Speaker A
यह साल 2007 की बात है। यूएन में हेल्थ एक्टिविस्ट के तौर पर काम करने वाले प्रशांत किशोर भारत लौट चुके थे। इस वक्त देश में कांग्रेस के गठबंधन की सरकार चल रही थी। प्रशांत किशोर ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की और सोशल सेक्टर में काम करने के लिए एक प्रेजेंटेशन दी। लेकिन राहुल ने उन्हें सिर्फ अमेठी में एक मल्टी फैसिलिटी हॉस्पिटल बनाने में मदद करने का ही ऑफर दिया। इस ऑफर से प्रशांत संतुष्ट नहीं होते। उन्हें अपने लिए काम बहुत छोटा लग रहा था और बात आगे नहीं बढ़ सकी। मॉब एट सेंट स्टीवंस कॉलेज लास्ट वीक राहुल गांधी मे वेल हैव द अटेंशन ऑफ द यूथ। साल 2010 में प्रशांत ने एक बार फिर यूएन की एक संस्था यूएन एड मिशन को जॉइन कर लिया और अफ्रीका के देश चार चले जाते हैं। यूएन एड में काम करने के दौरान ही प्रशांत को भारत के प्लानिंग कमीशन की एक स्टडी मिलती है। ये स्टडी भारत के सबसे पिछड़े राज्यों के हेल्थ सेक्टर की खराब स्थिति पर थी। लेकिन प्रशांत किशोर ने इस स्टडी को नए सिरे से तैयार किया और डाटा निकालकर साबित किया कि इंडिया के अमीर और डेवलप्ड माने जाने वाले राज्यों में भी हेल्थ सेक्टर उतना ही खराब है जितना गरीब राज्यों में है। प्रशांत ने अपना यह पेपर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भेज दिया और साथ ही इसकी एक कॉपी गुजरात के उस वक्त के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को भी भेज दी। इस पेपर पर नरेंद्र मोदी की नजर पड़ जाती है। नरेंद्र मोदी ने अपने अधिकारियों के जरिए चाट में रह रहे प्रशांत किशोर से संपर्क किया और सोशल सेक्टर की पॉलिसीज पर उनके साथ काम करने का ऑफर दे दिया। इस तरह साल 2010 में प्रशांत चाट से दिल्ली आते हैं और सीधे गुजरात की राजधानी गांधीनगर पहुंचते हैं नरेंद्र मोदी से मिलने के लिए। अगले साल गुजरात में इलेक्शन आने वाले थे। नरेंद्र मोदी ने प्रशांत में एक ऐसा आदमी देखा जो उनके लिए मॉडर्न तरीके से प्रचार कर सकता था। इस तरह नरेंद्र मोदी ने प्रशांत को अपने यहां पर काम करने का ऑफर दे दिया। प्रशांत ने नरेंद्र मोदी के लिए साल 2012 के दिसंबर महीने में होने वाले गुजरात चुनावों में प्रचार करने के लिए तैयारी शुरू कर दी। देश में पहली बार 3D टेलीकास्ट की टेक्नोलॉजी को इलेक्शन में उतार दिया जाता है। अब मोदी गुजरात की राजधानी से ही यानी गांधीनगर से ही गुजरात के अलग-अलग शहरों में भाषण दे सकते थे। मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को 3D तकनीक से प्रचार का आगाज किया। इस टेक्निक ने बाकी पार्टियों के नेताओं के मुकाबले नरेंद्र मोदी को एक बड़ा एडवांटेज दे दिया। 2012 के गुजरात चुनावों में नरेंद्र मोदी की जीत होती है और वे तीसरी बार गुजरात के मुख्यमंत्री बन जाते हैं। नरेंद्र मोदी के इस प्रचार के पीछे प्रशांत किशोर का दिमाग चल रहा था। अब प्रशांत किशोर के ऑफिस को मोदी के सरकारी आवास की ऊपर की मंजिल पर सेट कर दिया जाता है। साल 2013 में प्रशांत किशोर ने एसोसिएशन ऑफ सिटीजंस फॉर अकाउंटेबल गवर्नेंस यानी सीएजी बनाई जिसका काम था मोदी के लिए प्रचार के अलग-अलग तरीके खोजना। गुजरात चुनाव में प्रशांत ने 3D टेलीकास्ट का सिर्फ ट्रेलर दिखाया था। लेकिन लोकसभा चुनावों से पहले पूरी फिल्म उतार दी। क्या कोई सिफारिश के बिना कोई पैसों के बिना क्या आप अपने बच्चे को नौकरी दिला सकते हैं? नरेंद्र मोदी अब इस तरह से दिल्ली के हर नुक्कड़ पर सभा करते नजर आएंगे। 3D होलोग्राम के थ्रू नरेंद्र मोदी को 100 शहरों में एक साथ लाइव दिखाया जा रहा था। 3D कंटेनर्स गाड़ियों के थ्रू नरेंद्र मोदी के भाषणों को गांव-गांव पहुंचाया जा रहा था। मोदी के चाय वाले बैकग्राउंड को प्रशांत किशोर ने ही एक पॉलिटिकल कैंपेन में बदला। अबे कान खोल के सुन ले। हमने चाय बेची है इसका गर्व है। लेकिन हमने देश बेचने का काम नहीं किया। अब हर जगह मोदी बताने लगे कि वे चाय बेचते थे और गरीब परिवार से आते थे। चाय पर चर्चा जैसे कैंपेन के थ्रू प्रशांत ने नरेंद्र मोदी को काफी पॉपुलर बना दिया। मोदी आने वाला है कैंपेन चलाने के लिए 400 वीडियो विन तैयार की गई। जिनका काम था नरेंद्र मोदी के भाषणों को गांव-गांव जाकर दिखाना। इस सबके पीछे जिस आदमी का दिमाग चल रहा था वो थे प्रशांत किशोर। मोदी जब गांधीनगर में थे तो प्रशांत मोदी के घर के ऊपर वाले फ्लोर में शिफ्ट हो गए थे और जब प्रशांत नीतीश के साथ आए तो नीतीश के घर में ही डेरा जमा लिया। इन सब कारणों से प्रशांत किशोर नरेंद्र मोदी के एक पावरफुल सहयोगी बन जाते हैं। लेकिन बीजेपी के कई नेताओं को यह पसंद नहीं आ रहा था। खासकर अमित शाह को। आपकी खबर के मुताबिक लोकसभा चुनाव के बाद ही अमित शाह ने प्रशांत किशोर को किनारे कर दिया था। 2014 के चुनाव में नरेंद्र मोदी की जीत होती है। प्रशांत को उम्मीद थी कि उन्हें दिल्ली में पॉलिसी मेकिंग में कोई बड़ा काम मिलेगा। प्रशांत किशोर ने सीएजी को भंग कर दिया और इंडियन पीपल्स एक्शन कमेटी यानी आईपैक नाम से एक कंपनी बनाई जिसका मकसद था प्रधानमंत्री मोदी के साथ मिलकर डेवलपमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर से रिलेटेड पॉलिसीज बनाना। इस बॉडी का काम सीधे प्रधानमंत्री मोदी को रिपोर्ट करना था जो प्रशांत किशोर को बहुत पावरफुल बनाने जा रही थी क्योंकि उनके और प्रधानमंत्री के बीच में कोई नहीं होता लेकिन माना जाता है कि इससे अमित शाह जैसे बड़े बीजेपी नेताओं को लगा कि प्रशांत किशोर एक पैरेलल पावर सेंटर बनते जा रहे हैं जो उनके लिए ठीक नहीं है। इसलिए कई महीने बीत जाने के बाद भी प्रशांत को कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी जाती। अब प्रशांत किशोर का पेशेंस जवाब देने लगता है। वे प्राइवेट बातचीत में कहने लगे कि मोदी उनकी उम्मीद पर खरे नहीं उतर रहे हैं और उनकी सरकार अपने वायदों को पूरा नहीं कर रही है। प्रशांत को लगता था कि मोदी की जीत का क्रेडिट उन्हें मिलना चाहिए। जबकि बीजेपी की सोच अलग थी। बीजेपी नेताओं का मानना था कि प्रशांत किशोर भाजपा यानी कि पार्टी के संगठन के योगदान को कम दिखा रहे हैं। बीजेपी के नेता मानते थे कि प्रशांत एक दुकानदार हैं और पेमेंट होने के बाद उनका काम अब खत्म हो गया है। लोकसभा चुनाव के कुछ महीने बाद हुए विधानसभा चुनावों जैसे हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखंड में भाजपा को जीत मिलती है। इन चुनावों में प्रशांत किशोर का कोई रोल नहीं था। लेकिन इसके बावजूद बीजेपी का प्रदर्शन बहुत अच्छा रहता है। इससे यह धारणा मजबूत हुई कि 2014 का लोकसभा चुनाव भी भाजपा पार्टी अपने दम पर जीती है ना कि प्रशांत किशोर के कारण। फाइव मंथ्स आफ्टर अ थंपिंग विक्ट्री इन द लोकसभा पोल द बीजेपी सील्ड बोथ हरियाणा एंड महाराष्ट्र फाइट एंड विथ द मोदी वेयर स्टिल इंटैक्ट। द कांग्रेस पार्टी वास कंप्लीटली डेसिमेटेड। इससे प्रशांत को समझ आ गया कि उन्हें किनारे कर दिया गया है। एक बार फिर प्रशांत किशोर प्रधानमंत्री मोदी से मिलते हैं। लेकिन इस बार मोदी ने साफ कह दिया कि अमित शाह ही सब कुछ मैनेज करते हैं और उनसे जाकर मिलो। प्रशांत अमित शाह से मिलते हैं लेकिन अमित शाह ने उनकी एक नहीं सुनी। इस तरह प्रशांत किशोर मोदी और बीजेपी से अलग हो जाते हैं। और यहीं से शुरुआत होती है प्रशांत किशोर और अमित शाह के बीच एक राइवलरी की। अमित शाह से बदला लेने के लिए प्रशांत किशोर नीतीश कुमार से जाकर मिल जाते हैं। जो उस वक्त मोदी शाह की जोड़ी के सबसे बड़े विरोधियों में से एक थे। अमित शाह को जवाब देने के लिए प्रशांत किशोर मोदी के विरोधी खेमे में शामिल हो गए। दिसंबर 2014 में प्रशांत दिल्ली में पहली बार नीतीश से मिलते हैं। प्रशांत ने पहली शर्त रखी कि अगर आप मुझसे काम करवाना चाहते हैं तो जीतन राम मांझी को हटाकर खुद बिहार के मुख्यमंत्री बनिए। नीतीश ने प्रशांत की सलाह मान ली और फरवरी 2015 में जीतन राम मांझी को हटाकर फिर से मुख्यमंत्री बन जाते हैं। कि नीतीश कुमार बिहार के अगले मुख्यमंत्री होंगे। नीतीश कुमार रविवार की शाम 5:00 बजे राजभवन में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। प्रशांत ने भी आईपक कंपनी को दोबारा से रिवाइव किया और 2015 में होने जा रही बिहार चुनाव के लिए नीतीश कुमार के प्रचार का जिम्मा संभाल लिया। अब गुजरात की तरह ही बिहार में भी प्रशांत ने नीतीश के घर को अपना ऑफिस बना लिया। यह चुनाव नीतीश कुमार के लिए भी अग्नि परीक्षा की तरह था। क्योंकि 2014 लोकसभा चुनावों में नीतीश कुमार को मात्र दो सीटें आई थी। जबकि इससे पहले के चुनाव में उन्हें 20 सीटों पर जीत मिली थी। मोदी से निपटने के लिए नीतीश ने बिहार में अपने सबसे बड़े राजनीतिक विरोधी लालू यादव की आरजेडी और कांग्रेस से गठबंधन कर लिया। जिन्हें मिलाकर बना महागठबंधन। शुरू में प्रशांत किशोर को डाउट था कि यह गठबंधन काम नहीं करेगा। प्रशांत का मानना था कि लालू नीतीश को गठबंधन का फेस और मुख्यमंत्री उम्मीदवार बनाने में रोड़ा अटकाएंगे। प्रशांत ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से संपर्क किया और उनसे कहा कि वे लालू को नीतीश की लीडरशिप स्वीकार करने के लिए मनाएं। सोनिया ने यही किया और लालू ने खुद नीतीश को मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित कर दिया। प्रशांत को लालू की यह पॉलिटिकल मैच्योरिटी बहुत पसंद आई और गठबंधन को लेकर उनके मन में जो डाउट्स थे वो दूर हो जाते हैं। चुनाव के दौरान प्रशांत ने लालू और नीतीश के बीच मैसेंजर का काम किया और सीट बंटवारे जैसी चीजों में भी प्रशांत का रोल रहा। 2015 के बिहार चुनाव में महागठबंधन ने बड़ी जीत दर्ज की। और नीतीश की जीत के हीरो प्रशांत किशोर। बिहार चुनावों में जीत के हीरो नितीश हैं। लेकिन नीतीश की जीत के हीरो है प्रशांत किशोर। ये जीत अमित शाह की हार।











