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How Police Caught Asaram? | Ep-02| SMS Documentaries

आशाराम की गिरफ्तारी की पूरी कहानी, पुलिस की रणनीति और केस की जांच का विस्तृत विवरण।

Key Takeaways

  • पुलिस ने आशाराम की गिरफ्तारी के लिए गुप्त रणनीति अपनाई।
  • मीडिया और पुलिस की संयुक्त भूमिका ने गिरफ्तारी को संभव बनाया।
  • आशाराम पर गंभीर यौन उत्पीड़न के आरोप साबित हुए।
  • कानूनी प्रक्रिया में लंबी सुनवाई के बाद न्याय हुआ।
  • आशाराम समर्थकों की प्रतिक्रिया और पुलिस की तैयारी में संतुलन जरूरी था।

What the video covers

  • आशाराम को गिरफ्तार करने से पहले जोधपुर पुलिस ने उनके आश्रम में छुपकर निगरानी की।
  • नई भाजपा सरकार के आने पर जांच अधिकारी ट्रांसफर कर दिए गए।
  • डीसीपी अजय लांबा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए आशाराम को फंसाने की रणनीति अपनाई।
  • भोपाल एयरपोर्ट पर आशाराम की लोकेशन मीडिया में लीक कर दी गई जिससे वे इंदौर लौटे।
  • जोधपुर पुलिस ने इंदौर में आशाराम के आश्रम के बाहर और अंदर छुपकर गिरफ्तारी की तैयारी की।
  • आशाराम के समर्थक आश्रम के बाहर जमा हो गए लेकिन पुलिस ने चतुराई से गिरफ्तारी की।
  • आशाराम ने आरोपों से इनकार किया और मीडिया को इंटरव्यू दिए।
  • गिरफ्तारी के बाद आशाराम को जोधपुर पुलिस ने कोर्ट में पेश किया और केस की सुनवाई शुरू हुई।
  • पांच साल तक चली सुनवाई के बाद आशाराम को दोषी ठहराया गया।
  • मामले में कई गंभीर आरोप जैसे नाबालिग से बलात्कार और हत्या की धमकियां सामने आईं।

Answers

Questions about this video

आशाराम को गिरफ्तार करने में जोधपुर पुलिस ने कौन सी रणनीति अपनाई?

जोधपुर पुलिस ने आशाराम के इंदौर आश्रम में सादा कपड़ों में रहकर छुपकर निगरानी की और मीडिया में उनकी लोकेशन लीक कर उन्हें फंसाने की रणनीति अपनाई।

आशाराम पर कौन-कौन से मुख्य आरोप थे?

आशाराम पर नाबालिक से बलात्कार, यौन उत्पीड़न और हत्या की धमकियों जैसे गंभीर आरोप लगे थे।

आशाराम की गिरफ्तारी के बाद कोर्ट की प्रक्रिया कैसी रही?

आशाराम की गिरफ्तारी के बाद लगभग पांच साल तक कोर्ट में सुनवाई चली, जिसमें कई गवाहों ने बयान दिए और अंततः आशाराम को दोषी ठहराया गया।

Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:00
Speaker A
आशाराम को अरेस्ट करने से पहले ही जोधपुर पुलिस आशाराम के आश्रम में सादा कपड़ों में रह रही थी। नई भाजपा सरकार आते ही आशाराम केस की जांच कर रहे पुलिस अधिकारी ट्रांसफर कर दिए जाते हैं। आशाराम के भक्तों ने कहा कि आप कल्पना भी नहीं कर सकते, उससे भी ज्यादा पैसा बापू आपको देंगे। बस आप केस के इंपोर्टेंट विटनेस अमृत प्रजापति की सूरत में गोली मारकर हत्या कर दी जाती है। जेल में बंद आशाराम के छुए हुए पानी को पानी के टैंकर में डाल दिया जाता।
00:14
Speaker A
इस टैंकर से आसाराम के भक्त पानी पीते। मेडिकल रिपोर्ट से ये प्रूव हो गया कि आसाराम... आसाराम यौन उत्पीड़न मामले में आसाराम के गुरुकुल में पढ़ने वाली आसाराम जो कि जेल के अंदर है। आसाराम बापू को लेकर जा रही है। साराम को संबंध देख ही दिया।
00:27
Speaker A
आसाराम पर रोज नए-नए आरोप सामने आ रहे हैं। आसाराम पर नाबालिक से बलात्कार का आरोप। जोधपुर पुलिस के नोटिस के बाद भी 29 अगस्त के दिन आशाराम अपने ऊपर लगे यौन शोषण के केस की जांच में सहयोग देने के लिए जोधपुर नहीं पहुंचते।
00:40
Speaker A
सवाल उठने लगे कि आशाराम कहां है। आशाराम गायब हो चुके थे। मीडिया में सवाल उठने लगे कि जोधपुर पुलिस अगला एक्शन क्या लेगी। डीसीपी जोधपुर अजय लांबा ने अगले दिन प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाने का ऐलान कर दिया। नेशनल मीडिया में ब्रेकिंग न्यूज़ आने लगती हैं कि कुछ बड़ा होने वाला है।
00:55
Speaker A
अगले दिन शाम 5:00 बजे ही पूरा प्रेस कॉन्फ्रेंस मीडिया के लोगों से भर जाता है। मीडिया के अनुमानों पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए डीसीपी अजय लांबा ने कहा, हम सब उस स्टेज पर पहुंच चुके हैं जहां हम बाबा को अरेस्ट करने के लिए तैयार हैं। मैंने यह प्रेस कॉन्फ्रेंस आप सबको सूचित करने के लिए ही बुलाई है। हम बाबा आशाराम को अरेस्ट करने जा रहे हैं क्योंकि बाबा ने जांच में सहयोग का वायदा किया था, लेकिन वे जांच में शामिल नहीं हुए।
01:09
Speaker A
लेकिन मीडिया पूछने लगती है कि आशाराम अभी कहां है। इस पर डीसीपी लांबा ने चतुराई से कहा कि क्षमा करें, यह सूचनाएं अभी डिस्क्लोज नहीं की जा सकती। हमें पता है कि आशाराम कहां है और हमारी टीम जल्द ही उन्हें अरेस्ट करने के लिए पहुंचने वाली है।
01:21
Speaker A
यहां इंटरेस्टिंग बात यह है कि खुद डीसीपी अजय लांबा को क्या किसी को भी नहीं पता था कि इस वक्त आशाराम कहां है। लेकिन अजय लांबा अपनी किताब में इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को एक स्ट्रेटेजी की तरह बताते हैं। अजय लांबा कहते हैं कि उन्होंने यह प्रेस कॉन्फ्रेंस इसलिए जानबूझकर बुलाई ताकि आसाराम के पक्ष को लगे कि पुलिस को उनका पता लग चुका है।
01:32
Speaker A
इसलिए वह दूसरी जगह छुपने की कोशिश करेंगे या कोई गलती करेंगे। अजय लांबा की इस बात पर विश्वास करें तो एक तरह से यह स्ट्रेटेजी काम आती है। इधर प्रेस कॉन्फ्रेंस खत्म होती है कि उधर शाम के 6:00 बजकर 30 मिनट पर ही जोधपुर डीसीपी अजय लांबा को भोपाल एयरपोर्ट से कॉल आता है।
01:44
Speaker A
यह कॉल सीआईएसएफ के एडिशनल एसपी का था जो एयरपोर्ट की सुरक्षा में लगे हुए थे। सीआईएसएफ के एडिशनल एसपी अजय लांबा के भी मित्र रहे थे। एडिशनल एसपी ने कॉल पर कहा, आप कैसे हैं? मैंने आपकी प्रेस कॉन्फ्रेंस देखी थी। आप कह रहे हैं कि आशाराम को अरेस्ट करने जा रहे हो। अगर ऐसा है तो यह बाबा एयरपोर्ट पर क्या कर रहा है?
01:56
Speaker A
अंततः अजय लांबा की प्रेस कॉन्फ्रेंस काम कर गई। डीसीपी अजय लांबा ने कहा कि कैसे भी करके कुछ देर तक बाबा को बातों में उलझा के रखो ताकि हमारी टीम इंदौर से भोपाल आ सके। इंदौर से भोपाल की दूरी करीब 190 किमी है, यानी करीब 3 घंटे का रास्ता। लेकिन कानूनी तौर पर सीआईएसएफ के जवान आशाराम को रोक नहीं सकते थे क्योंकि उनके पास ये अधिकार नहीं था। ना उनके पास कोई आदेश था। भोपाल पुलिस भी आशाराम को अरेस्ट नहीं कर सकती थी क्योंकि मामला जोधपुर पुलिस के अंडर आता था। भोपाल पुलिस के अंदर नहीं आता था।
02:11
Speaker A
चूंकि जोधपुर पुलिस की टीम को इंदौर से भोपाल पहुंचने में तीन घंटे लग जाने थे, इसलिए जोधपुर पुलिस ने आसाराम की खबर मीडिया में लीक कर दी कि वह भोपाल में है। यह खबर मिलते ही पूरा मीडिया भोपाल एयरपोर्ट पर पहुंच जाता है। मीडिया से नजरें बचाने के लिए आसाराम बाबा भी एक कोने से दूसरे कोने में भागने लगते हैं।
02:26
Speaker A
आसाराम को जब यह पता लग गया कि अब मीडिया भी आ गई है तो उन्हें यहां से अरेस्ट किया जा सकता है। तो आशाराम अपने इंदौर वाले आश्रम के लिए वापस लौटने लगते हैं। उन्हें लगा कि पुलिस इंदौर आश्रम के अंदर घुसने की हिम्मत नहीं करेगी। सर्विलांस का जो काम अब जोधपुर पुलिस को करना चाहिए था, वह काम अब मीडिया कर रहा था। आगे-आगे आशाराम और पीछे-पीछे मीडिया।
02:39
Speaker A
अब आशाराम अपने इंदौर आश्रम पहुंच के थे। इंदौर आश्रम में पहले से ही जोधपुर पुलिस के लोग सादा कपड़ों में आशाराम के भक्त बनकर कुछ दिन से रह रहे थे। इसके अलावा एडिशनल डीसीपी सतीश चंद्र जहांगीर के नेतृत्व में जोधपुर पुलिस की एक स्पेशल टीम केवल आशाराम को अरेस्ट करने के लिए ही भेजी गई थी।
02:51
Speaker A
इसलिए अगले दिन यानी 30 अगस्त के दिन एडिशनल डीसीपी सतीश चंद्र जहांगीर की टीम आशाराम के इंदौर आश्रम के गेट पर पहुंच जाती है। आशाराम के साथ ही आशाराम का बेटा यानी नारायण साईं और आशाराम की बेटियां भी इंदौर आश्रम में मौजूद थे, जहां आशाराम चिंता मुक्त होकर अपने भक्तों के सामने प्रवचन कर रहे थे। आशाराम ने भगवान कृष्ण के जैसे ड्रेस पहनी हुई थी।
03:04
Speaker A
इधर जोधपुर पुलिस आशाराम पर लगे आरोपों की जांच में जुड़ जाती है। दूसरी तरफ आशाराम द्वारा मीडिया चैनलों को इंटरव्यूज दिए जाने लगते हैं। बाबू जी, ये खास करके जो आपके ऊपर जो आरोप लगा है, उसके बारे में क्या कहना है?
03:15
Speaker A
मेरे ऊपर जो आरोप लगे हैं, बहुत छोटे हैं। इधर जोधपुर पुलिस द्वारा इंदौर पुलिस को पहले से ही सूचित कर दिया गया था कि उन्हें सुरक्षा व्यवस्था का इंतजाम करना पड़ेगा। लेकिन आशाराम की गिरफ्तारी का असली काम जोधपुर पुलिस को ही करना था।
03:27
Speaker A
आशाराम के आश्रम के बाहर मौजूद जोधपुर पुलिस ने आश्रम के अंदर संदेश भिजवाया कि जोधपुर पुलिस एफआईआर के ऊपर बात करना चाहती है। इसके बाद जोधपुर पुलिस को आश्रम के अंदर बुला लिया जाता है। जहां सबसे पहले एडिशनल डीसीपी यानी सतीश चंद्र जहांगीर ने सबसे पहले आसाराम से कहा, नमस्कार बापू।
03:39
Speaker A
इस पर आसाराम ने कहा, नमस्कार। नमस्कार बोलो। क्यों आए हो? इस पर एसीपी चंचल मिश्रा ने कहा, बाबा, आपके खिलाफ एक नाबालिक लड़की ने रेप की रिपोर्ट दर्ज करवाई है। हम उसी को इन्वेस्टिगेट कर रहे हैं।
03:51
Speaker A
इस पर आशाराम ने कहा, अरे तुम लोगों ने क्यों एक बाबा को बदनाम करने का ठेका ले लिया है? एक नाबालिक और बेवकूफ लड़की के कहने पर मैं ये सब कुछ बहुत दिनों से सुन रहा हूं और टीवी पर देख रहा हूं। तुमको पता है मैं कौन हूं? तुमको पता है इस देश में मेरे कितने भक्त हैं? तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझसे ऐसी बेवकूफी की बात करने की?
04:06
Speaker A
आशाराम से बातचीत के दौरान एसएचओ मुक्ता पारीक और उनके पति सब इंस्पेक्टर सत्यप्रकाश भी मौजूद थे। मुक्ता पारीक और सत्यप्रकाश दोनों सादा ड्रेस में आशाराम के भक्त के रूप में थे। अंततः जोधपुर टीम ने आशाराम से कहा कि अगर उन्होंने कुछ भी ऊंच नीच की तो उन्हें अभी के अभी अरेस्ट कर लिया जाएगा। साथ ही उनके बेटे नारायण साईं और बेटियों को भी अरेस्ट कर लिया जाएगा।
04:22
Speaker A
आशाराम को आश्वासन दिया गया कि उन्हें चुपचाप एक गेस्ट की तरह ले जाया जाएगा और किसी को भी पता नहीं चलेगा। अब आशाराम को कोई चारा नहीं दिखता। उसने अपने वकीलों से बात करके सुबह जाने के लिए कहा। आशाराम ने कहा, ठीक है, ठीक है, मैं चलूंगा तुम्हारे साथ जोधपुर, मगर अभी रात के 12:00 बज चुके हैं। मैं तुम्हारे साथ कल सवेरे चल लूंगा।
04:37
Speaker A
लेकिन संभवतः यह आशाराम का प्लान था। आशाराम बार-बार अपने बयान बदलने लगते हैं। इस वक्त तक आसाराम के समर्थकों ने भी आसाराम की जगह को घेर लिया। इधर जोधपुर से डीसीपी अजय लांबा ने इंदौर पुलिस से कहा कि वह अब उनकी टीम के एग्जिट का बंदोबस्त करवा दे। यानी अब आशाराम को अरेस्ट करने का वक्त आ चुका था।
04:48
Speaker A
उधर आश्रम के सामने वाले गेट पर इंदौर पुलिस भारी संख्या में पहुंच गई। राइट कंट्रोल इक्विपमेंट, वाटर कैनंस, टियर गैस ट्रक्स सबका इंतजाम कर लिया गया। इसलिए आशाराम के समर्थक भी बड़ी संख्या में आश्रम के मुख्य द्वार पर ही इकट्ठे होने लगते हैं।
05:00
Speaker A
लेकिन इंदौर पुलिस अकल खेल गई। सारा फोर्स मेन गेट पर लगा दिया, यानी आगे के गेट पर लगा दिया। लेकिन पिछले दरवाजे पर एक बुलडोजर और कुछ एक पुलिस वाले भेज दिए। यानी इंदौर पुलिस ने पिछले दरवाजे से एग्जिट प्लान बनाया। जानबूझकर पिछले दरवाजे पर पुलिस की संख्या बेहद कम रखी या मामूली रखी ताकि आशाराम के भक्तों को लगे कि आशाराम को मुख्य गेट से बाहर ले जाया जाएगा।
05:16
Speaker A
इंदौर पुलिस से इशारा मिलते ही आश्रम के अंदर मौजूद जोधपुर पुलिस ने आशाराम को अपनी कस्टडी में ले लिया। तुरंत ही ये खबर पूरे आश्रम में फैल जाती है। आशाराम के समर्थक अब उस जगह पर पहुंच गए जहां पुलिस आशाराम को लेकर खड़ी थी। लेकिन पुलिस कमांडोज ने आशाराम को पकड़ा और तुरंत बाहर एक गाड़ी में डाल लिया। अन्य पुलिस वाले भी जल्दी से जल्दी गाड़ी में चढ़ जाते हैं।
05:32
Speaker A
अब तो पूरे आश्रम में हल्ला हो गया, बाबा को एयरपोर्ट ले जा रहे हैं। गाड़ियां निकालो, पीछा करो इनका और साथियों को इफॉर्म करो। आगे-आगे पुलिस की गाड़ियां और पीछे-पीछे आसाराम के समर्थकों की गाड़ियां। फाइनली जोधपुर पुलिस आसाराम को लेकर इंदौर एयरपोर्ट पहुंच जाती है, जहां से सीआईएसएफ की टीम ने उन्हें रेस्क्यू कर लिया।
05:44
Speaker A
सीआईएसएफ और एयरपोर्ट की सुरक्षा ऐसी थी जहां आशाराम के समर्थक कोई गड़बड़ नहीं कर सकते थे। लेकिन समस्या यह थी कि इंदौर से सीधे जोधपुर की कोई फ्लाइट नहीं थी और जोधपुर पुलिस जानबूझकर आशाराम, जो कि एक रेप का आरोपी था, उसे कोई प्रिविलेज नहीं देना चाहती।
05:56
Speaker A
के दौरान एसएचओ मुक्ता पारीक और उनके पति सब इंस्पेक्टर सत्यप्रकाश भी मौजूद थे मुक्ता पारीक और सत्यप्रकाश दोनों सादा ड्रेस में आशाराम के भक्त के रूप में थे अंततः जोधपुर टीम ने आशाराम से कहा कि अगर उन्होंने कुछ भी ऊंच नीच की तो उन्हें अभी
06:11
Speaker A
के अभी अरेस्ट कर लिया जाएगा साथ ही उनके बेटे नारायण साईं और बेटियों को भी अरेस्ट कर लिया जाएगा आशाराम को आश्वासन दिया गया कि उन्हें चुपचाप एक गेस्ट की तरह ले जाया जाएगा और किसी को भी पता नहीं चलेगा अब
06:22
Speaker A
आशाराम को कोई चारा नहीं दिखता उसने अपने वकीलों से बात करके सुबह जाने के लिए कहा आसाराम ने कहा ठीक है ठीक है मैं चलूंगा तुम्हारे साथ जोधपुर मगर अभी रात के 12:00 बज चुके हैं मैं तुम्हारे साथ कल सवेरे चल
06:35
Speaker A
लूंगा लेकिन संभवतः यह आशाराम का प्लान था आशाराम बार-बार अपने बयान बदलने लगते हैं इस वक्त तक आसाराम के समर्थकों ने भी आसाराम की जगह को घेर लिया इधर जोधपुर से डीसीपी अजय लांबा ने इंदौर पुलिस से कहा
06:49
Speaker A
कि वह अब उनकी टीम के एग्जिट का बंदोबस्त करवा दे यानी अब आशाराम को अरेस्ट करने का वक्त आ चुका था उधर आश्रम के सामने वाले गेट पर इंदौर पुलिस भारी संख्या में पहुंच गई राइट कंट्रोल इक्विपमेंट वाटर कैनंस
07:02
Speaker A
टियर गैस ट्रक्स सबका इंतजाम कर लिया गया इसलिए आशाराम के समर्थक भी बड़ी संख्या में आश्रम के मुख्य द्वार पर ही इकट्ठे होने लगते हैं लेकिन इंदौर पुलिस अकल खेल गई सारा फोर्स मेन गेट पर लगा दिया यानी
07:13
Speaker A
आगे के गेट पर लगा दिया लेकिन पिछले दरवाजे पर एक बुलडोजर और कुछ एक पुलिस वाले भेज दिए यानी इंदौर पुलिस ने पिछले दरवाजे से एग्जिट प्लान बनाया जानबूझकर पिछले दरवाजे पर पुलिस की संख्या बेहद कम रखी या मामूली रखी ताकि आशाराम के भक्तों
07:28
Speaker A
को लगे कि आशाराम को मुख्य गेट से बाहर ले जाया जाएगा इंदौर पुलिस से इशारा मिलते ही आश्रम के अंदर मौजूद जोधपुर पुलिस ने आशाराम को अपनी कस्टडी में ले लिया तुरंत ही ये खबर पूरे आश्रम में फैल जाती है
07:41
Speaker A
आशाराम के समर्थक अब उस जगह पर पहुंच गए जहां पुलिस आशाराम को लेकर खड़ी थी लेकिन पुलिस कमांडोज ने आशाराम को पकड़ा और तुरंत बाहर एक गाड़ी में डाल लिया अन्य पुलिस वाले भी जल्दी से जल्दी गाड़ी में
07:53
Speaker A
चढ़ जाते हैं अब तो पूरे आश्रम में हल्ला हो गया बाबा को एयरपोर्ट ले जा रहे हैं गाड़ियां निकालो पीछा करो इनका और साथियों को इफॉर्म करू आगे-आगे पुलिस की गाड़ियां और पीछे-पीछे आसाराम के समर्थकों की गाड़ियां फाइनली जोधपुर पुलिस आसाराम को
08:08
Speaker A
लेकर इंदौर एयरपोर्ट पहुंच जाती है जहां से सीआईएसएफ की टीम ने उन्हें रेस्क्यू कर लिया सीआईएसएफ और एयरपोर्ट की सुरक्षा ऐसी थी जहां आशाराम के समर्थक कोई गड़बड़ नहीं कर सकते थे लेकिन समस्या यह थी कि इंदौर से सीधे जोधपुर की कोई फ्लाइट नहीं थी और
08:23
Speaker A
जोधपुर पुलिस जानबूझकर आशाराम जो कि एक रेप का आरोपी था उसे कोई प्रिविलेज नहीं देना चाहती थी इसलिए कोई प्रा प्रवेट प्लेन नहीं किया गया इसलिए इंदौर से दिल्ली और दिल्ली से जोधपुर का प्लान बनाया गया सुबह 8:1 पर जोधपुर टीम इंदौर
08:38
Speaker A
एयरपोर्ट से दिल्ली एयरपोर्ट के लिए निकल जाती है लेकिन आशाराम के समर्थकों को पहले ही पता लग चुका था कि जरूर आशाराम को दिल्ली से जोधपुर ले जाया जाएगा इसलिए दिल्ली से जोधपुर जाने वाली सुबह की फ्लाइट्स में आशाराम के समर्थकों ने पहले
08:51
Speaker A
ही अपनी बुकिंग्स करवा ली और जैसे ही दिल्ली वाले हवाई जहाज ने जोधपुर के लिए उड़ान भरी वैसे ही आशाराम के समर्थकों ने आशाराम के पक्ष में नारे लगाने शुरू कर दिए हालांकि जोधपुर पुलिस नेने आशाराम के समर्थकों को काबू में ले लिया और उतरते ही
09:05
Speaker A
अरेस्ट की धमकी दे डाली जिसे आशाराम के समर्थक काबू में आ सके आशाराम को इंदौर से जोधपुर ले जाया गया लेकिन एक बड़ी समस्या थी कि आशाराम के समर्थक तो जोधपुर में भी थे फिर कैसे आशाराम के समर्थकों के बीच
09:17
Speaker A
आशाराम को एयरपोर्ट से महिला थाने तक लाया जाए जहां उनके खिलाफ केस दर्ज था लेकिन यहां जोधपुर पुलिस ने एक अकल खेली एक तो यह कि एयरपोर्ट के बाद आशाराम को मुख्य रास्ते से नहीं लाए बल्कि कि लास्ट समय
09:30
Speaker A
में रूट बदलकर दूसरे रास्ते से जोधपुर के अंदर लाया गया दूसरा केवल तीन गाड़ियां रखी गई एक आगे एक पीछे और बीच में आशाराम वाली गाड़ी तीसरा आशाराम को महिला थाने ले जाने के बजाय राजस्थान आर्म्ड कांस्टेबल यानी आरएसी में ले जाया गया शाम करीब 5:00
09:47
Speaker A
बजे से आरएसी के गेस्ट हाउस में आशाराम से दोबारा पूछताछ होती है आशाराम को सोफे से उतारकर जमीन पर बिठाया जाता है जिसने आशाराम का व सारा दं तोड़ दिया जो उन्हें अपने इंदौर वाले आश्रम में हो रहा था
10:00
Speaker A
डीसीपी अजय लांबा अपनी किताब में लिखते हैं कि मैंने आशाराम से पूछा बाबा तू यह बता कि यह सब क्या कर डाला तूने जल्दी बता इस पर आशाराम ने कहा गलती कर दी गलती कर दी मैंने जोधपुर पुलिस ने आशाराम से
10:13
Speaker A
बातचीत की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की आशाराम द्वारा अपना अपराध कबूल के बाद आशाराम को कुटिया ले जाया जाता है जहां आशाराम द्वारा क्राइम किया गया था इस दौरान पुलिस ने आशाराम के स्टेटमेंट्स और कुटिया की पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग की लेकिन सबसे
10:27
Speaker A
जरूरी काम था आशाराम को मेडिकल करवाने के लिए भेजना क्योंकि पुलिस को पहले से ही शंका थी कि आशाराम कोर्ट में अपनी उम्र का हवाला देकर कहेंगे कि वह नामर्द हैं और सेक्सुअली एक्टिविटी नहीं कर सकते इसलिए पुलिस ने पहले ही इंपोर्टेंट टेस्ट करवा
10:41
Speaker A
लिया 2 सितंबर 2013 के दिन हुए पोटेंसी टेस्ट में पाया गया कि आसाराम सेक्सुअली एक्टिविटी करने में सक्षम है इसके बाद जोधपुर पुलिस ने आशाराम को जुडिशियस कस्टडी में भेज दिया भले ही आशाराम ने जोधपुर पुलिस के आगे औपचारिक तौर पर अपना
10:55
Speaker A
गुनाह कबूल कर लिया था लेकिन इस मामले को अभी कोर्ट के आगे प्रूव होना था जो जितना आसान लग रहा था उतना नहीं रहा आशाराम के जेल भेजे जाने के बाद अब जोधपुर पुलिस को चार सीट तैयार करनी थी जिसके आधार पर
11:09
Speaker A
कोर्ट में बहस होनी थी लेकिन इस दौरान पुलिस टीम को ही धमकियां मिलने लगती हैं आशाराम कोई नॉर्मल आदमी नहीं था उसके पास 25 हज करोड़ की संपत्ति थी और करोड़ों की संख्या में भक्त थे डीसीपी अजय लांबा से
11:23
Speaker A
लेकर जोधपुर पुलिस की टीम के सभी बड़े अधिकारियों को करोड़ों रुपए के ऑफर आए इन्वेस्टिगेटिव ऑफिसर एसी चंचल मिश्रा को भी आशाराम के समर्थकों की तरफ से धमकियां मिलने लगती हैं चंचल मिश्रा का पीछा किया जाने लगा हालांकि जोधपुर पुलिस ने पीछा
11:38
Speaker A
करने वाले आशाराम के भक्तों को वक्त पर ही अरेस्ट कर लिया आशाराम के बेटे नारायण साईं पर लगे यौन शूषण के दूसरे केसों की जांच करने वाली गुजरात पुलिस ने जांच के दौरान यह भी बताया कि आशाराम के भक्त चंचल
11:52
Speaker A
मिश्रा की हत्या करने की प्लानिंग भी कर रहे थे इसलिए चंचल मिश्रा को जोधपुर पुलिस ने एक्स्ट्रा सुरक्षा मुहैया कराई इसी तरह एसएचओ मुक्ता पारी को भी धमकियां दी गई उनका भी पीछा किया गया अजय लांबा भी अपनी
12:05
Speaker A
किताब में एक जगह लिखते हैं कि एक बार आशाराम के कुछ वक्त उनसे मिलने आए और बोले आप कल्पना भी नहीं कर सकते उससे भी ज्यादा पैसा बापू देंगे आपको अजय लांबा बताते हैं कि आशाराम के भक्तों ने उनका ही नहीं
12:16
Speaker A
बल्कि उनके परिवार का भी पीछा किया उन्हें इंटेलिजेंस ब्रांच ने अलग से सुरक्षा दी अंततः 6 नवंबर 2013 के दिन जोधपुर पुलिस ने जोधपुर की जिला कोर्ट में चार सीट जमा कर दी दो दिन के बाद ही राजस्थान हाईकोर्ट
12:29
Speaker A
ने आदेश दे दिया कि आशाराम मामले की हर रोज सुनवाई की जाए ताकि जल्दी से जल्दी फैसला आ सके अब आशाराम को हर रोज जेल से कोर्ट ले जाना पुलिस के लिए एक बड़ी मुसीबत थी आशाराम के हजारों भक्त आशाराम
12:41
Speaker A
के रूट के बीच में ही आ जाया करते आर्म्ड पुलिस की दो कंपनियां केवल इस रूट को साफ करने के लिए लगाई जाती आशाराम के भक्त रोड के दोनों साइड खड़े हो जाते मामला इतना संजीदा था कि डीसीपी अजय लांबा की पत्नी
12:54
Speaker A
ने अपनी बेटी को पढ़ने के लिए स्कूल भेजना बंद कर दिया एक बार तो यह भी हुआ कि आशाराम के भक्त तजय लांबा के गांव भी चले गए जहां उनके माता-पिता रहा करते थे लेकिन इस केस में सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट तब
13:06
Speaker A
आया जब दिसंबर 2013 में राजस्थान में सरकार बदल जाती है कांग्रेस के बाद राजस्थान में भाजपा की सरकार आ चुकी थी जिसके नेता सामान्यत आशाराम के सत्संग में जाया करते थे राजस्थान में भाजपा सरकार को आए एक महीना नहीं बीता था कि 11 जनवरी
13:21
Speaker A
2014 के दिन भाजपा सरकार ने डीसीपी अजय लांबा को जोधपुर से ट्रांसफर करके उदयपुर भेज दिया जहां उन्हें डीसीपी की जगह एसवी बना दिया गया आसाराम केस से जुड़े लगभग सभी अधिकारी इधर-उधर जिलों में ट्रांसफर कर दिए जाते हैं इससे आसाराम केस में बड़ा
13:37
Speaker A
नुकसान होता है लेकिन एक चीज अभी भी बची हुई थी वह यह कि अभी भी एसएचओ मुक्ता पारिक जोधपुर में ही थी उनका ट्रांसफर नहीं हुआ था इस बीच अन्य पीड़िता हों ने भी आशाराम की शिकायत दर्ज कराने के लिए
13:50
Speaker A
जोधपुर पुलिस से संपर्क किया लेकिन जब भी पुलिस आगे की कारवाई करने के लिए उनसे संपर्क करती तो वे आशाराम भक्तों के कारण शिकायत दर्ज नहीं कर आती पुलिस ने जांच में एक पैटर्न यह भी देखा कि आशाराम के
14:02
Speaker A
आश्रमों से जुड़ी हुई बहुत सी लड़कियां बिना सेशन या क्लास पूरा किए ही अपने घर वापस चली जाती हैं कई तो फाइनल ईयर में या पेपर के जस्ट पहले ही वह भी बिना किसी सही कारण के इससे जोधपुर पुलिस को सक हुआ
14:15
Speaker A
लेकिन जब पुलिस उनके परिवारों से बात करने की कोशिश करती तो वे आश्रम के अपने अनुभवों को भूलना चाहते थे और कोई भी बयान नहीं देना चाहते थे लेकिन यह सोचकर कि आगे इसमें भी और भी पीड़ित महिलाएं सामने
14:28
Speaker A
आएंगी और भी सबूत आएंगे इसलिए जोधपुर पुलिस ने ओपन चार सीट जमा की यानी आगे अगर जांच में कुछ सामने आया तो उसे भी चार सीट में ऐड कर दिया जाएगा लेकिन राजस्थान में नई सरकार यानी भाजपा सरकार के आने के बाद
14:41
Speaker A
देखा गया कि जांच से जुड़े कुछ अन्य अधिकारी इस ओपन चार सट का फायदा इस तरह लेने लगे कि वह आशाराम के फेवर में जाए अब ये धूड़ा जाने लगा कि कैसे भी यह साबित कर दिया जाए कि लड़की नाबालिक नहीं है अगर यह
14:54
Speaker A
प्रूव हो जाए तो पोक्सो एक्ट जो लगा है जिसमें जबरन ओरल सेक्स या प्राइवेट पार्ट में उंगलियों के इस्तेमाल को भी रेप माना जाता है वह एक्ट नहीं लगेगा इस तरह आशाराम की आधी मुसीबत वहीं खत्म हो जाएगी लेकिन
15:06
Speaker A
अजय लांबा और उनकी टीम के वे लोग जो जोधपुर से ट्रांसफर कर दिए गए थे वे अब भी इस नाबालिक लड़की की मदद के लिए इस केस पर नजर बनाए हुए थे अजय लांबा और इस केस के वक्त कमिश्नर ऑफ पुलिस रहे बीजू जॉर्ज
15:20
Speaker A
जोसेफ ने राजस्थान पुलिस के चीफ यानी डीजीपी से मुलाकात की और जांच के बदले हुए तरीके से अवगत कराया डीजीपी के हस्तक्षेप के बाद अब ओपन चार सीट को अब क्लोज्ड चार सीट में बदल दिया जाता है अब कोर्ट में हर
15:34
Speaker A
दिन आसाराम के मामले पर बहस होने लगती है पीड़िता माधुरी की तरफ से वकील पीसी सोलंकी और वकील प्रमोद वर्मा खड़े थे जो बिना फीस के ही इस केस में अपनी लीगल हेल्प दे रहे थे भले ही आसाराम के केस की
15:46
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हर दिन सुनवाई हो रही थी लेकिन आसाराम के पक्ष की तरफ से जानबूझकर हर कानूनी लूप होल का फायदा उठाया गया कभी कुछ तो कभी कुछ इस कारण हर दिन चलने वाली ये सुनवाई में 1 साल 2 साल ती साल 4 साल बीत जाते
16:00
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हैं इस बीच पीड़ित परिवार भी मानसिक रूप से थक जाता एक तो उनका विश्वास टूटा उनकी बेटी के साथ इतना बुरा अनुभव हुआ ऊपर से कोर्ट में लगने वाले सामान्य खर्चे ने भी उनको आर्थिक रूप से भारी नुकसान पहुंचाया
16:13
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कोर्ट केस में उलझने के कारण पीड़िता के पिता के ट्रांसपोर्ट का बिजनेस ठप पड़ जाता है लेकिन दो ऐसी अफसर थी जो इस मामले में एक स्तंभ की तरह खड़ी रही थी वह थी एक एसएचओ मुक्ता पारीख और दूसरी थी एसीपी
16:27
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चंचल मिश्रा अगर यह दो पीड़िता के पक्ष के साथ नहीं खड़ी होती तो शायद आशाराम भी जेल के भीतर नहीं होते या पीड़िता के लिए आशाराम से लड़ना थोड़ा और मुश्किल होता जहां पीड़िता की तरफ से वकील पीसी सोलंकी
16:40
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और वकील प्रमोद वर्मा खड़े थे तो दूसरी तरफ से आशाराम के लिए वकीलों की फौज खड़ी कर दी जाती है वे भी देश के सबसे टॉप टॉप वकील सबसे पहले कस्टडी के वक्त आशाराम की तरफ से वकील के के मनन को खड़ा किया गया
16:54
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और इसके अलावा देश के सबसे चर्चित वकील राम जेठ मलानी भी आशाराम की तरफ से जमानत याचिका के लिए कोर्ट में खड़े हुए इसके अलावा सोली सोराब जी राजू रामचंद्रन सलमान खुर्शीद और ओंकार सिंह लखावत को भी आशाराम
17:08
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ने अपनी तरफ से कोर्ट में खड़ा किया यहां ये बताना भी जरूरी है कि जोधपुर पुलिस द्वारा आशाराम की गिरफ्तारी के कुछ दिन बाद ही दो पीड़ित बहनों ने भी आशाराम और उनके बेटे नारायण साईं के खिलाफ गुजरात के
17:20
Speaker A
सूरत में यौन शोषण की शिकायतें दर्ज करवाई इस मामले में कोर्ट की सुनवाई के दौरान एक गवाह भाग चंदानी पर एक एसिड अटैक किया गया और इसके अलावा सूरत केस से संबंधित दो गवाहों राकेश पटेल और अरविंद वाजपेई पर भी
17:35
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जानलेवा हमले हुए सूरत पुलिस द्वारा इन हमलावरों को अरेस्ट कर लिया गया तो वे आशाराम के सपोर्टर ही निकले इस बीच 23 मई 2014 के दिन इंपोर्टेंट विटनेस अमृत प्रजापति की सूरत में गोली मारकर हत्या कर दी गई अमृत प्रजापति ने मीडिया में बाइट
17:50
Speaker A
दी थी कि आशाराम जोधपुर जैसे अन्य मामलों में भी शामिल हैं और वह खुद इसके गवाह हैं सालों से देख रहे हैं यही कारण है कि साल 2012 में उन्होंने आशाराम का आश्रम छोड़ दिया गवाह अमृत प्रजापति की हत्या ने इस
18:04
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केस से जुड़े पुलिस अधिकारियों से लेकर पीड़िता के परिवार और वकीलों सबको डरा दिया आशाराम समर्थकों द्वारा दो अन्य गवाहों को भी मारने की भी कोशिश की गई जब गवाह राहुल सचान कोट से निकल रहे थे इस दौरान भी उन पर हमला हुआ हालांकि इस हमले
18:20
Speaker A
में उनकी जान बच गई लेकिन नवंबर 2015 में राहुल सचान अचानक से लापता हो जाते हैं जिसके बाद से अब तक उनकी कोई खबर नहीं है कि वे कहां हैं एक दूसरे गवाह महेंद्र चावला को भी पानीपत में गोली मार दी गई
18:34
Speaker A
हालांकि इस हमले में उनकी जान बच गई और उन्होंने कोर्ट के आगे गवाही भी दी एक तीसरे गवाह कृपाल सिंह ठाकुर पर भी जुलाई 2015 में गोलियों से हमला हुआ हमले में कृपाल सिंह की जान चली गई हालांकि इस वक्त
18:47
Speaker A
तक कृपाल सिंह का बयान कोर्ट में दर्ज हो चुका था यानी तीन हत्याएं हुई लेकिन इन हत्याओं और हमलों ने पीड़िता के पक्ष में खड़े गवाहों को यह संदेश दे दिया कि या तो गवाही से पहले ही मार दिए जाएंगे या अगर
19:00
Speaker A
उन्होंने गवाही दे भी दी तो वे बाद में मार दिए जाएंगे ऐसी परिस्थितियां थी इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आसाराम को जेल भेजना और सजा दिलाना कितना कठिन काम रहा लेकिन डर का माहौल बनाने के बाद भी आसाराम
19:13
Speaker A
न्याय के डंडे के नीचे आने वाला था कोर्ट में मेडिकल रिपोर्ट में यह भी प्रूव हुआ कि हां लड़की के साथ सेक्सुअल एक्टिविटी हुई है इसके अलावा लड़की के स्कूल और 10थ की मार्कशीट से यह भी प्रूव हुआ कि हां
19:24
Speaker A
लड़की नाबालिक है इसलिए पॉक्सो एक्ट बनता है कॉल रिकॉर्डिंग से यह भी पता चला चला कि आशाराम होस्टल वार्डन शिल्पी आश्रम डायरेक्टर शरद चंद्रा और आशाराम के असिस्टेंट शिवा के बीच घटना के दिनों में फोन पर बातें हुई हैं उनके बीच पहले फोन
19:39
Speaker A
पर जो बातचीत होती थी वह कम होती थी लेकिन 6 और 15 अगस्त के बीच यानी पीड़िता के बीमार होने और पीड़िता को दिखाने के लिए आशाराम के पास लाने और यौन शूषण की घटना होने के बीच की अवधि में इन सभी लोगों के
19:52
Speaker A
बीच कॉल की संख्या में काफी अधिक वृद्धि हुई है इधर कोर्ट में हो रही सुनवाई के दौरान आशाराम के भक्त महत्त्वपूर्ण रों और पूर्णिमा के दिन जेल के सामने इकट्ठे हो जाते आसाराम के भक्त निराश होकर ना जाए
20:04
Speaker A
इसके लिए जेल प्रशासन ने एक तरीका निकाला तरीका ये कि आशाराम के द्वारा छुए हुए एक बोतल पानी को पानी वाले टैंकर में डाल दिया जाता इस टैंकर से आशाराम के भक्त पानी पीते और बापू का आशीर्वाद समझ लेते
20:17
Speaker A
इससे समझा जा सकता है कि जेल से कोर्ट जाने के बीच आशाराम के समर्थक उन्हें देखने के लिए क्या-क्या करते होंगे लेकिन अब फैसले का वक्त आ चुका था करीब 5 साल तक चली कोर्ट की सुनवाई के बाद जज ने ऐलान कर
20:30
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दिया कि 25 अप्रैल 2018 के दिन आशाराम केस का फैसला घोषित कर दिया जाएगा इस वक्त तक यानी 25 अगस्त 2017 के दिन राम रहीम मामले में भी फैसला आ चुका था जिसके बाद हुई हिंसा में 38 से अधिक लोगों की मौत हुई
20:49
Speaker A
थी रामपाल बाबा जिसे साल 2014 में अरेस्ट किया गया था उनके समर्थकों ने भी भारी हिंसा की थी इसलिए सबक लेते हुए जोधपुर के पुलिस कमिश्नर अशोक राठौर ने पहले से ही सुरक्षा इंतजाम शुरू कर दिए जजमेंट में अभी 15 दिन
21:10
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बचे हुए थे मगर जोधपुर पुलिस ने ऐसी व्यवस्था की कि परिंदा भी परना मार सके पीड़ितों के भी सुरक्षा बढ़ा दी गई राजस्थान हाई कोर्ट के आदेश के बाद तय हुआ कि आशाराम के ऊपर जो फैसला सुनाया जाएगा
21:20
Speaker A
वह कोर्ट में नहीं बल्कि जेल के भीतर ही सुनाया जाएगा राजस्थान हाई कोर्ट के इस फैसले ने किसी भी तरह की हिंसा की संभावना को खत्म कर दिया शहर के होटल मैनेजरों को निर्देश दे दिया गया कि आशाराम के
21:32
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समर्थकों को होटल ना दें सिटी बस यूनियन से लेकर टैक्सी यूनियन के साथ मीटिंग करके निर्देश दिए गए कि आशाराम के समर्थक दिखें तो जोधपुर पुलिस को सूचित करें जोधपुर पुलिस की यह तैयारी जजमेंट वाले दिन काम आई आशाराम का एक भी समर्थक ना कोर्ट के
21:47
Speaker A
बाहर दिखा ना जेल परसर के बाहर दिखा अंततः 25 अप्रैल 2018 का दिन आ चुका था यानी फैसले का दिन आ चुका था देश के पूरे मीडिया में एक दिन पहले से ही आशाराम की खबरें दिखाई जाने लगती हैं स्पेशल जज यानी
22:01
Speaker A
मधुसूदन शर्मा को जेल के भीतर लाया जाता है जेल के भीतर के कोर्ट रूम में से सभी लोगों को बाहर निकाल दिया गया 453 पेजेस के जजमेंट को सुनाने का वक्त अब आ चुका था आशाराम के भक्तों को अपने बाबा की
22:14
Speaker A
बेगुनाही की आस थी तो पीड़िता की तरफ से लड़ रहे वकीलों पुलिस वालों पीड़िता और उसके परिवार को उस न्याय का इंतजार था जिसके लिए वे हर दिन कोर्ट में लड़ रहे थे जज मधुसूदन शर्मा ने आरोपी सेवा उर्फ
22:27
Speaker A
सवाराम को रिहा कर दिया और कहा कहा कि उन्हें दोषी साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत पेश करने में पीड़िता पक्ष यानी प्रोसेक साइड असफल रही इसी तरह आशाराम के रसोइए प्रकाश को भी सबूतों के अभाव में रिहा कर दिया गया लेकिन छिंदवाड़ा आश्रम
22:41
Speaker A
हॉस्टल की वर्डन शिल्पी उर्फ संचिता गुप्ता और छिंदवाड़ा आश्रम के डायरेक्टर शरद चंद्रा दोनों आशाराम के साथ कंस्पिरेशन करने के दोषी पाए गए इसलिए जज ने शिल्पी और शरद दोनों को 20-20 साल की यानी जेल की सजा सुनाई अब बारी आशाराम
22:57
Speaker A
यानी मुख्य आरोपी की आशाराम पोक्सो एक्ट के तहत परिभाषित रेप के दोषी पाए गए अदालत ने आशाराम को मैक्सिमम पनिशमेंट दिया यानी आशाराम को ता उम्र यानी अंतिम सांस तक जेल में रहने की सजा सुनाई यानी अदालत ने
23:11
Speaker A
ठप्पा लगा दिया कि अब जीवन में कभी भी आशाराम जेल के बाहर नहीं आ सकता पीड़ित पक्ष की वर्षों की मेहनत सफल हुई हालांकि उन्हें इससे कुछ नहीं मिला लेकिन उनके अपराधी को सजा मिलाने का बोध उन्हें संतुष्टि जरूर दे रहा था इधर सूरत की
23:25
Speaker A
पीड़िता उं द्वारा दर्ज मामले में भी आसाराम रेप के दोष पाए गए इस मामले में भी साल 2023 के जनवरी महीने में गुजरात की एक कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए आशाराम को आजीवन उम्र कैद की सजा सुनाई इस मामले में
23:38
Speaker A
पीड़िता का आरोप था कि आशाराम ने अहमदाबाद के मोटेरा में स्थित अपने आश्रम में साल 2001 से लेकर 2006 के बीच कई बार रेप किया था इस तरह आशाराम यौन शूषण के एक नहीं बल्कि दो मामले में प्रॉपर दोषी सिद्ध हुए
23:53
Speaker A
हालांकि आशाराम के समर्थकों द्वारा आज भी यह माना जाता है कि उनके बापू को राजनीतिक तौर पर फंसाया गया है लेकिन अदालत में हुई बहसों और फैसलों के बाद इस तर्क की कोई जगह नहीं बचती है बहरहाल यह कहानी फिलहाल
24:05
Speaker A
यहीं खत्म होती है आसाराम केस पर यह दूसरा एपिसोड था पहला एपिसोड आप मेरे चैनल पर देख सकते हैं इसमें आशाराम को लेकर पीड़िता ने क्या बताया आशाराम की कुटिया में क्या हुआ उसे लेकर डिटेल में चर्चा की
24:17
Speaker A
है जाते-जाते आखिरी बातें अगर आशाराम केस को लेकर हमने आपकी नॉलेज में जरा सी भी वृद्धि की है तो प्लीज चैनल को जरूर सब्सक्राइब करें क्योंकि हम ऐसी ही इन्वेस्टिगेटिव और रिसर्च बेस्ड वीडियो लाते हैं मुद्दों को ऊपर से छूने के बजाय
24:31
Speaker A
डिटेल में जाते हैं ताकि पुलिस समाज राजनीति और अर्थव्यवस्था इसे लेकर हम सबकी एक बृहद और एक साझा सोच बन सके आपका एक-एक कमेंट और एक-एक लाइक हमारी वीडियो की रीच को बढ़ाने में हमारी मदद
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