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Why Sam Altman is the Most Dangerous CEO in the World | OpenAI

सैम ऑल्टमैन की कहानी, ओपनएआई में उनका संघर्ष और एआई तकनीक के भविष्य पर उनका प्रभाव।

Key Takeaways

  • सैम ऑल्टमैन का ओपनएआई से निकाला जाना और वापसी सिलिकॉन वैली की राजनीति को दर्शाता है।
  • सैम की कहानी स्टार्टअप्स, निवेश और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में उनकी काबिलियत को उजागर करती है।
  • एआई और एजीआई के खतरे को समझना और उसका नियंत्रण भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है।
  • ओपनएआई और माइक्रोसॉफ्ट जैसे बड़े निवेशक एआई के विकास में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
  • सैम ऑल्टमैन की कहानी तकनीकी प्रगति और नैतिक सवालों के बीच संतुलन की चुनौती को दर्शाती है।

What the video covers

  • सैम ऑल्टमैन को अचानक ओपनएआई से निकाल दिया गया, लेकिन कर्मचारियों और निवेशकों के दबाव पर उन्हें वापस CEO बनाया गया।
  • सैम का जन्म 1985 में शिकागो में हुआ और उन्होंने स्टैनफोर्ड छोड़कर स्टार्टअप्स में कदम रखा।
  • उन्होंने वाई कॉम्बिनेटर में भाग लिया और बाद में इसके अध्यक्ष बने, जिससे उनकी पहचान और प्रभाव बढ़ा।
  • सैम ने कई स्टार्टअप्स में निवेश किया और सिलिकॉन वैली में एक प्रभावशाली व्यक्ति बन गए।
  • उनका सबसे बड़ा सवाल था कि अगर एआई इंसानों से ज्यादा स्मार्ट हो जाए तो क्या होगा।
  • इलोन मस्क भी एआई के खतरे को समझते थे और डीप माइंड के साथ जुड़े थे।
  • ओपनएआई की स्थापना एजीआई को सुरक्षित रूप से विकसित करने के लिए की गई थी।
  • ओपनएआई ने चैटजीपीटी लॉन्च किया, जिसने एआई की दुनिया में क्रांति ला दी।
  • सैम ऑल्टमैन और इलोन मस्क के बीच टेक्नोलॉजी और नियंत्रण को लेकर टकराव हुआ।
  • यह वीडियो भविष्य की सबसे ताकतवर तकनीक एआई के नियंत्रण और उसके खतरे पर सवाल उठाता है।

Answers

Questions about this video

सैम ऑल्टमैन को ओपनएआई से क्यों निकाला गया था?

सैम ऑल्टमैन को अचानक कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने बिना कोई वार्निंग या नेगोशिएशन के निकाल दिया था, जो सिलिकॉन वैली में आम है, लेकिन इसके पीछे के कारण वीडियो में विस्तार से नहीं बताए गए।

सैम ऑल्टमैन ने वाई कॉम्बिनेटर में क्या भूमिका निभाई?

सैम ने वाई कॉम्बिनेटर में पार्ट टाइम पार्टनर के तौर पर काम किया और बाद में इसके अध्यक्ष बने, जहां उन्होंने स्टार्टअप्स को फंडिंग, मेंटोरशिप और नेटवर्किंग में मदद की।

एजीआई और एआई में क्या अंतर है?

एआई किसी खास काम के लिए डिजाइन किया गया है और इंसानों की मदद से चलता है, जबकि एजीआई इंसानों की तरह सोच सकता है, खुद को सुधार सकता है और खुद फैसले ले सकता है, जिससे वह ज्यादा शक्तिशाली और खतरनाक हो सकता है।

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Speaker A
तारीख 17 नवंबर 2023 में दोपहर के 3:45 होने वाले थे। वेगास में फॉर्मूला वन रेसिंग का प्रैक्टिस सेशन चल रहा था। कई जाने माने लोग वीवीआईपी स्टैंड में इसका लुत्फ उठा रहे थे। की सबसे दिलचस्प कंपनी ओपन एआई के
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Speaker A
सीईओ सैम ऑल्टमैन भी थे। की रफ्तार में खोए हुए थे। फोन पर एक अर्जेंट मैसेज आया। उन्हें तुरंत वीडियो कॉल पर आने के लिए कहा गया था। वहां कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स उनका थे। ऑल्टमैन के आते ही बोर्ड ऑफ
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Speaker A
डायरेक्टर्स ने उनसे कहा, "आपको कंपनी से निकाला जाता है। हमारे साथ काम करने के लिए धन्यवाद। अब से हमारा आपका रिश्ता खत्म हुआ।" जरा सोच कर देखिए, अपने को-फाउंडर और सीईओ को एक झटके में निकाल देती है। वह भी बिना किसी
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Speaker A
नेगोशिएशन, बिना किसी वार्निंग के। है। लेकिन सिलिकॉन वैली में इस तरह की बर्खास्तगी कोई नई बात नहीं है। टसल हमेशा चलता रहता है। जैसे एलन मस्क ने X.com बनाया। बाद में उन्हें दोनों जगह से निकाल दिया गया। उबर के
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Speaker A
को-फाउंडर और सीईओ थे। 2017 में इन्वेस्टर्स के दबाव में उनको सीईओ की कुर्सी छोड़नी पड़ी थी। किया था। उन्हें भी एक-एक बार सीईओ की पोस्ट से हटाया गया था। इसलिए सैम ऑल्टमैन का निकाला जाना अपवाद नहीं था।
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Speaker A
लेकिन इसके बाद जो हुआ, अपवाद बन गया। कुछ ही समय के अंदर कंपनी में हंगामा शुरू हो चुका था। ओपन एआई के प्रेसिडेंट ग्रेग ब्रॉकमैन ने ऑल्टमैन के समर्थन में इस्तीफा दे दिया। माइक्रोसॉफ्ट ओपन एआई का सबसे बड़ा
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Speaker A
इन्वेस्टर था। उसने कहा कि हम ऑल्टमैन को हायर कर रहे हैं। साथ आएगा, उसका स्वागत रहेगा। एआई के स्टाफ की बारी। उसे वक्त कंपनी में थे करीब 770 लोग। उनमें से 700 लोगों ने ओपन लेटर जारी किया। कहा
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Speaker A
कि अगर ऑल्टमैन को वापस नहीं लाया गया, तो हम रिजाइन कर देंगे। उसके बाद कंपनी के हाथ-पांव फूल गए। उन्हें ऑल्टमैन को वापस बुलाना पड़ा। पांच दिनों के अंदर उनको सीईओ की कुर्सी वापस मिल चुकी थी। ने उनको फायर किया था वो बोर्ड बदला
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Speaker A
जा चुका था और ऑल्टमैन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया की सबसे ताकतवर शख्स बन चुके थे। उस सैम ऑल्टमैन की है जो कॉलेज से ड्रॉप आउट हुआ। जिसकी पहली कंपनी बुरी तरह फेल हुई। जिसने एआई के खतरे से बचने
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Speaker A
के लिए ओपन एआई बनाया और जो इस वक्त दुनिया के सबसे अमीर शख्स के साथ उलझा हुआ है। ये कहानी हमारे आपके भविष्य की भी है और उस सवाल की भी जिसका जवाब अभी किसी के पास नहीं है। वो सवाल
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Speaker A
है, दुनिया की सबसे ताकतवर टेक्नोलॉजी को कंट्रोल कौन करेगा? शुरू करते हैं। सैम ऑल्टमैन का जन्म 22 अप्रैल 1985 को शिकागो के एक यहूदी परिवार में हुआ था। उनकी मां स्किन की डॉक्टर थी और पिता रियल एस्टेट का बिजनेस करते थे। सैम
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Speaker A
को बचपन में सारी सुख-सुविधाएं मिली, कहीं कोई दिक्कत नहीं थी। जब आठ बरस के हुए, घर वालों ने उन्हें कंप्यूटर लाकर दे दिया। यहां से उनकी दिलचस्पी कंप्यूटर्स में जगी। कंप्यूटर के पुर्जे खोलना और फिर उनको असेंबल करना सैम का शौक बन गया। फिर
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Speaker A
उन्होंने कोडिंग में ध्यान लगाया। जब तक उनका बचपन बीता, तब तक वो सॉफ्टवेयर बनाना सीख चुके थे। फिर 2003 में सैम को स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में दाखिला साइंस की पढ़ाई करने गए थे। साथ ही साथ वो सोशल नेटवर्किंग ऐप पर भी काम कर रहे
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Speaker A
थे। लूप्ट। अपने दोस्तों के साथ लोकेशन शेयर कर सकते थे। 2005 में सैम को लगा कि उनका आइडिया काम कर सकता है। वो लूप्ट पर पूरा समय देना चाहते थे और इसी इरादे से उन्होंने स्टैनफोर्ड छोड़ दिया।
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Speaker A
उसी साल कैंब्रिज में वाई कॉम्बिनेटर बन रही थी। वाईसी स्टार्टअप एक्सलरेटर कंपनी है। ये स्टार्टअप्स को फंड, मेंटोरशिप और इन्वेस्टर्स तक पहुंचने का रास्ता देती है। में शुरू हुई कंपनियां आज दुनिया भर में नाम और दाम कमा रही है। कुछ चर्चित
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Speaker A
नाम है एयरबीएनबी, स्ट्राइप, ड्रॉपबॉक्स, रेडिट, क्विच आदि। वाई कॉम्बिनेटर ने 2005 में अपना पहला बैच लॉन्च किया। उसमें सैम का आइडिया सिलेक्ट हो गया। उन्हें वाई कॉम्बिनेटर के को-फाउंडर पॉल ग्राहम ने पर्सनली
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Speaker A
ट्रेन किया। वाई सी से निकलने के बाद लूप को 3 करोड़ डॉलर का इन्वेस्टमेंट मिला। सैम को इससे काफी शोहरत भी मिली लेकिन उनका ऐप उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा। आखिरकार 2012 में सैम ने लूप को बेच दिया। इस डील से उनके खाते में 50 लाख डॉलर आए थे। यह
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Speaker A
ठीक-ठाक पैसा था लेकिन इसमें उनके सात बरस खर्च हुए थे और लूप का कोई फ्यूचर नहीं बचा था। जिस कंपनी ने लूप को खरीदा था उसने भी बहुत जल्द से बंद कर दिया। उनका इंटरेस्ट सिर्फ कंपनी के
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Speaker A
इंजीनियर्स और उसकी लोकेशन शेयरिंग टेक्नोलॉजी में था। सिलिकॉन वैली के स्टैंडर्ड के हिसाब से लूप एक फेल्ड वेंचर था। सैम को इसका अंदाजा पहले ही हो गया था इसलिए वह दूसरी चीजों में ध्यान लगाने लगे थे। उन्होंने पार्ट टाइम पार्टनर के तौर
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Speaker A
पर वाई कॉम्बिनेटर जॉइन कर लिया था। इस रोल में वह स्टार्टअप्स का फ्यूचर तय कर सकते थे। फिर 2012 में उन्होंने हाइड्रोसाइन कैपिटल शुरू किया। यह कंपनी नए-नए स्टार्टअप्स में इन्वेस्ट करती थी। लूप बेचकर जो पैसा मिला था उसे सैम ने
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Speaker A
इसमें लगा दिया। उनके अलावा एक और आदमी ने उनकी कंपनी में इन्वेस्ट किया था और वह थे पीटर थियल। पीटर थियल को सिलिकॉन वैली का किंग मेकर माना जाता है। जिस कंपनी में उनका हाथ लगता है उसकी किस्मत चमक जाती
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Speaker A
है। जब फेसबुक पर कोई भरोसा नहीं करता था उस दौर में पीटर थियल ने पैसा लगाया। कंपनी स्पेस एक्स डूबने की कगार पर थी तब थियल ने उसे भी फंड दिया। उनको मार्क जकरबर्ग और अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी
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Speaker A
वांस के मेंटर के तौर पर भी जाना जाता है। उनकी एक कंपनी प्लांटर यूएस आर्मी के लिए टेक्नोलॉजी डेवलप करती है। सैम को मुश्किल दौर में थियल का साथ मिला था। यह गेम चेंजर साबित हुआ। थियल की गाइडेंस और उनका
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Speaker A
नेटवर्क सैम के काफी काम आया। वह तेजी से आगे बढ़ने लगे। दूसरी तरफ वाईसी के को-फाउंडर पॉल ग्राहम ने भी उनकी काबिलियत का लोहा माना था। 2014 में ग्राहम वाईसी प्रेसिडेंट की कुर्सी छोड़ रहे थे। उनको एक उत्तराधिकारी की इस वक्त तलाश थी।
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Speaker A
उन्होंने इसके लिए सैम ऑल्टमैन को चुना। ग्राहम ने बाकायदा ब्लॉग लिखकर सैम की तारीफ की थी। उन्होंने लिखा था, "वाईसी को आगे बढ़ाने का समय आ गया है। इस काम के लिए सैम सबसे बेहतर और स्मार्ट व्यक्ति हैं।
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Speaker A
वो स्टार्टअप्स के मामले में मुझसे कई गुना आगे हैं।" सैम ने उनको निराश नहीं किया। उनके अंडर वाई कॉम्बिनेटर ने तेजी से तरक्की की। सैम जल्दी ही डिसीजंस लेना पसंद करते थे। उन्होंने ज्यादा स्टार्टअप्स को वाईसी के बैच में शामिल किया। वाईसी पहले सिर्फ
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Speaker A
सॉफ्टवेयर पर फोकस करती थी। सैम ने बायोटेक, न्यूक्लियर एनर्जी, रोबोटिक्स, एआई को भी इसमें जोड़ा। सैम ने एक नॉन-प्रॉफिट फर्म वाईसी रिसर्च भी शुरू किया। ये भविष्य में होने वाली टेक प्रॉब्लम्स पर रिसर्च करती है। इसमें एक करोड़ डॉलर उन्होंने अपने अकाउंट से दिया
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Speaker A
था। इसके अलावा उन्होंने वाईसी में आने वाली 100 से ज्यादा कंपनियों में अपना पैसा लगाया। जिन स्टार्टअप्स को इन्वेस्टर्स नहीं मिलते थे, उनमें सैम दाव लगाते थे। इससे सैम की ख्याति चारों तरफ फैल गई। वो सिलिकॉन वैली के वेल-कनेक्टेड
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Speaker A
लोगों में से एक थे। हर फाउंडर, हर इन्वेस्टर, हर बोर्ड मेंबर उनको जानता था। लोग उन पर आंख मूंदकर भरोसा करते थे। कोई फाउंडर कहीं फंसता था, तो सबसे पहले सैम को फोन मिलाता था। सैम के पास सब कुछ था।
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Speaker A
वो मिलियंस एंड बिलियंस में खेल रहे थे। पैसे की कोई कमी नहीं थी। उनका रसूख भी सिर चढ़कर बोल रहा था। वो एक झटके में किसी का फ्यूचर बना या बिगाड़ सकते थे। लेकिन इतने से उनको संतोष नहीं था। एक
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Speaker A
सवाल उन्हें अक्सर परेशान करता रहता था। इंसानों से ज्यादा स्मार्ट हो जाएं, तो क्या होगा? क्या दुनिया बचेगी या मशीनों के हाथों खत्म हो जाएगी?
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Speaker A
ये आशंका उस समय तो कल्पना से परे लग रही थी। लेकिन एक दिन उनका डर सच साबित होने वाला था। सैम ऑल्टमैन के अलावा एक और व्यक्ति को एआई का खतरा दिखाई दे रहा था और वो थे इलोन मस्क। इलोन साइंस फिक्शन किताबों और
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Speaker A
फिल्मों के फैन रहे हैं। इस शौक ने उनके बिजनेस आइडियाज, उनके सपनों और उनके मकसद को काफी प्रभावित किया है। और यहीं से उनके मन में सुपर इंटेलिजेंट एआई की बात बैठी थी। 2012 में उनकी मुलाकात डीप माइंड
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Speaker A
के को-फाउंडर डेमिस हसाबिस से हुई। डीप माइंड 2010 में लंदन में शुरू हुई थी। यह कंपनी आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस यानी कि एजीआई पर रिसर्च कर रही थी। एजीआई और एआई में काफी अंतर है। एआई को किसी खास काम के लिए डिजाइन किया गया है जैसे
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Speaker A
कोडिंग, सर्च इंजन, इमेज जेनरेशन आदि। इसको चलाने के लिए इंसानों की जरूरत होती है। लेकिन एजीआई अभी के एआई मॉडल से कई गुना ज्यादा ताकतवर होगा। वह इंसानों की तरह सोच सकेगा,
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Speaker A
खुद ही इंप्रूव करेगा और खुद ही फैसले भी ले सकेगा। यानी जब तक एजीआई आपके कंट्रोल में है, आप उससे कुछ भी करवा लीजिए। लेकिन कंट्रोल छूटते ही वह इंसानों को पीछे छोड़ देगा। उस सिचुएशन में इंसान एजीआई की मर्जी पर निर्भर हो जाएगा। एलन मस्क जैसे लोग इस
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Speaker A
खतरे से बहुत पहले वाकिफ थे। डेमिस हसाबिस से मिलने के बाद उनकी धारणा और पुख्ता हो गई थी। वह इस जर्नी के हिस्सेदार बनना चाहते थे, इसलिए उन्होंने डीप फिर 2014 में उन्होंने डीप माइंड को खरीदने
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Speaker A
की कोशिश भी की लेकिन उनसे पहले गूगल ने डील कर ली थी। गूगल ने इसके लिए लगभग 50 करो
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Speaker A
स्ट्रैटेजीज। [संगीत] इसको स्वीडिश फिलोसोफर निक बोस्ट्रोम ने लिखा था। निक लंबे समय से एआई पर रिसर्च कर रहे थे। उन्होंने तर्क दिया दिन एआई इतना सक्षम होगा कि वह अपने मकसद को पूरा करने के लिए कुछ भी कर गुजरेगा। भले उसका
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Speaker A
मकसद मानवीय मूल्यों और हितों के खिलाफ हो। अंदर इंसानों जैसी भावना नहीं आ सकती इसलिए वह उनके भले या बुरे की पहचान [संगीत] नहीं कर सकता। मस्क की किताब पढ़कर शॉक्ड रह गए। अगस्त 2014 में उन्होंने ट्वीट किया, बोस्ट्रोम की सुपर
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Speaker A
इंटेलिजेंस सबको पढ़नी चाहिए। हमें एआई को लेकर केयरफुल रहने की जरूरत है। यह परमाणु हथियारों से अधिक खतरनाक हो सकता है। उस वक्त ज्यादातर लोगों ने मस्क की बात [संगीत] हंसी में उड़ा दी। लेकिन मस्क अपनी बात पर
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Speaker A
अडिग थे। वो अपने क्लोज सर्कल में इसकी चर्चा करने लगे थे। फिर 28 जून 2015 की तारीख आई। उस रोज मस्क [संगीत] का 44वां बर्थडे था। में दोस्तों के लिए एक पार्टी रखी थी। इसमें टेक वर्ल्ड के कई नामी
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Speaker A
गिरामी लोग आए थे। उनमें [संगीत] गूगल के को-फाउंडर लैरी पेज भी थे। लैरी और मस्क उन दिनों अच्छे दोस्त हुआ करते थे। उनके बीच एआई पर खूब डिस्कशंस, डिबेट्स हुआ करते थे। एक डिबेट उस रात भी हुई। धीरे-धीरे उनकी [संगीत] बातचीत तल होने
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Speaker A
लगी। मस्क ने कहा कि एआई इंसानों को तबाह कर देगा। इस पर लगाम लगाने की जरूरत है। लेकिन लैरी इसके [संगीत] खिलाफ थे। उनका मानना था कि एआई को अपनी रफ्तार से आगे बढ़ने देना चाहिए। जो ज्यादा इंटेलिजेंट
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Speaker A
होगा वो सरवाइव करेगा। फिर उन्होंने मस्क को कहा, तुम्हें इंटेलिजेंस से ज्यादा इंसानों की परवाह है। इस पर मस्क बिफर गए। वो बोले, हां, मैं प्रो-ह्यूमन हूं और ऐसा ही रहूंगा। यहीं से उनकी दोस्ती में खटास आ गई। इसके बाद दोनों के रास्ते अलग
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Speaker A
[संगीत] हो गए। गूगल के पास डीपमाइंड था। एआई पर इसकी मोनोपोली थी। लैरी पेज इस मोनोपोली [संगीत] को डिक्टेट कर रहे थे। इसलिए मस्क ने उन्हें चुनौती लिया। को कुछ काबिल और भरोसेमंद पार्टनर्स की जरूरत थी। इसमें उनको सैम ऑल्टमैन का साथ मिला।
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Speaker A
[संगीत] उनकी पहली मुलाकात वाई कॉम्बिनेटर के दिनों में हुई थी। तब से वे एक दूसरे से अक्सर मिलते रहते थे। एआई को लेकर दोनों की राय एक जैसी थी। उनका मानना था कि आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस का आना तय
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Speaker A
है। अगर किसी एक कंपनी ने एजीआई डेवलप कर कंट्रोल किया तो कयामत आ सकती है। वो कंपटीशन को पूरी तरह खत्म कर सकती है। उन्हें सबसे अधिक खतरा गूगल से था क्योंकि गूगल के पास डीपमाइंड था। वे तेजी [संगीत]
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Speaker A
से नए टूल्स बना रहे थे। के लिए अल्टरनेटिव सिस्टम बनाना जरूरी था। एक ऐसी कंपनी जो एकाधिकार को खत्म कर सके और जिसका फोकस प्रॉफिट कमाने से ज्यादा मानवता की भलाई [संगीत] पर हो। फिर दिसंबर 2015 में एलोन मस्क, सैम ऑल्टमैन, पीटर
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Speaker A
थियल समेत 13 लोगों ने मिलकर ओपन एआई बनाने का ऐलान किया। [संगीत] ये एक नॉन-प्रॉफिट संस्था थी। इसका इकलौता मकसद था इंसानी सभ्यता को ध्यान में रखते हुए एजीआई डेवलप [संगीत] करना। ओपन एआई का रोजमर्रा का काम सैम देखने वाले थे। वो
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Speaker A
कंपनी के सीईओ बन गए। [संगीत] मस्क ने पैसे वाला डिपार्टमेंट संभाला था। वो कंपनी के बोर्ड के को चेयरमैन बने। उन्होंने अपनी जेब से तकरीबन 4 करोड़ डॉलर दिए थे। धीरे-धीरे वो एक बिलियन डॉलर तक लगाने वाले थे। लेकिन मस्क ने पूरा पैसा
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Speaker A
नहीं दिया। ये आगे जाकर टेक वर्ल्ड के सबसे बड़े झगड़े का कारण बना। ओपन एआई के शुरुआती दो साल अच्छे से गुजरे। तब तक डीप माइंड ने अल्फा गो बनाकर सबको चौंका दिया था। मार्च 2016 में अल्फा गो ने बोर्ड गेम गो के नंबर एक प्लेयर को
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Speaker A
हरा दिया। वो दुनिया के सबसे जटिल गेम्स में से एक है। इसमें यूनिवर्स में मौजूद एटम से भी ज्यादा कॉम्बिनेशंस होते हैं। एक्सपर्ट्स मान रहे थे कि एआई कई दशक बाद उसको सॉल्व कर पाएगा। लेकिन अल्फा गो ने
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Speaker A
2016 [संगीत] में ये कमाल कर दिखाया था। इसने एजीआई की रेस को और तेज कर दिया। गूगल इस रेस में बहुत आगे निकल चुका था। उसके पास दुनिया बेहतरीन एआई रिसर्चस थे। फंड की कोई कमी नहीं थी। रिसोर्सेस के
12:26
Speaker A
मामले में उसका कोई मुकाबला नहीं था। वो बड़ी आसानी से बेताज बादशाह बन सकता था। लेकिन बीच रास्ते में उसका मन बदलने लगा। उसके सामने कई दुविधाएं आ गई। उन दिनों गूगल अपने सर्च इंजन से अच्छी खासी कमाई
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Speaker A
कर रहा था। अगर एआई मॉडल डायरेक्ट जवाब देने लगते तो लोग वेबसाइट्स खोलना पसंद नहीं करते। अगर वे लिंक्स नहीं खोलते तो ट्रैफिक कम होता और ट्रैफिक कम होने से ऐड रेवेन्यू घट जाता। गूगल इस बिजनेस को खोना
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Speaker A
नहीं चाहता था। उसका दूसरा डर सेफ्टी को लेकर भी था। उसके रिसर्चस का तर्क था कि अगर एआई मॉडल सही ठीक नहीं हुआ तो ये लोगों के लिए खतरा बन सकता है। इसलिए वे पूरी तरह श्योर होने के बाद ही अपना मॉडल
13:00
Speaker A
रिलीज करना चाहते थे। इसका नुकसान ये हुआ कि वे रेस में पिछड़ते चले गए। दूसरी तरफ ओपन एआई अपने मिशन पर फोकस्ड था। उसके पास अपना कोई सर्च इंजन नहीं था। उसको ऐड रेवेन्यू खोने का डर नहीं था और वे रिस्क
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Speaker A
लेने के लिए भी तैयार थे। लेकिन इस राह में एक बड़ा पेंच था। ओपन एआई भारी चुनौतियों के लिए तो तैयार था। लेकिन अंदर की खटपट ने उसका भविष्य खतरे में डाल दिया था। की शुरुआत 2017 में हो गई थी। उस समय
13:24
Speaker A
तक ओपन एआई ठीक रास्ते पर जा रहा था। लेकिन एलन मस्क उसकी रफ्तार [संगीत] से खुश नहीं थे। वह सब कुछ तेजी से हासिल करना चाहते थे। उन्होंने सैम और दूसरे [संगीत] को-फाउंडर्स को स्टाफ की रिपोर्ट देने के लिए कहा। जिन स्टाफ की रिपोर्ट
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Speaker A
कार्ड [संगीत] कमजोर थे, मस्क उन्हें तुरंत निकालना चाहते थे। लेकिन सैम उसके लिए तैयार नहीं हुए। उनका मानना था कि शॉर्ट टर्म में किसी की काबिलियत का पता नहीं चल सकता। अगर जल्दबाजी में लोगों को फायर किया गया तो इससे कंपनी का माहौल
13:49
Speaker A
बिगड़ेगा और अच्छे रिसर्चस को रिटेन करने में मुश्किल आएगी। सैम यह भी नहीं चाहते थे कि ओपन एआई किसी एक से चले। इसको लेकर मस्क नाराज रहने लगे। मीटिंग्स में चिल्लाना, स्टाफ को गालियां देना और फंडिंग रोकने की धमकियां
14:03
Speaker A
रोजाना की बात हो गई थी। में कंपनी का पैसा तेजी से खर्च हो रहा था। कंप्यूटिंग, एडवांस चिप्स, डेटा सेंटर, सैलरी आदि का खर्चा बढ़ता जा रहा था। उन्हें ज्यादा से ज्यादा पैसे की इस वक्त जरूरत थी। तब ओपन एआई को नॉन-प्रॉफिट
14:17
Speaker A
से फॉर-प्रॉफिट कंपनी में बदलने पर चर्चा शुरू हुई ताकि इन्वेस्टर्स से पैसा लाया जा सके। लेकिन उनके सामने एक बड़ा सवाल खड़ा था। नई कंपनी का सीईओ कौन होगा और कंपनी को कंट्रोल कौन करेगा? इस सवाल पर मस्क बेहद लालची हो गए। वह फॉर-प्रॉफिट
14:30
Speaker A
कंपनी में 90% तक हिस्सेदारी अपनी चाहते थे। एआई का विलय टेस्ला में करने का ऑफर भी दिया। सैम और बाकी को-फाउंडर्स ने इसे साफ मना कर दिया। फरवरी 2018 में मस्क ने नाराज होकर ओपन एआई से इस्तीफा दे दिया।
14:44
Speaker A
उन्होंने फंडिंग पहले ही रोक दी थी जिसके चलते स्टाफ की सैलरी और कंपनी का काम अटक सकता था। उस वक्त लिंक्डइन के को-फाउंडर रीड हॉफमैन ने पैसे दिए थे। इससे ओपन एआई बंद होने से बच गया। लेकिन इतने से लंबे
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Speaker A
समय तक गुजारा नहीं चल सकता था। ओपन एआई ने अपना फॉर-प्रॉफिट विंग ओपन एआई एलपी की स्थापना की। प्रति जवाबदेह रखा था। दूसरी चीज यह हुई कि प्रॉफिट पर लिमिट लगा दिया गया। पहले राउंड के इन्वेस्टर्स अपने निवेश पर
15:09
Speaker A
मैक्सिमम 100 गुना तक प्रॉफिट कमा सकते थे। मान लीजिए, किसी ने ₹5 करोड़ लगाए तो वह प्रॉफिट में ₹500 करोड़ से ज्यादा नहीं ले सकते थे। उससे ऊपर की कमाई नॉन-प्रॉफिट पार्ट में जाने वाली थी। उस पैसे का
15:21
Speaker A
इस्तेमाल कथित तौर पर इंसानों के भले के लिए होना था। यानी फॉर प्रॉफिट बीइंग पैसा कमा सकते थे। लेकिन वे कंपनी पर कंट्रोल नहीं कर सकते थे। डिसीजन लेने का हक सिर्फ और सिर्फ नॉन प्रॉफिट बीइंग के बोर्ड मेंबर्स को था। इस तरह ओपन एआई ने
15:36
Speaker A
मार्केट से पैसा उठाना शुरू किया। उन्हें पहला बड़ा इन्वेस्टमेंट मिला माइक्रोसॉफ्ट से। माइक्रोसॉफ्ट ने 2019 में 1 बिलियन डॉलर इन्वेस्ट किया। उसने ओपन एआई को सुपर कंप्यूटर सर दूसरे जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर भी दिए। बाद में माइक्रोसॉफ्ट ने और भी
15:48
Speaker A
रकम लगाई। एआई का सबसे बड़ा बाकर बन गया। इस सपोर्ट की बदौलत कंपनी तेजी से आगे बढ़ी। 30 नवंबर 2022 को उसने अपना पहला चैटबॉट लॉन्च किया। ये चैट जीपीटी था। चैट जीपीटी इंसानों की तरह सवालों के जवाब दे
16:02
Speaker A
सकता था। आर्टिकल्स लिख सकता था। कोड लिख सकता था। ईमेल ड्राफ्ट कर सकता था। साइंस के कॉम्प्लेक्स टॉपिक्स को आसानी से समझा सकता था। वो भी सेकंड्स के भीतर। इसके लिए घंटों गवाने की जरूरत नहीं थी। ये अपने आप
16:14
Speaker A
में चमत्कारी था। लोगों ने इसको हाथों-हाथ लिया। पांच दिनों के अंदर 10 लाख लोग इससे जुड़ चुके थे। दो महीने में इसके यूजर्स की संख्या 10 करोड़ के पार पहुंच चुकी थी। मौजूदा समय में हर महीने 100 करोड़ से
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Speaker A
ज्यादा यूजर्स चैट जीपीटी का इस्तेमाल कर रहे हैं। दुनिया ने ऐसी टेक्नोलॉजी पहले कभी नहीं देखी थी। वर्जन के साथ चैट जीपीटी की क्षमता बढ़ रही थी। उसने दुनिया में क्रांति ला दी। लेकिन कइयों को दहशत में भी डाला।
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Speaker A
लाखों करोड़ों लोगों की जॉब्स खतरे में दिखाई देने लगी। सरकारों को सतर्क होना पड़ा। वे एआई को रेगुलेट करने में जुट गए। जो गूगल रेस को लीड कर रहा था। उसको अपने आई इमरजेंसी अलर्ट जारी करना पड़ा। 25
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Speaker A
वर्षों में पहली बार गूगल सर्च को इतनी बड़ी चुनौती मिली। उसके इनकम का एक बड़ा सोर्स हाथ से फिसल रहा था। सैम ऑल्टमैन इस क्रांति के पोस्टर बॉय थे। दुनिया भर के नेता और बिजनेस लीडर्स उससे मिलना चाहते
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Speaker A
थे। वो अखबारों और मैगजींस के कवर्स पर थे। टीवी चैनल्स की हेडलाइंस में थे। कंपनियों की बोर्ड मीटिंग में उनका नाम लिया जा रहा था। सैम टेक वर्ल्ड की सबसे निर्णायक शख्सियत बन चुके थे। ऐसा रुतबा हाल फिलहाल में बहुत कम लोगों को हासिल
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Speaker A
हुआ था लेकिन इस रास्ते में बहुत जल्द रुकावटें भी आई। दो बड़े झटके शाम का इंतजार कर रहे थे और ये दोनों झटके उनको अपने ही लोगों से मिलने वाले थे। तारीख 17 नवंबर 2023, चैट जीपीटी लॉन्च हुए एक साल भी पूरा नहीं हुआ था। उससे
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Speaker A
पहले ही कंपनी के बोर्ड ने सैम ऑल्टमैन को सीईओ के पद से बर्खास्त कर दिया। ये एक तरह का तख्ता पलट था। सैम को उसके बारे में पहले से कोई जानकारी नहीं थी। माइक्रोसॉफ्ट सबसे बड़ा इन्वेस्टर था। उन्हें भी इसके बारे में नहीं बताया गया
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Speaker A
था। दरअसल सबसे बड़ा इन्वेस्टर होने के बावजूद माइक्रोसॉफ्ट के पास वोटिंग का अधिकार नहीं था। वोटिंग राइट्स नॉन प्रॉफिट कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के पास [संगीत] थे। कानूनी तौर पर वे सीईओ को हटा सकते थे। थे लेकिन सैम के खिलाफ क्योंकि एक
18:03
Speaker A
प्रस्ताव लाया गया था इसलिए उन्हें वोटिंग के लिए नहीं बुलाया गया। कंपनी के प्रेसिडेंट ग्रेग ब्रॉकमैन को भी इससे दूर रखा गया। अब बचे चार मेंबर। उन्होंने 4-0 के अंतर से सैम को हटा दिया। बोर्ड ने इसके पीछे एक सिंपल वजह बताई। उन्होंने
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Speaker A
कहा, "सैम में हमारा भरोसा खत्म हो चुका है। सैम हमसे बहुत सारी जरूरी जानकारियां छुपा रहे थे।" दरअसल बोर्ड के कुछ मेंबर्स को अंदेशा था कि सैम सीक्रेटली [संगीत] एजीआई डेवलप कर रहे हैं और इसमें सेफ्टी का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। था कि वो
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Speaker A
नॉन प्रॉफिट मिशन की आड़ में अपना बिजनेस एंपायर बना रहे हैं। कुछ इस बात से चिंतित थे कि प्रॉफिट के चक्कर में सिद्धांतों से समझौता हो रहा है। सच जो भी रहा हो लेकिन बोर्ड के फैसले ने हड़कंप मचा दिया था।
18:44
Speaker A
माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्य नडेला ने तुरंत दखल दिया। उन्होंने सैम और ब्रॉकमैन की लीडरशिप में एक नया एआई रिसर्च डिवीजन लॉन्च [संगीत] कर दिया। नडेला ने ओपन एआई के स्टाफ को खुला ऑफर भी दिया। इसके बाद ओपन एआई के 90% स्टाफ ने बगावत कर दी।
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Speaker A
उनकी डिमांड [संगीत] साफ थी या तो सैम को वापस बुलाइए या फिर हम कंपनी छोड़ देंगे। ओपन एआई के बाकी इन्वेस्टर्स भी सकते में [संगीत] थे। कंपनी में उनका भरोसा डूब रहा था। वे पैसा निकालने की वार्निंग दे रहे थे। आखिरकार
19:10
Speaker A
[संगीत] 22 नवंबर को बोर्ड ने हार मानी। उन्हें सैम ऑल्टमैन को वापस बुलाना पड़ा। जिन चार मेंबर्स ने उनको हटाया था, उनमें से तीन ने इस्तीफा दे दिया। [संगीत] फिर नया बोर्ड बनाया गया। इसके मेंबर्स सैम की हां में हां मिलाने के लिए तैयार
19:22
Speaker A
थे। ओपन एआई पर सैम का एकाधिकार कायम हो चुका था। दूसरी चुनौती एलन मस्क की तरफ से आई। जब तक चैट जीपीटी लॉन्च [संगीत] नहीं हुआ था, तब तक वो चुपचाप बैठे रहे। उन्होंने कभी भला-बुरा नहीं कहा। कई बार
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Speaker A
उन्होंने सैम की तारीफ तक की। हालांकि प्राइवेट ईमेल्स में उनकी नाराजगी साफ झलकती रहती थी। फिर भी 2022 तक उनका रवैया शांति वाला था। जीपीटी लॉन्च होने के बाद मस्क एकदम से बदल गए। वो सैम और माइक्रोसॉफ्ट के फिल्टर [संगीत] आलोचना
19:50
Speaker A
करने लगे। उनका तर्क था कि ओपन एआई अपना मकसद भूल गया है। मार्च 2023 में उन्होंने ओपन एआई को टक्कर देने के लिए एक्स एआई [संगीत] लॉन्च किया। एक्स एआई फॉर प्रॉफिट कंपनी थी। नवंबर 2023 तक उनका चैट बोट
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Speaker A
ग्रोक मार्केट में आ चुका था। मस्क ने कई बार ये दावा किया कि ग्रोक चैट जीपीटी से बेहतर है। लेकिन इतने से [संगीत] उनको चैन नहीं था। मस्क ओपन को लगातार पोच करते रहे। वो सैम पर धोखाधड़ी और आइडिया चुराने का आरोप भी
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Speaker A
लगाते रहे। फिर मार्च 2024 में उन्होंने कैलिफ़ोर्निया स्टेट कोर्ट में सैम, ग्रेग ब्रॉकमैन और ओपन एआई के खिलाफ मुकदमा कर दिया। लेकिन तीन महीने में मुकदमा वापस भी ले लिया। फिर अगस्त 2024 में वो फेडरल कोर्ट चले गए। इस बार उन्होंने आरोपों का
20:30
Speaker A
दायरा बढ़ा दिया था। साथ ही साथ माइक्रोसॉफ्ट को भी घेरा था। मस्क का इल्जाम था कि ओपन एआई ने कानून का गंभीर उल्लंघन किया है और माइक्रोसॉफ्ट ने इसमें मस्क की मदद की है। सैम और ब्रॉकमैन को कंपनी से हटाने की मांग रखी। साथ में ये
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Speaker A
अपील भी की कि ओपन एआई का फॉर प्रॉफिट विंग बंद किया जाए। जब तक केस का ट्रायल शुरू होता, तब तक दोनों तरफ से जुबानी झगड़ा चलता रहा। फरवरी 2025 में मस्क ने 97.4 बिलियन डॉलर में ओपन एआई खरीदने का ऑफर
20:57
Speaker A
दिया। सैम ने ना सिर्फ इससे मना कर दिया, बल्कि उन्होंने ट्विटर खरीदने का काउंटर ऑफर रख दिया। अप्रैल 2026 को केस का ट्रायल शुरू हुआ। इसमें सैम और मस्क दोनों ने बयान दर्ज करवाए। मस्क ने कहा कि ओपन
21:10
Speaker A
एआई प्रॉफिट कमाने के लिए नहीं बना था। हम एजीआई पर किसी एक कंपनी की मोनोपोली को रोकना चाहते थे। इसका कमर्शियल स्ट्रक्चर असली मिशन के खिलाफ है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर मुझे सैम के इरादों के बारे
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Speaker A
में पता होता तो मैं कभी पैसे नहीं लगाता। मैंने सैम पर भरोसा करके बहुत बड़ी बेवकूफी कर दी। फिर 13 मई को सैम ने कोर्ट में स्टेटमेंट दिया। उन्होंने कहा, मस्क ने हमें डूबने के लिए छोड़ दिया था।
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Speaker A
उन्होंने कभी अपना वादा नहीं निभाया। होकर ही हम सरवाइव कर सकते थे। यही वह तरीका था जिससे हम गूगल को टक्कर दे सकते थे और अच्छे इंजीनियर्स और रिसर्चर्स को साथ में रख सकते थे। दोनों तरफ की दलीलों को सुनने
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Speaker A
के बाद 18 मई को जूरी ने अपना फैसला सुनाया। उन्होंने मस्क के सभी दावों को खारिज कर दिया। जूरी ने आरोपों पर कोई राय नहीं दी। बस इतना कहा कि मस्क ने केस फाइल करने में बड़ी देर कर
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Speaker A
दी। मस्क ने इस फैसले से नाराजगी जताई। उन्होंने इसके खिलाफ अपील करने की बात भी कही। इस केस ने एक बार फिर से सैम ऑल्टमैन को यह साबित कर दिया था। के सबसे अमीर व्यक्ति को हराया था। यह उनकी सबसे बड़ी
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Speaker A
जीत थी। इसने उनकी ताकत को पुख्ता कर दिया था। लेकिन क्या ताकतवर होना जिम्मेदार होने की गारंटी भी है? और क्या सैम के बारे में यह बात भरोसे से कही जा सकती है?
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Speaker A
शायद नहीं। सैम ऑल्टमैन बेशक सबसे काबिल टेक लीडर्स में से एक हैं। उन्हें मिट्टी से सोना निकालना आता है। वह इन्वेस्टर्स [संगीत] को राजी करना जानते हैं। उन्हें अच्छे लोगों की और अच्छे आइडियाज की परख है। लेकिन उनके हाथ में छोड़ना बेहद खतरनाक [संगीत]
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Speaker A
साबित हो सकता है। सैम की कुछ ऐसी आदतें हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वह झूठ बोलने और फैक्ट्स को छुपाने में माहिर हैं। 2023 में ओपन एआई के बोर्ड मेंबर्स ने उनको इसी वजह से हटाया था। सैम
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Speaker A
के कई करीबी लोगों ने कहा कि सैम सोशियोपैथ की तरह बिहेव करते हैं। इंसानी सभ्यता का भविष्य उनके हाथों में नहीं छोड़ा जा सकता। इन्हीं वजहों से 2020 में डारियो अमोदेई ने ओपन ओपन से इस्तीफा दे दिया था। वह कंपनी का रिसर्च विंग लीड कर
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Speaker A
रहे थे। दारियो ने कई बार कहा कि सैम का ध्यान सेफ्टी से ज्यादा पैसे पर है। वो रिसर्चर्स को कुछ कहते हैं, इन्वेस्टर्स को कुछ और बताते हैं। दारियो ने ओपन एआई छोड़ने के बाद एंथ्रोपिक शुरू की। उनका
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Speaker A
चैटबॉट है क्लॉड। वो एथिक्स और मोरालिटी के मसलों पर स्टैंड लेते रहे हैं। फरवरी 2026 में उन्होंने मास सर्विलांस [संगीत] और ऑटोमेटिक वेपन सिस्टम में एआई के इस्तेमाल का विरोध किया था। जिसके चलते ट्रंप सरकार ने उनकी कंपनी
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Speaker A
को ब्लैकलिस्ट कर दिया [संगीत] था। एंथ्रोपिक ब्लैकलिस्ट हुई, उसे कुछ ही घंटों बाद सैम ने सरकार के साथ डील कर ली। उसके लिए सैम ऑल्टमैन की काफी आलोचना भी हुई थी। [संगीत] अप्रैल 2026 में न्यूयॉर्क मैगजीन ने सैम पर एक डिटेल
23:40
Speaker A
रिपोर्ट पब्लिश की थी। उसका टाइटल था ने कंट्रोल आवर फ्यूचर, कैन ही बी ट्रस्टेड? इसमें सैम के करीबी लोगों के हवाले से उनकी दो पहचानें दर्ज [संगीत] थी। पहली सैम को लोगों को खुश करना पसंद है। वो लोगों को वही बताते हैं जो वो
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Speaker A
सुनना चाहते [संगीत] हैं। और दूसरी, उनको इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि उनकी धोखेबाजी या झूठ का नतीजा उस आर्टिकल को आप पूरा पढ़ेंगे तो पता चलेगा कि सैम पर भरोसा करना मुश्किल क्यों है। जिस तरह से सैम ने अपने सिद्धांतों को
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Speaker A
बदला, उससे गंभीर [संगीत] सवाल उठते हैं। 2015 में सैम ने लिखा था कि अगर मशीनें इंसानों से अधिक बुद्धिमान [संगीत] हो गई, तो वे मानव जाति का अंत ही कर सकती हैं। और इसी को रोकने के लिए उन्होंने ओपन
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Speaker A
एआई बनाया था। उन्होंने दुनिया के सबसे बेहतरीन रिसर्चर्स को ये कहकर जोड़ा था कि वे मानवता को बचा रहे हैं। लेकिन 2026 तक तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। नॉन-प्रॉफिट संस्था के तौर पर शुरू हुई ओपन एआई 852 बिलियन डॉलर्स की कंपनी अब बन चुकी
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Speaker A
है। इसमें नॉन-प्रॉफिट विंग की हिस्सेदारी लगातार घट रही है। इसके साथ-साथ दुनिया को बचाने का मिशन भी पीछे छूट रहा है। में सेफ्टी पर काम करने वाली टीमें एक-एक कर भंग की जा चुकी हैं। जिन लोगों ने सैम की
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Speaker A
जवाबदेही तय करने की कोशिश की, उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जा चुका है और उन पर लगे आरोपों की सही से जांच तक नहीं हो सकी। इसलिए 11 बरस बाद भी सवाल अपनी जगह बरकरार हैं। क्या इंसान अपने इतिहास की
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Speaker A
सबसे [संगीत] शक्तिशाली तकनीक को संभालने के लिए तैयार है? अगर इसे संभालने का दावा करने वाले ही धोखा दे जाएं, तो क्या होगा?
25:06
Speaker A
आपको क्या लगता है? क्या सैम ऑल्टमैन पर भरोसा किया जा सकता है? क्या सरकारों को एआई के अंधाधुंध [संगीत] रेस पर लगाम कसनी चाहिए और एआई को हावी होने से रोकने में आम लोगों की क्या भूमिका हो सकती है? अपनी
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Speaker A
राय हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। अगर वीडियो पसंद आया हो तो इसको लाइक और शेयर करते रहिए। हमारे चैनल क्यूरियस स्थान को सब्सक्राइब भी कर लीजिए। [संगीत] यह तमाम जानकारी आपके लिए लेकर आए थे अभिषेक कुमार। नए वीडियो में नई कहानी के
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Speaker A
साथ फिर मिलूंगी। तब तक के लिए मुझे विदा दीजिए। बहुत-बहुत शुक्रिया। [संगीत]
Topics:सैम ऑल्टमैनओपनएआईएआई खतराइलोन मस्कवाई कॉम्बिनेटरचैटजीपीटीस्टार्टअपटेक्नोलॉजी नियंत्रणआर्टिफिशियल इंटेलिजेंसएजीआई

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