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Dark Web AlphaBay Story: The 25-Year-Old Genius Who Made the Silk Road Look Like a Joke

अलेग्जेंडर काजेस की अल्फाबे मार्केट की कहानी, जो सिल्क रोड से भी बड़ी और खतरनाक थी। डार्क वेब की सबसे बड़ी ब्लैक मार्केट का उदय और पतन।

Key Takeaways

  • डार्क वेब पर गैरकानूनी व्यापार सिल्क रोड के बाद भी जारी रहा और अल्फाबे ने इसे नया आयाम दिया।
  • विश्वसनीयता और सुरक्षा के कारण अल्फाबे ने तेजी से लोकप्रियता हासिल की।
  • क्रिप्टो करेंसी की ट्रैकिंग से बचने के लिए मोनेरो जैसी प्राइवेसी कॉइन्स का इस्तेमाल हुआ।
  • अलेग्जेंडर का लालच और दिखावा अंततः उसकी गिरफ़्तारी और मार्केट के पतन का कारण बना।
  • डार्क वेब की दुनिया में कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए पकड़ना बेहद चुनौतीपूर्ण है।

What the video covers

  • 5 जुलाई 2017 को थाईलैंड में 25 वर्षीय अलेग्जेंडर काजेस को एफबीआई और थाई पुलिस ने गिरफ्तार किया।
  • अलेग्जेंडर ने डार्क वेब की सबसे बड़ी मार्केट अल्फाबे बनाई, जो सिल्क रोड से 10 गुना बड़ी थी।
  • सिल्क रोड के बंद होने के बाद डार्क वेब पर कई नई मार्केट्स आईं, लेकिन उनमें से ज्यादातर एग्जिट स्कैम थीं।
  • अल्फाबे ने मजबूत सुरक्षा, 24 घंटे कस्टमर सपोर्ट और विवाद निपटान की सुविधा देकर यूजर्स का भरोसा जीता।
  • अल्फाबे पर ड्रग्स, चोरीशुदा क्रेडिट कार्ड, हैकिंग टूल्स, असलहे और पोर्नोग्राफी समेत कई गैरकानूनी वस्तुएं बिकती थीं।
  • अलेग्जेंडर ने बिटकॉइन की ट्रैकिंग से बचने के लिए मोनेरो क्रिप्टो करेंसी और टंबलर का इस्तेमाल किया।
  • अल्फाबे पर 2017 तक 4 लाख से ज्यादा यूजर्स और 400 से ज्यादा विक्रेता थे, रोजाना करोड़ों डॉलर का कारोबार होता था।
  • अलेग्जेंडर ने अपनी पहचान छुपाने के लिए थाईलैंड शिफ्ट होकर कई देशों की नागरिकता और बैंक अकाउंट्स बनाए।
  • अल्फाबे के अचानक बंद होने और अलेग्जेंडर की गिरफ्तारी के बाद एफबीआई ने इसे खुदकुशी करार दिया, लेकिन मौत पर संदेह बरकरार है।
  • यह कहानी डार्क वेब के सबसे बड़े डिजिटल क्राइम इम्पायर के उदय और पतन की है, जो हॉलीवुड फिल्मों से भी रोमांचक है।

Answers

Questions about this video

अल्फाबे मार्केट क्या थी और इसे किसने बनाया?

अल्फाबे डार्क वेब की सबसे बड़ी और खतरनाक ब्लैक मार्केट थी, जिसे 25 वर्षीय कनाडियन अलेग्जेंडर काजेस ने बनाया था। यह सिल्क रोड से भी बड़ी थी।

अल्फाबे ने सिल्क रोड से कैसे अलग काम किया?

सिल्क रोड पर कुछ प्रतिबंध थे जैसे चोरीशुदा क्रेडिट कार्ड और चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर पाबंदी, जबकि अल्फाबे में कोई नियम नहीं थे और यह एक सुपर मार्केट की तरह था जहाँ हर प्रकार का गैरकानूनी सामान बिकता था।

अलेग्जेंडर काजेस को आखिर क्यों और कहाँ गिरफ्तार किया गया?

अलेग्जेंडर को 5 जुलाई 2017 को थाईलैंड के बैंकॉक में एफबीआई, डीईए और थाई पुलिस ने गिरफ्तार किया क्योंकि वह अल्फाबे का मालिक था और डार्क वेब पर सबसे बड़ा ड्रग लॉर्ड माना जाता था।

Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:02
Speaker A
5 जुलाई 2017, थाईलैंड का दल हुकूमत बैंकॉक एक लग्जरी विला में बैठा 25 साल का यह कनाडियन लड़का दिखने में तो एक आम सा क्रिप्टो इन्वेस्टर था। महंगी गाड़ियां चलाता और हर जगह ऐश करता, लेकिन उसके लैपटॉप में एक ऐसा राज छुपा था जिसकी तलाश
00:20
Speaker A
पूरी दुनिया को थी। पुलिस को, इंटरपोल को, बल्कि [संगीत] एफबीआई को भी थी क्योंकि वह था इंटरनेट की खौफनाक दुनिया डार्क वेब की सबसे बड़ी और सबसे खतरनाक मार्केट अल्फा बे का अकेला मालिक। नाम था अलेग्जेंडर काजेस, कोड नेम अल्फा 02।
00:39
Speaker A
उसके पास थी बदनाम जमाना सिल्क रोड से भी 10 गुना बड़ी ब्लैक मार्केट दुनिया। तो समझ रही थी कि सिल्क रोड का फाउंडर पकड़ा गया है तो डार्क वेब हमेशा के लिए मर जाएगी, लेकिन नहीं। अल्फाबे सिल्क रोड से भी कहीं
00:53
Speaker A
बड़ी और ज्यादा खतरनाक डिजिटल एंपायर थी। जहां रोजाना लाखों डॉलर की ड्रग्स, चोरीशुदा क्रेडिट कार्ड, हैकिंग टूल, बल्कि असलहा और पोर्नोग्राफी तक बिकती थी। ये एंपायर कैसे बनी और इसे खत्म करने के लिए शुरू किए गए ऑपरेशन बॉयनेट में क्या कुछ
01:09
Speaker A
हुआ? ये कहानी ऐसी है कि हॉलीवुड की बड़ी से बड़ी फिल्म को भी पीछे छोड़ जाए। आए, आज इंकलाब पर डार्क वेब के नए बादशाह के राइज एंड फॉल की कहानी सुनते हैं और बताते हैं कि सिर्फ एक ईमेल आईडी ने कैसे इसकी पूरी
01:24
Speaker A
सल्तनत का खात्मा किया। मगर उससे पहले हमारी वीडियो को लाइक और चैनल को अभी सब्सक्राइब कर लीजिए। अक्टूबर 2013, सान फ्रांसिस्को की एक लाइब्रेरी में वो वाकया पेश आया जिसके बाद दुनिया ने सुख का सांस लिया। एफबीआई ने
01:44
Speaker A
सिल्क रोड के बानी रॉस उल्बिक को अपने लैपटॉप के साथ नंगे हाथों पकड़ा और फिर दुनिया को बताया कि सिल्क रोड को हमेशा के लिए बंद कर दिया गया है और अब कोई इंटरनेट पर ड्रग नहीं बेच सकेगा। इसकी डिटेल्ड
01:56
Speaker A
स्टोरी आप डार्क वेब से मुतालिक हमारी इस वीडियो में देख सकते हैं। तो रॉस उल्बिक की गिरफ्तारी से ऐसा लगा जैसे डिजिटल ड्रग ट्रेड का चैप्टर हमेशा के लिए बंद हो गया है। लेकिन क्या वाकई ऐसा हो सकता है? क्या
02:08
Speaker A
एक वेबसाइट के बंद होने से लाखों खरीदार और बेचने वाले अचानक गायब हो सकते थे? वो खामोश बैठ सकते थे जिन्हें घर बैठे ड्रग्स और इललीगल चीजें बेचने और खरीदने की लत लग चुकी हो? बिल्कुल नहीं। सिल्क रोड बंद
02:22
Speaker A
होने से डार्क वेब खत्म नहीं हुई। बल्कि उल्टा उसकी सबसे ज्यादा मार्केटिंग हुई। जिन्हें पहले डार्क वेब का नाम भी नहीं पता था, उन्हें भी पता चल गया। डिमांड और बढ़ गई, बल्कि कई गुना बढ़ गई और बिजनेस का
02:35
Speaker A
रूल है, जब डिमांड होगी तो सप्लाई भी लाजमन होगी। डार्क वेब वैसे भी हमारी तरह का आम इंटरनेट नहीं है, वहां कोई वेबसाइट वैसे काम नहीं करती जैसे हमारे सामने करती है। ड्रग मेथोडोलॉजी से एक मिसाल लाएं तो यह
02:48
Speaker A
हाइड्रा की तरह है। आप एक सर काटो, उसके दो नए सर निकल आएंगे। इसलिए सिल्क रोड बंद होने के बाद जो वैक्यूम पैदा हुआ, ट्रक डीलरों के पास जो करोड़ों डॉलर का माल था और खरीदारों की जेबों में जो मिलियंस ऑफ
03:01
Speaker A
डॉलर की क्रिप्टो करेंसी थी, सबको बस एक नई मार्केट की जरूरत थी। कई वेबसाइटें सामने आई भी। किसी ने सिल्क रोड 2.0 का नाम रखा तो कोई एवोल्यूशन और अगोरा के नाम से आया। लेकिन सबसे बड़ा मसला था एतबार का,
03:16
Speaker A
ट्रस्ट का। ट्रस्ट कौन करता? कैसे कायम होता? क्योंकि यह नई वेबसाइटें बनाने और चलाने वाले ज्यादातर खुद हैकर्स थे, धोखेबाज थे। जैसे ही उनकी वेबसाइट पर लोगों के लाखों डॉलर के बिटकॉइन आने लगे, वो रातोंरात वेबसाइट बंद करके भाग जाते।
03:32
Speaker A
यह था एग्जिट स्कैम। और ऐसे स्कैम डार्क वेब पर भरे पड़े थे। अब माफिया, ड्रग डीलरों और हैकरों को एक ऐसे डॉन की तलाश थी जो उन्हें सिल्क रोड जैसा मजबूत, महफूज़ और प्रोफेशनल प्लेटफार्म दे। और फिर दिसंबर
03:47
Speaker A
2014 आ गया। उन्हें वो डॉन, वो गॉडफादर मिल गया। डार्क वेब के फोरम्स पर एक नए यूजर ने पोस्ट की। नाम था अल्फा 02। इसने ऐलान किया कि उसने एक नई मार्केट बनाई है जिसका नाम है अल्फा बे। अल्फा 02 का दावा
04:04
Speaker A
था कि उसने सिल्क रोड और दूसरी वेबसाइटों की तमाम खराबियों को बहुत गौर से देखा है और ऐसी वेबसाइट बनाई है जो हैक नहीं हो सकती। इसका स्क्रो सिस्टम यानी पेमेंट का निजाम दुनिया का सबसे सिक्योर सिस्टम है
04:17
Speaker A
और सबसे बड़ी बात, वो कभी एग्जिट स्कैम करके नहीं भागेगा। लेकिन कहने से कुछ नहीं होता। सब कुछ करने से होता है। कोई उस पर यकीन क्यों करता? सब ने शक किया, लेकिन अल्फा 02 के काम करने का स्टाइल इतना
04:31
Speaker A
प्रोफेशनल था कि लोग हैरान रह गए। वो 24 घंटे कस्टमर सपोर्ट देता। किसी डीलर और बायर में झगड़ा हो जाता तो खुद एक जज की तरह फैसला करता। इसलिए ज्यादा वक्त नहीं लगा कि अल्फा बे पर ट्रैफिक का सैलाब आ
04:44
Speaker A
गया। यहां पर मैं सिल्क रोड और अल्फाबे का एक फर्क बता दूं क्योंकि यही वो फर्क है जिसने अल्फाबे को हिस्ट्री की सबसे बड़ी और खतरनाक एंपायर बना दिया था। सिल्क रोड का फाउंडर रॉस उल्बिक एक आइडियोलॉस्ट था।
04:59
Speaker A
इसके लिए उसके कुछ उसूल थे। उसकी वेबसाइट सिल्क रोड पर चोरीशुदा क्रेडिट कार्ड, हैकिंग टूल और चाइल्ड पोर्नोग्राफी बेचने पर पाबंदी थी। वो सिर्फ यह चाहता था कि लोग ड्रग्स आसानी से और आजादी से खरीद और बेच सकें। लेकिन अल्फा 02 का कोई उसूल, कोई
05:15
Speaker A
रूल नहीं था। उसने सिर्फ पैसे को बाप बना रखा था। उसने अल्फा बे में ऐसी कोई पाबंदी नहीं रखी थी जो सिल्क रोड पर होती थी। यही वजह है कि अल्फा बे सिर्फ ड्रग्स का Amazon नहीं था। यह क्राइम्स की सुपर
05:28
Speaker A
मार्केट बन गया। यहां के डिजिटल कॉरिडोर बहुत ही खौफनाक थे। जैसे कहीं हीरोइन, कोकेन और जानलेवा फेंटेनाइल सेल होती थी। यहां अमेरिका और यूरोप से चोरी होने वाले लाखों क्रेडिट कार्ड और बैंक अकाउंट्स की डिटेल कोड़ियों के भाव मिलती थी। यहां तक
05:45
Speaker A
कि आप किसी का भी बैंक अकाउंट $10 में खरीद सकते थे। यहां से कोई 16 साल का बच्चा भी सिर्फ कुछ डॉलर्स में ऐसा खतरनाक रैंसमवेयर खरीद सकता था जिससे वह किसी भी कंपनी का कंप्यूटर सिस्टम लॉक करके उससे
05:58
Speaker A
लाखों डॉलर भत्ता मांग सके। कहीं नकली पासपोर्ट, जारी ड्राइविंग लाइसेंस मिलते तो कहीं से आप प्रोफेशनल हिटमैन की खिदमत भी ले सकते थे। बल्कि यहां पोर्नोग्राफी तक की खरीद-फरोख्त होती थी। समझे यह सिल्क रोड 2.0 था। मगर स्ट्रॉन्गर, फास्टर, बेटर
06:15
Speaker A
एंड मोर ब्रूटल। लेकिन अल्फा 02 को एक बात का डर था। वो जानता था कि रॉस उल्बिक के पकड़े जाने की एक बड़ी वजह बिटकॉइन था। दुनिया को लगता है कि बिटकॉइन मुकम्मल तौर पर कॉन्फिडेंशियल यानी सीक्रेट होता है।
06:28
Speaker A
बिल्कुल नहीं। बिटकॉइन का लेजर पब्लिक होता है। पुलिस थोड़ी सी मेहनत से यह ट्रैक कर सकती है कि कौन सा कॉइन किस वॉलेट से निकलकर कहां गया। अल्फा 02 ने इस खतरे को खत्म करने के लिए एक कमाल की
06:41
Speaker A
ट्रिक खेली। उसने अपनी वेबसाइट पर एक नई क्रिप्टो करेंसी इंट्रोड्यूस करवा दी। नाम था मोनेरो। मोनेरो दुनिया का वन एंड ओनली प्राइवेसी कॉइन है। यह करेंसी पहले से मौजूद तो थी, लेकिन इसे उरूज पर पहुंचाया अल्फा 02 ने।
06:56
Speaker A
मोनेरो की खास बात यह थी कि जब आप भेजते हैं तो कोई नहीं देख सकता कि किसने भेजा है, किसे भेजा है और कितना भेजा। यह मुकम्मल तौर पर अनट्रेसेबल सिस्टम था। समझे अंधा कॉइन था। यही नहीं, अल्फा 02 ने
07:11
Speaker A
टंबलर यानी क्रिप्टो मिक्सर्स का इस्तेमाल भी किया जो उन कॉइन को इतनी बार घुमाते थे कि एफबीआई के लिए मनी ट्रेल फॉलो करना नामुमकिन हो गया। टॉर ब्राउज़र ने लोकेशन छुपा दी। मोनेरो ने मनी ट्रेल छुपा दी। अब
07:24
Speaker A
अल्फा 02 को कौन पकड़ता? इसका अल्फा बे अब एक किला बन चुका था। 10 गुना ज्यादा बड़ा हो चुका था। यानी रॉस उल्बिक की गिरफ्तारी के बाद सिर्फ 4 साल में और इतनी तेजी से फैलता जा रहा था कि 2017 तक सिल्क रोड से
07:39
Speaker A
अल्फा बे पर 4 लाख से ज्यादा यूजर्स थे। 400 से ज्यादा वेंडर रजिस्टर्ड थे। रोजाना करोड़ों डॉलर्स की ब्लैक ट्रेड हो रही थी और अल्फा 02 वो हर ट्रांजैक्शन पर 2 से 4% कमीशन ले रहा था। रोजाना बैठे-बठाए
07:54
Speaker A
लाखों डॉलर कमा रहा था। वो दुनिया की ताकतवर तरीन पुलिस, तहकीकाती इदारों और सीक्रेट एजेंसियों के लिए एक भूत था। कहा जाता है कि मुजरिम चाहे कितना ही चालाक क्यों ना हो, कैसा ही बेहतरीन मास्टर प्लान क्यों ना बना ले,
08:11
Speaker A
अपने गुरूर और लालच में एक गलती जरूर करता है। सिल्क रोड का फाउंडर रॉस उल्बिक भी एक आइडियोलॉस्ट था। अरबों डॉलर का मालिक होने के बावजूद सान फ्रांसिस्को में किराए के एक छोटे से घर में रहता था। पुराने कपड़े पहनता और अपनी
08:24
Speaker A
दौलत छुपाता था। लेकिन अलेग्जेंडर काजेस में ऐसा कुछ नहीं था। वो कनाडा का एक 25 साल का लड़का था। शायद छोटी उम्र में बड़े अरमान थे। इसलिए इसे पैसे और महंगी गाड़ियों के दिखावे की आदत थी। और वाकई जब
08:38
Speaker A
आप डार्क वेब के सबसे बड़े ड्रग लॉर्ड हो, आपके पास करोड़ों डॉलर के बिटकॉइन हो तो बंदा सोचता है कि इतना पैसा कमाने का फायदा क्या? जब आप इसे खर्च ही ना कर सकें। लेकिन इससे भी बड़ी मुश्किल यह थी
08:50
Speaker A
कि पैसे खर्च कैसे किए जाएं कि किसी को शक भी ना हो। इसके लिए अलेग्जेंडर ने कनाडा छोड़ दिया और थाईलैंड शिफ्ट हो गया। क्यों? क्योंकि वो वहां अपने पैसों के जरिए कोई भी आइडेंटिटी खरीद सकता था। अपनी
09:03
Speaker A
मर्जी का लाइफस्टाइल जी सकता था। यही नहीं, इसने साइप्रस और एंटीगा जैसे मुल्कों की सिटीजनशिप भी खरीदी ताकि अगर कभी भागना पड़े तो उसके पास कई पासपोर्ट हो। उसके बैंक अकाउंट स्विट्जरलैंड से हांगकांग तक फैले हुए थे। वह इंटरनेट पर मुख्तलिफ
09:19
Speaker A
प्लेटफार्मों पर जाता और अपनी दौलत, अपनी गाड़ियों और अपनी थाई लाइफ के बारे में पोस्ट करता ताकि लोगों को बताए कि उसने कितनी कम उम्र में कितनी दौलत कमाई है। अलेग्जेंडर खुद को बड़ा स्मार्ट समझता था। लेकिन उसे पता नहीं था कि डिजिटल वर्ल्ड
09:35
Speaker A
में एक-एक लव्स आ...
09:48
Speaker A
तो लाइक कर दें और चैनल को सब्सक्राइब भी। बहरहाल 2016 के आखिर तक अमेरिका की एफबीआई, यूरोपियन पुलिस, यूरोपोल और डीईए सब मिलकर एक टास्क फोर्स बना चुके थे। वो अल्फाबे के सर्वर ढूंढ रहे थे। लेकिन एलेक्जेंडर का सिक्योरिटी सिस्टम इतना
10:04
Speaker A
मजबूत था कि इसमें कोई गलती, कोई कमजोरी नजर नहीं आ रही थी। टॉर और मोनेरो ने इसके एंपायर को ऐसा बना दिया था कि कोई इसे गिरा नहीं सकता था। तब एक साइबर एजेंट को एक आईडिया आया। उसने मौजूदा सिस्टम को हैक
10:18
Speaker A
करने के लिए पास्ट में जाने का फैसला किया। सोचा कि जब दिसंबर 2014 में अल्फाबे की नई लॉन्चिंग हुई थी तो बनाने वाले ने कोई ना कोई बचकाना गलती जरूर की होगी। जैसे रॉस उलबक ने की थी और वो पकड़ा गया
10:31
Speaker A
था। तो एफबीआई ने भी 2014 में अल्फा बे पर बनने वाले बिल्कुल इब्तदाई अकाउंट्स का डाटा निकालना शुरू कर दिया। जब अल्फा बे नई-नई बनी थी तो जब भी कोई नया कस्टमर अकाउंट बनाता था तो उसे अल्फाB की तरफ से
10:44
Speaker A
एक वेलकम ईमेल आती थी। तब वेबसाइट के कोड में एक छोटी सी बड़ी ही मामूली सी गलती हो गई। इस वेलकम ईमेल के हेडर में मेटाडेटा में सेंडर का पर्सनल ईमेल एड्रेस छुपाया नहीं गया था। एफबीआई एजेंट ने जब वो ईमेल
10:57
Speaker A
एड्रेस देखा तो उसे यकीन नहीं आया। दुनिया के सबसे खतरनाक और सबसे स्मार्ट डार्क वेब ड्रग लॉर्ड का ईमेल एड्रेस था। pimp अंडरs एलेक्स अंडरs 91 एट hotmail.com जी हां pimplex 91 कोई इंक्रिप्टेड हाईटेक आईडी नहीं 90ज का एक आम सा hotmail अकाउंट
11:18
Speaker A
यह वो ईमेल एड्रेस था जो एलेक्जेंडर ने 15 साल की उम्र में बनाया था और 2014 में अल्फाबे की टेस्टिंग के दौरान इसे रिमूव करना भूल गया। एफबीआई ने यह हॉट मेल आईडी Google पर डाली और उन्हें 2008 में फ्रेंच
11:33
Speaker A
जबान का एक टैग फॉरम मिला जहां एक लड़का जिसकी आईडी अल्फा 02 थी कंप्यूटर के कुछ प्रॉब्लम पर सवाल पूछ रहा था और उसने अपना ईमेल pम अंडरs अंडरs 91 एट hotmail.com दिया हुआ था। एफबीआई को इसी फॉरम पर लड़के
11:49
Speaker A
का असली नाम भी मिल गया। एलेग्जेंडर कॉजेस जी हां, दुनिया का सबसे बड़ा ड्रग लॉर्ड भी कभी बच्चा ही था। ऐसा बच्चा जो झूठ नहीं बोल सकता था। इंटरनेट पर फर्जी नाम की जगह अपना असली नाम लिखता था। तो अब
12:02
Speaker A
एफबीआई को पता चल गया था कि यह लड़का कनाडा के एक छोटे से शहर से है। 1991 में पैदा हुआ था। इसीलिए ईमेल में 91 लिखा था और इसका निक नेम एलेक्स [संगीत] है। फिर इसकी Lindin प्रोफाइल भी मिल गई जिसमें
12:15
Speaker A
लिखा था वो सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और क्रिप्टो करेंसी का माहिर है। लेकिन अब वो कनाडा में नहीं था। उसके डिजिटल फुटप्रिंट्स बताते थे कि वो थाईलैंड जा चुका है और फिर एफबीआई को वो पोस्ट भी मिल गई जो एलेक्जेंडर ने एक फोरम पर की थी
12:29
Speaker A
जिसमें उसने थाईलैंड में खरीदी गई अपनी ग्रे रंग की पोरशे पैनामरा की तस्वीर लगाई थी। एफबीआई ने फौरन थाई पुलिस से कांटेक्ट किया और थाईलैंड का पूरा व्हीकल रजिस्ट्रेशन बेस छान मारा। पूरे थाईलैंड में एलेक्जेंडर कॉजेस के नाम पर सिर्फ एक
12:43
Speaker A
ही ग्रे रंग की पोशे पैनामरा थी। और उस गाड़ी के साथ अटैच था बैंकॉक के एक पोस्ट इलाके का एक विला का एड्रेस। गेम ओवर हो गया। डार्क वेब का भूत बेनकाब हो चुका था। एफबीआई के पास अब सब कुछ था। उसका असली
12:57
Speaker A
नाम, उसकी तस्वीरें, उसके घर का पता, उसकी बीवी का नाम, सब कुछ। एफबीआई के पास दो रास्ते थे। या तो सीधा बैंकॉक पुलिस को मैसेज भेजें कि वो अलेक्जेंडर को गिरफ्तार करें और अल्फाबे के सर्वर बंद करें। लेकिन
13:11
Speaker A
इसमें दो खतरे थे। पहला खतरा इंक्रिप्शन। अगर एलेक्जेंडर ने गिरफ्तारी से एक सेकंड पहले भी अपना लैपटॉप बंद कर दिया तो अल्फाबे का सारा डाटा करोड़ों डॉलर के बिटकॉइन और लाखों मुजरिमों की लिस्ट हमेशा के लिए लॉक हो जाएगी। उन्हें इसे हाथों और
13:27
Speaker A
खुले लैपटॉप के साथ पकड़ना था। बिल्कुल वैसे ही जैसे उन्होंने कुछ साल पहले रॉस उलbic को पकड़ा था। दूसरा और सबसे बड़ा खतरा हाइड्रा का सर। एफबीआई को अच्छी तरह पता था कि अगर अल्फाबे को बंद किया तो
13:40
Speaker A
उसके लाखों यूजर और ड्रग डीलर डार्क वेब की दूसरी बड़ी मार्केट हसा पर शिफ्ट हो जाएंगे। जैसे सिल्क रोड मरी तो अल्फा बे पैदा हो गई वैसे ही अल्फाबे के मरने पर हंजा उससे भी बड़ी बन जाएगी। वो सिर्फ एक
13:54
Speaker A
मुजरिम पकड़ेंगे लेकिन जुर्म का नेटवर्क वहीं रहेगा। इसलिए एफबीआई ने दुनिया की टॉप एजेंसियों के साथ मिलकर एक ऐसा मास्टर प्लान बनाया जैसा पूरी हिस्ट्री में नहीं था। उन्होंने फैसला किया कि वह एलेक्जेंडर को पकड़ेंगे नहीं बल्कि डार्क वेब के हर
14:08
Speaker A
एक यूजर को बेनकाब करेंगे। वह ऐसा साइबर ट्रैप बिछाएंगे कि मुजरिम खुद चलकर पुलिस के पास आएंगे। यह तारीख का सबसे बड़ा ट्रैप था। यह था ऑपरेशन बियोंने। तो उन्होंने एक ऐसी चाल चली जिसके बारे में डार्क वेब के किसी हैकर ने सोचा भी
14:25
Speaker A
नहीं होगा। उन्होंने अल्फाबे पर हमले से पहले हंसा पर कब्जा करने का फैसला किया। जून 2017 डश पुलिस ने बाल्टिक कंट्रीज में से एक लेथ्वेनिया में हसा मार्केट के सर्वर्स का पता चला लिया और उसके मालिकों को खामोशी से गिरफ्तार कर लिया। आमतौर पर
14:40
Speaker A
जब पुलिस कोई इललीगल वेबसाइट पकड़ती है तो उसे फौरन बंद कर दिया जाता है और मेन पेज पर एफबीआई का लोगो और सीजर बैनर लगा दिया जाता है। लेकिन इस बार उन्होंने ऐसा नहीं किया। क्यों? क्योंकि वह इसे एक जाल बनाना
14:54
Speaker A
चाहते थे। ऐसा जाल जिसमें सब आकर फंसे। डच पुलिस ने हासा के सर्वर को खुफिया तौर पर नेदरलैंड शिफ्ट कर दिया और अगले कई हफ्तों तक यूरोप की पुलिस खुद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी ड्रग मार्केट चला रही थी।
15:07
Speaker A
दुनिया भर के ड्रग डीलर, आर्म्स डीलर और हैकर हसा पर अपना माल बेच रहे थे और उन्हें लग रहा था कि वह डार्क वेब की सिक्योर जगह पर है। उन्हें अंदाजा ही नहीं था कि इस वेबसाइट का एडमिन अब कोई मुजरिम
15:20
Speaker A
नहीं बल्कि हॉलैंड की पुलिस खुद है। डच पुलिस ने खामोशी से वेबसाइट के कोड में तब्दीलियां की। ऐसे बैक डोर्स बनाए जो यूजर के इंक्रिप्टेड मैसेज पढ़ सकें। यूं जब भी कोई डीलर अपने कस्टमर को ड्रग बेचने के लिए अपना असली पता या लोकेशन डालता
15:34
Speaker A
पुलिस इसका स्क्रीनशॉट लेकर सेव कर लेती। इसी तरह अगर कोई कस्टमर अपना एड्रेस या लोकेशन देता तो वो भी पुलिस को मिल रहा था। जाल अब मुकम्मल तौर पर तैयार था। बस मछलियों को इस जाल तक लाने की जरूरत थी।
15:48
Speaker A
और यह काम एफबीआई को करना था। 4 जुलाई 2017 अमेरिका के नेशनल डे पर एफबीआई ने बटन दबा दिया। कनाडा में बनने वाले अल्फाबे के मेन सर्वर की पावर केबल खींच ली और दुनिया की सबसे बड़ी डार्क वेब
16:02
Speaker A
मार्केट अचानक ब्लैक आउट हो गई। एक भौचाल आ गया। लाखों ड्रग डीलर और खरीदारों के करोड़ों डॉलर अल्फा बे के वॉलेट्स में फंसे हुए थे। उन्हें लगा कि अल्फा 02 उनके सारे पैसे लेकर भाग गया है। वह भी एग्जिट
16:15
Speaker A
स्कैम निकला। अंडरवर में खौफ और गुस्से की लहर थी और फिर वही हुआ जिसका एफबीआई ने अंदाजा लगाया था। अल्फाबे के बंद होते ही सारे क्रिमिनल पागलों की तरह नई मार्केट की तरफ भागे जिसे वो सेफ समझ रहे थे। कौन
16:30
Speaker A
सी? जी हां, हानसा। अगले चंद दिनों में हानसा मार्केट पर ट्रैफिक में आठ गुना इजाफा हो गया। रोजाना हजारों नए डीलर और बायर रजिस्टर हो रहे थे। इतने ज्यादा कि डच पुलिस को नए अकाउंट्स अप्रूव करने के लिए अपनी टीम में इजाफा करना पड़ा और यहां
16:46
Speaker A
ज्यादातर लोगों ने अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती की क्योंकि इंसान आमतौर पर सुस्त है। इसलिए जो डीलर अल्फा बे पर जिस यूजरनेम और पासवर्ड के साथ रजिस्टर्ड थे खानसा पर आकर भी उन्होंने वही यूजरनेम और पासवर्ड इस्तेमाल किया। हम आमतौर पर अपनी
17:02
Speaker A
नॉर्मल वेबसाइटों पर भी यही करते हैं ना। एक ही यूजरनेम, एक ही पासवर्ड। लेकिन नॉर्मल वर्ल्ड में तो यह चल जाता है। क्रिमिनल वर्ल्ड में यह क्रिमिनल मिस्टेक थी। अब डच पुलिस के पास उन सबकी लाइव ट्रांजैक्शंस भी थी। उनके असली एड्रेस भी
17:17
Speaker A
और आईडी और पासवर्ड भी। और क्या चाहिए था? जाल भर चुका था। मुजरिम खुद चलकर जेल के दरवाजे पर आ चुके थे। अब बारी थी हाइड्रा का सर काटने की जो थाईलैंड के एक लग्जरी विला में बैठा हुआ था।
17:32
Speaker A
5 जुलाई 2017 थाईलैंड का कैपिटल बैंकॉक, एफबीआई, डीईए और थाई पुलिस अलेक्जेंडर कॉजेस के घर के बाहर खड़ी थी। उन्हें मालूम था कि अलेग्जेंडर अंदर है। यह भी पता था कि अल्फाबे के अचानक बंद होने की वजह से वो इस वक्त बहुत टेंशन में है।
17:48
Speaker A
यकीनन अपने लैपटॉप पर बैठा सर्वर ठीक करने की कोशिश कर रहा होगा। लेकिन एक बहुत बड़ा मसला अब भी उनके सामने था। इंक्रिप्शन एलेक्जेंडर के लैपटॉप पर मिलिट्री ग्रेड सिक्योरिटी होगी। अगर पुलिस दरवाजा तोड़कर अंदर घुसी तो वह एक सेकंड में अपना लैपटॉप
18:05
Speaker A
बंद कर देगा और उसकी स्क्रीन बंद होते ही पूरा सिस्टम लॉक हो जाएगा। अल्फा बे का मास्टर पासवर्ड करोड़ों डॉलर के बिटकॉइन और एलेक्जेंडर के खिलाफ तमाम सबूत हमेशा के लिए गायब हो जाएंगे। इसलिए एलेक्जेंडर को इस तरह पकड़ना था कि इसका लैपटॉप खुला
18:21
Speaker A
हो। बिल्कुल वैसे ही जैसे रॉस उलब को पकड़ा गया था। इसके लिए पुलिस को एक डिस्ट्रैक्शन चाहिए थी और फिर उन्होंने अपनी चाल चल दी। बिल्कुल मूवी स्टाइल में। उन्होंने जानबूझकर एक गाड़ी एलेक्जेंडर के घर के बाहर वाले गेट पर दे मारी। एक
18:36
Speaker A
जोरदार धमाका हुआ। अलेक्जेंडर जो अपने बेडरूम में बैठा लैपटॉप पर काम ही कर रहा था। इस जोरदार आवाज से घबरा गया। यह देखने के लिए कि बाहर क्या हुआ है। वो अपनी कुर्सी से उठा और दरवाजे की तरफ भागा। इस
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Speaker A
हालत में कि लैपटॉप खुला पड़ा था। इसी लम्हे का तो इंतजार था। कमांडोज़ ने उसे हिरासत में ले लिया। कुछ कमांडोज़ पिछले दरवाजे से अंदर दाखिल हुए। यह सब इतना आनन-फानन हुआ कि उसे पता भी नहीं चल सका।
19:02
Speaker A
लेकिन हथकड़ियां पहने बंदे से ज्यादा कीमती चीज थी उसका खुला हुआ लैपटॉप। स्क्रीन पर अल्फाबे का मेन सर्वर खुला हुआ था और एलेक्जेंडर एडमिन के तौर पर लॉग इन भी था। यही नहीं स्क्रीन पर नोटपैड भी खुला हुआ था। जिसने एफबीआई का काम और आसान
19:17
Speaker A
कर दिया। इस टेक्स्ट फाइल में एलेक्जेंडर की पूरी दौलत का हिसाब किताब था। एलेक्जेंडर की मुकम्मल चार्ज शीट सामने पड़ी थी। दुनिया का सबसे बड़ा डार्क वेब किंग पिन जिसने सिल्क रोड से 10 गुना बड़ी एंपायर खड़ी की थी। अब फर्श पर पड़ा अपने
19:32
Speaker A
खुले लैपटॉप को बेबसी से देख रहा था। एलेक्जेंडर को बैंकॉक की एक हाई जेल में शिफ्ट कर दिया गया। एफबीआई ने उसे अमेरिका ले जाने के लिए काम शुरू कर दिया था और अलेग्जेंडर समझ गया था कि उसे रॉस उलब्रिक
19:44
Speaker A
की तरह डबल उम्र कैद होगी। लेकिन अलेक्जेंडर की कहानी अदालत तक भी नहीं पहुंची। 12 जुलाई 2017 की सुबह अभी कुछ दिन पहले तक करोड़ों डॉलर का मालिक Lamborghini चलाने वाला लग्जरी बंगलों में रहने वाला पार्टियों पर पैसा उड़ाने वाला
20:00
Speaker A
एलेग्जेंडर एक छोटे से सेल में फर्श पर पड़ा था। अमेरिका ने थाईलैंड को मुजरिम हवाले करने की दरख्वास्त दे दी थी। अलेग्जेंडर को पता था कि वो अमेरिका पहुंचा तो कभी जेल से बाहर नहीं आ सकेगा। लेकिन वो कभी अमेरिका पहुंच ही नहीं सका।
20:15
Speaker A
क्योंकि उस दिन सुबह जब जेल गार्ड्स मामूल के मुताबिक अलेग्जेंडर के सेल में आए तो उन्होंने एक खौफनाक मंजर देखा। डार्क वेब का किंग बल्कि किंग ऑफ द किंग्स मुर्दा हालत में छत से लटक रहा था। उसने एक तोलिया को इस्तेमाल करके अपनी जान
20:31
Speaker A
ले ली थी। थाई पुलिस और एफबीआई ने ऑफिशियली इसे एक खुदकुशी करार दिया। कहा कि अलेग्जेंडर लंबी सजा के खौफ से टूट चुका था और अपनी जिंदगी का खुद ही खात्मा कर दिया। लेकिन अंडरवर और साइबर सिक्योरिटी की दुनिया में इस मौत को आज तक
20:45
Speaker A
शक की निगाह से देखा जाता है। क्या यह वाकई एक सुसाइड थी? क्या उसने अपने अंजाम से डर कर हार मान ली थी? या फिर उसे बहुत कुछ पता था और इसीलिए उसका जिंदा रहना बहुत खतरनाक था। क्योंकि अल्फा बे पर
20:59
Speaker A
दुनिया के सबसे बड़े और खतरनाक तरीन क्रिमिनल्स सिंडिकेट्स माफिया हैकरों और ड्रग कार्ट्स का अरबों डॉलर का धंधा था। अलेक्जेंडर के दिमाग में और उसके इंक्रिप्टेड सर्वर में ऐसे पावरफुल लोगों के राज दफन थे जो कभी नहीं चाहते थे कि
21:15
Speaker A
अलेक्जेंडर अमेरिकी अदालत में खड़ा होकर अपना मुंह खोले। क्या उसने वाकई खौफ से खुदकुशी कर ली थी या उसे उन पावरफुल माफियाज़ ने खुद को बचाने के लिए खामोश करवा दिया था। इस सवाल का जवाब उसके साथ ही दखन हो चुका। बहरहाल जब अलेग्जेंडर मर
21:31
Speaker A
रहा था उसी वक्त यूरोप में एफबीआई और डच पुलिस एक बटन दबाने वाले थे। याद है ना?
21:36
Speaker A
अल्फाबे के बंद होने के बाद लाखों मुजरिम घबरा कर हांसा पर शिफ्ट हो गए थे। उन्हें लग रहा था कि वह महफूज हैं [संगीत] लेकिन नहीं जानते थे कि हांसा को पिछले 1 महीने से पुलिस खुद चला रही है। और फिर 20 जुलाई
21:50
Speaker A
2017 को पुलिस ने जाल खींच [संगीत] लिया। हांसा को अचानक शटडाउन कर दिया और स्क्रीन पर वो बैनर लगा दिया जिससे हर साइबर क्रिमिनल खौफ खाता है। दिस हिडन साइड हैज़ बीन सीज्ड। जरा सोचें दुनिया भर में अपने
22:04
Speaker A
बंद कमरों और खुफिया तहखानों में बैठे लाखों हैकर और ड्रग डीलर जो खुद को इंटरनेट का जिन समझते थे उन्हें अचानक पता चला हो कि पिछले एक महीने से वो किसी अंडरवर डॉन के साथ नहीं बल्कि सीधा एफपीआई
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Speaker A
और यूरोपियन पुलिस के साथ बिजनेस कर रहे थे। उनके असली नाम, उनके असली एड्रेस बल्कि आईडी और पासवर्ड तक सब पुलिस के पास थे। तो उनका क्या हाल हुआ होगा? यह डार्क वेब की तारीख का सबसे बड़ा साइबर पैनिकिक
22:31
Speaker A
था। फिर एक वर्ल्ड वाइड क्रैकडाउन हुआ। पूरी दुनिया में पुलिस ने छापे मारे। सैकड़ों डीलरों को उनके घरों से मनशियात और करोड़ों डॉलर की क्रिप्टो करेंसी के साथंगे हाथों गिरफ्तार किया। यह ऑपरेशन बियोंने की एक शानदार और तारीखी जीत थी और
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Speaker A
साथ ही हिस्ट्री की सबसे बड़ी डार्क वेब मार्केट प्लेसेस का खात्मा हो गया। लेकिन रॉस उलब और अलेग्जेंडर कॉजेस की कहानी में हमें एक कंट्राडिक्शन दिखाई देता है। रॉस उलब एक आइडियोलॉजिस्ट था। वो चाहता था कि इंसान गवर्नमेंट के कंट्रोल से आजाद हो।
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Speaker A
उसने एक आईडियोलॉजी के साथ सिल्क रोड बनाई। लेकिन आखिर ताकत के नशे में अंधा होकर कातिलों को पैसे देने लगा। डबल उम्र कैद की सजा सुनी। लेकिन फिर हैरानक तौर पर रिहा हो गया और आजाद घूम रहा है। लेकिन
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Speaker A
एलेक्जेंडर कॉजेज बिल्कुल मुख्तलिफ था। वो प्योर कैपिटलिस्ट माइंडसेट रखने वाला एक लालची आदमी था। उसने अल्फाबेस सिर्फ और सिर्फ पैसे कमाने के लिए बनाई और यहां हर गंदे काम की इजाजत दी। यहां तक कि चाइल्ड पोनोग्राफी की भी। उसका अंजाम जेल के एक
23:32
Speaker A
अंधे सेल में हुआ। दोनों का स्टार्ट अलग-अलग था और एंड भी मुख्तलिफ हुआ। अल्फाबे और हांसा दोनों बंद हो गई। लेकिन क्या डार्क वेब वाकई खत्म हो गई? बिल्कुल नहीं। अल्फाबे के बंद होने के बाद दर्जनों नई मार्केट प्लेसेस आ गई और आज 2026 में
23:49
Speaker A
वो पहले से कहीं ज्यादा मॉडर्न और अनट्रेसेबल क्रिप्टो करेंसी इस्तेमाल कर रही हैं। पुलिस ने एक सर काटा, दूसरा सर काटा लेकिन हाइड्रा के चार नए सर निकल आए और यह रियलिटी खुलकर सामने आ गई कि जुर्म और कानून का खेल कभी खत्म नहीं होगा। शायद
24:06
Speaker A
कयामत तक नहीं। ओम
Topics:डार्क वेबअल्फाबेसिल्क रोडअलेग्जेंडर काजेसक्रिप्टो करेंसीएफबीआईथाईलैंडब्लैक मार्केटमोनेरोऑपरेशन बॉयनेट

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