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How Saudi Arabia Became the Most Powerful Country in Middle East | MBS

सऊदी अरब कैसे मध्य पूर्व का सबसे ताकतवर देश बना, एमबीएस की भूमिका और उसकी राजनीतिक-आर्थिक ताकतों की कहानी।

Key Takeaways

  • सऊदी अरब ने अपनी भौगोलिक स्थिति और तेल संसाधनों के कारण मध्य पूर्व में प्रमुख शक्ति बनकर उभरा।
  • राजनीतिक सत्ता पूरी तरह हाउस ऑफ सऊथ के हाथ में है, जहां राजा और क्राउन प्रिंस की भूमिका निर्णायक है।
  • अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी ने सऊदी अरब को सुरक्षा और आर्थिक लाभ दिए।
  • एमबीएस ने सत्ता संभालकर देश की नीतियों और वैश्विक प्रभाव को मजबूत किया।
  • सऊदी अरब के मानवाधिकार और क्षेत्रीय युद्धों को लेकर विवाद भी जारी हैं।

What the video covers

  • सऊदी अरब का भौगोलिक विस्तार और पड़ोसी देशों के साथ सीमा संबंध।
  • राजनीतिक व्यवस्था: एब्सोल्यूट मोनार्की, राजा और क्राउन प्रिंस की भूमिका।
  • इस्लाम का उदय और सऊदी अरब में वहाबी विचारधारा का प्रभाव।
  • सऊदी अरब के तेल संसाधन और वैश्विक तेल बाजार में उसकी भूमिका।
  • अमेरिका के साथ सऊदी अरब का रणनीतिक गठबंधन और सुरक्षा संबंध।
  • सऊदी अरब के इतिहास में हाउस ऑफ सऊथ का उदय और सत्ता का केंद्रीकरण।
  • सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था, जनसंख्या संरचना और सामाजिक पहलू।
  • एमबीएस का उदय और सऊदी अरब में उसकी सत्ता की मजबूती।
  • सऊदी अरब के क्षेत्रीय संघर्ष, यमन युद्ध और मानवाधिकार मुद्दे।
  • सऊदी अरब की वैश्विक राजनीतिक महत्वता और तेल की कीमतों पर नियंत्रण।

Answers

Questions about this video

सऊदी अरब की राजनीतिक व्यवस्था कैसी है?

सऊदी अरब में एब्सोल्यूट मोनार्की है जहां राजा राज्य और सरकार दोनों के प्रमुख होते हैं। संसद नहीं होती, बल्कि राजा द्वारा नियुक्त 150 सदस्यों वाली शूरा काउंसिल होती है जो सलाह देती है।

सऊदी अरब की ताकत का मुख्य स्रोत क्या है?

सऊदी अरब की ताकत का मुख्य स्रोत उसके विशाल तेल संसाधन हैं, जिनके कारण वह वैश्विक तेल बाजार में दूसरे नंबर पर है और तेल की कीमतों को नियंत्रित करता है।

एमबीएस का सऊदी अरब में क्या प्रभाव है?

मोहम्मद बिन सलमान (एमबीएस) वर्तमान क्राउन प्रिंस हैं जो असल में सऊदी अरब की नीतियों और शासन को नियंत्रित करते हैं, जिससे उनकी सत्ता काफी मजबूत हुई है।

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Speaker A
एशिया महाद्वीप के पश्चिमी मुहाने पर एक ऐसा देश है जो 95% रेगिस्तान है। एरिया में वह भारत का लगभग दो तिहाई है। वेस्ट एशिया में सबसे ज्यादा देशों के लैंड बॉर्डर्स उसी के साथ लगते हैं। इतना विशाल होने के बावजूद उसके यहां एक परमानेंट नदी
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Speaker A
नहीं है। 100 बरस पहले तक वहां ना कोई नेचुरल रिसोर्स था और ना ही कोई इंडस्ट्री थी। उस देश के लोग कबीलों में रहते थे। उनमें अक्सर लड़ाई झगड़ा चलता रहता था। तब किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि बंजर जमीन
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Speaker A
का वो टुकड़ा पूरी दुनिया को अपने इशारों पर नचाएगा। वो देश कितना खास है इसको तीन पॉइंट्स में समझ लेते हैं। उस देश को अमेरिका खुद डिपेंड करता है। पाकिस्तान और तुर्की उसके साथ नेटो जैसा डिफेंस पैक्ट करते हैं। [संगीत] अमेरिका, तुर्की और
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Speaker A
पाकिस्तान तीनों उसके बॉर्डर से बहुत दूर हैं। फिर भी वे उसकी सुरक्षा के लिए परेशान रहते हैं। 91 के हमले में शामिल 19 में से 15 अटैकर्स इसी देश के थे। मगर अमेरिका ने उस पर एक गोली तक नहीं चलाई।
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Speaker A
इस [संगीत] देश के राजकुमार ने एक इंटरनेशनल पत्रकार को विदेशी जमीन पर मरवा दिया था। लेकिन उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई और ना ही [संगीत] कोई सेंशन लगा। उस देश के पास 17% ऑयल रिजर्व हैं। ऑयल प्रोडक्शन में दूसरे नंबर पर आता है। उसके
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Speaker A
एक इशारे पर दुनिया भर में तेल के दाम ऊपर नीचे होने [संगीत] लगते हैं। उसकी सरकारी तेल कंपनी हर साल इतना प्रॉफिट कमाती है जितनी कई देशों की जीडीपी भी नहीं है। यह कहानी किंगडम ऑफ सऊदी अरेबिया [संगीत]
01:27
Speaker A
यानी सऊदी अरब की है। रेगिस्तान में पनपाई कबीला कैसे दुनिया का सबसे ताकतवर घराना बन गया? [संगीत] अमेरिका से उसकी सांठगांठ कैसे हुई? सऊदी अरब को बारगेनिंग पावर कहां से मिलती है? क्या सिर्फ तेल ने उसको बचा रखा है? फिर रिलीज़ की उठापटक में उसका
01:43
Speaker A
क्या स्टेक है? और मोहम्मद बिन सलमान यानी कि एमबीएस सऊदी अरब के सर्वे सर्वा कैसे बन गए? तो चलिए शुरू करते हैं। सऊदी अरब का मैप देखिए। इसका बॉर्डर सात देशों और दो समुंदरों से मिलता है। नॉर्थ में जॉर्डन, इराक और कुवैत, साउथ में यमन
02:09
Speaker A
और ओमान और ईस्ट में यूएई और कतर। समुंदर की बात करें तो ईस्ट में पर्शियन गल्फ और वेस्ट में रेड सी हैं। इन [संगीत] रूट्स में ऑयल सप्लाई और ग्लोबल ट्रेड की जान बचती है। सऊदी अरब सबसे ज्यादा जमीन के
02:20
Speaker A
मामले में 12वें नंबर का देश है लेकिन उसका ज्यादातर हिस्सा रहने लायक नहीं है। इसकी एक झलक पॉपुलेशन में दिखती है। सऊदी अरब में 3.5 करोड़ लोग रहते हैं। इनमें से लगभग 1.5 करोड़ लोग विदेशी मूल के हैं।
02:32
Speaker A
सबसे ज्यादा 27 लाख भारतीय [संगीत] हैं। सऊदी अरब के स्थानीय नागरिकों की संख्या लगभग 2 करोड़ है। जो सऊदी अरब का नागरिक है उसका मुस्लिम होना कंपलसरी है। उसके बिना सिटीजनशिप नहीं मिलती है। इस्लाम सऊदी अरब का स्टेट रिलीजन है। लगभग 90%
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Speaker A
नागरिक सुन्नी इस्लाम को मानते हैं। बाकी 10 फीसदी शिया हैं। अब बात करते हैं इकॉनमी की। सऊदी अरब की जीडीपी 1.4 ट्रिलियन डॉलर है। वो हाई इनकम वाले देशों की कैटेगरी में आता है। इसकी पर कैपिटा इनकम लगभग ₹35 लाख है। सऊदी अरब की करेंसी
03:04
Speaker A
का नाम है सऊदी रियाल। एक अमेरिकी डॉलर में पौने रियाल आते हैं। भारतीय करेंसी में एक सऊदी रियाल की कीमत लगभग ₹25.5 है। अब पॉलिटिकल सिस्टम पर चलते हैं। सऊदी अरब में एब्सोल्यूट मोनार्की है। राजा हेड ऑफ द स्टेट और हेड ऑफ द गवर्नमेंट दोनों होते
03:20
Speaker A
हैं। वो काउंसिल ऑफिस्टर्स को लीड करते हैं। अहम पदों पर अपॉइंटमेंट उन्हीं के हाथों होता है। वो सऊदी अरब के कमांडर इन चीफ भी हैं। सऊदी अरब में नॉर्मल देशों की तरह चुनाव नहीं होते। वहां संसद भी नहीं
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Speaker A
है। संसद की जगह शुरा काउंसिल की व्यवस्था है। इसमें 150 मेंबर्स होते हैं। इनकी नियुक्ति राजा करते हैं। यह बिल्स और एग्रीमेंट्स पर चर्चा करते हैं और राजा को सलाह भी देते हैं। हालांकि उनके पास किसी बिल या फिर एग्रीमेंट को पास करने या
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Speaker A
रोकने का हक नहीं है। अल्टीमेट पावर है वो राजा [संगीत] के पास है। इसी तरह जुडिशरी भी है। सऊदी अरब में अदालतों का सिस्टम बना हुआ है। लेकिन [संगीत] उसमें राजसत्ता का दखल बना रहता है। और सऊदी अरब में राजा
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Speaker A
कैसे चुना जाता है? जब एक राजा जिंदा होता है तभी वह अपना उत्तराधिकारी चुन लेता है। उसको क्राउन प्रिंस कहते हैं। आमतौर पर राजा की मृत्यु के बाद वह अगला राजा बनता है। लेकिन कई बार क्राउन प्रिंस राजा के
04:10
Speaker A
जीते जी अधिक शक्तिशाली हो जाते हैं जैसा कि अभी चल रहा है। सऊदी अरब के राजा सलमान हैं लेकिन असल में क्राउन प्रिंस एमबीएस [संगीत] डिक्टेट कर रहे हैं। ऐसी सिचुएशन में राजा की कुर्सी सेरेमोनियल हो जाती है। भले ही
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Speaker A
किंग और क्राउन प्रिंस में पावर को लेकर खींचतान चलती हो लेकिन सत्ता की धुरी एक ही परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है। उसका नाम है हाउस ऑफ सऊथ। इसका फाउंडर मोहम्मद इब्न सऊद को माना जाता है। उन्होंने पहले सऊदी स्टेट की नीव रखी थी। उनके वंशज
04:37
Speaker A
अब्दुल अजीज इब्न सऊद ने 1932 में मॉडर्न सऊदी अरब बनाया था। उन्हीं के बेटे अब पोते ही सऊदी अरब पर शासन कर सकते हैं। लेकिन ऐसा क्यों है? यह जानने के लिए हमें कुछ चीजें समझनी होंगी। आज का सऊदी अरब
04:49
Speaker A
जहां बसा है, वह 1400 बरस पहले काफी [संगीत] बिखरा हुआ था। लोग अलग-अलग कबीलों में रहते थे। यह इलाका हिंद महासागर और भूमध्य सागर के बीच पड़ता है। इसलिए यह ट्रेडर्स के लिए [संगीत] जंक्शन का काम करता था। फिर सातवीं सदी में मक्का में इस्लाम का
05:04
Speaker A
उदय हुआ। [संगीत] एशिया, अफ्रीका और यूरोप में करोड़ों लोग इसके प्रभाव में आए। मक्का और मदीना उसके [संगीत] लिए सबसे पवित्र जगहें थीं। वे हज के लिए आने लगे। इस तरह मक्का और मदीना धर्म और राजनीति के साथ [संगीत] इकॉनमी के भी केंद्र बन गए
05:18
Speaker A
थे। जो इन शहरों को कंट्रोल करता वो इस्लामी दुनिया को कंट्रोल कर सकता था। इसलिए [संगीत] इन पर कब्जे के लिए लड़ाईयां चलती रही। 1517 में यह इलाका ऑटोमन साम्राज्य के पास चला गया। उन्होंने शासन की जिम्मेदारी मक्का के शरीफ के पास
05:31
Speaker A
रहने दी। बदले में शरीफ ने ऑटोमंस की अधीनता मान ली। फिर 1744 में मोहम्मद इब्न अब अल वहाब दरिहा पहुंचे। दिरहा अरेबियन पेनसुला के पूर्व में बसा है। यह शहर मक्का से तकरीबन 900 कि.मी. दूर है। अल वहाब प्योर इस्लाम का प्रचार [संगीत] करने
05:47
Speaker A
निकले थे। उनका कहना था मुस्लिम भ्रष्ट हो गए हैं। उन्हें सुधार की जरूरत है। मगर कोई उन्हें [संगीत] सीरियसली नहीं ले रहा था। कई सरदारों ने तो धक्के मारकर भगा दिया था। लेकिन दरहा के अमीर ने उनको बड़ी
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Speaker A
इज्जत दी। उनका नाम था मोहम्मद इब्न सऊद। [संगीत] उन्होंने अल वहाब के साथ एक सौदा किया। सौदा यह था कि इब्न सऊद अल वहाब की विचारधारा को आगे बढ़ाएंगे। बदले में अल वहाब उनको पॉलिटिकल और रिलीजियस लेजिटसी देंगे। अब अल वहाब के समर्थक इब्न सऊद को
06:15
Speaker A
अपना राजा मानने लगे थे। इससे उनको एंपायर फैलाने का हौसला मिला। 19वीं सदी आते-आते उनके कबीले ने मक्का और मदीना पर कब्जा कर लिया था। लेकिन ऑटोमंस ने सेना भेजकर उनको हरा दिया। इसके बाद सऊद शासक अब्दुल्लाह कोानु भेज दिया गया। वो पहले रूलर इब्न
06:31
Speaker A
सऊद का परपोता था। अब्दुल्लाह को वहीं पर मार दिया [संगीत] गया। उसके मरते ही पहला सऊदी स्टेट खत्म हो गया। कुछ वक्त बाद दूसरा सऊदी स्टेट बनने की कोशिश हुई लेकिन आपसी लड़ाईयों के चलते ज्यादा चल नहीं पाया। [संगीत]
06:43
Speaker A
1891 आते-आते साउथ फैमिली अफसान पर थी। उनकी राजधानी रियाद हाथ से निकल चुकी थी। इसी परिवार में एक लड़का था अब्दुल अजीज इब्न सऊद। उसको भी इब्न सऊद कहा जाता है। वो पुराना गौरव लौटाना चाहता था। 1902 में
06:58
Speaker A
उसने रियाद पर कब्जा कर लिया। अब उसकी नजर [संगीत] पूरे अरेबियन पेनसुला पर थी। फिर उसने बेडन कबीले के लड़ाकों की मदद ली। इनको [संगीत] इखवान कहते थे। वे भी वहाबी विचारधारा को मानते थे। दोनों का कॉम्बिनेशन डेडली साबित होने वाला था।
07:12
Speaker A
लेकिन उससे पहले फर्स्ट वर्ल्ड वॉर शुरू हो गया। इस जंग में ऑटोमन साम्राज्य ब्रिटेन के खिलाफ लड़ने उतरा। ब्रिटेन ने उसको हराने के लिए अरेबियन पेनसुला पर दो पार्टियों से हाथ मिलाया। पहले थे मक्का के शरीफ हुसैन बिन अली और दूसरे व्यक्ति
07:25
Speaker A
थे इब्न सऊद। [संगीत] उन्होंने मिलकर ऑटोमन एंपायर को हरा दिया। लेकिन इससे अरेबियन पेनसुला की असली समस्या खत्म नहीं हुई थी। वहां पर पावर के दो सेंटर बन गए थे। वेस्ट में एजाज प्रांत पर हुसैन बिन अली का नियंत्रण था। इसी में मक्का और
07:40
Speaker A
मदीना आते थे। जबकि सेंट्रल और ईस्टर्न पार्ट में इब्रन सऊद राज कर रहे थे। उनका सेंटर रियाद में था। इन दोनों में हुसैन बिन अली का पलड़ा भारी था। उनके पास ब्रिटेन का सपोर्ट भी था। 1921 में ब्रिटेन ने उनके बेटे अब्दुल्लाह को
07:55
Speaker A
ट्रांस जॉर्डन का राजा बना दिया था। जॉर्डन पर अभी तक उन्हीं के परिवार का शासन है। खैर, ब्रिटेन के सपोर्ट के बावजूद हुसैन बिन अली अपना साम्राज्य नहीं बचा पाए। इब्न सऊद ने 1924 में मक्का और 1925 में मदीना को जीत लिया। हुसैन को
08:10
Speaker A
भागना पड़ा। अब लगभग पूरा अरेबियन पेनसुला साउथ फैमिली के कंट्रोल में था। लेकिन यहां पर एक गड़बड़ हो गई। इखवान लड़ा के मिडिल ईस्ट के दूसरे इलाकों में भी जिहाद करना चाहते थे। मगर इब्न सऊद इसके लिए तैयार नहीं थे। तब इकवान ने उनके खिलाफ
08:24
Speaker A
विद्रोह कर दिया। फिर इब्न सऊद ने उनको कुचलकर 1932 में तीसरे सऊदी स्टेट की [संगीत] स्थापना की। इसका नाम रखा गया किंगडम ऑफ सऊदी अरेबिया यानी सऊदी अरब। इब्न सऊद नए सऊदी साम्राज्य के पहले राजा बन गए। [संगीत]
08:37
Speaker A
लेकिन इसको एकजुट रखना बड़ी चुनौती थी। फिर उन्होंने हर कबीले और रसूखदार परिवारों में शादियां की। इन शादियों से उनको 45 बेटे
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Speaker A
बेटे थे। यह एक प्योर मोनार्की है। अगर बात सिर्फ मोनार्की तक रहती तो बहुत जल्द डेमोक्रेसी की मांग उठने लगती। अमेरिका यह डिमांड रखने में सबसे आगे होता। वो किसी ना किसी बहाने से हमला भी कर सकता था।
09:03
Speaker A
लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। उल्टा उसने सऊदी अरब को डिफेंड करने का वादा कर दिया था। इस चमत्कार का कारण था ब्लैक गोल्ड यानी कि तेल। सऊदी अरब में तेल खोजने की शुरुआत 1933 में हुई। उस बरस स्टैंडर्ड
09:18
Speaker A
ऑयल ऑफ कैलिफोर्निया सौकल ने सऊदी सरकार के साथ एक एग्रीमेंट किया। इस सौदे में सऊदी सरकार को तकरीबन $1,70,000 का सोना मिला था। बदले में कंपनी 60 बरस तक सऊदी अरब में खुदाई कर सकती थी। इस्लामी कट्टरपंथियों ने शुरुआत में इसका
09:33
Speaker A
विरोध किया। लेकिन इब्न सऊद ने उलेमाओं से इजाजत लेकर उनको शांत कर दिया। फिर 1933 में कैलिफोर्निया अरेबियन स्टैंडर्ड ऑयल कंपनी कैसो बनाई गई। इसी को एक्सप्लोरेशन का काम देखना था। उनको पहला बड़ा कुआं 1938 में देहरान के पास मिला। इसने पूरी
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Speaker A
कहानी बदल कर रख दी। शुरुआत 1500 बैरल तेल से हुई थी। धीरे-धीरे मामला लाखों और करोड़ों बैरल्स तक पहुंच गया। 1944 में कैसो का नाम बदलकर अरेबियन अमेरिकन ऑयल कंपनी आरामो कर दिया गया। शुरुआती दौर में आराम को का मालिकाना हक चार अमेरिकी
10:06
Speaker A
कंपनियों के पास था। सोकर टेक्स को एक्सॉन और मोबिल वे प्रॉफिट का कुछ हिस्सा सऊदी सरकार को देते थे। 1950 में हिस्सा 50% तक पहुंच गया। इससे सऊदी अरब की इनकम तेजी से बढ़ने लगी। 1973 में उन्होंने उस पैसे से
10:20
Speaker A
25% हिस्सेदारी खरीद ली। 1980 तक उन्होंने पूरी कंपनी खरीद ली थी। इसके बाद कंपनी का नाम सऊदी अराम को हो गया। इस डील में सऊदी अरब ने एक चीज अलग की थी। जहां दूसरे देश बंदूक की नोक पर तेल कंपनियां हथिया रहे
10:35
Speaker A
थे। वहीं सऊदी अरब ने लीगल तरीका अपनाया था। उसने [संगीत] शेयर्स के बदले वाजिब पैसा दिया था और उसने अमेरिकी इंजीनियर्स और टेक्नशियंस को बाहर नहीं निकाला था। इससे ऑयल प्रोडक्शन अपनी गति से चलता रहा और दोनों देशों के बीच भरोसा भी कायम रहा।
10:50
Speaker A
आज के दिन सऊदी अरब के पास 267 बिलियन बैरल का ऑयल रिजर्व है। इतने तेल से 7 बरस तक पूरी दुनिया की जरूरत पूरी हो सकती है। सिर्फ वेनेजुला में उससे ज्यादा तेल है। इस एक उपलब्धि ने सऊदी अरब की हैसियत फर्श
11:04
Speaker A
से अर्श पर पहुंचा दी और यह उसके लिए लेवरेज का सबसे बड़ा हथियार बन गया। फरवरी 1945 दूसरा वर्ल्ड वॉर खात्मे की तरफ था। मित्र राष्ट्रों की जीत तय हो चुकी थी। लेकिन उनको इतने में संतोष नहीं था। उस
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Speaker A
जंग में टैंक, फाइटर जेट्स और वॉरशिप्स का जैसा इस्तेमाल हुआ था, वह कल्पना से परे [संगीत] था। उसी समय नई-नई टेक्नोलॉजी भी आ रही थी। इनको चलाने के लिए तेल की जरूरत थी। जिसके पास तेल का कंट्रोल होता, वो
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Speaker A
पूरी दुनिया पर राज करने वाला था। हर देश इस इक्वेशन को समझता था। इसीलिए हर कोई सप्लाई लाइन सिक्योर करना चाहता था। फिर 14 फरवरी 1945 को अमेरिका [संगीत] के राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी रोजवेल्ट स्वेस नेहराए। वहीं पर सऊदी अरब के किंग इब्न
11:45
Speaker A
सऊद के साथ उनकी मीटिंग हुई। साउथ की चिंता दूसरी थी। उनके बॉर्डर्स पर ब्रिटेन का शिकंजा [संगीत] था। दूसरी तरफ इराक और जॉर्डन में जान दुश्मन शासन कर रहे थे। वे कभी भी उनकी गर्दन तक पहुंच सकते थे।
11:57
Speaker A
इसीलिए उन्हें एक बलशाली डिफेंस पार्टनर की [संगीत] दरकार थी। यानी अमेरिका को तेल चाहिए था और सऊदी अरब को सुरक्षा का भरोसा। फिर रुजवेट और इब्न सऊद के बीच एक सहमति बनी। इब्न सऊद ने अमेरिका को तेल की
12:08
Speaker A
गारंटी दी। बदले में अमेरिका ने हथियार और ट्रेनिंग देने का वादा किया। वो देहरान में मिलिट्री बेस बनाने के लिए भी तैयार हो गया। लेकिन इस बेस पर वह अपना झंडा नहीं फहरा सकता था। रुजवेल्ट और साउथ के
12:18
Speaker A
बीच कोई फॉर्मल एग्रीमेंट नहीं हुआ था। लेकिन क्योंकि उनको एक दूसरे की जरूरत थी इसलिए दोनों देश इसको निभाते रहे। यह रिश्ता पूरी तरह से प्रॉफिट लॉस की थ्योरी पर टिका हुआ था। इसकी पहली झलक नवंबर 1947 में दिखी जब फिलिस्तीन का मामला यूनाइटेड
12:32
Speaker A
नेशंस में पहुंचा। अमेरिका ने कहा था कि वो फिलिस्तीन के पार्टीशन के खिलाफ वोट करेगा। लेकिन उसने ना सिर्फ पार्टीशन का समर्थन किया बल्कि दूसरे देशों पर दबाव डालकर वोट भी दिलवाया। इससे फिलिस्तीन की जमीन पर यहूदी स्टेट बनने का रास्ता खुल
12:46
Speaker A
गया। सऊदी अरब इससे काफी नाराज हुआ। उसने अमेरिका से रिश्ता तो नहीं तोड़ा लेकिन जब मई 1948 में पहला अरब इसराइल युद्ध हुआ। उसने अपने सैनिक जरूर भेजे थे। सऊदी अरब ने फिर कभी इसराइल को मान्यता नहीं दी।
12:58
Speaker A
बाद में अमेरिका इसराइल का सबसे बड़ा पार्टनर बन गया। फिर भी वो अपने स्टैंड से पीछे नहीं हटा। 1950 और 60 के दशक में तेल की डिमांड और तेजी से बढ़ी। कई देशों की मिलिट्री और इकॉनमी मिडिल ईस्ट से आने वाले सस्ते तेल
13:11
Speaker A
पर टिकी हुई थी। इसी बीच 1960 में सबसे ज्यादा ऑयल प्रोड्यूस करने वाले देशों ने ओपेक बना लिया था। वे प्रोडक्शन की क्वांटिटी और कीमतें तय करने लगे थे। उन्होंने तेल कंपनियों में ओनरशिप लेने की शुरुआत भी कर दी थी। अब वे दबाव बनाने की
13:25
Speaker A
स्थिति में पहुंच गए थे। उन्हें इसको अप्लाई करने का मौका बहुत जल्द मिला। 1967 के सिक्स डे वॉर में इसराइल ने वेस्ट बैंक और गाजा पट्टी पर कब्जा कर लिया था। वो उन इलाकों में अवैध सेटलमेंट्स पसा रहा था।
13:37
Speaker A
सऊदी अरब ने अमेरिका से इसराइल पर प्रेशर बनाने की अपील [संगीत] की। उसने तेल का प्रोडक्शन रोकने की चेतावनी थी दी। लेकिन अमेरिका ने उसे नजरअंदाज कर दिया। फिर 1973 में एक और अरब इसराइल युद्ध शुरू हुआ। अबकी बार इजिप्ट और सीरिया ने इसराइल
13:51
Speaker A
पर हमला किया था। तब अमेरिका ने सऊदी अरब से मदद मांगी। [संगीत] लेकिन सऊदी अरब इजिप्ट और सीरिया के साथ खड़ा हो गया। इसी वॉर के बीच अमेरिका ने इसराइल को हथियारों की खेप भेजी। एक तरफ अमेरिका अरब देशों को
14:03
Speaker A
पीछे हटने के लिए कह रहा था। दूसरी तरफ वो इसराइल को खुली मदद [संगीत] दे रहा था। इससे सऊदी अरब को झटका लगा। उसने कुछ और अरब देशों के साथ मिलकर तेल का प्रोडक्शन घटा दिया और अमेरिका और उसके पार्टनर्स पर
14:14
Speaker A
ऑयल एंबारो लगा दिया। इसने पूरी दुनिया में हाहाकार मचा दिया। कुछ ही दिनों में तेल के दाम चार गुना तक बढ़ गए। कई देशों में मंदी के हालात पैदा हो गए। आखिरकार अमेरिका को झुकना पड़ा। उसने इसराइल को
14:26
Speaker A
1967 में जीते कुछ इलाकों से हटने के लिए मना लिया। तब जाकर सऊदी अरब ने एमार्गो हटाया। इस ऑयल क्राइसिस से सऊदी अरब को तीन चीजें हाथ लगी थी। पहली उसको महंगा तेल बेचकर खूब सारा पैसा मिला था। एक साल
14:38
Speaker A
के भीतर उसकी जीडीपी 150% तक बढ़ गई थी। दूसरी सऊदी अरब को अपनी बारगेनिंग पावर पता चल गई थी। उसके पास प्रोडक्शन घटाने या [संगीत] बढ़ाने की क्षमता थी। इसके जरिए वो तेल की कीमत कंट्रोल कर सकता था।
14:51
Speaker A
तीसरी चीज यह हुई कि सऊदी अरब ने तेल का कारोबार अमेरिकी डॉलर्स में करने का [संगीत] वादा किया। फिर उसने एक्स्ट्रा पैसा अमेरिका के मार्केट में इन्वेस्ट किया। बदले में अमेरिका ने उसको एडवांस हथियार और टेक्नोलॉजी में मदद की। इससे
15:03
Speaker A
दोनों देशों की निर्भरता एक दूसरे पर बढ़ गई थी। लेकिन सिर्फ तेल बेचकर सुपर पावर नहीं बना जा सकता था। ग्लोबल स्टेज पर धाक जमाने के लिए बाहर हाथ पैर फैलाने भी जरूरी थे। फिर 1979 आया और सऊदी अरब को
15:15
Speaker A
इसके कई मौके मिले। 1979 में सऊदी अरब के इर्द-गिर्द तीन बड़ी घटनाएं घटी। पहली घटना थी [संगीत] ईरान की इस्लामी क्रांति। शिया धर्मुगुरु आयतुल्लाह रुल्लाह खुमैनी ने शाह की सत्ता को उखाड़ दिया था। खुमैनी शिया थे जबकि सऊदी भी सुन्नी [संगीत] थी।
15:32
Speaker A
हुमैनी राजतंत्र को गैर इस्लामी कहते थे। इससे सऊदी सरकार को क्रांति का डर सताने लगा। इसीलिए जब 1980 में सद्दाम हुसैन ने ईरान पर हमला किया उसने सद्दाम को अरबों डॉलर्स का लोन दिया था। लेकिन यह गैंबल उल्टा पड़ गया। इराक ईरान वॉर का कोई
15:48
Speaker A
नतीजा नहीं निकला और सद्दाम ने लोन का पैसा लौटाने से मना कर दिया। जब सऊदी अरब ने प्रेशर डाला तब सद्दाम कुवैत पर चढ़ गया। वो सऊदी अरब के बॉर्डर पर मंडराने लगा था। फिर अमेरिका ने मदद करने का ऑफर
15:59
Speaker A
दिया। वो ऑयल सप्लाई खोना नहीं चाहता था। तब जाकर सद्दाम को पीछे धकेला जा सका। ईरान में क्रांति का एक और बड़ा असर हुआ। ईरान मिडिल ईस्ट में अमेरिका [संगीत] के लिए चुनौती बन गया था। उसको बैलेंस करने
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Speaker A
के लिए अमेरिका को सऊदी अरब की जरूरत थी। यह जरूरत अभी तक बनी हुई है। [संगीत] 1979 की दूसरी बड़ी घटना थी मक्का पर कब्जा। 20 नवंबर 1979 को 100 से ज्यादा हमलावरों ने मक्का पर कब्जा कर लिया। उनकी चार मेन
16:23
Speaker A
डिमांड्स थी। विदेशियों को बाहर निकालो। वेस्ट [संगीत] को तेल बेचना बंद करो। रॉयल फैमिली को कुर्सी से हटाओ और शुद्ध इस्लाम का पालन करो। यह साउथ फैमिली के अस्तित्व का सवाल था। उन्होंने मक्का के अंदर मिलिट्री एक्शन चलाकर कब्जा छुड़ा दिया।
16:37
Speaker A
लेकिन यह घटना उनके लिए सबक लेकर आई थी। उन पर आरोप था कि वहाबी विचारधारा से भटक गए हैं। वहाबी कट्टरपंथी पश्चिमी देशों से रिश्ते को भी इस्लाम के खिलाफ मानते थे। मगर सऊदी अरबी रिश्ता नहीं तोड़ सकता था।
16:50
Speaker A
उसने गुस्सा शांत करने के लिए दूसरा रास्ता अपनाया। वो वहाबिज्मु को बाहर एक्सपोर्ट करने लगा। उसने दुनिया भर में मस्जिद, मदरसे यूनिवर्सिटीज आदि बनाने पर पैसा खर्च किया। इसमें वहाबिज्मु का प्रचार किया जाता था। उसे सऊदी अरब के
17:05
Speaker A
अंदर कट्टरपंथियों का गुस्सा कम हुआ। साथ ही उसको दूसरे देशों पर प्रेशर बनाने का जरिया भी मिल गया। इसी से 1979 की तीसरी घटना की कड़ी भी जुड़ती है। दिसंबर 1979 में सोवियत संघ ने अफगानिस्तान पर हमला किया। सोवियत संघ नास्तिक था जबकि
17:18
Speaker A
अफगानिस्तान कट्टर इस्लामी देश था। फिर यह प्रचार किया गया कि इस्लाम खतरे में है। इसको बचाना हर मुस्लिम का कर्तव्य है। सऊदी अरब इसमें सबसे आगे था। उसने जिहाद के लिए पैसा दिया और अपने लोगों को लड़ने भी भेजा। इन्हीं लड़ाकों में ओसामा बिन
17:33
Speaker A
लादेन भी शामिल था। उसने सऊदी अरब के पैसे और अमेरिका के हथियारों से जंग लड़ी। अंत में सोवियत संघ को हार कर बाहर जाना पड़ा। इस जंग ने सऊदी अरब को भरोसा दिया कि उसका जिहाद एक्सपोर्ट करने का मॉडल सफल है। वो
17:45
Speaker A
ऑफिशियल आर्मी भेजे बिना भी दूसरे देशों में दखल दे सकता है। लेकिन कुछ बरस बाद यह चाल उसी के लिए मुसीबत बन गई। उसने जिन जिहादियों पर पैसा लगाया था वही उसके खिलाफ हो गए। वे सऊदी अरब और अमेरिका के
17:57
Speaker A
रिश्ते को हराम मानते थे। 1990 के दशक में उन्होंने सऊदी अरब के अंदर हमले शुरू कर दिए। फिर सितंबर 2001 में लादेन ने अमेरिका की धरती पर सबसे बड़ा टेरर अटैक करवा दिया। इस हमले में शामिल 19 में से
18:09
Speaker A
15 आतंकी सऊदी अरब के थे। कुछ सऊदी अधिकारियों ने आतंकियों को मदद भी की थी। 91 अटैक की जांच करने वाले कमीशन ने सऊदी अरब को प्रॉब्लमैटिक पार्टनर बताया। उन्होंने लिखा कि सऊदी अरब ने समय रहते अलकायदा से जुड़ी इंफॉर्मेशन साझा नहीं की
18:24
Speaker A
थी। इन सबके बावजूद सऊदी अरब पर जिम्मेदारी नहीं थोपी गई और ना ही उस पर हमला किया गया। इसकी दो बड़ी वजह थी। पहली यह कि सऊदी अरब ने लादेन से बहुत पहले रिश्ता तोड़ दिया था। वह अमेरिका के वॉर
18:36
Speaker A
ऑन टेररन में मदद देने के लिए भी तैयार था। दूसरा कारण यह था कि सऊदी अरब को दुश्मन बनाने में अमेरिका का नुकसान था। उसकी तेल की सप्लाई रुक सकती थी। सऊदी अरब में मक्का और मदीना है। वहां हमला करने से
18:47
Speaker A
सिविलाइजेशन वॉर का खतरा था और सऊदी अरब को खोकर मिडिल ईस्ट का एक जरूरी सिरा उसके हाथ से छूट सकता था। इसलिए अमेरिका उसके खिलाफ नहीं गया। सऊदी अरब के लिए अगली बड़ी चुनौती आई। 2011 में जब अरब देशों में क्रांति का
19:02
Speaker A
सिलसिला शुरू हुआ। मार्च 2011 तक इसकी [संगीत] आंच बहरीन तक पहुंच गई। बहरीन एक पुल के जरिए सऊदी अरब से जुड़ा है। यह [संगीत] उसके लिए भी घातक बन सकता था। तब सऊदी अरब ने सेना भेजकर विद्रोह को दबा
19:14
Speaker A
दिया। 2013 में इजिप्ट में मिलिट्री जनरल अब्दुल फतेह अलसीसी ने मुस्लिम ब्रदरहुड की सरकार गिरा दी। उस वक्त सऊदी अरब ने अलसीसी को सपोर्ट किया था। फिर सीरिया वॉर में उन्होंने बशर अल असद के विरोधियों का साथ दिया क्योंकि वहां असद के साथ ईरान
19:31
Speaker A
खड़ा था। सीरिया दोनों के लिए प्रॉक्सी वॉर का अड्डा बन गया। इसके बाद यमन की बारी आई। यमन सऊदी अरब के सदन बॉर्डर से लगा है। वहां के हुती विद्रोही शिया हैं। उन्हें ईरान का सपोर्ट मिला है। 2014 में
19:44
Speaker A
हुती विद्रोहियों ने यमन की राजधानी सेना पर कब्जा किया। यमन के राष्ट्रपति को देश छोड़कर भागना पड़ा। तब सऊदी अरब ने उनको शरण दी थी। फिर जनवरी 2015 में एमबीएस सऊदी अरब के डिफेंस मिनिस्टर डेपुटी क्राउन प्रिंस बन गए। मार्च 2015 में
19:59
Speaker A
उन्होंने गठबंधन सेना बनाकर यमन में बमबारी शुरू की। वह विद्रोहियों को हरा तो नहीं पाए लेकिन यमन में मानवीय संकट जरूर खड़ा हो गया। सऊदी अरब और उसके पार्टनर्स पर वॉर क्राइम्स के आरोप लगे लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। आदर्श और
20:13
Speaker A
नैतिकता के कॉन्टेक्स्ट में अजीब लग सकता है। लेकिन इंटरनेशनल अफेयर्स में ही [संगीत] ताकत की निशानी है। दवेश कुछ भी गलत करके बच सकता है। दुनिया उसी को सुपर पावर मानती है। मिडिल ईस्ट में रुतबा सऊदी अरब ने हासिल किया है इस रुतबे को। एक
20:25
Speaker A
राजकुमार नई ऊंचाइयों पर लेकर जा रहा है। वो अगला राजा बनने का सबसे बड़ा दावेदार है। दिलचस्प बात यह है कि वो इस रेस में दूर-दूर तक नहीं था। फिर अचानक वो सत्ता के शीर्ष पर कैसे पहुंच गया। सऊदी अरब में
20:40
Speaker A
पावर का ट्रांसफर भाइयों के बीच होता आया है। अगर भाई नहीं बचे तो उनके बेटों के बीच कुर्सी बटती है। लेकिन पहले राजा इब्न सऊद ने इसमें एक अपवाद रखा। उनके 45 बेटे थे। अगर वह अपने किसी भाई को उत्तराधिकारी
20:53
Speaker A
घोषित करते तो बेटों में झगड़ा हो सकता था। इसीलिए उन्होंने सबसे बड़े बेटे सऊद को क्राउन प्रिंस बनाया। 1953 में पिता की मौत के बाद सऊद राजा बन गए। लेकिन वो अव्वल दर्जे के अय्याश अरावसी थे। साउथ के
21:06
Speaker A
भाई फैसल उनसे कहीं ज्यादा समझदार और काबिल थे। परिवार के लोग भी उन्हीं को पसंद करते थे। फिर एक दिन उन्होंने सरकार का कंट्रोल अपने हाथों में ले लिया। जब राजा ने विरोध किया तो उनके महल की नाकेबंदी करवा दी गई। नवंबर 1964 में हाउस
21:18
Speaker A
ऑफ सऊद के सीनियर मेंबर्स और उलेमाओं ने फैसल को राजा मान लिया। सऊद को निर्वासन में जाना पड़ा। फैसल को सऊदी अरब का सबसे निर्णायक राजा माना जाता है। [संगीत] उन्होंने ऑर्गेनाइजेशन ऑफ द इस्लामिक कॉन्फ्रेंस ओआईसी की स्थापना की। यह 50 से
21:32
Speaker A
ज्यादा इस्लामी देशों का संगठन है। फैसल ने सऊदी अरब के अंदर दास प्रथा को खत्म कराया। उन्होंने लड़कियों के लिए स्कूल शुरू किया। वो देश में टीवी लेकर आए। कट्टरपंथियों ने इसका खूब विरोध किया मगर फैसल पीछे नहीं हटे। फैसल ने 1973 में ऑयल
21:46
Speaker A
एमबार्गो लगाया था कि सऊदी अरब के उभरने की शुरुआत थी। लेकिन फैसल इसको देखने के लिए जिंदा नहीं रहे। मार्च 1975 में उनके भतीजे ने ही उनकी हत्या कर दी। फैसल के बाद उनके भाई खालिद राजा बने। उन्होंने
21:59
Speaker A
1979 के झटों से सऊदी अरब को पार लगाया था। खालिद ने ही वहाबज़्मु के प्रचार प्रसार में पैसा बहाने की शुरुआत की। फिर 1982 में खालिद की मृत्यु हो गई। तब उनके भाई फहद को कुर्सी मिली। फहद बेसिक लॉ
22:14
Speaker A
चार्टर लेकर आए। फहद ने 2005 तक शासन चलाया। उनके मरने के बाद अब्दुल्लाह राजा बने। 2015 में अब्दुल्लाह की भी मृत्यु हो गई। तब उनके भाई सलमान राजा बन गए। 2015 तक इब्न सऊद के ज्यादातर बेटे मर चुके थे।
22:29
Speaker A
सलमान के अलावा दो-तीन बेटे ही जिंदा बचे थे। [संगीत] सलमान ने उनमें से एक मुकरिन को क्राउन प्रिंस बनाया। लेकिन 3 महीने के अंदर उनको हटाकर मोहम्मद बिन नायफ को क्राउन प्रिंस बना दिया गया। नायब सलमान के भतीजे थे। इस तरह पहली बार सक्सेशन की
22:44
Speaker A
लाइन इब्न सऊद के [संगीत] पोतों तक पहुंच गई थी। लेकिन बहुत जल्द उनको नायब से खतरा महसूस होने लगा। किंग सलमान ने एक और चीज की थी। उन्होंने अपने बेटे मोहम्मद बिन सलमान को डेपुटी क्राउन प्रिंस बनाया था।
22:56
Speaker A
एमबीएस महज 29 साल के थे। उनको सरकार या सेना में काम करने का कोई अनुभव नहीं था। फिर भी उनको डिफेंस मिनिस्टर की पोस्ट दी गई थी। फिर जून 2017 में राजा ने नायफ को मिलने बुलाया। [संगीत] उन्होंने उनसे जबरन
23:07
Speaker A
इस्तीफा ले लिया और फिर एमबीएस को क्राउन प्रिंस बना दिया। उसके बाद नायफ कभी पब्लिक में दिखाई नहीं दिए। उस वक्त यह बदलाव बहुतों को हजम नहीं हुआ। क्योंकि साउथ फैमिली में नायफ की बड़ी इज्जत थी। विद्रोह की वजह बन सकता था। एमबीएस के पास
23:22
Speaker A
इसका रास्ता भी था। 4 नवंबर 2017 को सऊदी अरब में एक एंटी करप्शन कमेटी बनाई गई। इसकी कमान एमबीएस के पास थी। उसी रोज 380 राजकुमारों, मंत्रियों और उद्योगपतियों को आलीशान व्स काल्टन होटल में बुलाया गया। उन पर करप्शन के आरोप लगाए गए। फिर उन्हें
23:37
Speaker A
अपनी संपत्ति छोड़ने के लिए कहा गया। कुछ ने पहले से तैयार कागज पर [संगीत] चुपचाप साइन कर दिया। जिन्होंने आनाकानी की उनके साथ मारपीट हुई। इस तरह एमबीएस ने अपने विरोधियों को एक झटके में ठिकाने लगा दिया था। फिर 2 अक्टूबर 2018 [संगीत] की तारीख
23:52
Speaker A
आई। उस रोज वाशिंग पोस्ट के पत्रकार जमाल अशोक जी इस्तानबुल में थे। अशोक जी सऊदी अरब [संगीत] के नागरिक थे। वह सऊदी सरकार की आलोचना करते थे। अक्टूबर 2018 में वो इस्तानबुल के सऊदी दूतावास में गए लेकिन कभी बाहर नहीं निकले। बाद में मालूम चला
24:09
Speaker A
कि दूतावास के अंदर उनकी हत्या कर दी गई है। इस हत्या का इल्जाम एमबीएस पर लगा। पश्चिमी देशों ने इस पर खूब हो हल्ला मचाया। कुछ ने [संगीत] कहा कि सऊदी अरब को अलग-अलग कर देंगे। जब जो बाइडन अमेरिका के
24:20
Speaker A
राष्ट्रपति बने उन्होंने कुछ सऊदी अधिकारियों पर बैन भी लगाया लेकिन एमबीएस को छोड़ना उनके [संगीत] लिए भी नामुमकिन था। फिर फरवरी 2022 में रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया। पश्चिमी देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगाया जिसके चलते तेल के दाम बढ़
24:34
Speaker A
गए। यूरोप पर अमेरिका में एनर्जी क्राइसिस के हालात बनने लगे। तब [संगीत] उन्हीं पश्चिमी देशों को सऊदी अरब के पास जाना पड़ा। फिर जनवरी 2025 में डोन्ड ट्रंप दूसरी बार अमेरिका के राष्ट्रपति बने। [संगीत] उन्होंने पहले विदेशी दौरे के लिए
24:46
Speaker A
सऊदी अरब को चुना। उनको भी सऊदी के तेल और पैसों की जरूरत थी। [संगीत] इसने एमबीएस का कद और ऊंचा कर दिया था। किंग सलमान 79 साल की उम्र में राजा बने थे। रोजमर्रा के काम में उनका ज्यादा दखल नहीं रहता था।
24:58
Speaker A
इसलिए असली पावर एमबीएस [संगीत] के पास थी। उन्होंने इसका इस्तेमाल खुद को इस्टैब्लिश करने में किया। एमबीएस ने अपने आसपास वफादारों का नेटवर्क बनाया और विरोधियों को किनारे किया। फिर उन्होंने इंटरनेशनल स्टेज पर अपनी पोजीशन को मजबूत किया। इस तरह अंदर और बाहर दोनों जगहों पर
25:14
Speaker A
उनका एक अधिकार बन गया। [संगीत] एमबीएस अपने विरोधियों को गायब करवा सकते थे। विदेशी जमीन पर मर्डर करा सकते थे। दूसरे देशों में वॉर क्राइम कर सकते थे। फिर भी उन्हें अंजाम का डर नहीं था। उनको कुछ भी
25:25
Speaker A
करने की खुली छूट हासिल थी। लेकिन एमबीएस को अंदाजा था कि यह छूट तभी तक मिलेगी जब तक वेस्ट को उनसे फायदा [संगीत] है। दूसरी चीज यह कि तेल का दबदबा कभी भी खत्म हो सकता है। इसीलिए समय रहते इसका विकल्प
25:37
Speaker A
ढूंढना जरूरी था। और इसीलिए 2016 में सऊदी अरब ने सोवन वेल्थ फंड पर ध्यान दिया। एमबीएस से पहले यह ठंडे बस्ते में पड़ा था। 2015 तक इसमें सिर्फ 150 बिलियन डॉलर्स थे। 2026 में आंकड़ा एक ट्रिलियन डॉलर के करीब पहुंच चुका है। तेल से होने
25:53
Speaker A
वाली कमाई का एक हिस्सा इस [संगीत] फंड में डाला जाता है। फिर वह पैसा दुनिया भर की बड़ी-बड़ी कंपनियों में इन्वेस्ट होता है। यह लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट प्लान है। इसके अलावा सऊदी अरब ने अल्ट्रा मॉडर्न कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स में पैसा लगाया
26:05
Speaker A
है। उसने रेगिस्तान में नियम सिटी बनाने की प्लानिंग की है। इसकी लागत सैकड़ों बिलियन डॉलर्स है। सऊदी अरब बिजनेस को भी आसान बना रहा है। उसके शहरों में मल्टीीनेशनल कंपनियों के दफ्तर खुल रहे हैं। वह टूरिज्म पर ध्यान दे रहा है। उसने
26:18
Speaker A
स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी खर्च किया है। वह फुटबॉल टीम्स खरीद रहा है। प्रीमियम स्पोर्ट्स लीग्स ऑर्गेनाइज करवा रहा है। 2034 के फीफा वर्ल्ड कप की मेजबानी भी वहीं है। इस कवायद का एक मकसद तो इमेज को सुधारना है। सऊदी अरब का दूसरा
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Speaker A
बड़ा मकसद है तेज से निर्भरता कम करना ताकि गाड़े वक्त में वरदान अभिशाप ना [संगीत] बन जाए। फरवरी 2026 तक वो इस रास्ते पर अच्छी रफ्तार से बढ़ रहा था और तभी एक हमला हुआ और उसकी गाड़ी हिचकोले
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Speaker A
खाने लगी। 28 फरवरी 2026 से अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर हमला शुरू किया। पहले ही दिन उन्होंने ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामिन की हत्या कर दी। इसके बाद ईरान ने मिडिल ईस्ट में अमेरिका के ठिकानों पर
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Speaker A
हमले किए और स्टेट ऑफ हॉर्मोस पर ताला लगा दिया। यह जंग किसी भी तरह से सऊदी अरब के हित में नहीं थी। पिछले सात वर्षों की तल्ख के बाद 2023 में [संगीत] ईरान के साथ डिप्लोमेटिक संबंध बहाल किए
27:11
Speaker A
थे। लेकिन ईरान वॉर ने उसको मुसीबत में डाल दिया था। एक तरफ उसकी ऑयल सप्लाई अधर में थी। दूसरी तरफ अमेरिका का सुरक्षा का वादा नाकाम साबित हो रहा था। फिर उसको रेड सी [संगीत] का रास्ता लेना पड़ा। उसके
27:22
Speaker A
ज्यादातर तेल के कुएं पर्शियन गल्फ के पास हैं। रेड सी तक पहुंचने के लिए उसने 1981 में बनी पाइपलाइन को इस्तेमाल [संगीत] में लिया। इसलिए उसके ऑयल बिजनेस पर ज्यादा असर नहीं पड़ा लेकिन दूसरे सेक्टर्स को झटका जरूर लगा है। उसकी
27:36
Speaker A
जीडीपी लगभग 5% तक घट गई है। अगर जंग लंबे समय तक चली तो यह नुकसान और बड़ा हो सकता है। डिफेंस के लिए भी सऊदी अरब को दूसरे विकल्पों की तरफ जाना पड़ा है। [संगीत] पिछले कुछ समय में वो हथियारों का सबसे
27:47
Speaker A
बड़ा खरीददार बना है। सबसे अधिक हथियार वो अमेरिका से खरीदता है। उसकी धरती पर अमेरिका के कई मिलिट्री बेससेस हैं। लेकिन जरूरत के वक्त यह उसके काम नहीं आ रहा है। सऊदी अरब ने बेशक एक लंबा और दिलचस्प सफर
28:01
Speaker A
तय किया है। एमडीएस ने इस सफर को नई रफ्तार दी [संगीत] है। उन्होंने कट्टरपंथियों पर लगाम कसी है। महिलाओं को ड्राइविंग और पब्लिक प्लेसेस में काम करने के अधिकार दिलाए हैं। सिनेमा और कॉन्सर्ट्स को फिर से खोला गया है। जिन
28:12
Speaker A
खेलों को हराम समझा जाता था उनमें सरकार पैसा लगा रही है। इन्हें देखकर लगता है कि सऊदी अरब मॉडर्न हो चुका है। लेकिन ऐसा मान लेना बड़ी भूल होगी। सऊदी अरब के पास बेशुमार पैसा है। वो मिडिल ईस्ट की सबसे
28:24
Speaker A
बड़ी इकॉनमी है। इसके बावजूद लगभग 13% आबादी गरीबी ने जीती है। उसकी सारी चमकधमक [संगीत] बड़े शहरों तक सीमित है। सऊदी अरब आज भी वापस उनको सपोर्ट करता है। कई आतंकवादी संगठनों की बुनियाद इससे जुड़ी है। सऊदी अरब ने महिलाओं को अभी तक
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Speaker A
पुरुषों के बराबर अधिकार नहीं मिले हैं। एमबीएस ने कुछ बदलाव जरूर किए लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। आज भी सऊदी अरब की किस्मत एक फैमिली पर टिकी हुई है। उसमें भी कुछ चुनिंदा लोग ही [संगीत] शासन चलाते हैं। सरकार चुनने में आम लोगों का कोई रोल
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Speaker A
नहीं रहता। सऊदी अरब में फ्रीडम ऑफ स्पीच की भी गुंजाइश नहीं है। प्रेस फ्रीडम इंडेक्स [संगीत] में वह 176वें नंबर पर आता है। मीडिया या तो सरकारिया है ही नहीं। आलोचना करने वाले पत्रकारों को जेल में डाल दिया जाता है। कई [संगीत] बार
29:05
Speaker A
हत्या भी करवा दी जाती है। सऊदी अरब पर यमन और दूसरे इलाकों में वॉर क्राइम्स के आरोप भी हैं। सऊदी अरब हर साल रिकॉर्ड नंबर में लोगों को मौत की सजा देता है। आरोप है कि सरकार डेथ पेनल्टी [संगीत] का
29:17
Speaker A
इस्तेमाल डर बनाए रखने के लिए करती है। इसके अलावा माइग्रेंट वर्कर्स की कंडीशन को लेकर भी सवाल उठते हैं। सऊदी अरब 2034 के फीफा वर्ल्ड कप का होस्ट है। [संगीत] इसके लिए वो बड़े लेवल पर स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर बनवा रहा है। इसमें लाखों
29:30
Speaker A
मजबूत काम कर रहे हैं। लेकिन उनकी सेफ्टी और उनकी सिक्योरिटी को अक्सर नजरअंदाज [संगीत] किया जाता है। यह सब भी एमबीएस के दौर में ही हो रहा है। किंग सलमान की उम्र ज्यादा नहीं बची है। उनके बाद एमबीएस की
29:41
Speaker A
राजा होंगे। वो अभी [संगीत] से राजा जैसा बर्ताव कर रहे हैं। लेकिन उनके शासन में किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं दिखती। उस पर उनका ध्यान भी नहीं है। एमबीएस की प्राथमिकता तेल से निर्भरता कम करने, डिफेंस में आत्मनिर्भर बनने और सऊदी अरब
29:56
Speaker A
को रीजनल सुपर पावर बनाने पर है। ईरान वॉर ने इस पर अभी ग्रहण लगा रखा है। एमबीएस इससे कैसे बाहर निकलते हैं? इसी से सऊदी अरब का भविष्य तय होगा। आप सऊदी अरब और एमबीएस के बारे में क्या सोचते हैं? हमें
30:07
Speaker A
कमेंट करके जरूर बताइएगा। इस वीडियो को यहीं पर समाप्त करते हैं। अगर वीडियो पसंद आया हो तो इसको लाइक और शेयर करते रहिए। हमारे चैनल क्यूरिस्तान को भी सब्सक्राइब कर लीजिए। यह तमाम जानकारी आपके [संगीत] लिए लेकर आए थे अभिषेक कुमार। नए वीडियो
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Speaker A
में नई कहानी के साथ एक बार फिर आपसे मिलूंगी। तब तक के लिए मुझे विदा दीजिए। बहुत-बहुत शुक्रिया।
Topics:सऊदी अरबमोहम्मद बिन सलमानमध्य पूर्वतेल संसाधनराजनीतिअमेरिका-सऊदी संबंधवहाबी विचारधाराहाउस ऑफ सऊथयमन युद्धआर्थिक ताकत

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