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Story of Yuvraj Singh Will Shock You | Yograj Singh | SMS Documentaries

योगराज सिंह और युवराज सिंह की क्रिकेट यात्रा, संघर्ष और पिता-पुत्र के रिश्ते की कहानी।

Key Takeaways

  • योगराज सिंह का क्रिकेट करियर चोटों और चयन न होने के कारण अधूरा रहा।
  • योगराज ने अपने बेटे युवराज को क्रिकेट में महान बनाने के लिए कड़ी मेहनत की।
  • युवराज की प्राथमिक रुचि स्केटिंग और टेनिस थी, लेकिन पिता ने क्रिकेट पर जोर दिया।
  • कड़ी ट्रेनिंग और संघर्ष के बाद युवराज ने रणजी ट्रॉफी में सफलता हासिल की।
  • पिता-पुत्र के रिश्ते में क्रिकेट ने तनाव भी पैदा किया लेकिन अंततः सफलता मिली।

What the video covers

  • 1983 में कपिल देव की टीम ने वर्ल्ड कप जीता, जबकि योगराज सिंह गुमनामी में रहे।
  • योगराज सिंह ने अपने क्रिकेट करियर में चोटों और खराब फॉर्म के कारण सीमित मौके पाए।
  • योगराज सिंह ने अपने बेटे युवराज सिंह को महान क्रिकेटर बनाने का संकल्प लिया।
  • युवराज सिंह को स्केटिंग और टेनिस में रुचि थी, लेकिन पिता ने क्रिकेट पर फोकस करने को कहा।
  • योगराज सिंह ने युवराज की कड़ी और कठोर ट्रेनिंग की, जिससे घर में तनाव बढ़ा।
  • युवराज ने जूनियर क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन किया और 15 साल की उम्र में रणजी ट्रॉफी में डेब्यू किया।
  • युवराज के शुरुआती मैचों में संघर्ष और आलोचनाएं हुईं, लेकिन कप्तान विक्रम राठौड़ ने उनका समर्थन किया।
  • 1999 में युवराज ने रणजी ट्रॉफी में पहला शतक लगाया, जिससे पिता का रवैया नरम पड़ा।
  • युवराज ने कच बिहार ट्रॉफी अंडर 19 के फाइनल में 358 रन बनाकर अपनी प्रतिभा साबित की।
  • वीडियो में पिता-पुत्र के बीच क्रिकेट के लिए संघर्ष और सपनों की कहानी दर्शाई गई है।

Answers

Questions about this video

योगराज सिंह का क्रिकेट करियर क्यों अधूरा रह गया?

योगराज सिंह को चोटों और खराब फॉर्म के कारण भारतीय टीम में सीमित मौके मिले और BCCI के चयनकर्ता बसंत सिंह बेदी ने उन्हें ज्यादा मौके नहीं दिए।

योगराज सिंह ने अपने बेटे युवराज सिंह के लिए क्या लक्ष्य रखा था?

योगराज सिंह ने अपने बेटे को सर गारफील्ड सोबर्स और विवियन रिचर्ड्स जैसे महान क्रिकेटर बनाने का संकल्प लिया था।

युवराज सिंह की प्राथमिक खेल रुचि क्या थी और पिता ने क्या किया?

युवराज सिंह को स्केटिंग और टेनिस पसंद थे, लेकिन उनके पिता ने उन्हें केवल क्रिकेट खेलने के लिए प्रेरित किया और कड़ी ट्रेनिंग दी।

Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:00
Speaker A
साल 1983 में इंडियन टीम ने वेस्ट इंडीज को हराकर पहली बार क्रिकेट वर्ल्ड कप जीत लिया। इस जीत के बाद कप्तान कपिल देव देश के नए हीरो बन जाते हैं। लेकिन एक और आदमी था जो कपिल देव का दोस्त था, जो कपिल की तरह ही चंडीगढ़ में उनके साथ प्रैक्टिस करता था। कपिल देव की तरह ही तगड़ा ऑलराउंडर था और फास्ट बॉल फेंकता था। यह वो खिलाड़ी था जिसे 6 साल पहले 1977 में इंडिया की अंडर 22 टीम में कपिल देव की जगह सेलेक्ट किया गया था। लेकिन आज एक तरफ कपिल देव वर्ल्ड कप उठा रहे थे तो दूसरी तरफ यह लड़का गुमनामी में जीवन काट रहा था। इस लड़के का नाम था योगराज सिंह। फर्स्ट द [संगीत] डोमेस्टिक क्रिकेट में युवराज सिंह के नाम को बड़े-बड़े क्रिकेटर जानने लगे थे। इसलिए उन्हें इंडियन टीम में खेलने का मौका मिल जाता है। लेकिन युवराज सिंह को सिर्फ एक ही टेस्ट मैच खेलने दिया गया। इसके अलावा उन्होंने छह वनडे मैच खेले लेकिन चोटों और खराब फॉर्म के कारण युवराज सिंह इन मौकों पर ज्यादा अच्छा ना कर सके। युवराज सिंह का करियर यहीं पर खत्म हो जाता है। [हंसी] कुछ बड़े खिलाड़ी जैसे इंडियन टीम के पूर्व कैप्टन हेमु अधिकारी युवराज सिंह को कपिल देव से एक पायदान ऊपर मानते थे। लेकिन योगराज की किस्मत में कुछ और लिखा था। योगराज सिंह की मानें तो सुनील गावस्कर योगराज को और मौके देने के पक्ष में थे। लेकिन BCCI के चीफ सिलेक्टर बने बसंत सिंह बेदी ने यह बात नहीं मानी। इन्हीं दिनों योगराज सिंह के पिता की कैंसर से डेथ हो जाती है। योगराज परिवार में इकलौते बेटे थे। अब जब भी योगराज बाहर मैच खेलने के लिए जाते तो उनका पूरा ध्यान घर पर रहने वाली उनकी अकेली मां, पत्नी और एक साल के बच्चे पर रहता। [संगीत] एक तरफ योगराज इंडियन टीम से निकाले जाने के कारण फ्रस्ट्रेशन से जूझ रहे थे। दूसरी तरफ परिवार को संभालना मुश्किल था। इन दोनों के बीच योगराज अच्छे से प्रैक्टिस नहीं कर पाए और चीजें बिगड़ती चली जाती हैं। एक महान क्रिकेटर का सितारा बिना कुछ किए ही बुझ जाता है। इस बात का मलाल और फ्रस्ट्रेशन युवराज सिंह के अंदर बैठ गया कि इतनी प्रतिभा होने के बाद भी वे घर पर ही रह गए। इन्हीं दिनों योगराज ने अपने ढाई साल के बेटे के लिए एक प्लास्टिक का बल्ला खरीदा जिससे उसने योगराज के सामने ही एक तगड़ा शॉट मार दिया। योगराज को उनके सपने पूरे करने वाला मिल चुका था। युवराज ने अपनी क्रिकेट प्रैक्टिस छोड़ दी और अपना एक नया लक्ष्य बनाया और वह लक्ष्य था युवराज को एक महान क्रिकेटर बनाने का। अपना क्रिकेट करियर छोड़ते समय युवराज सिंह ने एक पब्लिक स्टेटमेंट दिया कि मैं अपने बेटे को सर गारफील्ड सोबर्स और विवियन रिचर्ड्स के लेवल का क्रिकेटर बनाऊंगा। जब मैंने यूवी का स्टेटमेंट दिया कि आई विल [संगीत] मेक माय सनवी लेवल ऑफ सर गार्फिल्ड सोबर्स एंड विन रिचर्ड। इस पर इंडियन एक्सप्रेस के खेल पत्रकार प्रदीप मैगजीन ने लिखा कि मुझे लगता है कि योगराज सिंह पागल हो चुके हैं। उन दिनों अखबारों में योगराज सिंह के लिए जो भी लिखा जा रहा था उन अखबारों और मैगजीन की कतरनों को योगराज ने कटिंग करके अपने पास रखना शुरू कर दिया। योगराज के अनुसार अक्सर लोग उन पर हंसते थे। इसलिए योगराज अब हर हाल में अपने बेटे को टीम इंडिया के लिए खेलते हुए देखना चाहते थे। सारा कुछ यूवी पे ही निकल गया। तेरे को ये करना पड़ेगा। करना होगा। मेरे लिए खेलना पड़ेगा। उसके स्केट्स फेंक दिए। लेकिन अपने जिस बेटे को युवराज सिंह विवियन रिचर्ड के लेवल का महान क्रिकेटर बनाना चाहते थे, उसकी क्रिकेट में बिल्कुल भी दिलचस्पी नहीं थी। युवराज को क्रिकेटर नहीं बनना था। उन्हें पसंद था स्केटिंग और टेनिस। एक टेनिस मैच हारने के बाद युवराज ने ₹2100 का एक महंगा रैकेट तोड़ दिया। इसके बाद युवराज के पिता ने उनका टेनिस खेलना बंद करा दिया। अब युवराज हफ्ते में छ दिन स्केटिंग खेलते और सिर्फ रविवार के दिन क्रिकेट खेलते। युवराज अभी मात्र 11-12 साल के थे कि उन्होंने अंडर 14 स्टे टूर्नामेंट के स्पीड स्केटिंग गेम में गोल्ड मेडल जीत लिया। लेकिन अपने बेटे को शाबाशी देने की जगह युवराज सिंह आग बबूला हो जाते हैं। युवराज ने युवराज से उनका मेडल छीन लिया और स्केट्स [संगीत] छीनकर फेंक दिए और कहा कि लड़कियों का खेल खेलना बंद करो। आज के बाद तो सिर्फ क्रिकेट खेलेगा और सिर्फ क्रिकेट। युवराज चाहते थे कि युवराज क्रिकेटर बने जबकि उनके बेटे को अगर सबसे ज्यादा प्यारी कोई चीज थी तो वो थी स्केटिंग। घर आकर युवराज फूट-फूट कर रोते हैं। युवराज की मां युवराज सिंह से खूब लड़ी। दादी ने भी योगराज को खूब डांटा लेकिन युवराज का मानना था कि अगर किसी चीज को एक्सीलेंट करना है तो एक ही चीज पर फोकस करना होगा 10 पर नहीं। उस शाम जब युवराज जी भरकर रोने के बाद थक जाते हैं तो युवराज ने भी उन्हें गले लगाया और खुद भी फूट-फूट कर रोए। युवराज की मां शबनम हर सुबह युवराज के कमरे में उनके लिए चाय लेकर जाती थी। लेकिन स्केटिंग की घटना के अगले दिन युवराज चाय लेकर आते हैं। युवराज ने अपने पिता से पूछा, क्या आप मेरे साथ क्रिकेट किट खरीदने के लिए चलेंगे या मुझे मॉम के साथ जाना चाहिए? इस बात से युवराज बहुत खुश होते हैं। आखिर उनका बेटा क्रिकेटर खेलने के लिए तैयार हो गया था। युवराज सिंह ने युवराज का पटियाला के फेमस यदविंदर पब्लिक स्कूल में एडमिशन करवा दिया। जहां पास में ही था महारानी क्लब जिसमें क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू प्रैक्टिस करने के लिए आते थे। एक दिन युवराज सिंह युवराज को लेकर महारानी क्लब गए और सिद्धू से युवराज की बैटिंग देखने के लिए कहा। युवराज के कुछ शॉट देखकर सिद्धू ने कहा कि युवराज क्रिकेट के लिए नहीं बना है। यह सुनकर युवराज सिंह युवराज को हॉस्टल लेकर गए और कहा, अपना बस्ता उठा और घर चल। मैं देखता हूं कि तू क्रिकेट कैसे नहीं खेलता। युवराज ने अपने घर के पीछे का खूबसूरत बगीचा उजाड़ दिया और फ्लड लाइट्स के साथ एक मार्बल की पिच बना दी। यहां युवराज सिंह टेनिस बॉल्स को पानी में भिगोकर युवराज की बॉडी पर बॉलिंग करते ताकि उन्हें शॉर्ट बॉल्स खेलना आ जाए। युवराज युवराज को स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया की पेस बॉलिंग एकेडमी में भी ले गए। जहां वो युवराज से बिना हेलमेट के बल्लेबाजी करवाते और तेज बॉलर्स से उन्हें बाउंसर डालने के लिए कहते। युवराज अपने बेटे को इतनी ब्रूटल ट्रेनिंग देने लगे कि कई बार युवराज की मां शबनम युवराज से कहती कि तुम मेरे बेटे को मार डालोगे क्या? एक दिन कड़ाके की ठंड में युवराज सुबह-सुबह अपने गर्म बिस्तर को छोड़ना नहीं चाहते थे। इससे युवराज सिंह इतने नाराज हुए कि एक बाल्टी में ठंडा पानी भरकर लाए और युवराज सिंह के ऊपर उड़ेल दिया। एक बार जब युवराज ने एक खराब शॉट खेल दिया तो युवराज सिंह ने गुस्से में नॉन स्ट्राइककर का एक स्टंप उखाड़ा और युवराज की तरफ फेंक मारा। ऐसे ही एक मैच में जब युवराज खराब शॉट खेलकर आउट हुए तो घर आकर युवराज सिंह ने दूध का एक गिलास उठाकर सीधा युवराज की तरफ फेंक कर दे मारा और कहा अगर तुम मेरे बेटे नहीं होते तो मैं आज तुम्हें गोली मार देता। तुमने मेरी रेपुटेशन को बर्बाद कर दिया है और इतनी हार्ड ट्रेनिंग का कोई फायदा नहीं हुआ। जैसे-जैसे युवराज बड़े हो रहे थे, घर में तनाव का माहौल बढ़ता जा रहा था। युवराज के पेरेंट्स भी लगातार आपस में लड़ते रहते। इस माहौल से बचने के लिए युवराज क्रिकेट खेलने के लिए चंडीगढ़ से पटियाला, अमृतसर और दिल्ली निकल जाते। सिर्फ इसलिए कि उन्हें घर पर ना रहना पड़े। आई हेट दिस स्पोर्ट बिकॉज़ बीन वै टफ फॉर मी टफ ऑन मी मेंटली। लेकिन इन सब में अच्छा यह हुआ कि युवराज सिंह की कड़ी ट्रेनिंग युवराज को निखारती जा रही थी। युवराज ने जूनियर क्रिकेट में इतने रन बना दिए कि केवल 15 साल की उम्र में उन्होंने पंजाब की तरफ से रणजी ट्रॉफी में डेब्यू कर दिया। इंटरेस्टिंगली इतनी कम उम्र में मिले मौके पर युवराज ओपनिंग पर आए लेकिन जीरो पर आउट हो जाते हैं और इस मैच में एक कैच भी छोड़ दिया। आगे युवराज को कोई भी मैच नहीं खिलाया गया। इस तरह युवराज का करियर शुरू होने से पहले ही एंड हो गया। युवराज का मजाक उड़ाया जाने लगा। इससे युवराज और उनके पिता दोनों हर्ट हुए। लेकिन युवराज की कहानी अभी बाकी थी। युवराज को पंजाब की तरफ से रणजी मैच खेलने का दूसरा मौका मिला। 2 साल बाद यानी फरवरी 1999 में। सामने हैदराबाद की टीम थी। इस मैच में युवराज ने दो कैच लिए और एक रन आउट भी किया। लेकिन रन मात्र 20 और 18 ही बना सके। एक बार फिर से सवाल उठने लगे कि युवराज इस लेवल पर खेलने लायक हैं भी या नहीं। लेकिन पंजाब के कप्तान विक्रम राठौड़ ने युवराज का साथ दिया और उन्हें आगे बढ़ने का मौका दिया। नवंबर 1999 में युवराज ने हरियाणा के खिलाफ रणजी का अपना पहला शतक लगा दिया और 149 रन पर आउट हुए। मैच के बाद युवराज ने अपने पिता को फोन किया और खुशी-खुशी बताया कि उन्होंने शतक लगाया है। लेकिन उधर से युवराज ने नाराज होकर कहा कि दो क्यों नहीं बनाए? हालांकि 2 घंटे बाद ही युवराज का फोन वापस आया और उन्होंने अपने बेटे युवराज को Honda City कार गिफ्ट में दी। रणजी में पहले शतक को एक महीना भी नहीं बीता था कि युवराज ने एक और तगड़ी पारी खेल डाली। दिसंबर 1999 में पंजाब और बिहार के बीच कच बिहार ट्रॉफी अंडर 19 का फाइनल मैच खेला जा रहा था। इस मैच की फर्स्ट इनिंग में बिहार की टीम 357 रन पर ऑल आउट हो जाती है। वहीं पंजाब की टीम ने पांच विकेट पर 839 रन पर पारी की घोषणा कर दी। इस इनिंग में अकेले युवराज सिंह ने 358 रन बना डाले। यानी बिहार की पूरी टीम से।
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Speaker A
था जो कपिल की तरह ही चंडीगढ़ में उनके साथ प्रैक्टिस करता था। कपिल देव की तरह ही तगड़ा ऑलराउंडर था और फास्ट बॉल फेंकता था। यह वो खिलाड़ी था जिसे 6 साल पहले 1977 में इंडिया की अंडर 22 टीम में कपिल
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Speaker A
देव की जगह सेलेक्ट किया गया था। लेकिन आज एक तरफ कपिल देव वर्ल्ड कप उठा रहे थे तो दूसरी तरफ यह लड़का गुमनामी में जीवन काट रहा था। इस लड़के का नाम था योगराज सिंह। फर्स्ट द [संगीत] डोमेस्टिक क्रिकेट में युवराज सिंह के नाम
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Speaker A
को बड़े-बड़े क्रिकेटर जानने लगे थे। इसलिए उन्हें इंडियन टीम में खेलने का मौका मिल जाता है। लेकिन युवराज सिंह को सिर्फ एक ही टेस्ट मैच खेलने दिया गया। इसके अलावा उन्होंने छह वनडे मैच खेले लेकिन चोटों और खराब फॉर्म के कारण युवराज
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Speaker A
सिंह इन मौकों पर ज्यादा अच्छा ना कर सके। युवराज सिंह का करियर यहीं पर खत्म हो जाता है। [हंसी] कुछ बड़े खिलाड़ी जैसे इंडियन टीम के पूर्व कैप्टन हेमु अधिकारी युवराज सिंह को कपिल देव से एक पायदान ऊपर मानते थे।
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Speaker A
लेकिन योगराज की किस्मत में कुछ और लिखा था। योगराज सिंह की मानें तो सुनील गावस्कर योगराज को और मौके देने के पक्ष में थे। लेकिन BCCI के चीफ सिलेक्टर बने बसंत सिंह बेदी ने यह बात नहीं मानी। इन्हीं दिनों योगराज सिंह के पिता की
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Speaker A
कैंसर से डेथ हो जाती है। योगराज परिवार में इकलौते बेटे थे। अब जब भी योगराज बाहर मैच खेलने के लिए जाते तो उनका पूरा ध्यान घर पर रहने वाली उनकी अकेली मां, पत्नी और एक साल के बच्चे पर रहता।
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Speaker A
[संगीत] एक तरफ योगराज इंडियन टीम से निकाले जाने के कारण फ्रस्ट्रेशन से जूझ रहे थे। दूसरी तरफ परिवार को संभालना मुश्किल था। इन दोनों के बीच योगराज अच्छे से प्रैक्टिस नहीं कर पाए और चीजें बिगड़ती चली जाती हैं। एक महान क्रिकेटर का सितारा बिना कुछ
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Speaker A
किए ही बुझ जाता है। इस बात का मलाल और फ्रस्ट्रेशन युवराज सिंह के अंदर बैठ गया कि इतनी प्रतिभा होने के बाद भी वे घर पर ही रह गए। इन्हीं दिनों योगराज ने अपने ढाई साल के बेटे के लिए एक प्लास्टिक का
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Speaker A
बल्ला खरीदा जिससे उसने योगराज के सामने ही एक तगड़ा शॉट मार दिया। योगराज को उनके सपने पूरे करने वाला मिल चुका था। युवराज ने अपनी क्रिकेट प्रैक्टिस छोड़ दी और अपना एक नया लक्ष्य बनाया और वह लक्ष्य था
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Speaker A
युवराज को एक महान क्रिकेटर बनाने का। अपना क्रिकेट करियर छोड़ते समय युवराज सिंह ने एक पब्लिक स्टेटमेंट दिया कि मैं अपने बेटे को सर गारफील्ड सोबर्स और विवियन रिचर्ड्स के लेवल का क्रिकेटर बनाऊंगा। जब मैंने यूवी का स्टेटमेंट दिया कि आई
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Speaker A
विल [संगीत] मेक माय सनवी लेवल ऑफ़ सर गार्फिल्ड सोबर्स एंड विन रिचर्ड। इस पर इंडियन एक्सप्रेस के खेल पत्रकार प्रदीप मैगजीन ने लिखा कि मुझे लगता है कि योगराज सिंह पागल हो चुके हैं। उन दिनों अखबारों में योगराज सिंह के लिए जो भी लिखा जा रहा
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Speaker A
था उन अखबारों और मैगजीनंस की कतरनों को योगराज ने कटिंग करके अपने पास रखना शुरू कर दिया। योगराज के अनुसार अक्सर लोग उन पर हंसते थे। इसलिए योगराज अब हर हाल में अपने बेटे को टीम इंडिया के लिए खेलते हुए
03:24
Speaker A
देखना चाहते थे। सारा कुछ यूवी पे ही निकल गया। तेरे को ये करना पड़ेगा। करना होगा। मेरे लिए खेलना पड़ेगा। उसके स्केट्स फेंक दिए। लेकिन अपने जिस बेटे को युवराज सिंह विवियन रिचर्ड के लेवल का महान क्रिकेटर बनाना चाहते थे, उसकी क्रिकेट में बिल्कुल
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Speaker A
भी दिलचस्पी नहीं थी। युवराज को क्रिकेटर नहीं बनना था। उन्हें पसंद था स्केटिंग और टेनिस। एक टेनिस मैच हारने के बाद युवराज ने ₹2100 का एक महंगा रैकेट तोड़ दिया। इसके बाद युवराज के पिता ने उनका टेनिस खेलना बंद करा दिया। अब युवराज हफ्ते में
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Speaker A
छ दिन स्केटिंग खेलते और सिर्फ रविवार के दिन क्रिकेट खेलते। युवराज अभी मात्र 11-12 साल के थे कि उन्होंने अंडर 14 स्टे टूर्नामेंट के स्पीड स्केटिंग गेम में गोल्ड मेडल जीत लिया। लेकिन अपने बेटे को शाबाशी देने की जगह युवराज सिंह आग बबूला
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Speaker A
हो जाते हैं। युवराज ने युवराज से उनका मेडल छीन लिया और स्केट्स [संगीत] छीनकर फेंक दिए और कहा कि लड़कियों का खेल खेलना बंद करो। आज के बाद तो सिर्फ क्रिकेट खेलेगा और सिर्फ क्रिकेट। युवराज चाहते थे कि युवराज
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Speaker A
क्रिकेटर बने जबकि उनके बेटे को अगर सबसे ज्यादा प्यारी कोई चीज थी तो वो थी स्केटिंग। घर आकर युवराज फूट-फूट कर रोते हैं। युवराज की मां युवराज सिंह से खूब लड़ी। दादी ने भी योगराज को खूब डांटा लेकिन युवराज का मानना था कि अगर किसी चीज
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Speaker A
को एक्सीलेंट करना है तो एक ही चीज पर फोकस करना होगा 10 पर नहीं। उस शाम जब युवराज जी भरकर रोने के बाद थक जाते हैं तो युवराज ने भी उन्हें गले लगाया और खुद भी फूट-फूट कर रोए। युवराज की मां शबनम हर
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Speaker A
सुबह युवराज के कमरे में उनके लिए चाय लेकर जाती थी। लेकिन स्केटिंग की घटना के अगले दिन युवराज चाय लेकर आते हैं। युवराज ने अपने पिता से पूछा, क्या आप मेरे साथ क्रिकेट किट खरीदने के लिए चलेंगे या मुझे
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Speaker A
मॉम के साथ जाना चाहिए? इस बात से युवराज बहुत खुश होते हैं। आखिर उनका बेटा क्रिकेटर खेलने के लिए तैयार हो गया था। युवराज सिंह ने युवराज का पटियाला के फेमस यदविंदर पब्लिक स्कूल में एडमिशन करवा दिया। जहां पास में ही था महारानी क्लब
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Speaker A
जिसमें क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू प्रैक्टिस करने के लिए आते थे। एक दिन युवराज सिंह युवराज को लेकर महारानी क्लब गए और सिद्धू से युवराज की बैटिंग देखने के लिए कहा। युवराज के कुछ शॉट देखकर सिद्धू ने कहा कि युवराज क्रिकेट के लिए
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Speaker A
नहीं बना है। यह सुनकर युवराज सिंह युवराज को हॉस्टल लेकर गए और कहा, अपना बस्ता उठा और घर चल। मैं देखता हूं कि तू क्रिकेट कैसे नहीं खेलता। युवराज ने अपने घर के पीछे का खूबसूरत बगीचा उजाड़ दिया और फ्लड
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Speaker A
लाइट्स के साथ एक मार्बल की पिच बना दी। यहां युवराज सिंह टेनिस बॉल्स को पानी में भिगोकर युवराज की बॉडी पर बॉलिंग करते ताकि उन्हें शॉर्ट बॉल्स खेलना आ जाए। युवराज युवराज को स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया की पेस बॉलिंग एकेडमी में भी ले
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Speaker A
गए। जहां वो युवराज से बिना हेलमेट के बल्लेबाजी करवाते और तेज बॉलर्स से उन्हें बाउंसर डालने के लिए कहते। युवराज अपने बेटे को इतनी ब्रूटल ट्रेनिंग देने लगे कि कई बार युवराज की मां शबनम युवराज से कहती कि तुम मेरे बेटे को मार डालोगे क्या? एक
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Speaker A
दिन कड़ाके की ठंड में युवराज सुबह-सुबह अपने गर्म बिस्तर को छोड़ना नहीं चाहते थे। इससे युवराज सिंह इतने नाराज हुए कि एक बाल्टी में ठंडा पानी भरकर लाए और युवराज सिंह के ऊपर उड़ेल दिया। एक बार जब युवराज ने एक खराब शॉट खेल दिया तो युवराज
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Speaker A
सिंह ने गुस्से में नॉन स्ट्राइककर का एक स्टंप उखाड़ा और युवराज की तरफ फेंक मारा। ऐसे ही एक मैच में जब युवराज खराब शॉट खेलकर आउट हुए तो घर आकर युवराज सिंह ने दूध का एक गिलास उठाकर सीधा युवराज की तरफ
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Speaker A
फेंक कर दे मारा और कहा अगर तुम मेरे बेटे नहीं होते तो मैं आज तुम्हें गोली मार देता। तुमने मेरी रेपुटेशन को बर्बाद कर दिया है और इतनी हार्ड ट्रेनिंग का कोई फायदा नहीं हुआ। जैसे-जैसे युवराज बड़े हो
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Speaker A
रहे थे, घर में तनाव का माहौल बढ़ता जा रहा था। युवराज के पेरेंट्स भी लगातार आपस में लड़ते रहते। इस माहौल से बचने के लिए युवराज क्रिकेट खेलने के लिए चंडीगढ़ से पटियाला, अमृतसर और दिल्ली निकल जाते। सिर्फ इसलिए कि उन्हें घर पर ना रहना
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Speaker A
पड़े। आई हेट दिस स्पोर्ट बिकॉज़ बीन वै टफ फॉर मी टफ ऑन मी मेंटली। लेकिन इन सब में अच्छा यह हुआ कि युवराज सिंह की कड़ी ट्रेनिंग युवराज को निखारती जा रही थी। युवराज ने जूनियर क्रिकेट में इतने रन बना दिए कि केवल 15 साल की उम्र
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Speaker A
में उन्होंने पंजाब की तरफ से रणजी ट्रॉफी में डेब्यू कर दिया। इंटरेस्टिंगली इतनी कम उम्र में मिले मौके पर युवराज ओपनिंग पर आए लेकिन जीरो पर आउट हो जाते हैं और इस मैच में एक कैच भी छोड़ दिया। आगे
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Speaker A
युवराज को कोई भी मैच नहीं खिलाया गया। इस तरह युवराज का करियर शुरू होने से पहले ही एंड हो गया। युवराज का मजाक उड़ाया जाने लगा। इससे युवराज और उनके पिता दोनों हर्ट हुए। लेकिन युवराज की कहानी अभी बाकी थी।
07:45
Speaker A
युवराज को पंजाब की तरफ से रणजी मैच खेलने का दूसरा मौका मिला। 2 साल बाद यानी फरवरी 1999 में। सामने हैदराबाद की टीम थी। इस मैच में युवराज ने दो कैच लिए और एक रन आउट भी किया। लेकिन रन मात्र 20 और 18 ही
07:59
Speaker A
बना सके। एक बार फिर से सवाल उठने लगे कि युवराज इस लेवल पर खेलने लायक हैं भी या नहीं। लेकिन पंजाब के कप्तान विक्रम राठौड़ ने युवराज का साथ दिया और उन्हें आगे बढ़ने का मौका दिया। नवंबर 1999 में
08:12
Speaker A
युवराज ने हरियाणा के खिलाफ रणजी का अपना पहला शतक लगा दिया और 149 रन पर आउट हुए। मैच के बाद युवराज ने अपने पिता को फोन किया और खुशी-खुशी बताया कि उन्होंने शतक लगाया है। लेकिन उधर से युवराज ने नाराज
08:25
Speaker A
होकर कहा कि दो क्यों नहीं बनाए? हालांकि 2 घंटे बाद ही युवराज का फोन वापस आया और उन्होंने अपने बेटे युवराज को Honda City कार गिफ्ट में दी। रणजी में पहले शतक को एक महीना भी नहीं बीता था कि युवराज ने एक
08:37
Speaker A
और तगड़ी पारी खेल डाली। दिसंबर 1999 में पंजाब और बिहार के बीच कच बिहार ट्रॉफी अंडर19 का फाइनल मैच खेला जा रहा था। इस मैच की फर्स्ट इनिंग में बिहार की टीम 357 रन पर ऑल आउट हो जाती है। वहीं पंजाब की
08:51
Speaker A
टीम ने पांच विकेट पर 839 रन पर पारी की घोषणा कर दी। इस इनिंग में अकेले युवराज सिंह ने 358 रन बना डाले। यानी बिहार की पूरी टीम से एक रन ज्यादा। एक बार फिर जब युवराज ने अपने पिता को फोन किया तो
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Speaker A
उन्होंने कहा 400 रन क्यों नहीं बनाए? इस इनिंग के कारण युवराज सिंह का इंडिया की अंडर19 टीम के लिए सिलेक्शन हो जाता है। 2000 के जनवरी महीने में ICC का अंडर19 क्रिकेट वर्ल्ड कप हुआ। यह युवराज सिंह का
09:15
Speaker A
पहला अंडर19 इंटरनेशनल टूर्नामेंट था। इस पूरे टूर्नामेंट में युवराज ने शानदार परफॉर्मेंस दी। खासकर सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 58 बॉल में 84 रन बनाए। इस वर्ल्ड कप में इंडिया की जीत हुई और युवराज सिंह को प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट
09:30
Speaker A
मिलता है। यहां से युवराज सिंह के रास्ते इंडियन टीम के लिए खुलते हैं। युवराज का डेब्यू हुआ ICC नॉकआउ ट्रॉफी में जिसे अब चैंपियंस ट्रॉफी के नाम से जाना जाता है। यहां युवराज को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपना पहला मैच खेलने को मिला जो उस वक्त बहुत
09:44
Speaker A
खतरनाक टीम हुआ करती थी। लेकिन 18 साल के युवराज ने अपने पहले ही डेब्यू मैच में 84 रन मार डाले और प्लेयर ऑफ द मैच बनते हैं। बट ही इज अ गुड स्ट्राइककर ऑफ द बॉल एंड यू कैन सी इट देयर।
10:01
Speaker A
अगले 10 साल तक युवराज सिंह इंडियन टीम के मिडिल ऑर्डर पर छाए रहे। 2005 और छ में युवराज इंग्लैंड पाकिस्तान और दक्षिण अफ्रीका के साथ हुई तीन सीरीज में लगातार मैन ऑफ द सीरीज बनते हैं। साल 2007 में
10:14
Speaker A
दक्षिण अफ्रीका में पहला टी20 वर्ल्ड कप होता है। इंग्लैंड के खिलाफ एक मैच के दौरान युवराज की एंड्र्यू फ्लोटफ से तीखी बहस हो जाती है। इससे युवराज में ऐसा गुस्सा आया कि उन्होंने अगले ही ओवर में स्टर्ट ब्रॉड की छह गेंदों पर छह
10:28
Speaker A
मार दिए। जो टी20 में पहली बार और इंटरनेशनल क्रिकेट में केवल दूसरी बार हुआ था। इस मैच में युवराज ने मात्र 12 गेंदों में 50 मार डाली और सबसे तेज 50 का वर्ल्ड रिकॉर्ड बना डाला। एंड दिस लास्ट वन
10:42
Speaker A
टू मेक इट 36 इन दैट ओवर। सेमीफाइनल मैच में इंडिया के सामने ऑस्ट्रेलिया की टीम थी। मैच के दौरान युवराज की हेडन से कहासनी हो जाती है। एक बार फिर युवराज ने 30 गेंदों में 70 रन मार डाले। युवराज की इस पारी की बदौलत
10:59
Speaker A
इंडिया ऑस्ट्रेलिया को हराकर फाइनल में पहुंच जाती है और फाइनल में पाकिस्तान को हराकर पहला T20 वर्ल्ड कप जीत लेती है। इन द श्री टेक्स इट इंडिया विन इस टी20 वर्ल्ड कप ने कप्तान धोनी को तो हीरो बनाया ही लेकिन युवराज भी अब देश के
11:20
Speaker A
हीरो बन चुके थे। 2009 और 10 में युवराज लगातार चोटों से जूझ रहे थे। 2010 में उन्हें दो बार डेंगू हुआ। एक ही उंगली में दो बार चोट लग गई और कलाई में भी फ्रैक्चर हो गया। युवराज को जल्दी-जल्दी चोटें लग
11:33
Speaker A
रही थी और इन्हें ठीक होने में भी समय लग रहा था। एव्री टाइम आई केम बैक ऑन द फील्ड आई गॉट इंजर्ड अगेन देन केम बैक गॉट इंजर्ड अगेन। सो इट वास हैपनिंग एंड अगेन। सो आई वास यू
11:43
Speaker A
नो टाइम्स यू थिंक दैट यू नो इट्स नो पॉइंट प्लेइंग एनी मोर। 2011 आते-आते युवराज वापस अपने करियर की पीक पर पहुंच चुके थे। ऐसी फॉर्म उनकी कभी भी नहीं आई थी। लेकिन एक चीज उन्हें जो लगातार परेशान कर रही थी वो थी उनकी खांसी
11:57
Speaker A
और लगातार होने वाली उल्टी। युवराज का करियर अपनी पीक पर था लेकिन शरीर अंदर से खाली होता जा रहा था। जब युवराज ने चेकअप और टेस्ट कराए तो पता चला कि उन्हें कैंसर है। कैंसर यह क्या होता है? युवराज ने
12:11
Speaker A
डॉक्टर की बात पर विश्वास ही नहीं किया कि उन्हें कैंसर हो सकता है। युवराज के फैमिली डॉक्टर ने कहा, आपके पास सिर्फ तीन या छ महीने का ही वक्त बचा है। आपके पास सिर्फ तीन से छ महीने बचे हैं।
12:24
Speaker A
युवराज सिंह को मेडियास्टर्नल फिनोमिना कैंसर था जो उनके फेफड़े के पास हुआ था। युवराज यह बात पचा नहीं पा रहे थे कि उनके जैसा एक एथलीट जिसका बचपन इतनी ब्रूटल ट्रेनिंग से गुजरा हो जो हर दिन चार-प घंटे प्रैक्टिस करता हो और हेल्दी खाना
12:38
Speaker A
खाता हो उसको कैंसर हो सकता है। इससे पहले युवराज के दादा की भी कैंसर से ही मौत हुई थी। युवराज सिंह के बहाने यहां पर हम 2 मिनट कैंसर की बात करेंगे। इसलिए क्योंकि यह आपकी और हमारे अपनों की जिंदगी से
12:51
Speaker A
जुड़ा हुआ एकेंट इशू है। आज इंडिया में जो कैंसर तेजी से बढ़ रहा है वो हैं ब्लड कैंसर्स। इंडिया में सिर्फ एक साल में ही करीब 1 लाख लोगों में ब्लड कैंसर पाया गया। जिनमें से करीब 7000 लोगों की ब्लड
13:05
Speaker A
कैंसर के कारण डेथ हो गई। जिनमें से एक बड़ी संख्या बच्चों की भी रहती है। हमारी हड्डियों के भीतर जो स्पंजी जगह होती है जिसे बोन मेरो कहा जाता है वहां पर हमारा ब्लड बनता है। ब्लड बनाने का काम स्टेम
13:17
Speaker A
सेल्स करती हैं। जब स्टेम सेल्स में कोई गड़बड़ आ जाती है तो हेल्दी ब्लड सेल्स नहीं बन पाती हैं। जो ब्लड सेल्स आदमी के शरीर में ऑक्सीजन ली जाती हैं वो ऑक्सीजन अब शरीर में नहीं पहुंच पाता है और एक दिन
13:29
Speaker A
पेशेंट की मौत हो जाती है। लेकिन अगर इन खराब स्टेम सेल्स को किसी हेल्दी डोनर के हेल्दी स्टेम सेल्स से रिप्लेस कर दिया जाए तो ब्लड कैंसर के पेशेंट को बचाया जा सकता है। लेकिन स्टेम सेल्स ट्रांसप्लांट के लिए पेशेंट और डोनर दोनों का एचएलए
13:43
Speaker A
टाइप सेम होना चाहिए। एचएलए समझिए हमारी सेल्स का एक आइडेंटिटी टैग होता है। प्रॉब्लम यह है कि जैसे ब्लड ग्रुप मिलना काफी आसान है और अक्सर अपने घर परिवार में ही किसी ना किसी का ब्लड ग्रुप मैच कर
13:53
Speaker A
जाता है। वैसे एचएलए टाइप का मैच होना आसान नहीं है। यह इतना रेयर होता है कि कोई 10 लाख लोगों में से एक आदमी का एचएलए आपके टाइप से मिलेगा। अगर हमारे देश में ज्यादा से ज्यादा लोग अपना एचएलए टाइप
14:05
Speaker A
रजिस्ट्रेशन करवा लें तो पेशेंट के लिए एचएलए मैच ढूंढना आसान हो जाएगा। यही काम इंटरनेशनल नॉन प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशन डीकेएमएस करती है जो पोटेंशियल स्टेम सेल्स डोनर्स का डेटाबेस बनाकर रखती है। लेकिन इंडिया में ज्यादातर लोगों को इसके बारे में पता ही नहीं है। स्टेम सेल्स
14:22
Speaker A
डोनेशन ना केवल ब्लड कैंसर के मरीज की जान बचाता है बल्कि थैलेसीमिया के पेशेंट की भी जान बचाता है। जिसके कारण हजारों बच्चों की डेथ हो जाती है। थैलेसीमिया के पेशेंट को जिंदा रखने के लिए हर दो हफ्ते
14:32
Speaker A
पर या एक महीने पर ब्लड चढ़वाना होता है। लेकिन अगर उसका स्टेम सेल्स ट्रांसप्लांट करवा दिया जाए तो उसकी भी जान बचाई जा सकती है। मैं खुद रैंडम लोगों को रेगुलर ब्लड डोनेट करने के लिए जाता हूं। जैसे आज
14:44
Speaker A
आया हूं किसी अनजान आदमी को ब्लड डोनेट करने के लिए। लेकिन मुझे खुद नहीं पता था कि हमारे ब्लड में से निकलने वाले स्टेम सील से किसी थैलेसीमिया के पेशेंट या ब्लड कैंसर के पेशेंट की जान बचाई जा सकती है।
14:56
Speaker A
नहीं तो सबसे पहले खुद को ही रजिस्टर करवा लेता। लेकिन अब मैंने खुद को डीकेमएस की वेबसाइट पर एक पोटेंशियल स्टैंप सेल्स डोनर के रूप में खुद को रजिस्टर करवा लिया है। यह बहुत सिंपल है। डीकेएस की वेबसाइट
15:07
Speaker A
पर रजिस्टर करने के बाद कुछ दिनों में आपके घर पर एक स्वैब किट आएगी। आपको इंस्ट्रक्शंस का पालन करके अपने चीक का सैंपल [संगीत] लेना है। यूज्ड स्वैब को स्वैब किट में डालकर कंसेंट फॉर्म पर साइन करके और रिटर्न एनवेलप में दिए गए क्यूआर
15:20
Speaker A
कोड को स्कैन करके डीकेएमएस को वापस भेज देना है। यह पूरी प्रोसेस पूरी तरह से फ्री है। अगर कभी किसी पेशेंट का एचएलए टाइप आपके एचएलए टाइप से मैच कर गया तो आपसे कांटेक्ट किया जाएगा और आपके स्टेम
15:31
Speaker A
सील डोनेशन की प्रोसेस को पूरा करवा लिया जाएगा। जो बिल्कुल ब्लड प्लाज्मा या प्लेटलेट डोनेशन की तरह होती है। डोनेशन प्रोसेस भी बहुत सिंपल है। एक आम में नीडल डाली जाती है। अपेरेसिस मशीन से स्टेम सेल्स को अलग कर लिया जाता है और बाकी
15:44
Speaker A
ब्लड को दूसरी आम से वापस भेज दिया जाता है। मुश्किल [संगीत] से तीन-4 घंटे की प्रोसेस होती है। तो आज ही डिस्क्रिप्शन एंड पिंड कमेंट में मौजूद डीकेएमएस की वेबसाइट पर जाकर खुद को रजिस्टर करें और इसे एक मोमेंट बनाएं ताकि जरूरतमंद लोगों
15:57
Speaker A
की जान बचाई जा सके। अब वापस अपने टॉपिक पर लौटते हैं। जनवरी 2011 में इंडियन टीम साउथ अफ्रीका के दौरे पर थी। 14 जनवरी 2011 के दिन पहला मैच होना था। लेकिन मैच से पहले ही सुबह-सुबह युवराज को
16:14
Speaker A
खांसी उठती है। युवराज के थूक में लाल और बैंगनी रंग के धब्बे थे। हालांकि युवराज ने इसे इग्नोर कर दिया और मैच खेलने के लिए मैदान में उतर गए। लेकिन जब युवराज बैटिंग करने के लिए उतरे तो एक बार फिर
16:25
Speaker A
युवराज की सांसे उखड़ने लगी। अच्छे से सांस नहीं आ पा रही थी। इस मैच में युवराज 12 रन बनाकर ही लौट जाते हैं। युवराज ने अपने फिजियो से कहा कि उन्हें चेकअप की जरूरत है। लेकिन फिर यह कहकर टाल दिया कि
16:37
Speaker A
सीरीज खत्म होने दो। लेकिन सीरीज खत्म होने के बाद युवराज 2011 वर्ल्ड कप की तैयारी में लग जाते हैं। 2011 का वर्ल्ड कप युवराज के लिए सब कुछ था। इसके पीछे थी एक कहानी। बचपन से युवराज चंडीगढ़ में
16:49
Speaker A
अपने पिता के दोस्तों से सुनते हुए आ रहे थे कि 1983 का वर्ल्ड कप उनके पिता के नाम होना चाहिए था। लेकिन वह चंडीगढ़ के ही दूसरे खिलाड़ी कपिल देव के नाम हो गया। युवराज के मुताबिक लोग कहते थे कि वे कपिल
17:01
Speaker A
देव से भी ज्यादा तेज गेंदबाज थे। यही वो ठसक थी जो युवराज सिंह के मन में थी। इसी दिन के लिए उन्होंने अपने बेटे युवराज को तैयार किया था। इसी इतिहास को युवराज बदलना चाहते थे और अपने पिता को वह सम्मान
17:12
Speaker A
दिलाना चाहते थे जो उन्हें कभी नहीं मिला था। इससे पहले 2003 और सात के वर्ल्ड कप के मौके पर युवराज चूक चुके थे। 2011 का वर्ल्ड कप उनके लिए आखिरी वर्ल्ड कप की तरह था। लेकिन इसमें बुरा यह था कि युवराज
17:24
Speaker A
का शरीर साथ नहीं दे रहा था। उनकी फौमी अब सबसे बुरे दौड़ से गुजर रही थी। खुद युवराज अपने आप को लेकर श्योर नहीं थे। युवराज ने वर्ल्ड कप से पहले अपनी मां को बाहर विदेश में जाकर हॉलिडे मनाने के लिए
17:35
Speaker A
कहा। युवराज नहीं चाहते थे कि वे अगर टीम में परफॉर्म ना कर पाए तो कहीं ऐसा ना हो कि लोग गुस्से में आकर उनके घर पर पत्थर फेंके। हालांकि युवराज की मां ने मना कर दिया। 2007 वर्ल्ड कप की हार के बाद धोनी
17:46
Speaker A
के रांची वाले घर पर भी पत्थर फेंके गए थे और हंगामा किया गया था। फरवरी महीने में 2011 का क्रिकेट वर्ल्ड कप शुरू हो गया। इस बार वर्ल्ड कप इंडिया में हो रहा था और कुछ मैच बांग्लादेश और श्रीलंका में भी
17:58
Speaker A
होने थे। इंडिया का पहला मैच बांग्लादेश के साथ हुआ। हालांकि इस मैच में युवराज को बैटिंग का मौका नहीं मिल सका। इंडिया का दूसरा मैच इंग्लैंड के साथ होने जा रहा था। मैच से पहले जब युवराज वार्म अप कर
18:10
Speaker A
रहे थे तो स्ट्राइक स्टांस लेने में दिक्कत होने लगी। युवराज का सिर सही से घूम नहीं रहा था और वे अपने राइट शोल्डर के ऊपर की चीजों को ठीक से नहीं देख पा रहे थे। युवराज ने अपने फिजियो नितिन पटेल
18:21
Speaker A
को बुलाया। लेकिन नितिन पटेल की खूब कोशिश के बाद भी युवराज की गर्दन ठीक नहीं हो रही थी। हारकर युवराज ने जहीर खान से कहा कि वह यह मैच नहीं खेल पाएंगे। जहीर खान ने कहा कि मैंने कहा है ना चुप रहो और
18:33
Speaker A
खेलो। युवराज भी अपना दर्द और बीमारी भूलकर मैदान में उतर जाते हैं और 58 रन मारते हैं। [संगीत] युवराज किंग ऑफ सिक्स। इस मैच के बाद कई कमेंटेटर्स ने कहा कि युवराज ने अपनी फॉर्म वापस पा ली है। लेकिन इधर युवराज की
18:48
Speaker A
तबीयत और बिगड़ती चली जाती है। उन्हें नींद नहीं आती थी, बेची नहीं होती थी। वे अक्सर उल्टी करती उन्हें अपनी सांसों की आवाज सुनाई देती और उनका स्टैमिना तेजी से नीचे गिर रहा था। टीम के साथी खिलाड़ी जैसे जहीर खान और आशीष नेहरा कई बार
19:01
Speaker A
अनजाने में मजाक में कहते कि युवी तुम बूढ़े हो रहे हो। लेकिन उन्हें यह नहीं पता था कि युवराज अंदर ही अंदर एक बीमारी से लड़ रहे हैं। इंडिया का तीसरा मैच आयरलैंड से था। इस मैच में भी युवराज ने
19:13
Speaker A
50 मारी और पांच विकेट ले लिए। पूरा बैर स्टेडियम खड़ा हो गया। जनता युवराज के लिए तालियां बजा रही थी। इस मैच में युवराज मैन ऑफ द मैच बनते हैं। इंडिया का चौथा मैच नीदरलैंड से था। इस मैच में भी युवराज
19:26
Speaker A
ने नाबाद 51 रन मारे और दो विकेट लिए। इस मैच में भी युवराज मैन ऑफ द मैच बनते हैं। इंडिया का पांचवा मैच साउथ अफ्रीका के साथ नागपुर में था। मैच से पहले युवराज इतने नर्वस थे कि कुछ भी नाश्ता नहीं कर सके।
19:38
Speaker A
युवराज को लगातार उल्टियां हो रही थी और खांसी हो रही थी। युवराज को लग रहा था कि यह शायद टीबी है। युवराज का प्लान था कि एक बार वर्ल्ड कप खत्म हो जाए तभी अपनी बीमारी को दिखाऊंगा। साउथ अफ्रीका के साथ
19:49
Speaker A
हुए इस मैच में युवराज मात्र 12 रन बनाकर आउट हो जाते हैं। इस मैच में टीम इंडिया की हार हुई और यह टीम इंडिया की पूरे वर्ल्ड कप में एकमात्र हार थी। इंडिया का छठवां मैच वेस्ट इंडीज के साथ चेन्नई में
20:01
Speaker A
था। मैच के दौरान चेन्नई में भीषण गर्मी पड़ रही थी। युवराज ने मैदान पर ही कई बार खून की उल्टियां कर दी। युवराज को चक्कर भी आ रहे थे। युवराज की खांसी फिर से शुरू हो जाती है। युवराज की खांसी में से खून
20:13
Speaker A
निकल रहा था। लेकिन युवराज ने सोचा कि शायद साउथ अफ्रीका से हार की वजह से यह हुआ है क्योंकि इस हार ने उन्हें अंदर से हिला दिया था। युवराज की हालत देखकर अंपायर साइमन टॉफेल युवराज के पास आते हैं
20:25
Speaker A
और पूछते हैं, क्या तुम ठीक हो दोस्त? क्या तुम बाहर जाना चाहते हो? इस पर युवराज ने जवाब दिया, नहीं बॉस, मैं बाहर नहीं जा रहा। मैं 2 साल बाद शतक के करीब हूं। अगर मैं गिरकर बेहोश हो जाऊं तो आप
20:36
Speaker A
मुझे अस्पताल ले जा सकते हो। लेकिन तब तक मैं बाहर नहीं जा रहा। इस मैच में युवराज ने 113 रन बनाए और दो विकेट लिए और इंडिया ने यह मैच जीत लिया। एक बार फिर युवराज सिंह मैन ऑफ द मैच बनते हैं।
20:55
Speaker A
इंडिया का अगला मैच और क्वार्टर फाइनल ऑस्ट्रेलिया के साथ अहमदाबाद में था। ऑस्ट्रेलिया वो टीम थी जो पिछले तीन वर्ल्ड कप लगातार जीत चुकी थी और पिछले दो वर्ल्ड कप तो उसने एक भी मैच बिना हारे ही जीते थे। इसलिए यह मैच इंडिया के लिए करूं
21:10
Speaker A
या मरो की स्थिति वाला था। ऑस्ट्रेलिया ने 260 रन बनाए लेकिन इसके जवाब में इंडिया के 187 रन पर पांच विकेट गिर जाते हैं। प्रेशर रियली ऑन इंडिया। ऐसे लगा कि इंडिया यह मैच हार जाएगा। जब धोनी आउट हुए तो मैच जीतने की उम्मीद से
21:25
Speaker A
खत्म हो गई। हालांकि अभी क्रीज पर युवराज सिंह खड़े हुए थे। पूरा देश युवराज की तरफ देख रहा था। नॉर्मली आउट होने के बाद चुपचाप जाने वाले महेंद्र सिंह धोनी इस बार आउट होने के बाद युवराज के पास आए और
21:37
Speaker A
अग्रेशन के साथ कहा शाब्बास युवी अंत तक टिके रहना। धोनी [संगीत] की इस बात ने युवराज के मोटिवेशन को और बढ़ा दिया और अंत में इंडिया को जिताकर ही मैदान से बाहर आए। युवराज से फिनिश थिंग्स इनू द सेमीफाइनल ऑफ़ द वर्ल्ड कप ऑस्ट्रेलिया
21:54
Speaker A
आउट ऑफ द कंपटीशन। इस मैच में युवराज ने 57 रन मारे और दो विकेट लिए। एक बार फिर युवराज इंडिया को मैच जिताकर मैन ऑफ द मैच बनते हैं। पहले मैच जिसमें युवराज को बैटिंग का मौका नहीं मिला था उसे छोड़ दिया जाए तो हर मैच में
22:07
Speaker A
युवराज लगातार मैन ऑफ द मैच बन रहे थे। उन्होंने किसी दूसरे खिलाड़ी का मौका ही नहीं आने दिया। इस मैच के साथ इंडिया सेमीफाइनल में पहुंचे। विकेट्स टू बुक अ प्लेस अगेंस्ट पाकिस्तान इन द सेमीफाइनल्स इन मोहाली। 30 मार्च के दिन इंडिया का पाकिस्तान के
22:22
Speaker A
साथ सेमीफाइनल मैच था। इस ऑल इंपोर्टेंट पाकिस्तान मैच से पहले की रात में ही युवराज की गर्दन का दर्द वापस आ जाता है। पूरी रात तड़पने और इंतजार में चली जाती है। अंत में हारकर सुबह 4:00 बजे युवराज
22:35
Speaker A
फिजियो नितिन के पास पहुंच जाते हैं जो नींद में थे। हालांकि नितिन की काफी कोशिशों के बाद भी युवराज को राहत नहीं मिली। यह मैच मोहाली में था यानी युवराज के होम ग्राउंड में था। लेकिन जैसे ही युवराज बैटिंग पर आए तुरंत ही आउट हो गए
22:46
Speaker A
बिना एक भी रन बनाए। इट्सिंग। हालांकि इंडिया यह मैच जीत जाता है और तेंदुलकर मैन ऑफ द मैच बने। युवराज अभी भी अपनी बीमारी और चोटों से जूझ रहे थे। 2 अप्रैल 2011 के दिन इंडिया का फाइनल मैच
23:01
Speaker A
श्रीलंका के साथ था। फाइनल मैच से एक रात पहले युवराज थके हुए [संगीत] टेस्ट और जीतने के लिए बेताब थे। अपनी नींद की गोली लेते हुए युवराज ने टीम फिजियो नितिन पटेल से कहा, "कल चाहे कुछ भी हो। मैं बस यह
23:12
Speaker A
चाहता हूं कि भगवान हमें वर्ल्ड कप दे दे। वो जो चाहे कर ले, मेरी जान ले ले। मुझे दर्द दे दे। भगवान बस हमें वर्ल्ड कप दे दे। फाइनल मैच के दिन श्रीलंका की टीम पहले बैटिंग करने के लिए आई। युवराज ने
23:24
Speaker A
इंडिया की तरफ से सबसे कम रन देते हुए दो विकेट लिए। श्रीलंका की टीम 274 रन ही बना सकी। गौतम गंभीर के 97 और धोनी के 91 रन के कारण इंडिया ने आसानी से यह रन चेंज कर लिए। गौतम गंभीर के आउट होने के बाद
23:38
Speaker A
युवराज को मौका मिला। युवराज ने नाबाद 21 रन बनाए। 48वें ओवर में धोनी ने एक धमाकेदार सिक्स मारा और इंडिया यह मैच जीत गया। स्ट्राइक इंटू द क्राउड इंडिया लिफ्ट द वर्ल्ड कप। इस पल को लेकर युवराज अपनी बायोग्राफी में
23:52
Speaker A
कहते हैं कि मुझे लगा कि मैं बस फट पडूंगा। मैं पागल हो गया। उसे गले लगाना चाहता था, मारना चाहता था और तब तक करते रहना चाहता था जब तक कि वो मुझे कंफर्म ना कर दे कि बस हो गया। हमने वर्ल्ड कप जीत
24:04
Speaker A
लिया। [संगीत] इंडिया लेफ्ट द वर्ल्ड कप आफ्टर 28। युवराज और धोनी की जोड़ी ने इंडिया को 28 साल बाद वर्ल्ड कप उठाने का मौका दिया। युवराज मिडिल ऑर्डर में आते थे। इसके बावजूद उन्होंने इस वर्ल्ड कप में सबसे
24:22
Speaker A
ज्यादा 362 रन बनाए और इंडिया की तरफ से जहीर खान के बाद दूसरे नंबर पर सबसे ज्यादा 15 विकेट लिए। युवराज ने एक महान ऑलराउंडर के तौर पर इतिहास रच डाला। उन्हें 2011 वर्ल्ड कप के लिए प्लेयर ऑफ द
24:35
Speaker A
टूर्नामेंट चुना जाता है। इतनी विपरीत परिस्थितियों में भी युवराज की यह फॉर्म ऐसी थी जैसे इन्हीं दिनों के लिए उनके पिता युवराज सिंह ने उन्हें तपाया था। वर्ल्ड कप के बाद युवराज को डॉक्टर के पास जाना चाहिए था। लेकिन वह आईपीएल खेलने लग
24:51
Speaker A
जाते हैं जो 8 अप्रैल से 28 मई तक चलता है। आईपीएल खत्म होने के बाद युवराज ने आखिरकार अपने चेस्ट का एक्सरे करवाया। जब डॉक्टर ने यह एक्सरे युवराज को दिखाया तो इसमें सीधा फेफड़ा तो दिख रहा था लेकिन
25:03
Speaker A
बाई तरफ फेफड़े की जगह 7-आ सेंटीमीटर का एक सफेद बादल जैसे दिख रहा था। युवराज का दिल बैठ गया कि दूसरा फेफड़ा कहां है?
25:11
Speaker A
युवराज ने डॉक्टर से पूछा यह क्या बकवास है? डॉक्टर ने कहा कि यह कुछ भी हो लेकिन अच्छा नहीं है। अगले दिन युवराज सिंह एफएनएसी टेस्ट करवाते हैं। इस टेस्ट के रिजल्ट देखकर डॉक्टर ने कहा यह एक ट्यूमर
25:23
Speaker A
है जो कैंसर हो सकता है। युवराज को यकीन नहीं हो रहा था कि उन्हें कैंसर हो सकता है। युवराज को लगा कि डॉक्टर ही गलत है। वह एक एथलीट है। उन्हें कैंसर कैसे हो सकता है। कैंसर का प्रॉपर इलाज करवाने की
25:34
Speaker A
जगह युवराज ने अपने दोस्त और एक्यूपंक्चर स्पेशलिस्ट जतिन चौधरी से वैकल्पिक इलाज करवाना शुरू कर दिया। जतिन ने युवराज को यकीन दिलाया था कि उनका इलाज ट्यूमर को सिकोड़ देगा और उन्हें कीमोथेरेपी के साइड इफेक्ट से बचाएगा। इस तरह 4-प महीने तक
25:49
Speaker A
युवराज एक्यूपंक्चर स्पेशलिस्ट के भरोसे इलाज करवाते रहे। जबकि युवराज की हालत बिगड़ती जा रही थी। इसमें भी डॉक्टर्स के मना करने के बावजूद युवराज इंग्लैंड दौरे पर टेस्ट सीरीज खेलने के लिए चले जाते हैं। इसके बाद युवराज इंडीज के खिलाफ भी
26:03
Speaker A
दो टेस्ट मैच खेलते हैं। जिनमें उनका प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा। इस दौरान भी युवराज बार-बार मैदान पर उल्टियां कर रहे थे। जिससे अंपायर भी चिंता में पड़ जाते थे। भारत आने के बाद जब दिल्ली में हुए एक
26:14
Speaker A
टेस्ट मैच के दौरान एक रैंडम एंटी डूपिंग टेस्ट हुआ तो पूरा मामला सामने आ जाता है। युवराज के ब्लड सैंपल में बीटा एचसीजी दिखा। एक हार्मोन जो स्वस्थ मर्दों में कभी नहीं पाया जाता। इसके बाद बेंगलुरु में हुए एक आखिरी सिटी स्कैन ने सच उजागर
26:29
Speaker A
कर दिया। युवराज के सीने पर हुआ ट्यूमर उनके बाएं फेफड़े को निचोड़ रहा था और एक खून की नली पर इतना दबाव डाल रहा था कि उनका दिल फट सकता था। डॉक्टर ने युवराज से कहा, तुम यह क्या कर रहे हो? तुम्हें
26:41
Speaker A
एडमिट करने की जरूरत है और वह भी अभी तुरंत। युवराज को सेमिनोमा था जो एक प्रकार का कैंसर होता है। युवराज सिंह को पहले स्टेज का कैंसर है। बीमारी का नाम है सेिनोमा ग्रेड वन। अब युवराज के पास भागने की कोई जगह नहीं
26:57
Speaker A
थी। युवराज को पहले लंदन और फिर अमेरिका के इंडियाना पुलिस ले जाया जाता है। जहां पर उनका इलाज डॉक्टर लॉरेंस आइनहोन ने किया। वही डॉक्टर जिन्होंने अमेरिकी साइकिलिस्ट लॉन्स आर्मस्ट्रांग [संगीत] का इलाज किया था। 25 जनवरी 2012 को युवराज की
27:12
Speaker A
कीमोथेरेपी शुरू होती है। अब युवराज का खाना खाने का मन नहीं करता था। उनके बाल झड़ने लग जाते हैं। एक सुबह जब युवराज बिस्तर से उठे तो उनका बिस्तर बालों से भरा हुआ था। फ्रस्ट्रेट होकर उन्होंने बाथरूम जाकर खुद ही अपने सारे बाल काट
27:27
Speaker A
लिए। युवराज की हड्डियों में इतना दर्द था कि हिलना भी मुश्किल था। उन्हें लगा जैसे कि वे एक मरे हुए शरीर के अंदर जी रहे हैं। युवराज के मुंह में अजीब छाले पड़ जाते हैं। उन्हें उनके पैर ऐसे लगते थे
27:38
Speaker A
जैसे उनमें कुछ नहीं है। बस स्किन है। कई दिन तो युवराज टैक्सी तक भी चलकर नहीं जा पाते थे अपने घर से। उनका मन कर रहा था कि वे रेंट चलें। यह वो वक्त था जब युवराज को सुसाइड के विचार भी आए। कुछ ही दिन पहले
27:50
Speaker A
पूरा देश युवराज युवराज कर रहा था। युवराज अपने करियर के पीक पर चल रहे थे और कुछ ही महीने बाद अब वे जिंदगी और मौत से लड़ रहे थे अकेले। वर्ल्ड कप को याद करते हुए युवराज अपनी बायोग्राफी में लिखते हैं कि
28:03
Speaker A
जब मैं कैंसर के लिए कीमो पर था, मैं इंडियाना पुलिस में अपने घर के बाहर नहर देखता था और अचानक कुछ मुझे उस रात की याद दिलाता था। मैं उस वक्त को याद करता और खुद से पूछता। क्या मैं बेवकूफ था जो
28:16
Speaker A
डॉक्टर के पास नहीं गया? उल्टियों, गर्दन के दर्द, खून वाली खांसी और नींद ना आने वाली रातों को नजरअंदाज करके क्या मैं किनारे पर नहीं जी रहा था? क्या जिंदगी ज्यादा जरूरी थी या वर्ल्ड कप? मेरा जवाब खुद को था कि अगर जिंदगी मुझे फिर से उसी
28:30
Speaker A
स्टेज पर ले जाए तो मैं फिर वही डिसीजन लूंगा। 18 मार्च 2012 को तीन कीमो साइकिल के बाद युवराज का इलाज खत्म हुआ। डॉक्टर आइन होन ने युवराज से कहा, तुम यहां से एक ऐसे आदमी की तरह बाहर जा सकते हो जिसे कभी
28:44
Speaker A
कैंसर हुआ ही नहीं था। 9 अप्रैल 2012 के दिन युवराज भारत लौट आते हैं। वे काफी कमजोर थे और छ हफ्ते के रेस्ट के बाद उनका वजन बढ़कर 103 किलो हो गया। हालांकि अभी युवराज काफी कमजोर थे। युवराज ने बेंगलुरु
28:57
Speaker A
में राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी में अपनी ट्रेनिंग शुरू कर दी और 11 सितंबर के दिन चेन्नई में न्यूजीलैंड के खिलाफ हुए टी20 मैच से युवराज ने दोबारा से इंटरनेशनल क्रिकेट में वापसी की। मैदान पर कदम रखते ही युवराज की आंखों से आंसू निकलने लगे।
29:11
Speaker A
स्टेडियम तालियों से गूंज रहा था। जैसे ही युवराज ने एक लगाया, भीड़ ने भारी शोर मचाना शुरू कर दिया। इस मैच में युवराज ने 34 रन बनाए। हालांकि कैंसर के बाद आए युवराज की फॉर्म में उतार-चढ़ाव आते रहे। 2013 में वनडे मैचों में युवराज
29:25
Speaker A
का बैटिंग एवरेज गिरता चला जा रहा था। जिसके बाद उन्हें वनडे टीम से बाहर निकाल दिया जाता है। युवराज की परफॉर्मेंस टी20 में अभी भी ठीक-ठाक चल रही थी। इसलिए उन्हें 2014 के T20 वर्ल्ड कप के लिए चुन
29:37
Speaker A
लिया जाता है। लेकिन यहां युवराज के क्रिकेट करियर का एक बड़ा डिजास्टर होता है। इस वर्ल्ड कप में टीम इंडिया फाइनल तक पहुंची लेकिन फाइनल में केवल 130 रन ही बना पाई जिससे श्रीलंका ने आसानी से चज कर
29:48
Speaker A
लिया और भारत T20 वर्ल्ड कप हार जाता है। इस हार का जिम्मा आया युवराज सिंह पर जिन्होंने 21 गेंदों में केवल 11 रन बनाए थे। जब युवराज एयरपोर्ट पर उतरे तो मीडिया उन पर टूट पड़ा और चिल्लाने लगा। युवराज
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Speaker A
के घर पर भी पत्थर फेंके जाते हैं। बाद में युवराज ने कई वनडे मैच खेले लेकिन शायद यह अब उनकी विदाई के दिन थे। 2019 वर्ल्ड कप की टीम में युवराज को नहीं लिया गया। जिसके बाद 10 जून 2019 को उन्होंने
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इंटरनेशनल क्रिकेट से सन्यास का ऐलान कर दिया। युवराज के पिता युवराज सिंह कई बार महेंद्र सिंह धोनी पर उनके बेटे का करियर बर्बाद करने का आरोप लगा चुके हैं। एक इंटरव्यू में युवराज सिंह ने कहा कि मैं एमएस धोनी को कभी माफ नहीं करूंगा। उसने
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मेरे बेटे के साथ जो किया वह कभी माफ नहीं किया जा सकता। उस आदमी ने मेरे बेटे की जिंदगी बर्बाद कर दी जो चारप साल और खेल सकता था। इंस्पाइट के सिलेक्टर भी चाहते हैं युवराज को टीम में। BCCI भी चाहती है। लेकिन एक
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आदमी जो महेंद्र सिंह धोनी जिसका नाम है वो किसी को भी निकाल के बाहर फेंक देगा। एक दूसरे इंटरव्यू में विराट कोहली को भी ब्लेम करते हुए युवराज सिंह ने कहा कि धोनी से लेकर बाद में सब ने मेरे बेटे को
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धोखा दिया। वे सभी युवराज से डरते थे क्योंकि वह महान खिलाड़ी था और उन्हें डर था कि वह उनकी सीट ले लेगा। हालांकि युवराज ने खुद कभी धोनी को उनका करियर खत्म करने का दोष नहीं दिया बल्कि एक
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इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि धोनी ने ही 2019 वर्ल्ड कप को लेकर उन्हें क्लेरिटी दी थी और बताया था कि सिलेक्टर्स उनकी तरफ नहीं देख रहे हैं। युवराज के मुताबिक जितना उनसे हो सकता था उन्होंने किया था। लेकिन युवराज का यह भी कहना है कि उन्हें
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टीम मैनेजमेंट की तरफ से सपोर्ट नहीं मिला और अगर उन्हें सपोर्ट मिला होता तो वह एक और वर्ल्ड कप खेल पाते। युवराज को हमेशा इस बात का दुख रहा कि वह 2011 के बाद 50 ओवर का एक भी वर्ल्ड कप नहीं खेल पाए।
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युवराज के क्रिकेट करियर को देखें तो कहीं ना कहीं यह जितनी युवराज सिंह की कहानी है उतनी ही कहानी उनके पिता युवराज सिंह की है। खुद का क्रिकेट छोड़ने से पहले युवराज सिंह ने एक पब्लिक स्टेटमेंट दिया था कि
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मैं अपने बेटे को सर गारफील्ड सोबर्स और विवियन रिचर्ड्स के लेवल का क्रिकेटर बनाऊंगा। तब लोगों ने उनके ऊपर हंसा। उनका एक फील्ड क्रिकेटर की तरह मजाक उड़ाया गया। युवराज सिंह ने अखबार की उन सभी कटिंग्स को अपने पास रखा जो उनका मजाक
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उड़ा रहे थे। फिर उन्होंने एक ऐसा महान क्रिकेटर पैदा किया जिसने 2011 का वर्ल्ड कप एक खिलाड़ी नहीं बल्कि एक वॉरियर की तरह लड़ा। जैसा कि खुद युवराज सिंह ने कहा कि इस बहाने वे अपने पिता को वो सम्मान
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दिलाना चाहते थे जिसके वो हकदार थे। आज युवराज हर उस इंसान के लिए एक प्रेरणा है जो कैंसर से लड़ रहा है। कैंसर से ठीक होने के बाद युवराज ने यूवी कैन फाउंडेशन के जरिए कैंसर मरीजों की मदद करना शुरू कर
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दिया। क्यों ना हम भी कुछ ऐसा करें जिससे किसी की जान बच जाए। सोचिए अगर हमारे दो-ती घंटे निकालने से किसी की जान बचती है तो कितनी अच्छी बात होगी। आज ही डीकेएमएस की वेबसाइट पर खुद को रजिस्टर
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Speaker A
कराएं ताकि स्टैं सेल डोनर्स का एक डेटाबेस [संगीत] बन सके और किसी बच्चे बूढ़े आदमी औरत को केवल इसलिए जान ना गवानी पड़े कि उसे वक्त पर स्टेम सील डोनर नहीं मिला था। तो आज ही डिस्क्रिप्शन एंड पिंड कमेंट में मौजूद डीकेमएस की वेबसाइट
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Speaker A
पर जाकर खुद को रजिस्टर करें। इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।
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