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Why No One Can Stop Kim Jong Un? | The Secret World of North Korea

यह वीडियो नॉर्थ कोरिया की सख्त हुकूमत, कानून, और किम जोंग उन की सत्ता को समझाता है।

Key Takeaways

  • नॉर्थ कोरिया में सरकार का पूर्ण नियंत्रण है जो नागरिकों की हर गतिविधि को नियंत्रित करती है।
  • किम जोंग उन की सत्ता तीन पीढ़ियों से परिवार में बनी हुई है।
  • परमाणु हथियारों के कारण अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने नॉर्थ कोरिया पर सैन्य कार्रवाई नहीं की।
  • देश में इंटरनेट और मीडिया पर सख्त प्रतिबंध हैं, जिससे जनता की आजादी सीमित है।
  • आर्थिक संकट के बावजूद सरकार ने प्योंग यांग को एक मॉडल शहर के रूप में विकसित किया है।

What the video covers

  • नॉर्थ कोरिया में सरकार हर पहलू पर कड़ी निगरानी रखती है, जैसे खानपान, फैशन, और मीडिया।
  • किम जोंग उन की सत्ता तीन पीढ़ियों से चल रही है, जिसमें दादा, पिता और अब पोता शामिल हैं।
  • देश में इंटरनेट, सोशल मीडिया, और मोबाइल फोन पर सख्त पाबंदियां हैं।
  • शिक्षा मुफ्त है और फौजी सेवा अनिवार्य है, लेकिन व्यक्तिगत आजादी सीमित है।
  • सरकार मीडिया और मनोरंजन पर पूर्ण नियंत्रण रखती है और विदेशी सामग्री पर प्रतिबंध है।
  • अमेरिका और पश्चिमी देशों ने नॉर्थ कोरिया के परमाणु कार्यक्रम के कारण कोई सैन्य कार्रवाई नहीं की।
  • देश की आर्थिक स्थिति सोवियत संघ के टूटने के बाद खराब हुई, जिससे बिजली और खाद्य संकट पैदा हुआ।
  • प्योंग यांग को सरकार ने एक आदर्श समाजवादी शहर के रूप में प्रस्तुत किया है, जहां अमीर लोग रहते हैं।
  • नॉर्थ कोरिया में कड़ी सजा और तीन पीढ़ियों तक परिवार को दंडित करने की नीति लागू है।
  • वीडियो में नॉर्थ कोरिया की रहस्यमय और नियंत्रित दुनिया की गहराई से जानकारी दी गई है।

Answers

Questions about this video

नॉर्थ कोरिया में लोगों की आजादी पर क्या पाबंदियां हैं?

नॉर्थ कोरिया में सरकार लोगों के खानपान, फैशन, बाल कटवाने, इंटरनेट, मोबाइल फोन और मीडिया पर सख्त नियंत्रण रखती है। यहां सोशल मीडिया और विदेशी फिल्मों पर प्रतिबंध है।

किम जोंग उन की सत्ता कैसे बनी हुई है?

किम जोंग उन की सत्ता तीन पीढ़ियों से परिवार में है, पहले उनके दादा किम इल संग, फिर पिता किम जोंग इल, और अब वे खुद देश के सुप्रीम लीडर हैं।

अमेरिका और पश्चिमी देशों ने नॉर्थ कोरिया के खिलाफ सैन्य कार्रवाई क्यों नहीं की?

नॉर्थ कोरिया के परमाणु हथियार होने और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक जटिलताओं के कारण अमेरिका और पश्चिमी देशों ने अब तक कोई सैन्य कार्रवाई नहीं की है।

Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:01
Speaker A
जरा तसवुर करें एक ऐसे मुल्क का, जहां हुकूमत यह तय करती है कि आप क्या खाएंगे, क्या पहनेंगे, बाल कैसे कटवाएंगे, किताब कौन सी पढ़ेंगे। जहां खवातीन के फैशन और लिपस्टिक के कलर तक का फैसला हुकूमत करती है। जहां मोबाइल फोन और कंप्यूटर तो हो,
00:18
Speaker A
लेकिन इंटरनेट और सोशल मीडिया की इजाजत ना हो। जहां हर शख्स की निगरानी की जाती हो। और जहां हुकूमत के किसी भी उसूल के खिलाफ वर्जन की सजा सिर्फ एक शख्स को नहीं बल्कि उसकी तीन नस्लों को भुगतनी पड़ती है।
00:33
Speaker A
जी हां, आप सही समझे। यह कोई और मुल्क नहीं बल्कि दी वन एंड ओनली नॉर्थ कोरिया है। आज की इस वीडियो में हम आपको बताएंगे कि ढाई करोड़ से ज्यादा आबादी रखने वाले इस मुल्क को दुनिया की सबसे बड़ी जेल क्यों
00:49
Speaker A
कहते हैं। यहां कौन-कौन से हैरतअंगेज और चौंका देने वाले कानून हैं जिन पर सबको लाजमी अमल करना पड़ता है और हम बहुत से जहनों में गर्दिश करने वाले इस सवाल का जवाब भी देंगे कि एटमी ताकत होने और
01:02
Speaker A
इंसानी हुकूक की इंतहाई बदतरीन सूरत हाल के बावजूद अमेरिका और मगरबी मुल्कों ने ईरान और इराक की तरह इसके खिलाफ अब तक कारवाई क्यों नहीं की?
01:13
Speaker A
आगे बढ़ने से पहले हमारे चैनल को सब्सक्राइब जरूर कर लें और वीडियो को लाइक भी कीजिएगा। तो चलिए चलते हैं नॉर्थ कोरिया और एक्सप्लोर करते हैं वहां की अजीबोगरीब दुनिया को। 17 दिसंबर 2021 को नॉर्थ कोरिया के सदर
01:29
Speaker A
किम जोंग उनके वालिद किम जोंग इल की 10वीं बरसी थी। हुकूमत ने 11 दिन के शोक का ऐलान किया और साथ ही एक अनोखी पाबंदी लगा दी। हंसने पर पाबंदी। [हौसला बढ़ाने की आवाज़] इन 11 दिनों के दौरान मुल्क भर में किसी को भी हंसने की
01:44
Speaker A
इजाजत नहीं थी। सिर्फ यही नहीं बल्कि यह पाबंदी भी थी कि इस दौरान ना तो कोई शादी करेगा, ना सालगिरह मनाएगा, ना कहीं घूमने जाएगा, ना शॉपिंग करेगा। यहां तक कि अगर किसी के घर में मौत हो जाए तो जोर-जोर से
01:58
Speaker A
रोने की इजाजत भी नहीं होगी। घर वाले मयत की आखिरी रस्मात भी 11 दिन बाद अदा कर सकेंगे। क्योंकि किम जोंग उनके वालिद की बरसी ज्यादा इंपॉर्टेंट है। और हां, शोक के दिनों में हर कोई रोएगा बल्कि धाड़े
02:11
Speaker A
मार मार कर रोएगा। जिसको रोना नहीं आया उसकी मुल्क से वफादारी मशकूक हो जाएगी और सजा मिलेगी। दूसरी आलमी जंग के बाद जब जापान का कोरिया पर से कब्जा खत्म हुआ तो अमेरिका और सोवियत यूनियन ने कोरिया को दो हिस्सों
02:28
Speaker A
में बांट दिया। सदर्न एरिया अमेरिका के ज़र असर चला गया और वह साउथ कोरिया कहलाया। जबकि नॉर्दर्न एरिया पर सोवियत यूनियन ने अपना असर डाला और वह नॉर्थ कोरिया कहलाता है। जापान के खिलाफ गोरिल्ला वार लड़ने वाले लीडर किम इल संग
02:42
Speaker A
नॉर्थ कोरिया के पहले सुप्रीम लीडर बने। उसके बाद उनका बेटा किम जोंग इल और अब उनका पोता किम जोंग उन यानी 1948 में मिलने वाली आजादी के बाद से अब तक वहां सिर्फ एक ही खानदान के इन तीन अफराद की
02:56
Speaker A
हुकूमत चली आ रही है। यानी पहले दादा, फिर बेटा और अब पोता। अब जरा इस सेटेलाइट इमेज को देखें। साउथ कोरिया और चीन के दरमियान जो आपको अंधेरा नजर आ रहा है, यह नॉर्थ कोरिया है। अंधेरा इसलिए है कि एक तो यहां बिजली की कमी है।
03:13
Speaker A
दूसरा यह कि लोगों को रात देर तक पढ़ने और टीवी देखने की इजाजत नहीं। तो इसलिए लोग रात को बत्ती बुझाकर जल्दी सो जाते हैं। एक जमाना था जब यह मुल्क तरक्की में चीन और भारत से भी आगे था। वहां के हर शहरी को
03:26
Speaker A
तालीम, सेहत, रिहाइश और ट्रांसपोर्ट जैसी सहूलतें मुफ्त मिलती थीं। और यह ज्यादा पुरानी बात नहीं। 80 के दशक तक यह सब कुछ था। मगर फिर सोवियत यूनियन टूट गया। सोवियत यूनियन नॉर्थ कोरिया को सस्ता तेल और खुराक देता था। सस्ता तेल बंद हुआ तो
03:42
Speaker A
मुल्क के बड़े-बड़े बिजली घरों पर ताले लग गए। मुफ्त की बिजली इस्तेमाल करने वालों को बिजली महंगे दामों मिलने लगी। खुराक की भी कमी हो गई। अमेरिका ने मदद की पेशकश की मगर शर्त रखी कि अपना एटमी प्रोग्राम बंद
03:55
Speaker A
करो। नॉर्थ कोरिया ने इंकार कर दिया। अमेरिका ने पाबंदियां लगा दीं। यूं मुसीबत और बढ़ गई। लेकिन नॉर्थ कोरिया के कैपिटल प्योंग योंग को देखें तो बिल्कुल नहीं लगता कि यह एक गरीब मुल्क का शहर है। क्योंकि हुकूमत ने
04:08
Speaker A
दुनिया के सामने इसे एक मिसाली सोशलिस्ट शहर के तौर पर पेश करने की कोशिश की है। इसके लिए यहां से सारे गरीब लोगों को निकाल दिया गया है और यहां सिर्फ अमीर और खुशहाल लोग ही रहते हैं। महंगाई और गरीबी
04:21
Speaker A
के बावजूद यहां तालीम अब भी मुफ्त है। हाई स्कूल तक तालीम सबके लिए लाजमी है। अगर कोई बच्चा स्कूल ना जाए तो वालदैन को सजा दी जाती है। 17 साल की उम्र से हर शहरी को चाहे वो लड़का हो या लड़की फौज में लाजमी
04:36
Speaker A
सर्विस करनी पड़ती है। मर्द कम से कम 10 साल और औरतें 7 साल लाजमी सर्विस करती हैं। यहां खाना भी हुकूमत की मर्जी से खाया जाता है। जैसा कि हॉट डॉग अमेरिकी फूड है। इसलिए इस पर पाबंदी है। इसी तरह
04:49
Speaker A
साउथ कोरिया की कुछ डिशें पकाना भी मना है। हेयर स्टाइल भी हुकूमत की मर्जी के ही बनवाने पड़ते हैं। मर्दों के लिए तकरीबन 10 और खवातीन के लिए 18 हेयर स्टाइल हुकूमत ने तजवीज किए हैं। आप उनमें से कोई
05:02
Speaker A
भी एक चुन सकते हैं। लेकिन खबरदार सदर किम जोंग उनके स्टाइल वाली हेयर कटिंग आपने नहीं करानी क्योंकि उसकी इजाजत नहीं। हत्ता कि उनके डिजाइन वाला चश्मा भी कोई और नहीं पहन सकता। बालों को डाई करने पर
05:16
Speaker A
मुकम्मल पाबंदी है। लड़कियों को वेस्टर्न स्टाइल के टाइट कपड़े, छोटी स्कर्ट और धूप से बचाने वाली बड़ी टोपियां पहनने की इजाजत नहीं। रेड लिपस्टिक लगाना भी मना है। मेकअप को भी वेस्टर्न कल्चर समझा जाता है। इसलिए सिर्फ बहुत हल्का और लिमिटेड
05:31
Speaker A
मेकअप ही अलाउ किया जाता है। ब्रांडेड कपड़े, नीली जींस, फटी हुई या तंग जींस पहनना भी सख्ती से मना है। क्योंकि इसे भी बाहर के कल्चर का हिस्सा समझा जाता है। इन सारी चीजों पर नजर रखने के लिए वहां फैशन
05:43
Speaker A
पुलिस घूमती रहती है और जो खिलाफवर्जी करता नजर आता है उसे पकड़ लिया जाता है। मोबाइल फोन पर भी सख्त पाबंदियां हैं। मोबाइल फोन से इंटरनेशनल कॉल नहीं की जा सकती। स्मार्टफोन के ऑपरेटिंग सिस्टम भी वह नहीं जो हम और आप इस्तेमाल करते हैं।
05:59
Speaker A
वहां के मोबाइल फोन के लिए ऑपरेटिंग सिस्टम हुकूमत ने अपने हिसाब से डिजाइन किया है। वो कुछ इस तरह से बनाया गया है कि मोबाइल फोन चलते-चलते अचानक खुद ही स्क्रीनशॉट लेकर हुकूमत को भेज देता है ताकि यह मालूम हो सके कि बंदा इस वक्त
06:14
Speaker A
मोबाइल फोन पर क्या कर रहा था। मोबाइल फोन में कोई ऐप स्टोर नहीं होता। अगर कोई ऐप डाउनलोड करनी है तो मकसूस सरकारी स्टोर पर जाना पड़ता है। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि वह ऐप गवर्नमेंट से अप्रूव्ड हो।
06:27
Speaker A
स्मगलशुदा मोबाइल फोन या वीपीएन वाला फोन पकड़ा जाए तो सख्त सजा मिलती है। नॉर्थ कोरिया में इंटरनेट का इस्तेमाल भी बहुत लिमिटेड है। उसकी जगह लोग इंटरनेट यूज करते हैं। यह हुकूमत का अपना तैयार करदा इंटरनल नेटवर्क है। इसमें सिर्फ
06:44
Speaker A
हुकूमत की सिलेक्टेड वेबसाइट्स होती हैं। और यह इंटरनेट सर्विस भी इतनी महंगी है कि आम आदमी इसे अफोर्ड ही नहीं कर सकता। अगर किसी को इंटरनेट की जगह इंटरनेट लाजमी इस्तेमाल करना है तो इसके लिए उसे हुकूमत से स्पेशल परमिशन लेनी पड़ती है और वह
07:00
Speaker A
परमिशन भी 1 घंटे की होती है। इजाजत मिलने के बाद किसी खास मकाम पर वो कंप्यूटर इस्तेमाल कर सकता है। इस दौरान इसके दाएं और बाएं दो सरकारी अफराद इसकी निगरानी कर रहे होते हैं। हर 5 मिनट बाद कंप्यूटर रुक
07:14
Speaker A
जाता है और उसे दोबारा चलाने के लिए निगरानी करने वाले के फिंगरप्रिंट की जरूरत होती है। अगर किसी वजह से 1 घंटे से ज्यादा के लिए इंटरनेट इस्तेमाल करना पड़ जाए तो हुकूमत से फिर इजाज़त लेना पड़ती है। यहां Facebook, Instagram, Twitter या
07:28
Speaker A
Netflix जैसी किसी चीज का तस्सवुर तक नहीं। सोशल मीडिया तो है मगर हुकूमत का अपना बनाया हुआ। यहां पर आपको हुकूमत के अपने इन्फ्लुएंसर्स मिलेंगे। जो मुल्क को एक खूबसूरत, कामयाब और खुशहाल सोशलिस्ट स्टेट के तौर पर पेश करते हैं। कंटेंट
07:44
Speaker A
बहुत सोच समझ कर तैयार किया जाता है ताकि लोग अपने मुल्क से मोहब्बत करें और उस पर फक्र महसूस करें। मीडिया मुकम्मल तौर पर हुकूमत के कंट्रोल में है। प्राइवेट न्यूज़ चैनल या निजी अखबारों का वहां कोई तसवुर नहीं। सरकारी मीडिया हर वक्त हुकूमत
07:59
Speaker A
के नजरियात और प्रोपेगेंडे को फैलाने में लगा रहता है। मौजूदा और पिछले लीडरों की तारीफें की जाती हैं। खबरों, ड्रामों यहां तक के कार्टूनों में भी हुकूमत की वाहवाही करना लाजमी है। किम जोंग उन को एक हीरो या देवता की तरह
08:16
Speaker A
पेश किया जाता है। अगर आप वहां का कोई न्यूज़ चैनल देखें, या कोई अखबार पढ़ें, तो आपको लगेगा जैसे नॉर्थ कोरिया से ज्यादा आजाद और खुशहाल दुनिया में कोई और मुल्क है ही नहीं। तफरीही सरगर्मियां भी हुकूमत के कंट्रोल में हैं। गैर मुल्की
08:32
Speaker A
फिल्में या ड्रामे देखने की इजाजत नहीं। इसे बहुत बड़ा जुर्म समझा जाता है। अगर कोई शख्स पकड़ा जाए तो उसे सख्त सजा दी जाती है। इंटरनेशनल मीडिया के मुताबिक हॉलीवुड या साउथ कोरिया की फिल्में या ड्रामे देखने पर तो सजाए मौत तक दे दी
08:47
Speaker A
जाती है। इसके बावजूद साउथ कोरिया के ड्रामे और फिल्में स्मगल होकर किसी न किसी तरह यहां पहुंच ही जाती हैं और मकामी ब्लैक मार्केट में मिल जाती हैं। उन दिनों जब लोग यह फिल्में वीसीआर या डीवीडी प्लेयर पर देखते थे तब हुकूमत लोगों को
09:03
Speaker A
पकड़ने के लिए अचानक बिजली बंद कर देती थी। बिजली बंद होने से वीडियो कैसेट या डीवीडी प्लेयर में फंस जाती थी और सरकारी अहलकार अचानक घरों में घुसकर डीवीडी और प्लेयर चेक करते थे कि लोग क्या देख रहे
09:17
Speaker A
थे। अब यूएसबी की वजह से लोगों के लिए छुपाना आसान हो गया है। लेकिन फिर भी वह बहुत एहतिय
09:30
Speaker A
हैं। ताकि आसपड़ोस में किसी को पता ना चले कि वो गैर मुल्की फिल्में देख रहे हैं। रेलवे और बस स्टेशन पर म्यूजिक नहीं बल्कि किम खानदान की तकरीरें चलाई जाती हैं। और इस दौरान किसी को एक दूसरे से बात या शोर
09:45
Speaker A
करने की इजाजत नहीं होती। पासपोर्ट सिर्फ किम जोंग उनके करीबी लोगों और सरकारी अफसरों को मिलता है। आम लोग ख्वाब में भी मुल्क से बाहर नहीं निकल सकते। मुल्क तो छोड़े एक शहर से दूसरे शहर जाने के लिए भी
09:59
Speaker A
हुकूमत की इजाजत दरकार होती है। यह तक बताना पड़ता है कि आप वहां क्यों जा रहे हैं? कितना अरसा रहेंगे? कहां रुकेंगे?
10:07
Speaker A
अगर किसी ने छुपकर मुल्क छोड़ने की कोशिश की तो उसे गद्दारी समझा जाता है। ऐसी सूरत में सिर्फ उसे ही नहीं बल्कि उसके पूरे खानदान को सजा दी जाती है जिसमें उम्र कैद भी हो सकती है और सजा-ए-मौत भी।
10:22
Speaker A
शुमाली कोरिया में एक अनह्यूमन क्लास सिस्टम है जिसे सॉन्ग बंद कहते हैं। इसमें तीन दर्जे हैं। पहला दर्जा कोर कहलाता है जो आला तबका है और इसमें वो लोग होते हैं जिनके बड़ों ने शुमाली कोरिया के इंकलाब में हिस्सा लिया या जूबी कोरिया के खिलाफ
10:38
Speaker A
जंगे लड़ी। उन्हें बेहतरीन नौकरियां। फौज में आला ओदे बयांग योंग में रहने की इजाजत, गाड़ियां और दीगर सहूलतें मिलती हैं। उनकी तादाद कुल आबादी का 25 से 30% है। दूसरा दर्जा है बेवरिंग। यह दरमियाना तबका है। इसमें वो लोग आते हैं जिनके बाप
10:54
Speaker A
दादा ना बहुत वफादार थे ना गद्दार। उन्हें दरमियाने दर्जे की सहूलतें मिलती है। यह कुल आबादी का 50% हैं। तीसरा और सबसे कमतर दर्जा है हॉस्टाइल। यह वो तबका है जिनके बाप दादा या तो किसी मजहब से ताल्लुक रखते
11:09
Speaker A
थे या जूबी कोरिया में उनका कोई रिश्तेदार था। इन्हें घटिया दर्जे की नौकरियां दी जाती हैं। इन पर नजर भी ज्यादा रखी जाती है। वेस्टर्न वर्ल्ड और वेस्टर्न मीडिया किम जोंग उनकी गवर्नमेंट को एक क्रिमिनल नेटवर्क भी करार देती है। उनका कहना है कि
11:24
Speaker A
नॉर्थ कोरियन सरकार असलहा, मनुष्यात, जाली करेंसी और साइबर क्राइम के जरिए हर साल तकरीबन $ अरब डॉलर कमाती है और यह सारी रकम किम जोंग उनके अकाउंट में चली जाती है। वैसे तो इस मुल्क का पूरा नाम डेमोक्रेटिक पीपल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया
11:40
Speaker A
है। मगर रियलिटी में यहां डेमोक्रेसी नहीं है। ऐसा नहीं है कि वहां इलेक्शन नहीं होते। होते हैं। बिल्कुल होते हैं और हर 5 साल बाद होते हैं। लेकिन वहां सियासी जमात एक ही है। वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया जिसके
11:54
Speaker A
चेयरमैन किम जोंग उन खुद हैं। वोट देना सबके लिए लाजमी है। जो उस दिन घर से ना निकले उसे गद्दार समझा जाता है और सजा भुगतनी पड़ती है। इलेक्शन में हर हल्के से सिर्फ एक उम्मीदवार खड़ा होता है। वोटर को
12:07
Speaker A
सिर्फ हां या ना पर मोहर लगानी होती है। वोटिंग खुफिया नहीं होती बल्कि हां और नहीं वालों के लिए अलग-अलग बूथ बनाए जाते हैं। खौफ का यह आलम है कि कोई भी नहीं वाले बूथ में नहीं जाता और हर इलेक्शन में
12:20
Speaker A
सक्सेस का रेश्यो 99.99 होता है। 0.01% नहीं वाले नहीं होते बल्कि वो होते हैं जो बेचारे बुढ़ापे या बीमारी की वजह से वोट देने नहीं आ सकते। यहां सदर यानी प्रेसिडेंट का ओहदा 1998 में खत्म कर दिया गया। अब वहां प्रेसिडेंट ऑफ द स्टेट
12:39
Speaker A
अफेयर्स का ओहदा है और यह सबसे बड़ा सरकारी ओहदा है। मार्च 2026 में नॉर्थ कोरिया की सुप्रीम पीपल्स असेंबली के इजलास में तीसरी बार प्रेसिडेंट ऑफ द स्टेट अफेयर का चुनाव किया गया है। किम जोंग उन ना मुल्क के सदर
12:55
Speaker A
हैं और ना वजीर आजम। उसके बावजूद वह मुल्क के सब कुछ हैं। फौज के सुप्रीम कमांडर भी, रूलिंग पार्टी के चेयरमैन भी और मुल्क के लीडर भी। वो 8 जनवरी 1984 को पैदा हुए। 1 मिनट। यह तो वो तारीख है जो अमेरिका बताता
13:10
Speaker A
है। साउथ कोरियन इंटेलिजेंस 1983 कहती है। जबकि खुद नॉर्थ कोरिया 1982 बताता है। यानी किम की लाइफ की तरह उनकी डेट ऑफ बर्थ भी कंट्रोवर्शियल है। 2011 में बाप के इंतकाल पर 27, 28 या 29 साल की उम्र में
13:26
Speaker A
मुल्क के रूलर भी बन गए और अपनी फौज के भी। हालांकि उन्हें फौजी मामलात का तजुर्बा बिल्कुल नहीं था। उनके बारे में यह भी कहा जाता है कि उन्होंने अपनी शक्ल अपने दादा जैसी बनाने के लिए सर्जरी करवाई
13:38
Speaker A
है। उनके दादा किम इलसंग आवाम में एक ताकतवर और बा असर शख्सियत के तौर पर जाने जाते थे। इसलिए किम जोंग उन चाहते थे कि वह भी अपने दादा की तरह नजर आए ताकि आवाम उन्हें एक मजबूत और ताकतवर शख्सियत समझे।
13:53
Speaker A
नॉर्थ कोरिया की गवर्नमेंट दूसरे क्लेमों की तरह इस क्लेम को भी रद्द कर देती है और कहती है कि किम की शक्ल नेचुरली अपने दादा जैसी है। बहुत कम लोग जानते हैं कि नॉर्थ कोरिया में जमीन के नीचे पूरी एक दुनिया आबाद है
14:09
Speaker A
और यह इतनी खुफिया है कि इसके बारे में वहां के आम शहरियों को भी नहीं पता। इस जगह का नाम है कंग डोंग वीआईपी कॉम्प्लेक्स। यह एक इंतहाई लग्जरी रिहााइशी इलाका है और उसे वीआईपी इसलिए कहा जाता है कि यहां सिर्फ आला हुकूमती
14:24
Speaker A
शख्सियात या उनके मेहमानों को आने की इजाजत है। यहां किम जोंग उनका आलीशान महल भी है। इसलिए यह इंतहाई हाई सिक्योरिटी ज़ोन है और आम आदमी यहां आने का सोच भी नहीं सकता। इसमें अंडर ग्राउंड गाड़ियां भी चलती हैं और ट्रेन भी। यहां रिहाइशी
14:40
Speaker A
इमारतें भी हैं और गेस्ट हाउस भी। बागात भी हैं और झीलें भी। फुटबॉल का ग्राउंड भी है और घोड़ों का अस्तबल भी। यहां सुरंगों का एक बहुत बड़ा नेटवर्क भी है। नॉर्थ कोरिया से भागकर आने वाले यानी डिफेक्टर
14:53
Speaker A
तो क्लेम करते हैं कि उन सुरंगों में से कुछ चीन तक जाती हैं। किम जोंग उन दफ्तर से निकलकर लिफ्ट के जरिए इस अंडरग्राउंड कॉम्प्लेक्स में जा सकते हैं और फिर वहां से गाड़ी में बैठकर खुफिया रास्तों के
15:06
Speaker A
जरिए कहीं भी सफर कर सकते हैं। और दुनिया का बड़े से बड़ा सेटेलाइट भी उनकी मूवमेंट का पता नहीं लगा सकता। वहां एक सड़क तो ऐसी है जिसके बारे में किसी को नहीं पता कि यह कहां जाकर खत्म होती है। इसीलिए
15:19
Speaker A
मगरबी मीडिया इसे अ रोड टू नोवेयर कहता है। खैर यह खुफिया दुनिया किम जोंग उनके वालिद ने बनवाई थी। किम जोंग उन ने अपने बचपन का काफी अरसा इसी कॉम्प्लेक्स में गुजारा क्योंकि उन दिनों उन पर सख्त पाबंदियां थी। उनके साथ खेलने वाले उनकी
15:35
Speaker A
तरह के बच्चे नहीं थे बल्कि 30-40 साल के सिक्योरिटी गार्ड होते थे। लेकिन उनकी जिंदगी का एक दूसरा एंगल भी है जिसमें उन्होंने वेस्टर्न वर्ल्ड में तालीम हासिल की। वो स्विट्जरलैंड गए। इस दौरान उन्होंने यूरोप में एक अमीर बच्चे की तरह
15:50
Speaker A
जिंदगी का लुत्फ भी उठाया। मगर वो यूरोप में अपनी तालीम मुकम्मल ना कर सके। सिर्फ 17 साल की उम्र में उन्हें वापस नॉर्थ कोरिया बुला लिया गया। और फिर 10 साल बाद वो दुनिया में सख्त डिक्टेटरशिप रखने वाले मुल्क के सरबराह बन
16:05
Speaker A
गए। उनकी अहलिया रिसोल जू मुल्क की मशहूर गुलुकारा थी। किम जोंग उन सिर्फ पब्लिक ही नहीं बल्कि अपनी हुकूमत के बड़े-बड़े ओहदेदारों को भी नहीं बख्शते। उनकी किसी भी बात को ना मानना या मीटिंग के दौरान उनके सामने सो
16:20
Speaker A
जाना मौत को दावत देने के बराबर है। कहा जाता है कि मई 2015 में एक मीटिंग के दौरान डिफेंस मिनिस्टर को नींद आ गई। इस जुर्म पर उसे सबके सामने गोली मार दी गई। किम जोंग उन पर यह इल्जाम भी लगाया जाता
16:34
Speaker A
है कि उन्होंने अपने खानदान के कई अफराद को सख्त सजाएं दिलवाई। दिसंबर 2013 में उनके फूफा को रियासत के खिलाफ साजिशें करने के इल्जाम में सजा-ए-मौत दे दी गई। यह भी मशहूर है कि 13 फरवरी 2017 को उन्होंने अपने सौतेले भाई को हुकूमत से
16:49
Speaker A
इख्तलाफ रखने पर मलेशिया के क्वालालमपुर एयरपोर्ट पर कत्ल करा दिया था। किम जोंग उन वैसे तो अपनी सेहत का बहुत ख्याल रखते हैं मगर मोटापे पर कंट्रोल करना उनके लिए शायद मुश्किल है। इसकी वजह है पनीर। उन्हें पनीर इतना पसंद है कि उनके लिए हर
17:05
Speaker A
साल बड़ी मिकदार में पनीर बाहर से मंगवाया जाता है। यह भी कहा जाता है कि नॉर्थ कोरिया एक एथिस्ट और एंटी रिलीजन स्टेट है। किसी भी मजहब पर अमल करने या इसकी तब्लीक करने पर सख्त पाबंदी है। अगर कोई
17:18
Speaker A
किसी रिलीजन पर अमल करता हुआ पकड़ा जाए तो सजा सिर्फ मौत है। शुमाली कोरिया में किम खानदान को ही मजहबी हैसियत हासिल है। इसके लिए एक खास आईडियोलॉजी जोशे बनाई गई है। इस आईडियोलॉजी में खासतौर पर किम जोंग
17:33
Speaker A
उनके दादा किम इलसंग और बाप किम जोंग इल को सेंट्रल पोजीशन दी गई है। इन दोनों की तस्वीरें और स्टैचू हर घर हर दफ्तर हर स्कूल यहां तक के हर आवामी मकामात पर लाजमी लगाए जाते हैं। पुलिस अचानक छापा
17:48
Speaker A
मारकर चेक कर सकती है। अगर किसी घर या दफ्तर वगैरह में उनकी तस्वीर ना मिले तो उनके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाता है। हम रिलीजन की बात कर रहे थे तो जैसा कि मैंने पहले कहा कि कैपिटल पियांग यांग एक शोकेस
18:03
Speaker A
की तरह है तो वहां थोड़ी रिलीजियस फ्रीडम है। वहां पांच चर्च हैं और एक मस्जिद है जो अल रहमान मस्जिद कहलाती है। यह मस्जिद ईरान की एंबेसी में बनाई गई है। बाकी मुसलमान मुल्कों के सिफारतखानों का स्टाफ भी यहीं आकर नमाज पढ़ता है। टूरिज्म की
18:19
Speaker A
बात करें तो अव्वल तो कोई गैर मुल्की टूरिस्ट वहां जाता नहीं और अगर कोई भूला भटका चला भी जाए तो एयरपोर्ट पर ही उसकी अच्छी तरह छानपटक की जाती है। उसके फोन में मौजूद एक-एक चीज को सख्ती से चेक किया
18:31
Speaker A
जाता है कि कहीं इसमें शुमाली कोरिया के खिलाफ कोई चीज तो नहीं। अगर ऐसा हुआ तो फोन रख लिया जाता है और टूरिस्ट को वापस भेज दिया जाता है। यहां एक और दिलचस्प बात बताऊं। नॉर्थ कोरिया का कैलेंडर भी बाकी
18:45
Speaker A
दुनिया से अलग कर दिया गया था। 1997 में हुकूमत ने जियोशिया आईडियोलॉजी के मुताबिक एक कैलेंडर इंट्रोड्यूस कराया था। इसकी शुरुआत 1912 से हुई जो किम इल संग की पैदाइश का साल है। इस हिसाब से 2024 में वहां साल 113 चल रहा था। मगर 2024 में इस
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Speaker A
कैलेंडर को खत्म करके 2025 से दोबारा इसी ग्रेगोरियन कैलेंडर पर वापस आना पड़ा जो सारी दुनिया में चल रहा है। नॉर्थ कोरिया में इतनी पाबंदियों और सख्ती की वजह से बहुत से लोग वहां से फरार होने की कोशिश
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Speaker A
करते हैं। कुछ लोग पकड़े जाते हैं और कुछ लोग किसी ना किसी तरह वहां से निकल कर दूसरे मुल्क में पनाह लेने में कामयाब हो जाते हैं। वो अपने साथ खुफिया तौर पर ऐसी वीडियोस, तस्वीरें या डॉक्यूमेंट्स ले
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Speaker A
जाते हैं, जिनसे नॉर्थ कोरिया के बारे में बहुत सी बातें दुनिया को पता चलती हैं। 2017 में नॉर्थ कोरिया ने दुनिया को चौंका दिया। दरअसल इस साल उसने एक ऐसा एटमी मिसाइल तैयार कर लिया था जो उसके सबसे
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Speaker A
बड़े दुश्मन अमेरिका तक को निशाना बना सकता था। मगरबी मीडिया के मुताबिक किम जोंग उनके पास कम से कम 40 एटमी मिसाइल हैं और वह एक नए खुफिया हथियार की तैयारी के करीब हैं। जो वेस्ट के लिए पहले से
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Speaker A
ज्यादा खतरा बन सकता है। यह सीक्रेट वेपन है 3000 टन की एक सबमैरिन जिसको ट्रेस करना बहुत मुश्किल है। यह अटलांटिक ओशियन में पहुंचकर लॉस एंजेलस जैसे बड़े शहरों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। मगरबी मीडिया के नजदीक यह सबमरीन दुनिया के लिए
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Speaker A
एक नया और सीरियस थ्रेट है। यहां एक बहुत बड़ा सवाल पैदा होता है और यह सवाल यकीनन आपके जहन में भी होगा कि जब अमेरिका और यूरोपीय मुालिक ईरान और इराक पर सिर्फ एटमी हथियारों का शक होने पर हमला कर देते
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Speaker A
हैं तो फिर इन्हें नॉर्थ कोरिया की एटमी टेक्नोलॉजी और वहां ह्यूमन राइट्स की खुली खिलाफवर्ियां क्यों नजर नहीं आती? वो क्यों नॉर्थ कोरिया के खिलाफ कोई कारवाई नहीं करते? इसका सीधा और बहुत आसान जवाब यह है कि शुमाली कोरिया, ईरान या इराक
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Speaker A
नहीं। उसके पास एटमी हथियार भी हैं और अमेरिका तक पहुंचने वाले एटमी मिसाइल भी। इसलिए वो जानते हैं कि इसके खिलाफ कोई भी फौजी कारवाई खतरनाक साबित हो सकती है। नॉर्थ कोरिया पर हमला ना करने की दूसरी वजह इसकी ज्योग्राफी है। इसकी सरहद
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Speaker A
डायरेक्ट चीन और रूस जैसी ताकतों से मिलती हैं। इसके खिलाफ कोई भी फौजी कार्रवाई इन दोनों मुल्कों के लिए भी खतरा बन सकती है। अगर ऐसा हुआ तो यह दोनों भी मैदान जंग में कूद सकते हैं। और फिर वो जंग शुरू हो सकती
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Speaker A
है जिसे संभालना अमेरिका और उसके साथियों के लिए मुश्किल हो जाएगा। इसलिए फिलहाल इस पर दबाव डालकर और पाबंदियां लगाकर काम चलाया जा रहा है। अच्छा हां एक और बात ईरान और इराक की तरह शुमाली कोरिया के पास
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Speaker A
तेल या गैस के बड़े जखाय भी नहीं है। शायद इसीलिए अमेरिका इस मामले में कुछ खास दिलचस्पी नहीं ले रहा। किम जोंग उन जानते हैं कि उनका मुल्क बैरूनी दुनिया से कट चुका है। अमेरिकी पाबंदियों की वजह से
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Speaker A
इकॉनमी मुश्किल का शिकार है। आवाम को खानेपीने और दूसरी जरूरी चीजों की कमी का सामना है। वो यह भी जानते हैं कि उन्हें अपने लोगों को बेसिक सहूलतें देनी होंगी और उसके लिए इंटरनेशनल आइसोलेशन और पाबंदियों के जाल से निकलना होगा क्योंकि
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Speaker A
अगर ऐसा ना किया तो उनके इकरदार को खतरा भी हो सकता है। यही सोचकर 2018 में उन्होंने एक अहम कदम उठाया। वो बतौर सरबराह जिंदगी में तीसरी बार मुल्क से बाहर निकले और अमेरिकी सदर डोनाल्ड ट्रंप से सिंगापुर में तारीखी
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Speaker A
मुलाकात की और फिर एक हीरो की तरह वापस आए। आवाम को यह मैसेज दिया कि उनका लीडर दुनिया के ताकतवर तरीन मुल्क के सरबराह के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा होना जानता है। एक्सीलेंट रिलेशनशिप थैंक यू। उसके बाद दुनिया के और भी लीडर मुलाकात के
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Speaker A
लिए आगे आए। जैसा कि चीन के सदर शी जिंगपिन, रूस के सदर व्लादमीर प्यूटन। इससे यह भी साबित हुआ कि नॉर्थ कोरिया भले एक गरीब मुल्क है मगर एटमी हथियार की वजह से दुनिया में उसकी इज्जत है। फरवरी 2019 में किम जोंग ने ढाई हजार मील
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Speaker A
का सफर करके वियतनाम का रुख किया। वहां सदर ट्रंप के साथ एक अहम मुलाकात की। मकसद था नॉर्थ कोरिया पर पाबंदियों का खात्मा कराना। किम जोंग को यकीन था कि मुयदा हो जाएगा। उन्होंने ट्रंप को ऑफर की कि वह
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Speaker A
अपने मुल्क के सबसे बड़े एटमी मरकज को बंद करने पर तैयार हैं। बदले में उनके मुल्क पर लगी पाबंदियां खत्म की जाए। लेकिन सदर ट्रंप इस तरह के अधूरे मुआयदे पर राजी ना हो। उनका मुतालबा था कि शुमाली कोरिया
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Speaker A
अपने एटमी प्रोग्राम का मुकम्मल खात्मा करें। किम जोंग ने इंकार कर दिया और फिर अचानक खामोशी छा गई और मुलाकात नाकामी पर खत्म हो गई। कहा जाता है कि इस नाकामी पर किम जोंग ने अपने तीन आला अफसरों को फांसी
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Speaker A
दे दी थी। यह जाहिर करने के लिए कि वह मुयदा ना होने पर कितने नाराज हैं। वेस्टर्न मीडिया के मुताबिक इस नाकामी के बाद किम जोंग उन दोबारा उस खौफ और दहशत के निजाम की तरफ लौट आए जो तीन नस्लों से
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Speaker A
उनके खानदान ने कायम कर रखा है। बहरहाल नॉर्थ कोरिया में यह हालात 1948 से चले आ रहे हैं और कोई नहीं जानता कि सख्त डिक्टेटरशिप के यह दिन अभी मजीद कितनी नस्लों को बर्दाश्त करने पड़ेंगे। किम जोंग उन भी दो मुख्तलिफ दुनियाओं के
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Speaker A
दरमियान फंसे हुए हैं। एक तरफ उनके पास्ट की सख्त कम्युनिस्ट रिवायत हैं और दूसरी तरफ एक जदीद और काबिले कबूल रहनुमा बनने की जरूरत है। यही उनका सबसे बड़ा मसला है कि आया वह एक नरम और बेहतर हुक्मरान बनकर
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Speaker A
सामने आए या फिर इसी सख्त निजाम को जारी रखें जो उन्हें अपने बाप और दादा से मिला है। आपका क्या ख्याल है? नॉर्थ कोरिया दुनिया के बाकी मुल्कों जैसा बन पाएगा या नहीं कमेंट में जरूर बताइएगा। ओम
Topics:नॉर्थ कोरियाकिम जोंग उनपरमाणु हथियारसत्ता नियंत्रणइंटरनेट प्रतिबंधफैशन पाबंदीशिक्षाफौजी सेवासरकारी मीडियाअंतरराष्ट्रीय राजनीति

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