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Why Cruel Leaders Stay in Power | Machiavelli’s Brutal Truth | The Prince Explained

मैकियावेली की किताब 'द प्रिंस' के जरिए समझें जुल्म और चालाकी से पावर कैसे हासिल और बनाए रखें।

Key Takeaways

  • राजनीति में मोरालिटी को साइड में रखना पड़ता है, पावर के लिए चालाकी और जुल्म जरूरी हो सकते हैं।
  • पावर को बनाए रखने के लिए नए इलाकों में सीधे संपर्क या कॉलोनियाँ बनाना प्रभावी होता है।
  • कमजोर नेताओं को बचाकर अपने साथ जोड़ना बड़ी ताकतों से मुकाबले में मदद करता है।
  • वर्चू और फॉर्च्यून दोनों का होना जरूरी है, केवल काबिलियत से पावर टिकती नहीं।
  • जुल्म को जल्दी और भारी मात्रा में करना चाहिए, बार-बार जुल्म से नफरत बढ़ती है।

What the video covers

  • मैकियावेली के अनुसार एक हुक्मरान के लिए जनता का प्यार जरूरी नहीं, बल्कि उनका डर होना जरूरी है।
  • पावर हासिल करने और बनाए रखने के लिए सियासत में मोरालिटी और आइडियलिज्म को साइड में रखना पड़ता है।
  • प्रिंस को अपने नए कब्जे वाले इलाकों में जाकर या कॉलोनियाँ बनाकर वहां के लोगों का भरोसा जीतना चाहिए।
  • कमजोर लीडर्स को प्रोटेक्शन देकर उन्हें अपने अलायस बनाना चाहिए ताकि बड़ी ताकतों से मुकाबला किया जा सके।
  • फ्यूचर थ्रेट्स के लिए हमेशा अलर्ट रहना और जरूरत पड़ने पर प्रीवेंटिव अटैक्स करना जरूरी है।
  • रूलर बैरन सिस्टम और रूलर सर्वेंट सिस्टम के बीच अंतर समझना जरूरी है, और अपनी स्थिति के अनुसार सिस्टम चुनना चाहिए।
  • मैकियावेली के मुताबिक पावर के लिए वर्चू (काबिलियत) और फॉर्च्यून (भाग्य) दोनों जरूरी हैं।
  • कभी-कभी जुल्म करना पड़ता है, लेकिन उसे जल्दी और भारी मात्रा में करना चाहिए ताकि पावर जल्दी मजबूत हो।
  • पावर बनाए रखने के लिए जनता को सुरक्षा और समृद्धि देना भी जरूरी है, जिससे वे अपने हुक्मरान का समर्थन करें।
  • मैकियावेली के विचारों का प्रभाव आज के आधुनिक नेताओं और पॉलिटिक्स में भी देखा जा सकता है।

Answers

Questions about this video

मैकियावेली के अनुसार एक हुक्मरान के लिए सबसे जरूरी गुण क्या हैं?

मैकियावेली के अनुसार, एक हुक्मरान को वर्चू (काबिलियत, नेतृत्व क्षमता) और फॉर्च्यून (भाग्य, अवसर) दोनों की जरूरत होती है। साथ ही उसे सियासत में मोरालिटी को साइड में रखकर चालाक और क्रूर भी बनना पड़ता है।

नए कब्जे वाले इलाकों को नियंत्रित करने के लिए मैकियावेली क्या सलाह देते हैं?

मैकियावेली सलाह देते हैं कि प्रिंस को खुद नए इलाकों में जाकर लोगों के करीब रहना चाहिए या फिर अपनी कॉलोनी बनाकर वहां के लोगों को अपनी संस्कृति और आदतों में ढालना चाहिए ताकि उनका नियंत्रण मजबूत हो।

मैकियावेली के अनुसार पावर बनाए रखने के लिए जुल्म कब और कैसे करना चाहिए?

मैकियावेली कहते हैं कि अगर जुल्म करना पड़े तो उसे जल्दी और भारी मात्रा में करना चाहिए ताकि लोग हैरान रह जाएं और पावर जल्दी मजबूत हो जाए। बार-बार जुल्म करने से लोग नफरत करने लगते हैं, जो पावर के लिए नुकसानदायक है।

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00:00
Speaker A
अगर तुम्हारी आवाम तुमसे प्यार नहीं करती तो कोई मसला नहीं, लेकिन उनके दिल में तुम्हारा डर जरूर होना चाहिए। यह मशवरा है निकोलो मैकियावेली का दुनिया के हर हुक्मरान के लिए। दोस्तों, आज हम जिस किताब की बात करेंगे, यह वन ऑफ द मोस्ट पावरफुल
00:15
Speaker A
लेकिन वन ऑफ द मोस्ट कंट्रोवर्शियल किताब है। कुछ लोग तो इसको डिक्टेटर्स की गाइड बुक भी कहते हैं। जालिम बादशाहों की एक गाइड बुक। लेकिन कुछ लोग इसको एक ऑनेस्ट किताब समझते हैं जिसमें पॉलिटिक्स के बारे में बताया हुआ है जो कि गंदी होती है।
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Speaker A
इसमें कोई दो राय नहीं है। क्या कभी आपने सोचा है कि कुछ दुनिया के लीडर्स इंसानी हुकूक के खिलाफ वर्ज़ी करते हैं, इंटरनेशनल लॉस को तोड़ते हैं, लेकिन फिर भी वो पावर में रहते हैं। मैकियावेली के मुताबिक इसका
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Speaker A
जवाब यह है कि उन्हें पावर की सियासी गेम को खेलना आता है। यह किताब 500 साल पुरानी किताब है। इसके अंदर की जो इंसाइट्स हैं वो बहुत इंटरेस्टिंग हैं। को पावर पॉलिटिक्स समझाते हैं। आप इस वीडियो में यह जानेंगे कि मैकियावेली के नजदीक रूलर बनने
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Speaker A
के लिए क्या क्वालिटीज़ होनी चाहिए। पावर को कैसे हासिल करते हैं? फिर सबसे मुश्किल बात पावर को कैसे मेंटेन करते हैं। साथ आप यह भी समझेंगे कि अक्सर रूलर्स के लिए एंड्स मींस को जस्टिफाई कर देते हैं। यानी
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Speaker A
अगर पावर बचानी है तो कभी-कभी जुल्म भी करना पड़ेगा, जंग भी लड़नी पड़ेगी और धोखा भी देना पड़ेगा। यह सब जायज है। दोस्तों, मैं बताऊं, यह मेरी राय नहीं है। यह मैकियावेली की राय है। और मैकियावेली यही कहते
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Speaker A
हैं कि भाई सियासत में ना आपकी मोरालिटी और आइडियलिज्म जो है उसको साइड पे कर दो। और मैकियावेली का यह कहना है कि जब आपने सियासत करनी है तो फिर आपने यह भूल जाना है कि यह सही है, यह गलत है। मोरालिटी को
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Speaker A
आपने साइड पे कर देना है। आइडियलिज्म को आपने साइड पे कर देना है। बेंजामिन फ्रैंकलिन से लेकर नेपोलियन तक पॉलिटिशियंस मैकियावेली की पॉलिटिकल थिंकिंग से बड़े इन्फ्लुएंस रहे। और जब आप ये आईडिया समझ लेते हैं तो आज के पॉलिटिशियंस
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Speaker A
में भी आपको मैकियावेली बिहेवियर दिखता है। सोचिए आप रेनासोंस एरा के एक प्रिंस हैं और आपने अभी-अभी एक नया इलाका फतेह किया है। इस नए इलाके के जो लोग हैं वो आपको रूलर नहीं समझते। वो ये समझते हैं कि ये बंदा
02:00
Speaker A
इनवेडर है। इसने आके कब्जा किया है यहां पे। [संगीत] अब सवाल यह है कि आप उनको कंट्रोल कैसे करोगे? वो इलाका आप कैसे कंट्रोल करोगे? ये सिचुएशन ऐसी है जैसे ब्रिटिश ने इंडिया पर कब्जा किया और फिर अपने रिप्रेजेंटेटिव्स भेजे। तो उसके लिए
02:13
Speaker A
मैकियावेली बताते हैं अपनी किताब द प्रिंस में कि प्रिंस के लिए पहला रूल यह है कि अगर मुमकिन हो तो प्रिंस खुद उन प्रिंसिपलिटीज़ में जाकर रहे। उन इलाकों में जाकर रहे। क्योंकि जब लोग यह देखते हैं कि उनका रूलर इतने करीब है उनके तो
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Speaker A
फिर लोगों के दिल में उसके लिए प्यार बढ़ जाता है। उनको यह लगता है कि यह हुक्मरान हमारी कदर करता है और इसी तरह फिर आपके जो दुश्मन हैं आपसे वो इलाका वापस नहीं ले सकेंगे। उनको मुश्किल होगी। मिसाल के तौर
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Speaker A
पर चीन के शी जिनपिंग ने हांगकांग में अपनी पॉलिटिकल प्रेजेंस स्ट्रांग रखी ताकि लोकल डिसेंट को कंट्रोल किया जा सके। अगर आप खुद वहां नहीं जा सकते तो दूसरा बेस्ट ऑप्शन यह है कि आप लोगों की एक कॉलोनी
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Speaker A
वहां भेज दें। इस तरह धीरे-धीरे नए सब्जेक्ट्स आपकी कौम की आदतों और कल्चर को अडॉप्ट करने लग जाएंगे। ये कॉलोनियाँ बनाने की बात कर रहा है दोस्तों जैसे यूरोपियन कॉलोनाइजर्स ने अफ्रीका में कुछ ऐसे ही किया था। बेसिकली वो यह कह रहा है कि अपने
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Speaker A
वफादार लोगों का एक बहुत बड़ा ग्रुप वहां भेज के उनको सेटल करा दो। बिल्कुल जैसे इसराइल को सेटल किया गया है। दूसरा रूल यह है कि प्रिंस को हमेशा अपनी पावर के पोटेंशियल राइवल्स से बचने के लिए प्लानिंग करनी चाहिए। इसका एक तरीका यह है
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Speaker A
कि आसपास के जितने भी कमजोर लीडर्स हैं उनको प्रोटेक्शन देना शुरू कर दो। जब आप उनको पावरफुल दुश्मनों से बचाएंगे तो वो नेचुरली आपके अलायस बन जाएंगे। फिर आप मिलकर एक बहुत बड़ी स्ट्रांग एनिमी से मुकाबला कर सकते हैं। बिल्कुल ऐसे ही किया
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Speaker A
कोल्ड वॉर में यूनाइटेड स्टेट्स ने जब उसने छोटे-छोटे कंट्रीज को सोवियत यूनियन से बचाया और नेटो की अलायसेस बना दी। तीसरा रूल यह है कि प्रिंस को हमेशा फ्यूचर थ्रेट्स के लिए अलर्ट रहना चाहिए और जरूरत पड़ने पर पहले ही एक्शन ले लेना
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Speaker A
चाहिए। बिल्कुल बीमारी की तरह वैक्सीन करा लो पहले ही। अगर प्रॉब्लम शुरू में ही पकड़ी जाए तो उसे कंट्रोल करना बड़ा आसान हो जाता है। नॉर्थ कोरिया में जैसे किम जोंग उन की यह स्ट्रेटजी है कि जहां भी
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Speaker A
पोटेंशियल थ्रेट नजर आए पहले ही उसको एलिमिनेट कर दो, खल्लास कर दो। प्रीव अटैक्स कह लो। जिन चीज़ों को समझ रहे होंगे आप आज के दौर में अमेरिका और इजराइल जो ईरान पे अटैक्स कर रहे हैं। यह वही है प्रीव
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Speaker A
अटैक्स। उनके कहने के मुताबिक मैंने कहा था 500 साल पुरानी इस किताब को जब आप पढ़ेंगे आपको लगेगा यही हो रहा है इस दुनिया में अभी। एंशिएंट रोमंस ने भी जब ग्रीस पर कब्जा किया तो उन्होंने भी यही
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Speaker A
स्ट्रेटजी फॉलो की। वो किसी भी लोकल लीडर को इतना पावरफुल नहीं होने देते थे कि वो उनके लिए खतरा बन जाए। इन रूल्स कीनेस जो है ना दोस्तों वो तब समझ आती है जब आप एग्जांपल लेते हैं फ्रांस के लुई द 12थ
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Speaker A
की। ये एक ऐसा बादशाह था जिसने नॉर्दन इटली को कंकर तो किया लेकिन बाद में इन प्रिंसिपल्स को इग्नोर कर दिया और जल्द ही अपना कंट्रोल खो बैठा। जब अलेक्जेंडर द ग्रेट ने पर्शियन किंगडम को कंकर किया और
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Speaker A
फिर 323 बीसी में उसकी डेथ हो गई तो लोगों को यह लगा कि अब तो जो मेसडोनियंस हैं उन्होंने अपना कंट्रोल खो दिया है लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वो कई सालों तक वहां पर हुकूमत करते रहे। आखिर क्यों? इसका जवाब
05:01
Speaker A
समझने के लिए पहले यह समझना जरूरी है कि जो प्रिंसिपलिटीज़ होती हैं उनकी डिफरेंट टाइप्स होती हैं। पहली टाइप है रूलर बैरन सिस्टम। जैसा फ्रांस में था। इस सिस्टम में किंग तो रूल करता है लेकिन साथ ही बहुत सारे नोबेल्स होते हैं या बैरंस होते
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Speaker A
हैं जिनके अपने इंटरेस्ट भी होते हैं और उनकी अपनी पावर होती है। ये सिस्टम बड़ा अनस्टेबल होता है क्योंकि कभी भी बैरंस आके किंग को चैलेंज करने लग जाते हैं और यही वजह है कि फ्रांस का सिस्टम टूटा
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Speaker A
क्योंकि ऐसे सिस्टम को तोड़ना बड़ा आसान होता है। कुछ ही बैरंस को आपने अपनी साइड पर करना होता है और ऐसे सिस्टम को कंट्रोल करना बड़ा मुश्किल होता है। दूसरा टाइप है रूलर सर्वेंट सिस्टम। इस सिस्टम में जो
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Speaker A
प्रिंस है वो शुरू ही में उन सब लोगों को हटा देता है जिनमें इंडिपेंडेंट पावर या एंबिशन हो जो खुद को कुछ समझ रहे हों, कुछ बड़ा करना चाहते हों उनको पहले ही खलास कर दो। इसके बाद नोबेल्स सिर्फ प्रिंस के
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Speaker A
लिए लॉयल सर्वेंट्स बनकर रह जाते हैं। ये सिस्टम बहुत सेंट्रलाइज होता है और इसमें इन्वेशन जो है वो बड़ी मुश्किल हो जाती है। कोई ऐसे उठ के जो है ना आपको हटा नहीं सकता। आज के जमाने में चीन का सिस्टम
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Speaker A
कुछ हद तक इसी तरह का है जहां कम्युनिस्ट पार्टी के लीडर्स जो हैं वो शी जिनपिंग के लिए लॉयल हैं। जब अलेक्जेंडर ने पर्शिया को कंकर किया तो वहां भी कुछ ऐसा ही सिस्टम था। किंग डरियस ने सोसाइटी के मेजर
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Speaker A
लीडर्स को अपना लॉयल बना के रखा हुआ था। इसीलिए उसको फतह करना बड़ा मुश्किल था। लेकिन जब एक दफा कंट्रोल मिल गया तो रिबेलियन के चांसेस कम हो गए। अब कौन सा सिस्टम चुनना है, यह आपकी हालात के
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Speaker A
हिसाब से और आपकी एबिलिटीज़ पर डिपेंड करता है। प्रिंस बनने के लिए कई तरीके हो सकते हैं। मिलिट्री फोर्स, अलायंसेस या पॉलिटिकल डील्स लेकिन चाहे जो भी तरीका हो मैकियावेली के मुताबिक रूलर को वर्चू और फॉर्च्यून दोनों की जरूरत होती है। वर्चू
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Speaker A
का मतलब है करज, लीडरशिप और स्ट्रांग कैरेक्टर। लेकिन अगर फॉर्च्यून साथ ना दे तो सिर्फ वर्चू से काम नहीं चलता भाई। फॉर्च्यून का मतलब है कि मतलब अब टाइमिंग आपकी खराब है तो फिर कुछ भी नहीं कर सकते।
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Speaker A
एक एग्जांपल वो देता है रोमुलस की। अगर उसे बचपन में एल्बा से निकाला ना जाता तो वो शायद रोम को इस्टैब्लिश ही ना करता। मॉडर्न पॉलिटिक्स में नरेंद्र मोदी की एग्जांपल भी दी जा सकती है जो था तो एक
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Speaker A
सिंपल बैकग्राउंड से लेकिन उठ के प्राइम मिनिस्टर बन गया। यह जो ऑपॉर्चुनिटीज़ उसकी जिंदगी में आई होंगी उन पर खेलना यह उसकी गेम थी। इस तरह अगर फॉर्च्यून किसी को पावर दे भी दे तो उसे मेंटेन करने के
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Speaker A
लिए वर्चू का होना बहुत जरूरी है। वरना पावर ज्यादा देर तक ठहरती नहीं है। बेसिकली वो यह कह रहा है कि मौके पर चौका मारना आना चाहिए। आपको मौका परस्त होना चाहिए। ऑपॉर्चुनिस्ट होना चाहिए। कभी-कभी ये जो चालाकी है वो पावर हासिल करने का
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Speaker A
जरिया बन जाती है। दूसरी उसकी जो बड़ी कंट्रोवर्शियल बात है वो है जुल्म के बारे में। वो यह कहता है कि कभी-कभी जुल्म करना भी पड़े तो कर लेना चाहिए। लेकिन उसका तरीका है एक तो आपने जल्दी करना है और
07:42
Speaker A
बहुत सारा करना है ताकि जो लोग हैं वह हैरान हो जाएं, परेशान हो जाएं और इसी तरह आप पावर अपने पास कर लो। लेकिन एक दफा जब हो जाए तो फिर स्टेबल रहो। जो हुक्मरान बार-बार जुल्म करता है तो फिर लोग उससे
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Speaker A
नफरत करने लग जाते हैं। लेकिन पावर हासिल करने का एक और तरीका भी है लोगों को प्रोटेक्शन और प्रोस्पेरिटी देना। उनकी हिफाजत करना। जब सिटीजंस खुश होते हैं तो वो नेचुरली अपने रूलर को सपोर्ट करते हैं। यहां पर सिंगापुर की एग्जांपल दी जा सकती
08:08
Speaker A
है। ली कुआन यू की लीडरशिप एक बेहतरीन लीडरशिप रही है। लोग उससे इतने खुश रहे हैं कि उनको खुद ही सपोर्ट मिल जाती है। वॉर का आर्ट प्रि
08:20
Speaker A
पावर वॉर के जरिए ही तो हासिल की है और अक्सर वॉर ही उनके पावर को खत्म भी कर देता है। जैसे एडोल्फ हिट ने वर्ल्ड वॉर टू के जरिए अपनी पावर को एक्सपेंड किया। लेकिन आखिर में उसी जंग ने उसको तबाह भी
08:33
Speaker A
कर दिया। इसलिए मैकवली यह कहते हैं कि पीस के टाइम पर भी जंग की तैयारी हमेशा करनी चाहिए। और दूसरी बात कि मर्सनरीज पर भरोसा करना बहुत खतरनाक साबित हो सकता है। क्योंकि वो सिर्फ पैसों के लिए लड़ते
08:46
Speaker A
मुश्किल वक्त में वो भाग जाएंगे या खुद आपके खिलाफ हो सकते हैं। लीबिया के गदाफी ने भी मर्सिरीज पर रिलाई किया था। लेकिन रेवोल्यूशन के वक्त वो बड़े अनरिलायबल साबित हुए। इसलिए सबसे बेहतर आर्मी वो होती है जो अपने सिटीजंस पर मुश्तमिल हो।
09:01
Speaker A
प्रिंस बनने के बाद आपकी पर्सनल ट्रेड्स भी पॉलिटिकलेंस रखती हैं। जैसे जेरोसिटी, सखी दिल। अगर रूलर हद से ज्यादा जेनरस हो जाए तो स्टेट के फाइनेंससेस खराब हो जाते हैं और फिर टैक्सेस बढ़ाने पड़ते हैं। इसलिए मैकेवली के मुताबिक शुरू में
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Speaker A
जेनेरोसिटी दिखाना ठीक है। लेकिन बाद में फाइनेंशियल डिसिप्लिन जरूरी होता है। यानी पहले आवाम को खुश कर दो लेकिन बाद में औकात में। डर और प्यार फियर और लव के बीच में भी बैलेंस बहुत इंपॉर्टेंट है। मैकेवली यह कहते हैं कि फियर्ड होना लव्ड
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Speaker A
होने से ज्यादा सेफ है। फिर वो ये कहते हैं कि एक हुक्मरान [संगीत] को इतना जालिम भी नहीं होना चाहिए कि लोग उससे नफरत ही करने लग जाए। डर होना अलग बात है। लेकिन इतना जालिम भी नहीं होना चाहिए कि लोग
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Speaker A
उससे नफरत करें। मैक्य वैली के मुताबिक एक प्रिंस को लोमड़ी और शेर दोनों बनना चाहिए। शेर स्ट्रेंथ का एक सिंबल है जबकि लोमड़ी [संगीत] कनिंग और क्लेवरनेस का। सियासत में कभी ब्रूट स्ट्रेंथ की जरूरत पड़ती है और कभी स्मार्ट डिसेप्शन की।
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Speaker A
धोखा देना भी आना चाहिए और आपको मजबूत भी होना चाहिए। प्रिंस को कभी-कभी अपने वादे भी तोड़ने पड़ सकते हैं अगर उसका पॉलिटिकल फायदा हो तो। लेकिन पब्लिक इमेज हमेशा ऐसी होनी चाहिए कि वो बड़ा ऑनेस्ट हो। बड़ा
10:09
Speaker A
एथिकल लीडर है और हां एडवाइर्स जो होते हैं वह भी बहुत इंपॉर्टेंट रोल प्ले करते हैं। प्रिंस को चाहिए कि वह अपने साथ जो लोग रखे जो एडवाइर्स वो बहुत कॉम्पिटेंट हो और फिर प्रिंस को यह भी चाहिए कि वो
10:19
Speaker A
उनको रिवॉर्ड करें। लेकिन आखिर में जो फाइनल डिसिशन है वो प्रिंस का ही होना चाहिए। बिल्कुल जैसे यूएस प्रेसिडेंट्स की कैबिनेट होती है। लेकिन लास्ट कॉल जो है वो प्रेसिडेंट का होता है। आखिर में मैकेवली यह कहता है कि फ्यूचर सिर्फ फेड
10:34
Speaker A
पर डिपेंड नहीं करता। इंसान अपने एक्शन से भी अपनी डेस्टिनी, अपनी तकदीर शेप कर सकता है। फॉर्च्यून को एक रिवर की तरह समझे। अगर सैलाब आए तो वाइस रूलर जो हैं वो पहले ही डिफेंस बना लेते हैं ताकि डैमेज कम हो
10:49
Speaker A
और अक्सर बोल्ड और जो डेरिंग लीडर्स होते हैं वो कॉशियस लोगों से ज्यादा सक्सेसफुल होते हैं। यानी कैलकुलेटेड रिस्क लेना बहुत जरूरी है। अगर रूलर डरता ही रहेगा तो फिर वो सक्सेसफुल नहीं होगा। और इसमें आप मिसाल ईलन मस्क की भी दे सकते हैं। जिसने
11:04
Speaker A
बहुत रिस्की डिसीजंस लेकर अपनी कंपनीज़ को टॉप पर पहुंचा दिया। इसलिए मैकेवली के मुताबिक एक प्रिंस को कभी मर्सफुल, कभी क्रूल, कभी ऑनेस्ट और कभी डिसीटफुल, धोखेबाज बनना पड़ता है। उसका कोई एक रूप नहीं होता। जो भी उसकी स्टेट और पावर को
11:19
Speaker A
मजबूत बनाए चीज उसको उसमें ढल जाना चाहिए। पावर हासिल करने के लिए उसे मेंटेन करने के लिए कोई भी तरीका पूरी तरह से टैबू नहीं होता। यह सारा कुछ कहना है निकोलो मैचवेली का। यह किताब जब उसने लिखी थी तो
11:32
Speaker A
उसने यह किताब लिख के गिफ्ट की थी उस दौर के प्रिंस को लुरिंजो मेडिची को। तो 16 सेंचुरी की उसकी यह बातें आज भी रेलेवेंट है। और सियासत अगर आप देखें तो इसी तरह से हो रही है। कोई उसमें मोरालिटी है ही
11:45
Speaker A
नहीं। ऐसा होना चाहिए नहीं होना चाहिए यह एक अलग बहस है। लेकिन क्या ऐसा हो रहा है?
11:51
Speaker A
यह हकीकत है। और यह आपके सामने है। ऐसा ही हो रहा है। चलिए दोस्तों मिलते हैं आपसे किसी और वीडियो में किसी और बात पे करेंगे तब्सरा। तब तक के लिए भाई को दें इजाजत। मैं चला गुड बाय
Topics:मैकियावेलीद प्रिंसपावर पॉलिटिक्सराजनीतिहुक्मरानजुल्मसियासतलीडरशिपवर्चूफॉर्च्यून

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