कर्बला के बाद बीबी ज़ैनब और इमाम ज़ैनुल आबदीन के संघर्ष और खुतबात का विस्तृत वर्णन।
Key Takeaways
- कर्बला के बाद भी अहले बैत ने हिम्मत और हक की आवाज़ को कायम रखा।
- बीबी ज़ैनब की बहादुरी ने इमामत की विरासत को बचाया।
- इमाम ज़ैनुल आबदीन के खुतबात ने जुल्म के खिलाफ जागरूकता बढ़ाई।
- कैदियों के रूप में अहले बैत का सफर उनके संघर्ष का प्रतीक है।
- यजीद के दरबार में अहले बैत ने अपनी पहचान और हक की बात मजबूती से कही।
What the video covers
- कर्बला के मैदान में शहीदों के बाद अहले बैत के साथ क्या हुआ, इसका वर्णन।
- बीबी ज़ैनब ने जले हुए खेमे से इमाम ज़ैनुल आबदीन को सुरक्षित निकाला।
- कैदियों के रूप में अहले बैत को पहले कूफा और फिर दमिश्क ले जाया गया।
- कूफा में लोगों की प्रतिक्रिया और अहले बैत के खुतबात का प्रभाव।
- इमाम ज़ैनुल आबदीन ने यजीद के दरबार में हक की बात कही।
- बीबी ज़ैनब ने यजीद के दरबार में जुल्म के खिलाफ प्रभावशाली खुतबा दिया।
- कैदियों को शहरों में फतह के तौर पर पेश किया गया, पर हकीकत अलग थी।
- खुतबात ने जुल्म के खिलाफ हक की गवाही को सदियों तक जीवित रखा।
- इमाम ज़ैनुल आबदीन ने अपने वंश और हक की पहचान कराई।
- वीडियो में कर्बला के बाद अहले बैत की मजबूती और संघर्ष को दर्शाया गया।
Chapters
- 00:00कर्बला के बाद का माहौल और शहीदों की स्थिति
- 00:47अहले बैत के साथ क्या हुआ और खुतबात की भूमिका
- 02:14इमाम ज़ैनुल आबदीन का कैदियों के साथ सफर
- 03:40शाम गरीबा की रात और बीबी ज़ैनब की हिफाजत
- 05:10कूफा में अहले बैत का प्रवेश और लोगों की प्रतिक्रिया
- 06:42बीबी ज़ैनब का खामोश कूफा को संबोधित करना
- 09:10इमाम ज़ैनुल आबदीन का कूफा में खिताब
- 12:24इबने जियाद के दरबार में अहले बैत की बहादुरी
- 18:20दमिश्क में कैदियों का प्रदर्शन और यजीद का दरबार
- 19:10इमाम ज़ैनुल आबदीन का मिंबर पर खुतबा और यजीद से संवाद
Full Transcript — Download SRT & Markdown
Speaker A
कर्बला का मैदान खामोश हो चुका था। तलवारों की झिनकार रुक चुकी थी। नेजों पर सर बुलंद थे। रेत पर शोहदा के अदात पड़े थे। फुरात करीब था। मगर प्यास अब भी जिंदा थी। 10 मुहर्रम का सूरज ढल चुका था।
Speaker A
मगर अहले बैत की आजमाइश अभी खत्म नहीं हुई थी। अब एक ऐसा सफर शुरू होने वाला था जिसने कर्बला के पैगाम को रहती दुनिया तक पहुंचाना था। आज की इस वीडियो में हम जानेंगे आशुरा के बाद अहले बैत के
Speaker A
साथ क्या हुआ। कर्बला से कूफा और फिर शाम तक उन पर क्या गुजरी? इबने जियाद और यजीद के दरबारों
Speaker A
में क्या पेश आया? और वो कौन से खुदबात थे जिन्होंने जुल्म के मुकाबले में हक की गवाही को हमेशा के लिए
Speaker A
जिंदा कर दिया। आज आपसे मेरा एक सवाल है। अगर आप उस वक्त कूफा या शाम में मौजूद होते तो आपके ख्याल में सबसे ज्यादा दिल हला देने वाला लम्हा कौन सा होता? अपना जवाब कमेंट में जरूर लिखिए। 10 मुहर्रम 61
Speaker A
हिजरी को कर्बला में इमाम हुसैन इबने अली अल सलाम उनके अहले बैत असहाब और वफादार साथियों में से अक्सर शहीद कर दिए गए। जंग के इख्तताम पर सिर्फ चंद अफराद जिंदा बचे। जिनमें खवातीन, बच्चे और बीमारी की वजह से
Speaker A
जंग में शरीक ना होने वाले इमाम जैनुल आबदीन सबसे नुमाया थे। उन्हीं जिंदा बच जाने वालों को कैदी बनाकर पहले कूफा और फिर शाम ले जाया गया और यही सफर इस वाक्य का अगला बाप बना। रिवायत में आता है कि
Speaker A
लश्कर ने खेमों को लूटा। फिर उन्हें आग लगा दी। औरतों के पर्दे छीन लिए गए। बच्चे घबरा कर इधर-उधर भागने लगे और पूरा मैदान एक ऐसी दहशत में बदल
Speaker A
गया जिसे अल्फाज मुकम्मल तौर पर बयान नहीं कर सकते।
Speaker A
इसी रात को तारीख शाम गरीबा के नाम से याद करती है। यानी वो रात जब नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के घराने की औरतें और बच्चे बगैर किसी पनाह के रह गए। बाज रिवायत के मुताबिक इसी अफरातफरी में
Speaker A
बीबी ज़ैनब अलह सलाम ने इमाम ज़ैनुल आबदीन अल सलाम को जलते हुए खैमे से महफूज़ निकाला। बच्चों को एक जगह जमा किया और एक टूटे हुए नेज़ या लाठी के सहारे पूरी रात उनकी हिफाजत करती रही। जरा तसवुर कीजिए।
Speaker A
एक तरफ भाई, बेटे, भतीजे और वफादार साथी रेत पर पड़े हैं। दूसरी तरफ मासूम बच्चों की सिसकियां गूंज रही हैं। और उन सबके दरमियान एक खातून पूरे काफिले को संभाले खड़ी हैं। वो बीबी ज़ैनब अली सलाम थी। रिवायत के मुताबिक 11 मुहर्रम को अहले बैत
Speaker A
अल सलाम के जिंदा बच जाने वाले अफराद को कैदियों की सूरत में कर्बला से रवाना किया गया। इमाम हुसैन अली सलाम और दीगर शोहदा के सरों को नेजों पर बुलंद किया गया और काफिले को कूफा की तरफ ले जाया गया। जब
Speaker A
काफिला कूफा में दाखिल हुआ तो लोग तमाशा देखने के लिए जमा हो गए। उनमें से अक्सर को हकीकत का इल्म नहीं था। यह लोग कौन हैं? सुना है यह हुकूमत के खिलाफ बगावत करने वाले लोग हैं। शायद इसी
Speaker A
वजह से इनका यह हाल हुआ है। काफिले में मौजूद बच्चों को देखकर कुछ लोगों ने खजूर, रोटी और दूसरी गजा देने की कोशिश की। मगर सैयदा उम्मी कुलसूम ने उन्हें रोक दिया क्योंकि सदका अहले बैत पर जायज नहीं। जैसे
Speaker A
ही लोगों ने अहले बैत की गुफ्तगू सुनी, उनकी कैफियत बदलने लगी। शोर खत्म हो गया। मजमा साकित हो गया। बाज रिवायत ने इस मंजर को यूं बयान किया गया है कि लोग ऐसे
Speaker A
खड़े थे गोया उनके सरों पर परिंदे
Speaker A
बैठे हो। इसी लम्हे बहुत से अहले कूफा पर पहली बार यह हकीकत आशिकार हुई कि जिन्हें वो कैदी समझ रहे थे वो रसूल्लाह सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम का अपना घराना था। अब तसवुर कीजिए कैद का सफर, थकन, प्यास, बेपर्दगी और गम। लेकिन उन सबके
Speaker A
बावजूद एक आवाज ऐसी थी जिसमें ना खौफ था ना कमजोरी। वो आवाज थी बीबी ज़ैनब अलह सलाम की। रिवायत में आता है कि आप अलह सलाम ने अहले कूफा को खामोश होने का इशारा किया।
Speaker A
देखते ही देखते पूरा मजमा साकित
Speaker A
हो गया। फिर आप अल सलाम ने उन लोगों को मुखातिब किया जिन्होंने कभी इमाम हुसैन अली सलाम को खुतूत लिखे थे। बैत का वादा किया था। मगर फैसला कुन लम्हे में साथ छोड़ दिया। ऐ अहले कूफा ऐ अहद तोड़ने वालों क्या अब
Speaker A
तुम रोते हो? रोते रहो। मगर याद रखो यह आंसू उस खून को वापस नहीं ला सकते जो तुम्हारे हाथों बहाया गया। तुमने नबी सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम के नवासे को शहीद किया। उनके घराने की हुरमत पामाल की और आज अफसोस कर रहे हो। तुम्हारी मिसाल उस
Speaker A
औरत की सी है जो मजबूत धागा बुनकर खुद ही उसे तोड़ डाले।
Speaker A
यह अल्फाज़ सिर्फ मलामत नहीं थे। बल्कि अहले कूफा के जमीर पर एक ऐसा वार थे जिसने उन्हें अपने किरदार के सामने खड़ा
Speaker A
कर दिया। रिवायत के मुताबिक मजमा में आहो
Speaker A
बुका शुरू हो गई। मगर वक्त गुजर चुका था। उसके बाद इमाम ज़ैनुल आबदीन ने लोगों से खिताब किया। ए लोगों जो मुझे जानता है वह जानता है और जो नहीं जानता वो सुन ले मैं अली इब्नल हुसैन हूं। मैं उस हुसैन का
Speaker A
बेटा हूं जिसे फुराद के किनारे प्यासा शहीद किया गया। मैं उस घराने का फर्द हूं जिसके मर्द कत्ल कर दिए गए और औरतों को कैद कर लिया गया। बताओ जब रसूल्लाह सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम तुमसे पूछेंगे कि तुमने मेरी आल के साथ क्या किया तो तुम
Speaker A
क्या जवाब दोगे? यह सवाल पूरे मजमा पर बिजली बनकर गिरा। कूफा वालों को पहली मर्तबा एहसास हुआ कि खामोश रहना भी कभी जुल्म में शरीक हो जाना होता है। कूफा से अगला मरहला उबैदुल्लाह इबने जियाद का दरबार था। जहां तमाम
Speaker A
कैदियों को पेश किया गया। इबने जियाद समझता था कि जंग जीतने के बाद अब वो अहले बैत का हौसला भी तोड़ देगा। लेकिन हुआ इसके बरक्स। रिवायत में आता है कि उसने बीबी ज़ैनब को देखकर तहकीब से पूछा
Speaker A
देख लिया अल्लाह ने तुम्हारे घराने के साथ क्या किया? बीबी ज़ैनब अलैहिस्सलाम ने बगैर किसी खौफ के जवाब दिया। फासिक रुसवा होता है।
Speaker A
फाजिर झूठा साबित होता है। और हम उनमें से नहीं।
Speaker A
इसी दरबार में इबने जियाद ने इमाम ज़ैनुल
Speaker A
आबदीन अलह सलाम से गुफ्तगू की। जब इमाम अलह सलाम ने हक बात कही तो वो गुस्से में आ गया और कत्ल का हुक्म देने लगा। इसे कत्ल कर दो। इसी लम्हे बीबी ज़ैनब अल ससलाम आगे बढ़ी और इमाम को अपने हिसार में ले लिया। रिवायत
Speaker A
के मुताबिक आप अलह सलाम ने फरमाया अगर उसे कत्ल करना है तो पहले मुझे कत्ल करना पड़ेगा। यह सिर्फ एक बहन का जज्बा नहीं था। यह इमामत के आखिरी वारिस की हिफाजत थी। अगर इस लम्हे इमाम ज़ैनुल आबदीन शहीद कर दिए
Speaker A
जाते, तो सिलसिला इमामत वहीं मुनकता हो जाता। इबने जियाद पीछे हट गया। कूफा में कुछ अरसा कैद रखने के बाद अहले बैत को यजीद
Speaker A
के हुक्म पर दमिश्क यानी शाम रवाना कर दिया गया। यह सफर इंतहाई कठिन
Speaker A
था।
Speaker A
शोहदा के सरों को नेजों पर बुलंद रखा गया और काफिले को मुख्तलिफ शहरों से गुजारा गया ताकि उसे हुकूमत की फतह के तौर पर पेश किया जा सके। जब काफिला दमिश्क पहुंचा तो शहर में जश्न का माहौल था।
Speaker A
गलियां सजाई गई थीं, ढोल बज रहे थे और लोगों को यही बताया गया था कि हुकूमत ने एक बड़ी फतह हासिल की है। उन्हें मालूम नहीं था कि जिन कैदियों को वो देख रहे हैं वो रसूल्लाह सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम का
Speaker A
घराना है। बाज रिवायत में आता है कि कैदियों को रस्सियों में बांधकर शहर में फिराया गया और चलने में कमजोरी दिखाने पर सख्ती भी की जाती थी। फिर अहले बैत को यजीद के दरबार में पेश किया गया। इसके बाद
Speaker A
यजीद ने एक दरबारी खतीब को मेंबर पर भेजा ताकि वह हजरत अली और इमाम हुसैन के खिलाफ गुफ्तगू करें और हुकूमत के मौकिफ को सही साबित कर सके। इमाम ज़ैनुल आबदीन ने खतीब की गुफ्तगू सुनकर फरमाया तूने मखलूक को
Speaker A
खुश करने के लिए खालिक को नाराज किया है। फिर इमाम ज़ैनुल आबदीन ने यज़ीद से खिताब करने की इजाजत मांगी। मुझे लोगों से खिताब करने की इजाजत दीजिए। इब्तदा में यजीद ने इंकार किया। मगर हाजरीन के इसरार पर इजाजत देना पड़ी।
Speaker A
रिवायत के मुताबिक यजीद ने कहा, "यह ऐसा खानदान है जिसे इल्म विरासत में मिला है।" अगर यह मिंबर पर चढ़ गया तो हमारी हकीकत खोल कर रख देगा। इमाम ज़ैनुल आबदीन मिंबर पर तशरीफ ले गए और फरमाया ऐ लोगों हमें छह चीजों से नवाजा
Speaker A
गया है। इल्म, हिल्म, सखावत, फसाहत, शजात और मोमिनीन के दिलों में मोहब्बत। और हमें सात अजीम हस्तियों के जरिए फजीलत अता की गई है। मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहहु अलैहि वही वसल्लम हम में से हैं। अली मुर्तजा हम में से हैं। जाफर तैयार हम में से हैं।
Speaker A
हमजा हम में से हैं। फातिमा ज़हरा हम में से हैं। हसन और हुसैन हम में से हैं। मैं मक्का और मिना का बेटा हूं। मैं जमजम और सफा का बेटा हूं। मैं मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि व आही वसल्लम का नवासा
Speaker A
हूं। मैं अली मुर्तजा का बेटा हूं। मैं फातिमा जहरा का फरजंद हूं। मैं उस हुसैन का बेटा हूं जो कर्बला में शहीद किया गया। यह अल्फाज़ सुनते ही मजमा की कैफियत बदलने लगी। जब असर बढ़ता गया तो यज़ीद ने मुअजिन
Speaker A
को अजान देने का हुक्म दिया ताकि खुतबा वहीं रुक जाए। लेकिन आजान भी इमाम ज़ैनुल आबदीन की दलील बन
Speaker A
गई। जैसे ही मुअजिन ने कहा अशद अन मोहम्मद रसूल्लाह इमाम
Speaker A
ज़ैनुल आबदीन ने यजीद से पूछा ऐ यजीद बता
Speaker A
मोहम्मद सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम तेरे नाना हैं या मेरे? अगर तू कहे कि तेरे हैं तो झूठ बोलता है और अगर मानता है कि मेरे हैं तो फिर उनके घराने के साथ यह सुलक क्यों किया गया?
Speaker A
रिवायत के मुताबिक इस सवाल के बाद पूरे दरबार पर खामोशी छा गई। अगर इमाम ज़ैनुल आबदीन का खुतबा नसब का बुरहान था तो बीबी ज़ैनब अली सलाम का खुतबा जुल्म के चेहरे से नकाब उतार देने वाली आग थी। रिवायत में
Speaker A
आता है कि जब यज़ीद ने तकब्बुर, शायरी और सियासी गलबे के लहजे में गुफ्तगू की तो बीबी ज़ैनब ने उसके जवाब में ऐसा खुतबा दिया जो सदिय
Topics:कर्बलाबीबी ज़ैनबइमाम ज़ैनुल आबदीनअहले बैतयजीदइबने जियादखुतबाशहादतइस्लामिक इतिहासमुस्लिम विरासत











