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What REALLY Happened to Mohenjo Daro? | Indus Valley Civilisation EXPLORED

मोहेंजोदड़ो की 4500 साल पुरानी इंडस वैली सिविलाइजेशन की उन्नत शहरी योजना, रहस्य और विनाश की जांच।

Key Takeaways

  • मोहेंजोदड़ो की अर्बन प्लानिंग और ड्रेनेज सिस्टम अत्यंत उन्नत थे।
  • यहाँ के लोग शांति प्रिय थे और हथियारों का उपयोग नहीं करते थे।
  • शहर के विनाश का कारण आज भी रहस्य बना हुआ है।
  • मोहेंजोदड़ो का धर्म और सामाजिक व्यवस्था पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
  • मध्यकालीन यूरोप की तुलना में यह शहर बहुत अधिक स्वच्छ और सुव्यवस्थित था।

What the video covers

  • इंडस वैली सिविलाइजेशन लगभग 4500 साल पुरानी थी और मोहेंजोदड़ो इसका एक प्रमुख शहर था।
  • शहर की अर्बन प्लानिंग अत्यंत उन्नत थी, जिसमें ग्रिड सिस्टम, कवर ड्रेनेज सिस्टम और मल्टीपल स्टोरी हाउस शामिल थे।
  • यहाँ के लोग प्रोटो हिंदू धर्म का पालन कर सकते थे, लेकिन उनका वास्तविक धर्म अज्ञात है।
  • मोहेंजोदड़ो में हथियार नहीं मिले, जिससे यह पता चलता है कि वे शांति प्रिय थे।
  • शहर में अलग-अलग वर्गों के लिए आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्र थे, साथ ही एक रूलिंग क्लास भी थी।
  • यहाँ के लोग अनाज संग्रहित करते थे और कूड़ा प्रबंधन के लिए डस्टबिन्स का उपयोग करते थे।
  • मोहेंजोदड़ो की तुलना मध्यकालीन यूरोप से की गई, जहाँ यह शहर कहीं अधिक स्वच्छ और सुव्यवस्थित था।
  • शहर के विनाश के कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन कई थ्योरीज मौजूद हैं।
  • बुद्धिस्ट टूपा 1600 साल बाद बना, इसलिए मोहेंजोदड़ो के निवासियों का धर्म बुद्धिस्ट नहीं था।
  • शहर के संरचनात्मक अवशेष आज भी मौजूद हैं और ये आधुनिक शहरों के लिए प्रेरणा हैं।

Answers

Questions about this video

मोहेंजोदड़ो की शहरी योजना में क्या खास था?

मोहेंजोदड़ो की शहरी योजना अत्यंत उन्नत थी, जिसमें ग्रिड सिस्टम, कवर ड्रेनेज सिस्टम, मल्टीपल स्टोरी हाउस और हर घर से जुड़े ड्रेनेज सिस्टम शामिल थे। यह 4500 साल पहले की योजना है जो आज के आधुनिक शहरों के लिए भी प्रेरणादायक है।

मोहेंजोदड़ो के लोग किस धर्म का पालन करते थे?

मोहेंजोदड़ो के लोगों का धर्म स्पष्ट नहीं है, लेकिन कुछ थ्योरीज के अनुसार वे प्रोटो हिंदू धर्म का पालन करते थे। बुद्धिस्ट टूपा 1600 साल बाद बना था, इसलिए वे बुद्धिस्ट नहीं थे।

मोहेंजोदड़ो के विनाश का कारण क्या था?

मोहेंजोदड़ो के विनाश का कारण आज तक पूरी तरह से पता नहीं चला है। कई थ्योरीज हैं लेकिन कोई निश्चित प्रमाण नहीं है कि यह कैसे और क्यों तबाह हुआ।

Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:00
Speaker A
आखिर कैसे खत्म हुई 4500 साल पुरानी इंडस वैली सिविलाइजेशन? ऐसा आखिर क्या हुआ और इतनी एडवांस्ड अर्बन प्लानिंग तब के दौर में कैसे आई? इतना कमाल सूरज सिस्टम, इतना कमाल ड्रेनेज सिस्टम उस जमाने में कैसे पॉसिबल था? और क्या-क्या राज दफन हैं इस शहर की मिट्टी के नीचे? आइए दोस्तों, लेट्स एक्सप्लोर द फॉरगॉटन सिटी ऑफ मोहनजोदड़ो, माउंट ऑफ द डेड। चलो भाई, ये रंस जो आप देख रहे हैं ना, सारी ये उसी जमाने के हैं और बड़ी मिस्ट्री ये है कि अभी तक पता नहीं चला।
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Speaker A
मिट्टी के नीचे आइए दोस्तों लेट्स एक्सप्लोर द फॉरगॉटन सिटी ऑफ़ द मोहनज जोदार माउंट ऑफ द डेड चलो भाई ये रंस जो आप देख रहे हैं ना सारी ये उसी जमाने के हैं और बड़ी मिस्ट्री ये है कि नहीं पता चला अभी तक
00:38
Speaker A
प्रॉपर तरीके से बहुत सारी थ्योरीज हैं लेकिन ये नहीं पता चला कि हुआ क्या था, यहां पे सब कुछ कैसे तबाह हो गया। दूसरा, यह जो इंडस वैली सिविलाइजेशन थी, उसका वन ऑफ द मोस्ट इंपॉर्टेंट शहर था। ऐसे और भी हैं।
00:52
Speaker A
हड़प्पा भी है और हां बाय द वे यह उन्हीं जमानों में यानी 4500 इयर्स पहले इसके साथ-साथ जो है ना वो एंशिएंट इजिप्शन और मिसपटामिया का जो दौर था वो इसके पैरेलल ही चल रहा था। आहिस्ता-आहिस्ता हम चलते हैं और आपको
01:12
Speaker A
हड़प्पा भी है। और हां, बाय द वे, यह उन्हीं जमानों में यानी 4500 इयर्स पहले, इसके साथ-साथ जो है ना, वो एंशिएंट इजिप्शन और मिसोपोटामिया का जो दौर था, वो इसके पैरेलल ही चल रहा था। आहिस्ता-आहिस्ता हम चलते हैं और आपको दिखाते हैं।
01:27
Speaker A
बुद्धिस्ट टूपा तो 1600 साल बाद बना है आफ्टर द डेथ ऑफ दिस सिविलाइजेशन। ये 52 कमरे हैं इसके सारे सराउंडिंग में स्क्वायर शेप सारे कमरे हैं। 52 कमरे तो कहते हैं कि ये सारे जो इनके यानी बुद्धिस्ट मंक्स होते थे जो पुजारी होते
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Speaker A
इसको बोलते हैं स्टूपा। बुद्धिस्ट स्टूपा। इसको बुद्धिस्ट टूपा तो बोलते हैं, लेकिन वी रियली डोंट नो कि इनका मजहब क्या था। इस बुद्धिस्ट टूपा को देख के आप यह अस्यूम मत करना कि यहां के लोग बुद्धिस्ट हुआ करते थे। जी नहीं, ये बुद्धिस्ट टूपा तो 1600 साल बाद बना है, आफ्टर द डेथ ऑफ दिस सिविलाइजेशन।
01:59
Speaker A
तुक्के जिनको कह ले वो जरूर है। जैसे सर जॉन मार्शल की थ्योरी है कि हो सकता है ये लोग प्रोटो हिंदू रिलजन को फॉलो करते हैं। इस थ्योरी की वजह ये है कि यहां पे एक्सकवेशन के दौरान एक पशुपति का सील मिला
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Speaker A
ये 52 कमरे हैं, इसके सारे सराउंडिंग में स्क्वायर शेप सारे कमरे हैं। 52 कमरे तो कहते हैं कि ये सारे जो इनके यानी बुद्धिस्ट मंक्स होते थे, जो पुजारी होते थे, जो उनके रिलीजियस स्कॉलर्स होते थे, वो यहां पर रहते थे। और ये इसी तरह पूरे सर्कल में आते हैं।
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Speaker A
हो गया। यह तो एक मिस्ट्री है कि ये कैसे हुआ? ये क्यों तबाह हुआ जो भी है। लेकिन लोग ऐसे हैं ना कि वो इन पे चढ़ के इसको मजीद डैमेज करते हैं। इसलिए हमें खास मना किया गया था कि इन दीवारों पे आपने चढ़ना
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Speaker A
यहां के लोग किस मजहब को फॉलो करते थे? यह राज तो उन्हीं के साथ ही चला गया। लेकिन हां, कुछ स्पेकुलेशन जरूर है।
02:56
Speaker A
हुआ करती थी। और यह देखें यह जो ऊपर है ना कहा जाता है कि एक दो क्लासेस थे। यहां पे अपर क्लास लोग रहते थे। नीचे फिर रेजिडेंशियल और कमर्शियल यह एक एरिया होता था। यानी कि एक रूलिंग क्लास जो है वो
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Speaker A
तुक्के जिनको कह लें, वो जरूर हैं। जैसे सर जॉन मार्शल की थ्योरी है कि हो सकता है ये लोग प्रोटो हिंदू रिलिजन को फॉलो करते थे। इस थ्योरी की वजह ये है कि यहां पे एक्सकवेशन के दौरान एक पशुपति का सील मिला था।
03:24
Speaker A
और वो ग्रिड दो हिस्सों में डिवाइडेड भी नजर आती है अपर सिटी और लोअर सिटी में। क्योंकि कुछ इलाके थोड़े ऊंचे हैं और कुछ नीचे हैं। ये जो आप सामने देख रहे हैं, दिस यूज़ टू बी लेबर कॉलोनी जो एक मशहूर
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Speaker A
पशुपति, जिनको प्रोटो फॉर्म ऑफ लॉर्ड शिवा भी माना जाता है। पॉइंट टू बी नोटेड, दिस इस प्रोटो हिंदू रिलीजन, नॉट हिंदूज़्म। यही आगे जाकर हिंदूइज़्म बना। लेकिन यह सब स्पेकुलेशन है। यह कंफर्म नहीं है। भाई, कुदरत ने तो जो इसके साथ करना था, वह तो हो गया।
03:48
Speaker A
आर्कियोलॉजिस्ट का मानना यह है कि यहां पे मल्टीपल स्टोरीज के घर भी हुआ करते थे। वो शायद टूट गए हो तो आप आर्ग्यू कर सकते हैं। लेकिन वहां पे प्राइवेट वेल्स भी लोगों के पास हुआ करते थे और उसके सबूत तो
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Speaker A
यह तो एक मिस्ट्री है कि ये कैसे हुआ? ये क्यों तबाह हुआ? जो भी है। लेकिन लोग ऐसे हैं ना कि वो इन पे चढ़ के इसको मजीद डैमेज करते हैं। इसलिए हमें खास मना किया गया था कि इन दीवारों पे आपने चढ़ना नहीं है।
04:18
Speaker A
सारे स्पेककुलेशंस है बट आप स्ट्रक्चर देखिए मॉडर्न स्विमिंग पूल्स का भी इसी तरह का स्ट्रक्चर होता है। दिस इज 4500 इयर्स एगो। तो इमेजिन द लेवल ऑफ़ अर्बन प्लानिंग। एक और कमाल की बात यह है कि हर घर कनेक्टेड है टू द ड्रेनेज सिस्टम। यानी
04:37
Speaker A
और मैं आपको यह बताऊं कि यह अपने जमाने का मोस्ट एडवांस सिटी हुआ करता था। और इसकी अर्बन प्लानिंग जो है ना, वह आज तक एक बहुत बड़ी मिस्ट्री है कि इतनी कमाल किस्म की अर्बन प्लानिंग उस टाइम में कैसे हुआ करती थी।
04:51
Speaker A
यहां पे अनाज वो अपना स्टोर करते थे। आपको दिखाता हूं यहां पे क्योंकि ग्रेंस जो है ना वो मिले हैं। और उससे यह अंदाजा हुआ कि यहां पे ये खाना स्टोर करते थे। ग्रेन स्टोर करते थे। और यह कोई खुले हुए गटर या
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Speaker A
और यह देखें, यह जो ऊपर है ना, कहा जाता है कि एक-दो क्लासेस थे। यहां पे अपर क्लास लोग रहते थे। नीचे फिर रेजिडेंशियल और कमर्शियल यह एक एरिया होता था। यानी कि एक रूलिंग क्लास जो है, वो यहां पे रहती थी। दिस इज सपोज थ्योरी।
05:19
Speaker A
एक किस्म का गेट है। यह देखें। इस गेट से आप एंटर होते हैं। पूरा कमरा है। यह ब्रिक्स जो देख रहे हैं आप प्रॉपर बिग ब्रिक्स हैं यह। और मजे की बात यह कि जो मिडवल यूरोप होता था ना उससे बहुत दफा
05:34
Speaker A
इन चीजों की कोई अभी तक मतलब कंफर्मेशन नहीं है कि ऐसा ही होता था। एक चीज नोट करने वाली जरूर है कि इस पूरे शहर का जो स्ट्रक्चर है, वो ग्रिड सिस्टम की तरह है।
05:48
Speaker A
पे यानी उनसे बहुत पहले यहां लोग इतने सुखी रह रहे थे। इवन घर के आगे इन्होंने डस्टबिनस भी रखी होती थी। तो इतनी कमाल ड्रेनेज सिस्टम था, स्वेर सिस्टम था। प्लानिंग अर्बन प्लानिंग बहुत कमाल थी। लुक एट दिस। व्हाट अ
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Speaker A
और वो ग्रिड दो हिस्सों में डिवाइडेड भी नजर आती है, अपर सिटी और लोअर सिटी में। क्योंकि कुछ इलाके थोड़े ऊंचे हैं और कुछ नीचे हैं। ये जो आप सामने देख रहे हैं, दिस यूज़ टू बी लेबर कॉलोनी।
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Speaker A
में यूरोपियन सबसे ज्यादा अनहाइजीनिक कंडीशंस में रहे होंगे। आज जो हमें वीजा नहीं देते लेकिन एक जमाना था इनका बहुत बुरा हाल था। अगर हम इन दोनों जमानों को कंपेयर करें मिड इविल यूरोप और इंडस वैली सिविलाइजेशन तो आपको बहुत ज्यादा फर्क नजर
06:37
Speaker A
जो एक मशहूर डांसिंग गर्ल का स्टैचू था, वो भी यहां से मिला था, जो आपको दिखाया था मैंने। फिर यह इनका रेजिडेंशियल एरिया था। यह देखिए, थोड़ा सा हाइट पर है। अभी तो आप यह सब कुछ टूटा-फूटा देख रहे हैं।
06:54
Speaker A
समझ आएगी कि ये कितना बेहतर प्लानिंग से रहते थे। चल जी। अब जो इतना खूबसूरत यूरोप आपको नजर आता है तब के दौर में उसकी हालत इतनी खराब थी कि लोग अपने घर का कचरा बाहर सड़क पर ही फेंक दिया करते थे। लेकिन उसके
07:08
Speaker A
लेकिन आर्कियोलॉजिस्ट का मानना यह है कि यहां पे मल्टीपल स्टोरीज के घर भी हुआ करते थे। वो शायद टूट गए हों तो आप आर्ग्यू कर सकते हैं। लेकिन वहां पे प्राइवेट वेल्स भी लोगों के पास हुआ करते थे और उसके सबूत तो आज भी मौजूद हैं।
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Speaker A
कमाल था। ये उन्हीं के रखे हुए पत्थर हैं। उसी जमाने के हैं ना बहुत खूबसूरत। चल जी। ये देखें यहां पे लिखा भी हुआ है डस्टबिन कचरा दान। यहां पर ये अपना कूड़ा कचरा जो है वो रखते थे। इस जगह की जब एक्सकवेशन हुई, खुदाई
07:43
Speaker A
ये भाई, इसको ग्रेट बाथ भी कहते हैं। ये उनका स्विमिंग पूल समझ लें आप। अब इसके बारे में बहुत सारी थ्योरीज हैं कि हो सकता है कोई रिलीजियस उनके रिचुअल्स हो वो करते हों या बहुत सारी सेमिस्ट्री, बहुत सारे स्पेककुलेशंस हैं।
07:56
Speaker A
थे। आर्टिजंस हुआ करते थे, ट्रेडर्स भी थे, पॉटर्स भी थे, लोहार भी थे। लेकिन वॉरियर्स नहीं थे। जी हां, कैसी बात है कि जब एक्सकवेशन हुई तो कोई ऐसा हथियार नहीं मिला। कोई तलवार, कोई चाकू, कोई तीर, कोई
08:10
Speaker A
लेकिन आप स्ट्रक्चर देखिए, मॉडर्न स्विमिंग पूल्स का भी इसी तरह का स्ट्रक्चर होता है। दिस इज 4500 इयर्स एगो। तो इमेजिन द लेवल ऑफ अर्बन प्लानिंग।
08:22
Speaker A
इजिपशंस मिसोपमिया एलेमाइट्स चाइनीस जिया एंशिएंट डायनेस्टीज इन सबके पास हथियार हुआ करते थे। इससे यह अंदाजा हुआ कि यहां पर रहने वाले लोग कितने पीसफुल हुआ करते थे। हालांकि यह लोग ट्रेड भी करते थे बाकियों से लेकिन कभी भी हथियार
08:37
Speaker A
एक और कमाल की बात यह है कि हर घर कनेक्टेड है टू द ड्रेनेज सिस्टम। यानी हर घर का गंदा पानी ड्रेनेज सिस्टम से होकर शहर के बाहर चला जाता था।
08:54
Speaker A
सारे जगहों को देख के ना एक एक अजीब सी फीलिंग है। बहुत अजीब सी फीलिंग है। बताना बड़ा मुश्किल है। बट फील्स आई डोंट नो वही तो नहीं पता कि कैसे बताऊं। एक्सकवेशन के दौरान जो आर्टिफेक्ट्स मिले, जो स्टैचूस मिले उनसे
09:12
Speaker A
लेकिन ये सारा देखिए, ये ड्रेनेज सिस्टम था इनका और यह पीछे यहां पे ये स्टोर करते थे। ग्रेन स्टोर करते थे। गोदाम, जिसको बोलते हैं आप।
09:25
Speaker A
स्ट्रीट उझी किटी तो यहां से सीधा आप जाएंगे तो आप गेट की तरफ चले जाएंगे। वहां से आप एग्जिट कर सकते हैं। मतलब कुछ भी ऐसा अगर हो जाता है जहां पे आपको भागने की जरूरत पड़े तो सीधा आप यहां से जा सकते
09:39
Speaker A
यहां पे अनाज वो अपना स्टोर करते थे। आपको दिखाता हूं यहां पे क्योंकि ग्रेंस जो हैं ना, वो मिले हैं। और उससे यह अंदाजा हुआ कि यहां पे ये खाना स्टोर करते थे। ग्रेन स्टोर करते थे।
09:53
Speaker A
पड़ा हुआ है। और अजब सी बात ये है कि जब आप इस स्टैचू को भी देखेंगे तो आपको एक शख्स नजर आएगा जिसने शॉल ओढ़ी हुई है और उस शॉल के पैटर्न्स पे जब आप गौर करेंगे तो वो अजरक के पैटर्न से बहुत मिलते जुलते
10:05
Speaker A
और यह कोई खुले हुए गटर या फटी हुई नालियां नहीं होती थीं भाई। कवर्ड ड्रेनेज सिस्टम होता था पूरा। शहर का जितना भी गंदा पानी होता था, वो अंडरग्राउंड सूअर्स के जरिए शहर से बाहर डिस्पोज किया जाता था।
10:18
Speaker A
हुआ होगा। एक और स्टैचू जो काबिले जिक्र है वो है द डांसिंग गर्ल। ये भी जो आप देख रहे हैं ये पार्क में लगा हुआ रेप्लिका है और इसका भी जो असल है वो नेशनल म्यूजियम न्यू दिल्ली इंडिया में पड़ा हुआ है। इस
10:29
Speaker A
अब यह देखें, मैं जैसे इस कमरे में जा रहा हूं। यह गेट है।
10:41
Speaker A
एक कॉमन चीज हुआ करती होगी। सबसे बड़ी मिस्ट्री की बात यह है कि इनकी लैंग्वेज आज तक डिसाइफर नहीं हो सकी। 400 यूनिक सिंबल्स जरूर मिले हैं। टेबलेट्स की सूरत में, सील्स की सूरत में जिन पे मुख्तलिफ जानवर बने हुए हैं। जैसे कहीं पे बुल बना
10:56
Speaker A
एक किस्म का गेट है। यह देखें। इस गेट से आप एंटर होते हैं। पूरा कमरा है। यह ब्रिक्स जो देख रहे हैं आप, प्रॉपर बिग ब्रिक्स हैं यह।
11:08
Speaker A
है लेकिन लिखाई बहुत कम है और कोई किताबें भी नहीं मिली। कोई ऐसे डॉक्यूमेंट्स भी नहीं मिले। और अगर इनकी कोई लैंग्वेज थी भी तो वो बाइलिंगुअल नहीं थी। बाइलिंगुअल से मतलब वो किसी और जुबान से मिलती जुलती
11:21
Speaker A
और मजे की बात यह कि जो मिडवल यूरोप होता था ना, उससे बहुत दफा बेहतर इनकी अर्बन प्लानिंग होती थी। सैनिटेशन इनकी उनसे बहुत अच्छी थी।
11:32
Speaker A
डिसाइफर करने का तरीका ही यही होता है। जैसे 1979 में इजिप्ट में रोजेटा स्टोन मिला। उस पत्थर पे दो ऐसी एंशिएंट इजिपशियन लैंग्वेज लिखी हुई थी जो तब के जमाने में अनडिस्कवर्ड थी। अनडिसाइफर्ड थी। एक थी हिरोगफिक और दूसरी डेमोनिक
11:47
Speaker A
आपको पता है, तब तो इतने प्लैग्स होते थे यूरोप के कि लोग मरते जाते थे। एवरेज जो एज होती थी, वो भी बहुत कम थी। तो उसके बजाय यहां पे यानी उनसे बहुत पहले यहां लोग इतने सुखी रह रहे थे।
11:59
Speaker A
जब उन्होंने अल्फाज़ों को अल्फाज़ों से मिलाया तो एक नई बल्कि दो नई लैंग्वेजेज़ डिसएफर हो गई। अनफॉर्चुनेटली ये सारा कुछ इंडस वैली सिविलाइजेशन के केस में काम नहीं आया। अब एक मिस्ट्री तो इनकी जुबान है। और दूसरी मिस्ट्री ये है कि ये इतनी
12:14
Speaker A
इवन घर के आगे इन्होंने डस्टबिन्स भी रखी होती थीं। तो इतनी कमाल ड्रेनेज सिस्टम था, स्वेर सिस्टम था। प्लानिंग, अर्बन प्लानिंग बहुत कमाल थी। लुक एट दिस। व्हाट अ ब्यूटी। व्हाट ए ब्यूटी।
12:30
Speaker A
शिफ्ट कर दिया तो ये लोग तो पूरा का पूरा डिपेंड करते थे उस नदी पे। पूरा एग्रीकल्चर उनका उसी पर डिपेंड करता था तो फिर ये तबाह और बर्बाद हो गए। इनके पास कुछ रहा ही नहीं। दूसरी थ्योरी ये कहती है
12:41
Speaker A
ओवरऑल अगर सैनिटेशन की बात करें तो मोहनजोदड़ो के लोग बहुत ज्यादा सुखी रहते थे मिडिवल यूरोपियन से। फिफ्थ सेंचुरी से लेकर 15वीं सेंचुरी तक, जिसको मिड इवल यूरोप का पीरियड कहते हैं।
12:56
Speaker A
कहती है कि इनको आर्यंस ने इनवेड कर दिया। अब क्योंकि इनके पास तो कोई हथियार थे ही नहीं। सिर्फ ऐसे घास-फूस काटने वाले चाकू थे और टूल्स थे तो यह खुद को डिफेंड नहीं कर सके। ना कोई फोर्ट था, ना मिलिट्री थी
13:08
Speaker A
दोस्तों, इस पीरियड में यूरोपियन सबसे ज्यादा अनहाइजीनिक कंडीशंस में रहे होंगे। आज जो हमें वीजा नहीं देते, लेकिन एक जमाना था इनका बहुत बुरा हाल था।
13:20
Speaker A
तो बहुत हैं लेकिन फिक्र करने वाली बात यह है कि मोहनजोदड़ो की तबाही अभी भी खत्म नहीं हुई क्योंकि आज भी यह साइट खतरे में है और इसका सबसे बड़ा दुश्मन है सोइल सेलिनिटी। असल में जब जमीन की मिट्टी में
13:34
Speaker A
अगर हम इन दोनों जमानों को कंपेयर करें, मिड इविल यूरोप और इंडस वैली सिविलाइजेशन, तो आपको बहुत ज्यादा फर्क नजर आएगा।
13:47
Speaker A
पानी तो दे रहे हैं, लेकिन उसी पानी की वजह से जो मोहनजोदड़ो का ग्राउंड वाटर है, वह ऊपर राइज कर जाता है और मिट्टी को खराब करता है जिसकी वजह से ईंटें टूटने लग जाती है और स्ट्रक्चर कमजोर पड़ जाता है। ये
13:59
Speaker A
इंडस वैली सिविलाइजेशन में प्रॉपर तरीके के टॉयलेट बने हुए होते थे, जो कि मिड इविल यूरोप में बिल्कुल भी नहीं थे। ये मेरे लेफ्ट राइट पे वाशरूम्स हैं। ये सारे वाशरूम्स हैं।
14:16
Speaker A
अब इसका रीजन सिर्फ एक इरीगेशन नहीं है। इस दुनिया के बदलते हुए टेंपरेचर भी हैं। ग्लोबल टेंपरेचर क्योंकि बढ़ते ही जा रहे हैं। तो एक्सट्रीम हीट भी जो ऊपर की सतह है उसको कमजोर बनाती है। होता यह है कि
14:28
Speaker A
और आप चेक करें इसको जब आप कंपेयर करेंगे मिडवल यूरोप से, तो आपको समझ आएगी कि ये कितना बेहतर प्लानिंग से रहते थे। चल जी।
14:41
Speaker A
है। बड़ी हैरान करने वाली बात यह है कि जो 2022 में सिंध में सैलाब आया था वो मोहंजो दरोगा का ज्यादा कुछ बिगाड़ नहीं सका। वजह पता है क्यों? 4500 साल पुराना ड्रेनेज सिस्टम जो आज भी उसी तरह ही काम कर रहा
14:54
Speaker A
अब जो इतना खूबसूरत यूरोप आपको नजर आता है, तब के दौर में उसकी हालत इतनी खराब थी कि लोग अपने घर का कचरा बाहर सड़क पर ही फेंक दिया करते थे।
15:08
Speaker A
है वो सर्वाइव कर रहा था तो फिर आज के सिंध से ज्यादा तो मॉडर्न तब का सिंध हुआ अब तो यहां पे सिर्फ रन्स है लेकिन फिर भी मोहनजोदड़ो मैटर्स इसलिए नहीं क्योंकि ये एक आर्कलॉजिकल साइट है बल्कि इस बात का
15:20
Speaker A
लेकिन उसके बरक्स इंडस वैली सिविलाइजेशन में इतने साल पहले प्रॉपर डस्टबिन हुआ करते थे। वेस्ट डिस्पोज करने का एक सिस्टम हुआ करता था।
15:33
Speaker A
वो कभी भी गिर सकती है। मोहनजोदड़ो आज तो खंडराद में पड़ा हुआ है लेकिन इसकी ईंटों में एक लेगसी है। इन ईंटों में एक विरासत है। दुनिया के सबसे पहले जदीद शहर की सब्सक्राइब जरूर करना। ओम
Topics:मोहेंजोदड़ोइंडस वैली सिविलाइजेशनशहरी योजनाप्राचीन भारतपशुपति सीलप्रोटो हिंदू धर्मड्रेनेज सिस्टमहड़प्पा संस्कृतिप्राचीन इतिहासअर्बन प्लानिंग

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