Skip to content

The Man With Many Faces - Prashant Kishor | Bihar Election

प्रशांत किशोर की राजनीतिक रणनीतियों और बिहार चुनाव में उनकी भूमिका पर आधारित डॉक्यूमेंट्री।

Key Takeaways

  • प्रशांत किशोर ने राजनीतिक प्रचार में आधुनिक तकनीकों का सफलतापूर्वक उपयोग किया।
  • उनकी रणनीतियाँ नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार की राजनीतिक सफलता में अहम रहीं।
  • बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के साथ मतभेद के कारण प्रशांत किशोर ने विपक्षी गठबंधन के साथ काम किया।
  • राजनीतिक गठबंधन और मध्यस्थता में उनकी भूमिका निर्णायक रही।
  • प्रशांत किशोर भारतीय राजनीतिक रणनीति के एक प्रभावशाली और विवादास्पद चेहरे हैं।

What the video covers

  • प्रशांत किशोर ने 2007 में भारत लौटकर कांग्रेस के राहुल गांधी से सोशल सेक्टर में काम करने का प्रस्ताव रखा।
  • 2010 में प्रशांत किशोर ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ काम करना शुरू किया और 2012 के गुजरात चुनाव में 3D टेलीकास्ट तकनीक का उपयोग किया।
  • प्रशांत किशोर मोदी के प्रचार अभियान के मुख्य रणनीतिकार बने, लेकिन बाद में अमित शाह के विरोध के कारण किनारे कर दिए गए।
  • 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद प्रशांत किशोर ने आईपैक कंपनी बनाई, लेकिन उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं मिली।
  • अमित शाह से विवाद के बाद प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार के साथ गठबंधन किया और बिहार के मुख्यमंत्री बनने में मदद की।
  • प्रशांत किशोर ने 2015 के बिहार चुनाव में महागठबंधन के प्रचार का नेतृत्व किया और बड़ी जीत दिलाई।
  • प्रशांत किशोर ने राजनीतिक गठबंधनों में मध्यस्थता की और सीट बंटवारे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • उनकी रणनीतियों ने नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार दोनों के राजनीतिक करियर में महत्वपूर्ण प्रभाव डाला।
  • बीजेपी के भीतर प्रशांत किशोर को पैरेलल पावर सेंटर के रूप में देखा गया, जिससे उनकी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से टकराव हुआ।
  • प्रशांत किशोर की कहानी भारतीय राजनीति में रणनीतिकार के रूप में उनकी बढ़ती भूमिका और राजनीतिक राइवलरी को दर्शाती है।

Answers

Questions about this video

प्रशांत किशोर ने गुजरात चुनाव में किस तकनीक का इस्तेमाल किया?

प्रशांत किशोर ने गुजरात चुनाव में 3D टेलीकास्ट तकनीक का इस्तेमाल किया, जिससे नरेंद्र मोदी के भाषण अलग-अलग शहरों में लाइव दिखाए गए।

प्रशांत किशोर और अमित शाह के बीच विवाद क्यों हुआ?

अमित शाह को लगा कि प्रशांत किशोर पार्टी के संगठन के योगदान को कम दिखा रहे हैं और वे एक पैरेलल पावर सेंटर बन रहे थे, जिससे विवाद हुआ।

प्रशांत किशोर ने बिहार चुनाव में किस नेता के प्रचार का नेतृत्व किया?

प्रशांत किशोर ने बिहार चुनाव में नीतीश कुमार के प्रचार का नेतृत्व किया और महागठबंधन की बड़ी जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:00
Speaker A
यह साल 2007 की बात है। यूएन में हेल्थ एक्टिविस्ट के तौर पर काम करने वाले प्रशांत किशोर भारत लौट चुके थे। इस वक्त देश में कांग्रेस के गठबंधन की सरकार चल रही थी। प्रशांत किशोर ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की और सोशल सेक्टर में काम करने के लिए एक प्रेजेंटेशन दी। लेकिन राहुल ने उन्हें सिर्फ अमेठी में एक मल्टी फैसिलिटी हॉस्पिटल बनाने में मदद करने का ही ऑफर दिया। इस ऑफर से प्रशांत संतुष्ट नहीं होते। उन्हें अपने लिए काम बहुत छोटा लग रहा था और बात आगे नहीं बढ़ सकी। मॉब एट सेंट स्टीवंस कॉलेज लास्ट वीक राहुल गांधी मे वेल हैव द अटेंशन ऑफ द यूथ। साल 2010 में प्रशांत ने एक बार फिर यूएन की एक संस्था यूएन एड मिशन को जॉइन कर लिया और अफ्रीका के देश चार चले जाते हैं। यूएन एड में काम करने के दौरान ही प्रशांत को भारत के प्लानिंग कमीशन की एक स्टडी मिलती है। ये स्टडी भारत के सबसे पिछड़े राज्यों के हेल्थ सेक्टर की खराब स्थिति पर थी। लेकिन प्रशांत किशोर ने इस स्टडी को नए सिरे से तैयार किया और डाटा निकालकर साबित किया कि इंडिया के अमीर और डेवलप्ड माने जाने वाले राज्यों में भी हेल्थ सेक्टर उतना ही खराब है जितना गरीब राज्यों में है। प्रशांत ने अपना यह पेपर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भेज दिया और साथ ही इसकी एक कॉपी गुजरात के उस वक्त के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को भी भेज दी। इस पेपर पर नरेंद्र मोदी की नजर पड़ जाती है। नरेंद्र मोदी ने अपने अधिकारियों के जरिए चाट में रह रहे प्रशांत किशोर से संपर्क किया और सोशल सेक्टर की पॉलिसीज पर उनके साथ काम करने का ऑफर दे दिया। इस तरह साल 2010 में प्रशांत चाट से दिल्ली आते हैं और सीधे गुजरात की राजधानी गांधीनगर पहुंचते हैं नरेंद्र मोदी से मिलने के लिए। अगले साल गुजरात में इलेक्शन आने वाले थे। नरेंद्र मोदी ने प्रशांत में एक ऐसा आदमी देखा जो उनके लिए मॉडर्न तरीके से प्रचार कर सकता था। इस तरह नरेंद्र मोदी ने प्रशांत को अपने यहां पर काम करने का ऑफर दे दिया। प्रशांत ने नरेंद्र मोदी के लिए साल 2012 के दिसंबर महीने में होने वाले गुजरात चुनावों में प्रचार करने के लिए तैयारी शुरू कर दी। देश में पहली बार 3D टेलीकास्ट की टेक्नोलॉजी को इलेक्शन में उतार दिया जाता है। अब मोदी गुजरात की राजधानी से ही यानी गांधीनगर से ही गुजरात के अलग-अलग शहरों में भाषण दे सकते थे। मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को 3D तकनीक से प्रचार का आगाज किया। इस टेक्निक ने बाकी पार्टियों के नेताओं के मुकाबले नरेंद्र मोदी को एक बड़ा एडवांटेज दे दिया। 2012 के गुजरात चुनावों में नरेंद्र मोदी की जीत होती है और वे तीसरी बार गुजरात के मुख्यमंत्री बन जाते हैं। नरेंद्र मोदी के इस प्रचार के पीछे प्रशांत किशोर का दिमाग चल रहा था। अब प्रशांत किशोर के ऑफिस को मोदी के सरकारी आवास की ऊपर की मंजिल पर सेट कर दिया जाता है। साल 2013 में प्रशांत किशोर ने एसोसिएशन ऑफ सिटीजंस फॉर अकाउंटेबल गवर्नेंस यानी सीएजी बनाई जिसका काम था मोदी के लिए प्रचार के अलग-अलग तरीके खोजना। गुजरात चुनाव में प्रशांत ने 3D टेलीकास्ट का सिर्फ ट्रेलर दिखाया था। लेकिन लोकसभा चुनावों से पहले पूरी फिल्म उतार दी। क्या कोई सिफारिश के बिना कोई पैसों के बिना क्या आप अपने बच्चे को नौकरी दिला सकते हैं? नरेंद्र मोदी अब इस तरह से दिल्ली के हर नुक्कड़ पर सभा करते नजर आएंगे। 3D होलोग्राम के थ्रू नरेंद्र मोदी को 100 शहरों में एक साथ लाइव दिखाया जा रहा था। 3D कंटेनर्स गाड़ियों के थ्रू नरेंद्र मोदी के भाषणों को गांव-गांव पहुंचाया जा रहा था। मोदी के चाय वाले बैकग्राउंड को प्रशांत किशोर ने ही एक पॉलिटिकल कैंपेन में बदला। अबे कान खोल के सुन ले। हमने चाय बेची है इसका गर्व है। लेकिन हमने देश बेचने का काम नहीं किया। अब हर जगह मोदी बताने लगे कि वे चाय बेचते थे और गरीब परिवार से आते थे। चाय पर चर्चा जैसे कैंपेन के थ्रू प्रशांत ने नरेंद्र मोदी को काफी पॉपुलर बना दिया। मोदी आने वाला है कैंपेन चलाने के लिए 400 वीडियो विन तैयार की गई। जिनका काम था नरेंद्र मोदी के भाषणों को गांव-गांव जाकर दिखाना। इस सबके पीछे जिस आदमी का दिमाग चल रहा था वो थे प्रशांत किशोर। मोदी जब गांधीनगर में थे तो प्रशांत मोदी के घर के ऊपर वाले फ्लोर में शिफ्ट हो गए थे और जब प्रशांत नीतीश के साथ आए तो नीतीश के घर में ही डेरा जमा लिया। इन सब कारणों से प्रशांत किशोर नरेंद्र मोदी के एक पावरफुल सहयोगी बन जाते हैं। लेकिन बीजेपी के कई नेताओं को यह पसंद नहीं आ रहा था। खासकर अमित शाह को। आपकी खबर के मुताबिक लोकसभा चुनाव के बाद ही अमित शाह ने प्रशांत किशोर को किनारे कर दिया था। 2014 के चुनाव में नरेंद्र मोदी की जीत होती है। प्रशांत को उम्मीद थी कि उन्हें दिल्ली में पॉलिसी मेकिंग में कोई बड़ा काम मिलेगा। प्रशांत किशोर ने सीएजी को भंग कर दिया और इंडियन पीपल्स एक्शन कमेटी यानी आईपैक नाम से एक कंपनी बनाई जिसका मकसद था प्रधानमंत्री मोदी के साथ मिलकर डेवलपमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर से रिलेटेड पॉलिसीज बनाना। इस बॉडी का काम सीधे प्रधानमंत्री मोदी को रिपोर्ट करना था जो प्रशांत किशोर को बहुत पावरफुल बनाने जा रही थी क्योंकि उनके और प्रधानमंत्री के बीच में कोई नहीं होता लेकिन माना जाता है कि इससे अमित शाह जैसे बड़े बीजेपी नेताओं को लगा कि प्रशांत किशोर एक पैरेलल पावर सेंटर बनते जा रहे हैं जो उनके लिए ठीक नहीं है। इसलिए कई महीने बीत जाने के बाद भी प्रशांत को कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी जाती। अब प्रशांत किशोर का पेशेंस जवाब देने लगता है। वे प्राइवेट बातचीत में कहने लगे कि मोदी उनकी उम्मीद पर खरे नहीं उतर रहे हैं और उनकी सरकार अपने वायदों को पूरा नहीं कर रही है। प्रशांत को लगता था कि मोदी की जीत का क्रेडिट उन्हें मिलना चाहिए। जबकि बीजेपी की सोच अलग थी। बीजेपी नेताओं का मानना था कि प्रशांत किशोर भाजपा यानी कि पार्टी के संगठन के योगदान को कम दिखा रहे हैं। बीजेपी के नेता मानते थे कि प्रशांत एक दुकानदार हैं और पेमेंट होने के बाद उनका काम अब खत्म हो गया है। लोकसभा चुनाव के कुछ महीने बाद हुए विधानसभा चुनावों जैसे हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखंड में भाजपा को जीत मिलती है। इन चुनावों में प्रशांत किशोर का कोई रोल नहीं था। लेकिन इसके बावजूद बीजेपी का प्रदर्शन बहुत अच्छा रहता है। इससे यह धारणा मजबूत हुई कि 2014 का लोकसभा चुनाव भी भाजपा पार्टी अपने दम पर जीती है ना कि प्रशांत किशोर के कारण। फाइव मंथ्स आफ्टर अ थंपिंग विक्ट्री इन द लोकसभा पोल द बीजेपी सील्ड बोथ हरियाणा एंड महाराष्ट्र फाइट एंड विथ द मोदी वेयर स्टिल इंटैक्ट। द कांग्रेस पार्टी वास कंप्लीटली डेसिमेटेड। इससे प्रशांत को समझ आ गया कि उन्हें किनारे कर दिया गया है। एक बार फिर प्रशांत किशोर प्रधानमंत्री मोदी से मिलते हैं। लेकिन इस बार मोदी ने साफ कह दिया कि अमित शाह ही सब कुछ मैनेज करते हैं और उनसे जाकर मिलो। प्रशांत अमित शाह से मिलते हैं लेकिन अमित शाह ने उनकी एक नहीं सुनी। इस तरह प्रशांत किशोर मोदी और बीजेपी से अलग हो जाते हैं। और यहीं से शुरुआत होती है प्रशांत किशोर और अमित शाह के बीच एक राइवलरी की। अमित शाह से बदला लेने के लिए प्रशांत किशोर नीतीश कुमार से जाकर मिल जाते हैं। जो उस वक्त मोदी शाह की जोड़ी के सबसे बड़े विरोधियों में से एक थे। अमित शाह को जवाब देने के लिए प्रशांत किशोर मोदी के विरोधी खेमे में शामिल हो गए। दिसंबर 2014 में प्रशांत दिल्ली में पहली बार नीतीश से मिलते हैं। प्रशांत ने पहली शर्त रखी कि अगर आप मुझसे काम करवाना चाहते हैं तो जीतन राम मांझी को हटाकर खुद बिहार के मुख्यमंत्री बनिए। नीतीश ने प्रशांत की सलाह मान ली और फरवरी 2015 में जीतन राम मांझी को हटाकर फिर से मुख्यमंत्री बन जाते हैं। कि नीतीश कुमार बिहार के अगले मुख्यमंत्री होंगे। नीतीश कुमार रविवार की शाम 5:00 बजे राजभवन में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। प्रशांत ने भी आईपक कंपनी को दोबारा से रिवाइव किया और 2015 में होने जा रही बिहार चुनाव के लिए नीतीश कुमार के प्रचार का जिम्मा संभाल लिया। अब गुजरात की तरह ही बिहार में भी प्रशांत ने नीतीश के घर को अपना ऑफिस बना लिया। यह चुनाव नीतीश कुमार के लिए भी अग्नि परीक्षा की तरह था। क्योंकि 2014 लोकसभा चुनावों में नीतीश कुमार को मात्र दो सीटें आई थी। जबकि इससे पहले के चुनाव में उन्हें 20 सीटों पर जीत मिली थी। मोदी से निपटने के लिए नीतीश ने बिहार में अपने सबसे बड़े राजनीतिक विरोधी लालू यादव की आरजेडी और कांग्रेस से गठबंधन कर लिया। जिन्हें मिलाकर बना महागठबंधन। शुरू में प्रशांत किशोर को डाउट था कि यह गठबंधन काम नहीं करेगा। प्रशांत का मानना था कि लालू नीतीश को गठबंधन का फेस और मुख्यमंत्री उम्मीदवार बनाने में रोड़ा अटकाएंगे। प्रशांत ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से संपर्क किया और उनसे कहा कि वे लालू को नीतीश की लीडरशिप स्वीकार करने के लिए मनाएं। सोनिया ने यही किया और लालू ने खुद नीतीश को मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित कर दिया। प्रशांत को लालू की यह पॉलिटिकल मैच्योरिटी बहुत पसंद आई और गठबंधन को लेकर उनके मन में जो डाउट्स थे वो दूर हो जाते हैं। चुनाव के दौरान प्रशांत ने लालू और नीतीश के बीच मैसेंजर का काम किया और सीट बंटवारे जैसी चीजों में भी प्रशांत का रोल रहा। 2015 के बिहार चुनाव में महागठबंधन ने बड़ी जीत दर्ज की। और नीतीश की जीत के हीरो प्रशांत किशोर। बिहार चुनावों में जीत के हीरो नितीश हैं। लेकिन नीतीश की जीत के हीरो है प्रशांत किशोर। ये जीत अमित शाह की हार।
00:14
Speaker A
में काम करने के लिए एक प्रेजेंटेशन दी। लेकिन राहुल ने उन्हें सिर्फ अमेठी में एक मल्टी फैसिलिटी हॉस्पिटल बनाने में मदद करने का ही ऑफर दिया। इस ऑफर से प्रशांत संतुष्ट नहीं होते। उन्हें अपने लिए काम बहुत छोटा लग रहा था और बात आगे नहीं बढ़
00:30
Speaker A
सकी। मॉब एट सेंट स्टीवंस कॉलेज लास्ट वीक राहुल गांधी मे वेल हैव द अटेंशन ऑफ द यूथ। साल 2010 में प्रशांत ने एक बार फिर यूएन की एक संस्था यूएन एड मिशन को जॉइ कर लिया और अफ्रीका के देश चार चले जाते हैं।
00:46
Speaker A
यूएन एड में काम करने के दौरान ही प्रशांत को भारत के प्लानिंग कमीशन की एक स्टडी मिलती है। ये स्टडी भारत के सबसे पिछड़े राज्यों के हेल्थ सेक्टर की खराब स्थिति पर थी। लेकिन प्रशांत किशोर ने इस स्टडी
00:58
Speaker A
को नए सिरे से तैयार किया और डाटा निकालकर साबित किया कि इंडिया के अमीर और डेवलप्ड माने जाने वाले राज्यों में भी हेल्थ सेक्टर उतना ही खराब है जितना गरीब राज्यों में है। प्रशांत ने अपना यह पेपर प्रधानमंत्री
01:12
Speaker A
मनमोहन सिंह को भेज दिया और साथ ही इसकी एक कॉपी गुजरात के उस वक्त के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को भी भेज दी। इस पेपर पर नरेंद्र मोदी की नजर पड़ जाती है। नरेंद्र मोदी ने अपने अधिकारियों के जरिए चाट में
01:25
Speaker A
रह रहे प्रशांत किशोर से संपर्क किया और सोशल सेक्टर की पॉलिसीज पर उनके साथ काम करने का ऑफर दे दिया। इस तरह साल 2010 में प्रशांत चाट से दिल्ली आते हैं और सीधे गुजरात की राजधानी गांधीनगर पहुंचते हैं
01:39
Speaker A
नरेंद्र मोदी से मिलने के लिए। अगले साल गुजरात में इलेक्शन आने वाले थे। नरेंद्र मोदी ने प्रशांत में एक ऐसा आदमी देखा जो उनके लिए मॉडर्न तरीके से प्रचार कर सकता था। इस तरह नरेंद्र मोदी ने प्रशांत को
01:52
Speaker A
अपने यहां पर काम करने का ऑफर दे दिया। प्रशांत ने नरेंद्र मोदी के लिए साल 2012 के दिसंबर महीने में होने वाले गुजरात चुनावों में प्रचार करने के लिए तैयारी शुरू कर दी। देश में पहली बार 3D टेलीकास्ट की टेक्नोलॉजी को इलेक्शन में
02:05
Speaker A
उतार दिया जाता है। अब मोदी गुजरात की राजधानी से ही यानी गांधीनगर से ही गुजरात के अलग-अलग शहरों में भाषण दे सकते थे। मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को 3D तकनीक से प्रचार का आगाज किया। इस टेक्निक ने बाकी पार्टियों के नेताओं
02:20
Speaker A
के मुकाबले नरेंद्र मोदी को एक बड़ा एडवांटेज दे दिया। 2012 के गुजरात चुनावों में नरेंद्र मोदी की जीत होती है और वे तीसरी बार गुजरात के मुख्यमंत्री बन जाते हैं। नरेंद्र मोदी के इस प्रचार के पीछे प्रशांत किशोर का दिमाग चल रहा था। अब
02:37
Speaker A
प्रशांत किशोर के ऑफिस को मोदी के सरकारी आवास की ऊपर की मंजिल पर सेट कर दिया जाता है। साल 2013 में प्रशांत किशोर ने एसोसिएशन ऑफ सिटीजंस फॉर अकाउंटेबल गवर्नेंस यानी सीएजी बनाई जिसका काम था मोदी के लिए प्रचार के अलग-अलग तरीके
02:52
Speaker A
खोजना। गुजरात चुनाव में प्रशांत ने 3D टेलीकास्ट का सिर्फ ट्रेलर दिखाया था। लेकिन लोकसभा चुनावों से पहले पूरी फिल्म उतार दी। क्या कोई सिफारिश के बिना कोई पैसों के बिना क्या आप अपने बच्चे को नौकरी दिला सकते हैं?
03:07
Speaker A
नरेंद्र मोदी अब इस तरह से दिल्ली के हर नुक्कड़ पर सभा करते नजर आएंगे। 3D होलोग्राम के थ्रू नरेंद्र मोदी को 100 शहरों में एक साथ लाइव दिखाया जा रहा था। 3D कंटेनर्स गाड़ियों के थ्रू नरेंद्र मोदी के भाषणों को गांव-गांव पहुंचाया जा
03:22
Speaker A
रहा था। मोदी के चाय वाले बैकग्राउंड को प्रशांत किशोर ने ही एक पॉलिटिकल कैंपेन में बदला। अबे कान खोल के सुन ले। हमने चाय बेची है इसका गर्व है। लेकिन हमने देश बेचने का काम नहीं किया। अब हर जगह मोदी बताने लगे कि वे चाय बेचते
03:37
Speaker A
थे और गरीब परिवार से आते थे। चाय पर चर्चा जैसे कैंपेन के थ्रू प्रशांत ने नरेंद्र मोदी को काफी पॉपुलर बना दिया। मोदी आने वाला है कैंपेन चलाने के लिए 400 वीडियो विन तैयार की गई। जिनका काम था
03:50
Speaker A
नरेंद्र मोदी के भाषणों को गांव-गांव जाकर दिखाना। इस सबके पीछे जिस आदमी का दिमाग चल रहा था वो थे प्रशांत किशोर। मोदी जब गांधीनगर में थे तो प्रशांत मोदी के घर के ऊपर वाले फ्लोर में शिफ्ट हो गए
04:02
Speaker A
थे और जब प्रशांत नीतीश के साथ आए तो नीतीश के घर में ही डेरा जमा लिया। इन सब कारणों से प्रशांत किशोर नरेंद्र मोदी के एक पावरफुल सहयोगी बन जाते हैं। लेकिन बीजेपी के कई नेताओं को यह पसंद
04:14
Speaker A
नहीं आ रहा था। खासकर अमित शाह को। आपकी खबर के मुताबिक लोकसभा चुनाव के बाद ही अमित शाह ने प्रशांत किशोर को किनारे कर दिया था। 2014 के चुनाव में नरेंद्र मोदी की जीत होती है। प्रशांत को उम्मीद
04:26
Speaker A
थी कि उन्हें दिल्ली में पॉलिसी मेकिंग में कोई बड़ा काम मिलेगा। प्रशांत किशोर ने सीएजी को भंग कर दिया और इंडियन पीपल्स एक्शन कमेटी यानी आईपैक नाम से एक कंपनी बनाई जिसका मकसद था प्रधानमंत्री मोदी के साथ मिलकर डेवलपमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर
04:40
Speaker A
से रिलेटेड पॉलिसीज बनाना। इस बॉडी का काम सीधे प्रधानमंत्री मोदी को रिपोर्ट करना था जो प्रशांत किशोर को बहुत पावरफुल बनाने जा रही थी क्योंकि उनके और प्रधानमंत्री के बीच में कोई नहीं होता लेकिन माना जाता है कि इससे अमित शाह जैसे
04:54
Speaker A
बड़े बीजेपी नेताओं को लगा कि प्रशांत किशोर एक पैरेलल पावर सेंटर बनते जा रहे हैं जो उनके लिए ठीक नहीं है। इसलिए कई महीने बीत जाने के बाद भी प्रशांत को कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी जाती। अब प्रशांत
05:06
Speaker A
किशोर का पेशेंस जवाब देने लगता है। वे प्राइवेट बातचीत में कहने लगे कि मोदी उनकी उम्मीद पर खरे नहीं उतर रहे हैं और उनकी सरकार अपने वायदों को पूरा नहीं कर रही है। प्रशांत को लगता था कि मोदी की
05:17
Speaker A
जीत का क्रेडिट उन्हें मिलना चाहिए। जबकि बीजेपी की सोच अलग थी। बीजेपी नेताओं का मानना था कि प्रशांत किशोर भाजपा यानी कि पार्टी के संगठन के योगदान को कम दिखा रहे हैं। बीजेपी के नेता मानते थे कि प्रशांत
05:29
Speaker A
एक दुकानदार हैं और पेमेंट होने के बाद उनका काम अब खत्म हो गया है। लोकसभा चुनाव के कुछ महीने बाद हुए विधानसभा चुनावों जैसे हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखंड में भाजपा को जीत मिलती है। इन चुनावों में प्रशांत किशोर का कोई रोल नहीं था। लेकिन
05:42
Speaker A
इसके बावजूद बीजेपी का प्रदर्शन बहुत अच्छा रहता है। इससे यह धारणा मजबूत हुई कि 2014 का लोकसभा चुनाव भी भाजपा पार्टी अपने दम पर जीती है ना कि प्रशांत किशोर के कारण। फाइव मंथ्स आफ्टर अ थंपिंग विक्ट्री इन द
05:55
Speaker A
लोकसभा पोल द बीजेपी सील्ड बोथ हरियाणा एंड महाराष्ट्र फाइट एंड विथ द मोदी वेयर स्टिल इंटैक्ट। द कांग्रेस पार्टी वास कंप्लीटली डेसिमेटेड। इससे प्रशांत को समझ आ गया कि उन्हें किनारे कर दिया गया है। एक बार फिर प्रशांत किशोर प्रधानमंत्री
06:08
Speaker A
मोदी से मिलते हैं। लेकिन इस बार मोदी ने साफ कह दिया कि अमित शाह ही सब कुछ मैनेज करते हैं और उनसे जाकर मिलो। प्रशांत अमित शाह से मिलते हैं लेकिन अमित शाह ने उनकी एक नहीं सुनी। इस तरह प्रशांत किशोर मोदी
06:21
Speaker A
और बीजेपी से अलग हो जाते हैं। और यहीं से शुरुआत होती है प्रशांत किशोर और अमित शाह के बीच एक राइवलरी की। अमित शाह से बदला लेने के लिए प्रशांत किशोर नीतीश कुमार से जाकर मिल जाते हैं। जो उस वक्त मोदी शाह
06:34
Speaker A
की जोड़ी के सबसे बड़े विरोधियों में से एक थे। अमित शाह को जवाब देने के लिए प्रशांत किशोर मोदी के विरोधी खेमे में शामिल हो गए। दिसंबर 2014 में प्रशांत दिल्ली में पहली बार नीतीश से मिलते हैं। प्रशांत ने पहली
06:45
Speaker A
शर्त रखी कि अगर आप मुझसे काम करवाना चाहते हैं तो जीतन राम मांझी को हटाकर खुद बिहार के मुख्यमंत्री बनिए। नीतीश ने प्रशांत की सलाह मान ली और फरवरी 2015 में जीतन राम मांझी को हटाकर फिर से मुख्यमंत्री बन जाते हैं।
06:58
Speaker A
कि नीतीश कुमार बिहार के अगले मुख्यमंत्री होंगे। नीतीश कुमार रविवार की शाम 5:00 बजे राजभवन में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। प्रशांत ने भी आईपक कंपनी को दोबारा से रिवाइव किया और 2015 में होने जा रही बिहार चुनाव के लिए नीतीश कुमार के प्रचार
07:13
Speaker A
का जिम्मा संभाल लिया। अब गुजरात की तरह ही बिहार में भी प्रशांत ने नीतीश के घर को अपना ऑफिस बना लिया। यह चुनाव नीतीश कुमार के लिए भी अग्नि परीक्षा की तरह थी। क्योंकि 2014 लोकसभा चुनावों में नीतीश
07:25
Speaker A
कुमार को मात्र दो सीटें आई थी। जबकि इससे पहले के चुनाव में उन्हें 20 सीटों पर जीत मिली थी। मोदी से निपटने के लिए नीतीश ने बिहार में अपने सबसे बड़े राजनीतिक विरोधी लालू यादव की आरजेडी और कांग्रेस से
07:37
Speaker A
गठबंधन कर लिया। जिन्हें मिलाकर बना महागठबंधन। शुरू में प्रशांत किशोर को डाउट था कि यह गठबंधन काम नहीं करेगा। प्रशांत का मानना था कि लालू नीतीश को गठबंधन का फेस और मुख्यमंत्री उम्मीदवार बनाने में रोड़ा अटकाएंगे। प्रशांत ने
07:51
Speaker A
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से संपर्क किया और उनसे कहा कि वे लालू को नीतीश की लीडरशिप स्वीकार करने के लिए मनाएं। सोनिया ने यही किया और लालू ने खुद नीतीश को मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित कर दिया। प्रशांत को लालू की यह पॉलिटिकल
08:04
Speaker A
मैच्योरिटी बहुत पसंद आई और गठबंधन को लेकर उनके मन में जो डाउट्स थे वो दूर हो जाते हैं। चुनाव के दौरान प्रशांत ने लालू और नीतीश के बीच मैसेंजर का काम किया और सीट बंटवारे जैसी चीजों में भी प्रशांत का
08:16
Speaker A
रोल रहा। 2015 के बिहार चुनाव में महागठबंधन ने बड़ी जीत दर्ज की। और नीतीश की जीत के हीरो प्रशांत किशोर। बिहार चुनावों में जीत के हीरो नितीश हैं। लेकिन नीतीश की जीत के हीरो है प्रशांत किशोर। ये जीत अमित शाह की हार थी। प्रशांत को इस
08:31
Speaker A
जीत का इनाम मिला। मुख्यमंत्री बनने के बाद जनवरी 2016 में नीतीश ने प्रशांत को अपना एडवाइजर नियुक्त कर दिया और उन्हें कैबिनेट रैंक दे दी। एडवाइजर के तौर पर प्रशांत को बिहार विकास मिशन के जरिए बिहार के विकास के लिए काम करना था। बिहार
08:46
Speaker A
के अलावा प्रशांत अब इलेक्शन स्ट्रेटजिस्ट के तौर पर भी काम कर रहे थे। उन्होंने अब बीजेपी की सबसे बड़ी विरोधी पार्टी यानी कांग्रेस पर फोकस करना शुरू कर दिया। गांधी परिवार भी बिहार में प्रशांत के काम से इंप्रेस हो रखा था। इसलिए प्रशांत को
09:00
Speaker A
2017 में आने वाले पंजाब और उत्तर प्रदेश चुनाव के लिए स्ट्रेटजी बनाने की जिम्मेदारी दे दी जाती है। प्रशांत का मानना था कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की तभी वापसी हो सकती है जब वह दलितों और मुस्लिमों के साथ-साथ ब्राह्मण वोट बैंक
09:13
Speaker A
का भी बड़ा हिस्सा अपनी तरफ ले आए। इसके लिए उन्होंने प्रस्ताव रखा कि प्रियंका गांधी को उत्तर प्रदेश में चुनाव प्रचार का चेहरा बनाया जाए। इस वक्त तक प्रियंका राजनीति में नहीं आई थी और गांधी परिवार इस पर फैसला टालता रहा। इसकी जगह कांग्रेस
09:27
Speaker A
ने एक दूसरी ब्राह्मण नेता यानी शीला दीक्षित को अपना मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित कर दिया। यह काम प्रशांत की मर्जी के खिलाफ था। शीला दीक्षित ने भी प्रशांत को भाव नहीं दिया क्योंकि उनकी नजर में कांग्रेस के अमित शाह गुलाम नबी आजाद थे
09:41
Speaker A
ना कि प्रशांत किशोर। प्रशांत किशोर ने प्रमोद तिवारी को यूपी कांग्रेस का चीफ बनाने की सलाह दी। लेकिन पार्टी हाईकमान ने इसे भी इग्नोर करके राज बब्बर को यूपी कांग्रेस का चीफ बना दिया। इन अड़चनों के बावजूद प्रशांत ने अपना कांग्रेस अभियान
09:56
Speaker A
शुरू कर दिया और चाय पर चर्चा की तरह ही खाट सभा का प्लान बनाया जिसमें राहुल गांधी को चारपाई पर बैठकर खुले में किसानों से चर्चा करनी थी। इस अभियान का मकसद था किसानों को कांग्रेस से जोड़ना। लेकिन देवरिया में हुई पहली सभा में लोकल
10:10
Speaker A
लोग चारपाई उठाकर ले जाते हैं और अगले दिन मीडिया में राहुल और किसानों के साथ उनकी चर्चा की जगह चारपाई की लूट सुर्खियों में थी। राहुल गांधी आए खाट सभा में और चले भी गए लेकिन उनकी खटिया खड़ी हो गई है। यहां
10:23
Speaker A
जो लोग आए थे वो खाट लेकर निकल पड़े हैं। यह घटना कांग्रेस और प्रशांत दोनों के लिए शर्मिंदा करने वाली थी। जहां भी राहुल की खाट सभा होती वहां लोग इस उम्मीद में जुटते कि सभा के बाद खाट उठाकर ले जाएंगे।
10:37
Speaker A
इस बीच कांग्रेस के पुराने नेता प्रशांत से इनसिक्योर होने लगे। प्रशांत किशोर अहमद पटेल और गुलाम नबी आजाद जैसे नेताओं के लिए पार्टी में कोई रूल नहीं देखते थे। लेकिन यह नेता सोनिया गांधी के करीबी थे। इन लोगों को प्रशांत पर भरोसा नहीं था और
10:51
Speaker A
सोनिया गांधी के मन में प्रशांत को लेकर डाउट डालने शुरू कर दिए। इसके पीछे एक बड़ा कारण प्रशांत की अपनी कोई आईडियोलॉजी ना होना भी था। कभी वे राइट विंग पार्टी यानी बीजेपी के लिए काम करते थे तो कभी
11:03
Speaker A
समाजवादी नीतीश के लिए। इसके कारण कांग्रेसियों को उन पर भरोसा नहीं था। प्रशांत किशोर ने पार्टी स्ट्रक्चर और ऑर्गेनाइजेशन में बड़े चेंजेस करने का ब्लूप्रिंट भी पेश किया था। लेकिन पार्टी की इंटरनल पावर स्ट्रगल के कारण उनका कुछ
11:17
Speaker A
भी नहीं हो सका और यह जो प्लान था वह रखा का रखा रह गया। पीपल एग्री एंड देन दे डोंट इंप्लीमेंट इट हैज़ नेवर हैपेंड बिफोर टू अस। सो दिस वास द कांग्रेस पार्टी नॉट इंप्लीमेंटिंग योर प्लांस। प्रशांत किशोर का कांग्रेस संगठन में
11:30
Speaker A
बदलाव करने का प्लान फेल हो जाता है। इस कारण प्रशांत को अपने प्लान बी पर शिफ्ट होना पड़ता है और उन्होंने कांग्रेस को समाजवादी पार्टी से गठबंधन और अखिलेश की लीडरशिप में चुनाव लड़ने के लिए तैयार कर लिया। गठबंधन के बाद प्रशांत ने राहुल
11:44
Speaker A
अखिलेश की जोड़ी की ब्रांडिंग शुरू कर दी। चुनाव प्रचार के दौरान यूपी के लड़के नारा दिया गया। इस नारे का मकसद स्थानीय बनाम बाहरी की बहस पैदा करके मोदी शाह को बाहरी दिखाना था। यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और
11:57
Speaker A
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी एक साथ एक ही मंच पर नजर आएंगे। दोनों दलों के बीच गठबंधन होने के बाद यह पहला मौका है। लेकिन यह कुछ काम नहीं आया और 403 विधानसभा सीटों में से कांग्रेस की केवल सात सीटें ही आती हैं। इस तरह प्रशांत का
12:10
Speaker A
पूरा एजेंडा फेल हो जाता है। हालांकि पंजाब में कांग्रेस जीत जाती है लेकिन इस जीत का एक बड़ा कारण कैप्टन अमरिंदर सिंह का करिश्मा था और बीजेपी अकाली दल की सरकार के खिलाफ 10 साल की एंटी इनकंबेंसी थी। उत्तर प्रदेश की हार प्रशांत किशोर के
12:26
Speaker A
रेजुमे पर एक काला धब्बा बन जाती है। इससे प्रशांत के बारे में इमेज बनी कि जहां भी उनके पास बेचने के लिए एक अच्छा प्रोडक्ट था जैसे मोदी हो चाहे नीतीश वो उसे बेचने में सफल रहे। लेकिन जहां ऐसा प्रोडक्ट
12:38
Speaker A
नहीं था और उन्हें एक पार्टी को जमीन से खड़ा करना था या जिताना था वहां पर वह कुछ नहीं कर पाए। इधर जुलाई 2017 में नीतीश ने महागठबंधन का साथ छोड़कर बीजेपी से हाथ मिला लिया तो एडवाइजर के तौर पर प्रशांत
12:51
Speaker A
का जो टेन्योर था वह भी यहीं खत्म हो गया। साल 2018 में हैदराबाद के इंडियन स्कूल ऑफ बिज़नेस आईएसबी में प्रशांत से पूछा गया कि उनकी आईडियोलॉजी क्या है? तो उन्होंने जवाब दिया सेंटर लेफ्ट लेकिन आईडियोलॉजी को लेकर अंधा नहीं होना चाहिए। आईडियोलॉजी
13:05
Speaker A
को लेकर इसी नॉन कमिटल एटीट्यूड को लेकर प्रशांत पर उनके पूरे करियर में सवाल उठते रहे हैं। उनके विरोधी कहते हैं कि प्रशांत की आईडियोलॉजी ना तो कोई सेंटर लेफ्ट है ना कोई राइट है ना राइट सेंटर है। उनकी
13:17
Speaker A
आईडियोलॉजी पैसा और पावर है। जो ज्यादा पैसा और पावर दे प्रशांत उसके लिए काम करने के लिए तैयार रहे। हैदराबाद के इस इवेंट में ही प्रशांत ने ऐलान किया कि वे चुनावी रणनीतिकार का काम छोड़ने वाले हैं। जब पूछा गया कि क्या वे अब कोई पार्टी
13:33
Speaker A
ज्वाइन करेंगे तो उन्होंने जवाब दिया कि वे बड़े नेताओं के साथ बहुत काम कर चुके हैं। अब वे जमीन पर लोगों के साथ काम करना चाहते हैं। लेकिन इस ऐलान के लगभग 1 महीने के बाद ही सितंबर 2018 में प्रशांत नीतीश
13:47
Speaker A
कुमार की जेडीयू में शामिल हो जाते हैं। एज इलेक्शन स्ट्रेटजी एक्सपर्ट प्रशांत किशोर जॉइ नीतीशस जेडीयू। प्रशांत के जेडीयू जाइन करने के बाद कहा जाने लगा कि वे अब पार्टी में नंबर दो हैं। नीतीश ने भी कहा कि प्रशांत भविष्य हैं। 1 महीने के
14:01
Speaker A
बाद ही प्रशांत को जेडीयू पार्टी का नेशनल वाइस प्रेसिडेंट बना दिया गया। इधर 2019 के लोकसभा चुनाव आ जाते हैं। इन चुनावों में भी जेडीयू और बीजेपी दोनों साथ थे। इन चुनावों में नरेंद्र मोदी की जीत होती है
14:14
Speaker A
और वे दोबारा से प्रधानमंत्री बन जाते हैं। अपने दूसरे कार्यकाल में मोदी सरकार नागरिकता संशोधन कानून यानी सीएए लेकर आती है। सिटीजनशिप अमेंडमेंट कानून प्रशांत ने नीतीश की चेतावनी देने पर भी बार-बार सीएए कानून की आलोचना की। उन्होंने कहा सीएए एनआरसी सरकार को एक ऐसा
14:34
Speaker A
लीगल हथियार देती है जिससे वे सिस्टमेटिकली धर्म के आधार पर लोगों को टारगेट कर सकते हैं। मतलब एनआरसी जहां तक है वो हम लोग उसके पक्ष में नहीं रहे हैं। उसके पक्ष में नहीं है। एनआरसी ना लागू हो।
14:45
Speaker A
प्रशांत ने नीतीश को भी एक पत्र लिखा जिसमें उनसे एनआरसी पर अपना स्टैंड क्लियर करने के लिए कहा। इससे प्रशांत और नीतीश के बीच मतभेद बढ़ जाते हैं। प्रशांत ने यह भी दावा किया कि नवंबर 2019 में हुई एक
14:57
Speaker A
पार्टी मीटिंग में नीतीश ने कहा था कि बीजेपी ने उन्हें ह्यूमिलिएट किया है यानी अपमानित किया है। इन कारणों से प्रशांत और नीतीश के बीच की दरार और बढ़ जाती है। जनवरी 2020 में नीतीश कुमार ने प्रशांत किशोर को अपनी पार्टी से निकाल दिया। द
15:13
Speaker A
जेडीयू हैज़ एक्सप्ट एस पोल स्ट्रेटजिस्ट प्रशांत किशोर एंड पार्टी से निकाले जाने पर प्रशांत ने कहा कि नीतीश उनके लिए पिता समान है और उन्हें एक बेटी की तरह रखा इसलिए वे उनके इस फैसले पर सवाल नहीं उठाएंगे लेकिन
15:25
Speaker A
उन्होंने बीजेपी के साथ हाथ मिलाने के लिए नीतीश पर सवाल जरूर उठाया। प्रशांत ने कहा कि नीतीश अक्सर कहते थे कि वे गांधी, जेपी और लोहिया को धोखा नहीं देंगे। वो गांधी के चंपारण आने के 100 साल पूरे होने के
15:38
Speaker A
मौके पर ऐसे लोगों के साथ मिलकर सरकार चला रहे थे जो गडसे की फिलॉसफी मानते हैं। नीतीश जी हमेशा यह कहते रहे हैं कि गांधी, जेपी और लोहिया इन तीन को और इनकी बताई हुई बातों को हम नहीं छोड़ सकते हैं। मेरे
15:53
Speaker A
मन में यह जो दुविधा रही है कि आप गोडसे के साथ खड़े हुए लोग या गोडसे की विचारधारा को सहमति देने वाले लोग उनके साथ भी कैसे खड़े हो सकते थे?
16:06
Speaker A
इंटरेस्टिंगली प्रशांत किशोर उस मनीष कश्यप को हंसते-हंसते अपनी पार्टी में शामिल करा लेते हैं जो गॉडसे को मानने की बात करता था और गांधी को गाली देता था। प्रशांत के आरोपों के जवाब में नीतीश कुमार ने कई बार आरोप लगाया कि वे बीजेपी
16:20
Speaker A
और अमित शाह के आदमी हैं। नीतीश ने दावा किया कि अमित शाह ने ही उन्हें दो बार कॉल करके प्रशांत किशोर को पार्टी में शामिल करने के लिए कहा था। वो आया कैसे भाई? हमको अमित शाह जी कहे
16:31
Speaker A
ज्वाइन कराइए जाइन करें। हालांकि प्रशांत इससे इंकार करते रहे हैं और नीतीश पर झूठ बोलने का आरोप लगाते रहे हैं। साल 2020 में ही प्रशांत ने कांग्रेस से दोबारा संपर्क किया और कहा कि उनके पास एक प्लान है जिससे 2024 लोकसभा चुनाव में पार्टी को
16:47
Speaker A
मदद मिलेगी। लेकिन इस बार कांग्रेस से बात आगे नहीं बढ़ सकी। मार्च अप्रैल 2021 में प्रशांत ने पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस यानी टीएमसी का चुनाव प्रचार संभाला। यह प्रशांत के करियर का पीक था। चुनाव से
17:02
Speaker A
लगभग 4 महीने पहले ही उन्होंने Twitter पर ऐलान कर दिया कि मीडिया कितनी भी हाइप बनाए बीजेपी बंगाल में डबल डिजिट क्रॉस नहीं करेगी और अगर करती है तो वह यह काम छोड़ देंगे। प्रशांत का यह कॉन्फिडेंस सही
17:16
Speaker A
साबित हुआ। बीजेपी की मात्र 77 सीटें आती हैं। यानी 100 से काफी कम। इस सक्सेस के बाद प्रशांत किशोर दोबारा से कांग्रेस के चक्कर लगाने लगते हैं। प्रशांत ने राहुल और प्रियंका गांधी के साथ चार बैठकें की। मार्च 2021 में प्रशांत पंजाब के
17:31
Speaker A
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के प्रिंसिपल एडवाइजर बन जाते हैं। हालांकि उन्होंने कभी यह पद जॉइन नहीं किया। अगस्त 2021 में प्रशांत ने इस पद से इस्तीफा दे दिया। इस समय यह आशंकाएं जताई जाने लगी कि प्रशांत ऑफिशियली कांग्रेस को ज्वाइन करने
17:46
Speaker A
वाले हैं। द प्रशांत किशोर मीटिंग वि द गांधीज़ वाज़ नॉट जस्ट बिनेस एस यूजुअल अबाउट स्टेट इलेक्शंस बट अबाउट पीके प्लेइंग सम काइंड ऑफ़ बिगर रोल विद इन द कांग्रेस। कांग्रेस के साथ बातचीत के बीच अक्टूबर 2021 में
17:58
Speaker A
प्रशांत ने गोवा चुनाव में टीएमसी की मदद की। यहां हुई एक प्राइवेट मीटिंग का एक वीडियो लीक हो जाता है। जिसने प्रशांत को एक बड़े विवाद में ला दिया। इस विवाद में प्रशांत किशोर कह रहे हैं कि चाहे चुनाव
18:10
Speaker A
हारे या जीतें। बीजेपी अगले कई दशक तक भारतीय राजनीति का केंद्र रहेगी। वैसे ही जैसे आजादी के बाद के 40 साल कांग्रेस रही थी। यह सोचने की भूल ना करें कि लोग नाराज हो रहे हैं और मोदी को बाहर कर देंगे। अगर
18:22
Speaker A
वह मोदी को बाहर कर भी देंगे तो भी बीजेपी कहीं जाने वाली नहीं है। बीजेपी इज़ नॉट गोइंग एनीवेयर। दे आर गोइंग टू बी हियर। यू हैव टू फाइंड इट आउट फॉर नेक्स्ट मेनी डिकेड्स। इट्स नॉट गोइंग इन हर।
18:34
Speaker A
इस वायरल वीडियो में प्रशांत राहुल गांधी को टारगेट करते हुए दिखे। राहुल को लेकर उन्होंने कहा राहुल गांधी की सबसे बड़ी दिक्कत यही है कि शायद उन्हें लगता है कि कुछ वक्त की बात है और लोग खुद ही मोदी को
18:45
Speaker A
हटा देंगे। यह नहीं होने वाला। राहुल गांधी प्रोब्ली ही थिंक इट्स जस्ट इट्स जस्ट मैटर ऑफ़ टाइम व्हेन पीपल विल थ्रोइंग अवे। दैट्स नॉट हैपनिंग। इसी तरह प्रशांत की कंपनी आईपैक ने तेलंगाना चुनाव में टीआरएस के साथ कॉन्ट्रैक्ट कर लिया।
18:59
Speaker A
टीएमसी की तरह टीआरएस भी कांग्रेस की विरोधी पार्टी थी। इससे कांग्रेस के अंदर प्रशांत को लेकर भरोसे की कमी पैदा हुई जो आगे चलकर बड़ी बाधा बनने वाली थी। अप्रैल 2022 में प्रशांत किशोर और कांग्रेस की लीडरशिप के बीच फाइनल राउंड की मैराथन
19:13
Speaker A
मीटिंग होती है। प्रशांत ने कांग्रेस के रिवाइवल के लिए एक ब्लूप्रिंट तैयार किया जिसमें शामिल था ऊपर से लेकर नीचे तक संगठन को पूरी तरह बदलना। कांग्रेस वर्किंग कमेटी यानी कि सीडब्ल्यूसी के लिए चुनाव कराना, जमीन पर काम करने वाले लॉयल
19:28
Speaker A
वर्कर्स को अहमियत देना और उन्हें डिसीजन मेकिंग में शामिल करना। देश भर में बड़ी मेंबरशिप ड्राइव चलाना और बीजेपी और हिंदुत्व के खिलाफ एक आइडियोलॉजिकल काउंटर नैरेटिव तैयार करना। प्रशांत का यह भी मानना था कि कांग्रेस को रिवाइव करने के
19:42
Speaker A
लिए उस मंडली को खत्म करना होगा जो गांधी परिवार की करीबी है। प्रशांत ने अपनी प्रेजेंटेशन में कांग्रेस के रिवाइवल और साल 2024 के लोकसभा चुनाव को लेकर कुल 21 प्रपोजल्स रखे जिनमें से 18 पर सहमति बन जाती है। लेकिन तीन पर बात नहीं बनी। जिन
19:59
Speaker A
चीजों पर मतभेद थे उनमें से एक था ब्लूप्रिंट को इंप्लीमेंट कैसे किया जाए। प्रशांत चाहते थे कि वे सीधे कांग्रेस अध्यक्ष को रिपोर्ट करेंगे और उन्हें पार्टी के फॉर्मल स्ट्रक्चर से बाहर रखा जाए ताकि वे फ्रीली काम कर सकें। लेकिन
20:13
Speaker A
कांग्रेस ने उन्हें फ्री हैंड देने से इंकार कर दिया। पार्टी ने उन्हें एक एंपावर्ड एक्शन ग्रुप यानी ईएजी में शामिल होने को कहा जो पार्टी की नई डिसीजन मेकिंग बॉडी थी। प्रशांत ने ऐसा करने से इंकार कर दिया और कांग्रेस और उनकी बातचीत
20:28
Speaker A
यहीं पर समाप्त हो जाती है। प्रशांत किशोर ऑफ कोर्स वांटेड फुल कंट्रोल ऑफ द कांग्रेस बिफोर 2024 बट द कांग्रेस इंस्टेड जस्ट ऑफर्ड हिम अ सीट ऑन दिस एम्पावर्ड ग्रुप दैट दे हैड अनाउंस्ड यस्टरडे एंड कांग्रेस से बातचीत खत्म होने के बाद
20:41
Speaker A
प्रशांत ने ऐलान किया कि वे मुद्दों को अच्छे से समझने के लिए रियल मास्टर्स यानी कि लोगों के पास जाएंगे। इस तरह 2 अक्टूबर 2022 को प्रशांत ने अपनी जन स्वराज यात्रा का ऐलान कर दिया। जिसमें वे 665 दिन तक
20:55
Speaker A
पैदल चलकर बिहार के हजारों गांव गए। बिहार को बिहार में जो स्थिति है बदलना चाहिए कि नहीं? आवाज उठाकर बोलिए। इस वक्त प्रशांत अपनी यात्रा पर ही फोकस कर रहे थे। लेकिन तभी 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान ही एक दिन अचानक से वह
21:11
Speaker A
मीडिया के सामने आते हैं और बड़े कॉन्फिडेंस से दावा करते हैं कि चुनाव में बीजेपी की 2019 की 303 सीटों के बराबर या उससे ज्यादा सीटें आएंगी। मोर और लेस जो पिछले लोकसभा में आउटगोइंग लोकसभा में 303 का था वही नंबर या उससे
21:26
Speaker A
कुछ बेहतर उससे कुछ बेहतर होगा। उससे खराब नहीं होगा। ऐसा मुझे लगता है। इस चुनाव के पीछे उनका लॉजिक था कि किसी भी पावरफुल सरकार को गिराने के लिए कुछ बड़ा गुस्सा होना जरूरी है और मोदी के खिलाफ कोई बड़ा गुस्सा नहीं है। प्रशांत
21:40
Speaker A
ने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल में भी बीजेपी सीटों के मामले में नंबर वन पार्टी बनेगी यानी टीएमसी से आगे जाएगी। दे कुड बी वेरी वेल नंबर वन इन बंगाल। यू वुड बी लॉट ऑफ़ यू वुड बी सरप्राइज बट
21:52
Speaker A
बीजेपी विल इन ऑल लाइकलीहुड टू माय माइंड बीजेपी इस गोइंग टू इमर्ज एस नंबर वन पार्टी इन इन वेस्ट बंगाल। वहीं योगेंद्र यादव जैसे बड़े नाम दावा कर रहे थे कि बीजेपी की 260 से ज्यादा सीटें नहीं आएंगी। इसके कारण सवाल उठे कि आखिर
22:06
Speaker A
प्रशांत ने अचानक से सामने आकर यह दावा क्यों किया और क्या वो अपने पुराने मास्टर यानी कि मोदी के लिए माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। प्रशांत के विरोधियों ने आरोप लगाते हुए कहा कि बीजेपी चुनाव हार रही है
22:19
Speaker A
और इसलिए नैरेटिव बनाने के लिए उन्हें मैदान में उतारा गया है। यानी कि प्रशांत को मैदान में उतारा गया है। जन स्वराज यात्रा को लेकर भी यह सवाल उठ रहे थे कि प्रशांत के पास आखिर अपनी यात्रा के लिए
22:30
Speaker A
इतना पैसा कहां से आ रहा है? जय बिहार। जय जय आरोप लगा कि बीजेपी स्ट्रेटजी के तहत उन्हें फंड कर रही है और वे बीजेपी की आईडियोलॉजी को फॉलो करते हैं। सीनियर जर्नलिस्ट करण थापर ने जब एक इंटरव्यू में
22:47
Speaker A
प्रशांत से पूछा कि उन्होंने 2022 में कहा था कि हिमाचल चुनाव में कांग्रेस की बड़ी हार होगी लेकिन कांग्रेस जीत गई तो इस सवाल पर प्रशांत भड़क गए। उन्होंने करण थापर को चैलेंज दिया कि वह इसका वीडियो प्रूफ दिखा दें तो वह राजनीति छोड़ देंगे।
23:01
Speaker A
इस पर करण थापर ने कई न्यूज़ आर्टिकल्स दिखाए। लेकिन प्रशांत ने यह कहकर उन्हें खारिज कर दिया कि अखबार कुछ भी लिख सकते हैं। इफ आई हैव सेड दैट कांग्रेस विल बी राउटेड इन हिमाचल इन 2022 आई एम सेइंग ऑन कैमरा
23:15
Speaker A
ऑन रिकॉर्ड दैट आई क्विट व्हाट आई डू। 20 मई 2022 का प्रशांत का यह ट्वीट देखिए। इसमें प्रशांत कह रहे हैं कि हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की हार होगी। प्रशांत यहीं पर नहीं रुके। इंटरव्यू के बाद जब उन्हें ट्रोल किया गया तो उन्होंने एक
23:29
Speaker A
ट्वीट करते हुए कहा कि जो चुनावों के नतीजों के उनके आकलन से परेशान हैं उन्हें 4 जून को खूब सारा पानी अपने पास रखना चाहिए। 4 जून को 2024 लोकसभा इलेक्शन के रिजल्ट आने वाले थे। 1 जून को लगभग सभी
23:43
Speaker A
एग्जिट पोल्स में एनडीए की 400 और बीजेपी की लगभग 350 सीटें दिखाई जाने लगी। इससे प्रशांत ने कॉन्फिडेंस में आकर कहा कि अगली बार चुनाव और राजनीति की बात हो तो अपना कीमती वक्त खाली बैठे फर्जी पत्रकार, बड़बोले नेताओं और सोशल मीडिया के
23:59
Speaker A
विशेषज्ञों की फिजूल की बातों और विश्लेषण पर बर्बाद मत करना। जब नतीजे आए तो प्रशांत की कही बातें उन पर उल्टी पड़ जाती हैं। बीजेपी की मात्र 240 सीटें आती हैं। कहां 400 और कहां 200 यानी सरकार बनाने के लिए भी बीजेपी के पास पूर्ण
24:15
Speaker A
बहुमत नहीं था। भाजपा को गठबंधन करके सरकार बनानी पड़ी और कहां प्रशांत दावा कर रहे थे कि भाजपा की 2019 की 303 सीटों के बराबर आएंगी या इससे ज्यादा सीटें ऐसा लगता है मैं बार-बार कह रहा हूं कि
24:28
Speaker A
बीजेपी के नंबर मोर और लेस जो पिछले लोकसभा में आउटगोइंग लोकसभा में 303 का था वही नंबर या उससे कुछ बेहतर उससे कुछ बेहतर होगा उससे खराब नहीं होगा ऐसा मुझे लगता है। इधर बंगाल को लेकर भी प्रशांत की
24:43
Speaker A
भविष्यवाणी गलत साबित हुई। बंगाल में बीजेपी नंबर वन पार्टी तो नहीं बनी उल्टा उसकी सीटें 2019 के मुकाबले घटकर केवल 12 लोकसभा सीटें रह गई। वहीं टीएमसी की 29 सीटें आई। बी वेरी वेल नंबर वन इन बंगाल। यू वुड बी
24:58
Speaker A
लॉट ऑफ यू वुड बी सरप्राइज बट बीजेपी विल इन ऑल लाइकलीहुलीहुड टू माय माइंड बीजेपी इस गोइंग टू इमर्ज एस नंबर वन पार्टी इन इन वेस्ट बंगाल। इन नतीजों के बाद फिर से सवाल उठने लगे कि क्या प्रशांत किशोर से
25:09
Speaker A
सच में जमीनी स्थिति को पढ़ने में कहीं कोई दिक्कत हुई है या फिर वे बीजेपी के लिए माहौल बनाने का काम कर रहे थे। 2 अक्टूबर 2024 के दिन प्रशांत किशोर ने अपनी पार्टी लांच कर दी जिसका नाम रखा गया
25:22
Speaker A
जन स्वराज पार्टी। 2 अक्टूबर का दिन गांधी जयंती के कारण चुना गया। 7 जुलाई 2025 के दिन प्रशांत ने यूबर मनीष कश्यप को जन स्वराज पार्टी में शामिल करा लिया। प्रशांत ने मनीष कश्यप की खूब तारीफ की और
25:35
Speaker A
कहा कि मनीष बिहार के बेटे हैं। आप लोग मनीष कश्यप की भूमिका छोटी देख रहे हैं। मनीष कश्यप की भूमिका एमएलए बनने की नहीं है। मनीष कश्यप की भूमिका उससे बहुत बड़ी है। वो तो रास्ता है। वो तो बाय
25:47
Speaker A
प्रोडक्ट है। प्रशांत किशोर के जन स्वराज के झंडे में गांधी हैं। लेकिन अगर मनीष कश्यप की यह वीडियो देखें तो आप जान जाएंगे कि वे कितने बड़े गांधीवादी हैं। मौत पे जो है हम लोग गांधी के मौत पे हम
25:58
Speaker A
लोग जश्न मनाते हैं। हम लोग बोल रहे हैं। अब वो डर खत्म। डर खत्म। भारत प्रशांत की पार्टी जन स्वराज मुस्लिमों से नफरत करने के खिलाफ है और भाईचारे में यकीन रखती है। लेकिन मनीष कश्यप के वीडियोस कुछ और कहते हैं। मनीष की वीडियोस
26:12
Speaker A
के इन टॉपिक्स को देखिए। नमाज के बाद ही क्यों हो रहे हैं देश में दंगे? यूपी में बुलडोजर किसी के नहीं सुन रहा। कैसे मस्जिद को तोड़ रहा? अपराधी मुस्लिम तो कानून गुस्ताखी माफ करें। हिंदू सच बोले तो सर तन का नारा लगे। दिसंबर 2024 में
26:27
Speaker A
मनीष कश्यप ने ट्वीट करते हुए कहा कि भारत का मुस्लिम कभी इस देश के लिए वफादार नहीं हो सकता। ऐसे ढेरों ट्वीट्स मनीष कश्यप करता रहा है। बिहार में हुए उपचुनाव में भी जन स्वराज के चार में से तीन
26:38
Speaker A
उम्मीदवारों के खिलाफ किडनैपिंग और अटेमप्ट टू मर्डर जैसे सीरियस क्रिमिनल केसेस थे। लेकिन प्रशांत किशोर को ऐसे उम्मीदवारों से कोई दिक्कत नजर नहीं आ रही। प्रशांत का पूरा पॉलिटिकल करियर इसी तरह के विरोधाभासों यानी कंट्राडिक्शन से भरा पड़ा है। प्रशांत तेजस्वी यादव को
26:55
Speaker A
लालू यादव का बेटा कहकर वंशवाद पर सवाल उठाते हैं। लेकिन खुद वाईएसआर कांग्रेस के वाई एस जगन मोहन रेड्डी के लिए काम कर चुके हैं। जिनके पिता वाई एस राजशेखर रेड्डी दो बार के मुख्यमंत्री रहे। ऐसे ही प्रशांत एम के स्टालिन के लिए काम कर चुके
27:10
Speaker A
हैं। जिनके पिता करुणानिधि मुख्यमंत्री रहे। प्रशांत ने लालू प्रसाद यादव पर करप्शन के आरोप लगाए हैं। लेकिन जगन मोहन रेड्डी पर 31 से अधिक भ्रष्टाचार के मामले दर्ज होने के बावजूद प्रशांत ने उन्हें चुनाव जिताने के लिए अपनी पूरी टीम लगा
27:23
Speaker A
दी। प्रशांत आज मुस्लिमों के सपोर्ट के लिए सेुलर होने का दावा करते हैं। लेकिन उन नरेंद्र मोदी को जिताने में वे दिन रात काम करते रहे जिनकी राजनीतिक शुरुआत ही मुस्लिम विरोध से शुरू हुई। इन सब उदाहरणों पर यही कहा जा सकता है कि या तो
27:38
Speaker A
प्रशांत किशोर इन तथ्यों से अनजान थे या वे सब उनके लिए इंपॉर्टेंट नहीं रहा। बहरहाल प्रशांत किशोर की स्टोरी यहीं पर समाप्त होती है। हमने उनके अचीवमेंट्स और उनके फेलियर को बड़ी ही निष्पक्षता के साथ बताने की कोशिश की है। बिना कोई
27:53
Speaker A
पूर्वाग्रह रखे। अगर आपको हमारे एफर्ट्स में ईमानदारी लगती है तो हमारी वीडियो को शेयर करें। तीन चीजें करना ना भूलें। एक लाइक, एक कमेंट और एक सब्सक्राइब। नमस्कार
Topics:प्रशांत किशोरबिहार चुनावनरेंद्र मोदीनीतीश कुमारराजनीतिक रणनीतिगुजरात चुनावअमित शाहमहागठबंधनआईपैक3D टेलीकास्ट

Get More with the SozAI App

Transcribe recordings, audio files, and YouTube videos — with AI summaries, speaker detection, and unlimited transcriptions.

Or transcribe another YouTube video here →