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Dark Web King: From Bedroom Student to Billionaire Drug Lord | The Untold Story of Ross Ulbricht

डार्क वेब की दुनिया और रॉस उल्ब्रिक की सिल्क रोड वेबसाइट की कहानी, जिसने ड्रग ट्रेड को बदल दिया।

Key Takeaways

  • डार्क वेब एक वास्तविक और खतरनाक इंटरनेट की दुनिया है।
  • टोर ब्राउज़र और बिटकॉइन ने ऑनलाइन अपराध को संभव और सुरक्षित बनाया।
  • रॉस उल्ब्रिक ने टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर एक नया अवैध मार्केटप्लेस बनाया।
  • ट्रस्ट और एस्क्रो सिस्टम ने ऑनलाइन ब्लैक मार्केट को विश्वसनीय बनाया।
  • सरकार का हस्तक्षेप न होने का विचार अपराध को बढ़ावा दे सकता है।

What the video covers

  • डार्क वेब इंटरनेट का वह हिस्सा है जहां गैरकानूनी वस्तुएं और सेवाएं मिलती हैं।
  • टोर ब्राउज़र और बिटकॉइन ने डार्क वेब पर पहचान छुपाने और भुगतान को संभव बनाया।
  • रॉस उल्ब्रिक, एक 26 साल का छात्र, ने सिल्क रोड नामक वेबसाइट बनाई जो ड्रग्स और अन्य अवैध वस्तुओं का बाजार बनी।
  • सिल्क रोड ने ट्रस्ट और एस्क्रो सिस्टम के जरिए ऑनलाइन ब्लैक मार्केट को सुरक्षित और विश्वसनीय बनाया।
  • ड्रग्स की डिलीवरी वैक्यूम सीलिंग और सामान्य पोस्ट सेवा के जरिए की जाती थी।
  • सिल्क रोड पर 13,000 से अधिक अवैध वस्तुएं और सेवाएं उपलब्ध थीं।
  • रॉस का लिबर्टेरियन माइंडसेट था, जिसमें सरकार का हस्तक्षेप न हो, और हर व्यक्ति को अपनी पसंद का अधिकार हो।
  • डार्क वेब पर पहुंचना और टोर ब्राउज़र का उपयोग करना गैरकानूनी नहीं है, लेकिन अवैध चीजें खरीदना अपराध है।
  • बिटकॉइन की शुरुआत डार्क वेब के लिए कैश की तरह हुई, जो बैंकिंग सिस्टम से बाहर था।
  • सिल्क रोड ने एफबीआई, सीआईए और डीईए को वर्षों तक चुनौती दी।

Answers

Questions about this video

डार्क वेब क्या है और यह सामान्य इंटरनेट से कैसे अलग है?

डार्क वेब इंटरनेट का वह हिस्सा है जो गुप्त और गैरकानूनी गतिविधियों के लिए उपयोग होता है, जहां Google जैसे सर्च इंजन नहीं पहुंच पाते। यह टोर ब्राउज़र के जरिए एक्सेस किया जाता है जो यूजर की पहचान छुपाता है।

रॉस उल्ब्रिक ने सिल्क रोड वेबसाइट क्यों बनाई थी?

रॉस उल्ब्रिक ने एक ऐसी वेबसाइट बनाने का सोचा जहां लोग टोर ब्राउज़र के जरिए छुपकर बिटकॉइन से भुगतान कर सकें और जो चाहे खरीद-बिक्री कर सकें, जिससे सरकार का हस्तक्षेप न हो।

सिल्क रोड वेबसाइट की सफलता का मुख्य कारण क्या था?

सिल्क रोड की सफलता का मुख्य कारण ट्रस्ट सिस्टम था, जिसमें सेलर की रेटिंग होती थी और एस्क्रो सिस्टम से भुगतान सुरक्षित रहता था, जिससे ग्राहक और विक्रेता दोनों सुरक्षित महसूस करते थे।

Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:00
Speaker A
मनीह देखी है जब प्रोफेसर अपनी टीम को बताता है कि उसने नामुमकिन को मुमकिन बनाने के लिए वेपन कहां से खरीदे तो वह एक नाम लेता है द डार्क वेब। अब आप कहेंगे कि यह डार्क वेब तो बस एक कॉस्परेसी थ्योरी है। फिल्मों और ड्रामों की बातें हैं। बिल्कुल नहीं। यह बिल्कुल सच है। इंटरनेट पर वाकई एक ऐसी दुनिया मौजूद है जहां वो भी नहीं पहुंच सकते जिन्हें हमारी एक-एक [संगीत] चीज का पता है। Google और Facebook भी वहां पर तक नहीं मार सकते। यह एक ऐसी दुनिया है जहां सिर्फ एक क्लिक पर हर किस्म का नशा, हर किस्म का वेपन, किसी भी मुल्क का जाली पासपोर्ट सब कुछ मिल सकता है। इसी दुनिया का नाम डार्क वेब है। और सबसे ज्यादा हैरत की बात यह है कि इस खौफनाक दुनिया का सबसे बड़ा किंग, कोई खतरनाक गैंगस्टर या ड्रग लॉर्ड नहीं था बल्कि एक 26 साल का स्टूडेंट था। जिसने अपने बेडरूम में बैठकर वो मार्केट बनाई जिसे हम ड्रग की दुनिया का Amazon भी कह सकते हैं। वही था जिसने एफबीआई, सीआईए और डीईए को बरसों तक नचा कर रखा। एक आम सा लड़का दुनिया का सबसे बड़ा ड्रग डीलर कैसे बना? इसे दो मर्तबा उमर कैद की सजा हुई। लेकिन वो फिर भी आजाद क्यों घूम रहा है? आए आज इंटरनेट की इस डार्क वर्ल्ड में उतरते हैं। पहले देखते हैं कि यह डार्क वेब है क्या? क्या वहां तक जाना और वहां से कुछ खरीदना इललीगल है? और फिर जानते हैं जुर्म की वो कहानी जिसने दुनिया को बदल कर रख दिया। इंकलाब को सब्सक्राइब करना और बेल आइकॉन दबाना मत भूलिएगा। [संगीत] आज की दुनिया में कौन है जो इंटरनेट इस्तेमाल नहीं करता? Google, YouTube, Facebook, Instagram, Amazon हमें लगता है कि बस यही इंटरनेट है। लेकिन यह हमारी जिंदगी का सबसे बड़ा धोखा है। समझे इंटरनेट इस आइसबर्ग की तरह है। उसका एक हिस्सा वो है जो मुझे आपको और सबको ऊपर से नजर आता है। जिसे कहा जाता है यह पूरे इंटरनेट का सिर्फ 4% है। जी हां, सिर्फ 4%। बाकी 96% इंटरनेट आइसबर्ग की तरह पानी के नीचे छुपा हुआ है। एक ऐसी दुनिया जहां Google पहुंच भी नहीं सकता। इंटरनेट वर्ल्ड के इस बड़े हिस्से को हम डीप वेब कहते हैं। घबराएं नहीं। यह इतनी खतरनाक जगह नहीं है। डीप वेब असल में आपकी प्राइवेसी के लिए है। आपकी ईमेल्स, आपके बैंक स्टेटमेंट्स, हॉस्पिटल रिकॉर्ड्स, सरकारी डाटाबेस यह सब इंटरनेट पर इसी डीप वेब में मौजूद है। Google इसे तलाश नहीं कर सकता क्योंकि यहां हर चीज पर पासवर्ड्स लगे हुए हैं। यह डीप वेब खुफिया तो है लेकिन गैरकानूनी नहीं। लेकिन अगर इसी डीप वेब के बिल्कुल आखिरी कोने में जाएं इसकी गहराई में वहां पहुंचे जहां रोशनी की एक किरण तक नहीं आती। वहां एक छोटी सी और बड़ी ही खतरनाक दुनिया आबाद है। यह है इंटरनेट का सबसे निचला हिस्सा दीप। [संगीत] यहां कोई कानून नहीं। यहां कोई आपको नहीं जानता बल्कि यहां हर शख्स के चेहरे पर एक नकाब [संगीत] है। यहां लोग पहुंचते कैसे हैं और पकड़े क्यों नहीं जाते? असल में आम इंटरनेट पर जब आप कोई वेबसाइट खोलते हैं Google Chrome पर या किसी भी ब्राउज़र पर तो इंटरनेट को पता होता है कि आप कौन हैं और कहां से आए हैं। क्योंकि आपका IP एड्रेस आपका डिजिटल फिंगरप्रिंट है। लेकिन डार्क वेब पर जाने के लिए एक खास और खुफिया दरवाजा इस्तेमाल होता है जिसे कहते हैं टोर ब्राउज़र। टॉर एब्रविएशन है द अनियन राउटर का मतलब प्याज वाला राउटर। इसका नाम प्याज इसलिए रखा गया क्योंकि यह आपकी आइडेंटिटी को प्याज के छिलकों की तरह कई लेयर्स में छुपा देता है। यह ब्राउज़र काम कैसे करता है? जब आप टॉर पर कुछ सर्च करते हैं तो आपका सिग्नल सीधा वेबसाइट तक नहीं जाता। यह दुनिया भर के हजारों वॉलंटियर कंप्यूटर से गुजर कर जाता है जिन्हें नोट्स कहते हैं। यानी आपका पैगाम पाकिस्तान से निकलता है। पहले ब्राजील जाता है। वहां से जर्मनी फिर रूस और आखिर में मंजिल पर पहुंचता है। हर कदम पर पिछला रास्ता मिटा दिया जाता है। इसीलिए कोई भी हत्ता के एफबीआई भी यह पता नहीं लगा सकती कि यह रिक्वेस्ट असल में भेजी किसने थी और कहां से आई थी। लेकिन यहां एक मजे की बात सुनिए। यह टेक्नोलॉजी किसी हैकर या क्रिमिनल माइंडसेट के बंदे ने नहीं बनाई थी। यह बनाई थी अमेरिकन नेवी ने। लेकिन क्यों? ताकि उनके जासूस दुनिया भर में अपने खुफिया मैसेजेस भेज सकें। अमेरिका ने खुद वो हथियार बनाया था जिसे बाद में मुजरिमों ने उसी के खिलाफ इस्तेमाल कर लिया। आम लोगों के लिए भी tor ब्राउज़र इस्तेमाल करना और डार्क वेब तक जाना इललीगल नहीं है। मगर वहां से गैरकानूनी चीजें या गैरकानूनी सर्विज खरीदने की कोशिश करना जरूर इललीगल है। बहरहाल आइडेंटिटी छुपाने का मसला तो tor ब्राउज़र ने हल कर दिया। लेकिन अब भी एक बड़ा प्रॉब्लम बाकी था। पैसा जब कोई डार्क वेब पर किसी से असलहा या ड्रग खरीदेगा तो अपना क्रेडिट कार्ड या बैंक ट्रांसफर तो इस्तेमाल नहीं कर सकता। बैंक को फौरन पता चल जाएगा और पुलिस कुछ ही देर में दरवाजे पर खड़ी होगी। इसीलिए पैसा ऐसा होना चाहिए जो बैंकों के सिस्टम से बाहर हो, डिजिटल हो और जिसका कोई पता ना चला सके और 2009 में बिटकॉइन सामने आ गया। [संगीत] आज हम और आप समझते हैं कि बिटकॉइन इन्वेस्टमेंट है। लेकिन हकीकत यह है कि यह सबसे पहले [गला साफ़ करने की आवाज़] डार्क वेब की लाइफ लाइन बना। यह इस क्रिमिनल वर्ल्ड का कैश था। एक से दूसरे वॉलेट में बगैर किसी बैंक के, किसी नाम के, बगैर किसी शनाख्ती कार्ड के पैसा ट्रांसफर होने लगा। लेकिन याद रखें यह दोनों चीजें यानी tor ब्राउज़र और बिटकॉइन मौजूद तो थी लेकिन अलग-अलग थी। किसी ऐसे बंदे की जरूरत थी जो दोनों को मिला दे। और हैरत की बात यह कि काम करने वाला कोई खतरनाक गैंगस्टर नहीं था। कोई क्रिमिनल लॉर्ड नहीं था बल्कि टेक्सास में रहने वाला एक 26 साल का सादा सा नौजवान था। नाम था रॉस उलब। रॉस लिबर्टेरियन माइंडसेट रखने वाला आदमी था। मतलब हुकूमत को इंसान की जिंदगी में दखल देने का कोई हक नहीं है। और हर इंसान को यह हक है कि वो जो चाहे खाए पिए या बेचे। चाहे वो मनीशियात ही क्यों ना हो। यह बहुत ही खतरनाक और गलत माइंडसेट था और ROS ने इसे सिर्फ अपने ज़हन तक ही महदूद नहीं रखा बल्कि प्रैक्टिकली इस पर काम भी किया। सोचा कि अगर मैं एक ऐसी वेबसाइट बनाऊं जहां लोग Tor ब्राउज़र के जरिए छुप कर आए और बिटकॉइन से पेमेंट करें और जो चाहे खरीदें और बेचे तो यह बेहतरीन काम हो जाएगा। तब उसने कोडिंग सीखी और 2011 में एक ऐसी वेबसाइट ल्च कर दी जिसका नाम उसने दुनिया के एक बहुत पुराने ट्रेड रूट के नाम पर रखा। सिल्क रोड यानी शारा-ए- रेशम। इंटरनेट की दुनिया में ब्लैक मार्केट का दरवाजा खुल गया। जनवरी 2011 जब रोस अल्ब्रिक ने सिल्क रोट ल्च की। इट साउंड्स लाइक द प्लॉट ऑफ़ अ मूवी अ यूएस मैन वाज़ एबल टू हाई बिहाइंड अ फॉल्स आइडेंटिटी [संगीत] ऑपरेटिंग अ सोफिस्टिकेटेड इललीगल ड्रग वेबसाइट। तो उसके पास बेचने के लिए सिर्फ एक चीज थी। उसके अपने घर में उगाई गई मैजिक मशरूम। लेकिन शायद उसे भी अंदाजा नहीं था कि यह वेबसाइट इंसान की डार्क साइट सामने लाएगी। क्योंकि जब सबको पता चल जाए कि वह जो चाहे करे किसी को पता नहीं चलेगा तो इंसान शैतान बन जाता है। तो कुछ ही महीनों में सिल्क रोड सिर्फ मशरूम तक ही महदूद नहीं रहा वहां पर दुनिया जहां का हर गंदा काम होने लगा। हीरोइन, कोकेन, एलएसडी, जाली पासपोर्ट और हैकिंग टूल्स की एक पूरी दुनिया आबाद हो गई। सिल्क रोड एक ऐसी ब्लैक मार्केट बन गई जहां 13,000 से ज्यादा मुख्तलिफ चीजें और सर्विज मिल रही थी। आपको किसी का Facebook अकाउंट हैक करवाना है, किसी का बैंक अकाउंट उड़ाना है, क्रेडिट कार्ड की डिटेल चाहिए या आपको किसी दूसरे मुल्क की सिटीजनशिप चाहिए। सिल्क रोड पर सब मिलने लगा और फिर देखते ही देखते सिर्फ 2ाई साल में इस वेबसाइट ने 9.5 मिलियन बिटकॉइन का बिजनेस कर लिया। उस जमाने में बिटकॉइन की कीमत इतनी नहीं थी। वरना आज के हिसाब से तो यह खरबों डॉलर की रकम बनती है। आखिर यह वेबसाइट इतनी कामयाब कैसे हो गई? उसकी कामयाबी का सबसे बड़ा राज था ट्रस्ट यानी एतमाद। सोचें अगर कोई गली के किसी कोने पर खड़ा किसी ड्रग डीलर से माल खरीद रहा हो तो उसे दो चीजों का खौफ होता है। या तो बेचने वाला ही इसे लूट सकता है या पुलिस पकड़ कर ले जा सकती है। रोज उलब्रिक ने यह दोनों खतरे खत्म कर दिए थे। उसने सिल्क रोड को बिल्कुल Amazon की तरह चलाया। हर सेलर की रेटिंग होती थी। अगर कोई गलत माल बेचता तो कस्टमर वन स्टार देकर उसका बिजनेस तबाह कर सकता था। पैसों के लिए उसने एस्क्रो सिस्टम बनाया। यानी जब कस्टमर बिटकॉइन भेजता तो वो सीधा सेलर के पास नहीं जाते थे। वो वेबसाइट के पास महफूज़ रहते थे। जब कस्टमर को पार्सल मिल जाता और वो ओके करता तब पैसा सेलर को मिलता था। प्राइम वर्ल्ड में पहली बार कस्टमर सर्विस भी आ गई थी। यहां पर आपके दिमाग में सवाल आ रहा होगा कि भाई यह माल डिलीवर कैसे होता था? उसका हल रॉस ने निकाला। वैक्यूम सीलिंग टेक्नोलॉजी। उसकी दी गई इंस्ट्रक्शन के मुताबिक ड्रग्स को ऐसी पैकिंग में बंद किया जाता कि कुत्ते भी उसकी बू सूंघ ना सके। उन्हें किताबों के अंदर, डीवीडीज केस में या खिलौनों में छुपाकर आम पोस्ट के जरिए भेजा जाता। डीएचएल से, फेडक से या फिर यूएस पोस्टल सर्विस से। रोजाना हजारों पार्सल एक से दूसरे मुल्क में जा रहे थे। और पोस्टमैन और कोरियर वालों को पता भी नहीं होता था कि उनके थैले में मौजूद बर्थडे गिफ्ट में असल में हाई क्वालिटी कोन है या कोई और गैरकानूनी माल है। रोज उलब्रिक ने साबित किया ड्रग लॉर्ड बनने के लिए किसी गैंग की जरूरत नहीं सिर्फ
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Speaker A
है। फिल्मों और ड्रामों की बातें हैं। बिल्कुल नहीं। यह बिल्कुल सच है। इंटरनेट पर वाकई एक ऐसी दुनिया मौजूद है जहां वो भी नहीं पहुंच सकते जिन्हें हमारी एक-एक [संगीत] चीज का पता है। Google और Facebook भी वहां पर तक नहीं मार सकते। यह
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Speaker A
एक ऐसी दुनिया है जहां सिर्फ एक क्लिक पर हर किस्म का नशा, हर किस्म का वेपन, किसी भी मुल्क का जाली पासपोर्ट सब कुछ मिल सकता है। इसी दुनिया का नाम डार्क वेब है। और सबसे ज्यादा हैरत की बात यह है कि इस
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Speaker A
खौफनाक दुनिया का सबसे बड़ा किंग, कोई खतरनाक गैंगस्टर या ड्रग लॉर्ड नहीं था बल्कि एक 26 साल का स्टूडेंट था। जिसने अपने बेडरूम में बैठकर वो मार्केट बनाई जिसे हम ड्रग की दुनिया का Amazon भी कह सकते हैं। वही था जिसने एफबीआई, सीआईए और
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Speaker A
डीईए को बरसों तक नचा कर रखा। एक आम सा लड़का दुनिया का सबसे बड़ा ड्रग डीलर कैसे बना? इसे दो मर्तबा उमर कैद की सजा हुई। लेकिन वो फिर भी आजाद क्यों घूम रहा है?
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Speaker A
आए आज इंटरनेट की इस डार्क वर्ल्ड में उतरते हैं। पहले देखते हैं कि यह डार्क वेब है क्या? क्या वहां तक जाना और वहां से कुछ खरीदना इललीगल है? और फिर जानते हैं जुर्म की वो कहानी जिसने दुनिया को
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Speaker A
बदल कर रख दिया। इंकलाब को सब्सक्राइब करना और बेल आइकॉन दबाना मत भूलिएगा। [संगीत] आज की दुनिया में कौन है जो इंटरनेट इस्तेमाल नहीं करता? Google, YouTube, Facebook, Instagram, Amazon हमें लगता है कि बस यही इंटरनेट है। लेकिन यह हमारी
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Speaker A
जिंदगी का सबसे बड़ा धोखा है। समझे इंटरनेट इस आइसबर्ग की तरह है। उसका एक हिस्सा वो है जो मुझे आपको और सबको ऊपर से नजर आता है। जिसे कहा जाता है यह पूरे इंटरनेट का सिर्फ 4% है। जी हां, सिर्फ
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Speaker A
4%। बाकी 96% इंटरनेट आइसबर्ग की तरह पानी के नीचे छुपा हुआ है। एक ऐसी दुनिया जहां Google पहुंच भी नहीं सकता। इंटरनेट वर्ल्ड के इस बड़े हिस्से को हम डीप वेब कहते हैं। घबराएं नहीं। यह इतनी खतरनाक जगह नहीं है। डीप वेब असल में आपकी
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Speaker A
प्राइवेसी के लिए है। आपकी ईमेल्स, आपके बैंक स्टेटमेंट्स, हॉस्पिटल रिकॉर्ड्स, सरकारी डाटाबेस यह सब इंटरनेट पर इसी डीप वेब में मौजूद है। Google इसे तलाश नहीं कर सकता क्योंकि यहां हर चीज पर पासवर्ड्स लगे हुए हैं। यह डीप वेब खुफिया तो है
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Speaker A
लेकिन गैरकानूनी नहीं। लेकिन अगर इसी डीप वेब के बिल्कुल आखिरी कोने में जाएं इसकी गहराई में वहां पहुंचे जहां रोशनी की एक किरण तक नहीं आती। वहां एक छोटी सी और बड़ी ही खतरनाक दुनिया आबाद है। यह है
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Speaker A
इंटरनेट का सबसे निचला हिस्सा दीप। [संगीत] यहां कोई कानून नहीं। यहां कोई आपको नहीं जानता बल्कि यहां हर शख्स के चेहरे पर एक नकाब [संगीत] है। यहां लोग पहुंचते कैसे हैं और पकड़े क्यों नहीं जाते? असल में आम
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Speaker A
इंटरनेट पर जब आप कोई वेबसाइट खोलते हैं Google Chrome पर या किसी भी ब्राउज़र पर तो इंटरनेट को पता होता है कि आप कौन हैं और कहां से आए हैं। क्योंकि आपका IP एड्रेस आपका डिजिटल फिंगरप्रिंट है। लेकिन
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Speaker A
डार्क वेब पर जाने के लिए एक खास और खुफिया दरवाजा इस्तेमाल होता है जिसे कहते हैं टोर ब्राउज़र। टॉर एब्रविएशन है द अनियन राउटर का मतलब प्याज वाला राउटर। इसका नाम प्याज इसलिए रखा गया क्योंकि यह आपकी आइडेंटिटी को
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Speaker A
प्याज के छिलकों की तरह कई लेयर्स में छुपा देता है। यह ब्राउज़र काम कैसे करता है? जब आप टॉर पर कुछ सर्च करते हैं तो आपका सिग्नल सीधा वेबसाइट तक नहीं जाता। यह दुनिया भर के हजारों वॉलंटियर कंप्यूटर
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Speaker A
से गुजर कर जाता है जिन्हें नोट्स कहते हैं। यानी आपका पैगाम पाकिस्तान से निकलता है। पहले ब्राजील जाता है। वहां से जर्मनी फिर रूस और आखिर में मंजिल पर पहुंचता है। हर कदम पर पिछला रास्ता मिटा दिया जाता
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Speaker A
है। इसीलिए कोई भी हत्ता के एफबीआई भी यह पता नहीं लगा सकती कि यह रिक्वेस्ट असल में भेजी किसने थी और कहां से आई थी। लेकिन यहां एक मजे की बात सुनिए। यह टेक्नोलॉजी किसी हैकर या क्रिमिनल माइंडसेट के बंदे ने नहीं बनाई थी। यह
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Speaker A
बनाई थी अमेरिकन नेवी ने। लेकिन क्यों? ताकि उनके जासूस दुनिया भर में अपने खुफिया मैसेजेस भेज सकें। अमेरिका ने खुद वो हथियार बनाया था जिसे बाद में मुजरिमों ने उसी के खिलाफ इस्तेमाल कर लिया। आम लोगों के लिए भी tor ब्राउज़र इस्तेमाल
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Speaker A
करना और डार्क वेब तक जाना इललीगल नहीं है। मगर वहां से गैरकानूनी चीजें या गैरकानूनी सर्विज खरीदने की कोशिश करना जरूर इललीगल है। बहरहाल आइडेंटिटी छुपाने का मसला तो tor ब्राउज़र ने हल कर दिया। लेकिन अब भी एक बड़ा प्रॉब्लम बाकी था।
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Speaker A
पैसा जब कोई डार्क वेब पर किसी से असलहा या ड्रग खरीदेगा तो अपना क्रेडिट कार्ड या बैंक ट्रांसफर तो इस्तेमाल नहीं कर सकता। बैंक को फौरन पता चल जाएगा और पुलिस कुछ ही देर में दरवाजे पर खड़ी होगी। इसीलिए
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Speaker A
पैसा ऐसा होना चाहिए जो बैंकों के सिस्टम से बाहर हो, डिजिटल हो और जिसका कोई पता ना चला सके और 2009 में बिटकॉइन सामने आ गया। [संगीत] आज हम और आप समझते हैं कि बिटकॉइन इन्वेस्टमेंट है। लेकिन हकीकत यह है कि यह
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Speaker A
सबसे पहले [गला साफ़ करने की आवाज़] डार्क वेब की लाइफ लाइन बना। यह इस क्रिमिनल वर्ल्ड का कैश था। एक से दूसरे वॉलेट में बगैर किसी बैंक के, किसी नाम के, बगैर किसी शनाख्ती कार्ड के पैसा ट्रांसफर होने
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Speaker A
लगा। लेकिन याद रखें यह दोनों चीजें यानी tor ब्राउज़र और बिटकॉइन मौजूद तो थी लेकिन अलग-अलग थी। किसी ऐसे बंदे की जरूरत थी जो दोनों को मिला दे। और हैरत की बात यह कि काम करने वाला कोई खतरनाक गैंगस्टर
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Speaker A
नहीं था। कोई क्रिमिनल लॉर्ड नहीं था बल्कि टेक्सास में रहने वाला एक 26 साल का सादा सा नौजवान था। नाम था रॉस उलब। रॉस लिबर्टेरियन माइंडसेट रखने वाला आदमी था। मतलब हुकूमत को इंसान की जिंदगी में दखल देने का कोई हक नहीं है। और हर इंसान को
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Speaker A
यह हक है कि वो जो चाहे खाए पिए या बेचे। चाहे वो मनीशियात ही क्यों ना हो। यह बहुत ही खतरनाक और गलत माइंडसेट था और ROS ने इसे सिर्फ अपने ज़हन तक ही महदूद नहीं रखा बल्कि प्रैक्टिकली इस पर काम भी किया।
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Speaker A
सोचा कि अगर मैं एक ऐसी वेबसाइट बनाऊं जहां लोग Tor ब्राउज़र के जरिए छुप कर आए और बिटकॉइन से पेमेंट करें और जो चाहे खरीदें और बेचे तो यह बेहतरीन काम हो जाएगा। तब उसने कोडिंग सीखी और 2011 में
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Speaker A
एक ऐसी वेबसाइट ल्च कर दी जिसका नाम उसने दुनिया के एक बहुत पुराने ट्रेड रूट के नाम पर रखा। सिल्क रोड यानी शारा-ए- रेशम। इंटरनेट की दुनिया में ब्लैक मार्केट का दरवाजा खुल गया। जनवरी 2011 जब रोस अल्ब्रिक ने सिल्क रोट
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Speaker A
ल्च की। इट साउंड्स लाइक द प्लॉट ऑफ़ अ मूवी अ यूएस मैन वाज़ एबल टू हाई बिहाइंड अ फॉल्स आइडेंटिटी [संगीत] ऑपरेटिंग अ सोफिस्टिकेटेड इललीगल ड्रग वेबसाइट। तो उसके पास बेचने के लिए सिर्फ एक चीज थी। उसके अपने घर में उगाई गई मैजिक
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Speaker A
मशरूम। लेकिन शायद उसे भी अंदाजा नहीं था कि यह वेबसाइट इंसान की डार्क साइट सामने लाएगी। क्योंकि जब सबको पता चल जाए कि वह जो चाहे करे किसी को पता नहीं चलेगा तो इंसान शैतान बन जाता है। तो कुछ ही महीनों
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Speaker A
में सिल्क रोड सिर्फ मशरूम तक ही महदूद नहीं रहा वहां पर दुनिया जहां का हर गंदा काम होने लगा। हीरोइन, कोकेन, एलएसडी, जाली पासपोर्ट और हैकिंग टूल्स की एक पूरी दुनिया आबाद हो गई। सिल्क रोड एक ऐसी ब्लैक मार्केट बन गई जहां 13,000 से
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Speaker A
ज्यादा मुख्तलिफ चीजें और सर्विज मिल रही थी। आपको किसी का Facebook अकाउंट हैक करवाना है, किसी का बैंक अकाउंट उड़ाना है, क्रेडिट कार्ड की डिटेल चाहिए या आपको किसी दूसरे मुल्क की सिटीजनशिप चाहिए। सिल्क रोड पर सब मिलने लगा और फिर देखते
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Speaker A
ही देखते सिर्फ 2ाई साल में इस वेबसाइट ने 9.5 मिलियन बिटकॉइन का बिजनेस कर लिया। उस जमाने में बिटकॉइन की कीमत इतनी नहीं थी। वरना आज के हिसाब से तो यह खरबों डॉलर की रकम बनती है। आखिर यह वेबसाइट इतनी कामयाब
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Speaker A
कैसे हो गई? उसकी कामयाबी का सबसे बड़ा राज था ट्रस्ट यानी एतमाद। सोचें अगर कोई गली के किसी कोने पर खड़ा किसी ड्रग डीलर से माल खरीद रहा हो तो उसे दो चीजों का खौफ होता है। या तो बेचने वाला ही इसे लूट
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Speaker A
सकता है या पुलिस पकड़ कर ले जा सकती है। रोज उलब्रिक ने यह दोनों खतरे खत्म कर दिए थे। उसने सिल्क रोड को बिल्कुल Amazon की तरह चलाया। हर सेलर की रेटिंग होती थी। अगर कोई गलत माल बेचता तो कस्टमर वन स्टार
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Speaker A
देकर उसका बिजनेस तबाह कर सकता था। पैसों के लिए उसने एस्क्रो सिस्टम बनाया। यानी जब कस्टमर बिटकॉइन भेजता तो वो सीधा सेलर के पास नहीं जाते थे। वो वेबसाइट के पास महफूज़ रहते थे। जब कस्टमर को पार्सल मिल
08:52
Speaker A
जाता और वो ओके करता तब पैसा सेलर को मिलता था। प्राइम वर्ल्ड में पहली बार कस्टमर सर्विस भी आ गई थी। यहां पर आपके दिमाग में सवाल आ रहा होगा कि भाई यह माल डिलीवर कैसे होता था? उसका हल रॉस ने
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Speaker A
निकाला। वैक्यूम सीलिंग टेक्नोलॉजी। उसकी दी गई इंस्ट्रक्शन के मुताबिक ड्रग्स को ऐसी पैकिंग में बंद किया जाता कि कुत्ते भी उसकी बू सूंघ ना सके। उन्हें किताबों के अंदर, डीवीडीज केस में या खिलौनों में छुपाकर आम पोस्ट के जरिए भेजा जाता।
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Speaker A
डीएचएल से, फेडक से या फिर यूएस पोस्टल सर्विस से। रोजाना हजारों पार्सल एक से दूसरे मुल्क में जा रहे थे। और पोस्टमैन और कोरियर वालों को पता भी नहीं होता था कि उनके थैले में मौजूद बर्थडे गिफ्ट में
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Speaker A
असल में हाई क्वालिटी कोन है या कोई और गैरकानूनी माल है। रोज उलब्रिक ने साबित किया ड्रग लॉर्ड बनने के लिए किसी गैंग की जरूरत नहीं सिर्फ एक अच्छा लॉजिस्टिक सिस्टम काफी है। [संगीत] अब सिल्क रोड की शोहरत वहां भी पहुंच रही
09:51
Speaker A
थी जहां बिल्कुल नहीं जानी चाहिए थी। जून 2011 में एक वेबसाइट गाऊकर ने आर्टिकल लगाया और सिल्क रोड को ड्रग्स का Amazon करार देकर पूरी दुनिया खासतौर पर अमकी इदारों की तवज्जो इसकी तरफ कर दी। उसके फौरन बाद अमेरिकी सेनेटर चक शुमर ने
10:06
Speaker A
पब्लिकली कहा कि यह वेबसाइट बंद की जाए और कानून नाफिज़ करने वाले इदारों पर प्रेशर बढ़ा दिया। अब एफबीआई और दूसरे इदारे जाग चुके थे और रोज उलब्रिक को अपनी सिक्योरिटी की फिक्र हो रही थी। नवंबर 2011 में सिक्योरिटी खतरे और ब्लैकमेलिंग
10:21
Speaker A
की धमकियों के बाद रोस अमेरिका छोड़कर अपनी बहन के पास सिडनी चला गया और फिर उसने अपनी असल आइडेंटिटी मिटा दी और एडमिन के बजाय एक नया नाम अपना लिया। ड्रीट पर पायरेट रॉबर्ट्स यानी डीपीआर। यह नाम उसने
10:35
Speaker A
एक मशहूर फिल्म द प्रिंसेस ब्राइड से लिया था। फिल्म में यह कररेक्टर एक से दूसरे शख्स को मुंतकिल होता रहता था ताकि वो हमेशा जिंदा रहे। रोज का मैसेज बिल्कुल क्लियर था। अगर तुम मुझे पकड़ भी लोगे तो
10:47
Speaker A
कोई और मेरी जगह ले लेगा और यह आईडिया कभी नहीं मरेगा। अब वह सिर्फ वेबसाइट का एडमिनिस्ट्रेटर नहीं रहा था बल्कि फलसफी भी बन चुका था। वो वेबसाइट के फॉर्म्स पर लंबी चौड़ी तकरीरें लिखने लगा। कहता कि वो
10:59
Speaker A
एक ऐसी दुनिया बना रहा है जहां रियासत का कोई वजूद नहीं होगा। जहां हर इंसान अपनी मर्जी का मालिक होगा। सबको आजादी मिले या ना मिले लेकिन सिल्क रोड रोज आगे से आगे बढ़ रही थी। 2013 में वेबसाइट पर ट्रेड का
11:12
Speaker A
वॉल्यूम $1.2 बिलियन तक पहुंच चुका था। रोज उलब्रिट जो किसी एक छोटे से अपार्टमेंट में रहता था, अब करोड़ों डॉलर के बिटकॉइन का मालिक था। जबकि एफबीआई के लिए यह अब सिर्फ एक वेबसाइट नहीं थी। यह उनके अना का मसला बन चुकी थी। दुनिया की
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Speaker A
सबसे ताकतवर एजेंसियां एक ऐसे भूत का पीछा कर रही थी जिसका कोई ठिकाना नहीं था। कोई चेहरा नहीं था। कोई नाम नहीं था। लेकिन रोज उलब्रिक एक ऐसी गलती कर चुका था जो उसे पूरी जिंदगी के लिए सलाखों के पीछे
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Speaker A
डालने वाली थी। वो गलती क्या थी? मार्च 2013 एक बंदे ने रोस उलbr से कांटेक्ट किया और कहा कि सिल्क रोड के हजारों कस्टमर्स के असल नाम और पते उसके पास हैं। अगर $5 लाख के बिटकॉइन ना दिए तो
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Speaker A
यह लिस्ट वो एफबीआई के हवाले कर देगा। और मैंने कहा था ना कि रॉस के लिए सबसे अहम चीज थी प्राइवेसी। वो अपनी मिलियन डॉलर एंपायर को यूं किसी ब्लैकमेलर के हाथों बर्बाद होते नहीं देख सकता था। वो जो खुद
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Speaker A
को अमन पसंद कहता था, लिबर्टेरियन कहता था लेकिन अब वो फंस गया था। अगर पैसा देता तो ब्लैकमेलिंग कभी खत्म नहीं होती। और अगर पैसा ना देता तो उसकी खड़ी की गई एंपायर तबाह हो जाती। अब उसके सामने दो रास्ते
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Speaker A
थे। एक उसूल का और दूसरा सर्वाइवल का। और रोस ने दूसरा रास्ता चुन लिया। वो रास्ता जो गैंगस्टर अपनाते हैं। उसने डार्क वेब पर एक हिटमैन को तलाश किया और उसे $80 दिए ताकि वह उस ब्लैकमेलर का खात्मा कर दे। वो
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Speaker A
बंदा जो कभी मक्खी भी नहीं मारता था अब इंसानों को मारने के आर्डर दे रहा था। रॉस मुतमईन हो गया कि अब वो सुकून से राज करेगा। लेकिन यहां पर कहानी में एक और ट्विस्ट आता है। एफबीआई ने रोस को घेरने
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Speaker A
के लिए एक ऐसी चाल चली जो किसी हॉलीवुड फिल्म से कम नहीं थी। जनवरी 2013 में सिल्क रोड के एक एडमिनिस्ट्रेटर क्रिटिस ग्रीन को एफबीआई एक ऑपरेशन में गिरफ्तार कर चुकी थी और फिर उसकी लॉग इन डिटेल्स इस्तेमाल करते हुए सिल्क रोड यूज़र्स के
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Speaker A
अकाउंट से $3.5 लाख के बिटकॉइन चोरी कर लिए। प्रोस पागल हो गया। उसने एक और हिटमैन से राब्ता किया और ग्रीन को मारने का हुकुम दिया। लेकिन उसे बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि एफबीआई के एजेंट्स सिल्क रोड में अंदर तक घुस चुके हैं और जिसे वह अपना
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Speaker A
बहुत अच्छा दोस्त समझ रहा था जिसे कत्ल के लिए सुपारी दे रहा था वो हिटमैन भी असल में एक अंडर कवर एफबीआई एजेंट था। इस बंदे का असल नाम कार्ल फोर्स था और वो एफबीआई में काम करता था। वो तो नेक्स्ट लेवल पर
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Speaker A
जा चुका था। उसने बकायदा एक ड्रामा किया। ग्रीन के चेहरे पर नकली खून लगाया। इसे जमीन पर लिटाया और उसकी लाश बनाकर उसकी तस्वीरें रोस को भेज दी कि काम हो गया है। रोस ने जैसे ही वह तस्वीरें देखी तो सुकून
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Speaker A
का सांस लिया और हिटमैन को पेमेंट भी कर दी। उसे बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि उसका सिर्फ ओके कहना उसके ताबूत में आखिरी कील साबित होगा। क्योंकि अब रोस के खिलाफ कत्ल की साजिश का सबूत एफबीआई के पास था।
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Speaker A
यहां एक सवाल पैदा होता है। रोल ब्रिक तो ऐसा बंदा नहीं था। वो तो चोटंटी भी नहीं मारता था। तो जब पैसा आया पावर आई तो क्या हुआ? उसके अंदर का जानवर जागने लगा। जैसे-जैसे सिल्क रोड बड़ी होती गई रोज के
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Speaker A
अंदर बड़ी तब्दीलियां आने लगी। वो वेबसाइट पर ऐसे बातें करता जैसे लोगों का निजात दाहिंदा हो। मसीहा हो। कभी-कभी लगता है कि अपुन ही भगवान है। और फिर वो वक्त आ गया जब उसे लगा कि जो भी उसके लिए खतरा बनेगा उसे जीने का कोई हक
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Speaker A
नहीं। जानवरों पर जुल्म के खिलाफ बोलने वाला बंदा अब इंसानों के लिए जिंदगी और मौत के फैसले कर रहा था। यह ताकत का वो नशा है जो सिल्क रोड पर फरोख्त होने वाले हर नशे से ज्यादा खतरनाक है। बहरहाल
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Speaker A
अमेरिका की एफबीआई, डीईए और आईआरएस के बेहतरीन बंदे दिन रात एक ही सवाल का जवाब ढूंढ रहे थे। यह ड्रीट पर पायरेट रॉबर्ट्स आखिर है कौन? क्योंकि अभी तक उसकी असलियत का पता नहीं चला था। वह जानते थे कि
15:02
Speaker A
वेबसाइट कहां है। डार्क वेब पर उन्हें पता था कि वहां क्या बिक रहा है। लेकिन यह मालूम नहीं हो रहा था कि उसका सर्वर दुनिया के किस कोने में छुपा हुआ है और उसे चलाने वाला हाथ किसका है। रोज उलब्रिक
15:14
Speaker A
ने अपनी हिफाजत के लिए इतनी ऊंची दीवारें बना ली थी कि उन्हें उबूर करना नामुमकिन लगता था। लेकिन वो एक बात भूल गया था। टेक्नोलॉजी कभी गलती नहीं करती। लेकिन इंसान खता का पुतला है। इंटरनेट वर्ल्ड के इस सबसे बड़े मुजरिम को किसी सुपर
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Speaker A
कंप्यूटर ने नहीं बल्कि टैक्स डिपार्टमेंट यानी आईआरएस के एक आम से एजेंट ने पकड़ा। जब बड़े-बड़े लोग हैकिंग के जरिए सिल्क रोड को तोड़ने की कोशिश कर रहे थे। एक आम एजेंट गैरी अलफोर्ड ने बिल्कुल सिंपल फार्मूला अपनाया। उसने Google पर जाकर उन
15:44
Speaker A
तारीखों को सर्च करना शुरू किया जब सिल्क रोड पहली बार सामने आई थी। उसने सोचा जब इस वेबसाइट का बानी इसे शुरू कर रहा होगा तो उसने कहीं ना कहीं तो उसकी बात की होगी और फिर गैरी को एक पुरानी पोस्ट मिल गई।
15:56
Speaker A
एक यूजर जिसका नाम ऑल्ट था वो लोगों को सिल्क रोड इस्तेमाल करने की दावत दे रहा था। कुछ महीनों बाद उसी ऑल्टड ने एक और फोरम पर कोडिंग में मदद मांगी थी। यह था rs उल[email protected] जिसने एफबीआई को रोल के दरवाजे तक पहुंचा
16:10
Speaker A
दिया। एफबीआई ने जब रोस का रिकॉर्ड चेक किया तो उन्हें पता चला कि यह 26 साला बंदा सैन फ्रांसिस्को में एक जाली नाम से एक सस्ते से किराए के कमरे में रह रहा है। अब नाम पता सब कुछ आ चुका था लेकिन सबूत
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Speaker A
कोई नहीं था। एफबीआई को अब भी साबित करना था कि रोस ही ड्रीट पायरेट रोबर्ट्स है। दूसरी तरफ इंटेलिजेंस एजेंट ने सिर्फ रोड के सर्वर में एक टेक्निकल फॉल्ट भी ढूंढ लिया। उन्हें पता चला कि उसका सर्वर आइसलैंड के एक डाटा सेंटर में छुपा हुआ
16:36
Speaker A
है। एक खुफिया ऑपरेशन किया गया [संगीत] और एफबीआई ने उस सर्वर की मुकम्मल कॉपी हासिल कर ली और वहां उन्हें वह सब कुछ मिल गया जिसकी उन्हें जरूरत थी। हर चैट, हर आर्डर, हर बिटकॉइन ट्रांजैक्शन। अब शक की कोई
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Speaker A
गुंजाइश नहीं थी। रोज उलब ही वो भूत था जिसे वह ढूंढ रहे थे। लेकिन एक आखिरी और सबसे बड़ी मुश्किल बाकी थी। एफबीआई को पता था कि रोस का लैपटॉप मुकम्मल तौर पर इंक्रिप्टेड है। अगर वह इसे सड़क पर चलते
17:02
Speaker A
हुए पकड़ते हैं या उसके घर पर छापा मारते हैं तो रोस को सिर्फ एक सेकंड चाहिए होगा अपना लैपटॉप बंद करने के लिए और जैसे ही लैपटॉप बंद होगा सारे सबूत गायब और एफबीआई कभी उसका पासवर्ड नहीं तोड़ पाएगी। अब
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Speaker A
उसके पास सिर्फ एक ही रास्ता था रोज को उस वक्त पकड़ना जब वो सिल्क रोड पर लॉग इन हो और उसका लैपटॉप खुला हुआ हो। मतलब उन्हें हाथों पकड़ना था। [संगीत] फिर आया यगुम अक्टूबर 2013 का दिन। दोपहर
17:33
Speaker A
का वक्त रोस उलब अपने घर से निकल करीब ही पब्लिक लाइब्रेरी गया। वो वहां के फ्री वाई-फाई पर सिल्क रोड चला रहा था और उसे अंदाजा भी नहीं था कि उसके इर्द-गिर्द जो आम लोग मौजूद हैं, असल में एफबीआई के अंडर
17:47
Speaker A
कवर एजेंट हैं। वो मुकम्मल तौर पर घेरे में था। लेकिन कोई एजेंट हरकत नहीं कर रहा था। उन्हें सिर्फ इंतजार था उस लम्हे का जब रोस सिल्क रोड का एडमिन पैनल खोले और जैसे ही रोस ने एक कस्टमर कंप्लेंट का
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Speaker A
जवाब देने के लिए अपना मास्टर अकाउंट खोला एफबीआई ने अपना वार कर दिया। उसके दो एजेंट मियां बीवी बनकर पागलों की तरह लड़ने लगे। लाइब्रेरी की खामोशी में जब गालियों का तूफान उठा तो सब पीछे मुड़कर देखने लगे कि यह हुआ क्या है। रोस ने जैसे
18:16
Speaker A
ही पीछे मुड़कर देखा, उसका हाथ लैपटॉप से हटा। उसी लम्हे करीब ही बैठे एक एजेंट ने लैपटॉप को हल्का सा धक्का देकर उससे दूर कर दिया और तीसरे एजेंट ने खुली हुई हालत में लैपटॉप कब्जे में ले लिया। समझे यह
18:30
Speaker A
तारीख का सबसे फिजिकल टैकडाउन था। जहां एक सेकंड की चूक बिलियन डॉलर के सबूत मिटा सकती थी। लेकिन यह सब इतना आनन-फानन और इतना परफेक्ट हुआ कि रोस कुछ ही नहीं कर पाया। अब वो एफबीआई के चुंगल में था।
18:44
Speaker A
एजेंट ने लैपटॉप स्क्रीन देखी। वहां लिखा था मास्टरमाइंड जो सिल्क रोड का एडमिन अकाउंट था। गेम ओवर हो चुका था। इंटरनेट का सबसे बड़ा ड्रग लॉट एक पब्लिक लाइब्रेरी की मेज पर हथकड़ियों में जकड़ा हुआ था। एफबीआई ने रोस के कंप्यूटर से वो
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Speaker A
सब कुछ बरामद कर लिया जो उसे चाहिए था। करोड़ों डॉलर के बिटकॉइन उसकी जाती डायरी जिसमें उसने अपने हर जुर्म का एतराफ किया था और वो तमाम चैट्स जिनमें उसने हिटमैन को पैसे दिए थे। रोज उल्लब्रिक अब एक
19:12
Speaker A
क्रिमिनल साबित हो चुका था। सिल्क रोड बंद हो गई। रोस अदालत पहुंच गया। लेकिन क्या उसकी गिरफ्तारी से डार्क वेब खत्म हो गई?
19:20
Speaker A
क्या आजादी का वो आईडिया मर गया जिसके लिए रोस ने अपनी जिंदगी तबाह कर ली?
19:30
Speaker A
सैन फ्रांसिस्को की लाइब्रेरी में गिरफ्तारी के बाद रोस उलब्रिक को न्यूयॉर्क लाया गया। यह इस सेंचुरी के सबसे अहम मुकदमात में से एक था। एक तरफ अमेरिकन गवर्नमेंट थी जो साबित करना चाहती थी कि इंटरनेट पर कोई भी पर्दा कानून की
19:44
Speaker A
पहुंच से दूर नहीं है और दूसरी तरफ एक 26 साला बंदा जो अपने दफा में सिर्फ यही कह रहा था कि मैंने तो सिर्फ एक प्लेटफार्म बनाया था। मुजरिम मैं नहीं हूं। लेकिन अदालत के सामने जो सबूत पेश हुए वो कुछ और
19:56
Speaker A
ही कह रहे थे। रोज की सबसे बड़ी दुश्मन तो उसकी अपनी डायरी साबित हुई। प्रोसीक्यूटर ने अदालत को दिखाया कि रोज सिर्फ एक वेबसाइट एडमिनिस्ट्रेटर नहीं था बल्कि एक बेरहम मैनेजर था। उसने डायरी में ऐतराफ किया था कि इसे ड्रग लॉर्ड बनने में कितना
20:12
Speaker A
मजा आ रहा है और सबसे खतरनाक चैट वो थी जिसमें उसने एक बंदे को कत्ल करने के हजारों डॉलर अदा किए थे। वो बंदा मारा नहीं गया। वो सिर्फ एफबीआई का ड्रामा था। लेकिन रोज की नियत तो पता चल गई। अब जज के
20:24
Speaker A
सामने फिजिक्स का एक शर्मीला तालिबल्म नहीं बल्कि [संगीत] एक ऐसा बंदा था जिसने ड्रग बेचने वालों के लिए एक ऐसी ग्लोबल मार्केट बना ली थी जहां हीरोइन और कोकेन इतनी ही आसानी से दस्तियाब थी जितनी दूध या दही और मई 2015 में वो लम्हा आ गया
20:39
Speaker A
जिसका सबको इंतजार था। जज कैथरीन फॉरेस्ट ने ऐसी सजा सुनाई जिसने इंसानी [संगीत] हुकूक के अलमबरदारों और टेक्नोलॉजी के माहरीन को सक्ते में डाल दिया। रोज उलब्रिक को दो बार उम्र कैद और मजीद 40 साल की सजा सुनाई गई। वह भी पेरोल के किसी
20:55
Speaker A
इमकान [संगीत] के बगैर। उसका मतलब क्या था? उसका मतलब यह था कि रोस उलब्रिक अपनी बाकी की जिंदगी का हर सेकंड जेल की सलाखों के पीछे गुजारेगा। जज ने कहा कि मैं यह सजा इसलिए दे रही हूं ताकि दुनिया को पता
21:08
Speaker A
चले कि डार्क वेब पर छुपकर जुर्म करने वालों का अंजाम क्या होता है। अब दुनिया समझ रही थी कि रोज मरेगा भी जेल में। लेकिन सितंबर 2025 में न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक ऐसी खबर ब्रेक की जिसने पूरे अमेरिका को हिला कर रख दिया। डॉनल्ड ट्रंप
21:23
Speaker A
ने अपनी दूसरी सदारत के पहले ही महीने में रोस उलब्रिट को मुकम्मल और गैर मशरूत माफी देकर रिहा करने का हुकुम दिया। आखिर ट्रंप ने एक साबितशुदा ड्रग लॉट को क्यों रिहा किया? यह सिर्फ इंसानी हमदर्दी नहीं थी यह
21:36
Speaker A
सियासत थी। अमेरिका की क्रिप्टो कम्युनिटी और लिबर्टेरियन वोटर्स रोज को एक हीरो मानते थे और यह दोनों ट्रंप के वोटर थे। एलॉन मस्क जैसे लोग तक उसकी रिहाई का मुतालबा कर रहे थे। ट्रंप ने अपनी इलेक्शन कैंपेन में उसकी रिहाई का वादा किया था।
21:51
Speaker A
आई विल कम्यूट सेंटेंस ही ऑलरेडी 11 इयर्स गेट होम। ट्रंप के उस कंट्रोवर्शियल फैसले ने करोड़ों बिटकॉइन होल्डर्स और लिबर्टेरियन वोटर्स का दिल जीत लिया। इंटरनेट का वो भूत जिसे एफबीआई ने अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी कामयाबी करार दिया था। 11 साल बाद
22:14
Speaker A
दोबारा आजाद इंसान बन गया। लास्टाई डोनल्ड ट्रंप ग्रांटेड मी [संगीत] फुल पार्टन। आई वास डूइंग लाइफ विदाउट। आई वास लॉक्ड फॉर मोर देन 11 इयर्स यू लेट मी आउट। आई एम अ फ्री मैन। अगर आप इस स्टोरी में एक के बाद दूसरे
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Speaker A
ट्विस्ट से हैरान हो रहे हैं तो सबसे बड़ा शॉक तो आपको अब लगेगा। यह कि रोज को सामने लाने वाले दो अहम तरीन किरदार। एफबीआई के कॉल फोर्स और श बर्जेस भी बाद में पकड़े गए। टू फॉर्मर फेडरल एजेंट्स हु हेल्प शट डाउन
22:46
Speaker A
द सिल्क रोड विल प्लीट गिल्टी टू स्टीलिंग थाउजेंड्स ऑफ़ बिटकॉइन। असल में कॉल फोर्स ने जारी अकाउंट बनाकर रोज को ब्लैकमेल किया था और उसे इन्वेस्टिगेशन की खुफिया मालूमात बेचकर तकरीबन $57,000 के बिटकॉइन भी हासिल किए थे। बस एक गलती
23:03
Speaker A
हुई कि एक बार मालूमात बेचते हुए मैसेज के आखिर में गलती से अपना असल नाम कॉल्ड लिख दिया जिससे एफबीआई को उस पर शक हुआ और बिल आखिर उसका पोल भी खुल गया। उधर शर्जेस ने क्रिटिस ग्रेन की लॉग इन डिटेल्स इस्तेमाल
23:17
Speaker A
करते हुए सिल्क रोड से तकरीबन $8,20,000 के बिटकॉइन चुराए। कॉल फोर्स को बाद में 78 महीने और शॉन ब्रिजेस को 71 महीने कैद की सजा सुनाई गई। यानी इस गंगा में सभी हाथ धो रहे थे। कानून तोड़ने वाले भी और
23:30
Speaker A
उसे नाफिस करने वाले भी। बहरहाल सिल्क रोड तो खत्म हो गई लेकिन रोस ने दुनिया को एक ब्लूप्रिंट दे दिया था कि डार्क वेब पर इललीगल मार्केट बनाना मुमकिन है। वो वाकई ड्रीट पायरेट रोबोट्स बन गया। उसका यह
23:44
Speaker A
कहना भी बिल्कुल ठीक साबित हो रहा है कि अगर तुम मुझे पकड़ भी लोगे तो कोई और मेरी जगह ले लेगा। और यह आईडिया कभी नहीं मरेगा। सिल्क रोबोट के बंद होते ही उसकी जगह लेने के लिए दर्जनों नई वेबसाइट्स आ
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Speaker A
गई जो उससे भी 10 गुना ज्यादा बड़ी हो गई। आज डार्क रैक पर होने वाली ट्रेड पहले से कहीं ज्यादा कॉम्प्लेक्स और खतरनाक है। आज बहुत से हैकर्स, ड्रग डीलर्स और मनीहस्ट के प्रोफेसर जैसे लोग रोस के बनाए हुए
24:08
Speaker A
रास्ते पर चल रहे हैं। और ट्रंप की तरह लाखों लोग समझते हैं कि रोस उलब्रिक एक सियासी कैदी था। एक ऐसे लड़के को जिसने खुद कभी गोली नहीं चलाई उमर कैद की सजा देना नाइंसाफी है। लेकिन तस्वीर का एक
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Speaker A
दूसरा रुख भी है और वो बड़ा भयानक है। सिल्क रोड पर बिकने वाली मंशियात ने कितने खानदान उजाड़ दिए। कितने नौजवानों की जिंदगियां इस नाम निहात आजादी की भेंट चढ़ गई। उसका हिसाब कौन देगा? सिल्क रोड की कहानी हमें टेक्नोलॉजी की डार्क साइड
24:37
Speaker A
दिखाती है कि वो इंटरनेट जिसने हमें इल्म दिया, आवाज दी, ताकत दी। लेकिन उसी इंटरनेट ने हमें वो नकाब भी दिया जिसके पीछे छुपकर इंसान बदतरीन जरायम भी कर सकता है। रोस उलब आजाद है। लेकिन यह सवाल अब भी
24:52
Speaker A
अपनी जगह मौजूद है कि टेक्नोलॉजी हमें आजाद कर रही है या यह हमें ऐसे शिकंजों में कस रही है जिससे निकलना हमारे बस में नहीं होगा।
Topics:डार्क वेबरॉस उल्ब्रिकसिल्क रोडटोर ब्राउज़रबिटकॉइनऑनलाइन ड्रग मार्केटब्लैक मार्केटइंटरनेट सुरक्षागैरकानूनी व्यापारडिजिटल अपराध

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