डबल शाह की कहानी, जो ₹7000 तनख्वाह से अरबपति बना और पोंजी स्कीम के जरिए करोड़ों का फ्रॉड किया।
Key Takeaways
- पोंजी स्कीम एक पुराना लेकिन प्रभावी फ्रॉड मॉडल है।
- लोग लालच में आकर बिना जांच के निवेश कर देते हैं।
- डबल शाह ने अपनी शुरुआत ईमानदारी से की लेकिन बाद में धोखाधड़ी की।
- सरकारी और गैर सरकारी लोग भी इस तरह के फ्रॉड में फंस सकते हैं।
- कानून और न्याय व्यवस्था के बावजूद ऐसे फ्रॉडर्स का अंजाम कड़ा होता है।
What the video covers
- सैयद सिद्दतुल हसन गिलानी उर्फ़ डबल शाह ने सरकारी टीचर से अरबपति बनने का सफर तय किया।
- उसने 15 दिन में पैसे डबल करने का वादा कर पंजाब में भारी लोकप्रियता हासिल की।
- डबल शाह ने बिना किसी कानूनी एग्रीमेंट के लोगों से करोड़ों रुपए जुटाए।
- उसका कारोबार पोंजी स्कीम पर आधारित था, जो चार्ल्स पोंजी की फ्रॉड स्कीम से प्रेरित थी।
- डबल शाह ने दुबई में छह आलीशान होटल खरीदे और बड़ी संपत्ति बनाई।
- उसके खिलाफ कोई शिकायत नहीं थी, फिर भी उसे गिरफ्तार किया गया और 14 साल की सजा हुई।
- वीडियो में चार्ल्स पोंजी की कहानी भी बताई गई है, जिसने अमेरिका में इसी तरह का फ्रॉड किया था।
- डबल शाह ने शुरुआत में अपने निवेशकों को पैसे लौटाए जिससे विश्वास बना।
- उसकी गिरफ्तारी पर उसके समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किए।
- डबल शाह के बाद भी पाकिस्तान में कई पोंजी स्कीम चलती रही हैं।
Chapters
- 00:00डबल शाह की शुरुआत और सफलता
- 01:56चार्ल्स पोंजी की कहानी और पोंजी स्कीम का इतिहास
- 03:56डबल शाह का दुबई में निवेश और पोंजी स्कीम की शुरुआत
- 07:26पंजाब में डबल शाह की लोकप्रियता और विस्तार
- 11:06डबल शाह की गिरफ्तारी और उसके बाद की घटनाएं
- 13:48डबल शाह के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और सजा
- 20:06पोंजी स्कीम के प्रभाव और पाकिस्तान में इसके बाद की स्थिति
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Speaker A
कभी उसकी तनख्वाह ₹7000 थी। मगर उसने ₹ अरब जमा कर लिए। एक वक्त था कि उसकी जेब खाली होती थी। फिर वो वक्त आया कि बैंकों की गाड़ियां पैसे लेने उसके घर आती थीं। वो दो कमरों के झुग्गी जैसे मकान में रहता था। मगर फिर उसने दुबई में छह आलीशान होटल खरीद लिए। पहले कोई उसे उधार तक नहीं देता था। बाद में लोग बोरियों में नोट भर-भर कर उसको देने आते थे। वह हिसाब का टीचर था मगर जब बेहिसाब पैसा आने लगा तो वह गिनती ही भूल गया। वह अपने मुर्शद के घर पर हेलीकॉप्टर से नोट बरसाना चाहता था। मगर कानून ने उसकी उड़ान रोक दी। जी हां दोस्तों, हम बात कर रहे हैं गुजरावाला के सैयद सिद्दतुल हसन गिलानी उर्फ़ डबल शाह की। वो 15 दिन में पैसे डबल कर देता था। पूरे पंजाब में उसकी धूम मची थी। कई सियासतदान, ब्यूरोक्रेट्स, पुलिस ऑफिसर भी उसके पास पैसा डबल कराने आते थे। उसके खिलाफ कोई शिकायत नहीं थी। फिर भी उसे गिरफ्तार कर लिया गया। इसकी गिरफ्तारी पर एतजाज भी वो लोग कर रहे थे जिनके साथ फ्रॉड का इल्जाम इस पर लगाया जा रहा था। है ना हैरत की बात? खैर, एक मामूली सरकारी स्कूल टीचर अरबपति कैसे बना? उसे क्यों गिरफ्तार किया गया? उसका अंजाम क्या हुआ?
Speaker A
यह सब हम आपको बताएंगे लेकिन इससे पहले इंकलाब को सब्सक्राइब और वीडियो को लाइक जरूर कर लें। तो चलिए चलते हैं पाकिस्तान के तारीख के इंतहाई दिलचस्प किरदार डबल शाह के जिले गुजरावाला। अगर मुझे आज रिहा कर दिया जाए तो मैं अगले चार महीनों में सारे लोगों के पैसे उनके घरों तक पहुंचा दूंगा। जी हां, गिरफ्तारी के बाद डबल शाह सबको पैसे वापस देने को तैयार था। उसने नैप के साथ प्ली बारगेन भी कर ली थी। फिर उसे रिहा क्यों नहीं किया गया? उसे 14 साल की कैद की सजा क्यों सुनाई गई? यह हम आगे चलकर बताएंगे। लेकिन पहले इटली के एक शातिर की कहानी सुनिए जो अमेरिका, कनाडा और ब्राजील तक फैली हुई है। चार्ल्स पोंजी 1903 में इटली से अमेरिका पहुंचा। जेब में सिर्फ $ थे क्योंकि वह जुए में सब हार चुका था। बोस्टन में वेटर और डिशवाशर का काम किया। मगर चोरी और धोखाधड़ी की वजह से हर जगह से निकाला गया। फिर वो 1907 में कनाडा चला गया। वहां एक थर्ड क्लास बैंक में नौकरी मिली। जहां उसने पहली बार देखा कि ज्यादा मुनाफे का लालच देकर नए ग्राहकों से पैसा लिया जाता और पुराने ग्राहकों को पेमेंट की जाती। यह बैंक कुछ ही अरसे में दिवालिया हो गया और यूं इसकी मुलाजमत भी गई तो इसने जाली चेक काटकर पैसे हथियाए मगर पकड़ा गया और 3 साल की जेल काटनी पड़ी। रिहाई के बाद दोबारा अमेरिका आया और 1920 में बोस्टन में एक छोटी सी इन्वेस्टमेंट कंपनी खोली। लोगों को लालच दिया कि पोस्ट ऑफिस के इंटरनेशनल रिप्लाई कूपन के कारोबार से 45 दिन में 50% और 90 दिन में डबल मुनाफा दूंगा। जबकि उस वक्त भी वहां के बैंक 8 या 10% से ज्यादा का मुनाफा नहीं देते थे। इतने प्रॉफिट का सुनकर तो लोग पागल हो गए। पहले $00 आए। फिर देखते ही देखते रोजाना $10 लाख तक आने लगे। उसने वहां शानदार महल खरीद लिया और सिर्फ यही नहीं उसने वहां बैंक तक खरीद लिए। मगर यह सब फ्रॉड था। उसने कोई कूपन का कारोबार नहीं किया था।
Speaker A
बस नए ग्राहकों की रकम से पुराने ग्राहकों को पेमेंट की जा रही थी। जुलाई 1920 में अखबारों ने इसका राज खोल दिया। पूरे मुल्क में पैनिक फैल गया क्योंकि $.5 करोड़ यानी आज के $35 करोड़ डॉलर के फ्रॉड का मामला था। चार्ल्स पोंजी ने सिर्फ $20 लाख वापसी किए। नतीजा यह हुआ कि पांच बैंक डूब गए। कई लोग दिवालिया हो गए। पोंजी गिरफ्तार हुआ। कई साल जेल में गुजारे। फिर फ्लोरिडा में जमीनें बेचने की नई स्कीम चलाई लेकिन दोबारा पकड़ा गया। बिल आखिर 1934 में अमेरिका से डिपोर्ट हुआ और 1949 में ब्राजील के खैराती अस्पताल में अंधा और मफलूज होकर कुर्बत के हाल में मर गया। चार्ल्स पोंजी ने फ्रॉड के लिए कोई नया तरीका इस्तेमाल नहीं किया। बल्कि यह तो सदियों पुराना हरबा था। लेकिन उसने यह काम इतने बड़े पैमाने पर किया कि अब दुनिया भर में ऐसे फ्रॉड पोंजी स्कीम ही कहलाते हैं। खैर चार्ल्स पोंजी के अंजाम से किसी ने सबक नहीं सीखा। बस ऐसी धोखेबाजी बहुत से लोगों ने सीख ली। अब सवाल यह है कि अमेरिका में तहलका मचाने वाले इस फ्रॉड की स्कीम का डबल शाह को कैसे पता लगा?
Speaker A
हालांकि उस वक्त तो इंटरनेट भी नहीं था। तो दोस्तों इस बात का जवाब जानने के लिए हमें जाना पड़ेगा हबीबी कम टू दुबई। साल 2004 की एक शाम थी। 40 साल का सैयद सिल हसन शाह दुबई के एक शानदार साहिल पर सोचों में गुम 2 + 2 4 में मगन था। वो सोच रहा था कि क्या वजीराबाद के सरकारी स्कूल की टीचरी बेहतर थी या दुबई के स्कूल की नौकरी? क्योंकि चंदों दरहम के लिए बीवी और बच्चों से दूर रहना उसे घाटे का सौदा लग रहा था। मगर वो कश्तियां जला कर आया था। एजेंट को लाखों रुपए देकर वीजा लिया था। उसकी देखादेखी उसके दूसरे टीचर दोस्त भी पाकिस्तान से दुबई आना चाहते थे और उसके लिए लाखों रुपए खर्च करने को भी तैयार थे।
Speaker A
उसने दुबई में मौजूद अपने एक साथी टीचर से वीजा के लिए बात की। बलूचिस्तान के इलाके जॉब से ताल्लुक रखने वाले उस दोस्त का नाम हम काशिफ अर्ज कर लेते हैं। काशिफ ने कहा कि दोस्तों को दुबई ना बुलाओ बल्कि उनसे पैसे मंगवाओ और यहां मेरे साथ मोबाइल फोन कार्ड में इन्वेस्टमेंट करो। हम मोबाइल फोन कार्ड कैश में खरीद कर क्रेडिट पर बेचते हैं जिससे बहुत ज्यादा प्रॉफिट होता है। तो इस तरह तुम्हारे दोस्तों को भी नौकरी से ज्यादा नफा मिल जाएगा। सिल हसन ने इसकी बात मानकर अपने दोस्त से कहा कि वह पैसे भेज दे मगर उसके दोस्त ने पैसे नहीं भेजे। बहरहाल सिल हसन ने काशिफ के बिजनेस में अपना पैसा लगाने का फैसला किया। इसके लिए उसने अपनी बीवी से कहा कि अपने जेवर बेचकर रकम भिजवाए। बीवी ने ₹ लाख भेजे जो उसने काशिफ को दे दिए। उसने फिर अपनी बेटी से इस बात का जिक्र किया तो उसने भी ₹2 लाख भेजे। भाई को बताया तो ₹ लाख उसने भी इन्वेस्ट कर दिए। इस दौरान सिल हसन दिसंबर की छुट्टियां गुजारने पाकिस्तान आया। यहां एक दिन दुबई में मौजूद उसके दोस्त काशिफ का फोन आता है कि उसकी 2 लाख की इन्वेस्टमेंट डबल हो गई है। गुजरावाला के एक मनी चेंजर को 4 लाख भेज दिए हैं। वह जाकर ले ले। सिल हसन अपने दोस्तों के साथ गुजरावाला जाकर रकम ले आया। फिर एक महीने बाद काशिफ ने दोबारा फोन किया और यही कहा कि तुम्हारे 2 लाख फिर डबल हो गए हैं। मनी चेंजर से जाकर ले लो। सिल हसन ने फिर दोस्तों को साथ लिया और जाकर पैसे वसूल किए। चंद ही दिन गुजरे थे कि काशिफ का फिर फोन आया। कहा कि तीसरे 2 लाख भी डबल हो गए हैं। मनी चेंजर को भेज दूं या वापस इन्वेस्ट कर दूं। अब तो सैयद हसन का एतमाद बिल्कुल पक्का हो चुका था। उसने वही कहा जो हर कोई कहता कि हां यह पैसे रीइन्वेस्ट कर दो। छुट्टियां खत्म होने के बाद सिल हसन वापस दुबई जाने लगा तो उसके दोस्तों ने भी उसे पैसे दिए कि यह काशिफ के कारोबार में लगा दे क्योंकि वो देख चुके थे कि उसमें बहुत अच्छा रिटर्न मिल रहा है। खैर सिल हसन दोस्तों के 15-16 लाख और अपने घर के मजीद 80 लाख लेकर दुबई आया। दोस्तों वो यह पैसे काशिफ को देना चाहता था। मगर इतनी बड़ी रकम देने से पहले काशिफ के बिजनेस को मजीद जांचना बहुत जरूरी था। उसने तफ्तीश शुरू की तो पता चला कि काशिफ कोई कारोबार नहीं करता बल्कि वो तो एक पोंजी स्कीम चलाता है। सैयद हसन का माथा ठंका। और उसने यह 2025 लाख इन्वेस्ट करने के बजाय अपने पास रख लिए। इसी दौरान काशिफ ने उसका दिल जीतने के लिए मजीद ₹8 लाख डबल करने के नाम पर दिए। सिल हसन ने वो 8 लाख भी लिए और दुबई की नौकरी छोड़कर पाकिस्तान चला आया। उसने सब जमातफरीक करके सोच लिया था कि अब नौकरी नहीं करेगा बल्कि करेगा तो वही करेगा जो काशिफ कर रहा था जो अमेरिका में चार्ल्स पोंजी ने किया था। यूं साल 2005 के बीच में सैयद सिल हसन गिलानी डबल शाह बन गया।
Speaker A
शुरू में लोगों को लालच देने के लिए उसने 15 दिन में पैसा डबल करके देना शुरू किया और जिन-जिन दोस्तों ने सरमायाकारी की थी उनके पैसे डबल करके वापस किए। शुरू में उसका कारोबार सिर्फ निजामाबाद तक महदूद था लेकिन लालच की आग ने उसे फैला दिया। गुजरावाला, सियालकोट, वजीराबाद और आसपास के इलाके सब इसकी जद में आ गए। एक से दो, दो से तीन और यह तादाद बढ़ती गई। सैकड़ों से हजारों तक पहुंच गई। यूं निजामाबाद का यह आम टीचर डबल शाह के नाम से मशहूर हो गया। बहुत से लोग इसे आमिल या सूफी समझते थे जो अपनी करामत से पैसे डबल कर रहा था। उसके मुरीदों और ग्राहकों में आम लोग ही नहीं नामवर सियासतदान, ब्यूरोक्रेट्स और पुलिस अफसरान भी शामिल हो गए। लोग अपने जेवरात बेचते, गाड़ियां, मकान, हत्ता के पूरी जायदाद फरोख करके भी पैसे लाते और इसके हवाले कर देते। कोई स्टैंप पेपर नहीं, कोई एग्रीमेंट नहीं बनता। बस एक सादा सी पर्ची दी जाती जिस पर रकम और वापसी की तारीख लिखी होती थी। रकम देने वालों का नाम डबल शाह अपनी एक डायरी में भी लिखा करता था। शुरू-शुरू में 15 दिन में पैसे डबल किए जाते थे। फिर 30 दिन, फिर 2 महीने और फिर 70 दिन तक भी बात पहुंच गई।
Speaker A
ताम डबल शाह का कहना था कि उसने 15 दिन वाली स्कीम कभी नहीं जलाई थी। 15 दिन और या 20 दिन वाला। मैंने 70, 80, 90 दिन में कई लोगों को 4 महीने के बाद भी पैसे दिए हैं। बाज द शुरू में छह महीने बाद भी पैसे दिए। बहा टाइम पीरियड मेरा फिक्स नहीं था। बहरहाल दुनिया भर में पोंजी स्कीम कामयाब ऐसे ही होती है कि जो एक बार मुनाफा हासिल करता है वो सारी रकम दोबारा इन्वेस्ट कर देता है। ताकि मज़द प्रॉफिट हो। और डबल शाह भी यही गेम कर रहा था। मुकर्रा तारीख पर।
Speaker A
गया? उसे 14 साल की कैद की सजा क्यों सुनाई गई? यह हम आगे चलकर बताएंगे। लेकिन पहले इटली के एक शातिर की कहानी सुनिए जो अमेरिका, कनाडा और ब्राजील तक फैली हुई है। चार्ल्स पोंजी 1903 में इटली से
Speaker A
अमेरिका पहुंचा। जेब में सिर्फ $ थे क्योंकि वह जुए में सब हार चुका था। बोस्टन में वेटर और डिशवाशर का काम किया। मगर चोरी और धोखाधही की वजह से हर जगह से निकाला गया। फिर वो 1907 में कनाडा चला
Speaker A
गया। वहां एक थर्ड क्लास बैंक में नौकरी मिली। जहां उसने पहली बार देखा कि ज्यादा मुनाफे का लालच देकर नए ग्राहकों से पैसा लिया जाता और पुराने ग्राहकों को पेमेंट की जाती। यह बैंक कुछ ही अरसे में दिवालिया हो गया और यूं इसकी मुलाजमत भी
Speaker A
गई तो इसने जाली चेक काटकर पैसे हथियाए मगर पकड़ा गया और 3 साल की जेल काटनी पड़ी। रिहाई के बाद दोबारा अमेरिका आया और 1920 में बोस्टन में एक छोटी सी इन्वेस्टमेंट कंपनी खोली। लोगों को लालच दिया कि पोस्ट ऑफिस के इंटरनेशनल रिप्लाई
Speaker A
कूपन के कारोबार से 45 दिन में 50% और 90 दिन में डबल मुनाफा दूंगा। जबकि उस वक्त भी वहां के बैंक 8 या 10% से ज्यादा का मुनाफा नहीं देते थे। इतने प्रॉफिट का सुनकर तो लोग पागल हो गए। पहले
Speaker A
$00 आए। फिर देखते ही देखते रोजाना $10 लाख तक आने लगे। उसने वहां शानदार महल खरीद लिया और सिर्फ यही नहीं उसने वहां बैंक तक खरीद लिए। मगर यह सब फ्रॉड था। उसने कोई कूपन का कारोबार नहीं किया था।
Speaker A
बस नए ग्राहकों की रकम से पुराने ग्राहकों को पेमेंट की जा रही थी। जुलाई 1920 में अखबारों ने इसका राज खोल दिया। पूरे मुल्क में पैनिकिक फैल गया क्योंकि $.5 करोड़ यानी आज के $35 करोड़ डॉलर के फ्रॉड का मामला था। चार्ल्स पोंजी ने
Speaker A
सिर्फ $20 लाख वापसी किए। नतीजा यह हुआ कि पांच बैंक डूब गए। कई लोग दिवालिया हो गए। पोंजी गिरफ्तार हुआ। कई साल जेल में गुजारे। फिर फ्लोरिडा में जमीनें बेचने की नई स्कीम चलाई लेकिन दोबारा पकड़ा गया। बिल आखिर 1934 में अमेरिका से डिपोर्ट हुआ
Speaker A
और 1949 में ब्राजील के खैराती अस्पताल में अंधा और मफलूज होकर कुर्बत के हाल में मर गया। चार्ल्स पोंजी ने फ्रॉड के लिए कोई नया तरीका इस्तेमाल नहीं किया। बल्कि यह तो सदियों पुराना हरबा था। लेकिन उसने यह काम
Speaker A
इतने बड़े पैमाने पर किया कि अब दुनिया भर में ऐसे फ्रॉड पोंजी स्कीम ही कहलाते हैं। खैर चार्ल्स पोंजी के अंजाम से किसी ने सबक नहीं सीखा। बस ऐसी धोखेबाजी बहुत से लोगों ने सीख ली। अब सवाल यह है कि
Speaker A
अमेरिका में तहलका मचाने वाले इस फ्रॉड की स्कीम का डबल शाह को कैसे पता लगा?
Speaker A
हालांकि उस वक्त तो इंटरनेट भी नहीं था। तो दोस्तों इस बात का जवाब जानने के लिए हमें जाना पड़ेगा हबीबी कम टू दुबई। साल 2004 की एक शाम थी। 40 साला सैयद सिल हसन शाह दुबई के एक शानदार साहिल पर सोचों
Speaker A
में गुम 2 + 2 4 में मगन था। वो सोच रहा था कि क्या वजीराबाद के सरकारी स्कूल की टीचरी बेहतर थी या दुबई के स्कूल की नौकरी? क्योंकि चंदों दरहम के लिए बीवी और बच्चों से दूर रहना उसे घाटे का सौदा लग
Speaker A
रहा था। मगर वो कश्तियां जला कर आया था। एजेंट को लाखों रुपए देकर वीजा लिया था। उसकी देखादेखी उसके दूसरे टीचर दोस्त भी पाकिस्तान से दुबई आना चाहते थे और उसके लिए लाखों रुपए खर्च करने को भी तैयार थे।
Speaker A
उसने दुबई में मौजूद अपने एक साथी टीचर से वीज़ के लिए बात की। बलूचिस्तान के इलाके जॉब से ताल्लुक रखने वाले उस दोस्त का नाम हम काशिफ अर्ज कर लेते हैं। काशिफ ने कहा कि दोस्तों को दुबई ना बुलाओ बल्कि उनसे
Speaker A
पैसे मंगवाओ और यहां मेरे साथ मोबाइल फोन कार्ड में इन्वेस्टमेंट करो। हम मोबाइल फोन कार्ड कैश में खरीद कर क्रेडिट पर बेचते हैं जिससे बहुत ज्यादा प्रॉफिट होता है। तो इस तरह तुम्हारे दोस्तों को भी नौकरी से ज्यादा नफा मिल जाएगा। सिल हसन
Speaker A
ने इसकी बात मानकर अपने दोस्त से कहा कि वह पैसे भेज दे मगर उसके दोस्त ने पैसे नहीं भेजे। बहरहाल सिल हसन ने काशिफ के बिजनेस में अपना पैसा लगाने का फैसला किया। इसके लिए उसने अपनी बीवी से कहा कि
Speaker A
अपने जेवर बेचकर रकम भिजवाए। बीवी ने ₹ लाख भेजे जो उसने काशिफ को दे दिए। उसने फिर अपनी बेटी से इस बात का जिक्र किया तो उसने भी ₹2 लाख भेजे। भाई को बताया तो ₹ लाख उसने भी इन्वेस्ट कर दिए। इस दौरान
Speaker A
सिल हसन दिसंबर की छुट्टियां गुजारने पाकिस्तान आया। यहां एक दिन दुबई में मौजूद उसके दोस्त काशिफ का फोन आता है कि उसकी 2 लाख की इन्वेस्टमेंट डबल हो गई है। गुजरावाला के एक मनी चेंजर को 4 लाख भेज दिए हैं। वह जाकर ले ले। सिल हसन अपने
Speaker A
दोस्तों के साथ गुजरावाला जाकर रकम ले आया। फिर एक महीने बाद काशिफ ने दोबारा फोन किया और यही कहा कि तुम्हारे 2 लाख फिर डबल हो गए हैं। मनी चेंजर से जाकर ले लो। सिल हसन ने फिर दोस्तों को साथ लिया
Speaker A
और जाकर पैसे वसूल किए। चंद ही दिन गुजरे थे कि काशिफ का फिर फोन आया। कहा कि तीसरे 2 लाख भी डबल हो गए हैं। मनी चेंजर को भेज दूं या वापस इन्वेस्ट कर दूं। अब तो सितुल हसन का एतमाद बिल्कुल पक्का
Speaker A
हो चुका था। उसने वही कहा जो हर कोई कहता कि हां यह पैसे रीइन्वेस्ट कर दो। छुट्टियां खत्म होने के बाद सिल हसन वापस दुबई जाने लगा तो उसके दोस्तों ने भी उसे पैसे दिए कि यह काशिफ के कारोबार में लगा
Speaker A
दे क्योंकि वो देख चुके थे कि उसमें बहुत अच्छा रिटर्न मिल रहा है। खैर सिल हसन दोस्तों के 15-16 लाख और अपने घर के मजीद 80 लाख लेकर दुबई आया। दोस्तों वो यह पैसे काशिफ को देना चाहता था। मगर इतनी बड़ी
Speaker A
रकम देने से पहले काशिफ के बिजनेस को मजीद जांचना बहुत जरूरी था। उसने तफ्तीश शुरू की तो पता चला कि काशिफ कोई कारोबार नहीं करता बल्कि वो तो एक पोंजी स्कीम चलाता है। सितुल हसन का माथा ठंका। और उसने यह 2025
Speaker A
लाख इन्वेस्ट करने के बजाय अपने पास रख लिए। इसी दौरान काशिफ ने उसका दिल जीतने के लिए मजीद ₹8 लाख डबल करने के नाम पर दिए। सिल हसन ने वो 8 लाख भी लिए और दुबई की नौकरी छोड़कर पाकिस्तान चला आया। उसने
Speaker A
सब जमातफरीक करके सोच लिया था कि अब नौकरी नहीं करेगा बल्कि करेगा तो वही करेगा जो काशिफ कर रहा था जो अमेरिका में चार्ल्स पोंजी ने किया था। यूं साल 2005 के बीच में सैयद सिल हसन गिलानी डबल शाह बन गया।
Speaker A
शुरू में लोगों को लालच देने के लिए उसने 15 दिन में पैसा डबल करके देना शुरू किया और जिन-जिन दोस्तों ने सरमायाकारी की थी उनके पैसे डबल करके वापस किए। शुरू में उसका कारोबार सिर्फ निजामाबाद तक महदूद था
Speaker A
लेकिन लालच की आग ने उसे फैला दिया। गुजरावाला, सियालकोट, वजीराबाद और आसपास के इलाके सब इसकी जद में आ गए। एक से दो, दो से तीन और यह तादाद बढ़ती गई। सैकड़ों से हजारों तक पहुंच गई। यूं निजामाबाद का
Speaker A
यह आम टीचर डबल शाह के नाम से मशहूर हो गया। बहुत से लोग इसे आमिल या सूफी समझते थे जो अपनी करामत से पैसे डबल कर रहा था। उसके मुरीदों और ग्राहकों में आम लोग ही नहीं नामवर सियासतदान ब्यूरोक्रेट्स और
Speaker A
पुलिस अफसरान भी शामिल हो गए। लोग अपने जेवरात बेचते गाड़ियां, मकान हत्ता के पूरी जायदाद फरोख करके भी पैसे लाते और इसके हवाले कर देते। कोई स्टैंप पेपर नहीं, कोई एग्रीमेंट नहीं बनता। बस एक सादा सी पर्ची दी जाती जिस पर रकम और
Speaker A
वापसी की तारीख लिखी होती थी। रकम देने वालों का नाम डबल शाह अपनी एक डायरी में भी लिखा करता था। शुरू-शुर में 15 दिन में पैसे डबल किए जाते थे। फिर 30 दिन फिर 2 महीने और फिर 70 दिन तक भी बात पहुंच गई।
Speaker A
ताम डबल शाह का कहना था कि उसने 15 दिन वाली स्कीम कभी नहीं जलाई थी। 15 दिन और या 20 दिन वाला। मैंने 70 80 90 दिन में कई लोगों को 4 महीने के बाद भी पैसे दिए हैं। बाज द शुरू में छछ महीने
Speaker A
बाद भी पैसे दिए। बहा टाइम पीरियड मेरा फिक्स नहीं था। बहरहाल दुनिया भर में पोंजी स्कीम कामयाब ऐसे ही होती है कि जो एक बार मुनाफा हासिल करता है वो सारी रकम दोबारा इन्वेस्ट कर देता है। ताकि मज़द प्रॉफिट हो। और डबल शाह
Speaker A
भी यही गेम कर रहा था। मुकर्रा तारीख पर रकम लेने के लिए आने वाले 99% लोग दोबारा इन्वेस्ट करके चले जाते कि इसे भी डबल कर दो। लेकिन दोस्तों शुरू में एक दिन ऐसा भी आया जब डबल शाह को अपना बिजनेस डूबता हुआ
Speaker A
लगा। वो डबल शाह के धंधे का शुरू का टाइम था। एक शाम एक बंदा ₹15 लाख की पर्ची लेकर आया। उसकी पेमेंट उस दिन वाजिबुल अदा हो गई थी। यानी उसे ₹ लाख देने थे। मगर चकि नया-नया बिजनेस था इसलिए उस दिन की टोटल
Speaker A
नई इन्वेस्टमेंट भी बस इतनी ही बनती थी। यानी ₹ लाख। अब डबल शाह परेशान हो गया कि अगर सारी रकम इसको दे दी और कल परसों कोई और आ गया तो उसे क्या देगा? बहरहाल मजबूरी थी पैसे देना भी जरूरी थे। वरना सारी साख
Speaker A
राख में मिल जाती। डबल शाह ने इस उम्मीद के साथ इस बंदे को सारी रकम अदा कर दी कि वह इसे दोबारा इन्वेस्ट कर देगा। मगर वह थैला लेकर घर से बाहर निकल गया। डबल शाह की परेशानी डबल नहीं बल्कि ट्रिपल हो गई।
Speaker A
वो इस शख्स को देखने घर की छत पर गया तो देखा कि वो शख्स बाइक स्टार्ट करता है और गली से चला जाता है। बबल शाह का दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। वो रात उसके लिए बहुत भारी थी क्योंकि अगले दिन दूसरे
Speaker A
लोगों के 20 लाख भी वापस करने थे। अगर वापस ना कर सका तो धंधा चौपट हो जाएगा। एक दूसरे की देखादे सब अपने पैसे वापस मांगने लगेंगे। इस परेशानी में वो पूरी रात नहीं सो सका। पल-पल मौत से बदतर लग रहा था। मगर
Speaker A
फिर उसने मुसल्ला बिछा लिया और दुआ मांगने लगा कि ऐ अर्श वाले मेरी तौकीर सलामत रखना। यानी वह फ्रॉड के काम में भी अल्लाह की मदद मांग रहा था। गोया अल्लाह को भी धोखा देने की कोशिश कर रहा था। माज़
Speaker A
अल्लाह। खैर उसने नवाफिल पढ़ने के बाद फजर की नमाज भी पढ़ी और कुरान पढ़कर दुआ की। सुबह नाश्ते के वक्त घर की बैल बजी। उसका दिल धड़क उठा के कोई रकम वापस मांगने आ गया है। वो डरते-डरते दरवाजे के पास
Speaker A
गया। छोटी खिड़की से झांक कर देखा तो उसकी जान में जान आई। दरवाजे पर वही शख्स खड़ा था जो रात ₹ लाख लेकर गया था और उसके हाथ में वही थैला था। डबल शाह का दिल खुशी से झूम उठा। डबल शाह ने उसे अंदर कमरे में
Speaker A
बिठाया। उसने थैला खोला और नोटों के बंडल निकाले और फिर कहा कि शाह साहब कल जो 30 लाख लेकर गया था वह दोबारा इन्वेस्ट करने हैं और 10 लाख दोस्तों के भी लेकर आया हूं। यह भी रख लें और 40 लाख की एक पर्ची
Speaker A
बना दें। तो यूं शाहजी का धंधा चौपट होने से बाल-बाल बच गया। बाद में तो उसका नेटवर्क बड़े पैमाने पर फैल गया। लोगों ने बैंकों से पैसे निकलवाकर डबल शाह के पास जमा करवाना शुरू कर दिए। यहां तक कि बैंक मैनेजर और अमला
Speaker A
भी अपनी और खातेदारों की रकम उसके पास लेकर आते थे। यह हाल हो गया था कि बैंकों में कैश खत्म हो जाता था। गाड़ियां डबल शाह के घर भेजकर नोटों के बंडल मंगवाने पड़ते थे। जिन दिनों डबल शाह का कारोबार
Speaker A
उरूज पर था, उसके डेरे के मनाजिर देखने के लायक होते थे। जैसे कोई खजाने का महल हो। पैसे जमा करने वालों और वापस लेने वालों की लंबी कतारें लगी रहती थी। उसके नुमाइंदे बैठकर नोट ही गिनते रहते थे।
Speaker A
डेरे पर बोरियों में, थैलों में, हत्ता के खुलेआम पैसे पड़े होते। एक बार एक दिलचस्प वाक्या हुआ। शाम ढले एक बंदा नोटों की बोरी लेकर आया। पैसे गिनने वाले कारिंदे थक चुके थे और उन्होंने उसको कहा कि भैया तुम कल आना आज पैसे गिनने की
Speaker A
हिम्मत नहीं। वो बंदा मिन्नतें करने लगा कि परदेसी हूं यह थैला लेकर कहां जाऊंगा कुछ तो ख्याल करो। इस पर डबल शाह ने अपने बंदों को कहा कि 100 500 और 1000 का एक-एक बंडल तोल लो। फिर उसी हिसाब से सारे
Speaker A
बंडलों का वजन कर लो। उन्होंने तोला और जो रकम बताई उस पर वह बंदा कहने लगा कि नहीं एक छटांग कम तोला है। इस पर डबल शाह ने पूरे एक पाव ज्यादा लिखवा दिए कि फलां नोट इतने वजन के जमा हुए क्योंकि उसे पता था
Speaker A
मुझे कौन से देने हैं। जब यह डबल लेने आएगा तो वो यह भी जमा करा देगा। कहते हैं कि फिर यह मामूल बन गया। नोटों की नई गड़ियां वजन के बराबर ही लिख दी जाती थी। सब कुछ ठीक चल रहा था। क्योंकि सीनियर
Speaker A
सहाफियों के मुताबिक आला पुलिस अफसरान भी उसके मुरीदों में शामिल हो चुके थे। उनमें डीआईजी, एसएसपी रैंक तक के अफसरान भी शामिल थे। मगर वो लोग अपनी रकम डबल कराने के लिए 15 दिन महीने इंतजार नहीं करते थे।
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बल्किबला शाह जी पुलिस अफसरों को तो हाथ के हाथ पैसे डबल करके दे दिया करते थे। लेकिन जिस तरह हर कहानी में एक मोड़ आता है। डबल शाह की कहानी में भी यही मोड़ आ चुका था। जिसने उसकी पूरी एंपायर को जमीन
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बोझ कर दिया। एक अंग्रेजी अखबार में खबर छपी कि सैयद सिल हसन शाह गिलानी वजीराबाद रेलवे स्टेशन के करीब अपने पीरो मुर्शद के घर पर हेलीकॉप्टर से नोट बरसाएंगे। यह खबर अखबार में छपी तो जैसे बम फट गया। नैब समेत दीगर
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इदारे चौकन्ना हो गए कि यह कौन शख्स है? इंक्वायरी होने लगी। कुछ लोगों के ख्याल में उसने यह काम मुर्शद की मोहब्बत में किया था। जबकि कुछ लोगों का ख्याल है कि वह अपनी शोहरत में इजाफा करना चाहता था।
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कुछ सहाफियों ने दावा किया कि उसने वजीराबाद में दरिया चनाब के दोनों अतराफ चार्टर तैयारे से ₹50 लाख बरसाए थे। ताम इस दौर के किसी अखबार में ऐसी कोई खबर नहीं मिली। ना किसी काबिल एतमाद सहाफी ने ना पुलिस या नैब अफसर ने इस बात की तस्दीक
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की। तो बस यह हवाई बात ही है। जो बात हुई है वो यह कि खबर फैलने के बाद डबल शाह नैप के रेडार पर आ गया। उन्होंने खोज लगाई तो पता चला कि इसका कोई ऐसा बड़ा कारोबार नहीं है। कुछ पेट्रोल पंप, कुछ हाउसिंग
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सोसाइटियां हैं और दुबई में जो बिजनेस है वहां से पैसा आने के बजाय पाकिस्तान से पैसा वहां जाता है। अब नैब उसको गिरफ्तार करते हुए हिचकिचा रही थी। क्योंकि अव्वल तो उसके खिलाफ किसी ने कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई थी। दूसरा यह कि उसके किसी गैर
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कानानूनी कारोबार का सुराग भी नहीं मिला था। उस वक्त के डीजी ने पंजाब ने यह भी कहा कि हो सकता है वो कोई कानूनी कारोबार कर रहा हो जिससे आवाम को और पाकिस्तान को फायदा पहुंच रहा है तो पहुंचने दें।
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लेकिन जोंज-ज्यों तहकीकात आगे बढ़ी डबल शाह का पोल खुलने लगा और फिर चूहे बिल्ली का खेल शुरू हुआ। नैब और पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए वजीराबाद में टीम भेजी तो पता चला वो लाहौर में है। लाहौर गए तो
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मालूम हुआ वो गुजरावाला पहुंच गया है। टीम गुजरावाला पहुंची तो खबर मिली कि वो तो इस्लामाबाद पहुंच गया है। बहरहाल मुख्तलिफ जगहों पर छापे के बाद 13 अप्रैल 2007 को डबल शाह को तीन साथियों समेत जीटी रोड से
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गिरफ्तार कर लिया गया। दिलचस्प बात यह है कि डबल शाह को पहली बार जो गिरफ्तार किया गया था वो फ्रॉड या धोखादेही केस में नहीं बल्कि डकैती की वारदात के लिए मुशावरत केस में अरेस्ट किया गया था। सीपीओ गुजरावाला ने प्रेस
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कॉन्फ्रेंस में बताया कि डबल शाह के लाहौर हेड क्वार्टर से कंप्यूटर, लैपटॉप, काउंटिंग मशीन, दीगर रिकॉर्ड के अलावा ₹.5 करोड़ की मुल्की और गैर मुल्की करेंसी बरामद हुई। पुलिस ने डबल शाह के मुख्तलिफ बैंकों में 30 से जायद मुख्तलिफ नामों के
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अकाउंट का पता लगाया। जिनमें उस वक्त करोड़ों रुपए थे। उन अकाउंट्स को भी फ्रीज़ कर दिया गया। डबल शाह के उस वक्त के सामने आने वाले असासों में जिला गुजरावाला में छ से जायद पेट्रोल पंप और सीएनजी स्टेशन जबकि 15 से 20 करोड़ मालियत
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के कमर्शियल प्लॉट भी शामिल थे। इस तरह गैर मुल्की असासों में छह होटल और कई अपार्टमेंट दुबई में भी सामने आए। जिनमें गैलानी होटल, चे्स होटल, वेलशिया होटल, अलमाइदा और सफायर होटल शामिल थे। इन आलीशान होटलों की तसावीर उसने अपने घर के
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बाहर भी लगा रखी थी ताकि सरमायाकारी के लिए आने वालों को यह धोखा दिया जा सके कि दुबई में उसके कई होटल चल रहे हैं। लेकिन दोस्तों, सबसे दिलचस्प बात यह है कि डबल शाह की गिरफ्तारी के बाद उसकी रिहाई के
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लिए एहतजाज भी शुरू हो गया। इसके पास सरमायाकारी करने वाले लोग सड़कों पर निकल आए। डबल शाह बेकसूर डबल शाह बेकसूर के नारे गूंजने लगे क्योंकि यह सब लोग यह बात मानने को तैयार ही नहीं थे कि इनके साथ
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फ्रॉड हुआ है। उन्हें अब तक यही उम्मीद थी कि डबल शाह रिहा होकर उनके पैसे डबल करके वापस कर देगा। नैब ने तफ्तीश की तो यह बात तय हो गई कि डबल शार्प पेट्रोल पंप, सीएनजी स्टेशन और दुबई के होटलों जैसे
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बिजनेस चला तो रहा था लेकिन उनसे इतनी इनकम नहीं हो रही थी कि दो-ती महीनों में पैसा डबल हो जाए। यह सिर्फ और सिर्फ पोंजी स्कीम ही थी क्योंकि उस वक्त तक क्रिप्टो करेंसी नहीं आई थी कि दो-4 दिन में पैसा
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डबल हो जाए। बहरहाल क्रिप्टो में भी ऐसा एक या दो बार ही हो सकता है हर महीने नहीं। उधर डबल शाह का दावा था कि वह अरबों का बिजनेस करके अरबों ही कमाता था। प्रॉफिट हमेशा कारोबार करने से आता है। आप
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1000 के साथ 1000 नहीं कमा सकते। लाख के साथ लाख नहीं कमा सकते। करोड़ के साथ करोड़ भी नहीं आता। लेकिन अगर आपके पास एक अरब है तो आप उसके लिए हाई लेवल की इन्वेस्टमेंट करते हैं तो वहां से आउटपुट
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भी इसी तरह ही होता है। नैब के मुताबिक तकरीबन 48,000 लोगों से 7 अरब बटोरे गए। नैब ने अखबार में इश्तहार दिया कि जिन लोगों को डबल शाह से पैसे लेने हैं नैब से रुजू करें। जो अपने पैसों
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की मनी ट्रेल दे सकते थे वो लोग तो सामने आए मगर जिनका धन ही काला था वो तो मुंह छुपा कर ही रह गए। अफसोसनाक बात यह हुई कि डबल शाह के फ्रॉड की वजह से कई जाने भी
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गई। बहुत से ऐसे लोग भी थे जिन्होंने अपनी बेटी की शादी, अपने बुढ़ापे या इलाज के लिए पैसे इन्वेस्ट किए थे ताकि वह डबल होकर वापस मिल जाए। मगर जब उन्हें खबर मिली कि उनकी जमा पूंजी डूब गई है तो
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बहुतसों के हार्ड फेल हो गए। खैर नैब ने बाद में सिरतुल हसन पर बड़े पैमाने पर फ्रॉड का केस दर्ज किया। उसके बैंक अकाउंट और जायदादों की नीलामी से तकरीबन ₹ अरब की रिकवरी हुई। डबल शाह ने उस वक्त प्ली
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बारगेन के तहत बाकी रकम देने की हामी भरी थी। लेकिन बाद में अपना इरादा ही बदल दिया। जिस पर अदालत में केस चला और यकम जुलाई 2012 को उसे 14 साल की कैद और सवा5 अरब जुर्माने की सजा सुनाई गई। दोस्तों,
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जेल में एक दिन 12 घंटे का माना जाता है। यानी 14 साल की सजा असल में 7 साल की कैद होती है। डबल शाह अप्रैल 2007 में गिरफ्तार हुआ था, और अदालत के फैसले तक 5 साल कैद काट चुका था। यह 5 साल उसकी मजमुई
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सजा से खत्म हो गए। पीछे रह गए थे सिर्फ 2 साल। डबल शाह ने सोचा कि ₹4 अरब के बदले 2 साल की कैद महंगा सौदा नहीं। चुनांचे उसने प्ली बारगेन के बजाय सजा कबूल कर ली। 15 मई 2014 को जब वो कोर्ट लखपत जेल से रिहा
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हुआ तब भी फिल्मी मंजर देखने को मिला। उसका जेल के गेट पर शानदार इस्तकबाल हुआ। जैसे वो जेल से नहीं हज कर कर रेल से आया हो। उसे काफिले की सूरत में वापस वजीराबाद लाया गया। वहां भी लोगों ने अजब नजारा
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देखा कि पाकिस्तान की तारीख के सबसे बड़े फ्रॉड करने वाले मुजरिम के गले में हार डाले गए, पटाखे चलाए गए और मसाजिद से ऐलान करवाकर रिहाई की मुबारकबाद भी दी गई। सिल हसन शाह को लगा कि अब उसकी जिंदगी सवर गई।
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₹ अरब से वह अपने सब ख्वाब सब हसतें पूरी कर लेगा। वो कहते हैं ना कि एक अदालत ऊपर भी होती है। सितुल हसन को जमीनी अदालत से तो ऐसी सजा ना मिली कि वो इबरत की मिसाल बनता।
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लेकिन अभी आसमानी अदालत का फैसला बाकी था। रिहाई के बाद उसने लाहौर में मुस्तकिल देरा डाल लिया। दिल ही दिल में वो बहुत खुश था और ऐशोइशरत की जिंदगी गुजारने के प्लान भी बना रहा था। मगर जिन लोगों का
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चैन और सुकून उसने छीना था, उनकी आें अर्श को हिला रही थी। हजारों दुखी दिलों से निकली इल्तजाएं मकबूल हो चुकी थी। शायद इन बद्दुआओं का ही नतीजा था कि 16 अक्टूबर 2015 को डबल शाह को दिल का दौरा पड़ा।
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उसकी उम्र उस वक्त 50 साल थी। यानी इतना कोई बूढ़ा नहीं था। उसने अपने इलाज पर पैसा पानी की तरह बहा दिया। पंजाब इंस्टट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी में उसका इलाज हुआ। तबीयत बेहतर होने पर उसे डिस्चार्ज कर दिया गया। मगर कुछ ही दिन बाद 30
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अक्टूबर 2015 को एक बार फिर हार्ट अटैक हुआ। जो जानलेवा साबित हुआ और यूं उम्र भर की नकदी खत्म हुई। खैर यह कहानी यहां खत्म नहीं होती। सैयद सिल हसन शाह के अंजाम से ना धोखेबाजों और फ्रॉडियों ने कोई सबक हासिल किया ना लूटने
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वालों के हाल से लालच के जाल में फंसने वालों ने। सैयद सिल हसन के बाद भी कई डबल शाह पाकिस्तान में नमूदार हुए। कई अंजाम को पहुंच गए। कुछ अब भी आवाम की आंखों पर लालच की पट्टी बांधकर उन्हें गहरी खाई की
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तरफ ले जा रहे हैं। इन तमाम फ्रॉडियों की मुस्तर दास्ताने हम इंकलाब के जरिए आप तक पहुंचाएंगे। बस हमारे चैनल को अगर सब्सक्राइब अब तक नहीं किया तो सब्सक्राइब कर लें और बेल का आइकन भी दबा दें ताकि
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हमारी हर नई वीडियो बरव आप तक पहुंच जाए।
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