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How Norway Turned Every Citizen Into a Millionaire | Norway Country

नॉर्वे ने तेल की कमाई को सही प्रबंधन से हर नागरिक को करोड़पति बनाया और सामाजिक-आर्थिक विकास में मिसाल कायम की।

Key Takeaways

  • तेल की आमदनी को सही प्रबंधन और पारदर्शिता से देश की समृद्धि संभव है।
  • लोकतांत्रिक व्यवस्था और मजबूत संस्थान संसाधन अभिशाप से बचाव के लिए जरूरी हैं।
  • सामाजिक सुरक्षा और मुफ्त सेवाएं जीवन स्तर सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
  • भविष्य की पीढ़ियों के लिए संसाधनों का संरक्षण आवश्यक है।
  • भारत जैसे देश नॉर्वे की आर्थिक और सामाजिक मॉडल से सीख सकते हैं।

What the video covers

  • नॉर्वे का सरकारी पेंशन फंड 2.2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का है, जिससे हर नागरिक करोड़पति बन चुका है।
  • तेल की कमाई के बावजूद नॉर्वे ने तानाशाही, सिविल वॉर और विदेशी दखल से बचकर लोकतांत्रिक व्यवस्था कायम रखी।
  • तेल और गैस के संसाधनों को सही तरीके से मैनेज कर नॉर्वे ने रिसोर्स कर्स से बचाव किया।
  • नॉर्वे की संसद संसदीय लोकतंत्र पर आधारित है, जिसमें राजा के पास सीमित शक्तियां हैं।
  • 1969 में नॉर्वे ने नॉर्थ सी में तेल खोजा, जिसने देश की आर्थिक स्थिति पूरी तरह बदल दी।
  • तेल की कमाई को नॉर्वे ने एक पब्लिक फंड में जमा कर उसका निवेश किया, जिससे स्थायी आय सुनिश्चित हुई।
  • नॉर्वे ने 10 ऑयल कमांडमेंट्स बनाकर तेल संसाधनों पर आम जनता का अधिकार सुनिश्चित किया।
  • सरकार ने सामाजिक सुरक्षा, मुफ्त शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और रोजगार पर विशेष ध्यान दिया।
  • नॉर्वे में प्रेस फ्रीडम, कम क्राइम रेट, और उच्च जीवन गुणवत्ता है।
  • हालांकि नॉर्वे में नस्लीय भेदभाव और सामाजिक असमानताएं भी मौजूद हैं, लेकिन वे अन्य देशों की तुलना में कम हैं।

Answers

Questions about this video

नॉर्वे ने तेल की आमदनी को कैसे प्रबंधित किया?

नॉर्वे ने अपनी तेल और गैस से होने वाली कमाई को एक सरकारी पेंशन फंड में जमा किया, जिसे दुनिया भर में निवेशित किया जाता है। इस फंड से सालाना 3% से अधिक पैसा ही निकाला जाता है ताकि स्थायी आर्थिक विकास सुनिश्चित हो सके।

नॉर्वे में लोकतंत्र और शासन व्यवस्था कैसी है?

नॉर्वे में संवैधानिक राजशाही और संसदीय लोकतंत्र है, जहां राजा के पास नाम मात्र की शक्तियां हैं और असली सत्ता संसद और चुनी हुई सरकार के पास होती है।

भारत नॉर्वे की इस कहानी से क्या सीख सकता है?

भारत नॉर्वे की तरह प्राकृतिक संसाधनों का सही प्रबंधन, पारदर्शिता, सामाजिक सुरक्षा और भविष्य की पीढ़ियों के लिए संसाधनों का संरक्षण सीख सकता है ताकि आर्थिक समृद्धि और सामाजिक विकास सुनिश्चित हो सके।

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Speaker A
एक वेबसाइट है nbm.no। उसके होम पेज पर आपको एक ट्रैकर मिलेगा। यह रियल टाइम में आपको बताता है कि नॉर्वे की सेविंग्स अकाउंट में कितना पैसा है। यह पैसा [संगीत] नॉर्वे के सरकारी पेंशन फंड का है। इस अकाउंट में अभी तक 2.2 ट्रिलियन
00:15
Speaker A
आ चुके हैं। नॉर्वे इस पैसे पर प्रॉफिट भी कमाता है। 2025 में इसको प्रॉफिट में $47 बिलियन मिले थे। अगर इसको नॉर्वे के लोगों में बांटा जाए तो सबको ₹40 [संगीत] लाख मिलेंगे। वो भी सिर्फ प्रॉफिट में। इस
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Speaker A
पैसे के लिए अलग से मेहनत करने की कोई जरूरत नहीं है। यह पैसा उनको बैठे-बठाए मिल रहा है। इससे आपको नॉर्वे की अमीरी का अंदाजा लग गया होगा। इतना ही नहीं ह्यूमन डेवलपमेंट इंडेक्स में नॉर्वे दूसरे [संगीत]
00:42
Speaker A
नंबर पर है। प्रेस फ्रीडम में वो पहले स्थान पर आता है। लोगों को लिमिटेड खर्च में शानदार हेल्थ केयर मिलती है। एजुकेशन सबके लिए फ्री है। क्राइम रेट काफी कम है। औसत उम्र 84 साल के आसपास है। यानी क्वालिटी लाइफ के लिए नॉर्वे से बेहतर कम ही जगहें होंगी। लेकिन नॉर्वे
00:56
Speaker A
हमेशा से ऐसा नहीं था। एक वक्त तक गरीबी, बेरोजगारी और पलायन जैसी समस्याएं यहां पर आम थी। उसे यूरोप के सबसे कम विकसित देशों में गिना जाता था। लेकिन तेल मिलने के बाद उसकी किस्मत अचानक बदल गई। यहां पर आपको
01:10
Speaker A
एक अपवाद भी दिखेगा। दुनिया में जो भी देश तेल की [संगीत] कमाई पर निर्भर करते हैं वहां कुछ चीजें कॉमन मिलेंगी। जैसे तानाशाही, तख्ता पलट, सिविल वॉर, विदेशी दखल आदि। मगर नॉर्वे इन सब से बचा रहा। उसने तेल के साथ और तेल की बदौलत तरक्की
01:25
Speaker A
[संगीत] जारी रखी है। लेकिन नॉर्वे ने ऐसा क्या अलग किया? कैसे वह दुनिया के लिए एक रोल मॉडल बन गया? और भारत इस कहानी से [संगीत] क्या सीख सकता है? तो चलिए शुरू करते हैं। [संगीत] यह यूरोप का मैप है। नॉर्वेस के उत्तरी
01:46
Speaker A
छोर पर बसा हुआ है। इसका ईस्टर्न बॉर्डर स्वीडन, [संगीत] फिनलैंड और रूस से लगा है। बाकी तीनों तरफ समंदर है। नॉर्थ सी, नॉर्वेशियन सी और बैरन [संगीत] सी। नॉर्वे की पापुलेशन लगभग 56 लाख है। तकरीबन 65% आबादी ईसाई है। 25% लोग किसी धर्म को नहीं
02:02
Speaker A
मानते। 5% के आसपास [संगीत] मुस्लिम है। बाकी 5% में दूसरे धर्मों के लोग शामिल हैं। नॉर्वे के पास 3,85,000 वर्ग कि.मी.
02:11
Speaker A
जमीन है। अगर राजस्थान और हरियाणा को जोड़ा जाए तो वो नॉर्वे के बराबर होगा। नॉर्वे की करेंसी को क्रोन कहते हैं। इस समय एक क्रोन का रेट ₹10.30 [संगीत] के आसपास है। नॉर्वे की राजधानी है ऑस्लो। इसी शहर में नोबेल पीस प्राइज सेरेमनी
02:24
Speaker A
होती है। नोबेल प्राइज स्वीडन [संगीत] केमिस्ट और इंजीनियर अल्फ्रेड नोबेल की याद में दिए जाते हैं। अल्फ्रेड नोबेल को डायनामाइट के आविष्कार के लिए जाना जाता है। उन्होंने और भी कई आविष्कार किए थे। इससे उनको काफी कमाई हुई थी। जब उनका
02:37
Speaker A
अंतिम समय आया उन्होंने अपनी वसीयत में लिखा कि उनकी संपत्ति से फंड बनाया [संगीत] जाए। उससे जो ब्याज आता है उस पैसे से मानवता की भलाई के लिए काम करने वाले लोगों को अवार्ड दिए जाए। उन्होंने अवार्ड के लिए पांच कैटेगरीज बताई थी।
02:50
Speaker A
फिजिक्स, केमिस्ट्री, मेडिसिन, साहित्य और शांति। 1968 से इकोनॉमिक्स में भी नोबेल प्राइज दिया जाने [संगीत] लगा। लेकिन यह उनकी वसीयत में नहीं लिखा था। अल्फ्रेड नोबेल जब वसीयत लिख रहे थे तब नॉर्वे और स्वीडन एक [संगीत]
03:02
Speaker A
यूनियन का हिस्सा थे। नोबेल ने चार कैटेगरीज में विजेता ढूंढने की जिम्मेदारी स्वीडन के संस्थानों को दी। मगर शांति वाली कैटेगरी का जिम्मा उन्होंने नॉर्वे की संसद को दिया। उन्हें नॉर्वे का सिस्टम ज्यादा लिबरल और ज्यादा [संगीत]
03:14
Speaker A
डेमोक्रेटिक लगता था। लेकिन 1905 में नॉर्वे और स्वीडन का यूनियन टूट गया। नॉर्वे ने अलग जाने का फैसला कर लिया। हालांकि तब भी नोबेल पीस प्राइज नॉर्वे की कमेट ही देती है। नॉर्वे में संवैधानिक राजशाही और संसदीय लोकतंत्र वाली व्यवस्था एकदम ब्रिटेन जैसी। नॉर्वे में भी राजा
03:28
Speaker A
रानी होते हैं। अभी हेराल्ड पंचम गद्दी पर बैठे हुए हैं। वो हेड ऑफ द स्टेट हैं। लेकिन उनके पास नाम मात्र की ही शक्तियां हैं। असली पावर संसद और चुनी हुई सरकार के पास ही होती है। नॉर्वे की संसद का नाम है
03:40
Speaker A
स्टॉटिंग। इसमें 169 मेंबर्स होते हैं। इनका चुनाव हर 4 साल में होता है। जिस भी पार्टी या गठबंधन [संगीत] के पास संसद में बहुमत होता है, वह सरकार बनाती है और उसका नेता देश का प्रधानमंत्री बनता है। यह
03:52
Speaker A
कुर्सी फिलहाल योनास गर्स के पास है। यह तो हो गए बेसिक फैक्ट्स। अब तेल वाली कहानी पर चलते हैं। नॉर्वे के साउथ में नॉर्थ सी है। पुराने समय में इसको खतरनाक तूफानों और अच्छी मछलियों के लिए जाना जाता था। नॉर्वे के आसपास दो और समंदर
04:06
Speaker A
हैं। उनकी तुलना में नॉर्थ सी ज्यादा मुफीद था। सदियों से नॉर्वे की इकॉनमी शिपिंग और फिशिंग पर टिकी हुई थी। इस लिहाज से नॉर्थ सी उसकी लाइफ लाइन था। तब किसी ने यह नहीं सोचा था कि इस विकराल
04:18
Speaker A
समंदर में दूसरा खजाना भी हो सकता है। लेकिन 1959 में कहानी बदलने लगी। उस साल नीदरलैंड्स में नेचुरल गैस का एक बड़ा रिजर्व मिलता है। नीदरलैंड्स का वेस्टर्न बॉर्डर नॉर्थ सी से लगा हुआ है। वहां गैस मिला तो लोगों की उम्मीद जग गई। उन्हें
04:32
Speaker A
लगा कि नॉर्थ सी में तेल भी मिल सकता है। इसके बाद इंटरनेशनल तेल कंपनियों में एक्सप्लोरेशन लाइसेंस लेने की होड़ लग गई। लेकिन यहां पर एक दिक्कत थी। नॉर्थ सी किसी एक देश की सीमा में नहीं था। उसका
04:43
Speaker A
दायरा कई देशों तक फैला हुआ था। इसलिए उन्होंने बातचीत करके मेडियन लाइन खींची और उसके बेसिस पर नॉर्थ सी को आपस में बांट लिया। सबसे बड़ा समझौता 1965 में ब्रिटेन और नॉर्वे के बीच हुआ था। उन्होंने तय किया कि जिसके इलाके में जो
04:58
Speaker A
भी रिसोर्सेज मिलेंगे उस पर उस देश का पूरा हक होगा। 1960 के दशक में तेल कंपनियों ने एक्सप्लोरेशन में करोड़ों डॉलर्स लगाए। लेकिन उनकी कोशिश लगातार फेल हो रही थी। उन्हें इक्कादुक्का कुएं मिले थे। लेकिन उनमें इतना तेल नहीं था कि बड़े
05:13
Speaker A
पैमाने पर बिजनेस किया जा सके। इसके चलते तेल कंपनियों का धैर्य चूक रहा था। नॉर्वे वाले सेक्टर में अमेरिकी कंपनी फिलिप्स पेट्रोलियम काम पर लगी हुई थी। उसके इंजीनियर्स ने 30 से ज्यादा जगहों पर ड्रिलिंग की थी, लेकिन कहीं भी तेल नहीं
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Speaker A
मिला था। 1969 आते-आते कंपनी ने हार मान ली। उन्होंने डिसाइड किया कि एक और बार कोशिश करेंगे और अगर इस बार भी कुछ नहीं मिला तो काम बंद कर दिया जाएगा। दिसंबर 1969 में उन्होंने नॉर्वे में आखिरी बार
05:41
Speaker A
ड्रिलिंग शुरू की और फिर चमत्कार हो गया। अंतिम कोशिश में उन्हें 3 बिलियन बैरल कच्चे तेल का भंडार मिला था। यह इलाका नॉर्वे के तट से 320 कि.मी. दूर था। इस ऑयल फील्ड को नाम दिया गया एककोफिस। एककोफिस से आज भी तेल निकाला जा रहा है।
05:56
Speaker A
यह नॉर्वे की इनकम का एक बड़ा सोर्स बन चुका है। बाद के बरसों में नॉर्थ सी में तेल और गैस के और भी कुएं मिले। इसने नॉर्वे को दुनिया के सबसे अमीर देशों में एक बना दिया। आज के दिन नॉर्वे कच्चे तेल
06:07
Speaker A
का 12वां सबसे बड़ा प्रोड्यूसर है। तेल एक्सपोर्ट करने के मामले में वह आता है सातवें नंबर पर। नेचुरल गैस में भी नॉर्वे दुनिया के टॉप 10 देशों में शामिल है। यूरोप को सबसे ज्यादा पीएनजी नॉर्वे से ही मिलती है। कमाई की बात करें तो 1969 से
06:20
Speaker A
2025 के बीच नॉर्वे तेल और गैस से लगभग 1.5 ट्रिलियन से ज्यादा कमा चुका है। इसको नॉर्वे की पपुलेशन के रेश्यो में देखेंगे तो यह बहुत ज्यादा है। इतना पैसा किसी भी नॉर्मल देश का दिमाग खराब कर सकता है।
06:31
Speaker A
इसने किया भी है। यहीं पर नॉर्वे की कहानी अलग हो जाती है। नॉर्वे की कहानी अलग क्यों है? यह समझने के लिए आपको एक पैटर्न पहले समझना होगा। आपने रिसोर्स कर्स का नाम सुना होगा। जब संसाधन अभिशाप बन जाते
06:44
Speaker A
हैं। जब किसी देश के पास नेचुरल रिसोर्सेज से पैसा आता है तो क्या होता है? मान लीजिए किसी देश को तेल का बहुत बड़ा भंडार मिल गया। अब [संगीत] तेल की जरूरत तो सबको है। इसकी डिमांड हमेशा रहती है। इसलिए
06:56
Speaker A
बैठे-बठाए अंधाधुंध पैसा आने लगा। जिसके कारण विदेशी सामान सस्ता और लोकल सामान महंगा लगने लगा। नतीजा यह हुआ कि लोकल उद्योग धंधे, खेती और टूरिज्म कमजोर पड़ने लगे। लेकिन तब तक सरकार का फोकस दूसरे सेक्टर से हट [संगीत] चुका है क्योंकि
07:12
Speaker A
उसको आसान पैसे की लत लग चुकी है। धीरे-धीरे तेल की कमाई बाकी इनकम सोर्सेस पर भारी पड़ने लगी। अब सरकार टैक्स वसूलने पर भी ध्यान नहीं दे रही है। जबकि पहले टैक्स के पैसे से ही सरकार चलती थी। अब
07:24
Speaker A
आसान पैसा आ रहा है तो बेहिसब खर्चा भी हो रहा है। लेकिन यह बेखयाली तभी तक ठीक रहती है जब तक तेल की कीमतें ऊंची हो। जैसे ही तेल के दाम कम हुए या प्रोडक्शन कम हुआ तो पूरा सिस्टम कोलैप्स होने लगता है।
07:36
Speaker A
क्योंकि दूसरा इनकम सोर्स नहीं बचता। ऐसे में सरकार चलाना तब मुश्किल हो जाता है। इसके बाद करप्शन का मसला आता है। रिसोर्सेज का फायदा तभी तक मिलता है जब तक आप पावर में है। इसलिए [संगीत] नेता कब्जा बनाए रखने के लिए गबन करते
07:49
Speaker A
हैं। वे हमेशा सिस्टम को सेट करने की कोशिश में लगे रहते हैं। वे साम दाम दंड भेद की नीति अपनाते हैं। बस इसलिए कि उनकी कुर्सी बची रहे और यह जद्दोजहद हमेशा चलती रहती है। इसमें कई बार हिंसा भी होती है।
08:01
Speaker A
एक बार हिंसा हुई तो देश लूप में फंस [संगीत] जाता है। फिर तख्ता पलट विद्रोह सिविल वॉर आम हो जाते हैं। ऐसे माहौल में तानाशाहों को पनपने का मौका भी मिल जाता है। तीसरा खतरा आता है विदेशी दखल का। जो
08:12
Speaker A
भी ताकतवर देश हुए हैं उन्होंने नेचुरल रिसोर्सेज पर कंट्रोल रखने की भरसक कोशिश की है। चाहे वे रिसोर्सेज दुनिया में कहीं भी [संगीत] हो। अगर संसाधन किसी कमजोर देश में मि
08:25
Speaker A
ठीक से डील नहीं कर पाई तो विदेशी दखल का खतरा बढ़ जाता है। इन [संगीत] सबके बीच आम लोग ही हैं जो पिसते रहते हैं। रिसोर्सेज का फायदा सरकार के करीबी लोग उठाते हैं लेकिन जब नुकसान उठाने की बारी आती है तब
08:36
Speaker A
आम लोगों को आगे कर दिया जाता है। यह पैटर्न पिछले कई दशकों से चला आ रहा है। इराक [संगीत] लीबिया, वेनेजुला, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, इक्वेटोरियल गिनी जैसे देश इसके बड़े उदाहरण हैं। नॉर्वे को ऐसी अनहोनी का अंदेशा पहले से था। इसीलिए 1971 में संसद
08:52
Speaker A
ने पेट्रोलियम सेक्टर को रेगुलेट करने के 10 सिद्धांत बनाए। इन्हें 10 ऑयल कमांडमेंट्स कहते हैं। इसमें कहा गया कि नॉर्वे के नेचुरल रिसोर्सेज पर आम लोगों का हक होगा। पेट्रोलियम सेक्टर को नॉर्वे की सरकार कंट्रोल करेगी। किसी विदेशी
09:04
Speaker A
कंपनी को हावी नहीं होने दिया जाएगा। इसके अलावा सरकार ने सरकारी कंपनी स्टेट ऑयल बनाई। उसको मैंडेट दिया गया कि नॉर्वे के लोगों को ट्रेनिंग दो और उन्हें पूरी इंडस्ट्री चलाने के लिए तैयार करो। सभी पार्टियों के नेता इससे सहमत थे। उन्होंने
09:17
Speaker A
वादा किया कि इस मुद्दे पर कभी राजनीति नहीं करेंगे और वे वादा निभा भी रहे हैं। हालांकि एहतियात बरतने के बावजूद कुछ गलतियां हुई। नॉर्वे ने तेल से आने वाला पैसा बेतहाशा खर्च किया। उसने इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर किया। फिर लोगों के
09:31
Speaker A
टैक्स में कटौती की। पैसा आया तो लोगों की इनकम भी [संगीत] बढ़ी। उन्होंने जमकर लोन लेना शुरू कर दिया। नौजवान पीढ़ी ने ऑयल सेक्टर को प्रायोरिटी बना लिया था। वे दूसरे सेक्टर्स में काम नहीं करना चाहते थे। कुछ समय तक तो यह ठीक चला। लेकिन अंदर
09:43
Speaker A
ही अंदर इकॉनमी को नुकसान हो रहा था। नॉर्वे की फिशिंग इंडस्ट्री कमजोर हो रही थी। लोकल फैक्ट्रियां बंद हो रही थी। कुछ लोग तेल पर निर्भर होने लगे थे। 86 में नॉर्वे को एक बड़ा झटका लगता है। उस साल
09:54
Speaker A
कच्चे तेल की कीमत घटकर आधी रह जाती है। इसका सीधा असर सरकारी खजाने पर पड़ता है। कमाई अचानक से घट जाती है। नॉर्वे की करेंसी कमजोर पड़ने लगती है। जॉब्स जाने लगते हैं। इसके अलावा बैंकों को भी भारी
10:06
Speaker A
नुकसान होता है। जब तेल से अच्छा खासा पैसा आ रहा था। उन्होंने खूब लोन बांटे थे। उन्हें उम्मीद थी कि आसानी से रिटर्न आ जाएगा लेकिन क्राइसिस के कारण उनकी हालत खराब हो गई। तब सरकार को उन्हें बचाना
10:19
Speaker A
पड़ा। इसमें भी सरकारी खजाने से पैसा लगा था। इसने नॉर्वे को सोचने के लिए मजबूर कर दिया था। उस वक्त सरकार को समझ आया कि तेल और गैस लिमिटेड मात्रा में है। इससे होने वाली कमाई भी इसलिए लिमिटेड होगी। अगर समय
10:32
Speaker A
रहते इनको नहीं बचाया गया तो आगे और बड़ी मुसीबत आ सकती है। यह आने वाली पीढ़ी के साथ घोर अन्याय होगा और इसी को ध्यान में रखकर 1990 में नॉर्वे ने गवर्नमेंट पेट्रोलियम फंड एक्ट पास [संगीत] किया। इस
10:43
Speaker A
कानून ने कहानी का रुख हमेशा के लिए बदल दिया। इस एक्ट के तहत सरकार ने एक सेविंग्स फंड बनाया। इसका नाम है गवर्नमेंट पेंशन फंड ग्लोबल। इसको ऑल फंड भी कहते हैं। तय यह हुआ कि सरकार को तेल
10:55
Speaker A
और गैस से जो इनकम होगी उसे इस फंड में जमा किया जाएगा और फिर उस पैसे को दुनिया भर में इन्वेस्ट किया जाएगा। यह किसी एक व्यक्ति या सरकार का निजी अकाउंट नहीं था। यह पूरे देश का अकाउंट था और इस पर सबका
11:05
Speaker A
हक था। 1996 से ऑयल फंड में पैसा डालने और इस पैसे को इन्वेस्ट करने की शुरुआत हो गई। फिलहाल इस फंड में 2.2 ट्रिलियन से ज्यादा की रकम है। यह पैसा दुनिया की 8000 से ज्यादा दिग्गज कंपनियां और बोंड्स में
11:18
Speaker A
लगा है। जैसे-जैसे शेयर मार्केट ऊपर जाता है, फंड का पैसा भी बढ़ने लगता है। क्योंकि यह किसी एक मार्केट पर निर्भर नहीं करता इसलिए नुकसान की गुंजाइश भी कम रहती है। दुनिया भर के शेयर मार्केट्स में टोटल जितने शेयर्स हैं, उनमें से 1.5%
11:32
Speaker A
सिर्फ नॉर्वे के पास है। अकेले भारत के शेयर मार्केट में उसके 30 बिलियन लगे हुए हैं। अगर नॉर्वे की सरकार आज उस फंड से पूरा पैसा निकाल लेती है तो उसके हर नागरिक को ₹40 लाख मिल सकते हैं। लेकिन
11:43
Speaker A
[संगीत] सरकार अपनी मर्जी से ऐसा नहीं कर सकती। इसके लिए कुछ नियम कायदे बने हुए हैं। पहला नियम तेल और गैस से सरकार को मिलने वाला पैसा पहले ऑयल फंड में जाएगा। उससे पहले इसको कहीं और खर्च नहीं किया जा
11:56
Speaker A
सकता। दूसरा नियम ऑयल फंड में जितना पैसा है एक साल में उसको 3% से ज्यादा नहीं निकाला जाएगा। मान लीजिए फंड में $ ट्रिलियन है तो सरकार 60 [संगीत] बिलियन तक ही निकाल सकती है। यह पैसा बजट में
12:07
Speaker A
जुड़ता है। तब सरकार इसको खर्च करती [संगीत] है। इसको इस तरह से डिजाइन किया गया है कि फंड के प्रिंसिपल अमाउंट पर कोई फर्क ना पड़े और रिटर्न भी बढ़ता रहे। तीसरा नियम ऑयल फंड में पूरी पारदर्शिता बढ़ती जाएगी। सरकार इस फंड की हर एक डिटेल
12:21
Speaker A
पब्लिक करती है। ऑफिशियल वेबसाइट पर रियल टाइम में वैल्यू दिखती है। जिन कंपनियों में इन्वेस्टमेंट हुआ है उनकी लिस्ट भी लगी रहती है। गंभीर आरोपों में शामिल कंपनियों से इन्वेस्टमेंट हटाने का प्रोसेस भी लगातार चलता रहता है। चौथा
12:34
Speaker A
नियम सरकार डे टू डे वर्क में दखल नहीं देगी। इन्वेस्टमेंट का डिसीजन प्रोफेशनल फंड मैनेजर्स लेते हैं। वे सेंट्रल बैंक के अंडर काम करते हैं। सरकार का काम मैंडेट तय करने और नियम बनाने तक सीमित है। अगर इंपैक्ट की बात करें तो इस फंड ने
12:48
Speaker A
नॉर्वे को बदलने और आगे बढ़ने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई है। जैसे नॉर्वे में प्राइमरी स्कूल से लेकर यूनिवर्सिटी तक की पढ़ाई बिल्कुल मुफ्त है। नॉर्वे के हर नागरिक को पब्लिक हेल्थ सिस्टम का लाभ मिलता है। उन्हें साल में अधिकतम $300
13:01
Speaker A
लगते हैं। उसके बाद कोई पैसा नहीं देना होता। इसका पूरा खर्च सरकार उठाती है। नॉर्वे में बच्चे के जन्म पर माता-पिता दोनों को 49 हफ्ते की पेड लीव मिलती है। अगर कोई बेरोजगार हो जाए तो सरकार नई नौकरी मिलने तक सपोर्ट देती है। बीमारियां
13:15
Speaker A
एक्सीडेंट के कारण कोई काम करने में अक्षम हो तो उसको मदद दी जाती है। रिटायरमेंट के बाद लोगों को पेंशन देने में भी [संगीत] सरकार अच्छा खासा पैसा खर्च करती है। अब सवाल आता है क्या यह सब सिर्फ ऑयल फंड से
13:26
Speaker A
संभव हुआ है? [संगीत] जी नहीं ऐसा नहीं है। नॉर्वे के बजट में ऑयल फंड का योगदान 20% के आसपास रहता है। बाकी पैसा टैक्स, फीस और दूसरे सोर्सेस से आता है। उसमें भी टैक्स का रोल सबसे ज्यादा है। नॉर्वे में
13:38
Speaker A
इनकम टैक्स रेट 47.7% तक है। ज्यादातर सामानों पर 25% टैक्स लगता है। खाने पर 15% और ट्रांसपोर्टेशन और टूरिज्म पर 12% टैक्स है। पेट्रोलियम से होने वाले प्रॉफिट पर 78% टैक्स है। इसके अलावा सरकार वेल्थ टैक्स भी लगाती
13:55
Speaker A
है। 1 लिमिट से ज्यादा संपत्ति वाले लोगों को एक्स्ट्रा टैक्स चुकाना होता है। इतना टैक्स चुकाने के बाद भी लोगों की कमाई औसत देशों से ज्यादा है। नॉर्वे में पर कैपिटा इनकम लगभग ₹80 लाख है। टैक्स वगैरह चुकाने
14:06
Speaker A
के बाद भी लोगों के पास औसतन 40 से 45 लाख बचते हैं और टैक्स देकर जो सुविधाएं मिलती हैं, वह टैक्स से कई गुना ज्यादा है। सबसे जरूरी चीज लोगों को भरोसा मिलता है। कोई दिक्कत हुई तो सरकार संभाल लेगी। आपको
14:18
Speaker A
हॉस्पिटल के खर्च की चिंता नहीं करनी होती है। बच्चे के जन पर पेड लीव मिल रही है। अगर बच्चा छोटा है तो डे केयर में सब्सिडी भी मिलेगी। बच्चे की पढ़ाई का पूरा खर्च सरकार उठा रही है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट में
14:29
Speaker A
सब्सिडी है। अगर आप बीमार पड़ते हैं तो पहले 16 दिनों तक आपकी कंपनी पूरा पैसा देगी। उसके बाद भी आप एक साल तक ठीक नहीं हुए तो बाकी सैलरी सरकार देगी। इसके अलावा आपको हर साल 5 हफ्ते की पेड छुट्टी अलग से
14:41
Speaker A
मिलेगी। यह लोगों का कानूनी हक है। इसको अपने देश से कंपेयर करके देखें। यहां भी लोग ठीक-ठाक टैक्स देते हैं। लेकिन बदले में क्या मिलता है? सरकारी अस्पताल में भीड़ है या [संगीत] डॉक्टर नहीं है?
14:52
Speaker A
प्राइवेट में इलाज कराओ। सरकारी स्कूलों में टीचर नहीं है। कहीं-कहीं तो इमारत ही नहीं है। प्राइवेट स्कूल में पढ़ाओ। सरकारी बस खराब है। टैक्सी में जाओ। इसका कोई अंत नहीं है। लेकिन जब तक हम कलेक्टिव होकर नहीं सोचेंगे, जब तक सरकारें लॉन्ग
15:04
Speaker A
टर्म में प्लानिंग नहीं करेंगी, जब तक [संगीत] आने वाली पीढ़ियों का ध्यान नहीं रखा जाएगा, तब तक कोई भी बड़ा बदलाव लाना नामुमकिन है। नॉर्वे ने ऐसे कई कमाल किए हैं जिन्हें अपनाया जा सकता है। लेकिन उसकी खामियों पर बात करनी भी जरूरी है।
15:18
Speaker A
नंबर वन, नॉर्वे तेजी से क्लीन एनर्जी की तरफ शिफ्ट हो रहा है। वहां इलेक्ट्रिक कारों का चलन बढ़ा है। 2025 में रजिस्टर्ड हुई कारों में से 90% से [संगीत] ज्यादा इलेक्ट्रिक कारें थी। इसके अलावा नॉर्वे की जरूरत की अधिकांश बिजली हाइड्रो पावर
15:32
Speaker A
से आती है। नॉर्वे अपने यहां क्लीन एनर्जी को लेकर तो सजग है लेकिन वह भरपूर मात्रा में तेल भी बेचता है। यह तेल दूसरे देशों में इस्तेमाल हो रहा है। उससे होने वाला पोल्यूशन क्लाइमेट चेंज का एक बड़ा कारण
15:43
Speaker A
है। नॉर्वे अक्सर क्लाइमेट को बचाने की बात करता है। लेकिन दूसरी तरफ वो आर्कटिक में तेल की ड्रिलिंग भी करता है। इसको लेकर नॉर्वे की आलोचना भी होती है। पॉइंट नंबर [संगीत] टू नॉर्वे में नोबेल पीस प्राइ का विजेता तय होता है। वो
15:55
Speaker A
मानवाधिकार की बातें करता है। लेकिन उसके ऑयल फंड का पैसा हथियार बनाने वाली कंपनियों में भी लगा है। नॉर्वे धार्मिक स्वतंत्रता पर ज्ञान देता है। लेकिन उसके यहां धार्मिक कट्टरता [संगीत] बढ़ी है। विदेशी मूल के लोगों के खिलाफ
16:09
Speaker A
हमले बढ़ रहे हैं। नस्ल [संगीत] भेद की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई है। विदेशी आम वाले लोगों को नौकरी या घर मिलने में भी मुश्किलें [संगीत] आती हैं। तीसरा पॉइंट प्रेस फ्रीडम से जुड़ा है। नॉर्वे पिछले 10 वर्षों से प्रेस फ्रीडम [संगीत]
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Speaker A
इंडेक्स में पहले नंबर पर है। इंडेक्स के मुताबिक पत्रकारों के लिए नॉर्वे सबसे मुफीद है। नॉर्वे की आबादी 56 लाख है। इतने छोटे देश में 230 मीडिया [संगीत] संस्थान काम करते हैं। वहां आम लोग मीडिया पर भरोसा करते हैं। नेता उनके काम की
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Speaker A
इज्जत [संगीत] करते हैं और उन्हें सवाल पूछने का पूरा हक मिलता है। लेकिन यह रिश्ता कई बार पर्दा डालने के काम भी आता है। 2026 की शुरुआत में ऑबस्टीन फाइल्स चर्चा में थी। इनमें नॉर्वे की क्राउन प्रिंसेस मेतेमर का नाम भी आया था। इसमें
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Speaker A
उनके और ऑबस्टीन की दोस्ती की बात पता चली थी। इसके लिए क्राउन प्रिंसेस को माफी मांगनी पड़ी। इसके अलावा मरत के बेटे पर ड्रग्स और डोमेस्टिक अब्यूज के आरोप लगे [संगीत] थे। कई पत्रकारों को इस कैंडल की जानकारी पहले से थी, लेकिन वे लंबे समय तक
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Speaker A
सवाल उठाने से बचते रहे। नॉर्वे के अखबारों पर नस्ल भेदी और धर्म का अपमान करने वाले कार्टूनस छापने [संगीत] के आरोप भी लगे हैं। कई बार यह फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन के बजाय पूर्वाग्रह से भरे होते हैं। नॉर्वे कोई परफेक्ट देश नहीं
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Speaker A
है। उसमें भी खामियां हैं। वहां भी असंतुष्ट लोग हैं। वहां भी नीतियां फेल हुई हैं। सभी इलाकों में एक जैसा विकास नहीं पहुंचा है। कट्टरता है, नस्ली भेद है और कई मामलों में विरोधाभास भी दिखाई देता है। फिर भी दूसरे देशों की तुलना में
17:25
Speaker A
नॉर्वे काफी बेहतर स्थिति में है। उसने अपनी [संगीत] संस्थाओं को मजबूत बनाया है। उसने संसाधनों को अभिशाप में नहीं बदलने दिया। नॉर्वे ने उसे भविष्य की पीढ़ियों के लिए बचाया है। उसने कतरा-कतरा जोड़कर अपने लोगों पर खर्च किया। इस मामले में
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Speaker A
नॉर्वे ने पूरी ईमानदारी बरती है। काश बाकी देशों की सरकारें भी कुछ सीख ले पाती। तो यह थी नॉर्वे की कहानी। आपको कैसी लगी हमें कमेंट सेक्शन में जरूर बताइएगा। अगर यह वीडियो आपको पसंद आया हो तो इसको लाइक और शेयर कीजिए। हमारे चैनल
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Speaker A
क्यूरिस्तान को सब्सक्राइब भी कर लीजिए। यह तमाम जानकारी आपके लिए लेकर आए थे अभिषेक कुमार। नए वीडियो में नई कहानी के साथ फिर आपसे मुलाकात होगी। तब तक के लिए मुझे विदा दीजिए। बहुत-बहुत शुक्रिया।
Topics:नॉर्वेतेल संसाधनसरकारी पेंशन फंडलोकतंत्रआर्थिक विकासरिसोर्स कर्ससामाजिक सुरक्षानोबेल पुरस्कारनॉर्थ सीतेल प्रबंधन

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