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Nawaz Sharif: How One Family Ruled Pakistan | The Sharif Empire

नवाज शरीफ और मुस्लिम लीग नून की पाकिस्तान पर शासन की कहानी, लाहौर के विकास और भ्रष्टाचार की सच्चाई।

Key Takeaways

  • नवाज शरीफ का राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव पाकिस्तान पर गहरा रहा है।
  • मुस्लिम लीग नून ने लाहौर को मॉडल सिटी दिखाने के लिए भारी खर्च किया लेकिन बुनियादी सुविधाओं में कमी रही।
  • शहरी विकास के नाम पर पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य की अनदेखी हुई।
  • सरकारी परियोजनाओं में भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन ने आम जनता को प्रभावित किया।
  • लाहौर की जल और पर्यावरणीय समस्याएं आज भी गंभीर बनी हुई हैं।

What the video covers

  • जनरल जियाउल हक के दौर में नवाज शरीफ की शुरुआत और मुस्लिम लीग नून की सत्ता में उभरना।
  • नवाज शरीफ के तीन बार प्रधानमंत्री बनने और उनके शासनकाल की प्रमुख उपलब्धियां जैसे मोटरवे, न्यूक्लियर बम।
  • शरीफ परिवार की सियासत और व्यापारिक साम्राज्य, जिसमें सऊदी अरब की स्टील मिल और ऑफशोर खातों का जिक्र।
  • लाहौर को मॉडल सिटी के रूप में पेश करने के बावजूद शहर में साफ पानी, ड्रेनेज और पर्यावरण की गंभीर समस्याएं।
  • लाहौर में पानी की किल्लत, गंदे पानी की आपूर्ति और सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार।
  • रूडा के दावों के बावजूद रावी नदी की बहाली में विफलता और हाउसिंग सोसाइटीज का निर्माण।
  • लाहौर में भारी बारिश के बाद बाढ़ की समस्या और जल निकासी का अभाव।
  • शरीफ परिवार के शासनकाल में शहर के पार्कों और अस्पतालों की कमी, और पर्यावरणीय क्षति।
  • लाहौर की वायु गुणवत्ता की गिरावट और शहर का प्रदूषित होना।
  • शरीफ परिवार के शासनकाल की आलोचनाएं और उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप।

Answers

Questions about this video

नवाज शरीफ ने पाकिस्तान की राजनीति में क्या योगदान दिया?

नवाज शरीफ तीन बार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने और उन्होंने मोटरवे, न्यूक्लियर बम जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स शुरू किए, जिससे देश की आर्थिक और सुरक्षा स्थिति में सुधार हुआ।

लाहौर को मॉडल सिटी क्यों कहा जाता है और इसकी क्या वास्तविक स्थिति है?

मुस्लिम लीग नून ने लाहौर को साफ-सुथरी सड़कों, फ्लाईओवर्स और मेट्रो बस जैसी सुविधाओं के कारण मॉडल सिटी बताया, लेकिन शहर में साफ पानी, ड्रेनेज और पर्यावरण की गंभीर समस्याएं बनी हुई हैं।

शरीफ परिवार पर भ्रष्टाचार के क्या आरोप हैं?

शरीफ परिवार पर अरबों रुपए के भ्रष्टाचार, ऑफशोर खातों में धन छुपाने और सरकारी परियोजनाओं में अनियमितताओं के आरोप लगे हैं, जिनकी जांच भी हुई है।

Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:00
Speaker A
सुबह के 8:00 बजे हैं। जनरल जियाउल हक की फौजी आमियत का दौर है। गवर्नर हाउस पंजाब के वसीओ अरीज लॉन में गवर्नर पंजाब लेफ्टिनेंट जनरल गुलाम जिलानी खान और कॉमर्स मिनिस्टर मियां जाहिद सरफराज किसी अहम मामले पर उलझे हुए हैं। सफेद कुर्ता शलवार में मलबूस एक नौजवान कुछ दूर दाएं बाएं टहल रहा है। इतने में गवर्नर साहब को नाश्ते का ख्याल आता है। वो खानसामा को बुलाकर ऑर्डर करते हैं। खानसामा तमाम आइटम्स नोट कर लेता है और किचन की जानिब लौट जाता है। यह दोनों फिर फाइलों में गुम हो जाते हैं। मियां जाहिद सरफराज बताते हैं कि अचानक गवर्नर साहब को अनार का जूस याद आया। वो ऑफर करते हैं, "जाहिद तुम भी जूस पियो। बहुत मजे का है।"
00:19
Speaker A
"जी सर।" मेरे हां कहते ही लेफ्टिनेंट जनरल गुलाम [संगीत] जिलानी खान सफेद कुर्ता शलवार में मलबूस दूर टहलते नौजवान को आवाज देकर कहते हैं, "नवाज जाओ खानसा से कहो कि अनार का जूस भी ले आए।" और लड़का फौरन किचन की तरफ चल पड़ता है। जाहिद सरफराज ने उस लड़के को पहली मर्तबा देखा था। पूछने पर गवर्नर ने बताया कि यह इत्तेफाक फाउंड्री वाले मियां शरीफ का बेटा नवाज शरीफ है। गवर्नर हाउस में इधर-उधर घूमता यह नौजवान सिर्फ एक साल बाद ही पंजाब [संगीत] का वजीर खजाना बन जाता है और यहां से आगाज होता है उस शरीफ एंपायर का जो पिछली चार दहाइयों से पाकिस्तान पर राज कर रही है। तसवुर करें एक ऐसे शख्स का जिसे किस्मत [संगीत] ने इख्तेदार के एवानों से एक नहीं, दो नहीं, तीन मर्तबा निकाला। जिसने मोटरवे का जाल डाला, जिसने न्यूक्लियर [संगीत] बम फाड़ कर दुनिया को हिला डाला। तकबीर! जिसने मुल्क को लोड शेडिंग के अंधेरों से निकालकर रोशनियों से जगमगाया। लेकिन छुप छुपाकर लंदन के लग्जरी फ्लैट्स का मजा भी उठाया। [संगीत] सऊदी अरब में स्टील मिल का चक्कर भी चलाया और बिलियंस ऑफ डॉलर्स के ऑफशोर अकाउंट्स में रोकड़ा भी छुपाया। यह कहानी है मुस्लिम लीग नून की। यह कहानी है नवाज शरीफ, शहबाज शरीफ और मरियम नवाज की। यह कहानी है एक ऐसी सियासी पार्टी की जिसने पार्लियामेंट में नहीं एक स्टील मिल में आंख खोली जो एक आमिर की गोद में परवान चढ़ी। आज हम मुस्लिम लीग नून को कटहरे में खड़ा करेंगे और आप होंगे जज। लेकिन इससे पहले कि हम आगे बढ़े अगर आप चाहते हैं कि फिक्र का इंकलाब आए तो इंकलाब को सब्सक्राइब कर लें क्योंकि हम तो सोचो में इंकलाब लाकर ही रहेंगे। तो क्या ख्याल है?
00:34
Speaker A
लाहौर से शुरू करें। ये है शहर लाहौर। मुस्लिम लीग नून का गढ़, एक मॉडल सिटी। चौड़ी कुशादा और साफ सुथरी सड़कों का जाल। ट्रैफिक को रवा दवा रखने वाले फ्लाई ओवर्स का बेहतरीन इंतजार। बड़ी शहराओं को एक दूसरे से मिलाते अंडरपास हैं। शहर के एक किनारे से दूसरे किनारे तक दौड़ती भागती ऑरेंज लाइन ट्रेनें जो वक्त पर आती हैं और वक्त पर पहुंचाती हैं। मेट्रो बसें जिनका किराया ना होने के बराबर है। बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर और इन सबसे खुश यहां के आवाम। जिस तरह से लाहौर है, यह फार बेटर देन कराची इन टर्म्स ऑफ़ इंफ्रास्ट्रक्चर, इन टर्म्स ऑफ़ सेफ्टी। मुस्लिम लीग नून ने तरक्की की यह तस्वीर दिखाने के लिए बरसों मेहनत की है। यह बयानिया सेट करने के लिए लाखों जतन किए हैं। अरबों रुपए खर्च किए हैं। शरीफ खानदान ने बिजनेस के उस मशहूर उसूल पर सख्ती से अमल किया है कि भाई जो दिखता है वही बिकता है। लेकिन जरा ठहरिए। तस्वीर का एक दूसरा रुख भी है। आते हैं घरों में। यह कहते हैं हमें पैसे दो। फिर हमने कुरा उठाना है वरना कड़ा भी नहीं उठा सकते। मेरा गटरा पानी साफ बन जाए। सरफ तरह आ रहा है। पांच छ साल हो गए। तरह से गए हैं साफ पानी के लिए। मुस्लिम लीग नून और शरीफ खानदान लाहौर को एक मॉडल शहर के तौर पर पेश करते हैं। जाहिरी चमकदमक से आवाम की आंखें कुछ और देख ही नहीं पाती। अंदरून सिंध और कराची के लोग तो अब लाहौर आकर मरूब हो जाते हैं। उन्हें लगता है कि शरीफ खानदान ने बहुत काम किया है। लेकिन आज हम आपको वो सब दिखाएंगे जो वो दिखाना नहीं चाहते। सवाल यह है कि इसी हसीन मॉडल शहर लाहौर में आज तक पीने का साफ पानी क्यों दस्तियाब ना हो सका? 2026 की ह्यूमन राइट्स कमीशन और यूरोपी यूनियन की मुश्तका रिपोर्ट ने लाहौर के वाटर सिस्टम को गवर्नेंस का बोहरान करार दिया। रिपोर्ट के मुताबिक पीने वाले पानी के पाइप और सीवरेज के पाइप गल सड़कर आपस में मिल चुके हैं। शहरी साफ पानी से महरूम है। मिडिल क्लास फिल्टर वाला पानी खरीद कर पीता है और गरीब तबका गंदे नालों, गटरों का खराब पानी पीने पर मजबूर है। इसी तरह 2016 की एक रिपोर्ट के मुताबिक वासा शहर के बड़े हिस्से को साफ पानी फराहम ही नहीं कर पा रहा। पुराने ट्यूबवेल्स अपनी उम्र पूरी कर चुके हैं और पानी की किल्लत बढ़ रही है। अब सवाल यह है कि पंजाब के 1,200 अरब से ज्यादा के सालाना तरक्कियाती बजट में से लाहौर की नई सीवरेज बिछाने के लिए पैसे क्यों नहीं निकाले जाते? लाहौर आज भी ज्यादातर ज़रे जमीन पानी यानी ग्राउंड वाटर पर इनहसार करता है। यह पानी कभी 100-150 फुट गहराई में मिल जाता था। लेकिन अब 5600 फुट नीचे जा चुका है। माहरीन चिल्ला रहे हैं कि लाहौर पानी की बूंद-बूंद को मोहताज हो जाएगा। हालिया बरसों में रूडा यानी रावी अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी ने दरिया की बहाली, फ्लड कंट्रोल और पानी के बेहतर इंतजाम के नाम पर बड़े-बड़े मंसूबे शुरू करने के दावे किए। लेकिन दरिया रावी साफ पानी का मुस्तकिल जरिया ना बन सका। [हांफने की आवाज़] कहते हैं कि ज़बाने खल्क को नकारा-ए खुदा समझो। जरा सोशल मीडिया पर जाएं और देखें कि लोगों का कहना है कि रूडा दरिया की बहाली के नाम पर हाउसिंग सोसाइटीज बना रही है और जितनी तेजी से कब्जा हो रहा है दरिया रावी जल्द ही दरिया से नहर बन जाएगा। आलम इदारों के रिपोर्ट्स और माहरीन के शोरशराबे के बायस 2020 के बाद लॉरेंस रोड के करीब ज़रे जमीन वाटर रिजवायर और गुलबर्ग में रिचार्ज वेल्स तो बनाए गए लेकिन यह मंसूबे इतने छोटे थे कि उंगली कटाकर शहीदों में नाम लिखवा लिया गया। हकीकत यह है कि शहर में आज तक ऐसा मुकम्मल जदीद वाटर ट्रीटमेंट और सप्लाई निजाम बना ही नहीं जैसा बड़े आलमी शहरों में होता है। पानी बचाने, पानी की रिसाइक्लिंग करने, बारिश के पानी को इस्तेमाल करने का कोई बड़ा मंसूबा नहीं बनाया गया। नून लीग दौर का साफ पानी प्रोग्राम भी सियासी तनाजा बना रहा। नैब ने करप्शन के मुकदमात बनाए। अरबों रुपए यहां वहां हो गए मगर लाहौरियों को साफ पानी आज भी दस्तियाब नहीं। वैसे साफ पानी प्रोजेक्ट में भी शरीफ खानदान के एक फर्द ने साफ सुथरे पानी से खूब हाथ धोए। वो शख्स कौन था आगे आपको पता चल जाएगा। वैसे हैरत इस बात पर होती है कि चले आवामी फलाही मंसूबे तो गए तेल लेने। [संगीत] लेकिन सड़कें तो बनाई गई हैं। पुलों और अंडरपासेस पर तो अरबों रुपए उड़ाए गए हैं। लाहौर के मास्टर प्लान की धज्जियां उड़ा दी गई हैं। इसके बावजूद [संगीत] हाल यह है कि एक तेज बारिश हो जाए तो लाहौर शहर डूब जाता है। यानी जो प्रोजेक्ट्स तजीहात में शामिल थे उनमें भी डंडी। मई 2025 में वासा को लाहौर हाईकोर्ट में पेश होना पड़ा। जहां वकील मियां इरफान अकरम अदालत को सैनिटेशन और ड्रेनेज के मंसूबों पर मुतमन करने की कोशिश करते रहे। लेकिन हकीकत यह है कि हर शदीद बारिश के बाद लाहौर के कई इलाके आज भी डूब जाते हैं। लक्ष्मी चौक जैसी आवामी जगहों पर कई-कई फुट पानी खड़ा हो जाता है। पानी के निकास का कोई निजाम आज तक नहीं बन सका। लाहौर के लिए कोई ट्रांसफॉर्मेशनल मेगा वाटर सिस्टम बना ही नहीं जैसा इस्तंबोल, सिंगापुर या दिल्ली में देखा जा सकता है। इसीलिए आज भी लाहौर में बॉटल वाटर इंडस्ट्री फल फूल रही है। लोग घरों में बोर लगवा रहे हैं और पानी की आलूदगी एक बड़ा मसला है। आजकल तो खैर से लाहौर मेट्रो, फ्लाई ओवर्स और सड़कों से मशहूर है। माजी में लाहौर को बागों, दरख्तों और पार्कों का शहर कहा जाता था। अंग्रेज दौर में यहां की मॉल रोड को सुबह-शाम धोया जाता था। पार्क तो आज भी मौजूद हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन बड़े-बड़े पार्कों में से कोई भी मुस्लिम लीग नून ने नहीं बनाया। लाहौर के तमाम बड़े पार्क्स शरीयफ खानदान से पहले के बने हुए हैं। लॉरेंस गार्डन जिसे अब बागे जिना कहा जाता है, अंग्रेजों ने बनाया था। मॉडल टाउन की आबादी और पार्क भी पुराने बने हुए हैं। लाहौर का मशहूर रेस कोस पार्क जनरल जियाद और के गवर्नर पंजाब जनरल गुलाम जिलानी खान ने बनाया। गुलशन इकबाल पार्क भी जनरल जिलानी का बनाया हुआ है। शरीफ बिरादरान को 40 साल में सात आठ बार इख्तेदार मिला। 10 साल मुसलसल यह तख्ते लाहौर के मालिक और हाकिम रहे। लाहौर में एक भी पार्क ना बना सके। उल्टा हजारों लाखों दरख्त कटवा दिए। सड़कों की तौसी के नाम पर ग्रीन बेल्ट्स उजाड़ दी। सर सब्ज़ लाहौर को कंक्रीट का जंगल बना दिया। यही वजह है कि लाहौर दुनिया के आलूदा तरीन शहरों में पहले या दूसरे नंबर पर रहता है। शहर लाहौर आज भी पूरा दिन आलूदा तरीन शहरों की फहरिस्त में पहले और दूसरे नंबर पर रहा। द एयर क्वालिटी इंडेक्स इन लाहौर टू 388 ऑन संडे मॉर्निंग। चलिए पार्क्स को छोड़ें। लाहौर जैसे बड़े शहर के लिए पिछले 30-32 साल में कोई नया बड़ा जनरल अस्पताल तक नहीं बन सका। जीना अस्पताल आखिरी बड़ा अस्पताल था जो 1988 में बना और 94 में काम का आगाज किया। इसके बाद लाहौर की आबादी दोगुनी हो गई। मगर लाहौर वालों को इलाज मोलजे के लिए कोई नया अस्पताल ना मिल सका। पुराने अस्पतालों की तौसी, नए ब्लॉक्स और अपग्रेडेशन के नाम पर आवाम की सेहत को ड्रिप और बजट को चूना ही लगाया जाता रहा। अलबत्ता सड़कें, पुल,
00:48
Speaker A
जी सर। मेरे हां कहते ही लेफ्टिनेंट जनरल गुलाम [संगीत] जिलानी खान सफेद कुर्ता शलवार में मलबूस दूर टहलते नौजवान को आवाज देकर कहते हैं नवाज जाओ खानसा से कहो कि अनार का जूस भी ले आए और लड़का फौरन किचन
01:04
Speaker A
की तरफ चल पड़ता है। जाहिद सरफराज ने उस लड़के को पहली मर्तबा देखा था। पूछने पर गवर्नर ने बताया कि यह इत्तेफाक फाउंड्री वाले मियां शरीफ का बेटा नवाज शरीफ है। गवर्नर हाउस में इधर-उधर घूमता यह नौजवान सिर्फ एक साल बाद ही पंजाब [संगीत] का
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Speaker A
वजीर खजाना बन जाता है और यहां से आगाज होता है उस शरीफ एंपायर का जो पिछली चार दहाइयों से पाकिस्तान पर राज कर रही है। तसवुर करें एक ऐसे शख्स का जिसे किस्मत [संगीत] ने इख्तेदार के एवानों से एक
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Speaker A
नहीं, दो नहीं, तीन मर्तबा निकाला। जिसने मोटरवे का जाल डाला, जिसने न्यूक्लियर [संगीत] बम फाड़ कर दुनिया को हिला डाला। तकबीर! जिसने मुल्क को लोड शेडिंग के अंधेरों से निकालकर रोशनियों से जगमगाया। लेकिन छुप छुपाकर लंदन के लग्जरी फ्लैट्स
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Speaker A
का मजा भी उठाया। [संगीत] सऊदी अरब में स्टील मिल का चक्कर भी चलाया और बिलियंस ऑफ डॉलर्स के ऑफशोर अकाउंट्स में रोकड़ा भी छुपाया। यह कहानी है मुस्लिम लीग नून की। यह कहानी है नवाज शरीफ, शहबाज शरीफ और मरियम नवाज
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Speaker A
की। यह कहानी है एक ऐसी सियासी पार्टी की जिसने पार्लियामेंट में नहीं एक स्टील मिल में आंख खोली जो एक आमिर की गोद में परवान चढ़ी। आज हम मुस्लिम लीग नून को कटहरे में खड़ा करेंगे और आप होंगे जज। लेकिन इससे
02:47
Speaker A
पहले कि हम आगे बढ़े अगर आप चाहते हैं कि फिक्र का इंकलाब आए तो इंकलाब को सब्सक्राइब कर लें क्योंकि हम तो सोचो में इंकलाब लाकर ही रहेंगे। तो क्या ख्याल है?
02:58
Speaker A
लाहौर से शुरू करें। ये है शहर लाहौर। मुस्लिम लीग नून का गढ़ एक मॉडल सिटी। चौड़ी कुशादा और साफ सुथरी सड़कों का जाल। ट्रैफिक को रवा दवा रखने वाले फ्लाई ओवर्स का बेहतरीन इंतजारज। बड़ी शहराओं को एक दूसरे से मिलाते
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Speaker A
अंडरपास है। शहर के एक किनारे से दूसरे किनारे तक दौड़ती भागती ऑरेंज लाइन ट्रेनें जो वक्त पर आती हैं और वक्त पर पहुंचाती हैं। मेट्रो बसें जिनका किराया ना होने के बराबर है। बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर और इन सबसे खुश यहां के
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Speaker A
आवाम। जिस तरह से लाहौर है इस फार बेटर देन कराची इन टर्म्स ऑफ़ इंफ्रास्ट्रक्चर इन टर्म्स ऑफ़ सेफ्ट टर्म्स ऑफ़ सेफ्टी। मुस्लिम लीग नून ने तरक्की की यह तस्वीर दिखाने के लिए बरसों मेहनत की है। यह बयानिया सेट करने के लिए लाखों जतन किए
03:56
Speaker A
हैं। अरबों रुपए खर्च किए हैं। शरीफ खानदान ने बिजनेस के उस मशहूर उसूल पर सख्ती से अमल किया है कि भाई जो दिखता है वही बिकता है। लेकिन जरा ठहरिए। तस्वीर का एक दूसरा रुख भी है। आते हैं घरों में। यह कहते हैं हमें पैसे
04:18
Speaker A
दो। फिर हमने कुरा उठाना है वरना कड़ा भी नहीं उठा सकते। मेरा गटरा पानी साफ बन जाए। सरफ तरह आ रहा है। पांच छ साल हो गए। तरह से गए हैं साफ पानी के लिए। मुस्लिम लीग नून और शरीफ खानदान लाहौर को
04:28
Speaker A
एक मॉडल शहर के तौर पर पेश करते हैं। जाहिरी चमकदमक से आवाम की आंखें कुछ और देख ही नहीं पाती। अंदरून सिंध और कराची के लोग तो अब लाहौर आकर मरूब हो जाते हैं। उन्हें लगता है कि शरीफ खानदान ने बहुत
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Speaker A
काम किया है। लेकिन आज हम आपको वो सब दिखाएंगे जो वो दिखाना नहीं चाहते। सवाल यह है कि इसी हसीन मॉडल शहर लाहौर में आज तक पीने का साफ पानी क्यों दस्तियाब ना हो सका? 2026 की ह्यूमन राइट्स कमीशन और
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Speaker A
यूरोपी यूनियन की मुश्तका रिपोर्ट ने लाहौर के वाटर सिस्टम को गवर्नेंस का बोहरान करार दिया। रिपोर्ट के मुताबिक पीने वाले पानी के पाइप और सीवरेज के पाइप गल सड़कर आपस में मिल चुके हैं। शहरी साफ पानी से महरूम है। मिडिल क्लास फिल्टर
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Speaker A
वाला पानी खरीद कर पीता है और गरीब तबका गंदे नालों, गटरों का खराब पानी पीने पर मजबूर है। इसी तरह 2016 की एक रिपोर्ट के मुताबिक वासा शहर के बड़े हिस्से को साफ पानी फराहम ही नहीं कर पा रहा। पुराने
05:28
Speaker A
ट्यूबवेल्स अपनी उम्र पूरी कर चुके हैं और पानी की किल्लत बढ़ रही है। अब सवाल यह है कि पंजाब के 1,200 अरब से ज्यादा के सालाना तरक्कियाती बजट में से लाहौर की नई सीवरेज बिछाने के लिए पैसे क्यों नहीं
05:42
Speaker A
निकाले जाते? लाहौर आज भी ज्यादातर ज़रे जमीन पानी यानी ग्राउंड वाटर पर इनहसार करता है। यह पानी कभी 100 150 फुट गहराई में मिल जाता था। लेकिन अब 5600 फुट नीचे जा चुका है। माहरीन चिल्ला रहे हैं कि
05:58
Speaker A
लाहौर पानी की बूंदबूंद को मोहताज हो जाएगा। हालिया बरसों में रूडा यानी रावी अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी ने दरिया की बहाली फ्लड कंट्रोल और पानी के बेहतर इंतजाम के नाम पर बड़े-बड़े मंसूबे शुरू करने के दावे किए। लेकिन दरिया रावी साफ
06:15
Speaker A
पानी का मुस्तकिल जरिया ना बन सका। [हांफने की आवाज़] कहते हैं कि ज़बाने खल्क को नकारा-ए खुदा समझो। जरा सोशल मीडिया पर जाएं और देखें कि लोगों का कहना है कि रूडा दरिया की बहाली के नाम पर हाउसिंग सोसाइटीज बना रही
06:31
Speaker A
है और जितनी तेजी से कब्जा हो रहा है दरिया रावी जल्द ही दरिया से नहर बन जाएगा। आलम इदारों के रिपोर्ट्स और माहरीन के शोरशराबे के बायस 2020 के बाद लॉरेंस रोड के करीब ज़रे जमीन वाटर रिजवायर और गुलबर्ग
06:47
Speaker A
में रिचार्ज वेल्स तो बनाए गए लेकिन यह मंसूबे इतने छोटे थे कि उंगली कटाकर शहीदों में नाम लिखवा लिया गया। हकीकत यह है कि शहर में आज तक ऐसा मुकम्मल जदीद वाटर ट्रीटमेंट और सप्लाई निजाम बना ही नहीं जैसा बड़े आलमी शहरों में होता है।
07:05
Speaker A
पानी बचाने, पानी की रिसाइक्लिंग करने, बारिश के पानी को इस्तेमाल करने का कोई बड़ा मंसूबा नहीं बनाया गया। नून लीग दौर का साफ पानी प्रोग्राम भी सियासी तनाजा बना रहा। नैब ने करप्शन के मुकदमात बनाए। अरबों रुपए यहां वहां हो गए मगर लाहौरियों
07:22
Speaker A
को साफ पानी आज भी दस्तियाब नहीं। वैसे साफ पानी प्रोजेक्ट में भी शरीफ खानदान के एक फर्द ने साफ सुथरे पानी से खूब हाथ धोए। वो शख्स कौन था आगे आपको पता चल जाएगा। वैसे हैरत इस बात पर होती है कि
07:36
Speaker A
चले आवामी फलाही मंसूबे तो गए तेल लेने। [संगीत] लेकिन सड़कें तो बनाई गई हैं। पुलों और अंडर पाससेस पर तो अरबों रुपए उड़ाए गए हैं। लाहौर के मास्टर प्लान की धज्जियां उड़ा दी गई हैं। इसके बावजूद [संगीत] हाल यह है कि एक तेज बारिश हो जाए तो
07:53
Speaker A
लाहौर शहर डूब जाता है। यानी जो प्रोजेक्ट्स तजीहात में शामिल थे उनमें भी डंडी। मई 2025 में वासा को लाहौर हाईकोर्ट में पेश होना पड़ा। जहां वकील मियां इरफान अकरम अदालत को सैनिटेशन और ड्रेनेज के मंसूबों पर मुतमन करने की
08:13
Speaker A
कोशिश करते रहे। लेकिन हकीकत यह है कि हर शदीद बारिश के बाद लाहौर के कई इलाके आज भी डूब जाते हैं। लक्ष्मी चौक जैसी आवामी जगहों पर कई-कई फुट पानी खड़ा हो जाता है। पानी के निकास का कोई निजाम आज तक नहीं बन
08:29
Speaker A
सका। लाहौर के लिए कोई ट्रांसफॉर्मेशनल मेगा वाटर सिस्टम बना ही नहीं जैसा इस्तंबोल, सिंगापुर या दिल्ली में देखा जा सकता है। इसीलिए आज भी लाहौर में बॉटल वाटर इंडस्ट्री फल फूल रही है। लोग घरों में बोर लगवा रहे हैं और पानी की आलूदगी
08:47
Speaker A
एक बड़ा मसला है। आजकल तो खैर से लाहौर मेट्रो, फ्लाई ओवर्स और सड़कों से मशहूर है। माजी में लाहौर को बागों, दरख्तों और पार्कों का शहर कहा जाता था। अंग्रेज दौर में यहां की मॉल रोड को सुबह-शाम धोया जाता था। पार्क तो आज भी
09:06
Speaker A
मौजूद है लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन बड़े-बड़े पार्कक्स में से कोई भी मुस्लिम लीग नून ने नहीं बनाया। लाहौर के तमाम बड़े पार्क्स शरीयफ खानदान से पहले के बने हुए हैं। लॉरेंस गार्डन जिसे अब बागे जिना
09:20
Speaker A
कहा जाता है। अंग्रेजों ने बनाया था। मॉडल टाउन की आबादी और पार्क भी पुराने बने हुए हैं। लाहौर का मशहूर रेस कोस पार्क जनरल जियाद और के गवर्नर पंजाब जनरल गुलाम जिलाली खान ने बनाया। गुलशन इकबाल पार्क भी जनरल जिलानी का बनाया हुआ है। शरीफ
09:35
Speaker A
बिरादरान को 40 साल में सात आठ बार इ्तेदार मिला। 10 साल मुसलसल यह तख्ते लाहौर के मालिक और हाकिम रहे। लाहौर में एक भी पार्क ना बना सके। उल्टा हजारों लाखों दरख्त कटवा दिए। सड़कों की तौसी के नाम पर ग्रीन बेल्ट्स उजाड़ दी। सर सब्ज़
09:53
Speaker A
लाहौर को कंक्रीट का जंगल बना दिया। यही वजह है कि लाहौर दुनिया के आलूदा तरीन शहरों में पहले या दूसरे नंबर पर रहता है। शहर लाहौर आज भी पूरा दिन आलूदा तरीन शहरों की फहरिस्त में पहले और दूसरे नंबर
10:06
Speaker A
पर रहा। द एयर क्वालिटी इंडेक्स इन लाहौर टू 388 ऑन संडे मॉर्निंग। चलिए पार्क्स को छोड़ें। लाहौर जैसे बड़े शहर के लिए पिछले 3032 साल में कोई नया बड़ा जनरल अस्पताल तक नहीं बन सका। जीना अस्पताल आखिरी बड़ा अस्पताल था जो 1988
10:23
Speaker A
में बना और 94 में काम का आगाज किया। इसके बाद लाहौर की आबादी दोगुनी हो गई। मगर लाहौर वालों को इलाज मोलजे के लिए कोई नया अस्पताल ना मिल सका। पुराने अस्पतालों की तौसी, नए ब्लॉक्स और अपग्रेडेशन के नाम पर
10:36
Speaker A
आवाम की सेहत को ड्रिप और बजट को चूना ही लगाया जाता रहा। अलबत्ता सड़कें, पुल, अंडरपास और ट्रेन प्रोजेक्ट्स जरूर बने। ऑरेंज ट्रेन ढाई 300 अरब कर्ज लेकर बनाई गई। सवाल आखिर यह है कि यह मेहरबानी क्यों की गई? लाहौर के सहाफी इसकी एक ही वजह
10:56
Speaker A
बताते हैं कि इन बड़े मंसूबों के साथ किकब बैक्स और करप्शन इनवॉल्व है। जितना बड़ा प्रोजेक्ट, उतना ही उसमें कमाई का इमकान। 60 अरब का प्रोजेक्ट हो तो 2 ढाई अरब आराम से एक साइट पर हो जाते हैं। मजे की बात है
11:11
Speaker A
कि इन तमाम मंसूबों के ऑफिशियल कागजात जिस बिल्डिंग में रखे जाते हैं वहां अक्सर आग लग जाती है। रिकॉर्ड जाया हो जाता है। यानी एक साल में रिकॉर्ड स्पीड से सड़क बन गई, फ्लाई ओवर बन गया और फिर उतनी ही
11:24
Speaker A
स्पीड से रिकॉर्ड को आग भी लग गई। या गुस्ताख रिपोर्टर्स के बकौल आग लगा दी गई। मई 2013 में एलडीए प्लाज़ा में आग लगी जिसमें बहुत सा रिकॉर्ड जल गया। फॉरेंसिक मायरीन की तहकीकात से साबित हुआ कि यह
11:38
Speaker A
हादसा नहीं था। जून 2004 में एलडीए बिल्डिंग में आग लगी और 2018 में अली टावर में आग लगी जो शबाज शरीफ के दामाद की मिलत है। साफ पानी स्कैंडल समेत उनके खिलाफ नैक की कई इंक्वायरियां चल रही थी। इल्जाम
11:54
Speaker A
लगता है कि वहां भी बहुत सा रिकॉर्ड चल गया। ओह हम मोटरवे को तो भूल ही गए। चलिए मोटरवे का सफर करते हैं। आप शरीफ फैमिली के बारे में जो चाहे कहें लेकिन कुछ काम ऐसे हैं जिनको नजरअंदाज
12:13
Speaker A
करना मुमकिन नहीं। आप नवाज शरीफ से नफरत करें या मोहब्बत। लेकिन आप नक्शों को इग्नोर नहीं कर सकते। मुस्लिम लीग नून ने पाकिस्तान को तारीख का पहला मोटरवे दिया। वो मोटरवे जिसने पाकिस्तान में लॉजिस्टिक को हमेशा के लिए तब्दील कर दिया। जब नवाज
12:29
Speaker A
शरीफ ने लाहौर इस्लामाबाद मोटरवे बनाने का फैसला किया तब मुखालफिन ने इसे पागलपन करा दिया। पाकिस्तान ने छह लेंस पर मुश्तमिल ऐसा रोड पहले कभी नहीं देखा था। 367 यानी 367 कि.मी. तवील सड़क वर्ल्ड क्लास टेस्ट एरियाज। यह सिर्फ एक रोड नहीं था बल्कि
12:49
Speaker A
ऐलान था कि पाकिस्तान भी बना सकता है। आज पाकिस्तान का मोटरवे नेटवर्क 1800 कि.मी.
12:55
Speaker A
तवील हो चुका है। जिसका क्रेडिट नवाज शरीफ और मुस्लिम लीग नून को जाता है। लेकिन फिर एक किताब मंजरेआम पर आई जिसने धमाका कर दिया। रेमंड बेकर की किताब कैपिटलिज्म्स एक्लीस हील। वो लिखते हैं कि मोटरवे का इब्तदाई
13:13
Speaker A
तखमीना 8.5 बिलियन लगाया गया था। मंसूबे के लिए दो मर्तबा बोलियां लगाई गई और दोनों मर्तबा कोरिया की डेवो कंपनी फातेह रही। रातों में होने वाली मुलाकातें रंग लाई मोटरवे का ठेका डेवो कंपनी को दे दिया गया। जिसके पास बड़े बेुल अकवावी मोटरवेज
13:32
Speaker A
बनाने का कोई खास तजुर्बा था ही नहीं। बुनियादी तौर पर वह गाड़ियां बनाने वाली कंपनी थी। आखिरकार 8. बिलियन का मंसूबा अपने इख्तताम तक पाकिस्तान को 20 बिलियन का पड़ा। नवाज शरीफ के सेक्रेटरी ख्वाजा शमशाद अहमद खान एक किस्सा बयान करते हैं।
13:49
Speaker A
चलिए आपको भी सुनाते हैं। उन दिनों शमशाद अहमद खान जूबी कोरिया में पाकिस्तान के सफीर थे। वज़र आजम के एजाज में एक तकरीब में जूबी कोरिया के दीगर टॉप बिजनेसमैनों के साथ डेबो कंपनी का सीईओ किम वो चंग भी
14:04
Speaker A
शरीक था। उसका तारुफ मियां साहब से करवाया गया तो उन्होंने खिलाफ मामूल काफी देर तक कोरियन बिजनेसमैन से गुफ्तगू की। फिर फोन नंबरों के तबादले भी हुए। बात आई गई हो गई। शमशाद अहमद खान बताते हैं कि वह चंद
14:18
Speaker A
साल बाद कोरिया गए तो एक तकरीब में डेवो कंपनी के सीईओ से मुलाकात हो गई। उसने कान में शमशाद अहमद को बताया कि वो जेल भेज दिया गया था। आजकल पेरोल पर बाहर है। शमशाद अहमद खान ने हैरत से पूछा कि क्या
14:33
Speaker A
वजह थी? पता चला कि उन पर इल्जाम लगा था कि डेवो कंपनी के सीईओ के तौर पर इस्लामाबाद लाहौर मोटरवे प्रोजेक्ट में किक [संगीत] बैक्स में इन्वॉल्व थे। शमशाद अहमद खान यह वाकया सुनाकर खामोश हो जाते हैं। आपको मियां नवाज शरीफ की येलो कैब स्कीम
14:53
Speaker A
याद है ना? एक बेहतरीन मुशी मसूबे के तौर पर पीली टैक्सी स्कीम की खूब तशरीर की गई। मकसद बजाहिर बेरोजगार नौजवानों को रोजगार देना, टैक्सी कल्चर को जदीद बनाना और शहरी ट्रांसपोर्ट बेहतर [संगीत] करना था। लेकिन रेमंड बेकर ने अपनी किताब में येलो कैब
15:11
Speaker A
स्कीम को एक दिलचस्प अंदाज में मोटरवे से जोड़ा है। वो लिखते हैं कि एक बड़े मोटरवे को जाहिर है ज्यादा गाड़ियों की भी जरूरत थी। और इसीलिए नवाज शरीफ ने येलो कैब स्कीम शुरू की। 500 गाड़ियां इंपोर्ट करने
15:25
Speaker A
की इजाजत दे दी गई। वह भी ड्यूटी फ्री। पाकिस्तान को ₹700 मिलियन का नुकसान सिर्फ कस्टम ड्यूटी कीमत में हुआ। दूसरी तरफ बैंकों को मजबूर किया गया कि सिर्फ 10% डिपॉजिट पर लोगों को यह टैक्सियां इशू कर दी जाए। क्रिश्चियन साइंस मॉनिटर ने 1993
15:44
Speaker A
में रिपोर्ट किया कि मुस्लिम लीग नून के सियासी कारकुनों और रहनुमाओं ने खूब हाथ रंगी। जाली कागजात पर कई कई टैक्सियां इशू करवाई और फिर सब कुछ हड़प कर गए। 60% लोगों ने किस्तें भरी ही नहीं। तब बैंक
15:59
Speaker A
प्राइवेटाइज नहीं हुए थे। लिहाजा सरकारी बैंकों ने बगैर किसी ठोस मंसूबाबंदी या माली जमानत के हुकूमती अहकामात की पाबंदी की और उन्हें 500 मिलियन डॉल का खसारा हुआ। पेशतर लोगों ने टैक्सियां चलाने के बजाय या तो गाड़ी को जाती इस्तेमाल में
16:16
Speaker A
रखा या बेच खाया। वैसे स्कीम को मुकम्मल नाकामी कहना भी दुरुस्त नहीं होगा। इस मंसूबे की वजह से पुरानी खस्ता हाल टैक्सियों की जगह नई गाड़ियां आई। हजारों अफराद को वक्त रोजगार मिला। शहरी ट्रांसपोर्ट कल्चर में तब्दीली आई और
16:32
Speaker A
पाकिस्तान में स्मॉल कास्ट की डिमांड में इजाफा हुआ। बाज लोग आज भी 90ज की इंपोर्टेड येलो कैप Toyota को याद करते हैं। क्योंकि उस दौर में पाकिस्तानी सड़कों पर रिलेटिवली बेहतर गाड़ियां आई। लेकिन यह तमाम फायदे ज्यादातर शॉर्ट टर्म
16:48
Speaker A
थे। मुस्लिम लीग नून जब 2013 में इ्तेदार में आई तो मुल्क लोड शेडिंग के अंधेरों में डूबा हुआ था। कुछ शहरों में तो 181 घंटों की लोड शेडिंग हो रही थी। फैक्ट्रीज बंद हो रही थी और आवाम गुस्से से बिफरे हुए
17:05
Speaker A
थे। शरीफ बिरादरान का एक अहम क्रेडिट यह है कि उन्होंने अगले 5 सालों में 10,000 मेगावाट बिजली नेशनल ग्रिड में शामिल की। साहवाल कोल पावर प्लांट और पोर्ट कासिम एलएजी टर्मिनल रिकॉर्ड मुद्दत में मुकम्मल हुए। 2017-1 तक लोड शेडिंग ड्रामाई तौर पर
17:22
Speaker A
कम हुई और लोगों ने सुख का सांस लिया। अब सवाल यह है कि नतीजा [संगीत] क्या निकला?
17:28
Speaker A
शहरों में लोड शेडिंग कम हुई? जी बिल्कुल हुई। इंडस्ट्री को कुछ इस्तहकाम मिला? जी बिल्कुल [संगीत] मिला। अर्बन मिडिल क्लास को बड़ा रिलीफ मिला। जी बिल्कुल मिला। तो क्या यह सब कुछ परफेक्ट था? जी नहीं। क्या इसने गर्दिशी [संगीत] कर्ज यानी सर्कुलर
17:45
Speaker A
डेप्ट की मुसीबत से मुल्क को दोचार किया? जी बिल्कुल किया। डॉन की 204 की एक रिपोर्ट के मुताबिक यह कर्ज 6 ट्रिलियन तक पहुंच चुका है। आपने आईपीपीस का नाम तो सुना ही होगा। वो प्राइवेट कंपनियां जो [संगीत] बिजली पैदा करके हुकूमत को बेचती
18:01
Speaker A
हैं। आईपीपीस का बुनियादी मॉडल नवाज शरीफ दौर में मुतारिफ हुआ। 90ज में इसकी बुनियाद रखी गई और 2013 से 2018 में मुस्लिम लीग नून ने बड़े पैमाने पर नई बिजली पैदा करके लोड शेडिंग कम की। मगर इसकी कीमत मुल्क आज भी अदा कर रहा है। आप
18:18
Speaker A
अपना बिजली का बिल उठाकर देख लीजिएगा। कैपेसिटी पेमेंट की सूरत में हम आज भी अरबों रुपए इन आईपीपीस को अदा करते हैं। पाकिस्तान की पहली मास ट्रांजिट मेट्रो रेल, लाहौर ऑरेंज लाइन मेट्रो ट्रेन, कराची की ग्रीन लाइन पीआरटी, रावलपिंडी,
18:39
Speaker A
मुल्तान और पेशावर की मेट्रो बसेस सबकी बुनियाद मुस्लिम लीग नून के दौर में रखी गई। चाहे आप इसे अच्छा कहें या बुरा लेकिन पाकिस्तान के शहर इन मसूबों की वजह से एक मुख्तलिफ अंदाज से आगे बढ़ने लगे। अगर
18:52
Speaker A
मुस्लिम लीग नून और नवाज शरीफ के किसी काम को सबसे बड़ा कारनामा कहा जा सकता है तो वो यकीनन सीपक है। चीन पाकिस्तान मुआशी रफ्तारी। पाकिस्तान ने चीन के साथ 62 बिलियन [संगीत] डॉलर्स का मुयदा किया। बलूचिस्तान में सड़कों का
19:09
Speaker A
जाल, गवादा में डीप सी पोर्ट और पूरे मुल्क में एनर्जी [संगीत] प्रोजेक्ट्स। सीपक ने पाकिस्तान को एक रीजनल ट्रेड हब में तब्दील कर दिया। मुखालफिन कहते हैं कि कर्जों की शरायत आसान नहीं और मुआयदे भी शफाफ तरीके [संगीत] से नहीं किए गए। लेकिन
19:25
Speaker A
सीपैक के तहत जो इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा किया गया उसने साउथ एशिया में पाकिस्तानी अहमियत को बेइंतहा बढ़ा दिया है। नारा [चीखने की आवाज़] तकबीर अकबर नवाज शरीफ अगर किसी एक लम्हे को नवाज शरीफ के सियासी करियर का तारीखी लम्हा कह सकते हैं तो वो
19:47
Speaker A
था एटमी धमाकों का फैसला 28 मई [संगीत] 1998 का दिन भारत पहले ही एटमी धमाके कर चुका था दुनिया [संगीत] पाकिस्तान की तरफ देख रही थी अमेरिका का सख्त दबाव था नवाज [संगीत] शरीफ ने बाद में खुद यह इंकशाफ
20:02
Speaker A
किया था कि सदर बिल क्लिंटन ने उन्हें ने $5 बिलियन डॉलर देने की पेशकश की थी। लेकिन नवाज शरीफ ने अपने साइंसदानों से कहा धमाका कर दे। भारत ने जो एटमी तर्जुमात किए आज हमने उसका हिसाब भी चुका दिया है।
20:18
Speaker A
और यूं पाकिस्तान दुनिया की सातवीं और मुस्लिम मुालिक की पहली एटमी कुत बन गया। एक सियासतदान के तौर पर आप नवाज शरीफ के बारे में जो भी राय रखें लेकिन एक पाकिस्तानी के तौर पर नवाज शरीफ उस दिन
20:31
Speaker A
चट्टान की तरह मजबूत खड़ा रहा। 3 अप्रैल 2016 अचानक एक तूफान आ गया। पैनामे की लॉफर्म मोजेक फसेका हैक कर ली गई। 11 मिलियन खुफिया दस्तावेजात लीक हो गए। एक नाम जो हजारों मील दूर कहीं फाइलों में छुपा हुआ था। स्क्रीनंस पर आ गया।
20:53
Speaker A
लंदन की कोठियां, दुबई के अकाउंट्स और पनामा की खुफिया कंपनियां सब बेनकाब हो गई। नवाज शरीफ के बच्चे मरियम, हुसैन और हसन नवाज पाक लेन लंदन के एवन फील्ड हाउस के चार लग्जरी फ्लैट्स के [संगीत] मालिक निकले। कुर्रा अर्श के महंगे तरीन इलाकों
21:11
Speaker A
में से एक पार्क लेन लंदन। लेकिन पैसे कहां से आए? इस बात का शरीफ खानदान के पास कोई जवाब ना था। जॉइंट इन्वेस्टिगेशन टीम ने तफ्तीश आगे बढ़ाई और नताइश ने दुनिया को हैरान कर दिया। सऊदी अरब में स्टील मिल
21:27
Speaker A
दुनिया के टैक्स हैवन में आठ ऑफशोर कंपनियां ऐसे आसासे जिनका डिक्लेयर्ड इनकम में कोई जिक्र ना था। शरीफ खानदान मनी ट्रेल देने में नाकाम रहा। प्राइम मिनिस्टर नाहिल हो गए। व्यूवर्स आपको ब्रेकिंग न्यूज़ दे रहे हैं। नवाज शरीफ पाकिस्तान के तीन दफा प्राइम
21:41
Speaker A
मिनिस्टर जुलाई 2017 में सुप्रीम कोर्ट [संगीत] ने सिंग वजीर आजम नवाज शरीफ को ना अहल करार दे दिया। एवन फील्ड केस में 10 साल और अल अजीजिया केस में 7 साल की सजा सुनाई। वो कुछ ही अरसे बाद बीमारी का बहाना बनाकर
21:57
Speaker A
लंदन चले गए और उस वक्त तक ना लौटे जब तक हालात साजगार ना हो पाए। सो इस पूरी राम कहानी के बाद सवाल यह है कि मुस्लिम लीग नून [संगीत] या नवाज शरीफ ने पाकिस्तान को आखिर दिया क्या? अगर ईमानदारी से देखा जाए
22:12
Speaker A
तो नवाज शरीफ ने पाकिस्तान को न्यूक्लियर ताकत बनाया। जब पूरी दुनिया ने धमकियां दी रोकने की कोशिश की। नवाज शरीफ ने पाकिस्तान [संगीत] को इंफ्रास्ट्रक्चर दिया। मोटरवे मेट्रोस दी जिन पर लाखों पाकिस्तानी सफर करते हैं। सी पैक दिया एक
22:27
Speaker A
मोपम और मुतनाजा मंसूबा [संगीत] लेकिन जिसने इकोनॉमिक पार्टनरशिप को ट्रांसफॉर्म कर डाला। लेकिन नवाज शरीफ ने पाकिस्तान को करप्शन स्कैंडल [संगीत] भी दिए। दुनिया के महंगे तरीन इलाकों में महंगी तरीन प्रॉपर्टीज उनकी मिल्कियत निकली। जबकि पाकिस्तानी अस्पतालों में बच्चे दवाइयां
22:46
Speaker A
ना मिलने से मरते रहे। नवाज शरीफ ने हमें सर्कुलर डेट दिए जिनके पंजों में आम पाकिस्तानी आज भी जकड़ा हुआ है। हमें खानदानी सियासत दी जहां एक फैमिली 40 साल से एक सूबे और पाकिस्तानी सियासत पर राज कर रही है। नवाज शरीफ की
23:05
Speaker A
कहानी तवील कहानी है। नवाज शरीफ के करियर में निहायत दिलचस्प मोड़ आए। पाकिस्तान के वाहिद सियासतदान जो तीन मर्तबा वजीर आजम बने और सबसे बड़े सूबे के वजीर-आला और वजीर खजाना भी रहे। कोई सियासतदान उनसे ज्यादा खुशकिस्मत नहीं रहा और शायद ही कोई
23:23
Speaker A
पाकिस्तानी सियासतदान उनसे ज्यादा बदकिस्मत हो। उन्हें तीन बार विज़ारत उज़्मा से हटाया गया। दो बार आवामी ओहदे के लिए ना अहल करार दिया गया। तकरीबन एक दहाई जिला वतनी का सामना करना पड़ा और मुख्तलिफ मुद्दत की कैद की सजाएं सुनाई
23:40
Speaker A
गई। आज मियां साहब के भाई वजीर आजम है। उनकी पार्टी इख्तेदार में है। बेटी वजीरआला पंजाब है। निजाम सरेंडर है और दर हकीकत इख्तेदार आज भी मियां साहब के हाथों में है। आप नवाज शरीफ को चाहे कुछ भी
23:56
Speaker A
गर्दाने लेकिन एक बात मानना होगी। पाकिस्तान के सियासत में मियां साहब वो किरदार हैं जिन्होंने इस सिस्टम से हर बार धक्का खाने के बाद अपनी वापसी की राह भी ऐसे हुनर से तराशी कि उनके बड़े-बड़े मुखालफिन भी देखते [संगीत] ही रह गए। कैसे
24:14
Speaker A
वो झूठी सच्ची रिपोर्ट्स पर जेल से निकल कर लंदन चले गए। कैसे वो वापस आए और कैसे सारे मुकदमात हवा में उड़ गए। मियां साहब ने यह खेल पहली बार नहीं खेला। चौथी बार निजाम में वापसी की है। लोग कहते हैं एक
24:30
Speaker A
जरदारी सब पे भारी और कुछ का ख्याल है कि मौलाना फजलुर रहमान सियासत के बेताज बादशाह हैं। जबकि हकीकतन पाकिस्तानी सियासत के मैदान में नवाज शरीफ से काया शख्स ता हाल कोई नहीं। आप इसे सियासत कहें, मुनाफिकत कहें, सौदेबाजी कहें, वह
24:46
Speaker A
आपकी मर्जी। मियां साहब सूरत से भोले हैं। लेकिन उनको भोला समझने वाले वाकई बहुत भोले हैं।
Topics:नवाज शरीफमुस्लिम लीग नूनपाकिस्तान राजनीतिलाहौर विकासशरीफ परिवारसियासत और भ्रष्टाचारजल संकटरावी नदीशहरी बुनियादी ढांचापाकिस्तान इतिहास

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