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How South Korea Became Super Rich... And Ended Its Future | North Korea

साउथ कोरिया की गरीबी से समृद्धि तक की यात्रा, मिलिट्री शासन, आर्थिक सुधार और भविष्य की चुनौतियाँ।

Key Takeaways

  • साउथ कोरिया की आर्थिक सफलता में मिलिट्री शासन और तानाशाही की भूमिका थी।
  • विदेशी सहायता और कर्ज ने देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
  • साउथ कोरिया ने जापान के मॉडल को अपनाकर तेजी से विकास किया।
  • आर्थिक सुधारों के बावजूद देश को जनसंख्या और सुरक्षा चुनौतियों का सामना है।
  • कोरियन युद्ध के बाद संघर्ष विराम के बावजूद दोनों कोरियाओं के बीच तनाव बना हुआ है।

What the video covers

  • 1953 में कोरियन युद्ध के बाद नॉर्थ और साउथ कोरिया के बीच संघर्ष विराम हुआ।
  • साउथ कोरिया युद्ध के बाद बेहद गरीब था, लेकिन उसने तेजी से आर्थिक विकास किया।
  • साउथ कोरिया की तरक्की में मिलिट्री शासन और डिक्टेटर पार्क चुही की भूमिका महत्वपूर्ण रही।
  • कोरिया का विभाजन अमेरिका और सोवियत संघ के बीच ठंडे युद्ध का परिणाम था।
  • साउथ कोरिया ने जापान के मॉडल को अपनाकर आर्थिक सुधार किए और बड़ी कंपनियां बनाई।
  • अमेरिका की मदद और विदेशी कर्ज ने साउथ कोरिया की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में मदद की।
  • 1961 में पार्क चुही ने तख्ता पलट कर सत्ता संभाली और देश को तेजी से विकसित किया।
  • 1980 के दशक में मार्शल लॉ और तानाशाही के बावजूद आर्थिक विकास जारी रहा।
  • 1990 के दशक में आर्थिक संकट आया लेकिन सुधारों से देश ने उबर लिया।
  • आज साउथ कोरिया आर्थिक रूप से मजबूत है लेकिन जनसंख्या और रक्षा जैसे नए संकटों का सामना कर रहा है।

Answers

Questions about this video

साउथ कोरिया ने इतनी तेजी से आर्थिक विकास कैसे किया?

साउथ कोरिया ने जापान के मॉडल को अपनाया, विदेशी सहायता और कर्ज लिया, और मिलिट्री शासन के तहत सख्त आर्थिक नीतियाँ लागू कीं जिससे उसने तेजी से विकास किया।

पार्क चुही का साउथ कोरिया के विकास में क्या योगदान था?

पार्क चुही ने 1961 में तख्ता पलट कर सत्ता संभाली और देश में सख्त मिलिट्री शासन लागू किया, जिसने आर्थिक सुधारों को बढ़ावा दिया और साउथ कोरिया को विकसित राष्ट्र बनाने में मदद की।

कोरियन युद्ध के बाद साउथ और नॉर्थ कोरिया के बीच स्थिति क्या है?

1953 में संघर्ष विराम के बाद भी दोनों कोरियाओं के बीच तनाव बना हुआ है, और 30वीं पैरेलल को टेंपरेरी बॉर्डर माना गया है, जबकि अमेरिका की फौज साउथ कोरिया में तैनात है।

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00:00
Speaker A
27 जुलाई 1953 बरस तक लड़ने के बाद नॉर्थ और साउथ कोरिया ने संघर्ष विराम कर लिया था। 30वीं पैरेलल लाइन उनके बीच का टेंपरेरी बॉर्डर था। उन्होंने तय किया कि परमानेंट बॉर्डर का मसला बाद में सुलझाया जाएगा। वो [संगीत]
00:15
Speaker A
समय आज तक नहीं आया है। लेकिन इस दरमियान सियोल की यहां नदी पर एक चमत्कार जरूर हुआ। संघर्ष विराम के वक्त नॉर्थ और साउथ कोरिया [संगीत] की हालत कमोबेश एक जैसी थी। साउथ कोरिया कहीं ज्यादा गरीब था। उसके यहां एवरेज इनकम $80 के आसपास थी।
00:32
Speaker A
अफ्रीका के देशों में लोग उससे ज्यादा कमाते थे। सिर्फ इतना ही नहीं साउथ कोरिया की 40% आबादी पढ़ना लिखना भी नहीं जानती थी। उसकी ज्यादातर जमीन खेती के लायक नहीं थी। इंडस्ट्रीज [संगीत] जंग में तबाह हो चुकी थी और वो हर तरफ से
00:47
Speaker A
दुश्मनों से घिरा हुआ था। धीरे-धीरे समय बीता। नॉर्थ कोरिया जहां था वहीं ठहरा रह गया। मगर साउथ कोरिया ने ऐसी छलांग लगाई कि सब हैरान रह गए। आज साउथ कोरिया दुनिया के सबसे विकसित [संगीत] देशों में से एक
01:01
Speaker A
है। उसकी जीडीपी 2 ट्रिलियन डॉलर का आंकड़ा छूने वाली है। पर कैपिटा इनकम ₹34 [संगीत] लाख हो चुकी है। दुनिया भर के डाटा सेंटर्स उसके बनाए मेमोरी चिप्स की बदौलत चल रहे हैं। उसकी कंपनियों के प्रोडक्ट्स हमारे [संगीत] आपके घरों में
01:15
Speaker A
इस्तेमाल हो रहे हैं। Samsung, Hyundai, LG, K जैसे ब्रांड से हमारा वास्ता रोज [संगीत] पड़ता है। दुनिया का 20 फीसदी सी ट्रेड साउथ कोरिया के जहाजों में होता है और उसकी एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री दुनिया भर में करोड़ों लोगों को अपना दीवाना बना रही
01:30
Speaker A
है। यह सब सुनकर लगता है कि किसी ने साउथ कोरिया [संगीत] को सड़क से उठाकर स्टार बना दिया होगा। लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। इस सफर में इतनी विडंबनाएं हैं कि पहली बार में भरोसा करना आपके लिए मुश्किल
01:41
Speaker A
हो जाएगा। तो क्या है साउथ कोरिया की असली कहानी? वहां आधे समय तक मिलिट्री का शासन क्यों था? एक डिक्टेटर को साउथ कोरिया की तरक्की का झंडाबरदार क्यों माना जाता है?
01:51
Speaker A
एक दफा 35 लाख लोगों ने अपना सोना सरकार को क्यों दान कर दिया था? फिर साउथ कोरिया अमीर कैसे बना? उसकी चमकदमक का दूसरा पहलू क्या कहता है? और क्या साउथ कोरिया का [संगीत] अस्तित्व संकट में है? तो आइए
02:05
Speaker A
शुरू करते हैं। साउथ कोरिया ईस्ट एशिया का देश है। वो कोरियन पेनसुला पर बसा है। उसके वेस्ट में है चीन, ईस्ट में जापान। लेकिन दोनों से उसका लैंड बॉर्डर नहीं लगता। लैंड बॉर्डर सिर्फ एक देश से लगता है। वो है नॉर्थ
02:27
Speaker A
कोरिया। सदियों तक दोनों कोरिया एक ही साम्राज्य का हिस्सा थे। फिर 1910 में जापान ने उस पर कब्जा कर लिया। जापान अपनी क्रूरता के लिए कुख्यात था। उसने स्कूलों से कोरियन लैंग्वेज को निकाल दिया। कोरियन लोगों को जापानी नाम रखने के लिए मजबूर
02:44
Speaker A
किया गया। कोरिया के नेचुरल रिसोर्सेज को लूट कर जापान भेजा गया। इसके अलावा 2 लाख से ज्यादा कोरियाई महिलाओं को कंफर्ट वुमेन बनाया गया था। यानी जापान हर मामले में कोरिया के लोगों का दुश्मन था। लेकिन जब बदलाव की बारी आई तब साउथ कोरिया ने
02:58
Speaker A
जापान का मॉडल ही अपनाया था। खैर अगस्त 1945 में अमेरिका ने जापान पर दो परमाणु बम गिराए। इसके बाद जापान ने सरेंडर कर दिया। अब कोरिया आजाद हो चुका था। लेकिन यह आजादी चंद दिनों की ही मेहमान थी।
03:13
Speaker A
कोरिया में अमेरिका और सोवियत संघ मिलकर हथियार रखवा रहे थे। सोवियत संघ नॉर्थ में था जबकि अमेरिका साउथ से नॉर्थ की [संगीत] ओर बढ़ रहा था। एक समय बाद लगा दोनों के बीच क्लैश हो जाएगा। इसलिए उन्होंने अपना-अपना एरिया बांटने का फैसला किया। यह
03:28
Speaker A
जिम्मेदारी यूएस आर्मी के दो अफसरों को दी गई। उन्होंने नेशनल ज्योग्राफिक में छपे नक्शे के बेसिस पर कोरिया को बांट दिया। 30वीं पैरेलल के ऊपर का हिस्सा सोवियत संघ को मिला और नीचे यानी साउथ में अमेरिका बैठा था। इस बंटवारे तक अमेरिका और सोवियत
03:42
Speaker A
संघ पार्टनर्स थे। सेकंड वर्ल्ड वॉर खत्म होने के तुरंत बाद कोल्ड वॉर शुरू हो गया था। इसका असर कोरिया पर भी पड़ा। नॉर्थ में सोवियत संघ ने कम्युनिज्म का प्रचार प्रसार किया। उसने मिलिट्री अफसर किम इलसंग को ट्रेनिंग देकर नॉर्थ का लीडर बना
03:56
Speaker A
दिया। यूं तो मिलिट्री रूल साउथ में भी था। वहां सिगमन री को कमान सौंपी गई थी। लेकिन वो एंटी कम्युनिस्ट थे। उनको अमेरिका सपोर्ट कर रहा था। जैसे-जैसे कोल्ड वॉर आगे बढ़ा, नॉर्थ और साउथ के बीच खाई भी बढ़ती गई। 1948 आते-आते उनका एक
04:11
Speaker A
होना मुश्किल हो गया था। फिर अमेरिका ने पूरे कोरिया में यूएन स्पोंसर्ड इलेक्शन कराने का प्रस्ताव दिया। लेकिन नॉर्थ ने इसे साफ मना कर दिया। इसके तुरंत बाद साउथ की सरकार ने रिपब्लिक ऑफ कोरिया बनाने का ऐलान कर दिया। यह साउथ कोरिया का ऑफिशियल
04:26
Speaker A
नेम है। साउथ कोरिया के तीन हफ्ते के बाद नॉर्थ ने डेमोक्रेटिक पीपल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया यानी कि डीपीआर के बना लिया। यह नॉर्थ कोरिया का पूरा नाम है। सितंबर 1948 तक नॉर्थ और साउथ कोरिया अलग देश बन चुके
04:41
Speaker A
थे। लेकिन उन्होंने यूनिफिकेशन का मकसद नहीं छोड़ा था। दोनों सरकारें पूरे कोरिया पर कब्जा करना चाहती थी। उनके बीच अक्सर झड़प होती रहती थी। फिर 25 जून 1950 को नॉर्थ कोरिया ने साउथ कोरिया पर हमला कर दिया। उसकी फौज साउथ कोरिया की राजधानी
04:56
Speaker A
सियोल तक पहुंच गई। फिर [संगीत] अमेरिका ने यूएन सिक्योरिटी काउंसिल को दखल देने के लिए कहा। सिक्योरिटी काउंसिल ने मेंबर स्टेट्स [संगीत] को साउथ कोरिया की मदद करने की इजाजत दे दी। तब अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने सेना उतारी। उन्होंने
05:09
Speaker A
नॉर्थ कोरिया को पीछे धकेल दिया। इतना पीछे कि वे चीन बॉर्डर तक पहुंच गए। अब चीन पर खतरा मंडरा रहा था। फिर चीन ने अपने सैनिकों को लड़ने भेजा। यह सिलसिला 3 बरस तक चला। कभी इसका पल्ला भारी होता तो
05:22
Speaker A
कभी उसका। 1953 आते-आते स्टेलमेट की स्थिति बन गई थी। [संगीत] लाखों लोगों की मृत्यु के बावजूद जंग का कोई नतीजा नहीं निकल रहा था। आखिरकार जुलाई 1953 में उन्होंने संघर्ष [संगीत] फराम समझौता कर लिया। 30वीं पैरेलल लाइन को टेंपरेरी बॉर्डर
05:37
Speaker A
माना गया था। लेकिन इससे नॉर्थ और साउथ कोरिया में जंग का खतरा खत्म नहीं हुआ था। इसलिए अमेरिका ने साउथ कोरिया से अपनी फौज कभी नहीं हटाई। आज भी अमेरिका के 28,000 से ज्यादा सैनिक वहां तैनात हैं। बहरहाल
05:50
Speaker A
कोरियन वॉर ने साउथ कोरिया की हालत बद से बदतर कर दी थी। नीम पर करेला यह की सरकार की तानाशाही बढ़ती जा रही थी। राष्ट्रपति सिगमन री कुर्सी बचाने के लिए धांधली करने लगे थे। साउथ कोरिया होपलेस स्टेट बनता जा
06:04
Speaker A
रहा था। मगर [संगीत] लोग इतनी आसानी से हार मानने के लिए तैयार नहीं हुए। 1960 में छात्रों ने सरकार के खिलाफ विद्रोह कर दिया। सिगमन री को इस्तीफा देना पड़ा। उसके बाद एक डेमोक्रेटिक सरकार चुनी गई लेकिन हालात में कोई सुधार नहीं हुआ। 1961
06:20
Speaker A
की शुरुआत में साउथ कोरिया की जीडीपी 2 बिलियन डॉलर से भी कम थी। जीडीपी 1.1% की दर से खिसक रही थी। बेरोजगारी दर 11.7% थी। महंगाई दर 10% से ऊपर थी। व्यापार घाटा तेजी से बढ़ रहा था। प्रोटेस्ट और
06:36
Speaker A
हड़ताल रोजाना की बात हो गई थी। उसकी सांस विदेशी कर्ज की बदौलत चल रही थी। इसी माहौल में एक और तख्ता पलट हुआ। 16 मई 1961 की सुबह मेजर जनरल पार्क चुही ने सत्ता पर कब्जा कर लिया। आगे चलकर वो साउथ
06:51
Speaker A
कोरिया के सबसे निर्णायक नेता बने। कई लोग उनको नायक मानते हैं, लेकिन कईयों के लिए वह एक सन की तानाशाह थे। उनकी कहानी में इतने लेयर्स हैं कि असली चेहरा ढूंढना बेहद मुश्किल हो जाएगा। पार्क चुही नवंबर 1917 में किसान परिवार
07:08
Speaker A
में पैदा हुए थे। उन दिनों कोरिया पर जापान का शासन था। बड़े होने पर पार्क टीचर बन गए। लेकिन वह हमेशा गांव में नहीं रहना चाहते थे। फिर 1940 में वह मंचूरिया आर्मी में चले गए। मंचूरिया नॉर्थ ईस्ट
07:20
Speaker A
चाइना का इलाका था। वहां जापान ने कठपुतली सरकार बिठा रखी थी। उन्होंने पार्क को ट्रेनिंग के लिए टोक्यो भेज दिया। जब कोरिया आजाद हुआ उस वक्त वो मंचूरिया आर्मी [संगीत] में सेकंड लेफ्टिनेंट के पद पर थे। जापान के सरेंडर के बाद पार्क
07:33
Speaker A
कोरिया लौट आए। उनको साउथ कोरिया की मिलिट्री एकेडमी में दाखिला मिल गया। लेकिन उन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी की मेंबरशिप भी ले रखी थी। उस दौर में यह ईश निंदा से कम नहीं था। कम्युनिस्टों को दुश्मन का एजेंट समझा जाता था। उनको हटाने
07:47
Speaker A
के लिए सरकार समय-समय पर फर्ज कैंपेन चलाती रहती थी। ऐसा ही एक कैंपेन 1948 में आर्मी के अंदर चलाया गया। उसमें पार्क पकड़े गए। उनको [संगीत] मौत की सजा सुनाई गई। लेकिन उन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी के अंडरग्राउंड नेटवर्क की जानकारी सरकार को
08:01
Speaker A
दे दी। बदले में उनको रिहा कर दिया गया। हालांकि उनका मिलिट्री रैंक छीन लिया गया था और उनको मिलिट्री हेड क्वार्टर में सिविलियन स्टाफ के तौर पर जॉब दी गई। लेकिन पार्क ने वहां के सीनियर अफसरों को सेट [संगीत] कर लिया था। उनके रेकमेंडेशन
08:15
Speaker A
पर उन्हें फिर से आर्मी में रख लिया गया। इसके तुरंत बाद कोरियन वॉर शुरू हो गया था। [संगीत] इसमें पार्क ने बेहद अहम भूमिका निभाई। जंग खत्म होने के बाद पार्क तेजी से आगे बढ़े। 1961 तक वह मेजर जनरल
08:27
Speaker A
के पद पर पहुंच चुके थे। सैनिकों की एक बड़ी टुकड़ी उनके अंडर थी। पाक में साउथ कोरिया में केओस देखा। कमजोर सिविलियन सरकार देखी। लोगों की हताशा से वह दोचार हुए और एक सुबह फौज लेकर सियोल पहुंच गए।
08:41
Speaker A
उन्होंने बड़ी आसानी से सरकार गिरा दी। फिर मिलिट्री हुंडा बनाई गई। यह फौजी अफसरों की कमेटी थी जो साउथ कोरिया को चलाने वाली थी। पार्कस में डेपुटी चेयरमैन बने लेकिन बहुत जल्द उन्होंने आर्मी चीफ को साइड कर लिया। 1963 में उन्होंने आर्मी
08:55
Speaker A
से इस्तीफा दे दिया। फिर चुनाव जीतकर
09:10
Speaker A
इशारे का मोहताज था। पार्क चुही जापान के मेजी साम्राज्य से काफी प्रभावित थे। मेजी एरा 1860 के दशक में शुरू हुआ था। उनसे पहले जापान बंद देश था। वो किसी को अपने बॉर्डर पर पटकने तक नहीं देता था। इसके
09:24
Speaker A
चलते वह बाकी दुनिया से पिछड़ गया था। लेकिन मेजी साम्राज्य ने इतनी तेजी से चेंज लाया कि 20वीं सदी आते-आते जापान मिलिट्री और इंडस्ट्रियल सुपर पावर बन चुका था। मेजी साम्राज्य का स्लोगन था अमीर देश मजबूत आर्मी। यानी अगर अमीर बनना
09:39
Speaker A
हो तो आर्मी मजबूत करनी होगी और अगर आर्मी मजबूत करनी है तो अमीर बनना होगा। यह स्लोगन पार्क के करियर का हाई पॉइंट बन गया। इसके लिए वह किसी भी हद तक जा सकते थे। 1962 में पार्क में इंटेलिजेंस एजेंसी
09:52
Speaker A
के चीफ किम चोंगपिल को जापान के विदेश मंत्री ओहरा मासायोशी से मिलने भेजा। साउथ कोरिया को पैसों की सख्त जरूरत थी लेकिन कोई उसके यहां इन्वेस्ट नहीं करना चाहता था। तब पार्क ने दूसरा रास्ता निकाला। वो जापान से कॉलोनियल रूल का मुआवजा मांगने
10:08
Speaker A
पहुंच गए। जापान मुआवजा देकर जाती की बात स्वीकार नहीं करना चाहता था। इसलिए उसने ग्रांट और लोन के तौर की मदद दी। जापान ने कुछ पुराने लोन भी माफ कर दिए। यह साउथ कोरिया के लिए संजीवी साबित होने वाला था।
10:21
Speaker A
मगर पार्क ने इस एग्रीमेंट को सबसे छिपा कर रखा क्योंकि आम लोगों ने जापान को माफ नहीं किया था। फिर 1964 में सीक्रेट मेमोरेंडम का राज खुल गया। इसके खिलाफ प्रोटेस्ट होने लगा लेकिन पार्क ने मार्शल लॉ लगाकर लोगों को शांत कर दिया। उन्होंने
10:36
Speaker A
1965 में जापान के साथ डिप्लोमेटिक संबंध भी स्थापित किए। इससे लोग नाराज जरूर हुए, लेकिन पार्क के लिए पैसा ज्यादा जरूरी था। पार्क चुही ने दूसरी विवादित डील अमेरिका के साथ की थी। 1960 के दशक में वियतनाम वॉर जोर पकड़ रहा था। अमेरिका को
10:51
Speaker A
पार्टनर्स की जरूरत थी। तब पार्क ने हाथ बढ़ाया। यह उनकी जंग नहीं थी। इससे उनको कोई मतलब नहीं होना चाहिए [संगीत] था। फिर भी उन्होंने 3 लाख से ज्यादा कोरियन सैनिकों को वियतनाम भेजा। इनमें से लगभग 5000 सैनिक [संगीत] मारे गए। इसके बदले
11:06
Speaker A
में पार्क को वह मिला जिसकी उन्हें दरकार थी। 1965 से 1972 के बीच अमेरिका ने साउथ कोरिया में लगभग 1 बिलियन खर्च किए। साउथ वियतनाम उसके प्रोडक्ट्स का बड़ा डेस्टिनेशन बन [संगीत] गया। इसके अलावा उसकी कंपनियों को यूएस आर्मी के
11:18
Speaker A
कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स मिलने लगे और अमेरिका ने साउथ कोरिया को विदेशी कर्ज लेने में भी मदद की थी। फिर पार्क ने पहला बड़ा दांव स्टील इंडस्ट्री पर लगाया। लेकिन साउथ कोरिया के पास ना तो रॉ मटेरियल था ना ही टेक्नोलॉजी थी और ना
11:31
Speaker A
डोमेस्टिक मार्केट में डिमांड थी। वर्ल्ड बैंक ने कह दिया यह प्लान फेल हो जाएगा। अमेरिकी बैंक ने लोन देने से मना कर दिया। वेस्टर्न कंपनियों ने भी अपने हाथ पीछे खींच [संगीत] लिए। मगर पार्क पीछे नहीं हटे। वह फिर से जापान के पास गए। जापान ने
11:46
Speaker A
उनको पैसे, टेक्नोलॉजी और इक्विपमेंट से मदद की। इस तरह 1968 में पोहांग आयरन एंड स्टील कंपनी ऑस्को की स्थापना हुई। 1973 में इसने प्रोडक्शन शुरू कर दिया था। यह आगे चलकर दुनिया की सबसे बड़ी स्टील कंपनियों में से एक बनी। अब साउथ कोरिया
12:05
Speaker A
अपने घर में सस्ता स्टील बना रहा था। स्टील इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री का आधार था। इसकी बदौलत साउथ कोरिया ने एक से बढ़कर एक कंपनियां खड़ी की। उसके पीछे की कहानी भी बेहद इंटरेस्टिंग है। 1961 में तख्ता पलट
12:19
Speaker A
के बाद मिलिट्री Honda ने बड़े-बड़े उद्योगपतियों को अरेस्ट करना शुरू किया। इनमें Samsung, Hyundai, LG, Tan जैसी कंपनियों के फाउंडर और चेयरमैन थे। [संगीत] उन पर टैक्स चोरी, अर्बन घूस देने के आरोप थे। पार्क ने उनसे कहा तुम लोगों
12:32
Speaker A
ने भ्रष्ट तरीके से पैसा कमाया है। मैं सबको जेल में डालूंगा और तुम्हारी संपत्ति भी ज्त करूंगा। लेकिन अगर चाहो तो इससे बच सकते हो। उद्योगपतियों ने पूछा लेकिन कैसे? हम कुछ भी करेंगे। आप बस हुक्म कीजिए। फिर पार्क ने अपनी शर्त रखी।
12:46
Speaker A
उन्होंने कहा मैं तुम लोगों को आजाद कर सकता हूं। तुम्हारी कंपनी भी वापस मिल सकती है। लेकिन तुमको वो इंडस्ट्रीज [संगीत] इस्टैब्लिश करनी होंगी जो हम तय करेंगे। तुम्हें पूंजी सरकारी बैंकों से मिलेगी और फॉरेन कंपटीशन से बचाने की
12:57
Speaker A
जिम्मेदारी हमारी रहेगी। उद्योगपतियों के सिर पर तलवार लटकी थी। उस सिचुएशन में भी उनको विनविन वाली डील मिल रही थी। उन्होंने तुरंत हामी भर दी। इस तरह चाय बोल का जन्म हुआ। चायb का मतलब होता है कुलीन वंश। साउथ कोरिया में ये टर्म लेगसी
13:12
Speaker A
बिजनेस फैमिली के लिए इस्तेमाल होता है। जैसे Samsung, LG, Hyundai, SK, लोटे आदि। इन कंपनियों को सरकार से टारगेट मिलता था। उन्हें जरूरत के हिसाब से अलग-अलग सेक्टर्स में काम करने के लिए कहा जाता था। जो टारगेट पूरा कर लेते थे उन्हें
13:25
Speaker A
सस्ता लोन, फॉरेन एक्सचेंज और [संगीत] लाइसेंस आसानी से मिल जाता था। उनको सरकार प्रोटेक्ट भी करती थी। इस दौर में चाय बोल का दायरा तेजी से बढ़ा क्योंकि वही सरकारी टारगेट्स को पूरा करने की स्थिति में थे। जैसे-जैसे सरकार प्लान बनाती थी,
13:39
Speaker A
वैसे-वैसे उनका फोकस बदलता रहता था। इसलिए आप [संगीत] देखेंगे कि साउथ कोरिया में एक ही कंपनी कई सेक्टर्स में काम करती है। जैसे Samsung इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स भी बनाती है और जहाज भी उसका कंस्ट्रक्शन का बिजनेस भी है और इंश्योरेंस का भी।
13:52
Speaker A
Samsung के अस्पताल भी हैं और वे फ्यूनरल पार्लर भी चलाते हैं। इसी तरह LG है। LG को आप टीवी, फ्रिज, वाशिंग मशीन के लिए जानते हैं लेकिन उनका बिजनेस केमिकल से लेकर कॉस्मेटिक्स और रियलस्टेट तक फैला है। Hyundai को कार कंपनी के तौर पर जाना
14:06
Speaker A
जाता है। मगर वे शिपिंग, फाइनेंस और होटल्स के कारोबार में भी हैं। एसके ग्रुप सेमीकंडक्टर चिप्स के लिए पॉपुलर है। लेकिन वे टेलीकॉम, फार्मा, ट्रेडिंग का बिजनेस भी चलाते हैं। खैर, साउथ कोरिया में चाय बोल सिस्टम का असर तुरंत दिखाई
14:20
Speaker A
देने लगा था। 1960 में साउथ कोरिया सिर्फ 33 मिलियन का सामान एक्सपोर्ट करता [संगीत] था। 1969 में आंकड़ा 622 मिलियन तक पहुंच गया था। साउथ कोरिया की जीडीपी औसतन 10% की दर से बढ़ रही थी। लाखों लोगों को नौकरियां मिल रही थी। लोगों की
14:35
Speaker A
इनकम में हर साल तकरीबन 7% की बढ़ोतरी हो रही थी। जंग से उभर रहे एक देश के लिए यह आंकड़ा [संगीत] काफी सुखद था। लेकिन अंदर ही अंदर बहुत कुछ बिखरा हुआ भी था। बेशक तरक्की का खाका खींचा था। लेकिन उनका शासन
14:51
Speaker A
दमन और क्रूरता से भरा था। उनको अपनी आलोचना से नफरत थी। वह फोफिया एजेंसी के जरिए विरोधी नेताओं और [संगीत] आलोचकों पर नजर रखते थे। जेल, टॉर्चर और हत्या आम बात थी। फिर 1972 में पार्क नया संविधान लेकर
15:04
Speaker A
आ गए। इसने डायरेक्ट प्रेसिडेंशियल इलेक्शन का सिस्टम खत्म कर दिया। राष्ट्रपति चुनाव में आम जनता की भागीदारी नहीं बची। इसके अलावा राष्ट्रपति का कार्यकाल चार से बढ़ाकर 6 साल कर दिया गया और टर्म लिमिट भी हटा दी गई। नए संविधान
15:18
Speaker A
ने राष्ट्रपति के इमरजेंसी पावर्स बढ़ा दिए थे। वे जब चाहे संसद को भंग कर सकते थे। जुडिशरी पर भी उनका एकाधिकार हो गया था। इसके बाद तो पार्क में सारी हदें पार कर दी। 1973 में उनकी खुफिया एजेंसी ने
15:31
Speaker A
विपक्षी नेता किम डेजों को होटल से किडनैप कर [संगीत] लिया। वे उनकी हत्या करने वाले थे। लेकिन अमेरिका ने दबाव डालकर उनको बचा लिया। किम डेजों बाद में साउथ कोरिया के राष्ट्रपति बने। बहरहाल पार्क का पर्च कैंपेन बदस्तूर जारी रहा। 1979 आते-आते
15:47
Speaker A
इकॉनमी को झटके लग रहे थे। प्रोटेस्ट और स्ट्राइक्स का देश भर में दायरा बढ़ रहा था। विदेशी अखबारों में पार्क की आलोचनाएं छपने लगी थी। फिर 26 अक्टूबर 1979 की तारीख आई। राष्ट्रपति पार्क अपने तीन सबसे खास लोगों से डिनर पर मिले। यह लोग
16:03
Speaker A
[संगीत] थे चीफ बॉडीगार्ड चाचीचो, चीफ ऑफ स्टाफ किम केवोन और खुफिया एजेंसी के डायरेक्टर किम चेग। उनके बीच प्रोटेस्ट खत्म कराने को लेकर चर्चा हो रही थी। तभी बातचीत तल्ख हो गई। फिर किम चेग्यू ने राष्ट्रपति पार्क और उनके बॉडीगार्ड को
16:19
Speaker A
गोली मार दी। कुछ ही देर में दोनों की मृत्यु हो गई। पार्क का 18 साल का शासन डिनर टेबल पर समाप्त हो चुका था। पार्क की मौत के बाद साउथ कोरिया में डेमोक्रेसी की उम्मीद जग रही थी। लेकिन दिसंबर 1979 में
16:31
Speaker A
एक और मेजर जनरल ने एंट्री ले ली। उसका शासन और भी क्रूर था। हालांकि इसी क्रूरता ने साउथ कोरिया के लोगों को जीव भी बना दिया। चुनू आर्मी में मेजर जनरल थे। दिसंबर 1979 में उन्होंने मिलिट्री का कंट्रोल अपने
16:49
Speaker A
हाथों में ले लिया। क्योंकि मिलिट्री हुटा के पास पूरे देश का कंट्रोल था। इसलिए चुनवान साउथ कोरिया के डिफक्टो लीडर बन गए। मई 1980 में उन्होंने देश भर में मार्शल लॉ लगा दिया। यूनिवर्सिटीज को बंद कर दिया और विपक्षी नेताओं को जेल भेजा
17:03
Speaker A
जाने लगा। इनमें से एक किम देजंग भी थे। वो वांगचू प्रांत से आते थे। वहां के लोग उनको खूब पसंद करते थे। उनकी गिरफ्तारी के अगले ही दिन वांगजुक प्रांत के लोग सड़कों पर उतर आए। यह प्रोटेस्ट कई दिनों तक चला।
17:16
Speaker A
फिर एक रात चंद्रवान ने आर्मी भेज दी। उन्होंने गोली बंदूक के जोर पर प्रोटेस्ट खत्म करा दिया। इसमें 1000 से ज्यादा लोग मारे गए थे। उस वक्त तो लोग चुप रहे लेकिन अंदर ही अंदर गुस्सा उगलता रहा। फिर 1987
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Speaker A
का साल आया। साउथ कोरिया की इकॉनमी अपनी रफ्तार से बढ़ रही थी और इसी बीच सियोल को 1988 के ओलंपिक्स की मेजबानी मिलती है। लेकिन दूसरी तरफ चुन रुहान की तानाशाही बेलगाम होने लगी थी। वह खुद को बेताज
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Speaker A
बादशाह समझने लगे थे। फिर कुछ ऐसी घटनाएं घटी जिसने उनके अहंकार को चूर कर दिया। जनवरी 1987 में पुलिस के टॉर्चर में सियोल यूनिवर्सिटी के एक स्टूडेंट की मृत्यु हो गई। यह पहला ट्रिगर [संगीत] पॉइंट था। इसके खिलाफ छिटपुट प्रदर्शन शुरू हुए। फिर
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Speaker A
जून में पुलिस के हमले में एक और स्टूडेंट की जान चली गई। इसके बाद तो पूरा देश भड़क गया। लोगों के सब्र का बांध टूट चुका था। उन्होंने आर्या पार्क का मन बना लिया था। प्रदर्शनकारियों की संख्या लगातार बढ़ती
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Speaker A
जा रही थी। सरकार के पास अंतिम विकल्प आर्मी भेजने का था। लेकिन इसमें हजारों लोग मर सकते थे। अगले साल में ओलंपिक्स होने वाले थे इसलिए पूरी दुनिया की नजर भी साउथ कोरिया पर थी। आखिरकार 29 जून 1987
18:24
Speaker A
को सरकार झुक गई। उसको डायरेक्ट प्रेसिडेंशियल इलेक्शन का ऐलान करना पड़ा। साथ ही साथ संविधान में सुधार करने का वादा भी किया गया था। इसके बाद लोगों को फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन का हक मिला। पॉलिटिकल कैदियों को रिहा किया गया।
18:38
Speaker A
पॉलिटिकल पार्टियों से पहरा हटाया गया। संसद की शक्तियां बढ़ाई गई। इन सबके अलावा प्रेसिडेंट के लिए एक टर्न की लिमिट लगा दी गई। साउथ कोरिया में कोई भी व्यक्ति एक बार से ज्यादा राष्ट्रपति नहीं रह सकता है। [संगीत] इन सुधारों के बाद दिसंबर
18:51
Speaker A
1987 में चुनाव कराए गए। उसको साउथ कोरिया का पहला डेमोक्रेटिक इलेक्शन माना जाता है। यह चुनाव चंग जुवान की पार्टी के नेता रोते ने जीता था। वो भी चुंग की तरह मिलिट्री जनरल थे। लेकिन समय आने पर उन्होंने चुपचाप कुर्सी छोड़ दी। फिर 1993
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Speaker A
में किम योंग सेम राष्ट्रपति बने। वो सही मायनों में साउथ कोरिया [संगीत] के पहले सिविलियन प्रेसिडेंट थे। तब से अब तक पावर का पीसफुल ट्रांसफर होता आया है। हालांकि दिसंबर 2024 में इसमें एक छोटी सी रुकावट आ गई थी [संगीत] जब राष्ट्रपति यून सुकयोल
19:21
Speaker A
ने आधी रात को मार्शल लॉ लगा दिया था। लेकिन 6 घंटे के अंदर संसद ने उनका फैसला पलट दिया। फिर उनको महाभियोग लगाकर कुर्सी से हटा दिया गया। इसके बाद उन पर राजद्रोह का मुकदमा चलाया गया और उम्र कैद की सजा
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Speaker A
भी सुनाई गई। जब मार्शल लॉ की घोषणा हुई थी उसके तुरंत बाद हजारों लोग सड़कों पर उतर आए थे। साउथ कोरिया ने बरसों तक तानाशाही झेलने के बाद डेमोक्रेसी जीती थी। इसको बचाने के लिए लड़ने भिड़ने को तैयार था। जब आम जनता अपने अधिकारों के
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Speaker A
लिए लड़ना सीख लेती है, उस दिन लोकतंत्र अपने आप मजबूत हो जाता है। साउथ कोरिया ने एक कर दिखाया [संगीत] है। यह उसकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। आज का साउथ कोरिया विकास के ज्यादातर मानकों पर खरा
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Speaker A
उतरता है। इकॉनमी में वह दुनिया के बड़े-बड़े देशों को टक्कर दे रहा है। लेकिन बीच में एक वक्त ऐसा भी आया जब लोगों को शादी की अंगूठी तक दान करनी पड़ी थी। 1990 का दशक साउथ कोरिया के लिए अच्छा
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Speaker A
गुजर रहा था। वहां डेमोक्रेटिक इलेक्शन हो रहे थे। पावर का पीसफुल ट्रांसफर हो रहा था। इकॉनमी 8 से 9सदी की रफ्तार से बढ़ रही थी। 1996 में वह विकसित देशों के क्लब में शामिल हो गया था। लेकिन जुलाई 1997
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Speaker A
में एशियन फाइनेंशियल क्राइसिस शुरू हो गई। इसका असर साउथ कोरिया में भी पहुंचा। वहां के बिजनेस घरानों ने भारी भरकम कर्ज ले रखा था। क्राइसिस के वक्त देनदारों ने कर्ज आगे बढ़ाने से मना कर दिया। फिर विदेशी इन्वेस्टर्स अपना पैसा निकालने
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Speaker A
लगे। साउथ कोरिया से फॉरेन रिजर्व खत्म हो रहा था जिसके चलते इंपोर्ट करना मुश्किल हो गया। कई कंपनियां दिवालियां होने की कगार पर पहुंच गई। लोगों की नौकरियां जाने लगी। तब साउथ कोरिया को इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड का सहारा लेना पड़ा। लेकिन आईएमएफ ने
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Speaker A
कुछ विवादित शर्तें थूपी थी। इससे लोगों को गहरा धक्का लगा। फिर जनवरी 1998 में सिविक ग्रुप्स और बैंकों ने मिलकर गोल्ड कलेक्शन मूवमेंट चलाया। [संगीत] दरअसल साउथ कोरिया में लोगों के पास तकरीबन $20 बिलियन डॉलर का सोना था। अगर लोग यह सोना
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Speaker A
सरकार को देते तो उसको बेचकर फॉरेन करेंसी जुटाई जा सकती थी। इस कैंपेन में 35 लाख लोगों ने हिस्सा लिया। लोगों ने शादी की अंगूठी और मेडल्स तक सौंप दिए। कई लोगों ने बदले में एक भी पैसा नहीं लिया था। इस
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Speaker A
कैंपेन से 227 टन सोना इकट्ठा हुआ था। उन दिनों इसकी कीमत 2 बिलियन से थोड़ी ज्यादा थी। यह फाइनेंशियल क्राइसिस से निपटने के लिए तो पर्याप्त नहीं था, लेकिन इसने साउथ कोरिया के लोगों की जीविष्या को जरूर दिखाया था। फाइनेंसियल क्राइसिस के बाद
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Speaker A
साउथ कोरिया ने तेजी से इकोनमिक रिफॉर्म्स किए। उसकी अर्थव्यवस्था बहुत जल्द पटरी पर लौट आई थी। 2001 तक उसने आईएमएफ का कर्ज चुका दिया था। तब से उसके विकास की रफ्तार धीमी नहीं हुई है। इस सफर को कुछ डाटा
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Speaker A
पॉइंट से साझते हैं। 2026 में साउथ कोरिया की जीडीपी 2 ट्रिलियन डॉलर को छू सकती पर कैपिटा इनकम में वह जापान से भी आगे निकल गया है। 1960 में जिस साउथ कोरिया का टोटल एक्सपोर्ट 33 मिलियन था, वह 2025 में 700
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Speaker A
बिलियन को पार कर गया। इस साल अकेले जून में उसने 100 बिलियन डॉलर से ज्यादा का एक्सपोर्ट किया है। इसमें लगभग 44% हिस्सेदारी सेमीकंडक्टर्स की है। 2026 में साउथ कोरिया की ग्रोथ रेट 3% के आसपास रहने की उम्मीद है। विकसित देशों के लिए
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Speaker A
काफी ऊंचा माना जाता है। इसी साल जापान की ग्रोथ रेट 1.1% और अमेरिका की 1.5% रहने वाली है। साउथ कोरिया में 1% से भी कम लोग एक्सट्रीम पावर्टी में रहते हैं। वहां बेरोजगारी दर 3% से भी कम है और औसत आयु
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Speaker A
84 बरस है। इन सबके अलावा केपॉप साउथ कोरिया का सॉफ्ट पावर बनकर उभरा है। जो काम हॉलीवुड ने अमेरिका के लिए किया वह केपॉप साउथ कोरिया के लिए कर रहा है। इसकी दीवानगी लगातार बढ़ रही है। कोरियन म्यूजिक फिल्म्स, टीवी सीरीज, बैंड्स पूरी
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Speaker A
दुनिया में छा रहे हैं। केपॉप सिर्फ कल्चरल इमेज मेकिंग नहीं है। इससे अच्छी खासी आमदनी [संगीत] भी हो रही है। 2025 में एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री ने साउथ कोरिया की इकॉनमी में लगभग $5 बिलियन का योगदान दिया था। केपॉप ने एक और चीज की। उसने
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Speaker A
साउथ कोरिया की एक अल्ट्रा मॉडर्न और फीचरिस्टिक इमेज [संगीत] दुनिया को दिखाई है। लेकिन इस तस्वीर में कई दरारें भी छिपी हैं। उनको समझे बिना साउथ कोरिया की कहानी अधूरी रह जाएगी। साउथ कोरिया एक साथ कई असाधारण चुनौतियों
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Speaker A
से जूझ रहा है। उनकी पहली बड़ी चुनौती है जनसंख्या। [संगीत] किसी भी देश की लोकल पापुलेशन को स्थिर रखने के लिए 2.1 का फर्टिलिटी रेट जरूरी होता है। फर्टिलिटी रेट माने एक महिला औसतन कितने [संगीत] बच्चों को जन्म दे रही
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Speaker A
है। लेकिन साउथ कोरिया का फर्टिलिटी.80 है। यह जरूरी औसत से 60% कम है। इसका नुकसान लॉन्ग टर्म में दिखेगा। 2020 में साउथ कोरिया की पॉपुलेशन 5 करोड़ 18 लाख तक पहुंची थी। उसके बाद से लगातार घट रही है क्योंकि बुजुर्ग लोगों की मृत्यु हो
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Speaker A
रही है। लेकिन नए बच्चे पैदा नहीं हो रहे। अगर यही रफ्तार चलती रही तो 2072 तक साउथ कोरिया की पॉपुलेशन 3.5 करोड़ तक आ जाएगी। उसमें भी बुजुर्गों की संख्या ज्यादा होगी। उनके लिए पेंशन और हेल्थ केयर की
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Speaker A
व्यवस्था करनी होगी। यानी वर्क फोर्स कम होता जाएगा [संगीत] लेकिन एक्स्ट्रा खर्च बढ़ेगा। इसका असर इकॉनमी पर पड़ेगा और अंत में पूरा [संगीत] देश कोलैप्स हो सकता है। साउथ कोरिया की सरकार इसको नेशनल इमरजेंसी की तरह देख रही
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Speaker A
है। उसने बर्थ रेट बढ़ाने के लिए 200 बिलियन डॉलर से ज्यादा खर्च किए हैं लेकिन उन्हें कोई खास सफलता नहीं [संगीत] मिली है। बच्चा ना करने की वजह भी कम दरावनी नहीं है। साउथ कोरिया में घरों के दाम
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Speaker A
आसमान छू रहे हैं। पढ़ाई लिखाई का खर्च बढ़ रहा है। कंपटीशन की वजह से लोगों को देर तक काम करना पड़ता है। इसके अलावा बच्चा [संगीत] होने के बाद महिलाओं के लिए करियर में आगे बढ़ना मुश्किल हो जाता है।
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Speaker A
इसीलिए नौजवान पीढ़ी बच्चा पैदा करने को बोझ की तरह देखने लगी है। साउथ कोरिया की दूसरी चुनौती जियोपॉलिटिक्स से जुड़ी है। साउथ कोरिया ने बरसों से अमेरिका और चीन दोनों के साथ संतुलन बना रखा है। चीन उसका [संगीत] सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है।
24:56
Speaker A
जबकि डिफेंस के लिए वो अमेरिका पर निर्भर है। लंबे समय से इक्वेशन ठीक चल रहा था। लेकिन डॉन्ड ट्रंप के आने के [संगीत] बाद इसमें रुकावट पैदा होने लगी है। ट्रंप का कहना है कि चीन को छोड़कर हमारे यहां
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Speaker A
निवेश करो। लेकिन साउथ कोरिया के लिए ऐसा करना आसान नहीं है। चीन में ना सिर्फ उसकी अहम [संगीत] फैक्ट्रियां हैं बल्कि चीन का दखल नॉर्थ कोरिया में भी है। यह रिश्ता नॉर्थ कोरिया के साथ कॉन्फ्लिक्ट की सिचुएशन में [संगीत] काम आ सकता है।
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Speaker A
डॉनल्ड ट्रंप ने पिछले कुछ समय में साउथ कोरिया को कई बार टारगेट किया। उन्होंने पहले तो उसके प्रोडक्ट्स पर 25% टारक लगाया फिर उसको ईरान वॉर में शामिल होने के लिए कहा। [संगीत] लेकिन साउथ कोरिया इसके लिए तैयार नहीं
25:31
Speaker A
हुआ। इसके बाद ट्रंप ने साउथ कोरिया के साथ जॉइंट मिलिट्री डील्स कम करने का आदेश दिया है। एक तरफ ट्रंप साउथ कोरिया को अलग-थलग कर रहे हैं। दूसरी तरफ उन्होंने नॉर्थ कोरिया से बातचीत की पहल की है। यह
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Speaker A
साउथ कोरिया के लिए खतरे की घंटी है। साउथ कोरिया अभी तक डिफेंस के लिए अमेरिका पर निर्भर रहा है। अगर ट्रंप का यही रवैया जारी रहा तो उसको अमेरिका से सोचना पड़ सकता है। अब तीसरी चुनौती की बात यह है
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Speaker A
चाइबो सिस्टम। जिस सिस्टम ने साउथ कोरिया को तरक्की का स्वाद चखाया व उसको पीछे भी धकेल रहा है। चाहे बोल का लगभग हर सेक्टर में दबदबा है। उनके पास कैपिटल है। बैंक और सरकारी सिस्टम उन्हीं को सपोर्ट करते
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Speaker A
हैं। जैसे Samsung का इतना प्रभाव है कि लोग साउथ कोरिया को रिपब्लिक ऑफ Samsung भी कहते हैं। चाहे बोले एक तरह से साउथ कोरिया की इकॉनमी को कंट्रोल कर रहे हैं। इसीलिए कई बार उनके गुनाहों को नजरअंदाज भी करना पड़ता [संगीत] है। Samsung हो, LG
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Speaker A
हो, Hyundai हो इन कंपनियों के मालिक रबन और भ्रष्टाचार के मामलों में फंस चुके हैं। उन्हें सजा भी हुई है। लेकिन सरकार उनको जेल में नहीं रहने देती है। क्योंकि अगर एक भी कंपनी डूबी तो पूरे देश पर खतरा
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Speaker A
आ सकता है। दूसरी तरफ छोटी कंपनियों या स्टार्टअप्स को अक्सर ना सुनना पड़ता है। अगर कोई स्टार्टअप अपनी जगह बना भी ले तब भी उसको टेकओवर का खतरा सताता रहता है। साउथ कोरिया की चौथी चुनौती है सोसाइटल [संगीत] प्रेशर। साउथ कोरिया में हर कदम
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Speaker A
पर कंपटीशन का माहौल है। इसकी शुरुआत बचपन से ही हो जाती है। अच्छा स्कूल मिलेगा तभी अच्छी यूनिवर्सिटी में एडमिशन होगा। तभी अच्छी नौकरी मिलेगी। उसी से स्टार्टअप सिंबल भी डिसाइड होता है। फिर नौकरी में अलग तरह की रैट रेस [संगीत] होती है।
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Speaker A
लोगों को लगता है अगर वे समय से घर चले गए तो उनका प्रमोशन रुक सकता है। इससे बचने के लिए वे देर तक काम करते हैं। इससे बर्न आउट की समस्या होती है। [संगीत] इससे भी बुरा हाल एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री का है। हर
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Speaker A
वक्त गला काट प्रतियोगिता चलती है। स्टार्स पर लगातार परफॉर्म करने का दबाव रहता है। इसके अलावा दर्शक उनसे अलग-अलग तरह की अपेक्षाएं [संगीत] रखते हैं। जब स्टार्स उन पर खरे नहीं उतरते तो उनको बुरी तरह बुली किया जाता है। इसकी वजह से
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Speaker A
कई सितारे अपनी जान तक ले चुके हैं। साउथ कोरिया अमीर तो बन गया लेकिन एक बेहतर समाज बनाने में वो पीछे छूट गया है। आप साउथ कोरिया के बारे में क्या सोचते हैं?
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Speaker A
कमेंट करके हमें जरूर बताइएगा। इस वीडियो को यहीं पर समाप्त करते हैं। अगर वीडियो पसंद आया हो तो इसको लाइक और शेयर करते रहिए। हमारे चैनल क्यूबिस्तान को सब्सक्राइब भी कर लीजिए। यह तमाम जानकारी आपके लिए लेकर आए हैं मेरे साथी अभिषेक
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Speaker A
कुमार। नए वीडियो में नई कहानी के साथ फिर आपसे मिलूंगी। तब तक के लिए मुझे विदा दीजिए। बहुत-बहुत शुक्रिया।
Topics:साउथ कोरियाकोरियन युद्धआर्थिक विकासमिलिट्री शासनपार्क चुहीतानाशाहीजापान मॉडलविदेशी सहायताजनसंख्या संकटकोरिया विभाजन

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