सोनम वांगचुक की प्रेरणादायक जीवन कहानी और लद्दाख के शिक्षा व जल संरक्षण में उनके योगदान की कहानी।
Key Takeaways
- शिक्षा में स्थानीय भाषा और संस्कृति का समावेश आवश्यक है।
- व्यावहारिक शिक्षा से छात्र बेहतर भविष्य बना सकते हैं।
- स्थानीय समस्याओं के लिए स्थानीय समाधान जैसे आर्टिफिशियल ग्लेशियर्स प्रभावी हैं।
- सोनम वांगचुक ने शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण दोनों में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
- सामाजिक और राजनीतिक सक्रियता से क्षेत्रीय विकास संभव है।
What the video covers
- सोनम वांगचुक का जन्म 1966 में लद्दाख के एक छोटे गांव उले टोपो में हुआ।
- श्रीनगर के स्कूल में भाषा की समस्या और अपमान के कारण उन्होंने दिल्ली जाकर पढ़ाई की।
- उन्होंने लद्दाख के शिक्षा सिस्टम में सुधार के लिए SCCMOL की स्थापना की।
- ऑपरेशन न्यू होप के तहत स्थानीय भाषा में शिक्षा और शिक्षक प्रशिक्षण शुरू किया गया।
- फेल छात्रों के लिए अल्टरनेटिव स्कूल शुरू किए गए जो प्रैक्टिकल शिक्षा देते हैं।
- उनकी प्रेरणा से बनी फिल्म 'थ्री इडियट्स' के फुनसुख वांगड़ू किरदार से तुलना हुई।
- सोनम ने आर्टिफिशियल ग्लेशियर्स (आइस स्टूपाज) बनाकर जल संरक्षण में क्रांति लाई।
- 2018 में उन्हें रेमन मैक्ससे अवार्ड मिला, जिसे एशिया का नोबेल पुरस्कार कहा जाता है।
- उन्होंने लद्दाख के सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर भी सक्रिय भूमिका निभाई।
- कॉकरोच पार्टी के प्रमुख सदस्य के रूप में उन्होंने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किए।
Chapters
- 00:00सोनम वांगचुक का जन्म और प्रारंभिक शिक्षा
- 01:12श्रीनगर के स्कूल में संघर्ष और दिल्ली में नई शुरुआत
- 02:17लद्दाख के शिक्षा सुधार के लिए SCCMOL की स्थापना
- 04:33ऑपरेशन न्यू होप और शिक्षा में क्रांति
- 05:33अल्टरनेटिव स्कूल और व्यावहारिक शिक्षा
- 05:57फिल्म थ्री इडियट्स और सोनम वांगचुक की तुलना
- 07:21आर्टिफिशियल ग्लेशियर्स और जल संरक्षण
- 08:42सामाजिक-राजनीतिक सक्रियता और कॉकरोच पार्टी
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Speaker A
1 सितंबर 1966 के दिन लद्दाख के लेहे शहर में करीब 70 कि.मी. दूर एक छोटे से गांव उले टोपो में सोनम मांगचुक का जन्म होता है। यह इतना छोटा सा गांव था कि इस गांव में कोई स्कूल नहीं था, इसलिए 9 साल की
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उम्र तक सोनम को उनकी मां शेरिंग वांगमो ने अपने घर पर ही पढ़ाया। सोनम वांगचुक के पिता सोनम वांगियाल इंडियन पैरामिलिट्री फोर्सेज में काम करते थे और एक यंग माउंटेनियर थे जिन्होंने 23 साल की उम्र में माउंट एवरेस्ट चढ़ ली थी। वे एवरेस्ट
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पर चढ़ने वाले तीसरे इंडियन थे। सोनम के पिता का पॉलिटिक्स में भी इंटरेस्ट था। इसलिए साल 1957 से 1967 तक वे कांग्रेस की तरफ से जम्मू कश्मीर की असेंबली में एमएलसी बनाए जाते हैं। 1972 में वे कांग्रेस के टिकट पर लेह सीट से विधायकी
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का चुनाव लड़ते हैं और जीत जाते हैं। जिसके 3 साल बाद 1975 में वे जम्मू कश्मीर गवर्नमेंट में कांग्रेस की तरफ से मंत्री बन जाते हैं। इसलिए पूरा परिवार राजधानी श्रीनगर में शिफ्ट हो जाता है। यहां पहली बार 9 साल के सोनम का एक स्कूल में एडमिशन
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कराया जाता है। लेकिन इस स्कूल में उर्दू, कश्मीरी, हिंदी और इंग्लिश जैसी भाषाओं में ही पढ़ाया जाता था। जबकि सोनम को आती थी लद्दाखी। इस कारण उन्हें क्लास रूम में कुछ समझ नहीं आता था और ना उनके टीचर
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उन्हें समझाने की कोशिश करते थे। इसलिए अक्सर टीचर्स सोनम को पीटते, छोटा महसूस कराते और कई बार क्लास रूम से बाहर निकाल देते थे। इसलिए सोनम को इस स्कूल में एक बेवकूफ लड़का माना जाता था। हालांकि श्रीनगर के इस स्कूल से फायदा यह होता है
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कि लद्दाखी बोलने और समझने वाले सोनम को थोड़ी बहुत हिंदी और इंग्लिश भी अब समझ आने लगी थी। लेकिन श्रीनगर वाले स्कूल में मिल रहे अपमान, अकेलेपन और निराशा से भरे सोनम ने एक दिन दिल्ली जाने का फैसला ले
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लिया और अकेले ही दिल्ली के लिए निकल पड़ते हैं। एक स्पेशल केंद्रीय विद्यालय स्कूल में एडमिशन लेने के लिए जो स्पेसिफिकली सीमावर्ती इलाकों के बच्चों के लिए चलाया जाता था। हालांकि इस वक्त तक स्कूल में एडमिशन का टाइम निकल चुका था।
Speaker A
लेकिन 12 साल के सोनम ने खुद प्रिंसिपल के सामने अपना पक्ष रखा जिससे प्रिंसिपल का दिल पिघल जाता है और सोनम को सेवंथ क्लास में एडमिशन मिल जाता है। दिल्ली के स्कूल में सोनम का अनुभव बिल्कुल अलग रहा। इसका
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एक कारण यह भी था कि सोनम पहले से ही सेवंथ क्लास के 3 महीने की पढ़ाई लद्दाख में ही पूरी कर चुके थे। इसलिए टीचर्स को आंसर करना अब उनके लिए इजी हो रहा था। इसलिए जिस लड़के को श्रीनगर में बेवकूफ
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माना जा रहा था, वह दिल्ली में एक होशियार लड़का माना जाने लगा। अपने इस रिदमम को बनाए रखने के लिए सोनम ने जी जान लगाकर पढ़ाई करनी शुरू कर दी जिससे वे अपनी इस नई पहचान को बनाकर रख सकें। 12वीं करने के
Speaker A
बाद सोनम ने अब तय किया कि वह मैकेनिकल इंजीनियर बनेंगे। लेकिन उनके पिता चाहते थे कि उनका बेटा सिविल इंजीनियर बने ताकि लद्दाख जैसे कटे हुए इलाके में सड़कें और बिल्डिंग्स बना सकें। सोनम के पिता ने सोनम को धमकी दी कि अगर उन्होंने उनकी बात
Speaker A
नहीं मानी तो वह उनकी पढ़ाई का खर्च उठाना बंद कर देंगे। लेकिन सोनम फिर भी नहीं मानते और पिता के खिलाफ जाकर 19 की उम्र में श्रीनगर के नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी कि एनआईटी में एडमिशन ले लेते हैं। अब कॉलेज की फीस भरने के लिए
Speaker A
सोनम ने छुट्टियों में लेह में एक कोचिंग सेंटर खोल लिया और इससे सिर्फ 2 महीने में ही ₹17,000 कमा लिए जो उनकी 3 साल के इंजीनियरिंग कॉलेज की पूरी फीस के लिए काफी थे। इसी ट्यूशन सेंटर की वजह से सोनम
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को यह भी समझ आया कि लद्दाख के बच्चे तो होशियार हैं लेकिन सिस्टम उन्हें फेल कर रहा है। इसलिए सोनम ने तय किया कि वे लद्दाख के एजुकेशन सिस्टम को सही करके ही मानेंगे। उस वक्त लद्दाख में 10थ क्लास
Speaker A
में 95% फेल हो जा रहे थे क्योंकि उनका पूरा सिलेबस उर्दू में था। यानी कि जम्मू कश्मीर राज्य की भाषा में था। एक ऐसी भाषा जो लद्दाख में कोई नहीं बोलता था और इसके अलावा टीचर्स रट्टा मारने पर जोर देते थे।
Speaker A
इसे ठीक करने के लिए 1988 में सोनम मांगचुक ने एक ऑर्गेनाइजेशन बनाई जिसका नाम था एससीसीएमओएल यानी स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख। एससीसीएमओएल ने 1994 में लोकल गवर्नमेंट के साथ पार्टनरशिप में ऑपरेशन न्यू होप शुरू किया। जिसके तहत टीचर्स को दोबारा से
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ट्रेन किया गया। लद्दाखी कल्चर के हिसाब से दोबारा से किताबें लिखी गईं और स्कूल्स को मैनेज करने के लिए गांव-गांव में विलेज एजुकेशन कमिटीज बनाई गईं। ऑपरेशन न्यू होप ने लद्दाख के एजुकेशन सिस्टम में क्रांति ला दी और जहां पहले 10थ क्लास में केवल 5%
Speaker A
बच्चे ही पास होते थे, 7 साल में ही यह संख्या 11 गुना बढ़कर 55% और बाद में 75% तक पहुंच जाती है। इसके अलावा वो बच्चे जो अब भी फेल हो जा रहे थे उनके लिए सोनम मांगचुक ने लेह के पास सैकमोल अल्टरनेटिव
Speaker A
स्कूल्स शुरू किए जिसमें सिर्फ उन्हीं बच्चों को एडमिशन दिया जाता जो रेगुलर स्कूल में फेल हो रहे थे। इस अल्टरनेटिव स्कूल में किताबों से पढ़ाई नहीं होती थी बल्कि प्रैक्टिकल्स से होती थी। यहां स्टूडेंट्स रेडियो स्टेशन चलाते, खेती
Speaker A
करते, मशीनें रिपेयर करते और पूरा कैंपस खुद ही मैनेज करते। यह फेल होने वाले बच्चे आगे चलकर एंटरप्रेन्योर्स, इंजीनियर्स और लीडर्स बनते हैं। दोस्तों, यहां बीच में रोक कर एक बात बताना चाहता हूं। एक बिजनेस की शुरुआत अक्सर एक आईडिया
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से होती है। लेकिन जैसे-जैसे बिजनेस बढ़ता है उसका मालिक बिजनेसमैन कम और पासवर्ड्स का चौकीदार ज्यादा बन जाता है। सेल्स किसी अलग ऐप पर, अकाउंटिंग कहीं और, इन्वेंटरी एक्सेल में, एचआर WhatsApp पर और वेबसाइट किसी दूसरे प्लेटफार्म पर। आधा समय बिजनेस
Speaker A
चलाने में नहीं बल्कि इन सबको आपस में मिलाने में निकल जाता है। इसी केस को खत्म करता है ओडू, एक ऑल इन बिजनेस प्लेटफार्म जहां सेल्स, अकाउंटिंग, इन्वेंटरी, एचआर, मार्केटिंग और वेबसाइट तक सब कुछ एक कनेक्टेड सिस्टम पर मैनेज किया जा सकता
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है। इसे ओडू की तरफ से इंडिया का सबसे बड़ा टैक इवेंट करवाया जा रहा है गुजरात के गांधीनगर के महात्मा मंदिर कन्वेंशन सेंटर में जिसका नाम है ओडू एक्सपीरियंस 2026 इंडिया, जो हो रहा है आने वाले 11-12
Speaker A
सितंबर 2026 के बीच जहां 150 से ज्यादा कंट्रीज से 45000 से ज्यादा अटेंडज आ रहे हैं, जहां 200 प्लस टॉक्स होंगे, लाइव डेमोज होंगे और ओडू 20 का लाइव लॉन्च होगा। इससे पहले के भी ओडू इवेंट्स में बहुत
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बड़े-बड़े क्रिएटर्स भी आए थे जहां लोगों ने रियल कनेक्शंस बिल्ड किए, टेक के बारे में सीखा और पार्टी भी की। इस प्रोग्राम का बेसिक पास बिल्कुल फ्री है। अगर आप फाउंडर हैं या एंटरप्रेन्योर हैं या टैकी हैं या
Speaker A
अपना बिजनेस शुरू करने के लिए प्लानिंग कर रहे हैं तो डिस्क्रिप्शन में दिए लिंक से अभी फ्री रजिस्ट्रेशन कर लीजिए। अब वापस अपनी कहानी पर लौटते हैं। इस बीच साल 2009 में एक फिल्म आई थ्री इडियट्स जिसमें आमिर
Speaker A
खान एक स्टूडेंट रेंचो उर्फ़ फुनसुख वांगड़ू का रोल करते हैं जो इंडिया के पूरे एजुकेशन सिस्टम को कटघरे में खड़ा करता है। यह फिल्म बॉलीवुड के इतिहास की सबसे कामयाब फिल्मों में से एक रही। इसके बाद पूरे देश में एक ही सवाल था कि फुंसुक
Speaker A
बांगड़ू असल में कौन है? जवाब मिला सोनम बांगचुक। थ्री इडियट फिल्म की एंडिंग में लद्दाख में जो स्कूल दिखाया गया था वो बिल्कुल सोनम वांगचुक के एससीसी एमओएल स्कूल जैसा था। लेकिन खुद सोनम वांगचुक हमेशा से इस चीज से इंकार करते रहे हैं।
Speaker A
कौन बनेगा करोड़पति सुपर? उन्होंने साफ किया कि फिल्म उनके ऊपर नहीं बनी है लेकिन उनसे इंस्पायर्ड जरूर हो सकती है। सोनम का कहना था कि फिल्म बनाने से पहले उनसे कंसल्ट नहीं किया गया था और सीक्रेटली उनके स्कूल में शूटिंग करने की कोशिश भी
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की गई थी। लेकिन स्कूल स्टाफ ने इससे इंकार कर दिया था। जिसके बाद पास के एक स्कूल में शूटिंग की गई थी। जोश टॉक्स पर दिए अपने स्पीच में सोनम मांगसुक ने कहा कि वह फुनसुक वांगड़ू नहीं हैं। वह सोनम
Speaker A
मांगसुक हैं जो फिल्मों में नहीं काम करते बल्कि असल जिंदगी में काम करते हैं। लद्दाख को कोल्ड डेजर्ट कहा जाता है। जहां साल में केवल 100 एमएम बारिश होती है। ग्लेशियर से पिघलकर आने वाले पानी पर टिकी हुई है। लेकिन क्लाइमेट चेंज के कारण
Speaker A
ग्लेशियर्स तेजी से पिघल रहे हैं। जिससे गर्मियों में पानी बेकार बह जाता है और बाद में जब किसानों को सबसे ज्यादा पानी की जरूरत होती है तब खेती के लिए पानी ही नहीं होता। सोनम मांगुक ने इसका समाधान
Speaker A
आर्टिफिशियल ग्लेशियर्स बनाकर निकाला जिन्हें नाम दिया गया आइस स्टूपाज यानी कि इसमें सर्दियों में पाइप्स के जरिए पहाड़ों से पानी लाया जाता है जो नीचे आकर स्तूपाज की शेप के आर्टिफिशियल ग्लेशियर्स में जमा हो जाता है। बाद में जब किसानों
Speaker A
को खेती के लिए पानी की जरूरत होती है तो यह आर्टिफिशियल ग्लेशियर्स उन्हें यह पानी प्रोवाइड कराते हैं। इस तरह सोनम वांगसुक और उनकी टीम ने छह स्तूपाज बनाए जिनमें लगभग 3 करोड़ लीटर पानी स्टोर किया जा सकता है। यह आईडिया इतना सफल होता है कि
Speaker A
लद्दाख से निकलकर स्विट्जरलैंड तक पहुंच जाता है। जहां के विलेजेस में अपने आइस स्तूपाज बनाने शुरू कर दिए गए हैं। ऐसे ही इनोवेशंस के लिए साल 2018 में सोनू मांगचू को रेमन मैक्ससे अवार्ड से नवाजा जाता है। जिसे एशिया का नोबेल प्राइज कहा जाता है।
Speaker A
जून 2020 में जब लद्दाख के गलवान वैली में इंडिया और चाइना के सैनिकों में झड़प होती है जिसमें 20 भारतीय जवान शहीद होते हैं तो सोनम मांगचुक ने एक नारा दिया सेना देगी बुलेट से जवाब और हम देंगे वैलेट से
Speaker A
औ
Speaker A
गर्म रखने के लिए कई टन केरोसिन तेल जला देते थे। इससे ना केवल प्रकृति को नुकसान हो रहा था बल्कि केरोसिन के धुएं से सैनिकों को भी दिक्कत होती थी। इस समस्या के समाधान के लिए सोनम मांगचुक ने सोलर
Speaker A
हीटेड टेंट बनाई। यह टेंट पानी के जरिए दिन में सूरज की गर्मी को स्टोर करती थी जो रात को ठंड के समय जवानों के काम आती। यह वह समय था जब सोनम मांगचुक मोदी सरकार और उसके समर्थकों के लिए हीरो थे। सोनम
Speaker A
वांगचुक मोदी सरकार के फैसलों का समर्थन करती थी और बीजेपी की सरकारें प्रमोशनल कैंपेन में उनके चेहरे का इस्तेमाल भी किया करती थी। वांगचुक सेल्फ प्रोफेस्ड मोदी सपोर्टर हैड वन सेलिब्रेटेड लद्दाख बिकमिंग अ यूनियन टेरिटरी [संगीत] एंड प्रेस द प्राइम
Speaker A
मिनिस्टर फॉर फुलफिलिंग द रीजंस लॉन्ग स्टैंडिंग ड्रीम बट विदिन मंथ्स ही बिगेन एडवोकेटिंग फॉर स्पेशल स्टेटस एंड इवेंचुअल स्टेटहुड प्लेसिंग हिम एट ऑड्स विथ द राइट विंग। 5 अगस्त 2019 के दिन जब मोदी सरकार ने आर्टिकल 370 खत्म करके
Speaker A
जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म कर दिया और इसे दो यूनियन टेरिटरीज में बांट दिया। जम्मू कश्मीर और लद्दाख तब लेह की सड़कों पर इस फैसले का जश्न मनाया जाता है क्योंकि बुद्धिस्ट मेजॉरिटी वाले लेह में बहुत समय से कश्मीर से अलग किए जाने की
Speaker A
मांग की जा रही थी। खुद सोनम मांगचुक ने ट्वीट करके लिखा थैंक यू प्राइम मिनिस्टर लद्दाख के पुराने सपने को पूरा करने के लिए। लेकिन इस जश्न में एक अहम चीज छूट जा रही थी। जम्मू कश्मीर को खुद की विधानसभा
Speaker A
दी गई थी। जबकि लद्दाख को विधानसभा नहीं दी गई थी। उसे सीधे लेफ्टिनेंट गवर्नर के जरिए केंद्र सरकार चलाने वाली थी। जबकि पहले जम्मू कश्मीर विधानसभा में लद्दाख के अपने विधायक होते थे, मंत्री होते थे, लेकिन अब वह भी खत्म हो गया था और अपने ही
Speaker A
राज्य में लद्दाख के लोगों का रिप्रेजेंटेशन लिमिटेड हो गया था। इसके अलावा पहले आर्टिकल 370 के तहत लद्दाख में बाहरी लोगों के जमीन खरीदने पर रोक लगी हुई थी और लोकल लोगों का नौकरियों पर अधिकार था। लेकिन 370 खत्म होने के बाद अब
Speaker A
यह अधिकार भी चले गए। इसलिए धीरे-धीरे यहां के लोगों को एहसास होने लगा कि उन्हें जो मिला है वो आजादी नहीं बल्कि उल्टा उनका नुकसान हो गया है। इसलिए अब पूरे लद्दाख में कॉन्स्टिट्यूशन के सिक्स्थ शेड्यूल में शामिल किए जाने की
Speaker A
मांग उठने लगी जो ट्राइबल मेजॉरिटी एरियाज को ऑटोनॉमस काउंसिल्स के जरिए अपनी जमीन, अपने जंगल और कल्चरर्स पर नियम कानून बनाने का हक देता है। मतलब जो एरिया कॉन्स्टिट्यूशन के सिक्स्थ शेड्यूल में आते हैं वहां लोकल लोगों को अपने नियम
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अपने कानून खुद बनाने की आजादी होती है और स्टेट और केंद्र का इंटरफेरेंस कम होता है। 2019 के लोकसभा चुनाव और 2020 के हिल काउंसिल चुनाव में बीजेपी ने खुद वायदा किया था कि अगर वह चुनाव जीतते हैं तो
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लद्दाख को सिक्स्थ शेड्यूल में शामिल कर दिया जाएगा। इंटरेस्टिंगली बीजेपी यह चुनाव जीत भी जाती है लेकिन यह वायदा पूरा नहीं किया जाता। इस मुद्दे पर सोनम मांगचुक ने कई प्रदर्शन किए। सबसे पहले उन्होंने जनवरी 2023 में 5 दिन का
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क्लाइमेट फास्ट किया। फिर मार्च 2024 में खुले आसमान के नीचे हड्डियां जमा देने वाली ठंड में 21 दिन की भूख हड़ताल की। इसके बाद सितंबर 2024 में दिल्ली चलो पद यात्रा की जिसमें वह सैकड़ों लोगों के साथ 1 महीने तक पैदल चलकर लगभग 1000 कि.मी.
Speaker A
चलते हुए लेह से दिल्ली पहुंचते हैं। लेकिन 30 सितंबर की रात को सिंघु बॉर्डर पर दिल्ली पुलिस ने उन्हें अरेस्ट कर लिया। कुछ दिन बाद अरेस्ट से छूटने के बाद सोनम मांगसुक सीधे दिल्ली के लद्दाख भवन पहुंचते हैं और यहां अनिश्चितकालीन भूख
Speaker A
हड़ताल शुरू कर देते हैं। 16 दिन बाद 21 अक्टूबर 2024 को सरकार लद्दाख के मुद्दों पर बातचीत करने के लिए तैयार हो जाती है। जून 2025 में केंद्र सरकार ने सरकारी नौकरियों में लद्दाख के लोगों को 85% रिजर्वेशन दे दिया और लोकल रेजिडेंट बनने
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के लिए लद्दाख में लगातार 15 साल रहने की शर्त लगा दी। लेकिन दो सबसे बड़ी मांगों एक पूर्ण राज्य का दर्जा और सिक्स्थ शेड्यूल में शामिल किया जाना इन दोनों मांगों पर कोई फैसला नहीं लिया गया। इसलिए 10 सितंबर 2025 के दिन सोनम मांगचुक अपने
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14 साथियों के साथ एक बार फिर भूख हड़ताल पर बैठ जाते हैं। सोनम मांगचुक के अनशन के 15वें दिन यानी 24 सितंबर 2025 को भूख हड़ताल पर बैठे दो लोगों की तबीयत बिगड़ जाती है। जिसके बाद उन्हें अस्पताल में
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भर्ती कराया जाता है। इससे गुस्से में आए लेह के हजारों युवा सड़कों पर उतर आते हैं और देखते ही देखते हालात बेकाबू हो जाते हैं। भीड़ ने बीजेपी का ऑफिस और पुलिस की कई गाड़ियां फूंक दी। जवाब में पैरामिलिट्री
Speaker A
फोर्सेस ने प्रोटेस्टर्स पर गोलियां चला दी। इस फायरिंग में चार लोगों की मौत होती है और लगभग 90 लोग घायल होते हैं। इस हिंसा के अगले दिन 25 सितंबर को सोनम मांगचुक ने अपना अनशन तोड़ दिया और लोगों
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से शांति बनाए रखने की अपील की। रास्ते पर ना चलें। हिंसा के रास्ते पर यह मेरे 5 साल के कोशिशों को नाकाम कर देता है। लेकिन सरकार ने कहा कि इस हिंसा के लिए सोनम मांगचुक के भड़काऊ बयान जिम्मेदार
Speaker A
हैं। लद्दाख प्रशासन ने कहा कि सोनम ने मांगे ना मानने पर अरब स्प्रिंग की तर्ज पर सरकार का तख्ता पलट करने की बात कही थी और तिब्बत की तरह खुद को आग लगाने के सजेशंस दिए थे। अनशन तोड़ने के बाद जब
Speaker A
सोनम मांगचुक लेह में हुई हिंसा पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के लिए अपने गांव से लेहे जा रहे थे। तभी रास्ते में ही पुलिस ने उन्हें अरेस्ट कर लिया और 1600 कि.मी. दूर जोधपुर सेंट्रल जेल में भेज दिया। सोनम
Speaker A
मांगछु पर नेशनल सिक्योरिटी एक्ट यानी कि एनए लगा दिया जाता है। जिसके तहत सरकार लोगों को एक साल तक के लिए बिना किसी सुनवाई के और बिना किसी जमानत के जेल में डाल सकती है। एक फेमस साइंटिस्ट अब देश की
Speaker A
नेशनल सिक्योरिटी के लिए खतरा बन चुका था। ऐसा सरकार का कहना था। इधर लद्दाख पुलिस चीफ एसडी सिंह जामवाल ने दावा किया कि उनके पास इस चीज के क्रेडिबल इनपुट्स हैं कि सोनम मांगचुक के पाकिस्तान से संबंध हैं। बीजेपी के आईटी सेल हेड अमित मालवीय
Speaker A
ने कहा कि सोनम मांगचुक पाकिस्तान और चाइना के इंटरेस्ट को आगे बढ़ा रहे हैं। इन आरोपों के बीच सोनम मांगचुक को बिना किसी सुनवाई के लगभग 6 महीने तक जेल में रखा जाता है। लेकिन फिर अचानक से 14 मार्च
Speaker A
2026 के दिन मोदी सरकार ने सोनम मांगचुक के ऊपर लगे हुए एनएसए को हटा लिया और इस तरह लगभग 170 दिन बाद उन्हें जेल से बाहर निकाला जाता है। कई महीने जेल में रहने के बाद सबको लग रहा था कि अब सोनम मांगचुक
Speaker A
चुपचाप बैठ जाएंगे लेकिन ऐसा नहीं होता। मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के एक बयान के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी नाम का एक ऑनलाइन मूवमेंट खड़ा होता है। जिसने नीट पेपर लीक को अपना पहला बड़ा मुद्दा बनाया। कॉकरोच जनता पार्टी ने
Speaker A
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगते हुए 6 जून को जंतरमंतर पर अपना पहला प्रदर्शन बुलाया जिसमें सोनम मांगसुक भी शामिल होते हैं। वह कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़ने वाले सबसे पहला बड़ा फेस थे। 20 जून 2026 को सीजेपी ने
Speaker A
जंतरमंतर पर दूसरी बार प्रदर्शन किया और इस बार धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे देने तक यहां से हटने से इंकार कर दिया। 8 जून तक यह प्रोटेस्ट चलता रहता है। हालांकि उस तरह की भीड़ नहीं उमड़ी जैसी की उम्मीद की
Speaker A
जा रही थी। फिर 28 जून 2026 के दिन सोनम मांगछु जंतरमंतर पहुंचते हैं और भूख हड़ताल पर बैठ जाते हैं। पूरे तन मन धन की शक्ति से आप लोगों के साथ इन दोनों मुद्दों के समर्थन में अनशन पर बैठ रहा हूं।
Speaker A
सोनम मांगसुक ने ऐलान किया कि इस बार वह 5 या 10 दिन के लिए नहीं बल्कि तब तक अनशन करेंगे जब तक कि सरकार छात्रों की मांग नहीं मानती। हालांकि शुरुआत में अब भी लोगों के भी जंतरमंतर नहीं पहुंचती। लेकिन
Speaker A
जैसे-जैसे सोनम की भूख हड़ताल के दिन बढ़ने लगते हैं वैसे-वैसे Instagram पर इमोशनल विजुअल्स और गानों की बाढ़ आ जाती है। इधर 17 दिनों में सोनम मांगू का वजन लगभग 8 किलो तक गिर जाता है और वे लगातार
Speaker A
दर्द में रहने लगते हैं। कॉकरोच पार्टी के लीडर्स की तरफ से ऐलान किया जाता है कि 20 जुलाई के दिन वे संसद मार्च निकालने वाले हैं। 20 जुलाई के मार्च से पहले ही जंतरमंतर पर भीड़ आने लगती है। बड़े-बड़े
Speaker A
सेलिब्रिटीज भी अब सोनम मांगचू के सपोर्ट में ट्वीट्स करने लगे और वीडियोस डालने लगे। आज जो सोनम सर के साथ हुआ ना ठीक नहीं हुआ। चलिए आई एम ग्लैड दैट ही इज़ ओके। उनकी वाइफ उनके साथ है। सोनम मांगचुक को पॉलिटिकल सपोर्ट भी मिलने
Speaker A
लगता है। उद्धव ठाकरे, अखिलेश यादव और महुआ मोहित्रा जैसे बड़े नेताओं ने सोनम का समर्थन करते हुए उनसे अनशन तोड़ने की अपील की। अरविंद केजरीवाल और डिंपल यादव समेत कई बड़े नेता जंतरमंतर जाकर सोनम मांगसुक से मिलते हैं। शुरू में कांग्रेस
Speaker A
पार्टी ने कॉकरोच आंदोलन से दूरी बनाई हुई थी। लेकिन 17 जुलाई को कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा भी जंतरमंतर पर जाकर सोनम मांगसुक से मिलते हैं और उनको सपोर्ट करते हैं। यहां पर एक कोइंसिडेंस यह भी था कि 1980
Speaker A
में सोनम के पिता सोनम बांग्याल ने भी लद्दाख के लोगों को ट्राइबल स्टेटस दिलाने के लिए कई भूख हड़तालें की थी। 1984 में खुद प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी लेह जाकर उनका अनशन तुड़वाया था। लेकिन मोदी सरकार ने उनके बेटे यानी कि सोनम मांगचुक
Speaker A
को कोई रिस्पांस नहीं दिया। हालांकि सरकार भयंकर दबाव में थी। इस बीच 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस सोनम मांगुक को जबरन उठाकर सबदरजंग हॉस्पिटल ले जाती है। हालांकि सोनम मांगुक ने अनशन तोड़ने से इंकार कर दिया। पूरा देश इस घटना को देख रहा था।
Speaker A
इसलिए 20 जुलाई के संसद मार्च में ऐसी भीड़ आती है जो पहले कभी नहीं देखी गई थी। इस मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस और फोर्सेस ने प्रोटेस्टर्स पर पावर का इस्तेमाल किया लेकिन आंदोलन खत्म नहीं हुआ और मार्च के बाद भी हजारों लोगों की भीड़
Speaker A
अब जंतर मंतर पर आने लगी। इस बीच भाजपा के पूर्व अध्यक्ष जेपी नड्डा सोनम मांगसुक से मिलने के लिए अस्पताल पहुंचते हैं और उनका अनशन तुड़वा देते हैं। इस तरह 25 जुलाई 2026 के दिन फाइनली इंडिया के एजुकेशन
Speaker A
मिनिस्टर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। जो लोग पिछले 36 दिनों से हमें बोल रहे थे इस्तीफे नहीं होते इस सरकार में। ये सरकार इस्तीफे नहीं करवाती। उन सभी लोगों से मैं फिर से कहता हूं झुकती है दुनिया।
Speaker A
[हौसला बढ़ाने की आवाज़] कहानी थी सोनम मांगचुक की। कैसे वो छात्र जिसे क्लास में बेवकूफ समझा जाता था वो एक दिन बड़ा एजुकेशनिस्ट बनता है। जिसके कहने पर लाखों छात्र सड़कों पर आ जाते हैं और एजुकेशन मिनिस्टर को इस्तीफा देना पड़ता
Speaker A
है। सोनम की जिंदगी को देखें तो यही समझ में आता है कि उन्होंने समाज और लद्दाखी लोगों को अपने जीवन से ऊपर रखा। ऐसे लोग किसी भी देश की संपत्ति होते हैं जिन्हें मोदी सरकार ने बिना सोचे समझे जेल तक में
Speaker A
डाल दिया। फिलहाल यह कहानी यहीं तक। दोस्तों अंत में बात ओडू के टैक इवेंट की जो गुजरात के गांधीनगर में 11 12 सितंबर के बीच हो रहा है। जहां 150 से ज्यादा कंट्रीज से 45,000 से ज्यादा अटेंडज आ रहे
Speaker A
हैं। जिसका बेसिक पास एकदम बिल्कुल फ्री है। जिसकी लिंक आपको डिस्क्रिप्शन में मिल जाएगी। इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।
Topics:सोनम वांगचुकलद्दाख शिक्षा सुधारSCCMOLआर्टिफिशियल ग्लेशियर्सआइस स्टूपाजथ्री इडियट्सरेमन मैक्ससे अवार्डकॉकरोच पार्टीलद्दाख जल संरक्षणस्थानीय भाषा शिक्षा











