शी जिनपिंग की जीवन यात्रा और चीन के सबसे ताकतवर नेता बनने की कहानी।
Key Takeaways
- शी जिनपिंग ने अपने कठिन बचपन और राजनीतिक संघर्षों से उभरकर चीन के सबसे ताकतवर नेता बनने का सफर तय किया।
- कल्चरल रिवोल्यूशन और डाउन टू कंट्री मूवमेंट ने उनके जीवन को गहराई से प्रभावित किया।
- डेंग जियाओपिंग की आर्थिक नीतियों ने चीन को वैश्विक शक्ति बनाने में मदद की।
- शक्ति और पावर को समझना और हासिल करना जिनपिंग की सफलता की कुंजी थी।
- उनकी सख्त सत्ता पकड़ भविष्य में चीन की राजनीतिक स्थिरता के लिए चुनौती हो सकती है।
What the video covers
- शी जिनपिंग का बचपन कठिनाइयों से भरा था, जहां उनके परिवार को गद्दार माना जाता था।
- उनके पिता शी जोंगशुन माओ के करीबी थे लेकिन बाद में राजनीतिक विवादों में फंस गए।
- कल्चरल रिवोल्यूशन के दौरान जिनपिंग को गांव भेजा गया जहां उन्होंने कठोर जीवन बिताया।
- जिनपिंग ने कम्युनिस्ट पार्टी में शामिल होकर धीरे-धीरे सत्ता में अपनी जगह बनाई।
- माओ की मृत्यु के बाद डेंग जियाओपिंग ने चीन की नीतियों में बदलाव किया और अर्थव्यवस्था सुधारी।
- डेंग की पॉलिसीज ने चीन को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया और दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाया।
- शी जिनपिंग ने सत्ता हासिल करने के लिए पार्टी के अंदर विरोधी धड़ों को खत्म किया।
- उन्होंने चीन को तकनीकी और आर्थिक क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए कई कदम उठाए।
- जिनपिंग की सत्ता पर पकड़ मजबूत है लेकिन यह उनके पतन का कारण भी बन सकती है।
- वीडियो में शी जिनपिंग के जीवन के संघर्ष, राजनीतिक उथल-पुथल और चीन की बदलती स्थिति को विस्तार से बताया गया है।
Chapters
- 00:00शी जिनपिंग का बचपन और परिवार की स्थिति
- 01:30चीन की राजनीतिक पृष्ठभूमि और माओ की क्रांति
- 02:50शी जिनपिंग के पिता की गिरावट और कल्चरल रिवोल्यूशन
- 04:11कल्चरल रिवोल्यूशन के दौरान जिनपिंग की जिंदगी
- 05:27डाउन टू कंट्री मूवमेंट और गांव में जीवन
- 06:40कम्युनिस्ट पार्टी में शामिल होना और शिक्षा
- 07:40माओ के बाद चीन की नई दिशा और डेंग जियाओपिंग
- 08:57चीन की आर्थिक प्रगति और जिनपिंग का उदय
- 10:30शी जिनपिंग की सत्ता पकड़ और भविष्य की चुनौतियां
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Speaker A
एक सिचुएशन इमेजिन कीजिए। 15 साल का एक लड़का पहाड़ की गुफा में रहता है। उसको सोने के लिए पत्थर का बिस्तर मिला है। घर परिवार का कोई ठिकाना नहीं है। उसके पिता को गद्दारी वाली तख्ती पहनाकर घुमाया गया है।
Speaker A
फिर एक दिन जेल भेज दिया गया। उसकी मां लेबर कैंप में काम करती है और बहन की अचानक मृत्यु हो चुकी है। गांव वाले हर दिन ताना मारते हैं। वे उसे गद्दार का बेटा कहते हैं। उससे हर दिन मजदूरी करवाई जाती है और यह प्रोसेस सात [संगीत] बरसों तक चलता है।
Speaker A
लेकिन ना तो उस लड़के की हिम्मत टूटती है और ना ही सपना। इस जिल्लत से छूटते ही वह अपने मकसद पर लग जाता है। कहता है मुझे अपने देश का सबसे ताकतवर व्यक्ति बनना है। ना भूतो ना भविष्यति। ना मेरे जैसा कोई हुआ और ना कोई हो पाएगा। [संगीत]
Speaker A
इस घटना को 50 साल से ज्यादा हो चुके हैं। इस दरमियान सिक्का पूरी तरह पलट चुका है। वो लड़का अपने देश का ही नहीं बल्कि दुनिया का सबसे ताकतवर [संगीत] नेता बन चुका है। उस लड़के को दुनिया शी जिनपिंग के नाम से जानती है। द प्रेसिडेंट ऑफ पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना।
Speaker A
क्या है शी जिनपिंग की कहानी? उनके परिवार को लोग गद्दार क्यों कहते थे? जिनपिंग ने खोया रुतबा कैसे हासिल किया? उन्होंने चीन को ताकतवर कैसे बनाया? और जिनपिंग का असली मकसद क्या है? चलिए शुरू करते हैं। [संगीत]
Speaker A
शी जिनपिंग 15 जून 1953 को बीजिंग में पैदा हुए थे। तब तक चीन में कम्युनिस्ट क्रांति हो चुकी थी। अक्टूबर 1949 में माओ जिदोंग ने चीन की सत्ता पर कब्जा कर लिया था। उसने चीन को पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना बना दिया था और चाइनीस कम्युनिस्ट पार्टी सीसीपी देश की सरकार बन गई।
Speaker A
माओ की क्रांति से पहले चीन में कुमतांग पार्टी की सरकार थी। क्रांति के बाद वे फार मोसा द्वीप चले गए थे। इस द्वीप को ताइवान भी कहते हैं। जब जिनपिंग पैदा हुए उस वक्त चीन काफी गरीब और पिछड़ा था। उस दौर में 20% बच्चे जन्म के समय ही मर जाते थे। लोगों का औसत जीवनकाल 45 साल के आसपास था।
Speaker A
लिटरेसी रेट 30% से भी कम था। चीन की अर्थव्यवस्था खेती पर निर्भर थी। 90% लोग गांव में बसते थे और वहां कुछ-कुछ बरसों के अंतर में अकाल पड़ता रहता था। यानी उन दिनों जिंदगी मुश्किलों और अभावों से भरी हुई थी।
Speaker A
लेकिन जिनपिंग को कुछ भी झेलना नहीं पड़ा था। उनके पिता शी जोंशन सरकार का प्रोपगेंडा डिपार्टमेंट चलाते थे। वह माओं के सबसे करीबी लोगों में से थे। उन्होंने बुरे दिनों में माओं का साथ दिया था। उनके साथ क्रांति में भी हिस्सा लिया था। इसका उन्हें फायदा मिला।
Speaker A
उनको पार्टी और सरकार में बड़े पद दिए गए। 1959 में वह चीन के वाइस प्रीमियर बन चुके थे। उनकी फैमिली जोंगनाई में रहने लगी थी। यह बीजिंग का एक खास कंपाउंड था। इसमें कम्युनिस्ट पार्टी के सीनियर लीडर्स रहा करते थे। इसी कंपाउंड में माओ जिदोंग का घर भी था।
Speaker A
जोंगनाई की दुनिया बाकी चीन से एकदम अलग थी। वहां रहने वालों को किसी चीज की चिंता नहीं करनी थी। उन्हें सबसे बेहतर सुविधाएं मिलती थी। शी जिनपिंग का बचपन शाही अंदाज में बीता। [संगीत]
Speaker A
उन्हें एलट बोर्डिंग स्कूल में दाखिला मिला। वहां उनको लीडरशिप के लिए तैयार किया जा रहा था। लेकिन अचानक इसमें ब्रेक लग गया। 1962 में उनके पिता शी जोंगशुन माओ जदोंग की नजरों से उतर गए।
Speaker A
दरअसल उन्होंने एक ऐसी किताब का समर्थन किया [संगीत] था जिसके कुछ हिस्सों में माओ की आलोचना थी। इतनी सी बात उन पर भारी पड़ गई। उन्हें वाइस प्रीमियर के पद से हटा दिया गया। उनके खिलाफ जांच बैठा दी गई।
Speaker A
उनको कम्युनिस्ट पार्टी और क्रांति का दुश्मन बताया जाने लगा। फिर उन्हें एक फैक्ट्री में मजदूरी करने भेज दिया गया। लेकिन दुश्वारियां खत्म नहीं हुई थी। 1966 में माओ जिदोंग ने कल्चरल रेवोल्यूशन शुरू किया। इसका मकसद पुरानी प्रथाओं, पुरानी संस्कृति, पुरानी आदतों और पुराने विचारों को खत्म करना था।
Speaker A
यह असल में माओं का कमबैक प्लान था। ग्रेट लीफ फॉरवर्ड की ट्रेजडी माओं पर भारी पड़ी थी। पार्टी के अंदर उसको चुनौती देने वाले नेता खड़े होने लगे थे। माओं ने उन सबको एक झटके में खत्म करने की साजिश रची। उसकी अपील पर लाखों नौजवान पढ़ाई लिखाई छोड़कर रेड गार्ड्स में शामिल हो गए।
Speaker A
वो क्रांति के कथित दुश्मनों को मिटाने लगे। वे किताबों, मंदिरों, ऐतिहासिक इमारतों, पेंटिंग्स, आर्ट वक्स आदि को जलाने लगे। उन्होंने प्रोफेसर्स नेताओं लेखकों बुद्धिजीवियों आदि [संगीत] को सरेआम जलील किया। वे उनकी परेड निकालते थे और उन्हें पब्लिक में सजा भी देते थे।
Speaker A
कईयों को तो पीट-पीट कर मार दिया गया था। इस दौरान शी जोंशन भी निशाने पर आए। रेड गार्ड्स ने उनको फैक्ट्री से किडनैप कर लिया। उनके गले में तख्ती लटका कर घुमाया गया। फिर उन्हें जेल भेज दिया गया। जश को जेल में सबसे अलग-थलग रखा गया था।
Speaker A
इस बीच उनके घर को तोड़ दिया गया। उनकी पत्नी को लेबर कैंप जाना पड़ा। [संगीत] एक बेटी ने अपनी जान ले ली और उनके बेटों को अक्सर अपमानित किया जाता था। जंग पर इसका गहरा असर पड़ा। जेल में उनको मेंटल प्रॉब्लम्स [संगीत] होने लगी थी।
Speaker A
वो अकेले में अक्सर रोया करते थे। जब कल्चरल रिवोल्यूशन शुरू हुआ तब शी जिनपिंग महज 13 साल के थे। लेकिन उन्हें बख्शा नहीं [संगीत] गया। उनको गद्दार का बेटा कहा गया। बोर्डिंग स्कूल से निकाला जा चुका था। उनकी जिंदगी आम लोगों जैसी हो चुकी [संगीत] थी।
Speaker A
हर वक्त उनके ऊपर नजर रखी जाती थी। कभी भी अरेस्ट कर लिया जाता था। फिर आता है 1968 का साल। उस साल माओ ने एक नया शोफा छोड़ा। उसने कहा कि शहरों के नौजवान बर्बाद हो रहे हैं। उन्हें गांव जाकर किसानों से सीखना चाहिए।
Speaker A
इस कैंपेन को डाउन साइड टू द कंट्री साइड मूवमेंट कहा गया। इसमें लगभग 2 करोड़ युवाओं को खेतों में काम करने भेजा गया। इसमें शी जिनपिंग भी थे। उनको 1969 में लियांगी गांव में रखा गया। गांव वालों को पहले ही बता दिया गया था यह लड़का गद्दार का बेटा है।
Speaker A
इस पर निगरानी रखनी है। जिनपिंग को रहने के लिए गुफा दी गई थी। उसमें पत्थर का स्लैब रखा था। उनको उसी पर सोना था। खाने में रूखा-सूखा मिलता था। सुबह-सुबह उन्हें खेत पर निकलना होता था। इसके बाद उनको अपमान भी झेलना पड़ता था।
Speaker A
गद्दारी का टैग उन पर पहले से चसपा था। जिनपिंग ने एक बार भागने की कोशिश भी की, लेकिन उन्हें रास्ते में ही पकड़ लिया गया। इसके बाद और सख्ती होने लगी। ऐसे लड़पन का दो ही तरह से फ्यूचर हो सकता है। या तो हार मान लो या अपने आप को इतना ताकतवर बनाओ कि सिस्टम तुम्हारे इशारों पर चले।
Speaker A
शी जिनपिंग ने दूसरा वाला रास्ता चुरा। उनके मन में एक बात बैठ गई थी। ईमानदार या बेगुनाह होना अच्छी जिंदगी की गारंटी नहीं है। वफादार या क्रांति का नायक होना भी सफलता की कुंजी नहीं है।
Speaker A
यहां सिर्फ एक चीज आपको ऊपर लेकर जाएगी वो है पावर। इतनी पावर कि आप रूल बना सके और अपनी मर्जी से उन्हें बिगाड़ भी सके। उन्हें पता था सिस्टम बेहद जालिम होता है। इसको बदला नहीं जा सकता। इसीलिए अन्याय सहने से बेहतर है तुम खुद सिस्टम बन जाओ।
Speaker A
लियांगी में जिनपिंग ने पूरा ध्यान खेती पर लगा दिया था। उन्हें जो कहा जाता था वह बिना सवाल जवाब के पूरा करते थे। धीरे-धीरे गांव वालों ने उन्हें अपना लिया। लेकिन जिनपिंग हमेशा वहां नहीं रहना चाहते थे। वह कम्युनिस्ट पार्टी की मेंबरशिप के लिए लगातार अप्लाई कर रहे थे।
Speaker A
लेकिन उन्हें कम से कम 10 बार रिजेक्ट किया गया। 1974 में जब उनको मेंबर बनाया गया तब वह 21 साल के हो चुके थे। वह उस पार्टी में जाना चाहते थे जिसने उनके परिवार को गुरबत में धकेला था और उन्हें मजदूरी करने के लिए मजबूर किया था।
Speaker A
बहरहाल 1975 में जिनपिंग को लंगझी से निकलने की [संगीत] इजाजत मिल गई। उन्हें शिंगुआ यूनिवर्सिटी में एडमिशन भी मिला। जिनपिंग ने वहां से केमिकल इंजीनियरिंग [संगीत] की पढ़ाई की। 1979 में उनको डिग्री मिली।
Speaker A
तब तक चीन में माओ का दौर बीत चुका था। 1976 में माओ जिदोंग की मृत्यु हो [संगीत] गई थी। उसके वफादार या तो जेल में थे या मारे जा चुके थे। जिन लोगों को माओ ने जेल भेजा था वे पावर में आ चुके थे। [संगीत]
Speaker A
जिनपिंग के पिता शी जोंगशुन की भी वापसी हो चुकी थी। उनको फिर से लीडरशिप का हिस्सा बनाया गया। [संगीत] उन्हें खोया रुतबा वापस मिला। लेकिन जिनपिंग की मंजिल और भी बड़ी थी। चीन के नए लीडर का नाम था डेंग जियाऊपिंग।
Speaker A
माओ ने उनको दो बार पर्ज किया था। लेकिन वह किसी तरह बच गए थे। माओ की मौत के बाद वो सबसे बड़ा नेता बनकर उभरे। उन्होंने पार्टी और सरकार की कमान अपने हाथों में ले ली। डेंग का काम करने का तरीका माओ से एकदम उलट था।
Speaker A
माओ को केस, क्रांति और दिखावा पसंद था। डेंग की दिलचस्पी थी रिजल्ट्स में। वह कहते थे जब तक बिल्ली चूहे पकड़ रही है, तब तक यह मैटर नहीं करता कि वो सफेद है या फिर काली। मतलब यह कि विचारधारा से फर्क नहीं पड़ता।
Speaker A
जिस चीज से काम निकलता हो, उस पर ध्यान दो। डेन को जब सत्ता मिलती है, चीन की हालत उस वक्त काफी खस्ता थी। माओ के ग्रेटली फॉरवर्ड और कल्चरल रिवोल्यूशन ने देश को गर्त में पहुंचा दिया था। अर्थव्यवस्था रेंग रही।
Speaker A
चीन की पर कैपिटा इनकम भारत से भी कम थी। भारत की तुलना में चीन में ज्यादा लोग गांव में रहते थे। करोड़ों लोग गरीबी और बेरोजगारी से जूझ रहे [संगीत] थे। टैंक के सामने बहुत बड़ी चुनौती थी।
Speaker A
इसी बीच नवंबर 1978 में वह सिंगापुर के दौरे पर गए। वहां उन्होंने देखा कि चीनी मूल के लोग काफी बेहतर जीवन जी रहे हैं। वहां का पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर अच्छा था। लोगों के पास अच्छे घर थे।
Speaker A
सिंगापुर में विदेशी निवेश आ रहा था। फैक्ट्रियां लग रही थी और लोगों का लिविंग स्टैंडर्ड भी तेजी
Speaker A
देश को गर्त में पहुंचा दिया था। अर्थव्यवस्था रेंग रही चीन की पर कैपिटा इनकम भारत से भी कम थी। भारत की तुलना में चीन में ज्यादा लोग गांव में रहते थे। करोड़ों लोग गरीबी और बेरोजगारी से जूझ रहे [संगीत] थे। टैंक के सामने बहुत बड़ी
Speaker A
चुनौती थी। इसी बीच नवंबर 1978 में वह सिंगापुर के दौरे पर गए। वहां उन्होंने देखा कि चीनी मूल के लोग काफी बेहतर जीवन जी रहे हैं। वहां का पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर अच्छा था। लोगों के पास अच्छे घर थे। सिंगापुर में विदेशी निवेश आ
Speaker A
रहा था। फैक्ट्रियां लग रही थी और लोगों का लिविंग स्टैंडर्ड भी तेजी से ऊपर जा रहा था। जबकि सिंगापुर में एक ही पार्टी का कंट्रोल था। इसके बावजूद उसने तरक्की हासिल की थी। डेंग को लगा कि यह चीन में
Speaker A
भी संभव हो सकता है। माओ के समय में प्रॉफिट कमाने और प्राइवेट कंपनी को संदेह से देखा जाता था। डेंग ने इसको बदलने का फैसला किया। उन्होंने एक्सपेरिमेंट के लिए शजन को चुना। यह गांव हांगकांग बॉर्डर के पास [संगीत] था। यहां मुश्किल से 1 लाख
Speaker A
लोग रहते थे। ज्यादातर आबादी मछलियों पर निर्भर थी। जैसे ही डेंग ने शनजन को स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन बनाया और विदेशी कंपनियों को काम करने की इजाजत दी। वहां चमत्कार हो गया। कुछ ही बरसों में शजन दुनिया का टेक कैपिटल बन चुका था। वहां की
Speaker A
आबादी 2 करोड़ तक पहुंच चुकी थी। शजन की सफलता के बाद डेंग ने और भी कई जगहों पर स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोंस बनाए। उन्होंने चीनी स्टूडेंट्स को अमेरिका और यूरोप भेजा और उन्हें लौटकर चीन में काम करने के लिए
Speaker A
इंस्पायर [संगीत] किया। डेंग की पॉलिसीज ने चीन को पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने एक पेड़ की बुनियाद रखी थी। वो पौधा अब बरगद बन चुका था। 2010 में चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश बन गया।
Speaker A
यह रिकॉर्ड आज तक कायम है। उसकी नजर अब पहले नंबर [संगीत] पर है। चीन सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरर भी है। उसको दुनिया का वर्कशॉप कहा जाता है। डेंग ने इकॉनमी में तो कमाल किया ही। उन्होंने राजनीति में भी थोड़ी ईमानदारी लाने की कोशिश की। डेंग ने
Speaker A
माओं का कल्ट देखा था। इसलिए उन्हें लगता था कि एक आदमी के हाथ में पूरे देश का कंट्रोल नहीं होना चाहिए। इसीलिए 1982 के संविधान में कुछ बंदिशें लगाई गई। राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के लिए दो टर्म्स की लिमिट तय [संगीत] की गई। फाइनल
Speaker A
डिसीजन लेने का अधिकार कोलत ब्यूरो स्टैंडिंग कमेटी को दिया गया कि चाइनीस कम्युनिस्ट पार्टी की सबसे ताकतवर बॉडी है। इसमें [संगीत] सात मेंबर्स होते हैं। साथ में एक कुर्सी चीन के राष्ट्रपति के पास रहती है। डेन के रिफॉर्म में यह भी तय
Speaker A
हुआ कि हर 10 साल में लीडरशिप [संगीत] को बदला जाएगा। लेकिन इसका मतलब यह नहीं था कि चीन में लोकतंत्र आने वाला था। या आम लोगों को अपना लीडर चुनने का कोई अधिकार ही मिलने वाला था। इसकी सबसे बड़ी झलक जून
Speaker A
1989 में दिखी। तब 9 [संगीत] स्क्वायर में बैठे नौजवानों ने बुनियादी अधिकार मांगे। सरकार ने उनके ऊपर टैंक चढ़ा दिए। यही डेंग जिया ओपिंग का मॉडस ऑपरेंडी था। उनका मानना था कि पार्टी ही सबके लिए अच्छा या बुरा तय कर सकती है। इसमें विरोध या
Speaker A
आलोचना के लिए कोई जगह नहीं थी। खैर 91 नरसंहार के बाद डेंग ने कुर्सी छोड़ दी। उन्होंने 10 साल में लीडरशिप बदलने वाला वादा निभाया था। लेकिन जब तक जो जिंदा रहे सरकार उनका अप्रूवल लिए बिना कोई काम नहीं
Speaker A
करती थी। डेंग ने अपने उत्तराधिकारी के तौर पर जियांग जिमिन को चुना था। [संगीत] जियांग पहले तो कम्युनिस्ट पार्टी के जनरल सेक्रेटरी बने। उसके बाद उन्हें राष्ट्रपति की कुर्सी भी मिल गई। चीन में जनरल सेक्रेटरी का पद राष्ट्रपति से
Speaker A
ज्यादा ताकतवर होता है। उसके लिए कोई टर्म लिमिट भी नहीं है। लेकिन क्योंकि राष्ट्रपति के लिए दो टर्म्स का लिमिटेशन था और आमतौर पर दोनों कुर्सी एक ही व्यक्ति के पास रहती थी। इसलिए माना गया कि जनरल सेक्रेटरी भी दो टर्म्स के बाद हट
Speaker A
जाएंगे। जंग जेमिन और हु जिंताओ दोनों ने यह परंपरा निभाई। लेकिन 2012 में कहानी बदलने वाली थी। उस साल नवंबर में शी जिनपिंग कम्युनिस्ट पार्टी के जनरल सेक्रेटरी बने। मार्च 2013 में उनको राष्ट्रपति का पद मिला। कायदे से उन्हें
Speaker A
मार्च 2023 तक [संगीत] कुर्सी छोड़ देनी थी। लेकिन डेडलाइन बीते 3 साल से ऊपर का वक्त हो चुका है। जिनपिंग दोनों पदों पर बने हुए हैं। उन्होंने ता उम्र कुर्सी पर बने रहने का इंतजाम भी कर लिया है। इस
Speaker A
मामले में वह माओ जिदोंग को भी पीछे छोड़ सकते हैं। लेकिन उन्होंने यह सब किया कैसे? यह समझने के लिए हमें थोड़ा पीछे चलना होगा। शघवा यूनिवर्सिटी से डिग्री लेने के बाद शी जिनपिंग पार्टी में फुल टाइम काम करने
Speaker A
लगे। वो प्रिंसलिंग या राजकुमारों के कुवे से थे। प्रिंस लिंग का इस्तेमाल कम्युनिस्ट पार्टी के सीनियर नेताओं के बच्चों के लिए होता था। यह बच्चे आगे चलकर पार्टी की लीडरशिप संभालने वाले थे। जिनपिंग के पिता जॉनसन भी सीनियर नेता थे।
Speaker A
डेंग के दौर में वह सरकार में लौट आए थे। पार्टी उन पर फिर से भरोसा करने लगी थी। इसने जिनपिंग का काम आसान कर दिया। उन्होंने कुछ समय डिफेंस मिनिस्टर गेंग बाऊ के सेक्रेटरी के तौर पर काम किया। फिर
Speaker A
हेबे में पार्टी का कामकाज देखने लगे। 1985 में उनकी पोस्टिंग फजियान प्रांत में हुई। वहां वो 17 वर्षों तक रहे। धीरे-धीरे उन्होंने अपनी जगह बनाई। 1999 में उनको फजियान का गवर्नर बना दिया गया। 2002 में जिनपिंग को चेजियांग प्रांत भेजा गया। यह
Speaker A
चीन के सबसे विकसित इलाकों में से एक था। फिर 2007 में उन्हें शघाई का पार्टी सेक्रेटरी बनाया गया। शंघाई को चीन का फाइनेंशियल कैपिटल कहा जाता है। शघाई पहुंचने के बाद उनका सेंट्रल लीडरशिप में आना तय हो चुका था। यह मौका उन्हें बहुत
Speaker A
जल्द मिल गया। 2007 में ही उनको पोल ब्यूरो स्टैंडिंग कमेटी में शामिल कर लिया गया। जिनपिंग चीन के सबसे ताकतवर लोगों के ग्रुप में जगह बना चुके थे। पार्टी का दुश्मन कहलाने से लेकर पार्टी की टॉप लीडरशिप तक पहुंचने का यह सफर अपने आप में
Speaker A
केस स्टडी है। इस दौरान जिनपिंग ने बड़े करीने से अपनी छवि गढ़ी। जिनपिंग को चुपचाप काम करना आता था। वह लंबे चौड़े भाषण देने से बचते थे। उनको खूब पैसे कमाने की चाह नहीं थी। वो किसी को नाख
Speaker A
नहीं करते थे। वो हर धड़े के लोगों के साथ उठते बैठते थे। उनकी हां में हां मिलाते थे। किसी के सामने अपनीत्वाकांक्षा जाहिर नहीं करते थे। उनसे मिलने वाले लोगों को अक्सर लगता कि आदमी अपना ही है। इससे डरने
Speaker A
की कोई जरूरत नहीं है। लेकिन यह जिनपिंग की सोची समझी रणनीति थी। [संगीत] उन्होंने सीखा था कि अगर पार्टी में सर्वाइव करना है तो अपनी चाल छिपा कर रखो और किसी को दुश्मनी करने की वजह मत दो। इसने उन्हें
Speaker A
ऊपर तक पहुंचने में मदद की। 2007 तक वो जनरल सेक्रेटरी के रेस में आ चुके थे। 5 बरस बाद हु जिंताओं को हटना था। उससे पहले एक संभावित उत्तराधिकारी चुना जाना जरूरी था। यह काम पार्टी के सीनियर लीडर्स किया
Speaker A
करते थे। उन्होंने काफी सोच विचार के [संगीत] बाद जिनपिंग को पसंद किया। उनको लगता था कि जिनपिंग उनके वर्चस्व को सिर झुकाकर मान लेंगे और वे स्टेटस को से छेड़छाड़ नहीं करेंगे। यह कम्युनिस्ट पार्टी के कई नेताओं के लिए बहुत बड़ी भूल
Speaker A
साबित हुई। जब जिनपिंग टॉप लीडरशिप में पहुंचे, चाइनीस कम्युनिस्ट पार्टी में भ्रष्टाचार अपने चरम पर था। हर तरफ लूट मची हुई थी। पार्टी के नेता बेईमानी कर रहे थे। मिलिट्री जनरल घूस लेकर संपत्तियां बना रहे थे। उनका आदर्श या
Speaker A
नैतिकता से कोई लेना देना था नहीं। फिर 2012 में एक अजीबोगरीब घटना घटी। इसने चीन में चल रहे भ्रष्टाचार को दुनिया के सामने ला दिया। फरवरी 2012 की बात है। चीन के चिंगु स्थित अमेरिकी कंसिलेट में एक पुलिस
Speaker A
वाला आया। आते ही उसने शरण मांगी। उसका नाम वांग लजुन था। वो चोंकिंग प्रांत का पुलिस चीफ था। उसने बताया कि उसके बॉस बोजिलाई की पत्नी ने एक ब्रिटिश उद्योगपति का मर्डर किया है और बोला इस क्राइम को
Speaker A
छिपा रहा है। बोलाई उन दिनों चोंकिंग में कम्युनिस्ट पार्टी का सेक्रेटरी था। वो भी जिंगपिंग की तरह एक प्रिंसलिंग था। उसके पिता डेंग जियापिंग के करीबी थे। जिलाई ने एंटी करप्शन कैंपेन चलाकर अपना नाम बनाया था। 2012 में वह पार्टी की कोल लीडरशिप
Speaker A
में शामिल होने का बड़ा दावेदार था। वहां वह जिनपिंग को चुनौती दे सकता था। सिर्फ इतना ही नहीं बोलाई ने चाऊ योंग कांग से हाथ मिला लिया था। योंग पोलद ब्यूरो स्टैंडिंग कमेटी का मेंबर था। उसके पास पुलिस इंटेलिजेंस कोर्ट, इंटरनल
Speaker A
सिक्योरिटी और सरकारी वकीलों का फुल कंट्रोल था। ये दोनों मिलकर जिनपिंग को लीडर बनाने से रोकने का प्लान बना रहे थे। लेकिन फरवरी 2012 में मर्डर स्कैंड सबके सामने आते ही उनका प्लान चौपट हो गया। सबसे पहले बोजलाई के खिलाफ कार्रवाई हुई।
Speaker A
उसको पार्टी से निकाल दिया गया। केस चलाकर उम्र कैद की सजा दी गई। अब जिनपिंग के सामने कोई चुनौती नहीं बची। नवंबर 2012 में उनका राजतिलक तय था लेकिन अगस्त में वह अचानक गायब हो गए। पार्टी कुछ बता नहीं
Speaker A
रही थी और बाहर किसी को कोई खबर इसकी थी नहीं। पूरी दुनिया असमंजस में थी। बीच में अफवाह उड़ी कि उनको हार्ट अटैक आया है। किसी ने कहा वो घायल हो गए हैं। कोई कह रहा था उनको किसी ने किडनैप कर लिया है।
Speaker A
लेकिन जिनपिंग जैसे गायब हुए थे तीन हफ्ते बाद वैसे ही प्रकट हो गए। इन तीन हफ्तों में क्या हुआ इसके बारे में कोई जानकारी पब्लिक नहीं है। लेकिन बाद में जो हुआ उसकी एक थ्योरी निकली। कहा गया कि इस
Speaker A
दौरान वह पार्टी के वेटरन नेताओं से मिल रहे थे। जिनपिंग ने उनसे कहा हमारे सामने बहुत बड़ी समस्या आ गई है। भ्रष्टाचार हमें बर्बाद कर देगा। मैं इसको ठीक कर सकता हूं लेकिन मुझे अपने कामकाज में कोई रोक-टोक नहीं चाहिए। अगर आप अनलिमिटेड
Speaker A
पावर्स नहीं दे सकते तो मैं जनरल सेक्रेटरी नहीं बनना चाहता। कई दिनों की बहस के बाद पार्टी वेटर्न्स ने हामी भर दी। नवंबर 2012 में जिनपिंग को चाइनीस कम्युनिस्ट पार्टी का जनरल सेक्रेटरी चुन लिया गया। मार्च 2013 में वह राष्ट्रपति
Speaker A
भी बन चुके थे। अब वह सिस्टम को अपने इशारों पर नचा सकते थे। जिनपिंग इस पल का इंतजार बरसों से कर रहे थे। उन्होंने ऐसा खेल रचाया कि चीन में हाहाकार मच गया। कुर्सी संभालते ही जिनपिंग ने एंटी करप्शन
Speaker A
कैंपेन शुरू किया। उन्होंने अपने दोस्त वांग किशान को सेंट्रल कमीशन फॉर डिसिप्लिन इंस्पेक्शन का इंचार्ज बना दिया। यह कमीशन एंटी करप्शन कैंपेन चलाने वाला था। जिनपिंग ने इसकी शक्तियां बढ़ा दी। उन्होंने कहा, हम किसी को नहीं बखशेंगे। हमें बाघों और मक्खियों दोनों से
Speaker A
एक साथ लड़ना है। मक्खी छोटे-मोटे अफसरों को कहा जाता था जबकि बाद सीनियर नेता और अधिकारी थे। आमतौर पर एंटी करप्शन कैंपेन में मक्खियों को पकड़ कर खानापूर्ति की जाती थी। लेकिन जिनपिंग ने खेल बदल दिया था। अगले कुछ वर्षों में 15 लाख से ज्यादा
Speaker A
पार्टी मेंबर्स और सरकारी अफसरों के खिलाफ कारवाई की गई। 400 से ज्यादा सीनियर नेताओं को कुर्सी से हटाया गया। इसमें कई मिलिट्री जनरल्स भी शामिल थे। पार्टी की सेंट्रल कमेटी के 35 मेंबर्स को भी पकड़ा गया। यहां तक कि डिसिप्लिनरी कमीशन से भी
Speaker A
नौ लोगों को हटाया गया। कुछ बड़े नाम जान लीजिए। चाऊ योंकांग जुलाई 2014 में जांच शुरू हुई। दिसंबर में अरेस्ट किया गया और जून 2015 में उम्र कैद की सजा सुनाई गई। यह पहली बार था जब पोलिथ ब्यूरो स्टैंडिंग
Speaker A
कमेटी के किसी मेंबर को सजा हुई थी। लिंगजी हुआ वो पूर्व राष्ट्रपति हु जनताओं के सलाहकार थे। उनको उम्र कैद की सजा मिली। शूचे हुए वो चीन आर्मी में जनरल थे। उनको घसखोरी के इल्जाम में पकड़ा गया था।
Speaker A
ट्रायल शुरू होने से पहले ही उनकी मृत्यु हो गई। ली शंग वो जिनपिंग की कैबिनेट में डिफेंस मिनिस्टर थे लेकिन उन्हें बीच में ही हटा दिया गया। एक और डिफेंस मिनिस्टर वे फेंगहे को 2024 में करप्शन के आरोप में
Speaker A
पार्टी से निकाला गया था। इन दोनों पर घूस लेने के आरोप के उनकी संपत्तियां ज्त कर ली गई और मई 2026 में उन्हें सस्पेंडेड डेथ सेंटेंस की सजा मिली। यानी दोनों को फांसी तो नहीं होगी लेकिन उन्हें जीवन भर
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जेल में रहना होगा। यह कुछ बड़े नाम है। पूरी लिस्ट इससे कई गुना ज्यादा बड़ी है। यहां पर एक और बात समझनी जरूरी है। एंटी करप्शन कैंपेन में जो भी लोग पकड़े गए या पार्टी से निकाले गए [संगीत] उनमें से
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ज्यादातर वाकई करप्ट थे। लेकिन इसमें एक पैटर्न का खास ध्यान रखा [संगीत] गया था। जिन लोगों पर भी कारवाई हुई वे जिनपिंग के विरोधी धड़े के थे। इन लोगों की वफादारी कहीं और थी। इस दौरान ऐसे लोगों को भी
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निपटाया गया जो आगे चलकर मुसीबत बन सकते थे। इसलिए यह करप्शन हटाओ से ज्यादा वर्चस्व साबित करने का कैंपेन [संगीत] था। जब तक धूल शांत हुई जिनपिंग का एकाधिकार स्थापित हो चुका था। 2017 में कम्युनिस्ट पार्टी ने जिनपिंग थॉट को चीन के संविधान
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में शामिल कर लिया। यह रुतबा उनसे पहले सिर्फ माओदोंग और डेंग जियापिंग [संगीत] को मिला था। वो भी मृत्यु के बाद। लेकिन जिनपिंग का नाम जीतेजी संविधान में दर्ज हो चुका था। फिर मार्च 2018 में चीन की संसद ने राष्ट्रपति पद पर लगी टर्म लिमिट
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भी हटा दी। 2022 में वह तीसरी बार जनरल सेक्रेटरी बने और मार्च 2023 में बतौर राष्ट्रपति तीसरा टर्म उन्हें मिल गया। अब वह चाहे तो ताम्र कुर्सी पर रह सकते हैं। इस वक्त कम्युनिस्ट पार्टी की कोर लीडरशिप के सभी मेंबर्स उनके वफादार हैं। कोई
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उन्हें चुनौती देने की हालत में नहीं [संगीत] है। पार्टी के जो वेटरन लीडर्स हैं उनको एक-एक ठिकाने लगाया जा चुका है। जियांग जिमिन की 2022 में मृत्यु हो चुकी है। उसी साल कु जनता पांव को भी पार्टी की
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बैठक से बाहर निकाल दिया गया था। उनका कहीं अता-पता नहीं है। आप कह सकते हैं कि चीन का वर्तमान और भविष्य काफी हद तक जिनपिंग की मुट्ठी में कैद है। ऐसी ताकत चीन के किसी लीडर के पास नहीं थी। माओ और
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डेंग को भी चुनौती मिलती थी। लेकिन जिनपिंग ने उन दोनों को पीछे छोड़ दिया है। इसमें कोई शक नहीं कि शी जिनपिंग चीन के सबसे ताकतवर नेता बन चुके हैं। लेकिन उनकी इच्छाएं खत्म नहीं हुई है। ऐसे में
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एक सवाल उठना लाजमी है। जिनपिंग आखिर चाहते क्या हैं? शी जिनपिंग अक्सर चाइना ड्रीम की बातें करते हैं। उनका लक्ष्य चीन को फिर से दुनिया का सबसे ताकतवर देश बनाना है। उन्हें पिछले 200 बरसों का दाग भी धोना है। इस दौरान ब्रिटेन ने चीन को
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ओपीएम वॉर में हराया। फिर उसने हांगकांग पर कब्जा किया। 20वीं सदी में जापान ने कई वर्षों तक चीन में नरसंहार किया और लूटपाट मचाई। इसके बाद ताइवान उससे अलग हुआ। जिनपिंग ने 2049 की डेडलाइन तय की है। तब
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तक वह हर कमी पूरी कर लेना चाहते हैं। [संगीत] उनकी हर पॉलिसी के मूल में अमीर और शक्तिशाली चीन है। इसके लिए वो किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार है। 2013 में जिनपिंग ने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव ल्च
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किया था। इसके तहत चीन पूरी दुनिया में क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर बना रहा है। इसका मकसद ग्लोबल सप्लाई चेन को डिटेक्ट करना था। उसको इसमें कामयाबी भी मिली है। लेकिन इस प्रोसेस में कई देश उसके डेड ट्रैप में फंस चुके हैं। इसको लेकर चीन पर
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बेईमानी के आरोप लगते हैं। जिनपिंग की दूसरी बड़ी पॉलिसी थी मेड इन चाइना 2025। यह प्रोग्राम 2015 में ल्च किया गया था। चीन ने एडवांस टेक्नोलॉजी के 10 सेक्टर्स तय किए थे। वो 2025 तक इनमें ग्लोबल लीडर बनना चाहता था। कई सेक्टर्स में वो आगे
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निकला भी। इलेक्ट्रिक गाड़ियां बनाने में वह पहले नंबर पर पहुंच चुका है। सोलर पैनल्स में चीन काफी आगे है। ड्रोन, बैटरी, सेमीकंडक्टर्स और रोबोटिक्स में भी उसकी तूती बोल रही है। एक समय तक चीन को सस्ते प्रोडक्ट्स की फैक्ट्री माना जाता
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था। लेकिन अब वह महंगे और संवेदनशील टेक्नोलॉजी के लिए भी [संगीत] जाना जाने लगा है। जिनपिंग का तीसरा सबसे बड़ा सपना ताइवान से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कई बार कहा है कि ताइवान को चीन से मिलाना उनका ऐतिहासिक लक्ष्य है। इसको बहुत देर तक
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टाला नहीं जा सकता। चीन लंबे समय से इसकी तैयारी कर रहा है। [संगीत] जिनपिंग इस लक्ष्य को जल्द से जल्द हासिल करना चाहते हैं। लेकिन ताइवान पर हमले की स्थिति में उन्हें अमेरिका का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन चीन यहीं पर रुकने वाला नहीं
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है। उसका कम से कम 10 पड़ोसी देशों के साथ सीमा विवाद चल रहा है और हर विवाद में सैन्य संघर्ष का खतरा है। अगर जिनपिंग ने अपनी जिद पर काबू नहीं रखा तो तबाही होनी तय है। जिनपिंग से पहले के चीनी नेताओं का
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फोकस काफी हद तक अपने देश की सीमाओं तक था। उनके ग्लोबल एंबिशंस कम थे लेकिन [संगीत] जिनपिंग रुकने वालों में से नहीं है। अब एक जरूरी सवाल यहां पर आता है। शी जिनपिंग ने जैसे चीन को चलाया क्या वैसे
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ही बाकी दुनिया को भी चलाएंगे? [संगीत] उनकी इच्छा तो यही है लेकिन इतिहास ऐसे नेताओं को उनकी जगह याद दिलाता रहा है। जिनपिंग की शक्ति की सीमाएं हैं। [संगीत] हाल के समय में चीनी अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी पड़ी है। रियलस्टेट सेक्टर
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संकट में है। युवाओं में बेरोजगारी बढ़ रही है और जनसंख्या घटने लगी [संगीत] है। जिनपिंग ने भले ही पार्टी पर असाधारण पकड़ बना ली है। लेकिन यही उनके पतन का कारण भी बन सकता है। जो नेता खुद को सर्वे सर्वा
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मान लेते हैं उनके आसपास हां में हां मिलाने वालों की [संगीत] संख्या बढ़ जाती है। ये लोग राजा की खराबियों पर भी तालियां पीटते हैं। वे उसे कभी गलती का एहसास नहीं होने [संगीत] देते। ऐसे में खतरनाक ब्लंडर्स की संभावना बढ़ जाती है।
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माओ की यही कमजोरी थी। यही कमजोरी जिनपिंग पर [संगीत] भी हावी हो सकती है। इस वीडियो को यहीं पर समाप्त करते हैं। अब आपकी बारी। आप शी जिनपिंग के बारे में क्या सोचते हैं? हमें कमेंट सेक्शन में जरूर
Speaker A
बताइएगा। अगर आपको ये वीडियो पसंद आया हो तो इसको लाइक [संगीत] और शेयर करते रहिए। हमारे चैनल की को सब्सक्राइब भी कर लीजिए। नए वीडियो में नई कहानी के साथ आपसे फिर मुलाकात होगी। तब तक के लिए मुझे विदा
Speaker A
दीजिए। बहुत-बहुत शुक्रिया।
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