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Imam Mehdi (A.S) | Zahoor Ki Pehli Nishani Aa Chuki Hai?

इमाम मेहंदी (अ.स) की पहचान, उनकी निशानियां और आने वाले समय की घटनाएं।

Key Takeaways

  • इमाम मेहंदी का आगमन दुनिया के बड़े संकटों के बाद होगा।
  • उनकी पहचान रसूलल्लाह के खानदान से होगी और उनका नाम मोहम्मद होगा।
  • सुफियानी और अन्य फितनें इस दौर की प्रमुख चुनौतियां होंगी।
  • मुसलमानों का एकजुट होना और इमाम मेहंदी के नेतृत्व में जीत हासिल करना।
  • दज्जाल और हजरत ईसा के आने से अंतिम दौर की घटनाएं शुरू होंगी।

What the video covers

  • दुनिया में जुल्म और इंसाफ की कमी के बीच इमाम मेहंदी के आने की भविष्यवाणी।
  • सुफियानी नामक शख्स का उदय और उसकी जुल्म की घटनाएं।
  • मुसलमानों और रोमी (ईसाई) ताकतों के बीच जंग और गठबंधन की घटनाएं।
  • इमाम मेहंदी की मदीना मुनव्वरा में मौजूदगी और उनकी जिम्मेदारी का भय।
  • इमाम मेहंदी की बैत की घटना और उनकी खिलाफत की शुरुआत।
  • खुरासान से सियाह झंडों वाले लश्कर का समर्थन और सुफियानी का मुकाबला।
  • सुफियानी की फौज का विनाश और मुसलमानों की ताकत में वृद्धि।
  • दज्जाल और हजरत ईसा अलैहिस्सलाम के आने की भविष्यवाणियां।
  • इमाम मेहंदी के नेतृत्व में फितनों का अंत और दीन की जीत।
  • इमाम मेहंदी के आने के बाद की घटनाओं का विस्तार।

Answers

Questions about this video

इमाम मेहंदी कौन हैं और उनकी पहचान कैसे होगी?

इमाम मेहंदी रसूलल्लाह के खानदान से होंगे, उनका नाम मोहम्मद होगा और उनका चेहरा और किरदार रसूलल्लाह से मिलता-जुलता होगा। उन्हें अल्लाह ताला इल्म लुदनी अता करेगा।

सुफियानी कौन है और उसकी भूमिका क्या होगी?

सुफियानी अबू सुफियान की नस्ल से होगा और वह सियासी इंतशार और जंग का फायदा उठाकर अपनी ताकत बढ़ाएगा। उसकी बगावत और जुल्म से शाम और आसपास के इलाके खौफ में होंगे।

इमाम मेहंदी के आने से पहले कौन-कौन सी प्रमुख घटनाएं होंगी?

इमाम मेहंदी के आने से पहले दुनिया में जुल्म बढ़ेगा, खलीफा की मौत के बाद इख्तलाफ होगा, सुफियानी का उदय होगा, मुसलमानों और रोमी के बीच जंग होगी, और खुरासान से सियाह झंडों वाला लश्कर आएगा।

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00:00
Speaker A
आखिर इमाम मेहंदी कहां हैं? कौन उन्हें तलाश करेगा? कब वो वक्त आएगा जब अल्लाह ताला उनके जरिए उम्मत को इस मुसीबत से निजात अता फरमाएगा? तसवुर कीजिए, दुनिया जुल्म से भर चुकी होगी। इंसाफ एक ख्वाब बन चुका होगा। यह वो
00:22
Speaker A
वक्त होगा जहां इंसान की जान की कीमत 1 टके से भी कम रह जाएगी। कातिल को मालूम नहीं होगा कि वह क्यों कत्ल कर रहा है और मकतूल को भी यह मालूम नहीं होगा कि उसे किस वजह से कत्ल किया गया। कत्लेआम इस कदर
00:37
Speaker A
बढ़ जाएगा कि लोग अपनी जिंदगी से तंग आकर कब्रों के पास से गुजरेंगे और हसरत से कहेंगे, काश मैं इस कब्र में होता। यह वो निशानियां हैं जिनकी खबर रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने 1400 साल पहले दे दी थी। और आज इन्हीं में से एक-एक
00:56
Speaker A
निशानी हमारी आंखों के सामने हकीकत बनती जा रही है। दरिया फुराद के खुशक होने की पेशगोई आज फुराद तेजी से सूख रहा है। सऊदी अरब के वो इलाके जो कभी सिर्फ रेत से ढके थे, बारिशों, सब्जाजारों और फूलों से
01:12
Speaker A
भरने लगे हैं। और जब यह निशानियां एक-एक करके जाहिर होने लगेंगी तो दुनिया सिर्फ जाहिरी तब्दीलियों तक महदूद नहीं रहेगी। इंसानी मुशरा भी शदीद आजमाइशों की लपेट में आ जाएगा। हालात इस कदर खराब हो जाएंगे कि जमीन पर फितने रात के तारीक टुकड़ों की
01:30
Speaker A
तरह छा जाएंगे। इन्हीं हौलनाक हालात के दरमियान एक अजीम वाकया रनुमा होगा। एक खलीफा की वफात होगी और उसके बाद तख्तो ताज के लिए शदीद इख्तलाफ पैदा होगा। एक ही बाप के तीन बेटे खजाने और हुकूमत के लिए आपस
01:45
Speaker A
में लड़ेंगे। लेकिन अंजाम यह होगा कि वह सल्तनत उनमें से किसी एक को भी नसीब नहीं होगी और लोग एक ऐसे रहनुमा के इंतजार में होंगे जिसका वादा सदियों पहले किया गया था। लेकिन अगर आज अचानक आपके सामने वो
02:00
Speaker A
शख्सियत आ जाए तो क्या आप उन्हें पहचान सकेंगे? अपना जवाब कमेंट में जरूर दें। हजरत इमाम मेहंदी वो हस्ती जिनका ताल्लुक रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के मुबारक खानदान से होगा। आप
02:17
Speaker A
सैयद होंगे और सैयदा फातिमातु जहरा रज अल्लाहु अन्हा की औलाद में से होंगे। आपका चेहरा मुबारक रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के चेहरा अनवर से मुशाबहत रखेगा। सिर्फ शक्ल ही नहीं बल्कि अखलाक भी और किरदार की अजमत लोगों को रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की याद दिलाएगी। रिवायत में आता है
02:35
Speaker A
कि आपका नाम मोहम्मद होगा और आपके वालिद का नाम अब्दुल्लाह होगा। अल्लाह ताला उन्हें इल्म लुदनी अता फरमाएगा। यानी ऐसा इल्म जो किसी उस्ताद, मदरसे या किताब से हासिल नहीं किया गया होगा। बल्कि अल्लाह ताला की खास अता होगा। और यही इल्म
02:52
Speaker A
आने वाले अजीम फितनों के वक्त में उनकी रहनुमाई का सबसे बड़ा जरिया बनेगा। शाम की सरजमीन से एक शख्स उभरेगा जिसे सुफियानी के नाम से याद किया जाएगा। कहा जाता है कि उसका ताल्लुक अबू सुफियान की नस्ल से होगा। इब्तदा में वह सियासी
03:08
Speaker A
इंतशार और खाना जंगी से फायदा उठाते हुए अपनी ताकत बढ़ाएगा। और देखते ही देखते शाम के बड़े हिस्से उसके ज़रे असर आ जाएंगे। इसकी बगावत सिर्फ इख्तेदार हासिल करने के लिए नहीं होगी बल्कि उसके जुल्म और खूनरेजी से पूरा ख़्ता लरज़ उठेगा। रिवायत
03:26
Speaker A
में आता है कि सादाद भी उसके जुल्म का निशाना बनेंगे और खौफ की एक लहर शाम से निकल कर इर्द-गिर्द के इलाकों तक फैल जाएगी। और यही वो वक्त होगा जब दुनिया की ताकतें एक नई जंग के दहाने पर खड़ी होंगी।
03:40
Speaker A
लेकिन हैरानक बात यह है कि सबसे पहले जंग मुसलमानों और रोमियो के दरमियान नहीं बल्कि खुद रोमियो के अपने अंदर शुरू होगी। बाज रिवायत के मुताबिक रोमी सल्तनत के अंदर दो बड़े ईसाई गिरोह एक दूसरे के मुकाबिल आ जाएंगे। इख्तलाफ इस
03:58
Speaker A
कदर बढ़ जाएगा कि खाना जंगी भड़क उठेगी। हर तरफ अफरातफरी, खूनरेजी और इख्तेदार की जंग होगी। रोमी हुक्मरान अपनी सल्तनत का मरकज छोड़ने पर मजबूर हो जाएगा और शाम का रुख करेगा। वहां पहुंचकर वो अपने मुखालिफ ईसाई गिरोह को शिकस्त देने
04:16
Speaker A
के लिए मुसलमानों से मदद तलब करेगा। एक आरजी इत्तेहाद कायम होगा और दोनों अफवाज एक ही दुश्मन के खिलाफ मैदान-ए-जंग में उतरेंगी। फिर एक ऐसी खून रेज जंग छिड़ेगी जिसमें हजारों जाने जाया होंगी। आखिरकार मुसलमान और उनके इत्तेहादी फतह हासिल कर
04:35
Speaker A
लेंगे। लेकिन यह फतह ज्यादा देर कायम नहीं रहेगी। क्योंकि यही कामयाबी तारीख के सबसे बड़े धोखों में से एक की बुनियाद बनने वाली होगी। रिवायत में आता है कि दुश्मन की शिकस्त के बाद इत्तहादी ईसाई फिरके में से एक शख्स बुलंद आवाज में ऐलान
04:54
Speaker A
करेगा, "सलीब गालिब आ गई और इसी की वजह से हमें यह फतेह नसीब हुई।" नहीं, यह फतह दीन इस्लाम की बरकत से हासिल हुई है। गलबा इस्लाम का हुआ है सलीम का नहीं। ये चंद अल्फाज़ एक नई आग भड़का
05:11
Speaker A
देंगे। वो लश्कर जो कुछ देर पहले एक साथ लड़ रहा था, आपस में टकरा जाएगा। इसी हंगामे के दौरान बादशाह इस्लाम शहीद हो जाएगा। इसकी शहादत मुसलमानों के लिए एक बहुत बड़ा सदमा साबित होगी। इसके बाद वो दोनों ईसाई
05:29
Speaker A
ग्रोह जो पहले एक दूसरे के खिलाफ लड़ रहे थे, आपस में सुलह कर लेंगे। बाकी मांदा मुसलमान शाम से निकल कर मदीना मुनव्वरा का रुख करेंगे। वही मदीना जो रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की हिजरत का मरकज था। अब एक बार फिर मुसलमानों की
05:47
Speaker A
पनाहगाह बन जाएगा। उस वक्त मुसलमानों के दिलों में एक ही फिक्र जन्म लेगी। आखिर इमाम मेहंदी कहां है?
05:56
Speaker A
कौन उन्हें तलाश करेगा? कब वो वक्त आएगा जब अल्लाह ताला उनके जरिए उम्मत को इस मुसीबत से निजात अता फरमाएगा? रिवायत में आता है कि उस वक्त हजरत इमाम मेहंदी मदीना मुनव्वरा में तशरीफ फरमा होंगे। मगर उनके दिल में एक खौफ होगा।
06:15
Speaker A
इख्तेदार का खौफ नहीं बल्कि जिम्मेदारी का खौफ। इसी वजह से वो मदीना मुनव्वरा से किसी और मकाम की तरफ मुंतकिल हो जाएंगे। चुनांचे उस दौर के औलिया किराम, अब्दाल उजाम और अहले बसीरत लोग उनकी तलाश में निकल खड़े होंगे। लेकिन हमेशा की तरह
06:34
Speaker A
फितनों का दरवाजा भी खुला होगा। बाज लोग खुद को महदी जाहिर करने की कोशिश करेंगे। झूठे दावे किए जाएंगे। रिवायत के मुताबिक उस बैत से पहले रमजान उल मुबारक में एक गैर मामूली अलामत जाहिर हो चुकी होगी। चांद और सूरज को ग्रहण लग चुका
06:50
Speaker A
होगा। यह निशानी अहले इल्म की तवज्जो अपनी तरफ खींच चुकी होगी। मगर हक ज्यादा देर तक पोशीदा नहीं रह सकेगा। खाना काबा और बैतुल्लाह के गिर्द तवाफ करने वालों का हुजूम, मुसलमानों की एक जमात की निगाह उन पर पड़ेगी। वो उनकी
07:07
Speaker A
अलामात पहचान लेंगे। वो आगे बढ़ेंगे। उनका हाथ थामेंगे और उनसे बैत की दरख्वास्त करेंगे। लेकिन इमाम मेहंदी इस जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करेंगे मगर लोग इसरार करेंगे। यहां तक कि उन्हें मजबूर करके हजरे अस्वद और मकाम इब्राहिम के दरमियान
07:25
Speaker A
उनके हाथ पर बैत कर लेंगे। बैत के इसी लम्हे आसमान से एक आवाज बुलंद होगी। ऐसी आवाज जिसे वहां मौजूद हर शख्स सुनेगा। करीब वाले भी और दूर वाले भी। "हादा खलीफतुल्लाह महदी फस्मऊ व अतीउ।" यह अल्लाह के खलीफा महदी हैं। उनकी बात सुनो
07:47
Speaker A
और उनकी इतात करो। यह ऐलान गोया पूरी उम्मत के लिए एक पैगाम होगा कि इंतजार का वक्त खत्म हो चुका है। इस वक्त हजरत इमाम मेहंदी की उम्र 40 साल होगी और फिर जैसे ही उनकी खिलाफत की खबर दुनिया
08:02
Speaker A
में फैलेगी, वाक्यात तेजी से बदलना शुरू हो जाएंगे। मदीना की फौजें मक्का मुअजमा की तरफ रवाना होंगी ताकि इमाम मेहंदी की कयादत में शामिल हो सकें। हर गुजरते दिन के साथ उनकी कुत बढ़ती जाएगी। और फिर रिवायत
08:17
Speaker A
में एक और हैरतंगेज वाक्य का जिक्र मिलता है कि काबा के करीब एक मतफून खजाना मौजूद होगा जिसे रिताजुल काबा कहा जाता है। हजरत इमाम मेहंदी इस खजाने को निकलवाएंगे और उसे अपने लिए महफूज़ नहीं रखेंगे बल्कि मुसलमानों के दरमियान तकसीम फरमा देंगे।
08:35
Speaker A
इमाम मेहंदी की बैत की खबर अब मक्का की हुदूद से निकलकर पूरे आलम इस्लाम में फैल जाएगी। इसी दौरान मशरक की सरजमीन खुरासान से सियाह झंडों वाला एक अजीम लश्कर रवाना होगा। इस लश्कर का मकसद सिर्फ एक
08:52
Speaker A
होगा। हजरत इमाम मेहंदी की नुसरत। यह कोई मामूली काफिला नहीं होगा। रास्ते में जो भी उसके सामने आएगा, वो उसका मुकाबला करेगा और अपना सफर जारी रखेगा। रिवायत में आता है जब तुम खुरासान से सियाह झंडों को आते
09:08
Speaker A
देखो तो उनके साथ हो जाओ। अगरचे तुम्हें बर्फ पर घुटनों के बल चलकर जाना पड़े। इस अजीम लश्कर के अगले दस्ते की कयादत मंसूर नामी एक शख्स के हाथ में होगी। लेकिन दूसरी तरफ शाम में सुफियानी भी खामोश नहीं
09:24
Speaker A
बैठेगा। यह खबर सुनते ही वह अपने सबसे ताकतवर लश्कर को हिजाज की तरफ रवाना कर देगा। हजरत इमाम मेहंदी को खत्म करने के लिए आखिरकार यह लश्कर मक्का और मदीना के दरमियान वाकई बैदा के मैदान में पहुंचेगा और फिर जमीन कांपना शुरू हो जाएगी। पलक
09:44
Speaker A
झपकते ही पूरा लश्कर जमीन में धंस जाएगा। मगर इस पूरे लश्कर में से सिर्फ दो आदमी जिंदा बचेंगे। एक शख्स इस अजीम वाक्य की खबर लेकर हजरत इमाम मेहंदी के पास पहुंचेगा और उन्हें बताएगा सुफियानी का लश्कर अपने अंजाम को पहुंच
10:02
Speaker A
चुका है। जबकि दूसरा शख्स वापस जाकर सुफियानी को इत्तला देगा। "तेरी फौज जिस पर तुझे बड़ा गुरूर था, अब जमीन के नीचे दफन हो चुकी है।" लेकिन बाततिल की कुतें इतनी आसानी से हथियार डालने वाली नहीं होंगी। जब ईसाइयों
10:21
Speaker A
को यह मालूम होगा कि अरब के मुख्तलिफ इलाकों से फौजे इमाम मेहंदी के झंडे तले जमा हो रही हैं और मुसलमानों की कुत दिन-ब-दिन बढ़ रही है तो वह भी खामोश नहीं बैठेंगे बल्कि चारों तरफ पैगाम भेजे जाएंगे और फिर ईसाई दुनिया में एक गैर
10:39
Speaker A
मामूली असरी इज्तमा शुरू हो जाएगा। रिवायत में जिक्
10:57
Speaker A
मौजूद फौजियों को जमा किया जाए तो उनकी कुल तादाद 8400 बनती है जो शाम की सरजन पर इमाम मेहंदी के मुकाबले के लिए जमा होंगे। इधर हजरत इमाम मेहंदी मक्का मुकर्रमा से रवाना होंगे और रोजे रसूल सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम पर
11:17
Speaker A
हाजिरी की सहादत हासिल [संगीत] करेंगे फिर हजरत इमाम मेहंदी शाम की जानिब रवाना हो जाएंगे जहां दुश्मन अपनी पूरी ताकत के साथ जमा हो रहा होगा एक तरफ हजरत इमाम मेहंदी का लश्कर होगा और दूसरी तरफ 8400 का लश्कर उस वक्त हजरत इमाम मेहंदी के
11:38
Speaker A
लश्कर के तीन गिरोह बन [संगीत] जाएंगे पहला पहला गिरोह वो होगा जो नसारा की कसरत और ताकत को देखकर खौफजदा हो जाएगा और वो मैदान छोड़कर भाग जाएंगे। अल्लाह ताला उनकी तौबा कभी कबूल नहीं फरमाएगा। दूसरा गिरोह वो होगा जो साबित कदम रहेगा। उनमें
11:58
Speaker A
से बहुत से लोग शहादत का रुतबा हासिल करेंगे और उन्हें बदो ओहद के शोहदा जैसे मरातेब अता किए जाएंगे। तीसरा गिरोह वो होगा जिसे अल्लाह ताला अपनी खास तौफीक से नवाजेगा। यह लोग आजमाइश में साबित कदम रहेंगे और हमेशा के लिए गुमराही और बुरे
12:17
Speaker A
अंजाम से महफूज़ कर दिए [संगीत] जाएंगे। पहले दिन की जंग अपने इख्तताम को पहुंचेगी। खून बहेगा। जानों की कुर्बानी दी जाएगी और शाम होने तक मैदान शोहदा से भर चुका होगा। मगर जंग खत्म नहीं होगी। अगले रोज हजरत इमाम मेहंदी दोबारा लश्कर
12:36
Speaker A
को लेकर मैदान की तरफ रवाना होंगे और इस जमात का एक-एक फर्द शहादत का जामनोश करेगा। इसके बाद फिर तीसरा दिन तुलू होगा और शाम तक हजरत इमाम मेहंदी एक मर्तबा फिर थोड़ी सी जमात के साथ अपनी कयामगाह पर
12:53
Speaker A
वापस आएंगे। अब बजाहिर ऐसा महसूस होगा जैसे मुसलमानों की कुत खत्म हो चुकी है। लेकिन असल फैसला अभी बाकी होगा। चौथे दिन हजरत इमाम मेहंदी बाकी मांदा मुहाफिज और रसद की निगरानी करने वाली जमात को साथ लेकर मैदान में उतरेंगे। यह जमात तादाद
13:13
Speaker A
में बहुत कम होगी। दुश्मन उन्हें देखकर शायद यह समझेगा कि अब फतह यकीनी है। मगर इसी दिन अल्लाह ताला अपनी खास मदद नाजिल फरमाएगा। और इसी कलील जमात को फतहे मुबीन अता फरमाएगा। हजरत इमाम मेहंदी इस अजीम मारके में शरीक मुजाहदीन और उनके खानदानों
13:33
Speaker A
में बेइंतहा इनामो इकराम तकसीम फरमाएंगे। लेकिन यह एक अजीब फतह होगी। ऐसी फतह जिसमें माल तो होगा मगर खुशी नहीं होगी। क्योंकि इस [संगीत] जंग ने बेशुमार खानदानों को उजाड़ दिया होगा। बहुत से कबीले ऐसे होंगे जिनमें कभी सैकड़ों अफराद
13:50
Speaker A
हुआ करते थे। मगर अब पूरे खानदान में सिर्फ एक शख्स बाकी बचा होगा। इसके बाद हजरत इमाम मेहंदी अपनी तवज्जो जंग से हटाकर उम्मत के नज़्मो नस की तरफ मजूल फरमाएंगे और इस दौरान छह या सात साल का
14:05
Speaker A
अरसा [संगीत] गुजर जाएगा कि एक दिन अचानक वो लम्हा आ पहुंचेगा जिसके बारे में अंबिया अलह सलाम ने खबरदार किया था जिसका नाम सुनते ही सहाबा इकराम रज़्लाहु अन के चेहरों [संगीत] पर फिक्र नमूदार हो जाती थी। रसूल्लाह सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम ने
14:23
Speaker A
हजरत आदम अल सलाम से कयामत तक आने वाले फितनों में सबसे बड़ा फितना करार दिया था। दज्जाल अब अफवाह नहीं होगा बल्कि एक हकीकत बनकर दुनिया के सामने आ चुका होगा। रिवायत में आता है कि दज्जाल यहूदियों में
14:42
Speaker A
से होगा। उसकी एक आंख में ऐब होगा और उसकी पेशानी पर काफ फ़ रा लिखा होगा। जिसे हर ईमान वाला पढ़ लेगा और वो ऐसी सवारी इस्तेमाल करेगा जिसकी रफ्तार गैर मामूली होगी। फिर वो अपना फितना शुरू करेगा। सबसे
14:59
Speaker A
पहले इराक और शाम की सरजमी में वहां से उसकी दावत और उसका फितना फैलना शुरू होगा। फिर उसका रुख असफहान की तरफ होगा। असफहान में 70 हजार यहूदी उसके लश्कर में शामिल हो [संगीत] जाएंगे। रिवायत में आता है कि
15:13
Speaker A
अल्लाह ताला लोगों की आजमाइश के लिए उसके हाथ पर हैरानक चीजें जाहिर फरमाएगा। आसमान से बारिश बरसेगी। जमीन से सब्जा उगेगा। दरख्त फल देंगे। मवेशी मोटे ताजे हो जाएंगे और लोग यह सब कुछ अपनी आंखों से देखेंगे। फिर वो एक शख्स को बुलाएगा। उसे
15:32
Speaker A
कत्ल करेगा और लोगों के सामने दोबारा [संगीत] जिंदा करेगा। यह मंजर देखकर बहुत से लोग हैरान रह जाएंगे और कमजोर ईमान वाले उसके धोखे में आ जाएंगे। लेकिन वो शख्स जिसे दज्जाल कत्ल [संगीत] करके दोबारा जिंदा करेगा उसका ईमान पहले
15:48
Speaker A
से भी ज्यादा मजबूत हो जाएगा। वो दज्जाल के सामने खड़ा होकर ऐलान करेगा अल्लाह की कसम आज मेरा यकीन पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गया है कि तू ही दज्जाल है। यही दज्जाल की सबसे बड़ी चाल होगी। वो
16:03
Speaker A
हकीकत में खुदा नहीं होगा ना जिंदगी और मौत का मालिक होगा। बल्कि यह सब अल्लाह ताला की तरफ से लोगों के इम्तिहान का हिस्सा होगा। फिर दज्जाल मुल्कों और शहरों में घूमता फिरेगा। लोगों को अपनी तरफ बुलाएगा और दुनिया का एक बड़ा हिस्सा उसके
16:19
Speaker A
फितने में गिरफ्तार होता चला जाएगा। यहां तक कि वो मक्का और मदीना के करीब भी पहुंच जाएगा। मगर अल्लाह ताला उन दोनों मुकद्दस शहरों की हिफाजत फरमाएगा। मदीना मुनव्वरा के दरवाजों पर फरिश्ते मुकर्रर होंगे। दज्जाल और उसका लश्कर मदीना में दाखिल
16:35
Speaker A
नहीं हो सकेंगे। लेकिन उसकी आमद से मदीना लरज उठेगा। कुछ ऐसे लोग जो दिल से मुनाफिक होंगे या ईमान में कमजोर होंगे मदीना से निकल कर दज्जाल के लश्कर में शामिल होंगे। अब पूरी दुनिया दो हिस्सों में तकसीम होती
16:51
Speaker A
दिखाई देगी। एक तरफ दज्जाल का फितना और दूसरी तरफ इमाम मेहंदी की कयादत में अहले ईमान दज्जाल अपनी पूरी कुत के साथ आगे बढ़ रहा होगा। शहर उसके ज़रे असर आ रहे होंगे और उसका लश्कर दमिश की सिमत बढ़ रहा होगा।
17:08
Speaker A
लेकिन इससे पहले कि वो दमिश्क तक पहुंच पाए। हजरत इमाम मेहंदी अलहिस्लाम वहां पहुंच चुके होंगे। आप वहां जंग की मुकम्मल तैयारी फरमा चुके होंगे। फिर फजर का वक्त होगा। मुअजिन अजान देगा। लश्कर नमाज की तैयारी में मशरूफ होगा। सफें बन रही
17:26
Speaker A
होंगी। लोग वजू कर रहे होंगे। और ऐन इसी [संगीत] लम्हे हजरत ईसा अलहसलाम दो फरिश्तों के कांधों पर टेक [संगीत] लगाए आसमान से नजूल फरमाएंगे और दमिश की जामे मस्जिद के मशरकी मीनार पर जलवा अफरोज़ होंगे और अहले ईमान अपनी आंखों से अल्लाह
17:46
Speaker A
के एक अजीम नबी का नजूल देख रहे होंगे। हजरत ईसा अल सलाम नजूल फरमाकर [संगीत] हजरत इमाम मेहंदी अल सलाम से मुलाकात करेंगे और इमाम मेहंदी अर्ज करेंगे [संगीत] या नबी अल्लाह आप इमामत फरमाइए मगर हजरत ईसा अल सलाम इरशाद फरमाएंगे
18:03
Speaker A
[संगीत] नहीं इमामत तुम ही करो क्योंकि तुम में से कुछ-कुछ के इमाम बनाए गए हैं और यह सम्मान अल्लाह ताला ने इसी उम्मत को अता फरमाया है। चुनांचे [संगीत] इमाम मेहंदी अल सलाम नमाज की इमामत फरमाएंगे और अल्लाह के जलील
18:20
Speaker A
उल कदर नबी हजरत ईसा अल सलाम उनके पीछे इख्तदा [संगीत] करेंगे। नमाज खत्म होगी और फिर हजरत इमाम मेहंदी अल सलाम दोबारा हजरत ईसा अलहिस्लाम से अर्ज करेंगे। अब लश्कर का इंतजाम भी आप ही संभाल लीजिए। जिस तरह
18:36
Speaker A
मुनासिब समझे अंजाम दीजिए। लेकिन हजरत ईसा अल सलाम जवाब देंगे [संगीत] नहीं यह जिम्मेदारी बदस्तूर आपके ही सुपुर्द रहेगी। लश्कर का इंतजाम भी आप ही करेंगे। मैं तो सिर्फ दज्जाल के लिए आया हूं क्योंकि उसका अंत मेरे हाथों मुकद्दर किया
18:50
Speaker A
गया है। रिवायत में आता है कि जब दज्जाल की नजर हजरत ईसा अल सलाम पर पड़ेगी तो वह इस तरह पिघलने लगेगा जैसे नमक पानी में घुल जाता है। चुनांचे हजरत ईसा अल सलाम उसका ताकुब करेंगे। यहां तक कि उसे बाबे
19:06
Speaker A
लुत के मकाम पर पा लेंगे और वहीं दज्जाल का खात्मा कर दिया जाएगा। वो फितना जिसने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया था चंद लम्हों में तारीख का हिस्सा बन जाएगा। दज्जाल के मरने के बाद उसके लश्कर में खौफ
19:21
Speaker A
फैल जाएगा। इस्लामी फौज [संगीत] आगे बढ़ेगी और दज्जाल के पैरोकार शिकस्त खा जाएंगे। रिवायत में यहां तक आता है कि दरख्त और पत्थर भी अल्लाह के हुक्म से पुकार उठेंगे और छुपने वालों की निशानानदेही करेंगे सिवाय गरकत के दरख्त
19:37
Speaker A
के। यूं जमीन एक बार फिर जुल्म के एक अजीम बाप से पाक [संगीत] हो जाएगी। रिवायत में आता है कि हजरत ईसा अल सलाम और हजरत इमाम मेहदी अलह सलाम सात साल तक एक साथ रहेंगे और जमीन पर अल्लाह ताला की बरकतें नाजिल
19:54
Speaker A
होंगी। फिर वक्त अपनी रफ्तार से आगे बढ़ता रहेगा [संगीत] और एक दिन हजरत इमाम मेहंदी अलहिसलाम का विसाल हो जाएगा। उम्मत एक अजीम रहनुमा से महरूम हो जाएगी। लेकिन मिशन खत्म नहीं होगा क्योंकि हजरत ईसा अल सलाम अब भी जमीन पर मौजूद होंगे। रिवायत
20:13
Speaker A
में आता है कि हजरत इमाम मेहंदी अल सलाम के बाद हजरत ईसा अल सलाम 40 साल तक जमीन पर कयाम फरमाएंगे। और अब सवाल यह नहीं कि इमाम मेहंदी कब आएंगे? सवाल यह है कि अगर वह आज आ जाए तो क्या हम उनके लश्कर में
20:31
Speaker A
खड़े होने वालों में शामिल होंगे? क्या हमारा ईमान इन फितनों का मुकाबला कर सकेगा? क्या हम हक को पहचान सकेंगे जब पूरी दुनिया बाततिल को हक कह रही होगी?
20:42
Speaker A
अगर आप यहां तक यह दास्तान सुन चुके हैं तो दिल से एक दुआ कीजिए। या अल्लाह जब भी हक और बाततिल का मारका [संगीत] बरपा हो हमें हक वालों में शामिल फरमाना और हमारे दिल को हिदायत पर साबित रखना। आमीन। और
20:58
Speaker A
अगर इस दास्तान ने आपके दिल को छुआ है तो इस वीडियो को उन लोगों तक भी पहुंचाइए जो आखिरी जमाने के उन अजीम वाक्यात को जानना [संगीत] चाहते हैं। जजाकुम्ला खैरा।
Topics:इमाम मेहंदीसुफियानीमुसलमानदज्जालहजरत ईसाफितनेखिलाफतमदीना मुनव्वराखुरासानइस्लामिक भविष्यवाणी

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