कपूर परिवार की चार पीढ़ियों की बॉलीवुड में ताकतवर भूमिका और उनके संघर्षों की कहानी।
Key Takeaways
- कपूर परिवार ने चार पीढ़ियों तक हिंदी सिनेमा पर गहरा प्रभाव डाला।
- पृथ्वीराज कपूर से लेकर राज कपूर और उनकी संतान तक, सभी ने बॉलीवुड में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- परिवार ने थिएटर और फिल्मों दोनों में अपनी पहचान बनाई।
- परिवार के पारंपरिक नियमों में समय के साथ बदलाव आया, खासकर महिलाओं के करियर को लेकर।
- कपूर परिवार की फिल्मों ने भारतीय सिनेमा को वैश्विक पहचान दिलाई।
What the video covers
- पृथ्वीराज कपूर ने 1906 में लियालपुर में जन्म लिया और बॉलीवुड में अपने संघर्ष की शुरुआत की।
- पृथ्वीराज कपूर ने पृथ्वी थिएटर्स की स्थापना की और कई फिल्मों में प्रमुख भूमिका निभाई।
- राज कपूर, पृथ्वीराज के बेटे, बॉलीवुड के महान अभिनेता, निर्देशक और निर्माता बने।
- राज कपूर ने आर के फिल्म्स और आर के स्टूडियो की स्थापना की और कई हिट फिल्में दीं।
- कपूर परिवार की दूसरी और तीसरी पीढ़ी ने भी बॉलीवुड में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
- परिवार की महिलाओं को फिल्मों में काम करने की अनुमति पहले नहीं थी, जो बाद में बदला।
- रणधीर कपूर और बबीता के बीच परिवार के ट्रेडिशन और करियर को लेकर मतभेद हुए।
- कपूर परिवार की फिल्मों ने भारत के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लोकप्रियता हासिल की।
- परिवार के सदस्यों ने अभिनय, निर्देशन, और प्रोडक्शन में अपनी छाप छोड़ी।
- कपूर परिवार की कहानी संघर्ष, सफलता और पारिवारिक मूल्यों का मेल है।
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Speaker A
अगर हिंदी सिनेमा के पिछले 100 साल की हिस्ट्री को उठाकर देखें, तो एक नाम बार-बार सामने आता है कपूर। चार जनरेशंस, दर्जनों सुपरस्टार्स और अनगिनत यादगार फिल्में। इसलिए आज की इस वीडियो में हम बात करेंगे भारत की सबसे पावरफुल फिल्मी फैमिली द कपूर्स की। पाकिस्तान के फैसला में एक जगह है लियालपुर। यहीं पर 3 नवंबर 1906 के दिन एक पंजाबी हिंदू खत्री परिवार में एक बच्चे का जन्म होता है जिसका नाम रखा जाता है पृथ्वीराज कपूर। कपूर परिवार शुरू से ही पैसे वाला परिवार था। पृथ्वीराज कपूर के पिता दीवान वश्वर नाथ कपूर इंडियन इंपीरियल पुलिस में ऑफिसर थे। जहां तक कि उनके दादा परदादा भी फैसलाबाद जिले की समुद्री तहसील में तहसीलदार थे। पृथ्वीराज जब लॉ की पढ़ाई कर रहे थे तभी उन्हें एक्टिंग काफी पसंद थी। इसलिए पृथ्वी ने ल्यालपुर और पेशावर के थिएटर्स में एक्टिंग शुरू कर दी। इसी बीच 17 साल की उम्र में पृथ्वी की शादी 15 साल की राम सारणी से कर दी जाती है। अगले साल 14 दिसंबर 1924 को रामसारणी एक बेटे को जन्म देती हैं जिसका नाम रखा जाता है राज कपूर। उन दिनों बॉम्बे में ठीक-ठाक संख्या में फिल्में बन रही थी। इसलिए साल 1928 में पृथ्वी अकेले ही बॉम्बे आ जाते हैं और यहां इंपीरियल फिल्म्स कंपनी जॉइन कर लेते हैं। अब तक पृथ्वी तीन बच्चों के पिता बन चुके थे और उनकी पत्नी रामसारणी अभी भी पेशावर में ही अपने बच्चों का ख्याल रख रही थी। बॉम्बे आने के बाद पृथ्वी का असली संघर्ष शुरू होता है। पैसे कम होने की वजह से पृथ्वी गिरगांव के पास एक तबेले में रहने लगते हैं। धीरे-धीरे पृथ्वी को फिल्मों में छोटे-मोटे रोल्स मिलने लग जाते हैं। साल 1929 में आई एक साइलेंट फिल्म बेधारी तलवार से पृथ्वी ने अपना डेब्यू शुरू किया। लेकिन अगले ही साल 1930 में पृथ्वी को लीड रोल करने का मौका मिल जाता है और यह फिल्म थी सिनेमा गर्ल। अब जैसे-जैसे पृथ्वीराज कपूर को फिल्मों से पैसे मिलने लगे, उन्होंने अपने परिवार को भी बॉम्बे बुला लिया। लेकिन साल 1931 में पृथ्वीराज के बेटे देवेंद्र की डबल निमोनिया होने से मौत हो जाती है। पृथ्वीराज कपूर और रामसारणी इस दुख से अभी उभर नहीं पाए थे कि एक हफ्ते के अंदर ही 4 साल के उनके बेटे रविंद्र ने खेलते वक्त गलती से रेड पोइजन खा लिया जिससे उसकी भी मौत हो जाती है। आगे चलकर पृथ्वीराज के तीन बेटे राज कपूर, शम्मी कपूर और शशि कपूर भी एक्टिंग में ही अपना करियर बनाते हैं। वहीं उनकी बेटी उर्मिला कपूर शादी कर अपना घर बसा लेती हैं। साल 1944 में थिएटर के प्रति इंटरेस्ट के चलते पृथ्वीराज कपूर ने अपना थिएटर ग्रुप पृथ्वी थिएटर्स शुरू कर दिया। अगले 16 साल तक उनके थिएटर ग्रुप ने 2662 परफॉर्मेंस दी जिसके हर सिंगल शो में पृथ्वीराज कपूर लीड रोल में हुआ करते थे। लेकिन थिएटर में इतना पैसा नहीं था कि अब इसे लंबे समय तक चलाया जा सके। इसलिए एक बार फिर पृथ्वीराज मूवीज में काम करने लग जाते हैं। साल 1960 में पृथ्वीराज ने मुगले आजम में अकबर और 1965 की सिकंदर एआम में पूरस का रोल निभाया जिसकी काफी तारीफ होती है। हालांकि 1972 में पृथ्वीराज कपूर की मौत हो जाती है। इस वक्त उनकी उम्र 65 साल थी। पृथ्वीराज अपने आठ भाई बहनों में सबसे बड़े थे, उनके छोटे भाई त्रिलोक कपूर भी एक्टर थे। वहीं सुरेंद्र कपूर जो पृथ्वीराज के फर्स्ट कजन थे, वे भी एक फिल्म प्रोड्यूसर थे। उन्हीं के बेटे हुए बोनी कपूर, अनिल कपूर और संजय कपूर। लेकिन कपूर फैमिली की सेकंड जनरेशन की एक्टिंग फील्ड में शुरुआत होती है पृथ्वीराज कपूर के बेटे और इंडियन सिनेमा के शो मैन राज कपूर से। पेशा भर में जन्मे राज कपूर ने बचपन से ही अपने पिता पृथ्वीराज कपूर को एक्टिंग करते हुए देखा था। इसलिए उनका इंटरेस्ट भी फिल्मों में डेवलप होने लग जाता है। राज कपूर 10 साल की उम्र में ही पहली बार इंकलाब नाम की फिल्म में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट नजर आए। इसके बाद 1940 में वह एक्टिवली एज ए लीड एक्टर फिल्म्स करने लग जाते हैं। साल 1946 में राज कपूर अपने पिता की मर्जी से कृष्णा मल्होत्रा से शादी कर लेते हैं। कृष्णा एक आईजी की बेटी थी। कृष्णा की शादी के बाद उनके भाई राजेंद्रनाथ, प्रेमनाथ और नरेंद्र नाथ भी फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ जाते हैं। 1947 में राज कपूर और कृष्णा राज के पहले बच्चे का जन्म होता है। जिसका नाम रखा जाता है रणधीर कपूर। रणधीर कपूर के दादा राज कपूर को एक्टिंग के साथ डायरेक्शन में भी इंटरेस्ट था। इसलिए 1948 में उन्होंने अपना खुद का बैनर आर के फिल्म्स लॉन्च कर दिया। राज कपूर ने आर के स्टूडियो के नाम से एक स्टूडियो भी बनाया जो आज भी मुंबई के जाने-माने स्टूडियो में से एक है। यहीं से शुरू होती है एक लेजेंड्री एक्टर, डायरेक्टर, प्रोड्यूसर की जर्नी जिसने बॉलीवुड की एक से एक बढ़कर मूवीज दी। राज कपूर की फिल्म बरसात ने कमाई के सारे रिकॉर्ड्स तोड़ दिए। ऐसे ही साल 1951 में आई उनकी आवारा मेजर हिट रहती है। यह फिल्म इंडिया के साथ-साथ सोवियत यूनियन, चीन, टर्की, अफगानिस्तान में भी खूब चलती है। राज कपूर इंटरनेशनल स्टार बन जाते हैं और उन्हें इंडिया का चार्ली चैपलिन भी अब कहा जाने लगता है। साल 1955 में रिलीज हुई राज कपूर की फिल्म श्री 420 भी मेजर हिट साबित होती है। इस फिल्म को भी राज कपूर ने डायरेक्ट और प्रोड्यूस किया था और एक्टिंग भी की थी। फिल्म में उनके अपोजिट नरगिस थी। श्री 420 के दो गाने प्यार हुआ, इकरार हुआ और मेरा जूता है जापानी बड़े हिट साबित होते हैं। इन्हीं दिनों राज कपूर और नरगिस के अफेयर की चर्चाएं चल जाती हैं। माना जाता है कि दोनों के बीच 7 साल तक अफेयर चलता है। लेकिन राज कपूर पहले से शादीशुदा थे और अपने परिवार को छोड़ना नहीं चाहते थे। इसलिए साल 1956 में नरगिस राज से रिश्ता तोड़ लेती हैं और 1958 में एक्टर सुनील दत्त से शादी कर लेती हैं। मिड 60 तक राज कपूर की कई और फिल्में जैसे अनाड़ी, संगम, जिस देश में गंगा बहती है सुपरहिट साबित होती हैं जिससे राज कपूर का बॉलीवुड में सिक्का चलने लग जाता है। इस बीच एक और हीरोइन वैजंती माला से उनका अफेयर खूब चर्चा में रहता है। लेकिन 60 के दशक के आखिरी सालों में राज कपूर का स्टारडम कम होने लग जाता है। उनकी फिल्में अब एवरेज बिजनेस कर रही थी। साल 1970 में राज कपूर की फिल्म मेरा नाम जोकर जिसे बनाने में 6 साल लगे वह भी बॉक्स ऑफिस पर पिट जाती है। हालांकि आगे के सालों में यह फिल्म कल्ट्ड साबित होती है। इसी बीच 2 जून 1988 को राज कपूर की मौत हो जाती है। राज कपूर के पांच बच्चे हुए रणधीर कपूर, ऋषि कपूर, राजीव कपूर, ऋतू कपूर और रीमा कपूर। राज कपूर के सबसे बड़े बेटे रणधीर कपूर कपूर फैमिली के थर्ड जनरेशन से बॉलीवुड में एंट्री करने वाले पहले मेंबर थे। रणधीर कपूर के फिल्म करियर की शुरुआत 1955 में आई फिल्म श्री 420 में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट शुरू होती है। साल 1971 में आई फिल्म कल आज और कल में रणधीर कपूर ने लीड रोल किया। यह फिल्म उनका डायरेक्टोरियल डेब्यू भी था। इस फिल्म में उनके अपोजिट उस वक्त की हिट एक्ट्रेस बबीता को कास्ट किया जाता है। इस फिल्म की शूटिंग के दौरान ही दोनों के बीच प्यार हो जाता है और 1971 में ही दोनों ने शादी कर ली। हालांकि आगे रणधीर की फिल्में एवरेज रहती हैं। 1985 के बाद उनका करियर डूबता चला जाता है और उन्होंने एक्टिंग से सन्यास ले लिया। वहीं बबीता भी शादी के बाद एक-दो फिल्में करने के बाद हाउस वाइफ बन जाती हैं। बबीता काम करना छोड़ ही चुकी थी और रणधीर को भी धीरे-धीरे काम मिलना कम हो गया। रणधीर बबीता की दो बेटियां होती हैं। एक करिश्मा और दूसरी करीना। शुरुआती दिनों में कपूर खानदान की महिलाओं को बॉलीवुड में काम करने की इजाजत नहीं थी। उनका परिवार इस मामले में काफी रूढ़िवादी सोच रखता था। कपूर पेट्रियक्स का मानना था कि इंडस्ट्री में हीरोइंस का शोषण किया जाता है। इसलिए अच्छे घर की लड़कियां फिल्मों में काम नहीं कर सकती। एक अखबार को दिए इंटरव्यू में पृथ्वीराज कपूर की सबसे छोटी बहन शांता कपूर धवन इससे जुड़ा एक किस्सा शेयर करती हैं। एक बार शांता अपने भप्पा यानी कि बड़े भाई पृथ्वीराज कपूर के साथ फिल्म इंडिया मैगजीन के एडिटर पब्लिशर बाबूराव पटेल से मिलने के लिए गई थी। जब उनकी बात पूरी हो गई तो पटेल ने शांता की तरफ देखा और कहा कि वह उन्हें फिल्मों में मौका दे सकते हैं। यह सुनते ही पृथ्वीराज कपूर ने शांता को जल्दी से बाहर भेज दिया और बाद में इतना सुंदर दिखने पर डांटा भी। और बताया जाता है कि कपूर खानदान की किसी भी बेटी या बहू को फिल्मों में काम करने की आजादी नहीं थी। कपूर खानदान की कोई भी बेटी या बहू फिल्मों में काम नहीं कर सकती थी। यही फैमिली का रूल था। इसलिए बबीता कपूर ने भी रणधीर कपूर से शादी के बाद फिल्मों में ज्यादा टाइम तक काम नहीं किया। लेकिन जब बात उनकी बेटियों के फ्यूचर पर आई तो यह रूल रणधीर और बबीता के बीच मतभेद का बड़ा रीजन बन जाता है। रणधीर चाहते थे कि उनके दोनों बेटियां करिश्मा और करीना उनके परिवार के ट्रेडिशन को फॉलो करते हुए शादी के बाद सेटल हो जाएं। जबकि बबीता अपनी बेटियों के एक्टिंग करियर को बनाने के फेवर में थी। इसलिए मिड 80ज में बबीता ने रणधीर का घर छोड़ दिया और अपनी बेटियों के साथ लोखंडवाला की एक फ्लैट में अलग रहने लग जाती हैं। इस वक्त करिश्मा की उम्र 14 साल थी और करीना की उम्र 8 साल थी। बबीता ने अपनी दोनों बेटियों को अकेले बड़ा किया। लेकिन ना कभी रणधीर और ना ही बबीता ने पब्लिकली एक दूसरे के खिलाफ कुछ भी नेगेटिव बोला। इधर अपनी मां की गाइडेंस पर चलते हुए करिश्मा कपूर ने साल 1991।
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पावरफुल फिल्मी फैमिली द कपूर्स की। पाकिस्तान के फैसला में एक जगह है लियालपुर। यहीं पर 3 नवंबर 1906 के दिन एक पंजाबी हिंदू खत्री परिवार में एक बच्चे का जन्म होता है जिसका नाम रखा जाता है पृथ्वीराज कपूर। कपूर परिवार शुरू से ही
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पैसे वाला परिवार था। पृथ्वीराज कपूर के पिता दीवान वश्वर नाथ कपूर इंडियन इंपीरियल पुलिस में ऑफिसर थे। जहां तक कि उनके दादा परदादा भी फैसलाबाद जिले की समुद्री तहसील में तहसीलदार थे। पृथ्वीराज जब लॉ की पढ़ाई कर रहे थे तभी उन्हें
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एक्टिंग काफी पसंद थी। इसलिए पृथ्वी ने ल्यालपुर और पेशावर के थिएटर्स में एक्टिंग शुरू कर दी। इसी बीच 17 साल की उम्र में पृथ्वी की शादी 15 साल की राम सारणी से कर दी जाती है। अगले साल 14
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दिसंबर 1924 को रामसारणी एक बेटे को जन्म देती हैं जिसका नाम रखा जाता है राज कपूर। उन दिनों बॉम्बे में ठीक-ठाक संख्या में फिल्में बन रही थी। इसलिए साल 1928 में पृथ्वी अकेले ही बॉम्बे आ जाते हैं और
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यहां इंपीरियल फिल्म्स कंपनी जॉइ कर लेते हैं। अब तक पृथ्वी तीन बच्चों के पिता बन चुके थे और उनकी पत्नी रामसारणी अभी भी पेशावर में ही अपने बच्चों का ख्याल रख रही थी। बॉम्बे आने के बाद पृथ्वी का असली
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संघर्ष शुरू होता है। पैसे कम होने की वजह से पृथ्वी गिरगांव के पास एक तबेले में रहने लगते हैं। धीरे-धीरे पृथ्वी को फिल्मों में छोटे-मोटे रूल्स मिलने लग जाते हैं। साल 1929 में आई एक साइलेंट फिल्म बेधारी तलवार से पृथ्वी ने अपना
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डेब्यू शुरू किया। लेकिन अगले ही साल 1930 में पृथ्वी को लीड रोल करने का मौका मिल जाता है और यह फिल्म थी सिनेमा गर्ल। अब जैसे-जैसे पृथ्वीराज कपूर को फिल्मों से पैसे मिलने लगे, उन्होंने अपने परिवार को भी बॉम्बे बुला लिया। लेकिन साल 1931 में
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पृथ्वीराज के बेटे देवेंद्र की डबल निमोनिया होने से मौत हो जाती है। पृथ्वीराज कपूर और रामसारणी इस दुख से अभी उभर नहीं पाए थे कि एक हफ्ते के अंदर ही 4 साल के उनके बेटे रविंद्र ने खेलते वक्त
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गलती से रेड पोइजन खा लिया जिससे उसकी भी मौत हो जाती है। आगे चलकर पृथ्वीराज के तीन बेटे राज कपूर, शम्मी कपूर और शशि कपूर भी एक्टिंग में ही अपना करियर बनाते हैं। वहीं उनकी बेटी उर्मिला कपूर शादी कर
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अपना घर बसा लेती हैं। साल 1944 में थिएटर के प्रति इंटरेस्ट के चलते पृथ्वीराज कपूर ने अपना थिएटर ग्रुप पृथ्वी थिएटर्स शुरू कर दिया। अगले 16 साल तक उनके थिएटर ग्रुप ने 2662 परफॉर्मेंस दी जिसके हर सिंगल शो
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में पृथ्वीराज कपूर लीड रोल में हुआ करते थे। लेकिन थिएटर में इतना पैसा नहीं था कि अब इसे लंबे समय तक चलाया जा सके। इसलिए एक बार फिर पृथ्वीराज मूवीज में काम करने लग जाते हैं। साल 1960 में पृथ्वीराज ने
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मुगले आजम में अकबर और 1965 की सिकंदर एआम में पूरस का रोल निभाया जिसकी काफी तारीफ होती है। हालांकि 1972 में पृथ्वीराज कपूर की मौत हो जाती है। इस वक्त उनकी उम्र 65 साल थी। पृथ्वीराज अपने आठ भाई बहनों में
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सबसे बड़े थे, उनके छोटे भाई त्रिलोक कपूर भी एक्टर थे। वहीं सुरेंद्र कपूर जो पृथ्वीराज के फर्स्ट कजन थे, वे भी एक फिल्म प्रोड्यूसर थे। उन्हीं के बेटे हुए बोनी कपूर, अनिल कपूर और संजय कपूर। लेकिन कपूर फैमिली की सेकंड जनरेशन की एक्टिंग
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फील्ड में शुरुआत होती है पृथ्वीराज कपूर के बेटे और इंडियन सिनेमा के शो मैन राज कपूर से। पेशा भर में जन्मे राज कपूर ने बचपन से ही अपने पिता पृथ्वीराज कपूर को एक्टिंग करते हुए देखा था। इसलिए उनका
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इंटरेस्ट भी फिल्मों में डेवलप होने लग जाता है। राज कपूर 10 साल की उम्र में ही पहली बार इंकलाब नाम की फिल्म में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट नजर आए। इसके बाद 1940 में वह एक्टिवली एज ए लीड एक्टर फिल्म्स
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करने लग जाते हैं। साल 1946 में राज कपूर अपने पिता की मर्जी से कृष्णा मल्होत्रा से शादी कर लेते हैं। कृष्णा एक आईजी की बेटी थी। कृष्णा की शादी के बाद उनके भाई राजेंद्रनाथ, प्रेमनाथ और नरेंद्र नाथ भी
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फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ जाते हैं। 1947 में राज कपूर और कृष्णा राज के पहले बच्चे का जन्म होता है। जिसका नाम रखा जाता है रणधीर कपूर। रणधीर कपूर के दादा राज कपूर को एक्टिंग के साथ डायरेक्शन में भी
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इंटरेस्ट था। इसलिए 1948 में उन्होंने अपना खुद का बैनर आर के फिल्म्स लॉन्च कर दिया। राज कपूर ने आर के स्टूडियो के नाम से एक स्टूडियो भी बनाया जो आज भी मुंबई के जाने-माने स्टूडियो में से एक है। यहीं
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से शुरू होती है एक लेजेंड्री एक्टर, डायरेक्टर, प्रोड्यूसर की जर्नी जिसने बॉलीवुड की एक से एक बढ़कर मूवीज दी। राज कपूर की फिल्म बरसात ने कमाई के सारे रिकॉर्ड्स तोड़ दिए। ऐसे ही साल 1951 में आई उनकी आवारा मेजर हिट रहती है। यह फिल्म
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इंडिया के साथ-साथ सोवियत यूनियन, चीन, टर्की, अफगानिस्तान में भी खूब चलती है। राज कपूर इंटरनेशनल स्टार बन जाते हैं और उन्हें इंडिया का चार्ली चैपलिन भी अब कहा जाने लगता है। साल 1955 में रिलीज हुई राज कपूर की फिल्म श्री 420 भी मेजर हिट साबित
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होती है। इस फिल्म को भी राज कपूर ने डायरेक्ट और प्रोड्यूस किया था और एक्टिंग भी की थी। फिल्म में उनके अपोजिट नरगिस थी। श्री 420 के दो गाने प्यार हुआ, इकरार हुआ और मेरा जूता है जापानी। बड़े हिट
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साबित होते हैं। इन्हीं दिनों राज कपूर और नरगिस के अफेयर की चर्चाएं चल जाती हैं। माना जाता है कि दोनों के बीच 7 साल तक अफेयर चलता है। लेकिन राज कपूर पहले से शादीशुदा थे और अपने परिवार को छोड़ना
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नहीं चाहते थे। इसलिए साल 1956 में नरगिस राज से रिश्ता तोड़ लेती हैं और 1958 में एक्टर सुनील दत्त से शादी कर लेती हैं। मिड 60 तक राज कपूर की कई और फिल्में जैसे अनाड़ी संगम जिस देश में गंगा बहती है
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सुपरहिट साबित होती हैं जिससे राज कपूर का बॉलीवुड में सिक्का चलने लग जाता है। इस बीच एक और हीरोइन वैजंती माला से उनका अफेयर खूब चर्चा में रहता है। लेकिन 60 के दशक के आखिरी सालों में राज कपूर का
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स्टारडम कम होने लग जाता है। उनकी फिल्में अब एवरेज बिजनेस कर रही थी। साल 1970 में राज कपूर की फिल्म मेरा नाम जोकर जिसे बनाने में 6 साल लगे वह भी बॉक्स ऑफिस पर पिट जाती है। हालांकि आगे के सालों में यह
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फिल्म कल्ड साबित होती है। इसी बीच 2 जून 1988 को राज कपूर की मौत हो जाती है। राज कपूर के पांच बच्चे हुए रणधीर कपूर, ऋषि कपूर, राजीव कपूर, ऋतू कपूर और रीमा कपूर। राज कपूर के सबसे बड़े बेटे रणधीर कपूर
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कपूर फैमिली के थर्ड जनरेशन से बॉलीवुड में एंट्री करने वाले पहले मेंबर थे। रणधीर कपूर के फिल्म करियर की शुरुआत 1955 में आई फिल्म श्री 420 में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट शुरू होती है। साल 1971 में आई फिल्म कल आज और कल में रणधीर कपूर ने लीड
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रोल किया। यह फिल्म उनका डायरेक्टोरियल डेब्यू भी था। इस फिल्म में उनके अपोजिट उस वक्त की हिट एक्ट्रेस बबीता को कास्ट किया जाता है। इस फिल्म की शूटिंग के दौरान ही दोनों के बीच प्यार हो जाता है और 1971 में ही दोनों ने शादी कर ली।
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हालांकि आगे रणधीर की फिल्में एवरेज रहती हैं। 1985 के बाद उनका करियर डूबता चला जाता है और उन्होंने एक्टिंग से सन्यास ले लिया। वहीं बबीता भी शादी के बाद एक-दो फिल्में करने के बाद हाउस वाइफ बन जाती हैं।
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बबीता काम करना छोड़ ही चुकी थी और रणधीर को भी धीरे-धीरे काम मिलना कम हो गया। रणधीर बबीता की दो बेटियां होती हैं। एक करिश्मा और दूसरी करीना। शुरुआती दिनों में कपूर खानदान की महिलाओं को बॉलीवुड में काम करने की इजाजत नहीं थी। उनका
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परिवार इस मामले में काफी रूढ़िवादी सोच रखता था। कपूर पेट्रियक्स का मानना था कि इंडस्ट्री में हीरोइंस का शोषण किया जाता है। इसलिए अच्छे घर की लड़कियां फिल्मों में काम नहीं कर सकती। एक अखबार को दिए इंटरव्यू में पृथ्वीराज कपूर की सबसे छोटी
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बहन शांता कपूर धवन इससे जुड़ा एक किस्सा शेयर करती हैं। एक बार शांता अपने भप्पा यानी कि बड़े भाई पृथ्वीराज कपूर के साथ फिल्म इंडिया मैगजीन के एडिटर पब्लिशर बाबूराव पटेल से मिलने के लिए गई थी। जब उनकी बात पूरी हो गई तो पटेल ने शांता की
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तरफ देखा और कहा कि वह उन्हें फिल्मों में मौका दे सकते हैं यह सुनते ही पृथ्वीराज कपूर ने शांता को जल्दी से बाहर भेज दिया और बाद में इतना सुंदर दिखने पर डांटा भी और बताया जाता है कि कपूर खानदान की किसी
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भी बेटी या बहू को फिल्मों में काम करने की आजादी नहीं थी। कपूर खानदान की कोई भी बेटी या बहू फिल्मों में काम नहीं कर सकती थी। यही फैमिली का रूल था। इसलिए बबीता कपूर ने भी रणधीर कपूर से शादी के बाद फिल्मों में
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ज्यादा टाइम तक काम नहीं किया। लेकिन जब बात उनकी बेटियों के फ्यूचर पर आई तो यह रूल रणधीर और बबीता के बीच मतभेद का बड़ा रीजन बन जाता है। रणधीर चाहते थे कि उनके दोनों बेटियां करिश्मा और करीना उनके
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परिवार के ट्रेडिशन को फॉलो करते हुए शादी के बाद सेटल हो जाए। जबकि बबीता अपनी बेटियों के एक्टिंग करियर को बनाने के फेवर में थी। इसलिए मिड 80ज में बबीता ने रणधीर का घर छोड़ दिया और अपनी बेटियों के
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साथ लोखंडवाला की एक फ्लैट में अलग रहने लग जाती हैं। इस वक्त करिश्मा की उम्र 14 साल थी और करीना की उम्र 8 साल थी। बबीता ने अपनी दोनों बेटियों को अकेले बड़ा किया। लेकिन ना कभी रणधीर और ना ही बबीता
Speaker A
ने पब्लिकली एक दूसरे के खिलाफ कुछ भी नेगेटिव बोला। इधर अपनी मां की गाइडेंस पर चलते हुए करिश्मा कपूर ने साल 1991 में प्रेम कैदी नाम की फिल्म से बॉलीवुड में डेब्यू कर लिया। वो कपूर खानदान की पहली
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फीमेल मेंबर थी जिन्होंने फिल्मों में बतौर हीरोइन काम करना शुरू किया था। साथ ही वे कपूर खानदान की फोर्थ जनरेशन की भी पहली मेंबर थी जिन्होंने एक्टिंग को अपना प्रोफेशन बनाया। इस वक्त करीना की उम्र मात्र 16 साल थी। अपने करियर में करिश्मा
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ने कई हिट्स दी। गोविंदा के साथ उनकी जोड़ी को भी काफी पसंद किया जाने लगा था। 1996 में आई राजा हिंदुस्तानी करिश्मा कपूर के करियर का टर्निंग पॉइंट साबित होती है। इस फिल्म के लिए करिश्मा कपूर को फिल्म फेयर बेस्ट एक्ट्रेस का अवार्ड भी
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मिलता है और वह 90ज की टॉप हीरोइंस की लीग में आ जाती हैं। वहीं अगले ही साल 1997 में आई फिल्म दिल तो पागल है के लिए करिश्मा कपूर को बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस की कैटेगरी में नेशनल अवार्ड से सम्मानित
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किया जाता है। साल 2003 में करिश्मा कपूर ने दिल्ली के बिजनेसमैन संजय कपूर से शादी कर ली और फिल्मों से ब्रेक ले लिया। करिश्मा और संजय कपूर के दो बच्चे होते हैं समायरा कपूर और किियान राज कपूर। लेकिन शादी के 13 साल बाद ही करिश्मा और
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संजय कपूर के बीच तलाक हो जाता है। 2011 में करिश्मा ने बॉलीवुड फिल्मों में अपनी सेकंड इनिंग्स की शुरुआत की। लेकिन इस बार वे अपनी 90ज के दशक वाली सक्सेस को रिपीट नहीं कर सकी। वहीं दूसरी तरफ रणधीर बबीता
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की छोटी बेटी करीना अपनी बहन करिश्मा को फॉलो करते हुए साल 2000 में फिल्म रिफ्यूजी से बॉलीवुड में डेब्यू कर लेती हैं। रिफ्यूजी अमिताभ बच्चन के बेटे अभिषेक बच्चन की भी डेब्यू मूवी थी। इस फिल्म में करीना की एक्टिंग को काफी तारीफ
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मिलती है। लेकिन इसके बाद एक से एक बढ़कर बैनर्स की मूवीज मिलने के बाद भी करीना कोई कमाल नहीं दिखा पाती। कभी खुशी, कभी गम को छोड़ दिया जाए तो उनकी पहली 10 फिल्में या तो एवरेज ग्रोसर थी या पूरी
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तरह से फ्लॉप साबित हुई। हालांकि ओमकारा और जबवी मीट जैसी फिल्मों ने करीना कपूर को फिल्मों में इस्टैब्लिश कर दिया। यह फिल्में कमर्शियली और क्रिटिकली भी दोनों तरह से हिट साबित होती हैं। इसी बीच साल 2012 में करीना ने फिल्म एक्टर सैफ अली
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खान से शादी कर ली। करीना पिछले करीब 5 साल से सैफ अली खान को डेट कर रही थी। करीना और सैफ के दो बेटे होते हैं तैमूर अली खान और जहांगीर अली खान। कपूर खानदान की फोर्थ जनरेशन से करीना कपूर बॉलीवुड
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में काफी सक्सेसफुल रही। करीना कपूर का स्टारडम ऐसा था जिस पर ना तो उनकी फिल्में फ्लॉप होने का असर पड़ा और ना उनकी शादी करने का और ना ही उनके मां बनने का। माना जा सकता है कि वे कपूर फैमिली की सबसे
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सक्सेसफुल मेंबर्स में से एक हैं। इधर बेटियों के सक्सेसफुल करियर्स को देखते हुए साल 2007 में रणधीर और बबीता भी एक बार फिर से साथ रहने लग जाते हैं। वहीं राज कपूर की बड़ी बेटी ऋतू कपूर ने अपने
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फैमिली रूल को फॉलो करते हुए एक्टिंग में कोई इंटरेस्ट नहीं दिखाया और बिजनेसमैन राजन नंदा से शादी कर ली। ऋतू कपूर और राजन नंदा के दो बच्चे होते हैं निखिल नंदा और निताश नंदा। आगे निखिल नंदा ने मेगा स्टार अमिताभ बच्चन की बेटी श्वेता
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बच्चन से शादी कर ली और उनके दो बच्चे होते हैं नव्या नवेली नंदा और अगस्त नंदा। नव्या नवेली नंदा मॉडलिंग और पडकास्ट करती हैं। वहीं अगस्त नंदा ने 2023 में शाहरुख खान की बेटी सुहाना खान और बोनी कपूर की
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बेटी खुशी कपूर के साथ फिल्म द आर्चिस से अपना एक्टिंग डेब्यू किया। बोनी कपूर पृथ्वीराज कपूर के फर्स्ट कजिन सुरिंदर कपूर के बेटे हैं। अनिल कपूर भी बोनी कपूर के ही भाई हैं। इधर राज कपूर के दूसरे बेटे हुए ऋषि कपूर। यह ऋषि कपूर ही थे
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जिन्हें अपने पिता राज कपूर जैसी सक्सेस मिलती है। साल 1970 में ऋषि कपूर पहली बार अपने पिता की कल्ट क्लासिक फिल्म मेरा नाम जोकर में नजर आते हैं। इस फिल्म के लिए ऋषि कपूर को बेस्ट चाइल्ड आर्टिस्ट का
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नेशनल अवार्ड मिलता है। 1973 में ऋषि कपूर ने फिल्म बॉबी से बतौर हीरो अपनी इनिंग की शुरुआत की। इस फिल्म को ऋषि के पिता राज कपूर ने ही डायरेक्ट किया था और उनके अपोजिट डेब्यू करने वाली हीरोइन थी डिंपल
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कपाडिया। इंटरेस्टिंगली यह फिल्म बॉबी उस साल ही नहीं बल्कि पूरे 70 के दशक की सबसे बड़ी हिट साबित होती है। ऋषि कपूर रातोंरात स्टार बन जाते हैं। बाद में एक इंटरव्यू में ऋषि कपूर बताते हैं कि फिल्म बॉबी उन्हें लॉन्च करने के लिए नहीं बनाई
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गई थी। दरअसल मेरा नाम जोकर से हुए फाइनेंसियल लॉस के बाद राज कपूर के पास इतने पैसे नहीं थे कि वह राजेश खन्ना को फिल्म में कास्ट कर सके। इसलिए पैसे बचाने के लिए ऋषि को मूवी में ले लिया गया जो
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उनके लिए फायदे का सौदा साबित होती है। बॉबी वाज़ फिल्म मेड बिकॉज़ राज कपूर हैड टू बी बेल्ड आउट। ही हैड दिस स्टूडियो मॉडर्गेज्ड। ही हैड ही व्हाटएवर मनी ही अर्नड ऑल हिज़ लाइफ वास ऑलवेज इन्वेस्टेड इन हिज़ फिल्म्स। इट वाज़ ऑल केप्ट रोलिंग।
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इट वाज नेवर इन्वेस्टेड इन एनी काइंड ऑफ़ अदर इंडस्ट्रियल ज़ोन और इन एनीथिंग। इट वाज़ ओनली हिज़ फिल्म्स। इट वाज़ सो पैशन अबाउट हिज़ फिल्म्स। सो बॉबी वाज मेड एट अ टाइम व्हेन राज कपूर नीडेड अ सक्सेसफुल फिल्म।
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1974 में फिल्म जहरीला इंसान में ऋषि कपूर ने पहली बार नीतू कपूर के साथ काम किया। ऋषि और नीतू की जोड़ी हिट रहती है और उन्होंने आगे भी कई फिल्मों में साथ काम किया। इस दौरान ऋषि कपूर दूसरी लड़कियों
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को भी डेट कर रहे थे लेकिन उन्हें नीतू भी पसंद आने लगी थी। 1980 में जब नीतू अपने करियर के पीक पर थी तब ऋषि और नीतू ने शादी कर ली। शादी के बाद एक तरफ जहां ऋषि का करियर ऊपर जा रहा था, वहीं नीतू ने
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फिल्मों में काम करना छोड़ दिया। ऋषि और नीतू के दो बच्चे होते हैं। एक रणवीर कपूर और दूसरी बेटी रिद्धिमा कपूर। रिदमा फैशन डिजाइनर बनी और बिजनेसमैन भारत साहनी से शादी कर लेती हैं। दोनों के एक बेटी हुई
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समारा साहनी। कपूर्स के फोर्थ जनरेशन से आने वाले रणवीर को एक वर्सटाइल एक्टर माना जाता है। सबसे पहले रणवीर कपूर ने डायरेक्टर संजय लीला भंसाली को फिल्म ब्लैक में असिस्ट किया। इसके बाद साल 2007 में सावरिया फिल्म में अपना डेब्यू किया।
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लेकिन सावरिया फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप साबित होती है। लेकिन इसके बाद रणबीर कपूर की फिल्में बचना ए हसीनो वेकअप सिड और राजनीति सब सुपरहिट साबित होती हैं। लेकिन 2011 में आई फिल्म रॉकस्टार ने रणवीर कपूर को एक एक्टर के तौर पर एस्टैब्लिश कर
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दिया। अब हर डायरेक्टर प्रोड्यूसर रणवीर कपूर के साथ काम करना चाह रहे थे। इसी बीच साल 2022 में रणवीर कपूर ने एक्ट्रेस आलिया भट्ट से शादी कर ली। रणवीर और आलिया भट्ट की एक बेटी होती है जिसका नाम राह
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कपूर है। राज कपूर की दूसरी बेटी रीमा कपूर की शादी बिजनेसमैन मनोज जैन से होती है। रीमा और मनोज के दो बेटे होते हैं आदर और अरमान जैन। आदर अरमान दोनों ही बॉलीवुड में डेब्यू कर चुके हैं। लेकिन अब तक
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उन्हें खास सक्सेस नहीं मिली है। 2020 में अरमान की शादी अनीषा मल्होत्रा से हुई। वहीं आदर ने लंबे वक्त तक तारा सुतारिया को डेट करने के बाद आलेखा आडवाणी से शादी कर ली। राज कपूर के तीसरे बेटे राजीव कपूर
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को एक्टिंग में उतनी कामयाबी नहीं मिली जितनी उनके भाइयों को मिली थी। हालांकि उनकी मूवी राम तेरी गंगा मैली हो गई। सुपरहिट रही थी लेकिन इसके बाद उन्हें सक्सेस नहीं मिल सकी। 2001 में राजीव ने आरती सब्रवाल से शादी कर ली लेकिन उनकी
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शादी भी लंबी नहीं चली और 2003 में दोनों का डिवोर्स हो जाता है। आगे 2021 में हार्ट अटैक से राजीव की मौत हो जाती है। पृथ्वीराज कपूर के दूसरे बेटे शमशीर राज कपूर को पॉपुलरली शम्मी कपूर के नाम से
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जाना जाता है जो पांच दशक तक बॉलीवुड में एक्टिव रहे। शम्मी कपूर अपनी स्टाइलिश प्लेबॉय इमेज और डांसिंग स्किल्स के लिए फेमस थे। शम्मी कपूर ने 100 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। खासकर 60 के दशक में उन्होंने एक से बढ़कर एक हिट फिल्में
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दी। जैसे चाइना टाउन, कश्मीर की कली, जानवर, एंड इवनिंग इन पेरिस और ब्रह्मचारी। 1955 में रंगीन रातें मूवी में काम करने के दौरान शमी कपूर को गीता बाली से प्यार हो जाता है। इस तरह 4 महीने के अंदर ही शमी कपूर और गीता बाली मालाबार
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हिल के एक मंदिर में शादी कर लेते हैं। इन्हीं दोनों के बच्चे हुए आदित्य राज कपूर और कंचन कपूर। हालांकि साल 1965 में स्मॉल पॉक्स के चलते गीता बाली की मौत हो जाती है। इस वक्त उनकी उम्र मात्र 35 साल
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थी। गीता की मौत के बाद शमी कपूर अकेले हो जाते हैं। 1968 में रिलीज हुई फिल्म ब्रह्मचारी की शूटिंग के दौरान शमी कपूर की एक्ट्रेस मुमताज से नजदीकियों की खबरें सामने आने लगती हैं। हालांकि दोनों की नजदीकियां किसी रिश्ते में नहीं बदल सकी।
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मुमताज ने मेबी यू फाउंड। यू कमिंग टू मुमताज। व्हाई व्हाई डोंट बी ऑनेस्ट विथ मी? मुमताज इस वाज़ अ वैरी ब्यूटीफुल थिंग इन दैट मूवी। एट दैट टाइम आई वाज़ अ विडो एंड मुमताज हैपन टू बी अ वेरी प्रीटी लिटिल गर्ल एंड फॉर अ लिटिल
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शॉर्ट व्हाइल वी बोथ हैड ड्रीम्स आगे साल 2011 में एक इंटरव्यू में एक्ट्रेस मुमताज ने बताया कि शम्मी ने उन्हें शादी का प्रपोजल दिया था लेकिन मुमताज ने इससे इंकार कर दिया क्योंकि शम्मी की कंडीशन थी कि शादी के बाद मुमताज
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को अपना करियर छोड़ना पड़ेगा और ये शर्त मुमताज को मंजूर नहीं थी। बोले हमारे कपूर फैमिली के अंदर बहू काम नहीं करती है फिल्मों में और उस जमाने में नहीं करती थी। गीता जी के काम उन्होंने छुड़वा दिया था। शी वाज़ आल्सो अ
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वेरी बिग हीरोइन एंड वेरी ग्रेसफुल डांसर। साल 1969 में सम्मी कपूर नायला देवी गोहिल से दूसरी शादी कर लेते हैं। नायला देवी भावनगर स्टेट की गोहिल राजपूत डायनेस्टी की राजकुमारी थी। शादी के बाद नायला देवी ने सम्मी कपूर और गीता के बच्चों को अपना
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मान लिया और खुद किसी बच्चे की बायोलॉजिकल मदर नहीं बनी। उनके बेटे, एक्टर, प्रोड्यूसर और डायरेक्टर, बिजनेसमैन आदित्य राज कपूर की शादी प्रीति कपूर से होती है। उनके दो बच्चे भी हुए तुलसी कपूर और विश्व प्रताप कपूर। वहीं कंचन कपूर की
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शादी केतन देसाई से होती है। केतन प्रोड्यूसर और डायरेक्टर मनमोहन देसाई के बेटे हैं और केतन खुद भी डायरेक्टर प्रोड्यूसर रह चुके हैं। कंचन केतन की दो बेटियां होती हैं। पूजा देसाई और राजेश्वरी देसाई। शम्मी कपूर की आखिरी
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फिल्म रॉकस्टार थी जिसमें वह अपने भाई राज कपूर के पोते रणवीर कपूर के साथ नजर आए थे। फिल्म सुपरहिट साबित होती है लेकिन शम्मी कपूर इसकी सक्सेस नहीं देख पाई। फिल्म रिलीज से कुछ महीने पहले ही यानी 14
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अगस्त 2011 के दिन क्रोनिक किडनी फेलियर के चलते सम्मी कपूर की मौत हो जाती है। पृथ्वीराज कपूर की लेगेसी में अगला नाम आता है उनके सबसे छोटे बेटे शशि कपूर का। शशि के एक्टिंग करियर की शुरुआत बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट 1948 में उनके बड़े भाई
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राज कपूर की डायरेक्टोरियल डेब्यू फिल्म में यानी कि आग से होती है। लेकिन आगे साल 1974 में आई शशि कपूर की फिल्म चोर मचाए शोर ने रातों रात शशि कपूर को एक एक्टर के रूप में इस्टैब्लिश कर दिया। 1980 तक शशि
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कपूर ने कई शानदार फिल्में की। खासकर अमिताभ बच्चन के साथ कि उनकी जोड़ी ने कई ब्लॉकबस्टर मूवीज दी। फिल्म दीवार में शशि कपूर का डायलॉग मेरे पास मां है। अपने आप में एक कल्ट डायलॉग है। मेरे पास मां है।
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साल 1956 में शशि की मुलाकात इंग्लिश एक्ट्रेस जेनफर कैंडल से होती है। यहीं से शशि कपूर को कैंडल पसंद आ जाती हैं। शुरुआत में कैंडल की फैमिली उनकी शादी के फेवर में नहीं थी। लेकिन शशि को अपनी भाभी
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गीता बाली का पूरा सपोर्ट मिलता है और आखिर में 1958 में दोनों की शादी हो जाती है। शशि कैंडल के तीन बच्चे होते हैं कुणाल कपूर, करण कपूर और संजना कपूर। शशि और कैंडल दोनों थिएटर के लिए पैशनेट थे।
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इसलिए 1978 में उन्होंने पृथ्वी थिएटर को फिर से इस्टैब्लिश कर दिया जो पृथ्वीराज कपूर के समय कम पैसों के चलते बंद कर दिया गया था। हालांकि इसके 6 साल बाद यानी 1984 में जेनिफर की कैंसर के कारण मौत हो जाती
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है। कैंडल की मौत शशि कपूर के लिए एक बड़ा शौक थी। इस कारण वे डिप्रेशन में चले जाते हैं। जहां दूसरे कपूर भाइयों के अफेयर की गॉसिप्स फिल्म मैगजीन में होती रहती थी, वहीं शशि कपूर पूरी तरह से अपनी वाइफ के
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लिए डिवोटेड थे। इसलिए जेनिफर की मौत के बाद भी शशि ने दूसरी शादी नहीं की। आगे 4 दिसंबर 2017 में लीवर सिरोसिस नाम की बीमारी के चलते शशि कपूर की भी मौत हो जाती है। शशि कपूर और जेनिफर के बड़े बेटे
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कुणाल कपूर एक एक्टर, डायरेक्टर और प्रोड्यूसर रह चुके हैं और उनकी पत्नी का नाम सीना सिप्पी है। सीना सिप्पी शोले मूवी के डायरेक्टर रमेश सिप्पी की बेटी हैं। लेकिन कुणाल और सीना का रिश्ता ज्यादा लंबा नहीं चल सका और दोनों अलग हो
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जाते हैं। कुणाल और सीना के दो बच्चे होते हैं सायरा कपूर और जहान कपूर। जहान कपूर ने साल 2022 में फराज फिल्म से अपना बॉलीवुड में डेब्यू किया था। वहीं शशि और जेनिफर की बेटी सायरा कपूर सेट डिजाइनर
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हैं। शशि कपूर के दूसरे बेटे करण कपूर भी एक्टर और मॉडल रह चुके हैं। फिलहाल वे यूनाइटेड किंगडम में फोटोग्राफी बिजनेस चलाते हैं। उनकी शादी लोना कपूर से हुई है और उनके दो बच्चे हुए हैं जैक कपूर और
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आलिया कपूर। शशि की बेटी संजना एक थिएटर आर्टिस्ट हैं और उन्होंने कुछ फिल्मों में भी काम किया है। संजना ने ही साल 1993 से 2011 तक पृथ्वी थिएटर का काम भी संभाला था। संजना की शादी फिल्म एक्टर और
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डायरेक्टर अमिताभ भट्टाचार्य से होती है। लेकिन कुछ साल बाद उनका भी डिवोर्स हो जाता है। संजना की दूसरी शादी टाइगर कंजर्वेशनिस्ट वाल्मीकि थापर से होती है। उनका एक बेटा भी होता है हमीर थापर। लेकिन वाल्मीकि थापर की साल 2025 में कैंसर से
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मौत हो जाती है। पृथ्वीराज कपूर की इकलौती बेटी उर्मिला कपूर की शादी कोल माइन के मालिक चरणजीत सियाल से होती है। उनके चार बच्चे हुए जतिन, अनुराधा, नमिता और प्रीति सियाल। इनमें से जतिन सियाल जाने-माने टीवी एक्टर हैं। इस तरह पृथ्वीराज कपूर का
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फैमिली ट्री कंप्लीट होता है। कहा जा सकता है कि थिएटर और सिनेमा के लिए एक आदमी के पैशन से शुरू हुआ सफर आज भी जनरेशन दर जनरेशन आगे बढ़ रहा है। एक तरह से कपूर परिवार की कहानी एक फिल्मी फैमिली की
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कहानी नहीं है बल्कि ये खुद हिंदी सिनेमा की कहानी है। लगभग 100 साल से कपूर्स एक्टिंग कर रहे हैं। इस दौरान दौर बदला, दर्शक बदले, कहानियां बदली, लेकिन कुछ नहीं बदला तो वो था कपूर्स का इंडस्ट्री पर डोमिनेंस। पृथ्वीराज कपूर से लेकर
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रणवीर कपूर तक कपूर्स के हर पीढ़ी ने ना सिर्फ एक्टिंग को अपनाया बल्कि उसे अपना अलग स्टाइल भी दिया और शायद यही बात कपूर्स को अलग बनाती है। उनके हर जनरेशन में एक ना एक ऐसा एक्टर जरूर रहा जिसने
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प्रूव कर दिया कि एक्टिंग उनके ब्लड में है। इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।
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