तमिल अभिनेता विजय की संघर्ष यात्रा और उनकी राजनीति में सफलता की कहानी।
Key Takeaways
- विजय ने फिल्म इंडस्ट्री में संघर्ष के बाद सफलता हासिल की।
- उनकी फिल्मों में सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को प्रमुखता मिली।
- विजय ने अपने फैन क्लब्स को संगठित कर राजनीतिक नेटवर्क बनाया।
- उनकी लोकप्रियता ने उन्हें तमिलनाडु की राजनीति में एक प्रभावशाली नेता बनाया।
- विजय की कहानी प्रेरणादायक है जो संघर्ष से सफलता तक की यात्रा दर्शाती है।
What the video covers
- विजय का जन्म 22 जून 1974 को तमिल सिनेमा के फिल्म डायरेक्टर एस ए चंद्रशेखर के घर हुआ।
- उनकी छोटी बहन की मौत के बाद पिता ने उन्हें डॉक्टर बनाने का फैसला किया, लेकिन विजय ने एक्टिंग चुनी।
- 1992 में उनकी पहली फिल्म फ्लॉप रही और आलोचनाओं का सामना करना पड़ा।
- विजय ने कई लो बजट रोमांटिक फिल्में कीं, लेकिन सफलता 2004 की फिल्म हिल्ली से मिली।
- उनकी फिल्मों में सामाजिक और राजनीतिक संदेश होते थे, जो जनता के साथ जुड़ाव बनाते थे।
- विजय ने अपने फैन क्लब्स को मिलाकर विजय मक्कल एयक्कम नामक संगठन बनाया।
- यह संगठन सामाजिक कार्यों के साथ-साथ राजनीतिक नेटवर्क के रूप में भी काम करता है।
- विजय ने भ्रष्टाचार, किसानों के मुद्दे और वोटर राइट्स जैसे विषयों पर लड़ाई लड़ी।
- उनकी लोकप्रियता और राजनीतिक सक्रियता ने उन्हें तमिलनाडु में एक प्रभावशाली नेता बना दिया।
- विजय की राजनीतिक मशीनरी अब बड़ी चुनावी जीत के लिए तैयार है।
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Speaker A
22 जून 1974 के दिन तमिल सिनेमा के वेटरन फिल्म डायरेक्टर एस ए चंद्रशेखर और उनकी गायक पत्नी शोभा चंद्रशेखर के यहां पर एक बच्चे का जन्म होता है, जिसका नाम रखा जाता है जोसेफ विजय चंद्रशेखर। विजय विजय विजय।
Speaker A
विजय विजय विजय विजय चंद्रशेखर जब विजय केवल 10 साल के थे तभी उनकी 2 साल की छोटी बहन विद्या की ब्लड कैंसर के कारण मौत हो जाती है। जिसके बाद उनके पिता ने विजय को डॉक्टर बनाने का फैसला लिया। वहीं
Speaker A
विजय विजय विजय विजय चंद्रशेखर। जब विजय केवल 10 साल के थे, तभी उनकी 2 साल की छोटी बहन विद्या की ब्लड कैंसर के कारण मौत हो जाती है। जिसके बाद उनके पिता ने विजय को डॉक्टर बनाने का फैसला लिया। वहीं
Speaker A
में मिलते हैं। यहां से विजय के पिता भी हार मान जाते हैं कि उनका बेटा अब जो चाहे वह बन जाए। साल 1984 में आई फिल्म बैटरी में विजय को एक चाइल्ड एक्टर के तौर पर ले लिया जाता
Speaker A
विजय डॉक्टर नहीं बनना चाहते थे। वे बनना चाहते थे एक्टर। एक दिन विजय सुबह 10:00 बजे घर से निकलते हैं और शाम होने तक वापस नहीं आते। विजय के माता-पिता ने सब जगह विजय को ढूंढा और अंत में वे उद्यम थिएटर
Speaker A
1992 में रिलीज़ कर दिया जाता है। हालांकि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह से फ्लॉप होती है। इस फिल्म के लिए ज्यादातर रिव्यूअर्स नेगेटिव रिव्यूज दिए। एक पॉपुलर तमिल मैगजीन कुमुदन ने विजय के लुक्स और स्क्रीन प्रेजेंस का काफी मजाक
Speaker A
में मिलते हैं। यहां से विजय के पिता भी हार मान जाते हैं कि उनका बेटा अब जो चाहे वह बन जाए। साल 1984 में आई फिल्म बैटरी में विजय को एक चाइल्ड एक्टर के तौर पर ले लिया जाता
Speaker A
कि इन रिव्यूज का असर विजय पर यह होता है कि वे एक दिन पूरी रात रोते हैं। इसके बाद विजय ने कई लो बजट रोमांटिक फिल्में की। लेकिन इन फिल्मों ने एवरेज बिजनेस ही किया। लेकिन 1996 में आई होवे उनकागाह
Speaker A
है। यह फिल्म खुद विजय के पिता चंद्रशेखर डायरेक्ट कर रहे थे। जब विजय 18 साल के हुए तो उन्हें नालैया थिरपु फिल्म में पहला लीड रोल मिलता है। इस फिल्म को भी विजय के पिता डायरेक्ट कर रहे थे, जिसे
Speaker A
रोमांटिक रोल्स को छोड़कर एक्शन फिल्मों की तरफ बढ़ जाते हैं और एक एंग्री यंग मैन के रूप में रोल्स करने लगते हैं। इसके बाद साल 2004 में आई हिल्ली मूवी विजय के करियर में मेगा ब्रेक थ्रो बनकर आती है।
Speaker A
1992 में रिलीज़ कर दिया जाता है। हालांकि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह से फ्लॉप होती है। इस फिल्म के लिए ज्यादातर रिव्यूअर्स नेगेटिव रिव्यूज दिए। एक पॉपुलर तमिल मैगजीन कुमुदन ने विजय के लुक्स और स्क्रीन प्रेजेंस का काफी मजाक
Speaker A
ब्लॉकबस्टर्स मूवीज दी जिनसे वे तमिल सिनेमा के मेगा सुपरस्टार बन जाते हैं। विजय की फिल्मों की एक खास बात थी और वो यह थी कि उनकी फिल्म्स में सोश पॉलिटिकल मैसेज जरूर होता था। विजय अपनी फिल्मों में किसानों, भ्रष्टाचार, वुमेन
Speaker A
उड़ाया और कहा कि क्या हमें ऐसे चेहरे [हंसी] को देखने के लिए थिएटर में पैसे खर्च करने चाहिए। मीडिया में उड़ रहे मजाक से विजय अंदर से टूट जाते हैं। टीवी एक्टर और विजय के दोस्त संजीव वेंकट बताते हैं
Speaker A
पॉलिटिशियन से लड़े। [संगीत] ऐसी फिल्मों के कारण विजय का जनता के साथ एक कनेक्ट बनता है। उनके फैंस उन्हें रजनीकांत की तरह ही मसीहा के तौर पर पूजने लगते हैं। विजय की फिल्मों का आना उनके लिए त्योहारों के आने जैसा हो जाता है।
Speaker A
कि इन रिव्यूज का असर विजय पर यह होता है कि वे एक दिन पूरी रात रोते हैं। इसके बाद विजय ने कई लो बजट रोमांटिक फिल्में की। लेकिन इन फिल्मों ने एवरेज बिजनेस ही किया। लेकिन 1996 में आई होवे उनकागाह
Speaker A
इसका असली मकसद था जमीनी स्तर पर एक राजनीतिक नेटवर्क खड़ा करना। बीएमआई ने शुरुआत में अपनी पहचान बनाने के लिए जमीनी स्तर पर काम करना शुरू कर दिया। जैसे कि ब्लड डोनेशन कैंप लगाना, मुफ्त भोजन बांटना और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत
Speaker A
फिल्म विजय के लिए एक टर्निंग पॉइंट बनती है। इस फिल्म ने विजय को फैमिली ऑडियंस में पॉपुलर बनाया और उन्हें सॉफ्ट रोमांटिक हीरो की इमेज दे दी। यह पहली बार था जब विजय को तमिल इंडस्ट्री ने सीरियसली लेना शुरू कर दिया। 2000 के दशक में विजय
Speaker A
जाने लगते हैं। दोस्तों विजय की सक्सेस में दो चीजें इंपॉर्टेंट रही। पहला उनके संगठन का ग्राउंड वर्क और दूसरा ऑनलाइन वर्ल्ड में उनकी दमदार प्रेजेंस। अगर आप एक बिजनेसमैन हैं तो आपकी ऑनलाइन प्रेजेंस आपके बिजनेस को नेक्स्ट लेवल पर पहुंचा
Speaker A
रोमांटिक रोल्स को छोड़कर एक्शन फिल्मों की तरफ बढ़ जाते हैं और एक एंग्री यंग मैन के रूप में रोल्स करने लगते हैं। इसके बाद साल 2004 में आई हिल्ली मूवी विजय के करियर में मेगा ब्रेक थ्रो बनकर आती है।
Speaker A
कला और गोंड पेंटिंग हो, कश्मीर का केसर हो, चाहे उत्तराखंड के ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स हो, राजस्थान के ब्लू पॉटरी और हैंडलूम जो पहले लोकल मार्केट में बिकते थे, वे आज इंटरनेशनल मार्केट में पहुंच चुके हैं। आज इनकी सेल सैकड़ों गुना बढ़
Speaker A
यह फिल्म उस समय की सबसे बड़ी तमिल हिट्स बनती है, जिसमें एक्शन सीन थे, कॉमेडी टाइमिंग थी और विजय की एनर्जेटिक परफॉर्मेंस थी, जिसने विजय को मास हीरो बना दिया। यहां से तमिल सिनेमा में विजय का झंडा गढ़ने लगता है। आगे विजय ने लगातार
Speaker A
ओडu की बेस्ट बात यह है कि यहां आपका पूरा बिजनेस सिर्फ एक ही प्लेटफार्म पर मैनेज हो जाता है। जैसे सबसे पहले आप प्रोडक्ट फोटोज लगाते हैं। प्राइसिंग लिखते हैं। स्टॉक कितना है? वेरिएंट, साइज, कलर कौन से अवेलेबल हैं? और डिस्काउंट या ऑफर्स
Speaker A
ब्लॉकबस्टर्स मूवीज दी, जिनसे वे तमिल सिनेमा के मेगा सुपरस्टार बन जाते हैं। विजय की फिल्मों की एक खास बात थी और वो यह थी कि उनकी फिल्म्स में सोश पॉलिटिकल मैसेज जरूर होता था। विजय अपनी फिल्मों में किसानों, भ्रष्टाचार, वुमेन
Speaker A
ऑटोमेटिकली जीएसटी इनवॉइस बना देगा और खुद ही इस डाटा की ऑटोमेटिकली एंट्री भी कर देगा। यहां आप कूरियर कंपनीज को भी इजीली ऐड कर सकते हैं। जैसे डिलीवरी, ब्लू डॉट, डीएचएल आदि जो कस्टमर को उसके घर तक सामान
Speaker A
एंपावरमेंट जैसे मुद्दे उठाते और सीवियर यानी कि मसीहा बनकर आते, जो आम लोगों के लिए खड़ा होता है। जैसे 2002 की तमीजहान फिल्म में विजय ने लोगों को उनके बेसिक लीगल राइट्स को लेकर एजुकेट किया और पानी की कमी जैसे सामाजिक मुद्दे उठाए। करप्ट
Speaker A
पूरी तरह से फ्री है और पहली ऐप भी लाइफटाइम फ्री है। लेकिन अगर आपको ऊड पर अपना पूरा ही बिजनेस मैनेज करना है और दो से ज्यादा एप्स चाहिए तो आप ₹580 में uduू का सब्सक्रिप्शन ले सकते हैं। उडू पर अपनी
Speaker A
पॉलिटिशियन से लड़े। [संगीत] ऐसी फिल्मों के कारण विजय का जनता के साथ एक कनेक्ट बनता है। उनके फैंस उन्हें रजनीकांत की तरह ही मसीहा के तौर पर पूजने लगते हैं। विजय की फिल्मों का आना उनके लिए त्योहारों के आने जैसा हो जाता है।
Speaker A
की पार्टी एआईए [संगीत] डीएमके के गठबंधन को अपना समर्थन दिया। इस वक्त तमिलनाडु में डीएमके की गवर्नमेंट थी और एम करुणानिधि तमिलनाडु की चीफ मिनिस्टर थे। इन चुनावों में जय ललिता की जबरदस्त जीत होती है और 234 सीट्स वाली असेंबली में
Speaker A
साल 2009 में विजय ने अपने लगभग 85,000 फैन क्लब्स को मिलाकर एक सिंगल संगठन बना दिया, जिसका नाम रखा जाता है विजय मक्कल एयक्कम। जिसका मतलब होता है विजय पीपल्स मूवमेंट। इसे एक सामाजिक कल्याण संगठन के तौर पर पेश किया जाता है। लेकिन असल में
Speaker A
मामला बिगड़ जाता है। क्योंकि इस फिल्म की टैगलाइन थी टाइम टू लीड। सीएम जय ललिता को फिल्म की यह टैगलाइन खुद के लिए एक चैलेंज लगती है। तमिलनाडु सरकार ने इस फिल्म को टैक्स एक्सेंपशन देने से इंकार कर दिया।
Speaker A
इसका असली मकसद था जमीनी स्तर पर एक राजनीतिक नेटवर्क खड़ा करना। बीएमआई ने शुरुआत में अपनी पहचान बनाने के लिए जमीनी स्तर पर काम करना शुरू कर दिया। जैसे कि ब्लड डोनेशन कैंप लगाना, मुफ्त भोजन बांटना और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत
Speaker A
की कि इस फिल्म को रिलीज होने दिया जाए। वो जय ललिता से मिलने के लिए उनके घर तक जाते हैं लेकिन जय ललता उनसे मिलती नहीं है। अंत में यह फिल्म बाकी राज्यों में रिलीज होती है लेकिन तमिलनाडु में नहीं
Speaker A
सामग्री पहुंचाना। तमिलनाडु के लगभग हर विधानसभा में इस संगठन की कई शाखाएं बनाई जाती हैं। विजय ने एजुकेशन पर भी जोर दिया और 10वीं और 12वीं बोर्ड एग्जाम्स के टॉपर्स को अवार्ड्स देना शुरू कर दिया, जिससे यूथ के बीच विजय और ज्यादा पसंद किए
Speaker A
वी आर नॉट स्टिल एबल टू गो अहेड एंड वाच दिस। सो वी आर स्टिल वेटिंग फॉर इट। बट वी हैव हर्ड रिव्यूज दैट इट्स स्टिल गुड फ्रॉम इन Facebook एंड अदर सूट। माना जाता है कि यही वो वक्त था जब विजय ने फैसला
Speaker A
जाने लगते हैं। दोस्तों विजय की सक्सेस में दो चीजें इंपॉर्टेंट रही। पहला उनके संगठन का ग्राउंड वर्क और दूसरा ऑनलाइन वर्ल्ड में उनकी दमदार प्रेजेंस। अगर आप एक बिजनेसमैन हैं तो आपकी ऑनलाइन प्रेजेंस आपके बिजनेस को नेक्स्ट लेवल पर पहुंचा
Speaker A
पावरफुल लोगों से लड़ता। कभी वे किसानों के लिए लड़ते तो कभी मेडिकल इंडस्ट्री में हो रहे करप्शन का मुद्दा उठाते और कभी इलेक्ट्रल फ्रॉड्स के खिलाफ लड़ते और कभी वोटर राइट्स के लिए लड़ते। विजय ने अपनी फिल्मों में करप्ट रूलिंग पार्टी से लड़ने
Speaker A
सकती है। इंडिया के रूरल एरियाज में काम करने वाले बहुत से लोग ऑनलाइन स्टोर बनाकर अपने प्रोडक्ट्स को वर्ल्ड वाइड बेच रहे हैं। गुजरात के कच्छ क्षेत्र के महिलाओं के हाथों से बने सामान हो, चाहे कर्नाटक के वुडन टॉयज हो या मध्य प्रदेश के भील
Speaker A
जीएसटी है और हेल्थ केयर फ्री है तो इंडिया में 28% जीएसटी होकर भी हेल्थ केयर फ्री क्यों नहीं है? उनके इस डायलॉग ने बीजेपी को नाराज कर दिया। बीजेपी नेताओं ने मांग की कि इन सीन्स को फिल्म से हटाया
Speaker A
कला और गोंड पेंटिंग हो, कश्मीर का केसर हो, चाहे उत्तराखंड के ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स हो, राजस्थान के ब्लू पॉटरी और हैंडलूम जो पहले लोकल मार्केट में बिकते थे, वे आज इंटरनेशनल मार्केट में पहुंच चुके हैं। आज इनकी सेल सैकड़ों गुना बढ़
Speaker A
हैं। बीजेपी नेता एच राजा ने Twitter पर विजय के वोटर आईडी कार्ड का फोटो डाल दिया और कहा कि विजय ईसाई हैं। इसलिए उन्होंने फिल्म में जीएसटी की आलोचना की है। राजा ने यह भी कहा कि यह फिल्म मोदी के प्रति
Speaker A
चुकी है और यह सब पॉसिबल हुआ ई-कॉमर्स से। आप भी ओडू पर अपने बिजनेस के लिए ई-कॉमर्स वेबसाइट बना सकते हैं और बहुत ही सिंपल स्टेप्स में ऑनलाइन शॉप स्टार्ट करके अपने प्रोडक्ट्स को बेचना शुरू कर सकते हैं।
Speaker A
दिखाने के लिए विजय के खिलाफ एक एफआईआर भी दर्ज कर ली जाती है। इन द मोस्ट विज़ार्ड ट्विस्ट इन द कंट्रोवर्सी ओवर तमिल फिल्म मर्सियल एक्टर विजय हैज़ नाउ बीन बुक्ड एन एफआईआर हैज़ बीन रजिस्टर्ड अगेंस्ट हिम फॉर शोइंग टेंपल्स
Speaker A
ओडू की बेस्ट बात यह है कि यहां आपका पूरा बिजनेस सिर्फ एक ही प्लेटफार्म पर मैनेज हो जाता है। जैसे सबसे पहले आप प्रोडक्ट फोटोज लगाते हैं। प्राइसिंग लिखते हैं। स्टॉक कितना है? वेरिएंट, साइज, कलर कौन से अवेलेबल हैं? और डिस्काउंट या ऑफर्स
Speaker A
में खड़ा कर दिया। जब बीजेपी ने उन्हें टारगेट किया तो सोशल मीडिया पर एंटी बीजेपी लोग विजय के समर्थन में आ जाते हैं। तमिलनाडु के फिल्म इंडस्ट्री और पॉलिटिकल लीडर्स ने भी विजय का सपोर्ट किया। तमिल सिनेमाज़ बिग शॉट्स हैव बैक विजय इन द
Speaker A
क्या हैं? ऐसे मिनटों में आपकी ऑनलाइन शॉप रेडी हो जाती है। अब कस्टमर आपकी वेबसाइट पर आएगा, प्रोडक्ट देखेगा और ऑर्डर प्लेस करेगा। यहीं पर कस्टमर को पेमेंट, गेटवे जैसे यूपीआई, क्रेडिट कार्ड, रिजर पे के ऑप्शन मिल जाते हैं। पेमेंट के बाद ओडू
Speaker A
लाइफ में भी लोगों के असल मुद्दों के लिए पावरफुल लोगों से लड़ रहा था। इसी बीच 5 फरवरी 2020 को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने चेन्नई में मौजूद विजय के घर पर छापा मार दिया और टैक्स चोरी को लेकर उनसे पूछताछ
Speaker A
ऑटोमेटिकली जीएसटी इनवॉइस बना देगा और खुद ही इस डाटा की ऑटोमेटिकली एंट्री भी कर देगा। यहां आप कूरियर कंपनीज को भी इजीली ऐड कर सकते हैं। जैसे डिलीवरी, ब्लू डॉट, डीएचएल आदि जो कस्टमर को उसके घर तक सामान
Speaker A
कि विजय बीजेपी के खिलाफ लड़ रहे हैं और बीजेपी उन्हें टारगेट कर रही है। इसलिए हजारों फैंस ने पोस्टर लगाकर विजय से अपील की कि वह राजनीति में आकर तमिलनाडु को बचाएं। इस तरह अपनी पार्टी लॉन्च करने से
Speaker A
पहुंचाती हैं। चाहे वे दुनिया के किसी भी कोने में हो, चाहे भारत के किसी भी कोने में हो। मतलब उडू पर शुरू से लेकर एंड तक सब मैनेज हो जाता है। खास बात यह है कि उडू पर पहले साल के लिए वेबसाइट डोमेन
Speaker A
पिता चंद्रशेखर ने वीएमआई को एक पॉलिटिकल पार्टी के तौर पर रजिस्टर करा दिया। लेकिन विजय ने अपने फैंस से कहा कि वो इस राजनीतिक पार्टी में शामिल नहीं हो। आफ्टर दैट विजय हैड रिलीज़ अ स्टेटमेंट सेइंग दैट ही डिड नॉट कंसेंट टू यूजिंग
Speaker A
पूरी तरह से फ्री है और पहली ऐप भी लाइफटाइम फ्री है। लेकिन अगर आपको उडू पर अपना पूरा ही बिजनेस मैनेज करना है और दो से ज्यादा एप्स चाहिए तो आप ₹580 में उडू का सब्सक्रिप्शन ले सकते हैं। उडू पर अपनी
Speaker A
माता-पिता को भगवान के बराबर बताते थे और आज उनके ही खिलाफ बयान दे रहे थे। इंटरेस्टिंगली विजय ने एक सिविल केस भी दाखिल किया जिसमें अपने माता-पिता को उनके नाम पर मीटिंग्स करने से रोकने की मांग की गई। अंत में विजय के पिता चंद्रशेखर ने
Speaker A
कॉमर्स वेबसाइट बनाने की लिंक डिस्क्रिप्शन एंड कमेंट बॉक्स में डाल दूंगा, जहां से आप चेक कर सकते हैं। अब वापस अपनी कहानी पर लौटते हैं। 2011 आते-आते यह संगठन इतना मजबूत हो जाता है कि विधानसभा चुनाव में वीएमआई ने जय ललिता
Speaker A
के फैंस वीएमआई का फ्लैग लेकर इंडिपेंडेंट कैंडिडेट्स के तौर पर नॉमिनेशंस भर देते हैं। हालांकि विजय ने कभी ऑफिशियली घोषणा नहीं की कि वीएमआई इलेक्शंस लड़ेगी। ऊपरी तौर पर यह इनिशिएटिव खुद विजय के फैंस का था। कमाल की बात तो तब होती है जब
Speaker A
की पार्टी एआईए [संगीत] डीएमके के गठबंधन को अपना समर्थन दिया। इस वक्त तमिलनाडु में डीएमके की गवर्नमेंट थी और एम करुणानिधि तमिलनाडु के चीफ मिनिस्टर थे। इन चुनावों में जय ललिता की जबरदस्त जीत होती है और 234 सीट्स वाली असेंबली में
Speaker A
विजय की पॉलिटिकल मशीनरी अब पूरी तरह से फंक्शनल हो चुकी है और वो अब बड़ा चुनाव जीतने के लायक हो चुकी है। विजय मकलियक मेंबर्स वर एबल टू अटेन सच अ विक्ट्री व्हिच इज बीइंग सेड दैट कुड इट
Speaker A
जिसमें बहुमत के लिए 118 सीट्स चाहिए थी, उसमें जय ललिता को 150 सीट्स मिलती हैं और मुख्यमंत्री बन जाती हैं। मारा पट्रम कुंडरपेन एंड इंडिया नाटिन लेकिन इसी बीच 2013 में आई विजय की फिल्म थलाइवा के बाद एआईएडीएमके और विजय के बीच
Speaker A
[संगीत] विजय ने कहा कि उनकी पार्टी 204 लोकसभा इलेक्शन नहीं लड़ेगी और सीधे 2026 तमिलनाडु असेंबली इलेक्शन में उतरेगी। 27 अक्टूबर 2024 को विजय ने टीबीके की पहली रैली की जिसमें लाखों लोग आते हैं। इतनी बड़ी संख्या किसी भी नई पार्टी के लिए एक
Speaker A
मामला बिगड़ जाता है। क्योंकि इस फिल्म की टैगलाइन थी टाइम टू लीड। सीएम जय ललिता को फिल्म की यह टैगलाइन खुद के लिए एक चैलेंज लगती है। तमिलनाडु सरकार ने इस फिल्म को टैक्स एक्सेंप्शन देने से इंकार कर दिया।
Speaker A
कम्युनल और एंटी करप्शन पार्टी होगी। टीवी के एक सेकुलर और सोशल जस्टिस बेस्ड पार्टी होगी जो अंबेडकर पेरियार और कामराज की विचारधारा पर चलेगी। इस रैली में विजय ने डीएमके को अपना पॉलिटिकल अपोनेंट कहा तो बीजेपी को अपना आईडियोलॉजिकल अपोनेंट कहा।
Speaker A
विजय के खिलाफ एक हेट कैंपेन चलाया जाने लगता है। एक अननोन स्टूडेंट ग्रुप ने धमकी दी कि अगर इस फिल्म को तमिलनाडु के किसी थिएटर में लगाया जाता है तो वह उसे बम से उड़ा देंगे। विजय ने जय ललिता से भी अपील
Speaker A
हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी अवरगया [चीखने की आवाज़] डीएमके पार्टी को टारगेट करते हुए विजय ने कहा कि डिवाइसिव फर्सेज जो धर्म और जाति के आधार पर लोगों को बांटती हैं उन्हें आसानी से पहचाना जा सकता है। लेकिन करप्ट
Speaker A
की कि इस फिल्म को रिलीज होने दिया जाए। वो जय ललिता से मिलने के लिए उनके घर तक जाते हैं, लेकिन जय ललिता उनसे मिलती नहीं हैं। अंत में यह फिल्म बाकी राज्यों में रिलीज होती है, लेकिन तमिलनाडु में नहीं
Speaker A
जाएंगे। उनमें से विजय इसी टूर के तहत 27 सितंबर के दिन करूर में विजय की एक रैली हो रही थी। यहां विजय को दोपहर 12:45 पर पहुंच जाना था। लेकिन वह शाम के 7:00 बजे पहुंचते हैं और इसके बारे
Speaker A
होती क्योंकि तमिलनाडु सरकार ने यह कह दिया कि वो प्रोटेक्शन प्रदान नहीं कर सकती। वी आर नॉट एबल टू वाच इट इन तमिलनाडु। तमिल मूवी नॉट एबल टू वाच इन तमिलनाडु। सिंस इन तमिल एंड वी आर इन तमिलनाडु एंड
Speaker A
चाहते थे। जिसके चक्कर में लोगों का दम घुटने लगता है और भगदड़ मच जाती है। इस भगदड़ में कुल 41 लोगों की मौत हो जाती है। जिनमें नौ बच्चे भी शामिल थे। जबकि 200 लोग घायल हो जाते हैं।
Speaker A
वी आर नॉट स्टिल एबल टू गो अहेड एंड वाच दिस। सो वी आर स्टिल वेटिंग फॉर इट। बट वी हैव हर्ड रिव्यूज दैट इट्स स्टिल गुड फ्रॉम इन Facebook एंड अदर सूट। माना जाता है कि यही वो वक्त था जब विजय ने फैसला
Speaker A
हैं और तिरछी एयरपोर्ट से चार्टर्ड फ्लाइट लेकर चेन्नई पहुंच जाते हैं। अगले 48 घंटे तक विजय सामने नहीं आते और आखिरकार तीसरे दिन जाकर 5 मिनट का एक वीडियो जारी करके अपना मौन तोड़ते हैं। इस वीडियो में भी
Speaker A
लिया कि वो किसी को सपोर्ट करने के बजाय अब खुद पॉलिटिक्स में उतरेंगे। अब विजय ने अपनी फिल्मों में और ज्यादा अग्रेसिव तरीके से पॉलिटिकल और सोशल इश्यूज को उठाना शुरू कर दिया। लगभग हर फिल्म में वो एक मसीहा की तरह आते, जो आम लोगों के लिए
Speaker A
करुण। विजय ने डीएम की पार्टी पर राजनीतिक साजिश रचने का आरोप लगाया और टीवी के कार्यकर्ताओं पर हुई एफआईआर पर कहा कि मुख्यमंत्री सर अगर आपको बदला लेना है तो मुझसे लो उन्हें हाथ मत लगाओ। इस समय ऐसे
Speaker A
पावरफुल लोगों से लड़ता। कभी वे किसानों के लिए लड़ते तो कभी मेडिकल इंडस्ट्री में हो रहे करप्शन का मुद्दा उठाते और कभी इलेक्ट्रल फ्रॉड्स के खिलाफ लड़ते और कभी वोटर राइट्स के लिए लड़ते। विजय ने अपनी फिल्मों में करप्ट रूलिंग पार्टी से लड़ने
Speaker A
सम गुंडाज एंटर्ड एंड मिक्स्ड विथ द क्राउड एंड इवन टू चप्पल्स एट विजय। देन गो ऑन टू क्लेम्लेम दैट एन एंबुलेंस विदाउट अ पेशेंट इनसाइड वास ड्रिवन इन टू द क्राउड कॉजिंग द स्टैंप। इसी बीच दिसंबर 2025 में अपनी फिल्म
Speaker A
से लेकर वुमेन एंपावरमेंट का मैसेज दिया। पॉलिटिकल होने के कारण विजय की यह फिल्में विवादों में भी आती रहती हैं। इससे उन्हें और ज्यादा फायदा होता है। 2017 में आई मर्शल फिल्म में एक डायलॉग था, जिसमें विजय का करैक्टर पूछता है कि सिंगापुर में 7%
Speaker A
उन्होंने ₹250 करोड़ लिए थे। ऐसे में यह सब छोड़कर राजनीति में फुल टाइम आना जहां सफलता की कोई गारंटी नहीं हो एक बड़ा दाव था। विजय ने ऐलान किया कि टीवी के तमिलनाडु में अकेले ही चुनाव लड़ेगी और
Speaker A
जीएसटी है और हेल्थ केयर फ्री है तो इंडिया में 28% जीएसटी होकर भी हेल्थ केयर फ्री क्यों नहीं है? उनके।
Speaker A
विजय ने टीवी के मेनिफेस्टो में आठ बड़े वायदे किए जिनमें हर परिवार की महिला मुखिया को हर महीने ₹2500 बुजुर्गों और अपाहिज लोगों को ₹3000 और बेरोजगार युवाओं को ₹2500 से ₹4000 हर महीने देने की बात की। साल में छह फ्री एलपीजी सिलेंडर्स,
Speaker A
गरीब दुल्हनों को उनकी शादी में 8 ग्राम सोना और किसानों का कर्ज माफ करने जैसे वायदे किए। टीबीके के मेनिफेस्टो का हर वायदा एक स्पेसिफिक वोटर ग्रुप को टारगेट कर रहा था। यानी यह कोई रैंडम लिस्ट नहीं थी बल्कि एक कैलकुलेटेड स्ट्रेटजी थी जो
Speaker A
सफल रहती है। जब 4 मई को तमिलनाडु असेंबली के रिजल्ट्स आते हैं तो टीवी के 234 सीटों में से 108 सीटें जीतने में कामयाब रहती हैं। जो बाकी पार्टियों के मुकाबले सबसे ज्यादा सीटें थी। टीवी के पूर्ण बहुमत से
Speaker A
मात्र 10 सीटें दूर थी, लेकिन पहली बार चुनाव लड़ रही पार्टी के लिए यह एक हिस्टोरिक रिजल्ट था। टीवी की आंधी में खुद मुख्यमंत्री एमके स्टालिन अपनी कोलाथुर सीट भी हार जाते हैं और वह भी टीबीके के कैंडिडेट के सामने। 1971 के बाद
Speaker A
से तमिलनाडु में डीएमके और एआईएडीएम के बारी-बारी से सरकारें बनाती आ रही थी। लेकिन अब जयलता की मौत के बाद एआईएडीएमके अंदर से कमजोर हो चुकी थी। वहीं डीएमके एंटी इनकंबेंसी फेस कर रही थी। इसलिए टीवी के पार्टी में तमिलनाडु के लोगों को खासकर
Speaker A
यूथ वोटर्स को एक नया सपना दिखता है। जिनके दम पर विजय अपनी हिस्टोरिक जीत दर्ज कराने में सफल रहते हैं। सी जोसेफ विजयन और अंत में बात उडू की अगर आप अपना बिजनेस ऑनलाइन स्टार्ट करना चाहते हैं या ऑनलाइन
Speaker A
स्टोर बनाना चाहते हैं तो कमेंट बॉक्स और डिस्क्रिप्शन बॉक्स में मौजूद लिंक पर जाकर क्लिक करें और उडू पर अपनी ई-कॉमर्स वेबसाइट बना लें। इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।
Topics:विजयतमिल सिनेमाराजनीतिविजय मक्कल एयक्कमसामाजिक संदेशफिल्मेंतमिलनाडुसफलता कहानीफैन क्लबराजनीतिक नेटवर्क











