याहिया खान के करियर के अंतिम दिनों और 1971 के युद्ध में उनकी भूमिका की अनसुनी कहानी।
Key Takeaways
- याहिया खान ने 1971 के युद्ध में महत्वपूर्ण लेकिन विवादित भूमिका निभाई।
- उनका करियर कई राजनीतिक और सैन्य संकटों से भरा था।
- उनकी व्यक्तिगत कमजोरियां और मानसिक दबाव युद्ध की हार में योगदान थे।
- जुल्फिकार अली भुट्टो के साथ उनके संबंध और राजनीतिक मतभेद महत्वपूर्ण थे।
- वीडियो ने याहिया खान के जीवन के अनछुए पहलुओं को सामने लाया है।
What the video covers
- वीडियो में याहिया खान के जीवन और करियर के अंतिम दिनों की कहानी बताई गई है।
- 1971 के चुनावों में आवामी लीग की जीत और उसके बाद के राजनीतिक संकट पर चर्चा।
- पूर्वी पाकिस्तान में अलगाववादी आंदोलन और फौजी ऑपरेशन की स्थिति।
- याहिया खान का विश्व युद्ध द्वितीय में इटली में युद्धकैदी बनना।
- याहिया खान की शायरी और अंग्रेजी साहित्य के प्रति रुचि, खासकर शमीम हुसैन (ब्लैक ब्यूटी) के साथ संबंध।
- याहिया खान के बाग में खोदे गए गढ़े की कहानी और युद्ध के दौरान उनका छुपने का तरीका।
- 1971 के युद्ध के दौरान भारत के हमलों और पाकिस्तान की सैन्य स्थिति।
- याहिया खान और जुल्फिकार अली भुट्टो के बीच राजनीतिक तनाव और संयुक्त राष्ट्र में सीजफायर प्रस्ताव।
- युद्ध के दौरान याहिया खान के मानसिक दबाव, शराब पीने की आदत और युद्ध कैदी बनने का विवरण।
- वीडियो में पाकिस्तान के डार्क डेज़ और याहिया खान के करियर के अंत के अनसुने पहलुओं को उजागर किया गया है।
Chapters
- 00:00शमीम ब्लैक ब्यूटी और याहिया खान का परिचय
- 01:19नूरजहां से इंटरनेशनल कॉल और याहिया का नशा
- 02:321971 के चुनाव और पूर्वी पाकिस्तान की स्थिति
- 03:48याहिया खान का युद्ध कैदी बनना
- 04:46सहादत अली खान और याहिया खान का पारिवारिक इतिहास
- 06:00याहिया खान की शायरी और शमीम हुसैन के साथ संबंध
- 08:13युद्ध के दौरान याहिया खान का बाग में गढ़ा
- 09:18गिद्ध का प्रतीकात्मक वाकया और युद्ध की गंभीरता
- 10:19याहिया खान और जुल्फिकार अली भुट्टो के बीच राजनीतिक तनाव
- 11:29संयुक्त राष्ट्र में सीजफायर प्रस्ताव और युद्ध की हार
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Speaker A
एक आला पुलिस ऑफिसर की वाइफ शमीम ब्लैक ब्यूटी के नाम से मशहूर थी। बाग में बड़ी अर्जेंसी में एक गढ़ा खोदा गया। अय्यूब खान को डैडी कहने वाले जुल्फिकार अली भुट्टो की नजरों में याहिया खान की क्याेंस थी।
Speaker A
और अब शेख मजीद भी तबाह हो गया। आज हम आपको एक जनरल की कहानी [संगीत] के ऐसे किस्से सुनाएंगे जो आपने पहले कभी नहीं सुने होंगे। शत्रु शत्रु मुल्क के सबसे बड़े सूबे में सेपरेटिस्ट यानी अलहदगी पसंदों ने कयामत मचा रखी थी।
Speaker A
मुल्क पर दुश्मन हमला कर चुका था। फजा फाइटर जेट्स की जोरदार आवाजों से लरस रही थी। जमीन गोलियों की तड़तहट और बमों के धमाकों से कांप रही थी। और ऐसे में मुल्क का मुहाफिज मुल्क का करता धर्ता अपने एक साथी
Speaker A
के साथ बैठा जाम पर जाम पी रहा था। अचानक फोन की घंटी बजती है। यह एक इंटरनेशनल कॉल है। वो फोन उठाता है और आवाज सुनते ही उसका नशा दोबाला हो जाता है। वो हथेली से रिसीवर ढांप कर साथ बैठे
Speaker A
शख्स को आंख मारता है और मुस्कुरा कर कहता है यह नूरजहां है। टोक्यो से फोन कर रही है। यूं तो कॉल करने वाली गुलुकारा की आवाज हर दिल को भाती थी। मगर नशे में झूमते मुल्क के मालिक को कुछ ज्यादा ही
Speaker A
गरमा देती थी। वो बहकी बहकी आवाज में फरमाइश करता है। नूरजहां वो गाना तो सुनाओ। मेरा भाई मेरे भाग जगा आ गया। अपने भाग जगाने के चक्कर में कौम के भाग सुला देने वाला यह शख्स था जनरल आगा
Speaker A
मोहम्मद या खान। एक जंग में घिरे हुए मुल्क पर इंतहाई बेपरवाही के साथ रूल करने की यह कहानी बड़ी लंबी है। इस कहानी में एक सदर मुमिकत कहीं अकलीम अख्तर उर्फ़ जनरल रानी का राजा बन जाता है। कहीं किसी तरन्नुम की मलका का
Speaker A
बादशाह बना दिखाई देता है और कभी किसी तराना के सामने सर झुकाए नजर आता है। लेकिन आज हम हजारों बार सुनी गई इन स्टोरीज से हटकर आपको पाकिस्तान के उन डार्क डेज की कहानी सुनाएंगे जो या खान के
Speaker A
करियर के आखिरी दिन थे और मुत्तहदा पाकिस्तान के भी आखिरी लम्हे यानी दिसंबर 1971 [चीखने की आवाज़] 1971 के इलेक्शन आवामी लीग ने मेजॉरिटी से जीत लिए लेकिन उसे इख्तेदार दार नहीं दिया गया। आवामी लीग के कारिंदों ने मशरकी
Speaker A
पाकिस्तान में आग लगा दी। गैर बंगालियों को चुन चुन कर मारा गया। सिचुएशन को कंट्रोल करने के लिए फौजी ऑपरेशन शुरू किया गया लेकिन हालात मजीद खराब हो गए। 1971 का दिसंबर शुरू हो चुका था। इंटरनल कंडीशन तो पहले ही खराब थी कि 3 दिसंबर को
Speaker A
भारतीय फौज ने भी पाकिस्तान पर अटैक कर दिया। अगले रोज यानी 4 दिसंबर को भारतीय तैयारों ने पहले ढाका पर बम बरसाए और वाहिद एयरपोर्ट का रनवे तबाह कर डाला। भारत की क्लियर इंटेंशन यह थी कि वेस्ट और ईस्ट
Speaker A
पाकिस्तान के दरमियान हर कांटेक्ट को खत्म कर दिया जाए। सफाक भारतीय पायलट्स ने एक यतीम खाने पर भी बम गिरा दिए। बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक 400 से ज्यादा अफराद इस हमले में जान से गए। इतने खतरनाक
Speaker A
हालात में हमारे सदर मुमिकत या खान कहां थे और क्या वो भी कभी जंगी कैदी बने थे?
Speaker A
यह जानने से पहले उनके बारे में वो बात बताते हैं जो आपने पहले कभी नहीं सुनी होगी। यह बात है 1931 की। हिंदुस्तान पर अंग्रेज का राज था। मगर आजादी और बगावत की चिंगारियां भड़क उठी थी। अंग्रेज हुकूमत
Speaker A
हुरियत पसंदों को ढूंढ-ढूंढ कर कत्ल कर रही थी। इस काम के लिए जो लोकल लोग थे, गोरों से लॉयल थे, वो उनकी हेल्प कर रहे थे। ऐसा ही एक वफादार था सहादत अली खान। वो इंडियन इंपीरियल पुलिस में हेड
Speaker A
कॉन्स्टेबल भर्ती हुआ और अंग्रेजों की ऐसी खिदमत की, ऐसी सर्विसेज दी कि सुपरिंटेंडेंट के ओहदे तक जा पहुंचा। उसने आजादी के मतवालों पर बड़े जुल्म किए। भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव जैसे जो रिवोलशनरीज थे उन्हें गोरों ने गिरफ्तार
Speaker A
करके खुफिया तौर पर फांसी दे दी। तब इसी सादत अली खान ने उनकी लाशें छुप छुपा कर ठिकाने लगा दी। इस महारत से यह काम किए सादत ने कि अंग्रेज सरकार ने उसे खान साहब का खिताब अदा कर दिया। और इसी सहादत अली
Speaker A
खान का बेटा था या खान। बाप ने लाशें दफनाने के लिए गढ़े खोदे होंगे। लेकिन याहिया खान ने अपने बाग पे गढ़ा क्यों खुदवाया? और वो ब्लैक ब्यूटी का मुद्दा क्या है? यह मिस्ट्री हम आपको आगे बताएंगे। लेकिन अब अगर आप यह वीडियो
Speaker A
देखतेदेखते यहां तक आ ही गए हैं तो चैनल को सब्सक्राइब भी कर लीजिए। इससे हमारा हौसला बहुत बढ़ जाता है। और अगर आप लाइक और शेयर करेंगे तो फिर तो क्या ही बात है। लाइक और शेयर करने से ऐसी इनेटिव वीडियोस
Speaker A
दूसरों तक भी पहुंच जाती हैं। और यूं समझें कि हमें हमारी मेहनत का सिला मिल जाता है। और अगर आप ऑलरेडी सब्सक्राइबर हैं तो आपका बहुत-बहुत शुक्रिया। तो चलिए कहानी को वहीं से जोड़ते हैं और बताते हैं कि या खान जंगकी कैदी कैसे बने। [संगीत]
Speaker A
71 की जंग में नाकामी के बाद भारत ने हजारों पाकिस्तानी फौजियों को जंगी कैदी बना लिया था। उस वक्त या खान सदर पाकिस्तान और चीफ मार्शल लॉ एडमिनिस्ट्रेटर थे। लिहाजा हजारों पाकिस्तानी फौजियों को कैद करवाने का इल्जाम भी उन्हीं पर आता है। लेकिन एक
Speaker A
दिलचस्प हकीकत यह है कि वो खुद भी 1942 में वर्ल्ड वॉर 2 के दौरान इटली की फौज के हाथों पकड़े गए थे। लंबे अरसे इटली के एक जंगी कैंप में कैद रहे। दो मर्तबा फरार की कोशिश की लेकिन
Speaker A
दोनों बार पकड़े गए। आखिर तीसरी कोशिश में उन्हें कामयाबी मिली और वो भाग निकले। पार्टीशन के बाद पाक फौज में शामिल होने वाले मेजर या खान स्टाफ कॉलेज कोटा में इंस्ट्रक्टर भी रहे। अब सुनिए वो ब्लैक ब्यूटी की कहानी क्या है? असल में या खान
Speaker A
को शायरी का बड़ा शौक था। खासतौर पर शेक्सपियर और लॉर्ड बरन की पोएट्री के वह दीवाने थे। या ऐसे अफराद को पसंद करते थे जिनकी अंग्रेजी शानदार हो और वो लिटरेचर पर गुफ्तगू कर सके। [संगीत] यही वजह है कि
Speaker A
जहां वो अकलीम अख्तर और नूर जहां के गविदा थे वहीं एक बंगाली खातून शमीम हुसैन पर भी फिदा थे। एक आला पुलिस ऑफिसर की वाइफ [संगीत] शमीम ब्लैक ब्यूटी के नाम से मशहूर थी। उनके डार्क कलर के बावजूद याहिया उनकी कंपनी को
Speaker A
इसलिए पसंद करते थे क्योंकि वो इंग्लिश बहुत अच्छी बोलती थी और शेक्सपियर और लॉर्ड बैरन जैसे उनके पसंदीदा शोरों पर गुफ्तगू कर सकती थी। शमीम आगे चलकर इतनी पावरफुल हो गई कि फॉरेन मिनिस्ट्री के फैसलों में इंटरफेयर करने लगी थी।
Speaker A
या खान और उनके साथियों को एक हैरानक इशारा मिला था कि जंग की तरफ मत जाओ। बड़ी तबाही का सामना करोगे। लेकिन अफसोस [संगीत] कि वो समझ ना पाए। थोड़ी देर पहले हमने आपको बताया था कि सदर साहब ने अपने बाग
Speaker A
में एक गढ़ा खुदवाया था। पहले उसकी कहानी सुन लें। फिर यह भी बताएंगे कि वो इशारा क्या था। सदर या खान के दफ्तर के सामने एक बहुत बड़ा बाग था। सदर साहब ने हुकुम दिया कि वहां एक गढ़ा खोदा जाए। बाग में बड़ी
Speaker A
अर्जेंसी में एक गढ़ा खोदा गया और उसमें ज़रे जमीन एक कमरा बनाया गया। छत पर रेत से भरी हुई बोरियां रख दी गई। अब होता कुछ यूं था कि जब भी भारतीय तैयारे हमला करते और सायरन बचते सदर याहिया खान झूमते-झामते
Speaker A
किसी का सहारा लेते उस ज़रे जमीन कमरे में छुप जाते। और उस वक्त तक बाहर ना आते जब तक जहाज मुकम्मल तौर पर गायब ना हो जाते। उन्हीं दिनों एक बड़ा अजीब और बड़ा ही मिस्टीरियस किस्म का वाकया हुआ। लाखों
Speaker A
लोगों की मौत की तरफ इशारा करता वाकया। जनरल या खान ने ऐलान किया था कि अगर मशरकी पाकिस्तान पर हमला हुआ तो उसका जवाब मगरबी पाकिस्तान से एयर स्ट्राइक [संगीत] के जरिए दिया जाएगा। भारत ने हमले शुरू किए तो मिलिट्री हाई
Speaker A
कमांड के एक इजलास में शिरकत के लिए जनरल या प्रेसिडेंट हाउस से निकले और जीप में सवार हुए। उस मीटिंग में जंग के फाइनल डिसीजंस लिए जाने थे। ड्राइविंग सीट पर जनरल हमीद थे और जनरल या उनके साथ बैठे
Speaker A
थे। जो ही जीप स्टार्ट हुई अचानक कहीं से एक बहुत बड़ा गिद्ध आकर जीप के रास्ते में बैठ गया। गिद्ध ऐसा परिंदा है जो मुरदार खाता है जो नूसत, मौत और बर्बादी का सिंबल है। इस्लामाबाद में मौजूद प्रेसिडेंट हाउस
Speaker A
के इलाके में गिद्ध का आ जाना खुद एक अजीब सी बात थी। अरशद समी खान अपनी किताब थ्री प्रेसिडेंट्स एंड एन एड में लिखते हैं कि जनरल हमीद ने हॉर्न बजाए। गाड़ी आगे पीछे की लेकिन गिद्ध नहीं हटा। हैरानक तौर पर
Speaker A
जनरल या खुद जीप से नीचे उतरे और गिद्ध को अपनी फौजी स्टिक से भगाने की कोशिश करने लगे। वो चंद कदम आगे जाता और फिर दोबारा सड़क के बीचोंबीच आकर रुक जाता। आखिरकार पास ही मौजूद एक माली बेलचा उठा लाया और
Speaker A
बड़ी मुश्किल से गिद्ध को भगाया। लेकिन शायद गिद्ध पैगाम दे गया था कि अब क्या होने वाला है। वक्त गुजरता जा रहा था और ईस्ट पाकिस्तान में शिकस्त साफ दिखाई दे रही थी। आइए जानते हैं कि ऐसे में एक [संगीत]
Speaker A
डिक्टेटर अय्यूब खान को डैडी कहने वाले जुल्फिकार अली भुट्टो की नजरों में याहया खान की क्याेंस थी। यूनाइटेड नेशन की सलामती काउंसिल में सीज फायर की बहुत सी तजावीज पेश की गई लेकिन सोवियत यूनियन ने सबको वीटो कर दिया। फिर
Speaker A
पोलैंड ने एक तजवीज पेश की जिसमें फरी जंगबंदी और ईस्ट पाकिस्तान के कॉन्फ्लिक्ट को पॉलिटिकली हल करने की डिमांड की गई। याहया या ने पोलैंड की पेशकश को कुबूल करने का फैसला किया। फरी तौर पर जुल्फिकार अली भुट्टो से राब्ता किया गया जो
Speaker A
न्यूयॉर्क में पाकिस्तानी डेलीगेशन को लीड कर रहे थे। याया खान भुट्टो से कहना चाहते थे कि यह करारदा कबूल कर लो। लेकिन लाख कोशिश के बावजूद भुट्टो फोन पर अवेलेबल ही नहीं। आमतौर पर याहिया और भुट्टो के दरमियान मुख्तलिफ उमूर पर बातचीत के लिए
Speaker A
टेलीफोन पर अक्सर कांटेक्ट होता था और कभी कभार तो दिन में कई-कई मर्तबा बात होती थी। रिचर्ड ससन और लियो रोस अपनी किताब वॉर एंड सक्सेशन पाकिस्तान
Speaker A
हैं उसके जवाब में भुट्टो की आवाज आती है। मैं आपकी आवाज सुन नहीं सकता। याया खान कई बार अपनी बात रिपीट करते हैं। लेकिन भुट्टो ऐसा इंप्रेशन देते हैं जैसे उन्हें कुछ सुनाई ही नहीं दे रहा। मुसलसल कहते
Speaker A
हैं क्या आप क्या कह रहे हैं? मुझे कुछ सुनाई नहीं दे रहा। इस दौरान न्यूयॉर्क के टेलीफोन ऑपरेटर ने इंटरफेयर करते हुए कहा कि लाइन बिल्कुल साफ है। आप बोले इस पर भुट्टो को गुस्सा आ जाता है और वो चिल्ला
Speaker A
कर बोलते हैं अपना मुंह बंद करो। फिर भुट्टो ने अकवामे मुत्तहदा के इजलास में एक पुरजोश तकरीर की और पोलैंड की करारदाद के पेपर्स फाड़ दिए। वी विल फाइट वी विल गो बैक एंड फाइट। व्हाई शुड आई वेस्ट माय टाइम हियर इन द
Speaker A
सिक्योरिटी काउंसिल। आई विल नॉट टू बी अ पार्टी टू द इग्नोस सरेंडर माय कंट्री। यू कैन टेक योर सिक्योरिटी कार यू आर आई एम गोइंग। उनके स्टाइल ने पाकिस्तान में भुट्टो को मजीद पॉपुलर कर दिया। मगर कहा जाता है कि
Speaker A
अगर यह रेजोल्यूशन मान ली जाती तो शायद पाकिस्तान बच जाता या कमस कम ऐसी ह्यूमिलिएटिंग डिफीट से दोचार ना होता जो हमारा मुकद्दर बनी। भुट्टो ने ऐसा क्यों किया? यह आप सब अच्छी तरह जानते हैं। ठीक उन्हीं दिनों जनरल या ने एक इंटरनेशनल
Speaker A
टीवी चैनल को इंटरव्यू दिया। उनका कॉन्फिडेंस देखकर हैरत होती है। तमामतर एलगेशंस और अपने नेगेटिव इमेज के बावजूद वो एक बावाकार और इंप्रेसिव शख्स दिखाई दिए। उन्होंने इंटरव्यू में बड़ा इंटरेस्टिंग दावा किया। फरमाते हैं मैं मशरिक पाकिस्तान को अपने हाथ की हथेली की
Speaker A
तरह जानता हूं। आई नो ईस्ट पाकिस्तान मोर देन ईस्ट पाकिस्तान नो देमसेल्व्स। ईस्ट पाकिस्तान को वो कितना गहरा जानते थे इसका भांडा भी वो खुद ही फोड़ देते हैं। आर्मी है ट्राइड टू सेव 70 मिलियन पीपल ऑफ ईस्ट पाकिस्तान।
Speaker A
कहते हैं कि फौज 7 करोड़ मशरिकी पाकिस्तानियों को बागियों से बचाने की कोशिश कर रही है। हालांकि मशरिकी पाकिस्तान की आबादी 4 करोड़ 20 लाख के करीब थी। गोया मशरिकी पाकिस्तान को मशरिकी पाकिस्तानियों से ज्यादा जानने वाले सदर
Speaker A
को यह भी मालूम नहीं था कि उस ख्ते की आबादी कितनी है। ये तो चलिए सियासी दावे थे। मगर कहने वाले कहते हैं कि जब जंग शुरू हुई तो याया खान खौफ की वजह से शदीद ज़हनी दबाव और पैरानोया का शिकार हो गए थे।
Speaker A
और यह इत्तलात भी सामने आई कि उन्हें अक्सर भुट्टो, इंदिरा गांधी और भारतीय वज़र दफा जगजीवन राम से मुतालिक हेलुसिनेशंस के अटैक होते थे। 1971 की जंग शुरू हुए तीन ही दिन हुए थे। याया खान एक तकरीब में इनवाइटेड थे। यकीन
Speaker A
करना मुश्किल था कि मुल्क में जंग छिड़ी हुई है और यहां जश्नो सुरूर की शानदार पार्टी चल रही है। अचानक या खान अपने सिगरेट से डेकोरेशन के लिए लगाए गए गुब्बारों को फोड़ने लगते हैं। वो जिस गुब्बारे को भी फोड़ते जोर से एक नाम
Speaker A
लेते। ये जगजीवन राम तबाह हो गया। यह भुट्टो तबाह हो गया। और अब शेख मजीद भी तबाह हो गया। [हंसी] जब आखिरी गुब्बारा फटा तो वो खुशी से चिल्लाए। और अब शेख मुजीब भी तबाह हो गया। यह हरकतें करने के बाद वह गुलूकारा
Speaker A
नूरजहां के साथ तकरीब से चले गए। कहते हैं कि जंग के दिनों में या खान अपने आसाब को पुरसकून रखने के लिए रोजाना 2 से ढाई लीटर शराब पीते थे। बाज औकात वो रात को अचानक चीखते हुए उठ बैठते। वो कह रहे होते
Speaker A
मजीब को यहां से ले जाओ। फांसी दे दो उसे। एक डॉक्टर उन्हें पुरसकून करने के लिए बाकायदगी से मेडिसिंस देता था। आखिरकार शराब में गर्क रहने वाले सदर का मुल्क खून और आग में डूब गया और डूब कर उभरा तो वो
Speaker A
आधा रह गया था। अपनी खताएं, भारत की साजिशें और इख्तेदार से महरूमी पर आवामी लीग का रद्दे अमल रंग लाया और ईस्ट पाकिस्तान बांग्लादेश बन गया। हथियार डालने से एक रोज पहले जनरल या का एक पैगाम जनरल नियाजी को मिला जिसमें कहा
Speaker A
कि तुम अपना फैसला करने में आजाद हो लेकिन मेरी नसीहत यह है कि तुम वही करो जो भारतीय अफवाज कह रही है। शिकस्त हो गई मुल्क आधा रह गया। हर पाकिस्तानी गम से निढाल था। लेकिन सदर साहब अब भी नशे में
Speaker A
मस्त थे। उन्होंने जूही पाकिस्तानी फौज के हथियार डालने की बात सुनी सवा5 बजे कौम से खिताब करने पहुंच गए और कहा यह एक आरजी नाकामी है। हम मगरबी सेक्टर में लड़ाई जारी रखेंगे। इतनी बड़ी जंग में किसी एक
Speaker A
महाज पर वक्त तौर पर पीछे हटने का यह मतलब हरगिज़ नहीं है कि लड़ाई खत्म हो चुकी है। यह पैगाम रिकॉर्ड हुआ तो सेक्रेटरी खारजा सुल्तान खान यह सुनकर हैरान रह गए। या खान अब भी छतों, साहिलों और सड़कों पर दुश्मन
Speaker A
से लड़ने की बात कर रहे हैं। उन्होंने मशवरा दिया कि सदर का कोई पैगाम एयर ना किया जाए। लेकिन या खान ने यह तजवीज मानने से इंकार कर दिया। सेक्रेटरी ख्वाजा ने बड़ी मुश्किल से कांट छांट करके पैगाम को
Speaker A
एयर किया। शिकस्त और हथियार डालने की खबर मिलते ही पाकिस्तानी गुस्से से बिखर गए। सड़कों पर मुजाहरे होने लगे। जूनियर मिलिट्री ऑफिसर्स की फौजी बगावत की अफवाहें फैल गई। सुरते हाल से खौफजदा होकर या खान ने भी हथियार डाल दिए। वो 20 दिसंबर 1971 को
Speaker A
हुकूमत जुल्फिकार अली भुट्टो को देकर मुस्तहफी हो गए। आवामी लीग के सरबराह और बांग्लादेश के बानी शेख मुजीब उर रहमान को या ने पाकिस्तान में कैद कर रखा था। अब देखिए कितना अजीब मंजर है। शेख मुजीब रिहा होकर फ्लाइट से लंदन जा रहे थे। जबकि
Speaker A
याहिया खान को भुट्टो ने खारिया के करीब जंगल में वाकई एक बंगले बनी रेस्ट हाउस पे नजरबंद कर दिया था। 20 अप्रैल 1972 को उन्हें जाती रिहाइशगाह 61 हॉरले स्ट्रीट मुंतकिल कर दिया गया। उन्हें आवाम और सफियों से मिलने की इजाजत नहीं थी। हर
Speaker A
वक्त महफिल सजाए रखने वाला बिल्कुल तन्हा हो गया था। [संगीत] फिर वो वक्त भी आया जब याया खान को हमदुर रहमान कमीशन के सामने पेश किया गया। तारीख थी 26 दिसंबर 1971। कमीशन की रिपोर्ट ने कहा कि जनरल या खान
Speaker A
ने ना सिर्फ सरेंडर की इजाजत दी बल्कि जनरल नियाजी को उकसाया भी। कमीशन ने उनके खिलाफ पब्लिक ट्रायल चलाने का हुक्म दिया और या खान पर अय्याश और शराबनश होने का इल्जाम आयद किया। यहां आपको एक मजे की बात
Speaker A
बताएं। कमीशन में जमा कराए गए अपने बयान के आखिर में या खान ने दस्तखत किए और लिखा या खान एक गैरकानूनी तौर पर कैद किया गया जनरल। भारतीय साहफी दीवान परिंद्रा नाथ का कहना है कि याहिया पावर में आने के बाद
Speaker A
स्ट्रेस और प्रेशर का मुकाबला करने के लिए ड्रिंकिंग और अय्याशी की तरफ माइल हुए। जबकि एक सिपाही के तौर पर वो एक कॉम्पिटेंट सोल्जर थे। पार्टियों से परहेज करते थे। अपना वक्त फैमिली के साथ गुजारते थे और रमजान के रोज़ भी रखते थे। और आप यह
Speaker A
जानकर दंग रह जाएंगे कि 1969 से 1971 के या खान के दौरे इ्तदार में जमात इस्लामी के अमीर मियां तफैल मोहम्मद ने उन्हें इस्लाम का पासबान करा दिया था। अगस्त 1977 में एक रोज या खान के घर की
Speaker A
घंटी बजी। मुलाजिम ने दरवाजा खोला तो पाकिस्तान टेलीविजन का स्टाफ उनके दरवाजे पर खड़ा था। पीटीवी रावलपिंडी स्टेशन के सीनियर अफसर बुरहानुद्दीन हसन अमले को लीड कर रहे थे। याया खान यह जानकर हैरान रह गए कि वो उनका इंटरव्यू करना चाहते थे।
Speaker A
उन्हें जनरल जिया की इंतजामिया की तरफ से इंटरव्यू की हिदायत मिली थी और कहा गया था कि वो या खान से खासतौर पर 1971 में ईस्ट पाकिस्तान की सेपरेशन में जुल्फिकार अली भुट्टो के किरदार के बारे में बात करवाएं।
Speaker A
दरअसल जिया भुट्टो को फांसी देना चाहते थे। जिसके लिए जवास की तलाश थी। जब याहया को पता चला तो उन्होंने इस मौजू पर बात करने से साफ इंकार कर दिया। वो अब मुकम्मल तौर पर खामोश हो चुके थे और
Speaker A
यह चुप हमेशा की खामोशी की तरफ बढ़ रही थी। गिरती हुई सेहत की वजह से 1977 में उनकी नजरबंदी खत्म कर दी जाती है। वो रिहा हो जाते हैं। लेकिन खुद को रिहा नहीं करवा पाते। वो आखिर दम तक आवाम और तकरीबात से
Speaker A
दूर रहते हैं और फिर 10 अगस्त 1980 को उनकी जिंदगी का बाप हमेशा के लिए बंद हो जाता है। ओम
Topics:याहिया खानईस्ट पाकिस्तान1971 का युद्धजुल्फिकार अली भुट्टोआवामी लीगशमीम हुसैनपाकिस्तान इतिहासवर्ल्ड वॉर 2पाकिस्तानी सैन्य इतिहासडिक्टेटर











