हजरत खिज्र (अ.स) की कहानी और उनका आज भी जीवित होने का रहस्य कुरान की सूरत अल-कहफ की दास्तान में।
Key Takeaways
- हजरत खिज्र (अ.स) को अल्लाह ने खास इल्म दिया जो किसी नबी को नहीं मिला।
- इल्म की असली निस्बत हमेशा अल्लाह की तरफ होती है, इंसानी समझ सीमित है।
- सब्र और यकीन के बिना हजरत खिज्र (अ.स) के साथ सफर करना मुश्किल है।
- अजीब घटनाओं के पीछे गहरी हिकमतें होती हैं जो इंसान को तुरंत समझ नहीं आतीं।
- हजरत खिज्र (अ.स) का आज भी जीवित होना एक बड़ा रहस्य है।
What the video covers
- हजरत खिज्र (अ.स) एक रहस्यमयी शख्सियत हैं जो सदियों से भटकने वालों को रास्ता दिखाते आए हैं।
- कुरान की सूरत अल-कहफ में उनकी कहानी का जिक्र है, जिसमें हजरत मूसा (अ.स) ने उनसे इल्म सीखने का सफर किया।
- हजरत मूसा (अ.स) को अल्लाह ने बताया कि दो समंदरों के संगम पर एक बंदा है जिसे खास इल्म दिया गया है।
- हजरत मूसा (अ.स) और उनके नौजवान खादिम हजरत यूषा बिन नून (अ.स) ने मछली के चमत्कार से उस जगह का पता लगाया।
- हजरत खिज्र (अ.स) ने मूसा (अ.स) को इल्म सिखाने से पहले सब्र की शर्त रखी कि वे बिना सवाल किए उनके साथ चलेंगे।
- सफर के दौरान खिज्र (अ.स) ने कई अजीब घटनाएं कीं, जैसे कश्ती को नुकसान पहुंचाना और एक बच्चे को मारना, जो मूसा (अ.स) को समझ नहीं आईं।
- खिज्र (अ.स) ने मूसा (अ.स) को बताया कि इन घटनाओं के पीछे गहरी हिकमतें हैं जो इंसान की समझ से परे हैं।
- यह दास्तान 1400 सालों से उलमा को हैरान करती आ रही है और इंसानियत के लिए एक बड़ा सबक है।
- वीडियो में हजरत खिज्र (अ.स) के आज भी जीवित होने के सवाल पर भी चर्चा की गई है।
- यह कहानी सब्र, ईमान और अल्लाह की हिकमत पर यकीन रखने की प्रेरणा देती है।
Chapters
- 00:00हजरत खिज्र की पहचान और रहस्य
- 00:59क्या हजरत खिज्र नबी, वली या फरिश्ता थे?
- 02:14हजरत मूसा का इल्म की तलाश का सफर शुरू
- 04:07दो समंदरों के संगम की खोज
- 05:12मछली का चमत्कार और मंजिल का पता
- 06:07हजरत खिज्र से मुलाकात और इल्म सीखने की शर्त
- 07:10खिज्र के अजीब वाकये और मूसा की परीक्षा
- 09:09खिज्र के राज और हिकमत का खुलासा
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Speaker A
सदियों से लोग एक ऐसे बंदे का जिक्र करते आए हैं, जिसके बारे में कहा जाता है कि वह भटकने वालों को रास्ता दिखाता है। खिजरा, आप कहां हैं?
Speaker A
कब आकर मुझे रास्ता दिखाएंगे? एक ऐसी हस्ती जो उस वक्त भी मौजूद थी जब पहाड़ अपनी मौजूदा शक्ल में कायम नहीं हुए थे। जब बहुत सी सल्तनतों का वजूद तक नहीं था। और वह उस वक्त भी मौजूद थे जब दुनिया
Speaker A
की तारीख के बेशुमार अबवाब अभी लिखे ही नहीं गए थे। एक ऐसा शख्स जिसे अल्लाह ने वो इल्म अता किया जो इससे पहले किसी नबी को नहीं दिया, जिसका जिक्र खुद अल्लाह ताला ने कुरान करीम में फरमाया और जिसकी जिंदगी
Speaker A
का सिर्फ एक मुख्तसर हिस्सा कयामत तक आने वाली पूरी इंसानियत के लिए एक अजीम सबक बना दिया। एक ऐसा बंदा जिसके सामने अल्लाह के जलील उल कदर पैगंबर हजरत मूसा अल सलाम इल्म सीखने के लिए हाजिर हुए। कौन था यह
Speaker A
शख्स? क्या वो नबी था? क्या वो वली था? क्या वो फरिश्ता था? और सबसे बड़ा सवाल क्या वो आज भी जिंदा है? ठहरिए, हम आपको लेकर चलेंगे कुरान के सबसे पुरसरार सफर पर। सूरतुल काफ की वो दास्तान जिसने 1400
Speaker A
सालों से उलमा को हैरान कर रखा है। [गाना गाने की आवाज़] यह कहानी है हजरत खिज्र अल सलाम की। लेकिन इस दास्तान का आगाज करने से पहले हमें कमेंट्स में यह जरूर बताएं कि आप दिन में कितनी बार दुरूद पाक पढ़ते हैं और अगर
Speaker A
आप ऐसी ही मुस्तद और तारीख इस्लामी डॉक्यूमेंट्रीज पसंद करते हैं तो चैनल को सब्सक्राइब जरूर कीजिए क्योंकि आज की यह दास्तान इख्तताम तक आपकी सोच बदल सकती है। सदियों पुराना किस्सा है। मिस्र से निकलने के बाद बनी इसराइल एक बस्ती में मुकीम थे।
Speaker A
उनके दरमियान अल्लाह के बरगुजीदा नबी हजरत मूसा अल सलाम रौनक अफरोज़ थे। [संगीत] वही मूसा इन्होंने फिरौन जैसे जाबिर को ललकारा, जिन्होंने समंदर को अपने असा से चीर डाला, जिन्हें अल्लाह ने कलीमुल्लाह का खिताब [संगीत] अता किया। एक रोज मूसा अल
Speaker A
सलाम मिरर पर तशरीफ फरमा थे। मूसा अल सलाम ने एक ऐसा पुरसर खुदबा इरशाद फरमाया कि सुनने वालों के दिल कांप [संगीत] उठे। लोगों की आंखों से आंसू जारी हो गए। जब खुदबा खत्म हुआ तो मजमा में से एक शख्स
Speaker A
खड़ा हुआ। उसने पूछा, "ऐ अल्लाह के नबी, आज रूए जमीन पर सबसे ज्यादा इल्म रखने वाला कौन है?"
Speaker A
यह एक सादा सा सवाल था। लेकिन इस सवाल का जवाब तारीख का रुख मोड़ने वाला था। मूसा अल सलाम ने फरमाया, सबसे ज्यादा इल्म रखने वाला मैं हूं। यह जवाब ना तकुर था, ना गुरूर। वो अपने जमाने के अजीम तरीन नबी
Speaker A
थे। उन पर तरात नाजिल हुई थी। लेकिन सही बुखारी की रिवायत के मुताबिक अल्लाह ताला ने अपने नबी को यह तालीम देना पसंद फरमाई कि इल्म की असल निस्बत हमेशा अल्लाह ही की तरफ होनी चाहिए। चुनांचे अल्लाह ताला ने
Speaker A
वही फरमाई। ए मूसा, दो समंदरों के संगम पर हमारा एक बंदा मौजूद है, जिसे हमने अपनी तरफ से खास इल्म अता फरमाया है। यह सुनकर हजरत मूसा अलैहिस्सलाम ने फौरन अर्ज किया, "ए मेरे रब, मैं उस बंदे तक कैसे पहुंच सकता
Speaker A
हूं?" अल्लाह ताला ने फरमाया, "एक मछली अपने साथ ले लो, उसे एक टोकरी में रखो और जहां वो मछली तुमसे गायब हो जाए, वही तुम्हारी मंजिल है।" अल्लाह ताला का हुक्म मिलते ही हजरत मूसा अल सलाम ने एक लम्हा भी ताखीर
Speaker A
ना की। चुनांचे उन्होंने एक नमकीन भुनी हुई मछली ली। उसे टोकरी में रखा और अपने साथ अपने नौजवान खादिम हजरत यूष बिन नून अल सलाम को ले लिया। हजरत यूषा बिन नून कोई आम नौजवान नहीं थे। यह वो अजीम
Speaker A
शख्सियत थी जिन्होंने हजरत मूसा अल सलाम के बाद बनी इसराइल की कयादत संभाली। यूं दो अजीम हस्तियां एक ऐसे शख्स की तलाश में निकल पड़ी जिसे अल्लाह ताला ने अपनी तरफ से एक खास इल्म अता फरमाया था। उनकी मंजिल
Speaker A
थी मजमाउल बहराईन यानी दो समंदरों का संगम। यह मकाम कहां था? बाज मुफसरीन ने उसे फारिस और रूम के समंदरों का संगम करार दिया। कुछ ने जबल तारिक के इलाके का जिक्र किया। आखिरकार लंबे सफर के बाद वो दोनों
Speaker A
एक बड़ी चट्टान के करीब पहुंचे। रास्ते की थकन जिस्म पर गालिब आ चुकी थी। हजरत मूसा अल सलाम ने कुछ देर आराम करने का इरादा फरमाया। हजरत यूषा बिन नून भी करीब ही बैठ गए। और फिर इसी लम्हे वो मछली जो कई दिनों
Speaker A
से टोकरी में रखी हुई थी, अचानक जिंदा [संगीत] हो गई। मछली ने टोकरी से एक छलांग लगाई। फिर उसने समंदर में अपना रास्ता इस तरह बना लिया जैसे कोई सुरंग बन गई हो। हजरत यूषा बिन नून ने यह सब अपनी आंखों से
Speaker A
देखा। उन्होंने दिल में इरादा किया कि जैसे ही हजरत मूसा अल सलाम बेदार होंगे, वो फौरन उन्हें उस अजीब वाक्य के बारे में बता देंगे। लेकिन शैतान ने उन्हें यह बात याद दिलाना भुला दी। हजरत मूसा अल सलाम
Speaker A
बेदार हुए। दोनों दोबारा सफर पर रवाना हो गए। काफी देर बाद जब मुसलसल सफर की थकन महसूस होने लगी, हजरत मूसा अल सलाम ने अपने खादिम से फरमाया, "हमारा नाश्ता लाओ। इस सफर ने तो हमें बहुत थका दिया है।
Speaker A
यह सुनते [संगीत] ही हजरत यूषा बिन नून के चेहरे का रंग बदल गया। एकदम उन्हें वो सारा मंजर याद आ गया। उन्होंने फौरन अर्ज किया, "ऐ अल्लाह के नबी, जब हम उस चट्टान के पास ठहरे थे, तो मैं मछली के बारे में बताना
Speaker A
भूल गया। शैतान ने मुझे यह बात भुला दी और वह मछली बड़े अजीब अंदाज से समंदर में अपना रास्ता बनाकर चली गई।" हजरत मूसा अल सलाम ने यह सुना तो उनके चेहरे पर खुशी की एक लहर दौड़ गई।
Speaker A
उन्होंने फौरन फरमाया, "यही तो वह जगह थी जिसकी हम तलाश कर रहे थे।" अब दोनों ने एक लम्हा भी जाया ना किया। वो फौरन वापस मुड़े। मगर अब वहां एक शख्स मौजूद था। उसने सबज रंग की चादर ओढ़ रखी
Speaker A
थी। यह थे हजरत खिज्र अलसलाम। सही बुखारी की रिवायत के मुताबिक आप सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया, उन्हें खिज्र [संगीत] इसलिए कहा गया कि वो एक मर्तबा खुजान जमीन पर बैठे तो वो जमीन सरसो शादाब हो गई। इसी निस्बत से उन्हें
Speaker A
खिज्र कहा गया। हजरत मूसा अलह सलाम आगे बढ़े। "अस्सलाम वालेकुम।" हजरत खिजर अलहसलाम ने जवाब दिया, "वालेकुम अस्सलाम।" फिर ताज्जुब से फरमाया, "तुम्हारी सरजमीन में सलाम कहां से आया?" यह इस बात की तरफ इशारा था कि इस इलाके में इस अंदाज का सलाम आम
Speaker A
नहीं था। हजरत मूसा अल सलाम ने फरमाया, "मैं मूसा हूं। बनी इसराइल वाले मूसा।" जी हां। फिर हजरत मूसा अल सलाम ने इंतहाई आजजी के साथ अर्ज किया, "क्या मैं आपके साथ रह सकता हूं?" [संगीत] ताकि आप मुझे वह इल्म सिखाएं जो अल्लाह ने
Speaker A
आपको अता फरमाया है। लेकिन हजरत खिज्र अल सलाम जानते थे कि आगे क्या होने वाला है। चुनांचे उन्होंने फरमाया, "आप हरगिज़ मेरे साथ सब्र नहीं कर सकेंगे और आप उस चीज पर सब्र भी कैसे करेंगे जिसकी हकीकत का आपको पूरा इल्म नहीं।"
Speaker A
हजरत मूसा अलैहिस्सलाम ने फौरन जवाब दिया, "अगर अल्लाह ने चाहा तो आप मुझे सब्र करने वाला पाएंगे। और मैं आपके किसी हुक्म की नाफरमानी नहीं करूंगा। अगर तुम मेरे साथ चलना चाहते हो तो एक शर्त है। मेरे साथ
Speaker A
रहते हुए किसी चीज के बारे में मुझसे सवाल मत करना। यहां तक कि मैं खुद मुनासिब वक्त पर उसकी हकीकत तुम्हें बता दूं।" दोनों अल्लाह के बरगुजीदा बंदे अब एक नए सफर पर रवाना हुए। इसी दौरान एक निहायत खूबसूरत
Speaker A
वाकया पेश आया। समंदर के किनारे एक नन्ही सी चिड़िया आकर बैठी। उसने अपनी चोंच समंदर में डाली और पानी का सिर्फ एक कतरा लेकर उड़ने लगी। हजरत खिजर अल सलाम ने इस मंजर की तरफ इशारा करते हुए फरमाया, "ए मूसा,
Speaker A
मेरे इल्म और आपके इल्म की मिसाल अल्लाह के इल्म के मुकाबले में सिर्फ इतनी है जितना इस चिड़िया ने अपनी चोंच में इस अजीम समंदर से पानी लिया है।" कुछ दूर चलने के बाद उन्हें एक छोटी सी कश्ती नजर आई। यह चंद गरीब मछेरों [संगीत]
Speaker A
की मामूली सी कश्ती थी और उनकी पूरी जिंदगी इसी एक कश्ती के सहारे चल रही थी। कश्ती वालों ने हजरत खिजर अल सलाम को पहचान लिया और कहा, "यह अल्लाह के नेक बंदे हैं। इनसे किराया लेना मुनासिब नहीं।"
Speaker A
चुनांचे उन्होंने दोनों मुसाफिरों को बगैर किसी उजरत के अपनी कश्ती में सवार कर लिया। कश्ती आहिस्ता-आहिस्ता पानी को चीरती हुई आगे बढ़ने लगी। लेकिन अगले ही लम्हे ऐसा हुआ जिसका कोई तसवुर [संगीत] भी नहीं कर सकता था। हजरत खिज्र अल सलाम
Speaker A
आहिस्ता से उठे और कश्ती के तख्तों में से एक मजबूत तख्ता उखाड़ दिया। पानी फौरन कश्ती के अंदर आने लगा। हजरत मूसा अली सलाम यह मंजर देखकर सक्ते में आ गए। उन्होंने फौरन फरमाया, "क्या आपने इस कश्ती को इसलिए फाड़ दिया है
Speaker A
कि इसके सवारों को गर्क कर दें? यकीनन आपने बहुत बड़ा काम कर डाला।" यह एतराज गुस्से की वजह से नहीं था बल्कि अद और रहम की वजह से था। हजरत मूसा अल सलाम एक नबी थे। वो जुल्म देखकर खामोश
Speaker A
कैसे रह सकते थे। लेकिन हजरत खिज्र अल सलाम ने सिर्फ एक जुमला फरमाया, "क्या मैंने आपसे नहीं कहा था कि आप मेरे साथ हरगिज़ सब्र नहीं कर सकेंगे।" यह अल्फाज़ सुनते ही हजरत मूसा अल सलाम को अपना वादा याद आ गया। उन्होंने फौरन अर्ज
Speaker A
किया, "मेरी भूल पर मुझे ना पकड़िए। और मेरे मामले में मुझ पर सख्ती ना कीजिए।" हजरत खिजर अल सलाम ने कोई जवाब ना दिया। गोया वो जानते थे कि यह तो अभी इम्तिहान की पहली मंजिल थी। कश्ती आखिरकार किनारे
Speaker A
लग गई और दोनों मुसाफिर खामोशी से आगे बढ़ गए। लेकिन हजरत मूसा अल सलाम के दिल में कश्ती के वाकया की हलचल अभी बाकी थी। कुछ देर बाद दोनों एक ऐसी जगह पहुंचे जहां चंद बच्चे खेल रहे थे। फजा [संगीत] में बच्चों
Speaker A
की हंसी गूंज रही थी। हजरत खिजर अल सलाम आहिस्ता-आहिस्ता उसकी तरफ बढ़े और उन्होंने उस बच्चे को कत्ल कर दिया। यह वाकया इतना अचानक पेश आया कि हजरत मूसा अल सलाम चंद लम्हों के लिए साकित रह गए। यह मंजर हजरत मूसा अल सलाम के लिए
Speaker A
नाकाबिले बर्दाश्त था। हजरत मूसा अल सलाम बेख्तियार बोल उठे। क्या आपने एक पाकीजा जान को...
Speaker A
से ज्यादा सख्त थे। क्योंकि इस बार मामला सिर्फ एक कश्ती का नहीं था। एक इंसानी जान का था। हजरत खिज्र अल सलाम ने फरमाया, क्या मैंने आपसे नहीं कहा था कि आप मेरे साथ हरगिज़ सब्र नहीं कर सकेंगे। हजरत मूसा
Speaker A
अल सलाम को फौरन एहसास हुआ कि वह दोबारा अपना वादा तोड़ बैठे हैं। उन्होंने निहायत आजजी से अर्ज किया अगर इसके बाद भी मैं आपसे किसी चीज के बारे में सवाल करूं तो फिर मुझे अपने साथ मत रखिएगा। यकीनन मेरी
Speaker A
तरफ से आपको पूरा उज़्र मिल चुका होगा। यह गोया हजरत मूसा अल सलाम की तरफ से आखिरी वादा था। इसी वाक्य के बारे में बाद में रसूल्लाह सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम ने एक निहायत [संगीत] मुअ्सिर बात इरशाद फरमाई। अल्लाह मूसा पर रहम फरमाए। अगर वह सब्र कर
Speaker A
लेते तो अल्लाह ताला हमें उन दोनों के मजीद अजीब वाक्यात भी दिखाता। कश्ती का वाकया फिर उस लड़के का वाकया। ये दोनों मनाज़िर अभी तक हजरत मूसा अलैहिस्सलाम के जहन में गर्दिश कर रहे थे। काफी देर सफर करने के बाद दोनों एक बस्ती में दाखिल
Speaker A
हुए। बाज रिवायत में इस बस्ती का नाम अंताकिया बयान किया गया है। यह बस्ती खुशहाल थी। घर आबाद थे। लोग अपनेपने कामों में मशरूफ थे। हजरत मूसा अल सलाम और हजरत खिज्र अल सलाम कई दिनों के मुसाफिर थे।
Speaker A
उन्होंने बस्ती वालों से मेहमान नवाजी की दरख्वास्त की। किसी से पानी मांगा, किसी से खाने की दरख्वास्त की। लेकिन हैरतंगेज तौर पर पूरे शहर में किसी एक शख्स ने भी उन दोनों मुसाफिरों की मेजबानी कबूल ना की। दोनों बस्ती से गुजर रहे थे कि अचानक
Speaker A
हजरत खिज्र अल सलाम की नजर एक दीवार पर पड़ी। वो पुरानी दीवार थी। बुनियाद कमजोर हो चुकी थी। ऐसा महसूस होता था जैसे अगले ही लम्हे जमीन पर गिर जाएगी। हजरत खिज्र अल सलाम फौरन दीवार के करीब गए। [संगीत]
Speaker A
उन्होंने अपने हाथों से उसे सहारा दिया। पत्थरों को दुरुस्त किया। ईंटों को अपनी जगह रखा और थोड़ी ही देर में वो झुकी हुई दीवार दोबारा मजबूती से खड़ी हो गई। हजरत मूसा अल सलाम खामोशी से यह सब देखते रहे।
Speaker A
लेकिन आखिरकार उनकी जुबान से अल्फाज़ निकल ही गए। अगर आप चाहते तो इस काम की कोई उजरत ले सकते थे। गौर कीजिए। इस मर्तबा हजरत मूसा अल सलाम ने हजरत खिज्र अल सलाम के अमल पर एतराज नहीं किया। उन्होंने
Speaker A
सिर्फ एक मशवरा दिया। लेकिन यही वो लम्हा था जिसका वादा हजरत मूसा अल सलाम खुद कर चुके थे। हजरत खिज्र अली सलाम ने फरमाया यह मेरे और आपके दरमियान जुदाई का वक्त है। यह अल्फाज़ सुनते ही हजरत मूसा अल सलाम
Speaker A
खामोश हो गए। अब वो लम्हा आ चुका था। यह सफर जो इल्म की तलाश में शुरू हुआ था। अब अपने इख्तताम के करीब था। लेकिन हजरत खिज्र अल सलाम ने हजरत मूसा अल सलाम को खाली हाथ वापस नहीं भेजा। उन्होंने फरमाया
Speaker A
अब मैं आपको उन तमाम बातों की हकीकत बताऊंगा जिन पर आप सब्र ना कर सके। यह सुनकर हजरत मूसा अल सलाम पूरी तवज्जो से खड़े हो गए और फिर एक-एक [संगीत] करके तीनों राज खुलने शुरू हुए। हजरत खिज्र अली
Speaker A
सलाम ने फरमाया वो कश्ती जिसमें मैंने सुराख किया वो कुछ गरीब मछेरों की थी जो समंदर में मेहनत करते थे। मैंने चाहा कि उसमें ऐब पैदा कर दूं क्योंकि उनके आगे एक बादशाह था जो हर ठीक कश्ती को जबरदस्ती
Speaker A
छीन लेता था। अब सोचिए अगर खिज्र अल सलाम उस कश्ती में सुराख ना करते तो वो जालिम बादशाह उसे छीन लेता और गरीब मछेरों का सब [संगीत] कुछ चला जाता। लेकिन अब कश्ती में सुराख देखकर बादशाह ने उसे छोड़ दिया।
Speaker A
गरीब उस सुराख को बाद में आसानी से ठीक कर लेंगे और उनकी रोजी रोटी महफूज़ रहेगी। जो मूसा अल सलाम को जाहिरन बुरा काम लगा वो हकीकत में गरीबों के लिए सबसे बड़ी रहमत थी और फिर हजरत खिज्र अल सलाम ने दूसरा
Speaker A
राज बयान किया और वो लड़का उसके वैलिदैन दोनों मोमिन थे। हमें खतशा था कि वो उन्हें सरकशी और कुफ्र में मुब्तला कर देगा। सो हमने चाहा कि उनका रब उन्हें उसके बदले में बेहतर पाकीजा और ज्यादा मेहरबान औलाद अता करे। तफसीर इब्ने कसीर
Speaker A
में आता है कि उसके बाद अल्लाह ने उन वालदैन को एक बेटी अता फरमाई जिसने आगे चलकर एक नबी को जन्म दिया। जो काम मूसा अल सलाम को गलत लगा वो हकीकत में सबसे बड़ी रहमत थी। अब हजरत खिज्र अल सलाम ने आखिरी
Speaker A
राज बयान किया और वो दीवार यह शहर के दो यतीम लड़कों की थी और उसके नीचे उनका खजाना दफन था और उनका बाप नेक आदमी था। तो आपके रब ने चाहा कि वह दोनों अपनी जवानी को पहुंचे और अपना खजाना निकाल लें। देखिए
Speaker A
अल्लाह कैसे नेक बंदों की औलादों की हिफाजत फरमाता है। जो काम मूसा अल सलाम को मुफ्त की मजदूरी लगी वो हकीकत में यतीमों के लिए सबसे बड़ी हिफाजत थी। और फिर खिजर अली सलाम ने वो जुमला कहा जो इस पूरी
Speaker A
दास्तान [संगीत] का ताज है। उन्होंने फरमाया मैंने यह सब अपनी मर्जी से नहीं किया। यह सब अल्लाह के हुक्म से था। तीनों वाक्यात बजाहिर मुख्तलिफ थे। लेकिन उन तीनों में एक चीज मुश्तरक थी। इंसान सिर्फ हाल देख रहा होता है। जबकि अल्लाह
Speaker A
ताला माजी, हाल और मुस्तकबिल तीनों को एक साथ देख रहा होता है। और यही वो लम्हा है जो आज भी हर मोमिन को यह सिखाता है कि हर वो चीज जो हमारी आंखों को नुकसान दिखाई देती है। जरूरी नहीं कि हकीकत में भी
Speaker A
नुकसान ही हो। क्योंकि अल्लाह की हिकमत हमारी निगाह से कहीं ज्यादा वसी है। इसीलिए जब जिंदगी आपकी समझ से बाहर होने लगे बेटा बिजली का बिल भरना है। मैं भी रिटायर हूं। भैया मेरी स्कूल की फीस देनी है। [संगीत]
Speaker A
मुझे अफसोस है। फिलहाल हमारे पास आपके लिए कोई जगह नहीं है। जब हर दुआ खामोश महसूस होने लगे। हे अल्लाह हमारी मुश्किलात हल फरमा। तो सिर्फ एक बात याद रखिए इस कायनात में जो कुछ भी अल्लाह की मशीयत से होता है उसके पीछे कोई ना कोई
Speaker A
हिकमत जरूर होती है। बेटा अपना दिल छोटा मत करो। इसमें भी अल्लाह की कोई ना कोई मसलहत होगी। चाहे वो हिकमत आज समझ आए, 10 साल बाद समझ आए या फिर कयामत के दिन अल्लाह खुद हमें बताएं। अब वो सवाल जो सदियों से मुसलमानों
Speaker A
के दिलों में है। क्या हजरत खिज्र अल सलाम आज भी जिंदा है? इस मामले में उलमा की दो राय हैं। बहुत से सूफिया और कुछ उलमा का कहना है कि खिज्र अल सलाम आज भी जिंदा हैं। वो चार पैगंबरों में से एक हैं
Speaker A
जिन्हें आहिया जिंदा रहने वाले कहा जाता है। हजरत यूनुस अल सलाम, हजरत इदरीस अल सलाम, हजरत ईसा अल सलाम, हजरत खिज्र अल सलाम उन हजरात के मुताबिक खिज्र अल सलाम समंदरों पर मुकर्रर हैं। दुनिया में घूमते हैं और जरूरतमंदों की मदद करते हैं। इमाम
Speaker A
इबने तैमिया रहम्लाह, इमाम बुखारी, इमाम इबने कसीर और बहुत से मुहदसीन की यह राय है कि खिज्र अल सलाम वफात पा चुके हैं। उनकी दलील कुरान की यह आयत है। वमा जाना बश कबल खुलद। हमने आपसे पहले किसी बशर के
Speaker A
लिए हमेशगी नहीं रखी। और नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया 100 साल बाद आज जमीन पर जो जिंदा है वो नहीं रहेगा। इस बुनियाद पर बहुत से उलमा कहते हैं कि अगर खिज्र उस वक्त जिंदा होते तो
Speaker A
उस हदीस के बाद 100 साल में फौत हो जाते। अगर आज की यह दास्तान आपके दिल में उतर गई हो। अगर इस वीडियो ने आपके अल्लाह पर भरोसे को पहले से ज्यादा मजबूत कर दिया हो तो इस वीडियो को जरूर लाइक कीजिए। कमेंट
Speaker A
में सिर्फ एक जुमला जरूर लिखिए। मैं अल्लाह की हर तकदीर पर राजी हूं। अगर आप चाहते हैं कि कुरान करीम और इस्लामी तारीख की ऐसी ही ईमान अफरोज़, मुस्तनद और दिल को झुंझोर देने वाली दास्ताने आप तक पहुंचती
Speaker A
रहे तो दास्ताने कामिल को सब्सक्राइब कीजिए और [संगीत] इस वीडियो को उन लोगों तक जरूर पहुंचाइए जो शायद इस वक्त अपनी जिंदगी की किसी टूटी हुई कश्ती को देखकर मायूस बैठे हैं। क्या मालूम अल्लाह ताला आपके एक शेर को किसी की उम्मीद, [संगीत]
Speaker A
किसी के सब्र और किसी के ईमान का सबब बना दे। अल्लाह ताला हमें अपनी हिकमत पर कामिल यकीन, हर आजमाइश में सब्र और हर हाल में अपना शुक्र अदा करने की तौफीक अता फरमाए। आमीन या रब्बुल आलमीन।
Topics:हजरत खिज्रसूरत अल-कहफहजरत मूसाइल्मइस्लामी कहानीकुरान की दास्तानसब्रअल्लाह की हिकमतइमानइस्लामी इतिहास











