फिदेल कास्त्रो की कहानी और क्यूबा की राजनीतिक संघर्ष की विस्तृत जानकारी।
Key Takeaways
- फिदेल कास्त्रो ने क्यूबा की स्वतंत्रता और तानाशाही के खिलाफ संघर्ष किया।
- अमेरिका की नाकेबंदी ने क्यूबा की आर्थिक स्थिति को कमजोर किया।
- राजनीतिक और सामाजिक बदलाव के लिए कास्त्रो ने जेल में भी सक्रिय भूमिका निभाई।
- क्यूबा की भौगोलिक स्थिति ने इसे अमेरिकी नीति का केंद्र बनाया।
- कास्त्रो का नेतृत्व और विचारधारा क्यूबा के इतिहास में महत्वपूर्ण रहे।
What the video covers
- 26 अक्टूबर 1962 को फिदेल कास्त्रो ने सोवियत संघ को अमेरिका के हमले की चेतावनी दी।
- फिदेल कास्त्रो ने बतिस्ता की तानाशाही सरकार को हटाकर क्यूबा को आजादी दिलाई।
- क्यूबा पर अमेरिका की नाकेबंदी और आर्थिक संकट का वर्णन।
- फिदेल कास्त्रो का जन्म, परिवार और शिक्षा की पृष्ठभूमि।
- हवाना यूनिवर्सिटी में छात्र राजनीति और कास्त्रो का रेडिकल नेशनलिस्ट धड़े में शामिल होना।
- 1952 में बतिस्ता का तख्ता पलट और कास्त्रो का राजनीतिक संघर्ष।
- मोंकाडा बैरक पर हमला और उसके बाद जेल में कास्त्रो का भाषण।
- जेल में कास्त्रो की पढ़ाई और राजनीतिक विचारों का विकास।
- क्यूबा की भौगोलिक स्थिति और अमेरिकी प्रभाव।
- कास्त्रो की क्रांतिकारी सोच और देश के लिए उनकी कुर्बानी।
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Speaker A
26 अक्टूबर 1962 की दोपहर मॉस्को में एक चिट्ठी गिरी। यह चिट्ठी 10,000 कि.मी. दूर हवाना से आई थी। भेजने वाले ने सोवियत संघ के लीडर निकिता क्रशेफ को लिखा था, अमेरिका हमारे ऊपर हमला करने आ रहा है। अगर हमला होता है तो आप अमेरिका पर परमाणु बम गिराने के लिए तैयार रहना। हम अपनी कुर्बानी देने के लिए तैयार हैं। चिट्ठी लिखने वाला यह व्यक्ति क्यूबा का लीडर था। नाम फिदेल अलहंद्रो कास्त्रो रूस जिन्हें दुनिया फिदेल कास्त्रो के नाम से जानती है। कास्त्रो क्रांतिकारी थे। उन्होंने बतिस्ता की तानाशाही सरकार से आजादी दिलाई थी। बतिस्ता को अमेरिका का सपोर्ट हासिल था। तभी से उनका देश अमेरिका के निशाने पर है। जब तक कास्त्रो जिंदा रहे उन्होंने क्यूबा को बचा कर रखा। लेकिन आज के दिन क्यूबा अपनी आखिरी सांसे रहा है। अमेरिका ने 3 महीने से उसकी नाकेबंदी कर रखी थी। हर दूसरे दिन पावर ब्लैक आउट हो रहा था। बिजली के बिना अस्पतालों में लोग मारे जा रहे थे। बुनियादी चीजों की भारी कमी है। आशंका है किसी भी दिन क्यूबा ढह सकता है। कास्त्रों के सपने का भी पतन होगा। नमस्कार, मेरा नाम है दिव्यांशी सुमराव और आप देख रहे हैं क्यूरिस्तान। यह हमारी स्पेशल सीरीज नामचीन है। नामचीन के इस एपिसोड में जानिए क्यूबा और फिदेल कास्त्रो की कहानी। क्यूबा समुंदर के बीचों-बीच बसा हुआ है। मेन आइलैंड 144000 कि.मी. में फैला है। बिहार से थोड़ा बड़ा है। मेन आइलैंड के अलावा करीब 4000 छोटे-छोटे द्वीप हैं। लेकिन ज्यादातर आबादी बड़े वाले द्वीप पर रहती है। क्यूबा नॉर्थ अमेरिका में आता है। नॉर्थ अमेरिका में कनाडा, अमेरिका, मेक्सिको जैसे देश आते हैं। अमेरिका का फ्लोरिडा क्यूबा से महज 145 कि.मी. दूर है। इसी क्यूबा के सुदूर पूर्व में बसा हुआ है कस्बा ईरान। 13 अगस्त 1926 को इसी जगह फिदेल कास्त्रो का जन्म हुआ। उनके पिता एंजेल कास्त्रो स्पेन की फौज में थे। 1898 से पहले तक क्यूबा स्पेन की कॉलोनी था। फिर अमेरिका के साथ जंग शुरू हो गई। फिदेल के पिता एंजेल इसी जंग में हिस्सा लेने आए थे। इसमें स्पेन हार गया। उसको क्यूबा छोड़कर जाना पड़ा। लेकिन एंजेल वहीं पर रुक गए। वो मेहनत करते-करते जमींदार बन गए। गन्ने की खेती से उन्होंने खूब पैसा कमाया था। उन्हीं के यहां लिना गोंजालस मजदूरी करती थी। शादीशुदा होने के बावजूद लिना के साथ एंजेल रिश्ते में आए। लिना ही फिदेल कास्त्रो की मां थी। जिस समय उनका जन्म हुआ एंजेल और लिना ने शादी नहीं की थी। जिसके चलते फिदेल को अवैध संतान कहा जाता था। घर में उनको बेटे वाला हक नहीं मिलता था। इससे बचाने के लिए उनके पिता ने उनको बोर्डिंग स्कूल भेज दिया। उनकी पढ़ाई क्यूबा के एलिट स्कूलों में हुई। वो पढ़ाई के साथ-साथ स्पोर्ट्स में भी कमाल कर रहे थे। उनके टीचर्स कहते थे कि फिदेल में असाधारण इच्छाशक्ति और अनुशासन है। उन्हें आगे जाने से कोई रोक नहीं सकता। स्कूल में कास्त्रो वक्त और विचारों के बेहद पाबंद थे। उन्हें तर्क रखना और बहस करना पसंद था। जब तक वह कॉलेज जाने लायक हुए, उन्होंने लोगों को बांधे रखने का हुनर सीख लिया था। फिर 1945 में फिदेल कास्त्रो ने हवाना यूनिवर्सिटी के लॉ स्कूल में दाखिला ले लिया और यहीं से उनका रास्ता बदलने वाला था। उन दिनों हवाना यूनिवर्सिटी का तापमान चरम पर था। देश में चल रही उथल-पुथल का असर स्टूडेंट पॉलिटिक्स पर भी था। मारपीट, हिंसा और हत्या आम बात थी। छात्रों के कई गुट बन चुके थे। हर गुट का यूनिवर्सिटी के अलग-अलग हिस्से पर कब्जा था। कास्त्रो रेडिकल नेशनलिस्ट धड़े में शामिल हो गए। पहले ही साल उन्होंने छात्र संघ का चुनाव लड़ा लेकिन उसमें वह हार गए। फिर उन्होंने एक स्टूडेंट पार्टी ज्वाइन कर ली और उसके बैनर तले अपनी राय रखने लगे। उनके भाषण बड़े आक्रामक और जादुई होते थे। उनके तर्क लोगों को अपनी तरफ खींचने लगे। फिर 1948 में वो कोलंबिया गए। उनको लैटिन अमेरिकन स्टूडेंट कांग्रेस में हिस्सा लेना था। उसी बीच लिबरल पार्टी के लीडर हो रहे एलएसीआर गायतन की हत्या हो गई। इससे लोगों का गुस्सा भड़क गया। कास्त्रो की आंखों के सामने इतिहास बन रहा था। जोश-जोश में वह भी प्रोटेस्ट में शामिल हो गए। कुछ दिनों बाद उन्हें अरेस्ट कर लिया गया। कोलंबिया सरकार ने कम्युनिस्ट एजेंट होने का आरोप उन पर लगाया लेकिन बाद में उन्हें रिहा भी कर दिया गया। अक्टूबर 1948 में कास्त्रो क्यूबा लौट आए। उन्होंने शादी की। 1949 में उनको एक बेटा हुआ। अगले साल लॉ की डिग्री मिल गई। फिर वो वकालत करने लगे। कास्त्रो अधिकतर टाइम गरीब क्लाइंट्स के केस लेते थे। उन लोगों के पास देने के लिए कुछ होता नहीं था। वकालत से बहुत कमाई नहीं आती थी। मगर फैमिली ग्राउंड ऐसा था कि उनको कोई खासी दिक्कत नहीं होती थी। कास्त्रो गृहस्थ जीवन में रमने लगे थे। लेकिन पॉलिटिक्स उनका पहला प्यार था। वो इसे इतनी आसानी से नहीं भूल सकते थे। 1952 में उन्होंने संसद का चुनाव लड़ने का फैसला किया। चुनाव के लिए 1 जून को वोटिंग होनी थी। इसमें कास्त्रो की सीट पक्की मानी जा रही थी। लेकिन चुनाव होता उससे पहले तख्ता पलट हो गया। मार्च 1952 में सांसद फुलगेंसियो बतिस्ता ने कुर्सी पर कब्जा कर लिया। बतिस्ता 1940 से 1944 तक क्यूबा का राष्ट्रपति रह चुका था। उससे पहले वो आर्मी चीफ था। उसने 1933 के सैन्य तख्ता पलट को लीड किया था। तख्ता पलट के बाद क्यूबा को जलाने के लिए पांच लोगों की एक कमेटी बनी। बतिस्ता उस कमेटी का सबसे ताकतवर मेंबर था। फिर 1940 में वो खुद राष्ट्रपति बन गया। क्यूबा के संविधान में एक व्यक्ति लगातार दो टर्म राष्ट्रपति नहीं रह सकता था। इसलिए उसे कुर्सी छोड़नी पड़ी। 1944 के इलेक्शन में उसका कैंडिडेट हार गया। तब बतिस्ता अमेरिका चला गया। लेकिन पावर से उसका मुंह नहीं छूटा था। वो 1952 में दोबारा राष्ट्रपति चुनाव लड़ने वापस लौटा। लेकिन उसके जीतने के चांसेस बहुत कम थे। इसलिए उसने आर्मी से मिलकर सरकार गिरा दी और कुर्सी पर बैठते ही चुनाव रद्द करवा दिया। संविधान भी भंग कर दिया। पास्तों ने इसका विरोध किया। उन्होंने पहले संवैधानिक अदालत का दरवाजा खटखटाया। उनका तर्क था कि बतिस्ता की सरकार अवैध है। यह सरकार भंग की जाए। लेकिन कोर्ट ने उनकी पिटीशन को खारिज कर दिया। कास्त्रो को बड़ा धक्का लगा। उन्हें महसूस हुआ कि कानून उन्हीं की सुनता है जिनके पास पावर है। लीगल सिस्टम में उनका भरोसा कमजोर हो रहा था। फिर कास्त्रो सिस्टम बदलने की तैयारी करने लगे। इतिहास में क्यूबा की दो राजधानियां हुई हैं। 1607 में हवाना को राजधानी का दर्जा मिला। उससे पहले सेंटियागो दी क्यूबा से सरकार चलती थी। दोनों की लोकेशन में जमीन आसमान का अंतर है। सेंटियागो सुदूर दक्षिण में है जबकि हवाना नॉर्दन टिप पर है। भले ही राजधानी बदल गई थी लेकिन सेंटियागो का रुतबा कम नहीं हुआ था। वहां पर क्यूबा का दूसरा सबसे बड़ा मिलिट्री बैरक था। उसका नाम था मोंकाडा। कास्त्रो ने प्लान बनाया इस बैरक पर अचानक कब्जा किया जाएगा। वहां से हथियार उठाए जाएंगे। फिर रेडियो पर विद्रोह का ऐलान किया जाएगा। इससे आम लोग सड़कों पर आ जाएंगे और सब मिलकर सरकार पलट देंगे। कास्त्रो ने इसके लिए 26 जुलाई 1953 की तारीख चुनी। लेकिन शुरुआत में एक गड़बड़ हो गई। कास्त्रो के अधिकतर साथी पकड़े गए। कुछ को तुरंत गोली मार दी गई। बाकियों को जेल में टॉर्चर किया गया। फिर उनकी डेड बॉडीज की तस्वीरें पब्लिक में रिलीज की जाती थी। इसके जरिए सरकार मैसेज दे रही थी कि हमारे खिलाफ गए तो यही हश्र होगा। मोंकाडा प्लान फेल होने के बाद खासकर सियाराम आस्त्रा के पहाड़ों में छिप गए थे। कई दिनों तक भटकने के बाद उनकी हालत खराब हो चुकी थी। एक रोज वो एक किसान के घर में छिपे थे। तभी सैनिकों ने उन्हें घेर लिया। स्टैंडर्ड प्रैक्टिस थी कि उन्हें वहीं पर मार दिया जाता। लेकिन सैनिकों की टुकड़ी के लीडर ने कहा कि कैदियों की हत्या गलत है। उसके कहने पर कास्त्रो की जान बच गई। कास्त्रो को जेल में रखा गया। कुछ दिनों के बाद कोर्ट में ट्रायल शुरू हुआ। कास्त्रो के पास वकालत का अनुभव था। उन्होंने कहा कि अपनी दलील मैं खुद रखूंगा। कोर्ट ने इसकी इजाजत उन्हें दी। कास्त्रो ने अपने बचाव में 4 घंटे का भाषण दिया। उन्होंने आम लोगों की मुश्किलें गिनाई और बतिस्ता सरकार की तानाशाही की धज्जियां उड़ा कर रख दी। फिर उन्होंने अपना विजन रखा कि क्यूबा को कैसा होना चाहिए। अंत में उन्होंने कहा मुझे फांसी पर चढ़ा दो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन इतिहास बताएगा कि मैं सही था। कास्त्रो के भाषण ने पूरे केस की दिशा बदल दी थी। यह केस अब पॉलिटिकल बन चुका था। लोग कास्त्रो से रिलेट कर रहे थे। वे उनके लिए सहानुभूति दिखा रहे थे। ऐसे में कास्त्रो को मौत की सजा दी जाती तो लोग भड़क सकते थे। बतिस्ता सरकार इससे बचना चाहती थी इसलिए उन्हें फांसी की सजा के बदले 15 साल के लिए जेल भेज दिया गया। जेल में कास्त्रो ने कैदियों के लिए एक स्कूल शुरू किया। बाकी समय का इस्तेमाल उन्होंने कम्युनिस्ट विचारकों को पढ़ने समझने में किया। वो जेल से चिट्ठियां भी लिखते थे। उनके समर्थक इन चिट्ठियों का प्रचार करते थे। और धीरे-धी
Speaker A
परमाणु बम गिराने के लिए तैयार रहना। हम अपनी कुर्बानी देने के लिए तैयार हैं। [संगीत] चिट्ठी लिखने वाला यह व्यक्ति क्यूबा का लीडर था। नाम फिदेल अलहंद्रो कास्त्रो रूस जिन्हें दुनिया फिदेल कास्त्रो के नाम से जानती है। कास्त्रो
Speaker A
क्रांतिकारी थे। उन्होंने बतिस्ता [संगीत] की तानाशाही सरकार से आजादी दिलाई थी। बतिस्ता को अमेरिका का सपोर्ट हासिल था। तभी से उनका देश अमेरिका के निशाने पर है। जब तक कास्त्रो जिंदा रहे उन्होंने क्यूबा को बचा कर रखा। लेकिन आज के दिन क्यूबा
Speaker A
अपनी आखिरी सांसे रहा है। अमेरिका ने 3 महीने [संगीत] से उसकी नाकेबंदी कर रखी थी। हर दूसरे दिन पावर ब्लैक आउट हो रहा था। बिजली के बिना अस्पतालों में लोग मारे जा रहे थे। बुनियादी चीजों की भारी कमी
Speaker A
है। आशंका है किसी भी दिन क्यूबा ढह सकता है। कास्त्रों के सपने का भी पतन होगा। नमस्कार, मेरा नाम है दिव्यांशी सुमराव और आप देख रहे हैं क्यूरिस्तान। यह हमारी स्पेशल सीरीज नामचीन है। नामचीन के इस एपिसोड में जानिए क्यूबा और फदेलकास्त्रो
Speaker A
की कहानी। क्यूबा समुंदर के बीचों-बीच बसा [संगीत] हुआ है। मेन आइलैंड 144000 कि.मी. में फैला है। बिहार से थोड़ा बड़ा है। मेन आइलैंड के अलावा करीब 4000 छोटे-छोटे द्वीप [संगीत] हैं। लेकिन ज्यादातर आबादी बड़े वाले द्वीप पर रहती है। क्यूबा नॉर्थ
Speaker A
अमेरिका में आता है। नॉर्थ अमेरिका में कनाडा, अमेरिका, मेक्सिको जैसे देश आते हैं। [संगीत] अमेरिका का फ्लोरिडा क्यूबा से महज 145 कि.मी. दूर है। इसी क्यूबा के [संगीत] सुदूर पूर्व में बसा हुआ है कस्बा ईरान। 13 अगस्त 1926 को इसी जगह
Speaker A
फिदेलकास्त्रो [संगीत] का जन्म हुआ। उनके पिता एंजेल कास्त्रो स्पेन की फौज में थे। 1898 से पहले तक क्यूबा स्पेन [संगीत] की कॉलोनी था। फिर अमेरिका के साथ जंग शुरू हो गई। विदेल के पिता एंजेल इसी जंग [संगीत] में हिस्सा
Speaker A
लेने आए थे। इसमें स्पेन हार गया। उसको क्यूबा छोड़कर जाना पड़ा। लेकिन [संगीत] एंजल वहीं पर रुक गए। वो मेहनत करते-करते जमींदार बन गए। गन्ने की खेती से उन्होंने खूब पैसा कमाया था। [संगीत] उन्हीं के यहां लिना गोंजालस मजदूरी करती थी।
Speaker A
शादीशुदा होने के बावजूद लिना के साथ एंजेल रिश्ते में आए। लिना [संगीत] ही फदेल कास्ट्रो की मां थी। जिस समय उनका जन्म हुआ एंजेल और लेना ने शादी नहीं की थी। जिसके [संगीत] चलते फिदेल को अवैध संतान कहा जाता था। घर में उनको बेटे वाला
Speaker A
हक नहीं मिलता था। इससे बचाने के लिए उनके पिता ने उनको बोर्डिंग स्कूल भेज दिया। [संगीत] उनकी पढ़ाई क्यूबा के एलट स्कूलों में हुई। वो पढ़ाई के साथ-साथ स्पोर्ट्स में भी कमाल कर [संगीत] रहे थे। उनके टीचर्स कहते थे कि फिदेल में असाधारण इच्छाशक्ति
Speaker A
और अनुशासन है। [संगीत] उन्हें आगे जाने से कोई रोक नहीं सकता। स्कूल में कास्त्रो वक्त और विचारों के बेहद पाबंद थे। उन्हें तर्क रखना और बहस करना पसंद था। [संगीत] जब तक वह कॉलेज जाने लायक हुए। उन्होंने लोगों को बांधे रखने का हुनर सीख लिया था।
Speaker A
फिर 1945 में फिदेल कास्त्रो [संगीत] ने हवाना यूनिवर्सिटी के लॉ स्कूल में दाखिला ले लिया और यहीं से उनका रास्ता [संगीत] बदलने वाला था। उन दिनों हवाना यूनिवर्सिटी का तापमान चरम पर था। देश में [संगीत] चल रही उथल-पुथल
Speaker A
का असर स्टूडेंट पॉलिटिक्स पर भी था। मारपीट, हिंसा और हत्या आम बात [संगीत] थी। छात्रों के कई गुट बन चुके थे। हर गुट का यूनिवर्सिटी के अलग-अलग हिस्से पर कब्जा था। कास्त्रो रेडिकल नेशनलिस्ट धड़े में शामिल हो गए। [संगीत] पहले ही साल
Speaker A
उन्होंने छात्र संघ का चुनाव लड़ा लेकिन उसमें वह हार गए। फिर उन्होंने एक स्टूडेंट पार्टी ज्वाइन कर ली [संगीत] और उसके बैनर तले अपनी राय रखने लगे। उनके भाषण बड़े आक्रामक और जादुई होते थे। [संगीत] उनके तर्क लोगों को अपनी तरफ
Speaker A
खींचने लगे। फिर 1948 में वो कोलंबिया गए। उनको लैटिन अमेरिकन स्टूडेंट कांग्रेस में हिस्सा [संगीत] लेना था। उसी बीच लिबरल पार्टी के लीडर हो रहे एलएसीआर गायतन की हत्या [संगीत] हो गई। इससे लोगों का गुस्सा भड़क गया। कास्त्रों की आंखों के
Speaker A
सामने इतिहास बन रहा था। [संगीत] जोश-जोश में वह भी प्रोटेस्ट में शामिल हो गए। कुछ दिनों बाद उन्हें अरेस्ट कर लिया गया। कोलंबिया सरकार ने कम्युनिस्ट एजेंट होने का आरोप उन पर लगाया लेकिन बाद में [संगीत] उन्हें रिहा भी कर दिया गया।
Speaker A
अक्टूबर 1948 में कास्त्रो क्यूबा लौट आए। उन्होंने शादी की। 1949 में उनको एक बेटा हुआ। अगले साल लॉ की डिग्री मिल गई। फिर वो वकालत करने लगे। कास्त्रो अधिकतर टाइम गरीब क्लाइंट्स [संगीत] के केसेस लेते थे। उन लोगों के पास देने के लिए कुछ होता
Speaker A
नहीं था। वकालत से बहुत कमाई नहीं आती थी। मगर फैमिली ग्राउंड ऐसा था कि उनको कोई खासी दिक्कत नहीं होती थी। कास्त्रो गृहस्थ जीवन में [संगीत] रमने लगे थे। लेकिन पॉलिटिक्स उनका पहला प्यार था। वो इसे इतनी आसानी से नहीं भूल सकते
Speaker A
[संगीत] थे। 1952 में उन्होंने संसद का चुनाव लड़ने का फैसला किया। चुनाव के लिए 1 जून को वोटिंग होनी थी। इसमें [संगीत] कास्त्रों की सीट पक्की मानी जा रही थी। लेकिन चुनाव होता उससे पहले तख्ता पलट हो गया।
Speaker A
मार्च 1952 में सांसद फुलगेंसियो [संगीत] बतिस्ता ने कुर्सी पर कब्जा कर लिया। बतिस्ता 1940 से 1944 तक क्यूबा का राष्ट्रपति रह [संगीत] चुका था। उससे पहले वो आर्मी चीफ था। उसने 1933 के सैन्य तख्ता पलट को लीड किया था। तख्ता पलट के
Speaker A
बाद क्यूबा को जलाने के लिए पांच लोगों की एक कमेटी बनी। बतस्ता उस कमेटी का सबसे ताकतवर मेंबर था। फिर 1940 में वो खुद राष्ट्रपति बन गया। क्यूबा के संविधान में एक व्यक्ति लगातार दो टर्म राष्ट्रपति नहीं रह सकता था। इसलिए उसे कुर्सी छोड़नी
Speaker A
पड़ी। 1944 के इलेक्शन में उसका कैंडिडेट हार गया। तब बदस्ता अमेरिका चला गया। लेकिन पावर से उसका मुंह नहीं छूटा था। वो 1952 में दोबारा राष्ट्रपति चुनाव लड़ने वापस लौटा। लेकिन उसके जीतने के चांसेस बहुत कम थे। इसलिए उसने आर्मी से मिलकर
Speaker A
सरकार गिरा दी और कुर्सी पर बैठते ही चुनाव रद्द करवा दिया। संविधान भी भंग कर [संगीत] दिया। पास्तों ने इसका विरोध किया। उन्होंने पहले संवैधानिक अदालत का दरवाजा खटखटाया। उनका तर्क था कि बतिस्ता की सरकार अवैध है। यह सरकार भंग की जाए।
Speaker A
लेकिन कोर्ट ने उनकी पिटीशन को खारिज कर दिया। कास्त्रो को बड़ा धक्का लगा। उन्हें महसूस हुआ कि कानून उन्हीं की सुनता है जिनके पास [संगीत] पावर है। लीगल सिस्टम में उनका भरोसा कमजोर हो रहा था। फिर कास्त्रो सिस्टम बदलने की तैयारी करने
Speaker A
लगे। इतिहास में क्यूबा की दो राजधानियां हुई हैं। 1607 में हवाना को राजधानी का दर्जा मिला। उससे पहले सेंटियागो दी क्यूबा से सरकार चलती थी। दोनों की लोकेशन में जमीन आसमान का अंतर है। सेंटियागो सुदूर दक्षिण में है जबकि हवाना नॉर्दन
Speaker A
टिप पर है। भले ही राजधानी बदल गई थी लेकिन सेंटियागो का रुतबा [संगीत] कम नहीं हुआ था। वहां पर क्यूबा का दूसरा सबसे बड़ा मिलिट्री बैरक था। उसका नाम था मोंकाडा। कास्त्रो ने प्लान बनाया इस बैरक पर अचानक कब्जा किया जाएगा। वहां से
Speaker A
हथियार उठाए जाएंगे। फिर रेडियो पर विथ का ऐलान किया जाएगा। इससे आम लोग सड़कों पर आ जाएंगे और सब मिलकर सरकार पलट [संगीत] देंगे। कास्त्रो ने इसके लिए 26 जुलाई 1953 की तारीख चुनी। लेकिन शुरुआत में एक गड़बड़ हो गई। कास्टो के अधिकतर साथी
Speaker A
पकड़े गए। कुछ को तुरंत गोली मार दी गई। बाकियों को जेल में टॉर्चर किया गया। फिर उनकी डेड बॉडीज की तस्वीरें पब्लिक में [संगीत] रिलीज की जाती थी। इसके जरिए सरकार मैसेज दे रही थी कि हमारे खिलाफ गए
Speaker A
तो यही हश्र होगा। मोंकाडा प्लान फेल होने के बाद [संगीत] खासकर सियाराम आस्त्रा के पहाड़ों में छिप गए थे। कई दिनों तक भटकने के बाद उनकी हालत खराब हो चुकी थी। एक रोज वो एक किसान [संगीत] के घर में छिपे थे।
Speaker A
तभी सैनिकों ने उन्हें घेर लिया। स्टैंडर्ड प्रैक्टिस थी कि उन्हें वहीं पर मार दिया जाता। लेकिन सैनिकों की टुकड़ी के लीडर ने कहा कि कैदियों की हत्या [संगीत] गलत है। उसके कहने पर कास्त्रो की जान बच गई। कास्त्रो को जेल में रखा गया।
Speaker A
कुछ दिनों के बाद कोर्ट में ट्रायल शुरू हुआ। कास्त्रो के पास वकालत का अनुभव था। उन्होंने कहा कि अपनी दलील मैं खुद रखूंगा। कोर्ट ने इसकी इजाजत उन्हें दी। कास्त्रू ने अपने बचाव [संगीत] में 4 घंटे का भाषण दिया। उन्होंने आम लोगों की
Speaker A
मुश्किलें गिनाई और बतस्ता सरकार की तानाशाही की धज्जियां उड़ा कर रख दी। फिर उन्होंने अपना विज़न रखा कि क्यूबा को कैसा होना चाहिए। अंत में उन्होंने कहा मुझे फांसी पर चढ़ा दो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन इतिहास बताएगा कि मैं सही
Speaker A
था। कास्त्रो के भाषण ने पूरे केस की दिशा बदल दी थी। यह केस अब पॉलिटिकल बन चुका था। लोग कास्त्रों से रिलेट कर रहे थे। वे उनके लिए सहानुभूति दिखा रहे थे। ऐसे में कास्त्रो को मौत की सजा [संगीत] दी जाती
Speaker A
तो लोग भड़क सकते थे। बदस्ता सरकार इससे बचना चाहती थी इसलिए उन्हें फांसी की सजा के बदले 15 साल के लिए जेल भेज दिया गया। जेल में कास्त्रों ने कैदियों के लिए एक स्कूल [संगीत] शुरू किया। बाकी समय का
Speaker A
इस्तेमाल उन्होंने कम्युनिस्ट विचारकों को पढ़ने समझने में [संगीत] किया। वो जेल से चिट्ठियां भी लिखते थे। उनके समर्थक इन चिट्ठियों का प्रचार करते थे। और धीरे-धीरे कास्त्रो के पक्ष में ऐसे माहौल बनने लगा। उनको रिहा करने की मांग तेज
Speaker A
होने लगी और आखिरकार मई 1955 में बतिस्ता ने उन्हें क्षमादान दे दिया। कास्त्रो 15 के बजाय सिर्फ दो सालों में जेल से बाहर आ चुके थे। लेकिन उनके लिए क्यूबा में रहना मुश्किल था इसलिए उन्होंने क्यूबा छोड़ने का मन बना लिया। जेल से छूटने के बाद फदेल
Speaker A
कास्त्रो अपने भाई राहुल के साथ मेक्सिको चले गए। मेक्सिको सिटी उन दिनों क्यूबा से भागकर आए लोगों का गढ़ थी। कास्त्रों ने क्यूबा छोड़ा था क्रांति का सपना नहीं। वो मेक्सिको में सपोर्ट जुटाने लगे। इसी दौरान उनकी मुलाकात अर्जेंटीना से आए एक
Speaker A
डॉक्टर से हुई। उस डॉक्टर ने कुछ समय पहले मोटरसाइकिल और हिच हकिंग के जरिए साउथ अमेरिका का चक्कर लगाया था। इस ट्रिप में उसने हर तरफ गरीबी देखी थी। भेदभाव और शोषण देखा था और विदेशी कंपनियों की लूट
Speaker A
भी देखी थी। [संगीत] ट्रिप पूरी करने के बाद वह डॉक्टर गटमाला चले गए। वहां उन्होंने राष्ट्रपति हिककोबो और वेंस के साथ काम किया। एककोबो अपने लोगों का जीवन बदलने में लगे हुए थे। 1954 में उन्होंने लैंड रिफॉर्म्स लागू किए। बड़े
Speaker A
जिम्मेदारों से जमीन लेकर गरीब लोगों में बांटी गई। इससे यूनाइटेड फूड कंपनी को बड़ा झटका लगा। इस अमेरिकी कंपनी के पास क्वाटिमाला में काफी जमीन थी। लैंड रिफॉर्म से उसको नुकसान हो रहा था। तब उसने अमेरिकी सरकार को उकसाया। [संगीत] उस
Speaker A
दौर में कोल्ड वॉर भी चल रहा था। कोबो की पॉलिसीज कम्युनिस्ट सरकार से मेल खाती थी। इसने अमेरिका को चौकन्ना कर दिया। फिर सीआईए को सरकार पलटने की जिम्मेदारी दी गई। सीआईए ने ग्वाटेमाला में विद्रोह करवा दिया। आखिर मेंबो को इस्तीफा देना पड़ा।
Speaker A
[संगीत] नए राष्ट्रपति ने उनके सारे फैसले पलट दिए। अर्जेंटीना का वो डॉक्टर ये सब देखकर गुस्सा था। लेकिन उसके [संगीत] पास कोई रास्ता नहीं था। फिर वो मेक्सिको चला गया और क्रांति का रास्ता तलाशने लगा। वो नौजवान [संगीत] डॉक्टर और कोई नहीं बल्कि
Speaker A
अर्नेस्टो चे वारा थे। मेक्सिको में ही चेगवारा और फदेल कास्त्रो की पहली मुलाकात हुई। वे दोनों डिनर पर मिले थे। उनके बीच बात शुरू हुई और होते-होते सुबह हो गई। सुबह तक उनकी दोस्ती गहरी हो चुकी थी। वेवारा कास्त्रों की क्रांति में साथ देने
Speaker A
के लिए तैयार हो गए थे। अगले कुछ महीने लोग जुटाने उनको ट्रेनिंग देने और विद्रोह का खाका खींचने में बीते। फिर कास्त्रों ने एक सेकंड हैंड याट खरीदी। इसका नाम था ग्रैंडमा। ग्रैंडमा में 12 लोगों की सीट थी। लेकिन उसमें 82 लोगों को बिठाया गया।
Speaker A
यह नौजवान 25 नवंबर 1956 को क्यूबा के लिए रवाना हुए। उनके साथ मुसीबतें भी शामिल थी। ओवरलोडेड होने की वजह से आर्ट में बार-बार पानी भर रहा था। कई बार डूबने की नौबत आई। रास्ते में इंजन भी खराब हुआ।
Speaker A
इसके अलावा लोग बार-बार बीमार भी पड़ रहे थे। कास्त्रो ने चार दिनों में क्यूबा पहुंचने का प्लान बनाया था। लेकिन उनको 7 दिन लगे। कास्त्रो ने सत्यागो के विद्रोहियों से कोऑर्डिनेट कर रखा था। उनके आने से ठीक पहले वो लोग विद्रोह शुरू
Speaker A
करने वाले थे। इसमें कास्त्रो और उनके साथी शामिल होते और फिर विद्रोह को आगे बढ़ाना था। लेकिन देरी की वजह से गड़बड़ हो गई। सेंथियागो में विद्रोह तो समय से शुरू हुआ लेकिन उन्हें कास्त्रो की टीम का साथ नहीं मिला। बतिस्ता की सेना ने इस
Speaker A
विद्रोह को आसानी से कुचल दिया। बतिस्ता को मेक्सिको से नाव आने की खबर भी मिल चुकी थी। उन्होंने अपनी फौज को काम पर लगा दिया था। 2 दिसंबर 1956 को जब कास्त्रो और उनके साथी क्यूबा पहुंचे। उनका इंतजार
Speaker A
पहले से हो रहा था। 5 दिसंबर को उनको पहली बार घेरा गया। [संगीत] तब वे लोग जान बचाने के लिए पहाड़ों में छिप गए। यह सब इतनी जल्दी में हुआ कि उनके पास हथियार और खाने का सामान भी नहीं बचा। कई दिनों की
Speaker A
मशक्कत के बाद 20 लोग मिल पाए लेकिन बाकियों का कुछ पता नहीं चला। जो बच गए थे उनके पीछे बतिस्ता की फौज लगी थी। कोई दूसरा व्यक्ति होता तो कब का घुटने टेक देता लेकिन कास्त्रो कास्त्रो अलग थे।
Speaker A
उन्होंने अपने ग्रुप को इकट्ठा किया और नए लोगों को जोड़ने में जुट गए। धीरे-धीरे उनको गरीब किसानों का साथ मिलने लगा। यह लोग बतिस्ता के सताए हुए थे। कुछ ही समय में कातो की गोरिल्ला सेना बड़ी हो गई थी।
Speaker A
लेकिन यह बतिस्ता की सरकार गिराने के लिए काफी नहीं थी। उधर बतिस्ता सरकार ने यह बात भी पब्लिकली फैला दी थी कि ग्रैंडमा लैंडिंग के दौरान फुदेल कास्त्रो की मृत्यु हो चुकी है जो कि सच नहीं था। लेकिन फिर एक दिलचस्प घटना यहां पर घटती
Speaker A
है। न्यूयॉर्क टाइम्स के सीनियर जर्नलिस्ट हरबर्ट मैथ्यूस [संगीत] लंबे समय से कास्त्रो को ट्रैक कर रहे थे। उनको इन नौजवानों की कहानी इंटरेस्टिंग लगी थी। कास्त्रो ने इस मौके को भांप लिया। मैथ्यूस इंटरव्यू करने [संगीत] पहाड़ चढ़कर उनके कैंप तक गए इस इंटरव्यू की खबर
Speaker A
बतिस्ता को नहीं थी। कास्त्रो ने मैथ्यूस के सामने अपने लोगों की परेड करवाई। गोरिल्ला आर्मी में गिनती के लोग थे। उन्हीं को बार-बार चक्कर लगाने के लिए कहा गया। हर बार उनकी टोपियां बदल दी जाती थी। कास्त्रो दिखाना चाहते थे कि उनके पास
Speaker A
हजारों लोगों की फौज है और उनकी ये [संगीत] चाल सफल रही। अल्बर्ट मैथ्यूस की रिपोर्ट तीन दिनों तक न्यूयॉर्क टाइम्स के पहले पन्ने पर छपी। इसने कास्त्रो को लेकर दुनिया की धारणा बदल दी। उनकी पहचान एक ऐसे क्रांतिकारी नेता की बन चुकी थी जो
Speaker A
तमाम मुश्किलें झेलकर अपना देश [संगीत] बदलने की लड़ाई लड़ रहा था और उसकी लड़ाई में हजारों आम लोग शामिल थे। इस रिपोर्ट से बतिस्ता की अजय छवि को झटका लगा। सरकार ने इंटरव्यू को खारिज करने की कोशिश की तब
Speaker A
टाइम्स ने मैथ्यूस और कास्त्रों की साथ वाली तस्वीर [संगीत] छाप दी। इससे बतिस्ता की और किरकिरी हुई। 1958 आते-आते कास्त्रों की गोरिल्ला आदमी का कंट्रोल और बतिस्ता की मुसीबत बढ़ने लगी थी। अमेरिका बतिस्ता का सबसे बड़ा बैकर हुआ करता था।
Speaker A
लेकिन 1958 में उसने [संगीत] भी हथियारों की सप्लाई बंद कर दी। क्यूबा का मिडिल क्लास चर्च और बिजनेस कम्युनिटी भी उसके खिलाफ हो रही थी। आर्मी के अंदर भी असंतोष बढ़ रहा था। बतिस्ता अलग-थलग पड़ने लगा था। 29 दिसंबर 1958 के दिन उसको आखिरी
Speaker A
धक्का लगा। उस रोज बतिस्ता ने एक स्पेशल ट्रेन भेजी थी। उस ट्रेन में सैकड़ों सैनिक और हथियार थे। मकसद विद्रोहियों को कुचलना। [संगीत] चेवारा को ट्रेन आने की सूचना पहले ही मिल गई थी। उन्होंने बुलडोजर लगाकर पटरी उखड़वा दी। इसके चलते
Speaker A
ट्रेन पटरी से उतर गई। फिर विद्रोहियों ने सैनिकों को घेर लिया और हथियार [संगीत] अपने कब्जे में ले लिए। बतिस्ता को अपना महल ढहने का आभास हो चुका था। इसलिए उसने अपने करीबी लोगों को इकट्ठा किया और 1
Speaker A
[संगीत] जनवरी 1959 की सुबह देश छोड़कर भाग गया। पहले डोमेनिकन रिपब्लिक में शरण ली लेकिन उस स्पेन में हुआ। बतिस्ता के भागते ही फदेल कास्त्रो जनता के [संगीत] सामने आ गए। वो उस रोज सेंटियागो में थे। हवाना लगभग 1000 किलोमीटर दूर था।
Speaker A
शास्त्रों ने कहा मैं सड़क के रास्ते हवाना जाऊंगा। उनका काफिला जिधर से जाता था हजारों की धुल उनके स्वागत में खड़ी रहती थी। यह ट्रिप अपने आप में ऐतिहासिक थी। कास्त्रो क्यूबा के हर कस्बे और हर गांव से होकर गुजरे थे। इससे लोगों को
Speaker A
एकजुट करने में मदद मिली। छ [संगीत] दिनों की यात्रा के बाद वह हवाना पहुंच गए। हवाना में लाखों की भीड़ उनको सुनने के लिए आई थी। [संगीत] जब वो भाषण दे रहे थे तभी एक सफेद कबूतर उनके कंधे पर आकर बैठ
Speaker A
गया। स्थानीय परंपरा में सफेद कबूतर को शांति और प्योरिटी का प्रतीक माना जाता है। लोगों को लगा कि फदेल कास्त्रों को देवताओं ने चुनकर भेजा है। विकासस्त्रों के आगे बिछ गए। हवाना का आसमान उनकी जय जयकार से गूंज रहा था। कास्त्रों की उम्र
Speaker A
उस वक्त थी महज 32 साल। उन्होंने एक असंभव क्रांति को संभव कर दिखाया था। अब उन्हें क्यूबा का भविष्य ठीक करना था। लेकिन यह रहा इतनी आसान नहीं थी। काथरो की सरकार ने शुरुआत [संगीत] में ही क्रांतिकारी कदम
Speaker A
उठाए। उन्होंने स्पेशल कोर्ट्स बनवाए। इनमें बतिस्ता की फौज के अफसरों पर मुकदमा चला। सैकड़ों दोषियों को सजा दी गई। इसके बाद लिटरेसी [संगीत] कैंपेन शुरू हुआ। क्यूबा के सुदूर से सुदूर इलाकों में स्कूल और अस्पताल खोले गए। लाखों लोगों तक
Speaker A
यह सुविधा [संगीत] पहली बार पहुंच रही थी। अभी तक अमेरिका और क्यूबा का रिश्ता ठीक चल रहा था। अप्रैल 1959 में कास्त्रो वाशिंगटन डीसी [संगीत] में उपराष्ट्रपति रिचर्ड निकन से भी मिले। निक्न कास्त्रो से काफी प्रभावित थे। लेकिन वो उनको संदेह
Speaker A
की नजर से भी देखते थे। उन्होंने सीक्रेट मेमो में लिखा कास्त्रों में नेता बनने के पर्याप्त गुण है। क्यूबा और संभवत [संगीत] पूरे लैटिन अमेरिका के मामले में उनकी अहम भूमिका होने वाली है। मुझे वो ईमानदार [संगीत] लगते हैं। कम्युनिज्म को लेकर वो
Speaker A
थोड़े भोले हैं। मेरा मानना है हमें उनको अपनी दिशा में खींचने की कोशिश करनी चाहिए। लेकिन कास्रो अमेरिका की तरफ झुकने के लिए तैयार नहीं थे। वो इसी गुलामी से लड़कर सत्ता में आए थे। [संगीत] उन्हें किसी का पिछलग्गू बनना नहीं आता था। व
Speaker A
1959 में उनकी सरकार ने लैंड रिफॉर्म्स लागू किए। बड़े-बड़े फार्म से जमीन लेकर साधारण किसानों को बांटी [संगीत] गई। ज्यादातर जमीनें अमेरिकी कंपनियों के कब्जे में थी। अमेरिका को इससे पहला बड़ा धक्का लगा था। बाद में कास्ट्रो ने
Speaker A
अमेरिकी ऑयल रिफाइनरीज, शुगर मिल्स, टेलीकॉम और बिजली कंपनियां, एस्टेट्स को नेशनलाइज कर दिया। क्यूबा में अमेरिका का आर्थिक वर्चस्व अचानक खत्म हो चुका था। अमेरिका इससे नाराज हो गया। उसने क्यूबा पर प्रतिबंध लगा दिए। मार्च 1960 में सीआईए को तख्ता पलट की मंजूरी मिल गई।
Speaker A
कास्त्रों के जीतने के बाद उनके कई विरोधी क्यूबा से भाग गए थे। सीआईए ने इन लोगों को क्वाटमाला में ट्रेनिंग दी। उन्हें क्यूबा पर हमले के लिए तैयार किया गया। इस ग्रुप को नाम मिला ब्रिगेड 25o6। [संगीत] इसी बीच क्यूबा और अमेरिका के रिश्ते और
Speaker A
बदतर हो गए थे। जुलाई 1960 में अमेरिका ने क्यूबा से चीनी खरीदनी बंद कर दी। [संगीत] शुगर क्यूबा का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट था। इस पर उसकी इकॉनमी निर्भर करती थी। तब कास्त्रो ने सोवियत संघ से मदद मांगी। सोवियत संघ चीनी खरीदने के लिए तैयार हो
Speaker A
गया। वो मार्केट रेट से लगभग डेढ़ गुना ज्यादा पैसा दे रहा था। सोवियत संघ ने [संगीत] तेल और मशीनरी भी दी। इसने क्यूबा को बचाए रखने में बड़ी मदद की। सोवियत संघ अमेरिका के बगल में एक मजबूत पार्टनर बना
Speaker A
रहा था। कोल्ड वॉर के दौर में अमेरिका के लिए बेहद खतरनाक था। फिर जनवरी 1961 में उसने क्यूबा के साथ डिप्लोमेटिक संबंध पूरी तरह खत्म कर दिए। उसी महीने अमेरिका में एक नए राष्ट्रपति आए जॉन एफ कैनेडी। 43 साल के कैनडी लोकतंत्र संप्रभुता और
Speaker A
वैश्विक [संगीत] शांति की बातें करते थे। लेकिन उनका एजेंडा क्यूबा पर लागू नहीं होता था। अप्रैल 1961 में उन्होंने क्यूबा पर हमले की योजना को मंजूरी दे दी। प्लान यह था कि ब्रिगेड 256 समुंदर के रास्ते क्यूबा में दाखिल होगी। वे लोकल लोगों को
Speaker A
अपने साथ मिलाएंगे और फिर कास्त्रो के खिलाफ विद्रोह किया जाएगा। इस दौरान यूएस एयरफोर्स ऊपर से उनको सपोर्ट करेगी। 15 अप्रैल 1961 को एयरफोर्स [संगीत] ने क्यूबा पर पहला हमला किया। लेकिन इसमें क्यूबा को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ।
Speaker A
[संगीत] इसी बीच हमले की खबर लीक हो गई। तब केनेडी ने दूसरी एयर स्ट्राइक का प्लान कैंसिल कर दिया। तब [संगीत] 17 अप्रैल को ब्रिगेड 25 O6 पे ऑफ पिक्स में उतरी। वे एकदम अकेले थे। तब तक कास्त्रो अपने
Speaker A
सैनिकों के साथ [संगीत] मोर्चे पर पहुंच गए। 72 घंटों के अंदर विद्रोह दबा दिया गया था। 100 से ज्यादा विद्रोही मारे गए थे। जबकि लगभग [संगीत] 1200 को अरेस्ट कर लिया गया था। 21 अप्रैल को कैनेडी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया।
Speaker A
उन्होंने अपनी जिम्मेदारी स्वीकार की। इस घटना ने पदेल कास्त्रो का कद ऊंचा कर दिया था। उन्होंने अमेरिका को उसके पड़ोस में जबरदस्त मात दे दी थी। वे ऑफ पिक्स मॉडर्न हिस्ट्री में अमेरिका का सबसे बड़ा फेलियर माना जाता है। इस घटना के बाद सीआईए के
Speaker A
डायरेक्टर एलन डलिस को इस्तीफा देना [संगीत] पड़ा था। उसके बावजूद अमेरिका तख्ता पलट की कोशिश करता रहा। नवंबर 1961 में सीआईए ने ऑपरेशन मंगूस ल्च किया। इसके तहत क्यूबा की रिफाइनरीज, शुगर मिल्स और दूसरे सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर को [संगीत] टारगेट किया गया। उसने कास्त्रों
Speaker A
के विरोधी गुटों को हथियार और पैसे देकर उकसाया। इससे कास्त्रों को खतरा महसूस हुआ। उन्होंने [संगीत] सोवियत संघ को न्यूक्लियर मिसाइलें लगाने के लिए बुला लिया। सोवियत सुप्रीम लीडर निकिता खुशवस [संगीत] के लिए तैयार बैठे थे। इसके दो
Speaker A
कारण थे। पहला इससे क्यूबा पर अमेरिका के अगले हमले को टाला जा सकता है और दूसरा क्यूबा अमेरिका के नजदीक था। वहां से मिसाइलें मिनटों के अंदर अमेरिका तक पहुंच सकती थी। इससे अमेरिका पर दबाव बनाया जा सकता था। 1962 में सोवियत संघ ने मिसाइलें
Speaker A
लगानी [संगीत] शुरू कर दी। यह बात कई महीने बाद अमेरिका को पता चली। 14 अक्टूबर 1962 को उसका एक जासूसी विमान क्यूबा के ऊपर उड़ रहा था। तभी [संगीत] उसमें लगे कैमरों ने मिसाइल साइट्स की तस्वीरें खींच ली। यह देखकर कैनेडी के होश उड़ गए।
Speaker A
उन्होंने तुरंत अपने एडवाइज़र्स को बुलाया। मिलिट्री अटैक ल्च करने की मांग कर रही थी। लेकिन इससे न्यूक्लियर वॉर का खतरा था। इसलिए कैनडी ने समंदर में नाकेबंदी लगाने का फैसला किया ताकि मिसाइलें पहुंचाने वाले जहाजों को क्यूबा जाने से रोका जाए। 24 अक्टूबर को अमेरिका
Speaker A
और सोवियत संघ के जहाज एकदम आमनेसामने खड़े थे। किसी भी समय युद्ध शुरू हो सकता था। बस एक गोली चलने की देर थी। इतने में सोवियत जहाज वापस मुड़ गए। पहला बड़ा खतरा टल गया था। लेकिन क्यूबा पर हमले का डर
Speaker A
बना हुआ था। उसको रोकने के लिए डिप्लोमेटिक चैनल से बातचीत चल रही थी। 26 अक्टूबर को क्रिश्च ने कैनडी को एक ऑफर दिया। उन्होंने कहा मैं क्यूबा से मिसाइलें हटा लूंगा। लेकिन आपको वादा करना होगा कि क्यूबा पर हमला नहीं करेंगे और
Speaker A
बाद में तुर्की से अपनी मिसाइलें हटा लेंगे। उसी रोज कास्त्रो ने भी एक लेटर लिखा था। उन्होंने क्रशेफ से कहा था कि अगर हमारे ऊपर हमला हुआ तो आप अमेरिका पर न्यूक्लियर मिसाइल दाग देना। क्रशेफ यह पढ़कर दंग रह गए। उन्होंने तुरंत कोई जवाब
Speaker A
नहीं दिया। 27 अक्टूबर को क्यूबा ने अमेरिका का एक जासूसी प्लेन गिरा दिया। इसमें एक अमेरिकी [संगीत] पायलट मारा गया। इससे तनाव और ज्यादा बढ़ गया। अमेरिका में जंग छेड़ने की मांग होने लगी लेकिन कैनडी ने हमला टाल दिया। 28 अक्टूबर को उन्होंने
Speaker A
सोवियत संघ की दोनों डिमांड्स मान ली। खुशव भी क्यूबा से मिसाइलें हटाने के लिए राजी हो गए। इस समझौते में फिदेल कास्त्रो को शामिल नहीं किया गया था। उन्हें डील की सूचना रेडियो से मिली थी। वो इस बात से
Speaker A
खफा थे। उन्होंने खुश को फिर से चिट्ठी लिखी। कास्त्रो ने गुस्से में लिखा हमें मोहरा बनाया गया। आपने हमसे सलाह तक नहीं ली। सोवियत संघ पीछे हट गया था। लेकिन कास्त्रो हटने के लिए राजी नहीं थे। तब क्रश ने अपने डेपुटी अनस्तस मिचोयान को
Speaker A
क्यूबा भेजा। विजयान तीन हफ्ते तक हवाना में रहे। इसी बीच उनकी पत्नी की मृत्यु हो गई। लेकिन वह अंतिम संस्कार में नहीं गए। वो कास्त्रो को मनाए बिना वापस नहीं लौट सकते थे। काफी कोशिशें करने के बाद वह सफल
Speaker A
रहे। कास्त्रों ने गुस्सा निगल लिया था। उनके पास कोई दूसरा विकल्प भी नहीं था। उनको सोवियत संघ के सपोर्ट की जरूरत थी। संकट टल गया था। लेकिन विदे कास्त्रों को एक बड़ा सबक इससे मिला। महाशक्तियों की दुनिया में छोटे और कमजोर देशों की कोई
Speaker A
हैसियत नहीं होती। उन्होंने बाकी जिंदगी इस जद्दोजहद में बिताई कि क्यूबा को अनदेखा करना असंभव हो जाए। [संगीत] मिसाइल क्राइसिस के बाद भी अमेरिका ने क्यूबा को अस्थिर करने की कोशिशें जारी रखी। सीआईए ने कास्त्रो के सिगार में जहर मिलाया।
Speaker A
उनको गिफ्ट में जहर वाला सूट भेजा और भी कई प्लान बनाए गए। ऑफिशियल रिकॉर्ड्स में आठ साजिशों का पता मिलता है। कास्त्रो के समर्थकों का दावा 638 का है। लेकिन सीआईए का कोई भी प्लान कभी कामयाब नहीं हो पाया।
Speaker A
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति एक-एक कर बदलते रहे। क्यूबा को लेकर उनकी पॉलिसीज सख्त होती रही। कास्त्रो को खत्म करने का प्लान भी चलता रहा। मगर कास्त्रो अपने पद पर बने रहे। सोवियत संघ की मदद से उन्होंने देश को बचाए रखा। फिर 1991 में सोवियत संघ का
Speaker A
पतन हो गया। यह कास्त्रो के लिए सबसे बड़ी आपदा थी। तीन सालों में क्यूबा की जीडीपी 35% तक घट गई। ईंधन की कमी से बसें बंद हो गई। लोग साइकिल चलाने या पैदल चलने के लिए मजबूर हुए। खाना मुश्किल से मिलता था।
Speaker A
बिजली कटौती 16-16 घंटे तक होती थी। लोग छतों पर मुर्गियां पालने और पार्कों में सब्जियां उगाने लगे थे। अमेरिका को लगा था कास्ट्रो की सरकार कुछ महीनों के अंदर गिर जाएगी लेकिन ऐसा हुआ नहीं। [संगीत] कास्ट्रो ने प्रेस और लोगों की आजादी पर
Speaker A
ताला लगा रखा था। उन्होंने विरोधियों को काफी हद तक अपने कंट्रोल में रखा था। क्यूबा में सिंगल पार्टी सिस्टम लागू था। मुख्यधारा में उनके विरोधी बहुत कम थे। इसलिए उनके खिलाफ पॉपुलर विद्रोह की गुंजाइश [संगीत] नहीं के बराबर थी। दूसरी
Speaker A
वजह यह थी कि कासरो ने एजुकेशन और हेल्थ में काफी काम किया था। इससे आम लोग उनके साथ थे। इसके अलावा जनता विदेशी दखल के सख्त खिलाफ [संगीत] थी। पर 1998 में क्यूबा को एक लाइफ लाइन मिली। वेनेजुला
Speaker A
में क्यूको शाबेज राष्ट्रपति [संगीत] चुनाव जीत गए। उन्होंने क्यूबा की तर्ज पर अपने यहां सोशलिस्ट सिस्टम लागू [संगीत] किया। उन्होंने भी अमेरिकी कंपनियों का प्रभाव कम करना शुरू किया। वह भी पश्चिमी देशों के एकाधिकार के विरोधी थे। [संगीत]
Speaker A
उनकी दोस्ती क्यूबा से हो गई। वेनेजुला के पास कच्चे तेल का सबसे बड़ा भंडार है। उसने [संगीत] सस्ती दरों पर तेल दिया। बदले में क्यूबा ने ट्रेंड डॉक्टर्स और टीचर्स वेनेजुला को दिए। इससे क्यूबा की इकॉनमी स्थिर होने लगी। एक समय जो काम
Speaker A
सोवियत [संगीत] संघ कर रहा था वो वेनेजुला करने लगा था। लेकिन इसका एक बड़ा नुकसान भी हुआ। क्यूबा की निर्भरता सोवियत संघ से हटकर वेनेजुला पर शिफ्ट हो गई थी। [संगीत] यह सिस्टम निकोलस मादरो तक तो ठीक चला लेकिन जनवरी
Speaker A
2026 [संगीत] में अमेरिका ने मादरो को किडनैप कर लिया। नई सरकार अमेरिका की मेहरबानी से चल [संगीत] रही है। उसने दबाव में आकर वेनेजुला की सप्लाई रोक दी। दूसरे सप्लाई रूट्स पर अमेरिका ने नाकेबंदी लगा [संगीत] रखी है। इसके चलते क्यूबा तिलतिल
Speaker A
कर मर रहा है। कास्त्रो का क्यूबा किसी भी दिन खत्म हो सकता है। वैसे अंत देखने के लिए वह इस दुनिया में नहीं है। 2008 में उन्होंने राष्ट्रपति का पद छोड़ दिया था। 2011 तक वो कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ क्यूबा
Speaker A
के हेड बने रहे। लेकिन उनका पब्लिक अपीयरेंस कम हो गया था। उनके हटने के बाद अमेरिका ने क्यूबा से रिश्ते सुधारने की पहल की। बराक ओबामा की सरकार ने 2015 में डिप्लोमेटिक संबंध बहाल करने का फैसला किया। मार्च 2016 में ओबामा क्यूबा के
Speaker A
दौरे पर गए। 1928 के बाद पहली बार कोई अमेरिकी राष्ट्रपति क्यूबा में था। यह पल [संगीत] ऐतिहासिक था। ओबामा ने क्यूबा से कई प्रतिबंध हटा दिए। तब कास्त्रो ने अपने अखबार में कॉलम लिखकर क्यूबा के लोगों को शाबाशी दी थी। कट टू नवंबर 2016 यह महीना
Speaker A
क्यूबा के लिए दो बुरी घटनाएं लेकर आया। पहली घटना थी अमेरिका में डोनल्ड ट्रंप की जीत। [संगीत] ट्रंप क्यूबा को गिराने का सपना लेकर आए थे। उन्होंने ओबामा के ज्यादातर फैसलों को पलट दिया और जाते-जाते क्यूबा पर नए प्रतिबंध लगाकर गए। [संगीत]
Speaker A
अभी ट्रंप का दूसरा टर्म चल रहा है। इस बार उनका इरादा क्यूबा में सरकार बदलने का है। खैर, नवंबर 2016 में ही 25वीं तारीख को फदेल कास्त्रो का निधन हो गया। कास्त्रो के निधन के बाद उनके शरीर को
Speaker A
जलाया गया। उनकी राख के साथ हवाना से सत्यागो तक परेड [संगीत] हुई। जनवरी 1959 में बदस्ता को भगाने के बाद कास्त्रो इसी रास्ते से हवाना गए थे। फिर उनकी राख को सेंटियागो में ही दफना दिया गया। कास्त्रो ने पहले ही कहा हुआ था कि उनका अंतिम
Speaker A
संस्कार साधारण तरीके से [संगीत] होना चाहिए। मृत्यु के बाद उनकी कोई मूर्ति नहीं लगनी चाहिए। किसी सड़क या किसी चौराहे पर उनका नाम नहीं होना चाहिए। उनकी इच्छाओं का बखूबी पालन किया गया। लेकिन लोगों ने उन्हें याद रखा है। दुनियादेल
Speaker A
कास्त्रों को इतनी आसानी से नहीं भूल सकती। लेकिन कास्त्रों को याद कैसे रखा जाए?
Speaker A
[संगीत] कास्त्रों की क्रांति से पहले क्यूबा में भारी असमानता थी। साक्षरता दर 60 से 70% [संगीत] के बीच थी। गांव में भयंकर गरीबी थी। हेल्थ केयर की पहुंच गिनती के लोगों तक थी। कास्त्रो के आने के बाद इसमें
Speaker A
बदलाव [संगीत] हुआ। हर व्यक्ति तक स्कूल और अस्पताल पहुंचा। क्यूबा का हेल्थ केयर सिस्टम [संगीत] कई अमीर देशों से आगे है। उसके डॉक्टर्स की काबिलियत का लोहा पूरी दुनिया मानती है। लेकिन दूसरी वजहों [संगीत] से दिलकास्त्रों की आलोचना भी
Speaker A
होती रही है। कास्त्रों ने जीवन भर पावर पर अपना शिकंजा [संगीत] कस कर रखा। उन्होंने दूसरी पीढ़ी के नेता तैयार नहीं किए। जब तक वह बुरी तरह बीमार [संगीत] नहीं हो गए तब तक उन्होंने सत्ता नहीं छोड़ी। उनके शासन में हजारों लोगों को देश
Speaker A
छोड़कर भागना पड़ा। क्यूबा सिंगल पार्टी स्टेट बनकर रह गया। प्रेस और बोलने की आजादी पर पहरेदारी लगा दी गई। प्रोटेस्ट को बहुत बेरहमी से कुचला गया। कास्त्रों [संगीत] की क्रांति ऐसी ही एक व्यवस्था के खिलाफ थी। लेकिन सत्ता में आते ही यह बदल गया।
Speaker A
हालांकि [संगीत] कई लोग मानते हैं ये सब बाहरी दखल से निपटने के लिए करना पड़ा। अगर अमेरिका का खतरा ना होता तो शायद चीजें काफी अलग होती। खैर ऐसा होता तो क्या होता? वैसा होता तो क्या होता?
Speaker A
अनुमानों और कल्पनाओं का कोई अंत है नहीं। [संगीत] लेकिन कास्ट्रो इन मामलों में जो कर सकते थे जो उनके हाथ में था वहां उनकी आलोचना हो सकती है। जातेजाते छे व्यवारा का किस्सा भी [संगीत] आप सुनते जाइए। उनके
Speaker A
बिना फतेल कास्ट्रो की कहानी अधूरी रह जाएगी। क्रांति के बाद छे सरकार का हिस्सा बन गए। [संगीत] उन्होंने क्यूबा के नेशनल बैंक को चलाया। फिर कुछ समय कैबिनेट मिनिस्टर भी रहे। लेकिन क्यूबा में रहते-रहते उनका मन उबने लगा था।
Speaker A
[संगीत] चे मानते थे कि क्रांति का आईडिया पूरी दुनिया में फैलना चाहिए। इस इरादे से 1965 में उन्होंने क्यूबा छोड़ दिया। [संगीत] पहले कांगो गए लेकिन काम नहीं बना तो बोलेविया पहुंच गए। उन्होंने वहां क्रांति की तैयारी शुरू की। बोलेविया में उन दिनों
Speaker A
अमेरिका के समर्थन वाली सरकार [संगीत] थी। चे का वहां होना अमेरिका के लिए बेहद खतरनाक था। सीआईए उनके पीछे लंबे समय से लगी हुई थी। अक्टूबर 1967 [संगीत] में उनको पकड़ लिया गया। फिर उनकी हत्या कर दी गई। जब कास्त्रो को इसकी खबर मिली। वह
Speaker A
सन्न रह गए। 18 अक्टूबर 1967 को कास्त्रो ने चे [संगीत] के सम्मान में एक रैली की। इसमें उन्होंने कहा था मेरी कामना है कि भविष्य के नौजवान शेख व्यवारा जैसे बने। [संगीत] हमारे बच्चे उनकी तरह साहस के साथ
Speaker A
शिक्षक बने। शेख व्यवारा को मारने के बाद उनकी लाश को अनजान जगह पर दफना दिया गया था। लेकिन कास्त्रों ने उनको खोजने की उम्मीद नहीं छोड़ी। [संगीत] अगले 30 वर्षों तक वो कोशिश करते रहे और आखिरकार 1997 में कब्र का पता चल गया। तब चेक के
Speaker A
अवशेषों को क्यूबा [संगीत] लाया गया और उनको पूरे राजकीय सम्मान के साथ दफनाया गया। शेख व्यवारा की हत्या में शामिल कई अफसर संदिग्ध परिस्थितियों में मारे गए। एक व्यक्ति हेलीकॉप्टर क्रैश में मारा गया। तीन को अज्ञात लोगों ने गोली मार दी।
Speaker A
[संगीत] कहा गया यह हत्याएं कास्ट्रो करवा रहे हैं। लेकिन यह कभी साबित नहीं हो पाया। जिस मारियो तेरा ने छ पर गोली चलाई थी। वो अगले 39 वर्षों तक छिपा रहा। 2006 में उसको मोतियाबिंद हो गया। तब उसने फेक
Speaker A
नाम पर इलाज की अर्सी लगाई। उस समय क्यूबार वेनेजुला ऑपरेशन मिला [संगीत] चला रहे थे। इसमें लैटिन अमेरिका में आंखों की प्रीजरी की जाती थी। उसी में मारियो का इलाज भी हुआ। क्यूबा सरकार [संगीत] को इसकी जानकारी मिल गई थी। लेकिन उसने
Speaker A
बदला लेने के बजाय सरकारी अखबार में एक एडिटोरियल निकलवाया [संगीत] जिसमें लिखा था चार दशक पहले मारियो तेरा ने एक सपने और एक विचार की हत्या की थी। लेकिन आज चे ने [संगीत] फिर एक जंग जीत ली। विदेलकास्त्रो का एक पक्ष ऐसा भी था
Speaker A
दोस्तों का दोस्त और दुश्मनों का दुश्मन। आप विदेल कास्टो के बारे में क्या सोचते हैं? हमें कमेंट करके जरूर बताएं। तमाम जानकारी आपके लिए लेकर आए हैं अभिषेक [संगीत] कुमार। अगर यह वीडियो आपको पसंद आया हो तो लाइक, शेयर और सब्सक्राइब जरूर
Speaker A
करते चलिए। [संगीत] आपसे फिर जल्द मुलाकात होगी। अपना ध्यान रखिए। बहुत-बहुत शुक्रिया।
Topics:फिदेल कास्त्रोक्यूबाबतिस्ता तानाशाहीमोंकाडा हमलासोवियत संघअमेरिका नाकेबंदीहवाना यूनिवर्सिटीराजनीतिक संघर्षक्रांतिकारी नेताक्यूबा इतिहास











