फिरौन की तानाशाही और हजरत मूसा (अ.स) की कहानी, जिसमें जुल्म, नबीत्व और समंदर का मोज़ज़ा शामिल है।
Key Takeaways
- जुल्म की हदें पार करने पर अल्लाह का न्याय अवश्य आता है।
- सच्चे ईमान और हिम्मत से बड़े से बड़े संकट का सामना किया जा सकता है।
- अल्लाह की मदद और नूर ही सच्ची ताकत है।
- धैर्य और विश्वास से कठिनाइयों को पार किया जा सकता है।
- अंत में सच्चाई और हक की जीत होती है।
What the video covers
- मिस्र के फिरौन की तानाशाही और उसकी खुद को खुदा मानने की कहानी।
- बनी इसराइल की मजलूम कौम पर जुल्म और उनके बच्चों की हत्या का आदेश।
- हजरत मूसा (अ.स) का जन्म और उनकी मां द्वारा उन्हें दरिया में छोड़ने का साहस।
- फिरौन की बीवी हजरत आसिया का मूसा के प्रति प्यार और संरक्षण।
- मूसा का बचपन, युवावस्था और अपने मजलूम भाइयों के दर्द को महसूस करना।
- मूसा का मिस्र में जुल्म के खिलाफ खड़ा होना और फिरौन के दरबार में हक का पैगाम देना।
- मूसा और फिरौन के बीच जादूगरों का मुकाबला और अल्लाह के नूर का प्रदर्शन।
- मिस्र पर अल्लाह के पांच अज़ाबों का नाजिल होना और फिरौन की हार।
- मूसा के नेतृत्व में बनी इसराइल का मिस्र से निकास और समंदर का मोज़ज़ा।
- फिरौन और उसकी फौज का समंदर में डूब जाना और कहानी का नैतिक संदेश।
Chapters
- 00:00फिरौन की तानाशाही और जुल्म की शुरुआत
- 01:12बनी इसराइल की दासता और फिरौन का खौफनाक सपना
- 03:08मूसा का जन्म और दरिया में छोड़ना
- 05:03मूसा का बचपन और फिरौन के महल में संरक्षण
- 05:58मूसा की युवावस्था और जुल्म के खिलाफ पहला कदम
- 07:48मदियन में मूसा की तरबियत और नबूवत की प्राप्ति
- 10:01फिरौन के दरबार में हक का पैगाम और जादूगरों से मुकाबला
- 12:03मिस्र पर अज़ाब और बनी इसराइल का निकास
- 14:21समंदर का मोज़ज़ा और फिरौन की हार
- 17:25कहानी का निष्कर्ष और नैतिक संदेश
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Speaker A
एक बादशाह जो खुद को खुदा कहता था, मैं ही तुम्हारा रब हूं। और एक बच्चा जिसे वो मिटा देना चाहता था। मगर उसे पता नहीं था कि यह फैसला उसकी तबाही लिख चुका है। जब जुल्म हद से बढ़ता है,
Speaker A
हम तुम्हारे सामने हक का पैगाम लेकर आए हैं। तो अल्लाह अपना निजाम भेजता है। देखो, समंदर ने मेरे लिए रास्ता दे दिया है। पीछा करो उनका। आज मूसा और उसकी कौम का नामोनिशान मिटा दूंगा। और फिर एक आवाज उठती है जो ताज हिला देती
Speaker A
है। यह कहानी है तकबुर के अंजाम की। मिस्र उस दौर का सबसे ताकतवर मुल्क था। एक ऐसी सल्तनत जहां फिरौन का हुक्म सिर्फ कानून नहीं बल्कि अकीदा बन चुका था। और उसी मिस्र में बनी इसराइल की एक मजलूम कौम
Speaker A
थी जिन्हें गुलाम बना लिया गया था। उनके मर्द दिन भर पत्थर उठाते, मोहल्लात तामीर करते, अपने ही हाथों से अपने जालिम के लिए अजमत खड़ी करते और रात को थकन से टूट कर जमीन पर गिर जाते। मगर उनके नसीब में आराम
Speaker A
नहीं था। क्योंकि फिरौन जानता था कि अगर यह कौम कभी मजबूत हो गई तो उसका तख्त हिल जाएगा। इसीलिए उसने उन्हें हमेशा कमजोर रखा। तफसीर इबने कसीर के मुताबिक एक रात जब पूरी सल्तनत सुकून में सो रही
Speaker A
थी। फिरौन की आंख एक ऐसे ख्वाब से खुली जिसने उसके दिल में पहली बार खौफ पैदा कर दिया। उसने देखा कि बैतुल मुकद्दस की सिम से खौफनाक आग भड़कती है और देखते ही देखते मिस्र के मोहल्लात, घर सब कुछ
Speaker A
जलकर राख हो जाता है। मगर हैरत बल्कि खौफ की सबसे बड़ी वजह यह थी कि बनी इसराइल के घर महफूज़ रहते हैं। ये कैसा सपना है? क्या वाकई मेरी सल्तनत पर कोई खतरा मंडरा रहा है? कुछ ही देर में
Speaker A
दरबार भर चुका था। मगर आज वहां शोर नहीं था। बल्कि एक अजीब सी खामोशी थी। ऐसी खामोशी जिसमें सांसों की आवाज भी भारी लगने लगे। बनी इसराइल में एक लड़का पैदा होगा। जो तेरी सल्तनत के ज़वाल का सबब बनेगा।
Speaker A
अगर यह सच है तो सुन लो। इस शहर में पैदा होने वाले हर लड़के को कत्ल कर दिया जाएगा। और फिर जुल्म ने अपनी सबसे भयानक शक्ल इख्तियार कर ली। सिपाही गलियों में फैल गए। दरवाजे तोड़े जाने लगे।
Speaker A
मां की गोदें छीन ली गई। चीखें आसमान तक पहुंचने लगी। और इंसानियत पांव तले रौदी जाने लगी। यह वो वक्त था जब खौफ सिर्फ दिलों में नहीं बल्कि फजा में महसूस होता था। जमीन जैसे जुल्म के बोझ से कांप रही
Speaker A
थी। मगर ऐसे ही अंधेरों में अल्लाह अपनी रोशनी पैदा करता है। इसी जुल्म के बीच अल्लाह ने हजरत मूसा अल सलाम को पैदा फरमाया। बाहर तलवारें थीं, खून था, मौत थी और अंदर एक मां थी और उसकी गोद में एक
Speaker A
नन्हा सा बच्चा। वो मां खौफ से कांप रही थी। हर आवाज पर चूक जाती। हर लम्हा दिल डूब जाता। मगर फिर इसी खौफ के आलम में अल्लाह ने उसके दिल में सुकून उतार दिया। अपने बच्चे को दूध पिलाओ और जब तुम्हें
Speaker A
उसका खौफ हो तो उसे दरिया के हवाले कर दो। वना इला उे मूसा अनदा फल यम वला तखाफी वला ताजनी और हमने मूसा की मां की तरफ वही भेजा कि उसे दूध पिलाओ। फिर जब तुम्हें उसका खौफ हो तो उसे दरिया
Speaker A
में डाल दो और ना डरो और ना गम करो। फिर एक संदूक तैयार किया गया। नन्हे मूसा को उसमें लिटाया गया और एक मां जिसका दिल टूट रहा था अपने ही हाथों से अपने बच्चे को दरिया के हवाले कर रही थी। यह सिर्फ एक
Speaker A
अमल नहीं था। यह ईमान की इंतहा थी। उसकी बहन को कहा गया कि उसके पीछे-पीछे चलती रहो। दूर से देखो। चुनांचे वो खौफ और उम्मीद के दरमियान उस संदूक के पीछे चलती रही। और फिर वो संदूक बहता हुआ फिरौन के
Speaker A
महल के घाट तक जा पहुंचा। वही महल जहां से मौत के फैसले निकलते थे। मगर आज वही महल एक मोजजे का इंतजार कर रहा था। फिरौन की बीवी हजरत आसिया एक नरम दिल और रहम करने वाली औरत थीं। उन्होंने संदूक को
Speaker A
उठाया और जब उसे खोला तो वक्त जैसे रुक गया। अंदर एक मासूम चेहरा था ऐसा नूर जो दिल को छू जाए। वो बच्चा मूसा अल सलाम थे और इसी लम्हे अल्लाह ने हजरत आसिया अल सलाम के दिल में उस बच्चे के लिए
Speaker A
ऐसी मोहब्बत डाल दी कि उन्होंने उसे सीने से लगा लिया जैसे वो हमेशा से उन्हीं का हो। फिर बारी आई उस बच्चे को दूध पिलाने की। मगर हैरत की बात यह थी कि महल में मौजूद किसी दाया का दूध उस
Speaker A
बच्चे ने कबूल ही ना किया। और यूं अल्लाह की कुदरत देखो। मूसा अपनी ही मां की गोद में वापस आ गए। वही मां जो चंद दिन पहले खौफ से कांप रही थी। आज इसी बच्चे को सीने से लगाकर सुकून के आंसू बहा
Speaker A
रही थी। फदना इला उ तक वजन व्लाह हक वलमून फिर हमने उसे उसकी मां की तरफ लौटा दिया ताकि उसकी आंखें ठंडी हो और वो गमगीन ना हो और ताकि वह जान ले कि बेशक अल्लाह का वादा सच्चा है। मगर अक्सर लोग नहीं जानते।
Speaker A
वक्त गुजरता गया और मूसा एक तवाना बावकार जवान बन गए। महल की परवरिश ने उन्हें इल्म दिया मगर उनके दिल में अपने मजलूम भाइयों का दर्द हमेशा जिंदा रहा। एक दिन बाजार में एक ऐसा मंजर उनकी नजरों के सामने आया
Speaker A
जिसने उनकी रूह हिला दी। मूसा ने उस मजलूम को बचाने के लिए उस मिस्री को रोका और एक मुक्का मारा। वो मुक्का सिर्फ एक इंसान पर नहीं बल्कि सदियों के जुल्म पर था। मगर वो मिस्री वहीं
Speaker A
ढेर हो गया। और जैसे ही यह खबर फिरौन के दरबार तक पहुंची मूसा को पकड़ो। एक आग भड़क उठी। अब मौत के साए मूसा का पीछा करने लगे। एक शख्स दौड़ता हुआ आया। चेहरे पर खौफ वाज़ था।
Speaker A
मूसा फौरन निकल जाइए। आपके कत्ल का फैसला हो चुका है। सिपाही हर रास्ते पर हैं। खुदा के लिए अपनी जान बचाइए। यह सुनते ही मूसा ने एक लम्हा जाया ना किया। ना कोई सामान, ना कोई सवारी। बस एक
Speaker A
यकीन और रब पर भरोसा। और वो निकल पड़े एक अनजान सफर पर। पीछे मौत और सामने नामालूम रास्ते। कई दिनों की मसाफत के बाद वो मदियन पहुंचे। भूख, प्यास, थकन मगर दिल में अल्लाह की तलब। वहां एक कुआं
Speaker A
था, मर्दों का हुजूम और एक तरफ दो लड़कियां खामोश मजबूर। आप यहां अलग क्यों खड़ी हैं? क्या मैं मदद कर सकता हूं? हम मजबूर हैं। हमारे वालिद बूढ़े हैं। हम इंतजार करते हैं। मूसा आगे बढ़े और वो भारी पत्थर जो कई
Speaker A
मर्द हटाते थे अकेले हटा दिया। यह सिर्फ मदद नहीं थी बल्कि किरदार की ताकत थी। यह वाकया हजरत शोएब अल सलाम तक पहुंचा और मूसा अल सलाम को बुलाया गया। मूसा अब डरो नहीं। तुम एक अमन वाली जगह पर आ
Speaker A
चुके हो। और यूं एक शहजादा चरवाहा बन गया। 10 साल तरबियत के, सब्र के और तैयारी के। फिर एक रात वापसी के सफर में कोहेतूर पर एक अजीब रोशनी नजर आई। मगर वहां आग नहीं थी बल्कि अल्लाह का नूर था। ए मूसा मैं तेरा रब
Speaker A
हूं। जूते उतार तू मुकद्दसवादी में है। और इसी लम्हे मूसा अल सलाम को नबूवत अता हुई। लाठी अजदाहा बनी। हाथ नूर बन गया। फिरौन के पास जाओ। वो सरकश हो चुका है। ऐ रब मेरा सीना खोल दे। मेरी जुबान आसान
Speaker A
कर दे और मेरे भाई को मददगार बना दे। फिर वो दरबार में दाखिल हुए जहां फिरौन तख्त पर बैठा था। मूसा और हारून ने फिरौन के सामने हक का पैगाम पेश किया। हम तुम्हारे सामने हक का पैगाम लेकर आए
Speaker A
हैं। मगर तकबुर में डूबा हुआ वो बादशाह सच को मानने के लिए तैयार ना था। उसने फैसला किया कि हक को जादू के जोर पर दबाया जाए। चुनांचे पूरे मिस्र में ऐलान कर दिया गया। एक महान मुकाबला होगा जहां फिरौन के सबसे
Speaker A
बड़े जादूगर मूसा के मुकाबले आएंगे। लोग जोक दरजक आने लगे। एक बहुत बड़ा मैदान सजाया गया। हर आंख इसी मुकाबले पर जमी हुई थी। क्योंकि आज फैसला होना था हक और बाततिल के दरमियान। और फिर वो लम्हा आ
Speaker A
पहुंचा जब फिरौन के इशारे पर मिस्र के सबसे बड़े जादूगर आगे बढ़े। उन्होंने अपनी रस्सियां और लाठियां जमीन पर फेंकी। पूरा मैदान सांपों से भर गया। लोग खौफ से पीछे हटने लगे। देख मूसा ये है हमारी ताकत। अब बता तेरा
Speaker A
खुदा तुझे इस तूफान से कैसे बचाएगा? मूसा डरो नहीं अपनी लाठी फेंको। मूसा ने अपनी लाठी जमीन पर फेंकी और देखते ही देखते वो लाठी एक अजीमो शान अजदहे में बदल गई। ऐसा अजदहा जिसने जादूगरों के सारे फर्जी सांपों को एक-एक करके निगलना शुरू
Speaker A
कर दिया। और फिर पूरे दरबार पर सन्नाटा छा गया। यह जादू नहीं है। यह कोई इंसानी करिश्मा नहीं। यह तो उसी खुदा का नूर है जिसका जिक्र मूसा कर रहा है। हारून और मूसा के रब पर ईमान लाए। चाहे फिरौन हमारे
Speaker A
साथ जो भी करें। जादूगरों का सजदे में गिरना फिरौन के मुंह पर सबसे बड़ा तमांचा था। उसका गुरूर खाक में मिल चुका था। मगर उसकी सरकशी अब भी बाकी थी। उसने उन्हें दर्दनाक सजाओं की धमकियां दी। मगर जो लोग ईमान की मिठास चख
Speaker A
चुके हो उन्हें अब मौत का खौफ कहा रहता है। हक वाज़ हो चुका था। मगर फिरौन की अना ने उसे अंधा कर दिया था। जब उसने अल्लाह की निशानानियों को झुठलाया तो कुदरत ने मिस्र की सरजमी को हिला कर रख दिया
Speaker A
और फिर एक के बाद एक पांच ऐसे अज़ाब नाजिल हुए कि मिस्र की शानो शौकत मिट्टी में मिलकर रह गई। पहले एक खौफनाक तूफान आया जिसने खेतों को तबाह बर्बाद कर दिया। फिर टिड्डियों के लश्कर आए और सब कुछ चट कर
Speaker A
गए। फिर पूरा मिस्र जू और मेंढकों की लपेट में आ गया। और यहां तक के उनका पीने का पानी भी खालिस खून में बदल गया। जब मौत सर पर मुंडलाने लगती तो फिरौन अपनी खुदाई भूल जाता और मूसा के
Speaker A
सामने गिड़गिड़ाने लगता। मगर जैसे ही अज़ाब टलता वो फिर से वही पुराना जालिम बन जाता। यहां तक के अल्लाह का सब्र खत्म हुआ और आखिरी फैसले की घड़ी आ पहुंची। और फिर रात के सन्नाटे में अल्लाह का हुक्म आया। मूसा अपनी कौम को लेकर निकल
Speaker A
जाओ। बनी इसराइल खामोशी से मिस्र की सरहदों की तरफ बढ़ने लगे। हर कदम पर खौफ, हर सांस में बेयकीनी। मगर उम्मीद सिर्फ अल्लाह से। मगर जैसे ही सुबह का सूरज निकला पीछे से गर्
Speaker A
बनकर नमूदार हुआ। सामने बेपनाह समंदर और पीछे तलवारें, नेजे और खून की प्यासी फौज। मूसा हम तो मारे गए। सामने ये गहरी लहरें हैं। और पीछे फिरौन का लश्कर जो हमें कुचलने के लिए तैयार है। क्या आप हमें
Speaker A
यहां मौत के मुंह में ले आए हैं? अब तो हमारा कोई मददगार नहीं। हरगिज़ नहीं। तुम गलत सोच रहे हो। बेशक मेरा रब मेरे साथ है और वो मुझे जरूर रास्ता दिखाएगा। आज अल्लाह का वादा पूरा होकर रहेगा। मूसा ने अल्लाह के हुक्म से
Speaker A
अपनी लाठी समंदर पर मारी और फिर एक ऐसा मोजजा हुआ जिसने तारीख बदल दी। समंदर फट गया और उसके अंदर 12 खुस्ते बन गए। पानी की दीवारें दोनों तरफ पहाड़ों की मानिंद खड़ी हो गई। फिर बनी इसराइल एक-एक करके उन
Speaker A
खुश्क रास्तों पर चलने लगे। हर कदम पर खौफ था। मगर इससे बढ़कर अल्लाह पर यकीन था। इधर दूर कहीं उफक पर गर्द का एक तूफान उठा और फिर जमीन कांपने लगी क्योंकि फिरौन अपने लश्कर के साथ पहुंच चुका था।
Speaker A
देखो समंदर ने मेरे लिए रास्ता दे दिया है। पीछा करो उनका। आज मूसा और उसकी कौम का नामोनिशान मिटा दूंगा। बनी इसराइल का आखिरी शख्स भी रास्ता पार कर गया। मगर जैसे ही फिरौन अपने लश्कर समेत समुंदर के दरमियान पहुंचा अल्लाह का
Speaker A
हुक्म आया और फिर पानी की दीवारें टूट पड़ी और सदियों का तकब्बुर एक ही लम्हे में गर्क होने लगा। [संगीत] मैं ईमान लाया। मैं ईमान लाया। उस रब पर [संगीत] जिस पर बनी इसराइल ईमान लाए। मूसा का खुदा ही
Speaker A
हकीकी खुदा है। मुझे बचा लो। मुझे बचा लो। अब ईमान लाता है। जबकि इससे पहले तू सरकशी करता था। आज हम तेरे जिस्म को बचा लेंगे। ताकि तू आने वाली [संगीत] नस्लों के लिए इबरत का निशान बन जाए।
Speaker A
और फिर सब [संगीत] कुछ खत्म हो गया। दरिया नील की लहरों ने उस जिस्म को [संगीत] किनारे पर ला फेंका जिसने कभी खुद को खुदा कहा था। मैं ही तुम्हारा रब हूं। वही फिरौन जो तख्त पर बैठकर हुक्म देता
Speaker A
था। मूसा को पकड़ो। आज एक बेबस लाश बन चुका था। अल्लाह ने उसकी रूह कब्ज कर ली। मगर उसके जिस्म को बाकी रखा ताकि दुनिया देख सके कि जो अपने रब से टकराता है उसका अंजाम कितना होलनाक होता है। यह दास्तान हमें सिखाती है कि
Speaker A
जुल्म कितना [संगीत] ही ताकतवर क्यों ना हो अल्लाह की तदबीर के सामने कुछ भी नहीं। [गाना गाने की आवाज़] आज भी वो जिस्म महफूज है एक ऐसी खामोश चीख बनकर [संगीत] जिसे पूरी दुनिया सुनती है। अगर यह दास्तान आपके दिल को छू गई हो तो इस
Speaker A
वीडियो को लाइक जरूर करें और अगर आप ऐसी ही हकीकत से भरपूर दास्ताने सुनना चाहते हैं तो हमारे साथ जुड़े रहें क्योंकि अगली कहानी इससे भी ज्यादा चौंका देने वाली होगी। अल्लाह हाफिज।
Topics:फिरौनहजरत मूसामिस्रजुल्मनबीत्वसमंदर का मोज़ज़ाबनी इसराइलअज़ाबहक और बातिलइस्लामी कहानी











