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Real Story of Anant Singh, Surajbhan Singh and Viveka Pahalwan and | SMS Documentaries

अनंत सिंह, सूरजभान सिंह और विवेका पहलवान की सच्ची कहानी, बिहार के बाहुबली राजनीति और गैंगवार की झलक।

Key Takeaways

  • बिहार की राजनीति और अपराध में गहरा मेल है।
  • अनंत सिंह और उनके परिवार का बाहुबली और राजनीतिक प्रभाव बड़ा था।
  • गैंगवार और जातिगत राजनीति मोकामा क्षेत्र की पहचान थी।
  • राजनीतिक संरक्षण के कारण बाहुबली नेताओं पर कार्रवाई मुश्किल थी।
  • वीडियो में बाहुबली जीवन की सच्चाई और उसकी जटिलताएं उजागर होती हैं।

What the video covers

  • अनंत सिंह का जन्म 5 जनवरी 1967 को पटना जिले के लदमा गांव में हुआ।
  • अनंत सिंह ने छोटी उम्र में पढ़ाई छोड़कर साधुओं के बीच जीवन बिताया।
  • उनके बड़े भाई विराची सिंह की हत्या के बाद अनंत सिंह ने बदला लिया।
  • अनंत सिंह ने तस्कर सम्राट कामदेव सिंह के साथ काम शुरू किया, जो बिहार का पाब्लो एस्कोबार था।
  • दिलीप सिंह, अनंत के भाई, ने राजनीति में कदम रखा और मोकामा से विधायक बने।
  • अनंत सिंह और विवेका पहलवान के बीच पुरानी रंजिश के कारण गैंग वार हुआ।
  • सूरजभान सिंह ने दिलीप सिंह के गैंग में शामिल होकर मोकामा क्षेत्र में प्रभाव बढ़ाया।
  • राजनीति और अपराध के बीच गहरा संबंध था, जिसमें बाहुबली नेताओं का दबदबा था।
  • अनंत सिंह के खिलाफ कई बार कार्रवाई हुई लेकिन वे बच निकलते रहे।
  • वीडियो में बिहार की बाहुबली राजनीति, गैंगस्टर गतिविधियां और स्थानीय जातिगत राजनीति की झलक मिलती है।

Answers

Questions about this video

अनंत सिंह का शुरुआती जीवन कैसा था?

अनंत सिंह का जन्म 5 जनवरी 1967 को पटना जिले के लदमा गांव में हुआ था। उन्होंने पढ़ाई छोड़कर छोटी उम्र में साधुओं के बीच जीवन बिताया।

अनंत सिंह और सूरजभान सिंह के बीच क्या संबंध था?

अनंत सिंह और सूरजभान सिंह दोनों बाहुबली नेता थे, जिनके बीच मोकामा क्षेत्र में कड़ी टक्कर और गैंगवार हुई। सूरजभान ने दिलीप सिंह के गैंग में शामिल होकर प्रभाव बढ़ाया।

अनंत सिंह के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई?

अनंत सिंह पर कई बार पुलिस कार्रवाई हुई और उन्हें गिरफ्तार भी किया गया, लेकिन राजनीतिक संरक्षण के कारण वे कई बार बच निकलते रहे।

Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:00
Speaker A
5 जनवरी 1967 को पटना जिले की बाड़ तहसील में आने वाले लदमा गांव में किसान चंद्रदीप सिंह के यहां एक बेटे का जन्म होता है। जिसका नाम रखा जाता है अनंत सिंह। अनंत सिंह आनंद सिंह अनंत सिंह अनंत सिंह।
00:15
Speaker A
अनंत सिंह चंद्रदीप के यहां कई घोड़े बगियां थी और अच्छी खासी जमीन थी। अनंत चंद्रदीप सिंह का चौथा बेटा था और पढ़ाई में बिल्कुल भी मन नहीं लगता था। इसलिए चौथी क्लास के बाद ही अनंत ने स्कूल छोड़ दिया। एक दिन गांव
00:28
Speaker A
अनंत सिंह चंद्रदीप के यहां कई घोड़े बगियां थीं और अच्छी खासी जमीन थी। अनंत चंद्रदीप सिंह का चौथा बेटा था और पढ़ाई में बिल्कुल भी मन नहीं लगता था। इसलिए चौथी क्लास के बाद ही अनंत ने स्कूल छोड़ दिया। एक दिन गांव।
00:41
Speaker A
हरिद्वार आकर अनंत साधुओं के बीच रहने लगा। इसी कड़ी में अनंत अयोध्या चला जाता है और साधुओं के साथ रहने लगता है। एक दिन अनंत के सामने ही कुछ साधुओं के बीच झगड़ा हो जाता है। जिसे देखकर अनंत सिंह का मोह
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Speaker A
में एक साधु आता है। अनंत को बाबा बनने की ललक थी, इसलिए इस बाबा के साथ ही हरिद्वार के लिए निकल जाता है बिना घर पर बताए। छोटी सी उम्र में ही साधु बन गए। इस वक्त अनंत की उम्र मात्र 9 साल थी।
01:22
Speaker A
चुके थे। लेकिन गांव के ही मुन्नी लाल सिंह ने विराची सिंह की हत्या कर दी और गंगा पार जाकर जंगलों में छिप गया। इसके बाद अनंत सिंह ने भी चुन्नी लाल के कई परिवार वालों को मौत के घाट उतार दिया।
01:37
Speaker A
हरिद्वार आकर अनंत साधुओं के बीच रहने लगा। इसी कड़ी में अनंत अयोध्या चला जाता है और साधुओं के साथ रहने लगता है। एक दिन अनंत के सामने ही कुछ साधुओं के बीच झगड़ा हो जाता है। जिसे देखकर अनंत सिंह का मोह।
01:51
Speaker A
की हत्या कर दी। हालांकि यह घटना पुलिस रिकॉर्ड्स में दर्ज नहीं है लेकिन अनंत सिंह इस हत्या को एक्सेप्ट करते हुए कहते हैं कि वे गंगा पार तैर कर गए और अपने भाई की हत्या का बदला लिया। अनंत सिंह को
02:04
Speaker A
भंग हो जाता है और वो वापस अपने गांव लौट आता है। सो चले रह भैया मोर सो चले रह भैया मोर नेता के जोरदार हो। इस वक्त तक अनंत सिंह के बड़े भाई विराची सिंह गांव के मुखिया और बड़े जमींदार बन।
02:17
Speaker A
लेकिन एआई के बाद इंग्लिश सीखना एकदम आसान हो गया है। जैसे इस ऐप को ही देख लीजिए। माय नेम इज श्याम। मी टुमारो गोइंग गांव कजिन सिस्टर मैरिज। आपको इस सेंटेंस को करेक्ट इंग्लिश में बोलने में हेल्प करूंगी। माय नेम इज
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Speaker A
चुके थे। लेकिन गांव के ही मुन्नी लाल सिंह ने विराची सिंह की हत्या कर दी और गंगा पार जाकर जंगलों में छिप गया। इसके बाद अनंत सिंह ने भी चुन्नी लाल के कई परिवार वालों को मौत के घाट उतार दिया।
02:35
Speaker A
तो देखा आपने कैसे इस एआई टीचर ने मुझे सेकंड्स में करेक्ट कर दिया और वह भी हिंदी में ही। सबसे बड़ी बात यहां पर यह है कि यहां हमारा कोई मजाक नहीं उड़ाता। असल में हम इंग्लिश इसलिए नहीं सीख पाते
02:45
Speaker A
मोकामा में एक कहानी चलती है कि बिराची सिंह की हत्या के बाद अनंत सिंह ने अपने भाई के हत्यारे को ढूंढना शुरू कर दिया और एक दिन एक मुखबिर से मिली सूचना पर अनंत सिंह गंगा पार गए और अपने भाई के हत्यारे।
03:00
Speaker A
इस ऐप को आईआईटी ने साइंटिफिक तरीके से ऐसे डिजाइन किया है कि कोई भी आसानी से इंग्लिश सीख सके। पहले 100 लोगों के लिए सुपरवा AI का 3 दिन का ट्रायल सिर्फ ₹9 में मिल सकता है। तो अभी जाएं और
03:11
Speaker A
की हत्या कर दी। हालांकि यह घटना पुलिस रिकॉर्ड्स में दर्ज नहीं है, लेकिन अनंत सिंह इस हत्या को एक्सेप्ट करते हुए कहते हैं कि वे गंगा पार तैर कर गए और अपने भाई की हत्या का बदला लिया। अनंत सिंह को।
03:26
Speaker A
तस्कर सम्राट और गैंगस्टर कामदेव सिंह के साथ काम करना शुरू कर दिया जिसे बिहार का पावलो एस्कोबार कहा जाता था। कामदेव सिंह नेपाल इंडिया बॉर्डर पर गांजे और बाकी चीजों की बड़े लेवल पर तस्करी का काम करता था और उसका नेटवर्क बेगूसराय से लेकर
03:42
Speaker A
बिहार के बाहर उनकी दबंगई और मगही भाषा में बोले उनके डायलॉग्स ने फेमस कर दिया। वहीं अगर हम और आप हिंदी में बात करके अगर कोई हाई पेइंग नौकरी मांगने जाएं तो गेट से बाहर भगा दिया जाएगा। सच्चाई यही है।
03:58
Speaker A
अनंत सिंह के भाई दिलीप सिंह के हाथों में आ जाता है। इससे धीरे-धीरे दिलीप सिंह का प्रभाव भी बढ़ने लगा और उन्हें [संगीत] संरक्षण मिलता है मुकामा विधानसभा के कांग्रेस विधायक श्याम सुंदर सिंह धीरज से जो उस वक्त बिहार सरकार में मंत्री भी थे।
04:14
Speaker A
लेकिन एआई के बाद इंग्लिश सीखना एकदम आसान हो गया है। जैसे इस ऐप को ही देख लीजिए। माय नेम इज श्याम। मी टुमारो गोइंग गांव कजिन सिस्टर मैरिज। आपको इस सेंटेंस को करेक्ट इंग्लिश में बोलने में हेल्प करूंगी। माय नेम इज।
04:28
Speaker A
विधायक श्याम सुंदर सिंह, धीरज ने दिलीप सिंह से कहा कि वह दिन में उनके पटना वाले घर पर ना आया करें। इस बात से दिलीप सिंह की श्याम सुंदर सिंह से अनबन हो जाती है। यह बात दिलीप सिंह को इतनी अखर गई, कि
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Speaker A
श्याम। टुमारो आई एम गोइंग टू माय कजिंस वेडिंग इन द विलेज। क्या आपको यह समझ में आया?
04:52
Speaker A
है लेकिन बाहर लोग उन्हें चोर ही मानते हैं। मोकामा विधानसभा में करीब 2.89 लाख वोटर्स हैं जिनमें सबसे ज्यादा धनुक और कुर्मी जाति के 82 हजार वोट हैं। वहीं 500 अकेले भूमिहार और करीब 400 यादव वोट हैं। और बाकी कुछ बहुत छोटी-छोटी संख्या दूसरी
05:10
Speaker A
तो देखा आपने कैसे इस एआई टीचर ने मुझे सेकंड्स में करेक्ट कर दिया और वह भी हिंदी में ही। सबसे बड़ी बात यहां पर यह है कि यहां हमारा कोई मजाक नहीं उड़ाता। असल में हम इंग्लिश इसलिए नहीं सीख पाते।
05:25
Speaker A
मात्र 2678 वोटों से हार का सामना करना पड़ा। लेकिन साल 1990 के विधानसभा चुनाव में दिलीप सिंह ने श्याम सुंदर सिंह [संगीत] धीरज को 22,000 से ज्यादा वोटों से हरा दिया। इस तरह साल 1990 में दिलीप सिंह बन जाते हैं मोकामा से माननीय
05:41
Speaker A
क्योंकि हमें जज होने का डर रहता है। लेकिन सुपरनोवा एआई के साथ आप जितना चाहे बात करके इंग्लिश प्रैक्टिस कर सकते हैं और आपको किसी पर डिपेंड रहने की जरूरत नहीं है। दिन में बस 10-15 मिनट प्रैक्टिस करके आप बहुत जल्दी इंग्लिश सीख जाएंगे।
05:58
Speaker A
अनंत सिंह के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। जहां अब बोलचाल में दिलीप सिंह को बड़े सरकार कहा जाने लगा, तो अब वहीं अनंत सिंह बन गए छोटे सरकार। इधर अनंत सिंह और उनके पड़ोसी विवेका पहलवान के परिवार में पुरानी रंजिश चल रही
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Speaker A
इस ऐप को IIT ने साइंटिफिक तरीके से ऐसे डिजाइन किया है कि कोई भी आसानी से इंग्लिश सीख सके। पहले 100 लोगों के लिए सुपरनोवा AI का 3 दिन का ट्रायल सिर्फ ₹9 में मिल सकता है। तो अभी जाएं और।
06:35
Speaker A
विवेका पहलवान अनंत सिंह के दुश्मनों से जाकर मिल जाते हैं और उन्हें इकट्ठा करना शुरू कर देते हैं। आगे विवेका पहलवान और अनंत सिंह के बीच बड़ा गैंग वार चलता है जिसकी कहानी इस वीडियो में आगे है। जिंदगी में नहीं जब तक हम जिंदा रहेंगे हम
06:50
Speaker A
डिस्क्रिप्शन बॉक्स और कमेंट बॉक्स में दिए गए लिंक पर क्लिक करके सुपरनोवा AI को डाउनलोड करें। तो अब वापस अपनी कहानी पर लौटते हैं। इस वक्त तक अनंत सिंह के भाई दिलीप सिंह राजनीति में पावरफुल हो चुके थे। दिलीप सिंह ने बेगूसराय के रहने वाले।
07:10
Speaker A
1995 में दोबारा से बिहार विधानसभा चुनाव शुरू हो जाते हैं। इन चुनावों में अनंत सिंह के भाई दिलीप सिंह ने जनता दल के टिकट पर दोबारा से श्याम सुंदर धीरज को 6947 वोटों से हरा दिया। इस जीत के साथ ही
07:24
Speaker A
तस्कर सम्राट और गैंगस्टर कामदेव सिंह के साथ काम करना शुरू कर दिया जिसे बिहार का पावलो एस्कोबार कहा जाता था। कामदेव सिंह नेपाल इंडिया बॉर्डर पर गांजे और बाकी चीजों की बड़े लेवल पर तस्करी का काम करता था और उसका नेटवर्क बेगूसराय से लेकर।
07:37
Speaker A
सिंह के घर पर हमला बोल दिया। जवाब में अनंत सिंह की तरफ से भी गोलीबारी शुरू हो जाती है। दोनों तरफ से सैकड़ों गोलियां चलती हैं। इस हमले में अनंत सिंह के साले भूषण सिंह समेत पांच लोग मारे जाते हैं।
07:50
Speaker A
यूपी, नेपाल, कोलकाता और मुंबई तक फैला हुआ था। साल 1980 में एक पुलिस एनकाउंटर में कामदेव सिंह मारा जाता है। उनके साथ के ही कुछ उनके गद्दार मित्र द्वारा उनका लाइन पुलिस को दे दिया गया। रामदेव के बाद उसका पूरा क्रिमिनल एंपायर।
08:04
Speaker A
जाता है। दोनों हाथों में AK-47 लहराते इन दो युवकों का वीडियो इन दिनों वायरल हो रहा है। वीडियो में दिखने वाले दोनों युवकों के अलावा यहां तीसरा शख्स भी है जो हथियारों के साथ इन दोनों का वीडियो बना
08:17
Speaker A
अनंत सिंह के भाई दिलीप सिंह के हाथों में आ जाता है। इससे धीरे-धीरे दिलीप सिंह का प्रभाव भी बढ़ने लगा और उन्हें [संगीत] संरक्षण मिलता है मुकामा विधानसभा के कांग्रेस विधायक श्याम सुंदर सिंह धीरज से जो उस वक्त बिहार सरकार में मंत्री भी थे।
08:32
Speaker A
अलावा अपनी भूमिहार जाति से ही आने वाले एक दूसरे बाहुबली नेता सूरजभान सिंह से कड़ी टक्कर मिलने लगती है। 1980 के दशक में ही सूरजभान ने अनंत सिंह के बड़े भाई दिलीप सिंह का गैंग जॉइ कर लिया था। आरोप
08:45
Speaker A
श्याम सुंदर सिंह धीरज और दिलीप सिंह दोनों ही भूमिहार जाति से आते थे। श्याम सुंदर सिंह चुनाव जीतने के लिए दिलीप सिंह का खूब इस्तेमाल करने लगे। दिलीप सिंह श्याम सुंदर को जिताने के लिए बूथ कैप्चरिंग का काम करते थे, लेकिन एक दिन।
09:00
Speaker A
सुंदर ने भी दिलीप सिंह को टक्कर देने के लिए सूरजभान को बढ़ावा देना शुरू कर दिया। इससे मोकामा इलाके में सूरजभान का कंट्रोल बढ़ने लगा। मोकामा और आसपास के इलाके में लोग सूरजभान सिंह को दादा के नाम से जानने
09:14
Speaker A
विधायक श्याम सुंदर सिंह, धीरज ने दिलीप सिंह से कहा कि वह दिन में उनके पटना वाले घर पर ना आया करें। इस बात से दिलीप सिंह की श्याम सुंदर सिंह से अनबन हो जाती है। यह बात दिलीप सिंह को इतनी अखर गई, कि।
09:27
Speaker A
मिली। जब यूपी पुलिस गैंगस्टर श्री प्रकाश शुक्ला को ढूंढ रही थी तब सूरज भान ने ही उसे सालों तक अपने यहां पर छुपाया। बीरन साही और आपके हरिशंकर तिवारी जी के वर्चस्व की लड़ाई और इसमें पहला बड़ा अपराधी
09:39
Speaker A
उन्होंने खुद ही राजनीति में उतरने का फैसला ले लिया। जब मंत्री श्याम सुंदर सिंह धीरज ने दिलीप सिंह से दिन में नहीं आने को कहा तो वे समझ गए कि भले ही मोकामा के लोग कहते हो चुनाव दिलीप सिंह ने जीता।
09:56
Speaker A
[संगीत] की थी महंगी ब्रांड वो ढूंढ के जिसके पास भी हो गोली मार के छीन लिया करता था तो उसने कहा दादा एक AK-4 47 दो AK-47 लेके आए आता था वो जो काफिला आता था उसका दो AK-47 तो उन्होंने कहा दादा एक
10:10
Speaker A
है लेकिन बाहर लोग उन्हें चोर ही मानते हैं। मोकामा विधानसभा में करीब 2.89 लाख वोटर्स हैं जिनमें सबसे ज्यादा धनुक और कुर्मी जाति के 82 हजार वोट हैं। वहीं 500 अकेले भूमिहार और करीब 400 यादव वोट हैं। और बाकी कुछ बहुत छोटी-छोटी संख्या दूसरी।
10:27
Speaker A
मंत्री बृज बिहारी प्रसाद की हत्या की। इसमें सबसे आगे श्री प्रकाश शुक्ला था। उसके पीछे सुधीर त्रिपाठी और अनुज प्रताप सिंह था। इन तीनों के अलावा मुन्ना शुक्ला और मंटू तिवारी भी थे। धाएधाएं गोलियां चली और मंत्री की हत्या कर दी गई।
10:46
Speaker A
जातियों की भी है। संसाधनों, खेतों और जनसंख्या में ज़्यादा होने के कारण मुकामा पर हमेशा ही भूमिहारों का दबदबा रहा है। 1985 के चुनाव में दिलीप सिंह पहली बार कांग्रेस उम्मीदवार श्याम सुंदर धीरज के सामने खड़े होते हैं। हालांकि उन्हें।
10:57
Speaker A
लेकिन मुन्ना शुक्ला को उम्र कैद की सजा सुनाई गई है। 1999 के लोकसभा चुनाव में नीतीश कुमार बाढ़ लोकसभा सीट से चुनाव लड़े। इस चुनाव में सूरज भान ने नीतीश की काफी मदद की। अब सूरज भान ने भी इलेक्शन
11:11
Speaker A
मात्र 2678 वोटों से हार का सामना करना पड़ा। लेकिन साल 1990 के विधानसभा चुनाव में दिलीप सिंह ने श्याम सुंदर सिंह [संगीत] धीरज को 22,000 से ज्यादा वोटों से हरा दिया। इस तरह साल 1990 में दिलीप सिंह बन जाते हैं मोकामा से माननीय।
11:24
Speaker A
की आरजेडी से चुनाव लड़ रहे थे। भले ही सूरजभान निर्दलीय ही चुनाव लड़ रहे थे लेकिन उन्हें पीछे से नीतीश कुमार का सपोर्ट मिल रहा था। सूरजभान सिंह और दिलीप सिंह के मुकाबले में दिलीप सिंह की भारी हार होती है। जहां दिलीप सिंह को मात्र
11:39
Speaker A
विधायक। अब दिलीप सिंह के पास बाहुबल से लेकर राजनीतिक पावर सब आ जाती है। इससे उनके भाई अनंत सिंह को अब खुला हाथ मिल जाता है। ताली अब पुलिस और पैसा दोनों ही अनंत सिंह की जेब में थे। ज्यादातर क्रिमिनल मामलों में।
11:54
Speaker A
सिंह का चैप्टर बाकी था। सूबे के बड़े नेता अब अनंत सिंह पर डोरे डालने लगे। भाई की हार के बावजूद अनंत सिंह का दबदबा बना रहा और उनकी आपराधिक गतिविधियां वैसे ही जारी रहीं। मोकामा की महफिलों में अनंत
12:10
Speaker A
अनंत सिंह के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। जहां अब बोलचाल में दिलीप सिंह को बड़े सरकार कहा जाने लगा, तो अब वहीं अनंत सिंह बन गए छोटे सरकार। इधर अनंत सिंह और उनके पड़ोसी विवेका पहलवान के परिवार में पुरानी रंजिश चल रही।
12:28
Speaker A
अ राइफल बैन फॉर ऑल पथ सिक्योरिटी फोर्सेस। अनंत सिंह के भाई ने पहले जनता दल और बाद में राजद से अपनी राजनीति की थी। लेकिन अनंत सिंह नीतीश कुमार से ही नजदीकियां बढ़ाने लगे। साल 2004 के लोकसभा चुनाव में
12:42
Speaker A
थी। विवेका पहलवान रिश्ते में अनंत सिंह के चाचा लगते थे और दोनों के घरों की दीवारें एक दूसरे से सटी हुई थीं। दिलीप सिंह के मंत्री बनने और अनंत सिंह के बढ़ते दबदबे के कारण विवेका पहलवान ने गांव छोड़ दिया। गांव छोड़ने के बाद।
12:58
Speaker A
सिंह ने नीतीश कुमार का फुल सपोर्ट किया। हालांकि सामने राजद के मजबूत नेता विजय कृष्ण ने नीतीश कुमार को हरा दिया। लेकिन नीतीश कुमार को समझ आ गया कि अनंत सिंह उनके काम के आदमी हो सकते हैं। बिहार छोटी सरकार इज़ अ प्रॉमिनेंट फेस ऑफ
13:13
Speaker A
विवेका पहलवान अनंत सिंह के दुश्मनों से जाकर मिल जाते हैं और उन्हें इकट्ठा करना शुरू कर देते हैं। आगे विवेका पहलवान और अनंत सिंह के बीच बड़ा गैंग वार चलता है जिसकी कहानी इस वीडियो में आगे है। जिंदगी में नहीं जब तक हम जिंदा रहेंगे हम।
13:29
Speaker A
गए थे। अगली सुबह जब अनंत सिंह अपने कुछ लोगों के साथ चाय पी रहे थे। तभी विवेका पहलवान और उनके लोगों ने अचानक से आकर गोलियां चलाना शुरू कर दिया। इस हमले में अनंत सिंह की छाती में गोली लगती है जिसने
13:41
Speaker A
बेटा भतीजा सबको कह दिए हैं कि जब भी कोई मारेगा यही मारेगा हमको। दूसरा कोई नहीं मारेगा। हम भगवान भरोसा करते हैं। डरे नहीं आते डरते थे। एक राइफल दो राइफल ले चलते हैं। डरे नहीं है। डरे नहीं है।
13:54
Speaker A
चुका था। उनकी हालत काफी नाजुक होती जा रही थी। नाजुक स्थिति में ही उन्हें एक कार से पटना के एक अस्पताल में ले जाया जाता है। जहां डॉक्टर नरेंद्र प्रसाद ने अनंत सिंह का इलाज किया। अनंत सिंह के
14:06
Speaker A
1995 में दोबारा से बिहार विधानसभा चुनाव शुरू हो जाते हैं। इन चुनावों में अनंत सिंह के भाई दिलीप सिंह ने जनता दल के टिकट पर दोबारा से श्याम सुंदर धीरज को 6947 वोटों से हरा दिया। इस जीत के साथ ही।
14:18
Speaker A
अगर मेरे भाई को कुछ हुआ तो तुम कभी अपने परिवार का चेहरा नहीं देख पाओगे। कई घंटे की सर्जरी के बाद आखिरकार अनंत सिंह की जान बच जाती है। जिसके बाद कई दिन अस्पताल में भर्ती रहने के बाद अनंत सिंह को
14:32
Speaker A
दिलीप सिंह लालू यादव की बिहार सरकार में मंत्री बन जाते हैं। इस वक्त लालू यादव जनता दल पार्टी में थे और उन्होंने राजद नहीं बनाई थी। इधर दिलीप सिंह दोबारा एमएलए बने ही थे कि विवेका पहलवान ने अनंत।
14:49
Speaker A
चुनाव जीतकर सांसद बन चुके थे। इसलिए जब 2005 में बिहार विधानसभा चुनाव हुए तो सूरज भान खुद मोकामा से चुनाव नहीं लड़ सके। लेकिन सूरज भान ने मोकामा पर से अपना कंट्रोल नहीं छोड़ा और एलजेपी के टिकट पर
15:03
Speaker A
सिंह के घर पर हमला बोल दिया। जवाब में अनंत सिंह की तरफ से भी गोलीबारी शुरू हो जाती है। दोनों तरफ से सैकड़ों गोलियां चलती हैं। इस हमले में अनंत सिंह के साले भूषण सिंह समेत पांच लोग मारे जाते हैं।
15:16
Speaker A
से चुनाव लड़ रहे थे। दोनों बाहुबलियों की इस इनडायरेक्ट फाइट में अनंत सिंह की जीत होती है और वे मोकामा से माननीय विधायक बन जाते हैं। द रूलिंग पार्टी एमएलए फेसेस मोर देन 2 डजन क्रिमिनल केसेस इंक्लूडिंग मर्डर,
15:31
Speaker A
खुद अनंत सिंह की जान जैसे तैसे बच सकी। अनंत सिंह की तरफ से जवाबी फायरिंग में भी विवेका पहलवान की तरफ से कुछ लोग मारे जाते हैं। यहां से अनंत सिंह और विवेका पहलवान के बीच गैंग वार और भीषण होता चला।
15:46
Speaker A
प्लॉट्स पर अनंत सिंह के नाम की नेमप्लेट्स लग जाती हैं। इलाके में अफवाहएं फैल गई कि एक बार अनंत सिंह की किसी बिल्डिंग या प्लॉट पर नजर पड़ गई तो वह उसे लेकर ही रहेंगे। अनंत सिंह हैज़ बीन
15:57
Speaker A
जाता है। दोनों हाथों में AK-47 लहराते इन दो युवकों का वीडियो इन दिनों वायरल हो रहा है। वीडियो में दिखने वाले दोनों युवकों के अलावा यहां तीसरा शख्स भी है जो हथियारों के साथ इन दोनों का वीडियो बना।
16:13
Speaker A
मुकेश सिंह और बॉडीगार्ड विपिन सिंह ने कई बार मेरा रेप किया है। द लेटेस्ट एलगेशन इज दैट ही एंड ह्स रेप्ड एंड मर्डर वुमन रेशमा इन पटना। इस पत्र में रेशमा ने लिखा कि उसे डर है कि जब तक
16:25
Speaker A
रहा है। अनंत समर्थकों की मानें तो तीसरा शख्स जो वीडियो बना रहा है पूरे वीडियो में एक जगह उसकी तस्वीर दिखी है। दरअसल वह शख्स विवेका पहलवान का भतीजा कर्मवीर है। इस बीच अनंत सिंह को विवेका पहलवान के।
16:37
Speaker A
मिलती है। इस डेड बॉडी के पास ही रेशमा का वह पत्र भी मिला जो उसने मुख्यमंत्री को भेजा था। हालांकि आधिकारिक तौर पर अभी तक इस डेड बॉडी की पहचान कंफर्म नहीं हुई थी कि यह रेशमा है या कोई और है। रेशमा की
16:50
Speaker A
अलावा अपनी भूमिहार जाति से ही आने वाले एक दूसरे बाहुबली नेता सूरजभान सिंह से कड़ी टक्कर मिलने लगती है। 1980 के दशक में ही सूरजभान ने अनंत सिंह के बड़े भाई दिलीप सिंह का गैंग जॉइ कर लिया था। आरोप।
17:04
Speaker A
हबीब [संगीत] अली को पीटना शुरू कर दिया। प्रकाश सिंह को अनंत सिंह के घर में बंद करके बेरहमी से पीटा गया। प्रकाश व्हेन ही अप्रोच अनंत सिंह दिस मॉर्निंग फर्स्ट ही वास कॉल्ड इनसाइड द हाउस लेटर ऑन दे
17:16
Speaker A
लगते हैं कि दिलीप के साथी सूरजभान ने किडनैपिंग, रंगदारी और हत्या जैसी घटनाओं को अंजाम देना शुरू कर दिया था। जब दिलीप सिंह माननीय मंत्री बन गए तो गैंग का प्रैक्टिकल कंट्रोल सूरजभान सिंह के हाथ में आ चुका था। इधर पूर्व मंत्री श्याम।
17:29
Speaker A
के घर के सामने इकट्ठा होने लगे। अनंत सिंह के लोगों ने इन पत्रकारों पर भी डंडों और पत्थरों से हमला कर दिया। इस हमले में कई पत्रकार [संगीत] घायल होते हैं और दो टीवी चैनल्स के कैमरे टूट जाते
17:41
Speaker A
सुंदर ने भी दिलीप सिंह को टक्कर देने के लिए सूरजभान को बढ़ावा देना शुरू कर दिया। इससे मोकामा इलाके में सूरजभान का कंट्रोल बढ़ने लगा। मोकामा और आसपास के इलाके में लोग सूरजभान सिंह को दादा के नाम से जानने।
17:55
Speaker A
फ्रॉम मोकामा अह असेंबली कॉन्स्टिट्यूएंसी व्हिच इज़ वेरी क्रूशियल फॉर अह नितीश कुमार सो अह बिकॉज़ ही इज़ वेरी क्लोज़ टू पावर दैट वी। सो पुलिस आल्सो फाइंड्स इट वेरी डिफिकल्ट टू एक्ट अगेंस्ट हिम। पत्रकारों पर हुए इस हमले ने राजनीतिक रूप
18:10
Speaker A
लगे। 90 के दशक में जब यूपी के गैंगस्टर श्री प्रकाश शुक्ला का उदय हो रहा था तब सूरजभान सिंह की श्री प्रकाश शुक्ला से दोस्ती होती है। श्री प्रकाश शुक्ला को AK-47 चाहिए थी जो उसे सूरजभान सिंह से।
18:23
Speaker A
कुमार ने रेशमा के रेप और हत्या मामले को सीबीआई को सौंपने की सिफारिश कर दी। व्यक्ति यह सोचे कि किसी का संबंध रूलिंग पार्टी से है। इसलिए संभव है यहां की पुलिस उस मामले में किसी ना किसी प्रकार के
18:40
Speaker A
मिली। जब यूपी पुलिस गैंगस्टर श्री प्रकाश शुक्ला को ढू।
19:00
Speaker A
5 नवंबर के दिन पुलिस ने खुलासा किया कि शास्त्री नगर में मिली बॉडी रेशमा की नहीं बल्कि काजल देवी की थी। काजल नालंदा के बिहार शरीफ के केरोसिन डीलर रणवीर कुमार आर्य की बेटी थी जो पटना में एक ब्यूटी
19:13
Speaker A
पार्लर में काम कर रही थी। काजल 27 अक्टूबर से गायब थी। यानी वही तारीख जिससे रेशमा के गायब होने का दावा किया जा रहा था। 20 नवंबर के दिन पुलिस ने एक और खुलासा किया और कहा कि रेशमा असल में काजल
19:26
Speaker A
ही थी। लेकिन इसकी हत्या अनंत सिंह ने नहीं बल्कि अनंत सिंह को फंसाने के लिए बिल्डर अनिल शर्मा ने की थी। वही बिल्डर जिसने कुछ दिन पहले ही अनंत सिंह पर फिरौती मांगने का आरोप लगाया था। इस तरह
19:39
Speaker A
बिहार पुलिस ने अनिल शर्मा को गिरफ्तार कर लिया और अनंत सिंह को क्लीन चिट मिल जाती है। नेता [संगीत] जोर इधर अनंत सिंह को पत्रकारों के साथ मारपीट मामले में भी पहले ही जमानत मिल चुकी थी। इस तरह अनंत सिंह जेल से बाहर आ जाते हैं।
20:02
Speaker A
इसी बीच अनंत सिंह के बड़े भाई फाजो सिंह की हत्या कर दी जाती है। फाजो सिंह पर हुए हमले में उनके ड्राइवर अवधदेश सिंह की भी मौत हो जाती है। फाजो सिंह की हत्या में अनंत सिंह के पुराने दुश्मन विवेका पहलवान
20:15
Speaker A
का नाम आया। कुछ दिन बाद 8 जनवरी 2008 के दिन विवेका पहलवान के भाई संजय कुमार सिंह की भी पटना में दिन दहाड़े [संगीत] एक सरकारी दफ्तर में गोली मारकर हत्या कर दी जाती है। संजय की हत्या में अनंत सिंह का
20:29
Speaker A
नाम आता है। इसलिए अनंत सिंह के खिलाफ एक और एफआईआर दर्ज कर ली जाती है। हालांकि बाद में इस मामले में भी अनंत सिंह को क्लीन चिट मिल जाती है। अनंत सिंह और [संगीत] विवेका पहलवान के बीच गैंगवार में
20:42
Speaker A
अनंत सिंह के दो सहोदर भाई बिरंची सिंह और सच्चिदानंद सिंह उर्फ फाजो सिंह और विवेका पहलवान के सहोदर भाई संजय सिंह की भी हत्या हो चुकी है। इस बीच 2010 में एक बार फिर बिहार विधानसभा चुनाव शुरू हो जाते हैं। जहां एक
20:57
Speaker A
तरफ जेडीयू के विधायक अनंत सिंह को राजक सरकार की ओर से किए गए विकास, अगड़ी जातियों के वोट [संगीत] और अपने बाहुबल पर भरोसा है। वहीं लोजपा की तरफ से मैदान में खड़ी सोनम देवी अपने आप को इस क्षेत्र से
21:11
Speaker A
घर की बहू की तरह प्रोजेक्ट कर रही हैं। एक बार फिर अनंत सिंह ने नलनी रंजन शर्मा की पत्नी सोनम देवी को 8,954 वोटों से हरा दिया और लगातार दूसरी बार विधायक बन जाते हैं। झोपड़ियों में दिया है उजाला।
21:29
Speaker A
सारे गरीबों को दिया है सहारा। अरे सारे दुश्मनों को सारे विरोधी को पधार दिया है। हत्या और रंगदारी के तमाम आरोपों के बाद भी अनंत सिंह नीतीश कुमार की जेडीयू पार्टी में बने रहते हैं। लेकिन अनंत सिंह ने एक गलती कर दी। 2015 में बाढ़ बाजार
21:53
Speaker A
में चार लड़कों का अपहरण हो जाता है। जेडीयू के मुकामा से विधायक अनंत सिंह के परिवार की किसी महिला को बाढ़ बाजार के इसी चौक पर चार लड़कों ने छेड़ दिए। इन लड़कों पर आरोप था कि इन्होंने एक महिला
22:06
Speaker A
के साथ बाजार में छेड़छाड़ की थी। जब यह खबर अनंत सिंह के पास पहुंची तो अनंत सिंह ने करीब चार गाड़ियों में अपने लड़के भेज दिए। इन लड़कों ने चारों लड़कों को भरे बाजार से उठा लिया। इस [संगीत] वक्त की
22:17
Speaker A
बड़ी खबर बिहार में जेडीयू विधायक मुश्किल में हैं। अनंत सिंह पर आरोप लगाया कि उन्होंने चार युवकों को अगवा करवाया। तभी पटना पुलिस को इस मामले की भनक लग जाती है। तब तक इन गुंडों ने इन चारों लड़कों को पीट-पीट कर मरणासन्न अवस्था में
22:32
Speaker A
ला दिया। जैसे तैसे पुलिस ने इन चार लड़कों में से तीन लड़कों को रेस्क्यू करा लिया। लेकिन चौथे लड़के पुटुस यादव का कुछ भी पता नहीं चल सका। चारों को अन्यत्र ले जाकर उनकी हत्या कर देने का विचार था। पुलिस के द्वारा तत्काल
22:45
Speaker A
इसकी जानकारी प्राप्त होने पर जो गाड़ियां थी उनको चेस किया गया और इस चेस में पुलिस के दबिश में तीन जो लड़के हैं उनको छुड़ा लिया गया। अगले दिन अनंत सिंह के पैतृक गांव लदमा में एक डेड बॉडी मिलती है जिसकी
22:58
Speaker A
दोनों आंखें फोड़ी जा चुकी थी और प्राइवेट पार्ट्स को कुचल दिया गया था और उसे लाठियों से तब तक पीटा गया था जब तक कि उसकी जान नहीं चली गई थी। यह डेड बॉडी पुटुस यादव की थी। चश्मदीदों की मानें तो
23:12
Speaker A
उसकी दोनों आंखें फोड़ दी गई थी। गुप्तांग कुचल दिए गए थे और लाठी से उसे तब तक पीटा गया जब तक कि वह मर नहीं गया। इस बार अनंत सिंह का जेल जाना तय था। इसके पीछे कारण थे लालू यादव। इस वक्त तक नीतीश कुमार और
23:28
Speaker A
लालू यादव दोनों गठबंधन में आ चुके थे। लालू यादव ने अनंत सिंह को पुटुस यादव की हत्या के लिए पब्लिकली जिम्मेदार कहना शुरू कर दिया। तो यह साजिश किसकी है?
23:38
Speaker A
नाटक है। नाटक इलेक्शन आ गया है। जिनको जमीन घिसक गया कोई राह नहीं मिलता है जुलूस लगे चलते हैं आदमी खोज ले चलते हैं जिसको कुछ नहीं बच गया है ऐसी दो रानी या डोरियाल चलते हैं 24 जून के दोहफर बिहार पुलिस ने अनंत सिंह
23:51
Speaker A
के घर पर छापा मार दिया अनंत सिंह के घर पर पहुंची है पुलिस टीम छह डीएसपी और एसएसपी जांच में जुटे अनंत सिंह के घर से इंसास राइफल की छह खाली मैगजीन एक बुलेट प्रूफ जैकेट और कुछ खून से सने हुए कपड़े मिलते हैं। शाम
24:06
Speaker A
होते-होते अनंत सिंह को अरेस्ट करने के लिए अलग-अलग जिलों से पुलिस बुलाई जाती है। करीब 500 पुलिसकर्मियों की टीम अनंत सिंह के यहां पर पहुंच जाती है और इसी शाम अनंत सिंह को अरेस्ट कर लिया जाता है और
24:18
Speaker A
पटना की ब्यूर जेल में भेज दिया जाता है। 4 घंटे की लंबी पूछताछ और चर्च के बाद पटना पुलिस ने अभी से केवल कुछ मिनटों पहले अनंत सिंह को अपने हिरासत में लिया है। इन्हीं दिनों 2015 के बिहार विधानसभा
24:31
Speaker A
चुनाव होने जा रहे थे। इस बार अनंत सिंह को जेडीयू ने टिकट नहीं दी। इसलिए अनंत सिंह ने जेल से ही मोकामा सीट के लिए निर्दलीय ही पर्चा भर दिया। अनंत सिंह इन दिनों जेल के नेता है और जेल
24:43
Speaker A
के अंदर से निर्दलीय ही चुनाव में ताल ठोक रही है। इस चुनाव में जेडीयू और आरजेडी दोनों मिलकर चुनाव लड़ रही थी। फिर भी अनंत सिंह ने दोनों के उम्मीदवार नीरज कुमार को बुरी तरह से हरा दिया। अनंत सिंह ने साबित कर
24:56
Speaker A
दिया कि मोकामा में उनका दबदबा किसी पार्टी पर निर्भर नहीं करता और वे तीसरी बार जेल से ही विधायक बन जाते हैं। [संगीत] पुडुस यादव हत्याकांड में करीब 22 महीने जेल में रहने के बाद अप्रैल 2017 में अनंत
25:26
Speaker A
सिंह को जमानत मिल जाती है और वे जेल से बाहर आ जाते हैं। अरे सबके दुआ बनाने वाला अरे नदमा गांव के एक हो [संगीत] सबके दीवाना बनो नमा गांव के एक सबके दीवाना [संगीत] सबके दीवाना जेल से बाहर आने के बाद अनंत सिंह साल
25:54
Speaker A
2019 लोकसभा चुनाव के लिए मुंगेर सीट से दावेदारी ठोक देते हैं जिसके अंदर मोकामा विधानसभा क्षेत्र भी आता है। अचानक से चुनाव लोकसभा लड़ने का फैसला किया वजह क्या है?
26:07
Speaker A
बहुत दिन विधायक रहे, चार झोंक रहे, अब दिल्ली जाई का मन है। क्या अच्छा लगता है दिल्ली के बारे में?
26:13
Speaker A
सब लोग कहते हैं बहुत अच्छा है। तो हम भी कहते हैं अच्छा है। अनंत सिंह जेडीयू और आरजेडी के महागठबंधन से चुनाव लड़ना चाहते थे। लेकिन तेजस्वी यादव ने अड़ंगा डाल दिया और अनंत सिंह को लोकसभा की टिकट नहीं मिली।
26:26
Speaker A
हम फैसला किया कांग्रेस से लड़ेंगे। फैसला कर लिया है। हां। कांग्रेस से बात हुई है आपकी? नहीं। लेकिन अनंत सिंह अपनी पत्नी नीलम देवी को कांग्रेस से टिकट दिलाने में कामयाब रहे। मुंगेर सीट पर हुए इस मुकाबले में नीलम
26:39
Speaker A
देवी के सामने थे नीतीश कुमार के करीबी राजीव रंजन सिंह उर्फ़ ललन सिंह जो जेडीयू के टिकट पर चुनाव लड़ रहे थे। मुंगेर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रही हैं। नीलम देवी वोटिंग करने के लिए पहुंची हैं। पोलिंग बूथ पर पहुंची हैं। आप देखिए
26:53
Speaker A
तस्वीरों में। इस लोकसभा चुनाव में ललन सिंह ने अनंत सिंह की पत्नी को लगभग 1.68 लाख वोटों से हरा दिया। इस हार के बाद अनंत सिंह की मुसीबतें और बढ़ने लगती हैं। 16 अगस्त 2019 के दिन बिहार पुलिस ने एएसपी लिपि
27:07
Speaker A
सिंह के नेतृत्व में अनंत सिंह के घर पर छापा मार दिया। पटना के ग्रामीण एसपी ने अनंत सिंह के घर से AK-47 मिलने की पुष्टि की है। यह छापा करीब 11 घंटे चलता है। जिसमें बिहार पुलिस ने कथित तौर पर AK-47, टू
27:20
Speaker A
हैंड ग्रेनेड और 26 कारतूस बरामद किए। बिहार पुलिस के मुताबिक उन्हें अनंत सिंह के घर के पीछे बनी एक छोटी सी झोपड़ी में एक बक्से में AK-47 मिली। AK-47 को एक प्लास्टिक बैग और कार्बन में लपेटा हुआ था
27:34
Speaker A
ताकि मेटल डिटक्टर इसे पकड़ ना पाए। वहीं हैंड ग्रेनेड्स बगल की दूसरी झोपड़ी में मिली थी। आपसे अदावत तो ललन सिंह की हो सकती है। लिपी सिंह की अदावत क्या है?
27:43
Speaker A
ललन सिंह सरकार है। जो लिपी सिंह के कहेंगे वो करेंगे। पीसी सिंह की बेटी हैं। AK-47 मिलने के कारण अनंत सिंह पर अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट यानी यूएपीए लगा दिया जाता है। और अब एनआईए अगली छापेमारी की तैयारी कर
27:58
Speaker A
रही है। उनके पैतृक घर पर जो कि लदमा में स्थित है। वहां पर एनआईए की टीम पहुंचने वाली है। जिस वक्त पटना पुलिस अनंत सिंह के घर पर छापा मार रही थी। उस वक्त वे घर पर नहीं थे। एक दिन बाद 18 अगस्त को अनंत सिंह ने
28:11
Speaker A
एक वीडियो जारी किया जिसमें उन्होंने दावा किया कि वह 2004 से उस जगह पर ही नहीं गए जहां पर AK-47 मिली है। अनंत सिंह का आरोप है कि लिपि सिंह ने ही उन्हें फंसाने के लिए हथियार उनके घर में
28:24
Speaker A
रखवाए। इधर एएसपी लिपि सिंह ने अनंत सिंह की गिरफ्तारी की कोशिशें तेज कर दी। 200 से ज्यादा पुलिसकर्मियों को अनंत सिंह की खोज में लगा दिया गया। पूरे बिहार में जगह-जगह छापे मारे गए लेकिन अनंत सिंह पकड़ में
28:36
Speaker A
नहीं आए। इधर अनंत सिंह बिना नंबर वाली Honda City कार में बैठकर पटना से गया पहुंच गए। यहां एक लोकल लीडर ने उन्हें एक दूसरा वाहन दिया जिससे वह दिल्ली पहुंच जाते हैं। यहां 23 अगस्त के दिन अनंत सिंह
28:48
Speaker A
ने दिल्ली के साकेत कोर्ट में सरेंडर कर दिया। जहां कुछ ही समय में बिहार पुलिस पहुंच जाती है और अनंत सिंह को अपनी अरेस्ट में लेकर पटना की बेर जेल में भेज देती है। अभी मौजूद हैं पटना के बेयूर जेल में। यह
29:01
Speaker A
वही जेल है जहां पर बाहुबली अनंत सिंह को कैद करके रखा गया है और यह अब उनका नया ठिकाना है। जेल में रहते हुए ही अनंत सिंह ने 2020 बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने का मन बना लिया। इंटरेस्टिंगली 2019 लोकसभा चुनाव
29:15
Speaker A
में जिन तेजस्वी यादव ने अनंत सिंह को लोकसभा टिकट देने से इंकार कर दिया था। अब वे ही उन्हें मोकामा से टिकट देने के लिए तैयार हो गए हैं। हमें लालू यादव के सीट से। और क्या कुछ कहेंगे सर? क्या कुछ कहना
29:27
Speaker A
चाहेंगे अपने लोगों को? तेजस्वी जी मुख्यमंत्री होंगे। होल हैं। पूरी तरह से समर्थन रहेगा आनंद। हां पूरी तरह। आरजेडी से टिकट कंफर्म होने के बाद अनंत सिंह आरजेडी में शामिल हो जाते हैं। वहीं मोकामा से जेडीयू ने राजीव लोचन सिंह को
29:41
Speaker A
मैदान में उतार दिया। लेकिन एक बार फिर अनंत सिंह 35757 वोटों के बड़े अंतर से यह चुनाव जीत जाते हैं और चौथी बार माननीय विधायक बन जाते हैं और वह भी जेल से ही। ये भोजन नहीं हो रहा है। विधायक जी अन्न
29:54
Speaker A
का दान करते हैं। है ना? ये छप्पन भोग है। आप हमारा भंडारा देखिए। छप्पन भोग से कराते अतिथि देवो भबा का स्वागत है ना घमंड है ना दरवाजा बंद है और पूरे बिहार प्रदेश के लिए छोटे सरकार ही भरोसेमंद है।
30:10
Speaker A
21 जून 2022 के दिन स्पेशल कोर्ट ने 2019 में अनंत सिंह के घर से मिली AK-47 के मामले में फैसला सुना दिया। इस केस में पटना के एमपी एमएलए कोर्ट में ट्रायल चल रहा था। अब कोर्ट ने आनंद सिंह
30:24
Speaker A
को दोषी करार दिया है। एमपी एमएलए कोर्ट के जज त्रिलोकी दुबे ने एमएलए अनंत सिंह को दोषी मानते हुए उन्हें 10 साल की सजा सुनाई। इस सजा के साथ ही अनंत सिंह की विधायकी रद्द हो जाती है। इसके 1 महीने बाद ही अनंत सिंह को साल
30:39
Speaker A
2015 में उनके घर से मिली इंसास राइफल की छह मैगजीन मामले में भी दोषी पाया गया और उन्हें 10 साल की सजा सुनाई गई। अनंत सिंह अब पूर्व विधायक हो चुके हैं। बिहार असेंबली ने अधिसूचना जारी कर उनकी
30:53
Speaker A
विधानसभा सदस्यता को खत्म कर दिया है। अनंत सिंह की विधायकी जाने के बाद 2022 में मोकामा सीट पर दोबारा से उपचुनाव हुए। इस चुनाव में अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी को आरजेडी ने टिकट दे दिया। वहीं बीजेपी ने जेडीयू के बाहुबली नेता नलिनी
31:08
Speaker A
रंजन शर्मा की पत्नी सोनम देवी को टिकट दे दिया। जिनके प्रचार की कमान संभाली दूसरे बाहुबली नेता सूरजभान सिंह ने। मोदी जी के दो नंबर पर सोनम देवी के भारी मतों से विजय बनाकर जिसके कारण यह चुनाव दोबारा से अनंत सिंह
31:22
Speaker A
बनाम सूरजभान सिंह हो गया। एक बार फिर इस लड़ाई में अनंत सिंह भारी पड़े और उनकी पत्नी नीलम देवी ने सोनम देवी को 16,000 से ज्यादा वोटों से हरा दिया। खुशी रहेगा और हर बार रहेगा। हर बार रहेगा।
31:36
Speaker A
एकदम आनंद सिंह जिंदाबाद। सरकार क्या बोलिएगा? क्या बोलिएगा? आज क्या बोलिएगा? आज कहने का दिन है। नहीं। इस बीच अनंत सिंह के नीतीश कुमार और उनकी पार्टी जेडीयू से संबंध सुधरने लगते हैं। 28 जनवरी 2024 को नीतीश कुमार ने
31:53
Speaker A
महागठबंधन यानी कि आरजेडी, कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी को छोड़कर बीजेपी और एनडीए गठबंधन के साथ अपनी नई सरकार बना ली। विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची, श्रद्धा और निष्ठा रखूंगा। नीतीश कुमार टूक ओथ एस अ चीफ मिनिस्टर ऑफ
32:11
Speaker A
बिहार फॉर द नाइंथ टाइम। अब नई सरकार बनने के बाद नीतीश कुमार को विधानसभा के अंदर दोबारा से बहुमत साबित करना था। फरवरी 2024 में हुए इस फ्लोर टेस्ट में अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी ने नीतीश कुमार के समर्थन में वोट डाल
32:25
Speaker A
दिया। जबकि नीलम देवी आरजेडी के टिकट पर विधायक बनी थी। एक बार फिर लालू तेजस्वी के सत्ता से बाहर होने के बाद अनंत सिंह के नीतीश कुमार के साथ रिश्ते अच्छे होने लगते हैं। इधर देश में 2024 के लोकसभा
32:38
Speaker A
चुनावों की तैयारियां शुरू हो चुकी थी। इन्हीं दिनों अनंत सिंह को 15 दिन की पैरोल मिल जाती है। लोकसभा चुनाव से पहले उन्हें 15 दिनों की पैरोल मिली [संगीत] है। अनंत समर्थकों ने जेल से निकलने पर फूल मालाओं से स्वागत
32:50
Speaker A
किया। बेर जेल से बाहर आने के बाद अनंत सिंह सीधे मोकामा पहुंचे और ऐलान कर दिया कि ललन सिंह बड़े अंतर से लोकसभा चुनाव जीतेंगे। चुनाव का माहौल है। क्या लग रहा है हर तरफ घूम रहे हैं। एक बगली चुनाव है।
33:05
Speaker A
हां किसके पक्ष में जा रहा है? ललन सिंह के पक्ष में जा रहा है। जेडीयू के ललन सिंह मुंगेर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रहे थे। जिसके अंदर मोकामा क्षेत्र भी पड़ता है। इस चुनाव में ललन सिंह 80,000 से ज्यादा वोटों से जीतते
33:18
Speaker A
हैं। जिसमें अनंत सिंह का रोल भी था। मुंगेर से ललन सिंह की जीत हो चुकी है। जेडीयू के ललन सिंह जीत चुके हैं। एक बार फिर अनंत सिंह के अच्छे दिन शुरू हो जाते हैं। 14 अगस्त 2024 के दिन पटना
33:31
Speaker A
हाईकोर्ट ने उन्हें उनके घर से हथियार मिलने के दोनों मामलों में बरी कर दिया। इसके बाद अब पूर्व बाहुबली विधायक के जेल [संगीत] से बाहर निकलने का रास्ता साफ हो गया है। एक 2015 के मामले में और एक 2019 के मामले
33:43
Speaker A
में। तो ये देखिए राजनीतिक पैतरेबाजी के बाद मतलब जब उनकी पत्नी नीलम सिंह अगर मैं नाम याद कर रहा हूं नीलम देवी ने जब पार्टी बदली वो आरजेडी से अब सत्तारूढ़ पार्टी का हिस्सा है। उसके बाद यह खबर आ
33:56
Speaker A
रही है कि हाईकोर्ट ने सबूतों के अभाव में अनंत सिंह को बरी कर दिया। इस बीच 22 जनवरी 2025 के दिन नौरंगा जलालपुर गांव में अनंत सिंह के गुट और सोनू मोनू गैंग के बीच जमकर गोलीबारी शुरू हो जाती है।
34:13
Speaker A
सोनू मोनू नौरंगा जलालपुर गांव के रहने वाले दो भाई हैं जो अनंत सिंह के दुश्मन रहे विवेका पहलवान के लिए [संगीत] काम करते थे। पहले वे मोकामा और उसके आसपास के इलाकों में ट्रेनों में लूटपाट करते थे। इसी बीच सोनू मोनू का उत्तर प्रदेश में
34:27
Speaker A
रहने वाले मुख्तार अंसारी के गैंग से भी संबंध हो गया था। ना ना गोलियां वही चलाए थे। हमारे पास कोई गोली चलाने वाला नहीं है। माला फेरने वाला कुल है। साल 2016 में नौरंगा जलालपुर के पंचायत चुनाव में सोनू मोनू की बहन नेहा कुमारी
34:41
Speaker A
खड़ी हुई थी। जिसके सामने अनंत सिंह के करीबी मनी पहलवान की पत्नी मीना देवी खड़ी हुई थी। यह चुनाव सोनू मोनू की बहन नेहा जीत जाती हैं। लेकिन मनी पहलवान ने नेहा कुमारी की जीत पर कोर्ट में केस डाल दिया
34:54
Speaker A
और आरोप लगाया कि नेहा की उम्र चुनाव लड़ने के लिए जरूरी उम्र से कम है। इसके बाद कोर्ट ने नेहा का चुनाव रद्द कर दिया और उनके हाथ से प्रध चली जाती है। अपनी बहन की प्रधानी जाने के बाद सोनू मोनू ने
35:06
Speaker A
माना कि अनंत सिंह के समर्थन के कारण ही मनी पहलवान कोर्ट में गया है। अगर आप यहां के पंचायत प्रतिनिधि है हमारी मां। हम यहां के राजनीति करने वाले हैं। यहां के नेता हैं। यहां के लोगों से जुड़े
35:19
Speaker A
हुए हैं। और उस राजनीतकर्ता के साथ आप अभद्र कार्य कीजिएगा। गोली चलाइएगा तो जनता छोड़ेगी। 2017 में सोनू मोनू ने सोनपुर में अनंत सिंह और मनी सिंह की हत्या करने की योजना बनाई और इसके लिए मुंगेर से ₹6 लाख में एक
35:35
Speaker A
AK-47 भी खरीदी। लेकिन यह योजना सफल नहीं हो सकी। इसके बाद 2018 में सोनू मोनू ने ₹50 लाख में अनंत सिंह की सुपारी ली। लेकिन पुलिस को इसके बारे में पता चल गया और सोनू मोनू को गिरफ्तार कर लिया गया। कर
35:50
Speaker A
दीजिए उसमें दाग रह ही जाती। अब घर पर कोई व्यक्ति आएंगे तो उनका स्वागत करना हमारा परम धर्म है। कल भी अगर वह गोली नहीं फोड़ते तो कल भी हम उनका स्वागत करते। लेकिन यह गोली और बंदूक दिखा रहे हैं।
36:05
Speaker A
उम्र भी हो गई 68 की और लड़ने चल दिए 34 वाले से। जनवरी 2025 में एक तीसरे आदमी के कारण दोनों फिर से आमने-सामने आ गए। सोनू मोनू का ईंट का भट्टा है जिसमें मुकेश कुमार सिंह नाम का एक आदमी मुंशी के तौर
36:19
Speaker A
पर काम करता था। मुकेश का सोनू मोनू के साथ पैसों को लेकर विवाद चल रहा था। सोनू मोनू मुकेश पर ₹60 लाख की हेराफेरी का आरोप लगा रहे थे। एक दिन सोनू मोनू ने मुकेश के घर पर ताला लगा दिया। मुकेश को
36:33
Speaker A
जब पुलिस से मदद नहीं मिली तो वह अनंत सिंह के पास पहुंच गया। वेतन देने में आनाानी वेतन भी नहीं दे रहे थे। हमारा बाल बच्चा जब भूख मरने लगा तो हम कहे हम चिमनी पर अब नहीं रहेंगे आपके
36:43
Speaker A
यहां। तब कहे कि तब कहे कि हमरा ₹60 लाख लाओ। अनंत सिंह ने पहले हेमजा गांव पहुंचकर मुकेश के घर का ताला खोला और फिर सोनू मोनू से मिलने के लिए नौरंगा जलालपुर पहुंच गए। यहां उन्होंने अपने एक आदमी उदय
36:56
Speaker A
यादव को सोनू मोनू को बुलाकर लाने को कहा। यहीं कहासनी में दोनों तरफ से गोलियां चलने लग जाती हैं। जिससे उदय यादव घायल हो जाता है। लेकिन आप आवाज सुन सकते हैं यहां पर गोलियों की ताबड़तोड़ एक के बाद एक
37:09
Speaker A
कई राउंड फायरिंग यहां पर हुई है। पुलिस का मानना है कि इस मामले में 15 से 20 गोलियां चली। लेकिन लोगों का कहना था कि कम से कम 70 गोलियां चली थी। आपने एफआईआर भी दर्ज कराई है। हां, एफआईआर तो दर्ज करवाए हैं। प्रोटोकॉल
37:23
Speaker A
से तो जाएंगे। गोलीबारी की यह घटना सुर्खियों में आ जाती है। जिसके बाद अनंत सिंह ने कोर्ट में जाकर सरेंडर कर दिया। जहां से उन्हें एक बार फिर पटना की बूढ़ जेल भेज दिया गया। सुबह जो है दो गिरफ्तारियां हुई थी। सोनू
37:35
Speaker A
मोनू गैंग के सोनू की गिरफ्तारी हुई थी और साथ में अनंत सिंह की भी एक जो करीबी थे उनकी गिरफ्तारी हुई थी और अभी अनंत सिंह ने बाढ़ कोर्ट में सरेंडर कर दिया। यहां कई महीने जेल में रहने के बाद उन्हें
37:47
Speaker A
अगस्त 2025 में पटना हाईकोर्ट से जमानत मिल जाती है। जेल से बाहर आते ही अनंत सिंह ने एक रोड शो किया जिसमें 100 से ज्यादा वाहन शामिल हुए। इंटरेस्टिंगली इस रोड शो में जेडीयू नेता और मोदी सरकार में
38:00
Speaker A
केंद्रीय मंत्री ललन सिंह भी मौजूद रहे थे। अनंत सिंह के अपनी ताकत दिखाने के पीछे एक कारण नवंबर 2025 में होने जा रहे विधानसभा चुनाव भी थे। 2025 के विधानसभा चुनावों में अनंत सिंह को मोकामा से जेडीयू से टिकट मिल जाती है। इधर आरजेडी
38:16
Speaker A
ने मोकामा के दूसरे बाहुबली सूरजान सिंह की पत्नी वीना देवी को टिकट दे दिया। एक बार फिर 20 साल बाद मोकामा के दो भूमिहार बाहुबली आमने-सामने थे। जिससे मोकामा की लड़ाई और इंटरेस्टिंग हो जाती है। 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर
38:32
Speaker A
की जन स्वराज पार्टी ने भी अपने कैंडिडेट्स उतारे। एक बार सोच के बताइए आज तक आपने जिस नेता को जिस दल को वोट दिया उन नेताओं ने आपका और आपके बच्चों का काम किया है कि नहीं किया है?
38:46
Speaker A
मोकामा में पीयूष प्रियदर्शी जनसुराज के टिकट पर चुनाव लड़ रहे थे। पीयूष प्रियदर्शी को एक तीसरे बाहुबली दुलारचंद यादव ने समर्थन दे दिया। जिससे इस बार मुकामा का इलेक्शन तीन बाहुबलियों के बीच का मुकाबला बन गया। पीयूष भैया जिंदाबाद।
39:01
Speaker A
जिंदाबाद जिंदाबाद। पीयूष भैया जिंदाबाद जिंदाबाद जिंदाबाद 75 साल के दुलारचंद यादव का इलाके में बहुत प्रभाव था और वे खुद भी कई बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके थे दुलारचंद यादव को इलाके में पहलवान जी के नाम से जाना
39:17
Speaker A
जाता था और वो मुकामा के रेयर नॉन भूमिहार बाहुबलियों में से एक थे अरे गुंडा टूट राजा छूट राजा दुलारचंद यादव के अनंत सिंह सिंह से भी अच्छे रिश्ते थे। लेकिन जन स्वराज पार्टी का समर्थन करने के कारण अनंत सिंह और
39:38
Speaker A
दुलारचंद यादव के बीच नाराजगी बढ़ जाती है। दुलारचंद यादव ने पीयूष प्रियदर्शी के लिए प्रचार किया और अनंत सिंह की जब आलोचना की तो मामला और ज्यादा बिगड़ जाता है। चर्चा करते हैं कि छोटे सरकार को हराने वाला कोई माई का लाल पैदा नहीं हुआ है।
39:52
Speaker A
पैदा हुआ है तो मानते हैं कि पीयूष नाम है वह पैदा ले लिया। इस तनाव के बीच 30 अक्टूबर 2025 के दिन लगभग 3:30 बजे तारतर गांव के पास पीयूष प्रियदर्शी के काफिले का अनंत सिंह के काफिले से सामना हो जाता
40:06
Speaker A
है। पीयूष के काफिले में दुलारचंद यादव भी बैठे हुए थे। देखते ही देखते दोनों गुटों में आपस में पत्थर और गोलियां चलने लग जाती हैं। जब पुलिस मौके पर पहुंची तो उसे यहां पर एक गाड़ी में दुलारचंद यादव की
40:19
Speaker A
लाश मिलती है। दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार जो घटना के वक्त उनके ही साथ थे उसने अनंत सिंह को अपने दादा की हत्या का दोषी बताते हुए एफआईआर दर्ज करवाई। अनंत सिंह गोली मार दिया सर। गोली मारा
40:32
Speaker A
वहीं पे दादा जी घोड़ में गोली लगा गिर गए सर। उसके बाद भूषण सिंह और छोटन सिंह दोनों आए रड से मारने लगे। तब पर भी दादा जी नहीं मरे सर। उसके बाद गाड़ी चला दिया सर। इस घटना के बाद अनंत सिंह ने कहा कि उनके
40:47
Speaker A
काफिले की 30-40 गाड़ियां आगे निकल गई थी और 10 गाड़ियां पीछे रह गई थी। जिन पर जन स्वराज के समर्थकों ने हमला किया। अनंत सिंह ने कहा कि यह उन्हें फंसाने के लिए सूरजभान सिंह की साजिश है। एकदम फूल तैयारी सूरज भान के यह था कि
41:01
Speaker A
लड़ाई झगड़ा कैसे हो जाए तो वोट में ऐसे ऐसे हो जाए। सूरजान का ही खेला है। लेकिन पटना के एएसपी कार्तिकेय शर्मा ने बयान देते हुए कहा है कि सोची समझी साजिश के तहत दुलारचंद यादव की हत्या की गई है
41:13
Speaker A
और हत्या के वक्त अनंत सिंह मौके पर मौजूद थे। इस तरह 1 नवंबर 2025 के दिन पुलिस ने अनंत सिंह को गिरफ्तार कर लिया और ब्यूर जेल भेज दिया। पटना के एसएसपी कार्तिकेय कुमार शर्मा ने कहा कि सिर्फ एफआईआर की
41:27
Speaker A
वजह से नहीं बल्कि जांच में यह पाया गया कि पूरी घटना अनंत सिंह की मौजूदगी में हुई। मामले में मुख्य आरोपी अनंत सिंह ही हैं। सबूतों के आधार पर अनंत सिंह को गिरफ्तार पुलिस ने किया है। जहां एक ओर अनंत सिंह दुलारचंद यादव की
41:40
Speaker A
हत्या में जेल में थे, वहीं सुशासन का नारा देने वाले नीतीश कुमार की पार्टी के बड़े नेता और मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री ललन सिंह उनका प्रचार कर रहे थे। हम सबों का दायित्व है कि एक एक व्यक्ति
41:54
Speaker A
अनंत सिंह बनके चुनाव लड़े। 14 नवंबर 2025 के दिन बिहार विधानसभा चुनावों के रिजल्ट आ गए। एक बार फिर अनंत सिंह ने सूरजभान सिंह की पत्नी वीना देवी को 28,206 वोटों से हरा दिया। अनंत सिंह हैज़ बीन डिक्लेयर्ड अ विनर दिस
42:10
Speaker A
इज़ पॉसिबली द फर्स्ट विन कमिंग इन फॉर द ah फॉर द एनडीए। अनंत सिंह। द वेरी टॉक्ड अबाउट बाहुबली डॉन व्हाटएवर यू वांट कॉल हिम बट ही हैज़ वन, ही इज़ इन जेल। जेल में रहते हुए ही अनंत सिंह पांचवी बार
42:25
Speaker A
विधायक बन चुके हैं। अनंत भैया एक बार मंच पे आ सकते हैं क्या मेरे साथ?
42:31
Speaker A
दीवाना बनो ले। अरे नदमा गांव के एको [संगीत] कटवा दीवाना बनो ले। फिलहाल अनंत सिंह दुलारचंद यादव की हत्या के मामले में पटना जिले की बेर जेल में बंद हैं। लेकिन कितने दिन तक बंद रहेंगे इसे कहना मुश्किल है। सच यह है
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Speaker A
कि बाहुबलियों को टिकट देने में कोई भी पार्टी पीछे नहीं रहती। ना कांग्रेस, [संगीत] ना भाजपा, ना आरजेडी, ना जेडीयू। उतनी जल्दी जूते नहीं बदलते जितनी जल्दी नेताओं की नैतिकताएं बदल जाती हैं। और आखिर में बात सुपरवा ऐप की। अगर नीचे
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Speaker A
डिस्क्रिप्शन में मौजूद लिंक से अपनी इंग्लिश इंप्रूव करने की शुरुआत करेंगे तो मात्र ₹9 में यह ऐप आपके लिए लाइफ चेंजिंग साबित हो सकता है। तो जल्दी जाएं क्योंकि यह ऑफर सिर्फ पहले 100 इंस्टॉल के लिए ही है। हर बार की तरह इस बार भी हम बिना कोई
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Speaker A
ओपिनियन दिए अपनी वीडियो को यहीं पर समाप्त करना चाहेंगे। इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। [संगीत] नेता जो भैया
Topics:अनंत सिंहसूरजभान सिंहविवेका पहलवानबाहुबली राजनीतिबिहार गैंगस्टरमोकामादिलीप सिंहकामदेव सिंहगैंगवारबिहार अपराध

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