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Wo Lamha Jis Ne Poori Kainaat Ko Badal Diya! | Wiladat-e-Mustafa ﷺ Se Yateemi Tak Ka Safar

मक्का की वादी में यतीम बच्चे की विलादत से इतिहास का अहम मोड़, अब्दुल मुत्तलिब और जमजम के रहस्यों की दास्तान।

Key Takeaways

  • मक्का की धार्मिक और सामाजिक स्थिति में पैगंबर मुहम्मद ﷺ के जन्म ने क्रांतिकारी बदलाव लाया।
  • जमजम का पानी मक्का के लिए जीवनदायिनी था और उसकी खोज एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना थी।
  • अब्दुल मुत्तलिब का अपने बेटे की कुर्बानी का वादा और उसकी रक्षा का संघर्ष मानवता और ईमानदारी का प्रतीक है।
  • कुरैश के समाज में राजनीतिक और धार्मिक तनाव गहरे थे, जो पैगंबर के आने से पहले के माहौल को दर्शाते हैं।
  • इस्लामी इतिहास में पैगंबर की विलादत को एक नई शुरुआत और कायनात के लिए रहमत का दौर माना जाता है।

What the video covers

  • वीडियो में मक्का के इतिहास और उस दौर की सामाजिक-धार्मिक स्थिति का वर्णन है।
  • काबा में 360 बुतों की पूजा और असली तौहीद की उपेक्षा का जिक्र है।
  • अब्दुल मुत्तलिब द्वारा जमजम के पानी की खोज और उसकी रक्षा की कहानी प्रस्तुत की गई है।
  • अब्दुल मुत्तलिब ने अपने 10 बेटों में से एक को कुर्बान करने का वादा किया था, जो अब्दुल्लाह थे।
  • कुरैश के सरदारों ने अब्दुल्लाह की जान बचाने के लिए दाना काना की सलाह ली।
  • तीरों के जरिए कुर्बानी का फैसला हुआ, जिसमें बार-बार अब्दुल्लाह का नाम निकला।
  • अब्दुल्लाह की बीमारी और यशरब में उनका ठहरना बताया गया है।
  • इस्लामी इतिहास में पैगंबर मुहम्मद ﷺ की विलादत और उनके जीवन के शुरुआती संघर्षों का उल्लेख है।
  • वीडियो में जमजम के पानी के महत्व और कुरैश के सामाजिक संघर्षों को उजागर किया गया है।
  • अब्दुल मुत्तलिब की दुआ और उनके बेटे अब्दुल्लाह के प्रति उनकी ममता को दर्शाया गया है।

Answers

Questions about this video

जमजम के पानी की खोज कैसे हुई?

अब्दुल मुत्तलिब को सपनों में निर्देश मिला कि वह काबा के पास उस जगह खोदे जहां एक सुर्ख चोंच वाला कौवा जमीन पर ठूंगे मार रहा हो। उन्होंने अपने बेटे हारिस के साथ वहां खोदाई की और जमजम का मीठा पानी पाया।

अब्दुल मुत्तलिब ने अपने बेटे की कुर्बानी क्यों करने का वादा किया?

अब्दुल मुत्तलिब ने मक्का के कबीले और खुद को ताकतवर बनाने के लिए अल्लाह से दस बेटे मांगे थे, और बदले में एक बेटे को काबा के सामने कुर्बान करने का वादा किया था। जब उनके दस बेटे हुए, तो उन्होंने अपने वादे को पूरा करने का निर्णय लिया।

तीरों के जरिए कुर्बानी का फैसला कैसे हुआ?

कुरैश के सरदारों की सलाह पर अब्दुल मुत्तलिब ने अपने बेटों और ऊंटों के नाम पर तीर डाले। बार-बार तीर अब्दुल्लाह के नाम पर निकला, जिससे कुर्बानी के लिए अब्दुल्लाह चुने गए, लेकिन बाद में तीर ऊंटों के नाम पर भी निकले जिससे ऊंटों की संख्या बढ़ाई गई।

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00:13
Speaker A
दरबानों, निगाहबानों, ये कैसा जलजला है? मेरे एवान का शाही तख्त क्यों हिल रहा है?
00:18
Speaker A
बाहर ये कहराम कैसा है? शहंशाह-ए-आज़म कयामत टूट पड़ी है। महल की छत पर बने 14 बुलंद मीनार टूट कर जमीन पर गिर चुके हैं। क्या आप जानते हैं कि तारीख की वो कौन सी लज़ज़ाखेज़ रात थी जब ईरान के शहंशाह नोशेरवा
00:38
Speaker A
के नाकाबिल [संगीत] तस्कीर समझे जाने वाले शाही महल के 14 बुलंदोबाला जमीन बोस हो गए थे। वो कौन सा पुर असरार लम्हा था जब 1000 साल से [संगीत] दहकती फारिस के आतिशक गदे की मुकद्दस आग पलक झपकते ही राख
00:55
Speaker A
का ढेर बन गई। मीलों पर फैली गहरी सावा झील रातोंरात जमीन में धंसकर खुश्क मैदान बन गई और काबा के अंदर रखे 360 बुत अपने ही चेहरों के बल मिट्टी [संगीत] पर ऊंधे गिर पड़े। दुनिया के बड़े-बड़े शहंशाह
01:13
Speaker A
नजूमी और पादरी खौफ से कांप रहे थे। आखिर जमीन पर ऐसा क्या हादसा पेश आया है जिसने पूरी कायनात के निजाम को हिला कर रख दिया है?
01:23
Speaker A
यह कोई तबाही नहीं थी। यह मक्का की वादी में एक ऐसे यतीम बच्चे की आमद का ऐलान था जिसके कदमों की धूल पर दुनिया के सारे तख्तोताज कुर्बान होने वाले थे। आइए सुनते हैं चाहे जमजम के गुमशुदा राज कुर्बानी की
01:40
Speaker A
लज़ज़ाखेज़ नजर और विलादते मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की वो दास्तान जिसने तारीख का धारा हमेशा के [संगीत] लिए मोड़ दिया। यह छठी सदी ईवी का वो दौर था जब दुनिया अखलाकी, रूहानी और इंसानी इख्तदार के बदतरिन जवाल से गुजर रही थी। एक तरफ रूम
02:02
Speaker A
और फारिस की अजीमो शान सल्तनतें अपने जाहो जलाल, अय्याशी और गुरूर के नशे में मस्त थीं तो दूसरी तरफ जजीरा नुमा अरब सेहरा की तपती रेत पर कबायली तासुब, खानदानी दुश्मनियों, बेटियों को जिंदा दरगोर करने की सफाकाना रुसुमात और सैकड़ों खुद साख्ता
02:21
Speaker A
बुतों की पूजा में गर्क था काबा जिसे सैयदना इब्राहिम और इस्माइल अलैहि सलाम ने एक अकेले खुदा की इबादत के लिए तामीर किया था। अब 360 बुतों का मस्कन बन चुका था और असल तौहीद को फरामोश किया जा चुका था। मगर
02:39
Speaker A
कायनात के खालिक ने इस जमीन को हमेशा के लिए अंधेरों के हवाले नहीं करना था। यह वही साते थे जिनके लिए तारीख के औराक सदियों से गवाही दे रहे थे। तर में हजरत मूसा अल सलाम की ज़बानी कोहे फारान के नूर
02:54
Speaker A
की खुशखबरी दी गई थी। इंजील में हजरत ईसा अल सलाम ने अपने बाद तशरीफ लाने वाले आखरी रहनुमा फरकलेत अहमद की नवीद सुनाई थी और फारिस के कदीम मजूसी सहीफों से लेकर हिंद के वीदक शुलकों तक हर इलहामी और तारीख
03:11
Speaker A
किताब इस बयाबान की तरफ इशारा कर रही थी जहां तमाम जहानों के लिए अबदी रहमत का ज़हूर होने वाला था। सैयद उल मुरसलीन सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की विलादत से चंद दहाइयां कब [संगीत] मक्का मुकर्रमा में पीने के मीठे पानी की शदीद किल्लत थी।
03:28
Speaker A
हजरत इस्माइल अलैहि सलाम का जारी करदा मुतबरिक चश्मा जमजम सदियों पहले कबीला जरहम के दौर [संगीत] में जंगों और रेत के तूफानों तले दफन होकर तारीख के ओराक में गुम हो चुका था। [संगीत] और मक्का के वासियों में से किसी को मालूम न था कि यह
03:44
Speaker A
मुकद्दस चश्मा काबा के किस हिस्से में दफन है। एक रात कुरैश के बावकार सरदार अब्दुल मुत्तलिब काबा के सहन यानी हतीम के साए में सो रहे थे कि उन पर नींद की हालत में एक गैबी दुनिया का दरवाजा खुला। ए अब्दुल
04:00
Speaker A
मुत्तलिब [संगीत] उठो और तैबा को खोदो। वो दिन भर सोचते रहे कि तैबा से क्या मुराद है? अगली रात जब वो इसी जगह सोए तो वही हस्ती फिर नमूदार [संगीत] हुई और बोली ए अब्दुल मुत्तलिब उठो और बर्रा को खोदो।
04:17
Speaker A
तीसरी रात फिर वही निदा आई। ए अब्दुल [संगीत] मुत्तलिब मजमूना को खोदो। बिल आखिर चौथी रात उस गैबी हस्ती ने तमाम पर्दे हटाते हुए वाज़ अल्फाज़ [संगीत] में हुक्म दिया। ऐ अब्दुल मुत्तलिब जमजम को खोदो। वो जमजम जो कभी खुश नहीं होगा और
04:35
Speaker A
जिसका पानी हाजियों के लिए सेराबी का सामान बनेगा। इसकी निशानी यह है कि वो काबा के पास खून और गोबर के दरमियान उस जगह है जहां सुर्ख चोंच वाला कौवा जमीन पर ठूंगे मार रहा होगा। अब्दुल मुत्तलिब सुबह
04:50
Speaker A
सवेरे बेदार हुए और अपने इकलौते नौजवान बेटे हारिस को साथ लेकर काबा के सहन में उस मकाम पर पहुंचे [संगीत] जहां बुतों के लिए जानवर जिबा किए जाते थे। उन्होंने देखा कि एक सुर्ख चोंच वाला कौवा बिल्कुल इसी जगह रेत खोद रहा था। अब्दुल मुतलिब ने
05:07
Speaker A
बिस्मिल्लाह पढ़कर कुदाल से खोदना शुरू किया। चंद फुट नीचे जाते ही पुराने कुएं की पथरीली दीवार नजर आई और फिर देखते ही देखते सदियों से छुपा हुआ मीठा और [संगीत] ठंडा पानी जमीन से बाहर आने लगा। अब्दुल मुत्तलिब के लबों से बेसाख्ता नारा बुलंद
05:25
Speaker A
हुआ। अल्लाहू अकबर। यह इस्माइल का जमजम है। मगर जैसे [संगीत] ही पानी निकला, कुरैश के कबाइल के सरदार हसद और लालच की आग में जलते हुए दौड़ते हुए आए और अब्दुल मुत्तलिब को घेरे में ले लिया। कुरैश के
05:39
Speaker A
कबीले अब्दुल मुत्तलिब पर टूट पड़े। क्योंकि उस वक्त अब्दुल [संगीत] मुत्तलिब के पास सिवाय एक बेटे हारिस के कोई मददगार न था। जबकि दूसरे कबाइल के पास दर्जनों जंगजू बेटों की अफरादी कुत थी। कुरैश के तानों, तमसखुर और अपनी तन्हाई के [संगीत]
05:55
Speaker A
उस शदीद और पुरदर्द एहसास ने अब्दुल मुत्तलिब के दिल को चीर कर रख दिया। वो काबा की [संगीत] दीवार से लिपट गए। हाथ आसमान की तरफ उठाए और लरजती आवाज में वो तारीख मन्नत मानी। ऐ काबा के रब [संगीत]
06:10
Speaker A
तू गवाह है कि मैं आज तेरे घर के सामने कितना तन्हा और बेबस हूं। ए मेरे परवरदिगार अगर तूने मुझे 10 बेटे अता फरमाए जो जवान होकर मेरी ताकत बने और मेरा डिफा करें तो मैं अपने इस अहद के बदले
06:26
Speaker A
[संगीत] अपने 10 बेटों में से एक चहेते बेटे को तेरे नाम पर काबा के सामने कुर्बान कर दूंगा। साल गुजरते गए, मौसम बदलते रहे और अल्लाह ताला ने अब्दुल मुत्तलिब की इल्तजा को शर्फ कुबूलियत बक्शा। उनके घर एक के बाद
06:42
Speaker A
एक 10 [संगीत] खुबरू बहादुर और ताकतवर बेटे पैदा हुए जिनमें जुबैर, अबू तालिब, [संगीत] हमजा, अब्बास और सबसे छोटे अब्दुल्लाह शामिल थे। जब यह दसों बेटे जवान हो गए और अब्दुल मुत्तलिब की पुश्तपनाही [संगीत] के लिए तलवारें संभाल कर खड़े हुए तो
06:59
Speaker A
मक्का के किसी कबीले में इतनी [संगीत] जुर्रत न रही कि वो अब्दुल मुत्तलिब के सामने आंख उठाकर भी देख सके। मगर [संगीत] जैसे ही अब्दुल मुत्तलिब ने अपनी ताकत और वकार का उजू देखा, उनके जमीर ने उन्हें उनकी वह पुरानी नजर याद दिलाई जो उन्होंने
07:14
Speaker A
रब्बे काबा से मांगी थी। अब्दुल [संगीत] मुत्तलिब पर खौफ खुदा तारी हो गया। उन्होंने अपने तमाम बेटों को जमा किया और फरमाया ए मेरे बेटों [संगीत] मैंने तुम्हारी पैदाइश से पहले अपने रब से एक वादा किया था। और
07:28
Speaker A
अब्दुल मुत्तलिब कभी अपने रब से किए हुए वादे से पीछे नहीं हट सकता। आज मुझे अपनी नजर पूरी करनी है। तमाम बेटों ने सर झुका दिया और बाप के फैसले को तस्लीम किया। [संगीत] अब्दुल मुत्तलिब अपने दसों बेटों
07:42
Speaker A
को लेकर काबा के अंदर दाखिल हुए। जहां कुरैश का बड़ा बुत हिबुल रखा था और उसके पास तीरों के जरिए फॉल निकालने वाला पुजारी बैठता था। तमाम बेटों के नाम एक-एक लकड़ी के तीर पर [संगीत] लिखे गए। पुजारी
07:55
Speaker A
ने तीरों को घुमाया और एक तीर खींच कर बाहर निकाला। जिस तीर पर कुर्बानी का कुरा [संगीत] निकला उस पर लिखा था अब्दुल्लाह। अब्दुल्लाह जो अब्दुल मुत्तलिब [संगीत] के तमाम बेटों में सबसे छोटे, सबसे बाहया, हसीन तरीन और बेहद लाडले थे और जिनकी पेशानी
08:14
Speaker A
में नूरन नबूवत एक चमकते हुए सितारे की तरह दमक रहा था। [संगीत] अब्दुल मुत्तलिब का कलेजा कट कर रह गया। मगर अल्लाह के खौफ [संगीत] और अहद की पासदारी ने उनके कदम न लड़खड़ाने दिए। उन्होंने एक हाथ में
08:28
Speaker A
तेजधार छुरी संभाली और दूसरे हाथ से अब्दुल्लाह की कलाई पकड़ [संगीत] कर काबा के सामने कुर्बानगाह मकाम असफ नायला की तरफ बढ़े। जब मक्का के सरदारों और कुरैश की खवातीन ने यह दिल दहला देने वाला मंजर देखा तो पूरे हरम में चीखो पुकार मच गई।
08:45
Speaker A
अब्दुल्लाह के मामू और कुरैश के मुअज्ज़ज़ सरदार नंगी तलवारें लेकर आगे बढ़े। ए अब्दुल मुत्तलिब, खुदा की कसम, हम तुम्हारे जीते जी अब्दुल्लाह को कभी ज़बाह नहीं करने देंगे। अगर तुमने अपने सबसे नेक और खूबसूरत बेटे को ज़ह कर दिया तो अरब में एक
09:03
Speaker A
ऐसी भीषण रस्म चल पड़ेगी कि हर बाप अपने बेटों को ज़ह करने लगेगा। तुम यसब मदीना की मशहूर दाना काना के पास जाओ और इस मामले का कोई दूसरा हल तलाश करो। अब्दुल [संगीत] मुत्तलिब कुरैश के सरदारों के हमरा यथरब और फिर खैबर गए।
09:20
Speaker A
जहां उस वक्त की सबसे बड़ी दाना औरत मुकीम थी। उसने अब्दुल मुत्तलिब की पूरी [संगीत] दास्तान सुनकर पूछा, तुम्हारे कबीले में एक इंसान की जान का विद्यादियत कितना मुकरर है?
09:35
Speaker A
अब्दुल मुत्तलिब ने कहा, 10 ऊंट। उस दाना औरत ने कहा, अपने शहर वापस जाओ। एक तरफ अपने बेटे अब्दुल्लाह को खड़ा करो और दूसरी तरफ 10 ऊंट रखो और इन दोनों के बीच तीरों का कुरा डालो। [संगीत] अगर तीर अब्दुल्लाह के नाम
09:51
Speaker A
निकले तो 10 ऊंट और बढ़ा दो और यह अमल उस समय तक दोहराते जाओ जब तक तीर ऊंटों के नाम पर न निकल आए। [संगीत] जिस तादाद पर तीर ऊंटों पर निकले, उतने ऊंट अपने रब के नाम पर ज़बह कर देना। तुम्हारा रब राजी हो
10:07
Speaker A
जाएगा। और तुम्हारे बेटे की जान बच जाएगी। अब्दुल मुत्तलिब मक्का लौटे। काबा के सेहन में मक्का का सारा मजमा सांस रोके खड़ा था। एक तरफ हजरत अब्दुल्लाह सर झुकाए खड़े थे और दूसरी तरफ 10 ऊंट। पुजारी ने तीर
10:25
Speaker A
डाला तो तीर अब्दुल्लाह के नाम पर निकला। ऊंटों [संगीत] की तादाद 20 कर दी गई। तीर फिर अब्दुल्लाह पर निकला। 90 ऊंट हो गए। मगर हर बार कुरा अब्दुल्लाह के नाम पर ही निकलता रहा। अब्दुल मुत्तलिब के चेहरे पर
10:39
Speaker A
हवाइयां उड़ रही थीं और वो रो-रो कर दुआएं मांग रहे थे। जब ऊंटों की तादाद 100 पर पहुंची और फ...
10:57
Speaker A
अब्दुल मुत्तलिब का दिल मुतमाइन ना हुआ। उन्होंने फरमाया [संगीत] नहीं मैं लगातार तीन बार दोबारा कुरा डालूंगा ताकि मुझे यकीन हो जाए कि मेरा रब राजी हो गया है। पुजारी ने तीन बार दोबारा कुरान अंदाजी की और तीनों बार तीर ऊंटों पर ही निकला।
11:15
Speaker A
अब्दुल मुत्तलिब ने सजदा शुक्र अदा किया। 100 ऊंटों को उसी वक्त ज़बा [संगीत] करके मक्का के तमाम गरीबों, मिसकीनों, मुसाफिरों, हत्ता के पहाड़ों [संगीत] के परिंदों और दरिंदों के लिए वकफ कर दिया गया। और यूं हजरत अब्दुल्लाह की जान
11:30
Speaker A
[संगीत] बचाई गई। इसी तारीखी वाक्य की तरफ इशारा करते हुए सालों बाद नबी [संगीत] करीम सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम ने फक्र से फरमाया था मैं दो ज़बीहों का बेटा हूं। [संगीत] एक मेरे दादा इस्माइल और दूसरे मेरे वालिद अब्दुल्लाह।
11:48
Speaker A
इस वाक्य के बाद हजरत [संगीत] अब्दुल्ला मक्का के सबसे मुअज्जज़ और हर दिल अजीज नौजवान बन गए। कुरैश की बड़ी-बड़ी मालदार और खूबसूरत [संगीत] खवातीन अब्दुल्लाह से निकाह की आरजूमंद थी। मगर कुदरत ने इस पेशानी के नूर के लिए बनू ज़हरा के सरदार
12:05
Speaker A
वाहब की पाक दामन बाहिया और आली नसब बेटी हजरत आमना बिंते वाहब का इंतखाब कर रखा था। अब्दुल मुत्तलिब ने खुद जाकर हजरत आमना का रिश्ता मांगा और निहायत सादगी और वकार के साथ यह मुबारक निकाह अंजाम पाया।
12:22
Speaker A
शादी के चंद ही माह बाद [संगीत] हजरत अब्दुल्लाह कुरैश के तजारती काफिले के साथ गज्जा और शाम के तवील सफर पर रवाना हुए। हजरत आमना [संगीत] इस वक्त उम्मीद से थी। किसी के वहमोगुमान में भी ना था कि यह
12:36
Speaker A
मुसाफिर अब कभी मक्का की वादी में अपने कदम नहीं रखेगा। शाम से वापसी पर हजरत अब्दुल्ला का काफिला यशसरफ पहुंचा [संगीत] तो वह शदीद अलील हो गए और उन्होंने अपने ननिहाल बनू नज्जार के यहां कयाम किया। तिजारती काफिला जब मक्का में दाखिल हुआ तो
12:54
Speaker A
अब्दुल मुत्तलिब की निगाहें अपने चहेते अब्दुल्लाह को तलाश करने लगी। मेरा बेटा अब्दुल्लाह कहां है?
13:02
Speaker A
अब्दुल्लाह बीमार होकर यशसरब में रुक गए हैं। जब उन्हें मालूम हुआ कि अब्दुल्लाह [संगीत] बीमार होकर यशसरब में रुक गए हैं तो उन्होंने अपने बड़े बेटे हारिस को फरी तौर यशरब दौड़ाया। मगर जब हारिस यशसरब [संगीत] पहुंचे तो खबर मिली अब्दुल्लाह
13:18
Speaker A
चंद दिनों तक बीमारी की तकलीफ ना सह सके [संगीत] और अपने खालिक हकीकी से जा मिले हैं और उन्हें यसब की मिट्टी में सुपुर्द खाक कर दिया गया है। जब हारिस ने मक्का लौट [संगीत] कर यह अनदोनाक खबर सुनाई तो
13:31
Speaker A
हाशमी घराने पर कयामत टूट पड़ी। अब्दुल [संगीत] मुत्तलिब के आंसू थमते ना थे और हजरत आमना गहरे सदमे में डूब गई। मगर वो यतीम बच्चा जिसके पैदा होने से पहले ही उसके सर से बाप का साया उठ चुका था। अपने
13:47
Speaker A
रब की खास हिफाजत में था। ताकि कायनात [संगीत] को यह अबदी दर्स दिया जा सके कि जिसका दुनिया में कोई जाहिरी सहारा नहीं होता उसका रब ही उसकी परवरिश [संगीत] और अजमत का सबसे बड़ा जामिन होता है। हजरत
14:02
Speaker A
आमना बयान फरमाती हैं, मुझे जर्रा बराबर भी अपने पेट में बोझ का एहसास ना हुआ। बल्कि मैं अपने [संगीत] इर्द-गिर्द हर लम्हा एक पुरसकून और मुअत्तर राहत महसूस करती थी। अयाम हमल के दौरान हजरत आमना ने सच्चे ख्वाब और गैबी इशारे देखे। उन्होंने
14:20
Speaker A
देखा कि उनके जिस्म से एक ऐसा ताबनाक नूर बरामद हुआ जिसने मशरिक से लेकर मगरिब तक के उफक को जगमगा दिया। यहां तक कि इस नूर में शाम के शहर बसरा के ऊंचे-ऊंचे मोहल्लात मक्का में बैठे बिल्कुल वाज़
14:36
Speaker A
दिखाई देने लगे। ख्वाबों में उन्हें पै दरपै [संगीत] यह इलहामी नवीद सुनाई देती रही। ए आमना तुम तमाम जहानों के सरदार और आखिरी नबी की हामिला हो। जब यह मुबारक बच्चा दुनिया में जलवागर हो तो उसका नाम मोहम्मद रखना और
14:53
Speaker A
उसे हर शरीर और हासिद के शर से खुदा-ए वाहिद की पनाह में देना। दिन तेजी से गुजर रहे थे। मौसम बदल रहे थे। [संगीत] और 12 रबीउल अव्वल की वो तारीखी रात करीब आ रही थी। जिसके इंतजार में कायनात ने
15:08
Speaker A
अरबों साल का तवील सफर तय किया था। 12 रबीउल अव्वल [संगीत] आम उलफील का साल। यह तारीख का वो रोशन तरीन दिन था जिसके इस्तकबाल के लिए आसमानों के [संगीत] तमाम दरवाजे खोल दिए गए थे। मक्का की संगलाख
15:22
Speaker A
वादियों में सुबह सादिक की ठंडी मुत्तर हवाएं चल [संगीत] रही थी। उफ पर शहर के तारे चमक रहे थे कि सैयदुल मुरसलीन खातिमु नबीन हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम मक्का के कच्चे मगर पुरनूर हुजरे में इस दुनिया में जलवागर हो गए। वो
15:41
Speaker A
लम्हा कितना पुरजलाल कितना बेनजीर और कितना मुकद्दस [संगीत] था। हजरत आमना रज़ अल्लाह अन्हा फरमाती हैं कि जैसे ही मेरा लाल इस दुनिया में तशरीफ [संगीत] लाया पूरा हुजरा एक गैर जमीनी दूध या नूर से भर गया। वो कोई आम नो मौलूद ना थे। वो सजदे
15:58
Speaker A
की हालत [संगीत] में तशरीफ लाए थे। उनका रुख अनवर और शहादत की उंगली आसमान की तरफ उठी हुई थी। जैसे पैदाइश के पहले ही सांस में वो अपने रब की किब्रियाई और वाहदानियत का ऐलान फरमा रहे हो। [संगीत] आपका जिस्म
16:12
Speaker A
अथर ना सिर्फ तमाम निजासतों से पाक साफ और मुश्क अंबर की तरह मुत्तर था। बल्कि कुदरत ने आपको पैदाइशी तौर पर खतनाशुदा और नाफ [संगीत] बुरीदा पैदा फरमाया था। इसी घड़ी हजरत आमना ने देखा कि मक्का के तपते
16:27
Speaker A
रेगिस्तान से लेकर शाम के फलक बोस महलात तक की तमाम जमीनें नूर [संगीत] के समंदर में नहा गई हैं। और आसमान से फरिश्ते जमीन पर दरूदो सलाम के नजराने लेकर उतर रहे थे। जिस वक्त मक्का के एक खामोश और कच्चे मकान
16:42
Speaker A
में यतीम मोहम्मद ने पहली सांस ली। ठीक इसी पल सैकड़ों मील दूर दुनिया की सबसे बड़ी और मुतकबिर समझी जाने वाली सुपर पावर्स के ऐवानों में एक लज़ाखेज जलजला बरपा हो गया। मदाइयन के शाही महल में सासानी शहंशाह नौशेरवा आदिल अपने तख्त पर
16:59
Speaker A
सो [संगीत] रहा था कि अचानक जमीन बुरी तरह कांप उठी। इस जलजले ने नौशेरवा के महल की छत पर बने 14 बुलंदोबाला मीनार और [संगीत] खूबसूरत बुर्ज तोड़कर जमीन पर पटक दिए। और फिर इसी रात फारिस का वो मुकद्दस आतिश गधा
17:15
Speaker A
जिसकी शोलागजन आग को मजूसी पुजारियों ने 1000 साल से एक लम्हे के लिए भी बुझने नहीं दिया था। और जो रात दिन जलाई जाती थी अचानक बगैर किसी हवा या पानी के खुद-ब खुद राख का ढेर बनकर हमेशा के लिए ठंडी हो गई।
17:31
Speaker A
पुजारी अपने [संगीत] सीने पीटने लगे और पूरे फारिस में कोहराम मच गया। और मोजात का यह सिलसिला यहीं नहीं रुका। [संगीत] इराक और ईरान की सरहद पर वाकई मीलों लंबी और गहरी सावा झील जिसके मीठे पानी से पूरा
17:45
Speaker A
खित्ता सैराब [संगीत] होता था। देखते ही देखते जमीन के अंदर धंसकर एक सूखे रेगिस्तान में तब्दील [संगीत] हो गई। जबकि इसके बरक्स खुश्क साली का शिकार वादिय समावा [संगीत] जहां सदियों से पानी का एक कतरा ना था। अचानक मीठे पानी के उबलते हुए
18:00
Speaker A
चश्मों से भर गई। मक्का के अंदर बैतुल्लाह के ज़हन में रखे [संगीत] हुए तमाम 360 बुत अपने ही चेहरों के बल मिट्टी पर ऊंधे [संगीत] गिर पड़े। जैसे वो अपने आने वाले असल वारिस के आगे सजद रेज होकर अपनी
18:14
Speaker A
शिकस्त का एतराफ कर रहे हो। इब्लीस और उसके शयातीन जो सदियों से आसमानों की सरहदों पर जाकर फरिश्तों की गैबी सरगोशियां चुराया करते थे [संगीत] उन पर शहाबे साकिब और दहकती हुई आग के अंगारे बरसाए गए और उन्हें आसमानों की सरहदों से
18:30
Speaker A
हमेशा के लिए जलील करके निकाल दिया गया। सुबह की रोशनी फैलते ही हजरत आमना ने दादा अब्दुल मुत्तलिब को अपने पोते की विलादत की नवीद भेजी। अब्दुल मुत्तलिब जिनकी आंखें अब्दुल्लाह के गम में वीरान हो चुकी थी। जब तेज कदमों के साथ हुजरे में दाखिल
18:46
Speaker A
हुए और उन्होंने अपने पोते के चेहरे अनवर का दीदार किया तो उनकी आंखों से खुशी के आंसू जारी हो गए। उन्होंने नौ मौलूद को अपने कांपते हाथों पर उठाया [संगीत] सीने से लगाया और सीधे काबा के सहन में ले गए।
19:01
Speaker A
अब्दुल मुतलिब ने उस बच्चे को गोद में लिए हुए काबा का तवाफ किया। रब्बे काबा की बारगाह में सजदा शुक्र अदा किया और उस बच्चे के लिए हासिदों और शरीरों के शर से दुआएं मांगी। जब विलादत का सातवां दिन आया
19:16
Speaker A
तो अब्दुल मुतलिब ने अरब के दस्तूर के मुताबिक मक्का के तमाम कबाइल और कुरैश के बड़े-बड़े सरदारों के लिए एक शानदार अकीका की दावत का एतमाम किया। जब दस्तरखान पर ऊंटों और बकरियों का गोश्त चुना गया और तमाम सरदार खा पीकर फारग हुए तो कुरैश के
19:34
Speaker A
सबसे बड़े सरदार ने अब्दुल मुतलिब [संगीत] की तरफ रुख किया। ए अबू अलहारिस आपने अपने इस चहेते यतीम पोते का नाम क्या रखा है? क्या आपने अपने बाप दादा हाशिम या कुसे के नाम पर इसका नाम रखा है? नहीं।
19:52
Speaker A
मैंने इसका नाम मोहम्मद रखा है। ए अब्दुल मुत्तलिब तुमने अपने तमाम आबा अजदाद के रिवायती नामों को छोड़कर अरब के रेगिस्तान में यह अनोखा नाम क्यों चुना जो हमारी पूरी कौम में कभी किसी का नहीं रहा। क्योंकि मेरा दिल गवाही देता है कि आसमान
20:13
Speaker A
पर उसका रब और जमीन पर उसकी सारी मखलूक हमेशा उसकी हमद, मद और तारीफ करेगी। और इधर हजरत आमना के कानों में वो गैबी इलहाम गूंज [संगीत] रहा था जो उन्होंने ख्वाब में सुना था कि उस बच्चे का आसमानी
20:31
Speaker A
नाम अहमद होगा। यूं तारीख के ओराक पर जमीन के लिए मोहम्मद और आसमानों [संगीत] के लिए अहमद का नाम हमेशा के लिए सब हो गया। पैदाइश के इब्तदाई चंद दिनों तक नबी करीम सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम को उनकी वालिदा
20:48
Speaker A
हजरत आमना ने [संगीत] दूध पिलाया। उसके बाद आपके चाचा अबू लहब की लौंडी शोएबा ने आपको चंद रोज दूध पिलाने का शरफ हासिल किया। मगर अरब के उमरा और शरफा का कदीम दस्तूर [संगीत] था कि वो अपने बच्चों को
21:01
Speaker A
शहर की गुंजान आबादी और वबाई बीमारियों से दूर रखने के लिए देहात और सेहरा [संगीत] के बदवी कबाइल की दाइयों के सुपुर्द कर देते थे। ताकि बच्चे सेहरा की खुली फजा में जिस्मानी तौर पर मजबूत हो और खालिस
21:16
Speaker A
फसीहो बलीग अरबी जबान सीख सकें। इसी रिवाज के तहत सेहरा के मशहूर फसीह कबीले बनू साद की दाया औरतें दूध पीते बच्चों की तलाश में मक्का की तरफ रवाना हुई। इस साल अरब का पूरा ख्ता तारीख की बदतरीन कैदसाली की
21:33
Speaker A
लपेट में था। जमीन बंजर थी। जानवर भूख से निढाल थे और इंसान फाकों पर मजबूर थे। इन्हीं दाइयों के काफिले में एक इंतहाई गरीब, मुफलिस और कमजोर खातून भी शामिल थी। [संगीत] जिनका नाम था हलीमा। हजरत हलीमा के पास एक कमजोर, लागर और लंगराती हुई गदी
21:54
Speaker A
थी जो भूख और कमजोरी की वजह से पूरे काफिले के सबसे पीछे चलती थी और उनके पास एक बूढ़ी [संगीत] ऊंटनी थी जिसके थनों में दूध का एक कतरा भी ना था। हजरत हलीमा की [संगीत] अपनी गोद में मौजूद नन्हा बेटा रात भर भूख की
22:10
Speaker A
शिद्दत से बिलखता रहता था। क्योंकि हलीमा के अपने सीने में उसके लिए दूध खत्म हो चुका था और पूरा खानदान रातों को जाग कर तारे गिनता [संगीत] था। जब यह काफिला मक्का पहुंचा तो मक्का के अमीरों ने अपने-अपने बच्चे दायों के हवाले किए। हजरत
22:27
Speaker A
अब्दुल मुत्तलिब ने जब भी किसी दाया के सामने अपने यतीम पोते मोहम्मद को पेश किया तो हर दाया ने यह कहकर मुंह मोड़ लिया। यह तो यतीम बच्चा है। इसका बाप जिंदा नहीं है। इसकी परवरिश पर भला हमें क्या माल और
22:42
Speaker A
इनाम मिलेगा। हम तो जिंदा बाप वाले मालदार बच्चे लेंगे ताकि हमें भारी इनाम मिले। जब शाम हुई और काफिले की वापसी का वक्त आया तो हलीमा के सिवा तमाम दायों को अमीर घरानों के बच्चे मिल चुके थे और वह
22:57
Speaker A
खुशी-खुशी रवाना हो रही थी। हलीमा खाली हाथ थी। उन्होंने अपने शौहर हारिस की तरफ देखा और बोझल दिल से बोली खुदा की कसम मैं अपनी तमाम सहेलियों के सामने खाली हाथ बनू साद वापस जाना पसंद नहीं करती काफिले की औरतें मुझ पर हसेंगी
23:15
Speaker A
मैं जाकर उसी यतीम बच्चे को ले लेती हूं जिसको सबने छोड़ दिया है कोई हर्ज नहीं हलीमा ले आओ क्या अजब के अल्लाह ताला इसी मासूम यतीम के [संगीत] तफैल हमारे उजड़े हुए घराने में बरकत डाल डाल दे।
23:32
Speaker A
हजरत हलीमा उस कच्चे हुजरे में पहुंची और उन्होंने यतीम मोहम्मद को अपनी गोद में उठा लिया और फिर चश्म फलक ने देखा कि कुदरत ने कैसे एक ही पल में जमाने का बांसा पलट दिया। हजरत हलीमा फरमाती हैं,
23:47
Speaker A
जैसे ही मैंने उस मुबारक बच्चे को अपने सीने से लगाया, मेरा खुश्क सीना फौरन दूध के चश्मे की तरह उबल पड़ा। नन्हे मोहम्मद ने सैर होकर पिया और उनके बाद मेरे अपने भूखे बेटे ने भी बरसों बाद पेट भरकर पिया
24:02
Speaker A
और दोनों बच्चे मुस्कुरा कर गहरी नींद सो गए। हलीमा के शौहर हारिस जब रात को [संगीत] खेमे के बाहर बंधी हुई अपनी बूढ़ी सूखी ऊंटनी के पास गए तो उनकी आंखें फटी की फटी रह गई। ऊंटनी के थन दूध से इस कदर
24:17
Speaker A
भर चुके थे कि जमीन पर कतरे गिर रहे थे। उन्होंने दूध धोना शुरू किया तो उनके तमाम बर्तन भर गए। पूरी रात मियां बीवी ने पेट भरकर दूध पिया और बरसों की भूख के बाद एक पुरसकून रात गुजारी। हारिस ने अपनी बीवी
24:33
Speaker A
[संगीत] का हाथ थामा और कांपती हुई अकीदतमंद आवाज में कहा ए हलीमा खुदा की कसम तुम जान लो कि तुम कोई आम यतीम बच्चा नहीं लाई बल्कि कायनात की सबसे बाबरकत और मुकद्दस रूह उठा लाई हो। दयारे बनी साद की बंजर वादियों में जहां
24:54
Speaker A
कैद साली की वजह से घास का एक तिनका ना था। हलीमा की बकरियां जब भी शाम को वापस लौटती तो उनके पेट भरे होते और उनके थन दूध से छिलक रहे होते। जबकि बाकी पूरे कबीले के जानवर भूखे और खुश्क लौटते थे।
25:10
Speaker A
बनू साद के सरदार अपने चरवाहों पर चीखते। तुम लोग हमारे जानवरों को ऐसी सूखी और बंजर जमीन में चराने क्यों ले जाते हो?
25:17
Speaker A
तुम्हें नजर नहीं आता कि यह भूखे और कमजोर होकर लौट रहे हैं। तुम भी अपनी बकरियां वहीं क्यों नहीं चराते जहां हलीमा का चरवाहा चराता है। मगर वो नादान नहीं जानते थे कि बरकत जमीन की मिट्टी में नहीं बल्कि उस यतीम [संगीत]
25:35
Speaker A
बच्चे के मुबारक कदमों में थी। आप सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम दियारे बनी साद की खुली पुरसुकून और मुअत्तर फजाओं में परवान चढ़ते रहे। जब आपकी उम्र मुबारक तकरीबन चार या पांच साल हुई [संगीत] तो सेहरा के उस खामोश माहौल में एक ऐसा माफक
25:52
Speaker A
उल फितरत और लरजाखेज वाकया पेश आया जिसने गैब के तमाम पर्दों को चाक कर दिया। एक दिन आप सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम अपने रजाई भाई जमरा के साथ बस्ती के खमों के पीछे छोटी-छोटी बकरियां चरा रहे थे कि अचानक नीले आसमान से दूध या सफेद पोशाक
26:10
Speaker A
में मलबूस दो फरिश्ते हजरत जिब्राइल और हजरत मिखाइल अलैहि अस्सलाम जाहिर हुए। फरिश्ते आगे बढ़े। उन्होंने नन्हे मोहम्मद सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम को नरमी के साथ आगोश में लिया और एक तरफ ले जाकर जमीन पर लिटा दिया। उन्होंने आपके सीना मुबारक को
26:28
Speaker A
बगैर किसी तकलीफ दर्द या खून के एक ही लम्हे में चाक कर दिया। फरिश्तों ने आपके कलबे अथर को बाहर निकाला। [संगीत] हजरत जिब्राइल ने उसमें से खून का एक छोटा सा सिया लोथरा निकालकर बाहर फेंका और पुरजलाल आवाज में फरमाया [संगीत]
26:44
Speaker A
यह आपके अंदर शैतान का वो हिस्सा था जिसके जरिए वो बनी नौए इंसान को बहकाता [संगीत] है। जिसे रब्बे कायनात के हुक्म से हमेशा के लिए निकाल दिया गया है। फिर हजरत जिब्राइल ने एक सोने के तश्त में रखे आबे
26:58
Speaker A
ज़मजम से उस कलबे मुबारक को धोया। उसे नूर, हिकमत, ईमान, यकीन और तमाम जहानों की रहमत से लबरेज कर दिया। और वापस सीना मुबारक में रखकर चाक किए हुए हिस्से को इस तरह मिला दिया कि उस पर सिर्फ एक बारीक नूरी
27:14
Speaker A
लकीर का निशान बाकी रह गया। नन्हा रजाई भाई यह सारा हैबतनाक मंजर देखकर दहशत [संगीत] के आलम में कांपता हुआ बस्ती की तरफ दौड़ा। वो हांपता हुआ अपने खेमे में दाखिल हुआ और चीख कर पुकारा। अम्मी अब्बा दौड़िए। मेरे कुरैशी भाई को सफेद लिबास
27:32
Speaker A
वाले दो अजनबियों ने पकड़ कर जमीन पर पटक दिया है और उनका सीना चीर डाला है और उनका सीना चीर डाला है। [हांफने की आवाज़] हलीमा और उनके शौहर हारिस के पैरों तले से जमीन निकल गई। वो बदहवास होकर जंगल की तरफ
27:46
Speaker A
भागे। जब वो जाए वो कुआं पर पहुंचे तो देखा कि नन्हे मोहम्मद बावकार अंदाज में अकेले खड़े हैं। अगरचे चेहरे अनवर का रंग हैबत इलाही से कुछ मुतग था। मगर आंखों में वही पुरसकून जलाल दमक रहा था। हजरत हलीमा
28:01
Speaker A
ने रोते हुए आपको कलेजे से लगा लिया। चेहरा चूमा और बार-बार पूछने लगी कि [संगीत] मेरे लाल तुम्हें क्या हुआ है?
28:09
Speaker A
नन्हे मोहम्मद ने मुस्कुराकर तमाम माजरा बयान कर दिया। हलीमा और हारिस पर खौफ तारी हो गया कि कहीं [संगीत] सेहरा की तन्हाई में उस गैर मामूली बच्चे पर कोई शैतानी या जिन्नाती साया ना पड़ जाए। या हासिद उनकी
28:22
Speaker A
जान के दुश्मन ना बन जाए। उन्होंने मुत्तफका फैसला किया कि अब इस अमानत को मजीद सेहरा में रखना खतरे से खाली नहीं और वह बोझल दिल और नम आंखों के साथ उस बाबरकत बच्चे को मक्का ले जाकर [संगीत] उनकी
28:36
Speaker A
वालिदा हजरत आमना के हवाले करा आए। मक्का वापसी के बाद हुजूर सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम अपनी वालिदा हजरत आमना की आगोश मोहब्बत में परवान चढ़ने लगे। जब आपकी उम्र मुबारक 6 साल हुई तो हजरत आमना ने अपने मरहूम शौहर हजरत अब्दुल्लाह की कब्र
28:53
Speaker A
की जियारत और यशसरब में अपने ननिहाल बनू नज्जार से मिलने का पुख्ता इरादा [संगीत] किया। इस सफर में उनके साथ छ साला नन्हा बेटा मोहम्मद सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम और वफादार खादिमा हजरत उम्मे ऐमन भी थी। ऊंटों का यह छोटा सा काफिला [संगीत] मदीना
29:09
Speaker A
पहुंचा। एक पूरे महीने तक हजरत आमना अपने शौहर की यादों में आंसू बहाती रही और नन्हे मोहम्मद सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम ने मदीना के बनू नजार के बच्चों के साथ [संगीत] वक्त गुजारा तालाब में तैरना सीखा और उस मकान को देखा जहां उनके वालिद ने
29:26
Speaker A
आखिरी सांसे ली थी। जब मदीना से मक्का वापसी का सफर शुरू हुआ तो तपते हुए सेहरा [संगीत] की गर्म हवाएं चल रही थी। मक्के और मदीना के ऐन दरमियान वाक एक वीरान और पथरीली बस्ती अबवा के मकाम पर हजरत आमना
29:41
Speaker A
की तबीयत अचानक बिगड़ गई और वो शदीद बुखार की लपेट में आ गई। सेहरा का वो सन्नाटा [संगीत] कितना खौफनाक था। ना कोई सायादार दरख्त, ना कोई तबीब और ना पानी का कोई बड़ा चश्मा। छ साल का यतीम बच्चा अपनी नजा
29:58
Speaker A
के आलम में तड़पती हुई मां के सिरहाने रेत पर बैठा। अपने नन्हे हाथों से मां का चेहरा सहला रहा था और उनकी आंखों से आंसू बहकर मां के चेहरे पर गिर रहे थे। हजरत आमना ने अपनी आखिरी कुत जमा की। अपने लखते
30:14
Speaker A
जिगर के चेहरे पर निगाह डाली। उनके गालों [संगीत] को चूमा और वो तारीख वसीयत फरमाई जो तारीख के ओराक पर हमेशा के लिए अम्र हो गई। ऐ मेरे पाकीजा बेटे खुदा तुम्हें हर बुराई से महफूज़ रखे। अगर मेरा ख्वाब
30:29
Speaker A
सच्चा है तो तुम इस दुनिया के सबसे अजीम नबी बनकर जलवागर होगे। जान लो [संगीत] मेरे लाल हर जिंदा को मरना है और हर नए को पुराना होना है। मैं इस दुनिया से रुखसत हो रही हूं। मगर मेरा जिक्र कभी खत्म नहीं
30:44
Speaker A
होगा। क्योंकि मैंने एक बेमिस्ल और लाजवाल हस्ती को जन्म दिया है। और इन अल्फाज़ के साथ ही [संगीत] हजरत आमना ने हमेशा के लिए आंखें बंद कर ली। तारीख का वो मंजर कितना [संगीत] दिल दहला देने वाला था। 6 साल का
30:59
Speaker A
एक मासूम बच्चा जिसका बाप पहले ही दुनिया में नहीं था। अब उस तपते हुए वीराने में अपनी मां की बेजान लाश के पास अकेला बैठा बिलख रहा था। हजरत उम्मे ऐमन और नन्हे मोहम्मद ने मिलकर रोते हुए हजरत आमना के
31:15
Speaker A
लिए अबवा की तपती रेत में कब्र खोदी और उन्हें सुपुर्द खाक किया। जब उम्मे ऐमन ने वापसी के लिए ऊंट की मार पकड़ी तो छ साला मोहम्मद बार-बार पलट कर अपनी मां की कच्ची कब्र को हसरत भरी निगाहों से देख रहे थे।
31:32
Speaker A
हजरत उम्मे ऐमन जब उस यतीम बच्चे को लेकर मक्का पहुंची और दादा अब्दुल मुत्तलिब [संगीत] के सामने पेश किया तो 80 साला बूढ़े दादा की चीख निकल गई और उन्होंने [संगीत] अपने यतीम पोते को अपने सीने से लगा लिया। अब्दुल मुत्तलिब ने अपनी तमाम
31:47
Speaker A
मशरूफियात को छोड़कर अपनी बाकी [संगीत] मांदा जिंदगी सिर्फ और सिर्फ उस बच्चे की परवरिश और खिदमत के लिए वफ कर दी। वो जहां भी जाते नन्हे मोहम्मद को साथ रखते। [संगीत] रात को सोते वक्त अपने पहलू में सुलाते और खाना खाते तो पहले उनके मुंह
32:04
Speaker A
में लुकमा देते। मगर कुदरत उस यतीम को इंसानी सहारों [संगीत] से आजाद करके खालिसतन अपने सहारे पर परवान चढ़ाना चाहती थी। शफकत का यह साया भी ज्यादा देर कायम ना रह सका। जब आपकी उम्र मुबारक ठीक 8 [संगीत] साल, दो माह और 10 दिन हुई तो
32:21
Speaker A
अब्दुल मुत्तलिब शदीद अलील हो गए और उनकी वफात का वक्त आ पहुंचा। वफात से ऐन कब्ल अब्दुल मुत्तलिब ने अपने तमाम [संगीत] बेटों को बुलाया और इस बात पर गौर किया कि इस कीमती अमानत को किसके सुपुर्द किया
32:34
Speaker A
जाए। उन्होंने [संगीत] अपने सबसे शफीक बा अखलाक और हजरत अब्दुल्ला के हकीकी सगे भाई अबू तालिब का इंतखाब किया और उनका हाथ पकड़ कर फरमाया ए अबू [संगीत] तालिब मैं तुम्हारे सुपुर्द अपने इस यतीम बच्चे को कर रहा हूं जिसके बाप का साया उसकी पैदाइश
32:50
Speaker A
से पहले उठ गया था और जिसकी मां भी बचपन में छोड़ गई इसे अपनी जान से बढ़कर संभालना क्योंकि यह बच्चा एक अजीम शान मर्तबा हासिल करेगा और फिर अब्दुल मुत्तलिब का इंतकाल हो गया मक्का के गली कूचों में जब दादा का जनाजा
33:04
Speaker A
उठाया गया तो 8 साल के मोहम्मद अपने दादा के जनाजे के पीछे अपने छोटे-छोटे कदमों से चल रहे थे और उनकी आंखों [संगीत] से आंसू की छड़ी बेह रही थी। अबू तालिब ने अपने बाप से किया हुआ वादा निभाया और अपने उस
33:19
Speaker A
भतीजे [संगीत] को अपने घर ले आए। जरा गौर कीजिए तारीख के इस बेमिसाल सफर पर। वो यतीम बच्चा जिसके पैदा होने से पहले बाप का साया छीन गया। 6 साल की उम्र में तपते सेहरा के बायाबान में मां की आगोश रुखसत
33:33
Speaker A
हो गई और 8 साल की उम्र में शफीक [संगीत] दादा भी दाग मुफारकत दे गए। इसी यतीम ने अपनी सच्चाई, बेदाग अमानतदारी और पाकीजा किरदार की बदौलत पूरे अरब को झुकने पर मजबूर किया और मक्का की मलका सैयदा खदीजा
33:49
Speaker A
के दिल और तारीख के औरा पर [संगीत] अबदी हुक्मरानी कायम की। यह इस आफताब नबूवत सल्लल्लाहो अलैह वसल्लम की विलादत बचपन और जवानी की वो सच्ची दास्तान थी जिसने मक्का के [संगीत] संगलाख रेगजारों से निकलकर आगे चलकर गारे हिरा की चोटियों से पूरी
34:07
Speaker A
इंसानियत को जहालत और कुफ्र के अंधेरों से निजात [संगीत] दिलानी थी और तमाम जहानों के लिए अबदी रहमत बनना था। अगर आज की इस तफसीली तारीख और पुरनूर दास्तान ने आपके [संगीत] दिल को छुआ है और इस रहमत
34:21
Speaker A
मुजस्सिम सल्लल्लाहहु अलैह वसल्लम की मोहब्बत ने [संगीत] आपकी आंखों को नम किया है तो कमेंट सेक्शन में अपने प्यारे आका हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम की बारगाहे अकदस में एक बार सच्चे दिल से दूरूदो [संगीत] सलाम का नजराना
34:36
Speaker A
जरूर पेश कीजिए। इस मुबारक वीडियो को अपने दोस्तों, रिश्तेदारों और प्यारों के साथ शेयर कीजिए [संगीत] ताकि सीरत तबा का यह नूरानी पैगाम दुनिया के हर कोने तक पहुंचे। और तारीख इस्लाम के मुस्तनद, सच्चे और सिनेैटिक वाक्यात से जुड़े रहने
34:52
Speaker A
के लिए [संगीत] दास्ताने कामिल को सब्सक्राइब करके इस नूरानी कारवा का हिस्सा बने। जजाकुम्ला खैरा।
Topics:मक्काजमजमअब्दुल मुत्तलिबअब्दुल्लाहकाबापैगंबर मुहम्मदइस्लामी इतिहासकुरैशतौहीदयतीमी सफर

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