सद्दाम हुसैन की खोज में मसगफ मछली की भूमिका और अमेरिकी फौज की 8 महीने की तलाश की कहानी।
Key Takeaways
- मसगफ मछली सद्दाम की पसंदीदा थी और उनकी खोज में अप्रत्यक्ष भूमिका निभाई।
- अमेरिकी फौज ने सद्दाम की पहचान के लिए ताश के पत्ते बनाए।
- सद्दाम ने गुप्त गढ़े में लंबे समय तक छुपकर अपनी सुरक्षा की।
- स्थानीय लोगों की मदद सद्दाम की सुरक्षा में महत्वपूर्ण थी।
- अंततः अमेरिकी फौज ने सद्दाम को पकड़ने में सफलता हासिल की।
What the video covers
- सद्दाम हुसैन को मसगफ मछली बहुत पसंद थी, जो दजला और फराज नदियों से पकड़ी जाती है।
- अमेरिका ने इराक पर हमला किया और सद्दाम हुसैन 8 महीने तक छुपे रहे।
- अमेरिकी फौज ने सद्दाम और उनके सहयोगियों की तस्वीरों वाले ताश के पत्ते बनाए ताकि उन्हें पहचान सकें।
- सद्दाम के दोनों बेटे पकड़े गए और उनके लिए भारी इनाम घोषित किया गया।
- सद्दाम हुसैन एक गढ़े में छुपे थे जिसे बाद में 'स्पाइडर होल' कहा गया।
- अला नामिक नामक किसान ने सद्दाम को पनाह दी और उनकी मदद की।
- सद्दाम ने इस गढ़े में 235 दिन बिताए, जहां वे टॉर्च और पंखे का इस्तेमाल करते थे।
- सद्दाम ने अपने बेटों की मौत पर अफसोस जताते हुए इराकियों को अमेरिकी कब्जे के खिलाफ लड़ाई जारी रखने की हिदायत दी।
- अमेरिकी फौज ने अंततः इस गढ़े का पता लगाया और सद्दाम को गिरफ्तार किया।
- अला नामिक को इनाम मिला और वह आज सामान्य जीवन जी रहा है।
Chapters
- 00:00सद्दाम हुसैन और मसगफ मछली की भूमिका
- 01:15इराक पर अमेरिकी हमला और सद्दाम का गायब होना
- 02:17ताश के पत्तों के जरिए सद्दाम की तलाश
- 03:09सद्दाम के बेटों की गिरफ्तारी और इनाम
- 05:04सद्दाम की गुप्त पनाहगाह - स्पाइडर होल
- 06:04अला नामिक की मदद और सद्दाम का छुपना
- 07:50सद्दाम के जीवन की कठिनाइयां और ऑडियो संदेश
- 09:45अमेरिकी फौज की खोज और सद्दाम की गिरफ्तारी
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Speaker A
सद्दाम हुसैन को एक खास मछली मसगफ बहुत पसंद थी। यह मछली दरिया दजला और फराज से पकड़ी जाती है। अमेरिका ने इराक पर हमला किया तो सद्दाम हुसैन छुप गए। अमेरिकी फौजी 8 महीनों तक पूरे इराक में उनकी ब
Speaker A
सूंघते फिर रहे थे। मगर वो कहीं नहीं मिल रहे थे। फिर उसी मजबूफ मछली की वजह से सद्दाम हुसैन का पता चल गया। इराक की कौमी डिश समझी जाने वाली मसगोफ ने इराक के साबिक सदर का शिकार कैसे कराया?
Speaker A
आज की वीडियो में हम यह फिल्म जैसी रियल स्टोरी जानेंगे। मगर पहले हमारे चैनल को सब्सक्राइब और वीडियो को लाइक जरूर कर लें। तो चल इराक चलते हैं। आर इन द अर्ली स्टेजेस ऑफ़ मिलिट्री ऑपरेशंस टू डिस्मक टू फ्री इट्स पीपल एंड
Speaker A
टू डिफेंड द वर्ल्ड फ्रॉम ग्रेवेंजर। 20 मार्च 2003 को अमेरिका ने इराक पर हमला कर दिया। इल्जाम था ऐसे तबाही फैलाने वाले हथियारों का जिससे पूरी दुनिया को खतरा था। सिंपली स्टेटेड देयर इज नो डाउट सेपर। देयर इज नो डाउट ही दे
Speaker A
अस। लेकिन बाद में पता चला कि वहां ऐसा कुछ नहीं था। कोई खतरनाक हथियार नहीं थे। सद्दाम रिजीम का खात्मा हो चुका था। अमकी टैंक बगदाद तक पहुंच चुके थे। इराकी सदर के बड़े-बड़े मुजस्मे गिराए जा रहे थे।
Speaker A
अपनी फतह का ऐलान करने के लिए अमकी फौजियों ने सद्दाम के मुजस्मे के चेहरे पर अमरीकी परचम रख दिया। लेकिन उनकी हरकत वहां जमा इराकी शहरियों को पसंद ना आई। क्योंकि यह उन्हें इराक पर अमेरिका के कब्जे का ऐलान महसूस हुआ। फौजियों को फौरन
Speaker A
अपनी इस गलती का एहसास हुआ और उन्होंने जल्दी से अमेकी झंडा हटाकर वहां इराकी झंडा रख दिया और फिर वो मुजस्मा भी गिरा दिया गया। इराक तो अमेरिका और उसके इत्तहादियों के कब्जे में आ चुका था। लेकिन इराकी सदर सद्दाम हुसैन गायब हो
Speaker A
चुके थे। अमेरिकी फौज का टारगेट अब सद्दाम हुसैन और उनके साथियों को तलाश करना था। इसके लिए ताश के पत्तों के खास सेट तैयार करके अमकी फौज में बांटे गए। इन ताश के पत्तों पर इराक के 52 इंतहाई मतलूब अफराद
Speaker A
की तस्वीरें थी। यह सब सद्दाम हुसैन की बाज पार्टी के ओदेदार थे। ताश के पत्तों का यह खास सेट बनाने का मकसद यह था कि फौजी जब आराम के वक्त ताश खेलें तो यह चेहरे उनके सामने रहें और वह उन्हें आसानी
Speaker A
से याद रख सकें और पहचान सके कि उन्हें किन लोगों को तलाश करना है। इन सब में सद्दाम हुसैन सबसे ऊपर थे। उनकी तस्वीर हुक्म के इके पर थी। दूसरे दो इक्वों पर सद्दाम के बेटों कूदे और कुस्से की
Speaker A
तस्वीरें थी। अमेरिकी फौज को हुक्म दिया गया था कि जमीन पर या आसमान पर जहां भी मिले सद्दाम हुसैन को ढूंढना है। उस वक्त सद्दाम हुसैन के बारे में मशहूर था कि वह चंद घंटों से ज्यादा कहीं नहीं ठहरते थे।
Speaker A
बार-बार अपनी जगह बदलते रहते थे। इसी दौरान 4 महीने गुजर गए। ताश के पत्तों पर छपी कई अहम शख्सियत पकड़ी जा चुकी थी। मगर सद्दाम हुसैन का कहीं कोई सुराग नहीं मिला। जो लोग पकड़े गए थे उनमें से भी
Speaker A
किसी को मालूम नहीं था कि इराकी सदर कहां छुपे हुए हैं। सद्दाम और उनके बेटों का ना मिलना अमरी और इत्तहादी फौज की बड़ी नाकामी समझा जा रहा था। आखिरकार सद्दाम के दोनों बेटों की गिरफ्तारी पर 15-15 मिलियन
Speaker A
और सद्दाम हुसैन पर 25 मिलियन यानी $.5 करोड़ का इनाम रख दिया गया। लालच ने अपना काम कर दिखाया। एक दिन इराक के दूसरे सबसे बड़े शहर मूसल के अमीरकी फौजी अड्डे में एक शख्स दाखिल हुआ और बताया कि ओदे और
Speaker A
कुसे उसके घर में छुपे हुए हैं। यकीन करना मुश्किल था। फिर भी अमेरिकी फौज को वहां भेजा गया। वो एक बहुत बड़ी हवेलीनुमा घर था। सद्दाम के दोनों बेटे वाकई वहां मौजूद थे। मगर अमेरिकी फौज के मुताबिक उन्होंने
Speaker A
गिरफ्तारी नहीं दी बल्कि फायरिंग शुरू कर दी। अमेरिकी फौज पीछे हटी और उसने इजाफी फोर्स बुला ली। उसके बाद उस घर पर रॉकेट और बमों से हमला किया गया। पूरा घर मलबे का ढेर बन चुका था। दोनों भाई मारे गए।
Speaker A
अमेरिका ने अपना वादा निभाया। जिस शख्स ने सद्दाम के बेटों की मुखबरी की थी, उसे ना सिर्फ $30 मिलियन का इनाम दिया गया बल्कि फैमिली के साथ अमेरिका भी मुंतकिल कर दिया गया। सद्दाम हुसैन अब भी अमेरिकियों की
Speaker A
पहुंच से दूर थे। लेकिन इसी दौरान एक ऑडियो टेप सामने आई। में भी जिसमें सद्दाम हुसैन ने अपने बेटों की मौत पर अफसोस का इज़हार किया और इराकियों को अमरीकियों के खिलाफ जद्दोजहद जारी रखने की हिदायत की। यह ऑडियो टेप इस बात का सबूत
Speaker A
थी कि सद्दाम हुसैन ना सिर्फ जिंदा हैं बल्कि मुल्की हालात से बाखबर भी हैं। सद्दाम हुसैन की तलाश और तेज कर दी गई। लेकिन वो थे कहां? वो एक ऐसी खुफिया पनाहगाह में छुपे थे जहां के बारे में
Speaker A
अमकी फौज सोच भी नहीं सकती थी। यह दरअसल एक किस्म का गढ़ा था जिसकी गहराई तकरीबन 2 मीटर थी। दीवारें ईंटों और सीमेंट से मजबूत की गई थी। अंदर की जगह निहायत तंग थी। अंदर किसी के लिए सीधा खड़ा होना
Speaker A
इंतहाई मुश्किल था। आरजी तौर पर बनाई गई इस पनाहगाह में सिर्फ एक आदमी के लेटने की जगह थी। एक कोने में पंखा लगा हुआ था और हवा के गुजर के लिए करीब ही दीवार से एक पाइप निकला हुआ था। यह जगह सद्दाम हुसैन
Speaker A
के आबाई शहर तिकरीत के करीब दरिया दजला के किनारे पर थी। दरिया के उस पार सद्दाम हुसैन के आलीशान महल्लात थे जिन्हें वह हसरत भरी निगाहों से देखते रहते थे। लेकिन सद्दाम हुसैन यहां तक पहुंचे कैसे?
Speaker A
दरअसल अमेरिकी फौज जब बगदाद तक पहुंच गई तो सद्दाम हुसैन फौरन वहां से निकले। लेकिन वह अपने किसी रिश्तेदार या हुकूमती ओहदेदार के घर नहीं गए क्योंकि वहां पकड़े जाने का चांस बहुत ज्यादा था। इधर-उधर भटकने के बाद वह तकरीज से चंद मील दूर एक
Speaker A
इलाके अद्वार पहुंचे और वहां अला नामक नामी आम से किसान से पनाह की दरख्वास्त की। गरीब किसान अपने दरवाजे पर सदर सद्दाम हुसैन को देखकर हैरान रह गया। उससे पहले उसने उन्हें सिर्फ टीवी और अखबारों में ही देखा था। लेकिन मदद मांगने पर उसने हां कर
Speaker A
दी। बाद में उसने एक इंटरव्यू में बताया कि सद्दाम को उसने पनाह इसलिए दी कि उनकी अरब रिवायत और इस्लामी कानून के मुताबिक जब कोई मदद मांगे तो उसकी मदद करना फर्ज होता है। उस वक्त उसके ज़हन में यह ख्याल
Speaker A
भी नहीं आया कि वो एक ऐसे शख्स को पनाह देने का रिस्क ले रहा है जिसे पूरे इराक में फैली डेढ़ लाख अमरी फौज ढूंढ रही है। सद्दाम हुसैन ने भी अलानामे को खबरदार किया था कि उन्हें पनाह देने पर वह
Speaker A
गिरफ्तार भी हो सकता है और अमकी फौज के टॉर्चर का निशाना भी बन सकता है। मगर वह पीछे नहीं हटा। हालांकि उसे अंदाजा था कि अगर उसने सद्दाम हुसैन को अपने घर में पनाह दी तो अमेरिकी फौज कभी ना कभी ढूंढते
Speaker A
हुए वहां जरूर पहुंच जाएगी। यह भी खतशा था कि सद्दाम अगर बाहर रहे तो अमकी ड्रोन या जासूस सेटेलाइट की नजरों में आ सकते हैं। इसीलिए उसने अपने घर के सहन में एक गढ़ा खोदा। यह ग्ा भी अला नामक ने खुद खोदा था,
Speaker A
जिसे बाद में अमेकियों ने स्पाइडर होल का नाम दिया था। सद्दाम हुसैन अगले 235 दिन इसी गड्ढे में छुपे रहे थे। इस गड़े से बाहर निकलने का रास्ता थर्मोपोल के ढक्कन से ढका रहता था। जिसे मिट्टी और घास-पुस
Speaker A
से इस तरह छुपाया गया था कि वह जमीन का ही हिस्सा लगे। सद्दाम हुसैन के पास इस गड्ढे में रोशनी के लिए एक टॉर्च और दो बैटरी थी। इन्हीं बैटरीियों की मदद से वह यहां लगे पंखे को चलाते थे। टॉयलेट जाने के लिए
Speaker A
वह सिर्फ रात के वक्त ही बाहर निकलते थे और रात के वक्त ही कुछ चहलकदमी भी करते थे। इस गड्ढे में 235 दिन छुपे रहने वाले सद्दाम हुसैन ने कभी टेलीफोन इस्तेमाल नहीं किया क्योंकि वह जानते थे कि उनकी
Speaker A
आवाज से लोकेशन ट्रेस की जा सकती है। वहां से उन्होंने अपनी बीवी और बेटियों को खुतूत लिखे लेकिन उनसे कभी भी मिल नहीं सके। सिर्फ उनके दो बेटे उदय और कुसे उनसे मिलने आए थे। वह भी सिर्फ एक बार। इस
Speaker A
मुलाकात का सारा इंतजाम भी अला नामिक ने ही किया था। बेटों की हलाकत पर इज़हारे अफसोस का ऑडियो पैगाम भी सद्दाम हुसैन ने यहीं से रिकॉर्ड कराया था। उसमें भी अला नामिक ने ही सद्दाम हुसैन की मदद की थी।
Speaker A
बल्कि उसने तो बाहर का शोर अलग से रिकॉर्ड करके सद्दाम हुसैन के पैगाम में मिक्स कर दिया था ताकि किसी को अंदाजा ही ना हो सके कि यह ऑडियो रिकॉर्डिंग कहां की गई है। सद्दाम हुसैन के बैरूनी दुनिया से राब्ते
Speaker A
का वाहिद जरिया अला नामिक ही था। वह उनका बावर्ची भी, नाई भी और मुहाफिज भी था और उनके पैगाम आगे पहुंचाने वाला भी। यह वही था जो सद्दाम के पैगामात मुजाहमती कमांडरों तक पहुंचाता और उनके जवाब वापस लाता था। सद्दाम हुसैन ने कई ऑडियो
Speaker A
मैसेजेस रिकॉर्ड कराए जिनमें वह इराकी शहरियों से अमरीकी कब्जे के खिलाफ जंग जारी रखने की हिदायत करते थे। अलानामे के मुताबिक सद्दाम हुसैन का ख्याल था कि हो सकता है कभी हालात बदले और वह दोबारा इ्तदार में आ जाए।
Speaker A
सदाम हुसैन दिन में सिर्फ खजूरों पर गुजारा करते थे। राजदारी और सिक्योरिटी की वजह से उन्हें खाना सिर्फ रात के वक्त ही मिलता था। खाने में ज्यादातर चावल और उबली हुई सब्जियां होती थी। लेकिन कभी-कभी वह मशगूफ मछली की भी फरमाइश किया करते थे।
Speaker A
उन्हें कतई यह अंदाजा नहीं था कि यह मछली एक दिन उनके लिए फांसी का फंदा बन जाएगी। इधर सदाम हुसैन इस गढ़े में पनाह लिए हुए थे और उधर पूरी अमरी फौज उनकी तलाश में इराक का चप्पाचप्पा छान रही थी।
Speaker A
अमेरिकियों की सारी तवज्जो उन ताश की गड्डी पर थी जिस पर सद्दाम हुसैन और उनकी हुकूमत के साबिक ओहदेदारों की तस्वीरें थी। उन्हें एक-एक करके पकड़ा जा रहा था। मगर तमाम हरबे आजमाने के बावजूद किसी एक से भी सद्दाम हुसैन के बारे में मालूमात
Speaker A
नहीं मिली। एक तरफ यह सब हो रहा था तो दूसरी तरफ तिकरीद के हवाई अड्डे पर एक छोटे से तफ्तीशी कमरे में स
Speaker A
समझ चुका था कि जिन लोगों पर इस वक्त तवज्जो दी जा रही है। यह वो लोग थे जिन्हें सिर्फ इसलिए ओहदे मिले क्योंकि वह सद्दाम के रिश्तेदार थे। इसका मतलब यह हुआ कि सद्दाम इनकी ताकत थे। वह सद्दाम की
Speaker A
ताकत नहीं थे। और इस वक्त जब सद्दाम हुसैन छुपते फिर रहे हैं तो इन्हें ऐसे लोगों की जरूरत होगी जो उनके लिए ताकत हो। यानी उनके मुहाफिज उनके सिक्योरिटी गार्ड। सद्दाम हुसैन की पर्सनल सिक्योरिटी का एक पूरा मैकेनिज्म था जिसकी तीन लेयर्स थी।
Speaker A
सबसे बाहर वाली लेयर में वो थे जो मुल्क भर में सद्दाम हुसैन के महलों और उनके दीगर मफादात की हिफाजत करते थे। दूसरी लेयर में वो थे जिनके जिम्मे उन इलाकों और मुकामात को महफूज़ बनाना होता था जहां
Speaker A
सद्दाम हुसैन जाते थे। और तीसरी और आखिरी लेयर उन सिलेक्टेड और स्पेशल सिक्योरिटी पर्सनल्स की थी जो हर वक्त सद्दाम के साथ रहते थे। मेडोक्स का ख्याल बल्कि यकीन था कि इस वक्त भी सद्दाम हुसैन इन्हीं में से
Speaker A
किसी गार्ड की हिफाजत में होंगे। मेडोक्स ने अपनी तलाश का काम सद्दाम हुसैन के आबाई शहर तिकरीज से शुरू किया। हालांकि अमेरिकी फौज ने इस शहर को पहले ही छान मारा था मगर सद्दाम नहीं मिले थे। मेडोक्स ने तिकरीद
Speaker A
का रुख इसलिए किया कि वहां एक खानदान था आले मुसल्लित और सद्दाम हुसैन के ज्यादातर आला दर्जे के गार्ड्स का ताल्लुक इसी खानदान से था। और उसने जब तफ्तीश शुरू की तो एक नाम बार-बार उसके सामने आ रहा था।
Speaker A
मोहम्मद इब्राहिम उमर अल मुसल्लित। जैसे-जैसे मेडॉक्स मोहम्मद इब्राहिम के बारे में छानबीन करता रहा। उसका यकीन मजबूत होता गया कि वह बिल्कुल ठीक रास्ते पर जा रहा है। मोहम्मद इब्राहिम ना सिर्फ सदाम हुसैन का सबसे काबिल एतमाद गार्ड था
Speaker A
बल्कि यह भी साफ नजर आ रहा था कि इराक में चलने वाली गोरिल्ला वॉर को भी वही लीड कर रहा है। उसने इराक के मुख्तलिफ इलाकों में अपने नायब मुकरर कर रखे थे जो इत्तहादी फौज के खिलाफ हमलों की प्लानिंग और
Speaker A
निगरानी करते थे। एरिक मेडॉक्स ने सोचा अगर यह सारी बातें सही हैं तो फिर उसे लाजमी पता होगा कि सदाम हुसैन कहां है। मैडोक्स के लिए मोहम्मद इब्राहिम अब सबसे बड़ा टारगेट बन गया था। मैडोक्स तिकरीत में किसी तरह मोहम्मद इब्राहिम के 18 साला
Speaker A
बेटे को ढूंढ निकालने में कामयाब हो जाता है। लेकिन इब्राहिम कहां है? यह इसके बेटे को भी मालूम नहीं था। उससे बस इतना पता चल सका कि इसका बाप कभी-कभी समावा शहर में एक फिश फॉर्म से मछलियां खरीदने जाता है। यह
Speaker A
सुनकर मेडॉक्स के कान खड़े हो गए। उसे याद आया कि कुछ दिनों पहले सद्दाम के एक बावर्ची ने पूछ के दौरान बताया था कि सद्दाम हुसैन को भुनी हुई मस्जगोफ मछली बहुत पसंद थी। मैडोक्स को शुभा हुआ कि
Speaker A
इब्राहिम कहीं सद्दाम हुसैन के लिए तो मछलियां नहीं खरीदता। अब उसका मिशन इब्राहिम को पकड़ना था। उसने उसके बेटे के बताए हुए फिश फॉर्म पर छापा मारा। वहां मौजूद मछेरों से पूछ की। मगर सब ने यही कहा कि वह इब्राहिम को नहीं जानते। मगर जब
Speaker A
तफ्तीश के दौरान इंतहाई सख्ती की गई और दबाव डाला गया तो उनमें से एक ने बगदाद में किसी अंकल का जिक्र किया और बताया कि वह उसका और इब्राहिम का रिश्तेदार है। इब्राहिम उसके घर में हो सकता है। मेडोक्स
Speaker A
ने बगदाद में मछेरे के बताए हुए एक अपार्टमेंट पर छापा मारा। मोहम्मद इब्राहिम मिल गया। लेकिन वह मुंह कैसे खोलेगा? उसके लिए मेडॉक्स ने मारपीट और टॉर्चर का रिवायती तरीका नहीं अपनाया बल्कि उसे और उसकी पूरी फैमिली को
Speaker A
सिक्योरिटी और अमेरिकन नेशनलिटी देने का वादा किया। उस पर इब्राहिम ने वो राज उगल दिया जिसे जानने के लिए अमेकी सदर जॉर्ज डब्ल्यू बुश तक बेताब थे। अब सवाल यह पैदा होता है कि इब्राहिम को सद्दाम हुसैन के
Speaker A
खुफिया ठिकाने का पता कैसे चला? इसका जवाब यह है कि जैसा हमने बताया सद्दाम हुसैन को मजगोफ मछली बहुत पसंद थी। वह अला नामिक से कभी-कभी उसकी फरमाइश करते थे। सद्दाम हुसैन और अला नामिक दोनों को मोहम्मद इब्राहिम पर पूरा भरोसा था। इसीलिए सद्दाम
Speaker A
हुसैन के लिए मछली लाने की जिम्मेदारी इसी को दी गई थी। लेकिन इब्राहिम को भी सद्दाम हुसैन के इस खुफिया गढ़े के बारे में कुछ इल्म नहीं था। वो बस इतना जानता था कि अलानामिक ने उन्हें अपने घर में पनाह दे
Speaker A
रखी है। अपनी गिरफ्तारी से चंद हफ्ते पहले ही वह सद्दाम हुसैन के लिए मछली लेकर वहां आया था। बातोंबातों में उसने अलानामीिक से पूछा कि अगर अमरी यहां छापा मारे तो तुम सद्दाम हुसैन को कहां छुपाओगे? अलानामीिक को इब्राहिम पर भरोसा था और इसी भरोसे पर
Speaker A
उसने वो भयानक गलती कर दी जो सद्दाम हुसैन के लिए जानलेवा साबित हुई। उसने इब्राहिम को मकान के सहन में बनाए गए उस गड्ढे के बारे में बता दिया। वो राज जाहिर कर दिया जो इब्राहिम ने अमरीकियों को बेच दिया।
Speaker A
13 दिसंबर 2003 को रात 8:00 बजे अमेरिकी फौज ने सद्दाम हुसैन की जिंदा या मुर्दा गिरफ्तारी के लिए ऑपरेशन रेड डॉन शुरू किया जिसमें तकरीबन 600 फौजियों और कमांडोज़ ने हिस्सा लिया। मोहम्मद इब्राहिम भी साथ था। लेकिन उसे बख्तरबंद गाड़ी से
Speaker A
बाहर नहीं लाया गया। अमेरिकी फौज ने गांव को चारों तरफ से घेर लिया। कुछ अहलकार उस कच्चे से मकान तक पहुंचे जिसके अहाते में सद्दाम हुसैन की पनाहगाह थी। वहां अला नामिक और उसका भाई कैस मौजूद थे। जब उनसे
Speaker A
पूछ की गई तो वह दोनों अनजान बन गए कि उन्हें तो कुछ मालूम ही नहीं। फौजियों ने मकान की तलाशी लेना शुरू कर दी। अंदर एक गंदा सा कमरा था जिसमें एक छोटा सा बावचीखाना था। जहां एक सिंक, कुछ झूठे
Speaker A
बर्तन, चूल्हा और दूसरी चीजें थी। कमरे में बिस्तर पर कुछ कपड़े बिखरे हुए थे। वहां किसी किस्म का फोन या ऐसी कोई चीज नहीं थी। सद्दाम हुसैन की यहां मौजूदगी के कोई आसार भी नहीं थे। मोहम्मद इब्राहिम की
Speaker A
इंफॉर्मेशन गलत लग रही थी। उसे बख्तरबंद गाड़ी से उतार कर वहां लाया गया। वह धीमे कदमों से चलता हुआ उस मकान तक आया। अंदर सहन में आकर वो एक जगह अचानक रुक गया। फिर अपना एक पैर उसने जमीन पर मारा। वहां खड़े
Speaker A
फौजी एक दूसरे की शक्ल देखने लगे। वहां कुछ नहीं था। जमीन पर एक पुराना सा कालीन बिछा हुआ था। जिस पर मिट्टी और कचरा था। फौजियों ने कालीन हटाया तो उन्हें एक थर्मोपोल का ढक्कन नजर आया। उसे उठाया तो
Speaker A
एक सीधा गहरा गढ़ा था जिसमें बदबू के भपके उठ रहे थे। फौजियों ने हथियार तान लिए। एक अहलकार ने अंदर फेंकने के लिए ग्रेनेड तैयार किया। एक ने टॉर्च की रोशनी से अंदर झांका। लेकिन इससे पहले कि कोई एक्शन लिया
Speaker A
जाता गड्ढे के अंदर से एक थका हुआ उलझे बालों और लंबी दाढ़ी वाला बूढ़ा शख्स निकला। उसके दोनों हाथ ऊपर उठे हुए थे। उसने धीमी आवाज में कहा आई एम सद्दाम हुसैन द प्रेसिडेंट ऑफ इराक एंड आई एम
Speaker A
विलिंग टू नेगोशिएट यानी मैं सद्दाम हुसैन हूं इराक का सदर और मैं मुजाकरात करना चाहता हूं। वो इंतहाई पुरसकून थे। उन्होंने जरा भी मुजाहमत नहीं की। लेकिन उनके चेहरे पर शिकस्त और मायूसी साफ नजर आ रही थी। सद्दाम हुसैन को तेजी से वहां
Speaker A
खड़े एक हेलीकॉप्टर में बिठाकर बगदाद के करीब एक हाई सिक्योरिटी अड्डे पर ले जाया गया। वहां उनका पूरा मुआयना किया गया। शनाख्त की तस्दीक के लिए उनके मुंह से डीएनए टेस्ट का सैंपल लिया गया और उसकी वीडियो बनाकर उनकी यह तजलील पूरी दुनिया
Speaker A
को दिखाई गई। चंद माह बाद जून 2004 में अमेरिका ने सद्दाम हुसैन को इराक की नई हुकूमत के हवाले कर दिया। जिसने उन पर मुख्तलिफ मुकदमात चलाए। सदाम हुसैन मजीदम शत मौत और एक कत्लेआम के इल्जाम में 30 दिसंबर
Speaker A
2006 को ईद उल अज़ाहा की सुबह सद्दाम हुसैन को फांसी दे दी गई। सद्दाम हुसैन को पनाह देने के जुर्म में अला नामिक और उसके भाई कैस को भी गिरफ्तार कर लिया गया था। दोनों को बदनाम जमाना अबू गुरैब जेल में रखा
Speaker A
गया। वाशिंगटन पोस्ट को दिए गए इंटरव्यू में अलाना नामिक ने बताया कि दोनों भाइयों को दौराने कैद इंतहाई सख्त और नाकाबिले बर्दाश्त तफ्तीशी मरहलों से गुजारा गया। 24 घंटे इंतहाई अंधेरे में रखा जाता। दिन रात इंतहाई तेज मौसी चलाई जाती। डराने के
Speaker A
लिए उन पर कुत्ते भी छोड़ दिए जाते। वो छह माह तक यह सब बर्दाश्त करते रहे। उसके बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। अला नामिक आज आम शहरी की जिंदगी गुजार रहा है। वो आज भी उसी घर में रहता है जहां उसने सद्दाम
Speaker A
हुसैन को पनाह दी थी।
Topics:सद्दाम हुसैनमसगफ मछलीइराक युद्धअमेरिकी फौजस्पाइडर होलअला नामिकइराकी खोजताश के पत्तेइराक कब्जासद्दाम गिरफ्तारी











