पाकिस्तान और सऊदी अरब ने रणनीतिक रक्षा समझौता किया, जिससे भारत और इसराइल में हलचल मची। यह समझौता क्षेत्रीय सुरक्षा पर बड़ा प्रभाव डालेगा।
Key Takeaways
- पाकिस्तान-सऊदी अरब रक्षा समझौता भारत के लिए नई सुरक्षा चुनौती है।
- समझौता दोनों देशों के बीच व्यापक सैन्य सहयोग को दर्शाता है।
- सऊदी अरब को पाकिस्तान की न्यूक्लियर सुरक्षा मिली है, जो क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित करता है।
- इस समझौते से इस्लामी दुनिया में पाकिस्तान की प्रतिष्ठा और समर्थन बढ़ा है।
- भारत और इसराइल के लिए यह समझौता रणनीतिक रूप से चिंताजनक है।
What the video covers
- पाकिस्तान और सऊदी अरब ने 17 सितंबर को एक महत्वपूर्ण रणनीतिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए।
- यह समझौता भारत के लिए नई सुरक्षा चुनौतियां पैदा करता है और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित करता है।
- पाकिस्तान ने हाल की सीमा संघर्षों में सैन्य और कूटनीतिक मोर्चे पर सफलता हासिल की है।
- इस समझौते में दोनों देशों ने एक-दूसरे की रक्षा के लिए व्यापक प्रतिबद्धता जताई है, जो NATO से भी अधिक व्यापक है।
- सऊदी अरब ने पाकिस्तान से यह समझौता भारत के बजाय किया, जो भारत-सऊदी अरब संबंधों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
- इस समझौते के तहत सऊदी अरब को पाकिस्तान की न्यूक्लियर सुरक्षा भी मिली है।
- इस्लामी दुनिया में पाकिस्तान की प्रतिष्ठा इस समझौते और हालिया घटनाओं के कारण बढ़ी है।
- इसराइल और अमेरिका इस समझौते को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए चुनौती के रूप में देख रहे हैं।
- पाकिस्तान ने ईरान का समर्थन करते हुए इस्लामी दुनिया में अपनी स्थिति मजबूत की है।
- यह समझौता क्षेत्रीय तनावों को बढ़ा सकता है और भारत के लिए नई रणनीतिक समस्याएं उत्पन्न कर सकता है।
Chapters
- 00:00पाकिस्तान की वर्तमान स्थिति और अंतरराष्ट्रीय अलगाव
- 01:06पाकिस्तान-सऊदी अरब रणनीतिक रक्षा समझौते का परिचय
- 02:11दक्षिण एशिया में परमाणु तनाव और अमेरिका की भूमिका
- 03:21पाकिस्तान की कूटनीतिक सफलताएं और अंतरराष्ट्रीय छवि में बदलाव
- 05:23पाकिस्तान को मिली वैश्विक समर्थन और इस्लामी दुनिया में प्रतिष्ठा
- 08:27इसराइल और अमेरिका के प्रति पाकिस्तान का बहादुर रुख
- 09:11समझौते की विशेषताएं और सऊदी अरब की रणनीतिक मजबूरियां
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Speaker A
[संगीत] हमारा पड़ोसी देश बहुत बुरे दौर से गुजर रहा है। वो अब विश्व में इतना अलग थलग कर कि बड़े-बड़े देश उससे दूरी बनाने लगे हैं।
Speaker A
वो कटोरा लेकर के घूम रहा है। अरे नरेंद्र मोदी तो कह रहे थे पाकिस्तान दुनिया से अलग-थलग हो गया है। कटोरा लेकर फिर रहा है। मगर फिर ये क्या हुआ?
Speaker A
पाकिस्तानी वजीर-ए-आज़म का तो सऊदी अरब में ऐसा इस्तकबाल हुआ कि मोदी ने ख्वाब में भी नहीं सोचा होगा। ऐसा प्रोटोकॉल तो सिर्फ अमेरिका और रूस के सदर को मिला करता था। सऊदी दारुल हुकूमत रियाज़ को दुल्हन की तरह
Speaker A
सजाया गया था। जगह-जगह पाकिस्तानी झंडे लगे हुए थे। पाकिस्तान और सऊदी अरब में जो डिफेंस एग्रीमेंट हुआ है उसकी टाइमिंग भी बड़ी अहम है। यह 17 सितंबर को नरेंद्र मोदी की सालगिरह के दिन साइन हुआ है। परमिशन टू स्टार्ट द साइनिंग सेरेमनी ऑन द
Speaker A
स्ट्रेटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट बिटवीन द किंगडम ऑफ सऊदी अरेबिया एंड द इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान। पाकिस्तान सऊदी अरब म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट को पाकिस्तान की बहुत बड़ी जीत करार दिया जा रहा है और इंडिया समेत कई मुल्कों में इस मोहदे से खलबली मची हुई
Speaker A
है। अटैक ऑन पाकिस्तान विल नाउ बी टेकन एस एन अटैक ऑन सऊदी अरेबिया। पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच एक डिफेंस एग्रीमेंट हुआ है। भारत के लिए यह स्ट्रेटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट एक नई सरदर्दी बनकर आई है। भारत पर इसका असर क्या पड़ेगा?
Speaker A
सऊदी अरब ने यह एग्रीमेंट इंडिया से क्यों नहीं किया? पाकिस्तान और सऊदी अरब को इस मोहदे से क्या फायदा हुआ है? और कौन-कौन से मुल्क अब पाकिस्तान के साथ ऐसा मोयदा करेंगे? इसराइल इस एग्रीमेंट के जवाब में क्या कर सकता है? और अमेरिका इस एग्रीमेंट
Speaker A
को कैसे देखता है? इन सब सवालों पर आज बात करेंगे। लेकिन पहले इंकलाब को सब्सक्राइब और वीडियो को लाइक जरूर कर लें ताकि हम ऐसी ही रिसर्च बेस्ड वीडियोस आपके लिए लाते रहें। तो चलिए पहले ट्रंप की यह कुछ
Speaker A
बातें सुनते हैं। इंडिया एंड पाकिस्तान गना एंड अप इन न्यूक्लियर वॉर आई डिड स्ट्रेंज आई सॉ दे फाइटिंग देन आई सॉट्स श डाउन आई से गुड दैट्स अ लॉट ऑफ जेट्स यू नो 150 मिलियन प्ले श डाउन जी हां चंद महीने पहले तक साउथ एशिया में
Speaker A
एटमी जंग के बादल छाए हुए थे। पूरी दुनिया की नजरें यहां लगी हुई थी। पहलगाम वाक्य के बाद जब भारत ने पाकिस्तान के अंदर कारवाइयां की तो पाकिस्तान ने जवाब में ड्रोन और मिसाइल हमले किए। भारतीय अड्डों को निशाना बनाया और उनके कीमती राफेल
Speaker A
तैयारे भी मार गिराए। फिर एक गैर मुतवक्का मोड़ आया। सदर ट्रंप ने अचानक ट्वीट किया कि अमेरिका ने लड़ाई खत्म करा दी है। हालांकि अमेरिकी नायब सदर तो चंद रोज पहले तक कह रहे थे कि यह उनका मामला ही नहीं। फिर अचानक क्या बदला?
Speaker A
बजाहिर यह नतीजा था इस बात का कि पाकिस्तान ने अपनी नेशनल कमांड अथॉरिटी को एक्टिव कर दिया था। यह अथॉरिटी एटमी हथियारों को कंट्रोल करती है। अब जब रीजन में एटमी जंग का खतरा मंडलाने लगा तो अमेरिका को बीच में आना पड़ा।
Speaker A
पाकिस्तान को तो जंग के मैदान में बरतरी मिल चुकी थी। इसीलिए पाकिस्तान ने अमेरिका की सालसी खुशी से कबूल कर ली। पाकिस्तान के वज़र खारजा इसाक डार ने बताया कि भारत खुद अमेरिका के पास गया था कि पाकिस्तानी
Speaker A
हमले बंद करवाओ। बहरहाल पाकिस्तान को असल कामयाबी जंग के मैदान के बजाय डिप्लोमेसी के मैदान में मिली। कई दहाइयों से दुनिया पाकिस्तान को इंडिया के चश्मे से देखती थी। दहशतगर्दी, पॉलिटिकल इनस्टेबिलिटी, और इकोनॉमिकल इनस्टेबिलिटी को पाकिस्तान के साथ जोड़ दिया गया था।
Speaker A
मगर आज हमारे वजीर एआम आलमी ताकतों के साथ शाना बशाना चलते हैं और हमारे फील्ड मार्शल व्हाइट हाउस में लंच पर नजर आते हैं। मगर सवाल यह है कि यह हुआ कैसे? असल में पाक इंडिया सीज फायर के चंद ही हफ्ते बाद
Speaker A
पाकिस्तान एक्टिव हो गया। वजीर एआम शबाज शरीफ और नए तरक्की पाने वाले फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने मुख्तलिफ मुल्कों के दौरे किए। मुख्तलिफ जमातों के नुमाइंदों का वफ भी अमेरिका और यूरोप समेत कई मुल्कों में गया और वहां पाकिस्तानी नैरेटिव कामयाबी
Speaker A
से पेश किया। इंडिया के प्रोपेगेंडे का पर्दा चाक कर दिया गया। बहरहाल ये चार रोजा जंग ही वो मोड़ था जिसने पाकिस्तान का इंटरनेशनल इमेज बदल दिया। बरसों तक बाइडन इंतजामिया ने पाकिस्तान को नजरअंदाज किया रखा था। और
Speaker A
उसके रवैया की वजह से यूरोप भी पाकिस्तान के साथ यही सुलक कर रहा था। आलमी इदारे पाकिस्तान के साथ काम तो कर रहे थे मगर शक और बेदिली से मगर यह जंग सब कुछ बदल गई। मोदी सरकार ने इलेक्शन में फायदे के लिए
Speaker A
जो फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन किया था वो उल्टा पाकिस्तान के हक में बेहतर साबित हुआ। आइए देखते हैं इस जंग से पाकिस्तान को क्या-क्या कामयाबियां मिली। कामयाबी नंबर एक कश्मीर का मसला दोबारा दुनिया की नजरों में आ गया। भारत कई बरसों
Speaker A
से इसे दो मुल्कों का मामला कहकर दुनिया की आंखों में धूल झोंकता आ रहा था। मगर इस बोहरान के दौरान अमेरिका को सालसी करना पड़ी। जिसने बताया कि कश्मीर एटमी जंग का फ्लैश पॉइंट है। और अगर दुनिया ने मिलकर
Speaker A
इसका कोई हल ना निकाला तो कोई बड़ा बोहरान भी पैदा हो सकता है। दूसरी कामयाबी यह मिली कि अमेरिका ने इंडिया और पाकिस्तान को दोबारा एक साथ देखना शुरू कर दिया। कई बरसों से अमेरिका भारत को बड़े प्लेयर और
Speaker A
पाकिस्तान को एक गैर अहम मुल्क के तौर पर ट्रीट कर रहा था। मगर इस झड़प के बाद दोनों एक लेवल पर आ गए। तीसरी कामयाबी यह मिली कि पाकिस्तान को वर्ल्ड फोरम पर मजबूत इत्तेहादी मिल गए। सबसे पहले तो चीन
Speaker A
की बात करते हैं। चीन ने इस जंग में पाकिस्तान का खुलकर साथ दिया। भारतीय जहरत को गलत कहा बल्कि इंडियन राफेल तैयारे गिराने में चीनी टेक्नोलॉजी ही काम आई। फिर शबाज शरीफ का शी जिन पिंग के साथ फौजी परेड में शाना बशाना खड़े होना एक अलामती
Speaker A
तस्वीर बन गया। तुर्की ने न सिर्फ पाकिस्तान के साथ खुलकर खड़ा होने का ऐलान किया बल्कि एक तुर्क जंगी जहाज कराची भेजकर यकजैती का पैगाम दिया। उस पर इंडिया में बड़ी आग लगी और तुर्की के बॉयकॉट की मुहिम भी चली। अज़रबैजान ने भी
Speaker A
पाकिस्तान की वाजे हिमायत की। सऊदी अरब ने तो पहले खामोशी से सीज फायर के लिए कोशिशें की। फिर पाकिस्तान के साथ जॉइंट नेविल एक्सरसाइजेस और इन्वेस्टमेंट एग्रीमेंट करके बता दिया था कि वह असल में किसके साथ है। एक और बड़ा फायदा यह हुआ कि
Speaker A
इस्लामिक वर्ल्ड में पाकिस्तान की रिस्पेक्ट दोबारा बढ़ गई। सब ने देखा कि पाकिस्तान ने किस तरह अपने से कई गुना बड़े मुल्क का हमला नाकाम बनाया और इसको ऐसा शदीद नुकसान पहुंचाया कि अब भारत कोई हमला करने से पहले 10 बार सोचेगा। तो इस
Speaker A
जंग में पाकिस्तान की जीत का जश्न पूरी इस्लामिक दुनिया में मनाया गया। इन 57 इस्लामिक मुल्कों के आवाम की तरह उनके हुक्मरान भी यह सब देख रहे थे। फिर एक और अहम वाकया यह हुआ कि जून 2025 में जब
Speaker A
इसराइल ने ईरान पर हमला किया तो पाकिस्तान ने खुलकर ईरान की हिमायत की और इसराइल की जहारियत की मुजम्मत की। ऐसे वक्त में जब अमेरिका यूरोप जैसी ताकतें इसराइल के साथ थी। पाकिस्तान का यह मौकफ बहुत दिलेराना था। जवाब में ईरान की पार्लियामेंट में
Speaker A
तशक्कुर पाकिस्तान तशक्कुर पाकिस्तान के नारे गूंजे। यानी शुक्रिया पाकिस्तान। शुक्रिया पाकिस्तान। तो पाकिस्तान का यह बहादुरी वाला स्टांस भी इस्लामिक दुनिया की नजरों में आया। सबने देखा कि पाकिस्तान ही वो मुल्क है जो सिर्फ भारत ही नहीं इसराइल और अमेरिका के
Speaker A
सामने सीना तान कर खड़ा हो सकता है और उनको ललकार सकता है। नारा तकबीर। ऐसे में जाहिर है मिलिट्री लिहाज से कमजोर मुल्क पाकिस्तान से ही उम्मीदें लगाएंगे। और फिर जब इसराइल ने क़तर पर हमला किया तो अरब दुनिया की आंखें जैसे खुल गई। यह हमला
Speaker A
ऐसे मुल्क में हुआ जहां अमेरिका का सबसे बड़ा अड्डा है और क़तर के साथ ताबुन के मोहदे भी हैं। अरब मुल्कों ने देखा कि जब अमेरिका ने क़तर को नहीं बचाया तो वो इन्हें भी क्यों बचाएगा? तो ये थे वो
Speaker A
हालात जिनमें सऊदी अरब ने पाकिस्तान से म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट किया। सऊदी अरब को इसराइल से क्यों खतरा है और ग्रेटर इसराइल मंसूबा क्या है? इस पर हम आगे चलकर बात करेंगे। अभी यह देखते हैं कि यह एग्रीमेंट मोदी की बड़ी नाकामी क्यों है
Speaker A
और इस एग्रीमेंट का इंडिया और सऊदी अरब के ताल्लुकात पर क्या असर पड़ेगा। सबसे पहले तो ये देखें कि इस एग्रीमेंट को नेटो की तरह का मोयदा करार दिया जा रहा है। और भारत में खूब हाहाकार मची है।
Speaker A
भारत और पाकिस्तान के रिश्ते में जो नहीं होना चाहिए था वो हो गया। सऊदी अरब ने पाकिस्तान के साथ ये समझौता क्यों किया? सऊदी अरब की घटती ताकत और बढ़ती अस्थिरता ने उसे ऐसा फैसला लेने पर मजबूर कर दिया जो सरासर भारत विरोधी है।
Speaker A
पाकिस्तानियों को चिल्ला-चिल्ला कर यह बताया जा रहा है कि अब की बार अगर भारत ने हमला किया तो सऊदी अरब पाकिस्तान का साथ देगा। भाई हम तो कहते हैं कि नेटो से भी बड़ा मोयदा है। क्योंकि नेटो एग्रीमेंट के
Speaker A
आर्टिकल फाइव में तो कहा गया है कि आर्म्ड अटैक की सूरत में यह सब मुल्कों पर अटैक तसवुर होगा। जबकि पाक सऊदी एग्रीमेंट में अग्रेशन का लफ्ज इस्तेमाल किया गया है जो ज्यादा ब्रॉड है। यानी जरूरी नहीं कि आर्म
Speaker A
अटैक हो। किसी भी किस्म की जाहिरत की सूरत में दोनों मुल्क एक दूसरे का दिफा करेंगे। और सबसे अहम बात जिस पर पाकिस्तान और सऊदी अरब के मुखालिफन की नींदें उड़ी हुई हैं वो ये है कि सऊदी अरब को पाकिस्तान की
Speaker A
न्यूक्लियर प्रोटेक्शन भी मिल गई है। अब सवाल यह है कि सऊदी अरब ने पाकिस्तान से यह एग्रीमेंट क्यों किया? इंडिया से क्यों नहीं किया? हालांकि इं
Speaker A
रिश्ता मजहब का भी है। जो इन्वेस्टमेंट के रिश्ते से बहुत ज्यादा मजबूत होता है। मक्का मुकर्रमा और मदीना मुनवरा जितना अहम पाकिस्तान के लिए है वो इंडिया के लिए कभी हो ही नहीं सकता। फिर सऊदी अरब को जिस मुल्क से खतरा है भारत तो
Speaker A
इसका बहुत अहम दोस्त है। रिलेशंस बिटवीन इंडिया एंड इजराइल इज जेनुइन मेंशन। प्राइम मिनिस्टर मोदी अ हैप्पी बर्थडे। तो भारत खुद भी कभी ऐसा मोयदा सऊदी अरब से नहीं कर सकता था। अब अगर इसका जिक्र करें कि सऊदी अरब को इसराइल से क्या खतरा है तो
Speaker A
वह है ग्रेटर इसराइल मंसूबा। थ्रू द यूएई, सऊदी अरेबिया, जॉर्डन, इजराइल। 100 साल से यानी इसराइल के कायम होने के भी तकरीबन 25 साल पहले से यह बातें फैली हुई हैं। दरिया नील से दरिया फरात तक का हिस्सा इसराइल में शामिल होगा।
Speaker A
कुछ साल पहले अमेरिका की कार्नेल यूनिवर्सिटी ने ग्रेटर इसराइल के कुछ नक्शे जारी किए थे। उन नक्शों में दिखाया गया है कि उर्दन, शाम, इराक समेत मिस्र और सऊदी अरब के कई इलाके भी इसराइल का हिस्सा होंगे। कुछ नक्शों में तो मदीने मुनवरा को
Speaker A
भी इसराइली मुमिकत का हिस्सा दिखाया गया है। क्योंकि इस्लाम से पहले मदीने मुनव्वरा और खैबर में यहूदी भी रहते थे। इसीलिए बुनियाद परस्त यहूदी इस सरजमीन को भी अपनी मल्कि तसवुर करते हैं। इसके अलावा सऊदी अरब फस्तीन की भी खुलकर हिमायत करता
Speaker A
है और इसराइल को तस्लीम ना करने वाले मुल्कों में शामिल है। इसका असर दूसरे इस्लामिक मुल्कों में भी पड़ता है। इसीलिए भी इसराइल सऊदी अरब का दुश्मन है। अब तक सऊदी अरब अपने डिफेंस के लिए अमेरिका पर डिपेंड करता था। मगर कतर पर हमले के बाद
Speaker A
से इसकी भी सोच बदल गई है और माहिरीन अब इमकान जाहिर कर रहे हैं कि यूएई और क़तर भी जल्द पाकिस्तान के साथ ऐसा मुहदा करेंगे और हो सकता है फिर ख्ते के कुछ और मुालिक भी इस एग्रीमेंट में शामिल होते
Speaker A
जाएंI और यह वाकई नेटो जैसा वसी एग्रीमेंट बन जाए। इस एग्रीमेंट से सऊदी अरब का फायदा तो हमने जान लिया मगर पाकिस्तान को क्या मिलेगा। पाकिस्तान को तो सऊदी अरब की मिलिट्री पावर की इतनी जरूरत नहीं। पाकिस्तान का
Speaker A
असल मसला है उसकी इकॉनमी। पाकिस्तान पर तकरीबन $130 अरब डॉलर का कर्जा है। जिसमें चीन के बाद बड़ा हिस्सा वेस्टर्न मुल्कों और आईएमएफ का है। और पाकिस्तान की एक्सपोर्ट भी ज्यादातर अमेरिका और यूरोप को होती है। अभी तक तो अमेरिका ने इस
Speaker A
एग्रीमेंट पर कोई खास रिएक्शन नहीं दिया। लेकिन अगर वह पाकिस्तान पर कोई तजारती पाबंदियां लगाता है, रुकावटें घड़ी करता है या आईएमएफ के जरिए पाकिस्तान को तंग करने की कोशिश करता है तो पाकिस्तान के लिए मुश्किल हो सकती है। दूसरी तरफ
Speaker A
पाकिस्तान का पूरा कर्जा उतारना भी सऊदी अरब के लिए मुश्किल नहीं सिर्फ सऊदी आरामों की सालाना इनकम $20 अरब डॉलर के आसपास है। अगर वाकई ऐसा हो कि सऊदी अरब पाकिस्तान में इन्वेस्टमेंट करे, मज़ीद इस्लामिक मुल्क पाकिस्तान के साथ ऐसे
Speaker A
एग्रीमेंट और ट्रेड करें, तो पाकिस्तान कुछ ही बरसों में एक बड़ी इकोनमिक पावर बन जाएगा। बहरहाल इस एग्रीमेंट से इंडिया के साथ सबसे ज्यादा तकलीफ इसराइल को हो रही है। पाकिस्तान का एटमी प्रोग्राम इसराइल की नजरों में सबसे ज्यादा खटकता है। भारत
Speaker A
से इसराइल की पक्की दोस्ती की एक वजह पाकिस्तान भी है। क़तर पर हमले के बाद नित नेतन याू ने 2 मिनट की जो वीडियो जारी की है। इसमें दो बार पाकिस्तान का नाम लिया। इससे उनकी बेचैनी जाहिर है।
Speaker A
वीड एक्सक्टली व्हाट अमेरिका इन पाकिस्तान। दोज़ कंट्रीज दैट आर कंडेल टुडेड नॉट कम एंड सेल व्हाट अ टर्बल थिंग वाज़ डन। द सोवनिटी ऑफ़ पाकिस्तान वास वायलेटेड। इसराइल पाकिस्तान से डरने के बावजूद भारत की मिलीभगत से पाकिस्तान के
Speaker A
खिलाफ कोई मिस एडवेंचर कर सकता है। लेकिन खुदा ना खास्ता ऐसा हुआ भी तो अब पाकिस्तान को भी इस एग्रीमेंट के बाद एडवांटेज हासिल हो गया है कि इसराइल की सरहद का फासला पाकिस्तान के लिए 3200 कि.मी. से कम होकर 1700 कि.मी. रह गया है।
Speaker A
यानी इसराइल के सब शहर पाकिस्तानी मिसाइलों की रेंज में आ गए हैं। जो एटमी वार हेड भी ले सकते हैं। तो बहरहाल यह एग्रीमेंट इसराइल के ख्ते में अग्रेशन के खिलाफ एक डेटरनेट का काम करेगा। कुछ लोग यह तनकीद कर रहे हैं कि पाकिस्तान किराए
Speaker A
की फौज का काम कर रहा है। अव्वल तो हमने जो बातें बताई हैं उसके बाद इस तनकीद का कोई जवाज ही नहीं रहता। एक और अहम पॉइंट यह है कि फर्ज करें ये एग्रीमेंट ना भी होता और अल्लाह ना करे हरमैन शरीफैन पर
Speaker A
कोई हमला होता तो क्या पाकिस्तान खामोश तमाशा ही बना रहता? हमारे फौजी तो क्या हमारा तो बच्चा-बच्चा वहां कट मरने के लिए पहुंच जाएगा। तो यह एग्रीमेंट पाकिस्तान के लिए तो सरासर खैर ही खैर है। कुछ लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि अगर भारत
Speaker A
दोबारा पाकिस्तान पर हमला करता है तो सऊदी अरब क्या करेगा? क्या पाकिस्तान के साथ मिलकर लड़ेगा? तो भाई जैसा कि मैंने पहले कहा है कि हमें सऊदी अरब की मिलिट्री सपोर्ट की जरूरत नहीं पड़ेगी और पाकिस्तान अपने ब्रॉडर मुल्क को किसी मुश्किल में
Speaker A
नहीं डालेगा। लेकिन अगर भारत ने सऊदी अरब से ताल्लुकात बिगाड़े तो नुकसान उसी का होगा क्योंकि सऊदी अरब वहां अपनी इन्वेस्टमेंट रोक सकता है। सऊदी अरब में रहने वाले लाखों भारतीयों को मुल्क छोड़ने का भी कह सकता है। तो दोस्तों ये
Speaker A
एग्रीमेंट पाकिस्तान की एक बहुत बड़ी कामयाबी है। बाकी इंडियन सरकार और इंडियन मीडिया के लिए मोदी का यही पैगाम दिया जा सकता है। आप लोग रोना बंद कीजिए। मेरे तक आवाज आ रही है।
Topics:पाकिस्तानसऊदी अरबरक्षा समझौताभारतइसराइलरणनीतिक गठबंधनन्यूक्लियर सुरक्षादक्षिण एशियाइस्लामी दुनियाक्षेत्रीय सुरक्षा











