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Who Failed Karachi? Where Did the Billions Go? The Truth Behind Karachi's Broken Systems

कराची की बर्बादी और भ्रष्टाचार की सच्चाई, अरबों रुपये के गुमशुदा फंड और शहर के टूटे हुए सिस्टम का विश्लेषण।

Key Takeaways

  • कराची का पतन मुख्य रूप से राजनीतिक अस्थिरता और भ्रष्टाचार के कारण हुआ है।
  • शहर की बुनियादी सुविधाओं की स्थिति बेहद खराब है, जिससे नागरिकों का जीवन प्रभावित हो रहा है।
  • पिछले कई दशकों से कराची के विकास में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई।
  • आर्थिक संसाधनों का दुरुपयोग और गुमशुदा फंड शहर की समस्याओं को और बढ़ा रहे हैं।
  • कराची की पुनरुत्थान के लिए समन्वित प्रयास और जवाबदेही जरूरी है।

What the video covers

  • 1945 में हिरोशिमा और नागासाकी के पुनर्निर्माण की तुलना में कराची की तबाही और विकास की कमी।
  • कराची कभी एक विकसित, रोशन और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध शहर था, लेकिन अब यह खंडर और कचरे का शहर बन गया है।
  • शहर की आबादी तेजी से बढ़ी, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर और सेवाओं में सुधार नहीं हुआ।
  • 1968 में कराची से पाकिस्तान की राजधानी का इस्लामाबाद स्थानांतरण कराची के पतन की शुरुआत थी।
  • 1980 के बाद कराची में हिंसा, राजनीतिक अस्थिरता और दहशतगर्दी ने शहर को बर्बाद कर दिया।
  • एमकेएम और पीपल्स पार्टी की सरकारों ने शहर को विकास की अपेक्षित सुविधाएं नहीं दीं।
  • कराची में पानी, बिजली, सफाई, ट्रैफिक व्यवस्था और सार्वजनिक परिवहन जैसी बुनियादी सुविधाएं गंभीर रूप से खराब हैं।
  • कराची की आर्थिक स्थिति और टैक्स संग्रह के अरबों रुपये गुम हैं, जिनका पता नहीं चल पाया।
  • शहर में बढ़ती आबादी और बाहरी लोगों के आने से सामाजिक और प्रशासनिक दबाव बढ़ा है।
  • कराची की समस्याओं का समाधान राजनीतिक इच्छाशक्ति और पारदर्शिता के बिना संभव नहीं।

Answers

Questions about this video

कराची की बर्बादी की मुख्य वजह क्या है?

कराची की बर्बादी की मुख्य वजह राजनीतिक अस्थिरता, भ्रष्टाचार, और बुनियादी सुविधाओं की कमी है। 1968 में राजधानी का इस्लामाबाद स्थानांतरण भी इसका एक बड़ा कारण था।

कराची की तुलना हिरोशिमा और नागासाकी से क्यों की गई है?

हिरोशिमा और नागासाकी को पूरी तरह से तबाह होने के बाद भी 10-15 साल में पुनर्निर्मित किया गया, जबकि कराची पिछले 40-45 साल से तबाही का शिकार है, इसलिए तुलना की गई है।

पीपल्स पार्टी ने कराची के विकास में क्या योगदान दिया है?

पीपल्स पार्टी ने कराची में कई सालों तक शासन किया है, लेकिन उनके शासन में शहर की बुनियादी समस्याओं जैसे पानी, बिजली, सफाई और ट्रांसपोर्ट में कोई महत्वपूर्ण सुधार नहीं हुआ।

Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:04
Speaker A
6 अगस्त 1945, एक ही लम्हे में हिरशिमा तहस-नहस हो गया। तीन दिन बाद नागासाकी भी। एटम बम ने लाखों जानें ले लीं। दोनों शहर राख और मलबे का ढेर बन गए। लेकिन फिर इसी राख और मलबे के ढेर से इस कौम ने दोबारा
00:29
Speaker A
जन्म लिया। बम हमले के पहले ही दिन मुतासरीन के इलाज और उनकी खुराक का बंदोबस्त किया गया। अगले दिन ट्रांसफार्मर स्टेशन की मरम्मत का काम शुरू हुआ। दो दिन बाद महफूज़ इलाकों में ट्रेनें चलने लगीं। चंद हफ्तों में पानी की सप्लाई का भी आगाज
00:44
Speaker A
हो गया। सिर्फ 3 महीनों में दोनों शहरों की बिजली मुकम्मल तौर पर बहाल कर दी गई। 10 से 12 साल बाद यह दोनों शहर फिर से अपने पैरों पर खड़े हो गए। लेकिन कराची जो कभी रोशनियों का शहर हुआ
01:05
Speaker A
करता था। ख्वाबों का नगर हुआ करता था। अब खंडर का मंजर पेश करता है। किसी पार्टी ने हमें कुछ नहीं दिया भाई। सड़कों के हालात आपके सामने हैं। कराची को तो इस तरह से तबाह कर दिया गया है कि बिल्कुल उदड़ा पड़ा हुआ है बल्कि
01:19
Speaker A
इसको मोहिंजा दौड़ो बना दिया गया है। इस शहर के लोग पीने के पानी को तरस रहे हैं। वाटर बोर्ड में ताले लगे हुए हैं। जब देखो जब पानी नहीं आता, मीठा बोरिंग का पानी से गुजारा है। भाई सड़कों की हालत मोइंजो दौड़ों का मंजर पेश
01:38
Speaker A
कर रही है। खुदाई करती है आठ दिन तक तो खड्डा नहीं बंद होता यहां पर। पिछले दो महीने से खोदी हुई है। अभी तक बंद नहीं हुई है। कुछ मिला ही नहीं है। रोड ही नहीं बन पा रहे हैं। और क्या मिलेगा किसी को?
01:49
Speaker A
ट्रैफिक का निजाम बेहतर करने की बजाय शहरियों पर ई चालान थोप दिया गया। पब्लिक ट्रांसपोर्ट ना होने के बराबर है। इसकी जगह शहर भर में चर रक्षे दौड़ते फिरते नजर आते हैं। स्ट्रीट क्राइम्स को तो कराची वालों ने अपना मुकद्दर समझ लिया
02:04
Speaker A
है। स्नैचिंग तो हर जगह पे ही है। इंसान खुलेआम घूम नहीं सकता। खुलेआम बैठ नहीं सकता। खुलेआम खा नहीं सकता। जगह-जगह पड़े कचरे के ढेर, बदबू और बीमारियां फैला रहे हैं। सबसे बड़ा मसला जो है यह सफाई का है।
02:16
Speaker A
गटर लाइनें हैं, वो जगह-जगह उबल रही हैं। रोड खराब है। कराची पहले रोशनियों का शहर हुआ करता था। कचरे का शहर के नाम से मशहूर है। तजावुजात की भरमार है। ट्रैफिक जैम मामूल बन चुका है। कोई देखने वाला नहीं। कोई
02:32
Speaker A
पूछने वाला नहीं। अगर आप आंखें खोलकर कराची का हाल देखें तो आपको यहां तबाही और बर्बादी के सिवा कुछ नजर नहीं आएगा। लेकिन हां अगर आप आंखें बंद कर लें और सिर्फ सिंध गवर्नमेंट की सुने तो आपको लगेगा कि
02:44
Speaker A
पाकिस्तान का सबसे जद तरक्कीफ्ता और खुशहाल अगर कोई शहर है तो वो कराची ही है। जिस तरीके से कराची की तरक्की पे काम हो रहा है। कराची के इंफ्रास्ट्रक्चर पे काम हो रहा है। कराची के पानी की स्कीमों पे
02:57
Speaker A
काम हो रहा है। कराची के जो रोड रस्ते हैं, सफाई पे काम हो रहा है। वो कहीं और नहीं हो रहा। इस वक्त पाकिस्तान में कोई एक शहर कहा जाए जो पाकिस्तान की सबसे बेहतरीन सेहत की सहूलियात हो और वो फ्री ऑफ कॉस्ट
03:09
Speaker A
हो तो वो पाकिस्तान में सिर्फ एक ही शहर होगा, वो कराची का नाम आएगा। सिंध हुकूमत जब इ्तदार में होती है तो वो आवाम के लिए काम करती है। और अगर ये तारीख मंसूबे हटा दें, सिंध हुकूमत का दौर हटा दें तो आपको
03:20
Speaker A
सिर्फ और सिर्फ खंडरात नजर आएंगे। कराची 3.5 करोड़ की आबादी के साथ दुनिया का पांचवा बड़ा शहर कहलाता है और यह दुनिया के उन चंद शहरों में से एक है जो बैक वक्त मेट्रोपॉलिटन और कॉस्मोपॉलिटन स्टेटस रखते हैं। मेट्रोपॉलिटन यूं कि यह
03:34
Speaker A
मुल्क का सबसे बड़ा और गुंजना आबाद शहर है। मुल्क का इकोनॉमिक और फाइनेंसियल हब है और कॉस्मोपॉलिटन इस लिहाज से कि यहां मुख्तलिफ कौम के मुख्तलिफ ज़बाने बोलने वाले और मुख्तलिफ मज़ाहिब से ताल्लुक रखने वाले लोग आबाद हैं। और यहां एक बहुत बड़ा
03:47
Speaker A
कल्चरल मिक्स अप भी है। इसके बावजूद ये शहर टूटा हुआ, थका हुआ और बिखरा हुआ है। कराची की आबादी इस वक्त तकरीबन 3 से 4 करोड़ के दरमियान तो होगी। ठीक है? उसमें एक बड़ा रेश्यो जो है वो बाहर से आए हुए
04:00
Speaker A
लोगों का है। जो लोग यहां आते हैं कमाने की नियत से आते हैं। लेकिन उनको कराची को ओन भी करना पड़ेगा। जिस तरीके से कराची वाले यहां पे रह के उनकी चीजों को ओन करते हैं ना, ख्याल रखते हैं चीजों का या मसाइल
04:11
Speaker A
के लिए आवाज उठाते हैं तो ऐसी आवाज जो है वो बाहर से आए हुए लोगों को भी उठानी चाहिए और उसी तरीके से एफर्ट्स भी करनी चाहिए कराची वालों के साथ मिलके। ऐसा नहीं कि कराची शुरू से ऐसा था। जी नहीं। 1947
04:23
Speaker A
में जब मुल्क आजाद हुआ तब कराची एक जदीद और तरक्कीफ्ता शहर था। अंग्रेज जाते-जाते इसे मिनी लंदन बना गए थे। यहां कराची पोर्ट ट्रस्ट जैसा इदारा भी था और चेंबर ऑफ कॉमर्स भी। एनएडी, डीजे, सिंध मदरसतुल इस्लाम और स पैट्रिक्स जैसे आला मयार के
04:39
Speaker A
तालीमी इदारे भी थे। सिविल और दूसरे सेहत के मराकिज भी। कराची इलेक्ट्रिक सप्लाई कॉरपोरेशन शहर को बिजली फराहम कर रही थी और केएमसी भी काम कर रही थी। यहां सिंध हाई कोर्ट और सिंध असेंबली बिल्डिंग भी मौजूद थी। एयरपोर्ट से लेकर रेलवे
04:53
Speaker A
स्टेशनों तक, चिड़ियाघर से लेकर छोटे-बड़े पार्कों तक सब कुछ पहले से मौजूद था। बड़े-बड़े इंडस्ट्रियल ज़ोन भी और साफ सुथरी सड़कें भी। यह सब कुछ कयाम पाकिस्तान के वक्त पहले से मौजूद था। तो फिर इसे किसकी नजर लग गई? ऐसा क्या हुआ कि
05:08
Speaker A
यह शहर मजीद तरक्की करने और आगे बढ़ने के बजाय तबाही और बर्बादी का शिकार हो गया। दरअसल कराची की बर्बादी की कहानी 80 की दहाई से शुरू हुई। 1947 में इस शहर की आबादी 3 से 4 लाख थी। तकसीम के बाद आधा
05:22
Speaker A
शहर खाली हो गया। हिंदुओं और सिखों के साथ बहुत से पारसी, ईसाई, यहूदी, जैन और बुद्ध मत के पैरोकार हिंदुस्तान चले गए। और उनकी जगह वहां से आने वाले महाजरों ने ले ली। इस शहर में बड़े-बड़े सनती और तजारती
05:35
Speaker A
मराकिज़ की वजह से रोजगार के मवाके बहुत थे। और यह शहर मुल्क का दारुल हुकूमत भी था। तो, यूं महाजरों के बाद रोजगार की तलाश में मुल्क भर से लोगों ने यहां का रुख किया। उससे हुआ यह कि शहर की आबादी
05:48
Speaker A
तेजी से बढ़ी। जब आबादी बढ़ी तो इस शहर पर इसी आबादी का दबाव भी बढ़ने लगा। वसाइल कम नहीं थे मगर उन वसाइल को इस्तेमाल करने वालों की तादाद मुसलसल बढ़ रही थी। फिर भी कराची ने बाहें फैलाकर सबका इस्तकबाल
06:02
Speaker A
किया। उन्हें घर, रोजगार, तालीम, इलाज समेत जिंदगी की हर सहूलत फराहम की। लेकिन फिर 1968 में कराची के ज़वाल की पहली ईंट रख दी गई। इस साल मुल्क का कैपिटल कराची से इस्लामाबाद मुंतकिल कर दिया गया। जब कराची से कैपिटल का एजाज छीन गया, तो उसके
06:19
Speaker A
बाद किसी ने कराची को पलट कर नहीं देखा। कराची हर गुजरते दिन के साथ मसाइल और मुश्किलात की दलदल में धंसता चला गया। लेकिन किसी ने परवाह नहीं की। वह शहर जिसे अंग्रेज फलता फूलता छोड़कर गए थे। मुरझाने
06:32
Speaker A
लगा। लेकिन उसके बावजूद कराची रुका नहीं। वह तब भी रोशनियों का शहर और उरूसुल बिलात कहलाता था। फिर 1980 की दहाई के बाद अगले 30-35 साल तक यह शहर तशद्दुद, हंगामा अराई, मारधाड़, खौफ, सियासी बेचैनी और दहशतगर्दी की लपेट में रहा। उसके बाद यहां
06:50
Speaker A
सियासी खींचातानी शुरू हो गई। इस सब का नतीजा यह निकला कि यह मेगा सिटी खंडर बन गया। कचरे का ढेर बन गया। वो सड़कें जो कभी रोजाना पानी से धुलती थीं, आज टूट-फूट का शिकार हैं। वो शहर जहां सर्कुलर रेलवे
07:04
Speaker A
और डबल डेकर बसें चलती थीं, वहां अब चिंगची रक्षे दौड़ते नजर आते हैं। पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम ना होने के बराबर है। ना सरकारी स्कूलों में तालीम है और ना सरकारी अस्पतालों में इलाज की बेहतर सहूलियात। कराची में एमकेएम ने तवील अरसे
07:19
Speaker A
तक तनहा हुकूमत की। इस दौरान एमकेएम ने शहर को चंद सड़कें, चंद फ्लाई ओवर्स और चंद अंडरपास तो दिए मगर वह अमनो अमान ना दे सकी। एमकेएम के दौर में इस शहर ने ना सनती तरक्की की ना ही तालीमी या तिब्बी
07:32
Speaker A
मैदान में कोई कारनामा अंजाम दिया। आजकल इस शहर पर हुक्मरानी पीपल्स पार्टी की है। मेयर मुर्तजा वहाब भी बड़े-बड़े दावे करते फिरते हैं। हमारी नियत हमारे मंसूर के मुताबिक है। और मंशूर क्या है? कराची को पीपल्स पार्टी के
07:46
Speaker A
तीर के जरिए आगे लेकर जाना। सिंध को पीपल्स पार्टी का गढ़ कहा जाता है और कुछ गलत भी नहीं है। यहां पिछले 18 साल से इस जमात की हुकूमत है। इससे पहले भी यहां 1972 से 1977 तक पीपी की हुकूमत थी। यानी
08:00
Speaker A
5 साल, 1988 से 1990 तक फिर यहां पीपल्स पार्टी की हुकूमत रही। तकरीबन 2 साल। 1996 से 99 तक फिर पीपल्स पार्टी ने 3 साल हुकूमत की। और अब 2008 से अब तक यानी 2026 तक पीपल्स पार्टी की ही हुकूमत चली आ रही
08:17
Speaker A
है। कुल मिलाकर पीपल्स पार्टी सिंध पर 28 साल हुकूमत कर चुकी है और यह सिलसिला अभी जारी है। मगर इसके बावजूद कराची का हाल सबके सामने है। पीपल्स पार्टी काफी टाइम से यहां पे गवर्नमेंट में है। तकरीबन 17-18 साल हो
08:31
Speaker A
गए। तो इतने टाइम में जो परफॉर्मेंस उनकी होनी चाहिए थी वो नजर नहीं आई। वही पुराना दौर वापस आ रहा है कि ना पानी, ना गैस, ना लाइट कोई चीज जो है अवेलेबल नहीं है। जब कराची को लाहौर से कंपेयर करें और वहां
08:44
Speaker A
की तरक्की की बात करें तो मेयर साहब कुछ और ही फरमाने लगते हैं। जो अमाउंट ऑफ इन्वेस्टमेंट लाहौर शहर में हुई है वो कराची में हुई होती तो शायद सिचुएशन डिफरेंट होती। जब वफाकी हुकूमत अपना खजाना आपके लिए खोल देगी, उसको कोई और
08:58
Speaker A
शहर नजर नहीं आएगा। एक ही शहर नजर आएगा तो यही होगा। अब यहां सवाल यह पैदा होता है कि जब हिरशिमा और नागासाकी जैसे शहर जो 90% सफाए हस्ती से मिट गए थे, महज 10-15 साल में दोबारा अपने पैरों पर खड़े हो गए
09:12
Speaker A
तो कराची जो पिछले 40-45 साल से तबाही का शिकार है, वो अभी तक क्यों लड़खड़ा रहा है?
09:17
Speaker A
पीपल्स पार्टी क्यों पिछले 18 साल से कराची की बिगड़ी तकदीर नहीं सवार सकी। मेयर उनका ह
09:31
Speaker A
हैं कि हम बहुत काम कर रहे हैं लेकिन वो काम होता हुआ दिख नहीं रहा। बाज हलकों के मुताबिक कराची की आबादी 3.5 करोड़ तक जा पहुंची। मगर 2023 की मर्दम शुमारी में यहां की आबादी महज 2 करोड़
09:42
Speaker A
दिखाई गई। किसी ने उसके खिलाफ आवाज नहीं उठाई। अगर किसी ने एतजाज भी किया तो महज अपनी सियासत चमकाने के लिए। बस हर बंदा आता है अपनी सियासत चमकाता और चला जाता है। अब जाहिर है कराची की आबादी कागजात में कम
09:54
Speaker A
होगी तो उसी हिसाब से उसे फंड्स भी मिलेंगे। कराची मुल्क भर का 65 से 70% रेवेन्यू जनरेट करता है। सबसे ज्यादा टैक्स भी इसी शहर से इकट्ठा होता है। लालू खेत 94 अरब लालू खेत से जो टैक्स जमा होता
10:10
Speaker A
है वो लाहौर शहर के मजमूई टैक्स से ज्यादा है। 94 अरब सिर्फ सदर कराची से पौने अरब होता है। लेकिन अफसोस कि कराची पर उसकी कमाई के हिसाब से खर्च नहीं होता। और तो और जो मामूली सा बजट इसके लिए अलॉट होता है वह
10:29
Speaker A
भी इस पर नहीं लगता। कहां जाता है कोई नहीं जानता। सुबह सिंध को 15 सालों में 22,000 अरब मिले हैं नेशनल फाइनेंस कमीशन से। अगर कराची का 60% के बजाय 50% ही समझ लिया जाए शेयर फेडरल गवर्नमेंट में तो इसका मतलब
10:46
Speaker A
11,000 अरब तो कराची के थे। फिर जो 100 200 अरब डायरेक्टली कराची पर टैक्स लगा के लग लेती है सिंध हुकूमत तो इसमें 13 14 हजार अरब कराची के थे वो कहां लग गए सवाल तो वाकई बनता है कि ये सब पैसे गए कहां
11:06
Speaker A
क्योंकि इतनी बड़ी रकम से तो कराची समेत पूरे सिंध की तकदीर बदल सकती है। ज्यादा नहीं तो यह सूबा कम से कम पंजाब जितनी तरक्की तो कर सकता है। कराची भी लाहौर के बराबर आ सकता है। लेकिन माहरीन का कहना है
11:16
Speaker A
कि गुजस्ता 15 बरसों में 10,000 अरब से जायद रकम खर्च होने के बावजूद सुबह-बा सिंध में शोबा सेहत और सुबा हाईवेज में मामूली बेहतरी के अलावा कोई खातिरखा तरक्की और तब्दीली दिखाई नहीं दे रही। हालत यहां तक पहुंच चुकी है कि अब पंजाब
11:30
Speaker A
से भी सिंध हुकूमत को ताने दिए जा रहे हैं। रोड तो माशा्लाह मुल्तान के दुबई की तरह है। आइए आपको मुल्तान दिखाती हूं। आइए आपको लोधरा दिखाती हूं। आइए आपको रहीम यार खान डीजी खान दिखाती हूं। आप भी मुझे ले चलिए।
11:43
Speaker A
आप मुझे कश्मोर ले चले। आप मुझे जैकबाद छोड़े। आप मुझे नवाब शाह ले चले। आप मुझे गढ़ खुदा बख्श ले चले। मुझे दिखाएं वहां 17 साल में आपने क्या किया। कराची मुल्क का खजाना भरता है। मगर उसका अपना दामन खाली है। साबिक मेयर कराची
11:57
Speaker A
मुस्तफा कमाल तो यहां तक कहते हैं कि मुल्क को माशी बदहाली से आईएमएफ नहीं बल्कि सिर्फ कराची निकाल सकता है। आईएमएफ जो है वो पाकिस्तान को इस इकोनमिक कॉग्मायर दलदल से नहीं निकाल सकता। कराची निकाल सकता है। 18वीं तरमीम पीपल्स पार्टी खुद लेकर आई
12:14
Speaker A
थी। वो बड़े फखर से उसका क्रेडिट भी लेती है। मगर वो कराची में पानी जैसे बुनियादी मसाइल को हल नहीं कर पाई। मुर्तजा वहाब साहब जब से वाटर बोर्ड की सदारत उन्होंने संभाली है या उनके अंडर में आए तो तब से पानी के मसाइल भी बढ़ गए।
12:27
Speaker A
शहर की रोजाना की पानी की तलब 1200 मिलियन गैलन है। मगर कराची वाटर एंड सेवरेज कॉरपोरेशन सिर्फ 550 से 650 मिलियन गैलन फराम करता है। इसमें से भी 35% पानी लीकेज और चोरी में जाया हो जाता है। टैंकर
12:41
Speaker A
माफिया 272 मिलियन गैलन से जायद पानी चोरी कर लेता है। 41% शहरियों को पीने का साफ पानी में अससर नहीं। के फॉर मंसूबे का कराची के शहरी पिछले 20 साल से इंतजार कर रहे हैं। इस प्रोजेक्ट के जरिए शहर को
12:54
Speaker A
रोजाना 260 मिलियन गैलन पानी मिलने की उम्मीद दिलाई गई थी। अब K4 प्रोजेक्ट की तकमीमील के लिए 2027 की नई तारीख आई है। लेकिन माहरीन कहते हैं कि इस पर तो अभी काम ही शुरू नहीं हुआ। अगर बहुत तेजी से
13:06
Speaker A
काम शुरू भी किया जाए तो इसका 2030 से पहले मुकम्मल होना मुमकिन ही नहीं। कराची में स्ट्रीट क्राइम की हालत यह है कि शायद ही यहां कोई शहरी ऐसा हो जिसके साथ या उसके किसी दोस्त या रिश्तेदार के साथ यह
13:18
Speaker A
वारदात ना हुई हो। पूरे पुल को जो है वो लूट रहे हैं। कलाशन के साथ है 10-12 बंदे। ये कुरंगी वाला मेन पुल है। पटाकू की सरगरम है। शहर में स्ट्रीट क्राइम का अंदाजा इस बात से लगाएं कि कराची में साल 2025 के दौरान
13:29
Speaker A
स्ट्रीट क्राइम की 64,000 से जायद वारदातें रिपोर्ट हुई। 46,000 गाड़ियां और मोटरसाइकिलें छीनी गई। 17,000 लोगों से मोबाइल फस लूटे गए। मजामत पर 70 अफराद जिंदगी से महरूम कर दिए गए। सड़कों पर बेहंगम गाड़ियां दौड़ती देखें तो लगता है
13:44
Speaker A
कराची में ट्रैफिक पुलिस का सिरे से वजूद ही नहीं। जलायम की वारदातें देखें तो महसूस होता है जैसे पुलिस का कोई महकमा यहां काम ही नहीं करता। आए दिन बेलगाम टैंकर और डंपर मोटरसाइकिल सवारों को कुचल देते हैं। मगर आज तक किसी के खिलाफ कारवाई
13:59
Speaker A
होते नहीं देखी गई। 2025 में ट्रैफिक हादसात में 800 से जायद लोगों की जान गई। जख्मियों की तादाद हजारों में है। कराची में रोजाना 15 से 17,000 टन कचरा पैदा होता है जो मुंबई, नई दिल्ली और ढाका से
14:11
Speaker A
भी ज्यादा है। इसमें से सिर्फ 50 से 60% ही जमा करके ठिकाने लगाया जाता है। बाकी सड़कों, खाली प्लॉटों और नंदी नालों में फेंक दिया जाता है। नदी नालों में फेंका जाने वाला यही कचरा बारिश के दिनों में
14:23
Speaker A
सैलाब का सबब बनता है। बिजली का निजाम इतना खराब है कि बारिशों के दौरान करंट लगने से सबसे ज्यादा हलाकतें इसी शहर में होती हैं। बारिश की पहली बूंद पड़ते ही सबसे ज्यादा बिजली गायब इसी शहर में होती
14:35
Speaker A
है। बारिश के बाद जो शहर की हालत होती है वो देखने वाली होती है। नक्काशी आपका निजाम ऐसा है कि जरा सी तेज बारिश के बाद शहर की सड़कों पर दरिया बहने लगते हैं। आए दिन खुले गटरों में बच्चों के गिरने की
14:46
Speaker A
खबरें आती हैं। मगर किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता। कोई अगर इस पर बात भी करे तो इसे सियासत करार दे दिया जाता है। इतना बड़ा शहर है और यहां आग बुझाने के मुनासिब इंतजामात नहीं। बुल प्लाज़ा का वाकया सबकी
14:59
Speaker A
आंखें खोलने के लिए काफी था। लेकिन शायद आज भी सबकी आंखें बंद हैं। पब्लिक पार्क जिस तरह उजड़े हुए हैं, उन्हें देखकर लगता है कि उन्हें बनाकर छोड़ दिया गया। मेंटेनेंस नाम की कोई चीज नहीं। टूटे फूटे झूले और कचरे के ढेर देखकर फैमिलियों ने
15:14
Speaker A
तो उन पार्कों का रुख करना ही छोड़ दिया है। हर जगह माफियाज़ का राज है। सब अपनी मर्जी से जब चाहे चीजों की कीमतें बढ़ा देते हैं। कोई पूछने वाला नहीं। प्राइस कंट्रोल कमेटियां तो हैं मगर उसका अमला
15:26
Speaker A
कहां है? क्या करता है कोई नहीं जानता। कराची की सुरते हाल की जिम्मेदारी सिर्फ पीपल्स पार्टी पर डालना भी गलत होगा। एमकेएम पर भी इसकी जिम्मेदारी आयद होती है क्योंकि इसने भी शहर पर बहुत राज किया। वफाक और सिंध हुकूमत से इत्तेहाद भी था।
15:39
Speaker A
वो चाहती तो शहर का नक्शा बदल सकती थी। हम यह नहीं कहते कि एमकेएम ने कराची में कोई काम नहीं करवाया। एमकेएम के दौर में कराची में कुछ तरक्की देखने में आई। मगर लोग कहते हैं कि ये तरक्की सिर्फ उन्हीं
15:51
Speaker A
इलाकों में हुई जहां उसका वोट बैंक था। और फिर अमनो अमान की बदतरीन सुरते हाल की वजह से एमकेएम के दौर में शहर का बड़ा कारोबार या तो बैरने मुल्क चला गया या फिर पंजाब मुंतकिल हो गया। यह भी कराची की बर्बादी
16:03
Speaker A
की बड़ी वजह बना। मेयर कराची मुर्तजा वहाब तो सारा इल्जाम एमकेएम के खाते में डालते। अगर एमकेएम कराची के मामलात में इंटरेस्टेड होती तो शायद कराची का ये हाल नहीं हुआ होता। मतलब वो अपने आपको बरी उज्मा ये हमने अपने बड़े बूढ़ों से यही
16:18
Speaker A
सुना है 70ज के अंदर कराची शहर के अंदर घर की दीवारें जो है ना वो दो-दो फीट की होती थी वो सिक्योरिटी के लिए नहीं होती थी वो सिर्फ बफरकेशन की थी कि ये घर यहां खत्म हो गया वहां घर दूसरा
16:29
Speaker A
शुरू हो गया लोगों के घरों के गेट खुले रहते थे पहिया जाम हड़ताल बोरीबंद लाशें नहीं थी ये सारा 80ज के अंदर इस शहर के अंदर स्टार्ट हुआ तो कहीं ना कहीं ये चीजों ने शहर का नुकसान पहुंचाया है लेकिन
16:44
Speaker A
क्या अकेली एमकेएम जिम्मेदार है? इमरान अहमद न्यायाजी साहब ने 176 वोट हासिल किए। 2018 में वफाक में पीटीआई की हुकूमत आई तो उसने भी कभी इस शहर पर तवज्जो नहीं दी। उस वक्त के वज़र आजम साहब तो कराची आने तक की
17:00
Speaker A
जहमत नहीं करते थे। अगर कभी आए भी तो महज चंद घंटों के लिए लगता था कि कराची के मसाइल से उनका कोई लेना देना नहीं। कराची के लिए 1100 अरब के पैकेज का ऐलान भी किया गया था। मगर वो ऐलान ही रहा। इन पार्टियों
17:13
Speaker A
के साथ-साथ जमात इस्लामी की जिम्मेदारी को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। क्योंकि कराची के कुल 25 टाउन में से 12 अगर पीपल्स पार्टी के पास हैं तो नौ जमात इस्लामी के पास है। बाकी चार पीटीआई के पास है। तो सवाल जमात इस्लामी से भी होना
17:27
Speaker A
चाहिए कि वो अपने उन नौ टाउंस में कौन से तरक्की के काम करवा रही है। बहरहाल कराची की बर्बादी की जिम्मेदारी पीपल्स पार्टी पर इसलिए ज्यादा आती है कि वफाक में, सिंध में, शहर में हर जगह उसकी हुकूमत है।
17:38
Speaker A
18वीं तरमीम भी उसी ने मुतारिफ करवाई थी। इस तरमीम के बाद शहरी मसाइल जैसे कि पानी, सफाई, बलियात वगैरह की जिम्मेदारी सुबाई हुकूमत पर आ गई। तो फिर यह जिम्मेदारी लेने के बाद पीपल्स पार्टी ने क्या किया?
17:51
Speaker A
कराची दरअसल एक कमाऊ पोत है और सबकी नजरें उसकी कमाई पर है। सब उसे नोट उगाने वाला दरख्त समझते हैं और सबकी दिलचस्पी नोट तोड़ने पर है। उसकी आबियारी करने, उसकी देखभाल करने में किसी को दिलचस्पी नहीं। कराची पूरा मुल्क चलाता है। सबसे ज्यादा
18:08
Speaker A
रेवेन्यू देता है। सबसे ज्यादा रोजगार के मवाके यहां है। होना तो यह चाहिए था कि इस कमाऊ बूथ का सबसे ज्यादा ख्याल रखा जाता। उसकी देखभाल अच्छी तरह से की जाती। मगर अफसोस इसे लावारिस बनाकर छोड़ दिया गया।
18:20
Speaker A
इसीलिए आज यहां बच्चे-बच्चे की जुबान पर है कि कराची सबका है। मगर कराची का कोई नहीं। सोचना होगा कि कराची सिर्फ एक शहर नहीं मुल्क का मुस्तकबिल है। यह सवाल तो है कि कराची इतना तबाहाल क्यों है? मगर
18:34
Speaker A
असल सवाल यह है कि आखिर कब तक कब तक यह शहर अपने हुकूक से महरूम रहेगा?
Topics:कराचीशहरी विकाससिस्टम फेलियरपब्लिक सर्विसेजराजनीतिक भ्रष्टाचारपब्लिक ट्रांसपोर्टसफाई समस्यापानी की कमीसड़कें और ट्रैफिकआबादी वृद्धि

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