इस वीडियो में म्यूजिक के हलाल या हराम होने पर इस्लामी दृष्टिकोण और विभिन्न स्कॉलर्स के तर्कों का निष्पक्ष विश्लेषण किया गया है।
Key Takeaways
- म्यूजिक को लेकर इस्लाम में कोई एकमत राय नहीं है, विभिन्न स्कूलों के अलग-अलग दृष्टिकोण हैं।
- सही बुखारी की हदीस और कुरान की आयतें म्यूजिक के खिलाफ तर्क के रूप में इस्तेमाल होती हैं।
- विशेष अवसरों पर गाने और दफ बजाने की इजाजत इस्लामी हदीसों में मिलती है।
- म्यूजिक का कंटेंट और उसका प्रभाव महत्वपूर्ण है, जो इसे हलाल या हराम बनाता है।
- निष्पक्ष अध्ययन से पता चलता है कि म्यूजिक का इस्लामी दृष्टिकोण जटिल और बहुआयामी है।
What the video covers
- म्यूजिक हलाल है या हराम इस विषय पर तीन मुख्य दृष्टिकोण हैं।
- पहला दृष्टिकोण कहता है कि म्यूजिक पूरी तरह से हराम है, खासकर हबली, सलाफी और कुछ हनफी स्कॉलर्स के अनुसार।
- इस दृष्टिकोण के समर्थन में सही बुखारी की हदीस 5590 का हवाला दिया गया है जिसमें म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स को नॉर्मलाइज करने वालों को सजा का उल्लेख है।
- कुरान की सूरा लुकमान की आयत 6 को भी म्यूजिक के खिलाफ तर्क के लिए प्रस्तुत किया जाता है, जिसमें बेहूदा और फजूल बातों से मना किया गया है।
- दूसरा दृष्टिकोण कहता है कि म्यूजिक अपने आप में हराम नहीं है, बशर्ते वह बुराई न फैलाए और उसका कंटेंट इम्मोरल न हो।
- इस दृष्टिकोण के अनुसार, दफ बजाने और गाने की इजाजत विशेष अवसरों जैसे ईद, शादी आदि पर दी गई है।
- तीसरा दृष्टिकोण म्यूजिक को एक प्राकृतिक और सांस्कृतिक तत्व मानता है, जिसमें नेचर के विभिन्न साउंड्स भी म्यूजिक की श्रेणी में आते हैं।
- वीडियो में विभिन्न स्कॉलर्स जैसे इब्ने हजम, इब्ने कुतबा, इब्ने रल मकद के विचार भी प्रस्तुत किए गए हैं जो म्यूजिक के पक्ष में हैं।
- म्यूजिक के हराम या हलाल होने का फैसला इसके कंटेंट, प्रभाव और सामाजिक संदर्भ पर निर्भर करता है।
- वीडियो में निष्पक्ष और न्यूट्रल दृष्टिकोण अपनाते हुए सभी पक्षों के तर्कों का विश्लेषण किया गया है।
Chapters
- 00:00परिचय: म्यूजिक हलाल या हराम?
- 01:08पहला दृष्टिकोण: म्यूजिक पूरी तरह हराम
- 02:19हदीस और म्यूजिक पर तर्क
- 03:28कुरान की आयत और म्यूजिक
- 04:33म्यूजिक के खिलाफ तर्कों का विस्तार
- 06:34दूसरा दृष्टिकोण: म्यूजिक पर शर्तें
- 07:32हदीसों में दफ बजाने और गाने की इजाजत
- 07:52निष्कर्ष और म्यूजिक का इस्लामी विश्लेषण
- 09:01तीसरा दृष्टिकोण: म्यूजिक और नेचर के साउंड्स
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Speaker A
[संगीत] म्यूजिक हलाल है या हराम है? क्या वाकई म्यूजिक आपको दोजख की तरफ लेकर जाता है? अगर ऐसा ही है तो फिर उन सूफी कलामों का क्या, जिनको सुनके हो सकता है कोई इंसान अल्लाह के और करीब आ जाए? लेकिन एक सेकंड।
Speaker A
म्यूजिक तो मदहोश कर देती है और एक मदहोश इंसान को वक्त का अंदाजा भी नहीं होता। ऐसे में तो वह वक्त बर्बाद भी कर सकता है और इबादत भी छूट सकती है। यह सवाल सदियों से चलता आ रहा है और दोस्तों आज की वीडियो
Speaker A
में हम न्यूट्रल होकर मुख्तलिफ सवाल को स्टडी करेंगे और इसका जवाब ढूंढने की कोशिश करेंगे कि क्या म्यूजिक हराम है या हलाल है। डिस्क्लेमर ये है कि इस वीडियो में मैं किसी एक जवाब पे अटक नहीं जाऊंगा कि यही
Speaker A
हक है, जो मैं कह रहा हूं यही सच है। मैं तो आप ही की तरह एक तालिब इल्म हूं जो जवाब ढूंढने की कोशिश कर रहा है। तो ये जो टॉपिक आज हम डिस्कस कर रहे हैं दोस्तों ये एक
Speaker A
हाईली डिबेटेड टॉपिक है। मैंने जब इस पे रिसर्च की तो मुझे मुख्तलिफ व्यू पॉइंट्स मिले जिनको मेनली तीन कैटेगरी में तोड़ा जा सकता है। पहला व्यू पॉइंट यह कहता है कि म्यूजिक की कोई जगह ही नहीं है, म्यूजिक
Speaker A
बिल्कुल हराम है। इट इज फॉरबिड। पर्टिकुलर जो हबली और सलाफी स्कूल से ताल्लुक रखते हैं, वो स्कॉलर्स तो उसको हराम ही समझते हैं। कुछ हनफी स्कूल के स्कॉलर्स भी इसको फोरबिडेन, हराम और गलत समझते हैं। वो अपने दलील को मजबूत करने के लिए सही बुखारी की
Speaker A
यह हदीस पेश कर देते हैं। बुखारी 5590, बुक 74, हदीस 16। अबू अमीर से यह हदीस नरेड है जो कहते हैं कि हुजूर पाक सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि मेरी उम्मत में से कुछ लोग ऐसे होंगे जो जिना को, रेशम पहनने
Speaker A
को, शराब पीने को और म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स को हलाल और जायज समझेंगे। इसी हदीस के अंदर उन लोगों की डिस्क्रिप्शन भी मौजूद है कि वो कैसे होंगे। कहा गया है कि वो लोग पहाड़ के किनारे रह रहे होंगे। यहां पे पहाड़ के
Speaker A
किनारे एक सिंबॉलिक बात है, यानी कि वो कंफर्टेबल जिंदगी गुजार रहे होंगे, आसाय शों में होंगे। इस हदीस में यह भी बताया गया है कि उनके पास चरवाहे होंगे जो उनकी भेड़ बकरियों को चरा रहे होंगे। इसका मतलब
Speaker A
यह कि वो लोग बड़े मालदार होंगे। और इसी हदीस के अंदर उन लोगों की सजा भी बताई गई है कि अल्लाह ताला रातों-रात उनको तबाह कर देंगे और उसी पहाड़ को उनके ऊपर गिराया जाएगा और जो बच जाएंगे उनको बंदर और खंजीर
Speaker A
बना दिया जाएगा। अब नोट करना कि इस हदीस में जो चौथा पॉइंट है, ऐसे लोग जो म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स को नॉर्मलाइज करेंगे, उनको कानूनी समझेंगे, उनको हलाल समझेंगे। ये पॉइंट बड़ा कीमती है क्योंकि आज की वीडियो का मौजू यही है। इसी हदीस को लेकर बहुत
Speaker A
सारे स्कॉलर्स कहते हैं कि ये एक क्लियर प्रोहिबिशन है कि म्यूजिक हराम है। अब कुरान में तो कहीं भी क्लियर मेंशन नहीं है कि म्यूजिक हराम है, लेकिन वो लोग जो म्यूजिक को हराम समझते हैं, वो सूर लुकमान
Speaker A
की आयत छ को भी दलील बना के पेश कर देते हैं। इस आयत में एंटरटेनमेंट और बेहूदा बातों से मना किया गया है क्योंकि वो आपको अल्लाह की राह से गुमराह करती हैं। इस आयत में अल्लाह फरमाते हैं कि और लोगों में से
Speaker A
कुछ लोग ऐसे हैं जो बेहूदा कलाम खरीदते हैं ताकि बगैर सूझबूझ के लोगों को अल्लाह की राह से भटका दें और इस राह का मजाक उड़ाए। इन लोगों के लिए रुसवा कुन अजाब है। इस आयत का अगर हम कॉन्टेक्स्ट
Speaker A
समझने की कोशिश करेंगे तो हो सकता है हमें हमारे सवाल का जवाब किसी हद तक मिल जाए। असल में आयत मक्का में नाजिल हुई जब इस्लाम के अर्ली इयर्स थे और मुसलमानों की तादाद कम होती थी। और कुरेश का एक लीडर था
Speaker A
नजर बिन हारिस। इस आदमी का काम यही था कि लोगों को नबी पाक सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बातें सुनने से रोकना, डिस्ट्रक्ट कर देना। कुरान के इंपैक्ट को काउंटर करने के लिए यह आदमी इतना ख्वार था कि यह पर्शिया
Speaker A
जाता था, खास सफर करके पर्शिया जाता था और वहां से कहानियां खरीद करके ले आता था। रुस्तम और स् फंद यार की कहानियां जो पर्शियन हीरोज थे। तो जो भी लोग नबी के रास्ते पर चलने की कोशिश करते थे, ये उनको
Speaker A
रोकता था और कहता था कि यार वो छोड़ो, ये कहानियां देखो। ये मैं बैठो तुम्हें ये कहानियां सुनाता हूं। फारस से लेकर आ मैं कहानियां ऐसी एंटरटेनमेंट पैदा करता था, ऐसी स्टोरी टेलिंग करने शुरू हो जाता था कि लोग अल्लाह की राह से भटक जाते थे। तब
Speaker A
ही ये आयत नाजिल हुई थी। और इस आयत में जो अरेबिक फ्रेज यूज हुआ है लवल हदीस, उसको जब उर्दू में ट्रांसलेट करेंगे तो उसका मतलब यही बनता है कि बेहूदा बातें, फजूल बातें, बेतुकी बातें जो नजर बिन हारिस करता था। और
Speaker A
इसी आर्गुमेंट की बुनियाद पे म्यूजिक को हराम मानने वाले कहते हैं कि आजकल जो भी म्यूजिक है वो भी लवल हदीस है, फजूल बातें हैं, बेतुकी बातें हैं। इसलिए यह भी हराम है। और देखा जाए यह तक तनाना तंदूरी नाइट
Speaker A
धीमे-धीमे, धीमे धीमे, ये जो टोनी ककर टाइप जो गाने, जो भी बेहूदा से लिरिक्स बनते हैं जिनके कोई तुक ही नहीं है, वो तो इस डेफिनेशन पे पूरे ही उतरते हैं। और क्योंकि ऐसे कलाम इंसान को डिस्ट्रेक्ट कर सकते
Speaker A
हैं और हो सकता है कि वह ऐसा म्यूजिक सुनने में गुम हो जाए और नमाज का टाइम निकल जाए। तो इसी लॉजिक की बुनियाद पे म्यूजिक को हराम कहने वाले म्यूजिक को हराम कहते हैं। लेकिन इसका रिबेटल जब कुछ
Speaker A
स्कॉलर्स देते हैं जैसे इब्ने हजम या फिर जब आप इब्ने जरी अल तबार की तफसीर पढ़ते हैं तो भी आपको पता लगता है कि यहां पे जो लवल हदीस की बात की गई है उससे मुराद कोई भी बेतुकी बातें हो सकती हैं, गॉसिपिंग भी
Speaker A
हो सकती है, चुगली हो सकती है, बैक बाइटिंग हो सकती है, बेहूदा गाना भी हो सकता है। लेकिन स्पेसिफिकली यहां पे म्यूजिक को हराम नहीं कहा गया। लेकिन एक सेकंड ये जो अलग पॉइंट ऑफ व्यू है, उसपे हम बाद में आएंगे। तो पहले
Speaker A
पॉइंट ऑफ व्यू को अगर हम सराइज करें तो हमें एक हदीस से यह समझ आया कि म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स तो हराम हैं। और फिर सूर लुकमान आयत छ से ये पता चला कि बेहूदा, फजूल बातें जो होती हैं वो भी हराम हैं
Speaker A
क्योंकि वो आपको डिस्ट्रक्ट करती हैं अल्लाह की इबादत से। तो मतलब म्यूजिक तो इक्वेशन से आउट हो गया। ऊपर से ऐसे लिरिक्स, ऐसी शायरी भी आउट हो गई इक्वेशन से जो बेतुकी हो। लेकिन दोस्तों जैसे मैंने आपको वीडियो के शुरू में कहा था कि हम एक
Speaker A
न्यूट्रल एनालिसिस करेंगे, सबके पॉइंट ऑफ व्यूज को देखेंगे। अब ये तो एक पॉइंट ऑफ व्यू हो गया। अब चलो चलते हैं दूसरे पॉइंट ऑफ व्यू पे जो ये कहते हैं कि इस्लाम में म्यूजिक से कोई मसला नहीं है, लेकिन कुछ
Speaker A
कंडीशन जरूर अप्लाई होती है। कुछ स्कॉलर्स स्पेशली मालिक और शाफी स्कूल के स्कॉलर्स यह मानते हैं कि म्यूजिक इन्हेरेंटली हराम नहीं है अगर वह बुराई को प्रमोट नहीं कर रही तो। यानी यह कंडीशन बहुत अहम है। बाकी बहुत सारी अहा दीस ऐसी भी हैं जहां पे
Speaker A
हुजूर पाक सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने गाना गाने से और दफ बजाने से लोगों को रोका नहीं है बल्कि उल्टा उनको इनकरेज किया है। खास तौर पे ऐसे मौकों पे जब ईद हो, शादी हो या कोई सेलिब्रेशंस हो। एक हदीस सुनाने
Speaker A
इब्ने से भी आती है जहां पर हुजूर पाक सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा कि निकाह का ऐलान करो और दफ बजाओ ताकि पता चले कि ये एक लॉफुल शादी है। एक हदीस सुनन नसा से भी आती है जहां पे हुजूर पाक सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम
Speaker A
ने कहा कि एक जायज और नाजायज शादी में फर्क सिर्फ दफ का होता है। तो नबी तो इनकरेज करते थे कि जब आपकी शादी जायज है तो उसका पब्लिकली ऐलान करो और दफ बजाओ ताकि लोगों को पता चले कि ये एक लॉफुल
Speaker A
मैरिज है। सही बुखारी की हदीस 952, जो रेटेड बाय बीबी आयशा रजि अल्लाह ताला अन हरसे, वो ये कहती हैं कि एक दफा हजरत अबू बकर रजि अल्लाह ताला उनके घर आए और तब बीबी आयशा के साथ दो अंसारी लड़कियां बैठी थीं
Speaker A
जो गाना गा रही थीं। वो लड़कियां यौमे बवास के किस्से बयान कर रही थीं। हजरत अबू बकर ने जब उनको देखा तो वो नाराज हो गए, बच्चियों को डांट दिया कि अल्लाह के रसूल के घर शैतान के सास। जिस पे रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम
Speaker A
ने उनको रोका और बोला कि अबू बकर, हर कौम की ईद होती है, आज हमारी ईद है। इसका मतलब ईद की सेलिब्रेशन में गाना गाने की इजाजत उन्होंने दे दी। एक और हदीस सुना, अबू दाऊद 3312 में आती है कि जहां पे हुजूर पाक
Speaker A
सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक एक्सपेडिशन से वापस आ रहे थे तो एक जवान खातून ने उनको रोक के कहा कि ऐ अल्लाह के रसूल, मैंने यह नजर किया था कि अगर आप वापस सलामती से आ जाते हैं तो मैं खुशी में दफ बजाऊंगी और
Speaker A
कुर्बानी करूंगी। जिस पर अल्लाह के रसूल ने उस औरत को दफ बजाने की इजाजत भी दी और कुर्बानी करने की भी इजाजत दी। तो इन हदीस का अगर कंक्लूजन हम लें और उनमें से कुछ टेक अवेज निकालें तो वो यही समझ आते हैं कि
Speaker A
हमारे नबी ने गाना गाने की इजाजत और दफ बजाने की इजाजत दी है लेकिन स्पेशल ओकेज पे अगर ईद है या कोई सेलिब्रेशन है या शादी है तब। और हां, दफ वाहिद इंस्ट्रूमेंट है जिसका जिक्र हदीस में आया है, उसके
Speaker A
अलावा किसी इंस्ट्रूमेंट का जिक्र हदीस में आया नहीं है। और अगेन, सिंगिंग, गाना गाने की भी इजाजत तभी दी गई है जब उसका कंटेंट इम्मोरल ना हो। तो मुद्दे की बात करें और इस नजरिए को सराइज करें तो कुछ
Speaker A
स्कॉलर्स इन अहा दीस को बुनियाद बनाकर यह कहते हैं कि म्यूजिक हराम नहीं है बशर्ते कि उसका कंटेंट इम्मोरल ना हो, वह आपको अल्लाह से दूर ना कर रहा हो। दफ बजाने की एक्सप्लीसिटली दफ बजाने की इजाजत दी गई है।
Speaker A
गाना गाने की भी इजाजत दी गई है अगर शादी है, कोई स्पेशल ओकेज है या ईद है तब। याद है ना दोस्तों मैंने वीडियो के शुरू में कहा था कि यह जो नजरिए हैं, इनको तीन हिस्सों में तोड़ा जा सकता है। तो दो का जिक्र तो
Speaker A
हमने कर दिया। तीसरा पॉइंट ऑफ व्यू कहता है कि म्यूजिक...
Speaker A
हैं उनका ज्यादातर ताल्लुक तसव्वुफ से होता है यानी वो सूफी स्कॉलर्स होते हैं उनका कहना यह है कि अगर म्यूजिक आपको अल्लाह से दूर नहीं कर रहा तो फिर साज कोई भी बज रहा हो उससे इशू नहीं है इनकी
Speaker A
अप्रोच जो है म्यूजिक को लेके वो स्पिरिचुअल है इस नजरिए को सपोर्ट और एडवोकेट करने वाले जो स्कॉलर्स थे उनमें सबसे बड़ा नाम आता है इमाम अल गजाली का इनका ताल्लुक शाफी स्कूल से था और उन्होंने एक किताब भी लिखी इलिया उलूम
Speaker A
अलदीन जिसकी अंग्रेजी में अगर ट्रांसलेशन करें तो बनता है द रिवाइवल ऑफ रिलीजस साइंस इस किताब में इमाम अल गजाली ने मौसकी के रूहानी मफा दत का जिक्र किया है स्पिरिचुअल बेनिफिट्स ऑफ म्यूजिक जी हां उनका ये कहना था कि मौसी की क्योंकि इंसान
Speaker A
के जज्बात को छेड़ है तो ऐसे में म्यूजिक के जरिए इंसान के दिल में खुदा की मोहब्बत भी तो डाली जा सकती है उनका यह कहना था कि इंसान की जो रूह है वो बे साख एक अच्छी मेलोडी की तरफ रुजू होती है और ऐसे में
Speaker A
अगर उस मेलोडी के अंदर कोई शिर्क या कलाम नहीं है तो फिर उससे कोई मसला नहीं होना चाहिए एक आर्गुमेंट उन्होंने इस किताब में ये भी मेंशन किया कि अगर मौसी की ही एक इंसान को खुदा के करीब लेके जाए तो फिर
Speaker A
मौसी की हराम कैसे होगी अब इसके एग्जांपल में बहुत सारा सूफी म्यूजिक आ सकता है कवाली आ सकती है नौशी द आ सकती है है मनकबत आ सकती है ताजदारे हरम तू कुजा मन कुजा ये इस तरह की मौसकी है जिसकी वजह से
Speaker A
एक स्पिरिचुअल एक्ससी आप पे तारी हो सकती है व्हिच कैन इवेंचर अबाउट द क्रिएटर एंड गेटिंग क्लोजर टू द क्रिएटर उनके कहने के मुताबिक कुछ आवाजें ऐसी होती हैं जिनको सुनके सुकून आता है जैसे हजरत दाऊद अलैहि सलाम की आवाज
Speaker A
जिसकी गवाही कुरान भी देता है कि ऐसी सुरीली आवाज और किसी की हो ही नहीं सकती सूर स्वाद 18 से 19 में मेंशन है कि हजरत दाऊद अल सलाम की आवाज इतनी सुरली होती थी कि जब भी वह अल्लाह ताला की तारीफ में हमद
Speaker A
पढ़ते थे तो परिंदे और पहाड़ भी उनके साथ मिल जाते थे इमाम अल गजाली ने तो यह तक कहा है कि मौसी की रूह की गजा है जैसे जिस्म की गजा के लिए खाने की जरूरत होती है वैसे रूह की गजा के लिए मौसकी की जरूरत
Speaker A
होती है इमाम अल गजाली की तरह और भी बहुत सारे स्कॉलर्स हैं जिन्होंने म्यूजिक के हक में बात की है जैसे इब्ने हजम इब्ने कुतबा इब्ने रल मकद इन सब का नजरिया यही रहा है कि म्यूजिक हराम नहीं है बशर्क
Speaker A
उसके अंदर जो कलाम है वह आपको अल्लाह से दूर नहीं कर रहा 2007 में शोएब मंसूर की एक फिल्म आई थी खुदा के लिए उस फिल्म में नसीरुद्दीन शाह का एक मुख्तसर रोल था जिसमें वो मौलाना का किरदार प्ले करते हैं
Speaker A
और कोर्ट में मौसिकी के हक में कुछ दलीलें पेश करते हैं वो स्पीच सुनना बहुत जरूरी है जूर का सबसे बड़ा मोजा कुरान शरीफ मूसा को इस काबिल बनाया कि वो लाठी से दरिया के दो टुकड़े कर दे ईसा को यह ताकत दी के वो
Speaker A
मुर्दे को दोबारा जिंदा कर दे और दाऊद को क्या दिया मसकी ऐसी सुरीली आवाज और रागों और साजों पर इतना उबू के सुर लगाए तो पहाड़ साथ गाने लगे दुनिया जहान के परिंदे मदहोश होके आवाज की जानिब खींचे चले आए जबूर उठा
Speaker A
के देखिए यह तक लिखा है कि किन रागों से और किन साजों प के हजरत दाऊद अ सलातो सलाम ने खुदा की हमद सना की क्या यह मुमकिन है कि खुदा वंद करीम अपनी तारीफ सुनने के लिए एक हराम चीज का इंतखाब करें अब जो पहली
Speaker A
पहली हदीस हमने आपको सुनाई थी जिसमें क्लियर मना किया गया था म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स को प्ले करने से कुछ स्कॉलर्स ऐसे हैं जो यह कहते कि उसमें कॉन्टेक्स्ट की बात की गई थी ऐसा अगर वो म्यूजिक आपको अलाह दूर करता है तो वो हराम
Speaker A
है क्योंकि कुछ स्कॉलर्स ये कहते हैं कि प्रॉफिट के जमाने में सिंगिंग और शायरी बड़ी आम सी बात थी अगर ये इन्हेरेंटली हराम चीज होती जैसे शराब और सूअर का गोश्त तो उसका जिक्र कुरान में जरूर आया होता तो
Speaker A
दोस्तों ये थे तीन नजरिए जो हमने आपको बताए कि लोग क्या-क्या बिलीव करते हैं पहला नजरिया जिसमें मौसिकी की कोई इजाजत ही नहीं है सिरे से ही हराम करार दिया हु उसको दूसरा उसमें कंडीशंस है कि दफ प्ले
Speaker A
कर सकते हैं गाना गा सकते हैं लेकिन स्पेशल ओकेज संस पे और बशर्क के वो आपको अल्लाह की इबादत से दूर नहीं कर रही भटका नहीं रही तो और तीसरा नजरिया कि म्यूजिक हराम नहीं है अगर वो बुराई को प्रमोट नहीं
Speaker A
कर रहा फिर म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट जो भी हो मैटर नहीं करता अब इन तीन पॉइंट ऑफ व्यूज को थोड़ी देर के लिए हम साइड पर रख देते हैं पहले ये समझने की कोशिश करते हैं कि म्यूजिक है क्या मौसी की है क्या कौन
Speaker A
सी ऐसी आवाजें हैं जिनको हम मौसकी में शामिल कर सकते हैं और कौन सी आवाजें हैं जिनको मौसिकी में शामिल नहीं कर सकते अब ट्रेडिशनल डेफिनेशन ऑफ म्यूजिक जो है वो ये कहती है कि ऐसे साउंड्स की अरेंजमेंट
Speaker A
जो कानों को अच्छी लगे और इंसान के जज्बात को छेड़ दे और उन्हीं आवाजों की अरेंजमेंट से धुन बनती है मेलोडी बनती हैं और उन्हीं से ही रिदम बनता है ये आवाजें वोकल भी हो सकती हैं जैसे गले से अगर निकाली जाए
Speaker A
जिसको गाना कहते हैं जैसे वो दो बच्चियां गा रही थी और ये आवाजें इंस्ट्रूमेंट से भी निकाली जा सकती है जैसे दफ बजाई जाती है अब साइंस ने स्टडी करके बताया कि ये जो आवाजें इंसान के कानों को अच्छी लग रही
Speaker A
हैं ये मेनली सात किस्म की फ्रीक्वेंसी हैं जिनको सुर कहा जाता है उन्होंने सोचा तो क्यों ना इन फ्रीक्वेंसी को नाम दे देते हैं समझने के लिए आसानी के लिए तो उन्होंने 2616 हर्ज की फ्रीक्वेंसी को नाम दे दिया
Speaker A
सी यानी सा 23.3 3 हर्ज की फ्रीक्वेंसी को नाम दे दिया डी यानी रे और इसी तरह सातों स्वरों को उन्होंने नाम दे दिया सारे गामा पादा नहीं सबको अंग्रेजी में कहे तो सी डी ई एफ जी ए बी अब आप सोच रहे होंगे अचानक से
Speaker A
म्यूजिक क्लास कहां से शुरू कर दी भाई इस बंदे ने रुको जरा सब्र करो मैं कहना यह चाह रहा हूं कि क्योंकि ये फ्रीक्वेंसी हैं और ये नेचर में मौजूद है तो कुदरत भी इन फ्रीक्वेंसी से म्यूजिक बजाती रहती है
Speaker A
जैसे कोयल का कूकू करना नों को बड़ा अच्छा लगता है बड़ा सुकून मिलता है जब कोई कोयल कूकू कर रही हो तो क्यों क्योंकि उसकी फ्रीक्वेंसी भी म्यूजिकल नोट्स सी शार्प या जी शार्प से मिलती है कोयल हमेशा 900
Speaker A
हर्टज से लेके 2000 हर्टज की फ्रीक्वेंसी के बीच में ही गाती है जो कि पियानो का मिडिल ऑक्टेव बनता है बल्कि ईस्टर्न क्लासिकल म्यूजिक में तो कोयल के गाने को आप राग भोपाली या राग यमन से कंपेयर भी कर
Speaker A
सकते हैं क्योंकि उनमें भी जो प्रॉमिनेंट सुर होते हैं वो सा पा होते हैं वही सुर जो कोयल जिन में गाती है छोड़े कोयल को आ जाते हैं बारिश पे जब बारिश की बूंदे ग्राउंड प टच करती हैं या पत्तों प टच
Speaker A
करती हैं या पानी में पड़ जाती हैं तो कितना सुकून महसूस होता है वो आवाज सुनके कितना अच्छा लगता है ऐसे लगता है जैसे नेचर म्यूजिक बजा रही है असल में बारिश की बूंदे भी जब गिरती हैं तो टाइनी
Speaker A
वाइब्रेशंस ही क्रिएट होती हैं और उन वाइब्रेशंस को भी जब मेजर किया गया तो वो भी म्यूजिकल नोट्स ही निकलते हैं जैसे बारिश मध्यम सी है लाइट रेन है तो c5 d5 e5 के नोट्स बचते हैं मॉडरेट किस्म की
Speaker A
बारिश है तो g3 से c4 बचता है और बारिश अगर हैवी है तो लोअर नोट्स c2 d2 के नोट्स बचते हैं और ये मिसाले कोई एक दो नहीं है दोस्तों जैसे हवा हवा जब दरख्तों के बीच से गुजरती है या नैरो स्पेसेस से गुजरती
Speaker A
है तो एक विसलिंग साउंड क्रिएट करती है ऐसा लगता है जैसे कोई बांसरी बजा रहा हो उस हवा से बने हुए साउंड को भी जब ऑब्जर्व किया गया तो म्यूजिकल नट a4 बज रहा है 440 हर्टज या उससे ऊपर समंदर की लहरें भी जब
Speaker A
आपस में टकराती हैं तो वो भी वही फ्रीक्वेंसी क्रिएट करती हैं 200 से 500 हर्ट्ज की जो डीप चेलो क्रिएट कर सकता है या बेस गिटार क्रिएट करता है और ये आवाजें कानों को खूबसूरत इसलिए लगती है क्योंकि
Speaker A
इनमें एक स्टेडी रिदम भी होती है और पानी के कतरे जब पानी पे गिरते हैं पक करके तो ऐसा लगता है जैसे जाइलोफोन बज रहा हो कतरे छोटे हो तो म्यूजिकल नोट d5 e5 f5 जजर होता है बड़े हो तो a3 c4 बचता है वेल
Speaker A
मछलियां भी जब आपस में कम्युनिकेट करती हैं तो मेलोडिक लंबे-लंबे साउंड्स क्रिएट करती हैं फन फैक्ट ये है कि कुछ वेल्स तो रिपीटेड पैटर्स में साउंड्स ऐसे क्रिएट करती हैं जैसे मानो किसी इंसान ने उनको धुन बना के दे दी हो सब छोड़ें ये हमारी
Speaker A
जमीन जी हां ये हमारा गोला ये अर्थ भी वाइब्रेट करती है ऑन लो फ्रीक्वेंसी ऑफ 3 टू 10 मेगाहर्ट्ज इसको अर्थस हम भी कहते हैं प्लेनेट म्यूजिक भी कहते हैं इसका साइंटिफिक नाम ह्यूमन रेजोनेंस है जैसे जब म्यूजिक में वोकल ट्रेनिंग लेते हैं तो
Speaker A
हमिंग करते हैं हम हम तो हमारी अर्थ भी एक हम कर रही है लेकिन वो फ्रीक्वेंसी इतनी कम है कि वो सुनाई नहीं देती ये वाइब्रेशंस इतनी डीप होती है कि हमारे कानों को सुनाई नहीं देती लेकिन एक म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट है
Speaker A
जो ये वाइब्रेशन प्ले कर सकता है और वो है पाइप ऑर्गन मतलब हमारी अर्थ भी कांस्टेंटली एक म्यूजिक प्ले कर रही है साइंटिस्ट ये मानते हैं कि जो प्लेनेट म्यूजिक है है उसका असर इंसान के ब्रेन वेव्स पे भी पड़ता है और वो रेगुलेट होती
Speaker A
है पूरी बात का कंक्लूजन यह है दोस्तों कि नेचर कांस्टेंटली म्यूजिक प्ले कर रही है थ्रू वाइब्रेशंस थ्रू रिदम्स थ्रू हार्मनीज साइंटिस्ट ने ये डिस्कवर किया है कि जो नेचर ये साउंड्स निकाल रही है उनमें पैटर्स हैं उनमें हार्मनीज हैं तो बाय
Speaker A
डेफिनेशन वो साउंड म्यूजिक में फॉल करते हैं तो भाई लोग जब ये सारी आवाजें भी म्यूजिक में फॉल करें तो आ जाओ जरा वो सवाल फिर से कर लेते हैं अपने आप से क्या म्यूजिक हलाल है या हराम है क्योंकि नेचर
Speaker A
तो खुद भी म्यूजिक बजा रही है लेकिन मैं आपकी राय भी जरूर जानना चाहूंगा नीचे कमेंट बॉक्स में प्लीज पढ़े लिखे लोगों की तरह कन्वर्सेशन स्टार्ट करिएगा हेल्दी कन्वर्सेशन स्टार्ट करना बस बाकी अगर आपको यह वीडियो इंफॉर्मेशन लगी है तो
Speaker A
सब्सक्राइब का बटन ठोक दो बड़ी मेहनत लगी है इस पे मैं मिलता हूं आपसे किसी और वीडियो में किसी और बात प करते हुए तबसरा तब तक के लिए भाई को दीजिए इजाजत मैं चला गुड बाय ब
Topics:म्यूजिक हलाल या हरामइस्लाम में म्यूजिकहदीस और म्यूजिककुरान में म्यूजिकसलाफी और हबली दृष्टिकोणदफ बजाने की इजाजतम्यूजिक का इस्लामी विश्लेषणम्यूजिक कंटेंट और नैतिकतासूफी कलामइस्लामी स्कॉलर्स के विचार











