सिगरेट और वेप के नुकसान और एडिक्शन पर विस्तार से चर्चा, कौन ज्यादा खतरनाक है, और इतिहास से जुड़ी जानकारी।
Key Takeaways
- सिगरेट में मौजूद केमिकल्स और टार से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं।
- निकोटीन मुख्य एडिक्टिव एजेंट है जो दिमाग में डोपामिन रिलीज कर लत लगाता है।
- वेप सिगरेट की तुलना में कम हानिकारक माना जाता है परंतु पूरी तरह सुरक्षित नहीं है।
- सिगरेट पीने को महिलाओं की आजादी का प्रतीक बनाकर मार्केटिंग की गई।
- लंबे समय तक सिगरेट पीने से कैंसर, दिल की बीमारी और अन्य गंभीर बीमारियां होती हैं।
What the video covers
- सिगरेट में 600 से ज्यादा इंग्रेडिएंट्स होते हैं जो जलने पर 7000 केमिकल्स बनाते हैं, जिनमें निकोटीन, टार, कार्बन मोनोऑक्साइड, बेंजीन, लेड और कार्सिनोजेंस शामिल हैं।
- निकोटीन दिमाग में डोपामिन रिलीज कर एडिक्शन पैदा करता है, जिससे व्यक्ति लत में फंस जाता है।
- सिगरेट पीने से कैंसर, दिल की बीमारियां, ब्रोंकाइटिस, फर्टिलिटी प्रॉब्लम्स और इम्यून सिस्टम कमजोर होता है।
- 1929 में अमेरिका में महिलाओं को सिगरेट पीने के लिए प्रोत्साहित किया गया ताकि सेल्स बढ़ें, इसे महिलाओं की आजादी का प्रतीक बनाया गया।
- 1930 में जर्मन फिजिशियन फ्रिज लिखिन ने सिगरेट से कैंसर होने की स्टडी पब्लिश की, जिसके बाद जर्मनी ने एंटी स्मोकिंग मेजर्स शुरू किए।
- वेप एक बैटरी पावर्ड डिवाइस है जिसमें वेप जूस होता है, और इसमें निकोटीन की मात्रा नियंत्रित की जा सकती है।
- वेप को सिगरेट की तुलना में कम हानिकारक माना जाता है लेकिन इसके लम्बे समय के प्रभावों पर अभी अध्ययन जारी है।
- वेप में प्रयुक्त फूड फ्लेवरिंग्स फेफड़ों के लिए सुरक्षित नहीं हैं, भले ही वे खाने के लिए एफडीए से अप्रूव्ड हों।
- सिगरेट और वेप दोनों में एडिक्शन की समस्या है, लेकिन वेप को छोड़ने में कुछ लोगों को आसानी होती है।
- एडवर्ड बार्स ने सिगरेट मार्केटिंग में महिलाओं को टारगेट कर सेल्स बढ़ाने के लिए एक मास्टर स्ट्रोक किया था।
Chapters
- 00:00परिचय: सिगरेट और वेप की तुलना
- 01:11सिगरेट के हानिकारक तत्व और प्रभाव
- 03:27सिगरेट पीने के सामाजिक और स्वास्थ्य प्रभाव
- 04:311929 की मार्केटिंग रणनीति और महिलाओं का सिगरेट पीना
- 05:411930 में कैंसर स्टडी और एंटी स्मोकिंग मेजर्स
- 06:51एडवर्ड बार्स और सिगरेट मार्केटिंग की कहानी
- 07:47वेप क्या है और इसके घटक
- 12:15सिगरेट और वेप की तुलना और निष्कर्ष
Full Transcript — Download SRT & Markdown
Speaker A
सिगरेट या वेप इन दोनों में से कौन है ज्यादा खतरनाक? आज की इस वीडियो में इन दोनों का मुकाबला कराएंगे और जानने की कोशिश करेंगे कि इन दोनों में से कौन ज्यादा खतरनाक है और कौन रिलेटिवली सेफर है। तो यह वीडियो है धुएं छोड़ने वालों के नाम।
Speaker A
नाम। चलो जी पहले तो बाय द बुक जाके डेफिनेशन समझ लेते हैं कि यह सिगरेट आखिर कौन सी बला है? इसमें होता क्या है? तो जी एक सिगरेट में तकरीबन 600 इंग्रेडिएंट्स ऐसे होते हैं जिनको अगर जलाया जाए तो 7000
Speaker A
चलो जी पहले तो बाय द बुक जाके डेफिनेशन समझ लेते हैं कि यह सिगरेट आखिर कौन सी बला है? इसमें होता क्या है? तो जी एक सिगरेट में तकरीबन 600 इंग्रेडिएंट्स ऐसे होते हैं जिनको अगर जलाया जाए तो 7000 केमिकल्स प्रोड्यूस होते हैं।
Speaker A
में एक रिवॉर्ड सिस्टम पैदा करती है। जहां से आपने कश लगाया और दिमाग में डोपामिन के हिट्स हुए। मजा आने लग गया। फिर लगाया फिर डोपामिन का हिट आया और इसी तरह दिमाग उसका आदि हो चुका होता है। फिर आता है टार
Speaker A
जिनमें सबसे ज्यादा एडिक्टिव स्टिमुलेंट जो है वो है अमरीन की छोटी बहन निकोटेन। बाकी सारी चीजें एक तरफ कर दो। लेकिन यही निकोटीन है जो आपको लत लगा देती है। जिसकी वजह से ही आपको आदत पड़ जाती है। क्योंकि यह ब्रेन में एक रिवॉर्ड सिस्टम पैदा करती है।
Speaker A
में भी जमा हो जाता है। सिगरेट में कार्बन मोनोऑक्साइड भी होता है जिसकी वजह से आपके ब्लड में ऑक्सीजन की कमी होती है। उसके अलावा बेंजीन, लेड और बहुत सारे कार्सिनोजेस होते हैं। कास एनर्जीस वो होते हैं जिनकी वजह से कैंसर होता है। अब
Speaker A
जहां से आपने कश लगाया और दिमाग में डोपामिन के हिट्स हुए। मजा आने लग गया। फिर लगाया फिर डोपामिन का हिट आया और इसी तरह दिमाग उसका आदि हो चुका होता है। फिर आता है टार जिसकी वजह से आपके फेफड़े काले हो चुके होते हैं।
Speaker A
के जाल में फंस चुके हैं। निकेटिन इतनी कुती चीज है जो 10 सेकंड के अंदर आपके ब्रेन में पहुंचती है और उन्हीं तारों को छेड़ती है जिससे मजा आता है। प्लेजर होता है। पहले जरा स्टैट्स और फिगर्स की बात कर
Speaker A
कुछ लोगों के तो सिगरेट पी के होठ भी जो काले होते हैं वो भी टार की वजह से ही होते हैं। क्योंकि उन होठों में टार जमा हो जाता है। इसी तरह ही वो फेफड़ों में भी जमा हो जाता है। सिगरेट में कार्बन मोनोऑक्साइड भी होता है जिसकी वजह से आपके ब्लड में ऑक्सीजन की कमी होती है।
Speaker A
बीमारियां हो सकती हैं। ब्रोंकाइटिस हो सकता है। मर्द नापुंसक हो सकता है। जी हां, फर्टिलिटी को भी यह अफेक्ट करता है। मर्दाना कमजोरी यह एक नाइट मेयर है सब देियों का और वो सिगरेट पीने से पॉसिबल हो सकता है। उसके अलावा सिगरेट पीने से
Speaker A
उसके अलावा बेंजीन, लेड और बहुत सारे कार्सिनोजेंस होते हैं। कार्सिनोजेंस वो होते हैं जिनकी वजह से कैंसर होता है। अब ये सारे नुकसान किसको नहीं पता? सबको पता है जैसे आपकी भाभी ने मुझसे एक मासूमाना सवाल किया था कि अगर सिगरेट इतनी ही बुरी चीज है तो लोग क्यों पीते हैं?
Speaker A
हैं क्योंकि यहां पे गुटखा भी तो होता है ना और भी बहुत सारी चीजें होती है जिनमें तंबाकू यूज़ किया जाता है। अब ये तो हो गई सारी नंबरों वाली बातें। आइए मेरे साथ आपको एक कहानी सुनाता हूं। चलो चलते हैं
Speaker A
अरे क्योंकि उनको लत लग चुकी है। वह निकोटेन के जाल में फंस चुके हैं। निकोटेन इतनी कुटिल चीज है जो 10 सेकंड के अंदर आपके ब्रेन में पहुंचती है और उन्हीं तारों को छेड़ती है जिससे मजा आता है। प्लेजर होता है। पहले जरा स्टैट्स और फिगर्स की बात कर लेते हैं।
Speaker A
लड़कियों ने एक साथ सिगरेट को जलाया और फूंकने लग गई। वहां खड़ी हुई आवाम हैरान हो गई क्योंकि उस टाइम पे लड़कियां सिगरेट बिल्कुल भी नहीं पीती थी। सब उन लड़कियों को देखने लगी। वहां जो खड़े हुए फोटोग्राफर्स थे वो धड़ाधड़ उन लड़कियों
Speaker A
उसके बाद मैं आऊंगा जहां पे हम लड़ाई करवाएंगे वेप और सिगरेट की। तो सबसे पहले तो यह जानते हैं कि सिगरेट के लॉन्ग टर्म इफेक्ट्स क्या हैं? एक तो सबसे कॉमन कैंसर हो सकता है। दिल की बीमारियां हो सकती हैं। ब्रोंकाइटिस हो सकता है।
Speaker A
टाइटल के साथ टॉर्चेस ऑफ [संगीत] फ्रीडम। उन औरतों के सिगरेट पीने को इस तरह पोट्रे किया गया जैसे सिगरेट औरतों को एमावर करता हो। जैसे औरत के हाथ में अगर सिगरेट आ जाए तो समझो उसको आजादी मिल गई।
Speaker A
मर्द नपुंसक हो सकता है। जी हां, फर्टिलिटी को भी यह अफेक्ट करता है। मर्दाना कमजोरी यह एक नाइटमेयर है सब देियों का और वो सिगरेट पीने से पॉसिबल हो सकता है। उसके अलावा सिगरेट पीने से इम्यून सिस्टम भी वीक होता है।
Speaker A
टाइम पे यह सिगरेट एक लड़की के हाथ में एक बगावत का सिंबल बन गया। होना क्या था?
Speaker A
दुनिया भर में हर साल तकरीबन 80 लाख लोग सिगरेट पीने की वजह से मर जाते हैं। में से पाकिस्तान में खाली 16 लाख 1600 लोग टोबैको रिलेटेड तंबाकू से रिलेटेड बीमारियों में मर जाते हैं क्योंकि यहां पे गुटखा भी तो होता है ना और भी बहुत सारी चीजें होती हैं जिनमें तंबाकू यूज़ किया जाता है।
Speaker A
यू करने लग गए बल्कि सलूट करने लग गए उसको और वह शख्स था एडवर्ड बार्स। जी दोस्तों खासतौर पर मार्केटिंग सीखने वाले दोस्तों यह नाम जरा याद रखना एडवर्ड बार्स। यह शख्स सिगमन फ्रॉयड का भांजा था सिगमन फ्रॉयड जिसको खुद द फादर ऑफ साइको
Speaker A
अब ये तो हो गई सारी नंबरों वाली बातें। आइए मेरे साथ आपको एक कहानी सुनाता हूं। चलो चलते हैं 1929 अमेरिका में। न्यूयॉर्क के शहर में ईस्टर डे मनाया जा रहा था। सब खुश नजर आ रहे थे। परेड चल रही थी कि वहां पर अचानक 10 यंग लड़कियां आ गईं और उनके हाथ में था सिगरेट और उन लड़कियों ने एक साथ सिगरेट को जलाया और फूंकने लग गईं।
Speaker A
तब बारिस ने कहा कि सिगरेट की सेल्स तभी बढ़ेंगी जब औरतें भी सिगरेट पीने लग जाएंगी तो कुछ सोचना पड़ेगा। एंड दिस इज एक्जेक्टली व्हाट ही केम अप विद। एडवर्ड ने उन 10 लड़कियों को ईस्टर के दिन सिगरेट
Speaker A
वहां खड़ी हुई आवाम हैरान हो गई क्योंकि उस टाइम पे लड़कियां सिगरेट बिल्कुल भी नहीं पीती थीं। सब उन लड़कियों को देखने लगीं। वहां जो खड़े हुए फोटोग्राफर्स थे वो धड़ाधड़ उन लड़कियों की तस्वीरें बनाने लग गए।
Speaker A
नो आईडिया काफी सिनिस्टर था लेकिन जीनियस था। एक सिगरेट को औरत के फ्रीडम और इक्वलिटी मांगने का सिंबल बना देना मैनपुलेशन की हद है। व्हाट अ मास्टर स्ट्रोक। कुछ हद तक हम एडवर्ड बार्स को बेनिफिट ऑफ डाउट दे सकते हैं क्योंकि उस
Speaker A
यह वो टाइम था जहां पे लड़कियों के सिगरेट पीने को बिल्कुल टैबू माना जाता था और सोसाइटी में बिल्कुल अनएक्सेप्टेबल चीज हुआ करती थी। फिर क्या हुआ? वो लड़कियों के सिगरेट पीने वाली तस्वीर अखबार में छप गई। बहुत बड़े टाइटल के साथ टॉर्चेस ऑफ फ्रीडम।
Speaker A
1930 में एक जर्मन फिजिशियन फ्रिज लिखिन ने एक स्टडी पब्लिश की जिसमें उसने बताया कि सिगरेट पीने वालों को कैंसर हो रहा है। बॉस। इस तरह जर्मनी पहला कंट्री बना जिसने एंटी स्मोकिंग मेजर्स लेना शुरू कर दिए। लेकिन फिर भी इस स्टडी को पूरी दुनिया
Speaker A
उन औरतों के सिगरेट पीने को इस तरह पोट्रे किया गया जैसे सिगरेट औरतों को एमावर करता हो। जैसे औरत के हाथ में अगर सिगरेट आ जाए तो समझो उसको आजादी मिल गई। उसको इक्वलिटी मिल गई और यह वही दौर था जिसमें अमेरिका में पहली वेव ऑफ फेमिनिज्म चल रही थी।
Speaker A
वार्निंग्स भी आने लग गई। हालांकि बड़ी टोबैको कंपनीज ने इस सच को छुपाने के लिए करोड़ों रुपए लगा दिए थे। लेकिन ये सच इतना ताकतवर था कि ये आखिर फट पड़ा। तो मुद्दे की बात ये है कि सिगरेट से कैंसर
Speaker A
जहां औरतें अपने हकूक मांग रही थीं और खासतौर पे राइट टू वोट मांग रही थीं कि भाई वोट करने का हक हमें भी दो। उसी टाइम पे यह सिगरेट एक लड़की के हाथ में एक बगावत का सिंबल बन गया। होना क्या था?
Speaker A
नहीं उससे क्या-क्या होता है। आएंगे आएंगे वेब पे तसल्ली से आएंगे। तो खैर एडवर्ड बर्निस को यह तो शायद नहीं पता था कि वह ज़हर बेच रहा है, लेकिन उसको यह जरूर पता था कि वह एक झूठ बेच रहा है। क्योंकि औरत
Speaker A
बहुत सारी औरतें फिर सिगरेट पे लग गईं और अमेरिकन टोबैको कंपनी के स्टक्स स्काई रॉकेट हो गए। सेल्स एकदम से डबल हो गई। कंपनी के हेड्स एक दूसरे को मुबारकबाद देने लग गए और खासतौर पर एक शख्स का थैंक यू करने लग गए बल्कि सलूट करने लग गए उसको और वह शख्स था एडवर्ड बार्स।
Speaker A
लगती है जिसमें वेप जूस डलता है और धुआं निकलता है। बड़ा सिंपल सा मैकेनिज्म है कि जो लिक्विड होता है वेप जूस जिसको अक्सर बोलते हैं। वेप के अंदर एक कॉइल होती है जो कश लगाने से हीट अप होती है और उस
Speaker A
जी दोस्तों खासतौर पर मार्केटिंग सीखने वाले दोस्तों यह नाम जरा याद रखना एडवर्ड बार्स। यह शख्स सिगमन फ्रॉयड का भांजा था सिगमन फ्रॉयड जिसको खुद द फादर ऑफ साइकोएनालिसिस कहते हैं। और बार्स को फादर ऑफ पब्लिक रिलेशंस भी कहते हैं।
Speaker A
छोटी बहन निकोटीन पाई जाती है और वही तो एडिक्शन की जड़ है पूरी। हां, यह है कि वेब के अंदर आपके पास ऑप्शन होती है कि आप निकोटेन की क्वांटिटी कितनी रखना चाहते हैं। जैसे आप हार्ड सिगरेट पीते हैं या
Speaker A
क्यों? क्योंकि यह सारा खेल इस बंदे ने ही रचा था। ही यूज्ड टू वर्क इन अमेरिकन टोबैको कंपनी। उसके बॉसेस ने कहा कि सेल्स नहीं बढ़ रही कुछ बड़ा ब्रेकथ्रू चाहिए। तब बार्स ने कहा कि सिगरेट की सेल्स तभी बढ़ेंगी जब औरतें भी सिगरेट पीने लग जाएंगी तो कुछ सोचना पड़ेगा।
Speaker A
अंदर है क्या? किस चीज से बना हुआ है? इसके अंदर होता है प्रोपलीन ग्लाइकॉल जो फ्लेवर को एनहांस करता है और थ्रोट हीट भी पैदा करता है जो छोटे बाजों को ताकि एक फील आए। फिर इसके अंदर वेजिटेबल ग्लिसरीन
Speaker A
एंड दिस इज एक्जेक्टली व्हाट ही केम अप विद। एडवर्ड ने उन 10 लड़कियों को ईस्टर के दिन सिगरेट पकड़ाया। साथ में फोटोग्राफर्स को भी पैसा दिया कि जब वो सिगरेट जलाएं तो उनके फोटोज खींच रहे हैं। उसके बाद न्यूज़पेपर वालों को भी पैसे खिलाए और उनको बोला कि जब इसको छापो तो टॉर्चेस ऑफ फ्रीडम करके छापना।
Speaker A
अप्रूव्ड नहीं होती। आपके स्टमक और आपके लंग्स में फर्क है। जो चीज मैदे के लिए बनी है उसको फेफड़ों में डालोगे तो क्या होगा? कुछ उल्टा पुल्टा ही होगा। अब सवाल यह है कि लोग फिर वेप क्यों पीते हैं?
Speaker A
आई नो आईडिया काफी सिनिस्टर था लेकिन जीनियस था। एक सिगरेट को औरत के फ्रीडम और इक्वलिटी मांगने का सिंबल बना देना मैनिपुलेशन की हद है। व्हाट अ मास्टर स्ट्रोक। कुछ हद तक हम एडवर्ड बार्स को बेनिफिट ऑफ डाउट दे सकते हैं क्योंकि उस दौर में यह नहीं पता था कि सिगरेट पीने से कैंसर होता है।
Speaker A
25% लोगों ने सिगरेट पीना छोड़ दिया। लेकिन 25% बहुत सारे लोग ऐसे भी हैं जो दोनों ही पी रहे हैं। यहां से सिगरेट का सुट्टा लगा यहां से वेप का। लेकिन वेप आजकल एक मेडिकल टूल नहीं है बल्कि उसका
Speaker A
जी हां, 1929 में जब ये टॉर्चेस ऑफ फ्रीडम वाला पूरा सीन हुआ तब इतनी रिसर्च ही नहीं थी कि पता चले कि जी इससे कैंसर भी होता है। पूरे एक साल बाद 1930 में एक जर्मन फिजिशियन फ्रिज लिखिन ने एक स्टडी पब्लिश की जिसमें उसने बताया कि सिगरेट पीने वालों को कैंसर हो रहा है।
Speaker A
नहीं है। इसमें कोई कंबस्शन नहीं हो रही। तो यह तो इसमें तो इतना नुकसान नजर नहीं आ रहा। लेकिन क्या वाकई वेब 100% सेफ है? जी नहीं। क्योंकि इसके अंदर निकोटेन तो फिर भी है और निकोटेन इन इटसेल्फ बहुत बड़ी
Speaker A
बॉस। इस तरह जर्मनी पहला कंट्री बना जिसने एंटी स्मोकिंग मेजर्स लेना शुरू कर दिए। लेकिन फिर भी इस स्टडी को पूरी दुनिया नहीं मानती थी। चलते-चलते 1964 में पहली सॉलिड साइंटिफिक स्टडीज आई जिन्होंने बताया कि भाई यस स्मोकिंग कॉजेस कैंसर।
Speaker A
सेल्स होते हैं जिनको सिलिया बोलते हैं। उनको भी डैमेज करती है। अगेन वही नापुंसुकी मर्दों की स्पर्म की क्वालिटी और क्वांटिटी को भी अफेक्ट करती है। औरतों में फर्टिलिटी के इश्यूज भी निकटिन लाती है। अब यह तो हो गए नेगेटिन के मोटे-मोटे
Speaker A
क्योंकि जब देखा गया तो जो सुट्टेबाज थे उनमें कैंसर होने के चांसेस 50 टाइम्स ज्यादा थे। और तभी सिगरेट की डब्बियों पे वार्निंग्स भी आने लग गई। हालांकि बड़ी टोबैको कंपनीज ने इस सच को छुपाने के लिए करोड़ों रुपए लगा दिए थे।
Speaker A
ज्यादा कुछ कह नहीं सकते। वो तो जब 40-50 साल बाद ऐसे कोई मरीज आएंगे उनमें नई बीमारियां होंगी तो पता लगेगा। हां अगर आपने ऐसे मेडिकल के स्टूडेंट्स के लिए सब्जेक्ट बनना है आनंद भाई तो ठीक है। फिर
Speaker A
लेकिन ये सच इतना ताकतवर था कि ये आखिर फट पड़ा। तो मुद्दे की बात ये है कि सिगरेट से कैंसर होता है। ये जानते-जानते तकरीबन 100 साल लग गए। तब जाके एक फाइनल मोहर लगी कि हां जी इससे ये मसले हो रहे हैं। कैंसर हो रहा है।
Speaker A
मार्केट किया गया था। जब उसको एडवरटाइज किया गया था तो इस तरह किया गया था जैसे वो एक नई चीज है। कूल चीज है। ट्रडी चीज है। जब जूल का स्लीक डिजाइन आया तो टीनएजर्स पागल ही हो गए। ब्रांडिंग ही वेब
Speaker A
तो आप सोचिए वेप को तो अभी कितना ही टाइम हुआ है। अभी तो हमें पता ही नहीं उससे क्या-क्या होता है। आएंगे आएंगे वेप पे तसल्ली से आएंगे। तो खैर एडवर्ड बर्निस को यह तो शायद नहीं पता था कि वह ज़हर बेच रहा है, लेकिन उसको यह जरूर पता था कि वह एक झूठ बेच रहा है।
Speaker A
ब्लर हो गया बल्कि खत्म हो गया। क्योंकि बहुत सारे ऐसे लोग जो कभी सिगरेट नहीं भी पीते थे वो भी वेप करने लग गए। क्योंकि जाहिर है न्यू कूल है। अडॉप्ट तो करना है लोगों ने। 2019 में खाली यूएस का डाटा
Speaker A
क्योंकि औरत का सिगरेट पीना और उसका हकूक मांगना इनमें कोई ताल्लुक नहीं है। अब आइए जरा रिंग में लेके आते हैं वेप को। देखते हैं कि यह वेप आखिर किस भला का नाम है। देखने में तो एक सिंपल सी बैटरी पावर डिवाइस लगती है जिसमें वेप जूस डलता है और धुआं निकलता है।
Speaker A
उन्हीं वक्तों में दोस्तों यूके में वेब को इस तरह मार्केट किया गया। इस तरह एडवरटाइज किया गया जैसे यह एक मेडिकल टूल है। सिगरेट छुड़ाने का बेहतरीन तरीका हो। यूके में वेब को इस तरह कोई ट्रडी प्रोडक्ट के तौर पर दिखाया नहीं गया। कोई
Speaker A
बड़ा सिंपल सा मैकेनिज्म है कि जो लिक्विड होता है वेप जूस जिसको अक्सर बोलते हैं। वेप के अंदर एक कॉइल होती है जो कश लगाने से हीट अप होती है और उस लिक्विड को एरोसोल्स में चेंज करती है या वेपर्स में चेंज करती है जिसकी वजह से धुआं बनता है।
Speaker A
सबका रिजल्ट क्या हुआ? रिजल्ट यही हुआ कि बहुत सारे ऐसे लोग जो सिगरेट पीते थे। उन्होंने सिगरेट छोड़ दी और वो वेब पे आ गए। तो देख रहे हैं आप यह मार्केटिंग की कितनी बड़ी गेम है। यूएस में जहां पे उसको
Speaker A
यहां पर भी यह जानना बहुत जरूरी है कि वेप भी एक बहुत एडिक्टिव चीज है क्योंकि इसके अंदर भी वही अमरीन की छोटी बहन निकोटीन पाई जाती है और वही तो एडिक्शन की जड़ है पूरी। हां, यह है कि वेप के अंदर आपके पास ऑप्शन होती है कि आप निकोटीन की क्वांटिटी कितनी रखना चाहते हैं।
Speaker A
है तो आइए इनको कंपेयर करते हैं और देखते हैं कि इन दोनों में से खतरनाक कौन है। तो कंक्लूजन यह है कि यस वेब इज लॉट मोर सेफर देन सिगरेट। लेकिन अभी तक क्योंकि हमारे पास इतनी स्टडी नहीं है वेब को लेके तो
Speaker A
जैसे आप हार्ड सिगरेट पीते हैं या लाइट सिगरेट पीते हैं। बिल्कुल उसी तरह वेप के जूस के अंदर अगर आप 50 एमजी लेते हैं तो वो हार्ड होगा। 25 एमजी लेते हैं तो वो लाइट होगा। आइए जरा देखते हैं कि यह वेप में जो जूस डलता है, इस जूस के अंदर है क्या? किस चीज से बना हुआ है?
Speaker A
मैं आपसे पर्सनल जर्नी शेयर करता हूं कि हाउ आई क्विट सिगरेट्स और वेपिंग। तो बात ये है कि आई आल्सो स्टार्टेड विद स्मोकिंग इज़ मोस्ट ऑफ़ द पीपल डू। और फिर मैं आया वेबप पे और फिर वेब को भी मैंने बाय-ब कर
Speaker A
इसके अंदर होता है प्रोपलीन ग्लाइकॉल जो फ्लेवर को एनहांस करता है और थ्रोट हीट भी पैदा करता है जो छोटे बाजों को ताकि एक फील आए। फिर इसके अंदर वेजिटेबल ग्लिसरीन भी मौजूद होता है जिसकी वजह से धुआं थिक होता है।
Speaker A
यू कि आपकी बॉडी के साथ होता क्या है? जैसे ही आप निकोटेन छोड़ते हो तो पहले 3 घंटे में आपकी बॉडी से निकोटिन के जो लेवल्स हैं वह ड्रॉप होते हैं। बहुत ज्यादा ताकतवर क्रेविंग शुरू होने लग जाती
Speaker A
फिर एंड में फूड फ्लेवरिंग्स भी होती हैं। जैसे मिंट, स्ट्रॉबेरी, चॉकलेट। वैसे तो यह फूड फ्लेवरिंग्स एफडीए से अप्रूव्ड हैं। लेकिन भाई खाने के लिए अप्रूव्ड हैं। फेफड़ों में डालने के लिए अप्रूव्ड नहीं होती।
Speaker A
में तकलीफ होती है। भूख ज्यादा लगने लगती है। कंसंट्रेट नहीं कर पाते आप। मैंने तो क्लियरली आपकी भाभी को बोला था कि ये कुछ दिनों में मैं बहुत ही पागल हो जाऊंगा तो बर्दाश्त कर लेना। डे फोर से लेके डे सेवन
Speaker A
आपके स्टमक और आपके लंग्स में फर्क है। जो चीज मैदे के लिए बनी है उसको फेफड़ों में डालोगे तो क्या होगा? कुछ उल्टा पुल्टा ही होगा। अब सवाल यह है कि लोग फिर वेप क्यों पीते हैं? इसका जवाब कोई एक नहीं है।
Speaker A
बर्दाश्त कर लिया तो वीक टू से लेके वीक फोर तक आपकी क्रेविंग्स की जो फ्रीक्वेंसी है वो बहुत कम हो गई होती है। मूड भी आहिस्ता-आहिस्ता स्टेबलाइज होने लग जाता है। आप नोट करोगे फेफड़े आपके बेहतर फंक्शन करने लग जाते हैं और एनर्जी लेवल्स
Speaker A
हां, इसका जो मोस्ट कॉमन जवाब है वो यह है कि सिगरेट छोड़ने के लिए कुछ हद तक यह बात ठीक भी है क्योंकि यूके की स्टडीज ये बताती हैं कि जिन भी लोगों ने ई सिगरेट खरीदा उनमें से 25% लोगों ने सिगरेट पीना छोड़ दिया।
Speaker A
लेवल्स को खुद रिकैलबेट कर देगा कि बस भाई बस बस भाई बस ज्यादा बात नहीं चीप साहब इससे ज्यादा मजे आपको नहीं मिलेंगे तो यह डोपामिन जंकी बनना आप छोड़ दो दिमाग खुद ही समझा देगा अपने आपको क्रेविंग्स भी
Speaker A
लेकिन 25% बहुत सारे लोग ऐसे भी हैं जो दोनों ही पी रहे हैं। यहां से सिगरेट का सुट्टा लग...
Speaker A
वाली चीज कोई टॉफी या कुछ बस आपने उस वक्त अपने आप को याद कराना है कि ये जो क्रेविंग हो रही है यह 5 मिनट की है। 5 मिनट की तकलीफ है फिर सबसाइड कर जाएगी। कोल्ड टर्की ये इसको बोलते हैं। इट इज
Speaker A
वेरी हार्ड बट इट इज लाइफ चेंजिंग। बाकी दूसरा मेथड है आहिस्ता-आहिस्ता कम करना। हार्ड सिगरेट से लाइट सिगरेट पे आ जाना। लाइट सिगरेट से वेब पे चले जाना। वेव में भी निकटिन के लेवल्स को कम करते आना और
Speaker A
आखिरकार छोड़ देना। लेकिन फिर इस पूरे सफर में आपने चीट नहीं करना। क्योंकि अगर आपने चीटिंग की तो समझ लो सारा दोबारा से होगा। सब खत्म हो गया। अब दोबारा से जो है ना रिस्टार्ट करना पड़ेगा। कोई फायदा नहीं
Speaker A
होगा उसका। इसीलिए मेरे लिए यह काम नहीं कर रहा था क्योंकि मैं बहुत कम कर देता था निकटिन लेकिन फिर कोई कुछ हो जाता था और मुंह काला कर बैठता था। बाकी बेस्ट ऑफ लक जो छोड़ना चाहते हैं और जिन्होंने नहीं
Speaker A
शुरू किया तो भाई प्लीज खुदा के वास्ते निकटन बहुत लाती चीज है। इसको मत छुएं वरना आप लग जाएंगे पूरी जिंदगी के लिए। कूल बनने के लिए नहीं करना भाई। तो ये सारी बातें वेल रिसर्च थी। ऐसे मैं अपनी
Speaker A
तरफ से यबलियां नहीं मार रहा। अगर आपको यह वीडियो वाकई इनफेटिव लगी है तो इसको लाइक कर देना। चैनल को सब्सक्राइब कर देना। मिलते हैं आपसे किसी और वीडियो में किसी और बात पे करते हुए तब्सरा। तब तक के लिए
Speaker A
भाई को दीजिए इजाजत। मैं चला गुड बाय।
Topics:सिगरेटवेपनिकोटीनस्वास्थ्यएडिक्शनकैंसरकार्बन मोनोऑक्साइडटारएंटी स्मोकिंगमार्केटिंग











