रोम के पतन के बाद यूरोप के डार्क एजेस की कहानी, जिसमें बीमारी, फ्यूडल सिस्टम, चर्च की ताकत और क्रूसेड्स शामिल हैं।
Key Takeaways
- रोमन साम्राज्य के पतन के बाद यूरोप में राजनीतिक और सामाजिक अस्थिरता आई।
- फ्यूडल सिस्टम ने सुरक्षा दी लेकिन व्यक्तिगत स्वतंत्रता सीमित की।
- चर्च ने धर्म के साथ-साथ राजनीति और शिक्षा पर भी नियंत्रण रखा।
- क्रूसेड्स ने धार्मिक और राजनीतिक संघर्षों को जन्म दिया।
- ब्लैक डेथ ने यूरोप की आबादी और समाज को गहराई से प्रभावित किया।
What the video covers
- 476 ईस्वी में वेस्टर्न रोमन एम्पायर का पतन हुआ, जिससे यूरोप में पावर वैक्यूम पैदा हुआ।
- डार्क एजेस में यूरोप की आबादी आधी तक कम हो गई और जीवन स्तर बहुत खराब था।
- फ्यूडल सिस्टम ने सामाजिक व्यवस्था बनाई, जिसमें लोग जन्म से ही अपनी स्थिति में बंधे रहते थे।
- कैथोलिक चर्च ने राजनीतिक, आर्थिक और शैक्षिक क्षेत्र में अत्यधिक नियंत्रण स्थापित किया।
- चर्च ने लोगों को अपनी जमीन और धन दान करने के लिए प्रेरित किया, जिससे वह यूरोप की सबसे बड़ी ज़मीनदार बन गई।
- 1095 में पॉप अर्बन द्वितीय ने क्रूसेड्स की घोषणा की, जिससे धार्मिक युद्ध शुरू हुए।
- क्रूसेड्स ने धार्मिक लालच और राजनीतिक कारणों से कई बार यूरोप और मध्य पूर्व में संघर्ष बढ़ाया।
- ब्लैक डेथ महामारी ने यूरोप की आबादी को भारी नुकसान पहुंचाया और सामाजिक-आर्थिक बदलाव लाए।
- डार्क एजेस के अंत में यूरोप ने पुनर्जागरण की ओर कदम बढ़ाए।
- इस दौर में जीवन कठिन था, लेकिन यह यूरोप के इतिहास में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन काल था।
Chapters
- 00:00यूरोप का डार्क एजेस का परिचय और महामारी
- 01:16रोमन साम्राज्य का पतन और उसके प्रभाव
- 02:15डार्क एजेस में जीवन की कठिनाइयाँ
- 03:15फ्यूडल सिस्टम और सामाजिक संरचना
- 05:09कैथोलिक चर्च की बढ़ती सत्ता
- 06:06मध्यकालीन यूरोप में क्रूसेड्स की शुरुआत
- 08:02क्रूसेड्स के परिणाम और विवाद
- 12:20ब्लैक डेथ का प्रभाव और डार्क एजेस का अंत
- 16:27आगे का सफर: पुनर्जागरण की ओर
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Speaker A
क्या आपको पता है कि यूरोप ने वो जमाना भी देखा है कि जब एक बीमारी ने उसकी पापुलेशन तकरीबन आधी खत्म कर दी। सड़कों पर कचरा और गंदगी से फैला हुआ यूरोप कभी आपने इमेजिन किया है, जिसका पानी गंदा, हवा में बदबू और
Speaker A
हर घर में मौत का मंजर। लोग बेबस थे, कोई इलाज नहीं, कोई डॉक्टर नहीं, सिर्फ चर्च का दरवाजा था जहां पर वह दुआ मांगने जाते थे और इंतजार करते थे कि उनकी बारी कब आएगी। यह था असली काला दौर यूरोप का, जिसको डार्क
Speaker A
एजेस भी हिस्टोरियंस कहते हैं। आज हम दोस्तों बात करेंगे उस पीरियड की जो रोम के गिरने के बाद आया। हिस्टोरियंस इस जमाने को डार्क एजेस या मिडिल एजेस कहते हैं। यह दौर 476 एडी से लेकर 1350 एडी तक
Speaker A
चला। लगभग 900 साल तक चला। रोम का पावरफुल एंपायर जब गिरा तो पूरा यूरोप बर्बाद ही हो गया। फिर आहिस्ता-आहिस्ता नए चैप्टर्स खुलने लग गए। नाइट्स आए। चर्च बहुत पावरफुल हो गया। क्रूसेज हुई और सबसे बड़ी तबाही ब्लैक डेथ ने फैला दी। तो भाई आज हम
Speaker A
इस यूरोप के डार्क पीरियड को एक कहानी की तरह समझते हैं। यह दौर कैसे आया और लोग इसमें कैसे जीते थे। तो जी रोम के गिरने के बाद हुआ क्या? 476 एडी में वेस्टर्न रोमन एंपायर गिरी। आखिरी जो एंपरर था रोमलस
Speaker A
अगस्टलस उसको एक जर्मेनिक लीडर ओडसर ने शिकस्त दे दी और उसको तख्त से हटा दिया। ये तो हमने पिछली वीडियो में डिटेल से डिस्कस किया। लेकिन यह एक दिन में तो हुआ नहीं। रोम कई सदियों से आहिस्ता-आहिस्ता कमजोर होता जा रहा था। उसकी इकॉनमी गिरती
Speaker A
जा रही थी। आर्मी भी कमजोर होती जा रही थी। बॉर्डर पे बार्बेरियंस के जो अटैक्स थे वो भी बढ़ते जा रहे थे। बहरहाल रोमन एंपायर जैसे गिरी तो उसके बाद एक पावर का वैक्यूम बन गया। मतलब कोई सेंट्रल
Speaker A
गवर्नमेंट अब रही नहीं। कोई स्ट्रांग लॉज़ नहीं रहे। कोई ऐसी ताकत नहीं रही जो पूरे यूरोप को कंट्रोल कर सके। शहरों में लोग आहिस्ता-आहिस्ता कम होने लगे। ट्रेड लगभग खत्म ही हो गया। स्कूल और यूनिवर्सिटीज बंद हो गई। इसलिए हिस्टोरियंस इस जमाने को
Speaker A
डार्क एजेस कहते हैं। पॉइंट यहां पे याद रखने वाली यह है कि इस जमाने को जो डार्क एजेस कहते हैं तो वह यूरोप के लिए कहते हैं। पूरी दुनिया में ऐसे हालात नहीं चल रहे थे क्योंकि उनके हिसाब से यह दौर उनका
Speaker A
सबसे बुरा था। इल्म जो है वो कंप्लीटली रुक गया था। कल्चर सिविलाइजेशन तबाह हो गई थी। उसमें काले बादल छाके थे। लोगों की रोजाना की जो जिंदगी है वो बहुत ही गंदी थी। बहुत मुश्किल से भरी हुई। रोम के टाइम
Speaker A
में जो शहरों में एक्वा डक्ट्स होते थे और पब्लिक बाथ्स होते थे, जहां लोग नहाते थे, वो सब बर्बाद हो चुके थे। अब कोई सेंट्रल सिस्टम नहीं था इसलिए सड़कों पर सफाई करने वाले लोग भी नहीं थे। लोग अपना कचरा, गंदा
Speaker A
पानी और इवन इंसानी जो वेस्ट मटेरियल है वो सीधा सड़कों पर फेंक देते थे या नदियों में जो है वो डाल देते थे। शहरों में बदबू फैली रहती थी। हर जगह चूहे, फ्लीज और इंसेक्ट्स होते थे। घर छोटे-छोटे होते थे
Speaker A
और अंदर आग जली रहती थी, जिसका जो धुआं है उसके निकलने की कोई सही जगह भी नहीं होती थी। पेशेंट्स के घर में पूरी फैमिली के साथ उनके जानवर भी रहते थे। सूअर भी रहते थे। गाय, मुर्गियां सब एक ही जगह
Speaker A
रहते थे। लोग हफ्ते में एक बार नहाते थे, दो बार नहाते थे। कई तो महीनों महीनों तक नहाते ही नहीं थे। कपड़े गंदे रहते थे। स्किन इंफेक्शंस होती थी। ये दांत तो गंदे मतलब बहुत ही कॉमन चीज थी वहां पे।
Speaker A
हॉस्पिटल जाओ तो कोई प्रॉपर डॉक्टर्स नहीं थे। अगर कोई बीमार होता तो सिर्फ दुआएं की जाती भाई। या फिर हर्ब्स जो है ना उनसे इलाज करने की कोशिश की जाती, जड़ी बूटियों से। तो यह गंदगी और लैक ऑफ जो क्लीननेस है
Speaker A
यह मिडिल एजेस की एक बहुत बड़ी रियलिटी है। हर शहर या इलाका अपने आप को खुद प्रोटेक्ट करता था। लॉर्ड के पास अपनी आर्मी होती थी जिसमें नाइट्स होते थे। उसके पास अपना कासल होता था और अगर कोई
Speaker A
दुश्मन आ भी जाए तो लोग उस कासल में जो है ना शेल्टर ले लेते थे। अगर लॉर्ड चाहे तो। तो ये लोकल एक प्रोटेक्शन का सिस्टम था। बहुत ज्यादा स्ट्रिक्ट था। तो ये जो था ना एक फ्यूडल सिस्टम था। अगर आप इसमें पेजेंट
Speaker A
के घर में पैदा हुए हैं तो आपकी जिंदगी पेजेंट ही रहेगी। पूरी जिंदगी आप लॉर्ड की जमीन पर काम करते रहेंगे। उसको टैक्स देते रहेंगे और कभी भी इस जिंदगी से बाहर नहीं निकल सकते। फिर आपके बच्चे भी पेजेंट ही
Speaker A
रहेंगे। कोई चांस नहीं था। आपका फ्यूचर आपके पैदा होने से ही डिसाइड हो चुका होता था कि आप जो है ना आपका क्या होने वाला है। ये फ्यूडल सिस्टम जो है लगभग 500 से 600 साल तक चला। ये मिडिल एजेस का सबसे
Speaker A
बड़ा सोशल स्ट्रक्चर था। ये सिस्टम लोगों को सिक्योरिटी तो देता था लेकिन उनसे फ्रीडम छीन लेता था। लोग अपनी जिंदगी खुद चूज़ नहीं कर सकते थे कि उन्होंने क्या करना है। जो कुछ भी उनके साथ होता था वो
Speaker A
उनके बर्थ से ही फिक्स्ड होता था। फिर भी ये सिस्टम यूरोप को एक नया ऑर्डर तो देता था। रोमन के गिरने के बाद जो केओस मच गया उससे ये फ्यूडल सिस्टम जो है उसने जन्म लिया। अब इस दौर में यूरोप की सबसे बड़ी
Speaker A
पावरफुल चीज जो बन गई थी वो था कैथोलिक चर्च। असल में चर्च रोम के जमाने से ही बड़ा पावरफुल था। लेकिन रोम के गिरने के बाद वो और भी ज्यादा स्ट्रांग हो गया। क्योंकि कोई और स्ट्रांग इंस्टीट्यूशन बचा
Speaker A
ही नहीं था। गवर्नमेंट ही नहीं थी। सेंट्रल पावर ही नहीं था। तो चर्च ही वो जगह थी जिसको पावर हासिल हो गई। चर्च यहां पे कोई सिर्फ रिलीजियस इंस्टीट्यूशन नहीं था कि आप वहां जाओ और बस दुआएं करो। नहीं।
Speaker A
उसका इकॉनमी में भी हिस्सा था। कल्चर में, एजुकेशन में हर जगह पर उसी का कंट्रोल था। चर्च के पास जमीन भी बहुत ज्यादा थी। लोग अपनी जमीन लिटरली चर्च को डोनेट करते थे ताकि उनकी रूह जन्नत में जा सके। कई लोग
Speaker A
अपनी जमीनें बेचकर सारे पैसे चर्च को दे देते थे। इस वजह से चर्च यूरोप की सबसे बड़ी लैंड ओनर बन गई भाई। बहुत अमीर हो गई चर्च। चर्च ने असल में लोगों को यह समझा दिया कि अगर तुम चर्च को पैसे दोगे या
Speaker A
जमीन दोगे तो तुम्हारे गुनाह माफ हो जाएंगे। इसलिए लोग अपनी जमीनें दे देते थे। दूसरी बात ये कि चर्च के पास एजुकेशन का भी पूरा कंट्रोल होता था। सिर्फ प्रीस्ट जो मंक्स थे वो ही पढ़ना लिखना जानते थे। आम लोग बिल्कुल ही जाहिल थे।
Speaker A
बाइबल सिर्फ लैटिन में ही थी और आम लोग लैटिन समझते ही नहीं थे। इसलिए वो प्रीस्ट पर ही डिपेंड करते थे। लोग जितना भी कुछ जानते थे वो चर्च के थ्रू ही जानते थे। चर्च लोगों की सोच पर भी कंट्रोल रखती
Speaker A
चर्च के पास स्पिरिचुअल पावर भी बहुत थी। लोग कहते थे कि पोप जो है जो चर्च का लीडर है वह खुदा का रिप्रेजेंटेटिव है। इस जमीन पर वह आया हुआ है। खुदा की तरफ से भेजा गया। अगर पोप किसी को भी एक्स कम्युनिकेट
Speaker A
कर दे यानी चर्च से निकाल दे तो उसकी रूह सीधी जहन्नुम में चली जाएगी। ये बहुत बड़ी धमकी थी। किंग्स भी इस धमकी से डरते थे। चर्च के पास पॉलिटिकल पावर भी बहुत थी। क्योंकि बहुत सारे किंग्स अपनी लेजिटसी जो
Speaker A
है ना वो चर्च से ही हासिल करते थे। अगर चर्च किसी किंग को सपोर्ट करता था तो वो किंग बहुत पावरफुल हो जाता था। अगर चर्च किसी किंग के खिलाफ हो जाता तो बस उसकी पोजीशन वीक हो जाती। कई किंग्स जो थे वो
Speaker A
पोप के पास जाते थे ताकि वो उनको दुआ दे, ब्लेसिंग दें। एक प्रॉपर ऑफिशियल सेरेमनी होती थी। तो भाई इन मिडिल एजेस में चर्च से बड़ी कोई पावर नहीं थी। किंग्स डरते थे। इस धमकी से डरते थे प्रीस्ट की। अब हम
Speaker A
आते हैं मिडिल एजेस के सबसे ज्यादा वायलेंट और ड्रामेटिक हिस्से पर, क्रूशेड्स पे। यह मिडिल एजेस के सबसे फेमस और कंट्रोवर्शियल इवेंट से। हुआ ये कि भाई 1095 एडी में पॉप अर्बन टू ने क्लमेंट फ्रांस में एक बहुत बड़ी अनाउंसमेंट की। उसने कहा
Speaker A
कि मुसलमानों ने हमारी होली लैंड जो है जेरूसलम उस पर कब्जा कर लिया। क्रिश्चियंस को चाहिए कि वो इस जमीन को वापस लें। उसने कहा कि इसलिए हमें होली वॉर करनी पड़ेगी। हम पर फर्ज हो गई है। सबसे बड़ी बात ये थी
Speaker A
कि उसने कहा कि जो भी इस जंग में हिस्सा लेगा उसके सारे गुनाह माफ कर दिए जाएंगे। भाई ये उस टाइम के लोगों के लिए बहुत बड़ी बात थी। बहुत से लोग अपनी जिंदगी से वैसे ही तंग आ चुके थे। पेशेंट्स की तो वैसे ही
Speaker A
लाइफ कोई नहीं थी। इसमें बहुत सारे क्रिमिनल लोग भी शामिल थे। उनके लिए ये मतलब एक गोल्डन चांस था। वो अपने सारे गुनाह माफ करवा सकते थे। बस एक एडवेंचर पे निकल जाना है। आगे जो जिंदगी मिलेगी वो
Speaker A
बेहतरीन मिल जाएगी। जन्नत मिल जाएगी। अब सोचने वाली बात ये है कि हालांकि क्रिश्चियनिटी में एक बेसिक टीचिंग ये है कि अगर आपके एक गाल पर कोई थप्पड़ मारे तो उसको दूसरा गाल दे दो। ये जीसस ने कहा है।
Speaker A
ये बात ये जो मुन्ना भाई में वो बापू कहते हैं ना गांधी जी तो ये एक गांधी की कोई प्रिंसिपल नहीं है। गांधी ने भी ये क्रिश्चियनिटी से ही सीखा था। तो वो क्रिश्चियनिटी इन इट्स कोर वो माफी का सबक
Speaker A
देती है और वायलेंस से दूर रहने को कहती है। लेकिन ये देखिए पॉप जो है ना वो खुद लोगों को जंग के लिए बुला रहा था और उनको यह लालच दे रहा था कि आपके गुनाह माफ हो जाएंगे। तो बेसिकली जो मैं पॉइंट बनाना
Speaker A
चाह रहा हूं वो ये है कि रिलीजन का भाई कार्ड यूज़ करके आप एक पीसफुल रिलिजन को भी वायलेंट बना सकते हैं। अब इस अनाउंसमेंट के बाद हजारों लोग घर से निकल पड़े। नाइट्स और पेजेंट्स तो थे ही, औरतें और
Speaker A
बच्चे भी अपना घर जो है छोड़ के जेरूसलम की तरफ चल पड़े। और यहां हुई फर्स्ट क्रूसेट 1096 से 1099 तक। यह क्रूसेट सक्सेसफुल रहा। क्रिश्चियंस ने जेरूसलम जीत लिया। बहुत से मुसलमानों और यहूदियों
Speaker A
क्रूसेट थी ये। लेकिन ये सिर्फ शुरुआत थी। अगले 200 साल में टोटल आठ मेजर क्रूसेट्स हुई है। कुछ सक्सेसफुल रही और कुछ कंप्लीटली फेल हो गई। सबसे फेलियर जो था क्रूसेट जो क्रिश्चियन पॉइंट ऑफ व्यू से वो था चौथा जो फोर्थ क्रूसेट। ये क्रूसाइड
Speaker A
ओरिजिनली तो जेरूसलम वापस लेने के लिए था। लेकिन उन्होंने कॉन्स्टेंटोपल पर भी अटैक कर दिया। मतलब अपने क्रिश्चियन भाइयों पर ही उन्होंने हमला कर दिया। ये कैसे हुआ ये आपको मैं सिंपल वर्ड्स में जरा समझाता हूं कहानी शॉर्ट करके। भाई कॉन्स्टेंटिनोपल जो
Speaker A
आज का इस्तांबुल है उस दौर में मैंने पिछली वीडियो में आपको समझाया था कि वहां पे जो है ना बजेंटन एंपायर अब बन चुकी थी। वहां का एक प्रिंस था जिसका नाम था एलेगजियोस फोर्थ। उसके चाचे ने उसके बाप
Speaker A
एपरर आइजक टू को तख्त से हटा दिया और कैद कर दिया। तो जो एलेक्सोस फोर था वो भाग कर वेस्ट चला गया और क्रूसेडर्स के साथ मिल गया। उनके साथ उसने डील की। उसने कहा कि भाई अगर तुम लोग मुझे अपना तख्त वापस
Speaker A
करवाओगे तो मैं तुम लोगों को बहुत सारा गोल्ड दे दूंगा और जेरूसलम फतेह करने के लिए तुम्हारी मदद भी करूंगा। बहुत सारे फौजी तुम्हें दे दूंगा। तो क्रुसेडर्स ने 1203 में उसकी मदद की और उससे जो है कॉनस्टटनोपल जो है उसका एपरर बना दिया।
Speaker A
लेकिन जब वो एपरर बना तो उसके बाद उसने कोई सोना नहीं दिया। वो अब वादा खिलाफी उसने कर दी। कोई पैसे नहीं दिए और क्रुसेडर्स जो थे उनको गुस्सा आ गया। इसलिए 204 में क्रुसेडर्स ने कॉन्सनोपल पर ही जो है ना दोबारा हमला कर दिया। तो
Speaker A
उन्होंने एक तरह से अपने क्रिश्चियन भाइयों का ही शहर लूट लिया। बहुत लोगों को मारा और फिर जो है वो अपना लीडर बेल्डविन ऑफ लैंडर्स को नया एपरर बना दिया। इससे जो बसेंट एंपायर थी वो बहुत कमजोर हो गई। अब
Speaker A
इन क्रूशियर्स के पीछे जो रीज़ंस थे पहला तो था रिलीजियस रीज़न। पोप और चर्च ये कहते थे कि ये होली लैंड है जेरूशलम और ये हमने वापस लेनी है। ये खुदा का हुक्म है। तो क्रिश्चियंस पे ये फर्ज है। दूसरी रीज़न थी
Speaker A
इकोनॉमिक। क्योंकि यूरोप के लोग ये क्रूसेट करने के बाद मिडिल ईस्ट जो है उसके साथ ट्रेड उनका बढ़ सकता था। वहां से फिर उनको स्पाइसेस, सिल्क, गोल्ड दूसरी महंगी चीजें जो है वह हासिल हो जाती। तो बहुत से लोगों ने इस जंग को दौलत कमाने का
Speaker A
एक मौका भी समझा। तीसरी और रीज़न यह है कि यूरोप में जो फ्यूडरल सिस्टम था उसमें भी बड़े लूपोल थे जिसकी वजह से क्रूसेट्स मतलब उसने कंट्रीब्यूट किया। जैसे कि कि भाई वहां बहुत सारे एक्स्ट्रा नाइट्स थे, एक्स्ट्रा सोल्जर्स थे। क्योंकि बड़ी जमीन
Speaker A
जो थी वो सिर्फ अपने बड़े बेटे को मिलती थी। तो इसलिए जो छोटे बेटे होते थे अक्सर वो बेरोजगार रह जाते थे। ये लोग यूरोप में ही जो है ना वो वायलेंस और प्रॉब्लम क्रिएट करते या अपने बड़े भाई को मारते
Speaker A
फिर जो है तख्त ले लेते कभी वो लूट मचा देते कभी लोकल जंगों में जो है वो उलझ जाते तो चर्च और यूरोपियन रूलर्स ने ये सोचा कि ये जो एक्स्ट्रा बचे हैं बजाय कि ये मसले क्रिएट करें इनको होलीलैंड की जंग
Speaker A
में भेज देते हैं। बेहतर है इस तरह जो है यूरोप में पीस ही रहेगा और उनकी फाइटिंग एनर्जी जो है वो एक पॉजिटिव डायरेक्शन में लगी रहेगी जिससे हमें फायदा होगा। लेकिन इससे जो हुआ वो ये था कि यूरोप और मिडिल
Speaker A
ईस्ट के दरमियान ट्रेड वाकई बहुत बढ़ गया। यूरोपियंस ने बहुत सी नई चीजें भी सीखी इस दौरान। एडवांस मेडिसिंस, फिलॉसफी, साइंस जो उस वक्त के मुसलमानों के पास थी क्योंकि उस वक्त मुसलमानों ने काफी इन चीजों में तरक्की कर रखी थी। अलजेब्रा और
Speaker A
बहुत सी साइंटिफिक स्टडीज भी उन्होंने सीखी। ये सारी नॉलेज बाद में यूरोप को जाके रेनोजों्स में काम आई। लेकिन इसका नेगेटिव जो असर था वो ये था कि क्रूश की वजह से मुसलमानों और क्रिश्चियंस के दरमियान एक हेट्रिड जो है एक मिसट्रस्ट वो
Speaker A
बहुत बढ़ गया था। क्योंकि ये सिर्फ एक जंग नहीं थी। ये एक ऐसा कॉन्फ्लिक्ट था जो जनरेशंस तक चला। कई एस्टीमेट्स के मुताबिक जो है पूरी क्रूसेट्स में जो 95 से लेकर 91 तक चली उस दौरान 1 मिलियन से 3 मिलियन
Speaker A
लोग मारे गए। जिनमें मुसलमान भी थे, क्रिश्चियंस भी थे, जूस भी शामिल तो यह जो क्रूशेट्स हैं वह आज भी मिडिल एजेस की सबसे कंट्रोवर्शियल इवेंट्स हैं। कुछ लोग यह भी कहते हैं कि यह यह जो वॉर्स थी यह
Speaker A
बेसिकली कॉलोनियल वॉारर्स ही थी जिसमें यूरोप ये चाहता था कि मिडिल ईस्ट पर वो कब्जा करे। मेरी राय भी कुछ इसी तरह की है। ये दोनों बातें ही कुछ हद तक सही है कि यूरोप ने मिडिल ईस्ट पर कंट्रोल हासिल
Speaker A
करना था। उसके रिसोर्सेज हासिल करने की कोशिश उसने की लेकिन उसको रिलीजन का रंग दे दिया ताकि वो मोटिवेट हो जाए। खैर अब आते हैं मिडिल एजेस के सबसे डार्क और खतरनाक हिस्से पर जब ब्लैक डेथ ने यूरोप
Speaker A
को हिला के रख दिया। 1347 से लेके 1351 तक एक बहुत बड़ा प्लेग जो है उसने पूरे कॉन्टिनेंट को तबाह कर दिया। इसे लोग ग्रेट मोटलिटी भी कहते थे। यह बीमारी यर्सनिया पेस्टिस नाम के एक बैक्टीरिया से होती थी जो इनफेक्टेड फ्लीज के थ्रू फैलती
Speaker A
थी। यह बैक्टीरिया जो था यह ओरिजिनली सेंट्रल एशिया से ही आया था और मंगोल एंपायर के जो ट्रेड रूट्स थे वहां से यह यूरोप तक पहुंचा। प्लेग जो है वह तीन तरह का था और तीन तरह से फैलता था। एक था
Speaker A
बुबोनिक प्लैग। सबसे कॉमन ये था। इसमें बॉडी के जो लिंफ नोड्स हैं वो वो इनफ्लेम हो जाते थे। वो सूझ जाते थे और बड़ा दर्दनाक जो है ये एक लम्हा होता था पेशेंट के लिए। तेज बुखार हो जाता था और इलाज ना
Speaker A
होता तो 60 टू 80% लोग इसमें मर जाते थे। फिर दूसरा था सेप्टिसेमिक प्लग। यह बैक्टीरिया जो है वो ब्लड में चला जाता था। खून लिटरली काला हो जाता था। ब्लैक ब्लड हो जाता था और लोग जो है इसमें बहुत
Speaker A
जल्दी मर जाते थे। फिर था निमोनिक ब्लैक। सबसे खतरनाक ये था क्योंकि यह हवा के थ्रू फैलता था भाई। एक इनफेक्टेड इंसान से दूसरे इंसान में फैलता था। इस तरह से हवा के थ्रू। उस वक्त यूरोप की पपुलेशन जो थी
Speaker A
वो लगभग 70 से 80 मिलियन थी। ब्लैक डेथ ने ऑलमोस्ट 30 से 50% लोगों को मार दिया। यानी 30 से 40 मिलियन लोग। कुछ शहरों में तो 60 टू 70% पापुलेशन ही खत्म हो गई। तबाही इतनी बड़ी थी कि लोग घबराहट में
Speaker A
अपने घर छोड़कर भाग जाते थे। फैमिलीज़ टूट जाती थी। मां-बाप बच्चों को छोड़ देते थे। बच्चे अपने वालिदन को छोड़ देते थे। सड़कों पर लाशें पड़ी होती थी क्योंकि दफनाने वाले लोग ही नहीं थे। कई लोग घर में ही मर जाते थे और उनकी लाशें हफ्ते
Speaker A
हफ्ते जो है वहीं पर पड़ी रहती थी। लोग ये समझते थे कि ये गॉड का अज़ाब है। ये पनिशमेंट है। तो कुछ लोग इसमें एक्सट्रीम रिलीजियस हो गए। कुछ कुछ लोग फ्लेजिलेंट्स बन गए। प्लेजिलेंट्स होते हैं वो लोग जो
Speaker A
अपने आप को चेन्स और विप्स जो होती हैं कोड़े वो मारते हैं वो मारते हैं ताकि उनके जो है ना उनके गुनाह माफ हो जाए वो शहर-शहर वो घूमते हैं और अपने आप को सेल्फ पनिशमेंट का एक डिस्प्ले करते हैं। दूसरी
Speaker A
अफवाह ये फैली के जो जूस हैं उन्होंने जो कुएं होते हैं पानी के उनमें जहर मिला दिया। कुछ लोगों ने यानी जूस पे ही इल्जाम लगा दिया। अब ये बात साइंटिफिकली पॉसिबल नहीं थी। लेकिन यूरोप में इसकी वजह से जो
Speaker A
जूस हैं उनके अगेंस्ट बहुत ज्यादा मॉब अटैक्स हुए। बहुत सारे जूस को मार दिया गया। इस दौर में यूरोप ने प्रॉपर इसमें एंटीटिज्म जो थी ना इस दौर में यूरोप में फैल गई। उसकी एक बड़ी लहर पैदा हो गई।
Speaker A
ब्लैक डेथ जो है ये इसका असर सिर्फ तबाही तक महदूद नहीं रहा। इसके असरात बहुत लंबे चले। यूरोप को हमेशा के लिए बदल दिया। इसके इकोनॉमिक असर लेबर की शॉर्टेज हो गई। जो लोग बचे थे उनकी वेजेस बढ़ गई क्योंकि
Speaker A
काम करने वाले लोग ही कम थे। तो पेशेंट्स जो थे वो फिर बेहतर कंडीशंस भी मांगने लग गए। फुडल जो सिस्टम था वो आहिस्ता-आहिस्ता कमजोर होने लग गया। सोशल असर ये था कि लोगों ने सोचना शुरू कर दिया कि एक छोटी
Speaker A
सी एक बीमारी उसने इतनी बड़ी तबाही मचा दी है। ये सोच जो है ना पुरानी जो ट्रेडिशनल आइडियाज थे उनसे लोगों को दूर ले गई। चर्च की जो पावर है उस पर भी सवाल उठने लगे। तो कुछ लोग तो बहुत रिलीजियस हो गए। कुछ लोग
Speaker A
बिल्कुल ही बागी हो गए। लोग ये कहते थे कि भ चर्च अगर इतनी पावरफुल है तो और गॉड की रिप्रेजेंटेटिव है तो ये प्लेग जो है ये ये क्यों नहीं रोक सकती? कई लोग चर्च से दूर होने लग गए। ये दो एक्सट्रीम पे लोग
Speaker A
जा रहे कल्चरल असर इसका यह हुआ कि आर्ट और लिटरेचर में मौत का जो थीम है वह बहुत कॉमन हो गया। डांस मकाबरे मौत का नाच जिसको कहते हैं यह बड़ी मशहूर चीज हो गई। इसमें मौत को एक नाच के रूप में दिखाया
Speaker A
जाता था जिसमें अमीर हो या गरीब हो सबको मौत अपने साथ नचाती थी। तो ब्लैक डेथ ने मिडिल एजेस का एंड और रेनजोंस की बुनियाद रखी। इसने लोगों को यह सबक दिया है कि जिंदगी बहुत फ्रिजाइल है और सोसाइटी को
Speaker A
दोबारा से जिंदा करना उसको नया रूप देना बहुत जरूरी है। यूरोप की ये जो हिस्ट्री है उसमें एक बड़ा टर्निंग पॉइंट था। इसमें पुराना जमाना लिटरली खत्म हुआ है। उसके बाद नए जमाने की शुरुआत हुई है। 900 साल
Speaker A
तक ये पीरियड चला। इतना लंबा अरसा चला। बहुत सारे अप्स एंड डाउन्स रहे इसमें। लेकिन इस पीरियड ने यूरोप को बिल्कुल ही बदल दिया। आज हम यूरोप जो भी देखते हैं, यह इन सारी चीजों का नतीजा है। फ्यूडल
Speaker A
सिस्टम्स ने मॉडर्न क्लास सिस्टम्स जो है ना यह उसकी बुनियाद रखी है। उसकी रिफ्लेक्शन ने अभी भी कैथोलिक चर्च ने यूरोप को एक कल्चरल एक पॉलिटिकल आइडेंटिटी भी दी है। और ये जो नाइट्स हैं इनकी वो जो शिविलरी है इनकी इनके आइडियाज आज भी आप
Speaker A
लिटरेचर में, मूवीज में, गेम्स में देखते हो। क्रूसेस जो थी उन्होंने ईस्ट और वेस्ट के बीच जो रिलेशंस थे उनको बहुत ज्यादा अफेक्ट किया। ब्लैक डेथ ने यह दिखाया कि भाई एक बीमारी आ जाएगी तो कितने लोग मर
Speaker A
सकते हैं। तो यह था भाई सारा सफर। यह अभी खत्म नहीं हुआ। यूरोप की एक बड़ी लंबी हिस्ट्री है। अगले एपिसोड में हम बात करेंगे रेनोसों्स के बारे में। वो पीरियड जब यूरोप ने दोबारा जो है उठना शुरू किया
Speaker A
जब आर्ट्स, साइंस और नए आइडियाज का एक नया जमाना शुरू हुआ। यह एपिसोड अगर आपको पसंद आया है, यह सफर में अगर आप मेरे साथ हैं तो बहुत शुक्रिया। थैंक यू। इस वीडियो को लाइक, शेयर कर देना, कमेंट कर देना। और
Speaker A
मैं आपसे मिलता हूं अब अगली वीडियो में। तब तक के लिए मुझे दें इजाजत। मैं चला गुड बाय। ओम
Topics:डार्क एजेसरोमन साम्राज्य पतनफ्यूडल सिस्टमकैथोलिक चर्चक्रूसेड्सब्लैक डेथमध्यकालीन यूरोपमिडिल एजेस इतिहासयूरोप की सामाजिक व्यवस्थामध्यकालीन महामारी











