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Why Did Pakistan Break? How India Strategically Created Bangladesh? | Masterplan of 1971

भारत ने कैसे रणनीतिक रूप से पाकिस्तान को तोड़कर बांग्लादेश बनाया, 1971 की साजिश और राजनीतिक घटनाओं की गहराई से जांच।

Key Takeaways

  • भारत ने पाकिस्तान के अंदरूनी विभाजन और कमजोरियों का रणनीतिक रूप से फायदा उठाया।
  • बंगाली राष्ट्रीयता को बढ़ावा देकर भारत ने पाकिस्तान के दो हिस्सों के बीच फासला गहरा किया।
  • 1971 की जंग एक राजनीतिक साजिश थी, न कि केवल एक स्वतंत्रता संग्राम।
  • बांग्लादेश की स्थापना भारत की विदेश नीति और खुफिया रणनीति का परिणाम थी।
  • बांग्लादेश दशकों तक भारत के प्रभाव में एक सेटेलाइट स्टेट रहा।

What the video covers

  • 1971 की जंग केवल आजादी की लड़ाई नहीं बल्कि एक बड़ी साजिश का हिस्सा थी जिसमें भारत ने पाकिस्तान को तोड़ने की रणनीति बनाई।
  • पाकिस्तान के दो हिस्सों - मशरिकी और मगरबी पाकिस्तान के बीच सांस्कृतिक, भाषाई और राजनीतिक फासले भारत ने भुनाए।
  • भारत ने बंगाली राष्ट्रीयता और सांस्कृतिक पहचान को हथियार बनाकर मशरिकी पाकिस्तान में विद्रोह को प्रोत्साहित किया।
  • 1968 के अगरतला साजिश केस ने भारत और शेख मुजीब के बीच गुप्त समझौते को उजागर किया।
  • 1970 के चुनावों ने पाकिस्तान को तोड़ने की प्रक्रिया को तेज किया, जहां शेख मुजीब की लोकप्रियता बढ़ी।
  • भारत ने राजनीतिक संकट को सिविल युद्ध में बदलने के लिए खुफिया एजेंसियों और मीडिया का इस्तेमाल किया।
  • 1965 की जंग में भारत ने मशरिकी पाकिस्तान को नजरअंदाज कर उसकी असहमति और अलगाव को बढ़ावा दिया।
  • भारत ने बांग्लादेश को एक सेटेलाइट स्टेट के रूप में स्थापित किया जो दशकों तक उसके प्रभाव में रहा।
  • बांग्लादेश की आजादी और उसके बाद की राजनीतिक घटनाएं भारत की रणनीति का परिणाम थीं।
  • बांग्लादेश के अंदरूनी संघर्ष और राजनीतिक अस्थिरता भी भारत के हस्तक्षेप से प्रभावित रही।

Answers

Questions about this video

भारत ने 1971 में पाकिस्तान को तोड़ने के लिए क्या रणनीति अपनाई?

भारत ने पाकिस्तान के अंदरूनी सांस्कृतिक और राजनीतिक विभाजन का फायदा उठाया, बंगाली राष्ट्रीयता को बढ़ावा दिया और खुफिया एजेंसियों के माध्यम से विद्रोह को प्रोत्साहित किया।

अगरतला साजिश केस का 1971 की घटनाओं में क्या महत्व है?

अगरतला साजिश केस ने शेख मुजीब उर रहमान और भारत के बीच गुप्त समझौते को उजागर किया, जिससे भारत को बंगाली नेतृत्व के साथ काम करने का भरोसा मिला और बगावत की तैयारी तेज हुई।

बांग्लादेश की स्वतंत्रता के बाद भारत का उस पर क्या प्रभाव रहा?

बांग्लादेश को भारत ने एक सेटेलाइट स्टेट के रूप में स्थापित किया, जो दशकों तक भारत के राजनीतिक और सैन्य प्रभाव में रहा, जिससे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन प्रभावित हुआ।

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00:04
Speaker A
यह सिर्फ एक जंग की तस्वीर नहीं, एक मुल्क के बनने और दूसरे के टूटने की तस्वीर नहीं, यह एक बहुत बड़ी साजिश का आखिरी मंजर है। शायद तारीख की सबसे बड़ी साजिश का। दुनिया समझती रही कि यह बंगालियों की
00:19
Speaker A
आजादी की जंग है। सुनना शादी संग्राम। जुल्म के खिलाफ आवाम के उठ खड़े होने की जंग है। और इंडिया इंडिया का रोल तो बस इतना है कि वो एक मजलूम कौम की मदद करने आया है। बस हम हर तरह से मुक्ति वाहिनी की बांग्लादेश
00:37
Speaker A
के लोगों की मदद करेंगे। लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल मुख्तलिफ है। 16 दिसंबर 1971 के दिन की तैयारी बरसों पहले नई दिल्ली के बंद कमरों में शुरू हुई थी। जी हां, पाकिस्तान तोड़ने के खेल का आगाज कहीं पहले हो चुका था। शायद पाकिस्तान
00:59
Speaker A
बनते ही और उसके अहम किरदार शेख मुजीब उर रहमान इस खेल के बादशाह नहीं सिर्फ एक मोहरा थे। एक ऐसा मोहरा जिसे भारत ने बड़ी चालाकी से जहां चाहा जैसे चाहा इस्तेमाल किया। और यह जंग आवाम ने नहीं बल्कि
01:16
Speaker A
इंडियन रॉ की बनाई हुई एक प्रॉक्सी आर्मी ने लड़ी। और यह हम हवाओं में बात नहीं कर रहे। यह वो बातें हैं जो कई इंडियन जनरल भी कर चुके हैं। इंटेलिजेंस सरबराहों ने भी की बल्कि पाकिस्तान आर्मी के उस अफसर
01:29
Speaker A
ने भी की जो पाकिस्तान से बगावत करने वाला पहला बंगाली था जो भाग कर सबसे पहले दिल्ली पहुंचा था। लेकिन आज वो भी कुछ और कहता है कि भारत बांग्लादेश को आजादी दिलाने वाला नहीं था। लिबरेटर नहीं था
01:42
Speaker A
बल्कि एक चालाक खिलाड़ी था। जिसने अपने मफादात के लिए एक कौम को इस्तेमाल किया। अब वक्त आ चुका है कि हम बिग पिक्चर देखें और इतना वक्त गुजर चुका है कि अब तो समझे पिक्चर बिल्कुल क्लियर हो चुकी है।
01:58
Speaker A
आइए देखते हैं कि इंडिया ने कैसे पाकिस्तान की कमजोरियों को इस्तेमाल किया। किस तरह एक पॉलिटिकल क्राइसिस को फुल स्केल सिविल वॉर में बदल दिया। और कैसे आजादी के नाम पर एक ऐसी सेटेलाइट स्टेट बनाई जो बरसों नहीं बल्कि दिहाइयों तक
02:14
Speaker A
इंडिया की गुलाम बनी रही। यह कहानी है बांग्लादेश की। उस मुल्क की जो भारत की पाकिस्तान से दुश्मनी के नतीजे में पैदा हुआ। वो प्रोडक्ट कि जिसके हर हर पार्ट पर लिखा हुआ था मेड इन इंडिया। अगस्त 1947 सबक्टिनेंट में एक नए मुल्क
02:36
Speaker A
में जन्म लिया और शायद उसी दिन इसे तोड़ने का मंसूबा भी शुरू हो गया। भारत ने शिकार की तैयारी की शुरुआत उसी दिन कर दी थी और पहले दिन से पाकिस्तान की कमजोरियों को नजर में रखा। जान लिया कि पाकिस्तान दो
02:49
Speaker A
हिस्सों में बंटा हुआ ऐसा देश है जो अलग हिस्से नहीं बल्कि दो अलग दुनिया है। मशरिकी और मगरबी पाकिस्तान की जबान लिबास, मौसी, खाना पीना, उठना बैठना और हजारों साल की तारीख सब कुछ बिल्कुल मुख्तलिफ थी। मगरबी पाकिस्तान के कल्चर पर सेंट्रल
03:08
Speaker A
एशिया और मिडिल ईस्ट का गहरा असर था। जबकि मशरिकी पाकिस्तान की जड़े साउथ ईस्ट एशिया और बंगाल के अपने कल्चर में थी। इन दो अलग दुनियाओं को सिर्फ मजहब के धागे से बांधने की कोशिश की गई थी। लेकिन जब
03:23
Speaker A
कायदे आजम मोहम्मद अली जिन्ना ने ऐलान किया कि पाकिस्तान की कौमी जबान सिर्फ और सिर्फ उर्दू होगी तो अक्सरियत यानी बंगालियों ने इसे अपनी आइडेंटिटी पर हमला समझा। उन्होंने कायद का यह हुकुम मानने से इंकार कर दिया और बंगाली को कौमी जबान
03:38
Speaker A
बनाने की वो तहरीक शुरू की जिसके दौरान शायद बांग्लादेश की बुनियाद पड़ चुकी थी। जिसने जाहिर किया कि मजहब का धागा शायद इतना मजबूत नहीं जितना पाकिस्तान बनाते हुए इसे समझ लिया गया था। जय बांग्ला मशरिकी और मगरबी पाकिस्तान के बीच 1600
04:00
Speaker A
कि.मी. का फासला जरूर था। लेकिन हुकूमत पाकिस्तान के फैसलों की वजह से यह जहनों और दिलों में भी फासला पैदा होने लगा और जब दिलों में दोरी आने लगे तो दुनिया की कोई ताकत इस खला को पुर नहीं कर सकती और
04:14
Speaker A
इन हालात में दुश्मन ने अपनी पहली चाल चल दी। इसे पहली दरार मिल चुकी थी। जबान और कल्चर की दरार। कोलकाता हमेशा से बंगाली जबान, अदब और कौम परस्ती का गढ़ रहा है। पार्टीशन ने सिर्फ जमीन ही नहीं बल्कि बंगाली कल्चर को भी दो
04:34
Speaker A
हिस्सों में बांट दिया था। लेकिन जबान का ताल्लुक कहां टूटता है? यह तो किसी ना किसी सूरत में कायम रहता ही है। तो इंडियन इंटेलिजेंस और पॉलिसी बनाने वालों ने इसी ताल्लुक को एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल
04:46
Speaker A
करने का फैसला किया। आकाशवाणी। इस जमाने में ऑल इंडिया रेडियो की बंगाली सर्विस मशरिकी पाकिस्तान में बहुत पॉपुलर थी। जहां से इंडियन दानिश और फनकार मुसलसल यह पैगाम देते कि मगरबी पाकिस्तान उर्दू और इस्लाम के नाम पर बंगालियों के अजीम कल्चर को तबाह कर रहा
05:07
Speaker A
है। फिर कोलकाता से किताबें, रिसाले और म्यूजिक रिकॉर्डिंग्स मशरिकी पाकिस्तान में स्मगल होती और इस कंटेंट में ज्यादातर बंगाली नेशनलिज्म को बड़े ही रोमांटिक अंदाज में पेश किया जाता और मगरबी पाकिस्तान को एक काबिज़ और इस्तेसाली कुत के तौर पर दिखाया जाता। यही नहीं इंडियन
05:25
Speaker A
एजेंसियों ने ढाका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर्स, दानिशवरों बल्कि तलबा के साथ भी खुफिया राब्ते किए। उन्हें स्कॉलरशिप्स और टूअर्स के लालच दिए और उनके जरिए कौम परस्ती के ख्यालात को फैलाया और यह सब कुछ करने का मकसद सिर्फ एक था। मशरकी
05:40
Speaker A
पाकिस्तान के नौजवानों के ज़हन में यह बात बिठा दी जाए कि उनकी असल वफादारी इस्लाम से या पाकिस्तान से नहीं बल्कि बंगाली नस्ल और जबान से है। ये एक स्लो पोइजन था जो आहिस्ता-आहिस्ता बंगाल के ज़हन में उतरता चला गया। बंगाली पाकिस्तान की आबादी
05:55
Speaker A
का 54% थे। जम्हूरियत के उसूलों के मुताबिक हुकूमत उनकी होनी चाहिए थी। लेकिन हुआ क्या? पाकिस्तान के पहले बंगाली वज़र आजम ख्वाजा नाजिमुद्दीन को एक ब्यूरोक्रेट गुलाम मोहम्मद ने बरतरफ कर दिया। दूसरे बंगाली वज़र एआज़म हुसैन शहीद सोरवर्दी को
06:12
Speaker A
भी साजिशों के जरिए हटा दिया गया। एक के बाद दूसरा बंगाली वज़र एआज़म गैर आईनी तौर पर निकाला जाता रहा और इंडियन मीडिया को मौका मिलता रहा कि वो इसे पंजाबी एस्टैब्लिशमेंट की बंगालियों से नफरत बनाकर पेश करें। फिर जब अयूब खान का
06:26
Speaker A
मार्शल लॉ आया तो समझे जम्हूरियत का गला ही घोट दिया गया। बंगालियों को बिल्कुल क्लियर मैसेज मिल रहा था तुम मेजॉरिटी में तो हो सकते हो लेकिन हुकूमत हम ही करेंगे। सियासी मैदान में यह हाल था तो इकॉनमी भी
06:44
Speaker A
मुख्तलिफ नहीं थी। पाकिस्तान में इंडस्ट्रियलाइजेशन का आगाज़ हुआ तो इंडिया ने यह नैरेटिव फैलाया कि मगरबी पाकिस्तान असल में मशरिकी पाकिस्तान का खून चूसकर तरक्की कर रहा है। मैं यह नहीं कहता कि यह हकीकत नहीं। किसी हद तक यह बात ठीक थी।
06:59
Speaker A
मशरिककी और मगरबी पाकिस्तान के लाइफस्ट में और इकोनमिक कंडीशंस में काफी फर्क था। लेकिन इंडिया और इसके एजेंटों ने मिर्च मसाले लगाकर जिस तरह इसे एक प्रोपेगेंडे में बदला हालात वैसे हरगिज़ नहीं थे। इंडिया का टारगेट सिर्फ एक था। बंगाली
07:15
Speaker A
आवाम के ज़हनों में यह बात बिठा दी जाए कि उनके तमाम मसाइल की जड़ एक है वेस्ट पाकिस्तान। और तमाम मसाइल का वाहिद हल एक है। पाकिस्तान से अलग हो जाना। जबान, कल्चर, पॉलिटिक्स और इकॉनमी में यह सब देखने के बाद जंग के मैदान में भी कुछ
07:34
Speaker A
ऐसा हुआ जिसने बंगालियों की आंखें खोल दी। 1965 की जंग में जब भारत ने लाहौर पर हमला किया तो पूरी जंग सिर्फ वेस्टर्न फ्रंट पर लड़ी गई। 17 दिन तक मशरिकी पाकिस्तान तकरीबन लावारिस था। यानी भारत के रहमोकरम
07:55
Speaker A
पर था। इस वाक्य ने बंगालियों के जहन में शक की चिंगारियों को भड़कते शोलों में बदल दिया। उन्हें यकीन हो गया कि वेस्ट पाकिस्तान की नजर में उनकी और उनकी सरजमीन की कोई स्ट्रेटेजिकेंस नहीं है। वो सिर्फ एक बोझ है। एक कॉलोनी है और जब हर मैदान
08:12
Speaker A
में इंडिया को अपने टारगेट मिल गए और उसने पहला बड़ा कदम उठाया। 1968 में एक धमाका इंकशाफ हुआ। अगरतला साजिश केस जनवरी 1968 में पाकिस्तान की गवर्नमेंट ने ऐलान किया कि बंगाली सियासी रहनुमा शेख मुजीब उर रहमान और पाक फौज के कुछ बंगाली
08:35
Speaker A
अफसर इंडिया के साथ मिलकर पाकिस्तान तोड़ने की साजिश कर रहे हैं। ये अय्यूब खान हुकूमत के आखिरी दिन थे। सियासी मैदान इतना खराब हो चुका था कि इस ऐलान को भी एक सियासी ड्रामा समझा गया। शेख मुजीब उस
08:48
Speaker A
वक्त तक अपने मशहूर छह पॉइंट्स पेश कर चुके थे। जो इस पाकिस्तान में भी बहुत मकबूल हो चुके थे। कहा गया कि हुकूमत शेख मुजीब की बढ़ती हुई पॉपुलरिटी से घबरा गई है और उनके खिलाफ प्रोपेगेंडा कर रही है।
09:01
Speaker A
लेकिन बाद में बांग्लादेश बनने के बाद यही शेख मुजीब थे जिन्होंने बीबीसी को इंटरव्यू में खुद कहा। मैं बहुत पहले से एक अलग मुल्क बनाने का इरादा रखता था। बल्कि सन 2011 में अगरतला साजिश के किरदार शौकत अली ने साफ-साफ कह दिया। अगरतला
09:16
Speaker A
साजिश एक रियलिटी थी। बहरहाल अगरतला साजिश के एपिसोड से इंडिया ने दो चीजें हासिल की। एक यह कि शेख मुजीब ऐसा लीडर है जो उनके साथ काम करने को तैयार है। और दूसरा कि एक बड़ी और ऑर्गेनाइज्ड बगावत के लिए
09:31
Speaker A
सही वक्त का इंतजार करना होगा। और वह सही वक्त समझे आने ही वाला था। मैदान तैयार था। मोहरे तैयार थे। आग लगाने के लिए बस एक चिंगारी की जरूरत थी। और यह चिंगारी मिली 1970 के इलेक्शन से। इलेक्शंस विल टेक प्लेस। आई हैव लेफ्ट दिस
09:49
Speaker A
डिसीजन टू द चीफ इलेक्शन कमिश्नर। 1970 में पाकिस्तान की तारीख के पहले आम इंतखाबादात हुए। मुल्क बनने के 23 साल बाद पाकिस्तान की आवाम को पहली बार मौका मिला कि वो अपनी तकदीर का फैसला खुद करें। उम्मीद यही थी कि इलेक्शन मुल्क को जोड़
10:08
Speaker A
देगा। लेकिन यही इलेक्शन था जो मुल्क तोड़ने का सबब बन गया। क्यों? क्योंकि शेख मुजीब इलेक्शन लड़े अपने सिक्स पॉइंट एजेंडे के तहत। उनके वही मशहूर जमाना या बदनाम जमाना छह नकात। वैसे तो मुजीब ने यह छह नकात 1966 में लाहौर के एक जलसे में
10:25
Speaker A
पेश किए थे। मगर उन पर उस
10:39
Speaker A
हो। मगर 70 के इलेक्शन के बाद सूरत हाल बदल गई। क्योंकि इन छह नौकात पर अमल का मतलब तो साफ-साफ यह था कि पाकिस्तान को तोड़ दिया जाए। असल में शेख मुजीब ने डिमांड की थी कि फेडरल गवर्नमेंट सिर्फ
10:52
Speaker A
डिफेंस और फॉरेन अफेयर्स देखें। बाकी तमाम मामलात मगरबी और मशरिकी पाकिस्तान के सूबे खुद देखेंगे। यही नहीं मुल्क के दोनों हिस्सों की अलग-अलग करेंसी। अलग-अलग रिजर्व बैंक की डिमांड भी की और यह भी कहा कि फाइनेंशियल पॉलिसीज और फॉरेन एक्सचेंज
11:08
Speaker A
अकाउंट्स भी अलग-अलग होने चाहिए और तो और सरमाया भी मशरेकी पाकिस्तान से मगरबी पाकिस्तान नहीं जाएगा। टैक्स और रेवेन्यू कलेक्शन में भी मुल्क के दोनों हिस्से आजाद होंगे और फेडरल गवर्नमेंट किसी काम में मुदाखलत नहीं करें। और आखिर में यह भी
11:23
Speaker A
डिमांड की कि मशरेकी पाकिस्तान की अपनी अलग मिलिट्री या पैरामिलिट्री फोर्स होनी चाहिए। समझे यह खुला ऐलान था कि मशरिकी पाकिस्तान मगरबी पाकिस्तान से अलग होना चाहता है। हर हर पॉइंट इस बात का इशारा कर रहा था कि शेख मुजीब पाकिस्तान के साथ
11:39
Speaker A
नहीं रहना चाहते। लेकिन खुलेआम यह बात करना आसान नहीं था। इसीलिए मुजीब जलसों में कहते सिक्स पॉइंट पाकिस्तान को तबाह करने के लिए नहीं बल्कि फेडरल गवर्नमेंट की परफॉर्मेंस को बेहतर बनाने के लिए हैं। पाकिस्तान कायम रहने के लिए वजूद में आया
11:54
Speaker A
है और कोई ताकत पाकिस्तान को तबाह नहीं कर सकती। लेकिन इलेक्शन में जो रिजल्ट आए उसने मुजीब का माइंड बदल दिया। ईस्ट पाकिस्तान में 162 में से 160 नशिस्त थे। उनकी पार्टी आवामी लीग ने जीती और मगरबी पाकिस्तान की 138 में से 81 सीटें
12:10
Speaker A
जुल्फिकार अली भुट्टो की पीपल्स पार्टी को मिली। आवामी लीग वेस्ट पाकिस्तान में एक सीट भी नहीं जीत पाई और पीपल्स पार्टी ईस्ट पाकिस्तान में मुकम्मल तौर पर नाकाम रही। पाकिस्तान जियोग्राफिकली तौर पर तो पहले ही डिवाइडेड था। इस इलेक्शन के बाद
12:24
Speaker A
तो सियासी तौर पर भी दो हिस्सों में बट गया। शेख मुजीब ने इलेक्शन से पहले सदर याहिया खान से वादा किया था कि वह अपने छह नुकात में नरमी लाएंगे। लेकिन इतनी जबरदस्त कामयाबी मिलने के बाद वो मुकर गए। ऐलान कर दिया कि सिक्स पॉइंट
12:43
Speaker A
पर कोई डील नहीं होगी। कोई सौदेबाजी नहीं होगी। उसूल की बात करें तो शेख मुजीब को पाकिस्तान का वज़र आजम बनना चाहिए था। क्योंकि नेशनल असेंबली में उनके पास मेजॉरिटी थी। लेकिन एक बहुत बड़ा खतरा था। असेंबली के पास कॉन्स्टिट्यूशन बनाने का
13:02
Speaker A
इख्तियार होगा। और शेख मुजीब छह नुकातात को कॉन्स्टिट्यूशन का हिस्सा बना देंगे। यूं पाकिस्तान कानूनी तौर पर दो हिस्सों में बंट जाएगा और वेस्ट पाकिस्तान ऐसा बिल्कुल नहीं चाहता था। अब पाकिस्तान की तकदीर दो लोगों के हाथों में थी। मुजीब और
13:18
Speaker A
भुट्टो। और इस नाजुक सुरते हाल में पॉलिटिकल क्राइसिस के बीचोंबीच भारत ने अपनी दूसरी चाल चली। जनवरी 1971 में एक इंडियन जहाज के अखवा का ड्रामा रचाया गया जिसके हाईजैक का इल्जाम कश्मीरियों पर लगाया गया और इस वाक्य को बहाना बनाकर
13:33
Speaker A
इंडिया ने पाकिस्तान के जहाजों के लिए अपनी एयर स्पेस बंद कर दी। आप समझ रहे हैं ना इस एक फैसले से क्या हुआ होगा? जी हां, पाकिस्तान के दोनों हिस्से ईस्ट और वेस्ट पाकिस्तान एक दूसरे से बिल्कुल अलग थे।
13:46
Speaker A
दरमियान में कम से कम 1600 कि.मी. तक इंडिया था, और इसके फिजाई हुदूद बंद करने से पाकिस्तान के दोनों हिस्सों का डायरेक्ट राब्ता टूट गया। समझे इंडिया ने पाकिस्तान की स्ट्रैटेजिक नाकाबंदी कर दी और शेख मुजीब ने इंडिया के इस कदम की
14:01
Speaker A
हिमायत की। यह खुला इशारा था कि पर्दे के पीछे क्या खेल चल रहा है और कौन-कौन इस साजिश का किरदार है। 1971 के शुरू के दिन पाकिस्तान की पॉलिटिकल लीडरशिप के दरमियान मुजाकरात पर मुजाकरात हो रहे थे। टेंशन बढ़ती जा रही
14:21
Speaker A
थी और फिर 7 मार्च को शेख मुजीब ने ढाका में एक तारीख जलसा किया। दो देश मानुष के मुक्त करे इंशा्लाह देश और इसमें ऐलान कर दिया नॉन कोऑपरेशन मूवमेंट का एक पूरा ईस्ट पाकिस्तान मुजीब के कहने पर चलने लगा। मशरिकी पाकिस्तान
14:44
Speaker A
में फौज के सिवा हर सरकारी इदारा उनके हुकुम पर चल रहा था। और जब 23 मार्च आया तो एवान सदर और फौजी छावनियों के अलावा पूरे ईस्ट पाकिस्तान में पाकिस्तान की जगह आजाद बांग्लादेश का परचम लहराया गया। यह
14:59
Speaker A
ऐलान था कि मुजाकरात अब नहीं होंगे और जब मुजाकरात का कोई रास्ता ना बचे तो फिर वही होता है जो कभी नहीं होना चाहिए था। 25 मार्च 1971 की रात पाकिस्तानी फौज ने ऑपरेशन सर्च लाइट का आगाज कर दिया। वो
15:13
Speaker A
अनजाने में उसी जाल में फंस गई जो दिल्ली और ढाका ने मिलकर बनाया था। शेख मुजीब को गिरफ्तार कर लिया गया। भारत को अब अपनी आखिरी और सबसे ब्लडी मूव चलने का बहाना मिल गया। वक्त आ गया पाकिस्तान को तोड़ने
15:28
Speaker A
के लिए अपनी आखिरी चाल चलने का। ईस्ट पाकिस्तान में ऑपरेशन का आगाज हुआ और भूचाल आ गया। पाक फौज में मौजूद कई बंगाली फौजियों तक ने बगावत कर दी। 27 मार्च को पाक फौज से बगावत करने वाले मेजर जिया उर
15:46
Speaker A
रहमान ने चिटागोंग रेडियो स्टेशन से बांग्लादेश की आजादी का ऐलान कर दिया। साथ ही ताजुद्दीन अहमद की लीडरशिप में कोलकाता में बांग्लादेश की गवर्नमेंट इन एक्साइल भी बनाई गई। वैसे कुछ बागी फौजी ऐसे भी थे जो पाकिस्तान से फरार होकर सीधा दिल्ली
16:01
Speaker A
पहुंचे थे। उनमें एक थे सेकंड लेफ्टिनेंट शरीफ उल हक दालीम। उनका नाम इसलिए बता रहा हूं क्योंकि आगे उनका किरदार बहुत अहम हो जाएगा। तो इंडिया ने इन बागी फौजियों के साथ मिलकर एक फौज बनाई जिसका नाम रखा गया
16:14
Speaker A
मुक्ति बहिनी। उनकी ट्रेनिंग से लेकर उन्हें हथियार देने तक का सारा काम इंडियन आर्मी करने लगी। जाहिर यही किया गया कि बांग्लादेश की आजादी के लिए वन एंड ओनली मूवमेंट यही है। लेकिन हकीकत यह है कि यह तारीख का सबसे बड़ा झूठ था। इंडिया ने एक
16:29
Speaker A
नहीं दो फौजें बनाई थी। एक वो जो दुनिया को दिखाई और दूसरी वो जो उसका असल और खुफिया हथियार थी। क्योंकि इंडिया किसी पर भरोसा नहीं कर सकता था। उसे डर था यह मूवमेंट उसके कंट्रोल से बाहर हो जाएगी।
16:42
Speaker A
भारत को तो ऐसी सेना चाहिए थी जिसकी लगाम मुकम्मल तौर पर नई दिल्ली के हाथ में हो और यहीं पर शुरू हुई वो कहानी जो अमूमन सुनाई नहीं जाती लेकिन हम आपको सुनाएंगे। यह जंग के शुरू के दिन थे। शेख मुजीब के
16:57
Speaker A
चार बहुत करीबी और वफादार लीडर छुप-छुपा कर दिल्ली पहुंचे। उन्होंने दिल्ली में प्राइम मिनिस्टर इंदिरा गांधी से मुलाकात की और एग्जाइल गवर्नमेंट कायम करने वाले ताजुद्दीन अहमद पर शक का इज़हार किया और बताया कि ताजुद्दीन पर भरोसा नहीं किया जा
17:11
Speaker A
सकता। वो मुजीब के वफादार नहीं है। उन्होंने इंदिरा गांधी से दरख्वास्त की उन्हें एक अदा और ज्यादा वफादार फौज बनाने की इजाजत दी जाए। ऐसी फौज जो डायरेक्टली शेख मुजीब के कॉज के लिए काम करे। यह इंडिया के लिए एक गोल्डन चांस था। इंदिरा
17:26
Speaker A
गांधी ने फौरन इस प्रोजेक्ट का प्रपोजल दिया और फिर एक दूसरी फौज भी बनाई गई जिसका नाम था बांग्लादेश लिबरेशन फोर्स। लेकिन आमतौर पर यह मशहूर हुई मुजीब बहानी के नाम से। इस फौज को बनाने की जिम्मेदारी इंडियन सीक्रेट एजेंसी रॉ को दी गई और
17:48
Speaker A
इंडियन आर्मी के एक मेजर जनरल एस एस उबान ने यह काम संभाला। इस फौज को देहरादून के करीब एक सीक्रेट ट्रेनिंग कैंप में तरबियत दी जाती और उन्हें मुक्ति बहानी के मुकाबले में ज्यादा मॉडर्न और बेहतर हथियार भी दिए गए। यह एक मुकम्मल तौर पर
18:02
Speaker A
प्रॉक्सी आर्मी थी। इस सीक्रेट फोर्स का असल मकसद क्या था? यह कि इंडिया इस बात को यकीनी बनाना चाहता था कि बांग्लादेश की लिबरेशन वॉर का कंट्रोल मुकम्मल तौर पर उसके हाथ में रहे। वो नहीं चाहता था कि
18:15
Speaker A
मेजर जियाउ रहमान जैसे आजाद फौजी ज्यादा ताकतवर हो जाए। जो कल को भारत के लिए दर्द सर बन जाए। मुजीब बहानी सिर्फ इसीलिए बनाई गई थी कि जब बांग्लादेश आजाद हो तो आवामी लीग और शेख मुजीब ही पावर में रहें।
18:30
Speaker A
गुलामी में डिवाइड एंड रूल का निशाना बनने वाला इंडिया अब खुद इसी पॉलिसी पर चल रहा था। वो सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं बल्कि खुद बांग्लादेश की तहरीक आजादी को भी अंदर से डिवाइड कर रहा था। और यह साजिश इतनी
18:43
Speaker A
खुफिया थी कि बांग्लादेश की गवर्नमेंट इन एक्साइल उसके वज़र आजम ताजुद्दीन अहमद बल्कि इंडियन फौज के ईस्टर्न कमांड के सरबराह जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा को भी इसका कुछ पता नहीं था। ये थी इंडिया की स्ट्रेटजी। हर मोहरा एक धोखा था और हर चाल
19:00
Speaker A
एक साजिश। आप क्या समझ रहे हैं? इंडिया ये सब इसलिए कर रहा था क्योंकि वो पाकिस्तान का पुराना दुश्मन था। बिल्कुल नहीं। इसे एक बहुत बड़ा खतरा था। यह देखें यह पतला सा कॉरिडोर है जिसे चिकन स्नेक कहते हैं।
19:15
Speaker A
सिर्फ 22 कि.मी. चौड़ी यह पट्टी नॉर्थ ईस्ट में लोकेटेड इंडिया की सात रियासतों को बाकी मुल्क से जोड़ती है। यह रियासतें आसाम, नागालैंड, मणिपुर वगैरह शुरू से ही बगावत की आग में जल रही हैं। इंडिया से आजादी हासिल करना चाहती हैं। और ईस्ट
19:30
Speaker A
पाकिस्तान या बांग्लादेश इस चिकन स्नेक का गेटकीपर था। अगर बांग्लादेश में एक दोस्त हुकूमत हो, तो भारत अपनी इन रियासतों को आसानी से कंट्रोल कर सकता है। यहां तक कि 16 दिसंबर 1971 का दिन आ गया। 16 दिसंबर 1971 को बांग्लादेश को आजादी
19:52
Speaker A
मिल गई। लेकिन कैसी आजादी? मैंने शरीफ उल हक़ दालीम का जिक्र किया था। पाक फौज के एक बंगाली ऑफिसर जो पाकिस्तान से फरार होकर दिल्ली पहुंचे थे। यही थे जिन्हें बांग्लादेश बनने के बाद मुल्क का आला तरीन फौजी एजाज वीर उत्तम भी दिया गया। वही थे
20:08
Speaker A
जिन्होंने बाद में एक किताब भी लिखी जिसका नाम था बांग्लादेश अनटोल्ड फैक्ट्स। बड़े ही खतरनाक इंकशाफात किए गए थे इस किताब में। पहला यह कि आजादी के बाद इंडियन आर्मी ने बांग्लादेश में बहुत बड़े पैमाने पर लूटमार की। इस द ग्रेट लूटमार में
20:22
Speaker A
भारतीय फौज करोड़ों डॉलर का पाकिस्तानी फौजी सामान, असलहा, गाड़ियां और दूसरी चीजें अपने साथ ले गई। यहां तक कि इंडस्ट्रियल मशीनरी को भी उखाड़ कर भारत भेज दिया गया। आजादी के बाद कुछ अरसे के लिए इंडिया के साथ बॉर्डर भी खुला छोड़
20:36
Speaker A
दिया गया। एक ऐसा फैसला जो मुनज्जम लूटमार का हिस्सा था। क्योंकि इसकी वजह से इंडियन फौज और स्मगलर अरबों रुपए का सामान बांग्लादेश ले गए। सिर्फ 1972 से 1975 तक। एक अंदाजे के मुताबिक $2 अरब डॉलर का माल
20:52
Speaker A
बांग्लादेश से इंडिया स्मगल किया गया। लेकिन शरीफ उल हक ने इससे भी बढ़कर जो दावा किया वो यह था कि जब जंग चल रही थी ताजुद्दीन अहमद की जिला वतन गवर्नमेंट इंडिया में बैठी थी तब इसने भारत के साथ
21:05
Speaker A
एक मोयदा कर लिया था एक सीक्रेट सिविल पॉइंट एग्रीमेंट जिसने बांग्लादेश को इंडिया की क्लाइंट स्टेट बना दिया क्योंकि इस एग्रीमेंट के तहत बांग्लादेश की फॉरेन पॉलिसी ब्यूरोक्रेसी और इकॉनमी मुकम्मल तौर पर इंडिया के ताबे कर दी गई। जिस-जिस
21:21
Speaker A
चीज का मुतालबा पाकिस्तान से किया जा रहा था, जिसके लिए छह नुकात बनाए जा रहे थे, वह सब कुछ इंडिया को दे दिया गया। बिल्कुल प्लान के ऐन मुताबिक। 8 जनवरी 1972 को 9 माह की कैद के बाद
21:39
Speaker A
पाकिस्तान ने बांग्लादेश के बानी, शेख मुजीब उर रहमान को रिहा कर दिया। पूरी दुनिया की नजरें अब उन्हीं पर थी। उनका हर कदम, हर लफ्ज नए मुल्क की डायरेक्शन तय करने वाला था। मुजीब रिहाई के बाद पहले लंदन पहुंचे। जहां से सीधा अपने वतन अपने
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Speaker A
लोगों के पास ढाका जा सकते थे। लेकिन नहीं वो ढाका नहीं गए। जी हां, वो लंदन से सीधा दिल्ली पहुंचे। यह एक ऐलान था। एक बहुत बड़ा सिंबॉलिक यानी अलामती ऐलान कि बांग्लादेश का रास्ता दिल्ली से होकर गुजरता है। दिल्ली में
22:13
Speaker A
इंदिरा गांधी से मुलाकात की। बाद में शेख मुजीब उर रहमान एक इंडियन जहाज में बैठकर ढाका पहुंचे। जहां लाखों लोगों ने उनका इस्तकबाल किया। आजादी का सूरज उभर रहा था। लेकिन सूरज के निकलते ही उस पर ग्रहण लग
22:27
Speaker A
गया। ढाका पर अब नई दिल्ली का हाथ था। मार्च 1972 इंदिरा गांधी ढाका के दौरे पर आई। और फिर बांग्लादेश और इंडिया के बीच एक एग्रीमेंट हुआ। 25 साला दोस्ती, कोऑपरेशन और अमन का मोहदा। नाम बड़ा खूबसूरत था। लेकिन इस मोयदे की शर्तें तो
22:46
Speaker A
देखें। ऐसा लगता है बांग्लादेश ने खून पसीने से हासिल की गई आजादी इंडिया को दे दी। लेकिन हैरान ना हो यह सब प्लान के मुताबिक था। शेख मुजीब और इंदिरा गांधी की साजिश के ऐन मुताबिक। और इस मोयदे के
22:59
Speaker A
पॉइंट्स तो देखें। खासतौर पर आखिरी तीन क्लॉज़ तो बहुत ही कंट्रोवर्शियल है। क्लॉज़ नंबर नौ के मुताबिक दोनों में से कोई भी मुल्क किसी ऐसे फौजी इत्तेहाद में शामिल नहीं हो सकता, जो दूसरे मुल्क के खिलाफ हो। इसका मतलब यह है कि बांग्लादेश भारत
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Speaker A
की मर्जी के बगैर चीन, अमेरिका बल्कि किसी भी मुल्क के साथ कोई डिफेंस एग्रीमेंट नहीं कर सकता। फिर क्लॉज़ नंबर 10 तो देखें। अगर किसी मुल्क की सिक्योरिटी को खतरा हो तो दोनों मुल्क फौरन मिलकर कारवाई करेंगे। यानी इंडिया को बांग्लादेश के
23:30
Speaker A
अंदरूनी मामलात में फौजी मुदाखलत का खुला जवाज मिल गया। शेख मुजीब ने बांग्लादेश को कानूनन इंडिया की एक तफैली रियासत बना दिया। अब बांग्लादेश एक ब्लैक होल बन चुका था। जंग के बाद कत्लो गारत और लूटमार का वो सिलसिला शुरू हुआ कि सोचकर भी रूह कांप
23:47
Speaker A
जाती है। शेख मुजीब की पार्टी के लोग ही नहीं बल्कि उनके घर वालों ने भी इस बहती गंगा में खूब हाथ धोए। उनके भाई शेख नसीर पर स्मगलिंग और जायदादों पर कब्जे के इल्जामात लगे। भतीजे और यहां तक कि अपने
24:00
Speaker A
बेटे शेख कमाल पर बैंग डकैती जैसी भयानक एक्टिविटी में मुलव्विस होने के इल्जामात लगे। इन हालात में शेख मुजीब ने एक काम किया। उन्होंने एक प्राइवेट मलेशिया बना डाली। एक पैरेलल आर्मी नाम था जातिया रखी बहानी। यह फ़ सिर्फ और सिर्फ शेख मुजीब के
24:16
Speaker A
अंडर में थी। और इसे भी इंडियन फौज ने ही ट्रेनिंग और हथियार दिए थे। यह मुजीब बहानी का अपग्रेडेड वर्जन थी। जिसका काम था शेख मुजीब के पॉलिटिकल मुखालफों को खासतौर पर इस्लाम पसंदों को कुचलना। रखी बहानी पर हजारों लोगों की अल्ट्रा
24:28
Speaker A
जुडिशियल किलिंग के इल्जाम है। यानी दूसरों पर जेनोसाइड के इल्जाम लगाने वाले खुद इस काम में सबसे आगे रहे। अब बांग्लादेश में बेचैनी थी और सबसे बढ़कर फौज के अंदर जिससे साफ नजर आ रहा था कि यह जो पैरेलल आर्मी खड़ी की जा रही है जो
24:43
Speaker A
इंडिया के इशारों पर नाच रही है एक दिन उनका भी खात्मा कर देगी। तो आवाम की फौज की मायूसी गुस्सा और मुल्क की इस तबाही ने बिल आखिर उस खूनी अंजाम की बुनियाद रख दी जो शेख मुजीब का मुकद्दर बनने वाला था।
25:02
Speaker A
15 अगस्त 1975 सुबह-सुबह कुछ बागी फौजियों ने शेख मुजीब के घर पर हमला कर दिया और सिर्फ इन्हें ही नहीं उनके खानदान के हर मेंबर को बेदर्दी से कत्ल कर दिया। बीवी, भाई, तीन बेटे, दो बहुएं यहां तक कि
25:18
Speaker A
नौकरों को भी मार दिया गया। बंगला बंधु यानी बंगालियों का बाप अपनी ही कौम के हाथों मारा गया। और इस खोनी बगावत के साथ ही बांग्लादेश में इंडियन इन्फ्लुएंस का पहला पीरियड खत्म हो गया। अगले 15 साल तक मुल्क पर ज्यादातर फौजी
25:35
Speaker A
जनरलों की हुकूमत रही। पहले जनरल जिया उर रहमान और फिर हुसैन मोहम्मद इरशाद। उनके पीरियड में बांग्लादेश की फॉरेन पॉलिसी ने एक बड़ा यूटर्न लिया। नई फौजी लीडरशिप इंडिया के इन्फ्लुएंस को कम करने और मुल्क की इस्लामिक आइडेंटिटी को रिस्टोर करने की
25:49
Speaker A
कोशिश करती रही। बल्कि पाकिस्तान के साथ ताल्लुकात को भी बेहतर बनाया। यहां तक कि 1991 में बांग्लादेश में डेमोक्रेसी रिस्टोर हो गई। है तो यह अच्छी बात लेकिन इस डेमोक्रेसी ने एक नई दुश्मनी को जन्म दिया। एक नई जंग का आगाज कर दिया। जिसे
26:05
Speaker A
तारीख में बैटल ऑफ बेगम्स यानी बेगमों की जंग कहा जाता है। एक तरफ थी जनरल जियाउ रहमान की बेवा बेगम खालिदा जिया और उनकी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी जिसका नजरिया बांग्लादेशी नेशनलिज्म और इस्लाम पर मबनी था और उनका झुकाव पाकिस्तान और
26:20
Speaker A
चीन की तरफ समझा जाता था। और दूसरी तरफ थी शेख हसीना। शेख मुजीब उर रहमान की वो बेटी जो 15 अगस्त 1975 को उस रात बच गई थी। क्योंकि वो मुल्क से बाहर जर्मनी में थी। उनकी पार्टी आवामी लीग की आईडियोलॉजी थी।
26:34
Speaker A
बंगाली कौम परस्ती और सेकुलरिज्म और अपने बाप की तरह शेख हसीना भी इंडिया की खुली सपोर्टर बल्कि पार्टनर थी। फिर तकरीबन 20 साल तक यही दोनों खवातीन बारी-बारी बांग्लादेश पर हुकूमत करती रहीं और मुल्क की फॉरेन पॉलिसी एक पेंडुलम की तरह कभी
26:50
Speaker A
भारत तो कभी पाकिस्तान के दरमियान झूलती रही। यहां तक कि 2009 में शेख हसीना पावर में ऐसा आई कि फिर उन्हें हराना नामुमकिन हो गया। अगले 15 साल इंडिया बांग्लादेश ताल्लुकात का गोल्डन पीरियड थे। क्योंकि शेख हसीना ने इंडिया को वो सब कुछ दिया
27:05
Speaker A
जिसका वह ख्वाब देखता था। उन्होंने भारत का सबसे बड़ा सरदर्द कम किया। यानी नॉर्थ ईस्टर्न रियासतों के बागियों के खिलाफ एक भरपूर क्रैकडाउन किया। बांग्लादेश में मौजूद इन बागियों के ठिकाने खत्म किए और उनके रहनुमाओं को पकड़ कर भारत के हवाले
27:20
Speaker A
किया। यानी भारत की चिकन स्नेक पहले से कहीं ज्यादा महफूज़ हो गई। फिर वही थी जिन्होंने इंडिया को बांग्लादेश की सरजमी और बंदरगाहों के जरिए इन रियासतों तक ट्रांजिट ट्रेड की इजाजत दी। यह एक बहुत बड़ी सहूलत थी जिससे भारत को अरबों डॉलर
27:35
Speaker A
की बचत हुई। फिर हर आर्मी फोरम पर बांग्लादेश ने हमेशा भारत को सपोर्ट किया। ढाका ने हमेशा वही जबान बोली जो नई दिल्ली बोलता था। उन सबके बदले में इंडिया ने शेख हसीना का ना सिर्फ पॉलिटिक्स और डिप्लोमेसी में साथ दिया बल्कि सीक्रेट
27:49
Speaker A
सपोर्ट भी फराहम की। बांग्लादेश पर जो भी इल्जाम लगे इंडिया हमेशा हसीना वाजिद के साथ खड़ा रहा। यह एक खुली डील थी। तुम हमारी सिक्योरिटी का ख्याल रखो। हम तुम्हारे संहासन का ख्याल रखेंगे। तभी हसीना गवर्नमेंट ओवर कॉन्फिडेंट हो गई। और
28:03
Speaker A
जब एतमाद हद से ज्यादा बढ़ जाए तो गलत कदम उठने लगते हैं। शेख हसीना ने बेगम खालिदा जिया समेत पूरी अपोजिशन को जेलों में डाल दिया। बल्कि जमात इस्लामी की तो तकरीबन पूरी लीडरशिप को फांसी पर चढ़ा दिया या
28:17
Speaker A
उमर कैद की सजाएं दिलवा दी। हालात बिगड़ रहे थे, टेंशन बढ़ रही थी जिसे रिलीज करने की जरूरत थी। लेकिन नहीं शेख हसीना ने ऐसा नहीं किया और फिर प्रेशर कुकर फट गया। साल 2024 सरकारी नौकरियों में कोटा सिस्टम
28:38
Speaker A
के खिलाफ बांग्लादेश के तलबा ने एक पीसफुल मूवमेंट शुरू की। उनका मुतालबा था कि सरकारी नौकरियों में कोटा लिमिटेड किया जाए और मेरिट को बढ़ाया जाए। असल में हसीना गवर्नमेंट ने फैसला किया था कि ज्यादातर सरकारी नौकरियां उन लोगों को
28:52
Speaker A
मिलेंगी जिनके बाप दादा ने लिबरेशन वॉर में हिस्सा लिया था। जी हां, जिन्होंने 71 की जंग में हिस्सा लिया। वही नहीं उनकी औलादें बल्कि उनकी औलादों की औलादें भी मुफ्त में सरकारी नौकरियां ले रही थी। यह ऐसा फैसला था जिसके बाद आतिश फट पड़ा।
29:11
Speaker A
शेख हसीना की डिक्टेटरशिप और भारत को सपोर्ट करती पॉलिसियों के खिलाफ एक इंकलाब शुरू हो गया। जिसे लीड कर रही थी बांग्लादेश की जजी। वो नस्ल जिसने तारीख सरकारी अखबारों या टीवी चैनल्स पर नहीं इंटरनेट से सीखी है
29:29
Speaker A
और वो जनरेशन जो सवाल पूछने से नहीं डरती और जब यह नस्ल मैदान में आती है तो दुनिया का बड़े से बड़ा डिक्टेटर उनके आगे टिक नहीं सकता। हसीना वाजिद ने हर कोशिश कर ली। हजारों लोगों को मरवाया लेकिन इंकलाब
29:43
Speaker A
कामयाब हो गया। 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना मुल्क छोड़कर भाग गई। कहां? जी हां, इंडिया। बांग्लादेश आजाद हो गया। एक बार फिर। इंडिया ने 1971 में बांग्लादेश को आजादी तो दिलवा दी थी। इसे जंग तो जितवा दी थी
30:05
Speaker A
लेकिन वो बांग्लादेश के आवाम का दिल नहीं जीत सका क्योंकि वो बांग्लादेश को दोस्त नहीं एक सेटेलाइट स्टेट समझता था और जेंज़ ऐसे किसी इन्फ्लुएंस को नहीं मानती। आज एक नए बांग्लादेश की बागदौड़ नौजवान नस्ल के हाथ में है। उनके सामने चैलेंज बहुत बड़े
30:22
Speaker A
हैं। एक तबाहल इकॉनमी, एक टूटा फूटा मौशरा, एक ताकतवर पड़ोसी जो उन्हें हर सूरत नाकाम देखना चाहता है। चीन और पाकिस्तान आगे बढ़ रहे हैं। रीजन में एक नई जियोपॉलिटिकल सज्जबंदी हो रही है। इंडिया की मोनोपोली खत्म हो रही है। तो
30:39
Speaker A
क्या बांग्लादेश अब वाकई हकीकी मायनों में आजाद होगा? यह फैसला वहां की जजी करेगी।
Topics:पाकिस्तान टूटनाबांग्लादेश स्वतंत्रता1971 की जंगभारत की रणनीतिशेख मुजीब उर रहमानअगरतला साजिशमशरिकी पाकिस्तानमगरबी पाकिस्तानइंडियन इंटेलिजेंसबंगाली राष्ट्रीयता

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