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Gangs of Bombay | Dawood Ibrahim Story

दाऊद इब्राहिम की कहानी, मुंबई के अंडरवर्ल्ड और प्रमुख गैंगस्टर्स की पृष्ठभूमि पर आधारित एक विस्तृत डॉक्यूमेंट्री।

Key Takeaways

  • दाऊद इब्राहिम की कहानी मुंबई के अंडरवर्ल्ड के इतिहास से गहराई से जुड़ी है।
  • मुंबई में 1950-60 के दशक में विभिन्न क्षेत्रीय गैंग्स का उदय हुआ।
  • हाजी मस्तान, वरद राजन और करीम लाला ने मुंबई के अंडरवर्ल्ड पर कब्जा किया।
  • पुलिस और गैंगस्टर्स के बीच जटिल संबंध थे, जिसमें कुछ पुलिस वाले गैंग्स के साथ थे।
  • दाऊद का परिवार आर्थिक रूप से संघर्षशील था, लेकिन उसे विशेष शिक्षा और भविष्यवाणी के कारण अलग महत्व मिला।

What the video covers

  • दाऊद इब्राहिम का जन्म 26 दिसंबर 1955 को मुंबई के डोंगरी इलाके में हुआ।
  • दाऊद के पिता इब्राहिम कास्कर मुंबई पुलिस में हेड कास्टेबल थे और उनका करीम लाला से गहरा संबंध था।
  • 1950-60 के दशक में मुंबई में कई नॉर्थ इंडियन गैंग्स का उदय हुआ, जैसे इलाहाबादी गैंग, रामपुरी गैंग आदि।
  • मुंबई के तीन प्रमुख डॉन थे: हाजी मस्तान, वरद राजन (वर्दा भाई) और करीम लाला पठान।
  • हाजी मस्तान और वरद राजन तमिलनाडु से आए थे और मुंबई में अवैध शराब और कस्टम ड्यूटी से जुड़े कारोबार में शामिल थे।
  • करीम लाला ने साउथ बॉम्बे में जुआ और उधार देने का बिजनेस शुरू किया और पठान कम्युनिटी में उसका प्रभाव बढ़ा।
  • हाजी मस्तान और करीम लाला के बीच एक डील हुई जिससे मुंबई अंडरवर्ल्ड का साम्राज्य मजबूत हुआ।
  • इब्राहिम कास्कर की सच्चाई और ईमानदारी के कारण करीम लाला उन्हें भाई कहकर बुलाता था।
  • दाऊद को परिवार में विशेष प्राथमिकता मिली और निराले शाह बाबा की भविष्यवाणी के कारण अच्छे स्कूल में दाखिला मिला।
  • 1966 में इब्राहिम कास्कर पुलिस से सस्पेंड हो गए, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई।

Answers

Questions about this video

दाऊद इब्राहिम का जन्म कब और कहाँ हुआ था?

दाऊद इब्राहिम का जन्म 26 दिसंबर 1955 को मुंबई के डोंगरी इलाके में हुआ था।

मुंबई के अंडरवर्ल्ड के प्रमुख डॉन कौन थे?

मुंबई के प्रमुख डॉन हाजी मस्तान, वरद राजन (वर्दा भाई) और करीम लाला पठान थे।

दाऊद के पिता इब्राहिम कास्कर की मुंबई पुलिस में क्या भूमिका थी?

इब्राहिम कास्कर मुंबई पुलिस में हेड कास्टेबल थे और उनकी करीम लाला के साथ अच्छी दोस्ती थी।

Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:00
Speaker A
26 दिसंबर 1955 के दिन एक कंकड़ी मुस्लिम परिवार में दाऊद इब्राहिम का जन्म होता है। दाऊद के पिता इब्राहिम कास्कर मूल रूप से महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले के मुमका गांव के रहने वाले थे। इब्राहिम कास्कर के तीन भाई अभी भी रत्नागिरी के खेड़ इलाके में रहते थे। लेकिन इब्राहिम के पिता यानी दाऊद के दादा हसन कास्कर मुंबई के डोंगरी में एक हेयर कटिंग सेलून चलाते थे। इसलिए इब्राहिम ने भी बॉम्बे के डोंगरी में मौजूद टेमकर मोहल्ले में अपना घर बना लिया। यहां 10/10 स्क्वायर फीट के घर में इब्राहिम अपनी बीवी अमीना और 2 साल के बेटे साबिर के साथ रहा करते थे। और इसी घर में दाऊद का जन्म होता है। अंडरवर्ड डॉन दाऊद इब्राहिम 1993 [संगीत] बॉम्बे सिर ब्लास्ट मास्टरमाइंड दाऊद इब्राहिम दाऊद इब्राहिम दाऊद इब्राहिम मेरे को कोई कोर्टों में नहीं जाना है। मेरे पास खुद कोर्ट लगी हुई होती है। अनजस्टिस मैं किसी के साथ करता नहीं हूं और ना अपने साथ होने दूंगा। दाऊद के पिता इब्राहिम कासकर मुंबई पुलिस में हेड कास्टेबल थे। लेकिन पुलिस में होते हुए भी मुंबई के उस समय के डॉन करीम लाला के साथ उनका उठना बैठना था। जो दाऊद भाई के बाप थे इब्राहिम भाई और बाबा की बहुत दोस्ती थी। और इसी वजह दाऊद भाई भी बाबा का काफी इज्जत करता था वो। जब दाऊद का जन्म हुआ तो करीम लाला ने ही दाऊद के जन्म की दावत स्पॉन्सर की। इसलिए दाऊद के अंडरवर्ड डॉन बनने की कहानी को उसके जन्म के बाद की कहानी से नहीं समझा जा सकता क्योंकि असली कहानी उसके जन्म से पहले की कहानी में छुपी हुई है। 50 के दशक आते-आते मुंबई देश की आर्थिक राजधानी बन चुकी थी। जहां यूपी और एमपी जैसे राज्यों से बहुत सारे लोग रोजी रोटी कमाने के लिए मुंबई पहुंचने लग जाते हैं। इसलिए मुंबई में नॉर्थ इंडियंस लोगों की काफी जनसंख्या बढ़ चुकी थी। इनमें से ज्यादातर लोग इलाहाबाद, कानपुर, रामपुर और जौनपुर से आए थे और इन्हीं लोगों की संख्या ज्यादा थी जो मुंबई में जगह-जगह अपने हिसाब से बस्तियां बसाकर रहने लगे थे। लेकिन मुंबई में हर किसी को काम मिलना आसान नहीं था। इसलिए इनमें से बहुत से लोग क्राइम से जुड़ने लग जाते हैं। ऐसे ही नॉर्थ से आए लड़कों में से एक था नन्हे खान जो इलाहाबाद से मुंबई आया हुआ था। नन्हे खान आने जाने वाले लोगों को चाकू दिखाकर डराता और उन्हें लूट लिया करता था। मुंबई के भाईखला पुलिस स्टेशन के रिकॉर्ड के हिसाब से नन्हे खान साउथ बॉम्बे का सबसे पहला हिस्ट्री सीटर था। जल्द ही इलाहाबाद से आए हुए और भी लड़के नन्हे खान के गैंग से जुड़ जाते हैं। धीरे-धीरे यह गैंग इलाहाबादी गैंग के नाम से फेमस होने लगता है। मैं 1947 के फौरन बाद की बातें कर रहा हूं कि जॉनी गैंग और नन्हे खान का इलाहाबादी गैंग ये दोनों का आपस में टकराव हो रहा था। धीरे-धीरे भयकला इलाका मुंबई के क्राइम का सेंटर बन जाता है। जहां इलाहाबाद गैंग के अलावा रामपुरी गैंग, कानपुरी गैंग्स और जॉनी गैंग का भी राइज हो रहा था। इस तरह धीरे-धीरे मुंबई में एक से एक क्रिमिनल गैंग्स का जन्म होता है। लेकिन बॉम्बे पर हुकूमत करने वालों में तीन लोग सबसे ज्यादा खास माने जाते हैं। एक हाजी मस्तान, दूसरा वरद राजन, मुदिलियार उर्फ वर्दा भाई और तीसरा करीम लाला पठान। जल्द ही दक्षिण मुंबई में [संगीत] घर-घर में करीम लाला का नाम जाना जाने लगा। हाजी मस्तान का पूरा नाम मस्तान हैदर मिर्जा था जिसका जन्म 1926 में तमिलनाडु के एक छोटे से गांव पन्नाम में हुआ था। बॉम्बे के शुरुआती दिनों में हाजी अपने पिता के साथ मैकेनिक का काम करता था। फिर 18 साल की उम्र में बॉम्बे डॉग्स पर कुली का काम करने लग जाता है। यहां उसने देखा कि कैसे डॉग्स पर आने वाले सामान पर कस्टम ड्यूटी लगती है। हाजी ने सोचा कि अगर यह कस्टम ड्यूटी ना देनी पड़े तो कितना मुनाफा कमाया जा सकता है। इसी इललीगल काम में हाजी मस्तान आगे चलकर एक बड़ा आदमी बन जाता है। लेकिन मस्तान को अपने इललीगल कामों के लिए गुंडों वाली मसल पावर भी चाहिए थी। इसलिए उसकी नजर अब थी वरद राजजन डॉन पर। जिस वक्त हाजी मस्तान बॉम्बे डाकयार्ड्स पर काम किया करता था। लगभग उसी दौर में वरद राजन मुदलियार विक्टोरिया टर्मिनस पर कुली का काम करता था। वरद राजन उर्फ वर्दा भाई भी तमिलनाडु के वेलोर कस्बे से बॉम्बे आया था। लेकिन जल्द पैसे कमाने के लिए उसकी दोस्ती चोरों से हो जाती है। 1952 में जब शराब पर बैन लगा तो वर्धा भाई को पैसे कमाने का एक बड़ा मौका मिल जाता है। उन दिनों बॉम्बे का एंटॉप हिल एरिया और धारावी गरीबों की बस्ती हुआ करती थी। यहीं वरद राजन उर्फ़ वर्दा भाई ने अपने अवैध शराब का प्रोडक्शन शुरू कर दिया। उसके काम में पुलिस दखल ना दे इसलिए वो पुलिस की जेब गर्म भी अब करने लगा और इस तरह से वर्दा की शोहरत जो है तमिलनाडु में फैल गई। लोग आके बंबई में जमा होने लगे। लाखों लोगों ने यानी धारावी की बस्ती बाकायदा बहुत से लोग जो हैं ये वर्दा को अपना लीडर कहते थे और ये सब के सब वर्दा की तरफ बहुत ही शुक्रगुजार थे। इस कदर ज्यादा ये लोग वर्दा के वदार हो गए थे कि अब कितने सारे जवान अपनी जाने इस पे कुर्बान करने को तैयार हो गए धीरे-धीरे इसी धंधे से वरद राजजन सेंटर बॉम्बे का डॉन बन जाता है। इस तरह तमिलनाडु से आए हुए दो डॉन्स यानी कि हाजी मस्तान और वरद राजजन की आपस में दोस्ती हो जाती है। जहां हाजी मस्तान का साउथ बॉम्बे और वेस्ट बॉम्बे पर राज था तो वर्दा भाई सेंट्रल बॉम्बे का डॉन था। लेकिन इस तगड़ी में अब एक और नाम जुड़ने वाला था और उसका नाम था करीम लाला पठान। कोई पुख्ता तौर पर नहीं जानता कि अब्दुल करीम खान उर्फ़ करीम लाला बॉम्बे कब आया। माना जाता है कि करीम लाला अपने 30ज में पेशावर से बॉम्बे आया होगा। जहां वह साउथ बॉम्बे की बैदा गली में किराए पर रहने लग जाता है। यहां करीम खान गैंबलिंग यानी कि जुए का अड्डा सेट करता है। जुआ खेलने वाले लोग उससे पैसे भी उधार लेते थे। मुनाफा कमाने के लिए उसने एक नियम बनाया कि उधार लेने वाले लोग महीने की 10 तारीख को उसे ब्याज का पैसा जरूर देंगे। ऐसे में हर महीने की 10 तारीख को उसका गल्ला पैसों से बढ़ जाता। इससे मोटिवेट होकर उसने पैसे उधार देने को ही अपना बिजनेस बना लिया और इस तरह करीम खान से वह करीम लाला बन जाता है। इस तरह पठान कम्युनिटी के लोग बॉम्बे में सेट हो जाते हैं और धीरे-धीरे साउथ बॉम्बे में करीम लाला का रुतबा बढ़ने लग जाता है। करीम लाला का नाम इतना बड़ा हो जाता है कि सिर्फ उसके नाम से ही लोगों को डराया जा सकता था और कामों को चुटकियों में करवाया जा सकता था। जैसे ही मकान मालिक कहता अब तो लाला को बुलाना पड़ेगा। किराएदार घर छोड़ देते। करीम के काम में मुंबई पुलिस के भी बहुत से पुलिस वाले इनवॉल्व थे। करीम लाला की इस पावर की हाजी मस्तान को भी खबर थी। इसलिए मस्तान ने लाला को एक डील ऑफर की। इस डील के मुताबिक करीम लाला के गैंग के लड़के यानी कि पठान गैंग के लड़कों को हाजी मस्तान और डॉग पर आने वाले सामान को प्रोटेक्ट करना होगा। बदले में करीम लाला को कंसाइनमेंट की मार्केट वैल्यू के हिसाब से कट दिया जाएगा। यह डील बॉम्बे अंडरवर की सबसे खतरनाक डील साबित होती है। क्योंकि हाजी मस्तान का दिमाग और करीम लाला की मसल पावर दोनों अब अलायंस में आ चुकी इललीगल काम धंधे होने की वजह से मुंबई अंडरवर को पुलिस को भी मैनेज करना होता था। इसलिए बहुत से पुलिस वाले इनडायरेक्टली मुंबई अंडरवर की मदद भी किया करते थे। इधर दाऊद के पिता इब्राहिम कासकर मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच में हेड कॉन्स्टेबल थे। उन दिनों मुंबई पुलिस में हेड कॉन्स्टेबल की इज्जत बड़े अफसरों से भी ज्यादा होती थी क्योंकि ग्राउंड पर इन्हीं लोगों का काम रहता था। इसलिए गैंगस्टर हाजी मस्तान और करीम लाला का भी दाऊद के पिता इब्राहिम कास्कर के साथ उठना बैठना था। जहां दूसरे पुलिस वाले करीम लाला के घर से जेबें भरकर जाते थे। वहीं इब्राहिम कासकर करीम लाला से पैसे का लालच नहीं करते थे और अपनी ₹75 की सरकारी तनख्वाह से ही काम चलाते थे। इसलिए इब्राहिम कासकर एक अकेले पुलिस वाले थे जिनकी करीम लाला इज्जत करता था और उम्र में बड़ा होने के बाद भी करीम लाला इब्राहिम को भाई कहकर बुलाता था। इसलिए जब दाऊद का जन्म हुआ तो करीम लाला ने ही दाऊद के जन्म की दावत स्पॉन्सर की। दाऊद के बाद इब्राहिम के 10 बच्चे और होते हैं। लेकिन एक सैलरी में इतने बच्चों को पालना इब्राहिम के लिए काफी चैलेंजिंग हो रहा था। कई बार तो बच्चों को खाने के लिए कुछ भी नहीं मिल पाता था। लेकिन इब्राहिम ने दाऊद को अपने बाकी बच्चों से ज्यादा प्रायोरिटी दी। जहां दाऊद के दूसरे भाई म्युनिसिपालिटी स्कूल में पढ़ने के लिए जाते थे और बहन उर्दू स्कूल में पढ़ने के लिए जाती थी। तब दाऊद का एडमिशन नागपाड़ा के अहमद सेलर हाई स्कूल में करवाया गया। दाऊद पर इब्राहिम की मेहरबानी के पीछे निराले शाह बाबा की भविष्यवाणी थी। जिसमें उन्होंने कहा था कि इब्राहिम का दूसरा बेटा यानी कि दाऊद आगे चलकर काफी पावरफुल, फेमस और पैसे वाला बनेगा। इब्राहिम को निराले शाह बाबा पर पूरा भरोसा था, विश्वास था। इसलिए बाकी बच्चों के मुकाबले इब्राहिम ने दाऊद को अच्छे स्कूल में पढ़ने के लिए भेजा। दाऊद के सिक्स्थ क्लास में पहुंचने तक सब कुछ ठीक चल रहा था। लेकिन 1966 में इब्राहिम कासकर पुलिस से सस्पेंड हो जाते हैं। यह साफ नहीं है कि ऐसा क्यों हुआ था। पर माना जाता है कि एक हाई प्रोफाइल मर्डर केस को सॉल्व करने में फेल होने की वजह से उन पर यह एक्शन लिया गया था। इब्राहिम कासकर के सस्पेंड होने के बाद घर के हालात
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Speaker A
में रहते थे। लेकिन इब्राहिम के पिता यानी दाऊद के दादा हसन कास्कर मुंबई के डोंगरी में एक हेयर कटिंग सेलून चलाते थे। इसलिए इब्राहिम ने भी बॉम्बे के डोंगरी में मौजूद टेमकर मोहल्ले में अपना घर बना लिया। यहां 10/10 स्क्वायर फीट के घर में
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Speaker A
इब्राहिम अपनी बीवी अमीना और 2 साल के बेटे साबिर के साथ रहा करते थे। और इसी घर में दाऊद का जन्म होता है। अंडरवर्ड डॉन दाऊद इब्राहिम 1993 [संगीत] बॉम्बे सिर ब्लास्ट मास्टरमाइंड दाऊद इब्राहिम दाऊद इब्राहिम दाऊद इब्राहिम
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Speaker A
मेरे को कोई कोर्टों में नहीं जाना है। मेरे पास खुद कोर्ट लगी हुई होती है। अनजस्टिस मैं किसी के साथ करता नहीं हूं और ना अपने साथ होने दूंगा। दाऊद के पिता इब्राहिम कासकर मुंबई पुलिस में हेड कास्टेबल थे। लेकिन पुलिस में
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Speaker A
होते हुए भी मुंबई के उस समय के डॉन करीम लाला के साथ उनका उठना बैठना था। जो दाऊद भाई के बाप थे इब्राहिम भाई और बाबा की बहुत दोस्ती थी। और इसी वजह दाऊद भाई भी बाबा का काफी
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Speaker A
इज्जत करता था वो। जब दाऊद का जन्म हुआ तो करीम लाला ने ही दाऊद के जन्म की दावत स्पॉन्सर की। इसलिए दाऊद के अंडरवर्ड डॉन बनने की कहानी को उसके जन्म के बाद की कहानी से नहीं समझा जा सकता क्योंकि असली कहानी उसके जन्म से
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Speaker A
पहले की कहानी में छुपी हुई है। 50 के दशक आते-आते मुंबई देश की आर्थिक राजधानी बन चुकी थी। जहां यूपी और एमपी जैसे राज्यों से बहुत सारे लोग रोजी रोटी कमाने के लिए मुंबई पहुंचने लग जाते हैं। इसलिए मुंबई
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Speaker A
में नॉर्थ इंडियंस लोगों की काफी जनसंख्या बढ़ चुकी थी। इनमें से ज्यादातर लोग इलाहाबाद, कानपुर, रामपुर और जौनपुर से आए थे और इन्हीं लोगों की संख्या ज्यादा थी जो मुंबई में जगह-जगह अपने हिसाब से बस्तियां बसाकर रहने लगे थे। लेकिन मुंबई
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Speaker A
में हर किसी को काम मिलना आसान नहीं था। इसलिए इनमें से बहुत से लोग क्राइम से जुड़ने लग जाते हैं। ऐसे ही नॉर्थ से आए लड़कों में से एक था नन्हे खान जो इलाहाबाद से मुंबई आया हुआ था। नन्हे खान
02:02
Speaker A
आने जाने वाले लोगों को चाकू दिखाकर डराता और उन्हें लूट लिया करता था। मुंबई के भाईखला पुलिस स्टेशन के रिकॉर्ड के हिसाब से नन्हे खान साउथ बॉम्बे का सबसे पहला हिस्ट्री सीटर था। जल्द ही इलाहाबाद से आए हुए और भी लड़के नन्हे खान के गैंग से
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Speaker A
जुड़ जाते हैं। धीरे-धीरे यह गैंग इलाहाबादी गैंग के नाम से फेमस होने लगता है। मैं 1947 के फौरन बाद की बातें कर रहा हूं कि जॉनी गैंग और नन्हे खान का इलाहाबादी गैंग ये दोनों का आपस में टकराव हो रहा
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Speaker A
था। धीरे-धीरे भयकला इलाका मुंबई के क्राइम का सेंटर बन जाता है। जहां इलाहाबाद गैंग के अलावा रामपुरी गैंग, कानपुरी गैंग्स और जॉनी गैंग का भी राइज हो रहा था। इस तरह धीरे-धीरे मुंबई में एक से एक क्रिमिनल गैंग्स का जन्म होता है। लेकिन बॉम्बे पर
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Speaker A
हुकूमत करने वालों में तीन लोग सबसे ज्यादा खास माने जाते हैं। एक हाजी मस्तान, दूसरा वरद राजन, मुदिलियार उर्फ वर्दा भाई और तीसरा करीम लाला पठान। जल्द ही दक्षिण मुंबई में [संगीत] घर-घर में करीम लाला का नाम जाना जाने लगा। हाजी
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Speaker A
मस्तान का पूरा नाम मस्तान हैदर मिर्जा था जिसका जन्म 1926 में तमिलनाडु के एक छोटे से गांव पन्नाम में हुआ था। बॉम्बे के शुरुआती दिनों में हाजी अपने पिता के साथ मैकेनिक का काम करता था। फिर 18 साल की
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Speaker A
उम्र में बॉम्बे डॉग्स पर कुली का काम करने लग जाता है। यहां उसने देखा कि कैसे डॉग्स पर आने वाले सामान पर कस्टम ड्यूटी लगती है। हाजी ने सोचा कि अगर यह कस्टम ड्यूटी ना देनी पड़े तो कितना मुनाफा
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Speaker A
कमाया जा सकता है। इसी इललीगल काम में हाजी मस्तान आगे चलकर एक बड़ा आदमी बन जाता है। लेकिन मस्तान को अपने इललीगल कामों के लिए गुंडों वाली मसल पावर भी चाहिए थी। इसलिए उसकी नजर अब थी वरद राजजन
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Speaker A
डॉन पर। जिस वक्त हाजी मस्तान बॉम्बे डाकयार्ड्स पर काम किया करता था। लगभग उसी दौर में वरद राजन मुदलियार विक्टोरिया टर्मिनस पर कुली का काम करता था। वरद राजन उर्फ वर्दा भाई भी तमिलनाडु के वेलोर कस्बे से बॉम्बे आया था। लेकिन जल्द पैसे
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Speaker A
कमाने के लिए उसकी दोस्ती चोरों से हो जाती है। 1952 में जब शराब पर बैन लगा तो वर्धा भाई को पैसे कमाने का एक बड़ा मौका मिल जाता है। उन दिनों बॉम्बे का एंटॉप हिल एरिया और धारावी गरीबों की बस्ती हुआ
04:08
Speaker A
करती थी। यहीं वरद राजन उर्फ़ वर्दा भाई ने अपने अवैध शराब का प्रोडक्शन शुरू कर दिया। उसके काम में पुलिस दखल ना दे इसलिए वो पुलिस की जेब गर्म भी अब करने लगा और इस तरह से वर्दा की शोहरत जो है
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Speaker A
तमिलनाडु में फैल गई। लोग आके बंबई में जमा होने लगे। लाखों लोगों ने यानी धारावी की बस्ती बाकायदा बहुत से लोग जो हैं ये वर्दा को अपना लीडर कहते थे और ये सब के सब वर्दा की तरफ बहुत ही शुक्रगुजार थे।
04:32
Speaker A
इस कदर ज्यादा ये लोग वर्दा के वदार हो गए थे कि अब कितने सारे जवान अपनी जाने इस पे कुर्बान करने को तैयार हो गए धीरे-धीरे इसी धंधे से वरद राजजन सेंटर बॉम्बे का डॉन बन जाता है। इस तरह तमिलनाडु से आए
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Speaker A
हुए दो डॉन्स यानी कि हाजी मस्तान और वरद राजजन की आपस में दोस्ती हो जाती है। जहां हाजी मस्तान का साउथ बॉम्बे और वेस्ट बॉम्बे पर राज था तो वर्दा भाई सेंट्रल बॉम्बे का डॉन था। लेकिन इस तगड़ी में अब
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Speaker A
एक और नाम जुड़ने वाला था और उसका नाम था करीम लाला पठान। कोई पुख्ता तौर पर नहीं जानता कि अब्दुल करीम खान उर्फ़ करीम लाला बॉम्बे कब आया। माना जाता है कि करीम लाला अपने 30ज में पेशावर से बॉम्बे आया होगा।
05:12
Speaker A
जहां वह साउथ बॉम्बे की बैदा गली में किराए पर रहने लग जाता है। यहां करीम खान गैंबलिंग यानी कि जुए का अड्डा सेट करता है। जुआ खेलने वाले लोग उससे पैसे भी उधार लेते थे। मुनाफा कमाने के लिए उसने एक
05:24
Speaker A
नियम बनाया कि उधार लेने वाले लोग महीने की 10 तारीख को उसे ब्याज का पैसा जरूर देंगे। ऐसे में हर महीने की 10 तारीख को उसका गल्ला पैसों से बढ़ जाता। इससे मोटिवेट होकर उसने पैसे उधार देने को ही
05:35
Speaker A
अपना बिजनेस बना लिया और इस तरह करीम खान से वह करीम लाला बन जाता है। इस तरह पठान कम्युनिटी के लोग बॉम्बे में सेट हो जाते हैं और धीरे-धीरे साउथ बॉम्बे में करीम लाला का रुतबा बढ़ने लग जाता है। करीम
05:47
Speaker A
लाला का नाम इतना बड़ा हो जाता है कि सिर्फ उसके नाम से ही लोगों को डराया जा सकता था और कामों को चुटकियों में करवाया जा सकता था। जैसे ही मकान मालिक कहता अब तो लाला को बुलाना पड़ेगा। किराएदार घर छोड़ देते।
06:01
Speaker A
करीम के काम में मुंबई पुलिस के भी बहुत से पुलिस वाले इनवॉल्व थे। करीम लाला की इस पावर की हाजी मस्तान को भी खबर थी। इसलिए मस्तान ने लाला को एक डील ऑफर की। इस डील के मुताबिक करीम लाला के गैंग के
06:11
Speaker A
लड़के यानी कि पठान गैंग के लड़कों को हाजी मस्तान और डॉग पर आने वाले सामान को प्रोटेक्ट करना होगा। बदले में करीम लाला को कंसाइनमेंट की मार्केट वैल्यू के हिसाब से कट दिया जाएगा। यह डील बॉम्बे अंडरवर की सबसे खतरनाक डील साबित होती है।
06:24
Speaker A
क्योंकि हाजी मस्तान का दिमाग और करीम लाला की मसल पावर दोनों अब अलायंस में आ चुकी इललीगल काम धंधे होने की वजह से मुंबई अंडरवर को पुलिस को भी मैनेज करना होता था। इसलिए बहुत से पुलिस वाले इनडायरेक्टली मुंबई अंडरवर की मदद भी किया
06:37
Speaker A
करते थे। इधर दाऊद के पिता इब्राहिम कासकर मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच में हेड कॉन्स्टेबल थे। उन दिनों मुंबई पुलिस में हेड कॉन्स्टेबल की इज्जत बड़े अफसरों से भी ज्यादा होती थी क्योंकि ग्राउंड पर इन्हीं लोगों का काम रहता था। इसलिए
06:48
Speaker A
गैंगस्टर हाजी मस्तान और करीम लाला का भी दाऊद के पिता इब्राहिम कास्कर के साथ उठना बैठना था। जहां दूसरे पुलिस वाले करीम लाला के घर से जेबें भरकर जाते थे। वहीं इब्राहिम कासकर करीम लाला से पैसे का लालच
07:00
Speaker A
नहीं करते थे और अपनी ₹75 की सरकारी तनख्वाह से ही काम चलाते थे। इसलिए इब्राहिम कासकर एक अकेले पुलिस वाले थे जिनकी करीम लाला इज्जत करता था और उम्र में बड़ा होने के बाद भी करीम लाला इब्राहिम को भाई कहकर बुलाता था। इसलिए जब
07:13
Speaker A
दाऊद का जन्म हुआ तो करीम लाला ने ही दाऊद के जन्म की दावत स्पॉन्सर की। दाऊद के बाद इब्राहिम के 10 बच्चे और होते हैं। लेकिन एक सैलरी में इतने बच्चों को पालना इब्राहिम के लिए काफी चैलेंजिंग हो रहा
07:24
Speaker A
था। कई बार तो बच्चों को खाने के लिए कुछ भी नहीं मिल पाता था। लेकिन इब्राहिम ने दाऊद को अपने बाकी बच्चों से ज्यादा प्रायोरिटी दी। जहां दाऊद के दूसरे भाई म्युनिसिपालिटी स्कूल में पढ़ने के लिए जाते थे और बहन उर्दू स्कूल में पढ़ने के
07:35
Speaker A
लिए जाती थी। तब दाऊद का एडमिशन नागपाड़ा के अहमद सेलर हाई स्कूल में करवाया गया। दाऊद पर इब्राहिम की मेहरबानी के पीछे निराले शाह बाबा की भविष्यवाणी थी। जिसमें उन्होंने कहा था कि इब्राहिम का दूसरा बेटा यानी कि दाऊद आगे चलकर काफी पावरफुल,
07:49
Speaker A
फेमस और पैसे वाला बनेगा। इब्राहिम को निराले शाह बाबा पर पूरा भरोसा था, विश्वास था। इसलिए बाकी बच्चों के मुकाबले इब्राहिम ने दाऊद को अच्छे स्कूल में पढ़ने के लिए भेजा। दाऊद के सिक्स्थ क्लास में पहुंचने तक सब कुछ ठीक चल रहा था।
08:02
Speaker A
लेकिन 1966 में इब्राहिम कासकर पुलिस से सस्पेंड हो जाते हैं। यह साफ नहीं है कि ऐसा क्यों हुआ था। पर माना जाता है कि एक हाई प्रोफाइल मर्डर केस को सॉल्व करने में फेल होने की वजह से उन पर यह एक्शन लिया
08:14
Speaker A
गया था। इब्राहिम कास्कर के सस्पेंड होने के बाद घर के हालात खराब होते चले जाते हैं। ऐसे में दाऊद के प्राइवेट स्कूल की फीस भरना भी इब्राहिम के लिए अब मुश्किल था। अंत में दाऊद को 10 साल की उम्र में
08:24
Speaker A
ही पढ़ाई छोड़नी पड़ जाती है। जहां इब्राहिम अपने बेटे की पढ़ाई छूटने से परेशान थे, वहीं दाऊद अब बहुत ज्यादा खुश था क्योंकि अब उसे ना स्कूल जाना था, ना पढ़ना था और ना ही होमवर्क करना था। अब वह
08:36
Speaker A
बिना किसी रोक-टोक के दूसरे लड़कों के साथ गली-गली घूम सकता था। बदले हुए हालात में कासकर परिवार को टेमकर मोहल्ला छोड़ना पड़ता है और अब पखमोडिया स्ट्रीट का मुसाफिरखाना उनका नया पता था। इधर दाऊद भी अब छोटे-मोटे क्राइम्स करने लग जाता है।
08:51
Speaker A
उसमें पैसों को लेकर भूख थी और जल्द से जल्द पैसे वाला बनना चाहता था। इसलिए टीनएज में ही एंट्री करने से पहले ही दाऊद छोटी-मोटी चोरियां, चैन, स्नैचिंग और जेब काटने जैसे क्राइम करने लग जाता है। वो बच्चा था मेरे सामने मिलने का क्या
09:05
Speaker A
सवाल है? आपके सामने। हां। राइट? मतलब आपने देखा उसे? बच्चा था बोला। अब उसके अंदर क्या मैं बोतल से दूध भी पिला रहा था क्या? ये बताऊं आपको? मेरे सामने बच्चा था। उसका बाप मेरा दोस्त था। 70ज की शुरुआत में रत्नागिरी खासकर दाऊद
09:20
Speaker A
के गांव मुमका से बड़ी संख्या में मुस्लिम लड़के अब मुंबई के डोंगरी और आसपास के इलाकों में आकर बसने लग जाते हैं। जहां इब्राहिम और कास्कर परिवार ही उनका फर्स्ट पॉइंट ऑफ कांटेक्ट होता था। इन्हीं में से कुछ कोकड़ी मुस्लिम लड़के दाऊद और उसके
09:32
Speaker A
भाई साबिर के साथ जुड़ जाते हैं। 1970 आते-आते दाऊद अपने भाई साबिर इब्राहिम कास्कर और मुमका से आए लड़कों के साथ मिलकर एक गैंग बना लेता है। अब यह गैंग बोहरा कम्युनिटी के बिजनेसमैन लोगों से जबरन वसूली करने का काम करने लग जाता है।
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Speaker A
1972 और 73 तक दाऊद की गैंग जबरन वसूली के काम में लग जाती है। कुछ दिन बाद दाऊद की गैंग ने मुंबई के मोहटा मार्केट में एक दुकान खोल लिया। जहां वे इंपोर्टेड घड़ियां बेचने के नाम पर लोगों को चूना
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Speaker A
लगाने लग जाते हैं। इन सब चीजों से दाऊद और उसके गैंग का कॉन्फिडेंस बढ़ता जा रहा था और उन्हें लगने लगा था कि वह इस शहर में अब कोई भी क्राइम कर सकते हैं। लेकिन दाऊद अभी भी एक छोटा गुंडा था क्योंकि
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Speaker A
डोंगरी का असली डॉन अभी भी बासू दादा था। खुद दाऊद भी बासू की इज्जत करता था। बाकी गैंगेस्टर्स की तरह ही बासू दादा भी अपनी टीनएज में बॉम्बे पहुंचा था। कम उम्र में भारी भरकम काम करने से बासू का शरीर एक
10:18
Speaker A
रेसलर जैसा बन चुका था। बॉडी बिल्डिंग उसका पैशन बन चुकी थी और धीरे-धीरे उसने अपनी उम्र के लड़कों के साथ मिलकर ट्रकों से इंपोर्टेड फैब्रिक और इलेक्ट्रॉनिक्स का सामान चोरी करना शुरू कर दिया। फिर हाजी मस्तान की तरह ही इंपोर्टेड सामानों
10:30
Speaker A
की स्मगलिंग करने लगा जिससे वह जल्द ही टॉप के लोगों में पहुंच जाता है। जहां हाजी मस्तान को प्रोटेक्शन सपोर्ट के लिए करीम लाला और वर्दा भाई की जरूरत पड़ती थी, वहीं बासू दादा अपना सारा काम खुद हैंडल करता था। बासू दादा ने तिली मोहल्ले
10:43
Speaker A
में अपना एक अखाड़ा भी बना रखा था। यहीं से वह डोंगरी के इलाके पर भी राज किया करता था। उसके पास खालिद पहलवान, रहीम पहलवान और लाल खान जैसे पहलवानों की एक तगड़ी हुआ करती थी। इसलिए डोंगरी में बासू
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Speaker A
दादा और उसके पहलवानों का इतना खौफ था कि लोग उन्हें देखकर अपना रास्ता बदल लेते थे। लोकल मुंबई पुलिस भी बासू दादा से दूर रहती थी। कई बार पुलिस को जेब कतरों, साइकिल चोर या इललीगल कसीनो चलाने वालों
11:05
Speaker A
को पकड़ना होता था तो पुलिस भी बासू दादा की मदद ले लिया करती थी। बदले में बासू दादा पुलिस से अपने काम की इंफॉर्मेशन निकाल लेता था। उन दिनों मुंबई पुलिस फोर्स में बहुत कम मुस्लिम्स हुआ करते थे।
11:15
Speaker A
इसलिए दाऊद के पिता इब्राहिम जो मुंबई पुलिस सीआईडी और क्राइम ब्रांच में भी पोस्टेड रहे थे वे इन लोकल गुंडों के लिए काफी काम के आदमी हो सकते थे। बासू दादा चाहता था कि इब्राहिम कासकर रिटायरमेंट के बाद उसके लिए काम करें। लेकिन इब्राहिम
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Speaker A
बासू दादा का ऑफर रिजेक्ट कर देते हैं। इसी बीच एक दिन बासू का एक आदमी हामिद दाऊद के दोस्त को पीट देता है। यह बात दाऊद को बर्दाश्त नहीं होती और वह हामिद को पीटने पहुंच जाता है। लेकिन बासू दादा
11:38
Speaker A
की वजह से दाऊद इस बार सिर्फ धमकी देकर ही लौट आता है। लेकिन जब यह बात बासू दादा को पता चलती है तो वह आग बबूला हो जाता है और इब्राहिम कास्कर और दाऊद के भाई साबिर को अपनी बैठक में आने को कहता है और सबके
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Speaker A
सामने इब्राहिम कास्कर को नमक हराम और बहुत बुरा भला कहकर बेइज्जत करता है। घर लौटकर साबिर यह सारा वाक्या दाऊद इब्राहिम को बता देता है। इसलिए अब दाऊद का नेक्स्ट टारगेट था बासू दादा पर हमला। एक दिन बासू
12:02
Speaker A
दादा जुम्मे की नमाज के बाद अपनी Mercedes की तरफ लौट रहा था। तभी पीर खान स्ट्रीट पर दाऊद की गैंग ने सोडा बोतलों और इलेक्ट्रिक बल्ब से बासू पर हमला कर दिया। बासू ने भी कभी नहीं सोचा था कि कोई उस पर
12:13
Speaker A
हमला कर सकता है और वह भी सोडा बोतल से। इस हमले में बुरी तरह घायल हो चुका बासु और उसका पहलवान वहां से भाग जाते हैं। दाऊद और उसकी गैंग यहीं पर नहीं रुकते हुए तेली मोहल्ले में बासू दादा के अखाड़े पर
12:23
Speaker A
पहुंचते हैं और उसे पूरी तरह बर्बाद कर देते हैं। अब तक बासू का धंधा उसके खौफ पर चलता था लेकिन दाऊद इब्राहिम ने बासू दादा की रेपुटेशन इतनी खराब कर दी कि बासू दादा अपना स्टेटस दोबारा से रिक्लेम नहीं कर
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Speaker A
पाया और अब डोंगरी का नया डॉन बनता है दाऊद इब्राहिम। मेरी याद से जंग फर मारे। क्या कहने?
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Speaker A
अब दाऊद की नजर थी गैंगस्टर हाजी मस्तान के साम्राज्य पर। मस्तान ने करीम लाला यानी पठान गैंग के लोगों से। दाऊद के दो साथियों को पिटवाया था। दाऊद को टिप मिली कि मस्तान का ₹5 लाख मस्जिद बंदर के एक
12:59
Speaker A
ऑफिस से मालाबार हिल्स पर मौजूद मस्तान के घर पर ट्रांसफर किया जाना है और यह पैसे दो मारवाड़ी ट्रांसफर करने वाले थे। इसलिए दाऊद के प्लान के मुताबिक जैसे ही पैसे की गाड़ी करना बंदर ब्रिज के पास पहुंचती है,
13:11
Speaker A
इसे लूट लिया जाता है। लेकिन दाऊद और उसके साथियों को नहीं पता था कि उन्हें यह गलत टिप मिली है। क्योंकि यह पैसा हाजी मस्तान का नहीं था बल्कि माना जाता है कि यह पैसा मेट्रोपॉलिटन कोऑपरेटिव बैंक का था।
13:24
Speaker A
अनजाने में ही सही लेकिन दाऊद इब्राहिम ने अब एक बड़ी बैंक डकैती को अंजाम दे दिया था। अगले दिन के न्यूज़पेपर्स में इस डकैती की हेडलाइन बन जाती है। यह दाऊद का पहला बड़ा क्राइम था और अभी उसकी उम्र
13:36
Speaker A
पूरे 19 साल भी पूरी नहीं हुई थी। इधर मुंबई पुलिस करीम लाला की पठान गैंग से परेशान थी। इसलिए पुलिस ने करीम लाला के पर कतरने का फैसला कर लिया। लेकिन डोंगरी पुलिस स्टेशन के सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर रणवीर लिखा समझ नहीं पा रहे थे कि करीम
13:50
Speaker A
लाला को कैसे नापा जाए। रणवीर लिखा की दोस्ती एक लोकल जर्नलिस्ट इकबाल नतिक से हुआ करती थी। इकबाल ने इंस्पेक्टर लिखा को पठान गैंग से निपटने के लिए दाऊद की मदद लेने का सजेशन दिया। दरअसल इकबाल की रेफो
14:02
Speaker A
एक ईमानदार पत्रकार की थी जो बॉम्बे की गैंग्स के बारे में बिना किसी के डर के लिखा करता था। इकबाल नतिक और दाऊद दोनों ही रत्नागिरी से आते थे और एक दूसरे की हिम्मत की रिस्पेक्ट किया करते थे। नतिक
14:13
Speaker A
की नजर में दाऊद एक अंडरडॉग की तरह था जो अकेले ही बड़ी-बड़ी गैंग्स का सामना कर रहा था। इसलिए नतिक अपने अखबार में दाऊद को कम्युनिटी के एक प्रोटेक्टर की तरह और अच्छे इंसान की तरह पेश करता था। दाऊद हर
14:24
Speaker A
दिन नतिक से मिलने उसके ऑफिस जाया करता था और उसे पठान गैंग के मेंबर्स की खबरें भी देता था। इसलिए दोनों अब अच्छे दोस्त बन गए थे। दाऊद इब्राहिम और उसके भाइयों के काफी क्रोस भी गिना जाता था क्योंकि उसको पुलिस
14:36
Speaker A
की हेल्प की जरूरत थी। अकेला पत्रकार इतने बदमाशों से लड़ नहीं सकता था। तो उसकी जो शुरुआती अटैचमेंट थी वो डी कंपनी के साथ थी। हालांकि इंस्पेक्टर अ लिखा ने शुरुआत में इस सजेशन को प्रैक्टिकल नहीं माना कि
14:49
Speaker A
उन्हें पठान गैंग को निपटाने के लिए दाऊद की मदद लेनी चाहिए। लेकिन दाऊद के कारनामों को देखते हुए इंस्पेक्टर लिखा ने दाऊद के साथ एक अनऑफिशियल टीम बना ली। अब दाऊद का काम पठान गैंग को खत्म करना था और
15:00
Speaker A
इस काम में उसे पुलिस का पीछे से सपोर्ट मिल रहा था। यह पुलिस और दाऊद दोनों के लिए विनविन सिचुएशन थी। इसी बीच 1977 में एक बड़ा कांड होता है। दरअसल पठान गैंग के लोग एक गेस्ट हाउस में अपना स्मगलिंग का
15:12
Speaker A
सामान छुपाया करते थे। इसी गेस्ट हाउस में एक नया मैरिड कपल भी रहने के लिए आया था। जिस पर पठान गैंग के अय्यूब लाला और सईद की नजर पड़ जाती है। एक रात दोनों उनके कमरे में जबरन घुसकर महिला का गैंगरेप कर
15:24
Speaker A
देते हैं और गवाह को मिटाने के लिए पति की भी हत्या कर देते हैं। इस कपल की पठान गैंग से कोई दुश्मनी नहीं थी। उन्होंने यह हत्याएं सिर्फ हवस के लिए की थी। इस खबर को इकबाल नतिक अपने टेबल में छाप देते
15:36
Speaker A
हैं। जिसके बाद पुलिस पठान गैंग के अयूब लाला, बाटला और सईद को गिरफ्तार कर लेती है। लेकिन कुछ महीने जेल में बिताने के बाद ही यह आरोपी बाहर आ जाते हैं और इन्होंने अब इकबाल नतिक को मारने का प्लान
15:47
Speaker A
बना लिया। इस प्लान को अंजाम दिया गया 17 अगस्त 1977 की देर रात। पठान गैंग के लोगों ने नतिक को अमीरजादा के घर ले जाकर पीटा और टॉर्चर किया। बाद में महिम के एक सुनसान इलाके में फेंक दिया। जहां एक
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Speaker A
पुलिस वाले की नतिक पर नजर पड़ती है जो उसे हॉस्पिटल में एडमिट करवा देते हैं। जहां पुलिस ने नतिक का स्टेटमेंट ले लिया। हालांकि नतिक को इतनी गहरी चोटें आ चुकी थी कि उनकी इलाज के दौरान मौत हो जाती है।
16:11
Speaker A
इस घटना का पुलिस इंस्पेक्टर रणवीर लिखा और दाऊद इब्राहिम दोनों पर गहरा असर पड़ता है क्योंकि दोनों ही नतिक इकबाल को बहुत पसंद किया करते थे और दोस्त थे। इसलिए करीम लाला की पठान गैंग को निपटाने के लिए
16:22
Speaker A
इंस्पेक्टर लिखा और दाऊद इब्राहिम के पास एक मकसद भी था और वह मकसद था अपने दोस्त इकबाल नतीक की मौत का बदला। इससे पुलिस को फायदा यह हुआ कि इलाके से करीम लाला की पठान गैंग साफ हो जाती है और दाऊद को
16:34
Speaker A
इसमें फायदा यह था कि उसके राइवल गैंग का सफाया होना था जिससे मुंबई अंडरवर में उसकी पोजीशन और मजबूत हो जाती। अब जैसे-जैसे पुलिस टारगेटिंग से पठान गैंग कमजोर होती गई, वैसे-वैसे दाऊद का रुतबा मजबूत होता चला जाता है।
16:48
Speaker A
इस आदमी ने वो सारी टेरिटरीज़ तोड़ दी जो के धंधे की वैल्यूज़ हुआ करती थी। उन्होंने खत्म किया कि नहीं अब [संगीत] यह आपका इलाका है और यह मेरा इलाका है ये नहीं चलेगा जिसमें जितनी ताकत है वो उतनी दूर
16:59
Speaker A
तक जाएगा। और वो दाऊद ने किया। इस तरह 25 साल का होते-होते दाऊद इब्राहिम ने बॉम्बे की गैंग्स में अपनी जगह बना ली। अब हाजी मस्तान भी उसे बड़े गैंगस्टर्स की मीटिंग्स में बुलाने लगता है। ऐसे ही एक
17:10
Speaker A
मीटिंग में हाजी मस्तान ने करीम लाला के पठान गैंग और दाऊद इब्राहिम के गैंग के बीच सुलह कराने का काम किया। दोनों गैंग्स ने कुरान पर हाथ रखकर कसम खाई कि अब वे एक दूसरे के मेंबर्स को नहीं मारेंगे और ना
17:21
Speaker A
ही एक दूसरे के काम में दखल देंगे। इसलिए अब दाऊद का पूरा फोकस स्मगलिंग के बिजनेस पर बढ़ जाता है। जिसमें उसे खालिद पहलवान का पूरा सपोर्ट मिल रहा था। इससे पहले खालिद पहलवान बासू दादा के साथ काम करता
17:32
Speaker A
था। लेकिन बासू दादा को हराने के बाद दाऊद इब्राहिम ने खालिद पहलवान को उसकी जगह पर बिठा दिया था। जिससे खालिद पहलवान दाऊद का वफादार बन जाता है। इस तरह दाऊद इब्राहिम अब बॉम्बे से लेकर दमन पोर्ट तक सोने,
17:44
Speaker A
चांदी और इलेक्ट्रॉनिक के सामान की तस्करी करने लग जाता है। जिसे पहले बाजू दादा किया करता था। लेकिन स्मगलिंग के बिजनेस में दाऊद इब्राहिम दूसरे गैंगस्टर्स के मुकाबले बहुत ज्यादा आगे निकलता जा रहा था। क्योंकि उसकी लिमिट पोर्ट्स को पार
17:56
Speaker A
करके अब एयरपोर्ट्स तक पहुंच चुकी थी। दाऊद के लोग कभी मिठाई के डिब्बों में तो कभी ह्यूमन कैरियर्स की मदद से एयरपोर्ट पर गोल्ड स्मगल करते थे। लेकिन 1980 में एक दिन एयरपोर्ट पर स्मगलिंग का सामान पकड़ लिया जाता है। जिसके आरोप में दाऊद
18:09
Speaker A
इब्राहिम को अरेस्ट कर लिया जाता है। यह पहला मौका था जब दाऊद इब्राहिम की अरेस्ट हुई। लेकिन दाऊद अब तक सरकारी मशीनरी को पूरी तरह से पेनिट्रेट कर चुका था। मतलब पुलिस से लेकर दूसरे सरकारी डिपार्टमेंट्स में उसके लोग बैठे हुए थे। इस केस में भी
18:23
Speaker A
दाऊद सारे गवाहों को खरीद लेता है। इसलिए 3 साल बाद 1983 में दाऊद इब्राहिम को सभी आरोपों से बरी कर दिया जाता है। इधर दाऊद की गैंग के बिजनेस को बढ़ता हुआ देख करीम लाला की पठान गैंग के अमीरजादा और आलमजेब
18:35
Speaker A
दाऊद के भाई साबिर को निपटाने का प्लान बना लेते हैं। अमीरजादा को यह खबर मिल चुकी थी कि साबिर अपनी गर्लफ्रेंड चित्रा से मिलने जाएगा और उस समय अकेला होगा। जब साबिर अपनी गर्लफ्रेंड से मिलने के लिए घर
18:46
Speaker A
से अकेले निकला तो अमीरजादा आलमजेब मनोहर उर्फ मान्य सुरवे और मामूर खान ने साबिर को गोलियों से भून डाला। इसलिए जब दाऊद जेल से बाहर आया तब उसे कंट्रोल करने वाला कोई नहीं बचा था और वो अपनी गैंग का अकेला
18:59
Speaker A
बॉस बन जाता है। यही गैंग आगे चलकर डी कंपनी बनती है। इधर 1981 में खालिद पहलवान एक्टिव माफिया लाइफ से रिटायर हो चुका था। लेकिन जाने से पहले उसने मुंबई को उभरते हुए लोकल डों्स जैसे रमा नायक, अरुण गावली
19:12
Speaker A
और बाबू रेशम जैसे हिंदू गैंगस्टर्स को दाऊद इब्राहिम के गैंग में शामिल करवा दिया। नॉन मुस्लिम्स मेंबर्स की एंट्री के बाद अब दाऊद की गैंग बॉम्बे की दूसरी गैंग्स के मुकाबले कई ज्यादा मजबूत हो जाती है। अब दाऊद इब्राहिम को अपने भाई
19:24
Speaker A
साबिर इब्राहिम की मौत का बदला लेना था। हालांकि पठान गैंग का अमीरजादा पहले से ही पुलिस ने अरेस्ट कर लिया था। लेकिन दाऊद इब्राहिम अमीरजादा को मौत की घाट उतारना चाहता था। इसलिए वह राजन नायर उर्फ बड़ा राजन से मदद मांगता है। बड़ा राजन 1975 के
19:39
Speaker A
आसपास ठाणे स्थित हिंदुस्तान अपेरल नाम की एक फैक्ट्री में टेलर का काम किया करता था। लेकिन इससे राजन का घर नहीं चल पा रहा था। इसलिए एक्स्ट्रा पैसे कमाने के लिए राजन ने सरकारी और प्राइवेट ऑफिसिसेस से टाइप राइटर चोरी करके चोर बाजार में बेचना
19:52
Speaker A
शुरू कर दिया। इस तरह वो टाइप राइटर चोर के नाम से भी फेमस हो जाता है। लेकिन धीरे-धीरे बड़ा राजन भी अब जबरन वसूली के काम में लग जाता है और अपनी गोल्डन गैंग बना लेता है। बड़ा राजन की बहादुरी में
20:02
Speaker A
दाऊद इब्राहिम को काफी पोटेंशियल दिखती है और वो राजन को साबिर की मौत का बदला लेने की बात कहता है। इस तरह दाऊद इब्राहिम के गैंग में बड़ा राजन की एंट्री होती है। राजन एक शूटर के माध्यम से अमीरजादा को
20:13
Speaker A
कोर्ट रूम में ही शूट करवाने का प्लान बनाता है और डेविड परदेसी नाम के एक लड़के को इस काम के लिए हायर करता है। 6 सितंबर 1983 के दिन डेविड परदेसी ने प्लान के हिसाब से अमीरजादा को कोर्ट रूम में ही
20:25
Speaker A
शूट कर दिया। लेकिन इस काम में डेविड पकड़ा जाता है। क्योंकि परदेसी कोई अनुभवी अपराधी नहीं था इसलिए वो आसानी से सरकारी गवाह बनकर दाऊद इब्राहिम और बड़ा राजन का नाम पुलिस को दे देता है। मुंबई पुलिस इन
20:37
Speaker A
दोनों को ही हत्या की साजिश के आरोप में दोबारा से अरेस्ट कर लेती है। यहां एक इंटरेस्टिंग चीज यह थी कि बड़ा राजन के पास दाऊद इब्राहिम के जैसे प्रोटेक्शन नहीं थी और ना ही वह इतना रिसोर्सफुल था।
20:47
Speaker A
जब पठान गैंग को पता चलता है कि अमीरजादा के मर्डर के पीछे राजन नायर है यानी कि बड़ा राजन है तो वह महज 24 दिन के भीतर ही 30 सितंबर 1983 के दिन उसे भी कोर्ट रूम में उसी तरह से मरवा देती है जैसे बड़ा
20:59
Speaker A
राजन ने अमीरजादा को मरवाया था। लेकिन रेडीमेड यूनिफार्म लेके उसको फिट करती हुई शूट करती हुई चंद्रकांत फालक को देके उसको कचहरी में जाके उसने बड़ा राजन को तीन गोलियां मार के ढेर किया। तो जिस तरह बड़ा राजन ने अमीर दादा का मर्डर
21:19
Speaker A
प्लान किया था बिल्कुल उसी तरह पठान गैंग ने ढोलकिया ब्रदर के साथ मिलके बड़ा राजन का मर्डर प्लान [संगीत] किया। इधर सरकारी गवाह बनने की वजह से डेविड परदेसी को पुलिस प्रोटेक्शन दी जा रही थी। आने वाले समय में परदेसी शादी कर दुबई में
21:34
Speaker A
सेटल हो जाता है। लेकिन कई साल बीत जाने के बाद भी दाऊद ने उसका पीछा नहीं छोड़ा। मजबूरन उसे दुबई से भागकर मुंबई वापस आना पड़ता है। लेकिन यहां एक दिन एक होटल के कमरे में डेविड परदेसी की संदिग्ध
21:46
Speaker A
परिस्थितियों में डेड बॉडी पड़ी मिलती है। डेविड परदेसी ने पुलिस को दाऊद का नाम देकर दाऊद से हमेशा के लिए दुश्मनी मोल ले ली थी। इसलिए माना जाता है कि परदेसी के मर्डर के पीछे भी दाऊद का ही हाथ था। और
21:58
Speaker A
जैसे ही डेविल परदेसी अपने भाई के साथ नीचे आता है तो वहां पे गोलियां उसको मार के [संगीत] ढेर कर दिया जाता है और उसके बाद दुबई में फोन लगाया जाता है दाऊद इब्राहिम को और उसको और दो गोलियां चला के
22:09
Speaker A
सुनाया जाता है कि देखिए देव परदेसी का काम हो गया। साल 1984 में गैंगस्टर करीम लाला के भतीजे समाद खान की हत्या हो जाती है। इस हत्या में दाऊद की गैंग का नाम आता है। समाद खान एक बहुत ही क्रूर किस्म का
22:22
Speaker A
इंसान था जिसे लोगों को टॉर्चर करके मारने में मजा आता था। उसकी हरकतों से करीम लाला बहुत परेशान था। क्योंकि जब भी समाज कोई बड़ा कांड करता तो पुलिस पहले करीम लाला को ही उठाकर ले जाती थी। करीम लाला समाज
22:34
Speaker A
से इतना तंग था कि उसने एक अखबार में एक ऐड भी निकलवाया कि उसका समाज से कोई रिश्ता नहीं है। समाद इसे धोखे की तरह देख रहा था। इसलिए करीम लाला से रिश्ता खराब होने पर समाद दाऊद इब्राहिम की तरफ दोस्ती
22:45
Speaker A
का हाथ बढ़ा देता है। समाद ने दाऊद को विश्वास दिला दिया कि साबिर के मर्डर में उसका कोई हाथ नहीं था। शुरू में दाऊद समाद को लेकर डाउट में था। लेकिन वह समाद को अपने गैंग में ले लेता है। लेकिन उसी रात
22:56
Speaker A
समाद को पता चलता है कि दाऊद का भाई नूरा उसके बारे में झूठी अफवाहएं फैला रहा है। गुस्से में पागल समाद नूरा को बेरहमी से पीट-पीट कर घायल कर देता है। एक बार फिर किसी पठान के हाथों अपने भाई की ऐसी हालत
23:08
Speaker A
देख दाऊद अपना सब्र खो देता है और 4 अक्टूबर 1984 के दिन दाऊद उसका भाई अली अंतुले छोटा राजन और अब्दुल हामिद ने मिलकर समाज को गोलियों से छलनी कर दिया। समाद को कुल 19 गोली मारी जाती हैं।
23:21
Speaker A
ऐसी मची समाद को मारने के बाद भी यह लोग इतने घबराए हुए थे कि एक गाड़ी और कुछ हथियार छोड़ के भागे। समाद खान की हत्या बॉम्बे पुलिस के लिए सब्र का आखिरी इम्तिहान साबित होती है। खान जो था एक खूंखार और एक जालिम इंसान
23:36
Speaker A
था। उसको मारने के लिए पूरी ताकत लगी। एक जालिम इंसान था। उसके लिए पूरी ताकत एक साथ हुई उसको मारने के लिए। अब मुंबई पुलिस के इंस्पेक्टर मधुकर जेंडे ने एक-एक करके सभी गैंगस्टर्स को जेल में डालना शुरू कर दिया। सिर्फ दाऊद ही एक ऐसा था जो
23:51
Speaker A
अब भी आजाद था। एक टाइम था जब लोकल पुलिस पठान गैंग को खत्म करने के लिए दाऊद इब्राहिम को सपोर्ट कर रही थी। लेकिन दाऊद के भाई साबिर के मर्डर के बाद जो गैंग वॉर स्टार्ट हुआ उससे बॉम्बे पुलिस की खूब
24:02
Speaker A
किरकिरी हो रही थी। लेकिन अब तक दाऊद बहुत बड़ा आदमी बन चुका था। दाऊद इब्राहिम [संगीत] 41 सालों में दुनिया के सबसे कुख्यात आतंकियों में शामिल हो गया है। बॉम्बे में दाऊद का कद इतना बढ़ चुका था कि पुलिस के लिए उसे जेल में बंद करके
24:16
Speaker A
रखना नामुमकिन सा लगने लगा था। पुलिस प्रशासन के अंदर बहुत से लोग उसके लिए काम कर रहे थे। इसलिए या तो वह पकड़ा नहीं जाता था या पकड़े जाने के बाद उसे एंटीिसिपेटरी बेल मिल जाती थी। लेकिन समाद
24:28
Speaker A
खान की हत्या के बाद मुंबई पुलिस पूरी ताकत से उसके पीछे पड़ जाती है। पुलिस कमिश्नर डी एस सोमन ने दाऊद के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी कर दिया। 1986 की एक रात मुंबई क्राइम ब्रांच की टीम दाऊद को
24:39
Speaker A
पकड़ने के लिए दाऊद के अड्डे मुसाफिरखाना पर रेड मारती है। लेकिन इस बार भी दाऊद को पहले से ही इंफॉर्मेशन मिल जाती है कि पुलिस रेड मारने वाली है। इसलिए पुलिस के पहुंचने से 10 मिनट पहले ही दाऊद इब्राहिम
24:51
Speaker A
अपनी पत्नी महजिन के साथ फरार हो जाता है। पुलिस कमिश्नर सुमन और उनकी टीम हैरान थी क्योंकि इस रेड की इंफॉर्मेशन किसी भी बाहरी आदमी के साथ शेयर नहीं की गई थी। बस दाऊद को पकड़ने के लिए पुलिस ने एक बड़े
25:02
Speaker A
पॉलिटिशियन से परमिशन जरूर ली थी। जिसने पुलिस को दाऊद को जिंदा पकड़ने के इंस्ट्रक्शंस दिए थे। शुरुआती इन्वेस्टिगेशन में पता चला कि दाऊद को 10 मिनट पहले एक कॉल आया था जिससे वह अलर्ट हो गया था। माना जाता है कि यह कॉल दाऊद
25:15
Speaker A
को उसी पॉलिटिशियन ने की थी। इस तरह पुलिस को चकमा देकर दाऊद बॉम्बे से फ्लाइट लेकर दिल्ली के लिए निकल जाता है और फिर वहां से दुबई सेटल हो जाता है। दुबई जाकर दाऊद ने वहीं से मुंबई अंडरवर को चलाना शुरू कर
25:27
Speaker A
दिया। दुबई जाने के बाद दाऊद और एक नए गैंगस्टर छोटा राजन के बीच ऐसा गैंग वार होता है जैसा भारत ने पहले कभी नहीं देखा था। [संगीत] लेकिन आगे की कहानी नेक्स्ट यानी कि सेकंड एपिसोड में यह दाऊद पर बनाई हमारी सीरीज
25:49
Speaker A
का पहला एपिसोड था। तब तक इस चैनल को सब्सक्राइब कर लीजिए और संजय दत्त और गुलशन कुमार की वीडियोस को देख लीजिए। जिनमें हमने अंडरवर के बारे में काफी डिटेल में बताया है। इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।
Topics:दाऊद इब्राहिममुंबई अंडरवर्ल्डकरीम लालाहाजी मस्तानवरद राजनगैंगस्टरडोंगरीमुंबई पुलिस1993 बॉम्बे ब्लास्टअवैध शराब

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