना। मुझे पूरा नेटवर्क चाहिए। एक-एक धागा। पुरानी दिल्ली। फरीद उस शाम भीड़ में घुलमिल गया था। तंग गलियां। दोनों तरफ
10:45
Speaker A
दुकानें और उस भीड़ में खुद को छिपाना सबसे आसान था। रात को दुकानें बंद होने के बाद वह एक किताबों की दुकान के पास पहुंचा। बाहर से बंद लेकिन शटर के नीचे हल्की रोशनी। फरीद ने दरवाजे पर दो बार
10:59
Speaker A
धीरे से दस्तक दी। रुका फिर एक बार शटर आधा उठा। दुकानदार यूसुफ का चेहरा दिखा। उसने बिना कुछ कहे फरीद को अंदर खींच लिया। [संगीत] यूसुफ बाहर से एक साधारण किताबों का व्यापारी था। लेकिन दुकान के पीछे का कमरा किसी और काम के लिए था। वह
11:17
Speaker A
उस नेटवर्क की एक कड़ी था जो [संगीत] भारत के कई शहरों में फैली हुई थी। पीछे के कमरे में एक पुराना पंखा था। लकड़ी [संगीत] की मेज और दीवार पर भारत का नक्शा नक्शे पर लाल निशान दिल्ली [संगीत] जयपुर
11:30
Speaker A
लखनऊ। फरीद ने पूछा बाकी दोनों पहुंचे। यूसुफ ने कहा नदीम जयपुर [संगीत] पहुंच चुका है। इमरान से अभी संपर्क नहीं हुआ। फरीद का चेहरा गंभीर [संगीत] हो गया। फरीद ने बैग से एक छोटा धातु का डिब्बा निकाला। उसमें माइक्रोचिप और मुड़े [संगीत] हुए
11:46
Speaker A
नक्शे थे। यूसुफ ने डिब्बा लेकर किताबों की एक मोटी जिल्द के पीछे छिपा दिया। उसी समय बाहर से पुलिस गाड़ी का सायरन सुनाई दिया। दोनों की सांसे [संगीत] एक पल के लिए रुक गई। आवाज करीब आई। करीब और करीब।
12:01
Speaker A
फिर आगे निकल गई। यूसुफ ने लंबी सांस ली। फरीद ने कहा अब ज्यादा देर यहां नहीं रुकना। लेकिन उसी रात अर्जुन को एक और सुराग [संगीत] मिला। एक खबरी से सूचना आई। पुरानी दिल्ली में देर रात एक बंद दुकान
12:15
Speaker A
में रोशनी थी और एक अजनबी अंदर गया था। अर्जुन ने स्थानीय टीम को आदेश दिया दुकान पर नजर रखो लेकिन अभी कुछ मत करो। उस रात सादी वर्दी में दो एजेंट सामने चाय [संगीत] की दुकान पर बैठ गए। एक टीम छत पर
12:30
Speaker A
चली गई दूरबीन के साथ और एक गाड़ी गली के मोड़ [संगीत] पर खड़ी हो गई। किताबों की दुकान चारों तरफ से घिर चुकी थी और अंदर बैठे फरीद और यूसुफ को इसकी जरा भी खबर नहीं थी। लखनऊ में उस रात इमरान को नींद
12:44
Speaker A
नहीं आई। वह छत [संगीत] की तरफ देखता रहा। जब ट्रेनिंग ली थी तो सब कुछ साफ लगता था। दुश्मन, दोस्त, मकसद। लेकिन अब जब वह भारत की जमीन पर था, जब वह [संगीत] उन पुरानी गलियों में था जहां लोग सामान्य जिंदगी जी
13:00
Speaker A
रहे थे, तब कुछ भी साफ नहीं था। उसने आंखें बंद की, लेकिन नींद नहीं [संगीत] आई। अगली सुबह अर्जुन की टीम ने रात भर निगरानी [संगीत] की थी। सुबह होते-होते पता चला कि दुकान के अंदर दो लोग अभी भी थे और अब वे बाहर
13:16
Speaker A
निकलने [संगीत] की तैयारी कर रहे थे। अर्जुन ने कहा किसी को निकलने मत देना लेकिन पहले थोड़ा बाहर आने दो। मुझे देखना है कि [संगीत] वे कहां जाते हैं। कौन उनका इंतजार कर रहा है। दुकान का शटर धीरे से
13:29
Speaker A
उठा। पुरानी दिल्ली की वह सुबह धुंध में लिपटी हुई थी। [संगीत] गलियों में अभी पूरी तरह रोशनी नहीं आई थी। दूर कहीं अजान की आवाज गूंज [संगीत] रही थी। एक दो दुकानदार अपनी दुकानें खोल रहे थे। सड़क पर एक साइकिल वाला [संगीत] धीरे-धीरे
13:44
Speaker A
गुजरा। सब कुछ बिल्कुल सामान्य लग रहा था। लेकिन था नहीं। चाय की दुकान पर बैठे दो आदमी अखबार पढ़ रहे थे। लेकिन उनकी नजरें अखबार पर नहीं थी। सामने की इमारत की छत पर एक आदमी [संगीत] पाइप ठीक करने का नाटक
13:59
Speaker A
कर रहा था। लेकिन उसके हाथ में दूरबीन थी, और गली के मोड़ पर एक ऑटो खड़ी थी। जिसके अंदर तीन लोग बैठे थे जो कहीं जाने का इंतजार नहीं कर रहे थे। किताबों की दुकान चारों तरफ से घिरी हुई थी और अंदर फरीद को
14:13
Speaker A
यह नहीं पता था। फरीद ने शटर आधा उठाया और बाहर [संगीत] झांका। सुबह की धुंध, खाली सड़क, सामान्य लोग। उसकी नजर एक पल के लिए चाय [संगीत] की दुकान पर रुकी। दो आदमी, अखबार, उसने नजर हटाई, फिर वापस टिकाई।
14:29
Speaker A
वर्षों की ट्रेनिंग थी उसके पास और ट्रेनिंग ने उसे एक बात सिखाई थी। जब कोई बहुत सामान्य [संगीत] दिखने की कोशिश करे तो वह सामान्य नहीं होता। उस आदमी ने अखबार का पन्ना पलटा लेकिन उसकी नजर पन्ने पर नहीं गई। फरीद के पेट में कुछ कसा।
14:45
Speaker A
उसने बिना कोई भाव दिखाए शटर वापस गिरा दिया। [संगीत] अंदर आया। यूसुफ की तरफ देखा। धीमी आवाज में कहा। हम गिरे हुए हैं। यूसुफ का चेहरा सफेद पड़ गया। क्या?
14:57
Speaker A
फरीद ने कहा। बाहर निगरानी है। कम से कम तीन जगहों पर। यूसुफ की आंखें इधर-उधर भागने लगी। उसके हाथ कांपने लगे। अब क्या होगा? फरीद ने एक पल [संगीत] सोचा। फिर बोला, "मैं बाहर निकलता हूं। तुम अंदर रहो। माइक्रो चिप किसी को नहीं मिलनी
15:14
Speaker A
चाहिए।" यूसुफ ने कहा, लेकिन अगर तुम पकड़े गए तो फरीद ने उसे बीच में रोका। तो पकड़े गए। लेकिन वह चिप उनके हाथ नहीं लगनी चाहिए। उसने जेब से पिस्तौल [संगीत] निकाली, जांची और शटर उठाकर बाहर निकल गया। वायरलेस पर आवाज आई।
15:29
Speaker A
[संगीत] टारगेट बाहर आया अकेला। अर्जुन ने तुरंत कहा उसे जाने दो। देखते हैं [संगीत] कहां जाता है। लेकिन फरीद ने कोई गलती नहीं की। वह सीधे गली में घुस गया और तभी उसकी [संगीत] नजर छत पर उस आदमी पर पड़ी जिसके
15:44
Speaker A
हाथ में दूरबीन थी। 1 सेकंड। बस एक सेकंड में सब कुछ तय हो गया। फरीद भागा। पुरानी दिल्ली की तंग गलियां उसके लिए अजानी थी। लेकिन उसने [संगीत] बचपन से सीखा था कि भागते वक्त सोचो मत। बस भागो। वह पहली गली
16:00
Speaker A
में घुसा। दाई तरफ [संगीत] मुड़ा, बाई तरफ, फिर दाई तरफ। पीछे एजेंटों के कदमों की आवाज थी। रुको की आवाज थी। लेकिन वह नहीं रुका। उसने दौड़ते-दौड़ते पीछे बिना देखे गोली चलाई। गोली दीवार से टकराई। चिंगारी उठी। जवाब में पुलिस ने भी
16:17
Speaker A
[संगीत] फायर किया। पूरी गली गोलियों की आवाज से गूंज उठी। खिड़कियां बंद हुई। दुकानदार अंदर घुस गए। एक बच्चा जो सुबह की रोटी लेने निकला था, वह रोते हुए वापस भागा। अर्जुन कंट्रोल गाड़ी में था। वायरलेस पर [संगीत] लगातार अपडेट आ रहे
16:32
Speaker A
थे। टारगेट जामा मस्जिद वाली गली की तरफ बढ़ रहा है। टारगेट ने दोबारा फायर किया। एजेंट दो घायल। मामूली चोट। अर्जुन ने शांत आवाज में कहा, जिंदा चाहिए। यह आदमी पूरे नेटवर्क की चाबी है। फरीद एक मोड़ से
16:48
Speaker A
गुजरा और अचानक रुक गया। सामने गली बंद थी। पुरानी दीवार, ऊंचाई 10 फुट। पीछे एजेंटों के कदम करीब आ रहे थे। उसने एक सेकंड सोचा। फिर दीवार के पास की सीढ़ियों की तरफ भागा, [संगीत] ऊपर चढ़ा और छत पर
17:02
Speaker A
पहुंच गया। पुरानी दिल्ली की छतें आपस [संगीत] में जुड़ी हुई थी। एक बड़ा समतल मैदान। बीच-बीच में पानी की [संगीत] टंकियां, कपड़े सुखाने के तार और ऊंचीनीची दीवारें। फरीद एक छत से दूसरी छत पर कूदने लगा। पीछे दो कमांडो उसी रास्ते पर थे।
17:19
Speaker A
नीचे सड़क पर लोग आसमान की तरफ देख रहे थे। गोलियों की आवाज सुनकर कुछ समझ नहीं आ रहा था कि हो क्या रहा है। फरीद की सांसे [संगीत] तेज हो रही थी लेकिन उसके कदम नहीं थके। तभी एक पुरानी छत पर उसका पैर
17:32
Speaker A
एक ढीली ईंट पर पड़ा। ईंट खिसकी। फरीद का संतुलन [संगीत] बिगड़ा। वह लड़खड़ाया। एक पल के लिए लगा कि नीचे गिरेगा। लेकिन उसने पास [संगीत] की पानी की टंकी पकड़ ली। उसी पल पीछे से आवाज आई। हथियार नीचे फेंको।
17:46
Speaker A
फरीद ने मुड़कर [संगीत] गोली चलाई। गोली कमांडो के कंधे को छूते हुए निकली। जवाबी फायर हुआ। एक गोली फरीद के पैर में लगी। वह छत [संगीत] पर गिरा। दर्द से करा लेकिन उठने की कोशिश की। उठ नहीं पाया। तब भी वह
18:00
Speaker A
घिसटते हुए आगे बढ़ने लगा। कमांडो ने उसे चारों तरफ से घेर लिया। [संगीत] फरीद ने देखा। चारों तरफ कोई रास्ता नहीं था। उसके चेहरे पर पहली बार वह भाव आया जो [संगीत] हार का नहीं बल्कि निर्णय का था। उसने
18:14
Speaker A
पिस्तौल उठाई और अपनी तरफ मोड़ ली। कमांडो समझ गया। उसने बिना एक पल गमवाए छलांग लगाई। हाथ पकड़ा। [संगीत] पिस्तौल दूर जा गिरी। फरीद ने छुड़ाने की कोशिश की। लेकिन पैर में गोली लगी थी। ताकत नहीं बची थी।
18:29
Speaker A
वायरलेस [संगीत] पर आवाज गूंजी। टारगेट गिरफ्तार। दिल्ली में पहली जीत। लेकिन अर्जुन के चेहरे पर कोई खुशी नहीं थी। [संगीत] उसने कहा जयपुर और लखनऊ को बताओ। अभी नेटवर्क अलर्ट हो जाएगा। जयपुर। नदीम को खबर मिली। संदेश आया, [संगीत] दिल्ली
18:46
Speaker A
गिरी। उसने एक सेकंड भी नहीं गवाया। लैपटॉप से हार्ड ड्राइव [संगीत] निकाली, तोड़ी। टुकड़े अलग-अलग जगह फेंके। कागजात जलाए, ट्रांसमीटर तोड़े। 5 मिनट में कमरा खाली। उसने पीछे का दरवाजा खोला। सामने दो सशस्त्र जवान खड़े थे। हाथ ऊपर। [संगीत]
19:03
Speaker A
नदीम की आंखें एक पल के लिए बंद हुई। फिर खुली। उसने जेब से एक [संगीत] छोटा उपकरण निकाला। जमीन पर फेंका। तेज फ्लैश, धुआं। पूरा इलाका सफेद हो गया। जवान कुछ सेकंड के लिए अंधे हो गए। नदीम दीवार फांद कर
19:18
Speaker A
भाग निकला। जयपुर की उन संकरी गलियों में अब दूसरा पीछा शुरू हो चुका था। नदीम तेज [संगीत] था। बहुत तेज लेकिन जयपुर की टीम तैयार थी। वायरलेस पर लगातार उसकी लोकेशन अपडेट हो रही थी। वह एक के बाद एक [संगीत]
19:32
Speaker A
गली पार करता गया। दीवारें बांधी, नालियां पार की। लेकिन हर बार जब उसने सोचा [संगीत] कि रास्ता साफ है तब आगे कोई ना कोई खड़ा था। वह दाई तरफ गया तो रास्ता बंद, बाई तरफ गया तो टीम। आखिरकार वह एक
19:48
Speaker A
पुरानी बंद फैक्ट्री के इलाके में पहुंच गया। चारों तरफ टूटी हुई दीवारें, [संगीत] ऊंची चिमनियां और सन्नाटा। वह रुका, सांसे ली। पीछे मुड़कर देखा। तीन तरफ से टीम आ रही थी। उसने एक आखिरी बार भागने की [संगीत] कोशिश की। पैर फिसला, गिरा।
20:04
Speaker A
जवानों ने उसे दबोच लिया। जयपुर भी गिरी। लखनऊ इमरान को खबर मिली। कोडेड संदेश दिल्ली गिरी। जयपुर गिरी। तुरंत निकलो। उसके हाथ कांपने लगे। उसने जल्दी-जल्दी सामान उठाया। [संगीत] कमरे से बाहर निकला। रात के 3:00 बजे थे। लखनऊ की सड़कें
20:22
Speaker A
सुनसान थी। वह तेज कदमों से रेलवे स्टेशन की तरफ चला। उसे नहीं पता था कि जिस चाय वाले की दुकान को वह सुरक्षित समझ रहा था, वह बूढ़ा आदमी पहले ही [संगीत] गिरफ्तार हो चुका था और पूछताछ में उसने एक नाम बता
20:35
Speaker A
दिया था। इमरान लखनऊ रेलवे स्टेशन। रात के 3:00 बजे भी [संगीत] भीड़ थी। लंबी दूरी की ट्रेनें, सोते हुए यात्री, बच्चे, बुजुर्ग, कुली। इमरान उस भीड़ में घुल जाना चाहता था। उसने सिर झुकाया, कदम तेज किए, प्लेटफार्म की तरफ बढ़ा। उसके हाथ
20:54
Speaker A
कांप [संगीत] रहे थे। वह सिर्फ एक ट्रेन में बैठना चाहता था। कहीं भी जाने वाली ट्रेन। बस यहां से [संगीत] निकलना था। तभी पीछे से आवाज आई। इमरान उसके कदम रुक गए। वह पल ऐसा था जैसे वक्त [संगीत] थम जाए।
21:08
Speaker A
धीरे-धीरे उसने पीछे मुड़कर देखा। भीड़ के बीच एक आदमी खड़ा था। साधारण कपड़े लेकिन आंखें जो [संगीत] सीधे उसकी आत्मा में उतर रही थी। अर्जुन राठौड़ इमरान की सांसे तेज हो गई। उसने चारों तरफ नजर दौड़ाई। अखबार पढ़ने वाले, [संगीत] चाय पीने वाले,
21:25
Speaker A
यात्री बने हुए लोग लेकिन सबकी नजरें उसी पर थी। अर्जुन धीरे-धीरे [संगीत] उसकी तरफ बढ़ा। उसकी आवाज शांत थी। भागने की कोशिश मत करना इमरान। [संगीत] चारों तरफ हमारे लोग हैं। ट्रेन में भी, प्लेटफार्म पर भी, बाहर भी। इमरान के माथे पर पसीना आ गया।
21:42
Speaker A
उसने एक [संगीत] बार भागने के बारे में सोचा लेकिन उसके पैर नहीं उठे। शायद उसके अंदर कहीं गहराई में राहत थी। इस बात की राहत [संगीत] कि यहीं खत्म हो रहा है। उसने धीरे से बैग जमीन पर रखा और दोनों
21:55
Speaker A
हाथ ऊपर कर दिए। उसी समय वायरलेस पर आवाज आई। जयपुर से नदीम पकड़ा गया। अर्जुन ने आंखें बंद की। एक पल फिर खोली। तीनों गिरफ्त में थे। लेकिन यह खुशी का वक्त नहीं था। अर्जुन जानता था कि असली काम अब
22:10
Speaker A
शुरू होगा। माइक्रो चिप, नक्शे, [संगीत] कोडेड दस्तावेज और वह नेटवर्क जो भारत के शहरों में सालों से सोया पड़ा था। उसे जड़ से उखाड़ना था। [संगीत] पूछताछ। फरीद के सामने अर्जुन बैठा। फरीद का पैर बंधा हुआ था। चेहरे पर थकान थी। लेकिन आंखों
22:27
Speaker A
[संगीत] में अभी भी वही खालीपन था। अर्जुन ने पूछा, "तुम लोग भारत क्यों आए फरीद मुस्कुराया। तुम बहुत देर कर चुके हो। अर्जुन ने कहा, देर नहीं की। तुम यहां हो। तुम्हारे दोनों साथी यहां हैं और वह चिप
22:42
Speaker A
भी यहां है। फरीद की मुस्कान [संगीत] हल्की पड़ी। अर्जुन ने आगे कहा, "मुझे नेटवर्क चाहिए। पूरा फरीद चुप रहा। कुछ देर बाद उसने सिर्फ [संगीत] एक बात कही। अगर नदीम एक्टिव हो जाता तो तुम्हें रोकना मुश्किल होता। यही पहली बार था जब अर्जुन
22:59
Speaker A
को नदीम के असली महत्व का अंदाजा हुआ। अगले कई दिनों तक जांच चलती रही। माइक्रोचिप को खोला गया। उसमें कोर्ट था। कोर्ट तोड़ा गया। उसमें भारत के कई शहरों में छिपे संपर्कों के नाम थे। पते थे। संकेत थे। एक-एक धागा खींचा गया। दिल्ली
23:16
Speaker A
में यूसुफ की दुकान [संगीत] से दस्तावेज मिले। लखनऊ में चाय वाले बूढ़े से और नाम मिले। जयपुर में नदीम के टूटे उपकरणों के टुकड़े जोड़े गए। और धीरे-धीरे वह नेटवर्क जो सालों से भारत की जमीन में छिपा था।
23:29
Speaker A
एक-एक करके उखड़ने [संगीत] लगा। महीनों की मेहनत, दर्जनों गिरफ्तारियां और वह मिशन जो तीन घुसपैठियों की एक रात से शुरू हुआ था। आखिरकार खत्म हुआ। उस दिन शाम को अर्जुन राठौड़ अपने दफ्तर में बैठा था। मेज पर फाइल थी। उसने फाइल का आखिरी
23:47
Speaker A
[संगीत] पन्ना पढ़ा। फिर धीरे से बंद किया। खिड़की के बाहर दिल्ली की शाम थी। शहर चल रहा था। लोग चल रहे थे। बाजार थे, बच्चे थे, जिंदगी थी। उन्हें नहीं पता था कि उस रात क्या हो सकता था। उन्हें नहीं
24:01
Speaker A
पता था कि कुछ [संगीत] लोग उनकी जिंदगी की परवाह किए बिना काम करते हैं। अर्जुन ने फाइल पर हाथ रखा और धीमी आवाज में कहा जंग खत्म नहीं हुई। बस इस बार हम जीत गए। अगर दोस्तों यह कहानी
24:15
Speaker A
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Topics:पाकिस्तानी घुसपैठबीएसएफ ऑपरेशनभारत-पाक सीमाखुफिया नेटवर्कसलीम कुरैशीइंटेलिजेंस ब्यूरोराजस्थान सीमानकली पहचान पत्र2D एनीमेशनHidden Ops India

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