नॉर्थ कोरिया के सुप्रीम लीडर किम जोंग उन की सत्ता, इतिहास और पावर स्ट्रक्चर की गहराई से जानकारी।
Key Takeaways
- नॉर्थ कोरिया की सत्ता पूरी तरह किम परिवार के वंशानुगत नियंत्रण में है।
- सुप्रीम लीडर के पास पार्टी और सेना दोनों पर पूर्ण नियंत्रण होता है।
- कोरिया का विभाजन और कोल्ड वार ने नॉर्थ कोरिया के कम्युनिस्ट शासन को मजबूती दी।
- किम परिवार का कल्ट ऑफ पर्सनैलिटी सत्ता की वैधता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।
- नॉर्थ कोरिया का राजनीतिक सिस्टम चीन और सोवियत संघ के मॉडल से प्रेरित है।
What the video covers
- नॉर्थ कोरिया का राजनीतिक सिस्टम चीन और पुराने सोवियत संघ के कम्युनिस्ट मॉडल से मिलता-जुलता है।
- सुप्रीम लीडर का पद वंशानुगत है और किम परिवार के तीन पीढ़ियों ने इसे संभाला है।
- किम इलसंग ने नॉर्थ कोरिया की स्थापना की और सोवियत संघ के समर्थन से सत्ता में आए।
- किम जोंग उन वर्तमान सुप्रीम लीडर हैं और वे पार्टी और सेना दोनों पर नियंत्रण रखते हैं।
- कोरिया का विभाजन 38वें पैरेलल पर हुआ, जिसके बाद कोल्ड वार के कारण दोनों हिस्सों में टकराव बढ़ा।
- नॉर्थ कोरिया में किम परिवार का कल्ट ऑफ पर्सनैलिटी बेहद मजबूत है, जो सत्ता की वैधता बनाए रखता है।
- सुप्रीम लीडर के पद के साथ-साथ वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया का जनरल सेक्रेटरी पद भी महत्वपूर्ण है।
- नॉर्थ कोरिया की विदेश नीति और सैन्य शक्ति पर किम जोंग उन का प्रभाव व्यापक है।
- इतिहास में जापान के कब्जे और सोवियत- अमेरिकी प्रभाव ने कोरिया के वर्तमान राजनीतिक स्वरूप को आकार दिया।
- वीडियो में नॉर्थ कोरिया की सत्ता संरचना, इतिहास, और किम परिवार की भूमिका विस्तार से समझाई गई है।
Chapters
- 00:00परिचय और नॉर्थ कोरिया का राजनीतिक परिदृश्य
- 00:51नॉर्थ कोरिया के भू-राजनीतिक संबंध
- 01:38चीन और सोवियत संघ के राजनीतिक मॉडल की तुलना
- 02:22किम जोंग उन और सुप्रीम लीडर का पद
- 03:53किम इलसंग का इतिहास और नॉर्थ कोरिया की स्थापना
- 05:12कोरिया का विभाजन और कोल्ड वार का प्रभाव
- 07:56किम परिवार का सत्ता में उदय और कल्ट ऑफ पर्सनैलिटी
- 15:58नॉर्थ कोरिया की वर्तमान सत्ता संरचना और निष्कर्ष
Full Transcript — Download SRT & Markdown
Speaker A
यह नॉर्थ कोरिया है, दुनिया का सबसे सीक्रेटिव देश। इसके सुप्रीम लीडर को हर कोई जानता है। लेकिन उसको चुना कैसे जाता है? उसके पास क्या-क्या शक्तियां हैं?
Speaker A
क्या वो अकेले शासन करता है? या उसकी कोई टीम भी है? और किम जोंग उनको कैसे हटाया जा सकता है? नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम है दिव्याशी सुमरा। पावर बास के दूसरे एपिसोड में आपका बहुत-बहुत स्वागत है।
Speaker A
पहले एपिसोड में हमने चीन का पावर स्ट्रक्चर आपको बताया था। आज के एपिसोड में द हर्मिट किंगडम यानी नॉर्थ कोरिया की कहानी आपको बताएंगे।
Speaker A
नॉर्थ कोरिया का लैंड बॉर्डर सिर्फ तीन देशों से मिलता है। साउथ कोरिया, चाइना और रशिया। साउथ कोरिया उसका जन्मजात दुश्मन है, लेकिन चीन और रूस के साथ उसकी दोस्ती अच्छी है।
Speaker A
नॉर्थ कोरिया ज्यादातर मामलों में इन दोनों पर डिपेंडेंट है और उसकी झलक उसके पावर स्ट्रक्चर में भी दिखती है।
Speaker A
नॉर्थ कोरिया का पॉलिटिकल सिस्टम काफी हद तक आज के चीन और पुराने सोवियत संघ से मेल खाता है। दोनों मामलों में सिंगल पार्टी रूल करती है।
Speaker A
सोवियत संघ में सोवियत कम्युनिस्ट पार्टी शासन चलाती थी। चीन में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीसीपी) आज भी सरकार चला रही है।
Speaker A
वैसे ही नॉर्थ कोरिया में वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया (डब्ल्यूपीके) का वर्चस्व है। कुछ छोटी-छोटी पार्टियां और हैं, लेकिन उन्हें डब्ल्यूपीके की छत्रछाया में काम करना होता है।
Speaker A
क्योंकि सोवियत संघ 1991 में खत्म हो गया था। इस वीडियो में चीन से कंपैरिजन पर ज्यादा जोर रहेगा।
Speaker A
चाइनीस सिस्टम में सीसीपी का जनरल सेक्रेटरी ही देश का सबसे ताकतवर व्यक्ति होता है। आमतौर पर उसी के पास राष्ट्रपति की कुर्सी भी रहती है।
Speaker A
नॉर्थ कोरियन सिस्टम में राष्ट्रपति का पद नहीं है। वहां सबसे ऊंचा पद सुप्रीम लीडर का है।
Speaker A
नॉर्मली सुप्रीम लीडर ही वर्कर्स पार्टी का जनरल सेक्रेटरी होता है। लेकिन अगर उसके पास जनरल सेक्रेटरी की कुर्सी नहीं है, तब भी सुप्रीम लीडर ही सबसे पावरफुल होगा।
Speaker A
अभी किम जोंग उन के पास एक कुर्सी है। नॉर्थ कोरिया के तीसरे सुप्रीम लीडर हैं।
Speaker A
यहां पर एक बेसिक अंतर समझ में आता है। चीन में टॉप लीडर की पोस्ट हेरिडिटरी नहीं है। यानी यह जरूरी नहीं कि शी जिनपिंग का बच्चा अगला राष्ट्रपति बनेगा।
Speaker A
लेकिन नॉर्थ कोरिया में यह फिक्स्ड है। वहां तीनों सुप्रीम लीडर एक ही फैमिली से निकले हैं।
Speaker A
पहले सुप्रीम लीडर किम इलसंग थे। नॉर्थ कोरिया बनाने का क्रेडिट उनको मिलता है। उन्होंने 1948 से 1994 तक राज किया।
Speaker A
उनकी मृत्यु के बाद बेटा किम जोंग इल सुप्रीम लीडर बना। जब किम जोंग इल की मौत हो गई, तभी उनके बेटे किम जोंग उन को कुर्सी मिली।
Speaker A
अब अगला सुप्रीम लीडर वे डिसाइड करेंगे। फिलहाल किम जोंग उन नॉर्थ कोरिया की इंटरनल और एक्सटर्नल पॉलिसीज डिसाइड करते हैं।
Speaker A
वे वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया के चेयरमैन हैं और नॉर्थ कोरिया की फौज उन्हीं को रिपोर्ट करती है।
Speaker A
लेकिन सुप्रीम लीडर का पद आया कहां से? इसका जवाब छिपा हुआ है इतिहास में।
Speaker A
जहां आज नॉर्थ कोरिया और साउथ कोरिया है, पूरा कोरिया एक सल्तनत के अधीन था। फिर 1910 में जापान ने उस पर कब्जा कर लिया।
Speaker A
जापान का शासन 1945 तक चला। सेकंड वर्ल्ड वॉर में हारने के बाद उसको वापस जाना पड़ा।
Speaker A
कोरिया को आजाद कराने में दो देशों की बड़ी भूमिका थी। अमेरिका और सोवियत संघ।
Speaker A
अमेरिकी सेना साउथ की तरफ से बढ़ रही थी, जबकि सोवियत आर्मी नॉर्थ में पहले से मौजूद थी। वे दोनों पूरे कोरिया को अपने कंट्रोल में लेना चाहते थे।
Speaker A
इसके चलते आपस में लड़ाई का खतरा बढ़ रहा था। तब नेशनल ज्योग्राफिक मैगजीन में छपा कोरिया का नक्शा निकाला गया और 38 पैरेलल लाइंस के आगे बाउंड्री खींच दी गई।
Speaker A
इसको सोवियत संघ ने भी मान लिया। दोनों सेनाएं इस लाइन को पार नहीं कर सकती थीं।
Speaker A
लेकिन यह अरेंजमेंट टेंपरेरी था। लोकल सिस्टम को सुचारू बनाने के बाद दोनों को कोरिया से बाहर निकलना था। इसमें दोनों हिस्से का एकीकरण भी शामिल था।
Speaker A
लेकिन यह होता उससे पहले कोल्ड वॉर शुरू हो गया।
Speaker A
अमेरिका और सोवियत संघ पूरी दुनिया में अपना वर्चस्व जमाने की कोशिश करने लगे। यह जद्दोजहद कोरिया में भी देखने को मिली।
Speaker A
साउथ वाले हिस्से में अमेरिका ने अपनी विचारधारा को बढ़ावा दिया, जबकि नॉर्थ में सोवियत संघ ने कम्युनिस्ट सिस्टम को पुश किया।
Speaker A
धीरे-धीरे दोनों इलाकों के बीच खाई बढ़ने लगी। वे एक दूसरे को दुश्मन की तरह देखने लगे।
Speaker A
1948 में यूनाइटेड नेशंस की निगरानी में चुनाव होना था, लेकिन नॉर्थ ने हिस्सा लेने से मना कर दिया।
Speaker A
उन्हें लगा कि साउथ वाले उनके इलाके पर भी कब्जा कर लेंगे। उन्हें कम्युनिस्ट विचारधारा के खात्मे का डर भी था।
Speaker A
जब नॉर्थ ने मना किया तो साउथ वालों ने रिपब्लिक ऑफ कोरिया बना लिया। इसको आज हम साउथ कोरिया के नाम से जानते हैं।
Speaker A
इसके तुरंत बाद नॉर्थ ने भी अपने इलाके को देश घोषित कर दिया। इसका नाम रखा गया डेमोक्रेटिक पीपल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया।
Speaker A
नॉर्थ में सारा तिगड़म सोवियत संघ के इशारे पर हो रहा था, लेकिन वे डायरेक्ट रोल नहीं कर रहे थे।
Speaker A
लोकल लेवल पर उनका एक वफादार जनरल था जो उनसे दिशा निर्देश लेकर सब काम कर रहा था। वो जनरल किम इलसंग था।
Speaker A
किम इलसंग अप्रैल 1912 में पैदा हुए थे, जब उनका देश जापान का गुलाम था।
Speaker A
उनके बचपन में उनके पिता मंचूरिया चले गए थे। यह चीन का पूर्वोत्तर इलाका था। इसकी सीमा कोरियन पेनसुला से मिलती थी।
Speaker A
किम इलसंग का बचपन वहीं पर बीता। 1931 में जापान ने मंचूरिया पर भी कब्जा कर लिया।
Speaker A
तब किम इलसंग जापान के खिलाफ लड़ाई में शामिल हो गए। वे एक कम्युनिस्ट ग्रुप के साथ जापानी सेना पर हमले करने लगे।
Speaker A
लेकिन कुछ समय बाद जापान ने उनके ग्रुप को घेर कर मारना शुरू किया। तब किम इलसंग और उनके साथी भागकर सोवियत संघ पहुंच गए।
Speaker A
सोवियत कम्युनिस्ट पार्टी के साथ उनकी करीबी पहले से थी। वहां उन्हें हाथों-हाथ लिया गया।
Speaker A
उन्हें ओरिला वॉरफेयर और लीडरशिप की ट्रेनिंग दी गई। जब सेकंड वर्ल्ड वॉर शुरू हुआ तो सोवियत आर्मी की तरफ से जंग लड़ने भी गए।
Speaker A
सोवियत लीडर्स उनकी लीडरशिप पॉलिटी से काफी प्रभावित थे। इसीलिए जब नॉर्थ कोरिया को लीड करने की बारी आई, सोवियत संघ ने किम इलसंग पर दाव लगाया था।
Speaker A
सोवियत सपोर्ट से 1946 में नॉर्थ कोरियन वर्कर्स पार्टी बनाई गई। 1949 में उसका विलय साउथ कोरियन वर्कर्स पार्टी के साथ किया गया।
Speaker A
इस विलय से नई पार्टी बनी वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया (डब्ल्यूपीके)। आज भी नॉर्थ कोरिया पर इसी पार्टी का कब्जा है।
Speaker A
जब 9 सितंबर 1948 को नॉर्थ कोरिया एक देश बना, तब किम इलसंग को प्रधानमंत्री की कुर्सी मिली। यह उस वक्त नॉर्थ कोरिया में सबसे बड़ा पद था।
Speaker A
लेकिन बहुत जल्द सोवियत संघ वाला सिस्टम लागू हुआ, जहां कम्युनिस्ट पार्टी ही शासन करती थी।
Speaker A
नॉर्थ कोरिया में ही कम्युनिस्ट पार्टी डब्ल्यूपीके थी। किम इलसंग डब्ल्यूपीके के चेयरमैन बन गए। उन्होंने प्रधानमंत्री का पद भी अपने पास रखा।
Speaker A
1966 में चेयरमैन की पोस्ट को जनरल सेक्रेटरी का बना दिया गया। फिर 1972 में संविधान संशोधन के जरिए राष्ट्रपति की पोस्ट शुरू की गई।
Speaker A
तब किम इलसंग ने प्रधानमंत्री की कुर्सी को छोड़कर राष्ट्रपति की कुर्सी धारण कर ली। हालांकि वह डब्ल्यूपीके के जनरल सेक्रेटरी बने रहे।
Speaker A
फिर 8 जुलाई 1994 को किम इलसंग की मृत्यु हो गई। तब उनके बेटे किम जोंग इल को सुप्रीम लीडर बना दिया गया।
Speaker A
लेकिन वे अक्टूबर 1997 तक पार्टी के जनरल सेक्रेटरी नहीं बने थे। 1994 से 1998 के बीच राष्ट्रपति की कुर्सी खाली थी।
Speaker A
1998 में संविधान संशोधन करके राष्ट्रपति का पद खत्म करा दिया गया। यानी किम जोंग इल लंबे समय तक ऐसे किसी ऑफिशियल पद पर नहीं थे जिससे कि उनको नॉर्थ कोरिया का रूलर कहा जाता।
Speaker A
फिर भी वे डिफेक्टो सुप्रीम लीडर थे। उनकी सत्ता को कोई चुनौती नहीं दे सकता था।
Speaker A
इसकी सबसे बड़ी वजह थी किम फैमिली का कल्ट। इसकी पठकथा नॉर्थ कोरिया के शुरुआती दिनों में ही लिखी जाने लगी थी। इसके लिए तीन बड़े स्तरों पर काम हुआ।
Speaker A
पहले फेज में इतिहास की किताबें बदली गईं। सरकारी इतिहासकारों ने नॉर्थ कोरिया का समय 1912 से शुरू किया, जिस बरस किम इलसंग का जन्म हुआ था।
Speaker A
उन्होंने इसको तथ्य बनाकर पेश किया कि वह स्वर्ग से अवतरित हुए। उनका आदेश देवताओं का आदेश है। उसको नहीं माना तो सब कुछ तबाह हो सकता है।
Speaker A
किम इलसंग की आत्मकथा ने इस प्रोपगेंडा को और विस्तार दिया। एक जगह उन्होंने लिखा, "मैं छः बरस की उम्र में आजादी के लिए लड़ रहा था।"
Speaker A
जब बड़े बुजुर्ग प्रदर्शन करते थे, तब मैं भी उनके साथ जाता था। एक चिल्ड्रन बुक में लिखा है कि जब किम इलसंग बहुत छोटे थे, उन्होंने अपने से कई गुना भारी जापानी लड़के को धक्का मारकर गिरा दिया था।
Speaker A
किम इलसंग की हर कहानी में वही नायक थे। उन्हें जापानी और अमेरिकी साम्राज्यवाद से लड़ने के लिए धरती पर भेजा गया था।
Speaker A
यह प्रोपगेंडा उनकी मृत्यु के बाद भी जारी रहा। किम इलसंग को मरने के बाद इंटरनल प्रेसिडेंट और इंटरनल जनरल सेक्रेटरी घोषित किया गया।
Speaker A
इस तरह उनकी गॉड फादर की छवि बनाई गई। नॉर्थ कोरिया में उनसे ऊपर कोई नहीं हो सकता था।
Speaker A
क्योंकि 1970 के दशक में उन्होंने अपने बेटे किम जोंग इल को उत्तराधिकारी बना दिया था। इसीलिए उनको बड़ी आसानी से स्वीकार कर लिया गया।
Speaker A
यही काम किम जोंग इल ने अपने समय में किया। उनके तीन बेटे थे। सबसे बड़ा था किम जोंग नेम।
Speaker A
वो 2001 में फेक पासपोर्ट पर टोक्यो जाते पकड़ा गया था। 2003 में उसको साउथ कोरिया से निकाल दिया गया।
Speaker A
उनका दूसरा बेटा किम जोंग चुल दिमागी रूप से ठीक नहीं था। फिर बचे किम जोंग उन। किम जोंग इल के पास और कोई विकल्प नहीं बचा था।
Speaker A
लेकिन इसको लेजिटिमेसी कैसे मिलती? इसका माहौल 2006 से ही बनाया जाने लगा था। किम जोंग उ...
Speaker A
सेना में हैं। रिजर्व फोर्स में भी लाखों लोग काम करते हैं। जिन्हें समय पड़ने पर ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। 2010 से 2020 के बीच नॉर्थ कोरिया ने अपनी जीडीपी का 20 से 30% हिस्सा डिफेंस पर खर्च किया
Speaker A
था। 204 में उसने जीडीपी का 16स पैसा डिफेंस के लिए रखा था। नॉर्थ कोरिया में फौज, इंटरनल और एक्सटर्नल सिक्योरिटी के साथ-साथ प्रोपेगेंडा का भी साधन है। नॉर्थ कोरिया के पास न्यूक्लियर हथियार भी हैं। वह लगातार अपनी क्षमता बढ़ा रहा है। इन
Speaker A
हथियारों को ल्च करने का अधिकार सुप्रीम लीडर के पास है। नॉर्थ कोरिया के पावर स्ट्रक्चर से इतना तो आपको समझ आ गया होगा कि सुप्रीम अथॉरिटी किम जोंग उनके पास है। मुल्क की सारी संस्थाएं उनको हष्टपुष्ट बनाने के मिशन में लगी हैं। इस मिशन को
Speaker A
उनके कुछ करीबी लोग लीड करते हैं। यह किम जोंग उनके सबसे खास और वफादार लोग हैं। पहला नाम है कोरों ही। वो स्टेट अफेयर्स कमीशन के वाइस चेयरमैन और संसद की स्टैंडिंग कमेटी के मुखिया हैं। उन्होंने सेंट्रल मिलिट्री कमीशन में भी काम किया
Speaker A
है। उनको नॉर्थ कोरिया का नंबर टू माना जाता है। हालांकि यह कोई ऑफिशियल पोस्ट नहीं है। दूसरा नाम है पाक थे सोन का। वो नॉर्थ कोरिया के प्रधानमंत्री हैं। कैबिनेट को लीड करते हैं। उनकी जिम्मेदारी सुप्रीम लीडर के फैसलों को लागू कराने की
Speaker A
है। तीसरा नाम है किम यूजोंग का। वो किम जोंग उनकी बहन हैं। 2014 से वह पार्टी के प्रोपेगेंडा डिवीजन में काम कर रही हैं। 2021 में उन्हें स्टेट अफेयर्स कमीशन में शामिल किया गया था। चौथा नाम चोई सोनहोई
Speaker A
का है। वो 2022 से नॉर्थ कोरिया के विदेश मंत्री हैं। विदेशी नेताओं के साथ किम की ज्यादातर मीटिंग्स में वो हिस्सा लेती हैं। पांचवें हैं किमसोंग नेम। वो किम के सबसे करीबी सलाहकार हैं। उन्होंने नॉर्थ कोरिया के तीन सुप्रीम लीडर्स के साथ काम
Speaker A
किया है। उनकी जिम्मेदारी चीन के साथ बेहतर संबंध बनाए रखने की है। भले ही लोग आज ताकतवर हो लेकिन कल स्थिति बदल भी सकती है। किम जोंग उनके करीबी लोग अस्थाई हैं। नॉर्थ कोरिया में एक ही चीज स्थाई है। वह
Speaker A
है किम फैमिली का एकाधिकार। संविधान में उन्हें हटाने का कोई प्रावधान नहीं है। किम जोंग उन ने इस पकड़ को और मजबूत बनाया है। इसलिए वही नॉर्थ कोरिया के असली पावर बास हैं। तो, यह थी नॉर्थ कोरिया की
Speaker A
कहानी। इस वीडियो को यहीं पर समाप्त करते हैं। आपको कोई काम की जानकारी अगर इस वीडियो से मिली हो, तो लाइक और शेयर कीजिए। क्यूरिस्तान को सब्सक्राइब करना बिल्कुल मत भूलिएगा। आप अगले एपिसोड में किस देश का पावर स्ट्रक्चर समझना चाहेंगे
Speaker A
हमें कमेंट सेक्शन में जरूर बताइएगा। फिर किसी वीडियो में आपसे मुलाकात होगी। तब तक के लिए विदा लेती हूं। बहुत-बहुत शुक्रिया।
Topics:नॉर्थ कोरियाकिम जोंग उनसुप्रीम लीडरवर्कर्स पार्टी ऑफ कोरियाकोरिया विभाजनकम्युनिस्ट पार्टीकोल्ड वारकिम इलसंगराजनीतिक सिस्टमकल्ट ऑफ पर्सनैलिटी











