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पैसा तुम्हारे पीछे कैसे आएगा? | धन के पीछे भागना बंद करो | Osho Hindi speech

पैसे के पीछे भागना बंद करो, अपनी प्रतिभा और दृष्टिकोण बदलो, तभी धन और समृद्धि स्वतः आकर्षित होगी।

Key Takeaways

  • पैसे के पीछे भागना बंद करो, अपनी प्रतिभा और सेवा पर ध्यान दो।
  • धन एक ऊर्जा है, इसे मित्र की तरह स्वीकार करो।
  • समृद्धि का निर्माण मानसिकता और दृष्टिकोण से होता है।
  • ईमानदारी और सेवा से धन स्वतः आता है।
  • ऊर्जा का एकाग्रिकरण सफलता और धन का मूल मंत्र है।

What the video covers

  • पैसे के पीछे भागना धन को दूर करता है, इसे समझना जीवन की बड़ी कला है।
  • धन एक ऊर्जा है, जिसे पकड़ने के लिए अपने भीतर गहराई और आकर्षण पैदा करना जरूरी है।
  • हर व्यक्ति की अपनी अनोखी प्रतिभा और धारा होती है, नकल करने से सफलता नहीं मिलती।
  • धन के प्रति दृष्टिकोण सकारात्मक और तटस्थ होना चाहिए, न कि भय या लालच से भरा।
  • पैसे का सही उपयोग सेवा और ईमानदारी से होता है, जो दूसरों की मदद करता है वह समृद्ध होता है।
  • गरीबी की मानसिकता को तोड़कर समृद्ध चेतना का निर्माण करना आवश्यक है।
  • कृतज्ञता और सकारात्मक ध्यान से समृद्धि को आकर्षित किया जा सकता है।
  • ऊर्जा को एकाग्रित करके ही धन और सफलता के चमत्कार संभव होते हैं।
  • ध्यान और प्रेम से किया गया कार्य अद्वितीय होता है और धन को आकर्षित करता है।
  • धन जीवन का हिस्सा है, जीवन का केंद्र नहीं, इसलिए संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

Answers

Questions about this video

पैसे के पीछे भागना क्यों गलत है?

पैसे के पीछे भागने से पैसा दूर भागता है क्योंकि धन एक ऊर्जा है जो आकर्षित होती है, न कि जबरदस्ती पकड़ी जाती है। इसलिए पैसे के पीछे भागना ही समस्या की जड़ है।

धन को कैसे एक मित्र की तरह माना जा सकता है?

धन को न तो पाप समझना चाहिए और न ही भगवान की तरह पूजना चाहिए, बल्कि इसे एक उपकरण और सेवा का माध्यम मानकर सहज और तटस्थ दृष्टिकोण रखना चाहिए।

धन प्राप्त करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण मानसिकता क्या है?

धन प्राप्त करने के लिए समृद्ध चेतना, सकारात्मक दृष्टिकोण, कृतज्ञता और अपने भीतर की प्रतिभा को पहचानना सबसे महत्वपूर्ण है। गरीबी की मानसिकता को तोड़ना आवश्यक है।

Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:00
Speaker A
मैं तुमसे कुछ कहना चाहता हूं। एक बात जो बहुत गहरी है, बहुत मौलिक है और जिसे सुनकर शायद तुम्हारा पूरा जीवन ही बदल जाए। तुम पूछते हो पैसा तुम्हारे पीछे कैसे आएगा? यह प्रश्न बहुत पुराना है। बहुत सारे लोग इसी चिंता में जीवन गवा देते हैं। लेकिन मैं तुमसे कहता हूं। तुमने जो प्रश्न पूछा है, वही गलत है। तुम पूछ रहे हो कि पैसा तुम्हारे पीछे कैसे आएगा और मैं कहता हूं। यह प्रश्न ही तुम्हारी परेशानी की जड़ है क्योंकि जब तुम पैसे के पीछे भागते हो तो पैसा तुमसे दूर भागता है। यह जीवन का एक अटल नियम है। एक रहस्य है जिसे जान लेना ही सबसे बड़ी कला है। तुमने देखा होगा जो लोग सुबह से शाम तक पैसे कमाने की फिक्र में लगे रहते हैं।
00:18
Speaker A
[हंसी] वे अक्सर थके मांदे, चिंतित और खाली दिखते हैं। उनके पास शायद पैसा होता है। लेकिन पैसा उनके आनंद को, उनकी शांति को, उनकी स्वतंत्रता को नहीं खरीद पाता। और जो लोग अपने काम में, अपनी कला में, अपनी साधना में इतने मग्न हो जाते हैं कि उन्हें पैसे की कोई फिक्र नहीं रहती। अचानक एक दिन वे देखते हैं कि पैसा उनके दरवाजे पर आ खड़ा हुआ है। यह कोई जादू नहीं है। यह ऊर्जा का, चेतना का, आपके होने के तरीके का विज्ञान है। तुम्हें समझना होगा कि पैसा केवल कागज का टुकड़ा या धातु का सिक्का नहीं है। पैसा एक ऊर्जा है, एक प्रवाह है। वो उसी तरह है जैसे नदी का पानी। यदि तुम नदी के पीछे दौड़ोगे तो क्या तुम कभी नदी को पकड़ सकोगे? तुम हाथ पसारोगे। पानी उंगलियों से फिसल जाएगा। नदी को पकड़ने के लिए नदी के पीछे भागना बंद करो बल्कि किनारे पर खड़े हो जाओ। एक गहरा कुआं खोदो। नदी का पानी अपने आप उसमें भर जाएगा। यही रहस्य है धन का। तुम्हें अपने भीतर एक ऐसा कुआं खोदना होगा। एक ऐसी गहराई, एक ऐसा आकर्षण कि धन की ऊर्जा तुम्हारी ओर स्वतः प्रवाहित होने लगे। इसलिए पहली बात जो मैं तुमसे कहना चाहता हूं वो यह है कि पैसे के पीछे भागना बंद करो। यह मत सोचो कि पैसा कैसे कमाया जाए। यह सोचो कि तुम ऐसा क्या बन सकते हो?
00:32
Speaker A
ऐसा क्या कर सकते हो कि पैसा तुम्हारी प्रतिभा, तुम्हारी सेवा, तुम्हारे प्रेम के प्रति आकर्षित हो। तुमने कभी किसी बड़े कलाकार को, किसी महान वैज्ञानिक को, किसी सच्चे गुरु को देखा है? वे कभी धन के बारे में नहीं सोचते। वे तो अपनी खोज में, अपनी अभिव्यक्ति में इतने डूबे होते हैं कि उन्हें संसार याद भी नहीं रहता। और फिर देखो संसार उनके पीछे दौड़ता है। धन उनके पीछे आता है। यह जीवन का एक विडंबना पूर्ण नियम है कि जिस चीज को तुम पकड़ना चाहते हो वह छूट जाती है और जिसे तुम छोड़ देते हो वो तुम्हारा हो जाती है। तुम कहोगे ये तो ठीक है। लेकिन व्यवहार में, रोजमर्रा की जिंदगी में, पेट की भूख में, परिवार की जिम्मेदारी में यह कैसे संभव है? मैं समझता हूं तुम्हारी व्यथा। मैं कहता हूं यह कोई असंभव बात नहीं है। यह तुम्हारी दृष्टि, तुम्हारा दृष्टिकोण बदलने की बात है। तुम इसलिए गरीब हो या धनी होकर भी तुम्हारा मन गरीब रहता है। क्योंकि तुम सोचते हो कि धन एक बाहरी वस्तु है जो तुम्हें कहीं से लानी है जिसे तुम्हें संसार से छीनना है। नहीं। धन तुम्हारे भीतर की क्षमता, तुम्हारे भीतर की प्रतिभा, तुम्हारे भीतर के आत्मविश्वास का बाहरी विस्तार है। जो व्यक्ति अपने भीतर शून्य है, वह बाहर कितना भी धन बटोर ले उसका जीवन खाली है और वह धन उसे कभी संतुष्ट नहीं कर सकता। इसलिए पहला सूत्र यह है। अपने भीतर देखो, अपनी प्रतिभा को जानो, अपने कौशल को, अपनी अभिव्यक्ति को, उस अनोखेपन को जो केवल तुम में है। तुम्हारी सबसे बड़ी गलती यह है कि तुम दूसरों की नकल करने की कोशिश करते हो। कोई एक काम करके अमीर हो गया, तो तुम भी वही काम करने लगते हो। तुम भूल जाते हो कि जो एक के लिए रास्ता था, वो दूसरे के लिए गर्त हो सकता है। प्रत्येक व्यक्ति अद्वितीय है।
00:47
Speaker A
प्रत्येक की अपनी एक निश्चित धारा है। उसका अपना एक निश्चित प्रवाह है। तुम्हें अपनी धारा को पहचानना होगा। और जब तुम अपनी धारा में बहते हो, जब तुम वही करते हो जो तुम्हारा हृदय चाहता है, जो तुम्हारी आत्मा को संतुष्ट करता है, तो उसी क्षण एक अलौकिक समृद्धि तुम्हारे पास आनी शुरू हो जाती है। वह समृद्धि केवल पैसे की नहीं होती, वह आनंद की होती है, शांति की होती है और हां, पैसे की भी होती है क्योंकि पैसा भी उसी समग्रता का एक हिस्सा है। दूसरी बात जो बहुत महत्वपूर्ण है वह है तुम्हारा मनोभाव, तुम्हारा दृष्टिकोण धन के प्रति। अधिकतर लोग धन को पाप समझते हैं या धन को बुराई समझते हैं। ये उनकी अज्ञानता है और यही अज्ञानता उन्हें दरिद्र बनाए रखती है। धन न तो पाप है और ना ही पुण्य। धन तो बस एक उपकरण है, एक माध्यम है। जैसे चाकू का उपयोग तुम किसी को मारने के लिए कर सकते हो और उसी चाकू से तुम रोटी काट सकते हो या किसी की जान बचा सकते हो। धन भी वैसा ही है। यह तुम्हारे उपयोग पर, तुम्हारी चेतना पर निर्भर करता है। यदि तुम्हारी चेतना निम्न है तो धन तुम्हारे लिए विनाश लाएगा। अहंकार लाएगा। मदिरा और भ्रष्टाचार लाएगा। और यदि तुम्हारी चेतना ऊंची है तो धन तुम्हारी सेवा करेगा। तुम्हारी मदद करेगा। तुम औरों की सेवा में लगा सकते हो।
01:04
Speaker A
इसलिए धन के प्रति अपना दृष्टिकोण बदलो। उसे नापसंद मत करो। उससे डरो मत। और ना ही उसके प्रति लालच रखो। एक स्वस्थ, तटस्थ, सहज दृष्टिकोण रखो। धन एक ऊर्जा है और ऊर्जा को मित्र की तरह देखा जाना चाहिए, दुश्मन की तरह नहीं। जो उसे दुश्मन समझता है, वो उससे दूर भागता है और वो उससे दूर भागता है। जो उसे भगवान समझता है, वो उसके पैरों पर गिर जाता है और फिर वो उसे कुचल देता है। लेकिन जो उसे एक मित्र, एक साधन, एक सेवक के रूप में देखता है, वो उसके साथ सहज हो जाता है और वो उसके साथ हो जाता है। तुम सोचते हो कि पैसा कमाने के लिए चालाकी, धूर्तता, झूठ और शोषण की आवश्यकता होती है। यह समाज ने तुम्हें सिखाया है और यह सबसे बड़ा झूठ है। सच तो यह है कि पैसा कमाने का सबसे बड़ा, सबसे अटल, सबसे शाश्वत नियम है सेवा और ईमानदारी। जो व्यक्ति दूसरों की सेवा करने में, दूसरों की समस्याओं को हल करने में, दूसरों के जीवन को सुगम और सुंदर बनाने में सच्ची रुचि रखता है, उसके पास धन अपने आप आता है। क्योंकि धन तो केवल मूल्य की अभिव्यक्ति है। तुम संसार को जितना अधिक मूल्य दोगे, संसार तुम्हें उतना ही अधिक मूल्य लौटाएगा। यह एक सरल अंकगणित है। एक सरल आर्थिक नियम है। यदि तुम किसी काम को पूरे मन से, पूरी लगन से, पूरे प्रेम से करते हो तो उस काम में तुम्हारी ऊर्जा, तुम्हारी चेतना, तुम्हारा प्रेम समाहित होता है और वह काम अद्वितीय बन जाता है।
01:17
Speaker A
वो काम किसी और के द्वारा नहीं किया जा सकता। वो काम अपने आप में एक मूल्य रखता है और संसार उस मूल्य को, उस ऊर्जा को पहचानता है और उसके लिए तुम्हें पैसे देता है। इसलिए अपने काम को, अपनी कला को, अपनी सेवा को एक पूजा की तरह, एक साधना की तरह करो। जितना गहराई से करोगे, उतनी अधिक समृद्धि तुम्हारे द्वार पर आएगी। तीसरी और बहुत महत्वपूर्ण बात जो मैं तुमसे कहना चाहता हूं वह है तुम्हारी आंतरिक मानसिकता, तुम्हारा विश्वास। तुम सोचते हो कि तुम गरीब पैदा हुए हो, तुम्हारा भाग्य गरीबी है। तुम्हारी किस्मत में पैसा नहीं है। तुम्हारी नियति ही गरीबी है। यह विश्वास ही तुम्हारी सबसे बड़ी बेड़ी है। जब तुम सोचते हो कि तुम गरीब हो तो तुम गरीब बने रहते हो। और ना केवल बने रहते हो बल्कि तुम और गरीब होते चले जाते हो। क्योंकि तुम्हारा मन, तुम्हारी अचेतन धारणा पैसे को नकारती है और जो तुम नकारते हो वह तुमसे दूर हो जाता है। तुम्हें गरीबी की इस मानसिकता को तोड़ना होगा। तुम एक समृद्ध चेतना का निर्माण करो। समृद्धि का अर्थ केवल पैसा नहीं है। समृद्धि एक दृष्टिकोण है। समृद्धि एक अनुभव है। जो व्यक्ति प्रकृति में समृद्धि देखता है, जो व्यक्ति दूसरों के जीवन में समृद्धि देखता है, जो व्यक्ति अपने जीवन में, अपने रिश्तों में, अपने स्वास्थ्य में, अपनी बुद्धि में समृद्धि का अनुभव करता है, वही चेतना पैसे को भी आकर्षित करती है। इसलिए प्रतिदिन कृतज्ञता का अभ्यास करो। सुबह उठते ही उस सब के लिए धन्यवाद दो जो तुम्हारे पास है। चाहे वह कितना भी कम क्यों ना हो।
01:33
Speaker A
तुम्हारे पास दो वक्त की रोटी है। तुम्हारे पास पानी है। तुम्हारे पास हवा है। तुम्हारे पास आंखें हैं जो देखती हैं। कान हैं जो सुनते हैं। हाथ हैं जो काम कर सकते हैं। यही तुम्हारी पूंजी है। यही तुम्हारी समृद्धि है। इस कृतज्ञता भाव से, इस कृतज्ञता की ऊर्जा से तुम एक ऐसा कंपन पैदा करते हो जो और अधिक समृद्धि को आकर्षित करता है। यही सृष्टि का नियम है। जिस पर तुम ध्यान देते हो, वह बढ़ता है। यदि तुम अपनी गरीबी पर ध्यान दोगे, तो गरीबी बढ़ेगी। यदि तुम अपनी समृद्धि पर ध्यान दोगे, चाहे वो थोड़ी ही सही, तो वह बढ़ेगी, वह विस्तारित होगी। इसके अलावा एक और बहुत गहरा रहस्य है जो मैं तुम्हें बताना चाहता हूं। पैसा तुम्हारे पीछे तब आता है जब तुम अपनी ऊर्जा को बिखेरना नहीं, बल्कि उसे एकाग्र करना सीख लेते हो। तुम्हारी ऊर्जा सबसे बड़ी धन है और वो ऊर्जा जब एक बिंदु पर, एक लक्ष्य पर, एक काम पर केंद्रित हो जाती है, तो वो अद्भुत चमत्कार कर सकती है। देखो, एक आम आदमी की ऊर्जा बिखरी रहती है। वो सैकड़ों बातों में, हजारों चिंताओं में, अनगिनत इच्छाओं में अपनी ऊर्जा को व्यर्थ गवा देता है। और जो सफल होता है, जो धनवान होता है, उसने अपनी ऊर्जा को एक ही दिशा में, एक ही उद्देश्य के लिए लगाना सीख लिया होता है। यह ध्यान की प्रक्रिया है। जब तुम ध्यान करते हो, जब तुम अपने भीतर एकाग्र होते हो, जब तुम अपनी चे...
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Speaker A
उसमें भर जाएगा। यही रहस्य है धन का। तुम्हें अपने भीतर एक ऐसा कुआं खोदना होगा। एक ऐसी गहराई, एक ऐसा आकर्षण कि धन की ऊर्जा तुम्हारी ओर स्वतः प्रवाहित होने लगे। इसलिए पहली बात जो मैं तुमसे कहना चाहता हूं वो यह है कि पैसे के पीछे भागना
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Speaker A
बंद करो। यह मत सोचो कि पैसा कैसे कमाया जाए। यह सोचो कि तुम ऐसा क्या बन सकते हो?
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Speaker A
ऐसा क्या कर सकते हो कि पैसा तुम्हारी प्रतिभा, तुम्हारी सेवा, तुम्हारे प्रेम के प्रति आकर्षित हो। तुमने कभी किसी बड़े कलाकार को, किसी महान वैज्ञानिक को, किसी सच्चे गुरु को देखा है। वे कभी धन के बारे में नहीं सोचते। वे तो अपनी खोज में, अपनी
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Speaker A
अभिव्यक्ति में इतने डूबे होते हैं कि उन्हें संसार याद भी नहीं रहता। और फिर देखो संसार उनके पीछे दौड़ता है। धन उनके पीछे आता है। यह जीवन का एक विडंबना पूर्ण नियम है कि जिस चीज को तुम पकड़ना चाहते
02:44
Speaker A
हो वह छूट जाती है और जिसे तुम छोड़ देते हो वो तुम्हारा हो जाती है। तुम कहोगे ये तो ठीक है। लेकिन व्यवहार में, रोजमर्रा की जिंदगी में, पेट की भूख में, परिवार की जिम्मेदारी में यह कैसे संभव है? मैं
03:01
Speaker A
समझता हूं तुम्हारी व्यथा। मैं कहता हूं यह कोई असंभव बात नहीं है। यह तुम्हारी दृष्टि, तुम्हारा दृष्टिकोण बदलने की बात है। तुम इसलिए गरीब हो या धनी होकर भी तुम्हारा मन गरीब रहता है। क्योंकि तुम सोचते हो कि धन एक बाहरी वस्तु है जो
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Speaker A
तुम्हें कहीं से लानी है जिसे तुम्हें संसार से छीनना है। नहीं। धन तुम्हारे भीतर की क्षमता तुम्हारे भीतर की प्रतिभा तुम्हारे भीतर के आत्मविश्वास का बाहरी विस्तार है। जो व्यक्ति अपने भीतर शून्य हैव वो बाहर कितना भी धन बटोर ले उसका
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Speaker A
जीवन खाली है और वह धन उसे कभी संतुष्ट नहीं कर सकता। इसलिए पहला सूत्र यह है। अपने भीतर देखो, अपनी प्रतिभा को जानो, अपने कौशल को, अपनी अभिव्यक्ति को उस अनोखेपन को जो केवल तुम में है। तुम्हारी सबसे बड़ी गलती यह है कि तुम दूसरों की
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Speaker A
नकल करने की कोशिश करते हो। कोई एक काम करके अमीर हो गया, तो तुम भी वही काम करने लगते हो। तुम भूल जाते हो कि जो एक के लिए रास्ता था, वो दूसरे के लिए गर्त हो सकता है। प्रत्येक व्यक्ति अद्वितीय है।
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Speaker A
प्रत्येक की अपनी एक निश्चित धारा है। उसका अपना एक निश्चित प्रवाह है। तुम्हें अपनी धारा को पहचानना होगा। और जब तुम अपनी धारा में बहते हो। जब तुम वही करते हो जो तुम्हारा हृदय चाहता है जो तुम्हारी आत्मा को संतुष्ट करता है तो उसी क्षण एक
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Speaker A
अलौकिक समृद्धि तुम्हारे पास आनी शुरू हो जाती है वह समृद्धि केवल पैसे की नहीं होती वह आनंद की होती है शांति की होती है और हां पैसे की भी होती है क्योंकि पैसा भी उसी समग्रता का एक हिस्सा है दूसरी बात
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Speaker A
जो बहुत महत्वपूर्ण है वह है तुम्हारा मनोभाव तुम्हारा दृष्टिकोण धन के प्रति अधिकतर लोग धन को पाप समझते हैं या धन को बुराई समझते हैं। ये उनकी अज्ञानता है और यही अज्ञानता उन्हें दरिद्र बनाए रखती है। धन न तो पाप है और ना ही पुण्य। धन तो बस
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Speaker A
एक उपकरण है, एक माध्यम है। जैसे चाकू का उपयोग तुम किसी को मारने के लिए कर सकते हो और उसी चाकू से तुम रोटी काट सकते हो या किसी की जान बचा सकते हो। धन भी वैसा ही है। यह तुम्हारे उपयोग पर, तुम्हारी
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Speaker A
चेतना पर निर्भर करता है। यदि तुम्हारी चेतना निम्न है तो धन तुम्हारे लिए विनाश लाएगा। अहंकार लाएगा। मदिरा और भ्रष्टाचार लाएगा। और यदि तुम्हारी चेतना ऊंची है तो धन तुम्हारी सेवा करेगा। तुम्हारी मदद करेगा। तुम औरों की सेवा में लगा सकते हो।
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Speaker A
इसलिए धन के प्रति अपना दृष्टिकोण बदलो। उसे नापसंद मत करो। उससे डरो मत। और ना ही उसके प्रति लालच रखो। एक स्वस्थ तटस्थ सहज दृष्टिकोण रखो। धन एक ऊर्जा है और ऊर्जा को मित्र की तरह देखा जाना चाहिए। दुश्मन
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Speaker A
की तरह नहीं। जो उसे दुश्मन समझता है, वो उससे दूर भागता है और वो उससे दूर भागता है। जो उसे भगवान समझता है, वो उसके पैरों पर गिर जाता है और फिर वो उसे कुचल देता है। लेकिन जो उसे एक मित्र, एक साधन, एक
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Speaker A
सेवक के रूप में देखता है, वो उसके साथ सहज हो जाता है और वो उसके साथ हो जाता है। तुम सोचते हो कि पैसा कमाने के लिए चालाकी, धूर्तता, झूठ और शोषण की आवश्यकता होती है। यह समाज ने तुम्हें सिखाया है और
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Speaker A
यह सबसे बड़ा झूठ है। सच तो यह है कि पैसा कमाने का सबसे बड़ा, सबसे अटल, सबसे शाश्वत नियम है सेवा और ईमानदारी। जो व्यक्ति दूसरों की सेवा करने में, दूसरों की समस्याओं को हल करने में, दूसरों के
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Speaker A
जीवन को सुगम और सुंदर बनाने में सच्ची रुचि रखता है, उसके पास धन अपने आप आता है। क्योंकि धन तो केवल मूल्य की अभिव्यक्ति है। तुम संसार को जितना अधिक मूल्य दोगे, संसार तुम्हें उतना ही अधिक मूल्य लौटाएगा। यह एक सरल अंकगणित है। एक
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Speaker A
सरल आर्थिक नियम है। यदि तुम किसी काम को पूरे मन से पूरी लगन से पूरे प्रेम से करते हो तो उस काम में तुम्हारी ऊर्जा तुम्हारी चेतना तुम्हारा प्रेम समाहित होता है और वह काम अद्वितीय बन जाता है।
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Speaker A
वो काम किसी और के द्वारा नहीं किया जा सकता। वो काम अपने आप में एक मूल्य रखता है और संसार उस मूल्य को उस ऊर्जा को पहचानता है और उसके लिए तुम्हें पैसे देता है। इसलिए अपने काम को अपनी कला को अपनी
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Speaker A
सेवा को एक पूजा की तरह एक साधना की तरह करो। जितना गहराई से करोगे, उतनी अधिक समृद्धि तुम्हारे द्वार पर आएगी। तीसरी और बहुत महत्वपूर्ण बात जो मैं तुमसे कहना चाहता हूं वह है तुम्हारी आंतरिक मानसिकता तुम्हारा विश्वास तुम सोचते हो कि तुम
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Speaker A
गरीब पैदा हुए हो तुम्हारा भाग्य गरीबी है। तुम्हारी किस्मत में पैसा नहीं है। तुम्हारी नियति ही गरीबी है। यह विश्वास ही तुम्हारी सबसे बड़ी बेड़ी है। जब तुम सोचते हो कि तुम गरीब हो तो तुम गरीब बने रहते हो। और ना केवल बने रहते हो बल्कि
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Speaker A
तुम और गरीब होते चले जाते हो। क्योंकि तुम्हारा मन तुम्हारी अचेतन धारणा पैसे को नकारती है और जो तुम नकारते हो वह तुमसे दूर हो जाता है। तुम्हें गरीबी की इस मानसिकता को तोड़ना होगा। तुम एक समृद्ध चेतना का निर्माण करो। समृद्धि का अर्थ
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Speaker A
केवल पैसा नहीं है। समृद्धि एक दृष्टिकोण है। समृद्धि एक अनुभव है। जो व्यक्ति प्रकृति में समृद्धि देखता है, जो व्यक्ति दूसरों के जीवन में समृद्धि देखता है, जो व्यक्ति अपने जीवन में, अपने रिश्तों में, अपने स्वास्थ्य में, अपनी बुद्धि में
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Speaker A
समृद्धि का अनुभव करता है, वही चेतना पैसे को भी आकर्षित करती है। इसलिए प्रतिदिन कृतज्ञता का अभ्यास करो। सुबह उठते ही उस सब के लिए धन्यवाद दो जो तुम्हारे पास है। चाहे वह कितना भी कम क्यों ना हो।
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Speaker A
तुम्हारे पास दो वक्त की रोटी है। तुम्हारे पास पानी है। तुम्हारे पास हवा है। तुम्हारे पास आंखें हैं जो देखती हैं। कान हैं जो सुनते हैं। हाथ है जो काम कर सकते हैं। यही तुम्हारी पूंजी है। यही तुम्हारी समृद्धि है। इस कृतज्ञता भाव से
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Speaker A
इस कृतज्ञता की ऊर्जा से तुम एक ऐसा कंपन पैदा करते हो जो और अधिक समृद्धि को आकर्षित करता है। यही सृष्टि का नियम है। जिस पर तुम ध्यान देते हो, वह बढ़ता है। यदि तुम अपनी गरीबी पर ध्यान दोगे, तो
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Speaker A
गरीबी बढ़ेगी। यदि तुम अपनी समृद्धि पर ध्यान दोगे, चाहे वो थोड़ी ही सही, तो वह बढ़ेगी, वह विस्तारित होगी। इसके अलावा एक और बहुत गहरा रहस्य है जो मैं तुम्हें बताना चाहता हूं। पैसा तुम्हारे पीछे तब आता है जब तुम अपनी ऊर्जा को बिखेरना
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Speaker A
नहीं, बल्कि उसे एकाग्र करना सीख लेते हो। तुम्हारी ऊर्जा सबसे बड़ी धन है और वो ऊर्जा जब एक बिंदु पर, एक लक्ष्य पर, एक काम पर केंद्रित हो जाती है, तो वो अद्भुत चमत्कार कर सकती है। देखो, एक आम आदमी की
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Speaker A
ऊर्जा बिखरी रहती है। वो सैकड़ों बातों में, हजारों चिंताओं में, अनगिनत इच्छाओं में अपनी ऊर्जा को व्यर्थ गवा देता है। और जो सफल होता है, जो धनवान होता है, उसने अपनी ऊर्जा को एक ही दिशा में एक ही
10:09
Speaker A
उद्देश्य के लिए लगाना सीख लिया होता है। यह ध्यान की प्रक्रिया है। जब तुम ध्यान करते हो, जब तुम अपने भीतर एकाग्र होते हो, जब तुम अपनी चेतना को शांत और केंद्रित करते हो, तो तुम्हारी ऊर्जा एक मुट्ठी में एक बाण की तरह इकट्ठी हो जाती
10:27
Speaker A
है। और वो बाण जब संसार के लक्ष्य पर छोड़ा जाता है, तो वह अपना काम करता है। वह सफलता प्राप्त करता है। इसलिए ध्यान को, मौन को, आत्मचिंतन को अपने जीवन का हिस्सा बनाओ। प्रतिदिन कुछ समय अकेले बैठो। अपनी आंखें बंद करो। अपनी स्वास को
10:44
Speaker A
देखो, अपने विचारों को देखो और धीरे-धीरे उस गहराई में उतरो जहां कोई चिंता नहीं, कोई इच्छा नहीं, कोई भागदौड़ नहीं। उस शांत, स्थिर, एकाग्र चेतना में ही तुम्हारी सबसे बड़ी शक्ति है। वही शक्ति तुम्हें धन कमाने की सही दिशा, सही
11:01
Speaker A
रास्ता, सही अवसर दिखाएगी। और जब तुम उस रास्ते पर चलोगे, तो पैसा तुम्हारा पीछा करेगा। मैं तुमसे यह भी कहना चाहता हूं कि पैसे को एक गंतव्य, एक मंजिल मत बनाओ। पैसे को एक साधन मात्र बनाओ। बहुत से लोग
11:16
Speaker A
अपना पूरा जीवन पैसे इकट्ठा करने में लगा देते हैं और अंत में वे मर जाते हैं और पैसा यहीं रह जाता है। वे पैसे के मालिक नहीं बने बल्कि पैसा उनका मालिक बन गया। जब तुम पैसे को अपना लक्ष्य बना लेते हो
11:31
Speaker A
तो तुम कभी भी उस तक नहीं पहुंच पाते क्योंकि पैसे की कोई सीमा नहीं होती। यदि तुम्हारा लक्ष्य ₹1 लाख है और तुम उसे प्राप्त कर लेते हो तो तुरंत तुम्हारा मन 20 लाख का लक्ष्य बना लेता है। यह एक
11:46
Speaker A
अंतहीन दौड़ है। यह एक बीमारी है जिससे तुम कभी मुक्त नहीं हो सकते। इसलिए अपना ध्यान पैसे पर मत रखो। अपना ध्यान उस मूल्य पर रखो जो तुम संसार को दे सकते हो। अपना ध्यान अपनी प्रतिभा पर रखो। अपनी
12:02
Speaker A
सेवा पर रखो। अपने योगदान पर रखो। अपने विकास पर रखो और जब तुम इन चीजों पर ध्यान देते हो तो पैसा एक उप्पद एक सह उत्पाद की तरह आता है। वो आता है पर वो तुम्हारे जीवन का केंद्र नहीं होता। तुम्हारे जीवन
12:19
Speaker A
का केंद्र तो प्रेम, आनंद, शांति और सेवा होती है। और पैसा उस परिधि पर एक सुंदर सजावट की तरह होता है। यही सही जीवन है। यही वो जीवन है जिसमें पैसा तुम्हारे पीछे आता है। क्योंकि वो जानता है कि जिसके पास
12:35
Speaker A
वो जाएगा, उसका सदुपयोग होगा। वो किसी के काम आएगा। वह किसी को दुखी नहीं करेगा। एक और बात बहुत महत्वपूर्ण बात जो मैं तुम्हें बताना चाहता हूं वह है दान की भावना। तुम सोचते हो कि पैसा बचाने से,
12:51
Speaker A
पैसा जमा करने से, पैसा छुपाने से वो बढ़ता है। लेकिन मैं तुमसे कहता हूं सच तो इसके विपरीत है। पैसा प्रवाह में बढ़ता है। पैसा गतिशीलता में बढ़ता है। पैसा बांटने में बढ़ता है। जैसे नदी का पानी बहता है तो वह स्वच्छ, शक्तिशाली और
13:08
Speaker A
समृद्ध रहता है। पर अगर उसे रोक दिया जाए, उसे एक स्थान पर बांध दिया जाए तो वह गंदा, स्थिर और बेकार हो जाता है। धन भी वैसा ही है। जो व्यक्ति दान करना जानता है, जो व्यक्ति अपनी कमाई का कुछ हिस्सा
13:23
Speaker A
दूसरों की भलाई में, समाज की सेवा में, जरूरतमंदों की मदद में लगाता है, वह वास्तव में धन के प्रवाह को बढ़ाता है। वो संसार को संकेत देता है कि वह धन का सही उपयोग कर सकता है। और संसार उसे और अधिक
13:38
Speaker A
धन भेजता है। यह एक आध्यात्मिक आर्थिक नियम है। दान केवल पैसे का नहीं होता। दान तुम्हारे समय का हो सकता है। तुम्हारी सेवा का हो सकता है। तुम्हारी ज्ञान की हो सकती है। तुम्हारी सहानुभूति की हो सकती है। जब तुम बिना किसी स्वार्थ के बिना
13:56
Speaker A
किसी अपेक्षा के देते हो तो तुम एक ऐसा पुण्य क्षेत्र एक ऐसी ऊर्जा का चक्र बनाते हो जो तुम्हें अनेक गुना लौट कर आती है। यह किसी चमत्कार से कम नहीं है। लेकिन यह चमत्कार नहीं है। यह प्रकृति का नियम है।
14:11
Speaker A
इसलिए पैसे की कंजूसी मत करो। पैसे से लगाव मत रखो। पैसे को बहने दो और वह लौट कर तुम्हारे पास आएगा और भी अधिक रूप में। तुम अक्सर चिंता करते हो कि बाहर की परिस्थितियां कैसी हैं? बाजार कैसा है?
14:26
Speaker A
अर्थव्यवस्था कैसी है? नौकरी कैसी है? व्यापार कैसा है? मैं कहता हूं बाहर की परिस्थितियों पर तुम्हारा बहुत कम नियंत्रण है। पर तुम्हारे भीतर की स्थिति पर तुम्हारा पूरा नियंत्रण है। और जब तुम्हारी भीतर की स्थिति ठीक होती है। जब
14:43
Speaker A
तुम्हारी चेतना समृद्धि की ओर उन्मुख होती है। जब तुम्हारा आत्मविश्वास अटूट होता है। जब तुम्हारी क्षमता पर तुम्हें पूरा भरोसा होता है। तो बाहर की विपरीत से विपरीत परिस्थिति में भी तुम अवसर खोज लेते हो। बड़े-बड़े अकाल, महामंदी, युद्ध,
15:01
Speaker A
संकट के समय में भी कुछ लोग फलते फूलते रहे हैं। समृद्ध होते रहे हैं क्योंकि उनका दृष्टिकोण समृद्धि का था। उनकी सोच रचनात्मक थी। वे समस्या को अवसर में बदलना जानते थे। यह कला तुम्हें भी सीखनी होगी। यह कला तब सीखी जा सकती है जब तुम अपने मन
15:19
Speaker A
को, अपनी चेतना को, अपने आत्मविश्वास को निरंतर विकसित करते रहो। इसलिए अपनी शिकायतों को छोड़ो, अपने बहानों को छोड़ो अपनी हताशा को छोड़ो और अपने भीतर उस ज्योति को जगाओ जो कहती है मैं समर्थ हूं। मैं सक्षम हूं। मैं अपनी दुनिया बना सकता
15:37
Speaker A
हूं। मैं अपने भाग्य का निर्माता हूं। जिस क्षण यह भावना तुम्हारे भीतर प्रबल हो जाती है, उसी क्षण से तुम्हारी दुनिया बदलनी शुरू हो जाती है। और पैसा तुम्हारे पीछे आने लगता है। अंतिम बात और वो भी उतनी ही महत्वपूर्ण जितनी की पहली,
15:54
Speaker A
तुम्हारी सबसे बड़ी दरिद्रता तुम्हारा डर है। तुम डरते हो कि पैसा नहीं आएगा तो क्या होगा? तुम डरते हो कि पैसा खो जाएगा तो क्या होगा? तुम डरते हो कि लोग तुम्हें गरीब समझेंगे तो क्या होगा? यह डर ही
16:08
Speaker A
तुम्हारी ऊर्जा को सुखा देता है। तुम्हारी सोच को संकीर्ण कर देता है और तुम्हारे निर्णयों को गलत बना देता है। डर के कारण तुम उन जोखिमों को नहीं ले पाते जो आवश्यक है। डर के कारण तुम उन अवसरों को नहीं
16:21
Speaker A
पकड़ पाते जो सामने हैं। डर के कारण तुम अपनी क्षमता का पूरा उपयोग नहीं कर पाते। और फिर तुम कहते हो कि पैसा नहीं आया। पैसा आया उसने तुम्हारा दरवाजा खटखटाया। लेकिन तुम्हारा डर इतना बड़ा था कि तुमने
16:35
Speaker A
दरवाजा नहीं खोला। पैसा एक साहसी व्यक्ति से प्रेम करता है। पैसा उस व्यक्ति को पसंद करता है जो नए रास्तों पर चल सके। जो गिर कर फिर उठ सके। जो हार कर फिर जीत सके। जो हर बार अपने आप पर विश्वास कर
16:50
Speaker A
सके। जिस व्यक्ति में साहस है वही धन के नए स्रोत खोजता है। वही नए प्रयोग करता है। वही नई ऊंचाइयां छूता है और पैसा उसके पीछे पीछे आता है। इसलिए अपने डर को जानो, उसका सामना करो और उसे पार करो। डर
17:08
Speaker A
तुम्हारे अतीत के अनुभवों से, तुम्हारी गलत मान्यताओं से, तुम्हारे समाज के डरावने किस्सों से पैदा होता है। उन सबको देखो, समझो और फिर उन्हें छोड़ दो। क्योंकि वे तुम्हारे वर्तमान को तुम्हारे भविष्य को काला कर रहे हैं। एक निर्भय
17:25
Speaker A
साहसी आत्मविश्वासी व्यक्ति के पीछे न केवल पैसा बल्कि सारी सुविधाएं, सारी समृद्धि और सारी खुशियां दौड़ती है। तो प्रेमीजन मैं तुमसे यही कहना चाहता हूं कि पैसा तुम्हारे पीछे कैसे आएगा? इसका उत्तर बाहर नहीं तुम्हारे भीतर है। अपने भीतर के
17:43
Speaker A
खजाने को खोजो। अपनी प्रतिभा को पहचानो। अपने काम को प्रेम करो। अपनी सेवा को समर्पित करो। अपनी ऊर्जा को एकाग्र करो। अपनी चेतना को समृद्ध बनाओ। अपने दृष्टिकोण को सकारात्मक रखो और अपने डर को मिटा दो। यही वो जादू है जो पैसे को
18:01
Speaker A
तुम्हारी ओर आकर्षित करेगा। यह कोई त्वरित योजना नहीं है। यह कोई शॉर्टकट नहीं है। यह जीवन जीने की एक कला है। एक संपूर्ण दर्शन है। इस दर्शन को जियो। इस कला को सीखो और देखो कि कैसे संसार तुम्हारे
18:17
Speaker A
सामने झुकता है। कैसे समृद्धि तुम्हारे पीछे चलती है। और यह समृद्धि केवल धन की नहीं होगी। यह समृद्धि तुम्हारी आत्मा की होगी। तुम्हारे जीवन के हर रंग की होगी। तुम्हारे हर रिश्ते की होगी। तुम्हारी हर सांस की होगी। वही जीवन सच्चा जीवन है,
18:35
Speaker A
वही जीवन परिपूर्ण जीवन है। वही तुम जीवन के चरम आनंद को, चरम शांति को, चरम उत्सव को प्राप्त कर सकते हो। और उस उत्सव में पैसा केवल एक आमंत्रित अतिथि होता है और वह आता भी है खुशी-खुशी बिना किसी बुलावे
18:52
Speaker A
के। इसलिए अपने भीतर के उस उत्सव को जगाओ और देखो कि कैसे सारा जगत उस उत्सव में शामिल होने के लिए तुम्हारी ओर तुम्हारे पीछे दौड़ता है। मैं अभी और कहना चाहता हूं क्योंकि यह विषय इतना गहरा है, इतना
19:07
Speaker A
विराट है कि शब्द भी कम पड़ जाते हैं। तुम [नाक से की जाने वाली आवाज़] पैसे के पीछे इसलिए दौड़ते हो क्योंकि तुम्हें लगता है कि पैसे के बिना तुम अधूरे हो। तुम असुरक्षित हो। तुम कमजोर हो। लेकिन मैं
19:18
Speaker A
तुमसे कहता हूं यह भावना ही तुम्हारी सबसे बड़ी कमजोरी है और यही कमजोरी तुम्हें पैसे से दूर रखती है। पैसा एक ऐसे व्यक्ति को पसंद करता है जो अपने आप में पूर्ण हो जो अपने आप में संपूर्ण हो जो अकेले भी
19:33
Speaker A
उतना ही प्रसन्न हो जितना कि भीड़ में है। जब तुम अपने आप में अकेले हो तो तुम बेचैन हो जाते हो। तुम्हें लगता है कि पैसा ही तुम्हें बचा सकता है। पैसा ही तुम्हारी पीड़ा को दूर कर सकता है। यह सोच तुम्हें
19:45
Speaker A
पैसे का दास बना देती है। और एक दास कभी धनवान नहीं हो सकता। क्योंकि जो दास है वो पैसे की सेवा करता है। पैसा उसकी सेवा नहीं करता। याद रखो पैसा तुम्हारा सेवक हो सकता है। पर तुम पैसे के सेवक मत बनो। और
20:01
Speaker A
जब तुम पैसे के सेवक नहीं होते। जब तुम पैसे पर निर्भर नहीं होते। जब तुम पैसे के बिना भी उतने ही आनंदित, उतने ही शांत हो सकते हो, तभी पैसा तुम्हारे पास आना शुरू करता है। क्योंकि तब वो जानता है कि वो
20:16
Speaker A
यहां अपने घर आया है। किसी और के घर नहीं। यह बहुत महत्वपूर्ण बात है। इस पर तुम ध्यान से विचार करना। तुम सोचते हो कि पैसा भौतिक वस्तु है, भौतिक आवश्यकता है। पर मैं कहता हूं पैसा एक मानसिकता है, एक
20:30
Speaker A
ऊर्जा है, एक कंपन है। जिस तरह तुम्हारी भावनाएं, तुम्हारे विचार, तुम्हारी इच्छाएं एक विशेष कंपन पैदा करती है, उसी तरह पैसा भी एक कंपन है। और इस संसार में जो समान कंपन होते हैं, वे एक दूसरे को आकर्षित करते हैं। यदि तुम्हारे भीतर
20:48
Speaker A
गरीबी का कंपन है तो गरीबी तुम्हारी ओर आएगी। यदि तुम्हारे भीतर समृद्धि का कंपन है तो समृद्धि तुम्हारी ओर दौड़ेगी अब तुम पूछोगे कि समृद्धि का कंपन क्या है? समृद्धि का कंपन है आभार, संतोष, आत्मविश्वास और निर्भयता। जब तुम सुबह
21:08
Speaker A
उठकर अपने शरीर के लिए, अपने जीवन के लिए, अपने परिवार के लिए, अपने दोस्तों के लिए, अपनी क्षमताओं के लिए, अपनी बुद्धि के लिए। यहां तक कि अपनी चुनौतियों के लिए भी आभारी होते हो तो तुम समृद्धि का कंपन
21:22
Speaker A
पैदा करते हो और जब तुम शिकायत करते हो, जब तुम रोते हो, जब तुम दोष देते हो, जब तुम अपनी किस्मत को कोसते हो, जब तुम दूसरों से ईर्ष्या करते हो तो तुम गरीबी का कंपन पैदा करते हो। और जो कंपन तुम
21:37
Speaker A
पैदा करते हो, वही तुम्हें मिलता है। यह सृष्टि का अटल नियम है। इससे कोई बच नहीं सकता। इसलिए अपनी आंतरिक दुनिया को साफ करो। शिकायतों को धो दो। ईर्ष्या को जला दो, आभार को जगाओ और देखो कि कैसे समृद्धि
21:54
Speaker A
के द्वार खुलने लगते हैं और कैसे पैसा तुम्हारे पीछे चलने लगता है। यह [नाक से की जाने वाली आवाज़] कोई रहस्यवादी बात नहीं है। यह एक वैज्ञानिक सत्य है जिसे जानकर तुम अपने जीवन को पूरी तरह बदल सकते हो। एक और बात जो बहुत कम
22:09
Speaker A
लोग समझ पाते हैं वो यह है कि पैसा तुम्हारी चिंता करने की आदत से दूर भागता है। तुम पूरे दिन पैसे की चिंता करते हो। कैसे आएगा? कब आएगा? कितना आएगा? क्या होगा? अगर नहीं आया तो क्या होगा? बच्चों
22:25
Speaker A
की पढ़ाई, घर का कर्ज, बीमारी, बुढ़ापा। इतनी सारी चिंताएं तुम्हारे मन में भरी हुई हैं और इन चिंताओं के बोझ के नीचे तुम्हारी ऊर्जा दब जाती है। तुम्हारी सोच मंद पड़ जाती है। तुम्हारी कार्य क्षमता कम हो जाती है। तुम्हारा आत्मविश्वास टूट
22:43
Speaker A
जाता है। और जब तुम इस अवस्था में होते हो तो तुम वे निर्णय नहीं ले पाते जो पैसे को आकर्षित कर सकते हैं। तुम वे कदम नहीं उठा पाते जो समृद्धि की ओर ले जा सकते हैं। इसलिए मैं कहता हूं चिंता को छोड़ो। चिंता
22:58
Speaker A
तुम्हारी दरिद्रता का सबसे बड़ा कारण है। जितनी अधिक चिंता उतनी अधिक गरीबी। चिंता तुम्हारी बुद्धि को तुम्हारी रचनात्मकता को तुम्हारी ऊर्जा को समाप्त कर देती है। एक चिंतित मन कभी धन नहीं कमा सकता। क्योंकि एक चिंतित मन केवल समस्याएं देखता
23:16
Speaker A
है। अवसर नहीं। और पैसा तो अवसरों में बसता है। समस्याओं में नहीं। इसलिए जब भी चिंता आए उसे देखो पर उसके साथ मत बहो। उसे गहराई से समझो और फिर उसे जाने दो। यह कहो कि मैं अपनी पूरी कोशिश करूंगा। बाकी
23:33
Speaker A
मेरे हाथ में नहीं है। बाकी तो विधाता के हाथ में है और जो विधाता के हाथ में है वो सर्वोत्तम होगा। इस विश्वास के साथ जब तुम कर्म करते हो तो तुम्हारी ऊर्जा पूरी तरह से कर्म में लग जाती है। और वो कर्म
23:47
Speaker A
चमत्कारिक रूप से फल देता है। और वो फल होता है धन, समृद्धि और उससे भी बढ़कर आंतरिक शांति। तुम्हारी एक और बड़ी समस्या यह है कि तुम हर समय दूसरों की तुलना करते हो। उसके पास कितना है? इसके पास कितना
24:03
Speaker A
है? उसने कैसे कमाया? इसने कैसे कमाया? वो क्या कर रहा है? ये क्या कर रहा है? ये तुलना तुम्हारे मन को एक ऐसी आग में जला देती है जो कभी नहीं बुझती। और उस आग में तुम्हारी सारी ऊर्जा, तुम्हारी सारी
24:19
Speaker A
शांति, तुम्हारी सारी बुद्धि भस्म हो जाती है। और जब तुम जल रहे होते हो तो पैसा तुमसे दूर भागता है। क्योंकि पैसा उस आंख के पास नहीं आना चाहता। वो शीतलता, स्थिरता और संतुलन को पसंद करता है। इसलिए
24:35
Speaker A
मैं कहता हूं दूसरों से तुलना करना बंद करो। तुम्हारा जीवन तुम्हारा है, उसका जीवन उसका है। उसके पास जो है, वह उसके अनुभवों, उसके कर्मों, उसके पिछले जन्मों, उसकी परिस्थितियों, उसकी चेतना का परिणाम है। तुम्हारे पास जो है, वह तुम्हारा है।
24:54
Speaker A
तुम्हें अपना ही खेत जोतना है। अपना ही बीज बोना है। अपनी ही फसल काटनी है। दूसरे के खेत को निहारने से तुम्हारा खेत नहीं उगेगा। उल्टा तुम्हारा समय और ऊर्जा व्यर्थ जाएगी। अपना ध्यान अपने खेत पर लाओ और देखो कि तुम्हारे खेत में क्या उग सकता
25:11
Speaker A
है। क्या तुम्हारी मिट्टी के लिए सबसे अच्छा है। क्या तुम्हारी जलवायु के लिए सबसे अनुकूल है? जब तुम अपने खेत में पूरे मन से पूरी ऊर्जा से काम करते हो तो वहां से अनुपम फसल पैदा होती है। और वो फसल ही
25:26
Speaker A
तुम्हारी समृद्धि है जो किसी और की समृद्धि से कम नहीं। अपितु तुम्हारे लिए अधिक मूल्यवान है। मैंने देखा है कि बहुत से लोग पैसे कमाने के लिए अपनी नैतिकता, अपनी ईमानदारी, अपने सिद्धांतों से समझौता कर लेते हैं। वे सोचते हैं कि थोड़ा झूठ
25:42
Speaker A
बोलो, थोड़ा धोखा दो। थोड़ा कम लोगों को दे दो तो पैसा जल्दी आएगा। पर मैं तुमसे कहता हूं यह सबसे बड़ी भूल है। यह आत्मघात है। जो पैसा झूठ से, धोखे से, चोरी से आता है, वह तुम्हें कभी सुख नहीं देता। वो
25:59
Speaker A
तुम्हें कभी समृद्ध नहीं करता। वो तो एक बोझ है, एक पाप है जो तुम्हारे कंधों पर लगकर तुम्हें झुका देता है। जो तुम्हारी आत्मा को कलुषित करता है और जो अंततः तुम्हें नष्ट कर देता है। सच्चा धन तो
26:13
Speaker A
ईमानदारी से, मेहनत से, सेवा से आता है और वो धन तुम्हें न केवल बाहर से बल्कि भीतर से भी समृद्ध करता है। वो धन तुम्हारी आत्मा को प्रकाशित करता है, तुम्हारे मन को शांत करता है और तुम्हारे जीवन को अर्थ
26:28
Speaker A
देता है। इसलिए कभी भी पैसे के लिए अपनी ईमानदारी, अपनी सच्चाई, अपनी नैतिकता का बलिदान मत करना। ईमानदारी ही सबसे बड़ी पूंजी है और जिसके पास ये पूंजी है, पैसा उसके पीछे आता है क्योंकि संसार उस पर भरोसा करता है और भरोसा ही धन का आधार है।
26:47
Speaker A
बिना भरोसे के कोई व्यापार नहीं चलता, कोई रिश्ता नहीं चलता, कोई समाज नहीं चलता और बिना ईमानदारी के भरोसा नहीं बनता। इसलिए ईमानदारी को अपनी ढाल बनाओ। उसे अपना कवच बनाओ और देखो कि कैसे पैसा तुम्हारी ईमानदारी के प्रति आकर्षित होता है। कैसे
27:05
Speaker A
वह तुम्हारे दरवाजे पर आकर ठहर जाता है। इसके अलावा मैं तुमसे यह भी कहना चाहता हूं कि पैसे को आने देने के लिए तुम्हें अपने भीतर एक गहरी शांति, एक गहरी स्थिरता का विकास करना होगा। जिस व्यक्ति का मन हर
27:19
Speaker A
समय भागता रहता है। हर समय अस्थिर रहता है। हर समय इधर-उधर उछलता रहता है। वो कभी धन का केंद्र नहीं बन सकता। धन को एक स्थिर केंद्र की आवश्यकता होती है। जैसे कोई पेड़ को स्थिर मिट्टी की आवश्यकता
27:33
Speaker A
होती है। यदि तुम्हारा मन अस्थिर है तो तुम एक डगमगाते पेड़ के समान हो और कोई भी फल तुम पर नहीं टिक सकता। कोई भी धन तुम पर नहीं टिक सकता। इसलिए ध्यान, प्राणायाम, योग, मौन इन साधनों द्वारा
27:49
Speaker A
अपने मन को स्थिर करो, अपनी चेतना को स्थिर करो, अपनी ऊर्जा को स्थिर करो। जब तुम शांत और स्थिर होते हो, तो तुम्हारा निर्णय सही होता है। तुम्हारी दृष्टि स्पष्ट होती है। तुम्हारा व्यवहार संतुलित होता है और यही वे गुण हैं जो धन को
28:05
Speaker A
आकर्षित करते हैं। तुमने देखा होगा बड़े-बड़े व्यापारी, निवेशक, उद्योगपति, वे कितने शांत और संयत होते हैं। उनके चेहरे पर घबराहट नहीं होती। उनकी आंखों में स्थिरता होती है। उनके शब्दों में संतुलन होता है। ये कोई संयोग नहीं है। ये
28:23
Speaker A
उनके आंतरिक विकास का परिणाम है। उन्होंने अपने मन को शांत करना सीख लिया है और इसलिए धन उनके पास आता है। इसलिए तुम भी उस शांति को उस स्थिरता को अपने जीवन में उतारो और देखो कि कैसे धन तुम्हारी ओर
28:38
Speaker A
बहने लगता है। एक और अत्यंत गूढ़ रहस्य मैं तुम्हें बताता हूं जिसे बहुत कम लोग समझ पाते हैं। पैसा तब तुम्हारे पीछे आता है जब तुम उसे किसी बड़े उद्देश्य से किसी बड़ी सेवा किसी बड़े लक्ष्य के लिए उपयोग
28:53
Speaker A
करने की इच्छा रखते हो जब तुम्हारा मन केवल अपनी आवश्यकताओं अपनी विलासिताओं अपने भोगो के लिए धन चाहता है तो धन उस संकीर्णता के कारण तुमसे दूर रहता है लेकिन जब तुम सोचते हो कि मैं धन कमाऊंगा और उसका उपयोग गरीबों के लिए बीमारों के
29:11
Speaker A
लिए कलाकारों के लिए शिक्षा के लिए ज्ञान के लिए पर्यावरण के लिए समाज के उत्थान के लिए करूंगा तो एक बहुत बड़ी ऊर्जा एक बहुत बड़ी शक्ति तुम्हारे पीछे खड़ी हो जाती है। पूरा ब्रह्मांड पूरा संसार पूरी प्रकृति उस व्यक्ति की मदद करती है जो
29:29
Speaker A
दूसरों की भलाई के लिए काम करता है। ये सृष्टि का नियम है। ये धर्म का नियम है। ये कर्म का नियम है। इसलिए अपने धन के पीछे एक बड़ा उद्देश्य रखो। एक सार्थक उद्देश्य रखो। एक ऐसा उद्देश्य जो केवल
29:43
Speaker A
तुम्हारा ही ना हो, बल्कि इस पूरी मानवता का हो, इस पूरे जगत का हो। जब तुम्हारा उद्देश्य बड़ा होगा तो तुम्हारी ऊर्जा बड़ी होगी, तुम्हारी क्षमता बड़ी होगी, तुम्हारी आकांक्षा बड़ी होगी और पैसा उस बड़े उद्देश्य की सेवा के लिए तुम्हारे
30:00
Speaker A
पीछे आएगा। क्योंकि पैसा भी उसी उद्देश्य की सेवा करना चाहता है। वो तुम्हारे माध्यम से उस सेवा को अभिव्यक्त करना चाहता है। इसलिए जितना बड़ा उद्देश्य उतना ही अधिक धन और उतनी ही अधिक समृद्धि। तुम अक्सर यह भी सोचते हो कि पैसा आने के बाद
30:16
Speaker A
ही तुम कुछ कर पाओगे। कुछ बन पाओगे। कुछ दे पाओगे। यह सोच गलत है। पैसा तब आता है जब तुम पहले से ही कुछ बन चुके हो। जब तुम पहले से ही कुछ कर रहे हो। जब तुम पहले से
30:29
Speaker A
ही कुछ दे रहे हो। इसलिए पैसे की प्रतीक्षा मत करो। जो पैसा आने की प्रतीक्षा करता है, वह कभी नहीं आता। जो अपने काम में, अपनी सेवा में, अपनी कला में, अपने ज्ञान में, अपने प्रेम में पूरी तरह से लीन हो जाता है, वह पैसे को भूल
30:46
Speaker A
जाता है और वो पैसा उसे ढूंढता है। उसके पीछे आता है। यह एक विरोधाभास है। पर यह सत्य है। जितना तुम पैसे की ओर दौड़ोगे, उतना वह तुमसे दूर होगा। जितना तुम पैसे से दूर भागोगे, अपने काम में डूब जाओगे,
31:02
Speaker A
उतना ही वह तुम्हारे पास आएगा। यह जीवन का एक रहस्यमय नियम है। इस नियम को समझो। इस नियम को अपने जीवन में उतारो। अपना ध्यान पैसे पर नहीं, अपनी योग्यता पर रखो। अपने कौशल पर रखो, अपनी क्षमता पर रखो, अपनी
31:19
Speaker A
सेवा पर रखो। यदि तुम योग्य हो, यदि तुम सक्षम हो, यदि तुम कुशल हो, यदि तुम उपयोगी हो, तो संसार तुम्हें वो मूल्य देगा जो तुम्हारा हक है और वो मूल्य पैसे के रूप में आएगा। इसलिए पैसे की चिंता
31:34
Speaker A
करने के बजाय अपने विकास की चिंता करो, अपनी शिक्षा की चिंता करो, अपने ज्ञान की चिंता करो, अपने कौशल की चिंता करो, अपने चरित्र की चिंता करो। जब ये सब ठीक हो जाएंगे तो पैसा अपने आप ठीक हो जाएगा। वह
31:48
Speaker A
तुम्हारे पीछे आएगा, तुम्हें ढूंढेगा, तुम्हारा पीछा करेगा। मैंने देखा है बहुत से लोग पैसे कमाने के लिए अपना स्वास्थ्य, अपनी शांति, अपने रिश्ते, अपना समय, अपना सब कुछ न्योछावर कर देते हैं और अंत में उनके पास पैसा तो होता है, पर वे उसका
32:06
Speaker A
आनंद नहीं ले पाते। क्योंकि उनका स्वास्थ्य चला गया, उनकी शांति चली गई, उनके रिश्ते टूट गए, उनका समय बीत गया। यह सबसे बड़ा नुकसान है। पैसा जीवन का एक हिस्सा है। पूरा जीवन नहीं। पैसे के लिए अपना पूरा जीवन मत बेचो। जीवन का संतुलन
32:23
Speaker A
बनाओ। स्वास्थ्य को भी समय दो, रिश्तों को भी समय दो, शांति को भी समय दो, आनंद को भी समय दो, ध्यान को भी समय दो और काम को भी समय दो। जब तुम संतुलित होते हो, जब तुम समग्र होते हो, जब तुम्हारा जीवन हर
32:40
Speaker A
दिशा में समृद्ध होता है, तब पैसा एक आकर्षण की तरह तुम्हारी ओर आता है। वो देखता है कि ये व्यक्ति स्वस्थ है, यह व्यक्ति शांत है। यह व्यक्ति प्रसन्न है, यह व्यक्ति सही दिशा में है। उसके पास पैसा सुरक्षित रहेगा। वो पैसे का सही
32:56
Speaker A
उपयोग करेगा। वो पैसे से दूसरों को भी लाभ पहुंचाएगा। और इसलिए पैसा उसके पास आता है। इसलिए मैं कहता हूं पैसे के पीछे मत भागो। जीवन को समग्र रूप से जियो। जीवन के हर पहलू का आनंद लो। जीवन को एक कला की
33:12
Speaker A
तरह जियो। और देखो कि कैसे पैसा उस समग्रता का उस कला का एक स्वाभाविक हिस्सा बनकर तुम्हारे पास आता है। प्रेमीजन मैं तुम्हें और भी गहराई से ले चलता हूं। पैसा आखिर क्या है? पैसा संसार में उपलब्ध संसाधनों के विनिमय व्यापार और
33:29
Speaker A
आदान-प्रदान का एक माध्यम है। यह मानव सभ्यता की एक शानदार खोज है ताकि लोग अपनी-अपनी क्षमताओं, अपनी-अपनी सेवाओं, अपनी-अपनी वस्तुओं का आदान-प्रदान सरलता से कर सके। पर यह माध्यम जब लोगों की चेतना से लोगों के मूल्यों से लोगों के
33:47
Speaker A
उद्देश्यों से कट जाता है तब यह एक अभिशाप बन जाता है। इसलिए मैं कहता हूं पैसे को अपने मूल्यों से अपनी सेवा से अपने उद्देश्य से अपनी चेतना से जोड़ो जब तुम पैसे को अपनी चेतना से जोड़ते हो तो पैसा
34:03
Speaker A
तुम्हारी चेतना का अनुसरण करता है। वो तुम्हारे मूल्यों के अनुरूप आता है। वो तुम्हारी सेवा के अनुरूप आता है। और जब तुम पैसे को अपनी चेतना से अलग करके देखते हो, केवल एक संख्या, केवल एक वस्तु, केवल एक लक्ष्य के रूप में, तो वह तुमसे अलग हो
34:19
Speaker A
जाता है। वह तुमसे दूर भागता है। वह तुम्हें पीड़ा देता है। इसलिए पैसे के प्रति अपनी चेतना को सजग करो, अपनी चेतना को विकसित करो, अपनी चेतना को जागृत करो। जब तुम जागृत चेतना के साथ काम करते हो तो
34:35
Speaker A
तुम्हारा प्रत्येक कर्म तुम्हारा प्रत्येक शब्द तुम्हारा प्रत्येक विचार एक ऐसी ऊर्जा पैदा करता है जो धन को आकर्षित करती है। यही ध्यान का रहस्य है। यही जीवन की कला है। यही सफलता का मूल मंत्र है। तुम अक्सर पूछते हो मैं कितना प्रयास करूं?
34:54
Speaker A
कितनी मेहनत करूं? कितना समय लगाऊं? मैं कहता हूं प्रयास तो करो। पर प्रयास के पीछे एक आत्मसमर्पण एक ईश्वर पर भरोसा एक विश्वास होना चाहिए कि जो तुम्हारे लिए अच्छा है वही होगा। जब तुम प्रयास करते हो लेकिन परिणाम को लेकर आसक्त नहीं होते। जब
35:13
Speaker A
तुम कर्म करते हो, लेकिन फल की चिंता नहीं करते, तब तुम्हारी ऊर्जा का एक अलग ही आयाम खुलता है और उस आयाम से पैसा अपने आप तुम्हारे पास आता है। गीता में भगवान कृष्ण ने अर्जुन से कहा है, कर्म करो, फल
35:28
Speaker A
की चिंता मत करो। यही उपदेश पैसे पर भी लागू होता है। कर्म करो। अपनी पूरी क्षमता से करो, अपने पूरे प्रेम से करो, अपने पूरे समर्पण से करो और फल को ईश्वर पर, विधाता पर, संसार पर छोड़ दो। जब तुम इस
35:44
Speaker A
भाव से काम करते हो तो तुम्हारे भीतर एक अद्भुत शांति, एक अद्भुत आनंद, एक अद्भुत स्वतंत्रता का अनुभव होता है और उसी शांत, आनंदित, स्वतंत्र अवस्था में पैसा तुम्हारी ओर आता है। क्योंकि वह भी उसी शांति, उसी आनंद, उसी स्वतंत्रता का
36:02
Speaker A
हिस्सा बनना चाहता है। यह बहुत गढ़ है पर सत्य है। मैं तुमसे यह भी कहना चाहता हूं कि पैसे को रोको मत। उसे बहने दो। उसे चलने दो। उसे प्रवाहित होने दो। जब पैसा आता है तो उसे अपने पास जमा मत करो बल्कि
36:17
Speaker A
उसका सही उपयोग करो। उसे उस दिशा में लगाओ जिससे वो और अधिक मूल्य पैदा करें। जिससे वह और अधिक लोगों की सेवा करें। जिससे वो और अधिक समृद्धि लाए। एक कंजूस व्यक्ति, एक मक्खी चूस व्यक्ति जो पैसे को अपनी
36:32
Speaker A
मुट्ठी में बंद करके रखता है, उसके पास पैसा कभी नहीं ठहरता। क्योंकि जो बहता नहीं वह स्थिर हो जाता है और जो स्थिर है वह मृत्यु है। पैसा एक जीवंत ऊर्जा है और वह गति, प्रवाह, विनिमय और रचनात्मकता को
36:47
Speaker A
पसंद करता है। इसलिए जब पैसा आए तो उसे अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए, अपने कौशल को और निखारने के लिए, अपने व्यवसाय को विस्तार देने के लिए, दूसरों की मदद करने के लिए, समाज के उत्थान के लिए, अपने
37:03
Speaker A
ज्ञान को बढ़ाने के लिए लगाओ। और देखो कि कैसे वह पैसा तुम्हारे पास और अधिक पैसा लेकर आता है। कैसे वह तुम्हारी समृद्धि को कई गुना बढ़ा देता है। यही तो धन का गुणन का सूत्र है। यही तो समृद्धि का रहस्य है
37:16
Speaker A
और यही तो वो मार्ग है जिस पर चलकर तुम देखोगे कि पैसा ना केवल तुम्हारे पीछे आता है बल्कि तुम्हारा पीछा करता है। तुम्हें ढूंढता है। तुम्हारी प्रतीक्षा करता है। प्रेमीजन मैं तुम्हें आखिरी बात यह कहना चाहता हूं और शायद यह सबसे महत्वपूर्ण है।
37:33
Speaker A
पैसा तुम्हारे पीछे तब आता है जब तुम्हारा जीवन एक उत्सव एक नृत्य एक गीत एक कविता बन जाता है जब तुम जीवन को एक उपहार एक वरदान एक सुंदर यात्रा के रूप में देखते हो जब तुम हर सांस का आनंद लेते हो हर पल
37:50
Speaker A
का उत्सव मनाते हो हर क्षण को एक अवसर के रूप में जीते हो तब तुम्हारा पूरा अस्तित्व एक चुंबक बन जाता है और वो चुंबक न केवल पैसे को बल्कि सारी समृद्धि सारी सुंदरता सारी प्रसन्नता सारी शांति को अपनी ओर
38:06
Speaker A
आकर्षित करता है। इसलिए जीवन को उत्सव बनाओ। जीवन को आनंद बनाओ। जीवन को प्रेम बनाओ और देखो कि कैसे पैसा उस उत्सव का उस आनंद का उस प्रेम का एक स्वाभाविक अंग बनकर तुम्हारे पीछे आता है। यही मेरा
38:22
Speaker A
संदेश है। यही मेरा उपदेश है। यही मेरा आशीर्वाद है कि तुम जीवन को इतनी गहराई से इतनी समग्रता से इतनी सुंदरता से जियो कि पैसा तुम्हारे पीछे दौड़ने को मजबूर हो जाए और तुम उसकी ओर देखो तक नहीं। क्योंकि
38:37
Speaker A
तुम तो अपने उत्सव में, अपने आनंद में, अपने प्रेम में इतने मग्न हो कि तुम्हें पैसे की याद ही ना रहे और वो तुम्हारी याद में तुम्हारे पीछे आता रहे। यही सबसे बड़ी विजय है। यही सबसे बड़ी समृद्धि है और यही
38:52
Speaker A
सबसे बड़ा सत्य है कि जब तुम सत्य होते हो, जब तुम प्रेम होते हो, जब तुम आनंद होते हो तो संसार की सारी समृद्धि तुम्हारी ओर, तुम्हारे पीछे, तुम्हारी दिशा में बहने लगती है। तो अब बस यही करो।
39:06
Speaker A
पैसे के बारे में सोचना बंद करो। पैसे की चिंता करना बंद करो। पैसे की फिक्र करना बंद करो और अपने जीवन की गहराई में उतरो। अपने काम में डूब जाओ। अपनी कला में खो जाओ। अपनी सेवा में समर्पित हो जाओ। अपनी
39:22
Speaker A
साधना में लीन हो जाओ। ये करो और देखो कि कैसे पैसा तुम्हारे पीछे पीछे चलता है। कैसे वो तुम्हारे आंगन में आकर ठहर जाता है। कैसे वो तुम्हारे जीवन का एक सुंदर सहचर एक सुंदर सेवक, एक सुंदर मित्र बन
39:37
Speaker A
जाता है। और तुम उसके साथ मिलकर इस धरती पर स्वर्ग का एक टुकड़ा, एक कोना, एक उद्यान बना सकते हो। जहां हर कोई आए, हर कोई आनंद ले, हर कोई समृद्ध हो, हर कोई शांत हो, हर कोई परमात्मा का अनुभव करें।
39:53
Speaker A
यही तो सच्चा धन है। यही तो सच्ची संपत्ति है। यही तो सच्चा जीवन है। और इस जीवन को पाने के लिए तुम्हें कहीं जाना नहीं है। तुम्हें बस अपने भीतर उतरना है। अपनी आंखें बंद करनी है। अपनी सांसों को देखना
40:08
Speaker A
है। अपनी चेतना को जगाना है। और अपने होने के केंद्र में अपने अस्तित्व के मूल में उस अनंत अपार अमृतमय सत्ता को पहचानना है जो स्वयं धन है। स्वयं आनंद है। स्वयं प्रेम है, स्वयं प्रकाश है। उस प्रकाश में
40:26
Speaker A
जब तुम जीते हो तो सारा संसार, सारा धन, सारी समृद्धि तुम्हारे उस प्रकाश का प्रतिबिंब मात्र बन जाती है और तुम उस प्रतिबिंब के साथ खेलते हो। उस प्रतिबिंब का आनंद लेते हो पर उस प्रतिबिंब में नहीं फंसते। क्योंकि तुम तो स्वयं प्रकाश हो,
40:44
Speaker A
स्वयं दीप हो, स्वयं ज्योति हो और जब तुम स्वयं ज्योति हो तो ज्योति के पीछे अंधकार नहीं दौड़ता। ज्योति के पीछे तो और भी ज्योतियां दौड़ती हैं। और पैसा उन्हीं ज्योतियों में से एक है जो तुम्हारी ज्योति को देखकर तुम्हारी ज्योति से
41:01
Speaker A
आकर्षित होकर तुम्हारी ज्योति के चारों ओर नाचता है। और वो नृत्य ही समृद्धि है। वो नृत्य ही आनंद है। वो नृत्य ही जीवन है। इसलिए नाचो, गाओ, आनंद मनाओ, उत्सव करो और देखो कि कैसे पैसा तुम्हारे उस उत्सव में
41:18
Speaker A
शामिल होने के लिए तुम्हारे पीछे पीछे दौड़ता है। तुम्हारे साथ-साथ नाचता है और तुम्हारे जीवन को और भी सुंदर और भी समृद्ध और भी आनंदित बना देता है। यही मेरा आशीर्वाद है तुम्हारे लिए। यही मेरी कामना है तुम्हारे लिए। यही मेरा सत्य है
41:35
Speaker A
तुम्हारे लिए। जागो उठो और अपने उस सत्य को जियो। जहां पैसा पीछे है और तुम आगे हो। जहां पैसा सेवक है और तुम स्वामी हो। जहां पैसा एक खिलौना है और तुम खिलाड़ी हो। जहां पैसा एक नदी है और तुम समुद्र
41:52
Speaker A
हो, जहां पैसा एक किरण है और तुम सूर्य हो। इस सूर्यत्व को, इस समुद्रत्व को, इस स्वामित्व को पहचानो और देखो कि कैसे सारा जगत, सारा धन, सारी समृद्धि तुम्हारे उस सूर्यत्व के, उस समुद्रत्व के, उस स्वामित्व के पीछे दौड़ती है। तुम्हारी
42:11
Speaker A
सेवा में, तुम्हारी शरण में, तुम्हारी आनंद लीला में सम्मिलित होने के लिए। यही सबसे बड़ी सफलता है। यही सबसे बड़ी समृद्धि है। यही सबसे बड़ा जीवन है। मैं तुम्हें और गहरे में ले जाना चाहता हूं। क्योंकि यह विषय केवल पैसे का नहीं है। यह
42:27
Speaker A
तो स्वयं जीवन के रहस्य का विषय है। तुम सोचते हो कि पैसा कोई बाहरी वस्तु है जो तुम्हें बैंक से, नौकरी से, व्यापार से या किसी और स्रोत से प्राप्त होती है। पर मैं कहता हूं पैसा तो तुम्हारी आंतरिक स्थिति,
42:43
Speaker A
तुम्हारी चेतना की अवस्था, तुम्हारी ऊर्जा की शुद्धता का बाहरी प्रतिबिंब मात्र है। जैसे दर्पण में तुम्हारा चेहरा दिखता है, वैसे ही संसार के दर्पण में तुम्हारी आंतरिक समृद्धि या दरिद्रता प्रतिबिंबित होती है। यदि दर्पण में तुम्हारा चेहरा मैला दिखता है, तो तुम दर्पण को साफ करने
43:02
Speaker A
की कोशिश नहीं करते। तुम अपना चेहरा साफ करते हो। क्योंकि तुम जानते हो कि दर्पण तो केवल प्रतिबिंब है। ठीक इसी तरह यदि तुम्हारे जीवन में धन की कमी है। यदि पैसा तुम्हारे पीछे नहीं आ रहा है तो बाहर के
43:16
Speaker A
कारणों को दोष मत दो। अपने भीतर झांको। देखो कि तुम्हारी चेतना में क्या कमी है। तुम्हारी ऊर्जा में क्या अवरोध है। तुम्हारे विश्वास में क्या दरार है। तुम्हारे दृष्टिकोण में क्या विकृति है। और जब तुम अपने भीतर के उस अवरोध को उस
43:33
Speaker A
दरार को उस विकृति को पहचान लेते हो तो उसे बदलना शुरू करो। उसे ठीक करो। उसे शुद्ध करो। और तुरंत देखोगे कि संसार का दर्पण तुम्हारी नई छवि प्रतिबिंबित करने लगता है और पैसा तुम्हारे पीछे आने लगता है। यह कोई जादू नहीं है। यह चेतना का
43:50
Speaker A
विज्ञान है। ये ऊर्जा का भौतिकी है। ये जीवन का गणित है। जो इस गणित को समझ लेता है, वह अपने जीवन का निर्माण स्वयं कर सकता है। वह अपने भाग्य का लेखक स्वयं बन सकता है। वह अपनी समृद्धि का स्रोत स्वयं
44:05
Speaker A
बन सकता है। तुमने कभी ध्यान दिया है कि जब तुम किसी काम को पूरे मन से पूरे प्रेम से, पूरे उत्साह से करते हो तो समय का बोध नहीं होता। तुम थकते नहीं हो। तुम्हें कोई कठिनाई नहीं आती और अचानक तुम देखते हो कि
44:20
Speaker A
वह काम इतना सफल हो गया है, इतना शानदार हो गया है और उस सफलता के साथ पैसा भी आ गया है। ये इसलिए होता है क्योंकि जब तुम प्रेम से काम करते हो तो तुम अपनी पूरी ऊर्जा, अपनी पूरी चेतना, अपना पूरा
44:35
Speaker A
अस्तित्व उस काम में डाल देते हो। और वो काम एक जीवंत एक चेतन एक दैय रूप ले लेता है और वो रूप संसार को आकर्षित करता है और संसार उस रूप को मूल्य देता है और वो मूल्य ही पैसा है। इसलिए यदि तुम पैसा
44:51
Speaker A
चाहते हो तो काम को प्रेम करना सीखो। काम को पूजा करना सीखो। काम को ध्यान करना सीखो। काम को अपना ईश्वर बनाना सीखो। जब काम तुम्हारा ईश्वर बन जाता है तो उस ईश्वर से पैसा एक वरदान एक प्रसाद एक
45:08
Speaker A
अनुग्रह की तरह आता है और वह पैसा तुम्हें भ्रष्ट नहीं करता। वो पैसा तुम्हें और अधिक प्रेम और अधिक सेवा और अधिक सृजन के लिए प्रेरित करता है और तुम्हारा जीवन एक अद्भुत चक्र बन जाता है जिसमें प्रेम सेवा
45:24
Speaker A
सृजन और समृद्धि एक दूसरे को जन्म देते हैं। एक दूसरे को पोषित करते हैं और एक दूसरे को बढ़ाते हैं। मैं तुमसे एक और बहुत महत्वपूर्ण बात कहना चाहता हूं जो शायद तुम्हारी सोच के बिल्कुल विपरीत है पर सत्य है। जब तुम पैसे को लेकर बहुत
45:41
Speaker A
गंभीर होते हो, बहुत तनाव ग्रस्त होते हो, बहुत उद्विग्न होते हो, तो पैसा तुमसे दूर भागता है। पैसा एक ऐसे व्यक्ति को पसंद करता है जो हल्का हो, जो खिलखिला सके, जो खेल सके, जो मजाक कर सके, जो जीवन को एक
45:57
Speaker A
खेल की तरह ले सके। तुमने देखा होगा जो बच्चे खेलते हैं वे कितने आकर्षक कितने जीवंत कितने प्रसन्न होते हैं और सारा संसार उन बच्चों से प्रेम करता है। उन्हें प्यार करता है, उन्हें चाहता है। ठीक इसी तरह जब तुम अपने काम, अपने व्यापार, अपने
46:18
Speaker A
पेशे में खेल का, लीला भाव का, हल्केपन का, उत्सव का भाव लाते हो तो वह काम आकर्षक हो जाता है। लोग उसकी ओर आकर्षित होते हैं और पैसा उस आकर्षण का परिणाम होता है। इसलिए गंभीरता, चिंता, तनाव, भारीपन इन सबको छोड़ो और हल्केपन, खेल,
46:38
Speaker A
उत्सव, आनंद को अपने काम में लाओ। यह मत सोचो कि पैसा कमाना एक गंभीर काम है, एक कठिन संघर्ष है, एक मुश्किल लड़ाई है। नहीं। पैसा कमाना एक कला है, एक खेल है, एक नृत्य है। और जो इस नृत्य को सीख लेता
46:55
Speaker A
है, उसके लिए पैसा एक सहज, एक स्वाभाविक, एक सरल घटना है। वो कभी उसके पीछे नहीं भागता बल्कि पैसा उसके पीछे दौड़ता है। क्योंकि उसके जीवन का नृत्य, उसकी चेतना का संगीत, उसके अस्तित्व का आनंद पैसे को बुलाता है। पैसे को आमंत्रित करता है,
47:14
Speaker A
पैसे को बांधता है। तुम्हारी एक और गलती ये है कि तुम पैसे को अंतिम लक्ष्य समझते हो और इसी गलती के कारण तुम उस तक कभी नहीं पहुंच पाते क्योंकि अंतिम लक्ष्य की कोई सीमा नहीं होती। वो असीम होता है और
47:29
Speaker A
उसे पाने की इच्छा कभी पूरी नहीं होती। इसलिए पैसे को अंतिम लक्ष्य मत बनाओ। पैसे को एक मार्ग, एक साधन, एक सेतु, एक पुल बनाओ जो तुम्हें तुम्हारे वास्तविक लक्ष्य, तुम्हारे वास्तविक उद्देश्य, तुम्हारे वास्तविक स्व तक पहुंचाता है।
47:48
Speaker A
तुम्हारा वास्तविक लक्ष्य क्या है? तुम्हारा वास्तविक लक्ष्य है आनंद, शांति, प्रेम, स्वतंत्रता, जागृति, परमात्मा का अनुभव। यदि पैसा इसमें तुम्हारी सहायता करता है, तो वह सार्थक है। और यदि पैसा तुम्हें इनसे दूर ले जाता है, तो वह व्यर्थ है, वह बोझ है, वह अभिशाप है।
48:09
Speaker A
इसलिए अपने जीवन के वास्तविक लक्ष्य को पहचानो। उसे अपने सामने रखो और पैसे को उस लक्ष्य की प्राप्ति का एक साधन मात्र बनाओ। जब तुम ऐसा करते हो, तो तुम्हारा दृष्टिकोण, तुम्हारी ऊर्जा, तुम्हारा ध्यान, सब कुछ उस लक्ष्य की ओर केंद्रित
48:26
Speaker A
हो जाता है। और पैसा स्वतः उस केंद्रित ऊर्जा का एक उपद, एक सह उत्पाद, एक उपहार के रूप में आता है। और वो पैसा तुम्हें तुम्हारे लक्ष्य की ओर और भी तेजी से, और भी सरलता से, और भी सुंदरता से ले जाता
48:42
Speaker A
है। क्योंकि अब वो तुम्हारा मित्र है। तुम्हारा सहायक है। तुम्हारा साधन है। ना कि तुम्हारा स्वामी ना तुम्हारा बंधन ना तुम्हारा दुख। प्रेमीजन मैं तुम्हें एक और अनुभव से अवगत कराना चाहता हूं। जो मैंने जीवन में बहुत करीब से देखा है। बहुत से
49:01
Speaker A
लोग सोचते हैं कि पैसा उन्हें सुरक्षा देता है। पैसा उन्हें आश्रय देता है। पैसा उन्हें भविष्य की चिंता से मुक्त करता है। पर मैं कहता हूं ये भी एक भ्रम है। ये भी एक मिथ्या धारणा है। सच्ची सुरक्षा सच्चा
49:16
Speaker A
आश्रय सच्ची निर्भयता पैसे से नहीं अपने आत्मज्ञान से अपने आत्मविश्वास से अपनी आंतरिक शक्ति से आती है। जो व्यक्ति अपने आप को जान लेता है, जो व्यक्ति अपनी आत्मा की अमरता, अपनी चेतना की अनंतता, अपने अस्तित्व की स्वतंत्रता को अनुभव कर लेता
49:35
Speaker A
है, उसे पैसे से कोई सुरक्षा नहीं चाहिए। क्योंकि वह स्वयं सुरक्षा है, वह स्वयं आश्रय है, वो स्वयं निर्भयता है। और जब तुम इतने निर्भय होते हो, इतने सुरक्षित होते हो, इतने आत्मविश्वासी होते हो तो पैसा तुम्हारी ओर आकर्षित होता है।
49:53
Speaker A
क्योंकि पैसा भी उसी निर्भयता, उसी सुरक्षा, उसी आत्मविश्वास को पसंद करता है। वो उसी ऊर्जा के पास बैठना चाहता है। उसी आभा के साथ रहना चाहता है। उसी आनंद में भाग लेना चाहता है। इसलिए पैसे से सुरक्षा मत मांगो। अपने भीतर की सुरक्षा
50:10
Speaker A
को जगाओ। अपने भीतर के आश्रय को पहचानो। अपनी निर्भयता को जीवंत करो और देखो कि कैसे पैसा उस निर्भयता का उस सुरक्षा का उस आत्मविश्वास का एक प्रतीक बनकर तुम्हारे पीछे चलता है। तुम्हारे आसपास मंडराता है और तुम्हारी जीवन लीला में एक
50:27
Speaker A
सहज एक स्वाभाविक एक सुंदर सहचर बन जाता है। मैं तुमसे यह भी कहना चाहता हूं कि पैसे को लेकर तुम्हारा व्यवहार, तुम्हारा आचरण, तुम्हारा चरित्र बहुत महत्वपूर्ण है। जो व्यक्ति पैसे का अनादर करता है, जो पैसे को गंदा, घटिया या तुच्छ समझता है,
50:47
Speaker A
वह पैसे को आकर्षित नहीं कर सकता क्योंकि पैसा भी अपना सम्मान चाहता है। पैसा एक ऐसे व्यक्ति के साथ रहना चाहता है जो उसकी कदर करता हो, जो उसका आदर करता हो, जो उसे सही रास्ते पर लगाता हो। जो उसे व्यर्थ
51:01
Speaker A
नष्ट नहीं होने देता। जो उसे अपमानित नहीं करता। इसलिए पैसे के प्रति एक सम्मान, एक कृतज्ञता, एक सद्भावना का भाव रखो। जब भी पैसा तुम्हारे हाथ लगे तो उसे साफ सुथरा रखो। उसे व्यवस्थित रखो। उसका हिसाब रखो। उसका सही उपयोग करो। उसे ऐसे स्थानों पर
51:21
Speaker A
लगाओ जहां वो बढ़े, फले और फल दे। जो व्यक्ति पैसे की इज्जत करता है, पैसा भी उसकी इज्जत करता है। और जब पैसा तुम्हारी इज्जत करने लगता है, तो वह तुम्हारे पीछे आता है। तुम्हारी सेवा में, तुम्हारी आज्ञा में, तुम्हारी इच्छा के अनुसार। यह
51:39
Speaker A
एक अन्य रहस्य है जिसे बहुत कम लोग जानते हैं और जो जान लेता है, वह कभी पैसे के लिए नहीं रोता। वो तो पैसे के साथ हंसता है, पैसे के साथ खेलता है, पैसे के साथ नाचता है और उसका जीवन एक निरंतर उत्सव बन
51:54
Speaker A
जाता है। प्रेमीजन, मैं तुम्हें और भी गहरे में ले जाना चाहता हूं। तुम्हारा मन हर समय पैसे को लेकर एक आंतरिक संवाद करता है। एक आंतरिक बातचीत चलती रहती है। तुम सोचते हो अगर मेरे पास इतना पैसा होता तो
52:09
Speaker A
मैं यह करता, मैं वो करता, मैं वहां जाता, मैं यह खरीदता। ये सभी विचार ये सभी कल्पनाएं, ये सभी दिवा स्वप्न तुम्हारी ऊर्जा को बाहर बिखेर देते हैं। और जब तुम्हारी ऊर्जा बिखरी होती है तो पैसा तुमसे दूर रहता है। क्योंकि पैसा एक
52:27
Speaker A
केंद्रित एक संगठित एक अनुशासित ऊर्जा को पसंद करता है। इसलिए इन व्यर्थ की कल्पनाओं, इन बेकार के दिवा स्वप्नों, इन अवास्तविक इच्छाओं को छोड़ो और अपनी ऊर्जा को केंद्रित करो। अपने मन को एकाग्र करो। अपनी चेतना को स्थिर करो और वर्तमान में
52:46
Speaker A
जियो, वर्तमान में काम करो, वर्तमान में रहो। जब तुम पूरी तरह वर्तमान में होते हो, जब तुम्हारा मन कहीं नहीं भटकता। जब तुम्हारी ऊर्जा किसी दूसरी जगह नहीं बहती, तब तुम जो भी काम करते हो वो अद्भुत, वो
53:02
Speaker A
अपूर्व, वो अनुपम हो जाता है। और वही काम तुम्हारे लिए धन का, समृद्धि का, सफलता का द्वार खोलता है। इसलिए वर्तमान को अपना मित्र बनाओ। वर्तमान में अपनी पूरी ऊर्जा, अपना पूरा ध्यान, अपना पूरा प्रेम लगाओ और देखो कि कैसे वर्तमान तुम्हें भविष्य देता
53:21
Speaker A
है और भविष्य का सबसे बड़ा उपहार है समृद्धि, पैसा और संतोष। एक और अत्यंत सूक्ष्म बात मैं तुम्हें बताता हूं जो बहुत सूक्ष्म है पर अत्यंत प्रभावशाली है। तुम जैसे पैसे को देखते हो पैसा भी वैसे ही तुम्हें देखता है। जब तुम
53:39
Speaker A
पैसे को अपनी आंखों से अपनी भावनाओं से अपनी ऊर्जा से देखते हो तो तुम पैसे के प्रति एक विशेष कंपन पैदा करते हो। यदि तुम डर के साथ, लालच के साथ या नफरत के साथ पैसे को देखते हो तो पैसा भी उसी भय,
53:56
Speaker A
उसी लालच उसी नफरत को महसूस करता है और वह तुमसे दूर हो जाता है। लेकिन यदि तुम पैसे को प्रेम, सम्मान, कृतज्ञता और निरपेक्षता के साथ देखते हो तो पैसा भी उसी प्रेम, उसी सम्मान, उसी कृतज्ञता, उसी निरपेक्षता
54:13
Speaker A
के साथ तुम्हारी ओर आता है। यह एक आध्यात्मिक भौतिकी है जिसे समझना बहुत आवश्यक है। इसलिए अपनी दृष्टि को शुद्ध करो। अपनी भावनाओं को साफ करो। अपनी ऊर्जा को पवित्र करो और पैसे को एक मित्र एक सहयोगी एक साथी के रूप में देखो और वो उसी
54:32
Speaker A
रूप में तुम्हारे सामने आएगा तुम्हारे साथ चलेगा तुम्हारा साथ देगा और तुम्हारी जीवन यात्रा को सुंदर सुखमय और सार्थक बनाएगा। प्रेमीजन मैं तुमसे यह भी कहना चाहता हूं कि पैसा तब तुम्हारे पीछे आता है जब तुम सीख लेते हो कि पैसे का उपयोग कैसे करना
54:50
Speaker A
है। पैसे को कैसे संभालना है। पैसे के साथ कैसे व्यवहार करना है। बहुत से लोग पैसे की अज्ञानता के कारण उसे खो बैठते हैं या उसे व्यर्थ गवा देते हैं या उसका दुरुपयोग करते हैं और फिर वे रोते हैं कि पैसा
55:04
Speaker A
क्यों नहीं आता? पैसा आता है पर वे उसे पकड़ नहीं पाते। उसे संभाल नहीं पाते। उसे बढ़ा नहीं पाते क्योंकि उन्होंने पैसे का विज्ञान नहीं सीखा। पैसे का विज्ञान सीखो, पैसे की कला सीखो, पैसे के गणित सीखो, पैसे के मनोविज्ञान सीखो, पैसे के
55:21
Speaker A
आध्यात्मिक पहलू को समझो। जब तुम यह सब समझ लेते हो तो तुम पैसे के स्वामी बन जाते हो और जब तुम पैसे के स्वामी होते हो तो पैसा तुम्हारी आज्ञा में तुम्हारी इच्छा में तुम्हारी दिशा में चलता है और
55:35
Speaker A
वह तुम्हारे पीछे आता है क्योंकि वह जानता है कि तुम उसे सही रास्ता दिखा सकते हो। तुम उसे सही जगह लगा सकते हो। तुम उसे सही उद्देश्य दे सकते हो। इसलिए पैसे को लेकर अज्ञानता को, अनभिज्ञता को, लापरवाही को
55:50
Speaker A
छोड़ो और पैसे के प्रति सजगता, जागरूकता और बुद्धिमत्ता को अपनाओ और देखो कि कैसे पैसा तुम्हारी उस बुद्धिमत्ता के प्रति, तुम्हारी उस जागरूकता के प्रति, तुम्हारी उस सजगता के प्रति आकर्षित होता है और तुम्हारे पीछे पीछे चलने लगता है। मैं
56:07
Speaker A
यहां और भी कहना चाहता हूं और यह बात बहुत गहरी है जो शायद तुम्हारे कानों को चौंका दे पर सत्य है। पैसा तुम्हारे पीछे तब आता है जब तुम पैसे के प्रति आसक्ति को मोह को लगाव को पूरी तरह से छोड़ देते हो। हां,
56:24
Speaker A
तुमने सुना। जब तुम पैसे के प्रति बिल्कुल निर्लिप्त बिल्कुल उदासीन बिल्कुल अनासक्त हो जाते हो तब पैसा तुम्हारी ओर दौड़ता है। यह एक विरोधाभास है पर यह परम सत्य है। जब तुम पैसे को पकड़ने की कोशिश करते हो तो वो फिसल जाता है। जब तुम उसे जाने
56:43
Speaker A
देते हो तो वो आ जाता है। यह वैसा ही है जैसे जब तुम अपनी मुट्ठी बंद करते हो तो हवा तुम्हारे हाथ से बाहर चली जाती है और जब तुम अपनी मुट्ठी खोलते हो तो हवा तुम्हारे हाथ में आ जाती है। पैसा भी हवा
56:57
Speaker A
की तरह है। एक ऊर्जा की तरह है और उसे पाने का सबसे अच्छा, सबसे प्रभावी, सबसे निश्चित तरीका है, उसे ना पाने की इच्छा, उसे ना पकड़ने का भाव, उसे ना रोकने का दृष्टिकोण। जब तुम इस भाव में आ जाते हो
57:13
Speaker A
कि पैसा आए तो अच्छा ना आए तो और भी अच्छा क्योंकि तुम्हारा आनंद तुम्हारी शांति तुम्हारी संतुष्टि पैसे पर निर्भर नहीं है। तब पैसा तुम्हारी ओर आकर्षित होता है क्योंकि तुम उसके लिए एक सुरक्षित एक शांत एक स्थिर स्थान हो जहां वो रह सकता है।
57:33
Speaker A
बढ़ सकता है और फल फूल सकता है। यही वास्तविक त्याग है। यही वास्तविक सन्यास है। यही वास्तविक ध्यान है जो पैसे को, समृद्धि को और संपूर्ण जीवन को आकर्षित करता है। प्रेमीजन, मैं तुम्हें और भी बताता हूं क्योंकि यह विषय अंतहीन है।
57:51
Speaker A
जैसे समुद्र की गहराई। तुम सोचते हो कि पैसे का संबंध केवल तुम्हारे बैंक खाते, तुम्हारी नौकरी या तुम्हारे व्यापार से है। पर मैं कहता हूं। पैसे का संबंध तुम्हारी सांसों, तुम्हारे विचारों, तुम्हारी भावनाओं, तुम्हारे व्यवहार, तुम्हारी आदतों, तुम्हारी जीवन शैली,
58:11
Speaker A
तुम्हारे रिश्तों, तुम्हारे स्वास्थ्य, तुम्हारी नींद, तुम्हारे सपनों, तुम्हारी आकांक्षाओं, तुम्हारी आत्मा से है। तुम जैसे हो, वैसा ही तुम्हारा धन होता है। क्योंकि धन तुम्हारा विस्तार है। धन तुम्हारा प्रतिबिंब है। धन तुम्हारा प्रक्षेपण है। यदि तुम गंदे, अव्यवस्थित,
58:31
Speaker A
असंगठित, आलसी, अधीर, क्रोधी, ईर्षालु और लालची हो, तो तुम्हारा धन भी वैसा ही होगा। अव्यवस्थित, असंगठित, अस्थिर और अल्पायु। और यदि तुम स्वच्छ, व्यवस्थित, संगठित मेहनती धैर्यवान शांत दयालु उदार और संतुष्ट हो तो तुम्हारा धन भी वैसा ही होगा। व्यवस्थित, स्थिर, बढ़ता
58:58
Speaker A
हुआ और दीर्घायु। इसलिए अपने धन को बढ़ाने के लिए पहले अपने गुणों को बढ़ाओ। अपने चरित्र को सुधारो। अपनी आदतों को बदलो। अपने व्यवहार को परिष्कृत करो। अपने विचारों को शुद्ध करो। अपनी भावनाओं को संतुलित करो और अपनी आत्मा को प्रकाशित
59:15
Speaker A
करो। जब तुम इन सब में विकसित हो जाओगे, तो तुम्हारा धन अपने आप विकसित होगा। क्योंकि धन तुम्हारी आंतरिक समृद्धि का बाहरी प्रतिफल है और जब आंतरिक समृद्धि होगी तो बाहरी समृद्धि उसका अनुसरण करेगी। वो तुम्हारे पीछे आएगी। तुम्हारी
59:32
Speaker A
प्रतीक्षा करेगी और तुम्हारा जीवन एक समृद्ध एक आनंदित एक पूर्ण जीवन बन जाएगा। मैं अभी और भी कहना चाहता हूं क्योंकि मेरे पास कहने को बहुत कुछ है और तुम्हारी प्यास भी बहुत गहरी है। पैसा तुम्हारे पीछे कैसे आएगा? इसका एक और पहलू है जिसे
59:50
Speaker A
मैं तुम्हारे सामने रखना चाहता हूं और वो है समय का महत्व। तुम्हारा समय तुम्हारी सबसे बड़ी पूंजी है। उससे भी बड़ी जितना कि पैसा। पैसा तो तुम फिर से कमा सकते हो। पर समय जो चला गया वो कभी वापस नहीं आता।
60:07
Speaker A
और जो लोग समय को बर्बाद करते हैं, वे पैसे को भी बर्बाद करते हैं और जो समय का सदुपयोग करते हैं, वे पैसे का सदुपयोग करते हैं और उनके पीछे पैसा आता है। इसलिए अपने समय को मूल्यवान समझो। अपने समय को
60:22
Speaker A
व्यर्थ मत गवाओ। अपने समय को उस काम में लगाओ जो तुम्हें समृद्ध करे जो तुम्हें विकसित करे जो तुम्हें आगे बढ़ाए जो तुम्हें कुछ नया सिखाए जो तुम्हारी क्षमताओं को बढ़ाए जो तुम्हारे अनुभवों को गहरा करे जो तुम्हारे संबंधों को सुधारे
60:38
Speaker A
जो तुम्हारे स्वास्थ्य को बनाए रखे जो तुम्हारी आत्मा को पोषित करे जो व्यक्ति समय की कदर करता है। समय उसकी कदर करता है और समय की कदर करने वाले के पीछे पैसा आता है। क्योंकि समय और पैसा एक दूसरे से
60:53
Speaker A
जुड़े हुए हैं। एक दूसरे के पूरक हैं, एक दूसरे के सहचर हैं। जिसने समय को जीत लिया, उसने पैसे को जीत लिया और जिसने पैसे को जीत लिया, उसने समय को जीत लिया। और वो दोनों की समृद्धि में, दोनों के
61:07
Speaker A
उत्सव में, दोनों के आनंद में जीता है और उसका जीवन एक निरंतर विजय, एक निरंतर उल्लास, एक निरंतर समृद्धि है। प्रेमीजन मैं तुमसे एक और बात कहना चाहता हूं। और वो है जोखिम लेने की कला। पैसा उन लोगों
61:23
Speaker A
के पीछे आता है जो जोखिम लेने से नहीं डरते जो सुरक्षित स्थिर और पुराने रास्तों पर चलने के बजाय नए अनजाने और कभी-कभी खतरनाक रास्तों पर चलने का साहस रखते हैं। जीवन में सारी बड़ी समृद्धि सारा बड़ा धन
61:40
Speaker A
उन्हीं लोगों को मिला है जिन्होंने जोखिम उठाया है। जिन्होंने अपनी सुरक्षा को, अपनी आरामदायक दुनिया को, अपनी परिचित परिस्थितियों को छोड़कर अज्ञात में, अपरिचित में, अपरंपरागत में कदम रखा है। यह मत सोचो कि जोखिम लेना मूर्खता है या
61:57
Speaker A
लापरवाही है या असयम है। नहीं। जोखिम लेना बुद्धिमत्ता है, यह जीवन का खेल है। यह समृद्धि का नृत्य है। पर जोखिम लेने से पहले जोखिम को समझो, उसका विश्लेषण करो। उसके परिणामों का आकलन करो और फिर पूरी ऊर्जा पूरी चेतना पूरे समर्पण के साथ उस
62:19
Speaker A
जोखिम में कूद पड़ो। जो व्यक्ति जोखिम लेने में सक्षम है, वही नई ऊंचाइयां, नए क्षितिज नए अवसरों को छूता है। और जब वह उन नए क्षितिजों पर पहुंचता है, तो उसके पीछे पैसा अपने आप आता है। क्योंकि पैसा
62:34
Speaker A
हमेशा नवाचार, साहस और रचनात्मकता का अनुसरण करता है। वो कभी ठहराव, जड़ता और डर का साथ नहीं देता। इसलिए अपने डर को, अपनी झिझक को, अपनी असुरक्षा को पीछे छोड़ो और साहस के साथ, विवेक के साथ, जागरूकता के साथ नए रास्तों पर चलो और
62:55
Speaker A
देखो कि कैसे पैसा तुम्हारे उस साहस का उस विवेक का उस जागरूकता का अनुसरण करता है और तुम्हारे पीछे-पीछे आता है। तुम्हारे कदमों से कदम मिलाता है और तुम्हारी यात्रा को और अधिक साहसिक और अधिक रोमांचक और अधिक समृद्ध बनाता है। मैं यहां और भी
63:14
Speaker A
कहूंगा क्योंकि यह अभी भी अधूरा है यह विषय अनंत है इसकी गहराई असीम है। पैसा तुम्हारे पीछे तब आता है जब तुम अपने मन की गहराई में छिपी उन मान्यताओं उन संस्कारों उन कंडीशनिशंस को पहचानते हो और उन्हें तोड़ते हो जो तुम्हें बताती हैं कि
63:32
Speaker A
पैसा कमाना कठिन है। पैसा कमाना पाप है। पैसा कमाना केवल चुने हुए लोगों का काम है या पैसा तुम्हारी किस्मत में नहीं है। यह सब बातें, ये सब विश्वास तुम्हारे अचेतन मन में बैठे हुए हैं और वे तुम्हारे हर
63:46
Speaker A
कदम, तुम्हारे हर निर्णय, तुम्हारी हर क्रिया को प्रभावित करते हैं और वे तुम्हें पैसे से दूर रखते हैं। इसलिए इन मान्यताओं को पहचानो, इन्हें उजागर करो, इन्हें चुनौती दो और इन्हें बदलो। यह कहो मैं पैसे के योग्य हूं। मैं समृद्धि के
64:03
Speaker A
योग्य हूं। मैं एक समृद्ध जीवन जीने के लिए पैदा हुआ हूं। मैं अपने जीवन में धन को आकर्षित कर सकता हूं। मैं अपनी समृद्धि का स्वामी हूं और पैसा मेरे पीछे आता है क्योंकि मैंने उसे बुलाया है। मैंने उसे
64:18
Speaker A
आमंत्रित किया है। मैंने उसे अपने जीवन में स्थान दिया है। जब तुम यह सब अपने भीतर गहराई से अनुभव कर लेते हो। जब यह तुम्हारा विश्वास बन जाता है, तुम्हारी मान्यता बन जाता है, तुम्हारी धारणा बन जाता है, तो तुम्हारी पूरी चेतना,
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Speaker A
तुम्हारी पूरी ऊर्जा, तुम्हारा पूरा अस्तित्व समृद्धि के लिए खुल जाता है और पैसा उस खुले, उस आमंत्रित उस स्वागतशील अस्तित्व में प्रवेश करता है और तुम्हारे पीछे पीछे चलता है। तुम्हारे जीवन को धन, वैभव और संतोष से भर देता है। यही सबसे
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Speaker A
गहरा, सबसे मौलिक, सबसे प्रभावी परिवर्तन है जो तुम कर सकते हो। और जो तुम्हारे जीवन को पूरी तरह बदल सकता है। ना केवल पैसे के संदर्भ में, बल्कि हर पहलू में, हर आयाम में, हर स्तर पर। प्रेमीजन, मैंने
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Speaker A
तुम्हें बहुत कुछ कहा। बहुत गहराई से कहा, बहुत स्पष्टता से कहा। ये सब सुनो। इसे अपने मन में मत रखो। इसे अपने हृदय में उतारो। इसे अपने जीवन में जियो। क्योंकि जो बात सुनकर, पढ़कर या सोचकर ही रुक जाती
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Speaker A
है, वो बेकार है। वो निरर्थक है। वो मृत है। सच्ची बात वही है जो जीवन में उतरती है। जो आचरण में आती है। जो कर्म में बदलती है। जो अनुभव में परिणत होती है। इसलिए मैं तुमसे कहता हूं। अब इसी क्षण
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Speaker A
से, इसी घड़ी से, इसी मुहूर्त से इस सत्य को अपने जीवन में उतारो। पैसे के पीछे भागना बंद करो। पैसे की चिंता करना बंद करो। पैसे का भय करना बंद करो। पैसे की लालसा करना बंद करो और बस अपने आपको, अपनी
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Speaker A
प्रतिभा को, अपनी क्षमता को, अपनी सेवा को, अपने प्रेम को जियो। और देखो कि कैसे पैसा स्वतः सहज स्वाभाविक रूप से तुम्हारे पीछे आता है। तुम्हारी प्रतीक्षा करता है। तुम्हारी सेवा में लग जाता है और तुम्हारे जीवन को एक समृद्ध एक आनंदित एक अद्वितीय
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Speaker A
उत्सव में बदल देता है। यही मेरा आशीर्वाद है। यही मेरा वचन है। यही मेरा सत्य है। इस सत्य को जानो। इस सत्य को जियो और इस सत्य के साथ पूर्ण परिपूर्ण और समृद्ध जीवन का आनंद लो।
Topics:पैसाधनसमृद्धिध्यानसेवामनोवृत्तिआत्मविश्वासऊर्जाओशोआध्यात्म

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