1979 में मक्का की मस्जिदुल हराम में हुए सियासी और धार्मिक विद्रोह की कहानी। सऊदी अरब की राजनीति और समाज पर इसका गहरा असर।
Key Takeaways
- 1979 का मक्का का विद्रोह सऊदी अरब के धार्मिक और राजनीतिक परिदृश्य को बदलने वाला था।
- मॉडर्नाइजेशन और धार्मिक कंजरवेटिविज्म के बीच संघर्ष इस घटना की मुख्य वजह थी।
- सऊदी सरकार ने विद्रोह के बाद धार्मिक कड़े नियम लागू कर सामाजिक नियंत्रण बढ़ाया।
- विद्रोह ने सऊदी-अमेरिकी रिश्तों को प्रभावित किया और एंटी-वेस्टर्न भावना को बढ़ावा दिया।
- मोहम्मद बिन सलमान के सुधारों ने बाद में सऊदी अरब को फिर से आधुनिकता की ओर ले जाने की कोशिश की।
What the video covers
- 1979 में मस्जिदुल हराम में 300 शिद्दत पसंद जंगजुओं ने कब्जा किया और हजारों उमरा करने वालों को बंदी बनाया।
- इस विद्रोह के पीछे जहमान अल उतब और उनके बहनोई मोहम्मद इब्ने अब्दुल्लाह कहतानी थे, जिन्हें इमाम महदी माना जाता था।
- 1970 के दशक में सऊदी अरब में मॉडर्नाइजेशन की लहर आई, लेकिन धार्मिक तबके को यह मंजूर नहीं था।
- विद्रोह के दौरान सऊदी नेशनल गार्ड ने कई असफल हमले किए, अंततः फ्रांसीसी स्पेशल फोर्सेस की सलाह से टियर गैस और पानी का इस्तेमाल किया गया।
- अंत में सऊदी ट्रूप्स ने मस्जिद में दाखिल होकर विद्रोह को दबा दिया, और कई विद्रोहियों को सार्वजनिक रूप से फांसी दी गई।
- इस घटना के बाद सऊदी अरब की सरकार ने धार्मिक कंजरवेटिविज्म को बढ़ावा दिया और मॉडर्नाइजेशन पर रोक लगाई।
- मॉरल पुलिस बनाई गई, संगीत पर प्रतिबंध लगा, और सार्वजनिक स्थानों पर लिंग पृथक्करण लागू किया गया।
- सऊदी अरब और अमेरिका के बीच रिश्ते इस घटना के बाद प्रभावित हुए और एंटी-वेस्टर्न भावना बढ़ी।
- हालांकि बाद में मोहम्मद बिन सलमान के नेतृत्व में फिर से मॉडर्नाइजेशन की दिशा में कदम बढ़ाए गए।
- यह घटना सऊदी अरब के सामाजिक और राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई।
Chapters
- 00:00मक्का तवाफ रुकने का दिन और घटना का परिचय
- 00:481970 का दशक और सऊदी अरब में मॉडर्नाइजेशन
- 01:45जहमान अल उतब और विद्रोह की शुरुआत
- 02:29इमाम महदी कहतानी और उनके अनुयायी
- 03:14विद्रोह की योजना और मस्जिद में घुसपैठ
- 04:40सऊदी नेशनल गार्ड के असफल हमले
- 06:06फ्रांसीसी स्पेशल फोर्सेस की सहायता और रणनीति
- 06:50टियर गैस और पानी से विद्रोहियों का मुकाबला
- 07:30विद्रोह का अंत और परिणाम
- 09:00घटना के बाद सऊदी अरब में सामाजिक और राजनीतिक बदलाव
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Speaker A
आज बात करेंगे उस दिन की, जिस दिन काबे का तवाफ रुक गया था। मस्जिदुल हराम की दीवारें खून से रंग गई थीं। 300 शिद्दत पसंद जंगजू मस्जिदुल हराम के अंदर दाखिल हो गए थे और हजार मासूम लोगों को, जो उमरा करने आए थे,
Speaker A
उनको बंदी बना दिया गया। और फिर एक शख्स ने अपने साथी की तरफ इशारा किया और बोला कि इमाम महदी आ चुके हैं। कयामत का वक्त करीब है। और अगर तुम सच्चे मुसलमान हो तो आगे आओ और हमारे इमाम महदी की बैत
Speaker A
करो। जी दोस्तों, आज हम हिस्ट्री के एक ऐसे चैप्टर को पढ़ेंगे, जिसकी वजह से सऊदी अरबिया की सियासत और उसका सोशल लैंडस्केप टोटली चेंज हो गया। आज हम बात करेंगे ऑन द सीज ऑफ मक्का 1979। इस वाक को समझने के लिए
Speaker A
हमें 1970 के सऊदी अरबिया में जाना पड़ेगा। [संगीत] [संगीत] यह डेकेड सऊदी अरबिया के लिए सबसे अहम साबित होने वाला था। किंग खालिद के दौर में सऊदी अरबिया में एक वेव आई थी। वेव थी मॉडर्नाइजेशन की। 1970 का ऑयल बूम चल रहा
Speaker A
था। तेल की कीमतें पूरी दुनिया में स्काई रॉकेट कर चुकी थीं। और उस महंगे तेल से आने वाला पैसा सऊदी अरबिया का नक्शा बदल रहा था। मॉडर्न इंफ्रास्ट्रक्चर बन रहा था, स्कूल्स बन रहे थे, रोड्स बन रहे थे। लेकिन
Speaker A
ये सारी होती हुई तरक्की से एक तबका बिल्कुल खुश नहीं था। और वो था मजहबी तबका। उनका मानना यह था कि जो सऊदी में मॉडर्नाइजेशन आ रही है, इस वजह से हमारा मुल्क इस्लाम से बहुत दूर जा रहा है। इसलिए
Speaker A
किंग खालिद के खिलाफ बहुत सारी आवाजें खड़ी हुईं। और उन सारी आवाजों में से सबसे ऊंची आवाज थी एक शख्स की, जहमान अल उतब। जहमान एक वक्त पे सऊदी नेशनल गार्ड का मेंबर भी हुआ करता था। जी, सऊदी नेशनल गार्ड
Speaker A
जिसका सोल पर्पस ही यही है कि सऊदी की रॉयल फैमिलीज को प्रोटेक्शन देनी है। बादशाह की हिफाजत सऊदी नेशनल गार्ड की जिम्मेदारी है। लेकिन अब जो हिमान सऊदी अरबिया की बादशाहत, यानी उनकी मोनार्की के खिलाफ खड़ा हो गया था और उसका मकसद एक ही
Speaker A
था। यह मॉडर्नाइजेशन की वजह से जो इस्लाम से दूरी आ चुकी है, वो खत्म हो और एक इस्लामिक स्टेट कायम हो जाए। और वो तभी हो सकती है जब सऊदी में बादशाहत खत्म हो जाए। जहमान अल उतब का यह मानना था कि उसका
Speaker A
बहनोई मोहम्मद इब्ने अब्दुल्लाह कहतानी न उजु बिल्लाह इमाम महदी है। और ऐसा बिल्कुल नहीं है कि कहतानी को महदी मानने वाला सिर्फ उनका साला ही था। जी नहीं, इस मुर्शद के और भी बहुत सारे मुरीद थे जो यही मानते
Speaker A
थे कि कहतानी इमाम महदी है। उसके मुरीद का मानना था कि कहतानी इस दुनिया में पूरे मुसलमानों से करप्शन को खत्म करने के लिए आया है। और सऊदी अरबिया में जो बादशाहत चल रही है, उसको भी खत्म करने के लिए आया है।
Speaker A
मुरीद ये कहते थे कि इस बादशाहत ने मॉडर्नाइजेशन के चक्कर में यूएस जैसे तागतों से दोस्ती बना ली। और फिर आखिर वो दिन आ गया, 20 नवंबर 1979। द कैप्चर ऑफ द ग्रैंड मॉस्क। फजर का वक्त हो रहा था। नमाजी नमाज पढ़ रहे थे।
Speaker A
बहुत सारे लोग अपने रब से दुआ मांग रहे थे कि इस सब के दौरान तकरीबन 200 से 300 छुपे हुए दहशतगर्द अपने प्लान को सरंजाम दे रहे थे। जनाज के ताबूतों में और फूड सप्लाइज के अंदर वो लोग भारी भरकम हथियार स्मगल कर
Speaker A
रहे थे। जैसे ही सारा वेपन और मिलिटेंट्स मस्जिद में दाखिल हो गए, उन्होंने सारी गेट्स क्लोज कर दीं। बाहर जाने का रास्ता बंद कर दिया। मस्जिद के मीनारों पर भी स्नाइपर्स को तैनात कर दिया ताकि वह पूरे एरिया को कवर कर सकें। और फिर जो हेमान और
Speaker A
उसके साथियों ने मस्जिद के माइक्रोफोन का भी कंट्रोल ले लिया और ऐलान यह किया कि कयामत का वक्त करीब है। और मोहम्मद इब्ने अब्दुल्लाह अल कहतानी इमाम महदी हैं। वह सब मुसलमानों को गुमराही से बाहर निकालने के
Speaker A
लिए आए हैं। सऊदी से इस बादशाहत को खत्म करने आए हैं। और खिलाफत कायम करने के लिए आए हैं। तो अगर तुम सब सच्चे मुसलमान हो तो आओ और इमाम महदी की पयत करो। हॉस्टेस बनाए हुए लोगों को एक वार्निंग दी गई थी कि अगर
Speaker A
किसी ने भी भागने की कोशिश की तो वह मारा जाएगा। और वहां पे सऊदी गवर्नमेंट परेशान हो गई थी। उनका इनिशियल रिस्पांस हक्का बक्का सा था। उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि इस तरह का कोई वाकया हो सकता है। दे वर
Speaker A
टोटली नॉट रेडी फॉर इट। सऊदी लीडरशिप को उस वक्त समझ ही नहीं आ रहा था कि प्रोसीड किस तरह करना है। जो है मान के मिलिटेंट्स मस्जिद के अंडरग्राउंड टनल्स में भी थे। मीनारों पर तो उन्होंने पहले ही स्नाइपर्स
Speaker A
खड़े कर दिए थे। यानी कि पूरा कॉम्प्लेक्शन के कंट्रोल में था। जाहिर है इंटरनेशनल बैकलेस भी आना ही था। सब यही कहने लगे कि इतनी मुकद्दस जगह को सऊदी गवर्नमेंट प्रोटेक्ट नहीं कर सकी। कुछ तो करना ही था। तो फिर सऊदी नेशनल गार्ड्स ने
Speaker A
अपना पहला असल्ट किया। प्लान बहुत सिंपल था, बल्कि कुछ ज्यादा ही सिंपल था। जाना था और सीधा गेट्स पर अटैक करना था। अनफॉर्चूनेटली सऊदी नेशनल गार्ड्स ने दुश्मनों को अंडरएस्टिमेटर लिया। उनको तो पता ही नहीं था कि
Speaker A
मीनारों पर खड़े हुए स्नाइपर्स उनको कब से देख रहे हैं। और मेनली उन स्नाइपर्स की वजह से बहुत सारे सऊदी ट्रूप्स को अपनी जान गवानी पड़ी। पहला असल्ट और इतने बुरे तरीके से फेल हो गया। दूसरा असल्ट जब हुआ तो वो
Speaker A
तकरीबन दो दिन चला। सऊदी ट्रूप्स इस दफा आर्मर्ड व्हीकल्स लेकर आए थे, जो बुलेट प्रूफ थीं। उनके पास हैवी मशीन गन भी थी। और गोल सिर्फ एक था कि पूरे फायर पावर के साथ एक दफा मस्जिद में अंदर दाखिल होना है।
Speaker A
लेकिन यह असल्ट भी फेल हो गया। फिर आई तीसरे असल्ट की बारी। सऊदी ट्रूप्स ने मस्जिद के अंडरग्राउंड टनल से इंटर होने की कोशिश की। लेकिन फिर से उन्होंने दुश्मनों को अंडरएस्टिमेट कर दिया। जो हिमान के साथियों को पता था कि सऊदी ट्रूप्स इस
Speaker A
रास्ते से आने की कोशिश तो जरूर करेंगे। तो उन्होंने पहले ही सोल्जर्स के लिए बूमी ट्रैप्स बिछा दिए। जहां से जैसे ही सोल्जर्स गुजरते तो जोरदार धमाका हो जाता। और इस तरह जब तीसरा अटेंप्ट भी फेल हो गया तो सऊदी ने फ्रांस से मदद करने
Speaker A
को कहा। क्लीयरली सऊदी गवर्नमेंट को अब समझ आ गई थी कि इस सिचुएशन को हैंडल करने के लिए उनके पास कोई एक्सपर्टीज नहीं है। फ्रेंच स्पेशल फोर्सेस जीआईजीएन जब पहुंची तो उन्होंने सऊदी ट्रूप्स को एडवाइजरी सपोर्ट किया। फिजिकली तो वो
Speaker A
मस्जिदुल हराम में दाखिल हो नहीं सकते थे। फॉर ओबवियस रीजंस। रूल है कि कोई गैर मुस्लिम, कोई नॉन मुस्लिम मस्जिदुल हराम के अंदर एंटर नहीं हो सकता। तो इस फ्रेंच फोर्स का काम एक ही था, गाइड करना, बताना कि
Speaker A
क्या करना है, क्या नहीं करना, प्लान बनाना और उस प्लान को एक्जिक्यूट करवाना। और फिर फ्रेंच कमांडोज ने एक नई स्ट्रेटेजी एडवाइस की कि लेट्स फ्लड द इंसर्जनल गैस एन स्टन ग्रेनेड्स। फ्रेंच फोर्सेस की एडवाइस पर अमल करते हुए सऊदी सोल्जर्स ने
Speaker A
मस्जिद के बाहरी फ्लोर में ड्रिलिंग करना शुरू कर दिया। और इस ड्रिलिंग का एक ही मकसद था कि फ्लोर को अंडरग्राउंड टनल से कनेक्ट करना। और फिर जब फ्लोर में इस तरह के होल्स बन गए, जिससे बेसमेंट कनेक्ट हो
Speaker A
सकती थी, तो उन सुराख में टियर गैस को डिप्लॉय किया गया। मेंट्स में बैठे हुए दहशतगर्द, जो अपनी पोजीशन संभाले हुए बैठे थे, इतनी ज्यादा टियर गैस की वजह से उनकी पोजीशंस वीक हो गई। जब काफी ज्यादा टियर गैस
Speaker A
डिप्लॉय हुई, फिर उन्हीं सुराख में पानी भी पंप कर दिया गया, जिससे पूरा बेसमेंट पानी से भर गया। जो इमान के साथियों की हालत बुरी हो गई। कुछ तो वहीं पर मर गए और कुछ तो बाहर भाग के सरेंडर करने आ गए। और कुछ
Speaker A
क्रॉस फायर में मारे भी गए। जब टियर गैस और पानी से अंदर बैठे हुए इंसर्जनल बुरी हो गई तो फिर किया गया आखिरी असल्ट। और ये असल्ट सक्सेसफुल था क्योंकि इस असल्ट में सऊदी ट्रूप्स मस्जिद के अंदर दाखिल होने
Speaker A
में कामयाब हो गए। अंदर जाकर सऊदी के सोल्जर्स ने जितने भी मिलिटेंट्स थे, उनको न्यूट्रलाइज कर दिया। और इसी में ही मोहम्मद इब्ने अब्दुल्लाह अल कहतानी, जो खुद को इमाम महदी कह रहा था, वो भी मारा गया। अलबत्ता जो अपराइजिंग का लीडर था, ज
Speaker A
हेमान अल उतब, उसको जिंदा पकड़ा गया। जिंदा पकड़ने की एक ही वजह थी, उसको मजीद इंटेरोगेटर था। 1 साल के बाद, 1980 में उसे सजा-ए-मौत दी गई और उसे पब्लिकली एग्जीक्यूट कर दिया गया। सर कलम करके उसके
Speaker A
बाकी बचे हुए 67 साथियों को भी सऊदी अरबिया के मुख्तलिफ शहरों में पब्लिकली एग्जीक्यूट कर दिया गया। सर कलम करके। अगर इस सारे वाक की आफ्टरमैथ को देखें तो तकरीबन 1000 लोगों की जान गई। अनऑफिशियल रिपोर्ट्स ये कहती हैं कि जिसमें से 500
Speaker A
से 600 लोग सिविलियंस थे। इस इंसिडेंट से पहले सऊदी अरबिया तो मॉडर्नाइजेशन की तरफ जा रहा था, लेकिन इस इंसिडेंट के बाद सऊदी गवर्नमेंट की अप्रोच टोटल 180 डिग्री हो गई। यानी रिलीजस कंजरवेटिज्म ज्यादा बढ़ गया। उलमा को ज्यादा एंपावर कर दिया गया। और
Speaker A
एक मोरल पुलिस भी बनाई गई। उस मोरल पुलिस का काम यही था कि उन्होंने मेक श्योर करना है कि इस्लामिक रूल्स तरीके से फॉलो किए जा रहे हों। म्यूजिक को कंप्लीटली बैन कर दिया गया। लड़कियों के लिए अब बाय
Speaker A
को मैंडेटरी कर दिया गया। पब्लिक स्पेसेस में मर्दों और औरतों की सेपरेशन का सिस्टम भी किया गया। गवर्नमेंट ने मदरसों की फंडिंग भी बढ़ा दी। ज्यादा मदरसे बनाने भी शुरू कर दिए। गोल यही था कि दोबारा कहीं अल्लाह ना करे ऐसा फिर से कोई डिसेंट पैदा
Speaker A
हो जाए जो बोले कि सऊदी इस्लाम से बहुत दूर जा चुका है। अब इस वाकए के बाद यूएस और सऊदी की जो एक अलायंस थी, वो शेक हो गई थी। जो आपस में रिश्ते थे, जो बेहतर हो रहे थे,
Speaker A
वो अब खराब होने लगे थे। एक एंटी वेस्टर्न सेंटीमेंट लोगों में बढ़ने लगा। सब यूएस को ब्लेम करने लगे कि इनके साथ जब हमने दोस्ती बढ़ाई तो हमारे साथ अच्छा नहीं हुआ। ये जो तागत है ना, यह सब इन्हीं की वजह से
Speaker A
हुआ है। बल्कि एंटी वेस्टर्न सेंटीमेंट इस हद तक बढ़न...
Speaker A
तकरीबन 40 साल मॉडर्नाइजेशन को रोक दिया गया औरतों को ड्राइविंग की इजाजत भी नहीं थी और उनकी जो मोबिलिटी होती है यहां से वहां जाना उसको भी बड़ा रिस्ट्रिक्टर दिया गया था किसी भी तरह के पब्लिक इवेंट्स स्पेशली जो एंटरटेनमेंट से रिलेटेड हो
Speaker A
उनको तो कंप्लीट बैन कर दिया गया था पूरा मुल्क एक स्ट्रांग रिलीजस इंफोर्समेंट के पीरियड में जा चुका था 2016 तक जी हां 2016 तक क्योंकि 2016 में अब बारी थी द क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की उन्होंने तो सीधा कह दिया है कि मैं
Speaker A
सऊदिया को नया यूरोप बनाने वाला हूं जहां टूरिज्म भी बहुत होगा और कल्चरल डायवर्सिटी भी बहुत होगी मोहम्मद बिन सलमान ने जो रिफॉर्म्स किए हैं वो फिर से सऊदी अरबिया को मॉडर्नाइजेशन की तरफ लेकर जा रहे हैं जैसे
Speaker A
औरतों को ड्राइविंग की इजाजत भी दे दी गई है जैसे एंटरटेनमेंट के इवेंट्स पे बैन भी हटा दिए गए हैं बल्कि 2023 से तो कंसर्ट प कंसर्ट हो रहे हैं रियाद में साउंड स्टोर्म फेस्टिवल हुआ फिर पोस्ट मलोन
Speaker A
कंसर्ट हुआ फिर इंटरनेशनल ओपरा फेस्टिवल भी हुआ बहुत सारे लोग ऐसे भी हैं जो मोहम्मद बिन सलमान की इन लिबरल पॉलिसीज पे तं कीद करते हैं खैर क्राउन प्रिंस पे तो एक पूरी अलग वीडियो भी बन सकती है अगर इस
Speaker A
सब से रिलेटेड आपको और जानना है तो मैं आपको एक बुक रिकमेंड करूंगा ब्लड एंड ऑयल वो जरूर पढ़िए खैर अब हालात काफी बदल भी चुके हैं सऊदी अरबिया ने अपनी सिक्योरिटी पे और काउंटर टेररिज्म पे बहुत इन्वेस्ट
Speaker A
कर दिया है सर्वेस भी बहुत बढ़ा दी है और रिलीजस ग्रुप्स की इंटेलिजेंस मॉनिटरिंग भी शुरू कर दी है ताकि कहीं ऐसा ना हो कि फिर से कोई अपराइज आने लग जाए लेकिन मोहम्मद बिन सलमान के इन सारे रिफॉर्म्स
Speaker A
और मॉडर्नाइजेशन को देख के अल्लाह ना करें फिर से कोई मसला होने लग जाए क्योंकि लास्ट टाइम जब किंग खालिद ने ट्राई किया था तो उसका अंजाम अच्छा नहीं था आप और मैं खैरियत की दुआ ही कर सकते हैं इस सारे
Speaker A
इवेंट पे आपका क्या ओपिनियन है मैं वो जानना जरूर चाहूंगा तो नीचे कमेंट में अपना ओपिनियन मुझे जरूर बताना बाकी अगर आपको ये वीडियो इंफॉर्मेशन लगी तो सब्सक्राइब का बटन ठोक दो यार चलो जी मैं चलता हूं अब आपसे होती है किसी और वीडियो
Speaker A
में मुलाकात किसी और बात पर करते हुए तबसरा तब तक के लिए भाई को दीजिए इजाजत मैं चला गुड बाय [संगीत]
Topics:मक्का तवाफ1979 मक्का घेरावसऊदी अरब इतिहासमस्जिदुल हरामइमाम महदीजहमान अल उतबसऊदी नेशनल गार्डधार्मिक विद्रोहसऊदी मॉडर्नाइजेशनसऊदी सामाजिक बदलाव











