आदम (अ.स) से पहले जमीन पर जिन्नात की सल्तनत थी, उनकी बगावत और फरिश्तों के साथ जंग की कहानी।
Key Takeaways
- जमीन पर आदम (अ.स) से पहले जिन्नात की एक शक्तिशाली और विभाजित सल्तनत थी।
- बगावत और गुरूर ने जिन्नात की तबाही का कारण बनाया।
- अजाजील ने इबादत और वफादारी के रास्ते को चुना लेकिन अंततः गर्व में डूब गया।
- फरिश्तों और जिन्नात के बीच एक ऐतिहासिक जंग हुई जिसने जमीन की तक़दीर बदल दी।
- इंसान की तखलीक एक नई शुरुआत थी जो अजाजील और जिन्नात की दुनिया को चुनौती देगी।
What the video covers
- आदम (अ.स) की तखलीक से पहले जमीन पर जिन्नात की सल्तनत थी जो ताकतवर और हुक्मरान थे।
- जिन्नात में से कुछ ने अपनी ताकत पर गुरूर किया और बगावत कर दी, जिससे जमीन पर फसाद फैल गया।
- अजाजील नामक जिन्न ने अपनी इबादत और वफादारी से फरिश्तों के करीब पहुंचने की कोशिश की।
- जंग का वक्त आया जब फरिश्तों की फौज जमीन पर उतरी और बागी जिन्नात के खिलाफ लड़ाई हुई।
- अजाजील ने बागी जिन्नात के खिलाफ कयादत की और फतह हासिल की, लेकिन उसके दिल में भी तकब्बुर का बीज उगने लगा।
- जंग के बाद जिन्नात की खुली हुकूमत खत्म हो गई और जो बचे वे दूरदराज इलाकों में छिप गए।
- फरिश्ते अपना मिशन पूरा कर वापस आसमानों को लौट गए, लेकिन अजाजील की नई आजमाइश शुरू हुई।
- अजाजील ने खुद को फरिश्तों के बराबर समझना शुरू किया, जो उसकी तबाही का कारण बना।
- आखिरकार एक नई मखलूक, इंसान, मिट्टी से बनाई जाएगी जो अजाजील की चुनौती होगी।
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Speaker A
एक जमाना था जब जमीन जन्नत से आबाद थी। आदम अल सलाम की तखलीक से पहले वो यहां बसते थे। हुकूमतें कायम करते थे और अपने बादशाहों के ज़रे साया जिंदगी गुजारते थे। यह आम मखलूक नहीं थी। उनमें ऐसे हुक्मरान
Speaker A
भी थे जिनके पास गैर मामूली कुत्ते थे। वो नजरों से गायब हो सकते थे। तेजी से सफर कर सकते थे और दूसरों के दिलों [संगीत] में वसवसे डाल सकते थे। वक्त गुजरता गया और उनकी सल्तनतें फैलती चली गई। उन्होंने
Speaker A
अजीम शहर आबाद किए। लेकिन फिर ताकत ने उनके दिलों में गुरूर पैदा कर दिया। कुछ जिन्नात ने अपने रब की इतात छोड़ दी। उन्होंने लोगों से अपनी ताजीम और फिर अपनी इबादत का मुतालबा करना शुरू कर दिया। बुत
Speaker A
खड़े किए गए। बाततिल रसूमात फैलने लगी और जुल्म आहिस्ता-आहिस्ता आम होता गया। फिर जादू ताकत हासिल करने का जरिया बन गया। खुफिया महफिलें सजने लगीं, पोशीदा रस्में अदा होने लगीं और ऐसे उलूम को बेचा जाने लगा जो छुपे रहने चाहिए थे। ताकतवर कबीलों
Speaker A
ने कमजोरों को गुलाम बना लिया। जो जिन्नात अब भी अपने रब को याद रखते थे वो खौफ के बास छुपने पर मजबूर हो गए और अपनी ही जमीनों से बेदखल कर दिए गए। लेकिन आखिर वो कौन सी चीज थी जिसने जिन्नात की इस दुनिया
Speaker A
को फसाद में बदल दिया? वो कौन सा लम्हा था जब इतात की जगह बगावत ने ले ली और क्यों फरिश्ते उस बढ़ते हुए फसाद को देखकर फिक्रमंद होने लगे थे। इस सवाल का जवाब जानने के लिए हमें जिन्नात की तारीख के उस
Speaker A
मोड़ तक जाना होगा जहां से उनकी तबाही का आगाज हुआ। हमें यह समझना होगा कि आखिर वो मखलूक कैसे गुमराह हुई और कैसे एक ऐसा जिन जो कभी इबादत और इज्जत की अलामत समझा जाता था, बाद में इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन बन
Speaker A
गया। इस्लामी उलमा बयान करते हैं कि जिन्नात भी मुख्तलिफ कौमों और कबीलों में तकसीन थे। वह भी इंसानों की तरह मुख्तलिफ ज़बाने बोलते थे। उनकी बस्तियां और शहर हमारी दुनिया जैसे नहीं थे क्योंकि उनका वजूद ऐसे जहानों और पहलुओं से जुड़ा हुआ
Speaker A
था जो इंसानी आग से पोशीदा हैं। उन्हें आग की एक ऐसी किस्म से पैदा किया गया था जो आम आग की तरह नहीं थी। इसीलिए उनकी हकीकत को मुकम्मल तौर पर समझना इंसान के लिए आसान नहीं। उनमें से कुछ जिन्नात अपने रब
Speaker A
की इतात पर कायम रहे। [संगीत] वो खामोश, नेक और फरमाबरदार थे। लेकिन सब ऐसे नहीं थे। कुछ ने अपनी ताकत को देखा और उस पर फक्र करने लगे कि उन्हें अपनी हैसियत हकीकत से कहीं बड़ी दिखाई देने लगी।
Speaker A
उन्होंने आजादी को नेमत के बजाय बरतरी समझ लिया। रफ्तार रफ्ता उनके दिलों में हसद ने जगह बनानी शुरू कर दी। वह फरिश्तों को देखते और सोचते कि उन्हें आसमानों में यह मकाम क्यों मिला है? वह सवाल उठाने लगे कि
Speaker A
हम जमीन तक महदूद क्यों हैं? जबकि फरिश्ते आसमानों [संगीत] में गर्दिश करते हैं। यही सवाल आहिस्ता-आहिस्ता उनके दिलों को तारीक करने लगा। मगर इसी बढ़ते हुए फसाद के दरमियान एक ऐसा नाम भी था जो बाकी सबसे मुख्तलिफ था। एक [संगीत] ऐसा जिन जिसके
Speaker A
पास सिर्फ ताकत ही नहीं, बल्कि इबादत भी थी। उसका नाम अजाजील था। जब उसकी कौम गुरूर, जुल्म और नाफरमानी में डूबती [संगीत] जा रही थी, वह अपने रब की इतात में आगे बढ़ रहा था। जिन्नात की सरकशी अब
Speaker A
हद से बढ़ चुकी थी। जादू ताकत खरीदने और बेचने का जरिया बन चुका था। कमजोर गुलाम बनाए जा रहे थे। अल्लाह के फरमाबरदार जिन्नात खौफ के बास छुपते फिर रहे थे। वो दुनिया जो कभी आजादी और ताकत की अलामत थी।
Speaker A
[संगीत] अब गुरूर, ख्वाहिशात और जुल्म का मैदान बन चुकी थी। मगर अल्लाह ताला उन सब से गाफिल नहीं था। फरिश्ते भी यह सब देख रहे थे। वो इस फसाद को बढ़ते हुए देखते रहे। यहां तक कि एक दिन हुक्म आ गया। अब
Speaker A
जमीन एक ऐसी जंग [संगीत] देखने वाली थी जो इससे पहले कभी नहीं देखी गई थी। एक तरफ आग से पैदा होने वाली मखलूक थी और दूसरी तरफ नूर के लश्कर। और इन्हीं हंगामाखेज वाक्यात के दरमियान अजाजील भी मौजूद था।
Speaker A
वह अपनी कौम को गुनाहों में डूबते हुए देख रहा था। उसके दिल में उनके खिलाफ शदीद नफरत पैदा हो चुकी थी। लेकिन उसके अंदर एक और जज्बा भी जन्म ले रहा था। एक ऐसी ख्वाहिश जो खामोशी से उसके दिल में जगह
Speaker A
बना रही थी। वो खुद को साबित करना चाहता था। सिर्फ जिन्नात के सामने नहीं बल्कि फरिश्तों [संगीत] के सामने भी। वह दिखाना चाहता था कि आग से पैदा होने वाली मखलूक भी वफादारी, इतात और कुर्बानी में किसी [संगीत] से कम नहीं। और इसीलिए जब जंग का
Speaker A
वक्त आया तो अजाजील अपने ही हमजिंसों के खिलाफ खड़ा होने के लिए तैयार था। लेकिन खतरा हमेशा गुनाह से शुरू नहीं होता। कभी-कभी वह नेकी के लिबास में आता है। और अजील अब इसी मोड़ के करीब पहुंच [संगीत]
Speaker A
रहा था। वह फरिश्ता नहीं था। वह ऐसी मखलूक भी नहीं था जिसे इबादत पर मजबूर किया गया हो। उसके पास इख्तियार था और इसी इख्तियार के बावजूद उसने इबादत का रास्ता [संगीत] चुना था। वो सजदों में आगे बढ़ता गया।
Speaker A
अल्लाह की मारफत हासिल करता गया। यहां तक कि बाज रिवायत में आता है कि उसे फरिश्तों के दरमियान भी एक खास मकाम हासिल हो गया था। आहिस्ता-आहिस्ता वो अपनी इबादत को देखने लगा। फिर उसे पसंद करने लगा। जब दूसरे उसे इज्जत की निगाह से
Speaker A
देखते तो उसके दिल में एक अजीब एहसास पैदा होता। शायद उसे खुद भी उसका एहसास ना था। लेकिन तकब्बुर का एक नन्हा सा बीज उसके दिल की जमीन [संगीत] में गिर चुका था। इसी दौरान अल्लाह ताला ने फैसला फरमा दिया।
Speaker A
जमीन पर फसाद अपनी इंतहा को पहुंच चुका था। बागी जिन्नात हदें पार कर चुके थे। चुनांचे अजाजील को हुकुम मिला कि वह उन सरकश जिन्नात के खिलाफ निकले जो अल्लाह की इतात छोड़ चुके थे। उसकी कयादत में फरिश्तों का एक अजीम लश्कर तैयार किया
Speaker A
गया। अब वह वक्त करीब था जब आसमान की फौजें जमीन पर उतरेंगी और एक ऐसी जंग शुरू होगी जो पहले कभी [संगीत] नहीं देखी गई थी। फिर वो लम्हा आ पहुंचा। जब आसमानी लश्कर जमीन की तरफ उतरा तो गोया फजा बदल
Speaker A
गई। ऐसी हैबतनाक रोशनी जाहिर हुई जिस जैसी रोशनी जमीन ने पहले कभी नहीं देखी थी। फरिश्ते मुकम्मल सुकून और इतात के साथ आगे बढ़ रहे थे। उनके चेहरों [संगीत] पर ना गुस्सा था ना गुरूर। सिर्फ अपने रब के
Speaker A
हुक्म की तामील और उन सबके आगे अज़ाजल खड़ा था। नूर की मखलूक के दरमियान वो वाहिद आग से पैदा होने वाला। उसके दिल में पूरा [संगीत] यकीन था कि यह लम्हा उसकी अजमत का सबूत बनने वाला है। उसे महसूस होने लगा था
Speaker A
[संगीत] कि उसकी इबादत ने उसे अपनी कौम से बुलंद कर दिया है। शायद इतना बुलंद कि वह खुद को फरिश्तों के करीब समझने लगा था। लेकिन एक फर्क था। फरिश्ते अपनी हद पहचानते थे और अाजियल अभी अपनी हद भूलने
Speaker A
के सफर [संगीत] पर निकल चुका था। जब सरकश जिन्नात ने उस अजीम लश्कर को अपनी तरफ बढ़ते देखा तो उनके दिलों में खौफ उतर गया। फिर भी [संगीत] उन्हें अपने जादू, अपनी ताकत और अपनी सल्तनतों पर भरोसा था।
Speaker A
उन्हें यकीन था कि वह बच जाएंगे। मगर जब अल्लाह का फैसला नाजिल हो जाए तो फिर कोई ताकत, कोई लश्कर और कोई सल्तनत उसे रोक नहीं [संगीत] सकती। फिर वो जंग शुरू हुई जिसने जमीन की तारीख बदल कर रख दी। हर तरफ
Speaker A
तबाही का मंजर था। आसमान गूंज रहे [संगीत] थे। जमीन लरज रही थी और ऐसा महसूस होता था जैसे पूरी [संगीत] कायनात इस मारके की गवाह बन गई हो। और इस मारके के मरकज में अज़ाजील मौजूद था। वो पूरी शिद्दत [संगीत]
Speaker A
के साथ लड़ रहा था। उसकी तलवार सरकश लश्करों को चीरती चली जा रही थी। हर हमले के साथ वो अपने रब की इतात का इजहार करता और [संगीत] हर फतह के साथ उसकी शोहरत बढ़ती जाती। फरिश्ते उसके इर्द-गिर्द एक
Speaker A
मुकम्मल नज्म के साथ हरकत कर रहे थे। लेकिन अजाजील के अंदर कुछ और भी बढ़ रहा था। एक ऐसा एहसास [संगीत] जिसे वह खुद भी पूरी तरह महसूस नहीं कर पा रहा था। जंग आगे बढ़ती गई। सरकश जिन्नात
Speaker A
के शहर एक-एक करके गिरने लगे। उनके महल्लात मिट्टी में मिल गए। उनके तख्त उलट दिए गए। वो हुक्मरान जो अपनी ताकत पर नाज करते थे। अपनी ही सल्तनतों के मलबे तले दफन हो गए। उनका जादू [संगीत] बिखर गया और
Speaker A
उनकी बरसों की जमा की हुई कुत लम्हों में खत्म हो गई। आखिरकार अल्लाह का फैसला गालिब आ गया। [संगीत] जमीन जो मुद्दतों से जुल्म और फसाद का बोझ उठाए हुए थी, उस फितने से पाक [संगीत] कर दी गई। जो चंद
Speaker A
बाकी बचे उन्हें जमीन के दूरदराज [संगीत] और पोशीदा मकामात की तरफ धकेल दिया गया। ऐसे मकामात जो आम इंसानी निगाह से ओझल हैं। बाज रिवायत में आता है कि आज जिन्नात की जो बस्तियां सुनसान वादियों, वीरान पहाड़ों और दूरदराज इलाकों में [संगीत]
Speaker A
मौजूद हैं। उनका ताल्लुक उन्हीं बाकी मांदा नस्लों से है। यू जमीन पर उनकी खुली हुक्मरानी का दौर खत्म हो गया। और एक नया दौर शुरू होने के करीब था। फरिश्ते अपना मिशन मुकम्मल करके आसमानों की तरफ वापस लौट गए। लेकिन एक नाम [संगीत] ऐसा था जो
Speaker A
सबकी तवज्जो का मरकज बन चुका था। अजील उसकी बहादुरी का जिक्र किया जा रहा था। उसकी वफादारी की तारीफ हो रही थी। उसे इज्जत दी जा रही थी क्योंकि वो इस जंग में नुमाया रहा था। उसने बागी जिन्नात के
Speaker A
खिलाफ [संगीत] कयादत की थी और फतह हासिल की थी। मगर इसी मकाम पर एक खतरा पैदा हुआ। अजाजील को महसूस होने लगा कि वह दूसरों से बुलंद हो चुका है। उसे लगता था कि वह इतात के आखिरी दर्जे तक पहुंच गया है। शायद
Speaker A
इसीलिए वह खुद को फरिश्तों के दरमियान खला देखने लगा। लेकिन उसे खबर नहीं थी कि कायनात की सबसे बड़ी आजमाइश अभी उसके सामने आने वाली है। क्योंकि अब एक नई मखलूक की तैयारी शुरू हो चुकी थी। [संगीत] ऐसी मखलूक जो ना नूर से पैदा की जाएगी और
Speaker A
ना आग से बल्कि मिट्टी से। अगरचे अजाजील मैदान जंग में कामयाब हो चुका था। मगर उसका दिल इस इम्तिहान
Speaker A
हुई। फरिश्ते जिन्होंने जिन्नात के फसाद, खून रेजी और बगावत को अपनी आंखों से देखा था। अल्लाह ताला के नए हुक्म की तरफ मुतवजे हुए। उन्हें बताया गया कि जमीन पर एक नई मखलूक को खलीफा बनाया जाएगा। एक ऐसी
Speaker A
मखलूक जो जमीन की वारिस होगी। तब फरिश्तों ने अर्ज किया क्या जमीन में ऐसी मखलूक को पैदा किया जाएगा जो फसाद फैलाएगी और खून बहाएगी [संगीत] जबकि हम तेरी हमद के साथ तस्बीह करते हैं और तेरी पाकी बयान करते
Speaker A
हैं। यह एतराज नहीं था ना ही नाफरमानी। यह सिर्फ उस तजुर्बे का इजहार था जो वह [संगीत] पहले देख चुके थे। उन्होंने देखा था कि इख्तियार रखने वाली मखलूक जब राहे हक से हटती है तो जमीन किस तरह फसाद से भर
Speaker A
जाती है। लेकिन वह उस हिकमत को नहीं जानते थे जो सिर्फ अल्लाह [संगीत] जानता था। फिर हुकुम हुआ कि जमीन से मिट्टी जमा की जाए। मुख्तलिफ इलाकों [संगीत] से मिट्टी लाई गई। कहीं की मिट्टी सख्त थी। कहीं नरम,
Speaker A
कहीं सिया, कहीं सुर्ख, कहीं सफेद। गोया आने वाली मखलूक की मुख्तलिफ [संगीत] तबयतें, मिजाज और सिफात इसी मरहले में जमा की जा रही थी। फिर उस मिट्टी को जोड़ा गया। उसे शक्ल दी गई और एक जिस्म [संगीत] तैयार कर दिया गया। मगर अभी वह बेजान था।
Speaker A
खामोश साकित रूह के इंतजार में। और इसी लम्हे अाजील वहां पहुंचा। वो उस खामोश जिस्म के करीब खड़ा हुआ और उसके दिल में एक ऐसा ख्याल पैदा होने लगा जो जल्द ही पूरी तारीख का रुख बदल [संगीत] देने वाला
Speaker A
था। यही वो पोशीदा तकुर था जिसकी तरफ मुफसरीन इशारा करते हैं। वो गुरूर जो जुबान पर नहीं आता लेकिन दिल के अंदर आहिस्ता-आहिस्ता जड़े मजबूत करता रहता है। इसीलिए अल्लाह ताला ने फरमाया कि [संगीत] मैं वो जानता हूं जो तुम नहीं जानते। अजील
Speaker A
उस मिट्टी से बने जिस्म [संगीत] के गिर्द घूमता रहा। वो उसे गौर से देखता था। उसकी बनावट को समझने की कोशिश करता [संगीत] था। बाज रिवायत में आता है कि वह इस जिस्म के अंदर दाखिल हुआ और उसकी खाली जगहों को
Speaker A
देखा। उसने इस मखलूक की कमजोरियों पर गौर किया और अपने [संगीत] दिल में सोचा कि यह मिट्टी से बनी हुई मखलूक ज्यादा मजबूत नहीं होगी। उसे उसमें जरूरतें नजर आई, ख्वाहिशात नजर आई, [संगीत] जल्दबाजी और कमजोरी नजर आई। तब उसके दिल में एक ख्याल
Speaker A
पैदा हुआ। उसने सोचा कि अगर कभी मौका मिला तो वह इन्हीं कमजोरियों को इस्तेमाल करके उसे भटका देगा। गोया रूह फूंके जाने से पहले ही वो इंसान के बारे में सोचना [संगीत] शुरू कर चुका था। वो उसके रास्तों
Speaker A
को समझ रहा था। उसकी फितरत का अंदाजा लगा रहा था और शायद आने वाले दिनों के मंसूबे [संगीत] भी बना रहा था। मगर अल्लाह का फैसला उसके तमाम अंदाजों से बुलंद था। जब फरिश्ते [संगीत] अल्लाह की हिकमत के सामने
Speaker A
सर तस्लीम खम कर रहे थे। अजील के दिल में बेचैनी बढ़ती जा रही [संगीत] थी। उसने खुलकर कुछ नहीं कहा। कोई ऐतराज नहीं किया। लेकिन उसके अंदर एक खामोश तूफान जन्म ले चुका था। [संगीत] बाज रिवायत में आता है कि उसने फरिश्तों
Speaker A
से पूछा कि अगर उस नई मखलूक को हम पर फजीलत दे दी गई तो तुम क्या करोगे?
Speaker A
फरिश्तों का जवाब वाज़ था। वो अपने रब के हुक्म के ताबे थे। [संगीत] उनके लिए इतात के सिवा कोई रास्ता नहीं था। यह सुनकर अजाजील को अंदाजा हो गया कि अगर कभी आजमाइश आई तो वह उसमें अकेला होगा। फिर वो
Speaker A
लम्हा आ पहुंचा जिसने पूरी तारीख का रुख बदल दिया। [संगीत] अल्लाह ताला ने उस जिस्म में रूह फूंकी और अचानक खामोशी जिंदगी में बदल गई। वो जिस्म [संगीत] जो मिट्टी की एक सूरत था हरकत करने लगा। उसके सीने में सांस दौड़ने लगी।
Speaker A
पहली बार इरादा, शूर और जिंदगी एक साथ जाहिर हुए। इंसान वजूद [संगीत] में आ चुका था। ना किसी मां के वतन से ना किसी तवील इरतकाई सफर के नतीजे में। बल्कि अल्लाह ताला के हुक्म और कुदरत से और अजाजील वो
Speaker A
खामोश खड़ा उस नई मखलूक को देख रहा था जिससे वह अभी मिला भी नहीं था [संगीत] लेकिन जिससे वह पहले ही नफरत करने लगा था। यह आदम अल सलाम थे इंसानों के पहले बाप मिट्टी से पैदा किए गए
Speaker A
[संगीत] लेकिन एक ऐसी इज्जत के साथ जिसका अंदाजा अभी किसी को नहीं था। [संगीत] नबी करीम सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम ने हमें बताया कि जब रूह आदम अली सलाम के जिस्म में दाखिल होना शुरू हुई तो वह आहिस्ता-आहिस्ता [संगीत] सर से नीचे की
Speaker A
तरफ आई। पहले आंखों तक पहुंची फिर चेहरे, [संगीत] नाक और मुंह तक। जब रूह मुकम्मल तौर पर चेहरे तक पहुंची तो [संगीत] आदम अली सलाम को छींक आई। उस वक्त जिब्रील अल सलाम उनके करीब मौजूद [संगीत] थे। उन्होंने फरमाया ऐ आदम कहो
Speaker A
अल्हम्दुलिल्लाह। आदम अली सलाम ने [संगीत] फौरन कहा अल्हम्दुलिल्लाह तब अल्लाह ताला की तरफ से फरमाया गया ए आदम मेरी रहमत तुझ पर हो। जब रूह आंखों तक पहुंची तो आदम अली सलाम की नजर जन्नत की नेमतों पर पड़ी। [संगीत] उन्हें देखकर
Speaker A
उनके दिल में फौरन ख्वाहिश पैदा हुई कि उनसे फायदा उठाएं। लेकिन रूह अभी उनकी टांगों तक नहीं पहुंची थी। जिस्म [संगीत] का निचला हिस्सा अभी मुकम्मल तौर पर मुतहरिक नहीं हुआ था। वो उठने की कोशिश [संगीत] करने लगे। तब जिब्रील अल सलाम ने
Speaker A
फरमाया ए आदम जल्दी ना करो और यही वो सिफत है जिसका जिक्र बाद में कुरान ने भी किया कि [संगीत] इंसान जल्दबाजी करने वाला पैदा किया गया है यह सब कुछ अजाजील भी देख रहा था वही अजाजील जिसने पहले उस मिट्टी के
Speaker A
जिस्म को हिकारत से देखा था वही अजाजील जो उसकी कमजोरियों पर हंसा था मगर अब मंजर बदल रहा था वो बेजान जिस्म अब बोल रहा था समझ रहा था और जिंदगी हासिल कर चुका [संगीत] था और फिर वह लम्हा आ गया जिसने
Speaker A
पूरी कायनात के मुस्तकबिल का फैसला करना था। अल्लाह सुभाना ताला ने हुक्म फरमाया आदम को सजदा करो। यह कोई मशवरा नहीं था। यह रब्बुल आलमीन का हुकुम था। यह एक इम्तिहान था। ऐसा इम्तिहान जो फरिश्तों के लिए भी था और अजाजील के लिए भी। हुकुम
Speaker A
सुनते ही फरिश्तों ने एक लम्हे की ताखर नहीं की। वो फौरन सजदे में गिर [संगीत] गए। उनकी पेशानियां जमीन से लग गई। मगर जब तमाम फरिश्ते सजदे में झुक चुके थे। एक हस्ती अब भी खड़ी थी। वो अजाजील था। यह
Speaker A
अजीब लम्हा था। वो मखलूक जिसने बेशुमार मर्तबा इबादत की थी। जो सजदों और इतात के लिए मशहूर थी। अब एक सजदे के इम्तिहान में नाकाम हो रही थी। और इसी एक इंकार ने उसकी [संगीत] पूरी जिंदगी बदल दी। अल्लाह
Speaker A
सुभाना ताला ने फरमाया तुझे किस चीज ने रोका कि तू सजदा ना करे जब मैंने तुझे हुक्म दिया था अजाजील ने माफी नहीं मांगी उसने आज इख्तियार नहीं की बल्कि उसने तकब्बुर के साथ जवाब दिया मैं इससे बेहतर
Speaker A
हूं तूने मुझे आग से पैदा किया है और इसे मिट्टी से पैदा किया है यह सिर्फ एक जुमला नहीं था [संगीत] यह तारीख का पहला तकब्बुर था पहली बार किसी मखलूक ने अपनी असल को बुनियाद [संगीत] बनाकर खुद को दूसरों से बरतर समझा था। अब
Speaker A
अजाजील की हकीकत सबके सामने आ चुकी थी और अगला फैसला ऐसा था जो उसे हमेशा के लिए अजील से [संगीत] इब्लीस बना देने वाला था। अल्लाह सुभाना ताला ने फरमाया निकल जा यहां से। तू मरदूद है और कयामत के [संगीत]
Speaker A
दिन तक तुझ पर मेरी लानत है। इसी लम्हे अज़ाज़ल के लिए निजात का दरवाजा बंद हो गया। वो मकाम जिस तक पहुंचने के लिए उसने सदियों इबादत की थी उसके हाथों से निकल चुका था। लेकिन हैरानक बात यह है कि इस
Speaker A
मौके पर उसने माफी नहीं मांगी, तौबा नहीं की। अपने जुर्म का एतराफ नहीं किया। बल्कि उसने एक और दरख्वास्त की। उसने कहा ऐ मेरे रब मुझे उस दिन तक मोहलत दे दे जब लोग दोबारा जिंदा किए जाएंगे। अल्लाह ताला ने
Speaker A
फरमाया तुझे मुकर्रर वक्त तक मोहलत दी गई। इब्लीस [संगीत] को मोहलत मिल गई। लेकिन उसके बाद जो अल्फाज़ उसकी जुबान से निकले उन्होंने उसके दिल [संगीत] की मुकम्मल हकीकत ज़ाहिर कर दी। उसने कहा मैं तेरे सीधे रास्ते पर उनके लिए बैठूंगा। फिर मैं
Speaker A
उनके आगे से आऊंगा। उनके [संगीत] पीछे से आऊंगा। उनके दाएं से आऊंगा और उनके बाएं से आऊंगा। और तू उनमें से अक्सर को शुक्रगुजार नहीं पाएगा। यह सिर्फ एक ऐलान नहीं था। यह इंसान के खिलाफ एक जंग का
Speaker A
आगाज था। ऐसी जंग जो कयामत तक जारी रहने वाली थी। फिर अल्लाह ताला ने फरमाया निकल जा यहां से जलील और धुतकारा हुआ और उनमें से जो तेरे पीछे चलेगा मैं तुम सब जहन्नुम को भर दूंगा। चुनांचे वो मकाम जो कभी
Speaker A
इबादत की वजह से मिला था छीन [संगीत] लिया गया। वो इज्जत जो उसे हासिल थी खत्म कर दी गई। वो कुर्ब जो उसे नसीब था उससे दूर कर [संगीत] दिया गया। और इसी लम्हे एक नाम तारीख में दफन हो गया अाजील और एक नया नाम
Speaker A
हमेशा के लिए जाहिर [संगीत] हो गया इब्लीस मरदूद मलून और अल्लाह की रहमत से दूर और यूं एक सजदे से इंकार ने सदियों की इबादत को मिटा दिया एक ऐसा जिन जो कभी इबादत इल्म और मकाम की अलामत समझा जाता था
Speaker A
तकब्बुर की वजह से इब्लीस बन गया लेकिन इस कहानी का सबसे खौफ खौफनाक हिस्सा यह नहीं कि इब्लीस ने तकब्बुर किया बल्कि यह है कि वो आज भी वही जंग लड़ रहा है जिसका ऐलान उसने उस दिन किया था। यह एक ऐसी कहानी है
Speaker A
जिस पर जितना गौर किया जाए उतना कम है। शायद इसीलिए इसे सिर्फ सुन लेना काफी नहीं बल्कि दूसरों तक पहुंचाना भी जरूरी है। [संगीत] क्योंकि बहुत से लोग इब्लीस के अंजाम को जानते हैं। मगर उसके ज़वाल की असल
Speaker A
वजह को नहीं समझते। और अगर आप तारीख, कुरान और इस्लामी रिवायत के ऐसे ही पुरसरार और ईमान ताजा करने वाले वाकयात जानना चाहते हैं [संगीत] तो इस सफर में हमारे साथ रहिए क्योंकि अभी बहुत से राज ऐसे हैं [संगीत] जिनके पर्दे उठना बाकी
Speaker A
हैं। ॐ
Topics:आदम अल सलामजिन्नातअजाजीलफरिश्तेजंगइस्लामी इतिहासफसादइबादततखलीकमखलूक











