कराची में शराब के अवैध कारोबार और इस्लामी मुल्क में शराब की मौजूदगी की सच्चाई।
Key Takeaways
- पाकिस्तान में शराब का अवैध कारोबार व्यापक और संगठित है।
- शराब को सभी मुख्य मजाहिब में हराम माना गया है, फिर भी इसका कारोबार जारी है।
- सरकारी और राजनीतिक संरक्षण के कारण कानून प्रभावी नहीं हो पा रहे।
- शराब की बिक्री और खरीद पर पूरी पाबंदी जरूरी है।
- मीडिया और राजनीतिक हस्तक्षेप इस समस्या को बढ़ावा देते हैं।
What the video covers
- शराब का अवैध कारोबार कराची की गलियों में रात के अंधेरे में चलता है।
- शराब पर पाकिस्तान में पाबंदी के बावजूद यह अरबों रुपए का धंधा है।
- दुनिया के तमाम मजाहिब में शराब को हराम माना गया है, फिर भी पाकिस्तान में शराब का कारोबार चलता है।
- सिंध आबकारी एक्ट के कमजोर कानूनों के कारण शराब की फरोख्त खुलकर होती है।
- सरकारी और राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण शराब के अवैध कारोबार पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा।
- शराब की दुकानें अक्सर बेनामी नामों पर चलती हैं और इनके मालिक बड़े प्रभावशाली लोग होते हैं।
- शराब की खरीद-फरोख्त के लिए पुराने और बोसीदा कानूनों का सहारा लिया जाता है।
- गैर मुस्लिमों को सीमित मात्रा में शराब खरीदने की कानूनी इजाजत है, लेकिन हकीकत में इससे कहीं ज्यादा बिकती है।
- मीडिया और सियासतदान भी इस धंधे में शामिल हैं, जिससे समस्या और गंभीर हो जाती है।
- शराब की बिक्री पर पूरी तरह पाबंदी और कड़े कानून बनाने की जरूरत है।
Chapters
- 00:00शराब का अवैध कारोबार और रात के अंधेरे में लेन-देन
- 01:16मजहिबों में शराब की मनाही और पाकिस्तान का विरोधाभास
- 02:30सिंध आबकारी एक्ट और शराब के कमजोर कानून
- 03:41धार्मिक दृष्टिकोण से शराब की मनाही
- 04:58शराब के सामाजिक और कानूनी प्रभाव
- 06:08राजनीतिक संरक्षण और शराब का माफिया
- 07:19शराब की बिक्री पर पाबंदी और राजनीतिक विवाद
- 08:32गैर मुस्लिमों के लिए शराब की कानूनी सीमा और हकीकत
- 10:03शराब के अवैध कारोबार की जांच और निष्कर्ष
- 11:20समाप्ति: कानून का अमल और इस्लामी मुल्क में शराब की समस्या
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Speaker A
घड़ियों में रात के 2:00 बज चुके हैं। पूरे शहर में सन्नाटा है। नौजवान मोटरसाइकिल सवार अंधेरी गलियों में किसी को ढूंढ रहा है। अचानक वह एक गली के कोने पर रुकता है। एक शख्स पहले ही उसका मुंतजिर है। दोनों हाथ मिलाते हैं।
Speaker A
मोटरसाइकिल पर आने वाला शख्स उसे खामोशी से एक थैली पकड़ाता है। [संगीत] बदले में एक लिफाफा मिलता है और वह फौरन वहां से निकल जाता है। उस थैली में क्या है? कुछ ऐसा जिस पर मुल्क में पाबंदी है, जिसके
Speaker A
बेचने पर सजा है, जिसके इस्तेमाल पर कानून कैद कर सकता है। मगर यह धंधा रुकता नहीं क्योंकि यह सिर्फ एक गली का मामला नहीं, यह हर तरफ फैला हुआ एक [संगीत] जाल है। यह अरबों रुपए की एंपायर है और इस एंपायर की
Speaker A
बुनियादें बहुत गहरी हैं। आपको हॉलीवुड की फिल्मों में हीरो, हीरोइन, विलेन और उसके साथी अक्सर शराब पीते हुए दिखाए जाते हैं। फैमिली के इवेंट्स हो या फास्ट फूड रेस्टोरेंट में गपशप लगाते हुए दोस्त, बल्कि घर में बैठे मां बेटे को भी साथ बैठकर शराब पीते
Speaker A
दिखाया जाता है। आपको लगता है कि ये क्रिश्चियन हैं और ईसाइयत में शराब पीना जायज है। इसी तरह बॉलीवुड की फिल्मों में भी ऐसे मनाजिर आम हैं। आपको लगता है कि हिंदू मजहब ने शराब पीने की इजाजत दी है।
Speaker A
सिखों को भी अक्सर टुन दिखाया जाता है। और यूं आप समझते हैं कि सिवाय मुसलमानों के तमाम ही दुनिया शराब पी सकती है। लेकिन क्या आपको मालूम है कि दुनिया की तमाम मजाहिब चाहे किसी बात पर मुत्तफिक हों या
Speaker A
ना हों, मगर नशा एक ऐसी चीज है जिसको दुनिया की तमाम मज़ाहिब ने गलत करार दिया है। उससे बचने की हिदायत की है। खासकर शराब को एक ऐसा नशा करार दिया गया है जिसका रास्ता मुकम्मल तबाही की तरफ जाता
Speaker A
है। तमाम मज़ाहिब जब इस बात पर मुत्तफिक हैं कि शराब हराम है तो फिर मुमकिन खुदाद इस्लामी जमूरिया पाकिस्तान में शराब का निजाम क्यों है? पाकिस्तान एक ऐसा इस्लामी मुल्क है जहां शराब बनाने की चार फैक्ट्रियां हैं और लाताद दुकानें। सवाल
Speaker A
यह पैदा होता है कि एक इस्लामी मुल्क में शराब का निजाम क्यों मौजूद है? आज हम बात करेंगे इस निहायत अहम और हसास मुद्दे पर और पर्दा उठाएंगे कुछ ऐसे हक़ीकत से जिन्हें शायद कुछ लोग सुनने की ताब ना ला सकें।
Speaker A
लेकिन इससे पहले कि हम आगे बढ़ें हमारे चैनल को जरूर सब्सक्राइब कर लें। और अगर वीडियो पसंद आए तो उसे लाइक और शेयर करना मत भूलिएगा। तो चलिए शुरू करते हैं। पाकिस्तान के सूबे सिंध में शराब और बेयर
Speaker A
की फरोख्त एक सनद बन चुकी है। जिससे बड़े-बड़े नाम पर्दा जुड़े नजर आते हैं। और यह सब सिंध आबकारी एक्ट के कमजोर कानूनों पर खड़ा है। इस हवाले से यह कहा जा सकता है कि अरबों रुपए मालियत के इस धंधे
Speaker A
को चलाने के लिए कायम पाकिस्तान से अब तक बाकायदा कोई कानून साजी ही नहीं की गई। इनका अलमिया यह है कि कोई लॉ नहीं है, कुछ भी नहीं है। सिर्फ एक वर्बली ऑर्डर पे यह चीजें चला रहे हैं। और इतना बड़ा और
Speaker A
खुलेआम मंशियात जिसको मैं खुलेआम ही कहूंगा जिसका कोई लॉ नहीं है। जिसका कोई कानून बना हुआ नहीं है। किसी भी किस्म मजहब में नहीं है। तो, यह पूरा एक माफिया है और यह जानबूझ के हमारी यंग जनरेशन को खराब
Speaker A
कर रहे हैं। शराब की खरीदो फरोख्त पर बात करने से पहले हम आपको बता दें कि इस मुद्दे पर सिंध के वज़ीर मुकेश कुमार चावला को मौके के लिए एक से ज्यादा बार ना सिर्फ कॉल्स की गई बल्कि उनको और उनके तर्जुमान
Speaker A
शब्बीर बाबर को एक सवालनामा भी भेजा गया। मगर उन्होंने उसका कोई जवाब नहीं दिया। [संगीत] शराब को इस्लाम में हराम करार दिया गया है। और कुरान की सूरा मयदा की आयत नंबर 90 और 91 में वाज़ कहा गया है, "ऐ ईमान वालों,
Speaker A
शराब नापाक शैतानी काम है। उससे बचो ताकि तुम फलाह पा सको।" और हदीस में नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया, "जो चीज ज्यादा मिकदार में नशा लाए उसकी थोड़ी मिकदार भी हराम है।" बाइबल में नशे को गुनाह करार दिया गया है। हजरत नूह अलैहिस्सलाम
Speaker A
और हजरत लूत अलैहिस्सलाम के वाक्यात बतौर इबरत मौजूद हैं। ईसाइयत में खबरदार किया गया है कि शराब इंसान को गुमराह करती है। इसी तरह हिंदू मजहब में भी नशावर अशिया को मना किया गया है। चांदोग्य उपनिषद में
Speaker A
शराब पीने को पंच महापातक यानी पांच बड़े गुनाहों में शामिल किया गया है। लेकिन यहां सवाल यह पैदा होता है कि जब तीनों बड़े मज़ाहिब में शराब ममनू है तो पाकिस्तान जैसे इस्लामी मुल्क में इसकी फरोख्त और तैयारी इतनी आसान क्यों? और वो
Speaker A
भी हुकूमती सरपरस्ती में। मुस्लिम आबादियों के अंदर भी जो शराब की खरीदो फरोख्त की दुकानें हैं, यह यकीनी तौर पर हराम और नाजायज हैं। और इसकी शरीयत में किसी किस्म की कोई गुंजाइश और इजाजत नहीं। लिहाजा हुकूमत वक्त पर शरई तौर पर, दीनी
Speaker A
और इस्लामी तौर पर साथ-साथ आईनी और दस्तूरी और कानूनी तौर पर भी लाजिम है कि ये जो मुस्लिम आबादियों के अंदर शराब की दुकानें हैं, इनका लाइसेंस फिलहाल फौरन कैंसिल किया जाए। इस सिलसिले में सियासी जमातों को किरदार अदा करना चाहिए। मजहबी जमातों को
Speaker A
फहाल होना चाहिए। ये शराब जिसके बारे में आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया, तमाम बुराइयों की जड़ है। कैसे खुदा की रहमत आ सकती है जब तमाम बुराइयों की जड़ हमारी सोसाइटी और समाज के अंदर पैवस्त हो। हराम सो हराम है। समझ आई ना? उसको दुनिया
Speaker A
का किसी मजहब में भी हलाल नहीं बताया। जो हराम चीज है वो हराम है। कोई भी धर्म इसको इजाजत नहीं देता है। जो मुकररा किताबें हैं, चार वेद हो गए, रामायण हो गई या हमारे 18 पुराण हो गए हैं,
Speaker A
उनके अंदर कहीं भी नहीं लिखा हुआ है कि शराब पीना जो है हिंदू मजहब में अलाव है। अब शराब लोगों ने अख्तियार कर ली है तो वो फेल जो है उनका हमारे पाप में गिना जाता है। पाकिस्तान में अदालतो के मुताबिक
Speaker A
सुबह-संध शराब और बेयर की फरोख्त के हवाले से सबसे आगे है। और इस सूबे में भी कराची का नंबर पहला आता है। सिंध में शराब और बेयर की फरोख्त को कंट्रोल करने के लिए महकमा एक्साइज एंड टैक्सेशन मौजूद है।
Speaker A
उसके कानून मौजूद हैं। लेकिन शराब फरोख्त करने वाले इन कानूनों की ऐसी धज्जियां उड़ाते हैं जिसकी कोई मिसाल नहीं मिलती। शराब और बेयर की फरोख्त के हवाले से सरकारी वेबसाइट पर और सरकारी इदारों की जानिब से कोई रिकॉर्ड फराम नहीं किया
Speaker A
जाता। जिसकी दुहाई खुद सियासतदान देते हैं। सिंध असेंबली की कायमा कमेटी भी इस हवाले से बेबस है। कहा जाता है कि यह अरबों रुपए का एक ऐसा धंधा है जिसमें अक्सरियत के हाथ रंगे हुए हैं। मजे की बात
Speaker A
बताऊं, इसमें मीडिया से वाबस्ता भी कई चेहरे शामिल हैं। यह सारा खेल सिंध में एक ताकतवर शख्सियत के गिर्द घूमता है। जिसके अपने दर्जनों शराब के स्टोर बताए जाते हैं। और यह तमाम स्टोर उनके बेनामी अफराद के नाम पर हैं। दस्तियाब सरकारी रिकॉर्ड
Speaker A
के मुताबिक सिंध में 178 रिटेल वाइन स्टोर्स हैं और होलसेल स्टोर्स की तादाद 21 है जो कि एल वन और एल टू कहलाते हैं। शराब की यह खरीदो फरोख्त एक मुकम्मल सिस्टम के तहत चलती है। शराब और बियर की
Speaker A
खरीदो फरोख्त को एक पुराने और बोसीदा सिंध आबकारी एक्ट के तहत तहफ्फुज़ फराम किया गया है और यह एक्ट अंग्रेजों ने अपने दौर में अपने लिए बनाया था। इस एक्ट में पाकिस्तान बनने के बाद कुछ तब्दीलियां की गईं। मगर वह भी एक निजाम को ही तहफुज फराम
Speaker A
करती हैं। 1977 में साबिक वज़ीर एआम जुल्फिकार अली भुट्टो ने शराब की फरोख्त पर पाबंदी लगाई। मगर इस वक्त हाल यह है कि उनकी अपनी पार्टी ने सिंध असेंबली में शराब की पाबंदी की मुखालफत कर दी है। सूबे भर में शराब फ़रोख्त करने के तमाम
Speaker A
लाइसेंस को मंसूब किया जाए और फौरन तौर पर शराब की खरीदो फरोख्त पर मुकम्मल पाबंदी आयद की जाए। सर, मैं अपोजिट की अपनी राय हो सकती है। आज थोड़े जज्बाती हैं ये मेरे दोस्त। बात ये है कि बहुत बड़ा
Speaker A
तबका जो है वो महरूम हो जाएगा। जुल्फिकार अली भुट्टो शहीद की तो पीपल्स पार्टी नहीं है। ये पीपल्स पार्टी है। इसे हेड करते हैं आसिफ अली ज़दारी साहब जो कि प्रेसिडेंट ऑफ पाकिस्तान हैं। चेयरमैन इनके बिलावल भुट्टो ज़दारी साहब हैं। और जो
Speaker A
सिंध हुकूमत है वो सिंध हुकूमत माशाल्लाह से अपनी ही लीडरशिप की जो बिलावल साहब हैं और आसिफ अली ज़दारी साहब हैं। उनकी बात सुनने को तैयार नहीं होती। और यह बात मैं असेंबली के एहवान में बता चुका हूं प्रूफ
Speaker A
के साथ कि आप लोग अपनी लीडरशिप को भी जो है वह ठीक बात नहीं बताते हैं। ऐसे ऐसे मंसूबों के इफ्तदा करा देते हैं जिसका प्रैक्टिकली जिसका हकीकत से कोई ताल्लुक नहीं होता। भुट्टो की जो पार्टी उनका जो
Speaker A
नजरिया था ये पीपल्स पार्टी उस नजरिए पे है या उस भुट्टो की पार्टी है या नहीं। जब आपके कायद जुल्फिकार अली भुट्टो साहब जो पीपल्स पार्टी के थे उन्होंने एक बैंड लगाया और आप इस वक्त इदार में हो और 28वीं
Speaker A
तर 18वीं तरमीम में आपके पास सारे पावर्स हैं तो फिर क्यों भुट्टो हुकूमत के बाद जनरल जिया की हुकूमत में एक नया निजाम लाया गया। इस निजाम के तहत गैर मुस्लिमों को इनके मखसूस प्रोग्राम्स के दिनों में शराब और बेयर की मखसूस मिकदार खरीदने की
Speaker A
इजाजत दी गई। पुराने कानून को एक माफिया निजाम के तहत मखसूस लोग अपने मफाद के लिए इस्तेमाल करते हैं। यानी सिंध में शराब और बेयर की फरोख्त भी वाइन स्टोर की आड़ में एक सिस्टम के तहत की जाती है। आज के जदीद
Speaker A
दौर में भी फरोख्त का रिकॉर्ड पुराने रजिस्टर्ड में दर्ज किया जाता है। एक गैर मुस्लिम एक महीने में बियर के 16 केन और 750 एमएल की आठ बोतलें खरीद सकता है। मगर हकीकत में कितनी बोतलें इस एक्ट की आड़ में
Speaker A
बेची जाती हैं। नंबर सुनकर आप दंग रह जाएंगे। तहकीकात के दौरान इस बात का इंकशाफ हुआ कि गुजस्ता साल सिंध में शराब और बेयर की फरोख्त का हजम ₹20 अरब रुपए से ज्यादा था।
Speaker A
में भी कौमी खजाने को अरबों रुपए का नुकसान पहुंचाया गया। शराब और बेयर की फरोख्त के लिए वाइन स्टोर मालिकान पुराने रजिस्टर में दर्ज खातों को ही नए रजिस्टर में मुंतकिल करता रहता है। वो कहते हैं ना कि अगर आपको किसी मरे हुए अजीज से मिलना
Speaker A
हो तो इलेक्शन वाले दिन पोलिंग बूथ पहुंच जाए। मरा हुआ अजीज पहले ही वोट डाल चुका होगा। तो कुछ ऐसा ही इन पुराने रजिस्टर के खातों में होता है। ऐसे अफराद के नाम पर खरीदारी दर्ज होती है जो बरसों पहले
Speaker A
दुनिया छोड़ चुके हैं। जो थोड़ा बहुत रिकॉर्ड मेंटेन करने या कहीं ना कहीं खपाना होता है तो उसके लिए नाम लिख लेते हैं। फर्जी नाम होते हैं वो भी बेचारे। और अब बिल्कुल मैं आपकी बात से एग्री करूंगा कि जी वो जो मर खप गए हैं
Speaker A
उनके भी एनआईसी इस्तेमाल हो रहे होते हैं। मैं तो ये बोल रहा हूं कि वो जो स्टॉक मॉनिटरिंग है वो कौन करेगा? [संगीत] इनपुट और आउटपुट को मैनेज कौन करेगा? उस उसकी मॉनिटरिंग कौन करेगा? भाई मैं अगर एक
Speaker A
अल्कोहल यू नो शराब खाने का मालिक हूं। मैं कितनी ला रहा हूं, कैसे ला रहा हूं, क्यों ला रहा हूं? कोई पूछने वाला नहीं है यहां पे। जनाब देख थोड़ी रहे कोई चेक एंड बैलेंस का मैकेनिज्म थोड़ी है। यहां तो वो
Speaker A
कहते हैं ना वो वाइट में कुछ और हो रहा होता है। ब्लैक में कुछ और हो रहा होता है। अच्छा रिकॉर्ड तो कोई दस्तियाब नहीं है। आप इनकी वेबसाइट पे चले जाएं। आप इनके किसी सेक्रेटरी से बात कर लें, मिनिस्टर
Speaker A
से बात कर लें तो आपको किसी किस्म का कोई जवाब नहीं देगा। अगर आप बात कर रहे हैं तो इसमें तो कानून लागू होता है। इस पे तो लॉ बनते हैं। इस पे तो कुछ भी नहीं है। आप
Speaker A
जिस तरह कह रहे हैं एक रजिस्टर है। आप मुझे बताएं एक रजिस्टर है। रजिस्टर का मतलब यह है कि वो एक्साइज के डॉक्यूमेंशन को पूरा करना कि आज एक स्टोर ने 20 कार्टन की सेल की है। मैं आपको 20 कार्टन की सेल
Speaker A
की है। और दूसरे दिन उसने की है 30 कार्टन की सेल। यह क्या करते हैं? 20 कार्टन के हिसाब से जितने बंदे आते हैं, वह डिवाइड करके उस बंदे ने आठ बोतलें बियर कितनी सेल हुई है उसके हिसाब से उसको एवरेज बना के
Speaker A
उसको क्लोज करके दे देते हैं। भाई यहां आए इतने बंदे आए थे ये ले गए। एक परमिट पे एक जगह शराब मिल सकती है। यहां कोई कानून नहीं है। एक हिंदू पूरे कराची में घूमता रहे। पूरी ट्रक बना ले। अगर धरपार कर का
Speaker A
बंदा मिररपुर खास का हैदराबाद का बंदा कराची से कैसे शराब ले रहा है। सवाल यह पैदा होता है कि अरबों रुपए मालियत की शराब कौन खरीदता है? तो उसका अंदाजा गैर मुस्लिमों के आदादो शुमार से बासानी लगाया जा सकता है। सिंध में
Speaker A
रजिस्टर्ड बालिग मर्द और खवातीन गैर मुस्लिम्स की तादाद 22 लाख से जायद है। और जाहिर है शराब और बेयर की फरोख्त बालिग अफराद के लिए ही जायज है। लिहाजा जो रिकॉर्ड दस्तियाब है उससे तो जाहिर होता है कि गैर मुस्लिम मर्द और खवातीन पानी की
Speaker A
जगह दिन रात शराब और बियर ही पीते हैं। तभी तो सिंध में ₹ अरब रुपए से जायद की बेयर फरोख्त हो गई। या फिर यह हकीकत तस्लीम कर ली जाए कि सबसे बड़े खरीदार हमारे भाई लोग मुसलमान ही हैं। पाकिस्तान
Speaker A
में बल खुसूस सिंध में सबसे ज्यादा आबादी डिवीजन मिरपुर खास में रहती है। वहां वाइन स्टोर की तादाद 10 से 12 है। कराची में उससे 10 20 गुना ऊपर क्यों? कराची में तो इतनी आबादी रहती नहीं है। आप अगर ओवरऑल
Speaker A
अगर देखेंगे सबसे ज्यादा सेल सबसे ज्यादा जो सेल है कराची, हैदराबाद और मिररपुर खास शहर में होती है। अगर कराची में इतनी आबादी है तो हमारे मंदिर देखें तीन चार हैं और उससे 50 गुना ज्यादा वाइन स्टॉल कराची में है।
Speaker A
जितनी भी शराबें अकलियत नहीं यूज़ कर रही। मैं बार-बार मैं आपको वीडियो भी शेयर कर दूंगा। खुलेआम मुसलमानों को दी जा रही है। दूसरा तीसरा जो है वह बैठ के उसकी अल्कोहल की कंजमशन कर रहा होता है। हां लाइसेंसिंग करनी है
Speaker A
तो उसके लिए हिंदुओं का हिंदुओं का एनआईसी इस्तेमाल होता है। उनकी आइडेंटिटी इस्तेमाल होती है। क्रिश्चियंस की इस्तेमाल होती है। बट अल्कोहल की कंजम्पशन में आप देख लें मेजॉरिटी आपको कौन निकलेगा? वो वही लोग निकलेंगे जो इस सूबे में सबसे ज्यादा
Speaker A
मेजॉरिटी में मुसलमान है। माज़रत के साथ एक हकीकत है ये। और इसमें मैं मैं तो बता रहा हूं ना जितनी कंसमशन शो कराई जाती है और इससे एक स्टेप आगे बढ़ के मैं बात कर रहा हूं। जितने वाइन स्टोर का जो लाइसेंसिंग
Speaker A
यू नो जो दी हुई है सिंध गवर्नमेंट ने वो इतनी ज्यादा है कि अगर उनकी इक्वेशन के मुताबिक अगर ये कंजमशन हिंदुओं और क्रिश्चियंस के लिए हो रही होती तो आपकी बात बिल्कुल ठीक है कि भाई वो अगर पानी की
Speaker A
मतलब पानी की जगह वो शराब भी शराबनशी भी करते रहे तो इतनी कंजम्पशन नहीं हो सकती। इसका मतलब है कि ये जो एक टॉक लगा हुआ है कि नहीं जी लाइसेंसिंग का इजरा जो है वो तो एक माइनॉरिटी में से होगा और उसकी
Speaker A
कंसम्पशन जो है वो अल्हम्दुलिल्लाह मुसलमान जो है वो बैठ के शराबें पिएंगे। शराब और बियर की फ़रोख्त के लाइसेंस याफ्ता स्टोर के पीछे भी एक लंबी माफिया कहानी है। ये स्टोर तो गैर मुस्लिम अफराद के नाम पर है। मगर ये तमाम लाइसेंस किन के नाम पर
Speaker A
है? इसकी फहरिस्त कोई मुहैया करने को तैयार ही नहीं। हत्ता के कायमा कमेटी को भी यह इल्म नहीं कि शराब स्टोर्स के असल मालिकान कौन है? कहा जाता है कि एक बा असर शख्सियत के 35, एक के 25 और एक के 10
Speaker A
स्टोर्स हैं जो उनके बेनामी अफराद चलाते हैं। जबकि 10 स्टोर्स के मुतालिक यह दावा भी सामने आया कि एक मुस्लिम ताकतवर सियासी शख्सियत इसके पीछे हैं। इसमें जो जितने इनवॉल्व हैं बंदे उन सबकी आप अगर ऑडिट करेंगे सबकी प्रॉपर्टीियां बाहर पड़ी हैं।
Speaker A
तो इन्होंने कैसे पैसे भेजे? कैसे ली? इनसे पूछने वाला कोई नहीं क्योंकि 18 साल से इदार में बैठे हुए हैं। इनसे किसी चीज का पूछे तो यह जवाब ही नहीं देते। आप यह देखें बेसिकली गवर्नमेंट के टैक्स का पैसा वो भी चोरी कर
Speaker A
रहे हैं। एटलीस्ट इस पे तो कहीं ईमानदारी दिखा रहे हैं। ये कहते हैं कि हराम का पैसा हराम में जा रहा है। तो इस वजह से इनका मौकफ एक मैंने आपको वाज़ ही कहा ना कि ये कहते हैं कुछ भी नहीं होगा क्योंकि ये
Speaker A
बहुत बड़ी एक माफिया है और सारे मनी लॉन्डिंग हो रही है। अगर इनके पैसे होते तो यहां नजर आ रहे होते पाकिस्तान में इन्वेस्ट करते। इनकी पाकिस्तान में इन्वेस्ट कहां है? कहीं भी नहीं है। सारे पैसे कहां है? आउट ऑफ कंट्री पड़े हैं। तो
Speaker A
अब जो बाहर मुल्क पैसे गए हैं तो कैसे गए? अगर पैसे गए हैं तो इनके एफबीआर में शो होने चाहिए इतने पैसे जो इतना टैक्स हमको रेवेन्यू जनरेट होना चाहिए इनका। सो कुछ भी नहीं है। यह मनी लॉन्ड्री की है। सिंध
Speaker A
सरकार वैसे तो कराची को पेरिस बनाने का दावा करती है। मगर शराब की खरीदो फरोख्त के लिए ना कोई जदीद निजाम है ना बायोमेट्रिक। नादरा की तस्दीक का अमल है और ना ही कोई ऐसा सॉफ्टवेयर। यही वजह है
Speaker A
कि पुलिस, मुख्तलिफ इदारे, सियासी शख्सियात और कुछ मीडिया नुमाइंदगान भी सिस्टम से अपना हिस्सा वसूल करते हैं। अच्छा देखिए महकमा एक्साइज जो का जो नारकोटिक्स डिपार्टमेंट है मेन तो जिम्मेदार उसको ही हम समझते हैं। लेकिन इलाका पुलिस और जो दीगर ताकतवर लोग होते
Speaker A
हैं वो भी बकायदा तौर पर अपना हिस्सा लेते हैं। और माज़रत के साथ कुछ मैं बात कर रहा हूं। माज़रत के साथ कुछ सहाफी भी बकायदा तौर पर इन वाइन स्टोर से हिस्सा लेते हैं। उसकी वजह यह होती है कि वो दबाव डालते हैं
Speaker A
कि आप गैर मुस्लिम के बजाय मुसलमानों को शराब फ़रोख्त करते हैं। पाकिस्तान में मकामी तैयार करदा शराब और बेयर के साथ सबसे बड़ा नेटवर्क गैर मुल्की शराब का है। एक अंदाजे के मुताबिक गैर मुल्की शराब की सालाना फ़रोख्त का हजम 6 से 7 अरब बनता है।
Speaker A
गैर मुल्की सफारतखानों, कंसुलेट के अमले के नाम पर और स्मगलिंग के जरिए गैर मुल्की शराब कराची में लाई और फरोख्त की जाती है। गैर मुल्की शराब की एक बोतल 22,000 से ₹1.5 लाख तक की मिलती है। कस्टम एंटी
Speaker A
नारकोटिक्स एक्साइज के लोग भी इस धंधे से जुड़े नजर आते हैं। कराची में तो शराब के कई स्टोर्स एक दूसरे से मामूली से फासले पर मौजूद हैं। बल्कि कई तो मस्जिद के भी बहुत करीब हैं। शायद गालिब भी कभी किसी
Speaker A
ऐसी ही सुरते हाल से दोचार हुए होंगे। जब उन्होंने कहा कि मस्जिद के जेरे साया एक घर बना लिया है। यह बंदा-ए-मीना हमसाया खुदा है। अब तो यह धंधा एक ऐसे सिस्टम के तहत चलाया जा रहा है जिसमें पुलिस हो या
Speaker A
एक्साइज डिपार्टमेंट किसी को चेकिंग तक का इख्तियार नहीं। सर इसमें सबसे पहले देखिए ना इसमें अह जो सरपरस्ती हम किसी को अगर ना भी कहें लेकिन ये डायरेक्टली एक्साइज के अंडर में आता है। एक्साइज इस चीज को चेक करे कि इस चीज
Speaker A
में जब अ टैक्स जमा नहीं हो रहा तो चेक करने वाला कौन है? एक्साइज है। तो टोटल ओवरऑल सारी चीजों को आप देखा जाए तो सबकी मॉनिटरिंग करने के लिए एक्साइज डिपार्टमेंट है। और एक्साइज क्यों चाहेगी इसकी मॉनिटरिंग करना? क्योंकि इसमें बहुत
Speaker A
बड़ा अ समझे कि इसको करप्शन और लास्ट 17 इयर्स से मुकेश चावला ही होते आ रहे हैं। तो अब ये हुकूमत बताएगी कि इसमें ऐसी कौन सी अह टेक्निकल चीज़ हैं जो यह इतना रेवेन्यू जनरेट करके दे रहे हैं
Speaker A
या यह कोई सोने की चिड़िया है जो यह सारा अह सिंध चला रही है तो वो ज्यादातर आपको पता है कि मुकेश चावला अगर है या कोई और इससे ज्यादा कोई बिट अगर देगा तो आएगा लेकिन उसको ज्यादा एक्सपीरियंस है इन
Speaker A
चीजों [संगीत] में क्योंकि लास्ट थ्री टर्म में ये बैठा हुआ है इसको ज्यादा एक्सपीरियंस होगा इस चीज का ये जो हिंदुओं के नाम पे क्रिश्चियंस के नाम पे लाइसेंसिंग का इजरा होता है हमने तो हुकूमत से यह भी बताया भाई बताएं किसके
Speaker A
हैं वाइन स्टोर्स तो नाम तो कोई होता है बेचारा एक गरीब सा कोई बंदा होगा उसके नाम पे इजरा हुआ होगा मगर उसके पीछे जो है वो कोई सियासी हाथ होगा कोई दूसरा हाथ होगा तो यहां पे तो ज्यादातर हमारे माज़त के साथ
Speaker A
हमारे जो जितने हुक्मरान हैं उन्हीं के चल रहे हैं भाई वाइन स्टोर्स तो ये सारी चीजें सबको पता है ये वाली बातें हक़यक बताते नहीं है क्योंकि अगर हक़यक सामने आ जाएंगे तो फिर लोगों के लोगों के सामने
Speaker A
अया हो जाएगा ना ये पूरा निजाम अया हो जाएगा कि किस तरह एक फला बड़ा मशहूर बड़ा सियासतदान वो एक किसी वो हिंदू के नाम पे किसी क्रिश्चियन के नाम पे जो है वो शराबखाना खोलता है और माशा्लाह से जैसे ही
Speaker A
उस पे अगर कहीं शिकायतें होती हैं कुछ होता है दीगर चीजें होती हैं तो पीछे से उसी बड़े सियासतदान का फोन आता है और सब चीजें जो है वो खत्म हो जाती है। इसका मतलब यह हुआ कि हम मतलब आप अपनी कौम से
Speaker A
डायरेक्टली धोखा धोखादेही कर रहे हैं जनाब। और सिंध हुकूमत इसमें पीएचडी करके बैठी हुई है। सिंध हुकूमत के वजरा पीएचडी करके बैठे हुए हैं। पाकिस्तान में शराब की कहानी सिर्फ एक मशरूफ की कहानी नहीं ये कानून, मजहब, मईत,
Speaker A
सियासत और इंसानी रवयों की पेचीदा दास्तान है। पाकिस्तान में शराब है। इसके कारखाने हैं। यह घर-घर पहुंचती है। अरबों रुपए की इस पूरी एंपायर में पुलिस, ब्यूरोक्रेसी, सियासतदान सबका हिस्सा है। रिकॉर्ड तो मौजूद है, लेकिन सबके लिए अलग-अलग। खुफिया
Speaker A
अलग और दिखाने के लिए अलग। मगर सवाल यह है कि क्या हम ऐसा निजाम बनाने के काबिल हैं जहां कौमी खजाने को नुकसान पहुंचाने वालों की पकड़ हो सके? जहां मखसूस अफराद की जेबें भरने का सिलसिला रुक सके। जहां
Speaker A
कानून सिर्फ कागज पर ना हो। जहां नाम इस्लामी जमूरिया हो तो अमल भी इस्लामी हो।
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