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What Happened to Adani's USA Case

अमेरिका ने गौतम अडानी पर लगाया फ्रॉड केस, बाद में अमेरिकी कोर्ट ने आरोपों को खारिज किया। जानिए पूरा घटनाक्रम।

Key Takeaways

  • अमेरिका में विदेशी भ्रष्टाचार कानून के तहत भारत से जुड़े मामलों में भी केस दर्ज हो सकते हैं।
  • अडानी ग्रुप के खिलाफ आरोपों से भारतीय निवेशकों को भारी नुकसान हुआ।
  • राजनीतिक बदलाव और कानूनी रणनीतियों ने केस के परिणाम को प्रभावित किया।
  • अमेरिकी कोर्ट ने सबूतों की कमी और अधिकार क्षेत्र की सीमा के कारण केस को खारिज किया।
  • अडानी ग्रुप ने कानूनी लड़ाई के बाद अपनी प्रतिष्ठा बचाई और कारोबार जारी रखा।

What the video covers

  • 20 नवंबर 2024 को अमेरिका ने गौतम अडानी और जुड़े आठ लोगों पर फ्रॉड का केस दर्ज किया।
  • अडानी ग्रुप की मार्केट वैल्यू में भारी गिरावट आई, लगभग 2.25 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
  • अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस और सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन ने रिश्वत और फ्रॉड के आरोप लगाए।
  • अडानी ग्रुप और कई भारतीय राज्य सरकारों ने आरोपों को पूरी तरह से खारिज किया।
  • अमेरिका में फॉरेन करप्ट प्रैक्टिसेस एक्ट के तहत यह केस दर्ज किया गया था।
  • डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद एफसीपीए पर रोक लगी और केस की जांच धीमी हुई।
  • अडानी ने एक नई लीगल टीम हायर की, जिसने अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट से केस वापस लेने की अपील की।
  • अमेरिकी कोर्ट ने अगस्त 2026 में अडानी पर लगे सभी आरोपों को खारिज कर दिया।
  • अडानी ने अमेरिका में अरबों डॉलर निवेश करने और हजारों नौकरियां पैदा करने का प्रस्ताव रखा।
  • इस केस में राजनीतिक और कानूनी पहलुओं के कारण विवाद और जांच भी हुई।

Answers

Questions about this video

अमेरिका ने अडानी पर किस आधार पर केस दर्ज किया?

अमेरिका ने फॉरेन करप्ट प्रैक्टिसेस एक्ट के तहत अडानी और उनके साथियों पर रिश्वत और फ्रॉड के आरोप लगाए क्योंकि अडानी ग्रुप ने अमेरिकी निवेशकों से भी फंडिंग ली थी।

अडानी ग्रुप ने अमेरिकी आरोपों का क्या जवाब दिया?

अडानी ग्रुप ने आरोपों को बेबुनियाद बताया और कहा कि ये आरोप गलत हैं, साथ ही उन्होंने कानूनी कार्रवाई करने की बात कही। कई भारतीय राज्य सरकारों ने भी आरोपों को खारिज किया।

अमेरिकी कोर्ट ने आखिरकार अडानी के खिलाफ केस क्यों खारिज किया?

अमेरिकी कोर्ट ने कहा कि इस मामले में कोई ठोस सबूत नहीं है और यह मामला अमेरिकी न्याय क्षेत्र के बाहर आता है, इसलिए केस को बंद कर दिया गया।

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Speaker A
20 नवंबर 2024 के दिन खबर आती है कि अमेरिका ने इंडियन बिलेनियर गौतम अडानी और उनसे जुड़े आठ लोगों पर फ्रॉड का केस रजिस्टर कर लिया है और चार्जशीट भी सबमिट कर दी गई है। गौतम अडानी, गौतम अडानी, अडानी।
00:13
Speaker A
गौतम अडानी जैसे ही यह खबर सुबह सवेरे भारत में पहुंचती है तो अडानी ग्रुप की लिस्टेड कंपनीज की लगभग 2.25 लाख करोड़ मार्केट वैल्यू खत्म हो जाती है। अगले कुछ दिनों में अडानी ग्रुप की करीब 17% मार्केट वैल्यू समाप्त हो जाती है। यह एक तरह से
00:27
Speaker A
बड़ा झटका था गौतम अडानी के बिजनेस के लिए, जिसमें उनके साथ-साथ भारत के आम इन्वेस्टर्स का भी करोड़ों रुपया डूब जाता है। लेकिन अगस्त 2026 में अडानी के फेवर में एक खबर आती है कि अमेरिकी कोर्ट ने अडानी और उनकी कंपनी पर लगे केसेस को
00:41
Speaker A
डिसमिस कर दिया है। आखिर इन 1 साल 9 महीने में ऐसा क्या हुआ जो अमेरिकी कोर्ट ने अडानी पर लगाए आरोपों को खारिज कर दिया?
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Speaker A
अमेरिका का डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस जिसने अडानी पर केस किया था, आखिर उसने यह कहना क्यों शुरू कर दिया कि इस केस को लाना ही नहीं चाहिए था? क्यों डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस ने कोर्ट से अपना केस वापस ले लिया
00:58
Speaker A
और कैसे अडानी का अमेरिका में लगे इन केसेस से पीछा छूटा? आइए जानते हैं आज के इस एपिसोड में। 20 नवंबर 2024, बिलेनियर गौतम अडानी का दिन अच्छा जा रहा था। अडानी की कंपनी अडानी ग्रीन बॉन्ड मार्केट से
01:11
Speaker A
₹600 मिलियन यानी कि ₹5000 करोड़ रेज करती है। अडानी ग्रीन अडानी ग्रुप की फ्यूचरिस्टिक कंपनीज में से एक है और उसके लिए यह एकेंट माइलस्टोन था। लेकिन अगली सुबह होने से पहले ही एक खबर आती है कि अमेरिका ने अडानी और उनके साथियों पर
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Speaker A
फ्रॉड का आरोप लगाकर उनके खिलाफ एक इंडाइटमेंट यानी कि चार्जशीट दाखिल कर दी है। इसमें सबसे बड़ी इंटरेस्टिंग बात यह थी कि यह पूरा मामला इंडिया से जुड़ा हुआ था, ना कि अमेरिका से। इस चार्जशीट में लगे आरोपों में बताया गया कि अडानी और उनके
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Speaker A
अधिकारियों ने इंडिया में सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स पाने के लिए सरकारी अधिकारियों को रिश्वत दी थी। इन आरोपों को लगाते हुए अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस एंड सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन यानी कि एसीसी ने गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी के खिलाफ केस शुरू
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Speaker A
कर दिए। यूएस प्रोसकटर्स हैव चार्ज इंडियन बिलियनर गौतम अडानी एंड सेवन अदर्स इन एन अलज्ड ब्राइबरी एंड फ्रॉड स्कीम रिलेटेड टू अ रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट इन इंडिया। अडानी ग्रुप पर लगे इन आरोपों को अडानी ग्रुप और भारत की अलग-अलग राज्य की
02:07
Speaker A
सरकारों ने कंप्लीटली रिजेक्ट कर दिया। 21 नवंबर 2024 के दिन एक मीडिया रिलीज में अडानी ग्रुप ने कहा कि अडानी ग्रीन कंपनी के डायरेक्टर्स के खिलाफ यूएस ने जो आरोप लगाए हैं वह बेबुनियाद हैं और इन आरोपों को गलत साबित करने के लिए वह लीगल एक्शन
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Speaker A
लेंगे। उड़ीसा की बीजू जनता दल की सरकार ने भी इन आरोपों को बेसलेस कहा। छत्तीसगढ़ और तमिलनाडु की उस वक्त की कांग्रेस और डीएमके की सरकारों ने भी कहा कि उनका अडानी ग्रुप से कोई कॉन्ट्रैक्ट नहीं हुआ। इन सबका कहना था कि हमने अडानी ग्रुप के
02:35
Speaker A
साथ कोई सीधे एग्रीमेंट नहीं किया बल्कि सेंट्रल गवर्नमेंट की कंपनी सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया से एग्रीमेंट्स किए गए हैं। अब यहां पर एक सवाल उठता है कि इस मामले में अमेरिका ने केस क्यों दर्ज किया? जबकि यह मामला इंडिया का था। असल
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Speaker A
में यूएस में एक कानून है द फॉरेन करप्ट प्रैक्टिसेस एक्ट, जो यूएस में किसी भी तरह के बिजनेस लिंक वाले व्यक्ति और कंपनी के लिए रिश्वत देने को एक अपराध बनाता है। चाहे वह किसी दूसरे देश में ही क्यों ना
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Speaker A
दी गई हो। अडानी ग्रुप पर इसी कानून के तहत केस दर्ज किया गया था और अडानी ग्रुप ने अमेरिकी संस्थानों से लोन भी लिए थे। इसलिए यूएस की सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन यानी कि एससीसी ने भी गौतम अडानी और
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Speaker A
बाकी आरोपियों के खिलाफ अपने इन्वेस्टर्स को धोखा देने का केस दर्ज कर लिया। एससीसी का काम यूएस के शेयर मार्केट को रेगुलेट करना और इन्वेस्टर्स को किसी भी तरह के फ्रॉड से बचाना है। दरअसल सितंबर 2021 में अडानी ग्रीन एनर्जी ने बॉन्ड्स के जरिए
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Speaker A
दुनिया भर से $75 करोड़ रेज किए थे, जिसमें से $5 करोड़ अकेले यूएस इन्वेस्टर्स के थे। अब इसी पर एसीसी ने आरोप लगाया कि बोंड्स बेचते समय गौतम अडानी और सागर अडानी ने इन्वेस्टर से झूठ बोला कि अडानी ग्रीन में एक मजबूत एंटी
03:37
Speaker A
ब्राइबरी प्रोग्राम है और कंपनी के सीनियर मैनेजमेंट ने कभी भी रिश्वत नहीं दी है और ना ही देगा। एससीसी ने कहा कि यह दावा झूठा है और उसके मुताबिक इस समय तक यह लोग इंडिया में रिश्वत दे रहे हैं। इट एक्यूज़ अडानी
03:49
Speaker A
एंड ह नेफ्यू सगार ऑफ पेइंग $65 मिलियन इन ब्राइब्स टू इंडियन ग ऑफिशियल्स टू ऑब्टेन सोलर एनर्जी सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट्स। [संगीत] रटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका द्वारा लगाए गए इन आरोपों के बाद इंडिया के अडानी ग्रुप को टोटल करीब 27 बिलियन का
04:06
Speaker A
नुकसान हुआ। इन आरोपों को लगने से पहले अडानी ग्रुप की मार्केट कैप करीब 14.30 लाख करोड़ थी। जिस दिन अडानी ग्रुप पर अमेरिका ने केस दर्ज किया था, उस दिन महाराष्ट्र में इलेक्शन थे। इसलिए शेयर मार्केट बंद था। लेकिन जैसे ही 21 नवंबर
04:20
Speaker A
के दिन मार्केट खुला, एक ही दिन में अडानी ग्रुप को करीब 2.24 लाख करोड़ का नुकसान हुआ। अगले दिन करीब ₹1306 करोड़ का और फिर 25 नवंबर के दिन भी करीब ₹1436 करोड़ का नुकसान हुआ। यानी 3 दिन में ही
04:35
Speaker A
अडानी ग्रुप की मार्केट कैप 14.30 लाख करोड़ से गिरकर 11.85 लाख करोड़ पर आ जाती है। इस पूरी घटना में सिर्फ गौतम अडानी के ही पैसे नहीं डूबे बल्कि अडानी ग्रुप में लगे हुए LIC के पैसे भी डूबे और आम लोगों
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Speaker A
के भी करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ, जिनका पैसा अडानी ग्रुप में लगा हुआ था। हालांकि अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट के इन आरोपों पर भी सवाल उठे क्योंकि यह उस वक्त लाए गए थे जब अमेरिका की डेमोक्रेटिक पार्टी प्रेसिडेंशियल इलेक्शन हार चुकी थी। यानी
05:03
Speaker A
कमला हैरिस चुनाव हार चुकी थी और रिपब्लिक पार्टी के डोनाल्ड ट्रंप यूएस के प्रेसिडेंट चुने जा चुके थे। इस वक्त तक यूएस में अडानी के खिलाफ कोई केस नहीं था लेकिन सिर्फ 7 दिन बाद ही 20 नवंबर के दिन
05:15
Speaker A
उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी जाती है। यहां इंटरेस्टिंग चीज यह थी कि इस समय डेमोक्रेटिक पार्टी से आने वाले तत्कालीन अमेरिकी प्रेसिडेंट जो बाइडन एडमिनिस्ट्रेशन संभाल रहे थे। दरअसल अमेरिका में नया राष्ट्रपति चुनाव जीतते ही ऑफिस नहीं संभालता। जैसे डोनाल्ड ट्रंप
05:30
Speaker A
ने 5 नवंबर 2024 को चुनाव जीता था। लेकिन उनका शपथ ग्रहण 20 जनवरी 2025 को हुआ। तब तक जो बाइडन ही अमेरिका के राष्ट्रपति थे और उनकी एडमिनिस्ट्रेशन ही पावर में थी। हालांकि ट्रंप के प्रेसिडेंट बनने के बाद
05:42
Speaker A
अडानी ग्रुप को थोड़ी राहत मिलती है। यूएस प्रेसिडेंट बनने के 20 दिन के भीतर ही डोनाल्ड ट्रंप ने 10 फरवरी 2025 को फॉरेन करप्ट प्रैक्टिसेस एक्ट यानी एफसीपीए पर 180 दिन के लिए रोक लगा दी और इस एक्ट के
05:55
Speaker A
तहत चलने वाली पुरानी इन्वेस्टिगेशंस को रिव्यू करने का आर्डर दे दिया। यह वही कानून था जिसके तहत अडानी ग्रुप से रिलेटेड लोगों पर केसेस रजिस्टर किए गए थे। इसके बाद पूरे 2025 में अडानी के केस में कोई प्रोग्रेस नहीं होती।
06:09
Speaker A
ट्रंप हैज़ इशूड अ न्यू एग्जीक्यूटिव ऑर्डर अंडर व्हिच ही ईस्ट इनफोर्समेंट ऑफ लॉ बैनिंग ओवरसीज ब्राइट। इधर गौतम अडानी ने भी एक नई लीगल टीम हायर कर ली। इस टीम को रॉबर्ट जे गिफ्रा जूनियर लीड कर रहे थे। अडानी का केस संभालते ही
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Speaker A
गिफ्रा ने डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस के अधिकारियों से मुलाकात की और इस केस को वापस लेने की अपील की। यह कहते हुए कि इस केस का अमेरिका से कोई रिलेशन नहीं है और आरोप इंडिया में एक सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट
06:34
Speaker A
को लेकर लगे हैं, जिसमें अमेरिका का कोई भी आदमी शामिल नहीं था। इधर यूएस इंडक्टमेंट के बाद भी अडानी ग्रुप के बिजनेस ऑपरेशंस नहीं रुके। खासकर अडानी ग्रीन एनर्जी की ऑपरेशनल कैपेसिटी पहले के मुकाबले करीब 80% तक बढ़ जाती है। इस बीच अमेरिका के छह
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Speaker A
कांग्रेस मैन यानी कि सांसदों ने कहा कि यह एक मिसगाइडेड क्रूशेट था, जिसको आगे बढ़ाने का कोई ठोस कारण नहीं था और जो बाइडन के अंडर आने वाले जस्टिस डिपार्टमेंट की भी जांच होनी चाहिए। इस बीच अप्रैल 2026 में अडानी के लॉयर रॉबर्ट
07:02
Speaker A
गिफ्रा ने जस्टिस डिपार्टमेंट के वकीलों के साथ एक और मीटिंग की। द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक यह मीटिंग वाशिंगटन डीसी में जस्टिस डिपार्टमेंट के हेड क्वार्टर में हुई, जिसमें गिफ्रा ने लगभग 100 स्लाइड्स की एक प्रेजेंटेशन दी। इस
07:14
Speaker A
प्रेजेंटेशन में गिफ्रा ने कहा कि इस मामले में गौतम अडानी के खिलाफ कोई सबूत नहीं है और जस्टिस डिपार्टमेंट इस मामले में केस नहीं चला सकता क्योंकि यह उसके जुरिडिक्शन यानी कि अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। इस मीटिंग में गिफ्रा ने एक ऑफर भी दिया, जो आगे चलकर
07:28
Speaker A
एक बड़े विवाद की वजह बनता है। उन्होंने कहा कि अगर इस केस को बंद कर दिया जाता है तो गौतम अडानी यूएस में $ अरब डॉलर इन्वेस्ट करने और $5,000 नौकरियां पैदा करने के लिए तैयार हैं। लेकिन जस्टिस
07:39
Speaker A
डिपार्टमेंट के वकीलों ने साफ कह दिया कि इस केस के रेजोल्यूशन में $ अरब डॉलर के इन्वेस्टमेंट ऑफर का कोई रोल नहीं होगा। यानी केस बंद होगा या चलेगा यह इंडिपेंडेंटली डिसाइड होगा। एस पर अ ब्लूमबर्ग रिपोर्ट यूएस अथॉरिटीज आर
07:52
Speaker A
रिपोर्टेडली मूविंग टुवर्ड्स एंडिंग द फ्रॉड केसेस [संगीत] अगेंस्ट गौतम अडानी। इधर 14 मई 2026 के दिन अमेरिका के सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन यानी कि एससीसी ने गौतम अडानी के खिलाफ चल रहे सिक्योरिटीज फ्रॉड केस की सेटलमेंट फाइ
08:09
Speaker A
सेटलमेंट होता है। इस सेटलमेंट में सभी आरोपियों पर $1.8 करोड़ का फाइन लगाया जाता है। जिसमें से $ लाख अकेले गौतम अडानी को देने थे। असल में एससीसी का केस शुरुआत से ही एक सिविल केस था जिसमें अक्सर फाइन देकर सेटलमेंट ही होता है। इस
08:24
Speaker A
तरह एससीसी का यह सिविल केस बंद होने के बाद गौतम अडानी के खिलाफ अब सिर्फ रिश्वत के आरोपों से संबंधित क्रिमिनल केस ही बाकी था जो अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट ने यूएस की ब्रोकलिन फेडरल कोर्ट में रजिस्टर करवाया था। और डीओजे यानी कि डिपार्टमेंट
08:38
Speaker A
ऑफ जस्टिस इस प्रोसीक्यूशन पर और ज्यादा रिसोर्सेज खर्च नहीं करना चाहता। लेकिन डीओजे के इस एप्लीकेशन को जज निकोलस जे ग्रोफिस ने शुरुआत में ही एक्सेप्ट करने से इंकार कर दिया। 26 जून को अपने आदेश में जज ग्रोफिस ने कहा कि केस को बंद करने
08:53
Speaker A
के लिए जो कारण दिया है वह बहुत छोटा है और कमजोर कारण है। इसलिए डीओजे को इस केस को बंद करने के लिए सफिशिएंट रीजंस देने चाहिए। इस पर डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस के वकील ट्रेंट मैक ने कहा कि यह डिपार्टमेंट
09:05
Speaker A
की जुरिडिक्शन के बाहर है और दूसरे देश का मामला है। मैक्वॉटर ने कहा कि यह एक फॉरेन केस है और इंडिया में इसके रिलेटेड केसेस में कोई एक्शननेबल मिसकंडक्ट नहीं मिला और ना ही अमेरिका के इन्वेस्टर्स का कोई
09:17
Speaker A
इकोनॉमिक लॉस हुआ है। मैकॉटर ने कहा कि पिछली बाइडन एडमिनिस्ट्रेशन ने इस केस को नेम एंड सेम करने के लिए आगे बढ़ाया है। ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी जो बाइडन पर लगातार आरोप लगाती रही है कि उन्होंने डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस का पॉलिटिकल मिसयूज
09:31
Speaker A
किया। बाइडन के प्रेसिडेंसी के आखिरी हफ्तों में जाते-जाते उन्होंने अपने बेटे हंटर बाइडन को सीरियस लीगल केसेस में फुल एंड अनकंडीशनल पार्डन दे दिया। एक फेडरल गन केस में और एक टैक्स केस से जुड़े मैटर्स में। 1 दिसंबर 2024 को दिया गया यह
09:45
Speaker A
पार्डन बाइडन के ऑफिस छोड़ने से करीब 7 हफ्ते पहले आया था। इसके चलते जो बाइडन पर डीओजे को पॉलिटिकल पर्पज के लिए यूज करने के सीरियस एलगेशंस भी लगे। एंड सम डेमोक्रेट्स [संगीत] आर क्रिटिसाइजिंग प्रेसिडेंट डिसजन आफ्टर ही
09:58
Speaker A
प्रीवियसली सेड मेनी टाइम्स ही वुड नॉट ह सन। गौतम अडानी और जस्टिस डिपार्टमेंट की दलीलें सुनने के बाद 10 अगस्त 2026 के दिन जज निकोलस ग्रोफिस ने यह कहते हुए कि इस केस से संबंधितेंट चीजें लीगली काफी डिविसियस हैं। यह केस बंद कर दिया। जज
10:14
Speaker A
निकोलस ग्रोफिस ने यह केस डिसमिस विद प्रजुडिस किया। यहां विद प्रजुस का मतलब है कि डीओजे इन्हीं क्रिमिनल चार्जेस को इस मामले में दोबारा रिवाइव नहीं कर सकता। यानी कि इन आरोपों को दोबारा से अडानी के खिलाफ नहीं लगाया जा सकता। इस तरह अपने
10:27
Speaker A
फाइनल जजमेंट में जज निकोलस ग्रोफिस ने गौतम अडानी, उनके भतीजे सागर अडानी और विनीत एस जैन पर लगे सभी आरोपों को डिसमिस कर दिया। दूसरी तरफ अडानी ने भी इस फैसले का स्वागत किया और ट्वीट करके कहा कि
10:39
Speaker A
मुश्किल समय में भी उनका कानून पर भरोसा नहीं टूटा था और वे देश के लिए काम करना जारी रखेंगे। यह कहानी थी अडानी पर अमेरिका में चल रहे केस की जिन्हें अमेरिकी कोर्ट ने समाप्त कर दिया है। हम
10:50
Speaker A
ऐसे ही करंट टॉपिक्स पर छोटी-छोटी वीडियोस लाना शुरू कर रहे हैं क्योंकि बड़ी वीडियो लाने में बड़ा समय लग जाता है। अगली वीडियो किस टॉपिक पर होनी चाहिए इसे लेकर कमेंट बॉक्स में जरूर बता दें। इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।
11:02
Speaker A
[नाक से की जाने वाली आवाज़]
Topics:गौतम अडानीफ्रॉड केसअमेरिकाडिपार्टमेंट ऑफ जस्टिससिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशनफॉरेन करप्ट प्रैक्टिसेस एक्टअडानी ग्रुपमार्केट वैल्यूलीगल केसभारत-अमेरिका संबंध

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