चंगेज खान की कहानी, उनकी ताकत, साम्राज्य विस्तार और आधुनिक विश्व निर्माण में योगदान।
Key Takeaways
- चंगेज खान ने एक विशाल और प्रभावशाली साम्राज्य बनाया जो आज के कई देशों में फैला था।
- उनकी फौज की अनुशासन और रणनीति ने युद्ध के मैदान में उन्हें अद्वितीय बनाया।
- उन्होंने मेरिटोक्रेसी को अपनाया और पारंपरिक जातिगत या परिवारिक पदों को त्यागा।
- उनका शासन एक सुव्यवस्थित कानून व्यवस्था पर आधारित था जो समय-समय पर संशोधित होती रही।
- उनका योगदान केवल युद्ध और विस्तार तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने मानवाधिकारों और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी बढ़ावा दिया।
What the video covers
- चंगेज खान का असली नाम तैमूजीन था और वह यूरेशियन स्टेप में नोमेडिक संस्कृति में पले-बढ़े।
- उनके बचपन में परिवार को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा, जिसमें पिता की मृत्यु और कबीले द्वारा परित्याग शामिल था।
- 1206 तक तैमूजीन ने एक विशाल मंगोल साम्राज्य स्थापित किया, जिसे द ग्रेट मोंगोल नेशन कहा गया।
- चंगेज खान ने पारंपरिक कबीले के टाइटल्स को छोड़कर खुद को एक नया लकब दिया, जिसका अर्थ था 'अडिग, निडर और भयभीत न होने वाला'।
- उनकी फौज अत्यंत अनुशासित, कुशल और रणनीतिक थी, जिसमें घुड़सवार तीरंदाजी और फेंड रिट्रीट जैसी तकनीकें शामिल थीं।
- चंगेज खान ने युद्ध में हारे हुए नेताओं को अपने कबीले में शामिल कर मेरिटोक्रेसी को बढ़ावा दिया।
- उनके शासन में कानून और व्यवस्था के लिए एक संविधान जैसा सिस्टम था, जिसे द ग्रेट लॉ कहा जाता था।
- उनका साम्राज्य 25 वर्षों में 30 से अधिक देशों तक फैला, जो रोमनों के 400 वर्षों के विस्तार से अधिक था।
- मंगोल साम्राज्य में महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा भी शामिल थी और उन्होंने मानवाधिकारों का संरक्षण किया।
- उनके शासनकाल में सांस्कृतिक आदान-प्रदान हुआ, जिससे आधुनिक सभ्यता को बढ़ावा मिला।
Chapters
- 00:00चंगेज खान का परिचय और बचपन
- 01:48तैमूजीन का परिवार और प्रारंभिक संघर्ष
- 03:07मंगोल साम्राज्य की स्थापना
- 04:21चंगेज खान की युद्ध रणनीतियाँ
- 05:42मंगोल फौज की विशेषताएँ और युद्ध तकनीक
- 07:02साम्राज्य का विस्तार और प्रभाव
- 08:17शासन व्यवस्था और द ग्रेट लॉ
- 09:33सामाजिक नियम, सजा और मानवाधिकार
- 10:49सांस्कृतिक आदान-प्रदान और आधुनिक विश्व में योगदान
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Speaker A
एक ऐसा आदमी जिसके नाम से पूरी दुनिया के शहर कांप उठते थे। एक ऐसा कॉन्करर जिसने दुश्मन के सरों का पहाड़ बना दिया। एक ऐसा हुक्मरान जिसके बारे में साइंटिस्ट कहते हैं कि आज भी लाखों लोग उसकी नस्ल से हैं। कुछ लोग उसे तारीख का सबसे बेरहम कातिल कहते हैं। आइए समझते हैं कहानी चंगेज खान की थ्रू द बुक गैंगेस खान एंड द मेकिंग ऑफ मॉडर्न वर्ल्ड बाय जैक वेदरफोर्ड। चंगेज खान ने अपने बचपन में बहुत मुश्किलात का सामना किया। वो यूरेशियन स्टेप में पैदा हुआ जो आज मंगोलिया और साइबेरिया के दरमियान है। स्टेप दोस्तों उस मैदानी इलाके को कहते हैं जहां सिर्फ घास उगती है। दूर-दूर तक कोई दरख्त नजर नहीं आता। चंगेज़ खान का असल नाम तमुजिन था और वो एक नोमेडिक कल्चर में बड़ा हुआ था।
Speaker A
वहां हर कबीले का जो सरबराह था जो चीफ था उस कबीले का उसको खान कहा जाता था। ये खान एक लकब था। उस जमाने का एटमॉस्फियर बड़ा वायलेंट और ब्रूटल था। कबीलों के दरमियान कत्ल अगवा गुलामी ये सारी चीजें बहुत ही कॉमन थी। तमुजीन जब बड़ा हुआ तो उसे पता लगा कि उसके जो वालिद हैं यसुगी उन्होंने उनकी अपनी वालिदा होलन को जबरदस्ती अगवा कर लिया था। हालांकि उसकी अम्मा जो है वो उस वक्त शिलडू नाम के एक नौजवान से शादी कर चुकी थी। उसको जब यह पता लगा कि उसके अब्बा ने ही उसकी अम्मा को अगवा किया था और शादी की थी। वह तो बड़ा हैरान हुआ। लेकिन उस दौर में बीवी चुराना एक बड़ी आम बात होती थी। फलन यानी कि तेमुजीन की जो अम्मा है उन्होंने 1162 में तेमुजीन को जन्म दिया। कुछ ही अरसे बाद तेमुजीन का जो अब्बा था वो फौत हो गया। और कबीले ने तेमुजीन उसकी अम्मा उसके भाई बहनों को मैदानी इलाकों में अकेले ही छोड़ दिया मरने के लिए। यह उस दौर की रिवायत होती थी। फैमिली का सरबराह मर गया तो फिर फैमिली का ख्याल कबीले की जिम्मेदारी नहीं है। तो तैमूजीन और उसकी फैमिली फिर अपनी हिम्मत पे ही सर्वाइव करते रहे। तैमूजीन को कभी फॉर्मल तालीम नहीं मिली। उसने हमेशा से सख्त और बेरहम किस्म का एनवायरमेंट देखा। मिसाल के तौर पर जब वो अभी बच्चा ही था तो उसने अपने बड़े भाई को ही कत्ल कर दिया। क्योंकि भाई ये थी सर्वाइवल की जंग। उसका जो सौतेला भाई था बड़ा भाई वो अक्सर इन छोटों के साथ बड़ी ज्यादती करता था। उनका खाना भी छीन लेता था। इसलिए दोनों भाइयों ने तैमुजीन और खसर ने अपने सौतेले भाई को बड़े भाई को मारना ही बेहतर समझा। बाद में तैमुजीन को एक कबीले ताईचंद ने कैद भी कर लिया था और अपना गुलाम भी बना लिया था। खुशकिस्मती से वो वहां से एक घोड़ा चुरा कर भाग निकला और सीधा वापस पहुंचा अपने घर। अब बात यह है कि ये तैमुजीन ने चंगेज खान कैसे बना वक्त के साथ। आहिस्ता-आहिस्ता उसकी ताकत बढ़ती गई। 1206 तक तो तैमोजीन इतना पावरफुल हो गया था कि उसके पास एक बहुत बड़ा इलाका आ गया था। आज के दौर में देखें तो लगभग आज के वेस्टर्न यूरोप जितना इलाका मुख्तलिफ कबीले इस इलाके में शामिल थे जिसकी आबादी तकरीबन 1 मिलियन थी। उसने अपने इस बड़े इलाके का नाम भी रखा था। ये के मोंगोल उलस यानी द ग्रेट मोंगोल नेशन। इस नए नजरिए के मुताबिक उसने पुराने जो कबीले थे उनके टाइटल्स जो थे जैसे गुरखान तयंग खान ये जो थे उन सबको रिजेक्ट कर दिया। इसके बजाय उसने खुद को चंगेज़ खान का लकब दिया। ये जो चंगेज़ खान है तो मंगोलियन जुबान में चिन का मतलब है अनशेकेबल फियरलेस निडर जिसको कोई हिला ना सकता हो। ये पर्शियन स्पेलिंग की वजह से फिर उसका नाम वेस्ट में आज गेंगिस खान के नाम से मशहूर है। तो चंगेज़ खान की जिंदगी का एक और पहलू जो बड़ा मशहूर है वो ये है कि उसकी बहुत ज्यादा बीवियां थी और बहुत ज्यादा कनिजें भी थी।
Speaker A
कॉन्क्युपाइंस वैसे तो ये बड़ी कॉमन प्रैक्टिस थी कि जो जगह फतेह हो जाती थी तो वहां के हुक्मरान एक हरम बनाते थे जहां वो अपनी बीवियों को, अपनी फैमिली की औरतों को, अपनी कनीजों को भी रखते थे। यानी वो सिर्फ लेडीज़ की प्राइवेसी के लिए एक जगह बनी होती थी। तो चंगेज़ खान ने भी ऐसा किया। उसने तो बहुत ज्यादा ही ऐसे किया। आज जेनेटिक स्टडीज यह सजेस्ट करती हैं कि दुनिया में लगभग 16 मिलियन लोग ऐसे हैं जिनके डीएनए का सिलसिला कहीं ना कहीं चंगेज़ खान से जाके मिलता है। यानी ये एक ऐसा आदमी था जिसने सिर्फ एंपायर नहीं बनाई बल्कि अब बहुत बड़ी नस्ल भी बनाई है। चंगेज़ खान को वन ऑफ द ग्रेटेस्ट वॉर स्ट्रेटजिस्ट भी कहा जाता है। उसका दिमाग जंग प्लान करने में एग्जीक्यूट करने में बहुत चलता था। उसने रिवायत से हटकर काम किए थे। मिसाल के तौर पर वो हारे हुए दुश्मन जो लीडर्स थे उनको कत्ल करने के बजाय अपने ही कबीले में शामिल कर देता था। नेपोटिज्म की जगह वो मेरिटोक्रेसी को तरजीह देता था। यानी अहलियत की बुनियाद पर लोगों को वो किसी मुकाम पे नहीं ठहराता था। कोई जॉब नहीं देता था। ना ही रिश्तेदारी की बुनियाद पे बल्कि मेरिट के बेस पर वो काम देता था। उसकी फौज ही बहुत ही वेल डिसिप्लिंड थी और बहुत ही ट्रेंड थी। ये ये फौज जब फिर जंग के मैदान में उतरती थी तो अक्सर दुश्मन डर के मारे ही ढेर हो जाते थे और खुद ही सरेंडर करते कभी-कभी वह जानबूझकर कुछ लोगों को जिंदा छोड़ देता ताकि वह भागकर दूसरे शहरों को बताएं कि मंगोल फौज कितनी खतरनाक है। साइकोलॉजिकल वॉरफेयर की वजह से शहर जंग शुरू होने से पहले ही सरेंडर कर देते थे। अगर कोई शहर बगैर लड़े सरेंडर कर देता तो मोंगोल्स अक्सर उसको बख्श देते थे, छोड़ देते थे। लेकिन अगर कोई रेजिस्टेंस दिखाए, लड़ाई करे तो फिर भाई साहब पूरा शहर तबाह कर देते थे। उसकी हिस्ट्री ही मिटा देते थे। लाइब्रेरीज ही जला देते थे। तारीख में देखें तो निशापुर और खारजम जैसे शहरों में कत्लेआम किया था मंगोलों ने। जहां पे हजारों नहीं बल्कि लाखों लोगों को मार दिया था। इनकी फौज में ज्यादातर घोड़े सवार शामिल होते थे। सिपाहियों को 10-10 के यूनिट्स में तकसीम किया जाता था। और इनके बारे में मशहूर चीज यह थी कि यह लोग घोड़े पर सवारी करते हुए तीरंदाजी करते थे और उसके माहिर होते थे। उन्होंने एक खास स्ट्रेटजी भी मास्टर कर रखी थी जिसको कहते हैं फेंड रिट्रीट। यानी झूठमूठ का वह भाग जाते थे। जिससे दुश्मन को लगता था कि वह तो जंग जीत चुके हैं। जैसे ही फिर दुश्मन की फौज अपना डिसिप्लिन खो बैठती थी तो वो सारे वापस आ जाते थे। अचानक से पलट कर हमला करते थे और जोरदार हमला करते थे। जैक वेदरफोर्ड ये कहते हैं कि तारीखदानों ने चंगेज़ खान के साथ इंसाफ नहीं किया। इसमें रेसिज्म का बहुत बड़ा किरदार है। यूरोपियन के जितने हुक्मरान थे उन्होंने एलेक्जेंडर द ग्रेट और नेपोलियन बोनापार्ट को तो बड़ा ही जबरदस्त किस्म का बादशाह बताया है। उनकी जितनी बेरहमियां थी उनको हिस्टोरियंस ने बड़ा टोन डाउन करके बताया है और उनकी कामयाबियों की बहुत वाहवा की है। लेकिन चंगेज़ खान के साथ ऐसा नहीं हुआ। 19वीं सदी में वेस्टर्न साइंटिस्ट ने एशियन लोगों को कमतर साबित करने की बड़ी कोशिश की है। उन्होंने तो एक लफ्ज भी इजाद किया था मोंगोलॉइड जो किसी की भी बेइज्जती करने के लिए इस्तेमाल होता था। किसी को मंगोलॉयड बोलने का मतलब यह है कि उसको कम अकल बोल देना। उसको जंगली बोल देना। इसका मकसद था मोंगोल्स को कम अकल स्लो वेटेड प्रिमिटिव दिखाना। अगर कोई पूछे कि चंगेज़ खान कितना पावरफुल था तो बताना थोड़ा मुश्किल भी है क्योंकि उसके इलाकों का स्केल आज भी समझना बड़ा मुश्किल है। चंगेज़ खान ने अपने बेटों और पोतों के साथ मिलकर बहुत बड़े स्केल पर जंगे लड़ी। सिर्फ 25 सालों में मुंगोल फौज ने इतना इलाका फतेह किया था जितना रोमंस ने 400 सालों में किया था। तो इसको यूं समझो कि आज के नक्शे पर अगर देखा जाए तो उनका कंकर्ड जो इलाका था उसमें 30 मुल्क तक फैल सकते हैं। मेडिटेटरेनियन से लेकर पेसिफिक तक मंगोल एंपायर साइबेरिया के टंडरा से लेकर इंडिया के मैदानों तक फैली हुई थी। वियतनाम के चावल के खेतों से लेकर हंगरी के गंदुम के खेतों तक फैली हुई थी। कोरिया से लेकर बैलकंस तक फैली हुई थी। इस एंपायर में तकरीबन 1 मिलियन नोमेड्स और 15 से 20 मिलियन जानवर भी शामिल थे। इससे भी ज्यादा हैरानकन बात यह है कि मोंगोल फौज का जो साइज था उसमें मैक्सिमम 1 लाख वॉरियर्स थे। इतनी तादाद के फौजी अगर एक फुटबॉल स्टेडियम में खड़े हो जाएं तो वो भर जाएगा। लेकिन इतनी बड़ी एंपायर को कंट्रोल करना और सिर्फ 1 लाख फौज के लिए तो बड़ी मुश्किल बात होनी चाहिए। दरअसल ये फौज ही सिर्फ नहीं थी। ये एक पूरा निजाम था। ऐसे रूल्स थे, ऐसे लॉस थे जो इस एंपायर के सिस्टम को बरकरार रखते थे। आखिर चंगेज़ खान ने अपनी एंपायर का इतना एफिशिएंट सिस्टम कैसे बनाया? कुछ हद तक तो चंगेज़ खान के जो लॉज़ थे, जो आर्डर का एक सिस्टम था वो पुराने न्यूमेडिक लोगों की जो रिवायतें हैं उन्हीं पर मोबनी था। लेकिन जहां-जहां उसको लगता था कि ये कानून उसके रूल के खिलाफ जा रहा है या इसको अपडेट करने की जरूरत है तो फिर वो उसको अपडेट करता था। या कोई ऐसा कानून जो उसको लगता था इसको तो रद्द करना चाहिए तो वो उसको रद्द भी कर देता। एक प्रॉपर कॉन्स्टिट्यूशन की तरह उसने अपनी हुकूमत चलाई है। एक निजाम बनाया है जिसे वो द ग्रेट लॉ कहते थे। उसकी जिंदगी में कई बार यह जो कॉन्स्टिट्यूशन है वो रिवाइज भी हुई है। खासतौर पर उसके आखिरी सालों में अगर इस कानून का कोई एक मकसद था तो वो ये था कि लोगों को एक साथ जोड़ के रखना स्टेबिलिटी उनके दरमियान टेंशंस को खत्म करना। जिना को सजाए मौत का जुर्म बना दिया था इस कानून के हिसाब से। किसी दूसरे घर की शादीशुदा औरत के साथ अगर जिनाह किया तो उस मर्द और उस औरत दोनों को मौत की सजा।
Speaker A
वहां हर कबीले का जो सरबराह था जो चीफ था उस कबीले का उसको खान कहा जाता था। ये खान एक लकब था। उस जमाने का एटमॉस्फियर बड़ा वायलेंट और ब्रूटल था। कबीलों के दरमियान कत्ल अगवा गुलामी ये सारी चीजें बहुत ही
Speaker A
कॉमन थी। तमुजीन जब बड़ा हुआ तो उसे पता लगा कि उसके जो वालिद हैं यसुगी उन्होंने उनकी अपनी वालिदा होलन को जबरदस्ती अगवा कर लिया था। हालांकि उसकी अम्मा जो है वो उस वक्त शिलडू नाम के एक नौजवान से शादी
Speaker A
कर चुकी थी। उसको जब यह पता लगा कि उसके अब्बा ने ही उसकी अम्मा को अगवा किया था और शादी की थी। वह तो बड़ा हैरान हुआ। लेकिन उस दौर में बीवी चुराना एक बड़ी आम बात होती थी। फलन यानी कि तेमुजीन की जो
Speaker A
अम्मा है उन्होंने 1162 में तेमुजीन को जन्म दिया। कुछ ही अरसे बाद तेमुजीन का जो अब्बा था वो फौत हो गया। और कबीले ने तेमुजीन उसकी अम्मा उसके भाई बहनों को मैदानी इलाकों में अकेले ही छोड़ दिया मरने के लिए। यह उस दौर की रिवायत होती
Speaker A
थी। फैमिली का सरबराह मर गया तो फिर फैमिली का ख्याल कबीले की जिम्मेदारी नहीं है। तो तैमूजीन और उसकी फैमिली फिर अपनी हिम्मत पे ही सर्वाइव करते रहे। तैमूजीन को कभी फॉर्मल तालीम नहीं मिली। उसने हमेशा से सख्त और बेरहम किस्म का
Speaker A
एनवायरमेंट देखा। मिसाल के तौर पर जब वो अभी बच्चा ही था तो उसने अपने बड़े भाई को ही कत्ल कर दिया। क्योंकि भाई ये थी सर्वाइवल की जंग। उसका जो सौतेला भाई था बड़ा भाई वो अक्सर इन छोटों के साथ बड़ी
Speaker A
ज्यादती करता था। उनका खाना भी छीन लेता था। इसलिए दोनों भाइयों ने तैमुजीन और खसर ने अपने सौतेले भाई को बड़े भाई को मारना ही बेहतर समझा। बाद में तैमुजीन को एक कबीले ताईचंद ने कैद भी कर लिया था और
Speaker A
अपना गुलाम भी बना लिया था। खुशकिस्मती से वो वहां से एक घोड़ा चुरा कर भाग निकला और सीधा वापस पहुंचा अपने घर। अब बात यह है कि ये तैमुजीन ने चंगेज खान कैसे बना वक्त के साथ। आहिस्ता-आहिस्ता उसकी ताकत बढ़ती
Speaker A
गई। 1206 तक तो तैमोजीन इतना पावरफुल हो गया था कि उसके पास एक बहुत बड़ा इलाका आ गया था। आज के दौर में देखें तो लगभग आज के वेस्टर्न यूरोप जितना इलाका मुख्तलिफ कबीले इस इलाके में शामिल थे जिसकी आबादी
Speaker A
तकरीबन 1 मिलियन थी। उसने अपने इस बड़े इलाके का नाम भी रखा था। ये के मोंगोल उलस यानी द ग्रेट मोंगोल नेशन। इस नए नजरिए के मुताबिक उसने पुराने जो कबीले थे उनके टाइटल्स जो थे जैसे गुरखान तयंग खान ये जो
Speaker A
थे उन सबको रिजेक्ट कर दिया। इसके बजाय उसने खुद को चंगेज़ खान का लकब दिया| ये जो चंगेज़ खान है तो मंगोलियन जुबान में चिन का मतलब है अनशेकेबल फियरलेस निडर जिसको कोई हिला ना सकता होI ये पर्शियन स्पेलिंग
Speaker A
की वजह से फिर उसका नाम वेस्ट में आज गेंगिस खान के नाम से मशहूर है तो चंगेज़ खान की जिंदगी का एक और पहलू जो बड़ा मशहूर है वो ये है कि उसकी बहुत ज्यादा बीवियां थी और बहुत ज्यादा कनिजें भी थी
Speaker A
कॉन्क्युपाइंस वैसे तो ये बड़ी कॉमन प्रैक्टिस थी कि जो जगह फतेह हो जाती थी तो वहां के हुक्मरान एक हरम बनाते थी जहां वो अपनी बीवियों को, अपनी फैमिली की औरतों को, अपनी कनीजों को भी रखते थे। यानी वो
Speaker A
सिर्फ लेडीज़ की प्राइवेसी के लिए एक जगह बनी होती थी। तो चंगेज़ खान ने भी ऐसा किया। उसने तो बहुत ज्यादा ही ऐसे किया। आज जेनेटिक स्टडीज यह सजेस्ट करती हैं कि दुनिया में लगभग 16 मिलियन लोग ऐसे हैं
Speaker A
जिनके डीएनए का सिलसिला कहीं ना कहीं चंगेज़ खान से जाके मिलता है। यानी ये एक ऐसा आदमी था जिसने सिर्फ एंपायर नहीं बनाई बल्कि अब बहुत बड़ी नस्ल भी बनाई है। चंगेज़ खान को वन ऑफ द ग्रेटेस्ट वॉर
Speaker A
स्ट्रेटजिस्ट भी कहा जाता है। उसका दिमाग जंग प्लान करने में एग्जीक्यूट करने में बहुत चलता था। उसने रिवायत से हटकर काम किए थे। मिसाल के तौर पर वो हारे हुए दुश्मन जो लीडर्स थे उनको कत्ल करने के बजाय अपने ही कबीले में शामिल कर देता था।
Speaker A
नेपोटिज्म की जगह वो मेरिटोक्रेसी को तरजीह देता था। यानी अहलियत की बुनियाद पर लोगों को वो किसी मुकाम पे नहीं ठहराता था। कोई जॉब नहीं देता था। ना ही रिश्तेदारी की बुनियाद पे बल्कि मेरिट के बेस पर वो काम देता था। उसकी फौज ही बहुत
Speaker A
ही वेल डिसिप्लिंड थी और बहुत ही ट्रेंड थी। ये ये फौज जब फिर जंग के मैदान में उतरती थी तो अक्सर दुश्मन डर के मारे ही ढेर हो जाते थे और खुद ही सरेंडर करते कभी-कभी वह जानबूझकर कुछ लोगों को जिंदा
Speaker A
छोड़ देता ताकि वह भागकर दूसरे शहरों को बताएं कि मंगोल फौज कितनी खतरनाक है। साइकोलॉजिकल वॉरफेयर की वजह से शहर जंग शुरू होने से पहले ही सरेंडर कर देते थे। अगर कोई शहर बगैर लड़े सरेंडर कर देता तो
Speaker A
मोंंगोल्स अक्सर उसको बख्श देते थे, छोड़ देते थे। लेकिन अगर कोई रेजिस्टेंस दिखाए, लड़ाई करे तो फिर भाई साहब पूरा शहर तबाह कर देते थे। उसकी हिस्ट्री ही मिटा देते थे। लाइब्रेरीज ही जला देते थे। तारीख में देखें तो निशापुर और खारजम जैसे शहरों में
Speaker A
कत्लेआम किया था मंगोलों ने। जहां पे हजारों नहीं बल्कि लाखों लोगों को मार दिया था। इनकी फौज में ज्यादातर घोड़े सवार शामिल होते थे। सिपाहियों को 10-10 के यूनिट्स में तकसीम किया जाता था। और इनके बारे में मशहूर चीज यह थी कि यह लोग
Speaker A
घोड़े पर सवारी करते हुए तीरंदाजी करते थे और उसके माहिर होते थे। उन्होंने एक खास स्ट्रेटजी भी मास्टर कर रखी थी जिसको कहते हैं फेंड रिट्रीट। यानी झूठमूठ का वह भाग जाते थे। जिससे दुश्मन को लगता था कि वह
Speaker A
तो जंग जीत चुके हैं। जैसे ही फिर दुश्मन की फौज अपना डिसिप्लिन खो बैठती थी तो वो सारे वापस आ जाते थे। अचानक से पलट कर हमला करते थे और जोरदार हमला करते थे। जैक वेदरफोर्ड ये कहते हैं कि तारीखदानों ने
Speaker A
चंगेज़ खान के साथ इंसाफ नहीं किया। इसमें रेसिज्म का बहुत बड़ा किरदार है। यूरोपियन के जितने हुक्मरान थे उन्होंने एलेक्जेंडर द ग्रेड और नेपोलियन बोनापार्ट को तो बड़ा ही जबरदस्त किस्म का बादशाह बताया है। उनकी जितनी बेरहमियां थी उनको हिस्टोरियंस
Speaker A
ने बड़ा टोन डाउन करके बताया है और उनकी कामयाबियों की बहुत वाहवा की है। लेकिन चंगेज़ खान के साथ ऐसा नहीं हुआ। 19वीं सदी में वेस्टर्न साइंटिस्ट ने एशियन लोगों को कमतर साबित करने की बड़ी कोशिश की है। उन्होंने तो एक लफ्ज भी इजाद किया
Speaker A
था मोंगोलॉइड जो किसी की भी बेइज्जती करने के लिए इस्तेमाल होता था। किसी को मंगोलॉयड बोलने का मतलब यह है कि उसको कम अकल बोल देना। उसको जंगली बोल देना। इसका मकसद था मोंगोल्स को कम अकल स्लो वेटेड
Speaker A
प्रिमिटिव दिखाना। अगर कोई पूछे कि चंगेज़ खान कितना पावरफुल था तो बताना थोड़ा मुश्किल भी है क्योंकि उसके इलाकों का स्केल आज भी समझना बड़ा मुश्किल है। चंगेज़ खान ने अपने बेटों और पोतों के साथ मिलकर बहुत बड़े स्केल पर जंगे लड़ी।
Speaker A
सिर्फ 25 सालों में मुंगोल फौज ने इतना इलाका फतेह किया था जितना रोमंस ने 400 सालों में किया था। तो इसको यूं समझो कि आज के नक्शे पर अगर देखा जाए तो उनका कंकर्ड जो इलाका था उसमें 30 मुल्क तक फैल
Speaker A
सकते हैं। मेडिटेटरेनियन से लेकर पेसिफिक तक मंगोल एंपायर साइबेरिया के टंडरा से लेकर इंडिया के मैदानों तक फैली हुई थी। वियतनाम के चावल के खेतों से लेकर हंगरी के गंदुम के खेतों तक फैली हुई थी। कोरिया से लेकर बैलकंस तक फैली हुई थी। इस एंपायर
Speaker A
में तकरीबन 1 मिलियन नोमेड्स और 15 से 20 मिलियन जानवर भी शामिल थे। इससे भी ज्यादा हैरानकन बात यह है कि मोंगोल फौज का जो साइज था उसमें मैक्सिमम 1 लाख वॉरियर्स थे। इतनी तादाद के फौजी अगर एक फुटबॉल
Speaker A
स्टेडियम में खड़े हो जाएं तो वो भर जाएगा। लेकिन इतनी बड़ी एंपायर को कंट्रोल करना और सिर्फ 1 लाख फौज के लिए तो बड़ी मुश्किल बात होनी चाहिए। दरअसल ये फौज ही सिर्फ नहीं थी। ये एक पूरा निजाम था। ऐसे
Speaker A
रूल्स थे, ऐसे लॉस थे जो इस एंपायर के सिस्टम को बरकरार रखते थे। आखिर चंगेज़ खान ने अपनी एंपायर का इतना एफिशिएंट सिस्टम कैसे बनाया? कुछ हद तक तो चंगेज़ खान के जो लॉज़ थे, जो आर्डर का एक सिस्टम
Speaker A
था वो पुराने न्यूमेडिक लोगों की जो रिवायतें हैं उन्हीं पर मोबनी था। लेकिन जहां-जहां उसको लगता था कि ये कानून उसके रूल के खिलाफ जा रहा है या इसको अपडेट करने की जरूरत है तो फिर वो उसको अपडेट
Speaker A
करता था। या कोई ऐसा कानून जो उसको लगता था इसको तो रद्द करना चाहिए तो वो उसको रद्द भी कर देता। एक प्रॉपर कॉन्स्टिट्यूशन की तरह उसने अपनी हुकूमत चलाई है। एक निजाम बनाया है जिसे वो द ग्रेट लॉ कहते थे। उसकी जिंदगी में कई बार
Speaker A
यह जो कॉन्स्टिट्यूशन है वो रिवाइज भी हुई है। खासतौर पर उसके आखिरी सालों में अगर इस कानून का कोई एक मकसद था तो वो ये था कि लोगों को एक साथ जोड़ के रखना स्टेबिलिटी उनके दरमियान टेंशनंस को खत्म
Speaker A
करना। जिना को सजाए मौत का जुर्म बना दिया था इस कानून के हिसाब से। किसी दूसरे घर की शादीशुदा औरत के साथ अगर जिनाह किया तो उस मर्द और उस औरत दोनों को मौत की सजा सुना देते थे। पोलगमी जो है एक से ज्यादा
Speaker A
शादियां अलाउड थी। कॉनकुमाइंस रखना भी अलाउड की कनीज़ रखना भी अलाउड था। सिर्फ दूसरे के घर की औरत के साथ जिना नहीं कर सकते। और फिर जो दुल्हन उठाने वाला एक रिवाज था उसको भी चंगेज़ खान ने खत्म कर
Speaker A
दिया। यह ब्राइड किडनैपिंग जो थी उसको उसने बिल्कुल बैन कर दिया। औरत बेचना और किसी दूसरे की बीवी या बेटी को जबरदस्ती अपने पास रखना उसको किडनैप करना ये सारी चीजें जो थी इन पे सजा मौत मुकरर थी। आखिर
Speaker A
उसकी अपनी मां और बीवी भी एक जमाने में किडनैप हो चुकी थी। तो ऐसे कानून बनाना शायद एक पर्सनल वजह भी थी। सिर्फ यही नहीं बल्कि जानवरों की चोरी पर भी सजा-ए-मौत का हुक्म था। कुछ रिवायतों के मुताबिक तो जो
Speaker A
सिपाही डिसिप्लिन तोड़ते थे उनको उबलते हुए पानी में डालकर उनको सजा दी जाती थी। एक्सजीकशंस होती थी, पब्लिक पनिशमेंट्स होती थी। बड़ी सख्त सजाएं दी जाती थी। फौज में एक और रूल भी बड़ा मशहूर था। अगर 10 सिपाहियों के ग्रुप से कोई भाग जाता था,
Speaker A
तो उस पूरे ग्रुप को सजा मिलती थी। इसी सख्ती की वजह से मुंगल आर्मी तारीख की सबसे डिसिप्लिन वाली फौज रही है। ये भी लाजिम कर दिया था कि अगर किसी को किसी का गुमशुदा जानवर भी मिल जाता था तो वो असल
Speaker A
मालिक को वापस करते थे। अब यह सोचें कि ये सिस्टम कितने बड़े स्केल पर चल रहा था। इसके अलावा खान ने एक कम्युनिकेशन का भी सिस्टम बनाया था ताकि पूरे एंपायर को जोड़ा जा सके। होता ये था कि जो तेज
Speaker A
रफ्तार घोड़े सवार थे जिन्हें एरो मैसेंजर कहा जाता था। वो मुख्तलिफ स्टेशंस पर तैनात होते थे। आपस में उनका जो फासला था वो था 20 माइल्स का। यानी अगर आपने पैगाम पहुंचाना है तो एक घोड़े सवार को देना है।
Speaker A
वो 20 माइल ट्रैवल करके दूसरे को देगा। इस तरह आपका पैगाम जो है वो पूरी एंपायर में कहीं पर भी डिलीवर किया जा सकता है। और ये जो स्टेशंस थे यह पूरे एंपायर में फैले हुए थे। अब इस तरह की इमेज आपने कभी सुनी
Speaker A
ही नहीं होगी चंगेज़ खान के बारे में क्योंकि वेस्टर्नज़ ने सिर्फ उसको एक जालिम बादशाह की तरह ही पोट्रे किया है। एक तरफ वो शहरों को तबाह करने वाला कॉनकरर तो था लेकिन दूसरी तरफ वो रिलीजियस फ्रीडम मेरिटोक्रेसी ट्रेड को प्रमोट करने वाला
Speaker A
हुक्मरान भी था। चंगेज़ खान असल में एक काफी प्रोग्रेसिव हुक्मरान था और उसकी औलाद ने भी उस रिवायत को जारी रखा। उसके जितने भी सब्जेक्ट्स थे उनकी बेसिक ह्यूमन राइट्स का तहफुज़ किया जिसमें औरतें भी शामिल थी। उसके अलावा शायद तारीख का ऐसा
Speaker A
पहला हुक्मरान होगा जिसने कानून बना दिया जिसमें रिलीजियस फ्रीडम दी गई और खैर इसके प्रैक्टिकल रीज़ंस भी थे क्योंकि उसके एंपायर इतनी वसी थी। इतने मुख्तलिफ मजहब थे उसमें जैसे बुद्धिज्म, क्रिश्चियनिटी, इस्लाम। हालांकि खुद वो शेमिनिस्ट था। लेकिन वो ये समझता था कि मजहबी झगड़े अगर
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एंपायर में होंगे तो एंपायर खतरे में पड़ जाएगी। तो उसने सबको आजादी दी थी कि अपना मजहब आप प्रैक्टिस कर सकते हैं। कुछ रूल्स बड़े स्ट्रिक्ट थे और वह यह थे कि जैसे एंपायर का कोई भी इंसान किसी मंगोल को
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गुलाम नहीं बना सकता। या मोंगोल्स एक दूसरे को गुलाम नहीं बना सकते। चंगेज़ खान खुद तो इलिटरेट था। उसको ना लिखना आता था ना पढ़ना आता था। लेकिन उसने खुद टीचर्स, डॉक्टर्स, स्कॉलर्स इन सबको टैक्स फ्री कर दिया। इल्म को प्रमोट करने की उसने पूरी
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कोशिश की। उसने जो कॉनकरर्ड लोगों के स्कॉलर्स थे जो एक्सपर्ट्स थे उनको भी कत्ल नहीं किया बल्कि अपने कोर्ट में शामिल कर दिया। खासतौर पर उसका जो पोता था कुबलाई खान उसके दौर में तो एजुकेशन बहुत ज्यादा प्रमोट हुई। एजुकेशन प्रमोट करने
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की पॉलिसीज बड़ी पीक पे रही है। 1269 में उसने मंगोलियन जो जबान है वो सीखने के लिए स्कूल कायम किया। 1271 में उसने एक यूनिवर्सिटी भी बनाई। कुबलाई खान ने थिएटर को भी बड़ा प्रमोट किया ताकि जो अदबी फनून
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है उसको भी फरोख दी जाए। उसके दरबार में नए-नए तरीकों के एंटरटेनमेंट के लिए प्लेस परफॉर्म किए जाते थे। 12 सेंचुरी में आमतौर पर यह होता था कि जो हुक्मरान थे वो बचपन से ही बड़े ताकतवर लोगों के घरों में
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पढ़ते थे और बड़े भी वहीं पे होते थे। मिसाल के तौर पर कोई शहजादा जो है वो किसी बादशाह की कोर्ट में पढ़ता था। बड़ा भी वहीं पे होता था। लेकिन चंगेज़ खान के साथ बिल्कुल ऐसा नहीं हुआ। वो तो शुरू से ही
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एक आउटसाइडर था। तो फिर चंगेज़ खान ने एक बड़ा मुख्तलिफ निजाम बनाया। उसने कहा कि भाई ऐसी जो एस्ट्रोक्रेसी है इससे तो सिर्फ जो रॉयल खानदान के बच्चे हैं उन्हीं को ही कामयाबी के मौके मिलेंगे क्योंकि सारी ओपोरर्चुनिटीज तो उन्हीं को ही
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मिलेंगी। उसने इस सिस्टम को चेंज कर दिया। अब तरक्की सिर्फ पैदाइश की वजह से या किसी एस्ट्रोक्रेटिक प्रिविलेज की वजह से नहीं होती थी। वो होती थी वफादारी की बुनियाद मेरिट की बुनियाद पे। उसने इस सिस्टम को ही चेंज कर लिया। सबसे पहले उसने कबीलों
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की ताकत को कम किया और ये जो रिवायती टाइटल्स थे उनको भी सबको खत्म कर दिया। फिर उसने एक और बड़ा कदम उठाया के जो तमाम अहम ऑफिसिसेस थे वह सीधा सेंट्रल स्टेट से जोड़ दिए। ताकत जो है वह एक मरकजी हुकूमत
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के पास थी। यानी प्रिविलेजेस जो है वो किसी एक खानदान के या किसी शख्स के पास नहीं रहे। कोई फलानी फैमिली, फलानी फैमिली ऐसे नहीं रही। चंगेज़ खान ने सब कुछ मेरिट की बुनियाद पर कर दिया। सबसे पावरफुल
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इदारा तो फौज ही रहा। लेकिन उसमें भी सिर्फ मेरिट ही चलता था। चंगेज़ खान के दौर में हर सेहतमंद मर्द जिसकी उम्र 15 से 70 साल के दरमियान होती थी, वह फौज में भर्ती हो सकता था। यहां तक कि एक आम जो
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शेफर्ड है बकरियां चराने वाला वो भी अगर काबिल है तो रैंक्स में वो बढ़कर जनरल भी बन सकता है। वफादार लोगों को 1000 सिपाहियों के यूनिट का सरबराह बनाया जाता था। अगर कोई बहुत पुराना और वफादार साथी है तो उसको 10,000 सिपाहियों की भी कमांड
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दी जाती थी। और यह सिर्फ बैटल फील्ड तक महदूद नहीं था। अगर आप चंगेज़ खान के फेवरेट हैं। वो अगर आपको पसंद करता है और आप एक वफादार इंसान हो तो वो आपको सिस्टम में कोई अहम मुकाम भी दे सकता था। फिर आप
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चाहे किसी भी बैकग्राउंड से हो, सबसे ज्यादा अहमियत जो इस चीज़ की थी, वह थी लॉयल्टी। यहां तक कि उसके अपने खानदान वालों को भी, उसके जनरल्स के मुकाबले ज्यादा कोई फायदा नहीं हुआ। चंगेज़ खान ने अपनी मां, अपने सबसे छोटे भाई और अपने
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सबसे छोटे बेटों को भी सिर्फ 5000 सिपाहियों की कमांड दी थी। चंगेज़ खान के पास वफादारी का सिला देने के और भी बड़े तरीके थे। मिसाल के तौर पर उसने रिलीजियस जो लीडर्स थे उनको टैक्सेस और पब्लिक ड्यूटीज से एक्सप्ट किया था। डॉक्टर्स,
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स्कॉलर्स, लॉयर्स, टीचर्स इन इन सबको टैक्स रिलीफ दिए थे। भाई ट्रेड बड़ा उभरा उसके दौर में। चाइना से लेकर यूरोप की सोसाइटीज तक जो है वो ट्रेड किया गया। इस तरह आइडियाज का भी तबादला हुआ। जब चंगेज़ खान पैदा हुआ तो चाइना के लोग यूरोप के
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लोगों को जानते ही नहीं थे। बहुत कम जानते थे। और इसी तरह यूरोप के लोग चाइना के लोगों के बारे में कुछ भी नहीं जानते थे। तो ये बड़ी उसकी कामयाबी रही है कि उसने दो अलग जो दुनिया हैं उनको जोड़ दिया था।
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क्योंकि मंगोल फौज का खौफ इतना था कि एशिया यूरोप जो है ना कि इनके जो बहुत सारे शहर थे उन्होंने खुद ही सरेंडर कर दिया था। तो वह सारे जो है ना बड़े आराम से एक एंपायर बन गई। 1227 में जब चंगेज़
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खान फौत हो गया तब तक मतलब तजारत जो है ट्रेड का प्रॉपर एक सिस्टम बन चुका था। डिप्लोमेसी का एक सिस्टम बन चुका था। चंगेज़ खान की जो ट्रेड का सिस्टम था बड़ा स्मार्ट था। उसने दुनिया का पहला
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इंटरनेशनल पोस्टल सिस्टम बनाया था। दौलत को गर्दिश में रखना उसके लिए बहुत जरूरी था। इसलिए जंग में मिला जितना भी माल था उसने अपने पास नहीं रखा सिर्फ बल्कि दोबारा लोगों में तकसीम किया ताकि ट्रेड बढ़ता रहे। जहां भी उसने हुकूमत की वहां
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के लोकल कौमों को उसने बड़ा मजबूत तरीके से रीऑर्गेनाइज किया। सबसे बड़ी बात यह कि उसने सिल्क रोड पर एक ट्रेड फ्री ज़ोन बना दिया था। जिसकी वजह से तजारत बड़ी तेजी से और पावरफुल तरीके से हुई जिसमें पेपर,
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प्रिंटिंग, गन पाउडर, कंपस इस तरह की जो चीजें हैं, इस तरह की जो इन्वेंशंस हैं, वो चाइना से यूरोप तक फैल गई। और ये सारे ट्रेड का बड़ा किरदार है जो रेनोसोंस आया यूरोप में उसमें ये एक्सचेंज दोनों तरफ से
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था। मोंगोल्स ने जर्मन माइनर्स को चाइना भेजा, चाइनीस डॉक्टर्स को परर्शिया भेजा। इस तरह ये नूडल्स, चाय, कारपेट, प्लेइंग कार्ड्स ये सारी जो चीजें इंटरनेशनल हो गई। यानी कल्चरल एक्सचेंज हुआ ये। तो मंगोल्स ने मॉडर्न सिविलाइजेशन जो है उसकी
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बुनियाद रखी है। उसमें बड़ा हिस्सा दिया उन्होंने। इस किताब का मेन मैसेज ही यही है कि मंगोल एंपायर जो थी जो सबसे पहले चंगेज खान ने कायम की असल में बड़ी एक प्रोग्रेसिव आइडियाज रखती थी। लेकिन यूरोपियंस ने उन्हें सिर्फ एक जालिम
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बादशाह की हुकूमत ही बताया है। इस किताब के राइटर का यह कहना है कि मंगोल्स को समझना मॉडर्न सिविलाइज दुनिया की तारीख को समझने के लिए बहुत जरूरी है। आई होप यू लाइक द वीडियो। अब मिलते हैं आपसे किसी और
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वीडियो में। तब तक के लिए मुझे दें इजाजत। मैं चला गुड। बाय।
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