सऊदी अरब के बादशाह फैसल की कहानी, उनकी ताकत, फिलस्तीन के लिए संघर्ष और सऊदी खानदान की इतिहास पर आधारित एक विस्तृत डॉक्यूमेंट्री।
Key Takeaways
- शाह फैसल की नेतृत्व क्षमता ने सऊदी अरब को विश्व स्तर पर एक महत्वपूर्ण शक्ति बनाया।
- सऊदी अरब की ताकत का आधार धार्मिक, राजनीतिक और आर्थिक कारकों का संयोजन है।
- फिलस्तीन के लिए सऊदी अरब के अंदर मतभेद और राजनीतिक संघर्ष स्पष्ट हैं।
- ब्रिटिश और अन्य विदेशी शक्तियों का मध्य पूर्व की राजनीति में गहरा प्रभाव रहा।
- सऊदी अरब की आधुनिकता और परंपरा के बीच टकराव ने देश की आंतरिक राजनीति को जटिल बनाया।
What the video covers
- शाह फैसल मुसलमान दुनिया के एकमात्र बादशाह थे जिन्होंने अमेरिका को झुकने पर मजबूर किया।
- सऊदी खानदान की शुरुआत मोहम्मद बिन सऊद और मोहम्मद बिन अब्दुल वहाब की दोस्ती से हुई।
- ब्रिटिश एंपायर ने अरबों को उस्मानिया खिलाफत के खिलाफ बगावत के लिए प्रेरित किया, लेकिन शरीफ हुसैन ने फिलस्तीन को यहूदियों को सौंपने से मना किया।
- अब्दुल अजीज ने अंग्रेजों के समर्थन से मक्का और मदीना को फतह कर सऊदी अरब की स्थापना की।
- सऊदी अरब में तेल की खोज और विश्व युद्धों के दौरान तेल की मांग ने देश की आर्थिक और राजनीतिक ताकत बढ़ाई।
- किंग अब्दुल अजीज ने अपने बेटों सऊद और फैसल को अलग-अलग क्षेत्रों का गवर्नर बनाया।
- फिलस्तीन के लिए आवाज़ उठाने वाला मुख्य शख्स प्रिंस फैसल था, जबकि किंग अब्दुल अजीज ने कोई बड़ा कदम नहीं उठाया।
- फैसल ने शिक्षा, मीडिया और महिलाओं के अधिकारों के लिए कई सुधार किए, जिससे सऊदी के धार्मिक उलेमाओं से टकराव हुआ।
- सऊदी खानदान के अंदर सत्ता संघर्ष और फैसल की हत्या का इतिहास भी वीडियो में विस्तार से बताया गया है।
- फैसल की हत्या के बाद सऊदी अरब की राजनीति में बड़े बदलाव आए और देश की दिशा प्रभावित हुई।
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Speaker A
सऊदी अरब का बादशाह फैसल मुसलमान दुनिया का वो अकेला बादशाह था जिसके एक ही हुक्म से सुपर पावर अमेरिका ने उसके सामने घुटने टेक दिए थे। जिसने फिलस्तीन की आजादी के लिए पूरी दुनिया से दुश्मनी ली थी। लेकिन जैसे ही शाह फैसल मुसलमान दुनिया का
Speaker A
सबसे बड़ा लीडर बना, शाह फैसल को उसके अपने ही भतीजे सऊदी खानदान के एक शहजादे ने गोली मारकर शहीद कर दिया। लेकिन आखिर सऊदी खानदान को इतनी ताकत मिली कहां से? इसके लिए हमें बहुत पीछे जाना होगा। आज से 1400 साल पहले रसूल्लाह
Speaker A
सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपनी जिंदगी में ही अरब का यह सारा इलाका फतह कर लिया था। लेकिन जैसे ही रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम इस दुनिया से चले गए, अरब के बहुत सारे कबीलों ने पहले खलीफा अबू बकर रज़ अल्लाह ताला अनू के खिलाफ बगावत का
Speaker A
ऐलान कर दिया और सिर्फ यही नहीं, कुछ लोगों ने तो नबी होने का झूठा दावा भी किया था। जिनमें सबसे बड़े झूठे नबी का नाम था मुसलमा कजाब रसूल। तो अब पहले खलीफा अबू बकर रज़ अल्लाह ताला अनो ने अरब को दोबारा फतह करने के लिए
Speaker A
अपना बेस्ट जनरल खालिद बिन वलीद को इन बागी कबीलों की तरफ भेजा। जिसके बाद खालिद बिन वलीद ने तेजी से यह सारा इलाका दोबारा फतह किया। और आखिर उनकी लड़ाई तारीख के सबसे बड़े झूठे नबी मुसलमा कजाब से हुई। जंग यमामा
Speaker A
इस जंग में खालिद बिन वलीद ने मुसलमा कजाब और उसके कबीले बनू हनीफा को ऐसा हराया कि अगले 1000 साल तक बनू हनीफा दोबारा अपने पैरों पर खड़े नहीं हो सके। लेकिन 1000 साल के बाद मुसैलमा के कबीले बनू हनीफा से
Speaker A
एक नया बादशाह सामने आया। सऊदी खानदान का पहला बादशाह जिसका नाम था मोहम्मद बिन सऊद। जब सऊद बादशाह बना, उस वक्त दुनिया की सबसे बड़ी ताकत उस्मानिया खिलाफत थी जिसमें ज्यादातर उस्मानी बादशाह सूफीइज्म को फॉलो करते थे और उस्मानिया सल्तनत के दौर में मक्का का
Speaker A
यह हाल था कि मक्का की ग्रैंड मस्जिद में रोज एक ही नमाज पढ़ने के लिए चार अलग इमाम खड़े होते थे, हनफी, शाफी, मालिकी और हम्बली, और इनमें से कोई भी एक दूसरे के इमाम के पीछे नमाज नहीं पढ़ता था। यह सब देखकर अरब
Speaker A
में एक स्कॉलर ऐसा था जो इस सिस्टम से बिल्कुल खुश नहीं था। मोहम्मद बिन अब्दुल वहाब। लेकिन जैसे ही वो इस सब के खिलाफ आवाज उठाने लगे, लोगों ने उन्हें अपने ही शहर से निकाल दिया। अब मोहम्मद बिन अब्दुल वहाब के पास इल्म
Speaker A
तो था, लेकिन अपने ख्यालात ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए उन्हें ताकत की जरूरत थी। और ये ताकत उन्हें तब मिली जब उन्होंने दुनिया के पहले सऊदी बादशाह के साथ दोस्ती का हाथ मिलाया। जिसके बाद सऊदी और वहाबी
Speaker A
खानदान ने मिलकर अरब के इलाके नजत में एक मजबूत हुकूमत बनाई। अब सऊदी खानदान की एक मजबूत हुकूमत तो बन चुकी थी, लेकिन फिर भी उनकी उस्मानिया खिलाफत के साथ कोई औकात नहीं थी। उस्मानिया खिलाफत अब भी मुसलमानों की सबसे
Speaker A
बड़ी ताकत थी। लेकिन इस सब के 200 साल बाद उस्मानिया सल्तनत अपनी आखिरी सांसें ले रही थी। वर्ल्ड वॉर वन। जिसमें एक बार फिर ब्रिटिश एंपायर और उस्मानिया खिलाफत एक दूसरे के आमने-सामने हुए और ब्रिटिश एंपायर को अच्छी तरह पता
Speaker A
था कि हम उस्मानिया खिलाफत को तब तक नहीं तोड़ सकते जब तक उनके साथ अरबों का सपोर्ट है। तो ऑफ कोर्स ब्रिटिश एंपायर ने अपना फुल जोर लगाया कि किसी तरह अरब के लोग उस्मानिया सल्तनत के खिलाफ बगावत कर दें।
Speaker A
लेकिन यह कोई आसान काम नहीं था। ब्रिटिश एंपायर को इस काम के लिए एक बहुत ही ताकतवर अरब लीडर की जरूरत थी। और आखिर बहुत ढूंढने के बाद अंग्रेजों को यह लीडर मिल गया। मक्का का शरीफ हुसैन जो कोई आम इंसान नहीं था बल्कि उसका
Speaker A
ताल्लुक रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के खानदान से था और वो खुद भी एक बहुत बड़ा स्कॉलर था। ब्रिटिश एंपायर ने शरीफ हुसैन और अरब के लोगों के साथ एक वादा किया कि अगर हम उस्मानिया सल्तनत से यह जंग जीत गए, हम दुनिया से खिलाफत खत्म
Speaker A
नहीं करेंगे बल्कि हम तुर्कों से खिलाफत छीनकर वापस अरबों को मुसलमानों का खलीफा बनाएंगे। ये सुनकर ऑफ कोर्स अरब के लोग बहुत खुश हुए। और उन्होंने ब्रिटिश एंपायर के साथ मिलकर उस्मानिया सल्तनत के खिलाफ बगावत कर दी। और आखिर अरबों की ही इस बगावत की वजह से
Speaker A
खिलाफत उस्मानिया जो पहले इतने बड़े इलाके पर फैली हुई थी, अब सिर्फ इतनी सी रह गई। तो अब वेट मिशन तो पूरा हो चुका था मतलब ब्रिटिश एंपायर को अब खिलाफत शरीफ हुसैन को दे देनी चाहिए थी लेकिन ब्रिटिश एंपायर
Speaker A
ने कहा नहीं और उन्होंने शरीफ हुसैन के सामने एक बहुत ही खतरनाक शर्त रखी कि हम तुम्हें मुसलमानों का खलीफा तो बना देंगे लेकिन तुम्हें फस्तीन को यहूदियों के हवाले करना होगा। लेकिन फिलस्तीन को बेचने की अंग्रेजों की
Speaker A
इस ऑफर को शरीफ हुसैन ने फाड़ दिया। ब्रिटिश एंपायर को यह देखकर शरीफ हुसैन पर बहुत गुस्सा आया कि हमारे इस पपेट की इतनी हिम्मत कि वो हमें आंखें दिखाई। लेकिन शरीफ हुसैन ने फस्तीन यहूदियों के हवाले नहीं की। यह देखकर ब्रिटिश एंपायर
Speaker A
ने अपना सारा सपोर्ट शरीफ हुसैन से हटा दिया। जिसके बाद एक ऐसी अजीब सिचुएशन बनी कि पूरी दुनिया में अरबों का कोई भी बड़ा लीडर नहीं था। और यह सब देख कर इस मौके का सबसे बड़ा फायदा एक जवान अरब लीडर ने उठाया।
Speaker A
सऊद खानदान का किंग अब्दुल अजीज। अब्दुल अजीज शरीफ हुसैन से बिल्कुल ऑपोजिट था। उसे कोई परवाह नहीं थी कि अगर दुनिया से खिलाफत खत्म होती तो होने दो। अगर फिलस्तीन यहूदियों को मिलता है तो मिलने दो। उसे सिर्फ अरब का बादशाह बनना था और
Speaker A
अंग्रेजों को भी बिल्कुल ऐसे ही एक सेल्फिश मुसलमान लीडर की जरूरत थी जो सिर्फ अपना सोचे और बाकी मुसलमानों की उसे कोई परवाह ना हो। इसीलिए शरीफ हुसैन से अपना सपोर्ट हटाने के बाद अंग्रेजों ने अपनी पूरी ताकत के साथ अब्दुल अजीज को
Speaker A
सपोर्ट किया। जिसके बाद अब्दुल अजीज अपनी फौज के साथ तेजी से मक्का और मदीना फतह करने के लिए रियाद से रवाना हुए। एंड ऑफ कोर्स अंग्रेजों की मदद से अब्दुल अजीज ने आसानी से पूरा हिजाज फतह कर लिया।
Speaker A
और अब्दुल अजीज की ताकत को देखकर मक्का के सारे उलमा ने काबा के सामने उसके हाथ पर बैत की। मक्का और मदीना को फतह करने के बाद अब्दुल अजीज की बादशाहत इस सारे इलाके पर फैल गई। और इस तरह दुनिया में एक नई
Speaker A
रियासत बनी। द किंगडम ऑफ सऊदी अरेबिया। और अब्दुल अजीज इसका पहला बादशाह। सबसे पहले किंग अब्दुल अजीज ने सऊदी अरब को दो बड़े हिस्सों में डिवाइड किया। एक हिस्सा नजत जिसमें सऊदी खानदान का कैपिटल रियाद था। जिसका गवर्नर उसने अपने बड़े बेटे सऊद बिन
Speaker A
अब्दुल अजीज को बनाया और दूसरा हिस्सा हिजास जहां इस्लाम की सबसे होली साइट्स थी, मक्का और मदीना, और यहां का गवर्नर बादशाह ने अपने दूसरे बेटे को बनाया प्रिंस फैसल। अब जैसे ही सऊदी अरब एक स्टेट बना, सऊदी के
Speaker A
बिल्कुल पास ही एक मुल्क बहरेन में अरब का सबसे पहला ऑयल का कुआं डिस्कवर हुआ। मिडिल ईस्टर्न ऑयल। यह देखकर अब्दुल अजीज ने भी अपने अंग्रेज दोस्तों के साथ मिलकर सऊदी अरब में तेल ढूंढना शुरू किया। लेकिन अगले 6 साल तक
Speaker A
ढूंढने के बाद भी उन्हें ऑयल का एक खतरा भी नहीं मिला। इन्हीं अंग्रेज साइंटिस्ट ने बाद में अपनी किताब में लिखा है कि एक दिन अरब के डेजर्ट से एक गरीब आदमी उनके पास आया और हमें हाथ से पकड़ कर सऊदी अरब
Speaker A
के इलाके दमाम की तरफ लेकर गया। और हमें कहा यहां पर ढूंढो, वो तुम्हें यहीं पर मिलेगी। जो चीज तुम्हें चाहिए वो तुम्हें यहां मिलेगी। और इस तरह सऊदी अरब में दुनिया की सबसे बड़ी ऑयल की डिस्कवरी हुई।
Speaker A
द वर्ल्ड्स लार्जेस्ट सप्लायर ऑफ ऑयल। नाउ जैसे ही सऊदी में ऑयल की डिस्कवरी हुई, अब्दुल अजीज की किस्मत इतनी अच्छी थी कि उसके सिर्फ एक साल बाद दुनिया की सबसे बड़ी जंग शुरू हुई। वर्ल्ड वॉर टू। जिसकी वजह से पूरी दुनिया को ऑयल की सख्त
Speaker A
जरूरत थी। ये देखकर किंग अब्दुल अज़ीज पूरी दुनिया को सऊदी का तेल बेचने लगा। जिसकी वजह से सऊदी अरब की इकॉनमी 2 थाउजेंड टाइम्स बढ़ गई। और अब्दुल अजीज एक गरीब बादशाह था। अब दुनिया का सबसे ताकतवर बादशाह बन गया। इस जंग में वर्ल्ड वॉर 2
Speaker A
में। अब्दुल अजीज जर्मनी के हिटलर के खिलाफ अमेरिका के साथ मजबूती से खड़ा रहा। लेकिन वर्ल्ड वॉर टू खत्म होते ही अब्दुल अजीज के अंग्रेज दोस्तों ने दुनिया में एक नया मुल्क बनाया। इजराइल। जैसे इजराइल के लीडर ने इजराइल की आजादी
Speaker A
का ऐलान किया। ऑफ गॉड। उसके सिर्फ एक दिन बाद ऑलमोस्ट बहुत सारे अरब मुल्कों ने मिलकर इजराइल पर हमला कर दिया। अब जब सारे अरब इजराइल के खिलाफ लड़ रहे थे, दुनिया का सबसे बड़ा अरब बादशाह अब्दुल अजीज चुप करके बैठा हुआ था। अब्दुल
Speaker A
अजीज के पास पैसा तो बहुत था और बहुत बड़ी फौज भी थी। लेकिन फस्तीन को बचाने के लिए अब्दुल अजीज ने कोई भी कदम नहीं उठाया। और सिर्फ 800 सऊदी वालंटियर्स ने जाकर इजराइल के खिलाफ जंग लड़ी। लेकिन पूरे सऊदी
Speaker A
खानदान में सिर्फ एक ही शख्स ऐसा था जिसने फिलस्तीन के लिए आवाज उठाई। अब्दुल अजीज का बेटा प्रिंस फैसल जिसने यूएन में खड़े होकर कहा कि हम इजराइल को नहीं मानते। अब इजराइल तो आजाद हो गया। लेकिन इसके कुछ
Speaker A
ही सालों बाद किंग अब्दुल अजीज अपनी आखिरी सांसें ले रहा था। मरने से पहले अब्दुल अजीज ने अपने दोस्तों से कहा कि काश मेरे बाद सऊदी अरब का बादशाह सऊद नहीं बल्कि फैसल होता। और साथ यह भी कहा कि काश मेरे फैसल जैसे
Speaker A
तीन और बेटे होते। लेकिन फिर भी अपने आखिरी वक्त में अब्दुल अजीज ने फैसल को अपने पास बुलाया। और उससे सात बार कसम ली कि तुम अपने भाई सऊद के साथ वफादार रहोगे। जिसके बाद अब्दुल अजीज के मरते ही उसका बड़ा बेटा
Speaker A
सऊद सऊदी अरब का बादशाह बना। लेकिन आखिर क्यों? क्यों अब्दुल अजीज सऊद की जगह अपने बाद फैसल को बादशाह बनाना...
Speaker A
क्योंकि उसे पता था कि उसका बड़ा बेटा सऊद। एक बहुत ही अय्याश आदमी है। सऊद की चार बीवियां और उसके हरम में 100 से ज्यादा लौंडिया थी और सऊद के टोटल 115 बच्चे थे और उसकी ये सारी फैमिली उसके 24 लग्जरी पैलेसेस में
Speaker A
रहती थी। और सऊद की शराब पीने की आदत का सबको पता था। सऊद ने बादशाह बनते ही सऊदी अरब का सारा खजाना अपने खानदान पर लुटाना शुरू किया। सऊद ने ऐलान किया कि आज के बाद हर शहजादे को खजाने से करोड़ों रुपए दिए जाएंगे।
Speaker A
और सिर्फ यही नहीं सऊद में कर्जे ले लेकर सारे रॉयल शहजादों के लिए $1 बिलियन डॉल के पैलेसेस बनाने का हुक्म दिया। जिससे सऊदी अरब पर कर्जा डबल नहीं बल्कि ट्रिपल से भी बढ़ गया। अब जब सऊद सऊदी अरब का सारा पैसा अपनी
Speaker A
अय्याशियों पर उड़ा रहा था। उसके खानदान में सिर्फ एक शख्स ऐसा था जो उसे बार-बार इस सब से रोक रहा था। सऊद का भाई शाह फैसल। लेकिन सऊद ने शाह फैसल की बातें नहीं मानी क्योंकि उसे पता था कि हम जितना भी कर्जा
Speaker A
लें हमें कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन यह उसकी बहुत बड़ी गलतफहमी थी। क्योंकि बहुत जल्द सऊद का सारा गुरूर टूटने वाला था। अब तक दुनिया में ऑयल सिर्फ सऊदी और कुछ ही बाकी कंट्रीज में था। लेकिन आहिस्ता-आहिस्ता दुनिया के बाकी इलाकों
Speaker A
में भी ऑयल डिस्कवर होना शुरू हुई। जिससे दुनिया में ऑयल की सप्लाई तेजी से बढ़ने लगी। अब जब ऑयल की सप्लाई पूरी दुनिया में बहुत ही ज्यादा बढ़ गई तो ऑफ कोर्स ऑयल की प्राइस नीचे गिरने लगी और सऊदी अरब के
Speaker A
खजाने खाली होने लगे। अब सऊद फंस चुका था क्योंकि उसने कर्जे बहुत ज्यादा ले लिए थे और उन्हें वापस करने के लिए सऊद के पास पैसे नहीं थे। लेकिन इस सब के बाद भी सऊद अपनी अय्याशी की जिंदगी गुजारता रहा। यह
Speaker A
देखकर सऊद को उसके भाई फैसल ने बहुत समझाया कि तुम्हारी इन अय्याशियों से यह मुल्क तबाह हो जाएगा। लेकिन सऊद ने फैसल की बात नहीं मानी। आखिर फैसल ने गुस्से में आकर अपनी प्राइम मिनिस्टर की पोस्ट से रिजाइन कर दी और सऊदी अरब छोड़कर चला गया।
Speaker A
फैसल के जाने के बाद सऊदी अरब के हालात और भी ज्यादा खराब हो गए और सिर्फ 2 सालों में सऊदी अरब तारीख में पहली बार बैंकरप्ट होने के बिल्कुल करीब खड़ा था। यह सब देखकर सबको समझ आ गई कि अब सऊदी अरब को
Speaker A
तबाह होने से सिर्फ एक ही आदमी बचा सकता है। शहजादा फैसल। यह देखकर सऊदी खानदान और वहाबी खानदान ने मिलकर फैसल के सामने हाथ जोड़े कि आप प्लीज अपने भाई सऊद को हटाकर खुद सऊदी अरब के बादशाह बन जाए। वरना यह मुल्क तबाह हो
Speaker A
जाएगा। अब आप ही हमारी मदद कर सकते। लेकिन फैसल ने कहा नहीं मैं ऐसा नहीं कर सकता क्योंकि फैसल को वो दिन याद था जब उसने अपने बाप अब्दुल अजीज के सामने कसम खाई थी कि वो हमेशा सऊद के साथ वफादार रहेगा। इसीलिए
Speaker A
फैसल ने कहा कि नहीं बादशाह सऊदी ही रहेगा। मैं उसके अंदर प्राइम मिनिस्टर बनकर सऊदी अरब को बचाने की कोशिश करूंगा। सऊद ने फैसल की यह ऑफर एक्सेप्ट कर ली और सारी ताकत प्राइम मिनिस्टर फैसल के हवाले कर दी। फैसिल ने आते ही सबसे पहले शहजादों
Speaker A
की सारी अयाशियां खत्म कर दी। उनको दिए जाने वाले करोड़ों रुपए बंद कर दिए। और इन शहजादों के लग्जरी पैलेसेस छीनकर वहां गवर्नमेंट ऑफिसेस बनाए और सबसे बड़ा काम फैसल ने यह किया कि तारीख में पहली बार सऊदी अरब से स्लेवरी खत्म कर दी।
Speaker A
शाह फैसल ने अपने खजाने से हर गुलाम के मालिक को $2000 देकर उसे आजाद कर दिया। इस तरह एक ही दिन में हजारों गुलाम आजाद हो गए। और सऊदी की इकॉनमी ठीक करने के लिए शाह फैसल ने एक ताकतवर आदमी से कर्जा भी लिया।
Speaker A
जो उस वक्त सऊदी का सबसे अमीर आदमी था। जिसका नाम था मोहम्मद बिन लादिन। फैसल ने पूरी दुनिया से इस्लामिक स्कॉलर्स को सऊदी बुलाया ताकि यह स्कॉलर्स सऊदी के एलट खानदान के बच्चों को इस्लाम सिखा सके। बाय द वे इन्हीं इस्लामिक स्कूल्स में उसी
Speaker A
सऊदी के सबसे रिच आदमी मोहम्मद बिन लादिन का बेटा भी पढ़ता था। उससामा बिन लादिनसामाइ फैसल के इन जबरदस्त कामों से अब सऊदी अरब दोबारा मजबूत होने लगा। लेकिन पूरी दुनिया को अच्छी तरह पता था कि सऊद सिर्फ नाम का
Speaker A
बादशाह है और सारी ताकत असल में फैसल के पास है। इस सब के दौरान किंग सऊथ अमेरिका में आराम से बैठा हुआ था। लेकिन जब एक साल के बाद वो वापस सऊदी आया और वापस आकर उमरा करने के लिए गया। लेकिन उमरा करने के
Speaker A
दरमियान ही उसे समझ आ गई कि अब लोग उसे वो इज्जत नहीं दे रहे जो एक बादशाह को मिलनी चाहिए। और उसे समझ आ गई कि अब लोग उसे बादशाह समझते ही नहीं है। और यहां से सऊद आहिस्ता-आहिस्ता अपने भाई फैसल से नफरत
Speaker A
करने लगा। और सिर्फ यही नहीं बल्कि उसके अय्याश बेटे उसे फैसल के खिलाफ भड़काने लगे। क्योंकि फैसल ने आते ही इन सारे शहजादों की अय्याशियां खत्म कर दी थी। तो अब सऊद और उसके बेटे मिलकर फैसल को हटाने
Speaker A
की साजिश करने लगे। सऊद और उसके बेटे पैसे देकर लोगों को फैसल के खिलाफ करने लगे। जिसका फैसल को अच्छी तरह पता था। लेकिन फैसल ने बादशाह के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया। असल मसला तब बना जब सऊद ने फैसल की
Speaker A
तरफ एक लेटर भेजा जिसमें लिखा था फैसल तुम अपनी औकात में रहो और याद रखो कि बादशाह मैं हूं। और मैं तुम्हें हुक्म देता हूं कि मेरे दो बेटों को सऊदी अरब के टॉप मिनिस्टर्स बनाओ। वरना मैं अपनी रॉयल फौज भेजकर
Speaker A
तुम्हें गिरफ्तार कर लूंगा। जैसे ही फैसल ने बादशाह का यह खत पढ़ा, उसने ये खत अपने भाई को दिया जिसने सीधा जाकर बादशाह के मुंह पर यह खत फाड़ दिया। अपनी यह बेइज्जती देखकर बादशाह को बहुत गुस्सा आया और उसने फौरन अपनी रॉयल फौज
Speaker A
फैसल को गिरफ्तार करने के लिए उसके महल की तरफ भेज दिया। बादशाह की रॉयल फौज ने जाकर फैसल के महल को हर तरफ से घेर लिया। लेकिन फनी बात यह है कि फैसल के पास इतनी ताकत थी और उसका इतना रोप था कि जैसे ही
Speaker A
फैसल अपने महल से बाहर निकला। बादशाह की फौज की काम पे टांगने लगे। और उन्होंने फैसल को देखकर उसे गलती से सलूट कर दिया। जिसे देखकर फैसल इन गार्ड्स पर हंसने लगा। लेकिन फिर भी ये गार्ड्स फैसल को गिरफ्तार करने के लिए खड़े रहे। यहां
Speaker A
तक कि कहा जाता है कि बादशाह ने फैसल को मारने की कोशिश भी की। यह सब देखकर आखिर फैसल ने अपने बाप से की हुई कसम तोड़ दी। और कहा अब और बस है। सऊद सारी हदें पार कर चुका है।
Speaker A
अब सऊद के पास तो सिर्फ थोड़े से रॉयल गार्ड्स थे। लेकिन सऊदी अरब की पूरी फौज फैसल को अपना लीडर मानती थी। तो सबसे पहले फैसल ने हुकुम दिया कि सारे पैलेसेस से हमारी औरतों और बच्चों को निकाल दिया जाए।
Speaker A
क्योंकि अब फैसला तलवार से होगा। फैसल के एक ही इशारे से पूरी सऊदी फौज तेजी से बादशाह के महल की तरफ बढ़ने लगी और बादशाह के महल को हर तरफ से घेर लिया। अब फैसल और सऊद एक स्टैंड ऑफ में खड़े थे। लेकिन फैसल
Speaker A
की फौज बादशाह से बहुत ज्यादा थी। इसीलिए बादशाह अपनी फौज को लेकर पीछे हट गया। और हालात इतने बिगड़ चुके थे कि अब इन दोनों भाइयों फैसल और सऊद का फैसला करने के लिए सऊदी अरब का मुफ्ती ए आजम मक्का से कैपिटल
Speaker A
की तरफ आया। जो वहाबी खानदान का लीडर था। सऊद ये देखकर हैरान रह गया कि उसका अपना खानदान और सऊदी अरब के सारे उलमा बादशाह को छोड़कर फैसल के साथ खड़े थे। लेकिन क्यों? आखिर क्यों सब बादशाह को छोड़कर
Speaker A
फैसल के साथ खड़े थे? इसकी दो बड़ी रीज़ंस हैं। एक तो फैसल ऑफ कोर्स एक बहुत ही जहीम और जबरदस्त लीडर था। लेकिन इसकी एक और भी इंपॉर्टेंट वजह थी। इस सब से 200 साल पहले अरब के दो बड़े खानदान सऊद और वहाबी
Speaker A
खानदान ने मिलकर पहली सऊदी रियासत बनाई थी। और आज तक यही दो खानदान सऊदी अरब के सबसे पावरफुल खानदान थे। और फैसल ऐसा अकेला आदमी था। जो इन दोनों खानदानों का शहजादा था। क्योंकि फैसल का बाप अब्दुल अजीज सऊद खानदान से था। और उसकी मां तरफा
Speaker A
मोहम्मद बिन अब्दुल वहाब के खानदान से थी। इसीलिए अब दोनों खानदानों ने मिलकर बादशाह सऊद के खिलाफ शहजादे फैसल को सपोर्ट किया। आखिर यह सब देखकर फाइनली सऊद अपने तख्त से हट गया और शहजादा फैसल सऊदी अरब का नया
Speaker A
बादशाह बना। किंग डेजर्ट वारियर। और बादशाह बनते ही फैसल ने अपनी पहली स्पीच दी। और कहा कि ऐ लोगों मुझे अपना बादशाह नहीं बल्कि अपना दोस्त और नौकर समझो। क्योंकि तुम्हारा बादशाह मैं नहीं बल्कि इस पूरी कायनात का सिर्फ एक ही बादशाह है।
Speaker A
और मेरा यह तख्त कोई तख्त नहीं। तख्त भी सिर्फ अल्लाह का ही है। अब फैसल बादशाह तो सऊदी अरब के उलमा के सपोर्ट से बना था। लेकिन बादशाह बनते ही शाह फैसल ने कुछ ऐसे काम किए जिससे उलमा फैसल के खिलाफ होने
Speaker A
लगे। फैसल ने बादशाह बनते ही लड़कियों के स्कूल्स, यूनिवर्सिटीज और इवन सऊदी अरब का पहला टीवी चैनल भी खोला जिसमें मेल एंकर्स तो थे ही साथ ही एक फीमेल एंकर भी थे। लेकिन सऊदी अरब के उलमा यह सब बर्दाश्त
Speaker A
नहीं कर सकते थे। यहां तक कि एक दिन एक यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ने सऊदी न्यूज़पेपर में एक आर्टिकल लिखा जो एक बहुत ही सिंपल सी बात थी कि जमीन हमेशा सूरज के गिर्द घूमती है। सूरज जमीन के गिर्द नहीं।
Speaker A
यह न्यूज़पेपर पूरे सऊदी अरब में फैल गया। लेकिन जब इस आर्टिकल का सऊदी अरब के बड़े मुफ्ती शेख बिनबाज को पता चला तो उन्होंने हैरान किया कि यह सब बिल्कुल झूठ है। और फिर खुद न्यूज़पेपर में आर्टिकल लिखा कि
Speaker A
जमीन सूरज के गिर्द नहीं बल्कि सूरज जमीन के गिर्द घूमता है। जमीन तो साकिन है बेटा। शेख बिनबाज का ये आर्टिकल सिर्फ सऊदी में नहीं बल्कि पूरी दुनिया में फैल गया। जिसके बाद पूरी दुनिया में लोग सऊदी अरेबिया और उसके उलमा पर हंसने लगे और इसी
Speaker A
के साथ शाह फैसल का भी मजाक उड़ने लगा। जैसे ही फैसल को यह बात पता चली उसने हुक्म दिया कि जिन न्यूज़पेपर्स में यह बात छपी है उन सों को जमा करके आग लगा दी जाए। जिससे सऊदी उलमा और भी ज्यादा फैसल
Speaker A
के खिलाफ खड़े होने लगे। बाय द वे इस सब के 20 साल बाद एक सऊदी शहजादा पहली बार स्पेस गया और वहां उसने खुद अपनी आंखों से दुनिया को घूमते हुए देखा और वापस आकर उसने यह बात मुफ्ती आजम को बताई जिसके बाद
Speaker A
शेख बिनबास ने अपनी गलती एक्सेप्ट की और उस पर सबसे माफी मांगी। इन शॉर्ट उस जमाने के सऊदी उलमा इतना सख्त थे कि उन्होंने इवन वैनिला आइसक्रीम को भी हराम कह दिया था। लेकिन आखिर सऊदी उलमा और फैसल की जंग तब
Speaker A
शुरू हुई जब उसने सऊदी का पहला टीवी चैनल बनाया। एंड ऑफ कोर्स सऊदी उलमा तो टीवी को हराम समझते थे। तो वो हर तरफ टीवी के खिलाफ प्रोटेस्ट करने लगे। यहां तक कि एक शहजादे ने जाकर फैसल के टीवी स्टेशन पर
Speaker A
हमला कर दिया और वहां पुलिस ऑफिसर्स पर फायरिंग करने लगा। इसी फायरिंग के दौरान एक पुलिस ऑफिसर ने अपने आप को बचाने के लिए इस सऊद खानदान के शहजादे को गोली मार दी और वो मर गया। जो एक बहुत ही खतरनाक
Speaker A
बात थी। इस शहजादे का बाप सीधा अपने भाई बादशाह फैसल के पास गया और उसे कहा यह पुलिस वाला मेरे हवाले करो ताकि मैं इसका सर काट दूं। लेकिन फैसल ने कहा नहीं। पुलिस वाला तो बस अपनी ड्यूटी कर रहा था।
Speaker A
गलती तुम्हारे बेटे ने की थी। और जब तक मैं सऊदी का बादशाह हूं जो भी कानून तोड़ेगा चाहे वो शहजादा हो या कोई आम आदमी उसे सजा मिलकर रहेगी। मतलब अब फैसल ने एक आम पुलिस वाले को बचाने के लिए अपने ही खानदान सऊद खानदान
Speaker A
के साथ दुश्मनी ली थी। इस शहजादे की मौत को याद रखें क्योंकि इसी शहजादे की मौत की वजह से आगे जाकर शाह फैसल को भी शहीद किया गया था। ये सब तो सऊदी के अंदर हो रहा था। लेकिन
Speaker A
सऊदी अरब के बाहर भी फैसल आहिस्ता-आहिस्ता एक इंटरनेशनल लीडर बन गया। वेलकम टू डिग्निफाइड मिडिल ईस्टर्न रूलर। क्योंकि जैसे ही फैसल बादशाह बना उसके कुछ ही अरसे बाद एक बहुत बड़ी जंग शुरू हुई। पाकिस्तान वर्सेस इंडिया। व्हाई द इंडियंस आर सोश टू प्रेसिपिटेट
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दिस वॉर। जिसमें फैसल ने पाकिस्तान को फुल सपोर्ट किया, और पाकिस्तान की फौज की मदद के लिए सस्ता तेल भेजने लगा, जिससे पाकिस्तान और सऊदी एक दूसरे के बहुत ही करीब आने लगे। और सिर्फ यही नहीं बल्कि पाकिस्तान और इंडिया की जंग के बाद एक और
Speaker A
जंग भी हुई। इजराइल और अरबों की जंग। अरब स्टेट्स वेंट टू वॉर विथ द इजराइल। अब इजराइल के साथ पहली जंग में फैसल के बाप अब्दुल अजीज ने फस्तीनियों की कोई मदद नहीं की थी। लेकिन अब जब फैसल सऊदी अरब का
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बादशाह था, उसने अपनी 20,000 की फौज के साथ फस्तीन और अरबों की मदद की। लेकिन फैसल की बहुत कोशिश के बाद भी अरब इजराइल से यह जंग हार गए। और इतनी बुरी तरह से हारे कि इस जंग के बाद इजराइल का साइज तीन
Speaker A
गुना बढ़ गया। इजराइल से यह जंग बुरी तरह हारने के बाद कहा जाता है फैसल को इतना दुख हुआ कि किसी ने भी इस हार के बाद फैसल को कभी हंसते हुए नहीं देखा। और फैसल हर टाइम सिर्फ एक ही टेंशन में था कि किस तरह
Speaker A
अब इजराइल से बदला लिया जाए। इजराइल ने इस जंग में जिन मुसलमान मुल्कों को तबाह किया था फैसल ने अपने खजाने से उन सारे मुसलमान कंट्रीज को दोबारा अपने पैरों पर खड़ा किया और यहां से फैसल पूरी दुनिया से
Speaker A
फाइटर जेट्स, टैंक्स, और वॉर शिप्स खरीदने लगा। ताकि सऊदी फौज को ताकतवर बनाकर फैसल इजराइल से बदला ले सके। अब जब फैसल इजराइल से बदला लेने की प्लानिंग कर रहा था। अचानक दुनिया में एक ऐसा वाक्या हुआ जिसने
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पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया। एक दिन एक क्रिश्चियन आदमी ने जेरूसलम में मुसलमानों की तीसरी सबसे होली साइट मस्जिद अक्सा को आग लगा दी। जिससे पूरी दुनिया के मुसलमान इजराइल के खिलाफ खड़े हुए। इस क्रिश्चियन ने मस्जिद-ए-असा के अंदर
Speaker A
सलाहाउद्दीन अयूबी के मिंबर को आग लगाई थी। यह वो मेंबर था जिसे सलाहाउद्दीन अयूबी ने 800 साल पहले खुद इस जगह पर रखा था और अब यह मेंबर जलकर राख हो चुका था। और आहिस्ताआहिस्ता यह आंख इतनी बढ़ गई कि
Speaker A
मस्जिद-ए-असा की छत का एक हिस्सा भी गिर गया। इस सब के बाद जब उस क्रिश्चियन से पूछा गया कि तुमने आखिर ऐसा क्यों किया? तो उसने जवाब दिया कि मैंने यह इसलिए किया कि जीसस क्राइस्ट दुनिया में तभी आएंगे जब
Speaker A
मस्जिद अक्सा तबाह हो जाएगी। लेकिन अब इजराइल की हुकूमत की डिटाई देखें कि मस्जिद अक्सा को आग लगाने के बाद भी इजराइल की अदालत ने इस आदमी को कोई सजा नहीं दी। और कहा कि यह आदमी कोई टेररिस्ट नहीं
Speaker A
बल्कि एक पागल है। लेकिन अब अगर यही सब किसी मुसलमान ने किया होता तो पूरी दुनिया ने मिलकर उसे टेररिस्ट कहना था। इस्लाम डस नॉट डिर्व टू कॉल इटसेल्फ अ रिलजन ऑफ़ पीस। इस्लाम इज नॉट अ रिलजन ऑफ़ पीस।
Speaker A
मतलब हमारा टेररिस्ट टेररिस्ट और तुम्हारा टेररिस्ट पागल। अब जब इस आदमी को कोई सजा नहीं मिली। पूरी दुनिया के मुसलमान हर जगह इजराइल के खिलाफ प्रोटेस्ट करने लगे और सारे मुसलमान इस वक्त दुनिया में सिर्फ एक ही लीडर की तरफ
Speaker A
देख रहे थे। सऊदी अरब के शाह फैसल। तो अब यह सब देखकर फैसल ने पूरी दुनिया के मुसलमान लीडर्स को एक जगह जमा होने का हुकुम दिया और इसी कॉन्फ्रेंस में एक इस्लामिक ऑर्गेनाइजेशन बनाने का ऐलान हुआ जिसका नाम था ओआईसी
Speaker A
जिससे ऑफ कोर्स फैसल मुसलमान दुनिया का सबसे बड़ा लीडर बना। अब फैसल को मौका मिल चुका था कि वो पूरी दुनिया के मुसलमानों को इजराइल के खिलाफ यूनाइट करा। तो अब फैसल मुसलमान लीडर्स के साथ मिलकर इजराइल पर हमले की प्लानिंग करने लगा और
Speaker A
अचानक 1973 में यहूदियों के सबसे बड़े फेस्टिवल यम कपूर के दिन अरब फौजों ने इजराइल पर सरप्राइज़ हमला कर दिया और अरब फौजे हर तरफ से इजराइल के अंदर दाखिल हुए और इजराइल से ये सारे इलाके फतह कर लिए
Speaker A
इजराइल इस जंग के लिए बिल्कुल भी रेडी नहीं था। इसीलिए इजराइल की फौजें आहिस्ता-आहिस्ता मुसलमानों के प्रेशर की वजह से पीछे हटने लगी। यह देखकर किंग फैसल ने मुसलमानों की फौज की तरफ मैसेज भेजा कि आज मेरे बेटों
Speaker A
तुमने हमारा सर फक्र से बुलंद कर दिया। लेकिन अब रुकना नहीं है। इजराइल के खिलाफ आगे बढ़ते रहो। ऐसा लग रहा था कि मुसलमान अब कुछ ही दिनों में इजराइल को बिल्कुल क्रश कर ले। लेकिन यहां इजराइल की मदद के लिए वो आया
Speaker A
जिसका फैसल को डर था। सुपर पावर अमेरिका। द यूनाइटेड स्टेट्स है स्टुड बाय डिसाइड ऑफ़ इजराइल। अरब की फौज से डर कर इजराइल की प्राइम मिनिस्टर ने अमेरिका से मदद की भीख मांगी और अमेरिका से रिक्वेस्ट की कि फौरन हमें
Speaker A
$ बिलियन की एन भेजी जाए। जिस पर अमेरिका ने जवाब दिया कि $ बिलियन डॉलर नहीं यह लो $ बिलियन और जाकर इन अरबों को सबक सिखाओ। इसके साथ अमेरिका ने इजराइल को फाइटर जेट्स, टैंक्स और मशीन गंस भी भेजी। और अमेरिका की इस
Speaker A
मदद से इजराइल दोबारा अरब फौजों को पीछे धकेलने लगा। अब जब इस सबका मुसलमानों के लीडर किंग फैसल को पता चला। इस वक्त मुसलमानों का लीडर किंग फैसल अपने ऑफिस में बैठा हुआ था। जब उसे अमेरिका की इस बदमाशी का बताया गया।
Speaker A
फैसल को अमेरिका की इस हरकत पर इतना गुस्सा आया कि फैसल ने उसी वक्त अपना फोन उठाया और कहा फौरन ऑयल मिनिस्टर को मेरे सामने हाजिर किया जाए। जैसे ही ऑयल मिनिस्टर फैसल के पास पहुंचा उस वक्त रात के 8:00 बज रहे थे और इनकी
Speaker A
मीटिंग शुरू हुई। लेकिन ऑयल मिनिस्टर ने फैसल से कहा कि सऊदी के सारे टीवी चैनल्स 9:00 बजे बंद हो जाते हैं। तो अगर आपने कोई फैसला करना है तो अभी इसी वक्त करना होगा। जिस पर फैसल ने थोड़ा सोचा
Speaker A
और कहा लिखो मैं सऊदी अरब का बादशाह। फैसल बिन अब्दुल अजीज यह हुकुम देता हूं कि अमेरिका की तरफ भेजे जाने वाले सारे ऑयल को रोक दिया जाए। और आज के बाद अमेरिका को अरब की तेल का एक
Speaker A
खतरा भी नहीं मिलेगा। अरब में जिसके पास भी ऑयल था उन सब ने फैसल के हुकुम पर लब्बैक का और अमेरिका की तरफ तेल भेजना बंद कर दिया। और अमेरिका खत्म। बाय-बाय। टाटा गया। क्योंकि अमेरिका अपना 80% ऑयल अरब कंट्रीज
Speaker A
से खरीदता था। यह अमेरिका के लिए इतना बड़ा झचका था कि वर्ल्ड वॉर टू के बाद अमेरिका की इकॉनमी इतनी तेजी से कभी नहीं गिरी थी। लेकिन फिर भी अमेरिका ने अपने दोस्त इजराइल का साथ नहीं छोड़ा और
Speaker A
अमेरिका की मदद से इजराइल अरबों से यह जंग जीत गए। जिसके बाद ऑफ कोर्स अमेरिका ने फैसल से कहा कि अब जंग खत्म हो चुकी है। तो अब ऑयल की यह पाबंदी खत्म कर दो। लेकिन फैसल इतना गुस्से में था कि उसने कहा नहीं। जब तक
Speaker A
तुम इजराइल को सपोर्ट करोगे तब तक मैं तुम्हें तेल नहीं बेचूंगा। और यहां से फैसल ने अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया को अपनी असल ताकत दिखाई। फैसल ने अरब ऑयल को एक वेपन में बदल दिया। जिससे अमेरिका की इकॉनमी बिल्कुल टूट गई।
Speaker A
अमेरिका में लोगों के पास गाड़ियां चलाने के लिए भी तेल नहीं था। दिस हैप्स अस बल्कि पेट्रोल स्टेशंस में बड़ा-बड़ा लिखा होता था कि तेल को छोड़ो गॉड को याद करो और अमेरिका जैसी सुपर पावर कंट्री में पहली बार लोड शेडिंग और ब्लैक आउट्स होने
Speaker A
लगे और लोग दोबारा कैंडल्स और लकड़ियां जलाने लगे। अमेरिका में 5 लाख लोगों की जॉब्स चली गई और सबसे बड़ी बात यह थी कि जिस साल फैसल ने अमेरिका पर पाबंदी लगाई उस साल अमेरिका का सबसे बड़ा फेस्टिवल
Speaker A
क्रिसमस मनाया ही नहीं गया बल्कि क्रिसमस की रात को जो हमेशा लाइट से भरी होती थी। इस बार पूरे अमेरिका में सिर्फ और सिर्फ अंधेरा था। फैसल की ताकत का अंदाजा सिर्फ वेस्ट में अमेरिका को नहीं बल्कि ईस्ट में जापान को
Speaker A
भी हुआ और जापान में कहा जाने लगा कि एटम बम के बाद फैसल की पाबंदी जापान के लिए सबसे बड़ा क्राइसिस था। अब जब अमेरिका के हालात बहुत ही खराब हो गए। अमेरिका के बर्दाश्त की हद खत्म हो गई
Speaker A
और अमेरिका में सीक्रेट मीटिंग्स होने लगी जिसमें अमेरिकनंस यह प्लान करने लगे कि अगर फैसल ने यह पाबंदी खत्म नहीं की तो अमेरिका अपनी पूरी ताकत के साथ फैसल के सऊदी अरब पर हमला कर देगा और उसे हटाकर किसी और शहजादे को तख्त पर
Speaker A
बिठा देगा। जब फैसल को अमेरिका की इस प्लानिंग का पता चला, उसने अमेरिका को क्लियर मैसेज भेजा कि अगर तुमने मुझ पर हमला किया तो मैं अरब के सारे तेल के कुओं को आग लगा दूंगा जिससे तुम्हारा अमेरिका तबाह हो जाएगा। यह
Speaker A
सुनकर अमेरिका ने फैसल से कहा कि अगर तुम ऐसा करोगे तो तुम्हारा क्या होगा? जिस पर फैसल ने कहा कि हम तो हमेशा से डेजर्ट के गरीब लोग थे। हम पहले भी ऊंटों और खजूरों से गुजारा करते थे और अब भी दोबारा वही
Speaker A
करेंगे। लेकिन तुम लोग तेल के बगैर जिंदा भी नहीं रह सकोगे। जिसके बाद फैसल ने अपनी फेमस स्पीच की और कहा ऐ लोगों मैं वो बादशाह नहीं हूं। जो ऑफिस में बैठकर टेलीफोन पर जंग करेगा। बल्कि जब जंग का वक्त आएगा।
Speaker A
तुम सब मुझे फौज के फ्रंट पर देखोगे। और मुझे पता है कि हमारे इन खतरनाक फैसलों से वेस्ट और ईस्ट सब हम पर गुस्सा है। लेकिन मुझे इस सब की कोई परवाह नहीं। फिलस्तीन की आजादी के लिए हम हर हद तक जाएंगे।
Speaker A
अगर पूरी अरब दुनिया मिलकर इजराइल को एक्सेप्ट कर ले तब भी मैं अकेला इजराइल को कभी नहीं मानूंगा। पूरी दुनिया के मुसलमान यूनाइट हो गए हैं और इनका लीडर है फैसल। मुसलमानों की इसी यूनिटी को इसके कुछ ही
Speaker A
अरसे बाद ओआईसी की सबसे बड़ी कॉन्फ्रेंस में देखा गया जो पाकिस्तान के शहर लाहौर में थी। और मुसलमान दुनिया के सारे बड़े लीडर्स कदाफी भुट्टो शेख मुजीब यासिर अरफान सब शामिल थे जहां पहली बार एक इस्लामिक एटम बम की बात की गई।
Speaker A
इसी कॉन्फ्रेंस में एक बहुत ही फेमस पिक्चर ली गई जिसमें सारे बड़े लीडर्स मिलकर एक मस्जिद में बैठे हुए हैं। लेकिन अजीब बात यह है इस पिक्चर में जितने भी लीडर्स हैं उन सबको एक-एक करके आगे जाकर मार दिया गया। जैसे ही फैसल ओआईसी की
Speaker A
मीटिंग से वापस आया। फैसल की ताकत इतनी बढ़ चुकी थी कि आखिर अमेरिका ने फैसल के सामने घुटने टेक दिए। और अमेरिका ने फैसल के कहने पर इजराइल पर प्रेशर डालना शुरू किया कि वो अरबों के साथ डील कर लें।
Speaker A
जिसके बाद अमेरिका, यूरोप, जापान सब मिलकर फैसल के सामने हाथ जोड़कर तेल की भीख मांगने लगे। तो अब जब फैसल की डिमांड्स पूरी हो गई, उसने अमेरिका से पाबंदी हटा दी। लेकिन पाबंदी हटाने के बाद भी तेल की
Speaker A
प्राइस नीचे नहीं आई। इसीलिए फैसल के दौर में सऊदी की इकॉनमी तेजी से बढ़ने लगी। जब फैसल सऊदी अरब का बादशाह बना तब यहां की इकॉनमी सिर्फ 2 बिलियन डॉलर्स थी। लेकिन अब फैसल ने उसे 2 बिलियन डॉलर्स से 50
Speaker A
बिलियन तक पहुंचा दिया था। कहा जाता है सऊदी अरब में प्रॉपर्टी की प्राइसेस हर हफ्ते डबल होती रहती थी। और सऊदी अरब में कंस्ट्रक्शन इतनी तेजी से हो रही थी कि लोग सीमेंट कश्तियों में नहीं बल्कि हेलीकॉप्टर्स में मंगवा रहे थे। और यहीं
Speaker A
से सऊदी अरब के लोग दुनिया के सबसे अमीर लोग बन गए। अब जब फैसल अपनी ताकत की पीक पर था, कहा जाता है कि ये स्पीच उसकी जिंदगी की आखिरी स्पीच है। हम किस चीज का इंतजार कर रहे
Speaker A
हैं? दुनिया की गैरत जागने का कहां है दुनिया की गैरत? ए मेरे भाइयों मस्जिद अक्सा तुम्हें बुला रही है। तुम्हारी मदद के लिए रो रही है। हम किस चीज से डर हैं? मौत से। इससे ज्यादा अच्छी मौत और क्या हो सकती
Speaker A
है? जो अल्लाह के राह में लड़ते हुए आए। और मेरी अल्लाह से दुआ है कि अगर मेरे हाथों से फस्तीन आजाद नहीं होता। तो मुझे इस दुनिया में एक लम्हे के लिए भी जिंदा ना रखे। और ऐ अल्लाह मुझे शहादत की मौत दे।
Speaker A
और इसके कुछ ही अरसे बाद जब फैसल एक मजलिस में बैठा हुआ था। एक आदमी ने फैसल को गोली मार दी। लोग शाह फैसल को उठाकर हॉस्पिटल लेकर गए। जहां कहा जाता है फैसल के आखिरी अल्फाज़ यह थे कि मैं अपने कातिल को माफ़ करता हूं।
Speaker A
फैसल की शहादत की खबर पूरी दुनिया में आग की तरह फैली और हर तरफ लोग रोने लगे। और दुनिया के सारे लीडर्स फैसल के जनाजे के लिए सऊदी अरब पहुंचे। जिसके बादशाह फैसल की नमाज़ जनाजा पढ़ाई गई। इल्लाह।
Speaker A
जब फैसल को दफनाने के लिए ले जाया जा रहा था। लोग उसकी गाड़ी को घेर कर चीख-चीख कर रो रहे थे। और यह सारा कुछ उसी टीवी चैनल पर दिखाया जा रहा था जिसे फैसल ने शुरू किया था और
Speaker A
एंकर रो-रो कर कह रहा था कि आज पूरी उम्मते मुस्लिमा का बाप मर चुका है। और इस तरह बादशाह फैसल को दफना दिया गया। अब जिस आदमी ने फैसल को मारा था वो कोई और नहीं बल्कि फैसल के अपने भाई का बेटा था।
Speaker A
इसीलिए जब वो गन लेकर शाह फैसल की तरफ जा रहा था। किसी ने उसे नहीं रोका क्योंकि वो खुद भी एक शहजादा था। और जैसे ही फैसल अपने भतीजे से मिलने के लिए उसके पास गया, फैसल के भतीजे ने उसके सर पर दो गोलियां
Speaker A
मारी और फैसल को शहीद कर दिया। शाह फैसल को मारने के बाद जब उसके भतीजे से पूछा गया कि तुमने आखिर क्यों ऐसा किया? तो उसने एक बहुत ही स्टूपिड और अजीब जवाब दिया। उस शहजादे ने कहा, आज से 10 साल पहले।
Speaker A
मेरे एक भाई ने फैसल के बनाए हुए टीवी स्टेशन पर हमला किया था। जिसके बाद पुलिस वालों ने मेरे भाई पर फायरिंग करके उसे मार दिया था। और मुझे गुस्सा तब आया जब फैसल ने मेरे भाई का बदला लेने के बजाय उस
Speaker A
पुलिस वाले को माफ कर दिया। और आज मैंने 10 साल बाद फैसल को मारकर अपने उसी भाई का बदला पूरा कर दिया है। अब क्वेश्चन यह है कि इस शहजादे को अपना भाई 10 साल बाद कैसे याद आया? और पिछले 10 साल से यह शहजादा था
Speaker A
किधर? यह शहजादा पिछले 10 साल से अमेरिका में एक अय्याशी की जिंदगी गुजार रहा था। और वहां क्लब्स, ड्रग्स, और गर्लफ्रेंड पर अपने सारे पैसे उड़ा रहा था। बल्कि यह इतना अयाश था कि एक बार अमेरिका में इस शहजादे को ड्रग्स यूज़
Speaker A
करने पर गिरफ्तार भी किया गया था। मतलब 10 साल तक इसको अपने भाई के मरने की कोई परवाह नहीं थी। फैसल पर हमले से कुछ ही अरसा पहले यह अमेरिका से वापस सऊदी आया। आज दुनिया के बहुत सारे लोग समझते हैं कि
Speaker A
फैसल को किसी बदले की वजह से नहीं बल्कि अमेरिका और इजराइल पर पाबंदी की वजह से मारा गया था। क्योंकि अगर देखा जाए फैसल के मरते ही सबसे बड़ा फायदा अमेरिका और इजराइल को ही हुआ था। क्योंकि फैसल की
Speaker A
शहादत के फौरन बाद इजराइल और अरबों ने दोस्ती का हाथ मिलाया और सारे अरब कंट्रीज आहिस्ता-आहिस्ता इजराइल को एक्सेप्ट करने लगे। और फैसल के बाद आज तक किसी भी सऊदी बादशाह ने दोबारा अमेरिका के सामने सर उठाने की हिम्मत भी नहीं की। डू आई लाइक।
Speaker A
फैसल की शहादत के कुछ ही घंटों बाद सऊदी खानदान ने अपना नया बादशाह सेलेक्ट किया किंग खालिद बिन अब्दुल अजीज। जिसने आते ही हुकुम दिया कि फैसल पर हमले करने वाले शहजादे का सबके सामने सर काट दिया जाए। लेकिन नए बादशाह के आते ही
Speaker A
मुसलमानों की तारीख का सबसे खतरनाक वाकया पेश आया। काबा पर हमला।
Topics:शाह फैसलसऊदी अरबमोहम्मद बिन सऊदमोहम्मद बिन अब्दुल वहाबफिलस्तीनब्रिटिश एंपायरउस्मानिया खिलाफततेल की खोजअरब राजनीतिसऊदी खानदान











