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4th Khalifa of Islam ... ALIؓ

इस वीडियो में इस्लाम के चौथे खलीफा हजरत अली रज़िअल्लाहु अन्हु के जीवन, उनके बचपन, इस्लाम में योगदान और उनकी महानता पर चर्चा की गई है।

Key Takeaways

  • हजरत अली रज़िअल्लाहु अन्हु इस्लाम के सबसे बहादुर और न्यायप्रिय खलीफा थे।
  • उनकी परवरिश सीधे रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने की थी, जो उनकी महानता का प्रमाण है।
  • इस्लाम के शुरुआती संकटों में हजरत अली ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • उनकी जिंदगी से यह स्पष्ट होता है कि एक सच्चा नेता और योद्धा कैसा होता है।
  • मुसलमानों की खिलाफत को बचाने में हजरत अली का योगदान अतुलनीय है।

What the video covers

  • इस्लाम के चौथे खलीफा हजरत अली रज़िअल्लाहु अन्हु की जीवन यात्रा और उनकी तरबियत का वर्णन।
  • खलीफा उस्मान के शहीद होने के बाद मदीना में खलीफा अली की नियुक्ति और उनकी पहली भाषण।
  • मक्का पर अब्राह के हमले और अब्दुल मुतलिब की दुआ का चमत्कार।
  • हजरत अली का बचपन, उनके पिता अबू तालिब और चाचा अबू तालिब के साथ संबंध।
  • रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम द्वारा हजरत अली की परवरिश और शिक्षा।
  • हजरत अली का इस्लाम कबूल करना और मदीना में पहली नमाज।
  • इस्लाम के शुरुआती दौर में मक्का और मदीना के हालात।
  • हजरत अली की बहादुरी, न्यायप्रियता और इस्लाम के लिए उनके योगदान।
  • मुसलमानों और मक्का वालों के बीच संघर्ष और सुलह की घटनाएं।
  • खैबर की फतह और हजरत अली की नेतृत्व क्षमता।

Answers

Questions about this video

हजरत अली रज़िअल्लाहु अन्हु को इस्लाम का चौथा खलीफा क्यों माना जाता है?

हजरत अली को इस्लाम का चौथा खलीफा इसलिए माना जाता है क्योंकि उन्होंने खलीफा उस्मान के शहीद होने के बाद मुसलमानों की खिलाफत की जिम्मेदारी संभाली और इस्लाम को संकट से बचाया।

हजरत अली की परवरिश किसने की थी?

हजरत अली की परवरिश सीधे रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने की थी, जो उनकी शिक्षा और चरित्र निर्माण का मुख्य आधार थी।

खैबर की फतह में हजरत अली की क्या भूमिका थी?

खैबर की फतह में हजरत अली ने मुसलमानों की फौज का नेतृत्व किया और अपनी बहादुरी से इस महत्वपूर्ण जीत में अहम योगदान दिया।

Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:00
Speaker A
इस्लाम का चौथा खलीफा अमीरुल मोमिनीन अली। इस्लाम का सबसे बड़ा चीफ जस्टिस, इस्लाम का सबसे बहादुर वॉरियर।
00:31
Speaker A
[संगीत] जैसे ही इस्लाम के तीसरे खलीफा, खलीफा उस्मान रजिअल्लाहु अन्हु को उन्हीं के घर में शहीद कर दिया गया। पूरी खिलाफत में एक खौफ फैल गया।
00:50
Speaker A
हर तरफ गुस्सा और ग़म फैला हुआ था। मुसलमानों की इस खिलाफत में जो इस वक्त हिंदुस्तान से लेकर यूरोप के समंदरों तक फैली हुई थी।
01:07
Speaker A
[संगीत] पहली बार ऐसा वक्त आया था कि इस इतनी बड़ी खिलाफत का कोई खलीफा नहीं था। और फॉर
01:33
Speaker A
[संगीत] द फर्स्ट टाइम ऐसा लग रहा था कि अब फाइनली मुसलमानों की ये खिलाफत टूट जाएगी। लेकिन अब जब खिलाफत के हालात इतने खराब हो चुके थे। मदीना के सारे मुसलमानों को अच्छी तरह पता था कि अब इस खिलाफत को
01:49
Speaker A
सिर्फ एक ही आदमी बचा सकता है। रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के दामाद जिनकी तरबियत खुद रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के घर में हुई थी। खैबर को फतह करने वाले।
02:08
Speaker A
[संगीत] हजरत अली रजिअल्लाहु अन्हु। इसीलिए हजरत उस्मान को दफनाने के फौरन बाद
02:28
Speaker A
कुछ लोग हजरत अली रजिअल्लाहु अन्हु के पास गए और उन्हें कहा कि हम आपको मुसलमानों का नया खलीफा बनाना चाहते हैं।
02:54
Speaker A
[संगीत] लेकिन हजरत अली ने कहा नहीं, मेरी खिलाफत ऐसे छुप कर सीक्रेटली नहीं होगी बल्कि जाओ
03:17
Speaker A
और सबको मदीना की मस्जिद में जमा करो।
03:39
Speaker A
[संगीत] जिसके बाद हजरत अली खुद रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के मिंबर पर खड़े हुए।
03:59
Speaker A
[संगीत] जहां बिल्कुल पहले खलीफा अबू बकर, दूसरे खलीफा उमर और तीसरे खलीफा उस्मान की तरह,
04:15
Speaker A
सारे मुसलमानों ने चौथे खलीफा हजरत अली रज़िअल्लाहु अन्हु के हाथ पर बैत की। जिसके बाद अमीरुल मोमिनीन खलीफा अली रज़िअल्लाहु अन्हु ने अपनी खिलाफत की पहली स्पीच शुरू की। पर वेट, आखिर खलीफा अली रज़िअल्लाहु अन्हु
04:35
Speaker A
यहां तक पहुंचे कैसे? इसके लिए हमें पीछे जाना होगा। हजरत अली की खिलाफत से बहुत साल पहले मक्का जो अरब की एक बहुत बड़ी सिटी थी, पर हमला हुआ और मक्का पर हमला करने वाला यमन का सबसे बड़ा बादशाह अब रहा था।
04:52
Speaker A
जैसे ही वो अपनी 60 हजार की फौज लेकर मक्का के करीब पहुंचा,
05:11
Speaker A
मक्का के सारे लोग डर गए और उन्होंने अब्राह से मुकाबले के लिए अपना सबसे बड़ा सरदार आगे किया जिसका नाम था अब्दुल मुतलिब जिसने काबा के खिलाफ को पकड़ कर अल्लाह से
05:28
Speaker A
दुआ की कि या अल्लाह अपने इस घर काबा को अब्राह से बचा।
05:44
Speaker A
[संगीत] जिसके बाद अल्लाह ने एक मिरेकल से अब्राह और उसकी सारी फौज को तबाह कर दिया।
05:56
Speaker A
[संगीत] और मक्का ये जंग जीत गया। ये जंग जीतने के बाद मक्का और स्पेशली
06:12
Speaker A
अब्दुल मुतलिब का नाम पूरे अरब में फैल गया। और पूरा अरब अब्दुल मुतलिब को एक बड़ा सरदार मानने लगा। लेकिन इसके कुछ ही अरसे बाद अब्दुल मुतलिब इस
06:27
Speaker A
[संगीत] दुनिया से चले गए। जिसके बाद उनका बेटा उनके कबीले बनू हाशिम
06:42
Speaker A
का नया सरदार बना। हजरत अबू तालिब। एक दिन अबू तालिब अपने किसी काम से मक्का से बाहर किसी और जगह गए हुए थे और जैसे ही अपने सारे काम खत्म करके वो वापस मक्का में अपने घर पहुंचे। उन्हें बताया गया कि
06:57
Speaker A
मुबारक हो आपका बेटा पैदा हुआ। जिसका नाम आपकी बीवी फातिमा ने हैदर रखा है जिसका मतलब है शेर। लेकिन अबू तालिब ने कहा नहीं और उन्होंने अपने बेटे का नाम हैदर से बदल दिया और उसका नाम रखा आली।
07:12
Speaker A
इस वक्त
07:30
Speaker A
[संगीत] अबू तालिब मक्का के सबसे बड़े सरदारों में से एक थे। और हजरत अली मक्का के बड़े सरदार के सबसे छोटे बेटे थे। जब हजरत अली की उम्र 5 साल हुई, अचानक उसी साल अरब में एक बहुत बड़ा कहता था
07:44
Speaker A
आया। जिसकी वजह से अरब के साथ-साथ मक्का की इकॉनमी भी तेजी से गिरने लगी और मक्का के बड़े-बड़े सरदारों का बिजनेस बिल्कुल खराब हो गया।
07:58
Speaker A
[संगीत] इन्हीं सरदारों में एक हजरत अली के वालिद अबू तालिब भी थे। बल्कि अबू तालिब के घर
08:12
Speaker A
के हालात इतने खराब हुए कि उनके लिए अब अपने घर वालों का ख्याल रखना भी मुश्किल हो गया था। अब जब इन सख्त हालात में अबू तालिब को मदद की जरूरत थी,
08:28
Speaker A
उस वक्त उनकी मदद के लिए उन्हीं का भतीजा आगे बढ़ा। हजरत मोहम्मद
08:43
Speaker A
सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम। आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपने चाचा अबू तालिब को इस मुश्किल टाइम में अकेला नहीं छोड़ सकते थे।
08:58
Speaker A
[संगीत] क्योंकि इससे बहुत साल पहले जब आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के मां-बाप दोनों इस दुनिया से चले गए थे। उसके बाद 8
09:11
Speaker A
या 9 साल की उम्र तक अपने दादा अब्दुल मुतलिब के साथ रहे।
09:27
Speaker A
[संगीत] और फिर वो भी जब दुनिया से चले गए, उसके बाद आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम 9 साल की उम्र से लेकर 25 साल की उम्र तक अपने इसी
09:43
Speaker A
चाचा अबू तालिब के घर में रहे। मतलब हजरत अबू तालिब ने 17 साल तक आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को अपने घर में अपने बेटों की तरह पाला। तो अब जब आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक स्टेबल बिजनेसमैन थे और
09:58
Speaker A
उनके चाचा अबू तालिब को मदद की जरूरत थी तो यह देखकर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आगे बढ़े और अपने चाचा अब्बास
10:17
Speaker A
[संगीत] को लेकर अबू तालिब के घर पहुंचे। इस वक्त अबू तालिब के तीन छोटे बेटे थे। अकील, जाफर और
10:35
Speaker A
अली। अकील को अबू तालिब ने अपने पास रखा। हजरत अब्बास जाफर रज़िअल्लाहु अन्हु को अपने साथ लेकर गए। और रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अली जिनकी उम्र
10:56
Speaker A
[संगीत] उस वक्त सिर्फ 5 साल थी, अपने साथ अपने घर लेकर गए।
11:14
Speaker A
5 साल के छोटे से अली को देखकर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बीवी हजरत खदीजा रज़िअल्लाहु अन्हा बहुत खुश हुई होंगी क्योंकि इससे कुछ ही साल पहले हजरत खदीजा रज़िअल्लाहु अन्हा का बेटा कासिम बिन मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम फौत हो
11:30
Speaker A
चुके
11:48
Speaker A
[संगीत] थे और अगर इस दिन वो जिंदा होते तो उनकी उम्र आज इतनी ही होती जितनी इस वक्त अली रज़िअल्लाहु अन्हु की उम्र थी। तो अब अली के रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के घर आने से कासिम के जाने का ग़म
12:04
Speaker A
थोड़ा कम होने लगा। जिसके बाद आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम और खदीजा रज़िअल्लाहु अन्हा हजरत अली की तरबियत बिल्कुल अपने बेटों की तरह करने लगे। और यहां से इस्लाम के सबसे बड़े आलिम और इस्लाम के सबसे बड़े वॉरियर की तरबियत शुरू हुई।
12:17
Speaker A
हजरत अली रज़िअल्लाहु अन्हु दुनिया के वो अकेले आदमी हैं जिनकी तरबियत बचपन से रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने खुद की थी और हजरत अली की जिंदगी को देखकर यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि दुनिया की
12:36
Speaker A
सबसे बेस्ट पर्सनालिटी रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अगर किसी की तरबियत करें तो वो आदमी कैसा होगा। आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हजरत अली की तरबियत का बचपन से खास ख्याल रखते थे। हजरत अली रज़िअल्लाहु अन्हु को उन्होंने बचपन
12:50
Speaker A
से ही लिखना और पढ़ना सिखा दिया था। लेकिन पढ़ने लिखने के साथ-साथ कुछ और स्किल्स भी सीख रहे थे।
13:08
Speaker A
[संगीत] इसी तरह आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के घर में 5 साल गुजारने के बाद जब हजरत अली की उम्र 10
13:22
Speaker A
साल हुई, कभी-कभी रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपने घर से बहुत दूर मक्का के एक पहाड़ में एक गुफा की तरफ जाने लगे। और आखिर उसी गुफा में एक दिन रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर अल्लाह की वही नाजिल हुई।
13:36
Speaker A
[संगीत] जिसके बाद आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सीधा अपने घर आए और दुनिया में सबसे पहले उनकी बीवी खदीजा रज़िअल्लाहु अन्हा ने इस्लाम कबूल किया। जिनके बाद उन्हीं के घर में रहने वाले 10 साल की उम्र में अली रज़
13:54
Speaker A
अल्लाह अन्हु ने इस्लाम कबूल कर लिया। और फिर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बेस्ट फ्रेंड अबू बकर रज़िअल्लाहु अन्हु ने इस्लाम कबूल किया। जिसके बाद एक दिन आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हजरत अली के साथ नमाज पढ़ रहे थे। अचानक
14:09
Speaker A
[संगीत] हजरत अली के बाप अबू तालिब वहां से गुजरे और उन्होंने अली से पूछा कि ये तुम क्या कर रहे हो? जिस पर हजरत अली ने उन्हें बताया कि मैं मुसलमान हो चुका हूं। यह सुनकर अबू तालिब ने हजरत अली से कहा कि
14:25
Speaker A
मुझे पता है मोहम्मद तुम्हें कभी भी किसी भी गलत चीज की तरफ नहीं बुलाएगा। तो तुम जाओ और उसी को फॉलो करो। जिसके बाद हजरत अली इस्लाम के वो पहले आदमी थे जिन्होंने आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ काबा के
14:40
Speaker A
पास पहली नमाज पढ़ी। एक दिन आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम काबा के पास हजरत खदीजा और अली रज़िअल्लाहु अन्हु के साथ नमाज पढ़ रहे थे। इन्हें देखकर वहां खड़े एक आदमी ने आप सल्ला अलैहि वसल्लम के चाचा से पूछा कि
14:58
Speaker A
आखिर ये तीन लोग कर क्या रहे हैं? जिस पर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के चाचा ने इस आदमी को बताया कि यह मेरा भतीजा मोहम्मद है। जो कहता है मैं इस पूरी दुनिया में अल्लाह का आखिरी रसूल हूं।
15:15
Speaker A
इस वक्त इस पूरी दुनिया में इस औरत और इस बच्चे के अलावा कोई भी इसकी बात मानने को तैयार नहीं है। लेकिन यह मेरा भतीजा कहता है कि बहुत जल्द दुनिया के बड़े-बड़े सुपर पावर रोमन और परर्शियन एंपायर
15:32
Speaker A
ये सारे खजाने हमारे रिलिजन के कंट्रोल में होंगे। उस वक्त तो इस आदमी ने इस्लाम कबूल नहीं किया। लेकिन आगे जाकर जब वाकई में मुसलमानों ने रोमन और परर्शियन एंपायर फतह कर ली
15:48
Speaker A
[संगीत] तब इस आदमी ने कहा कि काश मैं उस दिन
16:04
Speaker A
इस्लाम कबूल कर लेता तो मैं दुनिया का चौथा मुसलमान होता। इसी तरह आने वाले काफी अरसे तक इस्लाम मक्का में सीक्रेट रहा और सिर्फ कुछ ही लोग मुसलमान हुए लेकिन आखिर कुछ ही अरसे बाद आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की तरफ अल्लाह की एक वही आई जिसमें
16:23
Speaker A
अल्लाह ने आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को हुकुम दिया कि अपने पूरे खानदान को इस्लाम की दावत दो। जिसके बाद आप सल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपने घर में अपने खानदान के 40 मेंबर्स को खाने की दावत पर बुलाया। इस्लाम की इस पहली दावत में आप सल्लल्लाहु
16:36
Speaker A
अलैहि वसल्लम की मदद के लिए सिर्फ हजरत अली खड़े थे। इसीलिए खाने पीने की सारी जिम्मेदारी आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अली रज़िअल्लाहु अन्हु को दी। जिन्होंने कहा जाता है बहुत अच्छी तरह खाने का इंतजाम
16:51
Speaker A
[संगीत] क
17:06
Speaker A
वसल्लम के बिस्तर पर हजरत अली रज़ अल्लाह अनहु लेटे हुए थे। ये देखकर उन्हें इतना गुस्सा आया कि वो सब हजरत अली से लड़ने लगे और उन्हें घर से निकाल कर मक्का के जेल में बंद कर दिया और बार-बार हजरत अली
17:20
Speaker A
से पूछने लगे कि हमें बताओ मोहम्मद और अबू बकर कहां हैं? लेकिन जब हजरत अली ने उन्हें कोई भी हिंट नहीं दिया। उन्होंने मायूस होकर हजरत अली को छोड़ दिया। जिसके बाद अगले तीन दिन तक हजरत अली रज़ अल्लाह अनू ने आप सल्लल्लाहु
17:37
Speaker A
अलैहि वसल्लम की सारी अमानतें लोगों को वापस कर दी और खुद सबसे आखिर में अकेले बगैर किसी ऊंट और घोड़े के पैदल मदीना की तरफ रवाना हुए। मक्का से मदीना कोई आम सफर नहीं था बल्कि यह 450 कि.मी. का लंबा
17:53
Speaker A
रास्ता था। 450 कि.मी. वो भी अरब के गर्म डेजर्ट में। और सबसे मुश्किल बात तो यह थी कि ये जुलाई का महीना था। जहां इस महीने में 50 डिग्री से भी ज्यादा गर्मी होती है। लेकिन अरब की यह सख्त गर्मी भी हजरत अली को उनके मिशन
18:17
Speaker A
से नहीं रोक सकी। और हजरत अली पैदल अकेले इस्लाम के नए घर आप सल्लल्लाहु अलह वसल्लम के शहर मदीना की तरफ चलते रहे। यहां तक कि अरब के रेगिस्तान की तेज हवाएं भी उन्हें नहीं रोक सकी और वो आगे बढ़ते
18:36
Speaker A
रहे। हजरत अली के इस मुश्किल सफर को देखकर एक और सफर की भी याद आती है कि जब इससे हजारों साल पहले मूसा अल सलाम अकेले फिरौन के शहर से निकल कर मिस्र के गरम डेजर्ट में पैदल चल रहे थे।
18:54
Speaker A
क्योंकि इन दो जर्नीज में एक बात कॉमन है कि ये दोनों ऑलमोस्ट 450 कि.मी. ही थे। इस दिन हजरत अली अकेले मदीना की तरफ बढ़ रहे थे और इतना [संगीत] पैदल चलने की वजह से उनके पैर बिल्कुल सूझ गए थे। लेकिन
19:10
Speaker A
उन्होंने कभी सोचा भी नहीं होगा कि जिस मदीना की तरफ वो इतने मुश्किल में बढ़ रहे हैं, एक दिन इसी मदीना में पूरे खिलाफत की बैत उन्हीं के हाथ पर होगी। वो खिलाफत जो हिंदुस्तान से लेकर यूरोप के समंदरों तक
19:26
Speaker A
फैली हुई थी। जिसके [संगीत] बाद आज ये अकेले चलने वाले अली उस दिन दुनिया के सबसे ताकतवर इंसान बनेंगे। अब जब हजरत अली सफर में थे। आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम और अबू बकर रज़ अल्लाह अनो इससे पहले ही
19:40
Speaker A
मदीना के करीब पहुंच चुके थे। लेकिन आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मदीना एंटर नहीं हुए। बल्कि वह मदीना से पहले एक गांव कुबा में कई दिन तक हजरत अली का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे और जैसे ही उन्हें पता
19:54
Speaker A
चला कि हजरत अली अकेले पूरे डेजर्ट को क्रॉस करके पहुंच चुके हैं तो वो [संगीत] बहुत खुश हुए और उन्होंने हुक्म दिया कि अली को मेरे पास बुलाया जाए। लेकिन सहाबा ने आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कहा कि
20:06
Speaker A
हजरत अली की हालत [संगीत] ऐसे हो गई है कि अब वो एक कदम भी और नहीं ले सकते और उनके पैर अब चलने के काबिल ही नहीं है। यह सुनकर आप सल्ला अलैहि वसल्लम खुद हजरत अली के पास [संगीत] गए। उन्हें गले से लगाया
20:19
Speaker A
और उनके पैरों के जख्मों को देखकर रोने लगे और उनके पैरों पर अपना हाथ फेरा जिससे हजरत अली को थोड़ा सुकून मिला। जिसके बाद फाइनली आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हजरत अली रज़ अल्लाह अनो और बाकी सहाबा के साथ
20:35
Speaker A
पहली बार मदीना एंटर हुए। [संगीत] और मदीना इस्लाम का पहला हेड क्वार्टर बना। अकबर। अब जब मक्का से सारे मुसलमान मदीना पहुंच गए तो आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इनके खानेपीने और रहने का मसला हल करने के लिए
20:57
Speaker A
मक्का के एक-एक मुसलमान को मदीना के एक-एक मुसलमान का भाई बनाया। आप सल्लल्लाह वसल्लम खड़े होकर दो-दो मुसलमानों का नाम लेने लगे और उन्हें भाई बनाने लगे और सों के नाम लेकर सबसे आखिर में जब हजरत अली रज
21:14
Speaker A
अल्लाह अनू की बाई आई [संगीत] तो आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उनका नाम नहीं लिया ये देखकर हजरत अली परेशान हो गए कि अब मैं मदीना में कैसे रहूंगा और वो सीधा आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास गए और उन्हें कहा कि आपने सबको किसी
21:29
Speaker A
का भाई बना दिया सिर्फ मुझे अकेला छोड़ जिस पर आप सल्ला अलह वसल्लम ने हजरत अली से कहा कि ए अली तुम दुनिया और आखिरत में मेरे भाई हो। यहां पर एक और रिवायत भी है कि आप सल्लल्लाहु अलह वसल्लम ने मदीना में
21:45
Speaker A
हजरत अली [संगीत] का भाई साहल बिन हुनैफ रज़ अल्लाह अनहु को बनाया था। इसी तरह हजरत अली रज़ अल्लाह अनहु इसके बाद मदीना में एक आम इंसान की तरह अपनी जिंदगी गुजारते रहे। और इसके कुछ ही अरसे बाद मदीना के
21:58
Speaker A
मुसलमानों पर एक बहुत ही खतरनाक वक्त आया। [संगीत] इस्लाम की पहली जंग जंग बदर जिसमें मुसलमानों की 313 की फौज के सामने 1000 काफिर खड़े थे। [संगीत] मतलब मुसलमान अपने से तीन गुना बड़ी फौज से लड़ने आए थे। जैसे ये दोनों फौजें एक दूसरे के
22:26
Speaker A
आमने-सामने हुई। सबसे पहले मक्का के तीन सरदार आगे बढ़े। जिनमें से एक जोरजोर से कहने लगा, ऐ मदीना वालों मदीना वालों जिसमें इतनी गैरत है कि वो हमसे आकर लड़े। ये सुनकर मुसलमानों की फौज से तीन अंसार आगे बढ़े। [संगीत]
22:49
Speaker A
लेकिन ये देखकर मक्का का सरदार कहने लगा कि तुम कौन हो? वापस जाओ और हमारे पास हमारे इक्वल मक्का के भाइयों को भेजो। ये सुनकर रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपने तीन मुसलमानों को वापस बुलाया और इन सरदारों से लड़ने के लिए
23:05
Speaker A
मुसलमानों के तीन सरदार भेजे। और आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हुकुम दिया उबैदा उठो। उबैदा मक्का के पुराने सरदार अब्दुल मुतलिब के पोते थे। जिसके बाद आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फिर हुक्म दिया हमजा उठो हमजा भी मक्का के पुराने सरदार अब्दुल
23:26
Speaker A
मुतलिब के बेटे थे और आखिर आप सल्लल्लाहु अलह वसल्लम ने सबके सामने हुक्म दिया कि अली उठो अली मक्का के एक शहजादे थे [संगीत] क्योंकि उनके वालिद अबू तालिब और उनके दादा अब्दुल मुतलब दोनों मक्का के बड़े सरदार रहे थे। तो आप सल्ला अलह वसल्लम के
23:46
Speaker A
हुक्म से मुसलमानों के ये तीन वॉरियर्स आगे बढ़े। अचानक लड़ाई शुरू हुई। सबसे पहले हजरत अली ने एक ही वार में अपने दुश्मन को मार डाला। जिसके बाद हजरत हमजा ने भी अपने अपोनेंट को मार डाला। और फिर हजरत अली और हमजा ने मिलकर तीसरे
24:09
Speaker A
सरदार को भी मार दिया। [संगीत] ये देखकर मुसलमानों की फौज जोर-जोर से नारे लगाने लगी। मक्का के ये तीन सरदार कोई आम लोग नहीं थे बल्कि ये मक्का के सबसे ताकतवर [संगीत] औरत हिदा के बाप, चाचा और भाई थे। जैसे ही
24:32
Speaker A
मक्का वालों ने अपने तीन बड़े सरदारों को इस तरह आसानी से गिरते हुए देखा। मक्का की सारी फौज ने मुसलमानों पर हमला कर दिया। और इस तरह इस्लाम की पहली जंग जंग बदर शुरू हुई। हजरत अली भी वापस जाकर
24:50
Speaker A
मुसलमानों की फौज के फ्रंट पर खड़े हुए और दुश्मनों का इंतजार करने लगे। [संगीत] इस वक्त हजरत अली की एज सिर्फ 23 साल थी और यह हजरत अली की जिंदगी की सबसे पहली जंग थी और फाइनली अब उन्हें यह मौका मिल
25:07
Speaker A
चुका था। जिसका उन्हें बेसब्री से इंतजार था क्योंकि हजरत अली ने इन सारे मक्का के सरदारों को बचपन में आप सल्ला अलह वसल्लम पर जुल्म करते हुए बार-बार देखा था। और अब फाइनली हजरत अली एक-एक से बदला लेने के
25:24
Speaker A
लिए बिल्कुल तैयार थे। और जैसे ही जंग शुरू हुई हजरत अली सीधा काफिरों की फौज के अंदर घुस गए। और जो तलवार चलाने का तरीका वो बचपन से सीख रहे थे। अब पहली बार हजरत अली अपनी तलवार सबके सामने यूज करने लगे।
25:44
Speaker A
हजरत अली को जंग में इस तरह लड़ते हुए देखकर मुसलमानों और मक्का वालों दोनों को समझ आ गई कि अली के जैसा वॉरियर पूरे अरब में कोई नहीं है। और यह बात बिल्कुल सही थी क्योंकि इस जंग जंग बदर से लेकर अपनी
26:01
Speaker A
जिंदगी की आखिरी जंग जंगहरवान तक। हजरत अली अपनी पूरी जिंदगी में कोई भी जंग नहीं हारा। बदर में मुसलमानों की फौज कम होने के बाद भी मुसलमान ऐसा लड़े कि आहिस्ता-आहिस्ता मक्का वालों की फौज पीछे हटने लगी। और इस तरह मुसलमान इस्लाम की
26:20
Speaker A
पहली जंग जंग बदर जीत गए। लेकिन अब जब मक्का वाले भाग ही रहे थे। मुसलमानों ने उनका पीछा करते हुए उनका एक और सरदार पकड़ लिया। और यह कोई आम सरदार नहीं था बल्कि यह वही उमैया खानदान का
26:35
Speaker A
उकबा था। यह वही उबा था जिसने इससे कुछ साल पहले मक्का में आप सल्ला अलह वसल्लम के गले को अपनी चादर से जोर से दबाया था और इसकी शक्ल हजरत अली बचपन से जानते थे। इसीलिए जैसे ही ये पकड़ा गया हजरत अली
26:52
Speaker A
सीधा आगे बढ़े और [संगीत] अपनी तलवार से इसकी गर्दन उड़ा दी। इस जंग में मुसलमानों ने 70 काफिरों को मारा था। और कहा जाता है हजरत अली ने अकेले इन 70 में से 25 या 30 लोगों को मारा था। इसमें थोड़ी कंफ्यूजन
27:09
Speaker A
है कि हजरत अली ने एक्सजेक्टली कितने लोगों को मारा था। लेकिन यह बात क्लियर है कि बदर में सबसे ज्यादा लोग हजरत अली ने ही मारे थे। जैसे ही मुसलमान बदर की जंग के बाद वापस मदीना पहुंचे। मदीना में हर
27:22
Speaker A
तरफ खुशी और सेलिब्रेशन का माहौल था और लोग इस जीत पर अल्लाह का शुक्र अदा कर रहे थे। लेकिन जैसे ही आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम खुशी से अपने घर पहुंचे और अपनी बेटियों के बारे में पूछा। यहां आप सल्लल्लाहु
27:39
Speaker A
अलैहि वसल्लम को एक बहुत ही शॉकिंग खबर सुनाई गई। [संगीत] उन्हें बताया गया कि जब आप बदर के मैदान में लड़ रहे थे। उसी वक्त यहां मदीना में आपकी बेटी रुकैया अपनी आखिरी सांसे ले रही थी और अब वो इस दुनिया
27:54
Speaker A
में नहीं रही। आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की चार बेटियां थी। बड़ी बेटी ज़ैनब जो इस वक्त मक्का में रहती थी। दूसरी बेटी रुकैया जो हजरत उस्मान की बीवी थी जो अब फौत हो चुकी थी। तीसरी बेटी उम्मे कलसूम रज़ अल्लाह अन्हा
28:11
Speaker A
जिनकी शादी भी आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने रुकैया के बाद हजरत उस्मान रज़ अल्लाह अन से करा दी थी। और आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की चौथी और सबसे छोटी बेटी जिनसे वो सबसे ज्यादा प्यार करते थे। हजरत फातिमा रज अल्लाह अन्हा बदर की जंग जीतने
28:28
Speaker A
के बाद आहिस्ताआहिस्ता जब मुसलमानों के हालात ठीक होने लगे तो अब मदीना में आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास हजरत फातिमा रज़ अल्लाह अन्हा की शादी के लिए रिश्ते आने लगे जिनमें हजरत अबू बकर और उमर रज़ अल्लाह अनू भी शामिल [संगीत] थे।
28:42
Speaker A
लेकिन आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम इन सारे रिश्तों को रिजेक्ट करते गए। अब जब हजरत फातिमा के लिए यह सारे रिश्ते आ रहे थे। उस वक्त हजरत अली आराम से अपने घर में बैठे हुए थे। और उन्होंने आप सल्ला अलह
28:55
Speaker A
वसल्लम से रिश्ते की कोई बात नहीं की थी। यह देखकर हजरत अली को उन्हीं के खानदान की एक औरत ने कहा कि आप भी जाकर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से उनकी बेटी फातिमा का रिश्ता मांगे। लेकिन हजरत अली
29:08
Speaker A
ने कहा कि मैं मेरे पास क्या है? मैं कैसे रिश्ता भेजूं? लेकिन उस औरत ने हजरत अली से कहा कि मुझे यकीन है कि अगर आप रसूल्लाह सल्ला अलह वसल्लम के पास जाएंगे वो आपको कभी इंकार नहीं करेंगे।
29:23
Speaker A
यह सुनकर हजरत अली को भी थोड़ा हौसला मिला और आखिर वो आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से उनकी आखिरी बेटी फातिमा का हाथ मांगने आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के घर गए लेकिन जैसे ही वो आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के
29:37
Speaker A
सामने आकर बैठे आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के रोब और ओरा को देखकर हजरत अली की जुबान से एक लफ्ज भी नहीं निकला। अब हजरत अली को इस तरह घबराते देखकर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने खुद हजरत अली से पूछा कि अली क्या बात [संगीत] है क्या
29:54
Speaker A
कहना चाहते हो लेकिन हजरत अली बिल्कुल उसी तरह खामोश बैठे रहे और कुछ ना कह सके ये देखकर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने दोबारा पूछा कि अली बताओ क्या बात है लेकिन इस बार भी हजरत अली की जुबान से एक
30:07
Speaker A
लफ्ज भी नहीं निकला ये देखकर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने खुद हजरत अली से कहा अली क्या तुम फातिमा [संगीत] के रिश्ते के लिए आए हो यह सुनकर हजरत अली ने ऊपर देखा और एक घबराई हुई आवाज में कहा कि
30:20
Speaker A
हां लेकिन या रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मेरे पास कुछ भी नहीं है। तो आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा क्या तुम्हारे पास जंग की वो शील्ड नहीं है?
30:31
Speaker A
जाओ और उसे बाजार में बेच कर आओ। वही मेरी बेटी फातिमा का मेहर होगा। जिसके बाद हजरत अली यह शील्ड लेकर [संगीत] सीधा बाजार की तरफ गए और आप सल्लाहु अलैहि वसल्लम अपनी बेटी फातिमा के पास गए। उन्हें हजरत अली के रिश्ते का बताया और
30:46
Speaker A
उनसे पूछा कि क्या वह इस रिश्ते पर राजी हैं या नहीं। जैसे ही आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फातिमा रज अल्लाह अन्हा से पूछा कहा जाता है हजरत फातिमा खामोश रही और आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम उनकी खामोशी को
30:59
Speaker A
देखकर समझ गए। अब दूसरी तरफ जब हजरत अली अपनी शील लेकर बाजार पहुंचे और वहां ये शील बेचने की कोशिश करने लगे। अचानक इसी बाजार में हजरत अली के पास मदीना का सबसे अमीर आदमी आया। आप सल्लल्लाहु अलैहि
31:14
Speaker A
वसल्लम के दामाद हजरत उस्मान रज अल्लाह अन [संगीत] हजरत उस्मान हजरत अली को देखते ही समझ गए कि वह यह शील्ड क्यों बेच रहे हैं तो उन्होंने खुद हजरत अली से यह शील्ड खरीद ली और इसके बदले हजरत अली को 400 सिल्वर
31:28
Speaker A
कॉइंस दिए जिसके बाद हजरत अली खुश होकर जब वापस जाने लगे तो हजरत उस्मान ने उन्हें रोक दी और उन्हें यह शील्ड एज अ गिफ्ट वापस कर दी और कहा तुम्हें इस शील्ड की आगे भी जरूरत पड़ेगी। हजरत अली इस तरह कुछ और पैसे भी जमा करके
31:46
Speaker A
ऑलमोस्ट 500 सिल्वर कॉइंस लेकर आप सल्लल्लाहु अलह वसल्लम के पास आए और यही उनकी शादी का महर था। इस वक्त हजरत अली के वालिद फौत हो चुके थे और उनका कोई भी भाई मदीना में नहीं था। इसीलिए इस शादी में
32:01
Speaker A
हजरत अली की मदद के लिए मदीना के सहाबा आगे बढ़े। और हजरत अली और फातिमा की शादी की तैयारी करने लगे। एक सहाबी ने हजरत अली को मदीना में एक छोटा सा घर दिया। हजरत बिलाल रज अल्लाह अनहु बाजार जाकर परफ्यूम्स और खुशबू
32:18
Speaker A
खरीदने लगे। हजरत अबू बकर और अमार बिन यासिर र बाजार में फर्नीचर खरीदने लगे। जिसके बाद सारे सहाबा मस्जिद नबवी में जमा हुए और आप सल्ला अल वसल्लम ने खुद हजरत अली का निकाह पढ़ाया [संगीत] और सारे सहाबा में खजूर तकसीम किए गए। उधर कुछ
32:40
Speaker A
सहाबियात ने हजरत [संगीत] फातिमा को दुल्हन की तरह तैयार किया। आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपनी बेटी फातिमा [संगीत] को कुछ गिफ्ट्स भी दिए। जिसमें कुछ कपड़े खजूर के पत्तों से बने हुए तकिए। दो आटे की चक्कियां और दो मिट्टी के बर्तन लिए।
33:00
Speaker A
इस तरह इस्लाम के फ्यूचर खलीफा हजरत अली रज अल्लाह अन और आप सल्ला अलह वसल्लम की सबसे छोटी बेटी फातिमा रज अल्लाह अन्हा की शादी हुई। [संगीत] ये इस्लाम की तारीख की सबसे इंपॉर्टेंट और सबसे सिंपल शादी थी।
33:18
Speaker A
जैसे ही यह शादी हो गई उसके कुछ ही दिन बाद एक दिन आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपनी बेटी फातिमा के घर गए और आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपनी बेटी से कहा फातिमा मैंने तुम्हारी शादी अपने खानदान के ऐसे शख्स से कराई है जिससे मैं
33:33
Speaker A
अपने पूरे अहलेबत में सबसे ज्यादा मोहब्बत करता हूं। अब मदीना में हजरत अली की शादी तो हो गई और मदीना के हालात भी बिल्कुल नॉर्मल थे। लेकिन मदीना से दूर मक्का के हर घर में बदर की हार का मातम छाया हुआ था और मक्का
33:51
Speaker A
के लोग अपने बड़े-बड़े सरदारों के मौत पर चीख-चीख कर रो रहे थे। और मक्का के लोग अब अपने सबसे बड़े सरदार के घर जमा हो रहे थे। अबू सुफियान और उनकी बीवी हिदा। जंग बदर में अबू सुफियान का अपना बेटा हमला
34:08
Speaker A
मारा गया था। और उनकी बीवी हिंदा के बाप, चाचा और भाई भी मारे गए थे। तो अब मक्का के सारे लोग मुसलमानों से बदला लेने के लिए बदर से तीन गुना बड़ी फौज जमा करने लगे। और बदर के
34:22
Speaker A
सिर्फ एक साल बाद 3000 की फौज लेकर मदीना की तरफ रवाना हुए। यह देखकर आप सल्ला अलह वसल्लम भी मुसलमानों की 1000 की फौज लेकर ओहद के मैदान की तरफ रवाना हुए। जैसे ये दोनों फौजें आमने-सामने हुई, अचानक
34:38
Speaker A
मुसलमानों की फौज से 300 मुनाफिक मुसलमानों को धोखा देकर जंग छोड़कर भाग गए। मतलब अब मुसलमान सिर्फ 700 रह गए और उनके सामने 3000 की फौज खड़ी थी। मतलब अब मुसलमानों ने अपने से चार गुना बड़ी फौज से लड़ना था।
34:59
Speaker A
बल्कि इस बार मक्का वालों की फौज में एक नया जनरल भी था खालिद बिन वलीद। मतलब यह जंग जंग औध बदर की जंग से भी ज्यादा खतरनाक थी। अब जब इस इंपॉसिबल जंग में दोनों फौजे आमने-सामने हुई मक्का
35:16
Speaker A
वालों की फौज से एक बार फिर उनका चैंपियन तल्हा आगे बढ़ा। और जोर-जोर से मुसलमानों को लड़ाई का चैलेंज देने लगा। तल्हा के इस गुरूर को देखकर ऑफ कोर्स मुसलमानों का चैंपियन भी आगे बढ़ा। जो अब आप सल्लल्लाहु अलह वसल्लम का दामाद भी था।
35:36
Speaker A
25 साल की उम्र का आली। सब ने अपनी तलवारें निकाली और हजरत अली ने भी ऐसा ही किया। लेकिन उनकी तलवार बाकियों से डिफरेंट थी। उनकी तलवार के एक नहीं बल्कि दो ब्लेड्स थे। ये तलवार जंग से पहले आप
35:54
Speaker A
सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने खुद हजरत अली को गिफ्ट में दी थी। और यह बाकी सारी तलवारों से ज्यादा लंबी और भारी थी। और इसका नाम था जुल्फिकार। जैसे ये लड़ाई शुरू हुई बस थोड़ी सी ही देर में हजरत अली ने अपनी तलवार से एक ही
36:13
Speaker A
वार में तल्हा की टांग काट दी और वो जमीन पर गिर पड़ा और रेंगते हुए दूर भागने की कोशिश करने लगा। और हजरत अली अपनी तलवार के साथ आहिस्ता-आहिस्ता उसकी तरफ बढ़ने लगे। अब यहां पर मक्का का यह चैंपियन जो
36:30
Speaker A
इससे पहले बड़ी-बड़ी बातें कर रहा था। अब यहां सबके सामने हजरत अली से अपनी जिंदगी की भीख मांगने लगा। लेकिन हजरत अली ने अपनी तलवार उठाई [संगीत] जिसे देखकर मुसलमानों की फौज नारे लगाने लगी। और हजरत अली ने अपनी तलवार चला दी।
36:51
Speaker A
और वापस मुसलमानों की तरफ जाने लगे। लेकिन जब मुसलमानों ने गौर से देखा उन्हें पता चला कि जब यह बंदा हजरत अली से भीख मांगने लगा था। हजरत अली ने इसे मारा नहीं बल्कि जंग के मैदान में माफ कर दिया था और इसी
37:06
Speaker A
के साथ इस्लाम की दूसरी जंग जंग ओहद शुरू। मुसलमानों की फौज में इतना जज्बा था कि वो कुछ ही देर में अपने से चार गुना बड़ी फौज को आसानी से पीछे धकेलने लगे। और आखिर बिल्कुल बदर की तरह मक्का की फौज
37:25
Speaker A
एक बार फिर जंग छोड़कर पीछे [संगीत] भागने लगी। यह देखकर इस पहाड़ के आर्चरर्स भी नीचे उतर गए। और मक्का वालों का छोड़ा हुआ माल जमा करने लगे। लेकिन इसी एग्जैक्ट वक्त का मक्का के जनरल खालिद बिन वलीद
37:41
Speaker A
इंतजार कर रहे थे। जैसे ही ये आर्चरर्स नीचे उतरे, खालिद बिन वलीद फुल स्पीड अपने घोड़ों [संगीत] के साथ पहाड़ के पीछे से छुपकर मुसलमानों पर हमले के लिए रवाना हुए। और पहाड़ के पीछे से मुसलमानों पर हमला कर दिया। ये देखकर मक्का की फौज भी
38:00
Speaker A
पलट गई। मतलब अब मुसलमान इन दोनों फौजों के दरमियान फंस गए थे। बल्कि हालात इतने खराब हुए कि कुछ लोगों ने रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कैंप पर भी हमला कर दिया। और सबसे खतरनाक बात ओहद में यह थी कि अचानक जंग के मैदान में ही एक
38:17
Speaker A
बहुत ही अजीब अफवाह फैली। लोग हर तरफ चीखने लगे कि रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को शहीद कर दिया गया। अब तक मुसलमान फुल जज्बे से लड़ रहे थे। लेकिन जब उन्होंने यह खबर सुनी, कुछ मुसलमान जंग छोड़कर पीछे हटने लगे। कुछ आप सल्ला अलह
38:34
Speaker A
वसल्लम के वफात होने की खबर सुनकर जमीन पर बैठ गए और रोने लगे और कुछ अपनी जगह पर ही खड़े रहे। लेकिन यह देखकर हजरत अली रज़ अल्लाह अनो ने मुसलमानों की फौज का झंडा उठाया और जोरजोर से कहने लगे कि अब जब रसूल्लाह सल्ला अलह
38:50
Speaker A
वसल्लम ही दुनिया में नहीं रहे तो फिर हमारा इस दुनिया में रहने का क्या फायदा है? इसी के साथ हजरत अली ने अपनी तलवार की नयाम तोड़ कर फेंक दी। और अपनी तलवार जुल्फिकार के साथ काफिरों की फौज के
39:04
Speaker A
[संगीत] अंदर घुस गई। लेकिन कुछ ही देर बाद पता चला कि यह सब बिल्कुल एक अफवाह थी और आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अब भी पहाड़ पर मजबूती से खड़े थे। यह देखकर हजरत अली बाकी सहाबा के साथ फुल स्पीड आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम
39:18
Speaker A
के पास पहुंचे और उन्हें बहादुरी से डिफेंड करने लगे। इस तरह मुसलमान दोबारा इस पहाड़ पर मजबूती से खड़े हुए और पहाड़ के ऊपर से मक्का वालों पर पत्थर बरसाने लगे। मुसलमानों को पहाड़ के ऊपर ऐसे स्टेबल देखकर मक्का वालों को समझ आ गई कि
39:35
Speaker A
अब वो और कुछ भी नहीं कर सकते। इसीलिए वो अपनी सारी फौज के साथ ओद छोड़कर वापस मक्का की तरफ चले गए। इस तरह इस्लाम की दूसरी जंग जंग ओद ना काफिर जीते और ना मुसलमान। [संगीत] ओद रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की
39:51
Speaker A
जिंदगी सबसे मुश्किल जंग क्योंकि इसमें सबसे ज्यादा 70 मुसलमान शहीद हुए थे। जिनमें रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के चाचा हजरत हमजा रज अल्लाह अनहु भी शामिल थे और इस जंग में हजरत अली रज अल्लाह अनहु को तलवारों के 16 जख्म लगे
40:08
Speaker A
थे। आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने सारे शहीदों को ओद में दफन करने का हुक्म दिया जिसके बाद सारे मुसलमान वापस मदीना आए। [संगीत] मदीना वापस आने के बाद आहिस्ताआहिस्ता जब मदीना के हालात ठीक होने लगे। सही मुस्लिम की हदीस है कि एक
40:25
Speaker A
दिन आप सल्लल्लाह अलह वसल्लम अपनी बेटी फातिमा रज अल्लाह अन्हा के घर गए और वहां उन्होंने देखा कि अली तो घर में है ही नहीं तो आप सल्ला अलह वसल्लम ने अपनी बेटी से पूछा कि अली कहां है? जिस पर हजरत
40:37
Speaker A
फातिमा ने आप सल्ला वसल्लम से कहा कि मेरी और उनकी किसी बात पर बहस हुई थी और वो घर से कहीं बाहर चले गए हैं। जिसके बाद आप सल्ला अलह वसल्लम भी हजरत अली को ढूंढने के लिए घर से बाहर निकले और जब वो मस्जिद
40:50
Speaker A
नबवी पहुंचे। उन्होंने देखा कि हजरत अली जमीन पर लेटे हुए हैं और उनके जिस्म पर मस्जिद नबवी की जमीन की मिट्टी लगी हुई थी। आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हजरत अली के पास आए और खुद अपने हाथों से उनके
41:03
Speaker A
जिस्म से मिट्टी हटाने लगे और फरमाया उठो ए अबू तुराब उठो। तुराब अरबी में मिट्टी को कहते [संगीत] हैं। और यहीं से हजरत अली का नाम अबू तुराब पड़ा। और कहा जाता है हजरत अली अपनी जिंदगी के आखिर तक अबू
41:18
Speaker A
तुराब नाम को बहुत पसंद करते थे और जब भी कोई उन्हें [संगीत] अबू तुराब कहकर पुकारता था उन्हें इस दिन की याद आती थी और वो बहुत खुश होते थे। [संगीत] लेकिन अफसोस की बात यह है आने वाले जमाने
41:30
Speaker A
में कुछ लोग ऐसे भी थे जो हजरत अली के इस नाम अबू तुराब से उनका मजाक उड़ाया करते थे। इस वाक्य के बाद एक दिन आप सल्ला अलह वसल्लम सहाबा के साथ मस्जिद में बैठे हुए थे। तो एक शख्स दूर से खुशी-खुशी आप सल्ला
41:44
Speaker A
अलह वसल्लम के पास [संगीत] आया और उनसे कहा या रसूल अल्लाह मुबारक हो आपकी बेटी फातिमा के घर बेटा पैदा हुआ है। यह सुनकर आप सल्ला अलह वसल्लम सीधा हजरत अली के घर पहुंचे। [संगीत] अपने नवासे को गोद में
41:59
Speaker A
उठाया और उन्हें गले से लगाया। जिसके बाद आप सल्ला अलैहि वसल्लम ने हजरत अली से पूछा कि तुमने इस बच्चे का क्या नाम रखा है?
42:07
Speaker A
[संगीत] जिस पर हजरत अली ने कहा कि मैंने इसका नाम हर्ब रखा है जिसका इंग्लिश में मतलब है वॉर। लेकिन आप सल्ला अलैहि वसल्लम ने हजरत अली से कहा कि नहीं बल्कि इस बच्चे का नाम हसन होगा। इस वक्त हजरत हसन अकेले मेल नवासे
42:25
Speaker A
थे। इसीलिए आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपने इस नवासे हसन से बहुत मोहब्बत करते थे। जैसे-जैसे हजरत हसन बड़े होते गए। कहा जाता है वह बिल्कुल अपने नाना आप सल्लल्लाहु अलह वसल्लम की तरह दिखते थे [संगीत] और आप सल्ला अलह वसल्लम उस जमाने
42:41
Speaker A
के सख्त अरब सोसाइटी में भी [संगीत] अपने नवासे हसन रज अल्लाह अनहु को मदीना की गलियों में अपने कंधों पर बिठाकर घुमाया करते थे जिसे देखकर एक दिन एक सहाबी ने आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से यह तक कहा कि
42:55
Speaker A
मेरे मदीना में 10 पोते और नवासे हैं। लेकिन मैंने कभी किसी से ऐसी मोहब्बत नहीं की जिस तरह आप हसन से करते हैं। और एक दिन जब आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हजरत हसन को अपने कंधे पर बिठाया हुआ था। एक
43:08
Speaker A
सहाबी ने यह देखकर हजरत हसन से कहा कि या हसन तुमने क्या जबरदस्त सवारी पाई है। जिस पर आप सल्ला अलह वसल्लम ने जवाब दिया कि सवार भी तो देखो कितना जबरदस्त है। और एक दिन आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हजरत
43:24
Speaker A
हसन को अपनी गोद में उठाया और अल्लाह से दुआ की ऐ अल्लाह उससे मोहब्बत रख जो हसन से मोहब्बत रखता है। और हजरत हसन के बारे में सबसे बड़ी बात आप सल्लल्लाहु अलह वसल्लम ने यह कही कि मेरा यह बेटा हसन
43:40
Speaker A
सैयद मतलब लीडर है और ये एक दिन मुसलमानों के दो बड़े ग्रुप्स के दरमियान सुलह कराएगा और बिल्कुल ऐसा ही हुआ। हजरत हसन रज़ अल्लाह अनो आगे जाकर मुसलमानों के आखिरी खलीफा-ए राशिद बने। और मुसलमानों की जानों को बचाने के लिए उन्होंने अपनी
44:00
Speaker A
खिलाफत अपनी मर्जी से छोड़ दी। इसी तरह हजरत हसन आहिस्ता-आहिस्ता मदीना में बड़े हो रहे थे। लेकिन मदीना से बहुत दूर मक्का वालों का कॉन्फिडेंस ओद की जंग के बाद और भी ज्यादा बढ़ गया था। और वो इस बार
44:16
Speaker A
10,000 की फौज के साथ मदीना पर हमले के लिए रवाना हो चुके थे। 10,000 की फौज मतलब मदीना की पूरी आबादी से भी ज्यादा बड़ी फौज मदीना पर हमले के लिए आ रही थी। जब आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को इसका
44:39
Speaker A
पता चला। उन्होंने सारे सहाबा की एक मीटिंग बुलाई जिसमें फैसला किया गया कि मुसलमान मदीना के अंदर ही रहकर मक्का वालों से जंग करेंगे। और मदीना के फ्रंट पर दो पहाड़ों के दरमियान एक बहुत बड़ी खंदक बनाएंगे। जैसे ही मक्का वालों की 10,000 की फौज
44:59
Speaker A
मदीना के करीब पहुंची वो ये खंदक देखकर हैरान रह गए क्योंकि ये इतनी बड़ी खंदक थी कि इसे क्रॉस करना ऑलमोस्ट इंपॉसिबल था और कोई भी इसे क्रॉस करने की कोशिश करता मुसलमान उन्हें अपनी तीरों से भगा देते।
45:16
Speaker A
15 दिन तक दोनों साइड्स अपनी-अपनी जगह पर उसी तरह खड़ी रही। लेकिन आखिर 15 दिन बाद मक्का के कुछ वॉरियर्स फ्रस्ट्रेट होकर आगे बढ़े। और किसी तरह इस खंदक को क्रॉस करके मुसलमानों की साइड पर पहुंच गए। जैसे
45:33
Speaker A
ही ये ग्रुप मुसलमानों के सामने आया, मक्का का सबसे बड़ा वॉरियर अमर बिन अबदेव आगे बढ़ा और जोर-जोर से मुसलमानों को चैलेंज देने लगा और कहने लगा तुम में से कौन अकेला मुझसे लड़ेगा?
45:49
Speaker A
अमर कोई आम वॉरियर नहीं था। इसकी हाइट आम लोगों से बहुत ज्यादा थी। और ये पूरे मक्का में अपनी ताकत की वजह से मशहूर था। जब उसने इतने गुरूर के साथ मुसलमानों को लड़ने का चैलेंज दिया। ए मुसलमानों
46:05
Speaker A
तो ऑफकोर्स मुसलमानों में से किसने आगे जाना था? हजरत अली मुसलमानों की फौज से आगे बढ़े। अमर ने हजरत अली को देखकर कहा कि भतीजे तुम अभी छोटे हो वापस जाओ मैं तुम्हें नहीं मारना चाहता जवान हो वापस जाओ
46:21
Speaker A
लेकिन हजरत अली ने कहा कि मैं तो तुम्हें मारना चाहता हूं इस पर अमर को गुस्सा आया और अपने घोड़े से उतर कर हजरत अली की तरफ भागने लगा और अपना स्पीयर उठाकर जोर से हजरत अली पर हमला किया। हजरत अली ने अपने
46:38
Speaker A
आप को बचाने के लिए अपनी शील्ड सामने रखी। लेकिन यह स्पेयर इतना तेजी से आ रहा था कि वो हजरत अली के शील्ड को फाड़ कर शील्ड के अंदर घुस गए। थोड़ा सा हजरत अली के चेहरे पर भी लगा।
46:53
Speaker A
हजरत अली जैसे वॉरियर को जख्मी करना बड़ी बात थी। लेकिन ये अमर की जिंदगी की सबसे बड़ी और आखिरी गलती हुई। [संगीत] हजरत अली ने तेजी से अपनी शील्ड हटाई और अपनी तलवार से एक ही वार में उसकी गर्दन
47:08
Speaker A
उड़ा ली। यह देखकर मुसलमान जोर-जोर से नारे लगाने लगे और मक्का वालों की फौज वापस खंदक को क्रॉस करके पीछे भाग गई। मक्का वालों ने इसके बाद दोबारा मुसलमानों पर हमला करने की गलती नहीं की। और आखिर कई
47:25
Speaker A
दिन मदीना के बाहर बैठने के बाद एक बहुत तेज तूफान आया जिससे मक्का के सारे कैंप्स उखड़ गए। और ये सारी 10,000 की फौज मदीना को छोड़कर वापस चली गई। इस तरह मुसलमान अपनी तीसरी जंग जंग खंदक [संगीत] जीत गए।
47:43
Speaker A
खंदक की जंग से पहले या कुछ ही अरसे बाद मदीना में हजरत अली के घर उनके दूसरे बेटे पैदा हुए। [संगीत] जिनका नाम भी रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने खुद रखा हुसैन। और आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने खुद हजरत हुसैन के कान में अजान दी। और
48:01
Speaker A
बिल्कुल हजरत हसन की तरह आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हजरत हुसैन से भी बहुत मोहब्बत करते थे। एक दिन मदीना में आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सहाबा के साथ कहीं जा रहे थे। तो रास्ते में आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की नजर छोटे से
48:14
Speaker A
हुसैन पर पड़ी जो कुछ खेल रहे [संगीत] थे। ये देखकर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आगे बढ़े और हुसैन रज़ अल्लाह अनहु को पकड़ने की कोशिश की। लेकिन हजरत हुसैन इधर-उधर भागने लगे। [संगीत] आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हजरत हुसैन के
48:29
Speaker A
साथ खेलने लगे और उन्हें हंसाते रहे। और आखिर आप सल्ला अलह वसल्लम ने छोटे से हुसैन को पकड़ लिया। [संगीत] उनके माथे को किस किया और हुसैन को देखकर फरमाया हुसैन मुझसे है और मैं [संगीत] हुसैन से हूं। ऐ अल्लाह उससे मोहब्बत कर
48:48
Speaker A
जो हुसैन से मोहब्बत करे। हजरत हुसैन अपने बड़े भाई हसन रज अल्लाह अनो से सिर्फ एक साल छोटे थे। और आप सल्लल्लाहु अलह वसल्लम दोनों से बहुत मोहब्बत करते थे। और इन्हें देखकर फरमाते थे हसन और हुसैन मेरी दुनिया
49:03
Speaker A
के दो फूल हैं। लेकिन अफसोस की बात यह है आगे जाकर आप सल्लल्लाहु अलह वसल्लम के इन दोनों फूलों के साथ जो हुआ [संगीत] उसे आज तक पूरी दुनिया के मुसलमान नहीं भुला सके। हसन रज़ अल्लाह अनहु को जहर देकर शहीद कर
49:20
Speaker A
दिया गया। और इमाम हुसैन रज़ अल्लाह अनो को उनकी पूरी फैमिली के साथ कर्बला के मैदान में बेदर्दी से [संगीत] शहीद कर दिया गया। जिस साल मदीना में हजरत हुसैन रज़ अल्लाह अनहु पैदा हुए। उसी साल हजरत अली पर एक
49:37
Speaker A
बहुत बड़ा गम भी आया। मदीना में हजरत अली की मां अबू तालिब [संगीत] की बीवी फातिमा बिंते असद इस दुनिया से चली गई और मदीना के लोग उन्हें दफनाने की तैयारी करने लगे। [संगीत] यह हजरत अली की जिंदगी का एक बहुत
49:53
Speaker A
ही मुश्किल दिन था। लेकिन हजरत अली से भी ज्यादा इस दिन रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम खफा थे। क्योंकि हजरत अली ने तो अपनी सारी जिंदगी आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के घर में गुजारी थी। लेकिन आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपना सारा
50:05
Speaker A
बचपन अबू तालिब के घर गुजारा था। जहां हमेशा हजरत अली की वालदा ही आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का ख्याल रखती थी। इसीलिए जैसे ही आप सल्ला अलह वसल्लम को पता चला वो सीधा हजरत अली के मां के पास पहुंचे और
50:18
Speaker A
उन्हें देखकर फरमाया ऐ मेरी मां अल्लाह आप पर रहम करे। आप मेरी मां के बाद मेरी मां थी। आप खुद भूखी रहती थी लेकिन हमेशा मुझे खिलाती थी। आपको खुद अच्छे लिबास की जरूरत होती थी। लेकिन आप हमेशा मुझे पहनाती थी।
50:37
Speaker A
[संगीत] जब उन्हें दफनाने का वक्त आया। आप सल्लल्लाह अलह वसल्लम खुद उनकी कब्र के अंदर गए और वहां अल्लाह से दुआ की ऐ अल्लाह मेरी मां को बखश दे जिसके बाद आप सल्ला अलह वसल्लम ने उनके कफ़न के लिए अपनी
50:53
Speaker A
कमीज उतार कर दी जिसके बाद उन्हें दफन कर दिया गया। अब ये सब तो हजरत अली के फैमिली मैटर्स थे। लेकिन वहां मदीना की रियासत में मुसलमान एक नई प्लानिंग कर रहे [संगीत] थे। खंदक की जंग के बाद मुसलमान
51:08
Speaker A
आप सल्लल्लाह अलह वसल्लम के हुक्म से पहली बार उमरा करने के लिए मक्का की तरफ रवाना हुए और मुसलमानों ने पहले ही मक्का वालों को बता दिया था कि हम कोई जंग वंग नहीं करना चाहते। हम सिर्फ उमरा करने के लिए आ
51:22
Speaker A
रहे हैं। लेकिन जैसे ही मुसलमान मक्का के करीब पहुंचे मक्का वालों ने उनका रास्ता रोक दिया। जिसके बाद मुसलमान कई दिन तक मक्का के बाहर ही बैठे रहे। और जब कोई हल नहीं निकला आखिर मुसलमानों ने और मक्का वालों
51:39
Speaker A
ने आपस में एक एग्रीमेंट कर ली सुलह हुबिया रसूल्लाह सल्ला अलह वसल्लम हजरत अली और कुछ सहाबा मक्का वालों से एग्रीमेंट के लिए एक कैंप में जमा हुए इस इतने इंपॉर्टेंट एग्रीमेंट को लिखने की जिम्मेदारी मदीना के सबसे बेस्ट राइटर को
51:56
Speaker A
मिली हजरत अली रज अल्लाह और हजरत अली ने यह एग्रीमेंट लिखना शुरू की और हजरत अली ने लिखा मोहम्मद मोहम्मद अल्लाह के रसूल के नाम से। जैसे ही हजरत अली ने ये लिखा मक्का वालों का एक शख्स गुस्से से खड़ा
52:11
Speaker A
हुआ और कहा ये क्या है? हम तो इन्हें रसूल मानते ही नहीं है। रसूल और उसने हजरत अली से कहा इस एग्रीमेंट से मोहम्मद अल्लाह का रसूल मिटाकर मोहम्मद बिन अब्दुल्लाह लिखो। इस बंदे की बातें सुनकर हजरत अली ने रसूल्लाह सल्लल्लाहु
52:27
Speaker A
अलैहि वसल्लम की तरफ देखा और आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हजरत अली से कहा कि ठीक है जैसा ये कह रहा है वैसा ही लिखो। लेकिन यहां पहली बार एक बहुत ही अजीब मोमेंट आया। वो अली जो बचपन से हमेशा
52:40
Speaker A
आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ खड़े थे और अपने हाथों से हर जंग में आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के लिए तलवार चलाते थे। आज अपने कलम से अल्लाह का रसूल लिखा हुआ नहीं मिटा सके। और आप सल्ला अलह
52:54
Speaker A
वसल्लम के कहने के बाद भी हजरत अली अपना हाथ नहीं हिला पा रहे थे। यह देखकर आप सल्ला अलह वसल्लम ने खुद यह एग्रीमेंट हजरत अली से और पूछा कहां लिखा है? और फिर खुद अपने हाथों से मोहम्मद रसूल्लाह को
53:09
Speaker A
मिटाया और हुकुम दिया कि इसकी जगह मोहम्मद बिन अब्दुल्लाह लिखा जाए। और इस तरह पहली बार मुसलमानों और मक्का वालों के दरमियान सुलह हुबिया की एग्रीमेंट हुई और मुसलमान वापस मदीना आ गए। पहले पहले तो मुसलमान इस एग्रीमेंट से खुश नहीं थे। लेकिन
53:27
Speaker A
आहिस्ता-आहिस्ता उन्हें समझ आने लगी कि आखिर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने यह सुलह [संगीत] क्यों की है? क्योंकि इस सुलह में एक पॉइंट यह था कि मुसलमान और मक्का वाले अगले 10 साल के लिए कोई भी जंग नहीं करेंगे। अब जब जंगे खत्म हो चुकी थी
53:42
Speaker A
मुसलमान मदीना में रहने लगे। लेकिन मदीना की इकॉनमी अब भी बहुत ही ज्यादा खराब थी और सारे सहाबा मदीना में बहुत ही गुर्बत की जिंदगी गुजारते थे। [संगीत] और सिर्फ सहाबा नहीं बल्कि खुद आप सल्ला अलह वसल्लम की फैमिली हजरत अली और फातिमा रज अल्लाह
54:00
Speaker A
अन्हा भी बहुत गरीब जिंदगी गुजारते थे। एक दिन आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपनी बेटी फातिमा के घर गए और उन्होंने देखा कि घर में अली और हसन और हुसैन है ही नहीं। जब आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने पूछा तो
54:13
Speaker A
उन्हें हजरत फातिमा ने बताया कि हमारे घर में खाने और पीने की कोई भी चीज नहीं थी और बच्चे भूख से रो रहे थे। तो हजरत अली हसन और हुसैन को अपने साथ कहीं बाहर ले गए हैं ताकि वो भूख से रोएं
54:28
Speaker A
ना। जिसके बाद आप सल्ला अलह वसल्लम उन्हें ढूंढने लगे और देखा कि हजरत अली किसी के बाग में उसके लिए बहुत ही मुश्किल मजदूरी कर रहे हैं और हसन और हुसैन उनके पास बैठे खेल रहे हैं। सारा दिन हजरत अली ने इसी तरह बहुत ही
54:44
Speaker A
मेहनत से इस बाग में मजदूरी की। जिससे उनके हाथ जख्मी भी हो गए थे और इस सारे के एंड में उन्हें सिर्फ 16 खजूर मिले [संगीत] जो हजरत अली ने अपने बच्चों को भी दिए और अपनी बीवी फातिमा को भी। यह मदीना के लीडर
55:01
Speaker A
रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के अपनी फैमिली का लाइफस्ट था। और सिर्फ यही नहीं इसी तरह हजरत अली और फातिमा रज़ अल्लाह अन्हा सारा काम खुद किया करते थे। और उनकी हेल्प के लिए कोई भी नहीं था। बल्कि कहा
55:14
Speaker A
जाता है हजरत फातिमा खाना कम होने की वजह से इतनी कमजोर हो चुकी थी कि जब भी वह आटा घूमती थी बार-बार उनका हाथ बर्तन से गिर जाता था और उन्हें चोट लगती थी और हजरत अली भी मजदूरी कर कर के बहुत कमजोर हो
55:30
Speaker A
चुके थे। यह देखकर एक दिन हजरत अली ने हजरत फातिमा रज अल्लाह अन्हा से कहा कि आप जाकर आप सल्ला अलहि वसल्लम से एक गुलाम की रिक्वेस्ट करें। तो हजरत फातिमा ने जाकर अपने वालिद आप सल्ला अलह वसल्लम से एक गुलाम की
55:45
Speaker A
रिक्वेस्ट की। लेकिन आप सल्ला अलह वसल्लम अपनी फैमिली को मदीना के आम लोगों से बड़ा नहीं समझते थे। इसीलिए उन्होंने अपनी बेटी फातिमा के इतने सख्त हालात को देखने के बाद भी उन्हें गुलाम नहीं दिया। अब यह बात तो क्लियर थी
56:01
Speaker A
कि इस तरह गुरबत में मुसलमान और जिंदगी नहीं गुजार सकते। [संगीत] तो यहां पर मुसलमानों की जिंदगी का एक बहुत बड़ा टर्निंग पॉइंट आया जिससे मदीना के हालात हमेशा के लिए बदल जंग खैबर अब तक सारी जंग हमेशा मक्का और मदीना के
56:30
Speaker A
दरमियान होती थी। लेकिन सुलेह हुबिया के बाद अब मक्का वालों से 10 साल तक कोई लड़ाई नहीं हो सकती थी। तो मुसलमानों ने अपना रुख मक्का से हटाकर अरब की एक और बड़ी सिटी की तरफ किया जिसका नाम था खैबर।
56:47
Speaker A
खैबर मदीना के करीब ही एक बहुत बड़ा शहर था और यह कोई आम शहर नहीं था बल्कि ये उस जमाने में पूरे अरब के यहूदियों का सबसे बड़ा हेड क्वार्टर था। और [संगीत] यहूदी उस जमाने में भी बिल्कुल आज की तरह बहुत
57:03
Speaker A
ही बड़े बिजनेसमैन थे जिनका बिजनेस पूरी दुनिया में फैला हुआ था। और इन सारे बिजनेसेस से यहूदी जितना माल कमाते थे उसका सबसे बड़ा हिस्सा उन्होंने इसी खैबर के किले में स्टोर किया हुआ था। मतलब खैबर के किले के अंदर अनलिमिटेड गोल्ड, सिल्वर
57:22
Speaker A
और लग्जरी चीजें पड़ी हुई थी। और इस बात का यहूदियों को अच्छी तरह पता था। इसीलिए उन्होंने इस खजाने को सेफ रखने के लिए खैबर के बाहर लंबी-लंबी दीवारें बनाई थी और बड़े-बड़े टावर्स खड़े किए थे। और खैबर
57:38
Speaker A
का हर किला जमीन से काफी ऊपर हिल्स पर बना हुआ था। इसीलिए पिछले कई 100 साल से कोई भी यहूदियों से खैबर का किला नहीं छीन सका था। इन शॉर्ट खैबर इतना मजबूत किला था कि आज तक उसकी लंबी-लंबी दीवारें और टावर्स
57:55
Speaker A
अपनी जगह पर मजबूती से खड़े हैं। आज खैबर ऐसा दिखता है और इसे देखकर सोचें उस जमाने में खैबर कैसा दिखता होगा। मतलब खैबर को फतह करना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन। और मुसलमानों का भी खैबर को फतह करने का
58:12
Speaker A
कोई प्लान नहीं था। लेकिन एक दिन मुसलमानों को खबर मिली कि खैबर के यहूदी एक बहुत बड़ी फौज जमा कर रहे हैं और मुसलमानों के कैपिटल मदीना पर हमला करने की तैयारी कर रहे हैं। ये देखकर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने सहाबा को जंग
58:27
Speaker A
के लिए तैयार होने का हुक्म दिया और फिर 1400 मुसलमानों के साथ इससे पहले कि खैबर मुसलमानों पर हमला करे आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम खैबर पर हमले के लिए रवाना हो। जैसे ही खैबर के लोगों ने मुसलमानों की
58:43
Speaker A
फौज को देखा वो सब अपने किलों के अंदर गए और सारी गेट्स बंद करके जंग के लिए तैयार हुए। जिसके बाद मुसलमानों ने खैबर के किले पर हमला कर दिया। लेकिन जैसे ही मुसलमान करीब पहुंचे यहूदी मुसलमानों पर तीर और पत्थर बरसाने लगे। और
59:02
Speaker A
इवन किले के अंदर से मुसलमानों पर तोपें भी जलने लगी। जिससे मुसलमान पीछे हट गए। जिसके [संगीत] बाद आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक-एक जनरल के साथ मुसलमानों की फौज को भेजते रहे। लेकिन यहूदियों का डिफेंस इतना सख्त था कि हर बार मुसलमानों
59:19
Speaker A
को पीछे हटना पड़ा। कहा जाता है एक बार अबू बकर और उमर रज अल्लाह अनो ने भी मुसलमानों की फौज के साथ हमला किया। और मुसलमान खैबर की दीवार तक पहुंच गए। लेकिन यह देखकर यहूदियों ने दीवार के ऊपर
59:33
Speaker A
से बड़े-बड़े भत्तर मुसलमानों पर फेंके और मुसलमानों को दोबारा पीछे हटना पड़ा। आखिर इतने हमलों के बाद ऐसा लगने लगा था कि मुसलमान खैबर को फतह नहीं कर पाएंगे और यहूदी ये जंग मुसलमानों से जीत जाएंगे। तो अब जब मुसलमानों का मोराल डाउन हो रहा था
59:53
Speaker A
तो आखिर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मुसलमानों को जमा किया और उन सब से कहा कल मैं झंडा ऐसे शख्स को दूंगा जो अल्लाह और उसके रसूल से मोहब्बत करता है और अल्लाह और उसके रसूल उससे मोहब्बत करते हैं और
60:07
Speaker A
अल्लाह उसी आदमी के हाथ पर खैबर के किले को फतह करेंगे। यह सुनकर सारे सहाबा हैरान रह गए कि आखिर वो लीडर कौन होगा जिससे अल्लाह भी मोहब्बत करता है। जैसे ही अगली सुबह हुई सारे सहाबा दूर-दूर से आकर आप सल्लल्लाहु अलैहि
60:28
Speaker A
वसल्लम के कैंप के पास जमा होने लगे और आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का इंतजार करने लगे [संगीत] और आपस में डिस्कस करने लगे कि वो लीडर आखिर कौन होगा। इस दिन ऑलमोस्ट हर सहाबी की ख्वाहिश थी कि आप सल्लल्लाहु अलह
60:42
Speaker A
वसल्लम झंडा उसे दें और वो खैबर को फतह करें। हजरत उमर कहते हैं कि मुझे कभी भी लीडर बनने की ख्वाहिश नहीं हुई सिवाय खैबर के उस दिन के कि उस दिन मैं भी यह चाहता था कि आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मुझे
60:57
Speaker A
मुसलमानों की फौज का लीडर बनाए। अब जब सारे मुसलमान जमा हो गए। सब गौर से उस जगह की तरफ देख रहे थे जहां से आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने आना था। और आखिर आप सल्ला अलह वसल्लम आगे आए और आप
61:12
Speaker A
सल्ला अलह वसल्लम को देखते ही सारी फौज बिल्कुल खामोश हो गए। अली का नाम सुनकर अपनी खैबर [संगीत] कांप जाता है। आखिर आप सल्ला अलह वसल्लम मुसलमानों के सामने खड़े हुए और कहा अली कहां है? शाह है मरता
61:32
Speaker A
[संगीत] है अली का नाम सुनकर सहाबा इधर-उधर देखने लगे और हजरत अली को ढूंढने लगे लेकिन हजरत अली उस दिन वहां थे ही नहीं हजरत अली की आंखों में बचपन से जो एलर्जी थी कंजेक्टिवाइटिस इस दिन दोबारा हजरत अली की आंखों में वही
61:52
Speaker A
एलर्जी थी जब आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को इसका बताया गया तो आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हुक्म दिया कि अली को यहां लाया जाए और सहाबा भाग-भाग कर हजरत अली के कैंप पहुंचे और हजरत अली से कहा कि जल्दी आए आप
62:06
Speaker A
ही वो लीडर हैं जिनसे अल्लाह मोहब्बत करते हैं [संगीत] और आप ही खैबर को फतह करें। जिसके बाद हजरत अली सारी मुसलमानों की फौज को क्रॉस करते हुए आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सामने हाजिर हुए। आप सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम ने हजरत अली की आंखों पर अपना
62:25
Speaker A
हाथ फेरा। जिससे उनकी यह एलर्जी हमेशा के लिए खत्म हो गई। और फिर आप सल्ला अलह वसल्लम ने सबके सामने हजरत अली को मुसलमानों की फौज का झंडा पकड़ाया और उन्हें हुकुम दिया कि जाओ और हमला करो। लेकिन हमले से पहले उन्हें इस्लाम की दावत
62:46
Speaker A
जरूर देना। हजरत अली मुसलमानों का झंडा लेकर पूरी फौज के साथ खैबर के किले की तरफ बढ़े। और इस बार हजरत अली की लीडरशिप में यह हमला इतना सख्त था कि मुसलमान किले के बिल्कुल करीब पहुंचने लगे। और जब यहूदियों
63:05
Speaker A
ने ये देखा उन्हें समझ आ गई कि अब उनका डिफेंस टूटने वाला है। और आखिर जब कोई भी रास्ता नहीं था यहूदियों का लीडर और उनका सबसे बड़ा वॉरियर। मरहब किले से बाहर आया। [संगीत] मरहब कोई आम वॉरियर नहीं था। वो बहुत ही
63:26
Speaker A
लंबा और मस्कुलर आदमी था। और खैबर के लोग कहा करते थे कि हमारा एक मरहब हजार आदमियों के बराबर था। और कहा जाता है इस दिन मरहब ने सर से लेकर पांव तक स्टील का आर्मर पहना हुआ था।
63:43
Speaker A
मरहब मुसलमानों की फौज के सामने आया और जोरजोर से मुसलमानों के लीडर को अकेले जंग के लिए चैलेंज [संगीत] करने लगा। तो ऑफकोर्स मरहब से लड़ने के लिए मुसलमानों का लीडर [संगीत] सिर्फ 28 साल के अली रज़ अल्लाह अनो आगे
64:01
Speaker A
आए। हजरत अली को देखकर मरहब ने कहा मैं हूं मरहब। जिसे पूरा खैबर जानता है। और जंग के वक्त में मैं ही सबसे बहादुर हूं। जिस पर हजरत अली ने उसे जवाब दिया और कहा मैं वो हूं जिसकी मां ने उसका नाम हैदर
64:23
Speaker A
रखा जंगल के शेर की तरह खतरनाक जिसे देखकर दिलों में खौफ बैठ जाता है। ये सुनकर मरहब हजरत अली की तरफ भागने लगा। और जोर से हजरत अली पर अपनी तलवार से हमला कर दिया। लेकिन हजरत अली साइड पर हुए और
64:49
Speaker A
फिर अपनी तलवार जुल्फिकार के एक ही वार में मरहब के सर पर इतना जोर से मारा कि हजरत अली की तलवार उसके स्टील के हेलमेट को तोड़कर [संगीत] उसके सर पर लगी और खैबर का चैंपियन मरहब पूरे खैबर के सामने गिर गया।
65:13
Speaker A
मरहब के गिरते ही मुसलमानों ने हजरत अली की लीडरशिप खैबर पर ऐसा हमला किया कि मुसलमानों की फौज खैबर के किले के अंदर घुस गई और किले के अंदर ही जंग शुरू हुई और इस तरह मुसलमानों ने खैबर का यह किला
65:29
Speaker A
फतह कर लिया और इस फतह के बाद मुसलमान खैबर का एक-एक किला फतह करते गए और आखिर पूरा खैबर फतह हो गया। खैबर के किले के अंदर यहूदियों के सारे खजाने मुसलमानों के कंट्रोल में आए। इन खजानों में इतना ज्यादा सोना था कि इससे
65:49
Speaker A
पहली बार मुसलमानों के हालात हमेशा के लिए बदल गए। आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने ये सारा सोना मुसलमानों में डिवाइड कर दिया। और आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने खैबर की बड़ी-बड़ी जमीनें जो खजूर के दरख्तों से भरी हुई थी। मुसलमानों में बांड थे। और
66:06
Speaker A
इसी खैबर को फतह करने के बाद पहली बार मदीना एक प्रॉपर और मजबूत स्टेट बनने लगी। और मुसलमानों के हालात इतने बदले कि हजरत उमर फरमाते हैं कि हिजरत से लेकर खैबर की फतह तक मैंने [संगीत] कभी पेट भरकर खाना
66:22
Speaker A
नहीं खाया था। मतलब खैबर की फतह के बाद मुसलमानों के हालात बिल्कुल बदल चुके थे। अब खैबर में हजरत अली इस बात के लिए मशहूर है कि उन्होंने खैबर में एक बहुत भारी दरवाजा उठाया था। लेकिन सिर्फ यह दरवाजा
66:37
Speaker A
नहीं बल्कि हजरत अली ने खैबर को फतह करके मदीना की पूरी इकॉनमी भी उठा दी थी। खैबर हजरत अली की जिंदगी की आखिरी जंग नहीं थी। क्योंकि रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने पहले यह बता दिया था कि आगे जाकर हजरत
66:51
Speaker A
अली मुसलमानों के एक बहुत बड़े लीडर बनेंगे। एक दिन आप सल्लल्लाहु अलह वसल्लम सहाबा के साथ कहीं जा रहे [संगीत] थे। अचानक आप सल्ला अलह वसल्लम का जूता फट गया। तो हजरत अली आप सल्ला अलह वसल्लम का जूता लेकर [संगीत] उसे ठीक करने लगे और आप
67:07
Speaker A
सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सहाबा के साथ थोड़ा आगे चले और फिर सहाबा से कहा कि तुम सब में एक आदमी ऐसा होगा जो कुरान की तफसीर के लिए ऐसे ही लड़ेगा जिस तरह [संगीत] मैं कुरान के लिए लड़ा हूं। जिस
67:20
Speaker A
पर अबू बकर रहु ने पूछा कि क्या वो मैं हूं? आप सल्ला अल वसल्लम ने कहा नहीं बल्कि यह शख्स वो होगा जो इस वक्त मेरा जूता ठीक कर रहा है और आगे जाकर बिल्कुल ऐसा ही हुआ। खैबर की फतह इतनी बड़ी थी कि
67:32
Speaker A
इस फतह के बाद आहिस्ता-आहिस्ता अरब के कबीले मुसलमानों के सामने अपना सर झुकाने लगे और आप सल्लल्लाहु अलह वसल्लम अरब के सबसे ताकतवर लीडर बनने लगे। और आखिर खैबर के सिर्फ एक साल बाद मक्का वालों ने मुसलमानों के साथ सुलह हुबिया तोड़ दी। और
67:50
Speaker A
अब मुसलमान इतने स्ट्रांग थे कि आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम 10,000 की फौज लेकर मक्का को फतह करने के लिए रवाना हुए। इससे सिर्फ 8 साल पहले एक ऐसा दिन भी आया था जब हजरत अली अकेले मक्का से हिजरत करके
68:07
Speaker A
मदीना गए थे। और अब आप सल्लल्लाहु अलह वसल्लम के साथ 10,000 की फौज लेकर हजरत अली भी दोबारा मक्का एंटर हुए और मक्का को फतह करके हजरत अली और बाकी सहाबा ने वहां के काबा के अंदर सारे बुतों को तोड़ दिया।
68:23
Speaker A
और इस तरह मुसलमानों ने आखिर मक्का को फतह कर लिया। मक्का को फतह करने के बाद हजरत अली इस्लाम की अगली जंग जंग हुनैन में भी आप सल्लल्लाहु अलह वसल्लम के साथ मजबूती से खड़े रहे और ये जंग भी मुसलमान जीत गए।
68:41
Speaker A
जिसके बाद आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम वापस अपने कैपिटल मदीना चले गए और अब मक्का को फतह करने के बाद पूरा अरब मदीना को अपना कैपिटल मानने लगा। और हर तरफ से लोग आकर आप सल्लल्लाहु अलह वसल्लम के हाथ
68:55
Speaker A
पर बैत करने लगे। अब जब आप सल्लल्लाहु अलह वसल्लम ने पूरे अरब को यूनाइट कर दिया था। यह देखकर उस वक्त की सुपर पावर आहिस्ताआहिस्ता मदीना की ताकत से डरने लगी। द ग्रेट रोमन एंपायर। इसीलिए मुसलमानों की ताकत और भी ज्यादा
69:16
Speaker A
बढ़ने [संगीत] से रोकने के लिए अब रोमन एंपायर मुसलमानों पर हमले की तैयारी करने लगे। जब रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को इसकी खबर मिली। आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने भी रोमन एंपायर से जंग के लिए 3000 मुसलमानों की फौज जमा की जिसके बाद
69:32
Speaker A
मुसलमान तबूक की तरफ रवाना हुए। इस जंग में आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने एक ऐलान किया था कि जो भी मुसलमान इस फौज में शामिल नहीं होगा, उसे मुनाफिक डिक्लेअर कर दिया जाएगा। [संगीत] जैसे ही मुसलमानों की फौज मदीना से रवाना
69:50
Speaker A
हुई, पहली बार आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मुसलमानों के सबसे बड़े वॉरियर हजरत अली को हुक्म दिया कि वो इस जंग में शामिल नहीं होंगे। बल्कि वो मदीना में रहकर मुसलमानों के कैपिटल की हिफाजत करेंगे। जिसके [संगीत] बाद मुसलमानों की फौज जंग
70:07
Speaker A
के लिए रवाना हुई। पहली बार ऐसा हुआ था कि हजरत अली आप सल्लल्लाहु अलह वसल्लम के साथ किसी जंग में शामिल नहीं हुए हो। यह देखकर मदीना [संगीत] के कुछ मुनाफिक हजरत अली के खिलाफ अजीब-अजीब बातें बनाने लगे। लेकिन
70:21
Speaker A
जब हजरत अली को इन बातों का पता चला वो सीधा मदीना से मुसलमानों की फौज की तरफ रवाना हुए और आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास पहुंचकर पूछा या रसूल अल्लाह आप क्यों मुझे मदीना के बच्चों और औरतों के
70:33
Speaker A
साथ छोड़ रहे हैं? हजरत अली को इस तरह परेशान देखकर [संगीत] आप सल्लल्लाहु अलह वसल्लम ने उन्हें कहा ए अली क्या तुम इस बात से खुश नहीं हो कि तुम्हारी हैसियत मेरे लिए ऐसी ही है जैसे मूसा अल सलाम के
70:46
Speaker A
लिए हारून अल सलाम की थी लेकिन मेरे बाद कोई नबी नहीं होगा इसीलिए ये सुनकर हजरत अली रज़ अल्लाह अनहो बहुत खुश हुए और वापस मदीना आ गए जिसके बाद मुसलमानों की फौज तबूक पहुंची लेकिन वहां से रोमंस पहले ही
71:04
Speaker A
भाग चुके चुके थे। इसीलिए कोई भी जंग नहीं हुई और आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मुसलमानों के साथ वापस मदीना आ गए। तबूक [संगीत] की जंग के बाद पूरे अरब से और भी तेजी से लोग इस्लाम की तरफ आने लगे। लेकिन
71:17
Speaker A
[संगीत] अरब में कुछ लोग अभी भी ऐसे थे जो इस्लाम एक्सेप्ट करने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थे। [संगीत] एक दिन अरब के क्रिश्चियन कबीले के लोग मदीना आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मिलने के लिए आए। इन क्रिश्चियंस को पता था कि वो अरब
71:32
Speaker A
के लीडर के साथ मिलने जा रहे हैं। इसीलिए उन्होंने बहुत ही महंगे-महंगे कपड़े पहने थे और इसके साथ हाथों में सोने की रिंग्स भी पहनी हुई थी और उनका ख्याल था कि यह सब देखकर [संगीत] अरब का बादशाह उन्हें इज्जत
71:44
Speaker A
देगा। लेकिन जैसे ही ये लोग आप सल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास पहुंचे और आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को सलाम किया। आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उनके सलाम का जवाब नहीं दिया। बल्कि इसके बाद उनकी किसी भी बात का जवाब नहीं दिया। यह देखकर ये
71:59
Speaker A
लोग हैरान हो गए और वहां से बाहर निकल आए और सहाबा से पूछने लगे कि हमें क्या करना चाहिए? आखिर हजरत अली ने आकर इन्हें बताया कि ये जो तुमने महंगे-महंगे कपड़े पहने हैं और सोने की अंगूठियां पहनी है यह सब
72:13
Speaker A
उतार दो और बिल्कुल आम लोगों की तरह कपड़े पहनकर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास जाओ। इन लोगों ने ऐसा ही किया और दोबारा सादा कपड़े पहनकर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास गए और फिर उन्हें सलाम किया। इस बार आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम
72:28
Speaker A
ने उन्हें देखा और उनके सलाम का जवाब दिया। और इस तरह आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम और इन क्रिश्चियंस की डिबेट शुरू हुई। ये क्रिश्चियंस बार-बार आप सल्ला अलह वसल्लम से कह रहे थे कि ईसा अल सलाम अल्लाह के बेटे हैं और हम सबके खुदा हैं।
72:44
Speaker A
लेकिन आप सल्लल्लाहु अलह वसल्लम उन्हें बता रहे थे कि ईसा अल सलाम अल्लाह के पैगंबर और सिर्फ अल्लाह के बंदे हैं। जिस पर उन्होंने आप सल्ला अल वसल्लम से कहा कि फिर हमें बताएं कौन ऐसा आदमी है जो बगैर
72:57
Speaker A
किसी बाप के पैदा हुआ हो। और उनकी इसी बात पर कुरान की आयत नाजिल हुई। जिसमें अल्लाह ने फरमाया कि ईसा की मिसाल ऐसी ही है जैसे आदम की है। अब कुरान की इस आयत का इन क्रिश्चियंस के पास कोई जवाब नहीं था
73:13
Speaker A
क्योंकि अगर ईसा अल सलाम बगैर बाप के पैदा हुए हैं तो आदम अली सलाम बगैर मांबाप के पैदा हुए थे। लेकिन फिर भी ये क्रिश्चियंस अपनी बात पर खड़े रहे। जिस पर आखिर आप सल्ला अलह वसल्लम ने इन क्रिश्चियंस को
73:26
Speaker A
मुबाहला का चैलेंज दिया कि तुम अपने फैमिली को लेकर आओ और मैं भी अपनी फैमिली अहले बैत को लेकर आऊंगा और फिर हम मिलकर अल्लाह से दुआ करेंगे कि जो भी हम में गलत है उस पर अल्लाह की लानत हो और सबको अच्छी
73:41
Speaker A
तरह पता था कि आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के अहले बैत कौन है। क्योंकि इससे पहले एक दिन आप सल्लल्लाह अलह वसल्लम घर गए और एक चादर के नीचे हजरत फातिमा, हसन, हुसैन और अली रज़ अल्लाह अनो को बिठाया और अल्लाह से
73:55
Speaker A
कहा कि यही लोग मेरे अहले बैत हैं। जब आप सल्लाहु अलैहि वसल्लम हजरत फातिमा, हसन, हुसैन और अली रज़ अल्लाह अनो के साथ मुबाहला के चैलेंज के लिए पहुंचे। वहां सारे क्रिश्चियंस ने आप सल्लाहु अलैहि वसल्लम से कहा कि आप हमारे बारे में जो भी
74:10
Speaker A
फैसला करना चाहे कर लें। लेकिन यह मुबाहला का चैलेंज हम आपके साथ नहीं कर सकते और यह क्रिश्चियंस वहां से चले गए। यहां से हजरत अली की जिंदगी में एक बहुत बड़ा चेंज आया क्योंकि अब रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि
74:25
Speaker A
वसल्लम हजरत अली को एक वॉरियर से इस्लाम का बहुत बड़ा जज बनाना चाहते थे। असल में जब पूरा अरब इस्लाम की तरफ आ रहा था। यमन का एक बहुत बड़ा कबीला अब भी मुसलमान होने के लिए तैयार नहीं था।
74:40
Speaker A
इसीलिए आप सल्ला अलह वसल्लम ने अपने एक जनरल खालिद बिन वलीद रज अल्लाह अनहु को [संगीत] यमन की तरफ भेजा ताकि वो इन लोगों को इस्लाम की दावत दें। [संगीत] लेकिन आप सल्ला अलह वसल्लम काफी अरसे तक इंतजार करते रहे। लेकिन यमन के मुसलमान
74:57
Speaker A
होने की कोई खबर नहीं आई। [संगीत] तो आखिर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने खालिद बिन वलीद को वापस मदीना बुलाया और फिर आप सल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हुक्म दिया कि अली को मेरे पास लाया जाए। हजरत अली ने
75:10
Speaker A
आकर आप सल्ला अलह वसल्लम से पूछा कि या रसूल अल्लाह आप मुझे बहुत दूर एक दूसरे मुल्क भेज रहे हैं और मेरी उम्र तो अभी बहुत कम है और वहां मुझसे बड़ी उम्र के लोग मेरी बात क्यों मानेंगे और मैं उनके
75:22
Speaker A
दरमियान सही फैसला कैसे करूंगा क्योंकि इस वक्त हजरत अली की ऐज सिर्फ 3032 साल थी जिस पर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हजरत अली के सीने पर अपना हाथ फेरा और हजरत अली को दुआ दी ऐ अल्लाह अली की जुबान
75:38
Speaker A
को सच के साथ रख और इसके दिल को हिदायत दे। और फिर हजरत अली से कहा ए अली जब भी तुम दो ग्रुप्स के दरमियान फैसला करना पहले दोनों ग्रुप्स की हर बात गौर से सुनना और तभी फैसला करना। आप सल्लल्लाहु
75:54
Speaker A
अलैहि वसल्लम ने हजरत अली को अपने हाथों से उनके सर पर एक अमा पहनाया। और उनके हाथ में काला झंडा दिया और इस तरह हजरत अली यमन की तरफ रवाना हुए। [संगीत] एक जनरल की तरह नहीं बल्कि यमन के गवर्नर
76:11
Speaker A
और जज की तरह। जैसे ही हजरत अली यमन पहुंचे उन्होंने वहां सारे लोगों को जमा किया। उनके सामने आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का लेटर पढ़कर सुनाया। और फिर एक जबरदस्त स्पीच की। और इस तरह हजरत अली की ही बातों से इंस्पायर होकर पूरे यमन ने
76:30
Speaker A
इस्लाम कबूल कर लिया। और हजरत अली के जाने के कुछ ही दिन बाद आप सल्ला अलह वसल्लम तक खबर पहुंची कि यमन इस्लाम कबूल कर चुका है। जिसके बाद हजरत अली यमन के लीडर बने। और यमन के सारे फैसले हजरत अली ही करने
76:47
Speaker A
लगे। यह वही यमन था जहां से बहुत साल पहले एक बादशाह ने मक्का पर हमला किया था। जिसका नाम था अब्राहम। अब्राहम। और अब मक्का का ही एक आदमी पूरे यमन का लीडर था। कुछ महीने यमन में रहने के बाद
77:05
Speaker A
हजरत अली को पता चला कि आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपनी [संगीत] जिंदगी के पहले हज के लिए मदीना से मक्का आ रहे हैं। [संगीत] जिसके बाद हजरत अली यमन से मक्का की तरफ रवाना हुए और जाकर आप सल्लल्लाहु अलह
77:18
Speaker A
वसल्लम के साथ इस हज में हिस्सा लिया। यह आप सल्लल्लाह वसल्लम की जिंदगी का पहला और आखिरी हज था। और हज करने के बाद रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हजरत अली और हजारों सहाबा के साथ वापस मदीना की तरफ
77:33
Speaker A
रवाना हुए। अब जब ये हजारों मुसलमान आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ मक्का से मदीना जा रहे थे। रास्ते में एक [संगीत] जगह खून के मकाम पर स्टे किया। मुसलमानों ने आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के लिए कुछ दरख्तों के नीचे स्पीच की जगह बनाई। जहां
77:52
Speaker A
आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सारे मुसलमानों के सामने आए। सही मुस्लिम और हदीस की इन किताबों में आप सल्ला अलह वसल्लम की यह स्पीच कुछ इस तरह है। आप सल्ला अलह वसल्लम सारे मुसलमानों के सामने आए और फरमाया ऐ लोगों सुन लो मैं भी एक इंसान हूं। बहुत
78:12
Speaker A
जल्द एक फरिश्ता अल्लाह का पैगाम लेकर मेरे पास आएगा और मैं उसका हुकुम मान लूंगा। ए लोगों मैं तुम्हारे पास दो बहुत बड़ी चीजें छोड़कर जा रहा हूं। एक अल्लाह की किताब कुरान इसको हमेशा मजबूती से पकड़ कर रखना [संगीत] और दूसरा मेरे अहले बैत।
78:37
Speaker A
मैं तुम्हें अपने अहले बैत के बारे में अल्लाह से डराता हूं। लेकिन आगे जाकर आप सल्लल्लाहु अलह वसल्लम के अहले बैत में हजरत अली रज़ अल्लाह अनहु को नमाज पढ़ते हुए कूफा की ग्रैंड मस्जिद में शहीद कर दिया गया। जिसके बाद आप
78:54
Speaker A
सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने दोबारा फरमाया मैं तुम्हें अपने अहले बैत के बारे में अल्लाह से डराता हूं। [संगीत] लेकिन आगे जाकर आप सल्ला अलह वसल्लम के अहले बैत में हजरत हसन रज़ अल्लाह अनू को ज़हर देकर शहीद कर दिया गया। जिसके बाद आप
79:12
Speaker A
सल्ला अलह वसल्लम ने तीसरी बार कहा मैं तुम्हें अपने अहले बैत के मामले में अल्लाह से डराता हूं। लेकिन आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के अहले बैत ने हजरत हुसैन रज़ अल्लाह अनो को भी कर्बला के मैदान में बेरहमी से शहीद कर
79:31
Speaker A
दिया। [संगीत] इसी तरह यह बात तीन बार कहने के बाद आप सल्ला अलह वसल्लम ने सहाबा से पूछा [संगीत] क्या तुम लोगों को नहीं पता कि मेरा मुसलमानों पर उनकी जानों से भी ज्यादा हक है?
79:46
Speaker A
जिस पर सहाबा ने जवाब दिया कि बिल्कुल हम मानते हैं। तो आप सल्ला अलह वसल्लम ने हजरत अली का हाथ पकड़ा [संगीत] और उसे उठाकर फरमाया जिसका मौला मैं उसका मौला अली। ऐ अल्लाह उससे मोहब्बत रख जो अली से
80:04
Speaker A
मोहब्बत रखे और उससे दुश्मनी कर जो अली से दुश्मनी करे। यह कोई पहली दफा नहीं था कि आप सल्ला अलह वसल्लम ने मौला अली कीेंस के बारे में मुसलमानों को बताया हो। इससे पहले भी एक बार आप सल्लल्लाहु अलह वसल्लम
80:18
Speaker A
ने फरमाया था कि ऐ अली तुमसे मोमिन ही मोहब्बत करेगा और तुमसे मुनाफिक ही बोगज़ रखेगा। एक और जगह आप सल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया था कुरान अली के [संगीत] साथ है और अली कुरान के साथ है। और एक और बार आप
80:33
Speaker A
सल्ला अलह वसल्लम ने फरमाया अली मुझसे है और मैं अली से हूं। हजरत अली उन 10 सहाबा में से भी थे जिन्हें रसूल्लाह सल्ला अलह वसल्लम ने दुनिया में जन्नत की खुशखबरी दी थी। आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने एक और
80:47
Speaker A
जगह फरमाया जिसने अली को गाली दी उसने मुझे गाली दी और जिसने मुझे गाली दी उसने अल्लाह को गाली दी। और कहा जिसने अली को तकलीफ पहुंचाई उसने मुझे तकलीफ पहुंचाई। और एक दिन आप सल्लल्लाहु अलह वसल्लम ने
81:03
Speaker A
फरमाया जिसने मेरी बात मानी उसने अल्लाह की बात [संगीत] मानी और जिसने अली की बात मानी उसने मेरी बात मानी और आखिर एक दिन आप सल्ला अलह वसल्लम ने हजरत अली से यह भी कहा कि मेरी उम्मत का सबसे बुरा आदमी वो
81:18
Speaker A
होगा जो तुम्हारी दाढ़ी को तुम्हारे खून से लाल कर देगा। मतलब तुम्हें शहीद कर देगा। मतलब जो आदमी हजरत अली को शहीद करेगा वो कयामत तक इस उम्मत का सबसे बदबख्त आदमी होगा। इस स्पीच के बाद आप सल्लल्लाहु अलैहि
81:39
Speaker A
वसल्लम सारे मुसलमानों के साथ वापस मदीना पहुंचे। और मदीना पहुंचते ही आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बार फिर उस वक्त की सुपर पावर रोमन एंपायर पर हमला करने की प्लानिंग करने लगे। और इस हमले के लिए आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने
81:56
Speaker A
मुसलमानों की एक नई फौज बनाई और उन्हें रोमन एंपायर पर हमले के लिए रवाना कर दिया। लेकिन जैसे ही ये फौज रवाना हुई आहिस्ता-आहिस्ता [संगीत] मदीना में आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की तबीयत खराब होने लगी और आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम
82:13
Speaker A
की जिंदगी के आखिरी दिन करीब आने लगे। आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की जिंदगी के आखिरी दिनों में हजरत अली हर वक्त आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास रहने लगे और उनका ख्याल रखने लगे बल्कि आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की मस्जिद में
82:30
Speaker A
आखिरी नमाज के लिए हजरत अली और अब्बास रज अल्लाह अनो आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को सहारा देकर उन्हें मस्जिद तक लेकर आए जहां आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मुसलमानों के साथ मस्जिद में नमाज पढ़ी लेकिन आहिस्ताआहिस्ता आप सल्लल्लाहु अलैहि
82:45
Speaker A
वसल्लम की तबीयत और भी बिगड़ने लगी जिसके बाद वो नमाज के लिए भी मस्जिद नहीं जा सकते थे और आप सल्लल्लाहु अलह वसल्लम के हुक्म पर अबू बकर रज़ अल्लाह अनहु मस्जिद में मुसलमानों को नमाज पढ़ाने लगे। इन
82:59
Speaker A
आखिरी दिनों में हजरत अली रज़ अल्लाह अनहु मदीना के सारे मर्दों में आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सबसे क्लोज रहते थे। इसीलिए जब भी हजरत अली बाहर निकलते थे सारे मुसलमान उनके गिर्द जमा होकर उनसे पूछते थे कि हमें बताएं आप सल्ला अलह
83:14
Speaker A
वसल्लम की तबीयत अब कैसी है? एक दिन जब हजरत अली बाहर आए सारे मुसलमान उनके पास जमा हुए और उनसे पूछने लगे तो हजरत अली ने सबको बताया कि अब आप सल्ला अलह वसल्लम ठीक है और उनकी तबीयत आहिस्ता-आहिस्ता बेहतर
83:27
Speaker A
हो रही है। लेकिन हजरत अली के चाचा अब्बास रज अल्लाह अनो ने उनसे कहा कि नहीं मैं अब्दुल मुतलिब के बेटों के चेहरों को अच्छी तरह पहचान लेता हूं। मतलब अब रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के आखिरी दिन करीब आ चुके हैं। और फिर हजरत
83:43
Speaker A
अब्बास ने हजरत अली से कहा कि चलो हम जाकर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से पूरे मुसलमानों की खिलाफत की रिक्वेस्ट करते हैं। लेकिन हजरत अली ने कहा कि नहीं अगर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हमें इंकार कर दिया तो फिर कभी भी उनके खानदान बनू
84:00
Speaker A
हाशिम को खिलाफत नहीं मिल सकेगी। आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के खानदान बनू हाशिम से आज तक मुसलमानों के सबसे ज्यादा खलीफा रहे हैं। बनू हाशिम खानदान के लोग ऑलमोस्ट 650 साल तक मुसलमानों के खलीफा रहे हैं। और आगे जाकर इसी बनू हाशिम
84:18
Speaker A
खानदान के दौर को ही इस्लामिक गोल्डन एज कहा जाता है। बल्कि आगे जाकर बनू हाशिम के सबसे बड़े खलीफा खुद हजरत अली रज़ अल्लाह अनहु ही बने। आहिस्ताआहिस्ता मदीना में रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलह वसल्लम की तबीयत खराब होती गई। जिसके कुछ ही दिन बाद अल्लाह के आखिरी
84:38
Speaker A
रसूल हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलह वसल्लम इस दुनिया से चले गए। आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की वफात की खबर एक आग की तरह पूरे मदीना में फैली। और मदीना के हर घर में लोग रो रहे थे। और हर तरफ मदीना में गम
84:55
Speaker A
फैला हुआ था। लेकिन यह दिन सबसे मुश्किल हजरत अली रज़ अल्लाह अनो और उनकी फैमिली के लिए था। [संगीत] क्योंकि मौला अली के लिए रसूल्लाह सल्ला अलह वसल्लम सिर्फ एक लीडर नहीं बल्कि उनके बाप की तरह थे। जो इससे बहुत साल पहले
85:12
Speaker A
सिर्फ 5 साल के अली रज़ अल्लाह अनहु को खुद अपने घर लेकर आए थे। और हजरत अली का अपने ही घर में बिल्कुल अपने बेटे की तरह ख्याल रखते थे। हजरत अली ने आप सल्लल्लाहु अलह वसल्लम के ही घर में लिखना और पढ़ना सीखा
85:27
Speaker A
था। और सिर्फ यही नहीं बल्कि अरब के सबसे बड़े वॉरियर भी हजरत अली आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के घर से ही बने। और आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपनी इस छोटी बेटी हजरत फातिमा रज़ अल्लाह अन्हा की शादी
85:40
Speaker A
भी हजरत अली रज़ अल्लाह अनहु से कराई थी। हजरत अली के बेटों हसन और हुसैन से आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सबसे ज्यादा मोहब्बत करते थे। और जाने से पहले आप सल्ला अलह वसल्लम ने सारे मुसलमानों से कहा था कि मैं दो चीजें तुम्हारे पास
85:54
Speaker A
छोड़कर जा रहा हूं। अल्लाह की किताब और अपने अहले बैत आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की वफात के बाद हजरत अली आप सल्लल्लाहु अलह वसल्लम की मयत के पास आए और कहा या रसूल अल्लाह आपसे पहले भी अल्लाह के रसूल
86:12
Speaker A
दुनिया से जा चुके हैं। लेकिन आपका दुनिया से जाना उन सारे पैगंबरों से बिल्कुल अलग है। क्योंकि आपके जाने के बाद आसमान और जमीन का रिश्ता हमेशा के लिए टूट चुका है। जो किसी भी और पैगंबर के जाने से कभी नहीं हुआ। या रसूल
86:37
Speaker A
अल्लाह अगर आपने हमें ना रोका होता तो आज हम अपने सारे आंसू यही आपके सामने बहा देते लेकिन आपने हमें ऐसा करने से रोका है या रसूल अल्लाह मेरे मां-बाप आप पर कुर्बान हो और जब आप अपने रब के पास पहुंच
86:56
Speaker A
जाए हम सबको जरूर याद रखिएगा दुनिया के [संगीत] सबसे अजीम इंसान रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलह वसल्लम हजरत अली ने गुसल दिया और इस इतने मुश्किल दिन में इतने गम में होने के बावजूद भी हजरत अली ने ही आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को
87:16
Speaker A
दफनाने की सारी तैयारी की। इसी तरह आखिरी वक्त तक हजरत अली आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ रहे। अब इस्लाम की तारीख में एक नया दौर शुरू हो चुका था। और आप सल्लल्लाहु अलह वसल्लम के जाने के बाद मुसलमानों ने अपना पहला खलीफा अबू बकर
87:35
Speaker A
रज़ अल्लाह अनहु को बनाया। और अब वक्त आ चुका था कि मुसलमान आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की कही हुई बातों को पूरा कर और उस वक्त की सुपर पावर्स रोमन और परर्शियन एंपायर क्रश कर दिया। [संगीत] इसीलिए अबू बकर रज़ अल्लाह अनो ने एक ही
87:59
Speaker A
टाइम पर दोनों सुपर पावर्स पर हमला कर दिया और मुसलमान एक के बाद एक शहर को फतह करने लगे और यहां से हजरत अली की जिंदगी में भी एक नया दौर आया द चीफ जस्टिस ऑफ इस्लाम सब्सक्राइब
Topics:हजरत अलीचौथा खलीफाइस्लाममदीनारसूल अल्लाहखलीफा उस्मानखैबर की फतहइस्लाम का इतिहासमक्काइस्लामी योद्धा

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