एंशिएंट ग्रीस ने इंसान को सवाल पूछना सिखाया और डेमोक्रेसी, फिलॉसोफी, साइंस जैसी क्रांतिकारी चीजें दीं।
Key Takeaways
- ग्रीस ने सवाल पूछने और तर्क करने की संस्कृति विकसित की।
- डेमोक्रेसी की शुरुआत एथेंस से हुई, जो आज भी लोकतंत्र का आधार है।
- सोक्रेटीस, प्लेटो और अरिस्टोटल ने मानव सोच को बदलने वाले विचार दिए।
- ग्रीक सभ्यता ने पश्चिमी संस्कृति और विज्ञान के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- ज्ञान की खोज और आलोचनात्मक सोच की परंपरा ग्रीस से शुरू हुई।
What the video covers
- ग्रीस ने डेमोक्रेसी, फिलॉसोफी, साइंस, लॉजिक, आर्ट, आर्किटेक्चर और थिएटर जैसी महत्वपूर्ण चीजें दुनिया को दीं।
- एंशिएंट ग्रीस कई स्वतंत्र सिटी-स्टेट्स का समूह था, जिनमें सबसे प्रसिद्ध एथेंस और स्पार्टा थे।
- स्पार्टा एक मिलिट्री स्टेट था जबकि एथेंस में डेमोक्रेसी और विचार-विमर्श का विकास हुआ।
- 508 ईसा पूर्व क्लस्थनीज़ ने एथेंस में डेमोक्रेटिया की शुरुआत की, जिसमें लोगों को अपने नेताओं को चुनने का अधिकार मिला।
- सोक्रेटीस ने सवाल पूछने की विधि विकसित की, जिसे आज सोक्रेटिक मेथड कहा जाता है।
- प्लेटो ने अपने गुरु सोक्रेटीस के विचारों को लिखा और दुनिया की पहली यूनिवर्सिटी 'एकेडमी' की स्थापना की।
- प्लेटो की थ्योरी ऑफ फॉर्म्स ने असली हकीकत की गहरी समझ दी, जिसमें असली चीजें एक परफेक्ट दुनिया में मौजूद हैं।
- एरिस्टोटल ने प्लेटो के विचारों को चुनौती दी और विज्ञान, फिलॉसोफी में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
- एलेक्जेंडर द ग्रेट ने ग्रीक संस्कृति को विश्वभर में फैलाया और एक बड़ी साम्राज्य स्थापित किया।
- ग्रीक विचारधारा ने पश्चिमी सभ्यता और आधुनिक लोकतंत्र की नींव रखी।
Chapters
- 00:00परिचय और एंशिएंट ग्रीस का महत्व
- 01:09ग्रीस की भौगोलिक स्थिति और प्रारंभिक सभ्यताएं
- 02:13सिटी-स्टेट्स: एथेंस और स्पार्टा का परिचय
- 03:21डेमोक्रेसी की शुरुआत और क्लस्थनीज़ का योगदान
- 04:25सोक्रेटीस: सवाल पूछने की कला और जीवन
- 06:17प्लेटो: गुरु और दार्शनिक विचार
- 07:22प्लेटो की थ्योरी ऑफ फॉर्म्स और आदर्श समाज
- 08:25अरिस्टोटल और ग्रीक संस्कृति का विस्तार
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Speaker A
दोस्तों, आज से हम एक नई सीरीज शुरू करने वाले हैं जिसमें हम यूरोप की हिस्ट्री बयान करेंगे और आज का जो एपिसोड है वो बड़ा खास है क्योंकि आज हम बात करेंगे एंशिएंट ग्रीस की। ये छोटा सा इलाका है जो
Speaker A
आज के यूरोप के कोने में है। इसने दुनिया को वो चीजें दी हैं जो दुनिया कभी नहीं भूल सकती। जैसे डेमोक्रेसी, फिलॉसोफी, साइंस, लॉजिक, आर्ट, आर्किटेक्चर, थिएटर। सबसे बड़ी बात यह है कि ग्रीस ने इंसान को सोचने का नया तरीका सिखाया। उसने इंसान के
Speaker A
अंदर वो क्यूरियोसिटी पैदा की जिसे इंसान ने सवाल पूछना शुरू किए। आज हम अमेरिका, यूरोप और यहां पाकिस्तान में भी डेमोक्रेसी का लफ्ज बड़ा इस्तेमाल करते हैं। हम कहते हैं कि हर इंसान के इक्वल राइट्स हैं। हुकूमत लोगों की मर्जी से
Speaker A
बननी चाहिए। ये सारे जो आइडियाज हैं ये ग्रीस से आए हैं। आज जो हम यूनिवर्सिटीज में फिलॉसफी पढ़ते हैं, प्लेटो पढ़ते हैं, अरिस्टोटल पढ़ते हैं, उनके आइडियाज को पढ़ते हैं। ये सब ग्रीस की देन है। अब सवाल ये है कि इतना छोटा सा मुल्क जो
Speaker A
ज्यादातर आइलैंड्स और पहाड़ी इलाकों पर था। इसने इतना कुछ कैसे अचीव कर लिया? जाहिर है ये समझने के लिए हमें पीछे जाना पड़ेगा। एंशिएंट ग्रीस जो है वो आज के ग्रीस से बहुत अलग नहीं था। मेडिटेरेनियन सी के किनारे चारों तरफ समंदर से घिरा हुआ
Speaker A
और ये चारों तरफ समंदर होने की वजह से वहां के जो लोग थे वो बहुत कमाल सेलर्स थे। और एक बड़ी मज़ेदार बात यह है कि ज्योग्राफी जिस भी मुल्क की होती है ना वो वहां के लोगों के सोचने पर भी असर डालती।
Speaker A
पहले यहां पे मिनोन सिविलाइजेशन थी जो क्रीट आइलैंड पर रहती थी। यह लोग बहुत एडवांस थे। उनके पास खूबसूरत पैलेसेस थे, आर्ट था, आर्किटेक्चर था, ट्रेड था। लेकिन 1400 बीसी में यह सिविलाइजेशन खत्म हो गई। कहा जाता है कि शायद उसकी वजह थी बड़े
Speaker A
अर्थक्वेक्स। जी, जलजलों ने उसे तबाह कर दिया या फिर दूसरी थ्योरी यह है कि वहां इन्वेशन हुई होगी। उसके बाद आई माइसिनियन सिविलाइजेशन। ये लोग मेनलैंड ग्रीस में रहते थे। होमर की मशहूर किताबों में इलियार्ड और ओडिसी में भी इनका जिक्र
Speaker A
मिलता है। लेकिन 1100 बीसी के आसपास एक बहुत बड़ा डार्क एज आ गया। इस दौर में ग्रीस की सिविलाइजेशन लगभग गिर चुकी थी। शहर खत्म हो गए थे। लोग लिखना भूल ही गए थे। यह काला दौर तकरीबन 300 साल तक चला।
Speaker A
फिर धीरे-धीरे ग्रीस ने दोबारा उठना शुरू किया और अब ये जो उठे वो उठे नहीं बल्कि उड़े। ये उड़ान बहुत जबरदस्त थी और इसे आर्केक पीरियड भी कहते हैं। लगभग 800 साल बीसी से ये एरा जो है वो शुरू हुआ। और
Speaker A
यहीं से हमारी असल स्टोरी शुरू होती है। अच्छा दोस्तों, एंशिएंट ग्रीस एक बहुत एक यूनाइटेड मुल्क नहीं था। ये 100्स ऑफ इंडिपेंडेंट सिटी स्टेट्स का ग्रुप था। हर शहर का अपना हुक्मरान था। अपने लॉस थे, अपनी आर्मी थी। यहां तक कि पुलिस भी
Speaker A
अपनी-अपनी थी। सबसे फेमस थे दो सिटी स्टेट्स। एथंस और स्पार्टा। इन दोनों में इतना फर्क था कि आप हैरान रह जाओगे। स्पार्टा एक मिलिट्री स्टेट थी। वहां हर मर्द को सोल्जर बनना पड़ता ही था। बचपन से ही लड़कों को लड़ने की ट्रेनिंग दी जाती
Speaker A
थी। उनका मकसद सिर्फ यही था कि एक बेहतरीन वॉरियर बनना है। स्पार्टा में डेमोक्रेसी बिल्कुल भी नहीं थी। वहां एक छोटा सा ग्रुप था जो हुक्मरानी करता था। औरतों को कुछ फ्रीडम इसलिए था क्योंकि वहां के मर्द ज्यादातर तो जंग में ही होते थे। लेकिन
Speaker A
एथेंस का शहर बिल्कुल ही अलग था। एथेंस में लोगों ने सोचा कि हम अपनी जिंदगी खुद कैसे बेहतर कर सकते हैं। वहां आर्ट था, थिएटर था, फिलॉसफी थी। लोग सवाल पूछते थे, डिबेट करते थे और वहां एक बहुत बड़ी चीज
Speaker A
पैदा हुई, डेमोक्रेसी। दोस्तों, आज हम डेमोक्रेसी को जो इतना नॉर्मल समझते हैं। लेकिन ढाई हजार साल पहले यह बिल्कुल नया आईडिया था। एथेंस में तकरीबन 508 बीसी में एक लीडर आया जिसका नाम था क्लस्थनीज़। उसने एथेंस के लोगों को यह पावर दी कि वो खुद
Speaker A
अपना लीडर चूज़ कर सके। इस सिस्टम को हम डेमोक्रेटिया कहते हैं। डेमोस का मतलब है लोग और क्रेटोस का मतलब है पावर, यानी लोगों की पावर। लेकिन ये डेमोक्रेसी आज वाली डेमोक्रेसी से थोड़ी अलग थी। एक तो सिर्फ फ्री एडल्ट्स यानी जो मर्द हजरात थे
Speaker A
वो ही वोट कर सकते थे। औरतें वोट नहीं कर सकती थीं, गुलाम वोट नहीं कर सकते थे और फॉरेनर्स जो थे वो भी वोट नहीं कर सकते थे। मतलब डेमोक्रेसी तो थी लेकिन लिमिटेड थी। फिर भी यह आईडिया बड़ा रेवोल्यूशनरी
Speaker A
था। पहली बार किसी बड़े शहर ने यह कहा कि हम हुकूमत जो है वो लोगों की मर्जी से बनाते। एथेंस में एक बड़ा ओपन स्पेस था जिसका नाम था एकलिया। वहां लोग इकट्ठे होते थे। डिबेट करते थे। वहीं वोट होता था। हर
Speaker A
इंपॉर्टेंट फैसला लोगों के सामने डिस्कस किया जाता था। जाहिर है यह सिस्टम परफेक्ट नहीं था। कभी-कभी लोग गलत फैसले भी ले लेते थे। लेकिन ये आईडिया कि इंसान अपनी जिंदगी खुद कंट्रोल कर सकता है। ये आईडिया ग्रीस से दुनिया में फैला और वेस्टर्न
Speaker A
फिलॉसफी की जो गोल्डन एज है वो भी इस शहर से शुरू होती है। एंशिएंट ग्रीस ने दुनिया को तीन ऐसे बड़े नाम दिए हैं जिन्होंने आगे जाकर इंसानों की सोच ही बदल दी। सोक्रेटीस, प्लेटो और अरिस्टोटल। चलो सबसे पहले बात करते हैं सोक्रेटीस की।
Speaker A
दोस्तों, सोक्रेटीस को हम फिलॉसफी का बाप भी कह सकते हैं। बल्कि कहते हैं इंटरेस्टिंग बात ये है कि उसने अपनी जिंदगी में कभी कोई किताब नहीं लिखी। हम उसके बारे में जितना जानते हैं उसके शागिर्दों की वजह से जानते हैं। सोक्रेटीस
Speaker A
का तरीका बहुत सिंपल था। वो लोगों से सवाल करता था और बड़े गहरे सवाल करता था। जैसे अगर कोई कहता कि मुझे इंसाफ चाहिए तो सोक्रेटीस उससे पूछता वो तो ठीक है पहले ये बताओ कि इंसाफ क्या होता है? क्या ये
Speaker A
सिर्फ पावरफुल लोगों के लिए होता है या हर इंसान के लिए इंसाफ बराबर होता है? अगर कोई कहता कि मैं खुश रहना चाहता हूं तो वो आपसे पूछता लेकिन असली खुशी क्या होती है?
Speaker A
क्या वो पैसे से आती है? क्या वो पावर से आती है? या कोई और ही चीज है जो इंसान को सुकून देती है? वो लोगों को उनकी अपनी ही कंट्राडिक्शन में फंसा देता था। इसलिए बहुत सारे लोग उससे तंग भी थे और नाराज भी
Speaker A
थे। वो ये कहते थे कि यह आदमी जो है हमारी जिंदगी खराब कर देता है और यह नौजवानों को भटका रहा है। सोक्रेटीस ने कभी यह नहीं कहा कि वो कोई बहुत बड़ा दानिशमंद है। उसका बल्कि मशहूर जुमला ही यही है कि आई
Speaker A
नो दैट आई नो नथिंग। यानी मुझे सिर्फ इतना पता है कि मुझे कुछ नहीं पता। दोस्तों, आज भी अगर कोई आपके सामने बड़ा कोई फन्ने खान, बड़ा कोई दानिश बनने की कोशिश करे तो आप ये समझना कि यार जब सुकरात को सब कुछ पता
Speaker A
नहीं था तो इसको कैसे सब कुछ पता है? ये अप्रोच इंसान को ये सिखाती है कि हमेशा इंसान को सीखते रहना चाहिए, कभी ये नहीं सोचना चाहिए कि बस अब तो उसको सब पता चल चुका है। सोक्रेटीस को 399 बीसी में मौत
Speaker A
की सजा सुनाई गई। उस पर इल्जाम यही था कि वो यंग जनरेशन को बिगाड़ रहा है और नए गॉड्स की बात कर रहा है। कोर्ट में उसने अपना डिफेंस खुद ही लिया लेकिन जूरी ने उसे गिल्टी करार दे दिया। उसने अपनी सजा
Speaker A
खुद ही कबूल कर ली और हेमलॉक नाम का जहर उसको प्याले में दिया गया एज अ पनिशमेंट और उसने वो पी लिया और उसकी इस तरह मौत हो गई। अपने प्रिंसिपल से वो कभी हटा नहीं। उसने अपने प्रिंसिपल्स पे कॉम्प्रोमाइज
Speaker A
नहीं किया। उसने कहा मैं करूंगा वही जो सही है। चाहे उसकी सजा मौत ही क्यों ना हो। ये शख्स तो फौत हो गया लेकिन उसके जो आइडियाज थे वो अमर हो गए। आज भी जो सवाल पे सवाल करता है तो इस सवाल करने के तरीके
Speaker A
को सोक्रेटिक मेथड कहते हैं। अब आते हैं प्लेटो। प्लेटो दोस्तों, सुकरात का सबसे मशहूर शागिर्द था। उसने अपने उस्ताद के आइडियाज को बुक्स में लिखना शुरू किया और यही वजह है कि आज हमें सुकरात के आइडियाज का पता है। आज हम सोक्रेटीस की सोच जितनी
Speaker A
भी जान पाए हैं वो प्लेटो की वजह से जान पाए। उसने एकेडमी नाम का एक स्कूल भी बनाया जिसको दुनिया की पहली यूनिवर्सिटी कहा जा सकता है। वहां लोग फिलॉसफी पढ़ते थे, मैथमेटिक्स पढ़ते थे, एस्ट्रोनॉमी पढ़ते थे और भी बहुत सारी चीजें पढ़ते थे।
Speaker A
ये एकेडमी लगभग 900 साल तक चली। प्लेटो की सबसे फेमस जो किताब है वह है दी रिपब्लिक, जमूरियत। इस किताब में वह एक परफेक्ट सोसाइटी का तस्सवुर पेश करता है। उसके मुताबिक एक अच्छी सोसाइटी तभी बन सकती है
Speaker A
जब हर इंसान अपनी जगह पर सही काम करे। कोई सोल्जर फिलॉसफर बनने की कोशिश ना करे और कोई फिलॉसफर सोल्जर का काम करने की कोशिश ना करे। हर कोई अपना-अपना काम करे और परफेक्ट करे। प्लेटो का सबसे इंपॉर्टेंट
Speaker A
आईडिया था थ्योरी ऑफ फॉर्म्स यानी नजरिया असल। वो कहता था कि दुनिया में जो चीजें हम देख रहे हैं जैसे एक खूबसूरत फूल, कोई अच्छा इंसान या एक बेहतरीन कुर्सी ये असल चीजें हैं ही नहीं। वो ये कहता था ये सिर्फ
Speaker A
उनकी कॉपीज हैं। असल चीजें तो एक और दुनिया में मौजूद हैं जिसे हम देख ही नहीं सकते। वहां हर चीज अपने परफेक्ट फॉर्म में एक्सिस्ट करती है। यानी यह जो खूबसूरत फूल है, यह उस दुनिया में परफेक्ट है। उसमें
Speaker A
कोई कमी ही नहीं है। और यह जो कुर्सी है, यह उस वर्ल्ड ऑफ आइडियाज में परफेक्ट कुर्सी है। और यह इंसान भी उस दुनिया में एक परफेक्ट इंसान है। ये आईडिया बड़ा गहरा था। प्लेटो कहते थे कि असली हकीकत वो नहीं
Speaker A
है जो हम आंखों से देख रहे हैं। वो सिर्फ शैडोज़ हैं। परछाइयां हैं। असली चीज तो उस दुनिया में। प्लेटो ने यह भी कहा था कि सबसे बेहतरीन हुक्मरान वो होना चाहिए जो फिलॉसफर किंग हो। यानी एक ऐसा इंसान जो
Speaker A
बहुत ज्यादा सोचता हो, जो समझता हो, अपनी पर्सनल डिजायर्स से ऊपर उठ...
Speaker A
इंसाफ के लिए जीता हो। मतलब वो एक कम अकल बेवकूफ बादशाह को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं कर सकता। रूलर सिर्फ वही होना चाहिए जो बहुत दानिशमंद हो। जो फिलॉसफर हो। अब आते हैं प्लेटो के भी शागिर्द पे। एरिस्टोटलल की बात कर लेते हैं। एरिस्टोटल प्लेटो का
Speaker A
वो शग था जिसने अपनी दुनिया ही अलग कर दी उस्ताद से। उसने रास्ता अलग कर दिया। प्लेटो ये कहते थे कि असल दुनिया तो वो है जो हम देख नहीं सकते। एरिस्टोटल ने कहा कि भाई पहले उस्ताद जी पहले इस दुनिया को तो
Speaker A
हम समझ लें जो हम देख रहे हैं। एिस्टोटलल के मुताबिक नॉलेज तब आती है जब हम किसी चीज को ऑब्जर्व करते हैं और फिर कंक्लूजंस पे पहुंचते हैं। एिस्टोटलल ने बायोलॉजी, फिजिक्स एथिक्स पॉलिटिक्स लॉजिक पोएट्री हर फील्ड में बहुत ही बेहतरीन काम
Speaker A
किया। प्लेटो ये कहते थे कि हर चीज का अपना पर्पस होता है। जैसे एक पेड़ है तो उसका पर्पस है फल देना। एक इंसान का पर्पस है बेहतरीन इंसान बनना। उसने लाइसियम नाम से अपना एक स्कूल भी खोला। वहां
Speaker A
स्टूडेंट्स सुबह वॉक करते थे और पढ़ते थे। जी वॉक करते-करते पढ़ते थे। इसलिए उन्हें पेरिपेटेटिक्स भी कहते थे। यानी वो घूमते फिरते पढ़ते थे। एरिस्टोटल ने लॉजिक का एक सॉलिड सिस्टम बनाया। उसने कहा कि देखो भाई अगर हम सही प्रिमिससेस से शुरू करें तो हम
Speaker A
सही कंक्लूजंस तक जरूर पहुंच सकते हैं। आज भी फिलॉसोफी में जब हम डिडक्टिव रीजनिंग की बात करते हैं तो एरिस्टोटलल का ही नाम लेते हैं। मैं छोटा सा एग्जांपल देता हूं इससे पहले आपका दिमाग फट जाए। देखिए अगर
Speaker A
हम ये कहें कि तमाम इंसान फानी है। मर्टल है। मर जाएंगे। और फिर हम कहें कि रजा समूह भी एक इंसान है। यह दो सच है। तो लॉजिक के मुताबिक कंक्लूजन यह होगा कि रजा समूह भी फिर फानी है। वो भी मोटल है। यानी
Speaker A
अगर पहली दो बातें सच हैं तो तीसरी बात भी सच होनी चाहिए। इसी को कहते हैं डिडक्टिव रीजनिंग। एरिस्टोटलल ने एथिक्स पर भी बहुत काम किया। उसने कहा कि इंसान का असली मकसद है यूडेडमोनिया यानी फ्लरिश करना। असली
Speaker A
खुशी को हासिल करना। और यह असली खुशी जो है यह तब मिलती है जब इंसान अपने पूरे पोटेंशियल पर पहुंचता है। जब वो अपनी काबिलियत के मुताबिक बेहतरीन इंसान बन जाता है। छोटे से एग्जांपल से समझ लेते हैं। सोचिए कोई इंसान जो म्यूजिक में बड़ा
Speaker A
टैलेंटेड है। अगर वो सिर्फ कैजुअल गाने गाता रहे तो वो सिर्फ टेंपरेरी मजा आएगा उसको। लेकिन जब वो अपनी पूरी मेहनत करे, प्रैक्टिस करे, डेडिकेशन के साथ अपने टैलेंट को पॉलिश करे, स्टेज पर परफॉर्म करे, लोगों को अफेक्ट करे तब वो फिर असली
Speaker A
फुलफिलमेंट वो महसूस करेगा। तब वो बन जाएगा स्टार। यही एरिस्टोटल का यूडमोनिया है। अपने मैक्सिमम पोटेंशियल पर पहुंचना। आज भी साइकोलॉजी में यह सेल्फ हेल्प बुक्स जो है बहुत सारी इसी आईडिया को रिपीट करती है। एिस्टोटलल ने एलेक्जेंडर द ग्रेड को
Speaker A
भी पढ़ाया था। जब एलेक्जेंडर छोटा था उसके वालिद किंग फिलिप टू उसने एरिस्टोटल को उसका उस्ताद लगाया। एिस्टोटलल ने एलेक्जेंडर को ग्रीक कल्चर पढ़ाया, फिलॉसफी पढ़ाई, साइंस पढ़ाई और यह बात आगे चलकर बड़ी इंपॉर्टेंट साबित हुई। क्योंकि एलेक्जेंडर ने जब दुनिया को फतेह किया तो
Speaker A
उसने ग्रीक आइडियाज को भी हर जगह फैलाया। अब आइए जरा बात करते हैं पर्शियन वॉर्स की। यह ग्रीस का सबसे बड़ा इम्तिहान वाला टाइम था। 500 कबल मसीह के आसपास पर्शियन एंपायर बहुत ताकतवर हो चुकी थी। उसने ग्रीस के कुछ शहरों पर हमला कर दिया। पहला
Speaker A
बड़ा मुकाबला हुआ मैराथॉन की जंग में। 400 बीसी में एथेंस के लोगों ने बहुत छोटी सी फौज के साथ बहुत बड़ी ताकत को पर्शियन फौज को हरा दिया। इस जीत ने उनमें एक नया कॉन्फिडेंस पैदा कर दिया। कॉन्फिडेंस इस
Speaker A
बात पे था कि वह अपनी आजादी को प्रोटेक्ट कर सकते हैं। यहां एक मशहूर वाक्या भी है। मैराथॉन की जंग के बाद एक मैसेंजर मैराथॉन से एथेंस तक भागता गया ताकि वो अब जीत के खबर सुना सके। जैसे ही वो वहां पहुंचा
Speaker A
उसने कहा हम जीत गए हैं। वो इतना थक चुका था कि ये खबर सुनाते साथ ही वो गिर गया और मर गया। इसी वजह से आज मॉडर्न मैराथॉन जो रेस है उसका नाम जो मैराथॉन पड़ा वो इसी वाक्य की वजह से पड़ा क्योंकि वो बंदा 42
Speaker A
कि.मी. तक भागा था। फिर जाके उसने यह ऐलान किया था। चलो भाई अब जंगों पे आते हैं। 400 बीसी पहले दूसरा बड़ा हमला हुआ। इस बार परर्शियन बादशाह जरसी खुद आया और बहुत बड़ी फौज लेकर आया और यहीं हुई थर्मोपलाई
Speaker A
की जंग। 300 स्पार्टंस ने किंग लनाडस की कयादत में बहुत बड़ी पर्शियन फौज को हरा दिया। ये कहानी आज भी दुनिया भर में बड़ी मशहूर है। 300 मूवी भी इस पर बनी है। इससे यह साबित होता है कि हिम्मत और डिसिप्लिन
Speaker A
फौज में कितनी बड़ी जरूरी चीज है। फिर उसके बाद आई बैटल ऑफ सलामीस। ये एक समुद्री जंग थी। एथंस का बहुत ही एक होशियार और इंटेलिजेंट वेरी स्मार्ट जनरल था। उसका नाम था थेनस टॉक्लेस। उसने अपनी स्ट्रेटजी से परर्शियंस को फिर हरा दिया।
Speaker A
नेवल वाली जंग में भी हरा दिया। इससे ग्रीक्स को यह एहसास हुआ कि भाई हम तो जो है ना कोई चीज है और फिर ग्रीकस का सबसे बड़ा हीरो भी आ गया एलेक्जेंडर द ग्रेट। वो 356 बीसी में पैदा हुआ। उसके वालिद
Speaker A
किंग फिलिप टू मेसडोनिया के बादशाह थे। एरिस्टोटलल उसका उस्ताद था। 20 साल की उम्र में एलेक्जेंडर बादशाह बन गया। बादशाह बनते ही उसने फैसला किया कि वो परर्शिया को हराएगा। यह उसके वालिद का बहुत बड़ा ख्वाब था। सिर्फ 10 साल में
Speaker A
उसने बहुत बड़ी एंपायर बना ली थी। उसने परशिया को हराया, इजिप्ट को जीता। हिंदुस्तान तक आ पहुंचा। लेकिन एलेग्जेंडर सिर्फ जीतने वाले हीरो में से नहीं था। वो ग्रीक कल्चर को दुनिया भर में फैला भी रहा था। उसने हर जीते हुए शहर में ग्रीक तर्ज
Speaker A
के स्कूल्स बनाए, थिएटर बनाया, लाइब्रेरीज बनाई। इस दौर को हिलेनिस्टिक पीरियड भी कहते हैं। जहां ग्रीक, पर्शियन और इजिप्शन कल्चर मिक्स हो गए। एलेक्जेंडर 32 साल में ही इस दुनिया से चला गया। फौत हो गया। लेकिन उसने जो एंपायर बनाई उसने दुनिया को
Speaker A
हमेशा के लिए बदल के रख दिया। ग्रीक आइडियाज जो थे वो मिडिल ईस्ट में पहुंचे, एशिया तक पहुंचे। कदीम ग्रीस ने सिर्फ फिलॉसोफर्स ऑफ़ वॉरियर्स नहीं दिए बल्कि फन में भी बहुत बड़ा हिस्सा डाला है। उनकी फनो तामीर आज भी दुनिया भर में कॉपी की
Speaker A
जाती है। उनके पास तीन तर्ज के कॉलम्स थे। डोरिक सादा और मजबूत आयोनिक थोड़ा सजा हुआ और फिर कोरिंथियन सबसे ज्यादा फैंसी। सबसे मशहूर उनकी इमारत है परनॉन की। एथेंस के एट एक्रोपलस ये जो परथनोन है ये जो प्लेस
Speaker A
है ये उनकी जो गॉडेस है देवी जो इनकी अथीना उसके लिए डेडिकेटेड है ये जगह। आज भी लोग इसकी खूबसूरती देखने आते हैं और बड़े हैरान होते हैं। स्कल्प्चर भी इनका बहुत एडवांस था। वो इंसान के जिस्म को ऐसा
Speaker A
परफेक्ट तरीके से दिखाते थे बहुत रियलिज्म उसमें डालते थे। उनका मकसद ये नहीं होता था कि बस एक इंसान के जैसा कोई पुतला बना दे। वो उसमें इतनी डिटेल डालते थे कि जितना वो असली लग सकता है वो लगे। थिएटर
Speaker A
में ग्रीस की बहुत कंट्रीब्यूशन है। पहली बार लोगों ने स्टेज पर ड्रामा परफॉर्म जो किया वो भी ग्रीस में था। आज भी दुनिया भर के थिएटर्स ग्रीस के जो क्लासिकल ड्रामाज़ हैं, वह परफॉर्म करते हैं। ओलंपिक्स की गेम्स भी ग्रीस से शुरू हुई। 776 बीसी में
Speaker A
पहली बार ओलंपिक्स हुई। यह सिर्फ गेम्स नहीं थी। एक मजहबी सखा इवेंट था। आज भी ओलंपिक्स जो मनाते हैं उसके ताने-बाने ग्रीस से ही मिलते हैं। दोस्तों, यह सब ढाई हजार साल पहले की बात है। लेकिन आज भी
Speaker A
ग्रीस की बात हम कर रहे हैं। देखिए क्यों? क्योंकि ग्रीस ने जो आइडियाज दिए वो बहुत ताकतवर है। पहला आईडिया हम अपने आप को बेहतर कैसे कर सकते हैं? पहले लोग कहते थे कि भाई जिंदगी में जो कुछ है बस वो तकदीर
Speaker A
है लेकिन ग्रीस ने कहा कि नहीं इंसान अपनी सोच से अपनी जिंदगी बदल सकता है। वो बेहतर बन सकता है। यह आईडिया आज भी हर सेल्फ हेल्प बुक में होता ही होता है। दूसरी बात हम सवाल कर सकते हैं। सोक्रेटिस ने हमें
Speaker A
यह सिखाया है कि सवाल पूछना बहुत जरूरी है। आज भी जब कोई साइंटिफिक रिसर्च करता है तो सवाल पूछता है। सवाल के बगैर तो कुछ हो ही नहीं सकता ना। तीसरी बात जो हमें ग्रीस से मिली। हम बेहतर मुआशरा कैसे बना
Speaker A
सकते हैं। ग्रीस ने डेमोक्रेसी का आईडिया दिया कि लोगों की मर्जी से हुकूमत होनी चाहिए। आज भी जब हम इलेक्शंस की बात करते हैं जो हम कहते हैं हर इंसान का एक बराबर वोट है। ये सब आइडियाज जो है ग्रीस से आए।
Speaker A
चौथी बात खूबसूरत। ग्रीस ने सिर्फ फलसफा नहीं दिया। उसने पैरथनोन दिया। खूबसूरती मुजस्मे स्कल्प्चर थिएटर उसने यह सिखाया कि इंसान सिर्फ रोटी और कपड़े के लिए नहीं जीता। वह खूबसूरती के लिए भी जीता है। खूबसूरती जिंदगी को मायने देती है। ग्रीस
Speaker A
ने इंसान को यह सिखाया कि वह सिर्फ जीने के लिए नहीं पैदा हुआ बल्कि समझने के लिए, पूछने के लिए, बेहतर बनने के लिए पैदा हुआ है। और ये सबसे बड़ी देन थी जो ग्रीस की सिविलाइजेशन ने पूरी दुनिया को दी है। तो
Speaker A
भाई आज हमने देखा कि एक छोटा सा इलाका जो समंदर के किनारे था वो दुनिया को क्या-क्या बड़े-बड़े आइडियाज देकर चला गया है। जिसकी वजह से आने वाली इतनी जनरेशंस की जिंदगियां बदल गई। तो भाई अगले एपिसोड में हम बात करेंगे रोमन एंपायर के उरूज की
Speaker A
और ज़वाल की। अगर यह वीडियो आपको पसंद आई तो इसको लाइक शेयर जरूर करना। यह एजुकेशनल वीडियोस हैं। मुझे पता है इन पे व्यूज बहुत कम आते हैं लेकिन मजा बहुत आता है। तो भाई जो लोग पढ़ना चाहते हैं जो लोग
Speaker A
समझना चाहते हैं मुझे चाहिए भी वही लोग। बाकी आपने मेरी कॉमेडी सुननी है तो मेरे Instagram पे चले जाएं। वो छोटे पैकेज में रीलो में आपको मिल जाएगी या फिर टिकट खरीदें मेरा और मेरे किसी स्टैंड अप कॉमेडी में आ जाए। चलो भाई मिलते हैं आपसे
Speaker A
फिर अगली वीडियो में। तब तक के लिए मुझे दे इजाजत। मैं चला गुड बाय।
Topics:एंशिएंट ग्रीसडेमोक्रेसीसोक्रेटीसप्लेटोअरिस्टोटलफिलॉसोफीग्रीक इतिहाससिटी स्टेट्सग्रीक संस्कृतिपश्चिमी सभ्यता











